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गर्भ में शिशु को दिल की बीमारी होने के क्या-क्या कारण होते हैं?

माँ के गर्भ में शिशु का विकास पहले दिन से ही शुरू हो जाता है पहले शिशु के अंग बनते हैं, धीरे धीरे उन अंगों का विकास होता है, गर्भ में शिशु मूव करने लगता है, आदि। लेकिन कुछ केस में देखा जाता है की गर्भ में शिशु का विकास सही से न होने के कारण शिशु शारीरिक परेशानियों का शिकार भी हो जाता है।

जैसे की कुछ बच्चों का मानसिक विकास सही नहीं होता है, कुछ बच्चों के हाथ पर टेढ़े मेढ़े हो जाते हैं, बच्चे के वजन में कमी होती है, कुछ बच्चे दिल की बिमारी से ग्रसित हो जाते हैं, आदि। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको गर्भ में शिशु को दिल की बीमारी होने के क्या क्या कारण होते हैं उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

स्ट्रैस

गर्भावस्था के दौरान महिला को हमेशा खुश रहने की सलाह दी जाती है क्योंकि यदि महिला खुश नहीं रहती है तनाव में रहती है। तो इससे गर्भ में शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास में कमी आती है साथ ही शिशु को हदय रोग भी हो सकता है।

नशीले पदार्थों का सेवन

यदि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान नशीले पदार्थों जैसे की अल्कोहल, धूम्रपान आदि का सेवन करती है तो ऐसा करने के कारण भी महिला हदय सम्बंधित समस्या हो सकती है।

शुगर

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला जेस्टेशनल शुगर की समस्या से ग्रसित होती है या फिर महिला पहले की शुगर की मरीज़ होती है। तो ऐसी महिलाओं के होने वाले बच्चों को भी दिल से सम्बंधित समस्या होने का खतरा होता है।

गलत खान व् जीवनशैली

प्रेगनेंसी के दौरान भी जो महिलाएं अपने खान पान का अच्छे से ध्यान नहीं रखती है और गलत खान पान का सेवन करती है साथ ही जिनकी जीवनशैली भी अच्छी नहीं होती है उन महिलाओं के बच्चों को दिल सम्बन्धी समस्या होने का खतरा अधिक होता है।

संक्रमण

यदि प्रेगनेंसी की शुरुआत में ही महिला को वायरल इन्फेक्शन हो जाता है या अन्य कोई संक्रमण हो जाता है। तो इसका बुरा असर शिशु के शुरआती विकास पर पड़ता है जिसकी वजह से बच्चे को दिल सम्बन्धी समस्या होने का खतरा होता है।

अनुवांशिक कारण

आपके घर में जो शिशु पहले हुए हैं या आपके साथ यदि यह समस्या हुई है तो इस कारण आपके होने वाले बच्चे को भी इस समस्या होने के चांस बढ़ जाते हैं।

गलत दवाइयों का सेवन

यदि प्रेग्नेंट महिला बिना डॉक्टरी परामर्श के अलग अलग दवाइयों का सेवन करती है तो इन दवाइयों का गलत असर भी गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ सकता है जिसकी वजह से आपके होने वाले शिशु को दिल की बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से गर्भ में पल रहे शिशु को दिल की बीमारी होने का खतरा होता है। ऐसे में गर्भवती महिला को इन बातों का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए और प्रेगनेंसी के दौरान पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। ताकि गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में कोई भी दिक्कत नहीं आएं और आपका होने वाला शिशु एक दम हष्ट पुष्ट और स्वस्थ जन्म लें।

Causes of having heart diseases to baby in womb

जब मिसकैरिज का खतरा हो तो यह करना चाहिए?

मिसकैरिज जिसे की आप गर्भपात भी कहते हैं यह महिला के लिए बहुत दर्दनाक हो सकता है। क्योंकि इसकी वजह से महिला केवल शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी प्रभावित होती है। खासकर जब कपल बच्चे की प्लानिंग करता है और महिला के साथ यह हो जाता है तो यह महिला के साथ उसके पार्टनर व् घरवालों के लिए भी दुखद होता है। आज इस आर्टिकल में हम आपको मिसकैरिज का खतरा क्यों होता है और किस तरह महिला इस परेशानी से बच सकती है इसके बारे में बताने जा रहे हैं। ताकि महिला को इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

गर्भपात होने के क्या कारण होते हैं?

बच्चा गिरने का कोई एक नहीं बल्कि कई कारण होते हैं तो आइये अब उन कारणों को विस्तार से जानते हैं।

  • यदि महिला का पहले गर्भपात हुआ होता है तो महिला को दुबारा यह समस्या होने का खतरा होता है।
  • महिला यदि मानसिक रूप से बच्चे के लिए तैयार नहीं होती है और महिला गर्भधारण कर लेती है तो तनाव के कारण भी महिला का मिसकैरिज हो सकता है।
  • जरुरत से ज्यादा बढ़ा हुआ वजन भी महिला की इस परेशानी का कारण होता है।
  • जो गर्भवती महिला नशीले पदार्थों का, कैफीन का जरुरत से ज्यादा सेवन करती है उन महिलाओं के गर्भ गिरने का खतरा भी अधिक होता है।
  • गर्भावस्था के दौरान बॉडी में यदि हार्मोनल असंतुलन अधिक होता है तो इस कारण भी मिसकैरिज का खतरा बढ़ जाता है।
  • शारीरिक बीमारी जैसे की थायरॉयड, शुगर से यदि महिला ग्रसित है तो भी मिसकैरिज का खतरा अधिक होता है।
  • बढ़ती उम्र में गर्भधारण करने वाली महिलाओं को गर्भपात की परेशानी होने की सम्भावना अधिक होती है।
  • गर्भावस्था के दौरान यदि महिला अपना अच्छे से ध्यान नहीं रखती है और लापरवाही बरतती है जैसे की पेट के बल काम करती है, भारी सामान उठाती है, बहुत ज्यादा भागादौड़ी करती है, यात्रा अधिक करती है, अपनी सेहत अपने खान पान का अच्छे से ध्यान नहीं रखती है तो भी महिला को गर्भपात होने का खतरा बढ़ जाता है।

मिसकैरिज के खतरे को कम करने के लिए यह करें

प्रेग्नेंट महिला को गर्भपात के खतरे से बचे रहने के लिए और गर्भपात के खतरे को कम करने के लिए बहुत सी बातों का ध्यान रखना चाहिए क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान छोटी छोटी बातों का अच्छे से ध्यान रखने पर ही महिला इस परेशानी से बची रह सकती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को मिसकैरिज की समस्या से बचे रहने के लिए क्या क्या करना चाहिए।

भरपूर करें आराम

गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान कॉम्प्लीकेशन्स होती है जिसकी वजह से महिला को बेड रेस्ट की सलाह दी जाती है। ऐसे में महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला जितना हो सके आराम करें और डॉक्टर द्वारा बताई गई सावधानियों का अच्छे से पालन करें। यदि महिला ऐसा करती है तो इससे गर्भपात के खतरे को कम करने में मदद मिलती है।

शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं होने दें

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी होती है तो इसकी वजह से भी गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में मिसकैरिज के खतरे को कम करने के लिए गर्भवती महिला को अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। और पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेनी चाहिए। ताकि महिला को बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें। साथ ही उन चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए जिनका सेवन करने से मिसकैरिज हो सकता है जैसे की कच्चा पपीता, अनानास, कच्चा अंडा, अधपका नॉन वेज, नशीले पदार्थ, जरुरत से ज्यादा कैफीन, आदि।

वजन

गर्भावस्था के दौरान महिला को मिसकैरिज के खतरे से बचे रहने के लिए अपने वजन का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। जैसे की महिला का न तो वजन जरुरत से ज्यादा होना चाहिए और न ही कम होना चाहिए। यदि प्रेग्नेंट महिला अपने वजन को नियंत्रित रखती है तो इससे भी महिला को मिसकैरिज के खतरे से बचे रहने में मदद मिलती है।

लापरवाही से बचें

मिसकैरिज के खतरे से बचने के लिए महिला किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। जैसे की झुककर काम नहीं करना चाहिए, पेट पर दबाव नहीं पड़ने देना चाहिए, भारी सामान नहीं उठाना चाहिए, भागदौड़ नहीं करनी चाहिए, यात्रा करने से बचना चाहिए, घर के काम करने में सावधानी बरतनी चाहिए, आदि। यदि महिला इन छोटी छोटी बातों का ध्यान रखती है तो ऐसा करने से महिला को मिसकैरिज से बचे रहने में मदद मिलती है।

खुश रहें

शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि मिसकैरिज के खतरे से बचे रहने के लिए महिला को मानसिक रूप से भी रिलैक्स रहना चाहिए। यदि महिला मानसिक रूप से रिलैक्स रहती है खुश रहती है तो ऐसा करने से भी गर्भवती महिला और बच्चे दोनों को फायदा मिलता है। जिससे प्रेग्नेंट महिला फिट रहती है और गर्भ में शिशु का विकास बेहतर तरीके से होता है।

डॉक्टर से संपर्क में रहें

यदि आपको मिसकैरिज का खतरा है, प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स हैं तो आपको शुरुआत से लेकर प्रेगनेंसी के नौवें महीने तक डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए। ताकि आपको कोई छोटी सी भी दिक्कत हो तो उसका इलाज समय से हो सके। और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके साथ ही गर्भपात जैसी समस्या से आपका बचाव हो सके।

तो यह हैं मिसकैरिज के खतरे से बचे रहने के कुछ टिप्स, यदि आप भी माँ बनने वाली हैं तो आपको भी इन बातों का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान आपको किसी भी तरह की दिक्कत से बचे रहने में मदद मिल सके।

Precautions to avoid miscarriage

प्रेगनेंसी में हल्दी और दूध का सेवन

हल्दी में जहां औषधीय गुण मौजूद होते हैं वहीँ दूध पोषक तत्वों से भरपूर होता है। और जब हल्दी और दूध को साथ में मिला दिया जाता है। तो इसके गुण दुगुने हो जाते हैं जो आपको बिमारियों से बचाकर रखने और स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। लेकिन जब बात प्रेग्नेंट महिला की हो तो किसी भी चीज के सेवन से पहले उसकी पूरी जानकारी लेना बहुत जरुरी होता है। जैसे की महिला को क्या वो चीज खानी चाहिए या नहीं, कितनी मात्रा में खानी चाहिए, आदि। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेग्नेंट महिला को हल्दी वाला दूध का सेवन करना चाहिए या नहीं इस बारे में बताने जा रहे हैं।

प्रेग्नेंट महिला को हल्दी दूध का सेवन करना चाहिए या नहीं?

गर्भावस्था के दौरान महिला को केवल हेल्दी चीजों को ही अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके। और हल्दी दूध भी पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होता है। इसीलिए प्रेग्नेंट महिला चाहे तो प्रेगनेंसी के दौरान हल्दी वाला दूध का सेवन कर सकती है। अब आइये जानते हैं की हल्दी वाला दूध का सेवन करने से कौन कौन से सेहत सम्बन्धी फायदे मिलते हैं।

इम्युनिटी बढ़ती है

गर्भावस्था के दौरान महिला की इम्युनिटी कमजोर होने के कारण महिला को संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन यदि महिला हल्दी वाला दूध का सेवन करती है तो महिला की इम्युनिटी को मजबूत रहने में मदद मिलती है जिससे माँ और बच्चे दोनों को गर्भावस्था के दौरान संक्रमण व् बिमारियों के खतरे से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है। क्योंकि हल्दी वाले दूध में एंटी ऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं।

कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल

हल्दी वाले दूध का सेवन करने से गर्भावस्था के दौरान महिला का कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल रहता है जिससे गर्भवती महिला को बहुत सी सेहत सम्बन्धी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

सूजन

प्रेगनेंसी के दौरान अधिकतर महिलाएं पैरों में होने वाली सूजन की समस्या से परेशान रहती हैं। लेकिन यदि महिला हल्दी वाला दूध का सेवन करती है तो इससे महिला को पैरों में सूजन की समस्या से बचें रहने में मदद मिलती है।

दर्द से राहत

प्रेग्नेंट महिला को जोड़ो में दर्द, पैरों में दर्द, सिर दर्द, बॉडी पेन जैसी समस्या का होना आम बात होती है। और इस दर्द के कारण महिला को परेशानी भी अधिक हो सकती है। लेकिन यदि महिला रोजाना हल्दी वाला दूध का सेवन करती है तो महिला को दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

सर्दी जुखाम का खतरा होता है कम

गर्भावस्था के दौरान यदि मौसम में बदलाव होता हैं, संक्रमण हो जाता है, या किसी अन्य कारण की वजह से सर्दी जुखाम की समस्या अधिक हो जाती है। तो ऐसे में इस परेशानी से राहत के लिए हल्दी वाला दूध का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।

नींद आती है बेहतर

गर्भावस्था के दौरान रात को सोने से पहले यदि महिला हल्दी वाला दूध का सेवन करती है तो इससे महिला को बेहतर व् गहरी नींद लेने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी के दौरान हल्दी दूध के सेवन से पहले इस बात का ध्यान रखें?

प्रेग्नेंट महिला ध्यान रखें की एक गिलास में एक चुटकी हल्दी बहुत होती है ऐसे में जरुरत से ज्यादा हल्दी दूध में मिक्स नहीं करें। क्योंकि हल्दी का जरुरत से ज्यादा सेवन करने से गर्भवती महिला को खतरा हो सकता है।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान हल्दी वाला दूध के सेवन करने के फायदे, साथ ही महिला को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए उससे जुड़े टिप्स। यदि आप भी माँ बनने वाली है तो प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों से बचे रहने के लिए आप भी हल्दी वाला दूध का सेवन कर सकती है।

Turmeric milk during pregnancy

कम उम्र में बाल सफ़ेद हो गए हैं? यह तरीके अपनाएँ

आज कल की भागती दौड़ती ज़िंदगी में लोगो के पास अपने लिए ही समय नहीं है। जिसकी वजह से कम उम्र में ही लोग ऐसी समस्याओं के शिकार हो जाते हैं जो उन्हें समय से पहले ही बूढ़ा बना देती है। जैसे की आज कल कम उम्र में ही लोग शुगर, थायरॉयड, ब्लड प्रैशर जैसी बिमारियों के शिकार हो रहे हैं, वजन जरुरत से ज्यादा है, स्किन ढीली पड़ जाती है, कम उम्र में ही बाल सफ़ेद हो रहे हैं, आदि। और इन सभी समस्या के होने का सबसे बड़ा कारण है गकत लाइफस्टाइल और गलत दिनचर्या होना। आज इस आर्टिकल में हम कम उम्र में ही बाल सफ़ेद होने के क्या कारण होते हैं व् किस तरह आप इस परेशानी से निजात पा सकते हैं उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

कम उम्र में बाल सफ़ेद होने के कारण

  • गलत खान पान के कारण शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है जिसका असर बॉडी पर पड़ने के साथ बालों पर भी पड़ता हैं और बाल सफ़ेद होने लगते हैं।
  • आज कल छोटे से बड़ा हर व्यक्ति किसी न किसी चीज को लेकर परेशान हो जाता है और आपकी यह टेंशन और तनाव लेना इस समस्या का कारण बनता है।
  • बालों के लिए केमिकल का अधिक इस्तेमाल करने के कारण बाल अपनी प्राकृतिक चमक खो देते हैं जिसकी वजह से बालों से जुडी यह समस्या होती है।
  • कुछ दवाइयों का सेवन करने के कारण भी यह समस्या हो जाती है।
  • यदि आप किसी शारीरिक बीमारी से पीड़ित हैं तो भी यह समस्या आपको हो सकती है।
  • शरीर में खून की कमी के कारण भी आपको इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • यदि आपके घर में पहले भी किसी और को यह समस्या हो चुकी है तो आपको भी यह समस्या होने के चांस अधिक है।

सफ़ेद बालों को काला करने के लिए टिप्स

यदि आप कम उम्र में ही बालों के सफ़ेद होने की समस्या से परेशान हैं तो कुछ आसान टिप्स को ट्राई करने से आपको इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सकती है। तो आइये अब उन टिप्स के बारे में विस्तार से जानते हैं।

अदरक और शहद

हफ्ते में दो से तीन बार अदरक के रस में शहद मिलाकर अच्छे से अपने बालों की जड़ से लेकर पूरे बालों में लगाएं। ऐसा करने से आपको इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सकेगी।

लौकी

एक लौकी को टुकड़ों में काटकर धूप में सूखा लें। उसके बाद इन सूखे हुए लौकी के टुकड़ों को नारियल के तेल में डालकर अच्छे से पकने दें, उसके बाद इस तेल को छानकर एक डिब्बी में भर लें। फिर हफ्ते में दो से तीन बार इस तेल को अपने बालों में लगाएं।

आंवला

आंवला बालों के लिए बहुत फायदेमंद होता है और आंवला का इस्तेमाल बालों के लिए करने से असमय बालों के सफ़ेद होने की समस्या से आपको बचे रहने में मदद मिलती है। आंवला का इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले एक बर्तन में दो से तीन गिलास पानी डालकर उसमे आंवला के टुकड़े डालें। अब पानी को तब तक उबालें जब तक की पानी आधा न रह जाये। उसके बाद जितनी मेहँदी आपके बालों में लगती है उतनी महेंदी को इस पानी के साथ भिगोएं। अब इसमें थोड़ा निम्बू का रस मिलाकर इसे बालों में लगाएं। ऐसा महीने में कम से कम दो बार जरूर करें।

नारियल और जैतून का तेल

बराबर मात्रा में एक कटोरी में नारियल और जैतून का तेल मिलाएं अब इसमें थोड़ा सा कपूर पीसकर अच्छे से मिक्स कर लें। कपूर मिक्स करने के बाद इस तेल को अपने बालों में लगाएं, ऐसा हफ्ते में दो से तीन बार करें। इस टिप्स का इस्तेमाल करने से भी आपके बालों को काला करने में मदद मिलती है।

दही

दही में टमाटर को पीसकर, थोड़ा सा निम्बू का रस और थोड़ा सा नीलगिरी का तेल मिलाएं। अब इन सभी चीजों को अच्छे से मिक्स कर लें। अब इस मिश्रण को बालों की जड़ से लेकर बालों की लम्बाई तक अच्छे से लगाएं।

आंवला और मेथी

नारियल, बादाम, ओलिव किसी भी तरह के आयल में कुछ आंवले के टुकड़े डालकर अच्छे से पका लें। उसके बाद इसे छान कर एक बोतल में डालें और इसमें एक चम्मच मेथी पाउडर मिलाएं। अब इस तेल को रात को सोने से पहले अपने बालों में लगाएं।

ब्लैक टी

बालों को काला करने के लिए ब्लैक टी का इस्तेमाल करना भी बहुत फायदेमंद होता है। इसके इस्तेमाल के लिए आप दो से तीन कप पानी में दो चम्मच पत्ती और एक चम्मच नमक डालें और इसे उबाल लें। अब इस पानी के ठंडा होने पर आराम से इसे अपने बालों में थोड़ा थोड़ा करके लगाएं और इस तरह से लगाएं के आपके सभी बाल गीले हो जाएँ। उसके बाद इसे थोड़ी देर बालों में लगे रहने दें।

बादाम का तेल

हफ्ते में दो से तीन बार थोड़े से बादाम के तेल में निम्बू का रस मिलाएं उसके बाद इस तेल से अच्छे से बालों की मसाज करें। ऐसा रात को सोने से पहले करें।

करी पत्ता

नारियल के तेल में कुछ करी पत्ते डालकर अच्छे से उबालें। उसके बाद जब यह पत्ते काले हो जाएँ तो इस तेल को छान लें। उसके बाद इस तेल से हफ्ते में दो से तीन बार अपने बालों की मसाज करें।

प्याज़ का रस

बालों से जुडी समस्या को दूर करने के लिए प्याज़ के रस का इस्तेमाल करने से भी बहुत से फायदे मिलते हैं। बालों को काला करने के लिए हफ्ते में दो से तीन बार ओलिव आयल में प्याज़ का रस मिलाकर अच्छे से मिक्स करें। उसके बाद इस मिश्रण को बालों में लगाएं।

शिकाकाई

दही में शिकाकाई पाउडर को मिलाकर अच्छे से अपने बालों की जड़ में और पूरे बालों में लगाएं। लगाने के आधे से एक घंटे बाद बालों को धो लें। ऐसा हफ्ते में दो बार जरूर करें।

मेहँदी और कॉफ़ी

एक गिलास पानी में एक चम्मच कॉफ़ी पाउडर मिलाकर अच्छे से उबाल लें। अब इस पानी के ठंडा होने पर इसे मेहँदी में मिलाएं और उस मेहँदी को बालों में लगाएं। ऐसा महीने में दो बार जरूर करें। ऐसा करने से भी बालों को काला करने में मदद मिलती है।

खान पान

शरीर में पोषक तत्वों की कमी के कारण भी यह समस्या हो सकती है। ऐसे में महिला को अपनी डाइट का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि शरीर में पोषक तत्वों की कमी न हो और आपको इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से कम उम्र में ही आपके बाल सफ़ेद हो सकते हैं साथ ही कुछ आसान टिप्स जिनकी मदद से आप इस परेशानी से निजात पा सकते हैं। यदि आप भी इस समस्या से परेशान हैं तो आप भी इन टिप्स को ट्राई कर सकते हैं क्योंकि इन टिप्स को ट्राई करने से आपको इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सकती है।

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गर्भ में शिशु का विकास रुकने के यह कारण होते हैं?

गर्भावस्था के नौ महीने महिला और शिशु दोनों के लिए बहुत अहम होते हैं। क्योंकि इस दौरान महिला अपने गर्भ में नन्ही जान को पाल रही होती है जो उसका हिस्सा होता है साथ ही बच्चे का पूरा विकास माँ पर ही निर्भर करता है और नौ महीने बाद उस नवजात शिशु के आने से महिला की खुशियां दुगुनी हो जाती है। साथ ही गर्भ में शिशु का विकास दिन प्रतिदिन बढ़ता है इसीलिए वो नौ महीने बच्चे के लिए भी बहुत खास होते हैं। लेकिन कुछ केस में गर्भ में शिशु का विकास अच्छे से नहीं हो पाता है और ऐसा होने का कोई एक नहीं बल्कि कई कारण होते हैं। तो आइये अब जानते हैं की गर्भ में शिशु का विकास सही नहीं होने के क्या क्या कारण होते हैं।

भरपूर पोषक तत्व नहीं मिलना

गर्भावस्था के दौरान खान पान बहुत अधिक महत्व रखता है लेकिन यदि महिला सही खान पान की बजाय गलत खान पान जैसे की जंक फ़ूड, कच्चा खाना, बासी खाना, पोषक तत्व जिस आहार में मौजूद नहीं है वो खाना खाती है, सही समय से आहार का सेवन नहीं करती है, आदि तो इसके कारण शिशु को भरपूर पोषक तत्व नहीं मिलते हैं। जिसकी वजह से शिशु के विकास में कमी आती है।

महिला का तनाव लेना

प्रेगनेंसी के दौरान जो महिलाएं बहुत ज्यादा टेंशन में रहती हैं तनाव लेती हैं। तो इसका बुरा असर भी गर्भ में पल रहे शिशु पर देखने को मिलता है जिसकी वजह से शिशु के विकास में कमी आती है।

एमनियोटिक फ्लूड की कमी

गर्भ में शिशु एमनियोटिक फ्लूड में होता है और एमनियोटिक फ्लूड गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में मदद करता है। लेकिन यदि महिला के गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड की कमी होती है तो इस कारण बच्चे के विकास में कमी होने का खतरा बढ़ जाता है।

नशीले पदार्थों का सेवन

जो प्रेग्नेंट महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह के नशे का सेवन करती हैं जैसे की अल्कोहल, धूम्रपान, आदि। तो इन नशों का बुरा प्रभाव पड़ने के कारण शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास बुरी तरह प्रभावित होता है। जिसकी वजह से शिशु के वजन में कमी, शिशु के मानसिक विकास में कमी जैसी समस्याएँ बच्चे को होती है।

दवाइयों का सेवन

गर्भावस्था के दौरान महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में इन परेशानियों से बचे रहने के लिए महिला यदि अपनी मर्ज़ी से दवाइयों का सेवन करती है। तो इन दवाइयों का प्रभाव गर्भनाल के रास्ते शिशु तक भी पहुँचता है जिसकी वजह से शिशु के विकास में कमी आ सकती है।

संक्रमण

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला को किसी भी तरह का संक्रमण हो जाता है तो इसके कारण गर्भ में शिशु भी प्रभावित हो सकता है। जिसकी वजह से शिशु के विकास में कमी आ सकती है।

सही टीकाकरण न होने के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कुछ दवाइयों का सेवन व् टीकाकरण करवाने के लिए कहा जाता है। लेकिन यदि महिला न तो अपनी दवाइयों को समय से लेती है और न ही टीकाकरण करवाती है तो इसके कारण महिला के साथ शिशु के विकास पर भी बुरा असर पड़ता है।

गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए यह करें

  • महिला अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखें ताकि महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके।
  • फोलेट, आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन्स से भरपूर पोषक तत्वों का सेवन महिला को करना चाहिए।
  • गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए महिला गर्भ में शिशु से बातें करें, शिशु को कहानियां सुनाएँ, पेट पर हाथ फिराएं।
  • गलत खान पान व् नशीले पदार्थों के सेवन से गर्भवती महिला दूरी रखें।
  • प्रेग्नेंट महिला जितना हो सके अपने आप को खुश रखें और टेंशन नहीं ले।
  • इम्युनिटी को मजबूत रखें ताकि बिमारियों व् संक्रमण से बचे रहने में मदद मिल सके।
  • भरपूर आराम करें।
  • गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करें।
  • सही समय पर गर्भवती महिला अपने जांच करवाएं, टीकाकरण करवाएं, और दवाइयों का सेवन करें।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से गर्भ में शिशु का विकास सही नहीं हो पाता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान महिला को इन सभी बातों का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि महिला को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो और शिशु का विकास भी अच्छे तरीके से हो सके।

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प्रेगनेंसी में गिलोय के नुकसान

गिलोय सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है क्योंकि गिलोय में औषधीय गुण मौजूद होते हैं। इसीलिए बिमारियों से बचे रहने और स्वस्थ रहने के लिए गिलोय का काढ़ा बनाकर पीना बहुत ही फायदेमंद होता है। लेकिन प्रेग्नेंट महिला को गिलोय का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि गिलोय का सेवन करने से गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों को नुकसान पहुँचने का खतरा रहता है। तो आइये अब जानते हैं की गिलोय का सेवन करने से गर्भवती महिला को कौन कौन से नुकसान पहुँच सकते है।

कब्ज़ और अपच की समस्या

गर्भावस्था के दौरान अधिकतर महिलाएं कब्ज़ व् अपच की समस्या से परेशान रहती हैं। ऐसे में यदि महिला गिलोय का सेवन करती है तो इसके कारण महिला की यह परेशानी और भी ज्यादा बढ़ सकती है। इसीलिए गर्भवती महिला को काढ़ा का सेवन करने से बचना चाहिए।

गर्म तासीर

अदरक की तरह गिलोय की तासीर भी गर्म होती है और गर्भवती महिला को ऐसी चीजों के सेवन की मनाही होती है जिनकी तासीर गर्म होती है। क्योंकि गर्म तासीर वाली चीजों का सेवन करने से गर्भवती महिला व् गर्भ में शिशु दोनों को नुकसान पहुंच सकता है।

ब्लड शुगर लेवल

गर्भावस्था के दौरान गिलोय का सेवन करने से गर्भवती महिला का ब्लड शुगर लेवल लौ हो सकता है। जिसके कारण गर्भवती महिला को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

लौ ब्लड प्रैशर

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। जिसमे से एक समस्या होती है ब्लड प्रैशर का हाई या लौ रहना, ऐसे में यदि महिला ब्लड प्रैशर लौ रहता है और महिला गिलोय का सेवन करती है। तो ऐसा करने से महिला की परेशानी बढ़ सकती है। और ब्लड प्रैशर का ज्यादा लौ रहना महिला और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक होता है।

बिमारियों का खतरा

वैसे तो गिलोय का सेवन करने से इम्युनिटी बढ़ती है जिससे बिमारियों से बचे रहने में मदद मिलती है। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान गिलोय का सेवन करने से इम्युनिटी का जरुरत से ज्यादा बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। जिसकी वजह से महिला को शारीरिक परेशानियां अधिक होने का खतरा बढ़ जाता है।

ऑपरेशन से पहले गिलोय का सेवन होता है खतरनाक

प्रेग्नेंट महिला को यह बिल्कुल पता नहीं होता है की उसकी डिलीवरी सिजेरियन होगी या नॉर्मल होगी। ऐसे में यदि महिला की डिलीवरी सिजेरियन होती है और महिला प्रेगनेंसी के दौरान गिलोय का सेवन करती है। तो इसके कारण सिजेरियन डिलीवरी के दौरान महिला की दिक्कतें बढ़ सकती है।

तो यह हैं गर्भावस्था के दौरान गिलोय का सेवन करने के नुकसान ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को गिलोय का सेवन करने से बचना चाहिए। प्रेग्नेंट महिला के साथ जो महिलाएं शिशु की स्तनपान करवा रही होती है उन्हें भी गिलोय का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा यदि आप चाहे तो इसके लिए एक बार अपने डॉक्टर से भी राय ले सकती है।

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प्रेगनेंसी में इन फलों को जरूर खाएं?

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गर्भावस्था के दौरान फलों का सेवन बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि फल खाने में स्वादिष्ट तो होते ही हैं साथ ही फलों में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला व् गर्भ में पल रहे शिशु को हेल्थी रखने में मदद करते हैं। लेकिन फलों का सेवन करते हुए महिला को ध्यान रखना चाहिए की महिला केवल उनकी फलों का सेवन करें।

जिनका सेवन करने से माँ और बच्चे दोनों को फायदा मिलता है, ताजे फलों का महिला सेवन करें, अच्छे से धोने के बाद महिला को फलों का सेवन करें, बहुत देर से कटे रखें फलों का सेवन महिला नहीं करें, आदि। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको उन फलों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका सेवन गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए।

सेब

गर्भवती महिला को रोजाना एक सेब का सेवन जरूर करना चाहिए। क्योंकि सेब विटामिन्स, फाइबर, आयरन, कैल्शियम, कैलोरीज व् अन्य पोषक तत्वों का बेहतरीन स्त्रोत होता है जो गर्भवती महिला और शिशु दोनों के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

केला

गर्भावस्था के दौरान महिला के ले का सेवानभी कर सकती है क्योंकि केला मैग्नीशियम, पोटैशियम, फाइबर, विटामिन्स का बेहतर स्त्रोत होता है। और यह सभी पोषक तत्व प्रेग्नेंट महिला को ऊर्जा से भरपूर रखने के साथ गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं।

अनार

आयरन, फोलेट, कैल्शियम, प्रोटीन से भरपूर अनार का सेवन भी प्रेगनेंसी के दौरान महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि इसका सेवन करने से महिला को एनीमिया व् अन्य शारीरिक परेशानियों से बचे रहने के साथ बच्चे के बेहतर विकास और बच्चे को जन्म दोष से सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।

संतरा

गर्भवती महिला को संतरा, किन्नू जैसे फलों का भी भरपूर सेवन करना चाहिए क्योंकि इनमे विटामिन see, फाइबर जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो गर्भवती महिला की शारीरिक परेशनियों को कम करने के साथ गर्भ में बच्चे के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं। इसके अलावा ऐसा माना जाता है की प्रेगनेंसी के दौरान संतरे का सेवन करने से आपके होने वाले शिशु की आँखे बहुत सूंदर होती है।

आम

यदि गर्भावस्था के दौरान आम का मौसम है तो गर्भवती महिला आम का सेवन भी कर सकती है। क्योंकि आम में विटामिन सी, विटामिन ए, फाइबर, पोटैशियम व् अन्य पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं।

अमरुद

अमरुद खाने में बहुत स्वादिष्ट होता है साथ ही इसमें पोषक तत्व जैसे की विटामिन सी, पोटैशियम, फाइबर आदि भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो गर्भवती महिला और शिशु दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला चाहे तो अमरुद का सेवन कर सकती है लेकिन ध्यान रखें की कीड़े वाले, कच्चे, बिना धुले अमरुद का सेवन महिला नहीं करें।

कीवी

गर्भावस्था के दौरान महिला चाहे तो कीवी का सेवन भी कर सकती है क्योंकि कीवी खाने में स्वादिष्ट होने के साथ पोषक तत्वों से भरपूर होता है जो माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं।

तरबूज

यदि तरबूज का सेवन चल रहा है तो गर्भवती महिला तरबूज का सेवन भी कर सकती है क्योंकि तरबूज में पानी की अधिकता होती है जो गर्भवती महिला को हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है।

तो यह हैं वो फल जिनका सेवन गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए लेकिन इनमे से किसी फल को खाने से यदि महिला को कोई परेशानी होती है तो महिला को उस फल का सेवन नहीं करना चाहिए। इन फलों के अलावा महिला थोड़ी थोड़ी मात्रा में अंगूर, बेरीज़, जामुन, खरबूजा, आदि का सेवन भी कर सकती है। लेकिन कच्चा पपीता, अनानास जैसे फलों का सेवन महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह फल प्रेग्नेंट महिला व् उनके होने वाले बच्चों के लिए नुकसानदायक होते हैं।

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प्रेगनेंसी के दौरान दूध पीना ज्यादा फायदेमंद है या दही खाना?

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हर महिला के लिए प्रेगनेंसी बहुत ही नाजुक समय होने के साथ बहुत ही महत्वपूर्ण भी होता है। क्योंकि इस दौरान महिला अकेली नहीं होती है बल्कि महिला के गर्भ में एक नवजात पल रहा होता है जो अपने विकास के लिए पूरी तरह से अपनी माँ पर निर्भर करता है। ऐसे में महिला के लिए जरूरी होता है की महिला प्रेगनेंसी के दौरान अपना अच्छे से ध्यान रखें न्यूट्रिशन से भरपूर आहार का सेवन करे ताकि माँ और बच्चे दोनों को फिट रहने में मदद मिल सकें।

साथ ही कुछ भी खाने या पीने से पहले महिला को इस बात के बारे में जरूर पता होना चाहिए की महिला जो भी खा रही है वो हेल्दी है या नहीं, बच्चे के लिए माँ के लिए फायदेमंद है या नहीं, आदि। आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान दूध व् दही के सेवन के बारे में बात करने जा रहे हैं की प्रेगनेंसी के दौरान दूध ज्यादा फायदेमंद होता है या दही ज्यादा फायदेमंद होती है।

प्रेगनेंसी के दौरान दूध या दही क्या है ज्यादा फायदेमंद?

गर्भावस्था के दौरान महिला के कुछ भी खाने या पीने से पहले उसकी पूरी जानकारी होना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला कोई ऐसी चीज खाती या पीती है जिसका सेवन महिला को नहीं करना चाहिए, गलत समय पर महिला कोई चीज महिला खाती है, जरुरत से ज्यादा कोई चीज महिला खाती है तो उसकी वजह से महिला और शिशु दोनों की सेहत को नुकसान पहुँचता है। लेकिन दूध और दही दोनों ही ऐसी चीजें हैं जिनका सेवन महिला प्रेगनेंसी के दौरान कर सकती है।

क्योंकि दोनों ही कैल्शियम, प्रोटीन, जैसे पोषक तत्वों से भरपूर है और यह पोषक तत्व माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद हैं। लेकिन दूध और दही का सेवन एक साथ महिला को नहीं करना चाहिए क्योंकि इसकी वजह से महिला को पेट सम्बन्धी परेशानी हो सकती है। ऐसे में यदि महिला दूध पी रही है तो महिला को दही नहीं खानी चाहिए और यदि महिला दही खा रही है तो महिला को दूध नहीं पीना चाहिए।

प्रेगनेंसी में दूध पीने के फायदे

  • दूध में कैल्शियम भरपूर मात्रा में मौजूद होता है जो हड्डियों व् दांतों के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
  • प्रोटीन की मात्रा भी दूध में मौजूद होती है जो महिला को स्वस्थ रखने के साथ बच्चे के बेहतर विकास में भी मदद करती है।
  • दूध पीने से शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।
  • गर्भवती महिला यदि रात को सोने से पहले गुनगुने दूध का सेवन करती है तो इससे महिला को बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है।
  • विटामिन डी से भरपूर दूध का सेवन करने से शिशु के बेहतर विकास व् शिशु को बिमारियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

गर्भावस्था में दही खाने के फायदे

  • दही प्रोटीन का बेहतरीन स्त्रोत होती है जो गर्भ में शिशु के बेहतर शारीरिक विकास में मदद करती है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान दही का सेवन करने से शरीर के तापमान को सही रहने में मदद मिलती है।
  • दही का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला की पाचन क्रिया को बेहतर रहने में मदद मिलती है।
  • प्रेग्नेंट महिला यदि दही का सेवन करती है तो इससे महिला के ब्लड प्रैशर को सामान्य रहने में मदद मिलती है।
  • दही का सेवन करने से गर्भवती महिला की इम्युनिटी बढ़ती है जिससे महिला को संक्रमण से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • कैल्शियम से भरपूर दही का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला व् शिशु की हड्डियों को पोषित रहने में मदद मिलती है।
  • दही का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला के वजन को सही रहने में मदद मिलती है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान मानसिक रूप से रिलैक्स रहने के लिए भी दही का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान दूध व् दही खाने से जुड़े टिप्स, साथ ही प्रेग्नेंट महिला को रात को, सर्दी खांसी होने पर दही का सेवन करने से बचना चाहिए।

Milk or Curd which one is more healthy for pregnant women

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में इन बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है?

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प्रेगनेंसी के दौरान एक से लेकर नौ महीने तक महिला बहुत से उतार चढ़ाव से गुजरती है ऐसे में महीने दर महीने महिला को लाइफ स्टाइल रहन सहन में कुछ न कुछ बदलाव जरूर करना पड़ता है साथ ही महिला को पूरी सावधानी भी बरतनी जरुरी होती है। ताकि प्रेग्नेंट महिला और बच्चा दोनों स्वस्थ रह सकें। आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी के सातवें महीने में महिला को कौन कौन सी सावधानी बरतने की जरुरत होती है उसके बारे में बात करने जा रहे हैं।

गर्भावस्था का सातवां महीना

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में महिला का वजन बढ़ा हुआ होता है, पेट बाहर की तरफ निकल जाता है, गर्भ में शिशु का विकास तेजी से हो रहा होता है, महिला की शारीरिक परेशानियां बढ़ सकती है, गर्भ में शिशु की हलचल बढ़ जाती है, यदि किसी तरह की लापरवाही की जाये तो समय से पहले जन्म का खतरा होता है, ऐसे ही कुछ बदलाव का अनुभव प्रेगनेंसी के सातवें महीने में महिला करती है। ऐसे में माँ और बच्चे को कोई दिक्कत नहीं हो इसके लिए जरुरी है की महिला पूरी सावधानी बरतें।

गर्भावस्था के सातवें महीने में महिला को कौन कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में महिला को कोई दिक्कत नहीं और और शिशु का विकास अच्छे तरीके से हो इसके लिए महिला को कौन कौन सी सावधानी बरतनी चाहिए आइये उसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

वजन उठाने से बचें

प्रेग्नेंट महिला को सातवें महीने में भारी वजन उठाने से बचना चाहिए। क्योंकि भरे चीजों को उठाने के कारन महिला के पेट पर दबाव पड़ता है जिसकी वजह से माँ और बच्चे दोनों को परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है।

झुककर काम नहीं करें

ऐसा कोई भी काम नहीं करें जिसमे महिला को झुकना पड़े क्योंकि प्रेगनेंसी के सातवें महीने में महिला का पेट बाहर की और निकला हुआ होता है। ऐसे में झुककर किसी भी काम को करने की वजह से प्रेग्नेंट महिला और बच्चे को परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है।

भागादौड़ी नहीं करें

गर्भावस्था के सातवें महीने में महिला को ज्यादा भागादौड़ी नहीं करनी चाहिए क्योंकि इसके कारण संकुचन होने का खतरा बढ़ जाता है। जिसकी वजह से गर्भ में शिशु को समस्या होने का खतरा रहता है।

खाते समय रखें इस बात का ध्यान

गर्भावस्था के दौरान महिला की पाचन क्रिया धीमी पड़ सकती है और सातवें महीने गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण महिला को पाचन क्रिया से जुडी समस्या होने का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में सातवें महीने में महिला को पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेने के साथ इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला थोड़ा थोड़ा करके अच्छे से चबाकर खाये। ताकि गर्भवती महिला को कब्ज़, अपच, गैस, जी मिचलाना, सीने में जलन, जैसी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिल सके।

सोने की पोजीशन का रखें ध्यान

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में पेट बाहर आने के कारण महिला को नींद लेने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में गहरी नींद के लिए महिला को प्रेगनेंसी पिल्लो का इस्तेमाल करना चाहिए या फिर महिला को बाईं और करवट लेकर सोना चाहिए इन दोनों ही तरीकों से प्रेग्नेंट महिला को गेंरी नींद लेने मदद मिलती है।

घर का काम करते समय बरतें सावधानी

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में घर के केवल वो काम करने चाहिए जिनमे महिला को किसी तरह की परेशानी नहीं हो। साथ ही महिला को ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिन्हे करने पर महिला को ज्यादा जोर लगाना पड़े, महिला के पेट पर दबाव पड़े या महिला को लम्बे समय तक एक ही जगह खड़े रहना पड़े। क्योंकि इन सभी कामों को करने से महिला की शारीरिक परेशानियां बढ़ सकती है।

स्ट्रेचमार्क्स

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में महिला को स्ट्रेचमार्क्स की समस्या अधिक न हो इसके लिए कोई न कोई घरेलू नुस्खा जरूर ट्राई करना चाहिए।

व्यायाम

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में महिला का वजन बढ़ जाता है ऐसे में महिलाएं अपने वजन को कम करने के लिए गलती से भी डाइट नहीं करें। क्योंकि यदि महिला डाइट करेंगी यानी अपने खान पान में लापरवाही बरतेंगी तो इसका असर माँ और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य को बुरी तरह से प्रभावित करेगा।

दवाइयों का सेवन

गर्भावस्था के सातवें महीने में महिला को जो विटामिन्स की दवाइया डॉक्टर ने लेने के लिए कहा है उनका समय से सेवन करना चाहिए। साथ ही यदि महिला को कोई दिक्कत हो तो उसके इलाज के लिए अपनी मर्ज़ी से किसी भी दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए।

नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करें

गर्भावस्था के सातवें महीने में महिला को किसी भी तरह के नशीले पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इन चीजों के सेवन से समय से पहले बच्चे का जन्म जैसी परेशानी होने का खतरा रहता है।

तनाव नहीं लें

गर्भावस्था के सातवें महीने में महिला को बिल्कुल भी टेंशन नहीं लेनी चाहिए। क्योंकि तनाव लेने के कारण माँ और बच्चे दोनों को दिक्कत हो सकती है।

मौसम के साथ सावधानी

यदि आपको प्रेगनेंसी का सातवां महिला चल रहा है साथ ही मौसम में भी बदलाव हो रहा है तो महिला को बदलते मौसम के साथ अपनी सेहत का ज्यादा ध्यान रखना चाहिए। ताकि बदलते मौसम के साथ महिला को किसी भी तरह की परेशानी नहीं।

तो यह हैं कुछ सावधानियां जो प्रेगनेंसी के सातवें महीने में महिला को बरतनी चाहिए। यदि महिला इन सावधानियों का ध्यान रखती है और किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करती है तो ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला और बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

Precautions for 7th month of pregnancy

प्रेगनेंसी में खर्राटे आने के कारण और उपाय

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प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को बहुत सी दिक्कतें होती है साथ ही महिला अपने शरीर में, व्यवहार में, खाने पीने के तरीके में, सोने के तरीके में बदलाव का अनुभव करती है। आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान महिला सोते समय खर्राटे आने की समस्या के बारे में बात करने का रहे हैं। वैसे तो खर्राटे आना आम बात होती है।

परन्तु खर्राटे लेने के कारण महिला को नहीं लेकिन साथ सोने वाले को बहुत परेशानी होती है साथ ही महिला को शर्मिंदगी भी महसूस हो सकती है। प्रेगनेंसी के दौरान महिला को खर्राटे आने का कोई एक नहीं बल्कि कई कारण हो सकते हैं। और इस समस्या से बचाव के लिए महिला कुछ आसान टिप्स को ट्राई भी कर सकती है।

प्रेगनेंसी के दौरान खर्राटे आने के कारण

  • महिला के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण ऐसा हो सकता है।
  • गर्भावस्था के दौरान बॉडी में ब्लड फ्लो बढ़ जाता है जिसकी वजह से खून की वाहिकाएं मोटी हो जाती है जिसकी वजह से नाक के आस पास का हिस्सा थोड़ा ब्लॉक हो सकता है और सोते समय महिला को खर्राटे आ सकते हैं।
  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला का वजन बढ़ने की वजह से महिला को सांस लेने में दिक्कत हो सकती है जिसकी वजह से महिला को खर्राटे की समस्या हो सकती है।
  • प्रेग्नेंट महिला को थकान अधिक होने के कारण भी सोते समय खर्राटे अधिक आ सकते हैं।
  • यदि प्रेग्नेंट महिला को नाक में एलर्जी, सर्दी, फ्लू की समस्या हो जाती है तो इस कारण भी महिला को खर्राटे अधिक आने लगते हैं।
  • कुछ महिलाओं को पहले से ही खर्राटे आते हैं और गर्भावस्था के दौरान अधिक आने लगते हैं।
  • जो महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान नशीले पदार्थों का सेवन करती है उन्हें भी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

क्या प्रेगनेंसी के दौरान खर्राटे खतरनाक होते हैं?

वैसे तो खर्राटे आना आम बात होती है लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला को बहुत अधिक खर्राटे आते हैं। तो इसकी वजह से गर्भवती महिला और शिशु दोनों की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। जैसे की महिला को हाई ब्लड प्रैशर, जेस्टेशनल डाइबिटीज़, सिजेरियन डिलीवरी जैसी समस्या होने के साथ शिशु के विकास में कमी भी आ सकती है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान खर्राटे अधिक आने की समस्या को अनदेखा न करते हुए इसके उपचार करने चाहिए साथ ही एक बार डॉक्टर से भी जरूर मिलना चाहिए।

गर्भावस्था के दौरान खर्राटे की समस्या से बचाव के उपाय

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला को खर्राटे अधिक आते हैं तो महिला कुछ आसान टिप्स को ट्राई करके इस परेशानी से निजात पा सकती है। जैसे की:

करवट लेकर सोएं

प्रेग्नेंट महिला को हमेशा करवट लेकर सोना चाहिए, करवट लेकर सोने से महिला को खर्राटे भी कम आते है साथ ही बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बाईं और करवट लेकर सोना चाहिए। क्योंकि बाईं और करवट लेकर सोने से नींद भी अच्छी आती है और बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन भी अच्छे से होता है।

सिर ऊँचा रखकर सोएं

गर्भावस्था के दौरान महिला को खर्राटे की समस्या से बचने के लिए सिर ऊँचा रखकर सोना चाहिए। इसके लिए महिला सिर के नीचे दो तकिये रखें, ऐसे सोने से नाक के जरिये हवा अच्छे से पास होगी जिससे सांस लेने आसानी होने के साथ खर्राटे की समस्या से बचे रहने में भी मदद मिलेगी।

वजन रखें नियंत्रित

जिन महिलाओं का वजन प्रेगनेंसी के दौरान जरुरत से ज्यादा बढ़ जाता है उन महिलाओं को खर्राटे की समस्या अधिक हो सकती है। ऐसे में गर्भवती महिला को अपना वजन प्रेगनेंसी के दौरान जरुरत से ज्यादा नहीं बढ़ने देना चाहिए। क्योंकि जितना महिला का वजन नियंत्रित रहता है उतना ही महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

सर्दी से बचाव

यदि सदरी फ्लू जुखाम आदि के कारण महिला का नाक बंद है तो महिला को इस परेशानी का इलाज करना चाहिए। क्योंकि इस परेशानी का इलाज करने से महिला को खर्राटे की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान खर्राटे लेने के कारण व् इस परेशानी से बचाव के कुछ उपाय, तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान खर्राटे लेने की समस्या हो रही है तो आप भी इन आसान टिप्स को ट्राई करके इस समस्या से निजात पा सकते हैं।

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