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ब्रेस्टफीड करवाने वाली महिला यह नहीं खाएं

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स्तनपान करवाना माँ और बच्चे दोनों के लिए ही बहुत फायदेमंद होता है। स्तनपान करवाने से महिला को जल्दी फिट होने, वजन कम करने, ब्रेस्ट कैंसर जैसी समस्या से बचे रहने आदि में मदद मिलती है। साथ ही स्तनपान के जरिये नवजात शिशु को वो सभी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मिलते हैं जो की शिशु के बेहतर विकास होने में मदद करते हैं। लेकिन इसके लिए जरुरी होता है की स्तनपान करने वाली महिला उन सभी पोषक तत्वों का भरपूर सेवन करें जो स्तन में दूध की वृद्धि करने में मदद करते हैं साथ ही उन खाद्य पदार्थों को बिल्कुल नहीं खाएं जिससे ब्रेस्टमिल्क में कमी आये या ब्रेस्टमिल्क में पोषक तत्वों की कमी हो। आज इस आर्टिकल में हम आपको उन पोषक तत्वों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका सेवन स्तनपान करवाने वाली महिला को नहीं करना चाहिए।

कैफीन युक्त पदार्थ

दूध पिलाने वाली महिला को चाय, कॉफ़ी, कोल्ड ड्रिंक, सोडा आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इन सभी पदार्थों में कैफीन की अधिकता होती है। और कैफीन का अधिक सेवन करने के बाद जो दूध बच्चा पीता है उसमे पोषक तत्वों की कमी हो जाती है, बच्चे को नींद न आने, चिचिड़ापन होने जैसी परेशानी का सामना भी करना पड़ता है। ऐसे में जितना हो सकें दूध पिलाने वाली महिला कैफीन का सेवन करने से बचना चाहिए।

खट्टे फल

स्तनपान करवाने वाली महिलाओं को खट्टे फलों का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि खट्टे फलों का सेवन करने के बाद जब बच्चा दूध पीता है तो इसकी वजह से बच्चे का पेट खराब होना, बच्चे को गैस होने जैसी परेशानियां होती है। ऐसे में महिला को स्तनपान करवाने के दौरान पपीता, आम, सेब जैसे फलों का सेवन करना चाहिए।

लहसुन

दूध पिलाने वाली महिलाओं को लहसुन का सेवन भी नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके कारण दूध में से अजीब सी गंध आ सकती है साथ ही दूध के स्वाद में भी फ़र्क़ आ सकता है। जिसकी वजह से बच्चा दूध नहीं पीता है या कुछ बच्चे दूध पीने के बाद उल्टी कर देते हैं।

डार्क चॉकलेट

दूध पिलाने वाली महिलाओं को डार्क चॉकलेट का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि डार्क चॉकलेट में भी कैफीन की अधिकता है जिसकी वजह से जब बच्चा दूध पीता है तो उसे बहुत सी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

जिन खाद्य पदार्थों को खाने से गैस बनती है

वो खाद्य पदार्थ जिनके खाने से गैस की समस्या होने का खतरा रहता है। जैसे की मूली, पत्तागोभी, गोभी, व् अन्य सब्जियां या दालें आदि। तो उन खाद्य पदार्थों का सेवन करने से महिला को बचना चाहिए क्योंकि इन खाद्य पदार्थों के कारण आपके शिशु को भी पाचन सम्बन्धी परेशानियां होने का खतरा बढ़ जाता है।

मूंगफली

यदि महिला को मूंगफली का सेवन करने से किसी तरह की एलर्जी होती है या परिवार में किसी को भी मूंगफली खाने से समस्या होती है। तो भी स्तनपान करवाने वाली महिला को मूंगफली का सेवन करने से बचना चाहिए। क्योंकि मूंगफली का असर दूध के जरिये शिशु तक पहुँचता है जिसकी वजह से बच्चे को भी एलर्जी जैसी परेशानी होने का खतरा रहता है।

पुदीना

स्तनपान करवाने वाली महिला पुदीना का सेवन करने से भी बचना चाहिए। क्योंकि पुदीना का सेवन करने से स्तन में दूध की कमी हो सकती है जिसके कारण बच्चे को जरुरत के अनुसार पर्याप्त दूध नहीं मिल पाता है।

मक्का

दूध पिलाने वाली महिलाओं को मक्का का सेवन भी नहीं करना चाहिए क्योंकि मक्का का सेवन करने से भी दूध पीने वाले शिशु को एलर्जी होने की सम्भावना अधिक होती है।

ब्रोकली

यदि दूध पिलाने वाली महिला ब्रोकली का सेवन करती है तो इसकी वजह से बच्चे को दूध पीने के बाद पेट में दर्द व् पेट से जुडी अन्य परेशानियां हो सकती है।

ज्यादा मसालेदार आहार

स्तनपान करवाने वाली महिलाओं को ज्यादा मसालेदार आहार का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि ज्यादा मसालेदार आहार का सेवन करने से बच्चे को पेट में गैस, दर्द, उल्टी आदि की परेशानी होने का खतरा बढ़ जाता है।

अल्कोहल व् धूम्रपान

दूध पिलाने वाली महिलाओं को अल्कोहल या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन भी नहीं करना चाहिए साथ ही महिला को धूम्रपान भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसके कारण महिला के ब्रेस्टमिल्क में कमी आती है साथ ही शिशु के विकास पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।

मछली

ब्रेस्टमिल्क पिलाने वाली महिलाओं को मछली का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि मछली में अमोनिया होता है। और अमोनिया दूध पीने वाले बच्चे के लिए बहुत बुरा होता है।

बासी व् ठंडा भोजन

स्तनपान करवाने वाली महिला को बासी व् ठंडा भोजन भी नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें पोषक तत्व नहीं होते हैं साथ ही इसके कारण महिला को पेट सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा अधिक होता है। इसके अलावा बच्चे को भी इसके कारण दिक्कत हो सकती है।

तो यह हैं कुछ आहार जो दूध पिलाने वाली महिला को नहीं खाने चाहिए। क्योंकि इनके कारण दूध पीने वाले बच्चे को परेशानी होने का खतरा रहता है। जिसकी वजह से बच्चे के विकास में कमी आ सकती है। इन खाद्य पदार्थों को छोड़कर महिला को उन सभी खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए जिसकी वजह से ब्रेस्टमिल्क को बढ़ाने और बच्चे के बेहतर विकास में मदद मिल सके।

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प्रेगनेंसी में फल खाना ज्यादा फायदेमंद होता है या जूस पीना?

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गर्भावस्था के दौरान फलों का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि फल पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं ऐसे में फलों का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। साथ ही फलों में मौजूद पोषक तत्व गर्भनाल की मदद से शिशु तक पहुंचते है शिशु का बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास करने में मदद करते हैं। प्रेगनेंसी के दौरान महिला अलग अलग तरह के फलों का सेवन कर सकती है साथ ही प्रेगनेंसी में कुछ ऐसे फल भी होते हैं जिनकी मनाही होती है। इसके अलावा कुछ गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान फलों का सेवन करना पसंद करती है तो कुछ गर्भवती महिलाओं को फलों का रस पीना पसंद होता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपसे फलों व् फलों के रस जुड़े टिप्स शेयर करने जा रहे हैं।

गर्भावस्था के दौरान कौन से फलों का सेवन करना चाहिए?

प्रेगनेंसी के समय गर्भवती महिला आम, केला, अनार, सेब, अमरुद, संतरा, मौसम्बी, कीवी, स्ट्रॉबेरी, आदि फलों का सेवन कर सकती है। लेकिन ध्यान रखें की फलों का सेवन सिमित मात्रा में किया जाये और सही समय पर किया जाये तभी गर्भवती महिला के लिए फायदेमंद होता है नहीं तो जरुरत से ज्यादा फलों का सेवन गर्भवती महिला की सेहत को नुकसान भी पहुंचा सकता है। इसके अलावा प्रेग्नेंट महिला को कच्चा पपीता, अनानास, अंगूर जैसे फलों का सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान बचना चाहिए।

गर्भावस्था में फलों का सेवन ज्यादा फायदेमंद होता है या फलों का रस पीना

कुछ गर्भवती महिला फलों का सेवन करना पसंद करती है तो कुछ गर्भवती महिलाएं फलों का रस पीना पसंद करती है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला चाहती है की फलों में मौजूद सभी पोषक तत्व महिला व् उसके होने वाले बच्चे को मिलें। तो इसके लिए यह जानना जरुरी होता है। की महिला को प्रेगनेंसी के दौरान फलों का सेवन करना चाहिए या फलों के रस का सेवन।

तो इसका जवाब है की प्रेगनेंसी के दौरान फलों को खाने से पेट भर जाता है लेकिन फलों के रस को पीने से पेट नहीं भरता केवल प्यास बुझ जाती है, फलों को खाने से महिला को पोषक तत्व भरपूर मिलते हैं जबकि जूस में फलों का पल्प और गुद्दा फेक दिया जाता है जिसकी वजह से जूस में पोषक तत्वों की कमी होती है, फलों का सेवन करने से महिला पाचन तंत्र अच्छा रहता है एनर्जी मिलती है जो की जूस पीने से भी होता है लेकिन ऐसा माना जाता है की जूस में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है जिस वजह से महिला के ब्लड में शुगर लेवल के बढ़ने का खतरा रहता है।

तो इन सभी बातों को जानने के बाद यह पता चलता है की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को फलों का रस पीने की बजाय फलों का सेवन करना चाहिए। क्योंकि फलों का सेवन करने से महिला और बच्चे को ज्यादा फायदे मिलते हैं। और ऐसा भी नहीं है की महिला फलों का रस न पीएं बल्कि कभी कभार महिला फलों के रस का सेवन भी कर सकती है। बस इस बात का ध्यान रखें की घर में रखें ताजे फलों का रस निकालकर ही पीएं, बाजार से डिब्बाबंद जूस का सेवन नहीं करें। इसके अलावा बर्फ या मीठा डालकर जूस पीने से भी बचें।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान फलों या फलों का रस कौन ज्यादा फायदेमंद होता है उससे जुड़े टिप्स, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपके लिए भी इन बातों को जानना जरुरी होता है। ताकि आपको और आपके बच्चे दोनों को फलों के बेहतरीन फायदे मिल सकें।

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सर्दियों में प्रेग्नेंट महिला को क्या नहीं खाना चाहिए?

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मौसम के अनुसार खान पान में बदलाव करना अच्छी बात होती है लेकिन साथ ही इस बात का ध्यान रखना भी जरुरी होता है की कौन से मौसम में कौन सी चीज फायदा करती है और कौन सी चीज का सेवन आपको नुकसान पहुंचा सकता है। खासकर प्रेग्नेंट महिला को तो इस बात का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेग्नेंट महिला को सर्दी के मौसम में किन किन चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए उस बारे में बताने जा रहे हैं।

दही

दही की तासीर ठंडी होती है जिस कारण सर्दी में दही का सेवन प्रेग्नेंट महिला को अधिक नहीं करना चाहिए। खासकर रात के समय तो गलती से भी महिला को दही नहीं खानी चाहिए इसके अलावा फ्रिज से निकलें दही का सेवन करने से भी प्रेग्नेंट महिला को बचना चाहिए।

ठंडी चीजें

सर्दियों के मौसम में प्रेग्नेंट महिला को ठंडा पानी, बर्फ या अन्य किसी भी ठंडी चीज जैसे की आइस क्रीम आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसके कारण महिला को सर्दी के कारण होने वाली परेशानियां हो सकती है। साथ ही ठंडी चीजों का असर गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ता है जिसकी वजह से जन्म के समय शिशु को निमोनिया जैसी बीमारी होने के खतरा भी रहता है।

अनार

अधिकतर गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान सुबह उठकर सेब या अनार जैसे किसी न किसी फल का सेवन जरूर करती है। जो की बहुत अच्छी बात होती है लेकिन यदि सर्दी का मौसम चल रहा है तो प्रेग्नेंट महिला को सुबह उठकर खाली पेट अनार का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि अनार की तासीर ठंडी होती है जिसके कारण महिला को कफ कोल्ड होने के साथ शिशु पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ता है और बच्चे को जन्म के समय निमोनिया, सांस लेने में दिक्कत आदि होने का खतरा बढ़ जाता है।

मीठा

सर्दी के मौसम में मीठा खाने की इच्छा बढ़ सकती है लेकिन प्रेग्नेंट महिला को अपनी जीभ के स्वाद को कण्ट्रोल में रखना चाहिए। क्योंकि मीठे का अधिक सेवन करने के कारण प्रेग्नेंट महिला के ब्लड में शुगर लेवल बढ़ सकता है जिस वजह से महिला को जेस्टेशनल शुगर होने का खतरा होता है। साथ ही ज्यादा मीठा खाने के कारण प्रेग्नेंट महिला का वजन भी जरुरत से ज्यादा बढ़ सकता है जो माँ और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक होता है।

फ्राइड फ़ूड

ज्यादातर लोग सर्दी के मौसम में तला भुना, फ्राइड, जंक फ़ूड आदि खाना ज्यादा पसंद करते हैं। लेकिन गर्भावस्था के दौरान महिला को इस आदत को सुधारना चाहिए क्योंकि यह सभी चीजें महिला के लिए शारीरिक परेशानी खड़ी कर सकती हैं साथ ही इनमे किसी तरह के पोषक तत्व नहीं होते हैं जिस वजह से इसके कारण शिशु के विकास में भी कमी आ सकती है।

बासी भोजन

सर्दियों के मौसम में अधिकतर लोग ऐसा मानते हैं की भोजन जल्दी खराब नहीं होता है तो अगले दिन में भी उसी भोजन को खा लेते हैं। लेकिन यदि आप माँ बनने वाली हैं तो आप ऐसा बिल्कुल नहीं करे क्योंकि चाहे सर्दी हो या गर्मी हो बासी भोजन में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है जिस वजह से उसे खाने से कोई फायदा नहीं मिलता है। साथ ही पेट खराब होने जैसी परेशानी होने का खतरा बढ़ जाता है।

चाय कॉफ़ी

सर्दी के मौसम में महिला का चाय कॉफ़ी पीने का मन अधिक कर सकता है खासकर सर्दियों में अदरक वाली चाय पीने की इच्छा अधिक हो सकती है। लेकिन महिला को इसे कण्ट्रोल करना है और जितना हो सके चाय कॉफ़ी का सेवन कम से कम करना है। क्योंकि चाय और कॉफ़ी का सेवन प्रेग्नेंट महिला और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक होता है।

तो यह हैं कुछ चीजें जिनका सेवन प्रेगनेंसी के दौरान सर्दियों के मौसम में गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए। इसके अलावा प्रेग्नेंट महिला को सर्दियों के मौसम में होने वाली परेशानी से बचे रहने के लिए गर्म कपडे पहनने चाहिए, इम्युनिटी बूस्ट करने वाली डाइट लेनी चाहिए।

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प्रेगनेंसी के दौरान स्ट्रेचमार्क्स से बचाव के 10 टिप्स

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स्ट्रेचमार्क्स स्किन पर पड़ने वाले वो निशान है जो स्किन में खिंचाव होने के कारण या स्किन के सिकुड़ने के कारण होते हैं। जैसे की प्रेगनेंसी के दौरान धीरे धीरे गर्भाशय का आकार बढ़ता है जिसके साथ पेट का आकार भी बढ़ता है। और पेट का आकर बढ़ने के साथ स्किन पर लाइन्स बनने लगती है और जैसे जैसे पेट का आकर बढ़ता है वैसे वैसे यह लम्बे लम्बे धब्बों के रूप में दिखाई देने लगती है।

स्ट्रेचमार्क्स के पेट पर होने के कारण पेट काफी भद्दा दिखाई देने लगता है। इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान स्ट्रेच मार्क्स तेहरवें हफ्ते से इक्कीसवें हफ्ते के बीच उभरने शुरू होते हैं। लेकिन यदि प्रेगनेंसी के दौरान स्किन की अच्छे से केयर की जाये तो स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। तो अब जानते हैं उन 10 टिप्स के बारे में जिन्हे ट्राई करने से प्रेगनेंसी के दौरान स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

हाइड्रेटेड रहें

स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से बचे रहने के लिए प्रेग्नेंट महिला को पानी व् अन्य तरल पदार्थों का सेवन भरपूर करना चाहिए। क्योंकि जितना महिला हाइड्रेटेड रहती है उतना ही स्किन में लचीलेपन को बरकरार रहने, स्किन की नमी को बरकरार रहने में मदद मिलती है। और जितना स्किन में नमी और लचीलापन रहता है उतना ही स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

मॉइस्चराइजर लगाएं

प्रेगनेंसी के दौरान स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से बचे रहने के लिए प्रेग्नेंट महिला को पेट पर रोजाना मॉइस्चराइजर लगाना चाहिए। मॉइस्चराइजर लगाने से स्किन की नमी बरकरार रहती है जिससे स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से प्रेग्नेंट महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

डाइट का रखें ध्यान

स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से बचे रहने के लिए प्रेग्नेंट महिला पोषक तत्वों से भरपूर डाइट खानी चाहिए। ताकि स्किन को भरपूर पोषण मिल सकें और स्किन से जुडी परेशानियों से महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बचे रहने में मदद मिल सके। इसके अलावा डाइट में महिला को विटामिन सी युक्त आहार जरूर लेना चाहिए क्योंकि विटामिन सी स्किन में कोलेजन के निर्माण में मदद करता है। जिसे झुर्रियों, स्ट्रेचमार्क्स व् अन्य परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

थोड़ा व्यायाम भी करें

व्यायाम करने से गर्भवती महिला का वजन नियंत्रित रहता है साथ ही महिला के शरीर में ब्लड फ्लो को सही होने में मदद मिलती है। और यदि महिला का वजन कण्ट्रोल रहता है और शरीर में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है तो इससे भी प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

विटामिन डी

स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से बचाव के लिए विटामिन डी भी बहुत फायदेमंद होता है। और विटामिन डी के लिए प्रेग्नेंट महिला को थोड़ी देर धूप जरूर लेनी चाहिए साथ ही विटामिन डी युक्त डाइट का सेवन भी करना चाहिए। जैसे की प्रेग्नेंट महिला विटामिन डी के लिए डेयरी प्रोडक्ट्स आदि को अपनी डाइट में शामिल कर सकती है।

तेल से मालिश करें

प्रेगनेंसी के दौरान ओलिव आयल, नारियल तेल, अरंडी का तेल, आदि पेट पर लगाएं। ऐसा करने से स्किन की नमी बरकरार रहती है। साथ ही इससे स्किन को पोषण भी मिलता है जिससे आपको इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

एलोवेरा जैल

एलोवेरा जैल भी स्किन के लिए बहुत फायदेमंद होता है। ऐसे में महिला मार्किट से लाकर या ताजे एलोवेरा के पत्ते को काटकर जैल पेट पर लगाएं। और रातभर के लिए छोड़ दें और सुबह उठकर पेट साफ़ कर लें। ऐसा करने से भी स्ट्रेचमार्क्स से बचे रहने और स्किन की नमी को बरकरार रखने में मदद मिलती है।

अंडे का सफ़ेद भाग

गर्भावस्था के दौरान कभी कभार अंडे को फोड़कर उसके सफ़ेद भाग को अलग कर लें। उसके बड़ा उसे फेटकर पेट पर लगाएं। और सूखने के बाद पेट को साफ़ पानी से साफ़ कर लें। उसके बाद पेट पर जैतून का तेल लगाएं ऐसा करने से भी प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

निम्बू का रस

प्रेगनेंसी के दौरान निम्बू का रस निकालकर पेट पर लगाएं और सूखने के बाद साफ पानी से पेट को साफ़ कर दें। निम्बू का इस्तेमाल करने से भी आपको स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

आलू का रस

आलू को कद्दूकस करके उसका रस निकाल लें उसके बाद इस रस को पेट पर लगाएं और सूखने के बाद साफ़ कर दें। आलू का रस भी प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले सरीचमार्क्स से बचे रहने का एक बेहतरीन उपाय होता है।

तो यह हैं वो 10 टिप्स जिन्हे प्रेगनेंसी के दौरान ट्राई करने से स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आप भी इन टिप्स को प्रेगनेंसी के दौरान जरूर ट्राई करें ताकि आपको स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से बचे रहने में मदद मिल सके।

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गर्भावस्था में दवाई खाने के तुरंत बाद यह चीजें नहीं खाएं?

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प्रेगनेंसी के दौरान छोटी छोटी चीजों का ध्यान यदि अच्छे से रखा जाये तो महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है। आज हम एक ऐसी ही जरुरी जानकारी आपके साथ शेयर करने जा रहे हैं जो प्रेगनेंसी के दौरान आपके काम आ सकती है। और वो जानकारी है की प्रेगनेंसी के दौरान यदि आप किसी भी तरह की दवाई ले रही है तो दवाई खाने के तुरंत बाद आपको क्या- क्या नहीं खाना या पीना चाहिए।

गर्म पानी

गर्भावस्था के दौरान ज्यादा गर्म पानी पीना महिला और शिशु के लिए नुकसानदायक होता है। साथ ही यदि आप किसी दवाई का सेवन कर रही है तो उसके साथ भी गुनगुना पानी लेने से आपको बचना चाहिए। ऐसा माना जाता है की गर्म पानी के साथ दवाई का सेवन करने से उस दवाई का असर उतना प्रभावशाली नहीं होता है।

खट्टे फल

दवाई का सेवन करने के बाद महिला को खट्टे फल जैसे की निम्बू, संतरा, मौसम्बी, आंवला, अंगूर आदि का सेवन करने से भी बचना चाहिए। क्योंकि दवाई के तुरंत बाद खट्टे फलों का सेवन करने से एलर्जी, कोलेस्ट्रॉल बढ़ने जैसी परेशानी का सामना महिला को करना पड़ सकता है। खट्टे फलों के अलावा महिला को खट्टी चीजें जैसे की अचार, चटनी, इमली आदि का सेवन भी नहीं करना चाहिए।

चाय कॉफ़ी

कुछ लोग चाय कॉफ़ी के साथ भी भी दवाई का सेवन कर लेते हैं लेकिन गर्भवती महिला को यह गलती बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। क्योंकि ऐसा करने के कारण दवाई के utne फायदे महिला को नहीं मिलते हैं जितने की दवाई का सेवन करने से महिला को मिलने चाहिए।

केला

वैसे प्रेगनेंसी के दौरान केले का सेवन फायदेमंद होता है लेकिन दवाइयों के बाद केले का सेवन करने से बचना चाहिए। खासकर यदि महिला ब्लड प्रैशर से जुडी दवाई खा रही होती है तो महिला को बिल्कुल भी केले का सेवन दवाई के बाद नहीं करना चाहिए। क्योंकि दवाई का सेवन करने के बाद केले का सेवन करने से दिल की धड़कन बढ़ने का खतरा रहता है।

डेयरी प्रोडक्ट्स

दवाई का सेवन करने के तुरंत बाद महिला को डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे की दूध, दही, मलाई, पनीर आदि का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि दवाइयों के बाद डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन करने से बॉडी में रिएक्शन होने की सम्भावना होती है जिससे एलर्जी आदि की परेशानी हो सकती है।

नशीले पदार्थ

प्रेग्नेंट महिला को अल्कोहल या किसी अन्य नशीले पदार्थ के साथ भी दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि दवाई और अल्कोहल दोनों में केमिकल मौजूद होते हैं। और यदि एक साथ या दवाई के तुरंत बाद अल्कोहल का सेवन किया जाये तो इसके कारण महिला को शारीरिक दिक्कत होने का खतरा होता है।

सोडा या कोल्ड ड्रिंक

गर्भवती महिला को सोडा या कोल्ड ड्रिंक के साथ या दवाई खाने के तुरंत बाद सोडा या कोल्ड ड्रिंक नहीं पीना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने के कारण महिला को शारीरिक रूप से परेशानी होने का खतरा बढ़ जाता है साथ ही दवाई का भी फायदा नहीं मिलता है।

तो यह हैं कुछ चीजें जिनका सेवन प्रेगनेंसी के दौरान मेडिसिन लेने के बाद नहीं करना चाहिए। यदि महिला इन बातों का ध्यान रखती है तो ऐसा करने से महिला को बहुत सी सेहत सम्बन्धी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा प्रेग्नेंट महिला को खाली पेट या डॉक्टर से बिना सलाह के किसी भी दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए।

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डिलीवरी के बाद इन चीजों को घर में जरूर लेकर आएं

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बच्चे के जन्म के बाद जब महिला घर में आती है तो उसे बहुत सी चीजों की जरुरत होती है। और यह जरूरतें महिला के साथ बच्चे के साथ भी जुडी होती है। ऐसे में यदि डिलीवरी के बाद घर में वह चीजें मौजूद हो तो महिला के तनाव को कम करने में मदद मिलती है। क्योंकि डिलीवरी के बाद महिला की जरुरत का सामान यदि घर में उपलब्ध नहीं हो तो इसे लेकर भी महिला परेशान हो जाती है। तो आइये अब इस आर्टिकल में जानते हैं की डिलीवरी के बाद महिला की जरुरत का कौन कौन सा सामान घर में ले आना चाहिए।

सैनिटरी पैड्स

बच्चे के जन्म के बड़ा महिला को हैवी ब्लीडिंग होती है जिसकी वजह से दिन में महिला को बहुत बार पैड बदलने की जरुरत पड़ती है। ऐसे में कपडा आदि यदि महिला इस्तेमाल करती है तो इसके कारण इन्फेक्शन का खतरा रहता हैं। इसीलिए डिलीवरी के बाद महिला के लिए आपको पहले से ही एक्स्ट्रा सैनिटरी पैड्स लाकर रख देने चाहिए।

महिला के लिए कपडे

बच्चे के जन्म के बाद महिला को थोड़े दिन तक ऐसे कपड़े पहनने चाहिए जिसमे महिला को आराम महसूस हो और बच्चे को भी दूध पिलाने में आसानी हो। ऐसे में में आपको पहले से ही महिला के लिए नर्सिंग ब्रा, दो तीन मैक्सी ड्रेस, एक्स्ट्रा पैंटी आदि ले आनी चाहिए। क्योंकि इनकी जरुरत महिला को जरूर पड़ती है। इसके अलावा यदि ठण्ड का मौसम है तो महिला के लिए जुराबे, स्वेटर, कैप आदि ले आनी चाहिए।

बेल्ट

डिलीवरी के बाद महिला को उठने, बैठने, लेटने, बच्चे को दूध पिलाने में कोई दिक्कत नहीं हो इसके लिए महिला को पेट पर बेल्ट बांधनी चाहिए। और यह बेल्ट डिलीवरी के बाद आपको जरूर ले आनी चाहिए।

आरामदायक पिल्लो

यदि आपके घर में सॉफ्ट पिल्लो हैं तो रहने दें, नहीं तो दो पिल्लो खरीद कर लाएं। एक पिल्लो को महिला पीठ के पीछे लगाकर आराम से बैठ सकती है साथ ही दूसरे पिल्लो पर शिशु को लिटाकर स्तनपान करवा सकती है। ऐसा करने से महिला को शिशु को स्तनपान करवाने में आसानी होती है साथ पीठ में दर्द की समस्या से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

महिला के लिए खाने का सामान तैयार करवाएं

डिलीवरी के बाद महिला को सौंठ, गोंद, ड्राई फ्रूट्स आदि के लड्डू खिलाए जाते हैं जिन्हे खाने से महिला को जल्दी से जल्दी फिट होने व् बच्चे के लिए अच्छे से दूध उतरने में मदद मिलती है। ऐसे में डिलीवरी से पहले ही आप उन लड्डू को बनवाकर रख लें ताकि डिलीवरी के तुरंत बाद से ही महिला को खान पान में किसी तरह की कमी नहीं हो।

बच्चे के लिए जरुरी सामान

बच्चे के जन्म के बाद बच्चे के लिए भी घर में बहुत सी चीज़ओं की जरुरत होती है ऐसे में बच्चे के घर आने से पहले बच्चे के लिए जरूरी सामान भी घर ले आना चाहिए। जैसे की महिला को दूध की बोतल, डाइपर, बच्चे के लिए पालना, बच्चे के लिए कपडे, बच्चे को नहलाने का सामान, बच्चे को दी जाने वाली दवाइयां, बच्चे की मालिश का सामान, आदि।

मालिश वाली व् काम वाली

डिलीवरी के बाद महिला के लिए मालिश वाली और कामवाली भी पहले से ही बुला लें, ताकि डिलीवरी के बाद महिला को घर के काम को लेकर कोई दिक्कत नहीं हो। साथ ही शरीर की मालिश करवाने से महिला को जल्दी से जल्दी फिट होने में मदद मिल सके।

तो यह हैं कुछ चीजें जो डिलीवरी के बाद महिला को चाहिए होती है। यदि महिला की जरुरत का सामान घर में उपलब्ध होता है तो इससे महिला की टेंशन को कम करने में मदद मिलती है।

फर्टिलिटी डाइट महिलाओं और पुरुषों के लिए

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महिला या पुरुष यदि किसी एक की भी फर्टिलिटी अच्छी नहीं होती है या फर्टिलिटी से जुडी कोई समस्या होती है तो इस कारण उनकी फैमिली प्लानिंग में समस्या आ सकती है। क्योंकि फर्टिलिटी अच्छी नहीं होने के कारण महिला कंसीव नहीं कर पाती है यानी की महिला प्रेग्नेंट नहीं हो पाती है। लेकिन ऐसा नहीं है की इस समस्या का कोई उपाय नहीं है। आज हम फर्टिलिटी बढ़ाने के ऐसे ही एक उपाय के बारे में आपसे चर्चा करने जा रहे हैं जो महिला और पुरुषों दोनों की फर्टिलिटी में सुधार कर सकते हैं।

और वो उपाय है कुछ खाद्य पदार्थ, जी हाँ कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ होते हैं जिनका सेवन करने से पुरुष के शुक्राणु की गुणवत्ता को बेहतर करने और महिला की एग क़्वालिटी को सुधारने में मदद करते हैं। और इन खाद्य पदार्थों को फर्टिलटी डाइट कहा जाता है तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की महिलाओं और पुरुषों को फर्टिलिटी में सुधार करने के लिए क्या-क्या खाना चाहिए।

पुरुषों की फर्टिलटी बढ़ाने के लिए फ़ूड

यदि किसी पुरुष के शुक्राणु की गुणवत्ता अच्छी नहीं होती है या शुक्राणु की संख्या में कमी होती है तो इस समस्या को खत्म करने के लिए पुरुष फर्टिलिटी डाइट को अपनी डाइट में शामिल कर सकता है। तो आइये अब जानते हैं की पुरुषों के लिए फर्टिलिटी डाइट कौन सी होती है।

अनार: अनार खाने या अनार का जूस पीने से मेल फर्टिलटी को तेजी से बढ़ाने में मदद मिलती है।

अंडा: विटामिन इ और प्रोटीन से भरपूर अण्डों का सेवन करने से पुरुषों में शुक्राणु की गुणवत्ता को सुधारने और शुक्राणु की संख्या को बढ़ाने में मदद मिलती है।

टमाटर: टमाटर में मौजूद लाइकोपिन शुक्राणु की संख्या, क्वालिटी और स्ट्रक्चर को सुधारने में मदद करता है। साथ ही टमाटर को ऑलिव ऑयल में पकाकर खाने से इसका फायदा और भी बढ़ जाता है।

कद्दू के बीज: जिंक और ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर कद्दू के बीज मेल ऑर्गन्स में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाने में मदद करते हैं। साथ ही रोजाना एक मुट्ठी कद्दू के बीज खाने से टेस्टोस्टेरोन और स्पर्म काउंट को तेजी से बढ़ाने में मदद मिलती है।

अखरोट: ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर अखरोट का सेवन करने से मेल ऑर्गन्स में ब्लड फ्लो को बढ़ाने, शुक्राणु की संख्या को बढ़ाने और शुक्राणु के आकार को बेहतर करने में मदद मिलती है।

लहसुन: एलिसिन से भरपूर लहसुन की तीन से वहार कलियाँ रोज चबाने से मेल ऑर्गन्स में ब्लड फ्लो बेहतर होता है साथ ही शुक्राणु की गुणवत्ता को संख्या को बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

डार्क चॉकलेट: डार्क चॉकलेट में मौजूद गुण भी पुरुषों की फर्टिलिटी को बेहतर करने में मदद करते हैं।

गाजर: गाजर में मौजूद विटामिन ए भी पुरुषों की इस परेशानी को दूर करने में मदद करता है।

पालक: फोलिक एसिड से भरपूर पालक का सेवन करने से भी पुरुष के शुक्राणु की गुणवत्ता और संख्या को बढ़ाने में मदद मिलती है।

केले: ब्रोमिलेन नामक एंजाइम, विटामिन B से भरपूर केले का सेवन करने से भी पुरुष का स्टेमिना, एनर्जी और स्पर्म काउंट बढ़ाने में मदद मिलती हैं।

महिलाओं की फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए डाइट

अनियमित पीरियड्स, तनाव के चलते महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है ऐसे महिलाएं भी इस परेशानी से निजात पाने के लिए अपने खान पान में कुछ खाद्य पदार्थों को शामिल कर सकती है। जिससे महिलाओं की फर्टिलटी को बढ़ाने में मदद मिलती है।

  • हरी सब्जियों का भरपूर सेवन करने से महिलाओं की फर्टिलटी को सुधारने में मदद मिलती है।
  • दालें व् फलियां यदि महिला अपनीओ डाइट में लेती है तो इससे महिला को बहुत फायदे मिलता है।
  • ड्राई फ्रूट्स का सेवन करना भी महिलाओं के लिए फायदेमंद होता है।
  • पुरुषों के साथ महिलाओं के लिए अंडे का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।
  • एवोकाडो का सेवन करने से महिलाओं की एग क़्वालिटी को बेहतर करने में मदद मिलती है।
  • फलों को अपनी डाइट में भरपूर मात्रा में शामिल करने से भी महिला को बहुत फायदा मिलता है।
  • महिलाओं की प्रजनन क्षमता को बेहतर करने के लिए अदरक का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।
  • डेयरी उत्पाद का सेवन करने से भी महिलाओं की प्रजनन क्षमता को बेहतर करने में मदद मिलती है।
  • फाइबर से भरपूर डाइट का सेवन करने से भी महिला को बहुत फायदा मिलता है।
  • महिलाएं प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के लिए दालचीनी का सेवन भी कर सकती है। दालचीनी का सेवन करने से एग क़्वालिटी को बेहतर करने में मदद मिलती है।

तो यह है वो फर्टिलिटी डाइट जो महिला और पुरुष दोनों की फर्टिलिटी में सुधार करने में मदद करती हैं। इसीलिए यदि आपको भी फर्टिलटी प्रॉब्लम के कारण कंसीव करने में दिक्कत आ रही है तो आपको भी इन खाद्य पदार्थों का सेवन जरूर करना चाहिए।

Foods to increase Fertility

सिजेरियन डिलीवरी के बाद ऐसे रखें अपना ध्यान

बच्चे का जन्म होने के बाद महिला को अपनी केयर अच्छे से करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि डिलीवरी के बाद महिला का शरीर काफी कमजोर हो जाता है। और जब महिला ने सिजेरियन तकनीक से बेबी को जन्म दिया हो तो महिला को बच्चे के जन्म के बाद और भी ज्यादा अच्छे से अपना ध्यान रखना चाहिए। ताकि महिला और बच्चे दोनों को ही किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो। आज इस आर्टिकल में हम आपसे सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला को अपना ध्यान कैसे रखना चाहिए इस बारे में बताने जा रहे हैं।

टांकों की करे अच्छे से केयर

सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला को टाँके जरूर लगते हैं ऐसे में यदि टांकों की अच्छे से केयर नहीं की जाये तो इससे टांकों के पकने या उनमे पस यानी सफ़ेद तरल पदार्थ भरने का खतरा रहता हैं। साथ ही महिला को टांकों में इन्फेक्शन होने का खतरा भी रहता है। ऐसे में सिजेरियन डिलीवरी के बाद टांकों से जुडी इस परेशानी से बचने के लिए महिला को टांकों का खास ध्यान रखना चाहिए। और इसके लिए महिला को टांकों पर डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाई लगानी चाहिए, टांकों पर पानी नहीं लगने देना चाहिए, आदि।

सैनिटरी पैड का रखें ध्यान

जब कोई महिला ऑपरेशन के बाद बच्चे को जन्म देती है तो डिलीवरी के बाद महिला को ब्लीडिंग भी अधिक होती है। ऐसे में महिला को सैनिटरी पैड को हर तीन से चार घंटे में बदल देना चाहिए। क्योंकि लम्बे समय तक एक ही पैड का इस्तेमाल करने से महिला को प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है।

ज्यादा झुकें नहीं या शारीरिक श्रम नहीं करें

सिजेरियन डिलीवरी होने के बाद महिला को ज्यादा झुकना नहीं चाहिए, ज्यादा चलना फिरना नहीं चाहिए, घर का काम नहीं करना चाहिए, भारी सामान नहीं उठाना चाहिए, शारीरिक श्रम जैसे की व्यायाम आदि भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसे काम करने से प्रेग्नेंट महिला को ज्यादा ब्लीडिंग, पेट व् पेट के निचले हिस्से में दर्द, कमर में दर्द की परेशानी हो सकती है। ऐसे में ऐसे किसी भी काम को करने से महिला को बचना चाहिए।

उठने बैठने की पोजीशन का ध्यान रखें

डिलीवरी के बाद उठने बैठने में महिला को दिक्कत तो होती ही है ऐसे में यदि महिला अचानक से यदि उठती बैठती है तो इस वजह से महिला को दिक्कत महसूस हो सकती है। ऐसे में किसी भी परेशानी से बचने के लिए महिला को उठते बैठते समय अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, आराम से उठने के साथ महिला को किसी चीज का सहारा लेकर उठना चाहिए।

शिशु को ब्रेस्टफीड करवाते समय रखें ध्यान

बच्चे के जन्म के बाद महिला को शिशु को ब्रेस्टफीड करवाते समय भी कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए जिससे महिला को परेशानी नहीं हो। जैसे की महिला को पेट पर बेल्ट बांधनी चाहिए, कमर को सहारा देकर बैठना चाहिए, पहले गोदी में सिरहाना लेना चाहिए और फिर बच्चे को उसपर लिटाकर बच्चे को दूध पिलाना चाहिए, आदि। ऐसा करने से शिशु को स्तनपान करवाने में महिला और बच्चे दोनों को ही दिक्कत नहीं होती है।

खान पान का ध्यान रखें

सिजेरियन डिलीवरी के तुरंत बाद महिला को खान पान का सबसे ज्यादा ध्यान रखना चाहिए। जैसे की महिला को पोषक तत्वों से भरपूर आहार लेना चाहिए। जिससे महिला को जल्दी से जल्दी फिट होने में मदद मिल सके। लेकिन महिला को घी, दूध, मलाई, मक्खन आदि खाने से बचना चाहिए क्योंकि इससे टांकों को सही होने में समय लगता है। और जैसे ही टाँके ठीक हो जाये वैसे ही डॉक्टर से पूछकर आप अपना खान पान शुरू कर सकते हैं।

सम्बन्ध बनाने से बचें

सिजेरियन डिलीवरी के बाद कम से कम तीन महीने तक सम्बन्ध नहीं बनाएं क्योंकि इसके कारण महिला को दिक्कत हो सकती है। इसके बाद भी सम्बन्ध बनाने से पहले एक बार डॉक्टर से राय जरूर लेनी चाहिए।

आराम करें भरपूर

बच्चे के जन्म के बाद जल्द से जल्द फिट होने के लिए महिला को भरपूर आराम करना चाहिए। क्योंकि महिला जितना ज्यादा आराम करती है उतना ही जल्दी महिला को स्वस्थ होने में मदद मिलती है।

यूरिन नहीं रोकें

डिलीवरी होने के बाद जब भी महिला की बाथरूम जाने की इच्छा हो तो महिला को तुरंत यूरिन पास करके आना चाहिए। क्योंकि यदि महिला यूरिन को रोक लेती है तो इससे पेट में दर्द की समस्या होने के साथ टांकों पर बुरा असर पड़ता है। ऐसे में महिला को यह गक्ति बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए।

कब्ज़ से बचें

डिलीवरी के बाद गर्म पानी, फाइबर युक्त आहार भरपूर मात्रा में लें जिससे पेट साफ़ रहें और कब्ज़ या गैस नहीं हो। क्योंकि कब्ज़ की समस्या होने के कारण महिला को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।

डॉक्टर से जांच

सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला को डॉक्टर जब जब जांच के लिए बुलाएँ महिला को जाना चाहिए इसके अलावा महिला को कोई दिक्कत हो तो भी महिला को डॉक्टर से मिलना चाहिए। ताकि सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला को जल्द से जल्द स्वस्थ होने में मदद मिल सकें।

तो यह हैं कुछ बातें जिनका ध्यान सिजेरियन डिलीवरी होने के बाद महिला को रखना चाहिए। यदि महिला इन बातों का ध्यान ऑपरेशन के बाद बच्चे के जन्म होने पर रखती है। तो इसे महिला को जल्दी से जल्दी रिकवर होने में मदद मिलती है।

Ways to take care after cesarean delivery

सर्दियों के मौसम में प्रेग्नेंट महिला को यह 10 चीजें जरूर खानी चाहिए

मौसम के अनुसार खान पान में बदलाव करना बहुत जरुरी होता है क्योंकि कुछ चीजें मौसमी होती है जो केवल उसी मौसम में मिलती है। और सेहत के लिए बहुत फायदेमंद भी होती है खासकर गर्भवती महिला को मौसम के अनुसार अपने खान पान में जरूर बदलाव करना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला और होने वाले बच्चे दोनों की सेहत को सही रहने में मदद मिल सकें। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको ऐसी दस चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका सेवन सर्दियों के मौसम में प्रेग्नेंट महिला को जरूर करना चाहिए।

हरी सब्जियां

सर्दियों के मौसम में आपको मार्किट में हर तिरह की हरी सब्ज़ी जैसे की पालक, बथुआ, सरसों, चने का साग, आदि मिलती है और यह हरी सब्जियों का ही मौसम होता है। साथ ही हरी सब्जियां आयरन, फोलेट, विटामिन्स, कैल्शियम, एंटी ऑक्सीडेंट्स जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होती है। जो की गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। इसीलिए सर्दियों में एक समय की डाइट में महिला को हरी सब्ज़ी का सेवन जरूर करना चाहिए।

गाजर मूली का सलाद

सर्दियों के मौसम में गाजर, मूली भी भरपूर मात्रा में मिलती है साथ ही यह पोषक तत्वों जैसे की विटामिन्स, आयरन, फाइबर आदि से भी भरपूर होती है। और यह सभी पोषक तत्व प्रेग्नेंट महिला के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। इसीलिए सर्दियों के मौसम में प्रेग्नेंट महिला को एक समय सलाद का सेवन जरूर करना चाहिए।

संतरा

सर्दियों के मौसम में संतरा भी आता है और संतरा फाइबर, आयरन, विटामिन सी जैसे पोषक तत्वों का बेहतरीन स्त्रोत होता है। जो की गर्भवती महिला व् उसके होने वाले बच्चे के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को रोजाना एक संतरे का सेवन जरूर करना चाहिए। लेकिन ध्यान रखें की रात के समय संतरे का सेवन करने से बचें। संतरे के अलावा किन्नू , निम्बू, आदि का सेवन भी सर्दियों में गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए।

केसर दूध

सर्दियों के मौसम में रोजाना गर्भवती महिला को एक गिलास दूध में दो चार रेशे केसर के डालकर दूध भी पीना चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान केसर दूध माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होता है।

शकरकंद

शकरकंद भी सर्दियों के मौसम में आपको आसानी से मिल जाता है। साथ ही शकरकंद का सेवन करना प्रेग्नेंट महिला और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होता है। क्योंकि शकरकंद में फाइबर, विटामिन्स, कैल्शियम आदि भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं।

ड्राई फ्रूट्स

सर्दियों के मौसम में गर्भवती महिला चाहे तो ड्राई फ्रूट्स का सेवन भी कर सकती है। क्योंकि सर्दियों के समय ड्राई फ्रूट्स का सेवन करने से गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

अंडा

प्रेगनेंसी के दौरान अंडे का सेवन बिल्कुल सेफ होता है लेकिन कुछ महिलाएं हो सकता है की गर्मी के मौसम में अंडे का सेवन नहीं करें। लेकिन यदि सर्दी का मौसम है तो गर्भवती महिला को अंडा रोजाना जरूर खाना चाहिए। क्योंकि अंडे में कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम, फैटी एसिड, प्रोटीन होते हैं। जो माँ और बच्चे दोनों की सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं।

मशरूम

सर्दियों के मौसम में गर्भवती महिला को मशरूम भी जरूर खाने चाहिए। क्योंकि मशरूम विटामिन डी का बेहतरीन स्त्रोत होता है। और विटामिन डी प्रेग्नेंट महिला और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों के लिए बहुत जरुरी होता है।

नॉन वेज

यदि प्रेग्नेंट महिला नॉन वेज खा लेती है तो प्रेग्नेंट महिला को सर्दियों के मौसम में नॉन वेज का सेवन भी जरूर करना चाहिए। खासकर मछली खाना सर्दियों में बहुत फायदेमंद होता है।

दालें

सर्दियों के मौसम में दाल में घी डालकर भी प्रेग्नेंट महिला को जरूर खाना चाहिए। क्योंकि दाल और घी दोनों ही पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। जो प्रेग्नेंट महिला और बच्चे दोनों को ऊर्जा से भरपूर रखने में मदद करते हैं।

तो यह हैं वो दस चीजें जो सर्दियों के मौसम में प्रेग्नेंट महिला को जरूर खानी चाहिए। और सर्दियों के मौसम में इन चीजों का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला व् उसके होने वाले बच्चे को बहुत से फायदे मिलते हैं।

Diet tips for winter pregnancy

प्रेगनेंसी में थकान और कमजोरी होने के कारण और उपाय

गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में लगातार हार्मोनल बदलाव होते हैं जिस वजह से महिला को तरह तरह की शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। और कुछ परेशानियां ऐसी होती है जिसका सामना अधिकतर गर्भवती महिलाओं को करना पड़ता है। जैसे की कब्ज़ होना, पेट में हल्का फुल्का दर्द रहना, कमजोरी व् थकान की समस्या होना आदि। आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली थकान व् कमजोरी की समस्या के बारे में बात करने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी में थकान व् कमजोरी होने के कारण

  • प्रेग्नेंट होने के तुरंत बाद से ही गर्भवती महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव होने शुरू हो जाते हैं और बॉडी में तेजी से हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को थकान व् कमजोरी की समस्या हो सकती है।
  • गर्भवती महिला का खान पान सही न होने के कारण महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है और पोषक तत्वों की कमी होने के कारण महिला को यह परेशानी होती है।
  • यदि प्रेग्नेंट महिला सारा दिन काम करती रहती है तो इस कारण भी महिला को यह दिक्कत होती है।
  • गर्भवती महिला का वजन बढ़ने के कारण, शरीर में ब्लड फ्लो तेजी से होने के कारण भी यह दिक्कत हो सकती है।
  • गर्भ में एक से ज्यादा शिशु होने के कारण भी यह दिक्कत हो सकती है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला को यदि शुगर, ब्लड प्रैशर या अन्य शारीरिक परेशानी होती है तो इस वजह से भी महिला को थकान व् कमजोरी की समस्या अधिक हो सकती है।
  • जिन गर्भवती महिलाओं के शरीर में खून की कमी होती है उन महिलाओं को यतः दिक्कत अधिक हो सकती है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान आराम करना बहुत जरुरी होता है लेकिन यदि महिला आराम नहीं करती है, नींद पूरी नहीं लेती है तो इससे शरीर थका हुआ महसूस करता है।
  • शरीर में पानी की कमी का होना भी इस परेशानी का कारण होता है।
  • जो गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान तनाव की समस्या से ग्रसित होती है उन महिलाओं को भी यह दिक्कत होती है।
  • गर्भ में एक से ज्यादा शिशु होने के कारण भी महिला को यह दिक्कत होती है।
  • सारा दिन केवल आराम करने या एक ही पोजीशन में बैठे रहने के कारण भी महिला को यह परेशानी हो सकती है।

प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली थकान व् कमजोरी की समस्या को दूर करने के उपाय

यदि आप प्रेग्नेंट हैं और आपको प्रेगनेंसी के दौरान थकान व् कमजोरी की समस्या अधिक हो रही है। तो कुछ आसान टिप्स कला ध्यान रखकर आप इस परेशानी से निजात पा सकती है। जैसे की:

पोषक तत्वों से भरपूर आहार

गर्भवती महिला को आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन्स व् अन्य पोषक तत्वों से भरपयर आहार लेना चाहिए। साथ ही सही समय व् सही मात्रा में अपनी डाइट लेनी चाहिए। ऐसा करने से शरीर में पोषक तत्वों की मात्रा सही रहती है जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में ऊर्जा की कमी नहीं होती है और महिला को इस दिक्कत से बचे रहने में मदद मिलती है।

हाइड्रेटेड रहें

खाने से साथ महिला को इस बात का भी ध्यान रखना है की महिला के शरीर में पानी की कमी भी न हो। और इसके लिए महिला को एक दिन में आठ से दस गिलास पानी, नारियल पानी जूस आदि का सेवन करना चाहिए। यदि महिला के शरीर में पानी की कमी नहीं होती है तो भी महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

नींद ले भरपूर

थकान व् कमजोरी की समस्या को दूर करने के लिए प्रेग्नेंट महिला को खान पान के साथ आराम का भी भरपूर ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि भरपूर आराम करने से भी प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने, शरीर के अंगो को आराम पहुंचाने, शरीर की क्रियाओं को बेहतर तरीके से काम करवाने में मदद मिलती है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को थकान व् कमजोरी की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

व्यायाम व् योगासन

ऐसा नहीं की सारा दिन लेकिन प्रेग्नेंट महिला को दिन भर में थोड़ा बहुत व्यायाम व् योगासन जरूर करना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से बॉडी में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है, मांसपशियाँ रिलैक्स होती हैं, आदि। जिससे प्रेग्नेंट महिला को थकाव व् कमजोरी से बचे रहने में मदद मिलती है।

तनाव नहीं लें

थकान व् कमजोरी की समस्या से बचने के लिए प्रेग्नेंट महिला को जितना हो सके तनाव नहीं लेना चाहिए और खुश रहना चाहिए। क्योंकि मानसिक रूप से फ्रेश रहने से भी प्रेग्नेंट महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। प्रेग्नेंट महिला तनाव से बचने के लिए मैडिटेशन कर सकती है।

बॉडी को ज्यादा नहीं थकाएं

थकान व् कमजोरी की समस्या से बचे रहने के लिए प्रेग्नेंट महिला को उतना ही काम करना चाहिए जितना महिला से हो सकता है और शरीर पर ज्यादा जोर नहीं डालें। इसके अलावा जब भी महिला को काम करते समय थकावट हो तो पहले महिला को थोड़ा आराम करना चाहिए उसके बाद काम करना चाहिए।

वजन को ज्यादा नहीं बढ़ने दें

गर्भवस्था के दौरान यदि महिला अपने वजन को न तो जरुरत से ज्यादा बढ़ने देती है और न हो कम होने देती है तो भी महिला को थकान व् कमजोरी की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

एक्टिव रहें

प्रेग्नेंट महिला को थकान व् कमजोरी की समस्या से बचने के लिए एक्टिव भी रहना चाहिए। जैसे की महिला को केवल पूरा दिन सोना ही नहीं चाहिए, बहुत देर तक एक ही पोजीशन में नहीं बैठे रहना चाहिए, आदि। यदि प्रेग्नेंट महिला इन बातों का ध्यान रखती है तो ऐसा करने से भी महिला को थकान व् कमजोरी की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान थकान व् कमजोरी होने के कारण व् इस परेशानी से बचाव के आसान उपाय, तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और इस दिक्कत से परेशान हैं तो आप भी इन टिप्स को ट्राई करके इस परेशानी से निजात पा सकते हैं।

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