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प्रेगनेंसी में मशरूम खाने के फायदे

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प्रेगनेंसी में महिला की कुछ न कुछ अलग खाने की इच्छा हो सकती है। जैसे की कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान मशरूम खाने की इच्छा हो सकती है। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान कुछ भी खाने पीने से पहले उसके बारे में पूरी जानकारी होना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि प्रेगनेंसी में गलत आहार का सेवन माँ के साथ बच्चे की सेहत पर भी गलत प्रभाव डाल सकता है।

तो लीजिये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान मशरूम खाना चाहिए या नहीं, मशरूम खाने के क्या फायदे या नुकसान होते हैं, मशरूम का सेवन करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, आदि के बारे में हम आपको विस्तार से बताने जा रहे हैं।

क्या गर्भवती महिला मशरूम खा सकती है?

प्रोटीन, फाइबर, आयरन, choline, विटामिन डी, राइबोफ्लेविन जैसे पोषक तत्वों से भरपूर मशरूम का सेवन गर्भवती महिला जरूर कर सकती है। क्योंकि मशरूम में मौजूद पोषक तत्व गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने के साथ बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास में भी मदद करते हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान मशरूम का सेवन करने के फायदे

गर्भवती महिला यदि प्रेगनेंसी के दौरान मशरूम का सेवन करती है तो इससे महिला को एक या दो नहीं बल्कि कई फायदे मिलते हैं। तो आइये अब इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में मशरूम खाने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

आयरन

गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में खून की कमी होने के कारण महिला को एनीमिया व् अन्य शारीरिक परेशानियां जैसे की थकान व् कमजोरी होने के साथ बच्चे के विकास में भी दिक्कत आ सकती है। लेकिन यदि महिला मशरूम का सेवन करती है तो महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। क्योंकि मशरूम में आयरन भरपूर मात्रा में मौजूद होता है जो महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।

फाइबर

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण पाचन क्रिया धीमी गति से काम करने लगती है। जिसके कारण कब्ज़, सीने में जलन, एसिडिटी जैसी समस्याएँ महिला को हो सकती है। लेकिन मशरूम खाने से महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। क्योंकि मशरूम में फाइबर की मात्रा भी मौजूद होती है जो गर्भवती महिला को इन परेशानियों से बचे रहने और पाचन क्रिया को सही तरीके से काम करने में मदद मिलती है।

विटामिन डी

मशरूम में विटामिन डी की मात्रा भी मौजूद होती है जो हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करने में मदद करती हैं। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान महिला यदि मशरूम का सेवन करती है। तो इससे महिला की हड्डियां मजबूत होती है जिससे महिला को थकान व् कमजोरी से बचे रहने और ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है। साथ ही मशरूम खाने से बच्चे की हड्डियों के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

प्रोटीन

मशरूम में प्रोटीन भी मौजूद होता है जो गर्भ में पल रहे बच्चे के बेहतर शारीरिक विकास में मदद करता है। ऐसे में बच्चे के बेहतर शारीरिक विकास के लिए प्रेग्नेंट महिला को मशरूम का सेवन जरूर करना चाहिए। साथ ही मशरूम में राइबोफ्लेविन होता है जो बच्चे के जन्म के समय बच्चे के वजन और लंबाई पर सकारात्मक असर डालता है।

कोलीन (Choline)

प्रेग्नेंट महिला यदि मशरूम का सेवन करती है तो इससे बच्चे के बेहतर शारीरिक विकास के साथ मानसिक विकास में भी मदद मिलती है। जिससे बच्चे के मस्तिष्क का विकास तेजी से होता है।

इम्युनिटी बढ़ती है

मशरूम में मौजूद विटामिन डी गर्भवती महिला की इम्युनिटी को बढ़ाने में भी मदद करता है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चे को संक्रमण व् बिमारियों से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

प्रेग्नेंट महिला मशरूम का सेवन करने से पहले इन बातों का ध्यान रखें

  • गर्भवती महिला को हमेशा ताजे मशरूम खरीदने चाहिए जिन मशरूम पर काले धब्बे, भूरे निशान होते है उन्हें नहीं खरीदना चाहिए।
  • मशरूम को अच्छे से धोने के बाद खाने के लिए इस्तेमाल में लाएं।
  • कच्चे मशरूम का सेवन नहीं करें उबालने के बाद या सब्ज़ी बनाकर मशरूम खाएं।
  • अगर पहले से स्टोर किए हुए मशरूम खरीद रही है तो उस पर डेट जरूर चेक करें।
  • यदि प्रेग्नेंट महिला को मशरूम खाने से एलर्जी होती है या प्रेगनेंसी में मशरूम खाने के बाद किसी तरह की एलर्जी हो रही है तो महिला को मशरूम का सेवन नहीं करना चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान मशरूम का सेवन करने से जुडी जानकारी, यदि आप भी माँ बनने वाली है तो आप भी मशरूम का सेवन करें। लेकिन खाने से पहले ऊपर दिए गए टिप्स का ध्यान रखें ताकि आपको और आपके बच्चे को मशरूम खाने के फायदे मिलें और किसी भी तरह का नुकसान नहीं हो।

Benefits of eating Mushroom in pregnancy

प्रेगनेंसी में नारियल पानी कब पीना चाहिए और कब नहीं पीना चाहिए?

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प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के लिए भरपूर मात्रा में पानी पीने के साथ जूस, निम्बू पानी, नारियल पानी व् अन्य तरल पदार्थों का सेवन करने की सलाह भी दी जाती है। नारियल पानी पीने में मीठा होने के साथ पोषक तत्वों से भरपूर भी होता है। और प्रेग्नेंट महिला यदि नारियल पानी का सेवन करती है तो इससे माँ व् बच्चे दोनों को फायदे मिलते हैं।

तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी में नारियल पानी कब पीना चाहिए और कब नहीं पीना चाहिए इसके बारे में बताने जा रहे हैं। लेकिन उससे पहले जानते हैं की प्रेगनेंसी में नारियल पानी पीने से कौन कौन से बेहतरीन फायदे मिलते हैं।

नारियल पानी में मौजूद पोषक तत्व

पोटैशियम, फाइबर, ओमेगा फैटी एसिड, प्रोटीन, सोडियम, कैल्शियम, विटामिन सी, मैग्नीशियम, मैगनीज़, एंटीऑक्सीडेंट्स आदि भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं।

गर्भावस्था में नारियल पानी पीने के फायदे

प्रेग्नेंट महिला यदि नारियल पानी का सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला को होने वाली शारीरिक परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है। साथ ही बच्चे को भी फायदा मिलता है। तो आइये अब इन फायदों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

मॉर्निंग सिकनेस से आराम

प्रेग्नेंट महिला को सुबह उठने के बाद कमजोरी, थकान, उल्टी आने की इच्छा होना, जी मिचलाना आदि की परेशानी होना आम बात होती है। खासकर प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में यह परेशानी अधिक होती है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला नारियल पानी का सेवन करती है तो महिला को इस परेशानी से बचे रहने व् सुबह उठने के बाद एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

पाचन तंत्र रहता है दुरुस्त

नारियल पानी का सेवन करने से गर्भवती महिला को पाचन तंत्र से जुडी समस्याएँ जैसे की कब्ज़, एसिडिटी, पेट का टाइट होना, अपच, आदि की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही पाचन तंत्र मजबूत होता है जिससे खाने को अच्छे से हज़म करने में मदद मिलती है।

शरीर में पानी की कमी होती है पूरी

नारियल पानी का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला के शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को पानी की कमी के कारण होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

वजन

प्रेगनेंसी के दौरान नारियल पानी का सेवन करने से महिला के वजन को नियंत्रित रहने में मदद मिलती है। क्योंकि नारियल में पानी में कैलोरी कम होती है, फाइबर व् ओमेगा फैटी एसिड अधिक होते हैं जो वजन को सही रखने में मदद करते हैं।

इम्युनिटी बढ़ती है

एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर नारियल पानी का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला की इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद मिलती है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चे को संक्रमण से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

एनर्जी मिलती है

नारियल पानी में मौजूद पोषक तत्व गर्भवती महिला को हमेशा एनर्जी से भरपूर रखने में मदद करते हैं। इसीलिए यदि महिला एनर्जी से भरपूर रहना चाहती है तो महिला को रोजाना नारियल पानी का सेवन जरूर करना चाहिए।

यूरिन इन्फेक्शन से बचाव

कई बारे प्रेगनेंसी में यूरिन इन्फेक्शन की समस्या हो जाती है लेकिन यदि महिला नारियल पानी का सेवन करती है तो महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। क्योंकि नारियल पानी का सेवन करने से किडनी के काम में सुधार आता है। जिससे इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

हाई ब्लड प्रैशर से आराम

यदि कोई गर्भवती महिला हाई ब्लड प्रैशर की समस्या से प्रेगनेंसी के दौरान परेशान होती है तो महिला को नारियल पानी जरूर पीना चाहिए। क्योंकि नारियल पानी पीने से महिला के ब्लड प्रैशर को सामान्य रहने में मदद मिलती है।

बच्चे का विकास होता है बेहतर

नारियल पानी का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला के शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है। जिससे एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा को सही रहने में भी मदद मिलती है और बच्चा गर्भ में स्वस्थ रहता है। साथ ही नारियल पानी में मौजूद पोषक तत्व गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान कब नारियल पानी पीएं और कब नारियल पानी नहीं पीएं?

गर्भावस्था के दौरान यदि प्रेग्नेंट महिला की नारियल पानी पीने की इच्छा होती है तो महिला नारियल पानी का सेवन कर सकती है। क्योंकि नारियल पानी पीने के लिए कोई महीना या समय नहीं निर्धारित किया गया है। लेकिन यदि महिला को नारियल पानी पीने से एलर्जी होती है, महिला को उसका स्वाद पसंद नहीं है, उसकी गंध से एलर्जी है तो गर्भवती महिला को नारियल पानी नहीं पीना चाहिए।

साथ ही भूरे नारियल का नहीं बल्कि हरे नारियल का पानी पीना चाहिए क्योंकि भूरे नारियल का पानी पीने से महिला को कब्ज़ की समस्या हो सकती है। इसके अलावा महिला को जरुरत से ज्यादा भी नारियल पानी का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि जरुरत से ज्यादा सेवन की गई किसी भी चीज का महिला को नुकसान पहुँच सकता है।

तो इसका मतलब यह हैं की प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने में महिला कभी भी नारियल पानी पी सकती है। बस इतना ध्यान रखें की महिला को नारियल पानी पीने से कोई समस्या नहीं हो और जितना हो सके ताजे नारियल लाकर उसका पानी पीएं और सिमित मात्रा में पीएं।

Coconut Water during Pregnancy

प्रेगनेंसी में अलग अलग तरीके से पेट में दर्द होने के कारण और उपाय

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प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। जैसे की उल्टियां होना, सिर दर्द व् चक्कर की समस्या, वजन बढ़ना, जी मिचलाना, जीभ के स्वाद में बदलाव, भूख कम या ज्यादा लगना, पेट में दर्द होना, आदि। आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान पेट में होने वाले दर्द के बारे में बात करने जा रहे हैं। गर्भावस्था में दौरान अधिकतर महिलाएं इस समस्या का सामना करती है।

लेकिन पेट दर्द कैसा हो रहा है, कब हो रहा है, पेट दर्द के साथ कौन से लक्षण बॉडी में महसूस हो रहे हैं इन सभी बातों का ध्यान गर्भवती महिला को रखना जरुरी होता है। क्योंकि कई बार यदि इसे अनदेखा किया जाये तो इसका परिणाम नुकसानदायक हो सकता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में जानते हैं की प्रेगनेंसी के समय अलग अलग तरीके से पेट में दर्द होने के क्या कारण होते हैं और किस तरह महिला इस समस्या से निजात पा सकती है।

गर्भपात

प्रेगनेंसी के दौरान पेट में दर्द होने का कारण गर्भपात हो सकता है। यदि प्रेगनेंसी की शुरुआत में ही महिला को पेट में या पेट के निचले हिस्से में तेजी से दर्द हो रहा होता है जैसे की माहवारी के समय होता है। और दर्द के साथ ब्लीडिंग या शरीर में कुछ असहज लक्षण जैसे की उल्टियां, दस्त आदि भी महसूस हो रहे हैं। तो इस तरह के पेट दर्द को अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि यह गर्भपात होने का संकेत होता है।

कब्ज़ या एसिडिटी

प्रेगनेंसी के दौरान महिला की पाचन क्रिया धीमी हो जाती है जिस वजह से महिला को कब्ज़ व् पेट में गैस की समस्या हो जाती है। और इस कारण महिला को पेट में दर्द महसूस हो सकता है।

गर्भाशय के आकार के बढ़ने के कारण

महिला के गर्भ में शिशु का विकास बढ़ने का साथ धीरे धीरे गर्भाशय का आकार भी बढ़ता है जिस वजह से गर्भाशय के आस पास की मांसपेशियों में खिंचाव महसूस होता है। और खिंचाव महसूस होने के कारण महिला को पेट में हल्का फुल्का दर्द पूरी प्रेगनेंसी के दौरान रह सकता है।

गलत खान पान

यदि प्रेग्नेंट महिला कुछ गलत खा पी लेती है तो इसके कारण भी महिला को पेट में दर्द की समस्या हो सकती है। इसीलिए गर्भवती महिला को बाहर का खाना आदि न खाने की सलाह दी जाती है। या फिर यदि महिला अच्छे से अपने खान पान का ध्यान नहीं रखती है और भूखी रहती है तो इस कारण भी महिला को पेट में दर्द की समस्या हो सकती है।

बच्चे की हलचल के कारण

गर्भ में शिशु जब किक करता है तो इस कारण भी कई बारे महिला को पेट में थोड़ा बहुत दर्द महसूस हो सकता है। लेकिन इसमें घबराने की कोई बात नहीं होती है।

समय से पहले डिलीवरी

गर्भवती महिला को यदि प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही की शुरुआत में ही पेट में असहनीय दर्द महसूस होने के साथ, प्राइवेट पार्ट से सफ़ेद पानी, रक्त निकलता हुस महसूस होता है। तो यह समय से पहले डिलीवरी होने का संकेत होता है। साथ ही यदि महिला को ऐसा प्रेगनेंसी के छतीसवें हफ्ते या उसके बाद महसूस होता है तो यह लेबर पेन शुरू होने का संकेत होता है। ऐसे में दोनों ही केस में महिला को जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलना चाहिए।

प्रेगनेंसी के दौरान पेट में दर्द की समस्या से बचने के आसान उपाय

  • खान पान का अच्छे से ध्यान रखें जैसे की गलत चीजों का सेवन नहीं करें, गैस बनाने वाले आहार नहीं खाएं, बासी व् ठंडी चीजें नहीं खाएं, समय से खाएं फाइबर युक्त डाइट लें, आदि।
  • पेट पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ने दें।
  • यदि प्रेगनेंसी के दौरान असहनीय दर्द महसूस होने के साथ शरीर में असहज लक्षण भी महसूस हो तो जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलें। ताकि माँ व् बच्चे दोनों को ही किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले पेट दर्द के कारण व् इस परेशानी से बचने के आसान उपाय। यदि आप भी माँ बनने वाली है तो इन बातों का ध्यान रखें ताकि पेट में कब और क्यों दर्द हो रहा है इसके बारे में आपको जानने में मदद मिल सके। जिससे आपको और आपके बच्चे को प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह की परेशानी नहीं हो।

प्रेगनेंसी के दौरान अंगूर खाने से क्या-क्या दिक्कत आती है?

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गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को फलों व् सब्जियों के साथ अन्य पोषक तत्व से भरपूर आहार लेने की सलाह दी जाती है। ऐसे में कुछ भी खाने या पीने से पहले महिला को इस बात का ध्यान रखना भी जरुरी होता है की महिला कौन से फल व् सब्जियां खा सकती है और किन फलों व् सब्जियों का सेवन प्रेग्नेंट महिला को नहीं करना चाहिए।

क्योंकि पोषक तत्वों से भरपूर चीजें खाने से माँ और बच्चे को फायदा मिलता है और यदि महिला किसी चीज का सेवन ज्यादा मात्रा में करती है या उस चीज का सेवन करती है जो प्रेग्नेंट महिला के लिए सही नहीं है तो इसका बुरा असर माँ व् बच्चे दोनों पर पड़ता है। आज इस आर्टिकल में अंगूर के बारे में बात करने जा रहे हैं की प्रेगनेंसी में अंगूर का सेवन करना चाहिए या नहीं, और अंगूर का सेवन करने से क्या नुकसान हो सकते हैं।

क्या गर्भवती महिला को अंगूर का सेवन करना चाहिए?

अंगूर खाने में स्वादिष्ट होता है इसीलिए अधिकतर लोगो को यह फल बहुत पसंद भी होता है। लेकिन जब बात प्रेग्नेंट महिला की हो तो महिला को अंगूर का सेवन करना चाहिए या नहीं इसके बारे में जानना जरुरी होता है। गर्भवस्था की पहली तिमाही में अंगूर का सेवन महिला को नहीं करना चाहिए क्योंकि इसकी वजह से शारीरिक परेशानियां अधिक होने का खतरा रहता है।

दूसरी तिमाही में कभी कभार महिला अंगूर का सेवन कर सकती है लेकिन सिमित मात्रा में ही अंगूर का सेवन करना चाहिए। इसके बाद तीसरी तिमाही में भी जितना हो सके गर्भवती महिला को अंगूर का सेवन करने से बचना चाहिए। ऐसे में आप यह कह सकते हैं की स्वाद के लिए महिला चाहे तो कभी कभार अंगूर खा सकती है लेकिन जरुरत से ज्यादा महिला को अंगूर का सेवन नहीं करना चाहिए।

गर्भावस्था में अंगूर खाने के नुकसान

गर्भवती महिला यदि अंगूर का सेवन करती है तो इसकी वजह से महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियां होने का खतरा बढ़ सकता है। जैसे की:

पाचन तंत्र से जुडी समस्या

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान पाचन तंत्र से जुडी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला अंगूर का सेवन करती है तो महिला की परेशानी कम होने की बजाय बढ़ सकती है। क्योंकि अंगूर के छिलके को पचाने में महिला को दिक्कत हो सकती है खासकर काले अंगूर का सेवन करने से महिला को ज्यादा दिक्कत हो सकती है। जिसकी वजह से महिला को अपच, कब्ज़, दस्त जैसी पेट सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा बढ़ सकता है।

ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है

अंगूर का सेवन करने से ब्लड में शुगर का लेवल बढ़ सकता है जिसकी वजह से गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान जेस्टेशनल डाइबिटीज़ होने का खतरा होता है।

वजन

प्रेगनेंसी के दौरान वजन का नियंत्रित रहना बहुत जरुरी होता है क्योंकि यदि महिला का वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ जाता है तो इसकी वजह से माँ व् बच्चे दोनों को परेशानी होने का खतरा होता है। और अंगूर का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला के वजन का जरुरत से ज्यादा बढ़ने का खतरा रहता है। इसीलिए गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अंगूर का सेवन करने से बचना चाहिए।

सीने में जलन

अंगूर का सेवन करने से गर्भवती महिला को पेट में गैस बनने की समस्या भी हो सकती है जिसकी वजह से महिला को सीने में जलन व् खट्टी डकार आने जैसी परेशानी अधिक हो सकती है।

सिजेरियन डिलीवरी होने का खतरा

प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही में अंगूर का सेवन करने से गर्भ में पल रहे बच्चे का वजन बढ़ने का खतरा रहता है। जिसकी वजह से डिलीवरी पेन समय से नहीं होता है और सिजेरियन डिलीवरी होने के चांस बढ़ जाते हैं।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो गर्भवती महिला को अंगूर का सेवन करने से हो सकते हैं। इसके अलावा जिन महिलाओं का वजन अधिक होता है, जिन्हे पेट सम्बन्धी परेशानी अधिक होती है, जिन महिलाओं को शुगर की समस्या होती है या अंगूर का सेवन करने से एलर्जी होती है। उन गर्भवती महिलाओं को अंगूर का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करना चाहिए।

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जाती हुई सर्दी में इन पांच चीजों को जरूर खाएं

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सर्दी के मौसम में अपने आप को ठण्ड से बचाने के लिए हर कोई अपना अच्छे से ध्यान रखता है। लेकिन जैसे ही ठण्ड का मौसम जाने वाला होता है तो उस दौरान यदि आप अपना अच्छे से ध्यान नहीं रखते हैं तो पूरी सर्दी में जो समस्या आपको नहीं होती है वो समस्या होने का खतरा आपको रहता है। ऐसे में सर्दी के मौसम में जिस तरह आप अपना ध्यान रखते हैं।

वैसे ही जाती हुई सर्दी में अपना ज्यादा ध्यान रखना चाहिए। ताकि बदलते मौसम के कारण होने वाली परेशानियों से आपको बचे रहने में मदद मिल सके। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको ऐसी पांच चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं। जिनका सेवन जाती हुई सर्दी में आपको जरूर करना चाहिए। ताकि आपको जातु हुई सर्दी में होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिल सके।

अदरक लहसुन (Ginger Garlic)

जाती हुई सर्दी के मौसम में आपको अदरक लहसुन का सेवन भरपूर करना चाहिए क्योंकि इसमें एंटी ऑक्सीडेंट्स व् अन्य पोषक तत्व मौजूद होते हैं। जो आपकी इम्युनिटी को बेहतर रखने में मदद करते हैं। जिससे आपको जाती हुई सर्दी में होने वाली समस्या जैसे की संक्रमण, फ्लू, बीमारी आदि से बचे रहने में मदद मिलती है।

हल्दी (Turmeric)

हल्दी एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी बायोटिक, एंटी इन्फ्लैमटरी गुणों से भरपूर होती है ऐसे में जाती हुई सर्दी में आपको हल्दी का सेवन भी जरूर करना चाहिए। और हल्दी के बेहतरीन फायदे के लिए रोजाना रात को सोने से पहले इसे गर्म दूध में मिलाकर पीना चाहिए।

अंडा (Egg)

सुपरफूड्स के बारे में जब बात की जाती है तो अंडे का नाम सबसे पहले आता है। ऐसे में जाते हुए सर्दी के मौसम में आपको अंडे का सेवन भी जरूर करना चाहिए। इससे शरीर में एनर्जी को भरपूर रहने में मदद मिलती है। जिससे आपको जाती हुई सर्दी में होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

देसी घी (Desi Ghee)

पुराने समय में दादी नानी सभी को देसी घी खाने की सलाह देती थी। क्योंकि घी खाने से आपको दुरुस्त रहने में मदद मिलती थी और आप फिट रहते थे। ऐसे ही यदि जाती हुई सर्दी में आप घी का सेवन करते हैं तो इससे आपके शरीर को गर्म रहने, एनर्जी से भरपूर रहने, इम्युनिटी को स्ट्रांग रहने में मदद मिलती है। जिससे आपको जाती हुई सर्दी में होने वाली दिक्कतों से बचे रहने में मदद मिलती है।

शहद (Honey)

शहद भी एक इम्युनिटी बूस्टर होता है जो आपको सर्दी जुखाम फ्लू जैसी परेशानियों से बचे रहने में मदद करता है। ऐसे में जाती हुई सर्दी में रोजाना सुबह खाली पेट एक गिलास गर्म पानी में शहद डालकर भी पीना चाहिए। इससे भी आपको फायदा मिलेगा जिससे आपको स्वस्थ, फिट व् एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलेगी।

तो यह हैं वो पांच चीजें जिनका सेवन जाती हुई सर्दी के मौसम में आपको जरूर करना चाहिए। यदि आप भी इन चीजों का सेवन करते हैं तो इससे जाती हुई सर्दी में होने वाली परेशानियों से बचे रहने में आपको मदद मिलती है।

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गर्भावस्था में इन पांच चीजों को खाने से गंभीर समस्या हो सकती है?

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प्रेगनेंसी के दौरान खान पान का बहुत अधिक महत्व होता है अच्छा और पोषक तत्वों से भरपूर खान पान जहां गर्भवती महिला व् बच्चे के विकास के लिए फायदेमंद होता है। वहीँ गलत खान पान गर्भवती महिला और बच्चे के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है। और कुछ खाद्य पदार्थ का सेवन करने से तो प्रेगनेंसी के दौरान गंभीर समस्यें होने का खतरा भी रहता है। तो आज इस आर्टिकल में हम प्रेग्नेंट महिला को ऐसे पांच खाद्य पदार्थों के बारे में बताने जा रहे हैं जो गर्भवती महिला व् बच्चे को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

कच्चा अंडा व् नॉन वेज

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अंडे व् नॉन वेज का सेवन जरूर करना चाहिए क्योंकि इसका सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान महिला को स्वस्थ रखने, प्रेगनेंसी में आने वाली कॉम्प्लीकेशन्स को कम करने और बच्चे के बेहतर विकास में मदद मिलती है। लेकिन गर्भवती महिला को कच्चे अंडे व् नॉन वेज का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसके साल्मोनेला, लिस्टेरिया, इ कोलाई जैसे हानिकारक बैक्टेरिया मौजूद होते हैं। जो गर्भवती महिला को उल्टी, दस्त, डायरिया जैसी समस्या से ग्रसित करने के साथ बच्चे के विकास पर भी नकारात्मक असर डालते हैं। इसके अलावा इनके सेवन से गर्भपात जैसी समस्या होने का खतरा भी होता है।

एलोवेरा

स्वास्थ्य को सही रखने के लिए एलोवेरा का सेवन फायदेमंद होता है लेकिन यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो भूलकर भी एलोवेरा नहीं खाएं। क्योंकि इसकी वजह से गर्भपात व् अन्य हानिकारक परेशानियां होने का खतरा रहता है।

कच्चा पपीता

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को कच्चे पपीते का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि कच्चे पपीते में लेटेक्स की मात्रा मौजूद होती है जो बच्चे के विकास पर बुरा असर डालती है। साथ ही इससे संकुचन शुरू हो जाता है जिसकी वजह से गर्भपात जैसी समस्या होने का खतरा बढ़ जाता है।

मछली

गर्भवती यदि मछली का सेवन करना चाहे तो कर सकती है लेकिन मछली का सेवन करते समय महिला को ध्यान रखना चाहिए की उस मछली में मर्करी की मात्रा अधिक नहीं हो। क्योंकि मर्करी गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास पर बुरा असर डालती है जिससे गर्भपात, बच्चे के विकास में कमी जैसी परेशानी खड़ी हो सकती है।

बिना धुले फल व् सब्जियां

गर्भवती महिला को बिना धुले फल व् सब्जियों का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसमें हानिकारक बैक्टेरिया मौजूद होता है जो आपके शरीर में पहुंचकर महिला के लिए शारीरिक परेशानियां बढ़ाने के साथ गर्भ मेंबच्चे के विकास पर भी बुरा असर डाल सकता है।

तो यह हैं वो पांच चीजें जिनका सेवन गर्भवती महिला को बिल्कुल नहीं करना चाहिए इसके अलावा महिला को शराब, धूम्रपान, कैफीन आदि का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह सभी चीजें गर्भ में पल रहे बच्चे को नुकसान पहुंचा सकती है जिससे शिशु के विकास पर बहुत बुरा असर पड़ता है।

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प्रेग्नेंट महिला को सप्ताह में कम से कम एक दिन इन चीजों को जरूर खाना चाहिए?

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गर्भावस्था में दौरान अधिकतर महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान अपने खान पान को लेकर रहती हैं। क्योंकि कई बार महिला को वो चीज खानी पड़ती है जो प्रेगनेंसी के दौरान तो हेल्दी होती है लेकिन महिला को वो खाने में पसंद नहीं होती है। और कई बार महिला को उन चीजों से परहेज रखना पड़ता है जो महिला को बहुत पसंद होती है।

ऐसे में बेशक महिला खान पान को लेकर कितनी ही परेशान हो लेकिन जितना गर्भवती महिला अपने खान पान का ध्यान रखती है उतना ही प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में बच्चे के बेहतर विकास में मदद मिलती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम ऐसी पांच चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका सेवन गर्भवती महिला को हफ्ते में कम से कम एक बार जरूर करना चाहिए।

अंडा

अंडा एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जिसका सेवन वैसे तो गर्भवती महिला को रोजाना करना चाहिए। लेकिन यदि महिला अंडे का सेवन रोजाना नहीं कर सकती है तो महिला को हफ्ते में कम से कम एक बार तो अंडा जरूर खाना चाहिए। क्योंकि अंडा गर्भवती महिला के लिए फायदेमंद होने के साथ गर्भ में पल रहे बच्चे के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास के लिए भी फायदेमंद होता है।

चिकन

गर्भावस्था के दौरान अच्छी तरह से पकाया हुआ चिकन, ताजा चिकन खाना बिल्कुल सेफ होता है साथ ही फायदेमंद भी होता है। ऐसे में गर्भवती महिला को हफ्ते में एक बार चिकन का सेवन भी जरूर करना चाहिए। यदि आपको चिकन की जगह मछली या मटन का सेवन करना पसंद हैं तो आप वो भी कर सकते हैं। लेकिन हफ्ते में एक बार कुछ न कुछ जरूर खाएं।

ड्राई फ्रूट्स

यदि आप रोजाना ड्राई फ्रूट्स नहीं खाती है तो हफ्ते में कम से कम एक बार बदल बदल कर किसी न किसी ड्राई फ्रूट का सेवन जरूर करें। जैसे की एक दिन बादाम खाएं, एक दिन अखरोट खाएं, एक दिन किशमिश आदि। ऐसे आपको सभी ड्राई फ्रूट्स के फायदे मिलेंगे।

हरी सब्ज़ी

रोजाना यदि आप अलग अलग सब्ज़ी का सेवन कर रही हैं तो एक दिन की डाइट में हरी सब्ज़ी का भी सेवन जरूर करें। क्योंकि हरी सब्जी पोषक तत्व से भरपूर होती है। जैसे की इसमें फाइबर, आयरन, फोलेट, जैसे पोषक तत्व होते हैं जो गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए भी फायदेमंद होते हैं।

चावल

प्रेग्नेंट महिला का यदि कभी रोटी खाने का मन नहीं होता है तो महिला चावल का सेवन भी कर सकती है। और हफ्ते में कम से कम एक या दो बार महिला को चावल का सेवन जरूर करना चाहिए। क्योंकि चावल का सेवन करना भी प्रेग्नेंट महिला के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

तो यह हैं वो पांच चीजें जिनका सेवन हफ्ते में कम से कम एक बार प्रेग्नेंट महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि इन चीजों का सेवन करने से गर्भवती महिला व् गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों को फायदा मिलता है।

प्रेगनेंसी में मछली खाना क्यों जरुरी होता है?

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गर्भावस्था के दौरान क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाएं इसके बारे में सही जानकारी न होने के कारण महिला कई बार उन चीजों सेवन नहीं करती है जिन चीजों का सेवन करना माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होता है। और उन्ही खाद्य पदार्थों में से एक खाद्य पदार्थ है मछली। जो महिलाएं नॉन वेज खा लेती है उन महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान मछली का सेवन जरूर करना चाहिए। और यदि आप नॉन वेज नहीं खाती है तो भी आपको एक बार ट्राई जरूर करना चाहिए। तो आइये आज इस आर्टिकल में प्रेगनेंसी में मछली के सेवन से जुडी जानकारी देने जा रहे हैं।

क्या प्रेग्नेंट महिला को मछली का सेवन करना चाहिए या नहीं?

आयरन, जिंक, आयोडीन, प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन- डी, विटामिन बी-12 व् अन्य पोषक तत्वों से भरपूर मछली का सेवन प्रेग्नेंट महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि यह सभी पोषक तत्व गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने के साथ गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास के लिए भी फायदेमंद होते हैं।

प्रेग्नेंट महिला को कौन सी मछली का सेवन करना चाहिए?

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को उन मछलियों का सेवन नहीं करना चाहिए जिनमे मर्करी की मात्रा ज्यादा होती है। क्योंकि मर्करी युक्त मछलियों का सेवन करने से बच्चे की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला ब्लू फिश, बफैलो फिश, कार्प फिश, ग्राउपर, रॉक फिश, सेबल फिश, शीप्सहेड, कैट फिश, बटर फिश आदि का सेवन कर सकती है। और गर्भवती महिला को किंग मैकेरल, टाइल फिश, मार्लिन, ऑरेंज रफी, बिगेये फिश, शार्क, सार्ड फिश, ट्यूना फिश आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।

गर्भावस्था में मछली का सेवन करने के फायदे

गर्भवती महिला यदि मछली का सेवन करती है तो ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला व् होने वाले बच्चे को बहुत से फायदे मिलता है। तो आइये अब उन फायदों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

बच्चे के विकास में मिलती है मदद

मछली में मौजूद पोषक तत्व शिशु के शारीरिक के साथ मानसिक विकास को भी बेहतर करने में मदद करते हैं। जैसे की ओमेगा 3 फैटी एसिड शिशु के दिमागी विकास को बेहतर करने मदद करता है तो विटामिन्स आयरन प्रोटीन जैसे पोषक तत्व शिशु के शारीरिक विकास को बढ़ाने में मदद करते हैं।

ब्लड प्रैशर

गर्भावस्था के दौरान जिन महिलाओं को हाई ब्लड प्रैशर की समस्या होती है उन महिलाओं को मछली का सेवन जरूर करना चाहिए क्योंकि इसका सेवन करने से ब्लड प्रैशर को कण्ट्रोल में रहने में मदद मिलती है।

कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल

प्रेग्नेंट महिला यदि मछली का सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला के कोलेस्ट्रॉल को सही रहने में मदद मिलती है। साथ ही महिला के हदय को स्वस्थ रहने व् हदय सम्ब्नधि समस्याओं से बचे रहने में मदद मिलती है।

तनाव होता है दूर

बहुत सी गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान तनाव जैसी परेशानी का सामना करती है। और गर्भवती महिला का तनाव लेना माँ व् बच्चे दोनों के लिए हानिकारक होता है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला मछली का सेवन गर्भावस्था के दौरान करती है तो महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

समय से पहले डिलीवरी का खतरा होता है कम

कई बार शरीर में पोषक तत्वों की कमी के कारण भी समय से पहले बच्चे के जन्म का खतरा हो जाता है खासकर ओमेगा 3 की कमी के कारण ऐसा होता है। लेकिन यदि महिला मछली का सेवन करती है तो महिला को इस समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है क्योंकि मछली का सेवन करने से गर्भवती महिला के शरीर में जरुरी पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है साथ ही मछली में ओमेगा 3 भरपूर मात्रा में मौजूद होता है।

जोड़ो में दर्द से मिलती है राहत

मछली में एंटी इंफ्लामेटरी गुण भी मौजूद होते हैं जो गर्भवती महिला को जोड़ो में दर्द की समस्या से सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।

प्रेग्नेंट महिला मछली का सेवन करते समय किन किन बातों का ध्यान रखें

  • गर्भवती महिला को किसी अच्छी जगह से खरीदी हुई मछली का ही सेवन करना चाहिए।
  • मछली का सेवन अच्छे से पकाने के बाद ही करें।
  • खाने के लिए प्रयोग में लाने से पहले मछली को अच्छे से साफ़ करवा लें क्योंकि सिर, किडनी, लिवर जैसे पार्ट्स में हानिकारक पदार्थ मौजूद होते हैं जो गर्भवती महिला के लिए नुकसानदायक होते हैं।
  • यदि प्रेग्नेंट महिला को मछली खाने से एलर्जी होती है या महिला ने अभी खानी शुरू की है और एलर्जी महसूस हो रही है तो महिला को इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ बेहतरीन फायदे जो मछली का सेवन करने से गर्भवती महिला को मिलते हैं। यदि आप भी माँ बनने वाली है तो इन सभी बातों का ध्यान रखते हुए आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान मछली को अपमी डाइट का हिस्सा जरूर बनाना चाहिए।

Benefits of eating fish during pregnancy

क्या प्रेग्नेंट महिला को कोविड का टीका लगाना सेफ होगा?

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लगभग पिछले एक साल से देशभर के लोग कोरोना जैसी बीमारी से जंग सी लड़ रहे हैं। साथ ही वो हर मुमकिन सावधानी को बरत रहे हैं जिससे इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके। साथ ही इस दौरान जो महिलाएं गर्भधारण कर रही हैं उन महिलाओं को और भी ज्यादा सावधानी बरतने की जरुरत है ताकि महिला की प्रेगनेंसी में किसी तरह की दिक्कत नहीं आये। और माँ और बच्चा दोनों इस बीमारी की चपेट में आने से बचें रहें।

आज बहुत कोशिशों के बाद इस बीमारी को हराने का समय आ गया है और कोरोना की वैक्सीन आ गई है। और इस वैक्सीन को लोगो को लगाने की शुरुआत भी हो गई है। लेकिन क्या गर्भवती महिला को इस वैक्सीन को लगवाना चाहिए या नहीं? यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रश्न है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको गर्भावस्था के दौरान महिला को करना वैक्सीन लगवानी चाहिए या नहीं इस बारे में बताने जा रहे हैं।

कोरोना वैक्सीन प्रेग्नेंट महिला के लिए सेफ है या नहीं?

कोरोना वैक्सीन महिला लगवाए या नहीं इसके लिए पहले तो सरकार द्वारा निर्देश जारी किये हैं। की प्रेग्नेंट महिला और स्तनपान करवाने वाली महिला को यह वैक्सीन बिना जरुरत के नहीं लगाईं जाएगी। उसके बाद यदि महिला प्रेगनेंसी के दौरान कोरोना से पीड़ित हो जाती है।

तो उसके बाद महिला को क्या ट्रीटमेंट दिया जाये, कोरोना वैक्सीन लगाईं जाएगी या नहीं, कोरोना वैक्सीन उनके लिए सेफ है या नहीं, इसका पूरा फैसला डॉक्टर्स द्वारा लिया जायेगा। उसके बाद जो भी सही तरीका होगा उसके माध्यम से गर्भवती महिला को इस परेशानी से बचाया जायेगा ताकि माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ रहे।

तो यह हैं प्रेग्नेंट महिला को कोरोना की वैक्सीन लगाया जाये या नहीं उससे जुडी जानकारी। इसके अलावा आज के समय में जो भी महिलाएं गर्भधारण का फैसला ले रही है उन महिलाओं को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि महिला को कोरोना वायरस के साथ अन्य हर प्रकार के संक्रमण से सुरक्षित रहने में मदद मिल सके।

Corona Virus Vaccination for Pregnant Women

प्रेग्नेंट महिला को बालों में गुनगुना तेल क्यों लगाना चाहिए?

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बालों का घना होना, लम्बा होना, शाइनी होना आपकी सुंदरता को और भी बढ़ा देता है। लेकिन कई बार बालों की सही केयर न करने के कारण, किसी बीमारी की वजह से, प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बालों से जुडी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में यदि महिला बालों में अच्छे से तेल लगाती है, पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करती है, तो आपको इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी के दौरान भी महिला इन टिप्स का इस्तेमाल कर सकती है। लेकिन गर्भवती महिला यदि प्रेगनेंसी के दौरान बालों में मालिश करती है तो महिला को नोर्मल तेल की बजाय तेल को थोड़ा गुनगुना करके मसाज करनी चाहिए। क्योंकि इससे महिला को बेहतरीन फायदे मिलते हैं। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में गुनगुना तेल लगाने के क्या फायदे होते हैं।

ब्लड सर्कुलेशन होता है बेहतर

बालों में गुनगुना तेल लगाकर उँगलियों से महिला या तो खुद मसाज करें या फिर किसी और से मसाज करवाएं। ऐसा करने से सिर में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है। और प्रेगनेंसी के दौरान ब्लड फ्लो बेहतर होने से गर्भवती महिला को बहुत सी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

सिर दर्द से मिलती है राहत

गर्भावस्था के समय बहुत सी महिलाएं सिर दर्द की समस्या से परेशान रहती है। लेकिन यदि महिला प्रेगनेंसी के समय बालों में गुनगुना तेल लगाकर मसाज करती है तो इससे महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

स्ट्रेस से मिलती है राहत

प्रेगनेंसी के दौरान तनाव यानी स्ट्रेस में रहना माँ के साथ बच्चे की सेहत पर नुकसान डाल सकता है। ऐसे में यदि महिला गुनगुने तेल को सिर में लगाती है तो इससे महिला को आराम महसूस होता है जिसेस महिला को मानसिक रूप से आराम मिलता है और महिला का स्ट्रेस कम होता है।

बालों को मिलते हैं फायदें

प्रेगनेंसी के समय बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव की वजह से बालों से जुडी समस्याएं जैसे की बालों का झड़ना, बालों में रूखापन होना, शाइन कम होना, आदि आम बात होती है। लेकिन यदि महिला प्रेगनेंसी के दौरान बालों में गुनगुना तेल लगाती है और ऐसा हर तीसरे चौथे दिन करती है। तो इससे बालों को पोषण मिलता है जिससे गर्भवती महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

रिलैक्स महसूस होता है

बालों में गुनगुना तेल लगाकर मसाज करवाने से गर्भवती महिला को रिलैक्स महसूस होता है जिससे महिला ऊर्जा से भरपूर महसूस करती है। बालों के अलावा महिला चाहे तो हाथों पैरों की मसाज भी कर सकती है।

नींद अच्छी आती है

प्रेगनेंसी के दौरान अनिंद्रा की समस्या होना आम बात होती है। लेकिन नींद पूरी न होने के कारण महिला को बहुत सी परेशानियां हो सकती है जैसे की आलस महसूस होना, बॉडी पेन होना, सिर दर्द होना, आदि। ऐसे में महिला यदि गुनगुने तेल से बालों की मसाज करती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला को आराम महसूस होता है। जिससे महिला को अच्छी नींद लेने में मदद मिलती है और अच्छी नींद के लिए महिला को रात को सोने से पहले बालों में तेल लगाना चाहिए।

तो यह हैं कुछ बेहतरीन फायदे जो बालों में गुनगुना तेल लगाने से गर्भवती महिला को मिलते हैं। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को बालों में गुनगुना तेल जरूर लगाना चाहिए। इसके अलावा बालों के लिए प्रेग्नेंट महिला नारियल तेल, सरसों, तेल, ओलिव ऑयल आदि का इस्तेमाल करना चाहिए।