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प्रेगनेंसी में दूध और खजूर का सेवन करना चाहिए या नहीं?

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गर्भावस्था के दौरान यदि महिला के शरीर में थोड़ी भी पोषक तत्वों की कमी होती है तो इसकी वजह से माँ और बच्चे दोनों को दिक्कत होने का खतरा हो जाता है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला अपने शरीर में पोषक तत्वों की नहीं होने देती है तो इससे माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ रहते हैं साथ ही प्रेगनेंसी में परेशानियां भी कम होती है।

साथ ही महिला को कुछ भी खाने या पीने से पहले इस बात का ध्यान रखना जरुरी होता है की महिला जो भी खा या पी रही है उसका खाना या पीना सेहत के लिए फायदेमंद है या नहीं। आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी में दूध और खजूर का सेवन करने के बारे में बताने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी में दूध और खजूर का सेवन करना चाहिए या नहीं?

दूध और खजूर दोनों ही पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं जो शरीर के अंगो को मजबूत करने के साथ आपको हेल्दी रखने में भी मदद करते हैं। और प्रेग्नेंट महिला भी चाहे तो दूध और खजूर का सेवन कर सकती है लेकिन इन्हे खाने या पीने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है। जैसे की प्रेग्नेंट महिला पूरे नौ महीने दूध पी सकती है लेकिन कच्चे दूध का सेवन महिला को नहीं करना चाहिए।

खजूर का सेवन भी गर्भवती महिला कर सकती है लेकिन प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में खजूर का सेवन गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि खजूर की तासीर गर्म होती है जिससे गर्भपात का खतरा होता है। साथ ही दूसरी और तीसरी तिमाही में भी सिमित मात्रा में ही खजूर का सेवन महिला कर सकती है।

जैसे की एक दिन में दो, तीन, ज्यादा से ज्यादा चार खजूर महिला खा सकती है। इसके अलावा महिला दूध में खजूर डालकर उसका सेवन भी कर सकती है। लेकिन दूध में खजूर डालकर महिला को प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में खाना चाहिए इससे महिला को फायदा मिलता है। साथ ही प्रेगनेंसी की पहली दूसरी तिमाही में महिला को दूध में खजूर डालकर उसका सेवन नहीं करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में दूध और खजूर खाने के फायदे

गर्भावस्था के समय यदि महिला दूध में खजूर डालकर उसका सेवन करती है तो ऐसा करने से महिला को बहुत से फायदे मिलते हैं। जैसे की:

नोर्मल डिलीवरी होने में मिलती है मदद

अधिकतर गर्भवती महिलाएं यही चाहती हैं की वो सामान्य प्रसव से शिशु को जन्म दें। ऐसे में खजूर दूध का सेवन करना गर्भवती महिला के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। क्योंकि प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में खजूर दूध का सेवन करने से शरीर को प्रसव के लिए तैयार होने में मदद मिलती है। साथ ही नोर्मल डिलीवरी के चांस भी बढ़ते हैं।

नींद आती है बेहतर

तनाव, शारीरिक परेशानियां आदि के कारण गर्भावस्था के दौरान नींद अच्छे से नहीं आती है या अनिंद्रा की समस्या हो जाती है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली इस परेशानी से निजात के लिए महिला का खजूर दूध पीना बहुत फायदेमंद होता है।

आयरन मिलता है

गर्भावस्था के दौरान खून की कमी गर्भवती महिला और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकती है। ऐसे में खजूर दूध का सेवन करने से महिला को यह परेशानी नहीं होती है क्योंकि इसे पीने से महिला को आयरन भरपूर मात्रा में मिलता है।

प्रसव आसान होता है

खजूर दूध का सेवन करने से शरीर को भरपूर ऊर्जा मिलती है जिससे प्रसव में आने वाली मुश्किलों को कम करने में मदद मिलती है।

शिशु का होता है बेहतर विकास

दूध में खजूर उबालकर पीने से महिला को बहुत से पोषक तत्व मिलते हैं। और यह सभी पोषक तत्व गर्भनाल के माध्यम से बच्चे तक पहुँचते हैं। जिससे शिशु का बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास होने में मदद मिलती है। इसके अलावा खजूर वाले दूध को पीने से गर्भ में पल रहे बच्चे को जन्म के समय होने वाली बिमारियों से सुरक्षित रखने में भी मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ बेहतरीन फायदे जो दूध में खजूर डालकर उसका सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को मिलते हैं। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन सभी बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि आपको और आपके बच्चे दोनों को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी में भूलकर भी नहीं करें यह काम नहीं तो जन्म से पहले ही बच्चा होगा बीमार

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गर्भावस्था के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु का विकास पूरी तरह से अपनी माँ पर ही निर्भर करता है। क्योंकि महिला जैसा खाती है वैसा ही शिशु को पोषण मिलता है, महिला जो करती है उसका प्रभाव शिशु के विकास को प्रभावित करता है, महिला जैसा सोचती है उसका प्रभाव बच्चे के मानसिक विकास पर पड़ता है, आदि। ऐसे में गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास अच्छे से हो और शिशु को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो।

इसके लिए प्रेग्नेंट महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला अपना अच्छे से ध्यान रखें और ऐसा कोई भी काम नहीं करें जिससे शिशु का विकास प्रभावित हो। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे काम बताने जा रहे हैं जो गर्भवती महिला को नहीं करने चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं क्योंकि उन कामों को करने से गर्भ में शिशु के बीमार होने का या शिशु के विकास से सम्बंधित समस्या होने का खतरा बढ़ जाता है।

ज्यादा शोर से बचें

प्रेगनेंसी के दौरान जैसे जैसे बच्चे के अंग विकसित होते हैं वैसे वैसे धीरे धीरे वो अपना काम करना भी शुरू कर देते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला को ज्यादा शोर में न रहने की सलाह दी जाती है क्योंकि इससे बच्चे की सुनने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। और बच्चे की सुनने की क्षमता सही नहीं होती है जिससे आपका होने वाला बच्चा बहरा होता है।

ज्यादा मीठा न खाएं

गर्भावस्था के समय महिला को मीठे का सेवन सिमित मात्रा में करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि जरुरत से ज्यादा मीठा खाने के कारण प्रेग्नेंट महिला को जेस्टेशनल शुगर होने का खतरा होता है। और इसका असर गर्भ में भी बच्चे पर भी पड़ना शुरू हो जाता है जिससे आपके होने वाले शिशु को शुगर की समस्या हो सकती है।

गलत आहार का गलत प्रभाव

पोषक तत्वों से भरपूर आहार जितना प्रेगनेंसी के दौरान फायदेमंद होता है उतना ही गलत आहार का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान नुकसानदायक होता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला गलती से भी गलत आहार जैसे की जंक फ़ूड, स्ट्रीट फ़ूड, ऐसी किसी जगह से लाया गया आहार जो की साफ़ नहीं हो, आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसके कारण महिला को पेट सम्बन्धी परेशानी तो होती ही है साथ ही इससे शिशु को भी अपने विकास के लिए पोषक तत्व नहीं मिलते जिससे शिशु के वजन में कमी, शिशु को संक्रमण आदि होने के चांस बढ़ जाते हैं।

डिब्बाबंद आहार

यदि आप प्रेग्नेंट हैं और डिब्बाबंद आहार का सेवन करती है तो यह गलती बिल्कुल भी नहीं करें। क्योंकि डिब्बाबंद आहार में बाईस्फेनोल ए (बीपीए) होता है जो गर्भ में पल रहे शिशु के संपर्क में आता है तो इससे बच्चे का विकास रुक जाता है। और इसका असर आपको बाद में महसूस होता है।

तनाव

गर्भावस्था के दौरान महिला को बिल्कुल भी तनाव नहीं लेना चाहिए। क्योंकि प्रेग्नेंट महिला के तनाव लेने का असर शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ता है। और गर्भ में शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास बहुत धीमा हो जाता है और इसका असर आपको डिलीवरी के बाद शिशु पर देखने को मिलता है।

ठण्ड से बचाव

आप प्रेग्नेंट हैं और सर्दियों का मौसम चल रहा है तो इस बता का ध्यान रखें की आप ठण्ड से बची रहें और ठंडी चीजों का सेवन नहीं करें। क्योंकि इससे प्रेग्नेंट महिला को ठण्ड लगने का खतरा होता है और निमोनिया हो सकता है। साथ ही इसका असर गर्भ में शिशु पर भी पड़ता है और गर्भ में ही शिशु निमोनिया से पीड़ित हो सकता है।

नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करें

गर्भावस्था के दौरान महिला को किसी भी तरह के नशीले पदार्थ जैसे की अल्कोहल, धूम्रपान आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से गर्भ में शिशु का विकास प्रभावित होता है जिससे शिशु का वजन नहीं बढ़ना, शिशु क्क मानसिक विकास अच्छे से नहीं होना जैसी परेशानियाना हो सकती है।

कैफीन

कैफीन युक्त पदार्थ जैसे की चाय, कॉफ़ी, चॉकलेट, आदि का सेवन करने से भी प्रेग्नेंट महिला को बचना चाहिए। क्योंकि कैफीन युक्त पदार्थ भी गर्भ में शिशु के विकास पर बुरा असर डालते हैं और शिशु की ग्रोथ अच्छे से नहीं होने देते हैं।

बहुत ज्यादा एक्ससरसाइज

गर्भावस्था के दौरान महिला को जरुरत से ज्यादा व्यायाम भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि जरुरत से ज्यादा करने के कारण गर्भ में शिशु परेशान होता है साथ ही गर्भ गिरने जैसी समस्या का सामना आपको करना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ चीजें जो प्रेग्नेंट महिला को नहीं करनी चाहिए। क्योंकि इन कामों को करने से आपके होने वाले बच्चे का शारीरिक व् मानसिक विकास प्रभावित होता है और गर्भ में ही बच्चे के बीमार होने और उसके विकास के रुकने जैसी समस्या हो जाती है।

Do not forget this even in pregnancy, otherwise the child will be ill before birth

आयुर्वेद के अनुसार प्रेगनेंसी में कब और कितना घी खाना सेफ होता है?

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पोषक तत्वों से भरपूर घी का सेवन भारतीय व्यंजनों का स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है। और आयुर्वेद के अनुसार घी का इस्तेमाल करने से केवल खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ता है। बल्कि घी का सेवन करने से स्वास्थ्य सम्बन्धी बहुत से फायदे भी मिलते हैं। इसीलिए बड़े बूढ़े बच्चे सभी को रोजाना घी का सेवन करने की सलाह दी जाती है।

साथ ही घी का सेवन सिमित मात्रा में ही करना चाहिए क्योंकि जरुरत से ज्यादा कोई भी चीज सेहत को फायदे पहुंचाने की जगह नुकसान पहुंचा सकती है। और जब बता गर्भवती महिला को हो तो हर जो भी खाद्य पदार्थ आप खा रहे हैं उसकी पूरी जानकारी होना बहुत जरुरी होता है। आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान घी का सेवन करने के बारे में जानेंगे।

आयुर्वेद के अनुसार गर्भावस्था के दौरान घी का सेवन करना चाहिए या नहीं?

घी का सेवन सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं लेकिन प्रेगनेंसी में कुछ भी खाने से पहले यह जनन्ना जरुरी होता है की आप जो खा रहे हैं वो माँ और बच्चे के लिए सेफ है या नहीं? और यदि सेफ है तो महिला को कब और कितनी मात्रा में उसका सेवन करना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला और शिशु दोनों को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो।

और आयुर्वेद के अनुसार घी का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान बहुत फायदेमंद होता है। घी का सेवन यदि प्रेग्नेंट महिला करती है तो इससे माँ और बच्चे दोनों को फायदे मिलते हैं। इसीलिए यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो आप घी का सेवन कर सकती है। तो आइये अब घी के सेवन से जुडी जानकारी के बारे में आर्टिकल में आगे विस्तार से जानते हैं।

घी में कौन कौन से पोषक तत्व मौजूद होते हैं?

घी में विटामिन्स, एंटी ऑक्सीडेंट्स, फैट आदि भरपूर मात्रा में मौजूद होता है जो गर्भवती महिला को फिट रहने और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

गर्भावस्था में घी का सेवन करने के फायदे

प्रेगनेंसी के दौरान यदि गर्भवती महिला घी का सेवन करती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला को बहुत से स्वास्थ्य सम्बन्धी फायदे मिलते हैं। आइये अब उन फायदों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

पेट से जुडी समस्याओं से मिलता है निजात

गर्भावस्था के समय शरीर में हार्मोनल बदलाव हो रहे होते हैं जिसके कारण शरीर की क्रियाओं पर असर पड़ सकता है। जैसे की महिला की पाचन क्रिया धीमी गति से काम करती है जिसकी वजह से महिला को कब्ज़, अपच, जैसी परेशानियां भी हो सकती है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला घी का सेवन करती है तो इससे पाचन को सुधारने में मदद मिलती है जिससे खाना आसानी से हज़म होता है। और पेट से जुडी परेशानी से गर्भवती महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

वजन रहता है नियंत्रित

आज तक आपने यही सुना होगा की वजन घटाना है तो घी का सेवन नहीं करें, जो की गलत होता है। बल्कि घी का सेवन करने से मेटाबोलिज्म बेहतर होता है, शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला का वजन सही रहता है।

इम्युनिटी स्ट्रांग होती है

गर्भावस्था के दौरान बिमारियों व् संक्रमण से बचाव के लिए जरुरी होता है की महिला की इम्युनिटी स्ट्रांग हो। लेकिन बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को अपनी इम्युनिटी को स्ट्रांग करने के लिए ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए जिससे प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो। और घी में एंटी ऑक्सीडेंट्स भरपूर होते हैं जो प्रेग्नेंट महिला की पोषक तत्वों को अवशोषित करने की क्षमता को बढ़ाते हैं। जिससे प्रेग्नेंट महिला की इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद मिलती है। इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को घी का सेवन जरूर करना चाहिए।

आँखों के लिए है बेहतर

गर्भावस्था के दौरान घी का सेवन करने से गर्भवती महिला की आँखों की रौशनी बेहतर होने के साथ गर्भ में पल रहे बच्चे की आँखों का बेहतर विकास होने में भी मदद मिलती है। क्योंकि घी में विटामिन ए मौजूद होता है जो आँखों के लिए बेहतर होता है।

हदय रहता है स्वस्थ

घी में एंटी इंफ्लामेटरी प्रॉपर्टीज होती है जो हदय को स्वस्थ रखने और बॉडी में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में मदद करते है। और बॉडी में कोलेस्ट्रॉल के नियंत्रित रहने से गर्भवती महिला को फिट रहने में मदद मिलती है।

शिशु का होता है बेहतर विकास

घी में मौजूद पोषक तत्वों का फायदा केवल प्रेग्नेंट महिला को ही नहीं मिलता है बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी घी का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।

ऊर्जा मिलती है

घी का सेवन करने से गर्भवती महिला की हड्डियों को पोषण मिलता है, शरीर में पोषक तत्वों की मात्रा भरपूर रहती है जिससे गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

तनाव से राहत

गर्भावस्था के दौरान घी का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को तनाव से राहत मिलने के साथ मूड को भी बेहतर रहने में मदद मिलती है। जो की माँ और बच्चे दोनों की सेहत के लिए अच्छा होता है।

गर्भावस्था के दौरान घी का सेवन कितना करना चाहिए?

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को एक दिन में एक से दो चम्मच घी का सेवन कर सकती है। लेकिन ध्यान रखें की घी को सब्ज़ी में डालकर, रोटी पर लगाकर करें।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान घी का सेवन से जुड़े टिप्स, साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें की जिन प्रेग्नेंट महिलाओं का वजन ज्यादा होता है और हाई ब्लड प्रैशर की समस्या होती है। उन्हें घी का सेवन नहीं करना चाहिए साथ ही इसके लिए एक बार डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

प्रेगनेंसी में नमक से रुक सकता है शिशु का विकास जानिए कैसे?

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नमक हमारे डेली रूटीन में खाएं जाने वाले आहार का एक अहम हिस्सा है। साथ ही नमक का सिमित मात्रा में सेवन करना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद भी होता है। लेकिन यदि नमक का सेवन जरुरत से ज्यादा किया या कम किया जाएँ तो इसके कारण सेहत सम्बन्धी परेशानियां होने का खतरा बढ़ जाता है। आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान नमक का सेवन कितना जरूरी है और इसकी कमी या अधिकता से बच्चे को क्या नुकसान हो सकता है इस बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था में नमक कितना जरुरी होता है?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को भरपूर न्यूट्रिशन की जरुरत होती है। और नमक भी प्रेगनेंसी के दौरान लिया जाने वाला एक जरुरी रसायन होता है। क्योंकि नमक का सेवन करने से शरीर में पीएच स्तर, तापमान, तरल पदार्थों के स्तर को सामान्य रहने में मदद मिलते हैं। साथ ही नमक का सेवन सही मात्रा में करने से मांसपेशियां, नसे, शरीर के सभी अंग सही तरीके से काम करते हैं।

इसके अलावा प्रेगनेंसी में ऐंठन, नस चढ़ना, पेट संबंधित समस्याओं से बचाव के लिए भी नमक का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए विकास के लिए भी नमक का सेवन बहुत जरुरी होता है। और यदि महिला नमक का सेवन ज्यादा या कम करती है तो इसके कारण गर्भवती महिला के साथ गर्भ में शिशु को दिक्कत हो सकती है।

प्रेगनेंसी में नमक का सेवन कम करने से बच्चे के विकास पर क्या असर पड़ता है?

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला नमक का सेवन कम या ज्यादा करती है तो इससे गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास पर बुरा असर पड़ता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में नमक का सेवन कम करने से बच्चे पर क्या बुरा असर पड़ता है।

बच्चे की हाइट

यदि प्रेग्नेंट महिला नमक का सेवन कम करती है या जन्म के बाद बच्चे को नमक का सेवन करवाती है तो इसके कारण बच्चे की हाइट पर बहुत बुरा असर पड़ता है। जिसके कारण बच्चे की हाइट अच्छे से नहीं बढ़ पात है और बच्चे की हाइट कम रह जाती है।

बच्चे का विकास होता है धीमा

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को भरपूर पोषक तत्वों का सेवन करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि यह पोषक तत्व गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने के साथ गर्भ में पल रहे बच्चे के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं। और कुछ पोषक तत्व ऐसे होते हैं जो बच्चे के विकास को तेजी से करने के लिए बहुत जरुरी होते हैं। जिनमे से एक आयोडीन भी होता है, और यदि गर्भ में पल रहे बच्चे को आयोडीन यानी नमक सही मात्रा में नहीं मिलता है। तो इसके कारण बच्चे का विकास सही नहीं होता है और बहुत धीमा भी होता है।

गॉइटर की समस्या

यदि प्रेग्नेंट महिला नमक का सेवन कम मात्रा में करती है तो इसके कारण होने वाले बच्चे को गॉइटर यानी घेंघा रोग होने का खतरा बढ़ जाता है।

दिमाग का विकास

प्रेगनेंसी के दौरान महिला यदि नमक का सेवन कम करती है तो इसकी वजह से होने वाले बच्चे के दिमाग के विकास में कमी, तंत्रिका तंत्र के विकास में कमी जैसी परेशानी होने का खतरा अधिक होता है। साथ ही बच्चे को मानसिक रोग होने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसके अलावा जन्म के बाद भी बच्चे को मानसिक रूप से विकसित होने में समय लगता है।

हाई ब्लड प्रैशर के कारण हो सकती है दिक्कत

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला नमक का सेवन ज्यादा करती है तो इसके कारण महिला को हाई ब्लड प्रैशर, हदय से सम्बंधित समस्या होने का खतरा बढ़ जाता है। और प्रेग्नेंट महिला को होने वाली दिक्कत का असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी पड़ता है।

गर्भ गिरने का खतरा होता है

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला आयोडीन का सेवन कम करती है तो इसके कारण बच्चे का विकास बढ़ नहीं पाता है। जिस कारण महिला का गर्भपात होने का खतरा बढ़ जाता है।

प्रेगनेंसी में नमक के कारण गर्भवती महिला को होने वाले नुकसान

  • नमक की कमी या अधिकता के कारण प्रेग्नेंट महिला के शरीर का तापमान, पीएच स्तर, तरल पदार्थों के स्तर में असंतुलन हो सकता है जिस कारण महिला की दिक्कत बढ़ सकती है।
  • प्रेग्नेंट महिला यदि नमक का सेवन अधिक मात्रा में करती है तो इस कारण महिला को है ब्लड प्रैशर जैसी परेशानी होने का खतरा होता है।
  • सूजन की समस्या का अधिक होना भी प्रेग्नेंट महिला के नमक का सेवन अधिक करने के कारण होता है। और यह सूजन पैरों के साथ हाथों, मुँह और टखनों पर भी आ सकती है।
  • हदय से जुडी समस्या होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
  • नमक का सेवन कम करने के कारण महिला को पेट सम्बन्धी परेशानी, नस चढ़ना, आदि की समस्या अधिक होती है। साथ ही महिला के अंग अच्छे से काम नहीं करते हैं।

तो यह हैं वो नुकसान जो नमक का कम या अधिक सेवन करने के कारण बच्चे व् प्रेग्नेंट महिला को हो सकते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला को सिमित मात्रा में नमक का सेवन करना चाहिए। साथ ही गर्भवती महिला को सफ़ेद नमक की जगह सेंधा नमक का इस्तेमाल करना चाहिए। कभी कभार महिला चाहे तो खाने में काले नमक का इस्तेमाल भी कर सकती है।

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प्रेगनेंसी में गिलोय खाने के नुकसान

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गिलोय पान के पत्तों की तरह दिखने वाले पत्तों की एक बेल होती है। जो आयुर्वेद के अनुसार स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं से निजात पाने के लिए बहुत लाभदायक होती है। गिलोय में एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी पायरेटिक आदि गुण मौजूद होते हैं जो स्वास्थ्य से जुडी परेशानियों से निजात पाने में मदद करते हैं।

लेकिन जब बात प्रेगनेंसी की हो तो गिलोय का सेवन प्रेग्नेंट महिला की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को गिलोय का सेवन नहीं करने की सलाह भी दी जाती है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला गिलोय काढ़ा का सेवन करती है तो इससे महिला की सेहत को बहुत से नुकसान हो सकते हैं। जैसे की:

पेट से जुडी समस्या

गर्भावस्था के दौरान महिला का पाचन तंत्र धीमी गति से काम करता है। जिसके कारण महिला को कब्ज़, अपच, पेट दर्द जैसी परेशानियां हो सकती है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला गिलोय का सेवन करती है तो इससे महिला की पेट सम्बन्धी परेशानी दुगुनी बढ़ सकती है। साथ ही महिला को पेट में जलन जैसी परेशानी भी हो सकती है।

लौ ब्लड प्रैशर

बहुत सी गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान ब्लड प्रैशर से जुडी परेशानी का सामना करती है कुछ गर्भवती महिलाओं को हाई ब्लड प्रैशर तो कुछ गर्भवती महिलाओं को लौ ब्लड प्रैशर की समस्या हो जाती है। और यदि प्रेग्नेंट महिला गिलोय का सेवन करती है तो गर्भवती महिला को लौ ब्लड प्रैशर की समस्या अधिक होती है और जिन महिलाओं को लौ ब्लड प्रैशर की समस्या होती है उनके लिए गिलोय का सेवन बहुत ज्यादा नुकसानदायक भी साबित हो सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला को जितना हो सके गिलोय का सेवन करने से बचना चाहिए।

ब्लड शुगर लेवल हो जाता है कम

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला गिलोय काढ़ा का सेवन करती है तो इसकी वजह से महिला का ब्लड शुगर लेवल कम होने का खतरा बढ़ जाता है।

इम्युनिटी बढ़ने के कारण हो सकता है नुकसान

गिलोय काढ़ा का सेवन करने से इम्युनिटी को बूस्ट करने में मदद मिलती है। लेकिन गर्भावस्था के दौरान गिलोय का सेवन करने से इम्युनिटी अधिक उत्तेजित हो सकती है। जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला को अन्य शारीरिक परेशानियां होने का खतरा बढ़ जाता है।

गर्म होती है तासीर

गर्भावस्था के दौरान उन चीजों का सेवन करने की मनाही होती है जिनकी तासीर गर्म होती है और अदरक, इलायची, आदि की तरह गिलोय की तासीर भी गर्म होती है। तासीर गर्म होने के कारण गर्भवती महिला को गिलोय का सेवन नहीं करना चाहिए और यदि प्रेग्नेंट महिला गिलोय का सेवन करती है तो महिला और बच्चे दोनों को दिक्कत होने की सम्भावना बढ़ती है।

डिलीवरी के बाद हो सकती है दिक्कत

यदि किसी की भी सर्जरी होने वाली होती है तो उसे थोड़े समय पहले गिलोय का सेवन बंद कर देना चाहिए। वैसे ही गर्भवती महिला को भी नहीं पता होता है की महिला का प्रसव सामान्य होगा या महिला सिजेरियन डिलीवरी से बच्चे को जन्म देगी। ऐसे में यदि महिला की डिलीवरी सिजेरियन हो जाती है तो गिलोय का सेवन करने के कारण महिला के घाव को भरने में ज्यादा समय लगता है जिस वजह से महिला को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो प्रेग्नेंट महिला को काढ़ा का सेवन करने से हो सकते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला को इन परेशानियों से बचे रहने और गर्भावस्था के दौरान स्वस्थ रहने के लिए काढ़ा का सेवन करने से बचना चाहिए। गर्भवती महिला के साथ जो महिला बच्चे को स्तनपान करवाती हैं उन्हें भी गिलोय का सेवन नहीं करना चाहिए।

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सर्दियों में प्रेग्नेंट महिला हेल्दी कैसे रहें?

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मौसम में बदलाव होने के साथ प्रेग्नेंट महिला को अपने केयर करने के तरीके में भी बदलाव करना शुरू कर देना चाहिए। क्योंकि मौसम के बदलाव के साथ खान पान, रहन सहन में बदलाव करना जरुरी होता है ताकि आपको स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। आज इस आर्टिकल में हम गर्भवती महिला को सर्दियों में हेल्दी रहने के लिए क्या- क्या करना चाहिए उस बारे में बताने जा रहे हैं। ताकि सर्दियों में होने वाली परेशानियों से प्रेग्नेंट महिला को बचे रहने में मदद मिल सके।

हेल्दी डाइट लें

गर्भावस्था के दौरान स्वस्थ व् हेल्दी रहने के लिए खान पान का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है। ऐसे में सर्दियों में महिला को अपने खान पान में बदलाव करने के साथ अपनी डाइट को समय से लेना चाहिए। इसके अलावा महिला को ज्यादा तला भुना, जंक फ़ूड खाने से बचना चाहिए। सर्दी के मौसम में हेल्दी रहने के लिए महिला को ड्राई फ्रिट्स, केसर दूध, हरी सब्जियां, गाजर, निम्बू आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए।

गर्म कपडे पहनें

प्रेग्नेंट महिला को सर्दी के मौसम में हेल्दी रहने के लिए अपने पहनावें का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। जैसे की महिला को गर्म कपडे पहनने चाहिए, टोपी, जुराबें, शाल, जैकेट, आदि पहनकर रखना चाहिए।

थोड़ी देर धूप में बैठें

सर्दियों के मौसम में हेल्दी रहने के लिए प्रेग्नेंट महिला थोड़ी देर धूप में भी रहें, धूप में रहने से महिला को ठण्ड से बचे रहने में मदद मिलती है। लेकिन ध्यान रखें की ज्यादा समय के लिए भी धूप में नहीं बैठें और धूप में से जाकर तुरंत पानी पीने से बचें।

हाइड्रेट रहें

सर्दी के मौसम में पानी पीने की इच्छा कम ही होती है। जिसके कारण बॉडी में पानी की कमी हो जाती है और तरह तरह की शारीरिक परेशानियां होने का खतरा अधिक हो जाता है। खासकर गर्भवती महिला को ज्यादा परेशानी हो सकती है। ऐसे में सर्दी में महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला पानी व् अन्य तरल पदार्थों का भरपूर सेवन करें ताकि महिला को हाइड्रेट रहने में मदद मिल सकें। इसके अलावा महिला ध्यान रखें की फ्रिज में रखें पानी जूस आदि का सेवन महिला गलती से भी नहीं करें।

ठन्डे पानी से नहाने से बचें

सर्दी के मौसम में प्रेग्नेंट महिला भूलकर भी ज्यादा ठन्डे पानी से नहीं नहाएं। क्योंकि इसके कारण ठण्ड लगने, सर्दी, जुखाम, खांसी होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा ध्यान रखें की बहुत ज्यादा गर्म पानी से भी नहीं नहाएं क्योंकि इसके कारण गर्भपात होने का खतरा होता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को गुनगुने पानी का इस्तेमाल नहाने के लिए करना चाहिए जिससे न तो गर्भपात का खतरा हो और न ही ठण्ड के कारण महिला को कोई दिक्कत हो।

साफ़ सफाई का ध्यान रखें

ठण्ड के मौसम में नहाने का मन नहीं करता है या कई बार आप एक ही कपडे को एक से ज्यादा दिन तक पहनते हैं। लेकिन यदि आप गर्भवती हैं तो आप ऐसा बिल्कुल नहीं करें क्योंकि साफ़ सफाई का ध्यान न रखने के कारण आपको इन्फेक्शन होने का खतरा अधिक होता है। ऐसे में हेल्दी रहने के लिए प्रेग्नेंट महिला को रोजाना नहाना चाहिए, शरीर की साफ़ सफाई का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, रोजाना स्वच्छ कपडे पहनने चाहिए।

मसाज करें

सर्दी के मौसम में प्रेग्नेंट महिला को हाथों पैरों की मसाज भी करनी चाहिए। क्योंकि मसाज करने से स्किन अच्छी रहती है साथ ही महिला के शरीर में गर्माहट भी आती है जिससे ठण्ड के कारण होने वाली दिक्कतों से महिला को बचे रहने और हेल्दी रहने में मदद मिलती है। लेकिन ध्यान रखें की पेट पर ज्यादा तेजी से मसाज नहीं करें।

थोड़ा व्यायाम भी है जरुरी

सर्दी के मौसम में हेल्दी रहने के लिए प्रेग्नेंट महिला को थोड़ा व्यायाम भी करना चाहिए। क्योंकि व्यायाम करने से शरीर में गर्माहट बने रहने में मदद मिलती है। आप चाहे तो योगासन भी कर सकती है, लेकिन इस बात का ध्यान रखें की ऐसा कोई भी काम नहीं करें जिससे आपको या बच्चे को दिक्कत हो।

जितना हो सके घर में रहें

प्रेगनेंसी के दौरान महिला की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है जिस कारण महिला को सर्दी में होने वाली परेशानियां जैसे की सर्दी, खासी, ठण्ड लगना, आदि होने का खतरा अधिक होता है। साथ ही घर से बाहर जाने पर यदि महिला किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आती है। तो इस वजह से महिला को बहुत जल्दी इन्फेक्शन होने का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को सर्दी के कारण होने वाली परेशानियों से बचे रहने के लिए सर्दी के मौसम में जितना हो सके घर में ही रहना चाहिए।

स्किन केयर का भी रखें ध्यान

सर्दियों के मौसम में स्किन से जुडी परेशानियां जैसे की स्किन में रूखापन आना, खुजली आदि की दिक्कत होना आम बात होती है। ऐसे में सर्दियों के मौसम में भी प्रेग्नेंट महिला को स्किन से जुडी इन परेशानियों से बचे रहने के लिए स्किन को मॉइस्चराइज करना चाहिए और इसके लिए महिला क्रीम, आयल किसी भी चीज का इस्तेमाल कर सकती है।

भरपूर आराम करें

गर्भावस्था के दौरान महिला को भरपूर आराम करना चाहिए ताकि महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। ऐसे में सर्दी के कारण होने वाली परेशानियों से बचे रहने के लिए सर्दियों के मौसम में भी महिला को भरपूर आराम करना चाहिए। और यदि प्रेग्नेंट महिला भरपूर आराम करती है तो इससे सर्दी के मौसम में भी महिला को एक्टिव और रिफ्रेश रहने में मदद मिलती है।

डॉक्टर से जांच समय से करवाएं

सर्दी में किसी तरह की समस्या हो चाहे नहीं हो लेकिन डॉक्टर से अपनी समय से जांच करवाएं और वेक्सीनेशन करवाएं। ताकि सर्दी के मौसम में होने वाली हर एक परेशानी से आपको बचे रहने में मदद मिल सकें।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिनका सर्दियों के मौसम में अच्छे से ध्यान रखने से प्रेग्नेंट महिला सर्दियों के मौसम में होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है। तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और सर्दियों का मौसम चल रहा है तो आपको भी इन सभी बातों का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

How to keep pregnant women healthy in winter

गर्भावस्था में ज्यादा देर नहाने से क्या नुकसान होता है?

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नहाने से आपके शरीर की साफ़ सफाई होने के साथ आपकी थकान व् आलस को कम करने में भी मदद मिलती है। क्योंकि नहाने के बाद आप रिलैक्स व् फ्रैश महसूस करते हैं। और रोजाना नहाने की आदत सेहत के साथ आपकी बेहतर दिनचर्या के लिए भी सही होती है। लेकिन रोजाना नहाने और ज्यादा देर तक तक नहाने में फ़र्क़ होता है।

खासकर गर्भवती महिला को इन छोटी छोटी बातों का ध्यान प्रेगनेंसी के दौरान रखना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि कई बार छोटी छोटी लापरवाही गर्भवती महिला के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम गर्भवती महिला यदि ज्यादा देर तक नहाती है तो उसे कौन- कौन से नुकसान पहुँच सकते हैं उस बारे में बताने जा रहे हैं।

पेट में हो सकती है दिक्कत

यदि गर्भवती महिला नीचे बैठकर नहाती हैं और पैरों के भार बैठकर नहाती है। तो प्रेगनेंसी के दौरान पैरों के भार ज्यादा देर तक बैठकर नहाने से पेट में दर्द, पेट में शिशु को दिक्कत आदि परेशानियां हो सकती है।

पैरों में सूजन

यदि गर्भवती महिला बैठकर नहीं बल्कि खड़े होकर शावर के नीचे लम्बे समय तक नहाती है तो इस कारण शरीर का पूरा भार पैरों पर पड़ता है। जिसके कारण पैरों तक ब्लड फ्लो अच्छे से नहीं होता है और महिला को पैरों में दर्द, सूजन आदि की समस्या हो सकती है।

चक्कर आने की सम्भावना

खड़े होकर ज्यादा देर नहाने से पैरों से सिर तक ब्लड फ्लो में रूकावट होने का खतरा होता है क्योंकि पैरों पर दबाव पड़ने के कारण ब्लड पैरों की नसों में जमने लगता है। जिसकी वजह से प्रेग्नेंट महिला को चक्कर आदि का आने का खतरा भी होता है। और ऐसे में यदि महिला चक्कर आने के कारण गिर जानती है तो महिला और शिशु दोनों को बुकसान पहुँचने का खतरा रहता है।

गर्भपात की सम्भावना

प्रेग्नेंट महिला यदि ज्यादा देर तक नहाती है और नहाने के लिए गर्म पानी का इस्तेमाल करती है या गर्मियों में टंकी के पानी से ज्यादा नहाती है। तो इसकी वजह से महिला का गर्भपात होने का खतरा भी बढ़ जाता है। क्योंकि गर्मियों में टंकी का पानी तेज गर्म हो जाता है साथ ही गर्म पानी से नहाने के कारण शरीर के तापमान में बदलाव आ जाता है जिसके कारण गर्भ गिरने का डर होता है।

तबियत खराब होने का खतरा

गर्मी हो, सर्दी हो, बदलता मौसम हो यदि किसी भी समय महिला जरुरत से ज्यादा नहाती है तो इसके कारण महिला को सर्दी, जुखाम आदि होने की दिक्कत हो सकती है। साथ ही प्रेग्नेंट महिला की इम्युनिटी कमजोर होने के कारण बुखार होने की सम्भावना भी बढ़ जाती है।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो प्रेग्नेंट महिला को ज्यादा देर नहाने के कारण हो सकते हैं। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को इन परेशानियों से बचने के लिए ज्यादा देर नहीं नहाना चाहिए। साथ ही गर्भवती महिला को गर्म पानी से नहाने से भी बचना चाहिए।

गर्भावस्था में बिस्कुट खाना कितना नुकसानदायक होता है?

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प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में हार्मोनल बदलाव होने के कारण महिला की जीभ के स्वाद में परिवर्तन आ जाता है जिसकी वजह से गर्भवती महिला की अलग अलग चीजें खाने की इच्छा हो सकती है। ऐसे में कुछ गर्भवती महिलाएं हल्की फुल्की भूख को मिटाने के लिए और क्रेविंग होने के कारण बिस्कुट का सेवन करना पसंद करती है। क्या आप भी माँ बनने वाली है और आप भी ऐसा करती हैं? यदि हाँ, तो आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी में बिस्कुट का सेवन करने से जुडी कुछ बातें बताने जा रहे हैं। जो आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।

गर्भावस्था में बिस्कुट खाना चाहिए या नहीं?

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला स्वस्थ रहना चाहती है तो उसके लिए जरुरी है की महिला अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखें। और खान पान में केवल उन्ही चीजों को शामिल करें जो प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह से नुकसानदायक नहीं हो। साथ ही महिला जो भी खाएं उसे सिमित मात्रा में ही खाएं। अब प्रेगनेंसी में बिस्कुट का सेवन करने के बारे में जानते हैं, प्रेगनेंसी के दौरान महिला यदि बिस्कुट का सेवन करती है।

तो महिला को शुगर और क्रीम से बने बिस्कुट, जरुरत से ज्यादा जिन बिस्कुट में फ्लेवर होता है वो बिस्कुट, बेसन के बिस्कुट आदि नहीं खाने चाहिए। क्योंकि यह बिस्कुट गर्भावस्था के दौरान माँ और बच्चे दोनों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हाँ, यदि आपको डॉक्टर कुछ अलग तरह के बिस्कुट खाने की सलाह देता है तो आप बिस्कुट का सेवन कर सकती है।

गर्भावस्था में बिस्कुट खाने के नुकसान

प्रेगनेंसी के दौरान महिला यदि गलत तरह के या जरुरत से ज्यादा बिस्कुट का सेवन करती है तो इसके कारण महिला को नुकसान पहुँच सकता है। साथ ही महिला को दिक्कत होने के कारण बच्चे पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। तो आइये अब जानते हैं की बिस्कुट खाने से कौन से नुकसान होते हैं।

वजन बढ़ने का खतरा

यदि प्रेग्नेंट महिला शुगर व् क्रीम से बने बिस्कुट का सेवन करती है तो उसमे मीठे की मात्रा की अधिकता होती है। और मीठा अधिक खाने के कारण महिला का वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ने का खतरा रहता है। और महिला का वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ने के कारण प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स होने का खतरा बढ़ जाता है। जिसकी वजह से माँ और बच्चे दोनों को दिक्कत हो सकती है।

जेस्टेशनल डाइबिटीज़

बिस्कुट स्वाद में मीठे होते हैं ऐसे में जरुरत से ज्यादा बिस्कुट खाने के कारण महिला के ब्लड में शुगर लेवल बढ़ सकता है। जिसके कारण महिला को प्रेगनेंसी में जेस्टेशनल शुगर होने का खतरा बढ़ जाता है।

पेट से जुडी समस्या

यदि प्रेग्नेंट महिला बेसन के बिस्कुट का सेवन करती है तो इसके कारण प्रेग्नेंट महिला को पेट में गैस, पेट फूलना, पेट में दर्द जैसी परेशानियां होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

एलर्जी

कुछ बिस्किट्स को बनाने के लिए ग्लूटेन का इस्तेमाल किया जाता है और प्रेगनेंसी के दौरान इस तरह के बिस्कुट खाने से महिला को एलर्जी होने का खतरा अधिक होता है। ऐसे में महिला को ग्लूटेन फ्री बिस्कुट का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में कौन से बिस्कुट खाने चाहिए?

गर्भावस्था के दौरान महिला न्यूट्रिशनल बिस्कुट जैसे की प्रोटीन, कैल्शियम वाले बिस्कुट का सेवन महिला कर सकती है। इसके साथ प्रेग्नेंट महिला आटे से बने बिस्कुट जिन्हे पचाना महिला के लिए आसान हो उन बिस्कुट का सेवन भी गर्भवती महिला कर सकती है।

गर्भवती महिला को बिस्कुट खरीदते समय क्या ध्यान रखना चाहिए?

प्रेग्नेंट महिला को बिस्कुट खरीदते समय बिस्कुट के पैकेट पर देखना चाहिए की यदि बिस्कुट को बनाने में यदि किसी भी आर्टिफिशल चीज का इस्तेमाल किया गया है तो महिला को बिस्कुट नहीं खाने चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान बिस्कुट का सेवन करने से जुड़े कुछ टिप्स, यदि आप भी माँ बनने वाली हैं तो इन सभी बातों का अच्छे से ध्यान रखें ताकि आपको बिस्कुट का सेवन करने के कारण किसी भी तरह का नुकसान नहीं हो।

Harmful effect of eating biscuit in Pregnancy

सर्दियों में चेहरे का कालापन ऐसे दूर करें

सर्दियों का मौसम बहुत से लोगो को पसंद होता है साथ ही सदियों को वो लोग खूब अच्छे से एन्जॉय भी करते हैं। लेकिन सर्दियों के मौसम में स्किन से जुडी बहुत सी परेशानियां होने की समस्या भी हो जाती है। जैसे की स्किन सूखी पड़ने लगती है, स्किन का कालापन बढ़ जाता है, आदि। और ऐसा होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे की सर्दियों में पानी पीने की इच्छा कम ही होती है जिसके कारण त्वचा डीहाइड्रेट हो जाती है।

साथ ही सर्दियों में पसीना कम आता है जिसकी वजह से स्किन पर धूल मिट्टी का जमाव अधिक होता है इसके अलावा सर्दियों में धूप में बैठना सभी को बहुत पसंद होता है और धूप में ज्यादा देर बैठने के कारण धूप की किरणों के असर के कारण स्किन काली पड़ने लगती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे टिप्स के बारे में बताने जा रहे हैं। जिन्हे ट्राई करने से सर्दियों में चेहरे के कालेपन को दूर करने और स्किन को ग्लोइंग व् कोमल बने रहने में मदद मिलती है।

ब्लैक टी

सर्दियों में चेहरे के कालेपन की समस्या को दूर करने का सबसे बेहतरीन उपाय ब्लैक टी है। इसके इस्तेमाल के लिए आप थोड़ी सी ब्लैक टी बनाएं। और उसे ठंडा करके रुई की मदद से तीन से चार बार अपने चेहरे पर लगाएं और उसके बाद चेहरे को सूखने के लिए छोड़ दें। फिर चेहरे को धो दें ऐसा रोजाना करें, ऐसा करने से आपको जरूर फायदा मिलेगा।

नारियल पानी

नारियल पानी का इस्तेमाल करने से भी सर्दियों में चेहरे के निखार को बरकरार रहने में मदद मिलती है। और इसके इस्तेमाल के लिए आप नारियल पानी को रुई की मदद से अपने चेहरे पर लगाएं। और ऐसा रात को सोने से पहले करें, फिर सुबह उठकर साफ़ पानी से मुँह धो लें।

एलोवेरा जैल

चेहरे से जुडी हर एक समस्या के समाधान के लिए एलोवेरा जैल का इस्तेमाल करने बहुत फायदेमंद होता है। एलोवेरा जैल के इस्तेमाल के लिए आप एलोवेरा जैल के ताजे पत्ते को तोड़कर उसके साइड के हिस्सों को काट दें और उसके बाद बीच में से एलोवेरा के पत्ते को काटें। फिर एलोवेरा जैल से चेहरे की मसाज करें और चेहरे को जब तक ऐसे ही छोड़ दें जब तक की चेहरे की स्किन जैल को अच्छे से सोख नहीं लें। उसके बाद साफ़ पानी से चेहरे को धों लें ऐसा रोजाना करें क्योंकि ऐसा करने से आपको सर्दियों में भी अपने चेहरे को ग्लोइंग बने रहने में मदद मिलेगी।

निम्बू का रस और गुलाबजल

निम्बू का रस प्राकृतिक क्लींजिंग एजेंट का काम करता है। ऐसे में निम्बू के रस को एक कटोरी में निकल लें और उसमे कुछ बूंदें गुलाबजल की मिलाएं। उसके बाद इस मिक्सचर को रुई की मदद से अपने चेहरे पर लगाएं। ऐसा आप रात को सोने से पहले करें और सुबह उठकर चेहरे को धो लें। ऐसा करने से भी आपको सर्दियों में चेहरे के कालेपन की समस्या को दूर करने में मदद मिलेगी।

मलाई और हल्दी

आधा चम्मच हल्दी पाउडर में मलाई मिलाएं और इसे अच्छे से मिक्स कर दें। अब इसे फेस मास्क की तरह चेहरे पर लगाएं और बीस मिनट के लिए छोड़ दें। उसके बाद चेहरे को साफ़ पानी से धो दें ऐसा हफ्ते में दो से तीन बार करें। ऐसा करने से आपको सर्दियों में चेहरे को गोरी और निखरी हुई रहने में मदद मिलेगी।

आलू का रस

आलू को कद्दूकस करके उसका रस निकाल लें और उसके बाद इस रस को रुई की मदद से तीन से चार बार चेहरे पर लगाएं और चेहरे को सूखने के लिए छोड़ दें। उसके बाद जैसे ही आपकी स्किन आलू के रस को अच्छे से सोख लें। उसके बाद नोर्मल या फिर गुनगुने पानी से चेहरे को धो लें।

पपीता

पपीते के कुछ टुकड़े लेकर उन्हें अच्छे से पीस लें अब उसमे कुछ बूंदे गुलाबजल की मिलाएं और इसे मास्क की तरह चेहरे पर लगाएं। उसके बाद चेहरे को दस से पंद्रह मिनट तक ऐसे ही छोड़ दें। और फिर चेहरे को साफ़ पानी से धो लें। यह नुस्खा भी सर्दियों में आपके चेहरे को निखरा हुआ रहने में मदद करता है।

बादाम तेल

सर्दियों में रोजाना रात को सोने से पहले चेहरे पर बादाम तेल लगाएं। और सुबह उठकर पानी से चेहरे को धो लें। ऐसा करने से भी सर्दियों में आपके चेहरे की ख़ूबसूरती को बरकरार रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिन्हे ट्राई करने से सर्दियों में भी आपकी स्किन को गोरी और निखरी हुई रहने में मदद मिलती है। ऐसे में आप भी सर्दियों में अपनी स्किन को निखरी हुई बनाने के लिए इन टिप्स को ट्राई कर सकते हैं।

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प्रेगनेंसी के दौरान आँखों के आगे अँधेरा आने के क्या कारण होते हैं?

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गर्भावस्था महिला के लिए एक ऐसा समय होता है जब महिला अलग अलग अनुभव करने के साथ अलग अलग तरह की परेशानियों का सामना भी कर सकती है। और कई परेशानियां तो ऐसी होती है जिनके बारे में महिला सोच भी नहीं सकती है। आज हम एक ऐसी ही परेशानी के बारे में आपसे बात करने जा रहे हैं। जैसे की कुछ गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान आँखों के आगे अँधेरा या धुंधला महसूस होने जैसी परेशानी हो सकती है। तो आइये अब इस परेशानी के होने के कुछ कारण जानते हैं।

ब्लड प्रैशर से जुडी समस्या

जिन गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान ब्लड प्रैशर से जुडी समस्या होती है उन महिलाओं को आँखों के आगे अँधेरा आने जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

भूखे रहना

गर्भावस्था के दौरान महिला को दुगुने पोषक तत्वों की जरुरत होती है ताकि महिला भी स्वस्थ रहें और बच्चे का विकास भी अच्छे से हो। और इसके लिए महिला को अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान रखने की जरुरत होती है। लेकिन यदि महिला अपनी डाइट का ध्यान नहीं रखती है भूखे पेट रहती है तो इस कारण महिला को कमजोरी, थकान, चक्कर आना, सिर दर्द, आँखों के आगे अँधेरा आना जैसी दिक्कतें हो सकती है।

लम्बे समय तक एक ही जगह पर खड़े रहने के कारण

प्रेग्नेंट महिला जब लम्बे समय के लिए एक ही जगह पर खड़ी रहती है तो वजन बढ़ने के कारण पैरों की नसों में ब्लड जम जाता है जिस वजह से सिर से पैर तक ब्लड फ्लो में रूकावट होती है। और ब्लड फ्लो में रूकावट होने के कारण महिला को चक्कर आना, आँखों के आगे धुंधलापन होने जैसी समस्या हो सकती है।

खून की कमी

जिन गर्भवती महिलाओं के शरीर में खून की कमी होती है उन्हें कमजोरी की समस्या अधिक होने के कारण इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

शुगर

जिन गर्भवती महिलाओं को डाइबिटीज़ की समस्या होती है या प्रेगनेंसी के दौरान यह समस्या हो जाती है। उन महिलाओं को भी दौरान प्रेगनेंसी के दौरान आँखों के आगे अँधेरा आने की समस्या हो सकती है।

आँखों से जुडी समस्या

यदि प्रेग्नेंट महिला की आँखे कमजोर होती है तो भी महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आँखों से आंसू निकलने और आँखों के आगे अँधेरा होने की समस्या होने पर महिला को एक बार आँखों की जांच भी करवानी चाहिए।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से प्रेग्नेंट महिला को आँखों के आगे अँधेरा आने की समस्या हो जाती है। ऐसे में इस परेशानी से बचाव के लिए महिला को अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, खून की कमी को पूरा करने के लिए आयरन युक्त डाइट लेनी चाहिए, भरपूर आराम करना चाहिए, ज्यादा देर एक ही पोजीशन में नहीं रहना चाहिए, आदि।