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प्रेगनेंसी के दौरान प्राइवेट पार्ट से हल्का-हल्का पानी आने के कारण व् उपाय

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प्रेगनेंसी के दौरान महिला पूरे नौ महीने तक शरीर में होने वाले अलग अलग बदलाव व् लक्षणों का अनुभव करती है। जिनका प्रेगनेंसी के समय महसूस होना बहुत ही आम बात होती है। आज इस आर्टिकल में हम आपसे गर्भावस्था के दौरान प्राइवेट पार्ट से पानी जैसा स्त्राव होने के क्या कारण होते हैं और इस समस्या से बचाव के लिए महिला क्या- क्या कर सकती है इसके बारे में बताने जा रहे हैं। लेकिन उससे पहले जानते हैं की प्रेगनेंसी में पानी जैसा स्त्राव होना सामान्य होता है या नहीं।

गर्भावस्था के दौरान पानी जैसा स्त्राव होना सामान्य होता है या नहीं?

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला को प्राइवेट पार्ट से सफ़ेद, गाढ़ा, चिपचिपा, गंधहीन, पदार्थ निकलता है। तो घबराएं नहीं यह सफ़ेद पानी हो सकता है जिसे वाइट डिस्चार्ज भी कहते हैं और वाइट डिस्चार्ज का निकलना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है। यह प्रेग्नेंट महिला को संक्रमण से सुरक्षित रखने में मदद करता है। लेकिन गर्भवती महिला को यदि प्राइवेट पार्ट से निकलते हुए डिस्चार्ज के रंग में बदलाव, बदबू, खून आदि महसूस हो तो महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि यह महिला के लिए परेशानी का कारण होता है।

प्राइवेट पार्ट से स्त्राव होने के कारण

गर्भावस्था के समय प्राइवेट पार्ट से होने वाले डिस्चार्ज के कई कारण होते हैं। कुछ कारण सामान्य होते हैं तो कुछ को अनदेखा करना आपके लिए परेशानी खड़ी कर सकता हैं। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में हल्का हल्का स्त्राव होने के क्या कारण होते हैं।

  • प्रेगनेंसी के समय बॉडी में एस्ट्रोजन हॉर्मोन का स्तर बढ़ जाता है जिस कारण पेल्विक एरिया में ब्लड फ्लो तेजी से होता है जिसकी वजह से ऐसा होता है।
  • गर्भवती महिला को हल्का हल्का सफ़ेद पानी निकल सकता है जो की अच्छी बात है इससे महिला को संक्रमण से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण भी ऐसा हो सकता है।
  • वजाइनल इन्फेक्शन की समस्या होने के कारण भी ऐसा हो सकता है। और ऐसा होने के कारण महिला को वजाइनल डिस्चार्ज ज्यादा होने के साथ यूरिन पास करते समय दर्द, जलन, आदि भी महसूस हो सकता है।
  • यदि गर्भवती महिला यौन संक्रमित रोग से ग्रसित है तो भी महिला को ऐसा हो सकता है।
  • प्रेग्नेंट महिला को यदि प्राइवेट पार्ट से सफ़ेद चिपचिपा पदार्थ निकल रहा है तो यह एमनियोटिक बैग फटने के कारण भी हो सकता है जिसका मतलब होता है की आपको लेबर पेन शुरू होने वाली है। और समय से पहले ऐसा होना समय पूर्व प्रसव का संकेत देता है।

प्रेगनेंसी में पानी जैसा स्त्राव होने की समस्या से बचाव के उपाय

यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला को सफ़ेद पानी आम कारणों की वजह से निकल रहा है तो अच्छी बात है क्योंकि इससे महिला के शरीर से विषैले पदार्थ निकलते हैं। साथ ही इससे महिला को संक्रमण से सुरक्षित रहने में भी मदद मिलती है। सफ़ेद डिस्चार्ज की समस्या होने पर महिला को केवल प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई रखनी चाहिए और सूती अंडरवियर पहननी चाहिए।

लेकिन यदि महिला को स्त्राव में बदबू, स्त्राव के रंग में बदलाव, तेजी से स्त्राव महसूस होता है, यूरिन पास करते समय यदि कोई दिक्कत होती है तो महिला को जल्दी से जल्दी डॉक्टर से मिलना चाहिए। ताकि यदि कोई परेशानी हो तो जल्दी से जल्दी उस समस्या का समाधान हो सके।

तो यह है प्रेगनेंसी में हल्का हल्का स्त्राव होने के कारण व् उस समस्या से बचने के उपाय, यदि आप भी माँ बनने वाले हैं तो स्त्राव को देखकर घबराएं नहीं। और यदि कोई असहज लक्षण महसूस हो या कुछ समझ नहीं आ रहा हो तो जल्दी से जल्दी डॉक्टर से मिलें। ताकि आपको और आपके होने वाले बच्चे को कोई भी दिक्कत नहीं हो।

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पीरियड्स की डेट आगे पीछे करने के क्या तरीके हैं?

मासिक धर्म एक नेचुरल प्रक्रिया है जो महिलाओं को होती है। और यह हर महीने अठाइस दिन के चक्र पर महिलाओं व् लड़कियों को होती है। कुछ महिलाओं को पीरियड्स दो चार दिन आगे पीछे भी हो सकते हैं और इसमें घबराने की कोई बात नहीं होती है। क्योंकि ऐसा होना बहुत ही आम बात होती है। पीरियड्स के दौरान हेवी ब्लीडिंग, पेट व् पीठ में दर्द, जाँघों में दर्द जैसी शारीरिक परेशानियां भी हो सकती है।

ऐसे में यदि कभी महिला को किसी शादी या किसी जरुरी प्रोग्राम में जाना हो, महिला के घर में धर्म कर्म का काम हो तो पीरियड्स होने की वजह से महिला को दिक्कत होती है। ऐसे में इस परेशानी से बचाव के लिए महिलाएं पीरियड्स को दो चार दिन आगे पीछे कर सकती है। और इसके लिए मार्किट में कुछ दवाइयां भी मिल जाती है। लेकिन इन दवाइयों के कारण महिला के शरीर में हार्मोनल असंतुलन हो सकता है।

जिसके कारण आपको बाद में पीरियड्स से जुडी परेशानी होने का खतरा भी हो सकता है। ऐसे में दवाइयों का इस्तेमाल करने से अच्छा है महिला घरेलू तरीकों को ट्राई करें, इससे महिला को इस परेशानी से निजात भी मिल जाता है और किसी तरह की दिक्कत भी नहीं होती है। तो आइये अब इस आर्टिकल में जानते हैं की महिला पीरियड्स को आगे पीछे करने के लिए क्या कर सकती है।

शारीरिक श्रम

यदि आप चाहती है की आपको जल्दी पीरियड्स आ जाये तो इसके लिए आपको ज्यादा शारीरिक श्रम करना चाहिए जैसे की ज्यादा व्यायाम करें, भागादौड़ी वाला काम ज्यादा करें, आदि। लेकिन यदि आप चाहती है की आपको पीरियड्स थोड़ा देरी से आएं तो आपको ज्यादा भागादौड़ी नहीं करनी चाहिए, ज्यादा शारीरिक श्रम नहीं करना चाहिए, आदि।

मसालेदार आहार

ऐसा माना जाता है की यदि आप मसालेदार आहार का सेवन करती है तो इससे आपको पीरियड्स जल्दी आने की सम्भावना रहती है। ऐसे में जल्दी पीरियड्स लाने के लिए आप अपने खाने में ज्यादा मिर्च मसालों का इस्तेमाल करें। लेकिन यदि आप चाहती है की आपको पीरियड्स जल्दी नहीं हो तो इसके लिए आपको मिर्च मसाले वाले खाने से परहेज करना चाहिए।

सिरका

पीरियड्स को तीन से चार दिन तक टालने के लिए आप सिरका का सेवन भी कर सकती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप एक गिलास पानी में तीन से चार चम्मच सिरका डालकर पीएं। ऐसा दो तीन दिन तक करते रहें और एक दिन में दो से तीन बार पीएं इससे आपको पीरियड्स लेट आएंगे। लेकिन ध्यान रखें की सिरका पीने में बिल्कुल भी अच्छा नहीं होता है तो इस बात का पहले ही ध्यान रखें।

खान पान का ध्यान

यदि आप चाहती हैं की आपके पीरियड्स जल्दी आएं तो आप अपनी डाइट में उन चीजों को शामिल करें जिनकी तासीर गर्म होती है। जैसे की ड्राई फ्रूट्स, तिल, खजूर, अनानास, पपीता, गुड़, अजवाइन, रेड मीट, डार्क चॉकलेट, अदरक आदि। और यदि आप चाहती है की आपके पीरियड्स देरी से आएं तो इन चीजों का सेवन बिल्कुल भी नहीं करें। और इन सभी खाद्य पदार्थों का सेवन या तो आप पीरियड्स की डेट आने से दो हफ्ते पहले बंद कर दें या इनका सेवन भरपूर मात्रा में करें।

निम्बू

पीरियड्स देरी से लाने के लिए निम्बू का सेवन करना भी बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए आप अपने खाने, सलाद में निम्बू का इस्तेमाल करें साथ ही निम्बू को पानी में मिलाकर भी पीएं। निम्बू के अलावा आंवला, संतरा, आदि खट्टे फलों का सेवन भी आपकी इस परेशानी से निपटने में फायदेमंद होता है।

चने की दाल

यदि आप चाहती है की आपको पीरियड्स लेट आएं तो इसके लिए चने की दाल का सेवन करना आपके लिए बेहतरीन उपाय है। इसके इस्तेमाल के लिए आप अपनी पीरियड्स की डेट आने के एक हफ्ते पहले ही थोड़ी सी चने की दाल को भून लें, उसके बाद उसका पाउडर बना लें। फिर एक हफ्ता रोजाना थोड़ा सा पाउडर लें और उसे गर्म पानी में मिलाएं और सूप की तरह खाएं।

अजवाइन

एक कप पानी में आधा चम्मच अजवाइन उबालकर उसका सेवन दिन में दो से तीन बार करें। इसके अलावा दिन में एक या दो बार अजवाइन वाली चाय पीएं। ऐसा करने से आपके पीरियड्स देरी से आते हैं।

तो यह हैं कुछ उपाय जिन्हे ट्राई करने से आपको पीरियड्स को देरी से या समय से पहले लाने में मदद मिलती है। यदि आप भी कभी चाहती हैं की आपको पीरियड्स जल्दी आएं या लेट आएं तो आप भी इन टिप्स को ट्राई कर सकती है।

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सिजेरियन डिलीवरी हुई है या होने वाली है? तो इन बातों का ध्यान रखें

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गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं को पहले से ही बता दिया जाता है की उनकी डिलीवरी सिजेरियन होगी। तो कुछ गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी के समय कुछ ऐसे कॉम्प्लीकेशन्स हो जाते हैं जिनकी वजह से महिला की डिलीवरी सिजेरियन करनी पड़ती है। ऐसे में सिजेरियन डिलीवरी होने वाली है या महिला सिजेरियन डिलीवरी से बच्चे को जन्म दे चुकी है तो ऐसे में महिला को किन- किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको बताने जा रहे हैं।

ऑपरेशन से डिलीवरी होनी है तो रखें इन बातों का ध्यान

गर्भावस्था के दौरान माँ या बच्चे दोनों में से किसी एक को भी यदि दिक्कत होती है, गर्भ में एक से ज्यादा शिशु होते हैं, या अन्य कोई परेशानी होती है तो डॉक्टर्स महिला को सिजेरियन डिलीवरी करवाने की सलाह देते हैं। ऐसे में यदि महिला की सिजेरियन डिलीवरी होने वाली है तो महिला को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

भरपूर आराम करें

महिला को कोई दिक्कत होती है तभी डॉक्टर्स महिला को ऑपरेशन करवाने की सलाह देते हैं। ऐसे में जब तक महिला की डिलीवरी हो नहीं जाती है तब तक महिला को भरपूर आराम करना चाहिए।

लापरवाही से बचें

यदि आपका प्रसव सिजेरियन होने वाला है तो महिला को जब तक प्रसव हो नहीं जाता है। तब तक अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। और छोटी से छोटी लापरवाही नहीं करनी चाहिए जैसे की व्यायाम नहीं करें, यात्रा नहीं करें, शारीरिक श्रम नहीं करें, ज्यादा देर तक खड़ी न रहें, गलत पोजीशन में न सोएं, खान पान में गलती नहीं करें, आदि।

शारीरिक रूप से रहें स्वस्थ

खान पान का महिला अच्छे से ध्यान रखें ताकि महिला शारीरिक रूप से मजबूत रहें और डिलीवरी के समय महिला को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो।

तनाव नहीं लें

कुछ महिलाएं जो नहीं चाहती हैं की उनका प्रसव सिजेरियन तरीके से हो वो महिलाएं ऐसा सुनकर तनाव में आ सकती है। लेकिन महिला को तनाव बिल्कुल नहीं लेना चाहिए। क्योंकि तनाव लेने के कारण महिला की मुश्किलें कम नहीं होती हैं बल्कि बढ़ जाती है।

डॉक्टर से राय लेते हैं

यदि महिला की सिजेरियन डिलीवरी होने वाली है तो महिला को समय समय पर डॉक्टर से जांच करवाते रहना चाहिए ताकि आपको अपनी शारीरिक स्थिति का पता चलता रहे जिससे आपको और आपके होने वाले बच्चे को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो।

सिजेरियन डिलीवरी होने के बाद महिला इन बातों का ध्यान रखें

जिन महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी हुई है उन महिलाओं को जल्दी से जल्दी फिट होने के लिए किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। आइये जानते हैं:-

टांकों का ध्यान रखें

ऑपरेशन से बच्चे का जन्म होने पर महिला को टाँके लगाएं जाते हैं। ऐसे में महिला को उन टांकों का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। जैसे की उन पर रोजाना दवाई लगानी चाहिए, पानी नहीं पड़ने देना चाहिए, टांको के आस पास की सफाई का ध्यान रखना चाहिए ताकि इन्फेक्शन नहीं हो, आदि। क्योंकि महिला के घाव जितना जल्दी भरते हैं उतना जल्दी महिला को थोड़ा आराम मिलता है।

मैटरनिटी बेल्ट का इस्तेमाल करें

सिजेरियन डिलीवरी होने के बाद महिला को उठने बैठने में ज्यादा दिक्कत महसूस हो सकती है। ऐसे में महिला को मैटरनिटी बेल्ट का इस्तेमाल करना चाहिए। क्योंकि इस बेल्ट को पेट पर बाँधने से महिला को उठते बैठते समय कम दिक्कत होती है। साथ ही शिशु को उठाने में भी महिला को कोई परेशानी नहीं होती है। हो सकता है शुरुआत में आपको बेल्ट का इस्तेमाल करने में दिक्कत हो लेकिन धीरे धीरे यह ठीक हो जाता है।

साफ़ सफाई का ध्यान रखें

ऑपरेशन से बच्चे को जन्म देने के बाद महिला को ब्लीडिंग भी अधिक होती है। ऐसे में महिला को प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए क्योंकि यदि महिला ऐसा नहीं करती है तो इससे इन्फेक्शन का खतरा रहता है। साथ ही हर छह घंटे में पैड बदलना चाहिए और यदि महिला को बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो रही होती है तो महिला को एक बार डॉक्टर से भी राय लेनी चाहिए। इसके अलावा यदि महिला को पेट पीठ में दर्द हो तो महिला सिकाई भी कर सकती है।

खान पान का ध्यान रखें

सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला को खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि महिला को जल्द से जल्द ठीक होने में मदद मिल सकें। लेकिन सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला को जब तक टाँके अच्छे से ठीक नहीं हो जाते तब तक महिला चिकनी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे टांकों को ठीक होने में समय लगता है।

आराम करें भरपूर

डिलीवरी के बाद महिला को जितना खान पान का ध्यान रखना होता है उतना ही आराम भी करना होता है। और डिलीवरी के बाद तो महिला जितना ज्यादा आराम करती है उतना ही जल्दी महिला को स्वस्थ होने में मदद मिलती है।

ज्यादा जोर नहीं लगाएं

ऑपरेशन से बच्चे को जन्म देने के बाद महिला एक बात का ध्यान रखें की महिला जब बाथरूम में जाती है तो ज्यादा जोर नहीं लगाएं। क्योंकि इसके कारण टांकों में दर्द होने की समस्या हो सकती है। और महिला को पेट सम्बन्धी समस्या न हो इसके लिए महिला को फाइबर युक्त डाइट लेनी चाहिए इससे पाचन क्रिया बेहतर रहती है और महिला को कोई दिक्कत नहीं होती है।

डॉक्टर से जांच

सिजेरियन डिलीवरी होने के बाद महिला डॉक्टर से रूटीन में जांच करवाएं ताकि महिला को बाद में किसी भी तरह की दिक्कत नहीं।

तो यह हैं यदि महिला की सिजेरियन डिलीवरी हुई है या होने वाली है तो महिला को किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए उससे जुड़े कुछ बेहतरीन टिप्स। यदि आपकी भी सिजेरियन डिलीवरी हुई है या होने वाली है तो आप भी इन बातों का ध्यान रखें।

प्रेगनेंसी में अगर कोरोना हो जाये तो क्या करना चाहिए?

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आज कल जब हर तरफ कोरोना वायरस का कहर बढ़ता ही जा रहा है तो ऐसे में इस समस्या से बचाव के लिए सभी को सावधानी बरतने के साथ घर से न निकलने की सलाह दी जा रही है। खासकर छोटे बच्चे, बुजुर्ग लोग और गर्भवती महिलाओं को ज्यादा सतर्क रहने की जरुरत है। क्योंकि इन लोगो की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है जिसकी वजह से इन्हे संक्रमण होने का खतरा ज्यादा है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान कोरोना हो जाये तो क्या करना चाहिए इसके बारे में टिप्स बताने जा रहे हैं।

सबसे पहले डॉक्टर से करवाएं जांच

यदि आप प्रेग्नेंट हैं और आपको अपने शरीर में कोरोना से ग्रसित होने के लक्षण महसूस हो रहे हैं। तो आपको जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलना चाहिए और डॉक्टर जिन दवाइयों का सेवन, जिन सावधानियों का ध्यान रखने की आपको सलाह देता हैं ,उन्हें फॉलो करें। ताकि आपको जल्द से जल्द इस समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा बीच बीच में डॉक्टर से बात करते रहें और अपनी हेल्थ की जानकारी देते रहें।

इम्युनिटी बढ़ाने वाले आहार खाएं

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला को कोरोना हो जाता है तो महिला को इम्युनिटी बूस्ट करने वाले फ़ूड खाने चाहिए जैसे की महिला को संतरा, दही, हरी पत्तेदार सब्जियां, ब्रोकली, लहसुन, पालक, आदि का सेवन करना चाहिए। इस तरह की डाइट लेने से गर्भवती महिला की इम्युनिटी बढ़ती है जिससे महिला को जल्द से जल्द इस समस्या से निजात मिलता है। इसके अलावा आपको डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयों का सेवन भी करते रहना चाहिए ताकि आपको स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

तनाव नहीं लें

प्रेगनेंसी के दौरान यदि आपको कोरोना हो जाता है तो इसे लेकर मानसिक रूप से बिल्कुल भी परेशान नहीं हो। क्योंकि तनाव लेने के कारण आपकी मुश्किलें कम नहीं होंगी बल्कि बढ़ जाएँगी। इसीलिए यदि आप प्रेग्नेंट हैं और आपको कोरोना हो गया है तो अपने आपको शारीरिक रूप से फिट रखने के साथ मानसिक रूप से फिट रखना चाहिए।

योगासन व्यायाम व् मैडिटेशन

कोरोना के चलते आप बाहर वाक के लिए व्यायाम आदि के लिए नहीं जा सकती हैं। ऐसे में घर में ही आप थोड़ी देर योगासन, व्यायाम या मैडिटेशन करें। क्योंकि इससे आपको जल्दी स्वस्थ होने में मदद मिलेगी क्योंकि इन्हे करने से आपको शारीरिक के साथ मानसिक रूप से भी फायदा मिलता है। और जब आप शारीरिक के साथ मानसिक रूप से भी स्वस्थ होती है तो आपको जल्दी से जल्दी इस समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

आराम करें भरपूर

किसी भी तरह की बीमारी होने पर शरीर काफी कमजोर हो जाता है ऐसे में गर्भवती महिला को कमजोरी नहीं हो। इसके लिए महिला को खान पान का ध्यान रखने के साथ आराम भी भरपूर करना चाहिए। क्योंकि आराम करने से आपको रिलैक्स व् फ्रेश महसूस होता है साथ ही आप फिट भी रहती है।

कोरोना से बचे रहने के लिए प्रेग्नेंट महिला इन बातों का ध्यान रखें

  • बाहर जाने से बचें।
  • संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में न आएं।
  • बार बार हाथ धोते रहें खासकर कुछ भी खाने पीने से पहले ऐसा जरूर करें।
  • भीड़भाड़ वाली जगह नहीं जाएँ।
  • खान पान का अच्छे से ध्यान रखें।
  • दोस्तों, रिश्तेदारों से मिलने की बजाय आप उनसे फ़ोन पर ही बात करें।
  • यदि चेकअप के लिए हॉस्पिटल या क्लिनिक जाना है तो आप मास्क, ग्लव्स आदि पहनकर जाएँ, हाथों को सैनिटाइज़ करते रहे, किसी भी चीज को छूने से बचें, आदि।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान कोरोना से कैसे बचा जाएँ व् कोरोना होने पर महिला को किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए उससे जुड़े कुछ टिप्स। यदि आप भी गर्भवती हैं तो आप भी इन बातों का ध्यान रखें ताकि आपको भी इन परेशानियों से बचे रहने में मदद मिल सके।

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अकेली रहने वाली प्रेग्नेंट महिला को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

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प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अकेले नहीं रहने की सलाह दी जाती है क्योंकि जब आपका परिवार आपके साथ होता है तो आपकी प्रेगनेंसी को आसान बनाने में मदद मिलती है। और जब परिवार साथ होता है तो यदि आपको कोई दिक्कत होती है, कुछ शेयर करना होता है तो आपके पास कोई होता है जो आपकी परेशानियों को हल करने में मदद मिलती है।

लेकिन कुछ केस ऐसे होते हैं जहां गर्भवती महिला को अकेले रहना पड़ता है जैसे की यदि आप अपने परिवार से बहुत दूर है, घर में कोई बड़ा नहीं है, आदि। ऐसे में गर्भवती महिला के लिए जरुरी होता है की वो अपनी केयर में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतें। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको अकेली रहने वाली गर्भवती महिला को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

मदद के लिए रखें कोई कामवाली

यदि आप प्रेग्नेंट हैं और आपके साथ कोई नहीं है तो आपको अपने लिए एक कामवाली रखनी चाहिए। जो पूरा दिन आपके साथ रहें और आपके घर का काम करने के साथ आपका भी ध्यान रखें। इसके अलावा आपको यदि कोई दिक्कत होगी तो आपको परेशानी नहीं होगी क्योंकि उस समय आपकी मदद के लिए आपकी कामवाली वहां पर होगी।

प्रेगनेंसी से जुडी जानकारी इक्कठी करें

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी से जुडी पूरी जानकारी इक्कठी कर लेनी चाहिए। जैसे की प्रेगनेंसी में क्या खाएं क्या नहीं, क्या करें क्या नहीं, किन बातों का ध्यान रखें, प्रेगनेंसी में महसूस होने वाले लक्षणों की जानकारी इक्कठी करें, आदि। यदि महिला को प्रेगनेंसी के दौरान सभी जरुरी जानकारी पता होती है तो इससे अकेले रहने पर महिला को कम परेशानी होती है, क्योंकि महिला को यह पता होता है की क्या सही है और क्या गलत है।

खान पान में न बरतें लापरवाही

जब आप अकेले होते हैं तो खाने पीने की इच्छा कम ही होती है लेकिन यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो खान पान में बिल्कुल भी लापरवाही नहीं बरतें। क्योंकि यदि आप खाना नहीं खाती है तो इसके कारण आपको दिक्कत होने के साथ गर्भ में शिशु का विकास भी अच्छे से नहीं होता है। इसीलिए अपने खाने पीने का एक रूटीन बनाएं जिससे आपको और आपके बच्चे दोनों को गर्भावस्था के दौरान स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

मैडिटेशन व् योगासन जरूर करें

गर्भावस्था के दौरान बहुत सी महिलाएं तनाव का शिकार हो सकती है और अकेली रहने वाली महिलाओं को तनाव होने का खतरा ज्यादा होता है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला तनाव का शिकार हो जाती है तो इससे माँ और बच्चे दोनों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है। इसीलिए अकेले रहने वाली प्रेग्नेंट महिला को दिन में थोड़ी देर व्यायाम, योगासन, मैडिटेशन आदि जरूर करना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से महिला को शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के साथ मानसिक रूप से भी स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

जंक फ़ूड नहीं खाएं

जब हम अकेले होते हैं तो अपने लिए खाना बनाने का मन नहीं करता है और मन करता है की खाना बाहर से मंगा कर खा लें। साथ ही जंक फ़ूड खाने की इच्छा बढ़ जाती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला जंक फ़ूड नहीं खाएं, ज्यादा तेल मसालें वाला आहार नहीं खाएं, क्योंकि ऐसी डाइट लेने से प्रेग्नेंट महिला को दिक्कत हो सकती है। साथ ही इसमें किसी तरह के पोषक तत्व नहीं होते हैं जिससे शिशु को भी नुकसान पहुँचता है।

सारा दिन सोती ही न रहें

प्रेग्नेंट महिला यदि अकेली रहती है तो महिला इस बात का ध्यान रखें की टाइम पास करने के लिए महिला सारा दिन सोती न रहे। क्योंकि जरुरत से ज्यादा सोने के कारण भी महिला की शारीरिक परेशानियां बढ़ने का खतरा रहता है। जैसे की महिला का वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ जाता, महिला चिड़चिड़ी हो जाती है, महिला को आलस ज्यादा आता है, आदि। इसके अलावा महिला को बहुत देर तक एक ही पोजीशन में बैठे भी नहीं रहना चाहिए।

किसी तरह की लापरवाही न करें

अकेले होने पर ऐसा लगता है की आप कुछ न कुछ कर लें, जैसे की घर की साफ़ सफाई, सामान खोल खोल कर देखना, आदि। लेकिन यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो आपको ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से आपको दिक्कत हो सकती है। हाँ, आप चाहे तो अपनी पसंद का कुछ हेल्दी बनाकर खा सकती है, पेंटिंग कर सकती हैं, किताबे पड़ सकती है आदि। लेकिन ऐसा कोई भी काम नहीं करें जिससे आपके शरीर पर जोर पड़े।

डॉक्टर से राय लें

जब गर्भवती महिला अकेली होती है और शरीर में महिला को कोई लक्षण असहज महसूस होता है या कुछ ऐसा होता है जो महिला को समझ नहीं आता है। तो ऐसे में महिला को डॉक्टर से बात करनी चाहिए ताकि महिला को यदि कोई दिक्कत हो तो उसका समाधान हो सके।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान अकेली रहने वाली गर्भवती महिला को रखना चाहिए। यदि महिला इन सभी टिप्स का ध्यान रखती है तो ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

रात को बिस्तर पर आपका बच्चा टॉयलेट नहीं करेगा करने होंगे यह काम

कई बच्चे होते हैं जिन्हे रात को सोते समय बीच में ही टॉयलेट निकल जाता है। बच्चों की यह आदत अच्छी तो नहीं है लेकिन छोटे बच्चों के साथ अकसर ऐसा हो जाता है। और इसमें घबराने की भी कोई बात नहीं होती है। लेकिन यदि बच्चा पांच साल की उम्र के बाद आठ साल की उम्र या इससे ज्यादा उम्र होने पर भी बीच में पेशाब कर देता है।

तो आपको इस समस्या का इलाज करना चाहिए क्योंकि इसकी वजह से आपके बच्चे को ही दिक्कत हो सकती है। आज इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे उपाय बताने जा रहे हैं जिन्हे ट्राई करने से आपको बच्चों के बीच में पेशाब करने की समस्या से निजात पाने में मदद मिलेगी। लेकिन उससे पहले इस समस्या के होने के कारण जानते हैं।

बच्चे के बीच में पेशाब करने के कारण

  • शरीर में हार्मोनल गड़बड़ी होने के कारण।
  • डर की वजह से।
  • यदि आपका बच्चा किसी बात को लेकर बहुत परेशान है।
  • आपके परिवार में यदि किसी को पहले भी यह समस्या रही हो तो आपके बच्चे को भी यह समस्या हो सकती है।
  • बच्चे के पेट में कीड़े होने के कारण।
  • सोने से पहले बहुत ज्यादा पानी का सेवन करने पर।
  • बच्चे का मूत्राशय अच्छे से विकसित न होने की वजह से या मसल्स कमजोर होने की वजह से।
  • शुगर या अन्य किसी शारीरिक बीमारी से पीड़ित होने के कारण।
  • दवाइयों का सेवन करने की वजह से।
  • बच्चा यदि बहुत गहरी नींद में सो रहा है तो भी बच्चे को पता नहीं चलता है और बच्चा बीच में यूरिन पास कर देता है।

बच्चे के बीच में टॉयलेट करने की समस्या से निजात पाने के टिप्स

यदि आपका बच्चा रात को सोने के बाद बीच में पेशाब कर देता है तो कुछ आसान टिप्स को ट्राई करने से आप इस परेशानी से निजात पा सकते हैं। जैसे की:

बच्चे के सोने वाले कमरे से ज्यादा दूर नहीं हो बाथरूम

कुछ बच्चे रात को बाथरूम दूर होने के कारण अकेले बाथरूम में जाने से डरते हैं। ऐसे में आप जिस कमरे में सोते हैं उसके पास ही बाथरूम होना चाहिए ताकि बच्चे को डर नहीं लगे। साथ ही यदि बाथरूम दूर है तो अपने बच्चे को बोलें की जब भी उसे पेशाब आये तो वो आपको बताये आप उनके साथ जाएंगी। ऐसा करने से बच्चे का डर कम होता है और इस समस्या से आपको धीरे धीरे निजात मिलता है।

शाम के बाद न दें ज्यादा पेय पदार्थ

शाम के बाद अपने बच्चे को तरल चीजें जैसे की पानी, जूस आदि का सेवन कम ही करने दें। ऐसा करने से बच्चों को कम यूरिन पास करने की इच्छा होती है। जिससे बच्चे की इस आदत को सुधारने में मदद मिलती है।

बच्चे से बात करें

यदि आपका बच्चा बीच में पेशाब करता है तो एक बार बच्चे से बात करें की कहीं आपका बच्चा डर, तनाव आदि में तो नहीं है। क्योंकि इस कारण भी आपके बच्चे को यह समस्या हो सकती है। और यदि डर या तनाव के कारण आपका बच्चा ऐसा कर रहा है तो उसे दूर करने की कोशिश करें।

बच्चों के बीच में टॉयलेट करने की आदत को सुधारने के घरेलू नुस्खें

दालचीनी: छोटे बच्चों को सब्ज़ी, पराठें आदि में थोड़ा सा दालचीनी पाउडर मिलाकर खिलाएं। ऐसा करने से बच्चे की इस आदत को छुड़वाने में मदद मिलती है।

गुड़: बच्चे को गुड़ खिलाएं, गुड़ की तासीर गर्म होती है और ठण्ड के समय ही अधिकतर बच्चों को यह समस्या होती है। गुड़ खिलाने से बच्चों की इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

जैतून का तेल: रात को सोने से पहले जैतून के तेल को गुनगुना करके बच्चे के पेट के निचले हिस्से पर मालिश करें, इससे बच्चे की इस आदत को सुधारने में मदद मिलेगी।

केला: दिन में एक या दो पके हुए केले बच्चे को खिलाएं इससे भी आपको बच्चे के बीच में पेशाब करने की समस्या से निजात मिलेगा।

सेब का सिरका: दिन में एक बार बच्चे को एक गिलास पानी में एक चम्मच सेब का सिरका मिलाकर दें। ऐसा करने से पेट में एसिड के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है जिससे बच्चे की यह आदत भी सुधरती है।

बीच में टॉयलेट करने की समस्या होने पर डॉक्टर से कब मिलें?

यदि आपके बच्चे की उम्र सात साल या उससे ज्यादा है, बच्चे को पेशाब करते समय दर्द होता है, बच्चा खर्राटे बहुत ज्यादा लेता है, पेशाब के रंग में भी बदलाव हो तो आपको एक बार डॉक्टर से जरूर राय लेनी चाहिए।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिन्हे ट्राई करने से बच्चे के बीच में पेशाब करने की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। यदि आपके बच्चे को भी यह समस्या है तो आप भी इन टिप्स को ट्राई कर सकते है।

Remedies for bed wetting problem in night

नोर्मल डिलीवरी होने वाली है या हुई है तो इन बातों का ध्यान रखें?

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अधिकतर गर्भवती महिलाएं यही चाहती हैं की वो सामान्य प्रसव यानी की नोर्मल डिलीवरी से बेबी को जन्म दें। क्योंकि सामान्य प्रसव के बाद महिला जल्दी रिकवर होती है। साथ ही महिला को शारीरिक परेशानियां भी कम ही होती है। और यदि महिला नोर्मल डिलीवरी के बाद अच्छे से आराम करती है, खाती है, तो महिला जल्दी से हष्ट पुष्ट भी हो जाती है।

लेकिन ऐसा तभी होता है जब महिला डिलीवरी से पहले और बाद में अपना अच्छे से ध्यान रखती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको यदि महिला की नोर्मल डिलीवरी हुई है या होने वाली है तो महिला को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए उस बारे में बताने जा रहे हैं।

जो महिलाएं नोर्मल डिलीवरी चाहती है वो रखें इन बातों का ध्यान

यदि आप प्रेग्नेंट हैं और चाहती हैं की आपकी डिलीवरी नोर्मल हो तो आपको कुछ बातों का प्रेगनेंसी के दौरान नियमित रूप से ध्यान रखना चाहिए। तो आइये अब जानते हैं की वो टिप्स कौन से हैं।

खान पान का ध्यान

अपना खान पान बेहतर रखें, समय से खाएं, उन आहार को खाएं जिससे नोर्मल डिलीवरी में मदद मिलें, आयरन प्रोटीन कैल्शियम व् अन्य पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लें। साथ ही जंक फ़ूड डिब्बाबंद फ़ूड ज्यादा तेल मसाले वाले आहार से दूरी रखें।

एक्टिव रहें

यदि आप नोर्मल डिलीवरी चाहती है तो जितना हो सकें एक्टिव रहें, व्यायाम करें, योगा करें जिससे बॉडी को सामान्य प्रसव के लिए तैयार होने में मदद मिल सकें।

डिप्रेशन से बचें

तनाव आपकी नोर्मल डिलीवरी में बाधा डाल सकता है ऐसे में यदि आप सामान्य प्रसव चाहती है तो प्रेगनेंसी के दौरान तनाव से दूर रहें और खुश रहें।

भरपूर आराम करें

प्रेग्नेंट महिला को भरपूर आराम भी करना चाहिए इससे सभी शारीरिक क्रियाओं को अच्छे से काम करने में मदद मिलती है जिससे सामान्य प्रसव होने के चांस में वृद्धि होती है।

हाइड्रेट रहें

शरीर में पानी की कमी नहीं होने दे क्योंकि इससे माँ व् बच्चे दोनों को दिक्कत होती है। और यदि महिला भरपूर पानी का सेवन करती है तो इससे माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ रहते हैं जिससे प्रसव को आसान बनाने में मदद मिलती है।

पैरेंटल क्लास लें

आजकल ऑनलाइन या फिर वैसे ही कहीं भी आपको आसानी से पैरेंटल क्लास मिल जाती है जो आपको नोर्मल डिलीवरी कैसे होगी इसके बारे में बताते हैं तो आप वो क्लास भी ले सकती है।

नोर्मल डिलीवरी होने के बाद रखें इन टिप्स का ध्यान

यदि आपने समय प्रसव से शिशु को जन्म दिया है तो जल्द से जल्द फिट होने के लिए कुछ बातों का ध्यान जरूर रखें। जैसे की:

हेल्दी डाइट

सौंठ के लड्डू, गौंद के लड्डू, ड्राई फ्रूट्स के लड्डू, अजवाइन और घी आदि के साथ सब्जियों, दालों आदि का भरपूर सेवन करें। इसके अलावा दूध भी भरपूर पीएं। यह सभी चीजों डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में आई कमजोरी को जल्द से जल्द दूर करती है।

आराम में न बरतें लापरवाही

जल्दी फिट होने के लिए प्रेग्नेंट महिला को जितना हो सकें भरपूर आराम करना चाहिए। क्योंकि जितना ज्यादा महिला आराम करती है उतना ही जल्दी महिला को फिट होने में मदद मिलती है।

मालिश

नोर्मल डिलीवरी होने के तुरंत बाद से ही महिला मालिश करवा सकती है ऐसे में आपकी भी यदि नोर्मल डिलीवरी हुई है तो आप भी मालिश जरूर करवाएं। क्योंकि मालिश करवाने से हड्डियों, मांसपेशियों में आई कमजोरी को दूर करने में मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला जल्दी से जल्दी फिट होती है।

दवाइयां

डिलीवरी के बाद भी महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं हो और महिला जल्दी से जल्दी फिट हो जाये इसके लिए डॉक्टर्स कुछ विटामिन की दवाइयां लेने की सलाह देते हैं। डिलीवरी के बाद उन विटामिन्स का सेवन महिला को समय से करना चाहिए। ताकि महिला को जल्दी से जल्दी फिट होने में मदद मिल सकें।

साफ़ सफाई का ध्यान रखें

डिलीवरी होने के बाद प्राइवेट पार्ट व् अपने आस पास की साफ़ सफाई का महिला को अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि महिला को किसी भी तरह का इन्फेक्शन नहीं हो और महिला को जल्दी से जल्दी फिट होने में मदद मिल सकें।

पानी का भरपूर सेवन करें

डिलीवरी के बाद महिला को खूब पानी का सेवन करना चाहिए इससे महिला को कब्ज़ व् अन्य पाचन सम्बन्धी समस्याओं से नोजाय मिलने के साथ ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है। साथ ही कोशिश करें की गर्म पानी का सेवन करें या गुनगुना पानी पीएं।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान महिला को नोर्मल डिलीवरी होने के बाद व् यदि आप नोर्मल डिलीवरी चाहती हैं तो रखना चाहिए। यदि महिला इन टिप्स का ध्यान रखती है तो ऐसा करने से महिला और बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। साथ ही डिलीवरी से पहले और डिलीवरी के बाद आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है।

Tips for Normal Delivery, Health tips after Normal Delivery

शिशु के जन्म लेने से पहले ही जान लें की ब्रेस्टफीड कैसे करवाएं?

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जो महिलाएं पहली बार गर्भधारण करती है उन महिलाओं के मन में प्रेगनेंसी की शुरुआत से लेकर प्रसव तक कुछ न कुछ सवाल चलते रहते हैं। और उन सवालों को लेकर महिलाएं परेशान रहती है साथ ही कुछ महिलाएं तो तनाव में भी आ जाती है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला अपने मन में चल रहे सवालों के जवाब अपने घर के सदस्यों, इंटरनेट, डॉक्टर से ले लेती है या जो भी मन में चल रहा हो उसे शेयर करती है। तो इससे महिला की दिक्कतें कम होती है।

ऐसे ही बच्चे के जन्म के बाद ब्रेस्टफीड को लेकर महिला दिक्कत में आ सकती है। क्योंकि बच्चे को ब्रेस्टफीड कैसे करवाना है, यदि दूध अच्छे से न उतर रहा हो तो क्या करना हैं, बच्चे को दूध कितनी कितनी देर में पिलाना है, आदि के बारे में महिला को जानकारी नहीं होती है। और नवजात शिशु के लिए माँ का दूध बहुत जरुरी होता है।

ऐसे में आपको बच्चे के जन्म के बाद ऐसी कोई दिक्कत नहीं हो इसके लिए महिला को बच्चे के जन्म से पहले ही ब्रेस्टफीड के बारे में जानकारी इक्कठी कर लेनी चाहिए। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको शिशु के जन्म लेने से पहले ही ब्रेस्टफीड कैसे करवाएं इसके बारे में जानकारी देने जा रहे हैं।

गर्भवती महिला के शरीर में न हो पोषक तत्वों की कमी

डिलीवरी के बाद आपको अपनी डाइट का खास ध्यान रखने की जरुरत होती है क्योंकि आपके द्वारा ली गई डाइट आपको जल्दी स्वस्थ करने के साथ ब्रेस्टफीड में पोषक तत्वों की मात्रा भरपूर रखने में मदद करती है। साथ ही इससे बच्चे के लिए पर्याप्त मात्रा में दूध भी उतरता है। ऐसे में डिलीवरी के बाद महिला को अपनी डाइट का खास ध्यान रखना चाहिए।

बच्चे को एक ही ब्रेस्ट से न पिलायें दूध

जब आप बच्चे को दूध पिलाती है तो ध्यान रखें की एक ही ब्रेस्ट से दूध नहीं पिलायें। बल्कि दोनों तरफ से दूध पिलायें लेकिन ध्यान रखें की बच्चा अपने आप ही स्तन को छोड़ें आप उसे जबरदस्ती न छुड़वाएं। और यदि बच्चे का एक बार में एक ब्रेस्ट से दूध पीकर पेट भर जाता है तो अगली बार दूसरे ब्रेस्ट से दूध पिलायें। इससे आपको भी ब्रेस्ट में दर्द और स्तन के छोटे बड़े होने जैसी समस्या से बचे रहने में मदद मिलेगी।

आरामदायक पोजीशन में बैठे

डिलीवरी के बाद आपको उठने बैठने में दिक्कत होती है ऐसे में जब भी आप बच्चे को दूध पिलायें तो ध्यान रखें की आप आरामदायक पोजीशन में बैठें। ताकि आपको भी कोई दिक्कत नहीं हो और बच्चा को भी कोई परेशानी नहीं हो।

बच्चे को दूध पिलाते समय ध्यान रखें कुछ बातें

कुछ छोटी छोटी बातें होती है जिनका ध्यान बच्चे को दूध पिलाते समय रखना बहुत जरुरी होता है। जैसे की दूध पिलाते समय ब्रेस्ट का आगे का हिस्सा अच्छे से बच्चे के मुँह में जाना चाहिए ताकि बच्चा आराम से दूध पी सकें, ब्रेस्ट का भार बच्चे की नाक पर नहीं पड़े जिससे बच्चे को सांस लेने में दिक्कत हो, बार बार ब्रेस्ट को साफ़ नहीं करें, साफ सुथरे कपडे पहने और ऐसे कपडे पहने जिसमे न आपको दूध पिलाने में दिक्कत हो और न हो बच्चे को दूध पीने में दिक्कत हो,

बच्चे को हर दो घंटे में दूध पिलायें, यदि बच्चा दूध पीते समय खांसी कर दें तो बच्चे को दूध नहीं पिलायें, बच्चे को दूध पिलाने से पहले कुछ न कुछ तरल जरूर पीएं जैसे की दूध, जूस, नारियल पानी, दूध पिलाने के बाद बच्चे को कंधे से लगाकर डकार जरूर दिलवाएं, लेटकर बच्चे को दूध नहीं पिलायें, आदि।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिन्हे समझने से और ध्यान रखने से आपको बच्चे के जन्म के बाद उसे स्तनपान करवाने में कोई दिक्कत नहीं होती है। यदि आप भी माँ बनने वाली है तो आपको भी इस जानकारी का जरूर पता होना चाहिए ताकि जन्म के बाद आपको शिशु को अच्छे से ब्रेस्टफीड करवा सकें और आपके होने वाले बच्चे का विकास अच्छे से हो सकें।

Know how to get breastfeed before your baby is born

अपने बच्चे को जल्दी बोलना ऐसे सिखाएं?

छोटे बच्चे बोलते हुए सभी को बहुत प्यारे लगते हैं। और बच्चे का जन्म के बाद घर वालों को इस बात की बहुत ज्यादा उत्सुकता रहती है की कब उनका बच्चा बोलना शुरू करेगा? ऐसे में यदि आप चाहते हैं की आपका बच्चा जल्द से जल्द बोन लगे तो इसके लिए आपको ही मेहनत करनी पड़ेगी। क्योंकि जितना आप बच्चे की सेहत का ध्यान रखती है, जितना उसके साथ समय बिताती हैं उतना ही बच्चे का विकास बेहतर होने में मदद मिलती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको आप अपने बच्चे को जल्दी बोलना कैसे सिखाएं उस बारे में बताने जा रहे हैं।

तुतलाकर नहीं बोलें

बच्चे को बोलना सीखाने से पहले आप व् अन्य घरवाले इस बता का खास ध्यान रखें की बेशक आपको बच्चे तोतले बोलते हुए अच्छे लगते हैं। लेकिन आप कभी बच्चे से तुतलाकर बात नहीं करें क्योंकि जैसा आप बोलते हैं वैसा ही बच्चे बोलना शुरू कर देते हैं। और बाद में बच्चों की इस आदत को सुधारना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में महिला व् अन्य सभी इस बात का ध्यान रखें की बच्चे से सीधे शब्दों में बात करें।

बातें करें

छोटे बच्चों के साथ आप जितनी ज्यादा बातें करते हैं बच्चा भी उतना ही आपके साथ बोलने की कोशिश करना शुरू कर देता है। ऐसे में यदि आप चाहते हैं की आपका बच्चा जल्दी बोलना शुरू कर दें तो इस बात का ध्यान रखें की आप भी बच्चे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं और बातें करें। और केवल माँ ही नहीं बल्कि घर के अन्य सदस्य भी बच्चे के साथ बात करें इससे बच्चा जल्दी बातें करना सीखता हैं।

बच्चों से बात करते समय मुद्रा का भी ध्यान रखें

आप जब अपने बच्चे से बात करती है तो जो भी करती है तो उस दौरान अपने हाथों से इशारे क्ले रूप में या खिलौने आदि दिखाकर या उस चीज की तरफ इशारा करके बातें करें। इससे बच्चे को चीजों को समझने में आसानी होती है जिससे बच्चे छोटी छोटी चीजों के नाम लेना शुरू करता है और धीरे धीरे आपके साथ बोलने भी लगता है।

बार बार बोलें

बच्चे को जल्दो बोलना सीखाने के लिए ध्यान रखें की आप जब बच्चे से बात करते हैं तो अपनी बातों को बार बार दोहराएं इससे बच्चा भी ट्राई करता है। जिससे बच्चा जल्द से जल्द बोलना सीख जाता है।

अपने बच्चे को भी मौका दें

यदि आप अपने बच्चे को कुछ बताते हैं या सीखातें हैं तो उसके बाद बच्चे को भी जवाब देने का मौका दें जैसे की जब आप बच्चे को बताती है की यह डॉगी है तो उससे पूछे डॉगी कहाँ हैं। उसके बाद वो इशारे से या मुँह से कुछ भी बोलकर आपको यदि जवाब देता है तो इसका मतलब होता है की बच्चा आपकी बातों को समझ रहा है। ऐसे में आप तो बच्चे से बातें करें उससे समझाएं साथ ही बच्चे को भी मौका दें। ऐसा करने से भी आपका बच्चे जल्दी से जल्दी बोलना सीखता है।

बच्चा जो मांगे उसे दें और बताएं

यदि आपका बच्चा किसी चीज जैसे की कोई फल, टॉय आदि की और इशारा करता है तो आप उसे बच्चे के हाथों में दें। और उसे बताएं की यह क्या है। जैसे की यदि आपने बच्चे को सेब दिया तो एक बार से ज्यादा बताएं ये एप्पल हैं, सेब हैं आदि। इससे धीरे धीरे बच्चा साड़ी चीजों को सीखने लगता है।

कविता सुनाएँ

केवल बातों से ही नहीं बल्कि अलग अलग तरीको से बच्चे से बातें करें जैसे की बच्चे को कविता सुनाएँ और एक ही कविता को बार बार दोहराएं। इसे आपके साथ बच्चा भी कोशिश करता है और जल्दी बोलना शुरू करता है। साथ ही छोटे बच्चे इन्हे सुनकर बहुत खुश भी होते हैं।

तो यह हैं कुछ तरीके जो आपके बच्चे को जल्दी से जल्दी बोलने में मदद करते हैं। लेकिन ध्यान रखें की हर एक बच्चा एक जैसा नहीं होता है कुछ बच्चे जल्दी बोलना शुरू कर देते हैं यो कुछ बच्चे थोड़ा लेट करते हैं। ऐसे में आप कोशिश करिये लेकिन घबराइए नहीं क्योंकि आपका बच्चा भी धीरे धीरे बोलना शुरू कर देगा। लेकिन यदि डेढ़ से दो साल का होने के बाद भी आपका बच्चा कुछ भी नहीं बोल रहा है तो एक बार डॉक्टर से जरूर मिलें।

Tips to teach your child to speak early

अचानक से लेबर पेन शुरू हो जाये तो क्या करें?

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गर्भावस्था के दौरान बहुत सी ऐसी बातें होती है जिन्हे लेकर महिलाएं अचानक से परेशान हो जाती है। खासकर जो महिलाएं पहली बार माँ बन रही होती है उन्हें ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन यदि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान गर्भावस्था और प्रसव के बारे में पूरी जानकारी इक्कठी कर लेती है।

तो इससे महिला की परेशानियों को कम करने और प्रेगनेंसी के दौरान महसूस होने वाले लक्षणों को समझने में आसानी होती है। आज इस आर्टिकल में हम गर्भवती महिलाओं को यदि अचानक से लेबर पेन शुरू हो जाये तो महिला को क्या करना चाहिए उससे जुडी जानकारी देने जा रहे हैं। लेकिन उससे पहले जानते हैं की प्रसव के क्या लक्षण होते हैं।

प्रसव के लक्षण

  • पेट या पेट के निचले हिस्से में तेजी से दर्द होना।
  • पीठ में दर्द का होना जो की असहनीय हो।
  • एमनियोटिक बैग का फटना यानी की वजाइनल डिस्चार्ज अधिक होना।
  • प्राइवेट पार्ट से ब्लीडिंग होना।
  • बच्चे का भार नीचे की तरफ अधिक महसूस होना।
  • डायरिया की समस्या होना।
  • जल्दी जल्दी यूरिन पास करने की इच्छा होना।
  • जोड़ो और मांसपेशियों में अधिक खिंचाव का अनुभव होना।
  • पेट व् सीने में हल्कापन महसूस होना।
  • महिला की भावनाओं में बदलाव होना।

महिला को लेबर शुरू होने पर क्या करना चाहिए

यदि किसी महिला को अचानक से लेबर पेन शुरू हो जाता है तो महिला को क्या करना चाहिए और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। आइये अब उसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

घबराएं नहीं

यदि महिला को अचानक से पेट में तेजी से दर्द उठता है जो की महिला से सहन नहीं होता है तो इसका मतलब होता है की महिला को लेबर पेन हो रहा है। ऐसे में बेशक महिला से दर्द सहन नहीं होता है लेकिन इस दौरान महिला को अपने आप को शांत रखने की कोशिश करनी चाहिए घबराना नहीं चाहिए। क्योंकि यदि महिला ज्यादा घबरा जाती है तो इसकी वजह से महिला को दिक्कत होने का खतरा होता है।

हॉस्पिटल फ़ोन करें

जहां भी महिला की डिलीवरी होने वाली है वहां पर आप फ़ोन करें या उसी समय पास खड़े किसी भी व्यक्ति से फ़ोन करने के लिए कहें और डॉक्टर से बात करें।

किसी का इंतज़ार नहीं करें

यदि प्रेग्नेंट महिला को लेबर पेन शुरू हो रहा है तो ऐसे में महिला को घर में किसी का इंतज़ार नहीं करना चाहिए बल्कि आपके साथ जो भी है उसके साथ जल्द से जल्द हॉस्पिटल में पहुँच जाना चाहिए। क्योंकि यदि आप देरी करती है तो इसकी वजह से आपकी परेशानियां बढ़ सकती है।

आरामदायक पहनावा पहने

हॉस्पिटल जाते समय आप आरामदायक कपडे व् चप्पल पहनकर जाएँ ताकि आपको कपड़ों या चप्पल के कारण किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो। और आप आराम महसूस कर सकें।

डिलीवरी बैग साथ लेकर जाएँ

डिलीवरी का समय पास आने से पहले ही आपने जो डिलीवरी बैग तैयार किया है उसे साथ में ले लें। ताकि आपको हॉस्पिटल जाते समय किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो और आपकी जरुरत का सभी सामान आपके पास मौजूद हो।

चिल्लाएं नहीं

डिलीवरी पेन अचानक से शुरू होने पर महिला चिल्लाना नहीं शुरू करें। क्योंकि ज्यादा चिल्लाने के कारण महिला ज्यादा थक सकती है। जिसकी वजह से डिलीवरी के समय महिला की दिक्कतें बढ़ सकती है ऐसे में जितना हो सके महिला को अपने आप को शांत रखना चाहिए। और लम्बी लम्बी साँसे लेनी चाहिए। इससे महिला के दर्द को कम करने में मदद मिलती है।

हॉस्पिटल जाने के लिए आरामदायक वाहन चुने

ऐसा बिल्कुल भी नहीं है की लेबर पेन शुरू होने पर आप बाइक या स्कूटी पर हॉस्पिटल जाएँ। बल्कि आपके पास जो भी है उससे टैक्सी बुक करने के लिए कहें या आप बुक करें। क्योंकि इस दौरान थोड़ी सी भी लापरवाही आपकी परेशानी को बढ़ा सकती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जो प्रेग्नेंट महिला को अचानक से लेबर पेन के शुरू होने पर ध्यान रखने चाहिए। यदि महिला इन टिप्स का ध्यान रखती है तो ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला की दिक्कतों को कम करने और प्रसव के समय आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है।

What to do if the labor pain suddenly starts