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प्रेग्नेंट महिला को घर के यह 10 काम नहीं करने चाहिए

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गर्भावस्था के समय महिला को स्वस्थ रहने के लिए अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। साथ ही महिला को खान पान, रहन सहन का ध्यान रखने के साथ ऐसी कोई भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए जिससे गर्भवती महिला या होने वाले बच्चे को कोई भी दिक्कत हो। आज इस आर्टिकल में हम गर्भवती महिला को घर के ऐसे कौन से दस काम है जो नहीं करने चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं। क्योंकि उन कामों को करने से माँ व् बच्चे को दिक्कत हो सकती है।

भारी सामान उठाना

प्रेग्नेंट महिला को घर में मौजूद किसी भी भारी सामान जैसे की पानी की बाल्टी, राशन से भरी बाल्टी, धुले हुए कपड़ों की बाल्टी, टेबल आदि को नहीं उठाना चाहिए। क्योंकि भारी सामान उठाने के कारण प्रेग्नेंट महिला को कमर, पेट, जोड़ो में दर्द की समस्या हो सकती है। साथ ही प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में भारी सामान उठाने के कारण महिला का गर्भपात होने का खतरा भी रहता है।

बार बार झुकने वाले काम

झाड़ू लगाना, नीचे से कुछ उठाना, बैठकर कपडे धोना, पोछा लगाना, आदि के लिए बार बार झुकना पड़ता है। साथ ही इसकी वजह से पेट पर भी दबाव पड़ता है। जिसके कारण महिला व् बच्चे को दिक्कत हो सकती है ऐसे में महिला को ऐसा भी कोई काम नहीं करना चाहिए। आपको इन कामों में मदद के लिए किसी दूसरे की मदद जरूर लेनी चाहिए।

लम्बे समय के लिए खड़े रहना

गर्भवती महिला को घर में ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिसमे लम्बे समय तक महिला को खड़े रहना पड़े। जैसे की महिला को किचन का काम करते समय ज्यादा देर तक खड़े रहना पड़ता है। महिला को ऐसे काम नहीं करने चाहिए यदि करना भी है तो बीच में बैठते रहना चाहिए। क्योंकि ज्यादा देर तक खड़े रहने के कारण भी महिला को सूजन, जोड़ो में दर्द जैसी समस्या हो सकती है।

सीढ़ियां चढ़ना

प्रेग्नेंट महिला को घर में बार बार सीढ़ियां भी नहीं चढ़ना चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी में ज्यादा सीढ़ियां चढ़ने के कारण गर्भवती महिला को परेशानी का सामना करना पड़ता है। यदि आपका घर ऊपर है तो आप नीचे कमा करने जाने के लिए किसी न किसी की मदद लें ताकि आपको किसी तरह की दिक्कत नहीं हो।

टॉयलेट साफ़ करना

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान टॉयलेट साफ़ करने से भी बचना चाहिए। क्योंकि टॉयलेट साफ़ करते समय प्रेग्नेंट महिला के पेट पर बहुत अधिक जोर पड़ता है क्योंकि टॉयलेट साफ़ करने के लिए बार बार झुकना पड़ता है। जिसकी वजह से महिला को दिक्कत हो सकती है।

घर में पालतू जानवर का काम

यदि प्रेग्नेंट महिला के घर में कोई पालतू जानवर है तो महिला को उसका काम भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसके कारण इन्फेक्शन होने का खतरा होता है।

केमिकल युक्त चीजों का इस्तेमाल

प्रेग्नेंट महिला को घर का काम करने में केमिकल युक्त चीजों का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए जैसे की पोछा लगाने के लिए, कपड़ों को धोने के लिए जिन चीजों का इस्तेमाल किया जाता है उनका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी के समय स्किन सेंसिटिव हो जाती है जिसकी वजह से इन्फेक्शन या फिर स्किन एलर्जी जैसी समस्या होने का खतरा रहता है।

गैस के पास ज्यादा देर तक खड़े रहना

गर्भवती महिला को गैस के पास खड़े रहकर ज्यादा देर तक काम नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से शरीर का तापमान बढ़ सकता है जिसकी वजह से महिला को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।

मशीन में से धुले हुए कपडे निकालना

गर्भवती महिला को मशीन में से पानी से भरे हुए धुले कपडे भी नहीं निकालने चाहिए बल्कि यह काम किसी और से करवाना चाहिए। क्योंकि पानी से भरे होने के कारण उन कपड़ों में वजन ज्यादा होता है और ज्यादा वजन उठाना गर्भवती महिला की सेहत पर गलत असर डाल सकता है।

छोटे बच्चों को गोदी में उठाना

यदि गर्भवती महिला का खुद का छोटा बच्चा है या घर में कोई और छोटा बच्चा है तो प्रेग्नेंट महिला को उसे ज्यादा देर के लिए नहीं उठाना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला को कमर में दर्द व् अन्य परेशानियां होने का खतरा होता है। और बच्चा यदि ज्यादा छोटा नहीं है तो महिला को उसे बिल्कुल भी गोदी में नहीं उठाना चाहिए।

तो यह हैं घर के कुछ काम जो प्रेग्नेंट महिला को नहीं करने चाहिए, क्योंकि इन्हे करने से प्रेग्नेंट महिला व् होने वाले बच्चे को दिक्कत हो सकती है। साथ ही महिला को कुछ भी करने या खाने से पहले उसकी अच्छे से जानकारी लेनी चाहिए। ताकि उसकी वजह से माँ या बच्चे को कोई दिक्कत नहीं हो।

Pregnant women should not do these household work

डिलीवरी के बाद होने वाले दर्द की समस्या से ऐसे पाएं छुटकारा

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प्रेग्नेंट महिला जब एक नन्ही जान को इस दुनिया में लाती है तो यह केवल एक नन्हे शिशु का जन्म नहीं होता है बल्कि इस दौरान महिला का भी नया जन्म होता है। और इस दौरान महिला का शरीर काफी कमजोर भी हो जाता है जिससे महिला धीरे धीरे उभरती है और फिट होती है। साथ ही डिलीवरी के बाद भी महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है।

जैसे की महिला को ब्लीडिंग बहुत ज्यादा होती है, उठने बैठने में परेशानी होती है, बॉडी पेन की समस्या हो सकती है, आदि। आज इस आर्टिकल में हम आपको डिलीवरी के बाद महिला को बॉडी पेन की समस्या से निजात पाने के लिए क्या क्या करना चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

खान पान का रखें ध्यान

बच्चे के जन्म के बाद महिला को कमर, पेट, सिर, जोड़ो आदि में दर्द की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। और इसका कारण महिला के शरीर में आई कमजोरी होती है और इस कमजोरी को दूर करने के लिए महिला के खान पान का बेहतर होना बहुत जरुरी होता है। ऐसे में महिला यदि डिलीवरी के बाद खान पान का पूरा ध्यान रखती है।

जैसे की ड्राई फ्रूट सौंठ अजवाइन मेथी आदि के लड्डू का सेवन करती है, दूध पीती है, हरी सब्जियां खाती है, दालों का भरपूर सेवन करती है, आदि। तो यह सभी चीजें महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी पूरी करती है साथ ही महिला के शरीर में आई कमजोरी को दूर करती है। जिससे महिला को डिलीवरी के बाद होने वाले दर्द की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

मालिश

यदि आपकी नार्मल डिलीवरी हुई है और टाँके नहीं लगे है तो डिलीवरी के तुरंत बाद से ही आपको मालिश करवानी चाहिए। क्योंकि मालिश करवाने से शरीर की मांसपेशियों, और हड्डियों को मजबूती मिलती है, महिला को आराम महसूस होता है, जिससे शरीर में आई कमजोरी दूर होती है और शरीर में दर्द से आराम मिलता है। लेकिन यदि आपको डिलीवरी के बड़ा टाँके लगे हैं या आपकी सिजेरियन डिलीवरी हुई है तो आपको डिलीवरी के बाद डॉक्टर से पूछकर ही मालिश करवानी चाहिए।

भरपूर आराम

बच्चे के जन्म के बाद शरीर में होने वाले दर्द की समस्या से आराम के लिए लिए जरुरी है की महिला जितना आराम कर सकती है उतना करें। क्योंकि महिला जितना आराम करती है उतना ही महिला के शरीर में एनर्जी आती है, महिला को दर्द से आराम मिलता है साथ ही महिला जल्द से जल्द रिकवर करती है।

न डालें शरीर पर जोर

डिलीवरी के बाद महिला जब तक अच्छे से फिट नहीं हो जाये तब तक महिला को ऐसा कोई भी काम नहीं करना चाहिए जिससे शरीर पर ज्यादा जोर पड़े। जैसे की एक्सरसाइज नहीं करें, भारी सामान नहीं उठायें आदि। क्योंकि इन सभी कामों को करने से आपकी दिक्कत बढ़ सकती है। ऐसे में इन परेशानियों से बचाव के लिए महिला को कोई भी ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिससे शरीर पर जोर पड़े।

सिकाई

बच्चे के जन्म के बाद होने वाली दर्द की समस्या से बचे रहने के लिए महिला को सिकाई करनी चाहिए। जैसे की सिकाई करने के लिए गर्म पानी की बोतल का इस्तेमाल कर सकती है। सिकाई करने से भी डिलीवरी के बाद महिला को शरीर में होने वाले दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ उपाय जिन्हे ट्राई करने डिलीवरी के बाद होने वाले बॉडी पेन की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। यदि आपको भी बच्चे के जन्म के बाद यह समस्या हो रही है तो आप भी इन टिप्स को ट्राई कर सकते हैं।

How to get rid of pain after delivery

प्रेग्नेंट महिला को आठवें और नौवें महीने इस पोजीशन में सोना चाहिए

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प्रेग्नेंट महिला को खान पान का भरपूर ध्यान रखने के साथ इस बात का ध्यान भी अच्छे से रखना चाहिए की महिला अपनी नींद भी अच्छे से लें। क्योंकि खान पान अच्छा होने के साथ महिला जितना ज्यादा आराम करती है उतना ही गर्भावस्था के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है। साथ ही प्रेग्नेंट महिला फ्रैश महसूस करती है और एक्टिव रहती है।

इसके अलावा महिला को भरपूर नींद लेने के साथ महिला किस पोजीशन में सो रही है उस बात का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि गलत पोजीशन में सोने के कारण गर्भवती महिला और गर्भ में बच्चे दोनों को दिक्कत महसूस हो सकती है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको गर्भावस्था के दौरान महिला को किस पोजीशन में सोना चाहिए उस बारे में भी बताने जा रहे हैं।

प्रेग्नेंट महिला को आठवें और नौवें महीने किस पोजीशन में सोना चाहिए?

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान आठवें और नौवें महीने में सोते समय सीधा होकर नहीं सोना चाहिए क्योंकि इसके कारण बच्चे का पूरा भार पीठ पर पड़ जाता है जिसकी वजह से महिला को कमर दर्द की समस्या हो जाती है। साथ ही सीधा होकर सोने से साँस लेने में तकलीफ, लौ ब्लड प्रैशर, पाचन तंत्र से सम्बंधित समस्या आदि हो सकती है।

पेट के बल भी महिला को नहीं सोना चाहिए क्योंकि इससे पेट पर दबाव पड़ता है और गर्भ में शिशु असहज महसूस करता है। ऐसे में महिला दाईं या बाई और करवट लेकर सो सकती है। लेकिन जब बात प्रेगनेंसी में सोने की सबसे बेहतरीन पोजीशन की हो तो महिला को बाईं और करवट लेकर, अपने पैरों को मोड़कर और उनके बीच में तकिया लगाकर सोना चाहिए।

क्योंकि यदि महिला इस पोजीशन में सोती है तो महिला को ऐसे सोने से किसी तरह की शारीरिक परेशानी नहीं होती है, महिला को नींद अच्छे से आती है, गर्भनाल की ,मदद से शिशु तक ब्लड ऑक्सीजन पोषक तत्व सभी अच्छे से पहुँचते हैं। इसीलिए यदि प्रेग्नेंट महिला सोती है तो महिला को बाईं और करवट लेकर ही सोना चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में गर्भवती महिला के सोने की सही पोजीशन के बारे में टिप्स, तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आप भी इसी पोजीशन में सोएं। ताकि आपको सोते समय किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

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शिशु को चाय पिलाने से यह नुकसान होता है?

चाय बहुत से लोगो को पसंद होती है साथ ही चाय पीने से कई लोग मानते हैं की उनका मूड रिफ्रेश होता है, थकान दूर होती है, आदि। लेकिन जब बात बच्चों की हो तो क्या बच्चों को चाय पिलाना सही होता है? तो इसका जवाब है नहीं, छोटे बच्चों को बहुत से लोग दूध में मिलाकर या वैसे चम्मच में साथ थोड़ी थोड़ी चाय पीला देते है। जो गलत बात होती है क्योंकि छोटे बच्चों को चाय पिलाने से उन्हें बहुत से नुकसान पहुँच सकते हैं। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको बच्चों को चाय पीने से कौन- कौन से नुकसान होते हैं उस बारे में बताने जा रहे हैं।

बच्चे के विकास में आती है कमी

छोटे बच्चों को चाय पिलाने से बच्चे के विकास में कमी आती है और बच्चे का विकास उस तरह से नहीं हो पाता है जिस तरह से होना चाहिए जैसे की छोटी उम्र में चाय पीने से हड्डियों पर बुरा असर पड़ता है क्योंकि कैफीन के कारण हड्डियां कैल्शियम को अच्छे से अवशोषित नहीं कर पाती है। और इसका कारण चाय में कैफीन की अधिकता होती है। चाय के साथ कॉफ़ी का सेवन बच्चे को करवाने से भी यह दिक्कत होती है।

अनिंद्रा की समस्या

छोटे बच्चों को चाय पिलाने से बच्चों की नींद अच्छे से नहीं आती है और भरपूर नींद न लेने की वजह से बच्चे की सेहत और विकास दोनों पर बुरा असर पड़ता है।

बच्चा हो जाता है चिड़चिड़ा

शिशु को चाय पिलाने से बच्चे की नींद पूरी नहीं होती है, साथ ही कुछ बच्चों को चाय पीने से गैस की समस्या हो जाती है जिसके कारण बच्चे को पेट सम्बन्धी या सेहत सम्बन्धी समस्या हो सकती है। जिसकी वजह से आपका बच्चा चिड़चिड़ा हो सकता है।

दिमाग के विकास पर पड़ता है असर

यदि आप अपने छोटे बच्चे को चाय पिलाती है तो इसकी वजह से बच्चे के शारीरिक विकास के साथ बच्चे के दिमाग के विकास पर भी असर पड़ता है। जिसकी वजह से आपका बच्चा थोड़ा स्लो हो सकता है।

बच्चों की मांसपेशियां होती है कमजोर

चाय का सेवन करने से बच्चों की मांसपेशियों के विकास पर भी बुरा असर पड़ता है जिसकी वजह से बच्चों की मांसपेशियां कमजोर हो जाती है। साथ ही यदि मांसपेशियों का विकास अच्छे से नहीं होता है तो इस वजह से बच्चे की हाइट भी अच्छे से नहीं बढ़ती है साथ ही अन्य शारीरिक परेशानियां होने का खतरा भी बच्चे को होता है।

डाइबिटीज़

छोटे बच्चों को चाय का सेवन करवाने से उनके ब्लड में शुगर लेवल बढ़ सकता है जिसकी वजह से छोटी उम्र में ही आपका बच्चा मधुमेह जैसी बीमारी का शिकार हो सकता है।

वजन

शिहु को यदि आप चाय पिलाती है तो इसके कारण आपके बच्चे का वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ सकता है। और वजन के जरुरत से ज्यादा बढ़ने के कारण आपके बच्चे को बीमारियां लगने का खतरा अधिक होता है।

दांतों में सड़न

छोटे बच्चों को चाय का सेवन करवाने से बच्चे के दांतों पर भी बुरा असर पड़ सकता है जिसकी वजह से दांतों में कीड़े लगने या दांतों में सड़न होने जैसी समस्या बच्चों को हो सकती है।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो बच्चों को चाय पिलाने से हो सकते हैं। तो ऐसे में यदि आप भी अपने बच्चों को चाय पिलाते हैं तो आपको ऐसा नहीं करना चाहिए। साथ ही बच्चों को पोषक तत्वों से भरपूर डाइट देनी चाहिए। ताकि बच्चे का विकास बेहतर तरीके से हो सकें।

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प्रेगनेंसी के 10 खतरनाक संकेत?

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प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बहुत सी परेशानियां हो सकती है जैसे की उल्टी होना, बॉडी पेन होना, सिर दर्द, चक्कर आना, कमजोरी व् थकान महसूस होना, मूड स्विंग होना, तनाव होना, आदि। और गर्भावस्था के दौरान थोड़ी बहुत शारीरिक परेशानी होना बहुत आम बात होती है। क्योंकि गर्भाधारण के बाद से ही महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव हो रहे होते हैं, महिला का वजन बढ़ता है जिसकी वजह से महिला को यह दिक्कतें हो सकती है।

लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों के बारे में महिला को पूरी जानकारी रखनी चाहिए। क्योंकि गर्भावस्था के दौरान यदि महिला को कोई दिक्कत ज्यादा होती है और महिला उसे अनदेखा करती है तो इसकी वजह से महिला व् बच्चे को दिक्कत हो सकती है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे दस खतरनाक संकेत बताने जा रहे हैं जो प्रेग्नेंट महिला को यदि महसूस हो तो महिला को उसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।

ब्लीडिंग की समस्या

गर्भावस्था की शुरुआत में, प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाने पर, महिला की वजाइनल जांच होने पर प्रेग्नेंट महिला को स्पॉटिंग की समस्या हो सकती है। लेकिन इसके अलावा यदि महिला को ब्लीडिंग की समस्या हो और ब्लीडिंग ज्यादा हो रही हो या थोड़ी थोड़ी हो रही हो लेकिन एक दिन तक या उससे ज्यादा हो तो महिला को उसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग की समस्या का अधिक होना गर्भपात का संकेत होता है।

धुंधला दिखाई देना

यदि गर्भवती महिला को धुंधला दिखाई देने की समस्या होतो है तो भी महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसा होने का कारण हाई ब्लड प्रैशर या गेस्टेशनल शुगर हो सकता है। जिसे अनदेखा करने के कारण महिला को ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।

पेट या पीठ में दर्द

गर्भवती महिला को पेट में हल्का फुल्का पेट या पीठ में दर्द महसूस होना बहुत आम बात होती है। लेकिन यदि महिला को बहुत तेज पेट या पीठ में दर्द महसूस हो तो महिला के लिए यह खतरे का संकेत हो सकता है।

फीवर (बुखार)

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर का तापमान थोड़ा बढ़ सकता है लेकिन यदि महिला के शरीर का तापमान ज्यादा बढ़ जाता है। और महिला को एक या उससे ज्यादा दिन तक बुखार होता है तो महिला को तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए क्योंकि शरीर का तापमान ज्यादा बढ़ने की वजह से गर्भपात होने का खतरा रहता है। साथ ही डॉक्टर के बिना बताएं महिला को किसी भी दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए।

सूजन

प्रेगनेंसी के समय महिला को पैरों में सूजन की समस्या होना आम बात होती है। लेकिन यदि महिला को पैरों के साथ हाथों, मुँह पर भी सूजन हो जाये साथ ही सूजन बहुत ज्यादा हो। तो महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि यह गर्भवती महिला के हाई ब्लड प्रैशर या अन्य किसी शारीरिक समस्या से पीड़ित होने के लक्षण होते हैं। जिन्हे नज़रअंदाज़ करने से महिला की मुश्किलें बढ़ सकती है।

बच्चे की हलचल में कमी

प्रेगनेंसी के पाचंवें महीने में ज्यादातर शिशु गर्भ में हलचल करना शुरू कर देते हैं। और शिशु का अच्छे से हलचल करना गर्भ में शिशु के बेहतर विकास की और इशारा करता है। लेकिन यदि गर्भ में पल रहा शिशु हलचल नहीं करें और एक से डेढ़ घंटे तक बहुत कोशिश करने के बाद भी आपको शिशु की हलचल महसूस नहीं हो तो महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह गर्भ में शिशु से सम्बंधित खतरे का संकेत होता है।

समय से पहले डिलीवरी पेन होना

यदि गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही या तीसरी तिमाही में लेबर पेन शुरू हो जाता है। तो इसकी वजह से प्रीमेच्योर डिलीवरी होती है जो गर्भ में शिशु के वजन में कमी, शिशु के विकास में कमी जैसी समस्या होती है। ऐसे में गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के समय किसी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। साथ ही अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि महिला को ऐसी कोई भी समस्या नहीं हो।

वजाइनल डिस्चार्ज

प्रेगनेंसी के समय महिला को वजाइना से थोड़ा बहुत सफ़ेद पानी आना आम बात होती है। लेकिन यदि महिला को समय से पहले वजाइनल डिस्चार्ज अधिक होता है तो यह पानी की थैली फटने की तरफ इशारा करता है। और डिलीवरी का समय पास आने से पहले वजाइनल डिस्चार्ज अधिक होना शिशु के लिए खतरा होता है।

सफ़ेद पानी की समस्या

गर्भावस्था के दौरान थोड़ा बहुत सफ़ेद पानी निकलना बहुत अच्छी बात होती है क्योंकि यह बच्चे को संक्रमण से सुरक्षित रखने में मदद करता है। लेकिन यदि महिला को सफ़ेद पानी अधिक आये, पानी में बदबू हो या पानी का रंग अलग सा हो तो ऐसा होना वजाइनल इन्फेक्शन का संकेत होता है। ऐसे में महिला को जितना हो सके इसे अनदेखा न करते हुए डॉक्टर से मिलना चाहिए क्योंकि इस समस्या के बढ़ने के कारण महिला की दिक्कत भी बढ़ सकती है।

सिर दर्द की समस्या

बहुत सी महिलाओं को प्रेगनेंसी के समय थोड़ा बहुत सिर में दर्द की समस्या हो सकती है। लेकिन यदि महिला की यह परेशानी अधिक हो और सिर दर्द बहुत ज्यादा होता हो साथ ही चक्कर व् बेहोशी की समस्या भी हो तो महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा होना हाई ब्लड प्रैशर की समस्या होने का संकेत होता है।

तो यह हैं कुछ संकेत जो यदि प्रेग्नेंट महिला को महसूस हो तो महिला को उसे बिल्कुल भी अनदेखा नहीं करने चाहिए। क्योंकि यह सभी लक्षण माँ व् बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक होते हैं।

चौबीस घंटे में प्रेग्नेंट महिला को कितना पानी पीना चाहिए?

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जिस तरह पोषक तत्वों से भरपूर आहार आपकी सेहत के लिए बहुत जरुरी है उसी तरह पानी का पर्याप्त सेवन भी स्वास्थ्य को सही रखने के लिए बहुत जरुरी है। ऐसे में यदि आपके शरीर में यदि थोड़ी भी पानी की कमी होती है तो इसकी वजह से आपको सेहत सम्बन्धी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। और जब बात गर्भवती महिला की हो तो प्रेगनेंसी होने पर महिला को शरीर में पानी की कमी बिल्कुल भी नहीं होने देनी चाहिए।

क्योंकि इसकी वजह से न केवल प्रेगनेंसी में दिक्कतें बढ़ती है बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु पर भी बुरा असर पड़ता है। लेकिन यदि महिला पानी का भरपूर सेवन करती है तो इससे माँ व् बच्चे दोनों को भरपूर फायदे भी मिलते हैं। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी में पानी का सेवन करने से जुडी जानकारी विस्तार से बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था के समय प्रेग्नेंट महिला को कितना पानी पीना चाहिए?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के लिए पानी का सेवन बहुत जरुरी होता है साथ ही पानी की मात्रा का ध्यान रखना भी महिला के लिए जरुरी होता है। क्योंकि यदि महिला भरपूर पानी का सेवन करती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला और बच्चे दोनों को फायदा मिलता है। ऐसे में गर्भवती महिला को दिन में आम लोगो की बजाय ज्यादा पानी पीना चाहिए यानी की महिला को एक दिन में दस से बारह गिलास पानी का सेवन जरूर करना चाहिए। और ऐसा जरुरी नहीं है की महिला केवल पानी ही पीए बल्कि महिला तरल पदार्थ की कमी को शरीर में पूरा करने के लिए जूस, नारियल पानी, निम्बू पानी, दूध आदि का सेवन भी कर सकती है।

गर्भावस्था के समय पानी पीने पीने के फायदे

  • पानी का भरपूर सेवन करने से महिला के शरीर का तापमान सही रहता है।
  • बॉडी के हाइड्रेट रहने से बॉडी में ऊर्जा भी भरपूर रहती है।
  • गर्भवती महिला यदि पानी का भरपूर सेवन करती है तो इससे महिला का पाचन तंत्र भी सही रहता है।
  • पानी का भरपूर सेवन करने से शरीर में विषैले पदार्थों का जमाव नहीं होता है जिससे महिला को इन्फेक्शन की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान स्किन की नमी को बरकरार रहने में मदद मिलती है।
  • पानी का भरपूर सेवन करने से महिला के गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा सही रहती है जिससे बच्चे का बेहतर विकास होने के साथ बच्चे को झटके आदि से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।
  • पानी का भरपूर सेवन करने से गर्भवती महिला के शरीर को पोषण मिलता है जिससे महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों से गर्भावस्था के दौरान बचे रहने में मदद मिलती है।
  • समय से पहले डिलीवरी होने की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान पानी का सेवन करने से जुडी सम्पूर्ण जानकारी, ऐसे में गर्भवती महिला को पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला और बच्चे को भरपूर पोषण मिल सके। साथ ही महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली बहुत सी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिल सके।

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प्रेग्नेंट महिला आग सेकने और हीटर का इस्तेमाल करने से पहले यह जान लें

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सर्दियों का मौसम चल रहा है और इस कड़ाकेदार ठण्ड से बचाव के लिए आप आग सेकने या रूम हीटर जैसे विकल्प को ट्राई कर सकते हैं। जो की अच्छी बात भी है क्योंकि यह दोनों ही आपको ठण्ड से बचे रहने में मदद करते हैं। लेकिन यदि आप प्रेग्नेंट हैं और आप सर्दी से बचाव के लिए आग सेक रही हैं या रूम हीटर का इस्तेमाल कर रही है।

तो ऐसे में जरुरी है की आप कुछ बातों का ध्यान रखें ताकि इससे आपको और आपके होने वाले बच्चे को किसी भी तरह का नुकसान नहीं हो। साथ ही यदि आप प्रेग्नेंट नहीं भी हैं तो भी आपको इन टिप्स का ध्यान रखना चाहिए। आज इस आर्टिकल में हम प्रेग्नेंट महिला को आग सेकने और हीटर का इस्तेमाल करने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए उस बारे में बताने जा रहे हैं।

आग के ज्यादा करीब नहीं बैठें

यदि आग की आंच बहुत तेज है है तो प्रेग्नेंट महिला को आग के ज्यादा करीब नहीं बैठना चाहिए। क्योंकि इससे शरीर का तापमान तेजी से बढ़ सकता है जिसकी वजह से आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

लम्बे समय तक नहीं सेकें आग

लगातार बहुत देर तक गर्भवती महिला को आग नहीं सेकनी चाहिए क्योंकि ऐसा करने के कारण भी बॉडी का तापमान बढ़ सकता है। जिससे गर्भ में शिशु दिक्कत महसूस कर सकता है।

आग से उठते ही न करें ठन्डे पानी का इस्तेमाल

आग सेकने के तुरंत बाद ठन्डे पानी का सेवन करने या हाथ मुँह धोने ठन्डे पानी से धोने से बचें। क्योंकि आग सेकने के कारण शरीर गर्म होता है ऐसे में ठन्डे पानी का सेवन करने या उसका इस्तेमाल करने के कारण सर्द गर्म हो सकता है। जिसकी वजह से आपको जुखाम, खांसी, बुखार जैसी परेशानी होने का खतरा बढ़ जाता है।

रूम हीटर का इस्तेमाल करते समय न करें कमरा बंद

यदि आप रूम हीटर चला कर सोती हैं तो ध्यान रखें की आप पूरा कमरा बंद करके नहीं सोएं क्योंकि इसके कारण दम घुटने की आशंका रहती है। जिससे आपको और आपके बच्चे दोनों को दिक्कत हो सकती है। ऐसे में महिला यदि रूम हीटर का इस्तेमाल करती है तो कमरे की कोई खिड़की या दरवाज़े को खोलकर रखना चाहिए। इसके अलावा यदि आप कमरे में नहीं हैं तो भी कमरा बंद करके हीटर को चलता भी नहीं छोड़ें क्योंकि इससे कमरे में कार्बन मोनो ऑक्साइड पैदा होती है जो सेहत के लिए बहुत ज्यादा हानिकारक होती है।

तापमान रखें सामान्य

ध्यान रखें की यदि आप रूम हीटर का इस्तेमाल कर रही है तो आप उसका तापमान सामान्य रखें जिससे आपके कमरे में ठण्ड नहीं हो लेकिन यह भी ध्यान रखें की हीटर का तापमान जरुरत से ज्यादा नहीं बढ़ाएं। क्योंकि जरुरत से ज्यादा हीटर का तापमान बढ़ाने के कारण आपकी सेहत को नुकसान पहुँच सकता है। इसके अलावा यदि आप हीटर चलाकर सो रही हैं तो तुरंत उठकर बाहर नहीं जाएँ। बल्कि पहले हीटर बंद करके पांच से दस मिनट तक कमरे में ही रहे उसके बाद बाहर जाएँ।

तो यह हैं कुछ बातें जो प्रेग्नेंट महिला को आग सेकने या हीटर का इस्तेमाल करने से पहले ध्यान रखनी चाहिए। यदि प्रेग्नेंट महिला इन बातों का ध्यान रखती है। तो इससे प्रेग्नेंट महिला को किसी तरह की परेशानी नहीं होती है साथ ही माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ रहते हैं।

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प्रेगनेंसी में सर्दी खांसी होने पर यह बिल्कुल नहीं करें?

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गर्भावस्था के दौरान महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। और इन परेशानियों के होने का कारण शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव, मौसम में परिवर्तन, इम्युनिटी कमजोर होना आदि हो सकते हैं। साथ ही यदि किसी भी परेशानी को अनदेखा किया जाये तो इसकी वजह से महिला की मुश्किलें बढ़ सकती है।

लेकिन इन परेशानियों के इलाज के लिए बहुत सी बातों का ध्यान रखना चाहिए क्योंकि गर्भावस्था के दौरान यदि थोड़ी भी चूक हो जाये तो इसके कारण महिला की परेशानी घटने की बजाय बढ़ सकती है। आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान सर्दी जुखाम की समस्या होने पर महिला को क्या -क्या नहीं करना चाहिए उस बारे में बताने जा रहे हैं। ताकि यदि आप किसी घरेलू तरीके को ट्राई कर रहें हैं तो उसकी वजह से आपको नुकसान नहीं हो।

सर्दी जुखाम होने के लक्षण

  • गले में दर्द होना।
  • खांसी करते समय बलगम निकलना।
  • नाक बंद होना या नाक बहना।
  • लगातार छींके आना।
  • थकान महसूस होना या बुखार जैसा महसूस होना।
  • सिर दर्द रहना।

सर्दी जुखाम होने पर प्रेग्नेंट महिला क्या नहीं करें

यदि आप प्रेग्नेंट हैं और आपको सर्दी जुखाम की समस्या हो गई है तो आपको प्रेगनेंसी के दौरान कुछ उपाय को करने से बचना चाहिए। जैसे की:

काढ़ा नहीं पीएं

सर्दी जुखाम की समस्या से बचने का सबसे आसान उपाय होता है की काढ़ा का सेवन किया जाये। लेकिन प्रेग्नेंट महिला को काढ़ा का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि काढ़ा बनाने के लिए इलायची, अदरक, तुलसी, गिलोय, जैसी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। काढ़ा के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इन सभी चीजों की तासीर गर्म होती है।

और गर्म तासीर वाली चीजों का सेवन गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि गर्म तासीर वाली चीजों का सेवन करने से गर्भ में पल रहे बच्चे पर बुरा असर पड़ता है। इसीलिए गर्भावस्था के दौरान सर्दी खांसी की समस्या होने पर महिला को काढ़ा का सेवन नहीं करना चाहिए।

बिना डॉक्टर को संपर्क किए दवाई का सेवन

प्रेग्नेंट महिला को सर्दी खांसी की समस्या होने पर डॉक्टर से बिना सलाह किए अपने आप किसी भी दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि आपके द्वारा ली गई दवाइयां गर्भ में बच्चे पर नकारात्मक असर डाल सकती है।

गर्म पानी का सेवन नहीं करें

ज्यादातर लोग सर्दी खांसी होने पर गर्म पानी का सेवन करते हैं लेकिन यदि आप प्रेग्नेंट हैं जरुरत से ज्यादा गर्म पानी का सेवन करने से आपको बचना चाहिए। क्योंकि ज्यादा गर्म पानी का सेवन प्रेगनेंसी में बच्चे के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

गर्म पानी से नहाना

गर्भवती महिला को सर्दी खांसी की समस्या होने पर गर्म पानी से भी नहीं नहाना चाहिए, हाँ लेकिन महिला गुनगुना पानी नहाने के लिए इस्तेमाल कर सकती है। क्योंकि गर्म पानी से नहाने पर शरीर के तापमान में बदलाव आ सकता है, महिला का ब्लड प्रैशर लौ हो सकता है जो माँ और बच्चे दोनों के लिए सही नहीं होता है।

गर्भावस्था में सर्दी खांसी की समस्या से बचाव के उपचार

  • ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थों का सेवन करें।
  • पोषक तत्वों से भरपूर आहार लें।
  • भरपूर आराम करें।
  • ठण्ड का मौसम हैं तो अपने पहनावें का अच्छे से ध्यान रखें।
  • शहद का सेवन करने से भी प्रेग्नेंट महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सकती है।
  • निम्बू और शहद का सेवन करने से भी आपको फायदा मिलता है।
  • लहसुन का सेवन भी इस समस्या से बचाव का एक बेहतरीन उपाय है।

तो यह हैं कुछ काम जो प्रेग्नेंट महिला को सर्दी खांसी की समस्या होने पर नहीं करने चाहिए। क्योंकि इन्हे करने से प्रेग्नेंट महिला व् होने वाले बच्चे को दिक्कत हो सकती है। इसके अलावा सर्दी खांसी की समस्या से बचाव के लिए आपको एक बार डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए की आप क्या करें और क्या नहीं ताकि आपको और आपके बच्चे दोनों को किसी भी तरह की समस्या नहीं हो।

चांदी के गहने साफ़ करने के तरीके

चांदी के गहने हो या बर्तन आप उन्हें रोजाना इस्तेमाल करें या उन्हें एक जगह रंग दें वो अपनी चमक खो देते हैं। और काले होने के बाद वो बहुत गंदे लगते हैं लेकिन आप चाहे तो अपने चांदी के बर्तनों या गहनों को आसानी से साफ़ कर सकते हैं। ताकि उनकी चमक हमेशा बरकरार रह सकें। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको चांदी के बर्तनों की चमक बढ़ाने के कुछ आसान टिप्स बताने जा रहे हैं।

हैंड सेनेटाइजर

चांदी के गहनों और बर्तनों की साफ़ सफाई के लिए हैंड सेनेटाइजर का इस्तेमाल करना बहुत फायदेमंद होता है। इसके इस्तेमाल के लिए आप रुई को हैंड सेनेटाइजर में भिगोकर या सूती कपडे को हैंड सेनेटाइजर में भिगोकर अच्छे से चांदी के गहनों को साफ करें।

निम्बू

थोड़े से सोडा में निम्बू का रस मिलाएं और उसमे अपने चांदी के गहनों को थोड़ी देर के लिए रख दें। उसके बाद उन्हें हल्के ब्रश से साफ़ कर सूखे कपडे से पोछ दें।

डिटर्जेंट

थोड़े से गुनगुने पानी में डिटर्जेंट मिलाकर अच्छे से घोल लें उसके बाद उसमे चांदी के बर्तन या गहने डालकर छोड़ दें। अब उन्हें निकालकर अच्छे से साफ कर लें ऐसा करने से भी चांदी के बर्तनों व् गहनों को साफ़ करने में मदद मिलती है।

टूथ पेस्ट

थोड़े से टूथपेस्ट में पानी मिलाकर एक पतला सा घोल बनाएं। घोल बनाने के बाद ब्रश से चांदी के बर्तनों या गहनों को रगड़कर साफ़ करें। और उसके बाद साफ़ कपडे से उन्हें पोछ लें। ऐसा करने से भी चांदी के गहनों की चमक को बरकरार रहने में मदद मिलती है।

एल्युमिनियम फॉयल

चांदी के गहनों को साफ़ करने के लिए एल्युमिनियम फॉयल का इस्तेमाल करने से भी बहुत फायदा मिलता है। इसके इस्तेमाल के लिए आप एक बर्तन में थोड़ा पानी गर्म करें और उसके बाद उसमे एक चम्मच बेकिंग सोडा मिलाएं और गहने को उस मिश्रण में भिगोकर रख दें। फिर उसे फॉयल पेपर से रगड़ें आप देखेंगे की आपके चांदी के बर्तन आदि चमक गए हैं।

टोमैटो सॉस

खाने की चीजों का स्वाद बढ़ाने के साथ टोमैटो सॉस चांदी के गहनों व् बर्तनों को चमकाने में भी मदद करती हैं। इसके इस्तेमाल के लिए आप बर्तन या गहने का जो भी हिस्सा गन्दा है उस पर टोमैटो सॉस को रगड़ें या फिर उसे टोमैटो सॉस में थोड़ी देर डालकर रख दें। उसके बाद उसे अच्छे से साफ़ कर लें।

सिरका

सिरके का इस्तेमाल करने से भी चांदी के सामान की चमक को बरकरार रखने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप एक कप सिरके में एक चम्मच नमक मिलाएं। अब इस मिश्रण में अपने चांदी के गहनों को डालकर रख दें। उसके बाद इन्हे निकालकर सूखे कपडे से साफ़ कर लें। ऐसा करने से भी आपके चांदी के गहनों को साफ़ करने में मदद मिलती है।

पोलिश

आज कल मार्किट में पोलिश आसानी से मिल जाती है और यह पोलिश जब आप अपने चांदी के गहनों या चांदी के बर्तनों के लिए इस्तेमाल करते हैं। तो इससे आपका चांदी का सामान एक दम से चमकने लगता है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिन्हे ट्राई करने से आपके चांदी के बर्तनों व् गहनों की चमक को बरकरार रहने में मदद मिलती है। तो यदि आप भी घर में अपने चांदी के गहनों या बर्तनों को चमकाना चाहते हैं तो आप भी इनमे से किसी भी टिप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।

सोने के जेवर चमकाने के टिप्स

गहनों की चमक जितनी ज्यादा होती है उतने ही ज्यादा वो देखने में खूबसूरत लगते हैं। और महिलाओं के श्रृंगार में गहनों का अहम स्थान होता है साथ ही गहने महिलाओं को जितने पसंद होते हैं उतनी कोई और चीज नहीं होती है। लेकिन यदि आप रोजाना कुछ न कुछ सोने का गहना पहन कर रखते हैं जैसे की महिलाओं को सोना पहन कर रखने का बहुत शौक होता है या लम्बे समय के लिए उन्हें अंदर रख कर रखते हैं। तो इस कारण मैल व् गंदगी का जमाव होने के कारण उनकी चमक कम होने लगती है। और आपके महंगे गहनों की ख़ूबसूरती धुंधली पड़ने लगती है।

लेकिन आप चाहे तो इन गहनों की चमक को हमेशा बरकरार रख सकते हैं जैसे की आप इनकी साफ़ सफाई ज्वेलर से करवा सकते हैं। परन्तु हर बार ज्वेलर से गहनों की साफ़ सफाई करवाना थोड़ा महंगा पड़ता है साथ ही इस कारण आप धोखे की शिकार भी हो सकती है क्योंकि कुछ ज्वेलर आपके गहनों में गड़बड़ी भी कर सकते हैं। ऐसे में आप घर में ही कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल करके अपने सोने के गहनों की चमक को बरकरार रख सकते हैं। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको सोने के गहनों की चमक को बरकरार रखने के कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं।

डिटर्जेंट पाउडर

कपडे धोने के सर्फ या बर्तन साफ़ करने के जैल का इस्तेमाल करने से आप अपने सोने के गहनों की चमक को बढ़ा सकते हैं। इसके लिए आप गुनगुने पानी में सर्फ या जैल अच्छे से मिक्स कर लें। उसके बाद आप इसे अपने गहने डालकर दस मिनट के लिए रख दें।

उसके बाद टूथब्रश को गहनों पर आराम से रगड़ें पानी में डालने के कारण गहनों पर जमी गंदगी ढीली पड़ जाएगी। और ब्रश का इस्तेमाल करने से आप उसे अच्छे से हटा पाएंगे उसके बाद साफ़ पानी से अपने गहनों को अच्छे से साफ़ करें।

अमोनिया

सोने के गहनों को साफ़ करने के लिए अमोनिया का इस्तेमाल करना भी बहुत फायदेमंद होता है। इसके इस्तेमाल के लिए आप छह चम्मच पानी में एक चम्मच अमोनिया को मिलाएं। उसके बाद इसे अच्छे से मिक्स करें।

और अपने सोने के गहने को ज्यादा से ज्यादा एक मिनट के लिए इस मिश्रण में डालें। और उसके बाद उसे निकालकर तुरंत साफ़ पानी से धो लें। लेकिन ध्यान रखें की सोने के उन गहनों की अमोनिया में बिल्कुल सफाई नहीं करें जिसमे नग या कोई मोती हो।

गर्म पानी

जिस सोने के आभूषण में कोई मोती या नग नहीं हो उसे साफ़ करने के लिए गर्म पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके इस्तेमाल के लिए आप एक गिलास पानी को अच्छे से उबाल लें। और उसके बाद उस आभूषण को पानी में भिगोकर पांच सात मिनट के लिए रख दें। उसके बाद ब्रश से उसे साफ़ करें फिर उसे साफ़ पानी से धोकर सूखे कपडे से साफ़ कर लें।

नग वाले सोने के गहने साफ़ करने के तरीके

इसके लिए सबसे पहले आप थोड़ा सा गुनगुना पानी लें और इसमें डिटर्जेंट मिलाएं अब किसी कोमल कपडे को इस मिक्सचर में भिगोएं और हल्के हाथों से नग वाली ज्वेलरी को साफ़ करें। ऐसा करने से आपके नगों को नुकसान नहीं होगा और आपके सोने के गहने भी चमक जायेंगे।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिन्हे ट्राई करने से आप अपने सोने के गहनों की चमक को बरकरार रख सकते हैं। लेकिन पूरी सतर्कता और सावधानी के साथ अपने सोने के गहने साफ़ करें। ताकि आपके गहनों की चमक में किसी भी तरह की कमी नहीं आएं और आपके गहनों की चमक भी बरकरार रहें।