Home Blog Page 68

गर्भ में शिशु सबसे ज्यादा खुश कब होता है?

जब महिला को पता चलता है की वो माँ बनने वाली है तो वो पल महिला के लिए बहुत ही उत्साहित कर देने वाला होता है। साथ ही महिला उसी पल से अपने गर्भ में पल रहे शिशु से भावनात्मक रूप से जुड़ जाती है। महिला व् परिवार का हर सदस्य उस पल का बेसब्री से इंतज़ार करता है की कब नन्हा मेहमान उनकी जिंदगी में आएगा। लेकिन सच तो यह हैं की जैसे ही बच्चा गर्भ में आता है वैसे ही वो भी अपनी माँ से जुड़ जाता है और उसी पल से उसका विकास होना शुरू हो जाता है। साथ ही गर्भ में भी बच्चा ऐसी ऐसी हरकतें करता है जिसे आप देख नहीं सकते हैं।

जैसे की गर्भ में शिशु में शिशु का हंसना, रोना, अंगूठा चूसना, आदि। अब आप सोच रहे होंगे की क्या बच्चा सच में ऐसा करता है? तो इसका जवाब है जी हाँ, बच्चा गर्भ में ऐसी बहुत सी हरकतें करता है। बस फ़र्क़ इतना होता है की बच्चे के जन्म के बाद आप उन्हें महसूस कर सकते हैं देख सकते है जबकि गर्भ में उनका पता नहीं चलता है। साथ ही गर्भ में बच्चा गर्भ में बाहर होने वाली चीजों से भी खुश या नाराज़ हो सकता है। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसी बातों के बारे में बताने जा रहे हैं की गर्भ में शिशु खुश कब होता है।

जब माँ खुश होती है

गर्भावस्था के दौरान जब माँ खुश रहती है तो इसका असर गर्भ में शिशु पर भी पड़ता है। जिससे माँ के पेट शिशु भी खुश रहता है इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को खुश रहने की सलाह दी जाती है।

महिला के शिशु से बातें करने पर

माँ के पेट में बच्चा बाहर की आवाज़ों को सुन सकता है ऐसे में जब माँ अपने बच्चे से बातें करती है, कहानियां सुनाती है तो इसे सुनकर गर्भ में बच्चा बहुत खुश होता है। और जितना अधिक माँ अपने बच्चे से बातें करती है उतना ही ज्यादा माँ और बच्चे का भावनात्मक लगाव बढ़ता जाता है।

बच्चा जब मधुर संगीत सुनता है

धीमी धीमी आवाज़ में मधुर संगीत जब गर्भ में पल रहे शिशु को सुनाई देता है। तो संगीत सुनने से भी गर्भ में शिशु खुश होता है। लेकिन ध्यान रखें की ज्यादा तेज आवाज़ में गाने नहीं सुनें। क्योंकि इसके कारण शिशु के सुनने की क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है।

प्रेगनेंसी में कोई भी लापरवाही न करने पर

जब प्रेगनेंसी के दौरान महिला कोई भी लापरवाही नहीं करती है जैसे की ट्रैवेलिंग नहीं करती है, पेट के बल नहीं सोती है, उन चीजों का सेवन नहीं करती है जो बच्चे को नुकसान पहुंचाती है, झुककर काम नहीं करती है, पेट के बल कोई काम नहीं करती है, आदि। तो ऐसा करने से गर्भ में शिशु दिक्कत महसूस नहीं करता है। और जब शिशु को गर्भ में कोई दिक्कत नहीं होती है तो गर्भ में शिशु खुश रहता है।

जब महिला बच्चे का मनपसंद आहार खाती है

गर्भ में शिशु को खाने के स्वाद का भी पता चलने लगता है जब महिला कुछ ऐसा खाती है जिसका स्वाद बच्चे को पसंद आता है। तो उस स्वाद का लुत्फ़ उठाकर गर्भ में बच्चे ख़ुशी महसूस करता है।

भरपूर आराम करने पर

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला सारा दिन काम करती है आराम नहीं करती है। तो इसके कारण महिला को थकान, कमजोरी व् अन्य शारीरिक परेशानियां होने का खतरा रहता है। और जब महिला परेशान होती है तो गर्भ में बच्चा भी परेशान होता है। लेकिन यदि महिला प्रेगनेंसी के दौरान भरपूर आराम करती है तो ऐसा करने से महिला को आराम मिलता है और बच्चा भी गर्भ में खुश महसूस करता है।

बच्चे का अच्छे से विकास होने पर

प्रेग्नेंट महिला यदि पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करती है। तो इससे महिला को स्वस्थ रहने के साथ बच्चे का विकास भी अच्छे से होता है। और जब बच्चे का विकास अच्छे से होता है। तो गर्भ में बच्चा एक्टिव रहता है और खुश भी रहता है।

पेट पर हाथ फेरने से

माँ का अहसास किसी भी बच्चे के लिए बहुत ही प्यारा होता है ऐसे में जब गर्भवती महिला अपने पेट पर हाथ फेरती है तो इससे गर्भ में शिशु बहुत अच्छा महसूस करता है और खुश होता है।

भरपूर पानी पीने से

हाइड्रेटेड रहना गर्भवती महिला के लिए बहुत जरुरी होता है। क्योंकि जब महिला भरपूर पानी का सेवन करती है तो इससे महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। साथ ही गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा सही रहती है। जिससे गर्भ में शिशु का विकास अच्छे से होता है और जब शिशु का विकास अच्छे से होता है तो बच्चा माँ के पेट में खुश रहता है।

टेंशन नहीं लेने पर

गर्भवती महिला के तनाव लेने के कारण न केवल महिला की सेहत पर बुरा असर पड़ता है बल्कि बच्चे का विकास भी अच्छे से नहीं होता है। जिसके कारण बच्चा गर्भ में एक्टिव नहीं होता है। ऐसे में यदि आप चाहती है की गर्भ में आपका शिशु खुश रहे तो इसके लिए जरुरी है की महिला अपनी प्रेगनेंसी को अच्छे से एन्जॉय करे। और बिल्कुल भी टेंशन नहीं ले।

तो यह हैं गर्भ में शिशु कब खुश होता है इससे जुड़े कुछ खास टिप्स, यदि आप भी प्रेग्नेंट है तो आपको भी इन सभी बातों का जरूर ध्यान रखना चाहिए। ताकि गर्भ में शिशु को भी खुश होने में मदद मिल सके। और जब बच्चा गर्भ में खुश होगा तो उसका विकास भी बेहतर तरीके से होने में मदद मिलेगी।

When is the baby happiest in the mother’s womb

जुड़वां बच्चे होने के लक्षण

एक नन्ही जान को इस दुनिया में लाना महिला के लिए उसकी जिंदगी का सबसे बेहतरीन पल होता है। और यदि महिला को यह पता चल जाये की उसके गर्भ में एक नहीं बल्कि दो शिशु हैं तो यह ख़ुशी दुगुनी हो जाती है। गर्भावस्था के दौरान महिला बहुत से शारीरिक व् मानसिक बदलाव होते हैं जिनके कारण महिला की सेहत पर असर पड़ता है।

साथ ही बॉडी में बहुत से अलग अलग लक्षण भी महसूस होते हैं जिन्हे देखकर बहुत सी चीजों का अंदाज़ा लगाया जाता है। जैसे की गर्भ में बेटा है या बेटी है, गर्भ में जुड़वां शिशु हैं या नहीं, आदि। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे लक्षणों के बारे में बताने जा रहे हैं जो यह बताने में मदद करते हैं की जुड़वां शिशु हैं।

वजन

यदि गर्भ में जुड़वां बच्चे होते हैं तो महिला का वजन प्रेगनेंसी की शुरुआत में ही तेजी से बढ़ने लगता है। जबकि गर्भ में एक शिशु के होने पर महिला का वजन तीसरे महीने से बढ़ना शुरू होता है।

भूख ज्यादा लगना

यदि गर्भ में जुड़वां शिशु होते हैं जो महिला को बहुत ज्यादा भूख लगती है। और ऐसा प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों से ही शुरू हो जाता है।

ब्रेस्ट में नाजुकता

ब्रेस्ट का संवेदनशील होना प्रेगनेंसी का एक आम लक्षण होता है लेकिन यदि प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद महिला के ब्रेस्ट में संवेदनशीलता अधिक होती है। तो यह भी गर्भ में जुड़वां शिशु होने लक्षण होता है।

उल्टी की समस्या का अधिक होना

प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में यदि महिला को उल्टी, जी मिचलाना जैसी परेशानी अधिक होती है तो यह भी गर्भ में एक नहीं बल्कि दो शिशु होने के लक्षण होते हैं।

थकान की समस्या

यदि प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद से ही महिला को बहुत अधिक कमजोरी या थकान जैसी परेशानी होती है तो यह भी गर्भ में जुड़वां शिशु के होने की तरफ संकेत करता है।

पहले भी जुड़वां बच्चे हो

यदि आपको पहले भी जुड़वां बच्चे हुए हैं तो यह भी महिला के दोबारा गर्भधारण होने पर जुड़वां बच्चे के होने का लक्षण होता है।

तो यह हैं कुछ लक्षण जो प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में ही गर्भ में जुड़वां बच्चे होने की और संकेत करते हैं। साथ ही महिला जब पहले अल्ट्रासॉउन्ड में जब शिशु की धड़कन की जांच करवाती है तो उसमे भी यह बताया जाता है की महिला के गर्भ में एक शिशु है या जुड़वां। गर्भ में जुड़वां बच्चे होने पर महिला का समय से पहले प्रसव होने का खतरा अधिक होता है। ऐसे में प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि माँ व् बच्चे दोनों को कोई दिक्कत न हो।

Signs of having twins Baby

नवजात शिशु की केयर के लिए खास टिप्स

छोटे बच्चे की केयर करना किसी परीक्षा से कम नहीं होता है। खासकर जब आपका पहला बच्चा हो तब तो ज्यादा परेशानियां होती हैं। लेकिन फिर भी माँ अपने बच्चे को अच्छी से अच्छी केयर देने की कोशिश करती है। और धीरे धीरे बच्चे की हरकतों को समझने भी लग जाती है। परन्तु जब बच्चा जन्म लेता है तो शुरुआत में बच्चा छोटा होने के साथ बहुत नाजुक भी होता है, और बच्चे की इम्युनिटी पावर भी कम ही होती है।

ऐसे में बच्चे की केयर में थोड़ी सी भी चूक हो जाये तो इसके कारण बच्चे के बीमार होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में बच्चे को बहुत ज्यादा केयर की जरुरत होती है साथ ही महिला को छोटी छोटी बातों का ध्यान रखने की जरुरत होती है ताकि बच्चा स्वस्थ रहें। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको नवजात बच्चे की केयर कैसे की जाये इस बारे में कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं।

जब भी बच्चे को उठाएं हाथों को धोएं

महिला इस बात का खास ध्यान रखें की नवजात शिशु को अच्छी केयर देने के लिए और बिमारियों से सुरक्षित रखने के लिए महिला जब भी बच्चे को उठाएं तो उससे पहले या तो अपने हाथों को साबुन से धोये या फिर अपने हाथों को सैनिटाइज़ करें।

बार बार बच्चे को चूमें नहीं

छोटे बच्चे बहुत क्यूट होते हैं इसीलिए उन्हें बार बार प्यार करने का मन करता है। लेकिन महिला इस बात का ध्यान रखें की न तो महिला और न ही कोई और बच्चे को बार बार चूमें। क्योंकि ऐसा करने से भी बच्चे के बीमार होने का खतरा रहता है।

बच्चे के कपड़ों का ध्यान रखें

बच्चे के पहनने वाले कपडे, बच्चे के नीचे बिछाने वाले कपड़ों का अच्छे से ध्यान रखें की वो अच्छे से धुले हुए हो। और हो सके तो बच्चे के कपड़ों को डेटोल में धोना चाहिए ताकि कपड़ों के कारण बच्चे को संक्रमण का खतरा न हो।

नैप्पी गीला तो नहीं हुआ है चेक करें

बार बार चेक करते रहे की बच्चा का नैप्पी गीला तो नहीं हुआ है। क्योंकि छोटे बच्चे जितना दूध पीते हैं उतना ही सुसु कर देते हैं। ऐसे में गीली नैप्पी में रहने के कारण बच्चे को इन्फेक्शन जैसी कोई परेशानी न हो। इससे बचने के लिए महिला को बच्चे की नैप्पी चेक करते रहना चाहिए।

घर में डाइपर न पहनाएं

आज कल ज्यादातर महिलाएं बाहर जाने के साथ घर में भी बच्चों को डाइपर पहनकर रखती है जो की बच्चे के लिए गलत है क्योंकि इसके कारण बच्चे को रैशेस जैसी परेशानी होने का खतरा रहता है। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए महिला को जितना हो सके घर में बच्चे को डाइपर नहीं पहनाना चाहिए।

दूध समय पर पिलायें

छोटा बच्चा आपको बता तो नहीं सकता है की उसे भूख लगी है लेकिन अंदाज़े के अनुसार हर दो से ढाई घंटे बाद आप शिशु को दूध जरूर पिलायें। यदि शिशु सो रहा है और उसे तीन से ज्यादा घंटे हो गए हैं तो शिशु को उठायें और उसे दूध पिलायें।

बच्चे को स्तनपान कराते समय ध्यान रखें

छोटे बच्चे को ब्रेस्टफीड करवाते समय छोटी छोटी बातों का ध्यान महिला को जरूर रखना चाहिए। जैसे की बच्चे को दूध पिलाने के बाद डकार जरूर दिलवाएं, बच्चे को दूध पिलाते समय ध्यान रखें की बच्चे की नाक पर ज्यादा दबाव नहीं पड़े, बच्चा जब तक खुद दूध पीना बंद नहीं करें तब तक आप बच्चे को दूध पिलाना बंद नहीं करें, आदि। साथ ही यदि बच्चा ब्रेस्टफीड लेने की बजाय बोतल का दूध पीटा है तो बोतल की साफ़ सफाई का ध्यान रखने के साथ हर बार शिशु को ताजा दूध बनाकर ही दें।

हर किसी के हाथों में बच्चे को नहीं दें

जब घर में बच्चा आता है तो हर किसी का बच्चे को खिलाने का मन करता है लेकिन ध्यान रखें की बच्चे को हमेशा किसी न किसी की गोदी में न रखें। इसके कारण आपको परेशानी होगी क्योंकि बच्चे की आदत बिगड़ जाएगी। साथ ही हर किसी के हाथ में बच्चा देने से बच्चे को इन्फेक्शन होने का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में यदि किसी को बच्चा देना भी है तो पहले उनके अच्छे से हाथ धुलवाएं या सैनिटाइज़ करवाएं।

मालिश जरूर करवाएं

जन्म के बाद बच्चे की मालिश जरूर करवाएं या फिर घर में रोजाना नहलाने से पहले बच्चे की मालिश करें। क्योंकि मालिश करवाने से बच्चे की हड्डियां मजबूत होती है, बच्चे के शरीर में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है, जिससे बच्चे के विकास को तेजी से होने में मदद मिलती है।

बच्चा सो रहा है तो उठायें नहीं

छोटे बच्चे से खेलने का शौक हर किसी को होता है लेकिन जब बच्चा छोटा है तो वो दिन भर में ज्यादा समय सोता ही हैं। ऐसे में ध्यान रखें की बच्चा जब सो रहा हो तो उसे किसी को उठाने नहीं दें क्योंकि इसके कारण बच्चा चिड़चिड़ा हो सकता है, बच्चे की सेहत खराब हो सकती है, आदि।

बच्चे को कहीं बाहर लेकर जाते समय ध्यान रखें

यदि आप बच्चे को बाहर लेकर जाते हैं तो ध्यान रखें की बच्चे को अच्छे से दूध पिलाकर लेकर जाएँ, ज्यादा धूप में नहीं लेकर जाएँ, बच्चे को ज्यादा कसकर दबाकर न पकड़ें की कहीं बच्चे को सांस लेने में ही दिक्कत होने लग जाये, आदि। जैसे की यदि आप बाइक पर बैठी है तो ध्यान रखें की बच्चे को उस तरह पकड़कर बैठें जिस तरीके से बच्चा अच्छे से सांस ले लें।

मौसम के अनुसार बच्चे की केयर करें

नवजात यदि गर्मी के मौसम में हुआ है तो गर्मी के मौसम के अनुसार बच्चे का ध्यान रखें। जैसे की बच्चे को सूती कपडे पहनाये, मच्छरों से बच्चे का बचाव करें, ज्यादा गर्मी में बच्चे को नहीं रखें, आदि। और यदि सर्दी का मौसम है तो सर्दी के मौसम के अनुसार बच्चे का ध्यान रखें जैसे की बच्चे को गर्म कपडे पहनाएं। बच्चे को धूप जरूर दिखाएं, बच्चे के हाथ पैर, सिर सब ढक कर रखें।

घर में कोई पालतू जानवर है तो उससे बच्चे को दूर रखें

बहुत से लोगो को घर में पालतू जानवर रखने का शौक होता है। लेकिन उस पालतू जानवर को बच्चे से दूर रखें। क्योंकि पालतू जानवर हो सकता है बच्चे को काट ले या फिर उसकी वजह से बच्चे को इन्फेक्शन हो जाये। और इस बात का खास ध्यान रखें की पालतू जानवर को हाथ लगाने के बाद किसी को भी बच्चे को हाथ नहीं लगाने दें।

बच्चे का टीकाकरण समय से करवाएं

जन्म के बाद नवजात बच्चे का सही समय पर टीकाकरण करवाएं। क्योंकि यदि बच्चे का टीकाकरण समय पर होता है। तो इससे बच्चे को बिमारियों से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान बच्चे के जन्म के बाद महिला को जरूर रखना चाहिए। क्योंकि इन टिप्स का ध्यान रखने से नवजात की केयर अच्छे से होती है। साथ ही बच्चे को बिमारियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

Newborn Baby Care tips

चेहरे पर दाग धब्बे नहीं होंगे प्रेगनेंसी में यह खाएं यह लगाएं

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला के शरीर में लगातार हार्मोनल बदलाव होते हैं। और इन्ही बदलाव के के कारण महिला को तरह तरह की परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है जैसे की शारीरिक परेशानियों का होना, मानसिक परेशानियों का होना, स्किन सम्बन्धी परेशानियों का होना, आदि।

तो आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली स्किन सम्बन्धी परेशानी जैसे की चेहरे पर दाग धब्बे निकलना के बारे में कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं। जिनसे आपको जानने में मदद मिलेगी की प्रेगनेंसी के दौरान क्या खाएं और चेहरे पर क्या लगाएं जिससे आपको दाग धब्बों की समस्या से बचे रहने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी में क्या- क्या खाएं जिससे चेहरे पर दाग धब्बे न हो

गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं की ख़ूबसूरती बढ़ जाती है तो कुछ महिलाओं को चेहरे पर दाग धब्बे हो जाते हैं। ऐसे में महिला यदि अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान रखती है तो इससे स्किन को पोषण मिलता है जिससे दाग धब्बों जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में दाग धब्बों से बचने के लिए महिला को क्या खाना चाहिए।

  • आयरन युक्त आहार खाएं जैसे की हरी सब्जियां, गाजर, चुकंदर, टमाटर, अखरोट, भीगे हुए बादाम, सोयाबीन आदि।
  • विटामिन सी युक्त फल जैसे की संतरा, निम्बू, आंवला आदि, इससे शरीर में मौजूद विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं साथ ही स्किन को पोषण भी मिलता है।
  • प्रोटीन से भरपूर डाइट लें जैसे की दूध, अंडा, चिकन, दालें आदि भरपूर खाएं।
  • खाने का ध्यान रखने के साथ इस बात का भी ध्यान रखें की गर्भवती महिला को पानी का भी भरपूर सेवन करना चाहिए। क्योंकि पानी का भरपूर सेवन करने से त्वचा की नमी बरकरार रहती है जिससे स्किन को पोषण मिलता है।

दाग धब्बों से बचने के लिए प्रेगनेंसी में यह लगाएं

गर्भावस्था के दौरान चेहरे पर होने वाले दाग धब्बों को दूर करने के लिए गर्भवती महिला चेहरे पर केमिकल्स का इस्तेमाल करने की बजाय घरेलू नुस्खों को ट्राई करें। इससे चेहरे के दाग धब्बे भी दूर हो जाते हैं और प्रेगनेंसी में भी ख़ूबसूरती को बरकरार रहने में मदद मिलती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में दाग धब्बों से बचने के लिए प्रेग्नेंट महिला को चेहरे पर क्या लगाना चाहिए।

एलोवेरा जैल (Aloe vera gel)

रोजाना नहाने से बीस मिनट पहले एलोवेरा जैल को चेहरे पर लगाएं। और नहाते समय अपने मुँह को ताजे पानी से धो लें। या फिर रात को सोने से पहले आप एलोवेरा जैल को चेहरे पर लगाएं और सुबह उठकर मुँह को धो लें। ऐसा करने से प्रेगनेंसी में भी आपको अपनी स्किन को चमकदार रखने में मदद मिलती है साथ ही दाग, धब्बे, कील, मुहांसे जैसी समस्या से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

गुलाबजल (Rose Water)

रोजाना रात को सोने से पहले रुई की मदद से गुलाबजल को अपने चेहरे पर लगाएं। और उसके बाद अपने चेहरे को साफ़ पानी से धो लें। गुलाबजल भी स्किन पर होने वाली दाग धब्बों की समस्या से आपको निजात दिलाने में मदद करता है।

दही और हल्दी (Curd and Turmeric)

दही का पानी निकालकर दही में थोड़ी सी हल्दी डालकर चम्मच से अच्छे से मिक्स कर लें। उसके बाद इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं और दो से तीन मिनट तक मसाज करें। उसके बाद दस मिनट तक चेहरे को ऐसे ही छोड़ दें। फिर चेहरे को साफ़ पानी से धो लें।

शहद और निम्बू (Lemon and Honey)

एक से डेढ़ चम्मच शहद में दो चम्मच निम्बू का रस मिलाएं और इस पेस्ट को अच्छे से मिक्स कर लें। अब इस पेस्ट को मास्क के रूप में चेहरे पर लगाएं और उसके बाद चेहरे को सूखने के लिए छोड़ दें। सूखने के बाद गुनगुने पानी से चेहरे को धो लें।

बादाम (Almond)

प्रेगनेंसी के दौरान बादाम खाने के साथ बादाम को चेहरे पर लगाने से भी दाग धब्बों की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए प्रेग्नेंट महिला को एक से डेढ़ चम्मच चावल के आटे में दो से तीन बादाम पीसकर मिक्स करने हैं उसके बाद दही मिलकर एक पेस्ट तैयार करना है। पेस्ट तैयार करने के बाद इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं। और उसके बाद इसे सूखने के लिए छोड़ दें। चेहरे के सूखने के बाद साफ़ पानी से चेहरे को अच्छे से धो लें।

कच्चा दूध (Milk)

रोजाना सोने से पहले रुई की मदद से चेहरे पर कच्चा दूध लगाएं फिर इसे रात भर के लिए चेहरे पर छोड़ दें। सुबह उठकर साफ़ पानी से चेहरा धो लें। ऐसा करने से चेहरे पर होने वाले दाग धब्बों की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

पपीता (Papaya)

गर्भावस्था के दौरान पपीता खाया नहीं जा सकता है लेकिन पपीते को चेहरे पर लगाया जरूर जा सकता है। क्योंकि पपीते का इस्तेमाल करने से दाग धब्बों से निजात पाने के साथ चेहरे की स्किन को खूबसूरत बनाने में भी मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप थोड़े से पपीते के टुकड़ों को पीस लें और इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर एक पेस्ट बनाएं। यदि आपकी स्किन ऑयली है तो इसमें थोड़ा निम्बू का रस भी मिलाएं। अब इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं और पंद्रह से बीस मिनट बाद चेहरे को धो लें। ऐसा करने से चेहरे पर होने वाले दाग धब्बों की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिन्हे ट्राई करने से प्रेगनेंसी के दौरान भी महिला के चेहरे की ख़ूबसूरती को बरकरार रहने में मदद मिलती है। साथ ही महिला को दाग धब्बों की परेशानी से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

शिशु को गर्भ में काला होने से ऐसे बचाएं

जैसे ही महिला गर्भवती होती है वैसे ही उसके मन में अपने बच्चे की छवि बननी शुरू हो जाती है। और हर महिला यही चाहती है की वो एक सूंदर, हष्ट पुष्ट, बुद्धिमान, गोरे शिशु को जन्म दें। क्या आप भी प्रेग्नेंट हैं और आप भी ऐसा ही सोच रही हैं? तो इसके लिए जरुरी होता है की प्रेगनेंसी के दौरान महिला अपना अच्छे से ध्यान रखें साथ ही खान पान का अच्छे से ध्यान रखें।

और अपने आहार में ऐसी चीजों को शामिल करे जिससे शिशु का विकास अच्छे से हो और आपका शिशु गोरा भी हो। तो लीजिये आज इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे टिप्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे गर्भ में आपको अपने शिशु को काला होने से बचाने में मदद मिलती है।

नारियल खाएं (Coconut)

गर्भावस्था के दौरान हरा नारियल खाना या नारियल पानी पीना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। साथ ही ऐसा भी माना जाता है की यदि प्रेग्नेंट महिला नारियल का सेवन करती है। तो इससे गर्भ में शिशु की त्वचा की रगत में भी निखार आता है जिससे आपका होने वाला शिशु गोरा होता है।

संतरा (Orange)

संतरा विटामिन सी, फाइबर जैसे पोषक तत्वों का बेहतरीन स्त्रोत होता है। जो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों से सुरक्षित रखने में मदद करता है। साथ ही संतरा गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी फायदेमंद होता है। संतरे का सेवन करने से गर्भ में शिशु का विकास बेहतर होने के साथ शिशु की स्किन को भी पोषण मिलता है जिससे शिशु की स्किन में निखार आता है।

केसर वाला दूध (Saffron milk)

पुराने समय में ऐसा माना जाता था की यदि गर्भवती महिला केसर दूध का सेवन करती है तो इससे महिला की होने वाली संतान गोरी और सूंदर होती है। तो यदि आप भी चाहते हैं की आपकी होने वाली संतान गोरी व् सूंदर हो तो आप भी प्रेगनेंसी के दौरान केसर दूध का सेवन कर सकती है।

आयरन युक्त सब्जियां व् फल (Fruits and vegetables rich in iron)

जिन फलों व् सब्जियों में आयरन की मात्रा भरपूर होती है जैसे की हरी सब्जियां, सेब, अनार, गाजर, चुकंदर, आदि। उनका सेवन भी गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि आयरन से भरपूर डाइट लेने से भी गर्भ में शिशु का शारीरिक व् मानसिक विकास बेहतर होने के साथ शिशु की स्किन को भी पोषण मिलता है। जिससे आपका होने वाला बच्चा गोरा व् निखरा हुआ होता है।

देसी घी (Desi Ghee)

गर्भावस्था के दौरान देसी घी का सिमित मात्रा में सेवन माँ व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होता है। साथ ही ऐसा भी माना जाता है की यदि प्रेग्नेंट महिला देसी घी का सेवन करती है तो इससे होने वाले शिशु की रंगत में निखार आता है।

अंडा (Egg)

प्रोटीन व् अन्य मिनरल्स से भरपूर अंडे का सेवन करने से गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास होने के साथ आपके होने वाले शिशु की रंगत को निखारने में भी मदद मिलती है। ऐसे में यदि आप अंडा खाती है तो प्रेगनेंसी के दौरान अपनी डाइट में अंडे को जरूर शामिल करें।

दूध (Milk)

दूध पोषक तत्वों से भरपूर होता है दूध का सेवन करने से गर्भवती महिला को फिट रहने और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है। साथ ही दूध का सेवन करने से होने वाले शिशु की रंगत भी दूध की तरह निखरी हुई होती है। इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को एक दिन में दो से तीन गिलास दूध पीने की सलाह दी जाती है।

भीगे हुए बादाम (Almond)

गर्भवती महिला यदि रोजाना भीगे हुए बादामों का सेवन करती है तो इससे न केवल गर्भ में शिशु के विकास को बेहतर होने में मदद मिलती है। बल्कि बादाम में मौजूद विटामिन इ शिशु की स्किन व् बालों के बेहतर विकास के लिए भी फायदेमंद होता है।

अंगूर (Grapes)

वैसे प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादा अंगूर का सेवन करने की मनाही होती है लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला सिमित मात्रा में अंगूर का सेवन करती है। तो इससे गर्भवती महिला को सेहत सम्बन्धी फायदे तो मिलते ही हैं साथ ही अंगूर आपके होने वाले शिशु की रंगत को निखारने में भी मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ आहार जिन्हे खाने से गर्भ में पल रहे शिशु की रंगत को निखारने में मदद मिलती है। और आपका शिशु काला नहीं होता है, यदि आप भी चाहती हैं की आपका होने वाला शिशु गोरा हो। तो आप भी प्रेगनेंसी में इन बातों का अच्छे से ध्यान रखें।

How to protect your baby from getting black in the womb

सर्दियों में डिलीवरी होने वाली है इन बातों का ध्यान रखें

सर्दियों का मौसम वैसे तो बहुत ही अच्छा होता है लेकिन इस दौरान यदि थोड़ी सी भी लापरवाही बरती जाए तो इस कारण सर्दी, खांसी, बुखार, गले में इन्फेक्शन जैसी परेशानियां हो जाती है। इसीलिए मौसम के बदलाव के साथ सेहत का ज्यादा ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। आज इस आर्टिकल में हम उन महिलाओं के बारे में कुछ ध्यान देने योग्य बातों के बारे में बताने जा रहे हैं। जिन महिलाओं की डिलीवरी सर्दियों में होने वाली होती है।

क्योंकि डिलीवरी होने के बाद यदि महिला थोड़ी भी लापरवाही बरतती है तो इसका असर न केवल महिला की सेहत पर पड़ता है। बल्कि इसके कारण बच्चे को भी नुकसान होता है, क्योंकि माँ यदि बीमार हो जाती है तो नवजात की केयर भी अच्छे से नहीं हो पाती है। तो आइये अब सर्दियों में डिलीवरी होने पर महिला को किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए जिससे माँ व् बच्चे दोनों को दिक्कत न हो उस बारे में बताने जा रहे हैं।

सर्दी से बचने के लिए गर्म कपड़ें पहनें

सर्दियों में डिलीवरी होने के बाद बच्चे के साथ माँ को भी गर्म कपडे पहनने चाहिए। शरीर के साथ हाथ, पैर, सिर को भी अच्छे से ढक कर रखना चाहिए। क्योंकि ऐसा माना जाता है की महिला की डिलीवरी होने के बाद चालीस दिन तक यदि महिला अपना अच्छे से ध्यान रखती है तो महिला को आगे चलकर दिक्कत नहीं होती है और महिला जल्दी फिट होती है। ऐसे में महिला को सर्दी में अपने आप को बचाकर रखना चाहिए ताकि महिला को सर्दी के कारण कोई दिक्कत न हो।

गर्म पानी का इस्तेमाल

डिलीवरी के बाद सर्दियों में ठन्डे पानी का इस्तेमाल महिला को बिल्कुल नहीं करना चाहिए। बल्कि यदि हाथ भी धोने हैं तो गुनगुना पानी लें। नहाने के लिए गर्म पानी का इस्तेमाल करें इससे शरीर की सिकाई भी होगी और सर्दी से भी बचाव होगा। पीने के लिए भी गुनगुने या गर्म पानी का इस्तेमाल करें।

ध्यान रखें की शरीर में पानी की कमी न हो

सर्दी के मौसम में प्यास कम ही लगती है ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला पानी का सेवन करना नहीं भूलें। क्योंकि शरीर में पानी की कमी होने के कारण महिला को थकान, कमजोरी, दूध की मात्रा में कमी, स्किन से जुडी परेशानियां, बॉडी पेन आदि का खतरा बढ़ जाता है।

मसाज

डिलीवरी के बाद बच्चे की मालिश रोजाना करने के साथ महिला को अपने शरीर की मालिश भी करवानी चाहिए। इससे शरीर को आराम मिलता है और महिला को जल्दी फिट होने में मदद मिलती है। क्योंकि इससे शरीर में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है। ध्यान रखें की यदि आपकी डिलीवरी सिजेरियन हुई है या आपको नोर्मल डिलीवरी में भी टाँके आये हैं तो आप मसाज करवाने से पहले डॉक्टर की राय जरूर लें। इसके अलावा ध्यान रखें की मसाज बंद कमरे में करवाएं ताकि आपके शरीर को ठंडी हवा नहीं लगे।

सर्दियों में खान पान का रखें ध्यान

यदि आपकी डिलीवरी सदियों में हुई है तो आपको रोजाना दो से तीन गिलास दूध पीने के साथ गोंद या ड्राई फ्रूट के लड्डू भी खाने चाहिए। क्योंकि यह लड्डू सर्दियों में आपके लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। क्योंकि इन लड्डुओं को बनाने में जिन चीजों का इस्तेमाल होता है उनकी तासीर गर्म होती है सर्दियों के आपके लिए बहुत फायदेमंद होती है। इसके अलावा महिला को सब्जियों से बने सूप, दालों, हरी सब्जियों, फ्रूट्स आदि का भी भरपूर सेवन करना चाहिए।

आराम करें

यदि गर्मियों में आपकी डिलीवरी होती है तो गर्मी के कारण आपको परेशानियां हो सकती है। लेकिन यदि आपकी डिलीवरी सर्दियों में हुई है तो आप बहुत लकी हैं। क्योंकि सर्दियों में डिलीवरी होने पर आप अच्छे से आराम कर सकती है। और जितना अधिक डिलीवरी के बाद महिला आराम करती है उतना ही ज्यादा महिला को फिट होने में मदद मिलती है।

कमरे में हीटर लगाकर न सोएं

डिलीवरी के बाद सर्दी से बचने के लिए रात को बंद कमरे में हीटर चलाकर नहीं सोएं क्योंकि ऐसा करने से दम घुट सकता है। यदि आप सर्दी से बचने के लिए हीटर चलाती हैं तो ध्यान रखें की की कमरे को खोलकर सोएं ताकि अंदर बहुत ज्यादा हीट न हो जिससे आपको या बच्चे को कोई दिक्कत हो।

एक्स्ट्रा कपडे रखें अपने पास

सर्दियों में कपडे सूखने की बहुत समस्या होती है ऐसे में डिलीवरी के बाद आपको कपड़ों के कारण कोई दिक्कत न हो। इससे बचने के लिए आपको पहले ही एक्स्ट्रा कपडे लाकर रख लेने चाहिए, केवल पहनने के लिए ही नहीं बल्कि चादर, कम्बल, बच्चे के बिछोने आदि भी लाकर जरूर रखें।

संक्रमित व्यक्ति से दूरी रखें

ध्यान रखें की सर्दी के मौसम में ऐसे व्यक्ति से दूरी बनाकर रखें जिसे संक्रमण की समस्या जैसे की खांसी जुखाम हो। क्योंकि ऐसे व्यक्ति के करीब जाने के कारण आपको भी दिक्कत हो सकती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान सर्दियों में डिलीवरी होने के बाद महिला को जरूर रखना चाहिए। यदि महिला इन बातों का ध्यान रखती है तो ऐसा करने से माँ व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

Precautions for winter baby delivery tips

इम्युनिटी बूस्ट करने के लिए काढ़ा कैसे बनाएं?

पुराने समय में लोग फिट रहने के लिए और बिमारियों से बचे रहने के लिए काढ़े का सेवन करते थे। आज भी कई लोग छोटी छोटी शारीरिक समस्याओं के होने पर घर में काढ़ा बनाकर उसका सेवन करते हैं। क्योंकि काढ़ा पीने से शरीर में मौजूद विषैले पदार्थ तो निकल ही जाते हैं।

साथ ही शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है जो आपको हर बीमारी व् संक्रमण से बचे रहने में मदद करती है। आयुर्वेद के अनुसार भी काढ़ा का सेवन करना आपको सभी बिमारियों से सुरक्षित रखने में मदद करता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे काढ़ा के बारे में बताने जा रहे हैं जो इम्युनिटी को बढ़ाने में आपकी मदद करते हैं।

तुलसी, लौंग, दालचीनी से बना काढ़ा

  • सबसे पहले दस से बारह तुलसी के पत्ते, एक बड़ा टुकड़ा दालचीनी का या दो चम्मच दालचीनी पाउडर, दो तीन लौंग, आधा टुकड़ा कच्ची हल्दी, इन सभी चीजों को पीसकर अच्छे से मिक्स कर लें।
  • अब गैस पर एक बर्तन में दो गिलास पानी डालकर इन सभी चीजों को उसमे डाल दें।
  • उसके बाद इसे दस से बारह मिनट के लिए उबालें।
  • अब इसे छान लें और इसमें एक या डेढ़ चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो बार चाय की तरह पीएं।
  • ऐसा करने से आपको सर्दी, खांसी, जुखाम जैसी बिमारियों से बचाव करने और इम्युनिटी को बूस्ट करने में मदद मिलती है।

काली मिर्च, अदरक, हल्दी से बना काढ़ा

  • सबसे पहले आप इस काढ़ा को बनाने के लिए जिन चीजों की जरुरत है उन्हें इक्कठा कर लें।
  • जैसे की 8-10 काली मिर्च, 3-4 लौंग, आधा चम्मच पीसी हुई हल्दी, 1-2 बड़ी इलायची, 5-6 मुनक्का, दालचीनी का 1 टुकड़ा, दो चम्मच पीसी हुई अदरक, तुलसी की 5-6 पत्तियां।
  • उसके बाद दो गिलास पानी में अदरक और हल्दी को डालकर तब तक उबालें जब तक की पाने पूरा पीला न हो जाये और अदरक की अच्छे से खुशबू न आये।
  • फिर बाकी चीजों को भी एक एक करके पानी में डालें और पानी को कम से कम दस से पंद्रह मिनट तक उबालें।
  • अब यह पानी एक कप से थोड़ा ज्यादा रह जायेगा अब इसे छान लें और इसमें एक से डेढ़ चम्मच शहद मिलाकर इसका सेवन करें।
  • ध्यान रखें की जब भी यह काढ़ा पीना हो इसे ताजा बनाएं, एक हफ्ते में एक बार इस काढ़े को बनाकर जरूर पीएं। क्योंकि यह काढ़ा इम्युनिटी बूस्ट करने के लिए बहुत ही बेहतरीन होता है।

तुलसी का काढ़ा

  • तुलसी का काढ़ा बनाने में आसान होने के साथ सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि यह इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करता है।
  • इसे बनाने के लिए एक पैन में दस बारह तुलसी के पत्ते, दो दालचीनी के ज्यादा छोटे छोटे या ज्यादा बड़े नहीं बल्कि मध्यम आकार के टुकड़े और तीन कप पानी डालें।
  • अब इस पैन को गैस पर रखें और पानी को जब तक उबालें जब तक की पानी एक कप न रह जाएँ।
  • उसके बाद इस पानी को छान लें और इसमें एक से डेढ़ चम्मच शहद मिलाएं और इसका सेवन करें।
  • ऐसा हफ्ते में दो से तीन बार करें इससे आपकी प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ काढ़ा जो इम्युनिटी बूस्ट करने में मदद करते हैं। जिससे आपको बिमारियों व् इन्फेक्शन से बचे रहने में मदद मिलती है। और यह काढ़ा बच्चों से लेकर बुर्जुगों तक सभी को पीना चाहिए। ताकि सभी को फिट रहने में मदद मिल सके।

Know how to make Immunity Booster Kadha Recipe

7वें महीने में गर्भवती महिला को दूध में एक चम्मच घी डालकर क्यों पीना चाहिए

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला के लिए दूध और घी का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि दूध और घी दोनों में ही पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो प्रेग्नेंट महिला को तंदरुस्त रखने के साथ गर्भ में बच्चे के शारीरिक व् मानसिक विकास के लिए भी फायदेमंद होते हैं।

अलग अलग तो इनका सेवन प्रेगनेंसी में करना फायदेमंद होता ही है साथ ही यदि प्रेग्नेंट महिला दूध में एक चम्मच घी डालकर दिन में एक बार उस दूध का सेवन करती है। तो यह भी माँ व् बच्चे दोनों के लिए दुगुना फायदेमंद होता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में प्रेगनेंसी के 7वें महीने में गर्भवती महिला को दूध में एक चम्मच घी डालकर क्यों पीना चाहिए इस बारे में बताने जा रहे हैं।

बच्चे का बढ़ता है विकास

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में गर्भ में बच्चे का विकास तेजी से बढ़ने लगता है ऐसे में गर्भ में शिशु का विकास अच्छे से हो इसके लिए गर्भवती महिला को रोजाना दिन में एक समय दूध में घी डालकर जरूर पीना चाहिए। क्योंकि दूध और घी दोनों के मिलने से आपको और बच्चे दोनों को पोषक तत्व भी दुगुने मिलते हैं। जो गर्भ में शिशु के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास में मदद करते हैं। जिससे आपके होने वाले शिशु की हड्डियां मजबूत होती है, मसल्स मजबूत होती है, दिमाग का विकास अच्छे से होता हैं, आदि।

कब्ज़ से मिलती है राहत

गुनगुना दूध और घी दोनों में ही ऐसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो गर्भवती महिला के पाचन तंत्र को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करते हैं। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को कब्ज़ जैसी परेशानी से राहत पाने में मदद मिलती है।

पाचन होता है बेहतर

प्रेगनेंसी के दौरान वजन बढ़ने के कारण महिला की पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है जिसके कारण महिला को खाना हज़म करने में दिक्कत होती है। लेकिन यदि महिला दूध में घी डालकर पीती है तो प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही पेट से जुडी अन्य परेशानियों से भी महिला को निजात मिलता है।

महिला रहती है एनर्जी से भरपूर

दूध में घी डालकर पीने से प्रेग्नेंट महिला के शरीर में कैलोरी की मात्रा सही रहती है जिससे गर्भवती महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

डिलीवरी के लिए शरीर होता है तैयार

दूध में घी डालकर पीने से प्रेग्नेंट महिला के शरीर को प्रसव के लिए तैयार होने में मदद मिलती है। साथ ही इससे प्रसव को आसान बनाने व् प्रसव के दौरान होने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है।

शारीरिक और मानसिक फिटनेस के लिए है बेहतर

प्रेगनेंसी के दौरान महिला शारीरिक के साथ मानसिक रूप से भी बहुत सी परेशानियों का अनुभव करती है लेकिन यदि महिला दूध में घी डालकर पीती हैं। तो ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला को शारीरिक के साथ मानसिक परेशानियों से भी राहत पाने में मदद मिलती है। क्योंकि दूध में घी डालकर पीने से थकान, कमजोरी, तनाव से बचाव होता है जिससे गर्भवस्था के दौरान महिला शारीरिक और मानसिक रूप से फिट रहती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो 7वें महीने में गर्भवती महिला को दूध में एक चम्मच घी डालकर पीने से मिलते हैं। यदि आप भी प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में हैं तो आपको भी ऐसा जरूर करना चाहिए। लेकिन याद रखें की यदि आपका वजन ज्यादा है या दूध और घी से अन्य कोई परेशानी है तो दूध में घी डालकर सेवन करने से पहले एक बार डॉक्टर से जरूर बात कर लें।

Why should a pregnant woman drink ghee in milk in the 7th month of Pregnancy

लम्बी घनी और सूंदर पलकों के लिए यह करें

आँखों की सुंदरता को बढ़ाने में पलकें अहम रोल अदा करती है। लेकिन यदि पलके घनी, लम्बी न हो तो इससे आँखों सुंदरता कम हो जाती है और आँखें उतनी आकर्षक नहीं लगती हैं। कुछ महिलाएं तो आँखों की सुंदरता को बढ़ाने के लिए आर्टिफिशल पलकों का इस्तेमाल भी करती हैं। लेकिन रोजाना ऐसा करना मुमकिन नहीं होता है। तो क्या आप भी पलकों की ग्रोथ अच्छी न होने के कारण परेशान हैं? यदि हाँ, तो आइये आज इस आर्टिकल में आपको कुछ आसान टिप्स बताने जा रहे हैं जो पलकों को लम्बी, घनी और सूंदर बनाने में आपकी मदद करते हैं।

जैतून और अरंडी का तेल (Olive oil and Castor oil)

एक या दो बून्द जैतून के तेल में एक या दो बून्द अरंडी का तेल मिलाएं, और इसे अच्छे से मिक्स करें। उसके बाद मस्कारा लगाने वाले ब्रश से इस तेल को अपनी पलकों पर लगाएं। ऐसा रात को सोने से पहले करें, उसके बाद सुबह उठकर अपनी आँखों को अच्छे से धो लें। यदि आप चाहे तो सिर्फ ओलिव आयल का इस्तेमाल भी कर सकती है क्योंकि ओलिव आयल का इस्तेमाल करने से भी आपको बेहतरीन फायदा देखने को मिलता है।

पेट्रोलियम जेली (Petroleum jelly)

रात को सोने से पहले अपनी पलकों पर पेट्रोलियम जेली लगाएं। ज्यादा नहीं लगाएं, थोड़ी थोड़ी लगाएं, उसके बाद सुबह उठकर अपनी आँखों को धो लें। ऐसा करने से आँखों की पलकों को घना, सूंदर और आकर्षक बनाने में मदद मिलती है।

निम्बू का छिलका (Lemon Peel)

एक निम्बू का छिलका लें और उसे छोटे छोटे हिस्सों में काट लें, उसके बाद इन छिलकों को जैतून या अरंडी के आधा कटोरी तेल में डालें और दो से तीन दिन तक इसे ढक कर रख दें। उसके बाद इसे मस्कारा लगाने वाले ब्रश की मदद से रोजाना रात को सोने से पहले पलकों पर लगाएं। और सुबह उठकर आँखों को ठन्डे पानी से धो लें।

ग्रीन टी (Green Tea)

ग्रीन टी की पत्तियों को पानी में अच्छे से उबाल लें, पानी के ठंडा होने पर इसमें रुई को भिगोएं। और फिर रुई की मदद से पलकों पर इसे लगाएं। ऐसा रोजाना रात को सोने से पहले करें। उसके बाद बचे हुए मिश्रण को ढक कर रख दें, क्योंकि इस मिश्रण को आप दो से तीन दिन बाद तक इस्तेमाल कर सकते हैं।

एलोवेरा जैल (Aloe vera gel)

रोजाना रात को सोने से पहले एलोवेरा जैल को मस्कारा स्टिक से पलकों पर लगाएं। रात भर इसको ऐसे ही रहने दें, उसके बाद सुबह उठकर अच्छे से आँखों को धो दें। ऐसा करने से आपको पलकों को घना और सूंदर बनाने में मदद मिलती है।

मसाज करें (Massage)

रात को सोने से पहले हल्के हाथों से आँखों की नारियल तेल, विटामिन इ का तेल, जोजोबा आयल, टी ट्री आयल से मसाज करें। ऐसा करने से भी आपको फायदा मिलता है।

अंडा (Egg)

अंडे की जर्दी यानी की अंडे का थोड़ा सा पीला भाग लें, उसके बाद उसमे थोड़ा ग्लिसरीन मिलाएं। अब इन दोनों को जब तक मिक्स करें जब तक की यह एक क्रीमी मिक्सचर न बन जाये। उसके बाद रुई की मदद से इसे पलकों पर लगाएं फिर आँखों से पंद्रह से बीस मिनट तक बंद करें और लेट जाएँ। फिर पानी की मदद से अच्छे से आँखों को साफ़ कर लें। यह तरीका भी पलकों को खूबसूरत बनाने में आपकी मदद करता है।

नारियल दूध (Coconut Milk)

बाजार से नारियल दूध आपको आसानी से मिल जाता है लेकिन ध्यान रखें की अच्छी क़्वालिटी का नारियल दूध लाएं। उसके बाद नारियल दूध में रुई को भिगोएं, और इसे पलकों पर लगाएं। दस मिनट तक इसे आँखों पर ही रहने दें, उसके बाद आँखों को पानी से साफ़ कर दें।

ब्रश (Brush)

रोजाना दिन में दो से तीन बार ब्रश की मदद से अपनी पलकों को ऊपर की और उठायें। ऐसा करने से भी पलकों को घना करने में मदद मिलती है। क्योंकि इससे उनमे ब्लड फ्लो अच्छे से होते हैं और उनमे जमी गंदगी भी अच्छे से निकल जाती है।

पलके करें ट्रिम (Trim your Eyelashes)

हर दो से तीन महीने में पलकों को बिल्कुल थोड़ा थोड़ा ट्रिम करें, ऐसा करने से पलकों की ग्रोथ को बढ़ाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जो आपकी पलकों को घनी, सूंदर व् आकर्षक बनाने में मदद करते हैं। लेकिन ध्यान रखें की एक दिन या एक हफ्ते में ही आपको इसका फायदा नहीं होगा। बल्कि कुछ समय तक रोजाना इन टिप्स को ट्राई करें, धीरे धीरे आपको इसका फायदा जरूर महसूस होगा।

Tips for Long, Thick and Beautiful Eyelashes

महिलाओं में मूछें और दाढ़ी आने की समस्या के कारण और उपाय

महिलाएं अपनी ख़ूबसूरती को लेकर बहुत सजग रहती है और उनकी ख़ूबसूरती हमेशा बरकरार रहे इसके लिए महिला बहुत से सुंदरता बढ़ाने के उपाय भी ट्राई करती है। लेकिन कई बार महिलाओं के चेहरे पर दाढ़ी मूछें आने लगती हैं, जिस तरह पुरुषों के चेहरे पर दाढ़ी मूछें होती है।

जो न केवल देखने में अजीब और भद्दा लगता है बल्कि इसके कारण महिला लोगो के बीच हास्य का विषय भी बन जाती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको महिलाओं के चेहरे पर दाढ़ी मूछें आने के क्या कारण होते हैं और किस तरह महिला इस समस्या से छुटकारा पा सकती है इस बारे में बताने जा रहे हैं।

महिला के चेहरे पर दाढ़ी मूछें आने के कारण

  • शरीर में होने वाले हार्मोनल असंतुलन के कारण महिलाओं को यह समस्या हो जाती है।
  • गर्भावस्था और मेनोपॉज़ के दौरान शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं और शरीर में होने वाले इन्ही हार्मोनल बदलाव के कारण भी महिला को दाढ़ी मूछों की समस्या हो सकती है।
  • यदि महिला के परिवार में किसी को यह समस्या है तो इस कारण भी महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • यदि महिला किसी बिमारी से जुडी दवाइयों का सेवन करती है तो महिला को दवाइयों का सेवन करने के कारण भी ऐसा हो सकता है।

दादी व् मूंछों की समस्या से निजात पाने के टिप्स

यदि किसी महिला को दाढ़ी व् मूंछे निकल रही हैं तो घबराएं नहीं, क्योंकि ऐसा नहीं है की आपको इस परेशानी से निजात नहीं मिल सकता है। बल्कि कुछ आसान टिप्स को ट्राई करने से इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है। जैसे की:

केला और ओटमील का इस्तेमाल करें

केले और ओटमील को मिक्स करके अच्छे से पीस लें, और एक पेस्ट तैयार करें। अब इस पेस्ट को अच्छे से अपने चेहरे पर लगाएं और दस से पंद्रह मिनट तक मसाज करें। मसाज करने के बाद चेहरे को धों दें, ऐसा करने से आपको इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

चीनी और निम्बू का रस

निम्बू के रस में थोड़ी सी चीनी डालकर अच्छे से गर्म करें, और जब तक गर्म करें जब तक की यह वैक्स की तरह चिपचिपी न हो जाये। उसके बाद इस पेस्ट के ठंडा होने पर इसे चेहरे पर पतली लेयर के रूप में लगाएं और थोड़ी देर बाद पानी से इसे साफ़ कर दें, ऐसा करने से आपको चेहरे पर होने वाले अनचाहे बालों से निजात पाने में मदद मिलेगी।

लेज़र

घरेलू तरीको के अलावा लेज़र भी एक तरीका है जिसे ट्राई करने से इस समस्या से निजात मिल जाता है। यह तरीका थोड़ा महंगा हो सकता है लेकिन इस समस्या से बचने के लिए यह एक असरदार उपाय होता है।

वैक्सिंग

इस समस्या से बचने के लिए आप चाहे तो अपने चेहरे पर वैक्सिंग भी करवा सकती है, लेकिन ध्यान रखें की जिस वैक्स से स्किन को किसी तरह का नुकसान न हो वही वैक्स करवाएं।

तो यह हैं कुछ कारण व् उपाय जिनकी वजह से महिलाओं को दाढ़ी व् मूंछों की समस्या हो जाती है। और यदि महिला को यह समस्या हो जाती है तो नीचे दिए गए टिप्स को ट्राई करने से महिला आसानी से इस समस्या से निजात पा सकती है।

Causes and remedies for mustache and beard problem in women