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घर में प्रेगनेंसी टेस्ट करने के लिए कितने समय का इंतज़ार करना चाहिए ताकि रिजल्ट सही हो

पीरियड्स मिस होने के बाद महिला के मन में सबसे पहले यही बात आती है की कहीं महिला का गर्भ तो नहीं ठहर गया है। और इस बात का पता लगाना आज कल मुश्किल भी नहीं है। क्योंकि ऐसे बहुत से घरेलू तरीके हैं जिनसे महिला इस बात का पता लगा सकती है की महिला गर्भवती है या नहीं है। साथ ही मार्किट में आसानी से किसी भी मेडिकल स्टोर से आपको प्रेगनेंसी टेस्ट किट भी मिल जाती है।

जिससे टेस्ट करके आप इस बात को कन्फर्म भी कर सकते हैं। की पीरियड्स मिस होने का कारण आपकी प्रेगनेंसी है या नहीं। लेकिन सही रिजल्ट के लिए जरुरी होता है की महिला सही समय पर प्रेगनेंसी टेस्ट करें जिससे प्रेगनेंसी टेस्ट का रिजल्ट सही आने के चांस भी अधिक हो। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी टेस्ट करने का सही समय कौन सा होता है इस बारे में बताने जा रहे हैं।

किस समय प्रेगनेंसी टेस्ट करना होता है सबसे सही?

जैसे ही महिला के पीरियड्स मिस होते हैं तो उसके बाद महिला को चार से पांच दिन का इंतज़ार करना चाहिए। क्योंकि पीरियड्स का चार पांच दिन ऊपर नीचे होना आम बात होती है। और उसके बाद महिला को प्रेगनेंसी टेस्ट किट को डेट चेक करके लाना चाहिए ताकि आपको सही रिजल्ट मिल सके। फिर यूरिन का नमूना लेकर महिला को प्रेगनेंसी टेस्ट करना चाहिए।

महिला चाहे तो घरेलू तरीको का इस्तेमाल करके भी प्रेगनेंसी टेस्ट कर सकती है। सही रिजल्ट के लिए सही समय का ध्यान रखना भी जरुरी होता है इसके लिए महिला को सुबह के सबसे पहले यूरिन का इस्तेमाल करना चाहिए। क्योंकि सुबह के पहले यूरिन में HCG हॉर्मोन का लेवल ज्यादा होता है जिससे रिजल्ट सही आने के चांस भी अधिक होते हैं।

ध्यान रखें की यदि एक बार टेस्ट करने पर टेस्ट किट में लाइन हल्की आती है या नहीं आती तो आपको एक या दो दिन के गैप पर दोबारा टेस्ट करना चाहिए। ताकि आपको सही परिणाम मिल सके। उसके बाद यदि टेस्ट किट या घरेलू उपाय करने के बाद यदि कोई रिजल्ट नहीं आता है या फिर आता है तो महिला को दोनों ही केस में डॉक्टर से मिलना चाहिए। ताकि महिला को पीरियड्स नहीं होने के सही कारण का पता चल सके। और यदि महिला प्रेग्नेंट हैं तो महिला का शुरुआत से सही ट्रीटमेंट शुरू हो सकें।

कैसे करें प्रेगनेंसी टेस्ट

  • घर पर प्रेगनेंसी टेस्ट किट लाकर उसे समतल जगह पर रखें।
  • उसके बाद ड्रॉपर की मदद से यूरिन की दो से तीन बूंदें यूरिन डालने वाली जगह पर डालें।
  • फिर आपको कम से कम पांच मिनट तक इंतज़ार करना है।
  • उसके बाद यदि आपको टेस्ट किट में एक लाइन नज़र आती है तो इसका मतलब होता है की आपका टेस्ट नेगेटिव हैं और यदि आपको दो लाइन दिखाई देती हैं तो इसका मतलब होता है की टेस्ट पॉजिटिव है।

How long to wait for the pregnancy test so that the result is correct

आजकल प्रीमैच्योर डिलीवरी क्यों नहीं हो रही है?

प्रेगनेंसी के दौरान हर महिला यही चाहती है की उसका होने वाला शिशु स्वस्थ, हष्ट पुष्ट, तंदरुस्त, हो और डिलीवरी के समय शिशु को किसी भी तरह की परेशानी न हो। लेकिन फिर भी कुछ केस में ऐसा होता है की शिशु डिलीवरी का समय आने से पहले ही जन्म ले लेता है जिसे प्रीमैच्योर डिलीवरी कहा जाता है। लेकिन आज कल ऐसा बहुत कम हो रहा है जिसकी वजह से बच्चों के स्वस्थ जन्म लेने के चांस भी बढ़ रहे है। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रीमैच्योर डिलीवरी क्या होती है और आज कल समय पूर्व बच्चे का जन्म कम क्यों हो रहा है इस बारे में बताने जा रहे हैं।

प्रीमैच्योर डिलीवरी क्या होती है?

गर्भ में शिशु के कम से कम 36 हफ्ते रहने के बाद जब शिशु का जन्म होता है तो यह डिलीवरी का बिल्कुल सही समय होता है। लेकिन यदि आपकी डिलीवरी 36 हफ्ते से पहले हो जाती है तो इसे प्री मैच्योर डिलीवरी कहा जाता है।

आज कल प्रीमैच्योर डिलीवरी कम क्यों हो रही है?

जैसे ही महिला की प्रेगनेंसी की न्यूज़ कन्फर्म हो जाती है उसके बाद से ही महिला को हर कोई राय देने लगता है की प्रेगनेंसी के दौरान महिला अपना पूरा ख्याल रखें। क्योंकि महिला जितना अच्छे से अपना ध्यान रखती है उतना ही ज्यादा ज्यादा शिशु के स्वस्थ होने के चांस बढ़ते हैं और डिलीवरी के दौरान महिला को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है। लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी में आपको ऐसे बहुत से काम करने पड़ सकते हैं जिसकी वजह से आपको प्रेगनेंसी के दौरान दिक्कत हो सकती है।

लेकिन आज कल ऐसा होने का खतरा बहुत कम हो गया है क्योंकि कोरोना के भय के कारण लोग अपनी दुगुनी केयर कर रहे हैं, जिसकी वजह से प्रेग्नेंट महिला भी अपना ज्यादा अच्छे से ख्याल रख रही है, इसके अलावा और भी ऐसे कारण है जिनकी वजह से बच्चे के जन्म से पहले होने का खतरा कम हो गया है। तो आइये अब विस्तार से उन कारणों पर चर्चा करते हैं।

महिला कर रही है भरपूर आराम

गर्भावस्था के दौरान महिला को भरपूर आराम करने की सलाह दी जाती है क्योंकि महिला जितना आराम करती है उतना ही ज्यादा प्रेगनेंसी में आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है। पहले महिला को घर और बाहर के कामों के चलते आराम करने का समय कम मिलता था। लेकिन आज कल घर में जब सब इक्कठे हैं तो हर कोई महिला को आराम करने की सलाह देता है और महिला भरपूर आराम करती है। जिससे बच्चे के समय से पहले जन्म होने का खतरा कम हो गया है।

खान पान का रखा जा रहा है अच्छे से ध्यान

खान पान के प्रति बरती गई लापरवाही के कारण माँ व् बच्चे दोनों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है जिसकी वजह से डिलीवरी में भी परेशानियां बढ़ सकती है। लेकिन आज कल महिला अपने खान पान का ध्यान अच्छे से रख रही है। समय से अपनी डाइट ले रही है, इम्युनिटी बढ़ी रहे इसके लिए डाइट ले रही है, जिससे माँ और बच्चे दोनों के स्वस्थ रहने के चांस भी बढ़ रहे हैं। और बच्चे के समय से पहले जन्म लेने की समस्या कम हो रही है।

इन्फेक्शन से बचाव की है पूरी तैयारी

गर्भावस्था के दौरान साफ़ सफाई का ध्यान न रखा जाये, इम्युनिटी का ध्यान न रखा जाये तो इसके कारण इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। और इन्फेक्शन के कारण बच्चे के समय से पहले जन्म होने का खतरा भी बढ़ जाता है। लेकिन आज कल कोरोना से बचाव के लिए महिला साफ सफाई का ध्यान दुगुना रख रही है और इम्युनिटी बढ़ाने के लिए हर उपाय कर रही है जिससे संक्रमण का खतरा कम हो रहा है। और समय से पहले बच्चे का जन्म का खतरा भी कम हो गया है।

घरवालो का मिल रहा है सहयोग

प्रेगनेंसी के दौरान घरवालों का भरपूर सहयोग यदि मिल जाता है तो इससे प्रेगनेंसी और आसान हो जाती है और समय कहा जाता है पता ही नहीं चलता है। साथ ही महिला को यदि सपोर्ट मिलता है, तो इससे प्रेगनेंसी को समझने में आसानी होती है जिससे प्रेगनेंसी में आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है। और जब प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स कम होती है तो प्रीमैच्योर डिलीवरी होने का चांस भी कम हो जाते हैं।

स्ट्रेस हो रहा है कम

आज कल प्रीमैच्योर डिलीवरी न होने का एक कारण महिला को स्ट्रेस का नहीं होना भी है। क्योंकि घर में रहने के कारण सभी का साथ मिल रहा है, महिला अकेली नहीं है, महिला अपने अनुभवों को शेयर कर रही है जिससे तनाव कम हो गया है। और तनाव कम होने के कारण प्रेगनेंसी और डिलीवरी में आने वाली परेशानियाना कम हो गई है।

दवाइयों का सेवन

आज कल महिला भी अपनी दुगुनी केयर कर रही है जिसके चलते महिला शरीर में पोषक तत्वों की कमी न हो इसके लिए महिला अपनी सभी दवाइयों का सेवन समय से कर रही है। और दवाइयों का सेवन समय से करने पर महिला और बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल रही है जिसकी वजह से समय से पहले बच्चे के जन्म होने का खतरा कम हो गया है। इसके अलावा घर में सभी के होने के कारण महिला यदि दवाई का सेवन करना भूल जाती है तो घर वाले महिला को याद दिला देते हैं।

लापरवाही का खतरा हो गया है कम

आजकल माहमारी से बचने के लिए भागदौड़ कम हो गई है, यात्रा नहीं कर सकते हैं, घर में कोई काम करते हैं तो गर्भवती महिला के लिए वो सही है या नहीं इसे लेकर घर वाले बता देते हैं, जिसकी वजह से प्रेगनेंसी में होने वाली लापरवाही का खतरा भी कम हो गया है। और महिला जितनी लापरवाही कम बरतती है उतना ही समय से पहले बच्चे के जन्म होने का खतरा भी कम होता है।

प्रेगनेंसी और डिलीवरी की ज्यादा जानकारी मिल रही है

आपको यह तो पता ही होगा की जितनी ज्यादा जानकारी हमे किसी चीज के बारे में हमे होती है उतना ही हमे उसे समझने में मदद मिलती है। वैसे ही घर में रहने के कारण महिला को हर तरफ से प्रेगनेंसी और डिलीवरी में अपनी केयर किस तरह की जाये उसकी दुगुनी जानकारी महिला को मिल रही है। जिससे महिला को प्रेगनेंसी और डिलीवरी दोनों में आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिल रही है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से प्री मैच्योर डिलीवरी का खतरा बहुत ही कम हो गया है। तो यदि आप भी कोरोना काल में प्रेग्नेंट हैं तो आप भी अपना अच्छे से ध्यान रखें ताकि आपको इस माहमारी से बचने में मदद मिल सके और आप एक स्वस्थ शिशु को जन्म दें।

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प्रेग्नेंट महिला को मच्छरों से बचाव करना क्यों जरुरी है?

गर्भावस्था के दौरान महिला को अपनी सेहत सही रखने के लिए छोटी से छोटी बात का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि यदि महिला प्रेगनेंसी के दौरान थोड़ी सी भी लापरवाही बरतती है तो इसके कारण माँ व् बच्चे दोनों को सेहत सम्बन्धी दिक्कत होने का खतरा रहता है। आज इस आर्टिकल में हम प्रेग्नेंट महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियों से बचने के लिए ही कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को मच्छरों से बचकर क्यों रहना चाहिए।

संक्रमण का रहता है खतरा

यदि आपको मच्छर काटते हैं, मच्छर आपके खाद्य पदार्थ पर बैठते हैं तो इसके कारण बैड बैक्टेरिया के फैलने का खतरा रहता है। जो आपके द्वारा लिए जाने वाले आहार के माध्यम से या स्किन के संपर्क में आने के कारण बॉडी में पहुँच जाता है। जिससे प्रेग्नेंट महिला के संक्रमित होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

बिमारियों का रहता है खतरा

गर्भवती महिला यदि मच्छरों से बचाव नहीं करती है तो इसके कारण मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियां जैसे की मलेरिया, डेंगू आदि होने का खतरा भी प्रेग्नेंट महिला को रहता है। और प्रेगनेंसी के दौरान महिला का किसी बिमारी से ग्रसित होना बच्चे पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

खुजली की परेशानी अधिक होती है

जब मच्छर काटते हैं तो उस जगह पर दाने बनने लगते हैं, स्किन लाल हो जाती है, खुजली होने लगती है, आदि। ऐसे में खुजली अधिक होने के कारण स्किन पर जख्म बनने की समस्या हो सकती है। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए प्रेग्नेंट महिला को मच्छरों से बचकर रहना चाहिए।

प्रेगनेंसी में मच्छरों से बचाव के टिप्स

  • शाम के समय घर के खिड़की दवाज़े बंद रखें जिसेस घर में मच्छर प्रवेश न कर सकें।
  • ऐसे कपडे पहने जिससे आपके हाथ पैर अच्छे से ढकें रहें।
  • मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
  • घर में कपूर जलाएं।
  • ऐसे उत्पादों का इस्तेमाल स्किन के लिए नहीं करें जिनमे से तेज गंध आती हो।
  • मच्छर मारने वाले रैकेट का इस्तेमाल करें।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में मच्छर से बचकर क्यों रहना चाहिए और मच्छरों से बचने के उपाय। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान मच्छरों के कारण होने वाली परेशानी से प्रेग्नेंट महिला को बचे रहने में मदद मिल सके।

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प्रेगनेंसी में नारियल तेल कितना फायदेमंद होता है?

प्राकृतिक उत्पादों का इस्तेमाल करना सेहत व् स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है। खासकर जब बात प्रेगनेंसी की हो तो इन उत्पादों का इस्तेमाल करना और भी ज्यादा फायदेमंद होता है। तो आज इस आर्टिकल में हम आपसे एक ऐसे ही प्राकृतिक उत्पाद के बारे में बात करने जा रहे हैं। और वो उत्पाद है नारियल का तेल, नारियल का तेल खाने से, स्किन पर लगाने से, बालों पर लगाने से, सभी तरह से फायदेमंद होता है। क्योंकि इसमें पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं।

नारियल तेल में मौजूद न्यूट्रिएंट्स

नारियल तेल में विटामिन्स, एंटी ऑक्सीडेंट्स, एंटी फंगल, एंटी बैक्टेरियल गुण मौजूद होते हैं जो की सेहत और सौंदर्य दोनों को बरकरार रखने में मदद करते हैं।

क्या प्रेग्नेंट महिला नारियल तेल का इस्तेमाल कर सकती है?

जी हाँ, प्रेगनेंसी के दौरान नारियल तेल का इस्तेमाल करना बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि इससे महिला को स्किन केयर, बालों से सम्बंधित, सेहत से जुड़े बहुत से फ़ायदे मिलते हैं। साथ ही नारियल तेल को खाने के लिए इस्तेमाल करने से माँ के साथ गर्भ में शिशु को भी बेहतर विकास में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में नारियल का तेल इस्तेमाल करने से मिलने वाले फायदे

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला नारियल तेल का इस्तेमाल करती है तो इससे महिला और बच्चे दोनों को बहुत से फायदे मिलते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं प्रेगनेंसी में नारियल तेल का सेवन करने से कौन से फायदे मिलते हैं।

स्किन का रूखापन होता है दूर

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला को स्किन रूखी रूखी महसूस होती है तो महिला हाथ पैरों के साथ चेहरे की स्किन पर भी नारियल तेल का इस्तेमाल कर सकती है। इसके लिए महिला रात को सोने से पहले स्किन की नारियल तेल से मसाज करें और सुबह नहाते समय उसे साफ़ कर दें। ऐसा करने से महिला की स्किन की कोमलता को बरकरार रखने में मदद मिलेगी।

स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से मिलता है निजात

गर्भावस्था के दौरान पेट का आकार बच्चे के बढ़ते विकास के साथ बढ़ता जाता है। ऐसे में पेट की स्किन में खिंचाव बढ़ने के कारण महिला को स्ट्रेचमार्क्स की समस्या हो जाती है। लेकिन यदि महिला प्रेगनेंसी के दौरान पेट की स्किन पर नारियल तेल लगाती है तो ऐसा करने से महिला को स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

बालों के लिए है फायदेमंद

प्रेगनेंसी के दौरान कुछ महिलाओं को बालों के झड़ने जैसी परेशानी भी हो सकती है। ऐसे में यदि महिला बालों के लिए नारियल तेल का इस्तेमाल करती है। तो इससे महिला के बालों को मजबूती मिलती है जिससे प्रेग्नेंट महिला को इस परेशानी से बचे रहने में फायदा होता है।

सेहत के लिए है फायदेमंद

नारियल तेल का इस्तेमाल खाने में करने से भी महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी बहुत से फ़ायदे मिलते हैं। जैसे की महिला की इम्युनिटी मजबूत होती है जिससे महिला को संक्रमण व् बिमारियों से बचे रहने में मदद मिलती है, कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल रहता है, वजन नियंत्रित रहता है, आदि।

प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियां होती है कम

गर्भावस्था के दौरान महिला को बहुत सी परेशानियां होती है जैसे की मॉर्निंग सिकनेस, कब्ज़, सीने में जलन, आदि। लेकिन यदि महिला अपने खाने में एक से दो चम्मच नारियल तेल को शामिल करती है तो ऐसा करने से महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है।

गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में करता है मदद

नारियल तेल का इस्तेमाल करने से केवल गर्भवती महिला को ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चे को भी बहुत से फायदे मिलते हैं। क्योंकि जब नारियल तेल का सेवन महिला करती है तो इससे बच्चे को भी भरपूर पोषक तत्व मिलते हैं, बच्चे की इम्युनिटी बढ़ती है, बच्चे का विकास बढ़ता है, आदि।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान नारियल तेल का सेवन करने के फायदे, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी नारियल तेल का इस्तेमाल और सेवन प्रेगनेंसी के दौरान जरूर करना चाहिए। ताकि माँ व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें।

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गर्भावस्था के दौरान स्किन केयर के लिए किन चीजों का इस्तेमाल करें

ख़ूबसूरती बढ़ाने के लिए आमतौर पर सभी लोग किसी न किसी ब्यूटी प्रोडक्ट का इस्तेमाल जरूर करते हैं। लेकिन जब बात प्रेगनेंसी की हो तो महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान स्किन केयर के लिए कौन सी चीजों का इस्तेमाल करना है और कौन सी का नहीं इस बात का ध्यान रखना जरुरी होता है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान लगातार बॉडी में हार्मोनल बदलाव हो रहे होते हैं।

ऐसे में स्किन की चमक को बढ़ाने के लिए प्रेग्नेंट महिला के लिए जरुरी होता है की महिला स्किन केयर के लिए ऐसे प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें जिससे स्किन को किसी तरह का नुकसान नहीं हो। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में महिला को कौन से ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना चाहिए।

ब्रांड का प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करें

गर्भावस्था के दौरान महिला जिस भी ब्यूटी प्रोडक्ट का इस्तेमाल करती है वो लोकल नहीं होना चाहिए क्योंकि इसके कारण महिला को स्किन सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा रहता है। ऐसे में महिला को कंपनी के प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना चाहिए और हो सके तो जिन प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल आप प्रेगनेंसी के पहले करती थी उन्ही प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें।

क्योंकि यदि आप कंपनी के प्रोडक्ट का इस्तेमाल करती है लेकिन प्रोडक्ट्स बदल देती है तो हो सकता है वो आपकी स्किन को सूट नहीं करें और आपको स्किन सम्बन्धी परेशानी हो। ऐसे में महिला को जितना हो सके महिला को प्रेगनेंसी में स्किन सम्बन्धी परेशानी से बचने के लिए उन्ही कंपनी के प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना चाहिए जिनका इस्तेमाल महिला प्रेगनेंसी से पहले करती थी।

आयुर्वेदिक चीजों का करें इस्तेमाल

मार्किट में बहुत से आयुर्वेदिक स्किन केयर प्रोडक्ट्स भी मिलते हैं जिन्हे बनाने के लिए आयुर्वेदिक चीजों का इस्तेमाल किया जाता है जो स्किन पर बुरा असर नहीं डालती है। ऐसे में महिला प्रेगनेंसी के दौरान स्किन को स्वस्थ और हेल्दी रखने के लिए आयुर्वेदिक चीजों का इस्तेमाल कर सकती है।

घरेलू नुस्खे करें ट्राई

बहुत से ऐसे घरेलू तरीके भी होते हैं जिनका इस्तेमाल करने से प्रेगनेंसी के दौरान स्किन को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है। जैसे की एलोवेरा जैल, गुलाब जल, कच्चा दूध, आलू का रस, खीरा, टमाटर, बेसन, दही, आदि। गर्भवती महिला चाहे तो इनका इस्तेमाल भी कर सकती है। क्योंकि इन टिप्स को ट्राई करने से भी प्रेगनेंसी के दौरान स्किन को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ चीजें जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला स्किन केयर के लिए इस्तेमाल कर सकती है। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो प्रेगनेंसी में ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते समय इन बातों का ध्यान रखें ताकि प्रेगनेंसी में भी आपकी स्किन को ग्लोइंग और चमकदार बने रहने में मदद मिल सके। इसके अलावा बेहतर खान पान भी प्रेगनेंसी के दौरान स्किन को हेल्दी और स्वस्थ रखने में मदद करता है।

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जन्म के बाद तीन महीने तक बच्चे की केयर करते समय इन 10 बातों का ध्यान रखें

जो कपल पहली बार माँ बाप बनते हैं उनके लिए बच्चे की शुरूआती दिनों में केयर करना बहुत मुश्किल हो जाता है। क्योंकि उन्हें समझने में समय लगता है की बच्चे की केयर कैसे करनी चाहिए, बच्चा रो क्यों रहा है, बच्चे को कितनी बार दिन में दूध देना चाहिए, आदि। ऊपर से सब लोग बच्चे की केयर के लिए अलग अलग सलाह देते हैं जिससे हो सकता है आप कंफ्यूज हो जाये की आखिर क्या करें और क्या नहीं।

साथ ही बच्चे के जन्म के शुरुआत के दिनों में यदि थोड़ी सी भी लापरवाही बरती जाये तो इसके कारण बच्चे को परेशानी होने का खतरा भी रहता हैं। लेकिन आप घबराइए नहीं क्योंकि आज इस आर्टिकल में हम आपको ऐसी दस छोटी छोटी बातों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका यदि आप ध्यान रखती हैं तो इससे बच्चे को किसी भी तरह की परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

साफ़ सफाई का ध्यान

नवजात शिशु की इम्युनिटी कमजोर होने के कारण शिशु को इन्फेक्शन का खतरा रहता है। ऐसे में नवजात की बेहतर केयर के लिए आपको शिशु के कपड़ों, शिशु के सुलाने की जगह, शिशु यदि बोतल से दूध पीता है उसकी, अपने हाथों की अच्छे से साफ़ सफाई का ध्यान रखें। ऐसा करने से शिशु को इन्फेक्शन से बचे रहने में मदद मिलेगी।

स्तनपान कब कैसे करवाएं

तीन महीने के बच्चे की बेहतर केयर के लिए उसे स्तनपान करवाना भी जरुरी होता है। क्योंकि माँ का दूध बच्चे के बेहतर विकास और बच्चे को बिमारियों से बचाव करने में मदद करता है। ऐसे में बच्चे को सही तरीके से महिला को दूध पिलाना चाहिए और हर दो घंटे के गैप पर बच्चे को स्तनपान करवाना चाहिए।

बच्चे की नींद का रखें ध्यान

छोटे बच्चे जन्म के बाद अधिकतर समय के लिए सोते हैं ऐसे में बच्चे के साथ खेलने के चक्कर में उसे उठाकर नहीं रखें बल्कि सोने दें। क्योंकि जितना बच्चा आराम करता है उतना ही बच्चे को खुश रहने में मदद मिलती है। लेकिन ध्यान रखें की यदि बच्चे को दूध पीये दो से तीन घंटे हो गए हैं और फिर भी बच्चा सो रहा है तो बच्चे को उठाकर उसे दूध जरूर पिलायें।

हर किसी के हाथ में न दे शिशु

तीन महीने के बच्चे के हर किसी के हाथ में नहीं दें क्योंकि इसके कारण बच्चे को दिक्कत हो सकती है क्योंकि हो सकता है जिसे आप बच्चे को उठाने के दें वो व्यक्ति संक्रमित हो या फिर उसे बच्चे को सही से उठाना नहीं आता हो।

टीकाकरण है जरुरी

जन्म के बाद शुरुआत में बच्चे को बिमारियों से सुरक्षित रखने के लिए टीकाकरण किया जाता है। ऐसे में आपको भी जन्म के बाद बच्चे के बेहतर विकास के लिए समय से टीकाकरण करवाना चाहिए।

शिशु को उठाने का तरीका

छोटे बच्चे को उठाते समय भी आपको अच्छे से ध्यान रखना चाहिए जैसे की उसके सिर, गर्दन को स्पोर्ट देकर उठाना चाहिए। क्योंकि छोटे बच्चे की गर्दन की मांसपेशियां अभी कमजोर होती है और धीरे धीरे बच्चे की गर्दन सेट होती है

शिशु को नहलाते समय रखें ध्यान

छोटे बच्चे को नहलाते समय ध्यान रखें जैसे की यदि सर्दियां है तो बच्चे को गीले कपडे से साफा कर दें, रोजाना नहीं नहलाएं, पानी के तापमान का ध्यान रखें, आदि। साथ ही नहलाते समय शिशु को कैसे पकड़ना है, कैसे नहलाना है इस बात का भी ध्यान रखें।

डाइपर से जुडी सावधानी

आज कल छोटे बच्चों को डाइपर पहनाने का बहुत चलन है लेकिन इस कारण बच्चा परेशानी अनुभव कर सकता है। जैसे की कुछ बच्चे डाइपर में सुसु नहीं करते हैं, कुछ बच्चों को रैशेस हो जाते हैं, कुछ बच्चे बीच में पॉटी पर देते हैं और आपको पता ही नहीं चलता है जिससे बच्चे को दिक्कत होती है, आदि। ऐसे में बच्चे की बेहतरी के लिए घर में बच्चे को डाइपर नहीं पहनाएं जब घर से बाहर जाना हो तभी बच्चे को डाइपर पहनाएं और थोड़ी थोड़ी देर में डाइपर को चेक करते रहें।

मालिश

छोटे बच्चे की बेहतर केयर के लिए उसकी मालिश जरूर करें, क्योंकि मालिश करने से बच्चे की हड्डियां मजबूत होती है। बच्चे के शरीर में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है जिससे बच्चे के बेहतर विकास में मदद मिलती है।

शिशु को बाहर ले जाते समय रखें ध्यान

यदि आप छोटे बच्चे को बाहर लेकर जा रही है तो ध्यान रखें की बच्चे को पूरी तरह से नहीं ढके या अपने आप से बिल्कुल चिपकाकर नहीं रखें। क्योंकि हो सकता है इसकी वजह से शिशु को सांस लेने में परेशानी हो सकती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जो बच्चे की केयर में आपकी मदद करते हैं साथ ही बच्चे की केयर के लिए आपको एक बात का और ध्यान रखना चाहिए। की संक्रमित व्यक्ति से अपने बच्चे को दूर रखना चाहिए और यदि आप संक्रमित हैं तो अपना समय से इलाज करें और साफ़ सफाई का ध्यान रखें।

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प्रेगनेंसी में ये 5 चीजें कर लें नोर्मल डिलीवरी होगी

प्रेगनेंसी का नौवां महीना लगते ही महिला के मन में यही बात चलती रहती है की महिला की डिलीवरी नोर्मल होगी या सिजेरियन। साथ ही ज्यादातर महिलाएं यही चाहती है की उनका बच्चा सामान्य प्रसव से जन्म लें। क्योंकि नोर्मल डिलीवरी के बाद महिला को जल्दी फिट होने में मदद मिलती है साथ ही बच्चा भी स्वस्थ होने के चांस बढ़ जाते हैं। क्या आप भी प्रेग्नेंट हैं और आप चाहती है की आपकी डिलीवरी नोर्मल हो?

तो इसकी तैयारी आपको प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही कर देनी चाहिए। क्योंकि यदि आप प्रेगनेंसी के दौरान तो अपनी सेहत के प्रति लापरवाही बरतती है तो इसके कारण नोर्मल डिलीवरी होने के चांस कम हो जाते हैं। तो आइये अब हम आपको ऐसे पांच टिप्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका ध्यान यदि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही रखती है तो इससे महिला की डिलीवरी नोर्मल होने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही नियमित जांच करवाएं

यदि आप चाहती है की आपकी डिलीवरी नोर्मल हो तो प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद से ही कभी भी अपनी जांच में लापरवाही नहीं करें, सभी टेस्ट करवाएं, प्रीनेटल विटामिन्स लें, टीकाकरण करवाएं, आदि। ऐसा करने से यदि प्रेगनेंसी में माँ या बच्चे को कोई समस्या भी होगी तो उसका समय से इलाज हो जायेगा। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान माँ और बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलेगी। और प्रेगनेंसी के दौरान जितना माँ और बच्चा स्वस्थ रहेंगे उतना ही डिलीवरी को आसान बनाने में मदद मिलेगी।

शरीर में खून की कमी न होने दें

नोर्मल डिलीवरी के लिए सबसे जरुरी है की गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी न हो। क्योंकि खून की कमी होने के कारण प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स बढ़ जाते हैं, बच्चे का विकास अच्छे से नहीं होता है, डिलीवरी के समय दिक्कतें बढ़ जाती है, आदि। ऐसे में नोर्मल डिलीवरी के लिए महिला को प्रेगनेंसी के दौरान उन खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए जिससे शरीर में खून की कमी को पूरा होने में मदद मिल सके। जैसे की अनार, सेब, आंवला, निम्बू, चुकंदर, गाजर, टमाटर, हरी सब्जियां, आदि।

उन खाद्य पदार्थों का सेवन करें जिनसे नोर्मल डिलीवरी होने के चांस बढ़ते हैं

गर्भावस्था के दौरान फिट रहने के लिए सबसे जरुरी होता है की महिला पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करें। साथ ही उन खाद्य पदार्थों का भरपूर सेवन करें जिससे नोर्मल डिलीवरी होने के चांस बढ़ते हैं। जैसे की पालक, ब्रोकली, संतरा, केला, ओट्स, नट्स यानी ड्राई फ्रूट्स, दालें और फलियां, नॉन वेज, डेयरी प्रोडक्ट्स, शकरकंद, आदि। यदि महिला इन सभी पोषक तत्वों का सेवन करती है तो इससे महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी पूरी होने के साथ शरीर को नोर्मल डिलीवरी के लिए तैयार करने में मदद मिलती है।

एक्टिव रहें

गर्भावस्था के दौरान महिला का एक्टिव रहना भी जरुरी होता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है की आप अपने शरीर पर ज्यादा जोर डालें। बल्कि आप थोड़ा व्यायाम करे, योगासन करें, इससे महिला स्वस्थ रहेगी जिससे बच्चे का विकास अच्छे से होगा और शरीर भी नोर्मल डिलीवरी के लिए तैयार होगा।

डिलीवरी को लेकर तनाव में नहीं आएं

बहुत सी महिलाएं डिलीवरी का समय पास आने पर डिलीवरी को लेकर तनाव में आ जाती है जिससे महिला की परेशानियां कम होने की बजाय बढ़ जाती है। ऐसे में महिला को डिलीवरी को लेकर तनाव में नहीं आना चाहिए बीएस अपनी प्रेगनेंसी को एन्जॉय करना चाहिए। क्योंकि जितना महिला स्ट्रेस कम लेती है उतना ही नोर्मल डिलीवरी होने के चांस बढ़ जाते हैं।

तो यह हैं वो पांच टिप्स जिनका ध्यान यदि प्रेग्नेंट महिला प्रेगनेंसी की शुरुआत से रखती है तो इससे महिला की डिलीवरी नोर्मल होने में मदद मिलती है। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और चाहती है की आपकी डिलीवरी नोर्मल होने के चांस बढे तो आपको भी इन सभी बातों का प्रेगनेंसी के दौरान अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

Do these 5 things in pregnancy if you want normal delivery

बच्चों के दांत निकलने की उम्र, लक्षण और उपाय

बच्चे के जन्म के बाद उसके द्वारा की गई हर पहली हरकत, उसका विकास हर एक माता पिता के लिए बहुत ही ख़ुशी का पल होता है। आज इस आर्टिकल में हम आपसे बच्चे के दांत निकलने के बारे में बात करने जा रहे हैं। जन्म के बाद बच्चे का दांत निकलना भी बहुत ख़ुशी का पल होता है और सबसे ज्यादा ख़ुशी की बात यह होती है की अब आपका बच्चा ठोस चीजों को खाने की कोशिश भी कर सकता है। तो आइये अब जानते हैं की जन्म के बाद बच्चे के दांत कब निकलते हैं, दांत निकलने के क्या लक्षण होते हैं, दांत निकलने पर क्या दिक्कतें आती हैं, और आप इन दिक्कतों से बचने के लिए क्या कर सकते हैं।

बच्चे के दांत निकलने की उम्र

हर एक बच्चे की दांत निकलने की उम्र अलग अलग होती है जैसे की कुछ बच्चों के दांत चार महीने, कुछ बच्चों के दांत छह महीने या आठ महीने बाद भी निकल सकते हैं। साथ ही कुछ बच्चों के दांत इससे भी लेट निकल सकते हैं। ऐसे में इसमें घबराने की कोई बात नहीं होती है।

जिन बच्चों के दांत लेट निकलते हैं तो उसके कुछ कारण हो सकते हैं जैसे की अनुवांशिक कारण यानी की आपके घर में यदि और बच्चों के साथ ऐसा हुआ है या आपके साथ ऐसा हुआ है तो आपके बच्चे के साथ भी ऐसा हो सकता है, बच्चे का जन्म यदि समय से पहले हुआ है या बच्चा कमजोर है तो भी ऐसा हो सकता है, आदि।

बच्चे के दांत निकलने के लक्षण

यदि आपके बच्चे के दांत निकल रहे हैं या निकलने वाले हैं तो इसके कुछ लक्षण आपको बच्चे में महसूस होंगे। और आप उन लक्षणों को देखकर अंदाजा लगा सकते हैं की बच्चे के दूध के दांत निकलने वाले हैं। तो आइये अब जानते हैं की वो लक्षण कौन से हैं।

  • बच्चा यदि हर चीज को मुँह में लेने लगे और उसे काटने लगे या फिर बच्चा अपने हाथों को हमेशा मुँह में ही रखें।
  • यदि आपके बच्चे के मुँह से ज्यादा लार टपक रही है।
  • बच्चे के मसूड़ों का ज्यादा लाल होना, ऐसा होने पर बच्चों को मसूड़ों में दर्द महसूस हो सकता है।
  • बच्चे का बहुत ज्यादा चिड़चिड़ा होना।
  • आपके बच्चे का ढंग से दूध नहीं पीना, भूख कम लगना।
  • यदि आपका बच्चा कान या गालों को खींचने या नोचने की कोशिश करता है तो यह भी बच्चे के दांत निकलने का लक्षण होता है क्योंकि ऐसा बच्चे मसूड़ों में दर्द महसूस होने के कारण कर सकते हैं।
  • कुछ बच्चों को इस दौरान उल्टियां व् दस्त की दिक्कत भी हो सकती है।

बच्चे के दांत निकलने पर होने वाली परेशानी को कम करने के उपाय

छोटे बच्चे को दिक्कत होने पर वह आपको अपनी दिक्कत बता नहीं सकते हैं लेकिन यदि आपका बच्चा बहुत ज्यादा रो रहा है, कुछ खा नहीं रहा है, चिड़चिड़ा हो रहा है, आदि तो इसका मतलब यह है की आपका बच्चा परेशान हैं। ऐसे में इस परेशानी को कम करने के लिए आप क्या-क्या कर सकती है आइये जानते हैं।

टीथर

आज कल मार्किट में टीथर मिलता है जिसमे आप बच्चे के हाथ में दे सकते हैं। वह बहुत ही कोमल होता है और बच्चे जब उसे मुँह में लेकर चबाता है तो उसे आराम महसूस होता है।

साफ़ सफाई का ध्यान रखें

दांत निकलने पर मसूड़ों में होने वाले दर्द के कारण बच्चा हर चीज मुँह में लेता है जिसके कारण उन चीजों पर जमे कीटाणु पेट में जाते हैं। और पेट में इन्फेक्शन होने के कारण बच्चे को उल्टी दस्त की परेशानी हो जाती है। ऐसे में महिला को साफ सफाई का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि बच्चे के दांत निकलने पर होने वाली डायरिया की परेशानी को दूर करने में मदद मिल सके।

मालिश

अपनी ऊँगली को साफ करके बच्चे के मसूड़ों को दबाएं यानी उनकी मालिश करें इससे बच्चे को अच्छा लगेगा और बच्चा काफी आराम महसूस करेगा। ऊँगली नहीं तो सूती कपडे को ठन्डे पानी में डालकर उस पानी से बच्चे के मसूड़ों पर लगाएं इससे भी बच्चा आराम महसूस करता है।

बच्चे को थोड़ा ज्यादा प्यार करें

बच्चे के दांत निकलने पर मसूड़ों में होने वाले दर्द की वजह से बच्चा बहुत परेशान हो जाता है ऐसे में बच्चे की दिक्कत को कम करने के लिए महिला को बच्चे को थोड़ा ज्यादा प्यार करना चाहिए ताकि बच्चा खुश रहे।

तो यह हैं बच्चे के दांत निकलने की उम्र, लक्षण व् उपाय, यदि आपला बच्चा भी छोटा है और आपको उसमे दांत निकलने के लक्षण महसूस हो रहे हैं। तो आप भी अपने बच्चे का और ज्यादा ध्यान रखें।

शिशु नीचे कैसे आता है? शिशु के जन्म लेने की प्रक्रिया

माँ बनना महिला के लिए एक बहुत ही खास अनुभव होता है क्योंकि महिला पूरे नौ महीने तक अपने गर्भ में एक नन्ही जान को सींचती है। उसके बाद जब वो नन्हा शिशु जन्म लेता है तो यह केवल बच्चे का ही जन्म नहीं होता है बल्कि इस दौरान माँ भी नया जन्म लेती है। गर्भावस्था की शुरुआत से आखिर तक महिला के मन में बहुत से सवाल आते हैं और ज्यादातर महिलाएं इस बारे में जरूर सोचती है।

की आखिर ऐसा कैसे ही जाता है की बच्चा जन्म लेने की सही पोजीशन में आ जाता है या क्यों नहीं आता है, डिलीवरी लेट क्यों हो जाती है, डिलीवरी पेन के लिए महिला को क्या करना चाहिए, आदि। तो ज्यादा मत सोचिये क्योंकि आज इस आर्टिकल में हम आपको बच्चे के जन्म लेने से जुडी जानकारी आपके साथ शेयर करने जा रहे हैं।

गर्भ में शिशु जन्म लेने की सही पोजीशन में कब आता है?

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भाशय में शिशु लगातार मूवमेंट करता रहता है और अपनी पोजीशन बदलता रहता है। जैसे जैसे शिशु का विकास बढ़ता है वैसे वैसे गर्भ में शिशु को घूमने के लिए जगह कम मिलने लगती है। साथ ही शिशु के जन्म लेने का समय भी पास आने लगता है। तो शिशु हेड डाउन पोजीशन में आने लगता है हेड डाउन पोजीशन में शिशु का सिर नीचे की तरफ हो जाता है। और इस अवस्था में शिशु प्रेगनेंसी के 32वें से 36वें हफ्ते में आ जाता है। उसके बाद जैसे ही लेबर पेन शुरू होता है, एमनियोटिक फ्लूड निकलने लगता है तो बच्चे का जन्म लेने का सही समय आ जाता है।

गर्भ में शिशु जन्म लेने की सही पोजीशन में कैसे आता है?

माँ के गर्भ में बच्चा पूरे नौ महीने तक विकसित होता है ऐसे में जब बच्चे के जन्म का समय पास आता है तो महिला कुछ नहीं करती है। बल्कि जब बच्चा गर्भ में घूमता है और उसका सिर अपने आप ही पेल्विक एरिया के पास आता है और बच्चे की रीढ़ की हड्डी और चेहरा महिला के पेट से सटा होता है। उसके बाद धीरे धीरे जब बच्चा के सिर के दबाव से पेल्विक एरिया पर जोर पड़ता है वैसे वैसे गर्भाशय की ग्रीवा का मुँह खुलने लगता है। तो इसका मतलब यह होता है की जन्म लेने के लिए शिशु का सही पोजीशन में आना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है।

बच्चे के जन्म लेने में देरी के क्या कारण होते हैं?

ऐसा बिल्कुल भी जरुरी नहीं होता है की महिला की डिलीवरी डॉक्टर द्वारा बताई गई तिथि पर ही होती है। कुछ महिलाओं को डिलीवरी डेट से पहले या बाद में डिलीवरी हो सकती है। लेकिन कुछ महिलाओं को प्रसव की शुरुआत ही नहीं होती है। इसका कोई अलग कारण नहीं होता है बल्कि गर्भ में यदि शिशु जन्म लेने की सही पोजीशन में नहीं आता है तो हो सकता है की महिला को प्रसव पीड़ा नहीं हो। लेकिन ऐसे में महिला को दो बातों का खास ध्यान रखना चाहिए पहली शिशु की हलचल का ध्यान रखें दूसरा डिलीवरी डेट निकल जाने के बाद तुरंत डॉक्टर से मिलें।

डिलीवरी डेट निकल जाने पर महिला को क्या करना चाहिए?

जब महिला की डिलीवरी का समय पास आता है तो महिला को अच्छे से आहार लेना चाहिए, व्यायाम करना चाहिए, मसाज करनी चाहिए, आदि। क्योंकि इससे महिला स्वस्थ रहती है और महिला के शरीर को डिलीवरी के लिए तैयार करने में मदद मिलती है। लेकिन कई बार डिलीवरी डेट निकल जाने के बाद भी महिला को शरीर में प्रसव का कोई भी लक्षण महसूस नहीं होता है। ऐसे में महिला को इसे अनदेखा न करते हुए डॉक्टर से मिलना चाहिए। क्योंकि डिलीवरी डेट निकल जाने के बाद गर्भ में शिशु का ज्यादा दिनों तक रहना माँ व् बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

यदि आप भी गर्भवती हैं, तो इन बातों का आपको भी ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि प्रसव की जानकारी जितने अच्छे से होती है उतना ही प्रेगनेंसी और प्रसव को आसान बनाने में मदद मिलती है। और हर परेशानी से माँ व् बच्चे को सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

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IVF की जरुरत किन महिलाओं को पड़ती है?

आज के समय में ऐसे बहुत से कपल्स है जो बहुत कोशिश के बाद भी माँ बाप नहीं बन पा रहे हैं। और बच्चा न होने का कोई एक कारण नहीं होता है ऐसे बहुत से कारण होते हैं जिनकी वजह से यह परेशानी होती है। साथ ही बच्चा न होने की जिम्मेवार केवल महिला ही नहीं बल्कि पुरुष भी हो सकते हैं। लेकिन आज कल इस समस्या के उपचार के लिए मेडिकल में सुविधा दी गई है जिससे उन कपल्स की समस्या का समाधान किया जा सकता है जो बहुत कोशिश करने के बाद भी माँ बाप नहीं बन पा रहे हैं। और वो सुविधा है IVF यानी इन विट्रो फर्टिलाइज़शन। तो आइये अब इस सुविधा के बारे में विस्तार से जानते हैं।

IVF क्या है?

IVF एक फर्टिलिटी ट्रीटमेंट है जो उन लोगो की मदद करता है जो बच्चा पैदा करने में असमर्थ होते हैं। इस प्रक्रिया में महिला के अंडाशय में से अंडा निकाला जाता है। और पुरुष के स्पर्म को इंजेक्शन में डालकर अंडे को इंजेक्ट किया जाता है। उसके बाद अंडे को महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है। जिससे महिला का गर्भाधारण हो जाता है।

किन महिलाओं को इन विट्रो फर्टिलाइज़शन की जरुरत पड़ती है?

  • जिन महिलाओं को बहुत कोशिश करने के बाद भी प्रेगनेंसी नहीं होती है वो इस तरीके का सहारा ले सकती है।
  • यदि महिला के प्रजनन अंगों में किसी तरह की समस्या है जैसे की फैलोपियन ट्यूब का ब्लॉक होना, आदि और महिला प्राकृतिक तरीके से गर्भवती नहीं हो सकती है तो महिला को IVF करवाने की सलाह दी जाती है।
  • अनियमित माहवारी से जूझ रही महिलाएं, मासिक धर्म बंद हो गया हो वो महिलाएं, इस तरीका का सहारा ले सकती है।
  • एक उम्र होने के बाद अंडाशय में अंगो की गुणवत्ता में कमी आने लगती है जिसकी वजह से महिला प्रेग्नेंट नहीं हो पाती है। ऐसे में बढ़ती उम्र में जो महिलाएं प्रेगनेंसी चाहती है उन महिला को IVF करवाने की सलाह दी जाती है।
  • केवल महिलाओं में कमी होने के कारण ही IVF का सहारा नहीं लिया जाता है बल्कि यदि किसी पुरुष के शुक्राणु की गुणवत्ता अच्छी नहीं होती है तो भी महिला इस तरीके का इस्तेमाल करके गर्भाधारण कर सकती है।

यदि आपको भी प्रेगनेंसी में कोई दिक्कत आ रही है, उम्र बढ़ती जा रही है, रोजाना सम्बन्ध बनाने पर भी गर्भ नहीं ठहर रहा है, आदि। तो आप भी एक बार डॉक्टर से जाँच जरूर करवाएं ताकि आपको भी माँ बाप बनने की रह में आ रही मुश्किलों को दूर करने में मदद मिल सके।

Which women need IVF?