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प्रेगनेंसी में सुरक्षित कैसे सोएं?

गर्भावस्था की न्यूज़ कन्फर्म होते ही महिला का लाइफ स्टाइल, महिला का रूटीन, महिला का खान पान, सभी में बदलाव आ जाता है। क्योंकि प्रेगनेंसी महिला के लिए वो समय होता है जब महिला को केवल अपने लिए ही नहीं बल्कि अपने गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी सोचना होता है। और गर्भ में पल रहा शिशु अपने विकास के लिए अपनी माँ पर ही निर्भर करता है। ऐसे में महिला को बच्चे के विकास के लिए केवल अपने खान पान ही नहीं बल्कि महिला क्या कर रही है, कैसे सो रही है इन सभी बातों का भी ध्यान रखना होता है।

क्योंकि यदि महिला खान पान तो अच्छा ले रही है लेकिन सोने में गलती कर रही है यानी की महिला की सोने की पोजीशन सही नहीं है, भरपूर नींद नहीं ले रही है। तो इसका असर भी गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कैसे सोना चाहिए जिससे माँ या बच्चे दोनों को कोई दिक्कत नहीं हो उस बारे में बताने जा रहे हैं।

उल्टा नहीं सोएं

गर्भावस्था के दौरान महिला को उल्टा होकर बिल्कुल भी नहीं सोना चाहिए। क्योंकि उल्टा होकर सोने से गर्भवती महिला के पेट पर दबाव पड़ता है। जिसकी वजह से गर्भ में पल रहे बच्चे को असुविधा महसूस हो सकती है। ऐसे में पेट के बल सोने से गर्भवती महिला को बचना चाहिए।

एक ही पोजीशन में बहुत देर तक नहीं सोएं

गर्भावस्था के समय महिला को एक ही पोजीशन में बहुत देर तक नहीं सोना चाहिए। यानी की सोते समय थोड़ी थोड़ी देर बाद अपनी पोजीशन बदलते रहना चाहिए। और जितना हो सके करवट लेकर सोना चाहिए।

बाईं और करवट लेकर सोना है सबसे बेहतरीन

गर्भावस्था के दौरान महिला को बाईं और करवट लेकर सोना चाहिए। क्योंकि बाईं और करवट लेकर सोने से शरीर में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है, गर्भ में बच्चे को कोई दिक्कत नहीं होती है, महिले को सोने में किसी तरह की दिक्कत नहीं होती है, आदि।

पीठ के बल नहीं सोएं

गर्भावस्था के दौरान महिला को पीठ के बल नहीं सोना चाहिए। क्योंकि पीठ के बल सोने से गर्भाशय का पूरा भार पीठ पड़ जाता है। जिसकी वजह से महिला को पीठ में दर्द की समस्या हो जाती है। साथ ही पेट के बाहर आने के बाद पैरों तक अच्छे से ब्लड फ्लो भी नहीं होता है जिसकी वजह से महिला को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

ज्यादा टाइट कपडे पहनकर नहीं सोएं

बेहतर नींद लेने के लिए महिला सोते समय अपने पहनावें का भी ध्यान रखना चाहिए। यानी महिला को जितना हो सके ऐसे कपडे पहनकर सोना चाहिए जो ज्यादा टाइट नहीं हो, चुभने वाले नहीं हो, आदि। यदि महिला आरामदायक कपडे पहनकर सोती है तो इससे महिला को बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है और कोई दिक्कत नहीं होती है।

प्रेगनेंसी पिल्लो का इस्तेमाल करें

जिन गर्भवती महिलाओं को सोने में ज्यादा दिक्कत होती है उन गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी पिल्लो का इस्तेमाल करना चाहिए। प्रेगनेंसी पिल्लो का इस्तेमाल करने से गर्भवती महिला को बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है।

खान पान सही रखें

रात को सोने से पहले लिया जाने वाले आहार भी महिला को ऐसा लेना चाहिए जिसे पचाने में महिला को कोई दिक्कत नहीं हो। और वो आहार आसानी से हज़म हो सके। साथ ही महिला को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध भी पीना चाहिए। यदि महिला इन बातों का ध्यान रखती है तो महिला को सोते समय होने वाली दिक्कत से बचे रहने और बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान प्रेग्नेंट महिला सोते समय रखती है तो ऐसा करने से महिला को अच्छी नींद आती है और सोने में किसी भी तरह की दिक्कत नहीं होती है।

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प्रेगनेंसी के 10 खतरनाक लक्षण जिन्हे न करें अनदेखा

गर्भावस्था के दौरान महिला को अपना अच्छे से ख्याल रखने की सलाह दी जाती है और किसी भी तरह की लापरवाही को न बरतने की सलाह दी जाती है। क्योंकि महिला द्वारा बरती गई लापरवाही का बुरा असर केवल गर्भवती महिला पर ही नहीं बल्कि गर्भ में शिशु पर भी पड़ता है। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान महिला शरीर में बहुत से बदलाव व् लक्षणों का अनुभव भी करती है।

ऐसे में शरीर में महसूस हो रहे लक्षणों का ध्यान रखना भी महिला के लिए बहुत जरुरी होता है। क्योंकि गर्भावस्था के दौरान महिला को बहुत से ऐसे लक्षण जिन्हे अनदेखा करना गर्भवस्था के दौरान माँ व् बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान किन किन लक्षणों को महिला को अनदेखा नहीं करना चाहिए।

ब्लीडिंग

प्रेगनेंसी की शुरुआत में यदि महिला को पैंटी में खून के धब्बे महसूस होते हैं तो ऐसा गर्भाशय में भ्रूण के प्रत्यारोपण के होने पर होता है। लेकिन यदि महिला को ब्लीडिंग थोड़ी ज्यादा होती है जैसे की पीरियड्स में होती है तो इसे महिला को अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसा होना महिला के गर्भपात का लक्षण होता है।

पेट में तेजी से दर्द

गर्भावस्था में दौरान पेट में हल्का फुल्का दर्द रहना बहुत ही आम बात होती है। क्योंकि यह दर्द पेट के आस पास की मांसपेशियों में खिंचाव होने के कारण, कब्ज़, पेट में गैस, आदि के कारण हो सकता है। लेकिन पेट में दर्द असहनीय हो तो यह दर्द प्रेगनेंसी की शुरुआत में गर्भपात, समय से पहले बच्चे का जन्म या डिलीवरी का समय पास आने पर प्रसव का संकेत होता है।

सूजन अधिक होना

गर्भावस्था के दौरान महिला के पैरों में सूजन होना आम बात होती है इसका कारण पैरों तक ब्लड का अच्छे से फ्लो नहीं होना, पैरों पर दबाव अधिक पड़ना आदि हो सकता है। लेकिन यदि महिला के पैरों के साथ मुँह और हाथों पर सूजन बढ़ जाये, सिर दर्द, चक्कर, बेहोश होने जैसी परेशानी हो तो महिला को इस लक्षण को अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसका कारण ब्लड प्रैशर का ऊपर नीचे होना हो सकता है जिससे प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स बढ़ सकती है।

खुजली की समस्या

गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण स्किन में भी बदलाव आ सकते हैं। साथ ही स्किन में खिंचाव बढ़ने के कारण रूखापन अधिक हो सकता है जिसकी वजह से महिला को खुजली की समस्या अधिक हो सकती है और खुजली अधिक करने की वजह से रैशेस पड़ सकते हैं। ऐसे में यदि क्रीम आदि लगाने से यह परेशानी दूर हो जाती है तो अच्छी बात है लेकिन यदि क्रीम आदि लगाने के बाद यह परेशानी दूर नहीं होती है तो इसके अनदेखा नहीं करें। क्योंकि इस परेशानी का कारण महिला को होने वाली लिवर की समस्या हो सकती है।

बुखार

प्रेग्नेंट महिला के शरीर के तापमान में बदलाव होना आम बात होती है। ऐसे में महिला को इसे लेकर घबराना नहीं चाहिए लेकिन यदि महिला के शरीर के तापमान बढ़ने के साथ सर्दी, खांसी, जुखाम, आदि की समस्या भी हो तो महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए और न ही अपने मन से किसी भी दवाई का सेवन करना चाहिए।

बच्चे की हलचल

प्रेगनेंसी के पांचवें महीने के आस पास गर्भ में शिशु की हलचल महिला महसूस कर सकती है। शुरुआत में कम समय के लिए महिला को यह हलचल महसूस हो सकती है क्योंकि बच्चा छोटा होता है। लेकिन जैसे जैसे बच्चे का विकास बढ़ता है। वैसे वैसे गर्भ में शिशु की हलचल भी बढ़ जाती है। ऐसे में यदि कभी महिला को ऐसा महसूस हो की बहुत देर यानी की करीबन एक या डेढ़ घंटे से गर्भ में बच्चे ने हलचल नहीं की तो महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। और जितना जल्दी हो सके डॉक्टर से मिलना चाहिए क्योंकि यह गर्भ में बच्चे के ऊपर खतरा होने का संकेत होता है।

सफ़ेद पानी का निकलना

गर्भावस्था के दौरान यदि किसी समय महिला के प्राइवेट पार्ट से सफ़ेद, गाढ़ा, चिपचिपा पानी अधिक निकलने लगता है। तो महिला को इसे भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसा होने का कारण पानी की थैली का फटना होता है जिसमे गर्भ में शिशु होता है। और ऐसा होना महिला के प्रसव होने का संकेत होता है।

शारीरिक परेशानियों का होना

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियां होती है और ऐसा होना गर्भावस्था के दौरान बहुत ही आम बात होती है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला को सिर में दर्द, थकान और कमजोरी, चक्कर आना, धुंधला महसूस होना जैसी परेशानियां अधिक होती है तो महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि यह किसी शारीरिक बीमारी होने का संकेत होता है।

उल्टी दस्त की परेशानी

गर्भावस्था के दौरान उल्टियां होना आम बात होती है लेकिन यदि महिला को कुछ भी खाने के बाद उल्टी आये, बहुत ज्यादा उल्टियां हो साथ ही दस्त की परेशानी भी हो तो महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसके कारण महिला को डीहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है जो माँ व् बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक होती है।

मसूड़ों से खून आना

कुछ गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान मसूड़ों से खून आने की समस्या भी हो सकती है। और यह समस्या अधिक हो तो इसका कारण कोई शारीरिक बीमारी हो सकती है। ऐसे में महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की यदि महिला को मसूड़ों से जुडी परेशानी अधिक हो तो महिला को तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

तो यह हैं कुछ लक्षण जिन्हे गर्भवती महिला को बिल्कुल भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। यदि महिला इस बात का ध्यान रखती है तो महिला को और बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

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प्रेग्नेंट महिला केला खाने से पहले इन बातों का ध्यान रखें

गर्भावस्था के दौरान महिला को पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेने की सलाह दी जाती है। और आज इस आर्टिकल में हम एक ऐसे ही पोषक तत्वों से भरपूर फल के बारे में बात करने जा रहे हैं जिसका सेवन गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए। और वो फल केला है, केले में फोलेट, विटामिन सी, विटामिन बी 6, पोटैशियम, फाइबर जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। जो प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रखने के साथ गर्भ में पल रहे बच्चे के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं।

इसके अलावा केले में मौजूद फोलेट गर्भ में पल रहे बच्चे को जन्म दोष से सुरक्षित रखने में भी मदद करता है। लेकिन केले के सेवन फायदे गर्भवती महिला और बच्चे को तभी मिलते हैं जब गर्भवती महिला सही तरीके से केले का सेवन करती है। क्योंकि केले का सेवन करते समय यदि कुछ बातों का ध्यान न रखा जाये तो इसके कारण महिला को सेहत सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा भी रहता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को केले का सेवन करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

कच्चा केला नहीं खाएं

कई बार केले बाहर से तो पके हुए दिखाई देते हैं लेकिन अंदर से खाने में बिल्कुल कच्चे होते हैं। ऐसे केलों का सेवन गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए क्योंकि इन्हे खाने से महिला को उल्टी दस्त, पेट में दर्द जैसी परेशानी होने का खतरा रहता है।

ज्यादा पका हुआ या बहुत दिनों से रखा हुआ केला न खाएं

यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो ऐसे केले का सेवन बिल्कुल नहीं करें जो बहुत दिनों से रखा हुआ है या बहुत ज्यादा पका हुआ होता है। क्योंकि ऐसे केले में बैक्टेरिया मौजूद हो सकता है जिसकी वजह से महिला को इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही ज्यादा पके हुए केले में मिठास बढ़ जाती है जिसके कारण ब्लड में शुगर लेवल के बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है।

इंजेक्शन से पके हुए केले का सेवन नहीं करें

आज कल यदि किसी फल का मौसम नहीं होता है तो उस फल को पकाने के लिए इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जाता है ऐसे में आपको केले का सेवन करते समय इस बात का ध्यान रखना है की केले बिल्कुल साफ़ हो उन्हें इंजेक्शन से न पकाया गया हो। क्योंकि ऐसे केले खाने से आपको किसी तरह का फायदा नहीं मिलता है।

गले सड़े केलों का सेवन नहीं करें

यदि किसी केले पर थोड़ा भी दाग है, केले को बहुत देर से छिलका उतार कर रखा है, केले को काटकर बिना ढके हुए रखा है तो भी महिला को केले का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसे केले पर हानिकारक बैक्टेरिया का जमाव हो सकता है। और इनका सेवन करने से माँ व् बच्चे की सेहत को नुकसान पहुँचता है।

तो यह हैं कुछ बातें जिनका ध्यान गर्भवती महिला को केले का सेवन करते समय रखना चाहिए यदि प्रेग्नेंट महिला इन बातों का ध्यान रखती है। तो ऐसा करने से गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

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क्या प्रेगनेंसी में ब्रेस्ट पेन होता है? तो यह जरूर जानें

गर्भावस्था महिला के लिए एक ऐसा समय होता है जहां महिला को ख़ुशी होने का अनुभव होने के साथ शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी जरुरी नहीं होता है की सभी गर्भवती महिलाओं को एक जैसी परेशानियां हो। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली ब्रेस्ट पेन की समस्या के बारे में बात करने जा रहे हैं जिसका सामना ज्यादातर गर्भवती महिलाओं को करना पड़ता है।

गर्भावस्था में ब्रेस्ट पेन होने के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला को स्तनों में दर्द महसूस होता है तो ऐसा होने का कोई एक कारण नहीं होता है। बल्कि ऐसे बहुत से कारण होते हैं जिनकी वजह से महिला को ब्रेस्ट पेन की समस्या हो सकती है। जैसे की:

हार्मोनल बदलाव

महिला के गर्भधारण के बाद से ही शरीर में हार्मोनल बदलाव होने शुरू हो जाते हैं। जिसके कारण बॉडी में एस्ट्रोजन हॉर्मोन के स्तर में बदलाव होता है और हॉर्मोन के स्तर में बदलाव होने के कारण ब्रेस्ट में भारीपन महसूस होता है जिसकी वजह से महिला को ब्रेस्ट में दर्द हो सकता है।

ब्रेस्ट के आकार में बदलाव

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला के स्तनों में दूध बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। जिसके कारण ब्रेस्ट के उत्तकों में फैलाव होने लगता है। और उत्तकों में फैलाव होने के कारण ब्रेस्ट का आकार बढ़ता है। और ब्रेस्ट साइज ज्यादा होने के कारण महिला को ब्रेस्ट पेन जैसी परेशानी हो सकती है।

ब्रेस्ट में गाँठ

कई बार बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण ब्रेस्ट में छोटे छोटे सिस्ट बन जाते हैं जिन्हे की गाँठ कहा जाता है। यदि किसी गर्भवती महिला के साथ ऐसा होता है तो इन गाँठ के कारण ब्रेस्ट में कड़ापन या सूजन आ जाती है जिसकी वजह से गर्भवती महिला को ब्रेस्ट में पेन होने लगता है।

कोलेस्ट्रम निकलने के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान जब महिला के ब्रेस्ट में बच्चे के लिए दूध बनना शुरू हो जाता है तो उसके बाद कभी कभी महिला की ब्रेस्ट में से यह तरल पदार्थ रिसने लगता है। और जब यह तरल पदार्थ बाहर आता है तो इस कारण भी महिला को ब्रेस्ट पेन की समस्या हो सकती है।

टाइट ब्रा या कपडे

यदि गर्भवती महिला अपने ब्रेस्ट साइज से छोटी ब्रा या बहुत ज्यादा टाइट कपडे पहनती है तो इस कारण भी ब्रेस्ट पर दबाव अधिक पड़ने के कारण महिला को ब्रेस्ट पेन की समस्या हो जाती है।

प्रेगनेंसी के दौरान ब्रेस्ट पेन से बचने के उपाय

यदि किसी गर्भवती महिला को ब्रेस्ट में इतना पेन होता है की महिला सहन कर पा रही होती है तो महिला कुछ आसान घरेलू टिप्स का इस्तेमाल करके इस समस्या से निजात पा सकती है। लेकिन यदि महिला को ब्रेस्ट में दर्द, सूजन की समस्या ज्यादा होती है तो इस परेशानी को अनदेखा न करते हुए महिला को तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। तो आइये अब जानते हैं की ब्रेस्ट पेन से बचने के घरेलू टिप्स कौन से हैं।

  • व्यायाम करें, इससे बॉडी में ब्लड फ्लो अच्छे से होगा जिससे आपको ब्रेस्ट पेन के साथ अन्य बॉडी पार्ट्स में होने वाली दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलेगी।
  • खान पान का अच्छे से ध्यान रखें, क्योंकि पोषक तत्वों से भरपूर आहार खाने से मांसपेशियां दुरुस्त रहती है जिससे आपको इस परेशानी से बचने में मदद मिलती है।
  • कैफीन यानी चाय कॉफ़ी का सेवन अधिक मात्रा में नहीं करें।
  • ज्यादा टाइट ब्रा या कपडे नहीं पहनें।
  • पानी का भरपूर सेवन करें।
  • बर्फ या गर्म पानी से सिकाई करें, मालिश करने से भी आपको फायदा मिलेगा।

ब्रेस्ट पेन होने पर डॉक्टर से कब मिलें

  • जब महिला को असहनीय दर्द हो रहा हो।
  • ब्रेस्ट में गांठ ज्यादा बन रही हो।
  • ब्रेस्ट के किसी एक हिस्से में दर्द का अधिक होना।
  • स्तन से तरल पदार्थ का रिसाव अधिक होने पर।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में ब्रेस्ट पेन की समस्या से बचे रहने के कुछ खास टिप्स यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। इसके अलावा आपको प्रेगनेंसी में छोटी छोटी बातों का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि आपको प्रेगनेंसी में होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिल सके।

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प्रेगनेंसी में सिंघाड़ा (पानीफल) खाने के फायदे

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को फलों का सेवन भरपूर मात्रा में करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि फलों में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। और ऐसा नहीं है सालभर एक ही तरह के फल आते हैं बल्कि बदलते मौसम के साथ बाजार में नए नए फल भी आते हैं। और जो फल आपको बिना मौसम के बाजार में मिल जाते हैं न तो उनका स्वाद उतना बेहतर होता है और न ही वो सेहत के लिए सही होते हैं। ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि उन फलों को दवाइयों व् इंजेक्शन लगाकर पकाया जाता है। इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को मौसम के अनुसार ही फलों का सेवन करना चाहिए।

आज इस आर्टिकल में एक ऐसे ही फल के बारे में बात करने जा रहे हैं जो सितम्बर अक्टूबर में यानी सर्दियों के मौसम के आस पास आपको मार्किट में मिलता है। और वो फल है सिंघाड़ा यानी पानीफल, खाने में स्वादिष्ट होने के साथ यह सेहत के लिहाज से भी बहुत फायदेमंद होता है। साथ ही प्रेग्नेंट महिला का भी यदि इस फल को खाने का मन होता है तो महिला बिना किसी डर के इस फल का सेवन कर सकती है। क्योंकि यह फल प्रेगनेंसी के दौरान बहुत फायदेमंद होता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में सिंघाड़ा खाने से कौन- कौन से फायदे मिलते हैं।

कैल्शियम

सिंघाड़ा कैल्शियम का बेहतरीन स्त्रोत होता है और प्रेग्नेंट महिला के लिए कैल्शियम महत्वपूर्ण पोषक तत्व होता है। जो गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूती देने के साथ गर्भ में पल रहे बच्चे की हड्डियों व् दांतों के विकास में भी मदद करता है।

गर्भपात का खतरा होता है कम

गर्भावस्था की पहली तिमाही में महिला के गर्भ गिरने का खतरा अधिक होता है लेकिन यदि महिला पानीफल का सेवन करती है तो प्रेग्नेंट महिला के इस रिस्क को कम करने में मदद मिलती है।

ऊर्जा से रखता है भरपूर

सिंघाड़े का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला को थकान, कमजोरी जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

संक्रमण से रखता है दूर

सिंघाड़े में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट गुण गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान ब्लड इन्फेक्शन, यूरिन इन्फेक्शन, सफ़ेद पानी की समस्या, जैसी परेशानियों से बचे रहने में मदद करते हैं।

स्किन के लिए है फायदेमंद

गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव की वजह से महिला को स्किन सम्बन्धी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन सिंघाड़े का सेवन करने से महिला की इन सभी परेशानियों को दूर होने में मदद मिलती है क्योंकि सिंघाड़े में विटामिन सी, विटामिन ए भरपूर मात्रा में मौजूद होता है।

एंटी बैक्टेरियल गुणों से भरपूर

सिंघाड़े में एंटी बैक्टेरियल गुण भी भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो गर्भवती महिला को दर्द, सूजन, जैसी परेशानियों से बचे रहने में मदद करते हैं।

अनिंद्रा की समस्या को करता है दूर

सिंघाड़े में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट गुण गर्भवती महिला को नींद न आने की समस्या से बचे रहने में भी मदद करते हैं। अनिंद्रा के साथ सिंघाड़े का सेवन करने से गर्भवती महिला को तनाव जैसी समस्या से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

डीहाइड्रेशन की समस्या होती है दूर

ठण्ड का मौसम होने पर पानी पीने की इच्छा कम ही होती है लेकिन गर्भवती महिला के शरीर में पानी की कमी का होना माँ व् बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक होता है। ऐसे में गर्भवती महिला के लिए सिंघाड़े का सेवन बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि सिंघाड़े का सेवन करने से शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।

वजन नियंत्रित रहता है

सिंघाड़े का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला का वजन सही रहता है जिससे वजन ज्यादा होने के कारण होने वाली परेशानी से प्रेग्नेंट महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

बच्चे के लिए है फायदेमंद

सिंघाड़ा पोषक तत्वों से भरपूर होता और यह पोषक तत्व केवल गर्भवती महिला को ही फिट रखने में मदद नहीं करते हैं। बल्कि यह गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं।

तो यह हैं कुछ फायदे जो गर्भवती महिला को सिंघाड़े का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को मिलते हैं। यदि आप भी गर्भवती है तो आप भी इस फल का सेवन कर सकती है कच्चा खाने के साथ आप चाहे तो उबाल कर भी इसका सेवन कर सकती है।

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प्रेगनेंसी हो जाने के बाद क्या पीरियड्स आ सकते हैं?

पीरियड्स का मिस हो जाना प्रेगनेंसी होने का सबसे महत्वपूर्ण लक्षण होता है। और शादी के बाद जब जब महिला के पीरियड्स यदि किसी भी कारण मिस हो जाते हैं तो महिला के मन में सबसे पहले यही बात आती है की कहीं महिला प्रेग्नेंट तो नहीं हो गई है। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी जरुरी नहीं होता है की हर बार पीरियड्स मिस होने का एक ही कारण हो। आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान पीरियड्स आ सकते हैं या नहीं इस बारे में बात करने जा रहे हैं। यह सवाल बहुत सी प्रेग्नेंट महिलाओं के मन में आ सकता है तो आइये अब इसका जवाब जानते हैं।

क्या प्रेगनेंसी के दौरान पीरियड्स आ सकते हैं?

जैसे ही महिला का गर्भधारण होता है तो उस दौरान भ्रूण के गर्भाशय में प्रत्यारोपित होने पर महिला को ब्लड के धब्बे अपनी पैंटी में नज़र आ सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं होता है की महिला को पीरियड्स हो गए हैं। कुछ गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में ब्लीडिंग होने की समस्या हो जाती है। और इसका कारण शारीरिक कमजोरी, महिला द्वारा बरती गई लापरवाही, किसी कारण पेट पर झटका लगना, आदि हो सकता है।

ऐसे में महिला को तुरंत डॉक्टर्स से मिलना चाहिए ताकि ब्लीडिंग ज्यादा नहीं हो। क्योंकि ब्लीडिंग का ज्यादा होना खतरा पैदा कर सकता है। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान नोर्मल मासिक धर्म की तरह ब्लीडिंग हो ऐसा नहीं होता है। और यदि किसी महिला को अचानक से मासिक धर्म की तरह पेट या पीठ में दर्द होता है और ब्लड फ्लो भी पीरियड्स की तरह शुरू हो जाता है तो इसका मतलब यह होता है की महिला का गर्भपात हो गया है।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग होने के कारण, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन सभी बातों के बारे में पता होना चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में महसूस होने वाले लक्षण को यदि अनदेखा किया जाये तो इसके कारण आपकी परेशानियां बढ़ सकती है साथ ही गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी बुरा असर पड़ सकता है।

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सर्दियों में प्रेग्नेंट महिला के लिए मूंगफली खाना सेफ है या नहीं?

प्रेगनेंसी के दौरान क्या खाना चाहिए और क्या नहीं इसका ध्यान प्रेग्नेंट महिला को सबसे ज्यादा रखना चाहिए। क्योंकि प्रेग्नेंट महिला का खान पान जितना बेहतर होता है। उतना ही प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है साथ ही गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास भी अच्छे से होता है। आज इस आर्टिकल में भी हम प्रेगनेंसी के दौरान खान पान से जुडी बात ही करने जा रहे हैं। और जिस खाद्य पदार्थ की बात करने हम जा रहे हैं उसे मूंगफली यानी की छोटा बादाम कहा जाता है।

गर्भावस्था में सर्दियों का मौसम आने के साथ ही मूंगफली की बिक्री भी बढ़ जाती है। क्योंकि यह खाने में मज़ेदार होने के साथ टाइम पास का भी अच्छा साधन होता है। लेकिन गर्भवती महिला को हर खाने की चीज का सेवन करने से पहले इस बात का ध्यान रखना जरुरी होता है की महिला को वो खानी चाहिए या नहीं, कितनी मात्रा में उस चीज का सेवन करना चाहिए, कब सेवन करना चाहिए आदि। लेकिन उससे पहले यह जानते हैं की मूंगफली खाने से कौन से फायदे शरीर को मिलते हैं।

एंटीऑक्सीडेंट्स से होती है भरपूर

मूंगफली में विटामिन्स, फैट, एंटी ऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो शरीर को पोषण देने के साथ इम्युनिटी बूस्ट करने में भी मदद करते हैं। जिससे आपको संक्रमण व् बिमारियों से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

फाइबर से होती है भरपूर

मूंगफली में फाइबर भरपूर मात्रा में मौजूद होता है जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मदद करता है। और आपको पेट सम्बन्धी समस्या जैसे कब्ज़, एसिडिटी, आदि से बचे रहने में मदद मिलती है।

हड्डियों के लिए है फायदेमंद

मूंगफली का सेवन करने से हड्डियों को पोषण मिलता है क्योंकि इसमें मैगनीज़ मौजूद होता है। और महिला, पुरुष, बच्चे, बुर्जुर्ग जो भी इसका सेवन करते हैं उन सभी की हड्डियों को मजबूती मिलती है।

स्किन के लिए है फायदेमंद

मूंगफली में प्राकृतिक रूप से आयल मौजूद होता है जो स्किन को पोषित रखने में मदद करता है। जिससे स्किन सम्बन्धी परेशानियों से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

आयरन

शरीर में खून की कमी का होना बहुत सी शारीरिक परेशानियों को बढ़ा देता है। लेकिन मूंगफली का सेवन करने से इन परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है क्योंकि मूंगफली में आयरन की अधिकता होती है जिससे शरीर में खून की कमी पूरी होती है।

प्रेगनेंसी में मूंगफली खाना सेफ हैं या नहीं?

वैसे तो मूंगफली का सेवन करने से बहुत से स्वास्थ्य सम्बन्धी फायदे मिलते हैं लेकिन जब बात प्रेगनेंसी की हो तो गर्भवती महिला को मूंगफली का सेवन करना चाहिए या नहीं इस बात का ध्यान रखना जरुरी होता है। और इसका जवाब है की गर्भावस्था में सर्दियों में मौसम में यदि मूंगफली का सेवन करना चाहे तो कर सकती है क्योंकि मूंगफली के फायदे माँ व् बच्चे दोनों को ही मिलते हैं।

लेकिन यदि किसी प्रेग्नेंट महिला को खांसी की समस्या है, मूंगफली खाने से रैशेस खुजली जैसी समस्या होती है, गले में खराश हो जाती है तो गर्भवती महिला को मूंगफली का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। इसके अलावा यदि आपको पहले कभी मूंगफली खाने से कोई परेशानी नहीं हुई है लेकिन प्रेगनेंसी में मूंगफली का सेवन करने से हो रही है तो भी मूंगफली का सेवन आपको नहीं करना चाहिए।

तो यह हैं सर्दियों में प्रेग्नेंट महिला को मूंगफली का सेवन करने के फायदे, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और सर्दियों का मौसम है तो आप भी मूंगफली का आनंद ले सकती है। लेकिन ध्यान रखें की यदि आपको मूंगफली खाने से किसी तरह की परेशानी होती है या हो रही है तो इसका सेवन नहीं करें।

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प्रेगनेंसी में पैदल चलना कब फायदेमंद होता है और कब नुकसानदेह होता है?

गर्भावस्था महिला के लिए बहुत ही नाजुक समय होता है जहां महिला द्वारा बरती गई थोड़ी सी लापरवाही का गर्भ में पल रहे बच्चे और महिला दोनों पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है। इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही को न बरतने की सलाह दी जाती है। और वो हर काम करने की सलाह दी जाती है जो माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होता है।

जैसे की प्रेगनेंसी के दौरान थोड़ी देर वॉक करने यानी की पैदल चलने की सलाह दी जाती है। लेकिन यह सलाह हर प्रेग्नेंट महिला के लिए नहीं होती है क्योंकि प्रेगनेंसी में कुछ केस ऐसे होते हैं जहां पर पैदल चलने के कारण भी माँ व् बच्चे को दिक्कत हो सकती है। आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेग्नेंट महिला के लिए कब पैदल चलना फायदेमंद होता है और कब नुकसानदायक होता है इस बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था में पैदल चलना कब होता है फायदेमंद?

प्रेग्नेंट महिला के लिए पैदल चलना जब फायदेमंद होता है जब महिला पूरी तरह से स्वस्थ होती है, प्रेगनेंसी में किसी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स नहीं होती है, चलने के कारण महिला को कोई दिक्कत नहीं होती है, और डॉक्टर्स भी महिला को जब दिन में थोड़ी देर पैदल चलने की सलाह देते हैं। क्योंकि पैदल चलने से महिला के शरीर में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है, महिला एक्टिव रहती है, व्यायाम हो जाता है, आदि।

प्रेग्नेंट महिला के लिए पैदल चलना कब नुकसानदायक होता है?

सभी गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी में थोड़ी देर वॉक करने या पैदल चलने की मंजूरी नहीं होती है। क्योंकि कुछ केस ऐसे भी होते हैं जहां पैदल चलने से गर्भवती महिला और बच्चे दोनों को दिक्कत हो सकती है। जैसे की:

  • जिन गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग होने की समस्या होती है उन्हें बिल्कुल पैदल चलने की मनाही होती है।
  • यदि किसी गर्भवती महिला की प्रेगनेंसी में किसी तरह के कॉम्प्लीकेशन्स होते हैं तो उन्हें भी अच्छे से आराम करने की सलाह दी जाती है और पैदल चलने की मनाही होती है।
  • कई बार गर्भ में शिशु का भार नीचे की तरफ अधिक होता है जिसकी वजह से समय से पहले बच्चे के जन्म होने का खतरा बढ़ जाता है ऐसे केस में भी गर्भवती महिला को पैदल चलने की मनाही होती है।
  • यदि गर्भवती महिला को थोड़ी देर चलने के बाद ही थकान व् कमजोरी अधिक महसूस होती है तो भी प्रेग्नेंट महिला को ज्यादा देर वॉक न करने की सलाह दी जाती है।
  • गर्भ में एक से ज्यादा शिशु होने पर महिला वॉक तो कर सकती है लेकिन तेजी से वॉक महिला को करने से बचना चाहिए।
  • यदि किसी कारण डॉक्टर ने प्रेग्नेंट महिला को वॉक करने के लिए मना किया है तो डॉक्टर की बात भी महिला को माननी चाहिए और वॉक नहीं करनी चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान महिला के पैदल चलने से जुड़े कुछ टिप्स, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि पैदल चलने के कारण महिला या शिशु को किसी भी तरह की परेशानी न हो।

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डिलीवरी का समय नजदीक आ गया है फिर भी बेबी नीचे नहीं आ रहा है तो क्या करें

गर्भावस्था के दौरान महिला उस पल का बेसब्री से इंतज़ार करती है की कब नौवें महीने की शुरुआत होगी और उनके शिशु के जन्म लेने की ख़ुशी का इंतज़ार खत्म होगा। प्रेगनेंसी की शुरुआत में पीरियड्स की डेट से अनुमान लगाकर या पहले अल्ट्रासॉउन्ड के बाद महिला को डिलीवरी के लिए एक अनुमानित तिथि बता दी जाती है। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी जरुरी नहीं होता है की डॉक्टर आपको जो तिथि बताते हैं उसी डेट को बेबी जन्म लेता है।

बल्कि कुछ महिलाओं की डिलीवरी उस डेट से पहले या बाद में हो सकती है। और ऐसा भी नहीं होता है की डिलीवरी एक ही दम से हो जाती है। बल्कि जैसे महिला को प्रेगनेंसी होने के लक्षण शरीर में महसूस होते हैं वैसे ही डिलीवरी होने वाली है इसके कुछ लक्षण भी महिला को शरीर में महसूस हो सकते हैं। जैसे की पेट या पीठ में दर्द, बच्चे का भार नीचे की तरफ महसूस होना, पहले के मुकाबले शिशु का हलचल कम करना आदि।

लेकिन कई बार डिलीवरी का समय नजदीक आ जाता है लेकिन फिर भी बेबी का भार नीचे की तरफ महसूस नहीं होता है। ऐसे में महिला का घबराना आम बात होती है लेकिन इस दौरान घबराने से महिला की परेशानियां कम नहीं होती है बल्कि बढ़ सकती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको डिलीवरी का समय नजदीक आने पर भी यदि बेबी नीचे नहीं आ रहा है तो आपको क्या क्या करना चाहिए इस बारे में बताने जा रहे हैं।

तनाव नहीं लें

यदि महिला को नौवां महीना खत्म होने वाला है लेकिन फिर भी महिला को शरीर में शिशु के जन्म होने के कोई भी लक्षण महसूस नहीं हो रहे हैं तो घबराएं नहीं, तनाव नहीं लें, क्योंकि इसके कारण आपकी दिक्कत बढ़ सकती है। इस दौरान महिला को शांत रहना चाहिए और एक्टिव रहना चाहिए क्योंकि जितना महिला एक्टिव रहती है उतना ही महिला की डिलीवरी आसान होती है साथ ही किसी भी तरह के कॉम्प्लीकेशन्स नहीं आती है। साथ ही महिला को उन टिप्स को ट्राई करना चाहिए जिनसे प्रसव पीड़ा को बढ़ाने में मदद मिल सके।

व्यायाम करें

बेबी के नीचे नहीं आने पर महिला को बेबी को जन्म के लिए सही पोजीशन में लाने के लिए थोड़ा बहुत व्यायाम भी करना चाहिए। व्यायाम करने के लिए महिला वाक कर सकती है, स्ट्रेचिंग कर सकती है, पोछा लगा सकती है, आदि। ऐसा करने पेट के आस पास के हिस्सों पर जोर पड़ता है जिससे शिशु को जन्म लेने की सही पोजीशन में आने में मदद मिलती है। साथ ही डिलीवरी पेन की शुरुआत होने में मदद मिलती है।

ऐसी चीजों का सेवन करें जिससे प्रसव पीड़ा हो

यदि महिला की डिलीवरी डेट नजदीक आ रही है लेकिन फिर भी शिशु का भार नीचे की तरफ महिला को महसूस नहीं हो रहा है तो इसके लिए महिला को प्रसव पीड़ा को बढ़ाने वाले आहार को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। क्योंकि प्रसव पीड़ा बढ़ने के साथ ही शिशु जन्म लेने की सही पोजीशन में आ जाता है। और इसके लिए महिला देसी घी, मसालेदार आहार, अनानास, अंगूर, ड्राई फ्रूट्स, व् अन्य गर्म तासीर वाली चीजों का सेवन कर सकती है।

डॉक्टर से मिलें

यदि डिलीवरी डेट निकल जाने के बाद भी महिला को शरीर में प्रसव का कोई लक्षण महसूस नहीं होता है, शिशु नीचे की तरफ नहीं आता है। तो महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए और जल्दी से जल्दी डॉक्टर से मिलना चाहिए। क्योंकि डिलीवरी डेट निकल जाने के बाद शिशु का ज्यादा समय तक गर्भ में रहना खतरा पैदा कर सकता है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान डिलीवरी का समय नजदीक आने पर भी यदि बेबी नीचे नहीं आ रहा है तो प्रेग्नेंट महिला को रखना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला और बच्चे दोनों को ही किसी भी तरह की परेशानी नहीं हो।

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प्रेगनेंसी में इमली खाने के फायदे और नुकसान

पोषण की बात की जाये तो वो हमारी सेहत का एक अहम हिस्सा होता है। क्योंकि जब तक हम अपने शरीर को पोषण नहीं पहुंचाते हैं। तब तक हम फिट नहीं रहता हैं, और हमे सेहत से सम्बंधित कोई न कोई परेशानी होती रहती है। और प्रेगनेंसी के दौरान तो शरीर को पोषित करना और भी जरुरी होता है क्योंकि इस दौरान महिला के शरीर में एक नन्ही जान का विकास हो रहा होता है।

शरीर को पोषण पहुंचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होती है डाइट यानी आपके द्वारा लिया जाने वाला आहार, जो आपको स्वस्थ रखने में मदद करता है। यदि आप किसी ऐसी चीज का सेवन करते हैं जो पोषक तत्वों से भरपूर होती है तो वो आपके शरीर को पोषण पहुंचाती है तो उससे आपको स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। लेकिन यदि आप किसी ऐसी चीज का सेवन करते हैं जिसमे न्यूट्रिशन नहीं होता है तो उसे खाने से आपको कोई फायदा नहीं होता है।

साथ ही सेहत सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा भी बढ़ जाता है। साथ ही जो आप खा रही है उसकी मात्रा भी यदि सही न हो यानी की आप उसका सेवन जरुरत से ज्यादा करें तो इसके कारण भी आपको सेहत सम्बन्धी परेशानियों का सामना कर सकती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम इमली के सेवन के बारे में बात करने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी में इमली का सेवन

इमली खाने में स्वादिष्ट होने के साथ पोषक तत्वों से भी भरपूर होती है। जो प्रेग्नेंट महिला को बहुत से सेहत सम्बन्धी फायदे पहुंचाने में मदद करती है। लेकिन ध्यान रखें की सिमित मात्रा में इमली का सेवन करना ही प्रेग्नेंट महिला के लिए फायदेमंद होता है। परन्तु यदि प्रेग्नेंट महिला जीभ के स्वाद के चक्कर में जरुरत से ज्यादा इमली का सेवन करती है तो इसके कारण प्रेग्नेंट महिला को सेहत सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा भी होता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में इमली का सेवन करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं और कौन से नुकसान होते हैं।

गर्भावस्था में इमली खाने के फायदे

प्रेग्नेंट महिला यदि सिमित मात्रा इमली का सेवन करती है तो ऐसा करने से महिला सेहत संबधी फायदे मिलते हैं। जैसे की:

एंटी इंफ्लेमेटरी गुण

इमली में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं जो गर्भवती महिला की मांसपेशियों को आराम पहुंचाने, सूजन की समस्या से बचाव करने, बॉडी पेन से राहत दिलाने में मदद करते हैं।

पेट सम्बन्धी परेशानी होती है दूर

गर्भावस्था के दौरान महिला को कब्ज़, पेट में गैस जैसी परेशानियां अधिक रहती है। ऐसे में इमली का सेवन महिला के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है क्योंकि इमली का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को पेट सम्बंधित परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलती है और पेट भी साफ़ रहता है।

ब्लड प्रैशर रहता है कण्ट्रोल

इमली में पोटैशियम और माइल्ड सोडियम मौजूद होता है जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करता है। लेकिन ध्यान रखें की यह फायदा भी आपको तभी मिलता है जब आप सिमित मात्रा में इमली का सेवन करती है।

जेस्टेशनल डाइबिटीज़ का खतरा होता है कम

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को जेस्टेशनल डाइबिटीज़ होने का खतरा अधिक होता है। लेकिन यदि महिला इमली का सेवन करती है तो इमली में मौजूद फ्लेवोनोइड्स और पॉलीफेनोल्स गर्भवती महिला को इस परेशानी से सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।

आयरन

इमली में आयरन प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है ऐसे में इमली का सेवन करने से गर्भवती महिला के शरीर में आयरन की कमी को पूरा होने में मदद मिलती है। साथ ही समय से पहले बच्चे के जन्म होने का खतरा कम होता है।

मॉर्निंग सिकनेस

अधिकतर गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान मॉर्निंग सिकनेस की समस्या से परेशान होती है। लेकिन इमली का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को मॉर्निंग सिकनेस यानी जी मिचलाना उल्टी जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

एंटी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर

इमली में एंटी ऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो गर्भवती महिला को बिमारियों व् संक्रमण से सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।

गर्भावस्था में इमली खाने के नुकसान

  • इमली का सेवन अधिक करने से डायरिया होने का खतरा अधिक होता है।
  • डीहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है।
  • जरुरत से ज्यादा इमली का सेवन करने से ब्लड शुगर लेवल बिगड़ने, ब्लड प्रैशर से जुडी समस्या होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • इमली का सेवन करने के बाद महिला को तुरंत दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके कारण महिला को दिक्कत होती है।

तो यह हैं कुछ फायदे और नुकसान जो इमली का सेवन कर`ने से प्रेग्नेंट महिला को मिलते हैं। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आप भी इन सभी बातों का ध्यान रखते हुए इमली का सेवन कर सकती है।

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