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प्रेग्नेंट महिला को ठंडा पानी क्यों नहीं पीना चाहिए?

प्रेगनेंसी के दौरान भरपूर मात्रा में पानी पीने से बहुत से फायदे मिलते हैं और यह फायदे महिला के साथ बच्चे को भी मिलते हैं। जैसे की भरपूर पानी पीने से महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है जिससे प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियां कम होती है। साथ ही पानी का भरपूर सेवन गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा को सही रखने में मदद करता है। जिससे गर्भ में बच्चे के विकास को बेहतर होने में मदद मिलती है।

लेकिन पानी का सेवन करते समय महिला को बहुत सी बातों का ध्यान रखना भी जरुरी होता है जैसे की महिला को फिल्टर्ड पानी पीना चाहिए, ज्यादा ठंडा या ज्यादा गर्म पानी नहीं पीना चाहिए, आदि। आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान ठंडा पानी पीने से गर्भवती महिला को कौन कौन से नुकसान हो सकते हैं उस बारे में बताने जा रहे हैं। जैसे की:

पेट से जुडी परेशानियां हो जाती है

ठंडा पानी पीने से पेट के आस पास की नसें सिकुड़ जाती हैं। जिसके कारण पाचन क्रिया धीमी पड़ने लगती है। और पाचन क्रिया के धीमे होने के कारण प्रेगनेंसी के दौरान पेट से जुडी परेशानियों जैसे की पेट में दर्द, खाना हज़म होने में दिक्कत आदि का सामना महिला को करना पड़ता है।

कब्ज़

ठन्डे पानी में यदि आप हाथ डालते हैं तो आपको ऐसा लगता है की आपके हाथ जम गए हैं। वैसे ही जब प्रेग्नेंट महिला ठंडा पानी पीती है तो इससे शरीर में चीजें भी सख्त होने लगती है जैसे की यदि आप खाना खाती है तो ठन्डे पानी की वजह से खाना सख्त हो जाता है जिसके कारण वो अच्छे से हज़म नहीं हो पाता है। और इस कारण गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान कब्ज़ व् बवासीर जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

पोषक तत्वों की हो जाती है कमी

यदि प्रेग्नेंट महिला खाने के साथ ठंडा पानी पीती है तो उसमे पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। क्योंकि ठंडा पानी भोजन में मौजूद पोषक तत्वों को खत्म कर देता है। ऐसे में गर्भवती महिला को आहार में मौजूद भरपूर पोषक तत्व मिलें इसके लिए प्रेग्नेंट महिला को ठंडा पानी प्रेगनेंसी के दौरान नहीं पीना चाहिए खासकर खाने के साथ तो बिल्कुल भी नहीं पीना चाहिए।

सर्दी खांसी की समस्या

ठंडा पानी पीने के कारण गर्भवती महिला को सर्दी, खांसी, गले में इन्फेक्शन जैसी परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है। साथ ही बुखार होने का खतरा भी अधिक होता है।

गर्भ में शिशु की बढ़ती है हलचल

जब महिला ठंडा पानी पीती है तो इसके कारण महिला के शरीर के अंदर के तापमान में फ़र्क़ आता है। जिसकी वजह से गर्भ में शिशु की हलचल बढ़ जाती है। साथ ही यदि महिला बहुत ज्यादा ठंडा पानी पीती है तो इस कारण जन्म के बाद बच्चे को निमोनिया होने का खतरा भी रहता है।

शरीर में दर्द

ठन्डे पानी का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को जोड़ो में दर्द, पीठ में दर्द व् शरीर के अन्य हिस्सों में दर्द जैसी परेशानी का सामना भी अधिक करना पड़ सकता है।

सूजन

ठंडा पानी पीने की वजह से प्रेग्नेंट महिला को सूजन की समस्या भी प्रेगनेंसी के दौरान अधिक हो सकती है। जिसकी वजह से प्रेग्नेंट महिला को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।

वजन भी बढ़ता है

ठंडा पानी पीने के कारण शरीर में जमी चर्बी सख्त हो जाती है साथ ही इसकी वजह से फैट भी नहीं कम होता है। जिसके कारण वजन ज्यादा बढ़ने का खतरा होता है। और प्रेगनेंसी के दौरान महिला के वजन का जरुरत से ज्यादा बढ़ना माँ व् बच्चे दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है।

डीहाइड्रेशन की समस्या

ठंडा पानी पीने से बहुत जल्दी प्यास बुझ जाती है। जिसकी वजह से शरीर में पानी की कमी हो जाती है और गर्भवती महिला को डीहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है जिससे माँ और बच्चे दोनों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है।

एनर्जी हो जाती है डाउन

प्रेग्नैंक्ट महिला यदि ज्यादा ठंडा पानी पीती है तो ज्यादा ठंडा पानी पीने से मेटाबॉलिज्म धीमी हो जाती है, जिसकी वजह से गर्भवती महिला सुस्त महसूस करती है और गर्भवती महिला का एनर्जी लेवल भी डाउन हो जाता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान ऊर्जा से भरपूर रहने के लिए प्रेग्नेंट महिला को जितना हो सके ताजा पानी का सेवन करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से गर्भवती महिला को ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए। ठंडा पानी पीने के अलावा ठंडी चीजें, ठंडा जूस आदि भी प्रेग्नेंट महिला को नहीं पीना चाहिए।

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ठुड्डी के कालेपन को दूर करने के उपाय

जिन लोगो की स्किन ऑयली होती है उन्हें नाक के आस पास और ठुड्डी पर कालेपन की समस्या अधिक रहती है और इसका कारण नाक व् ठुड्डी पर ब्लैकहेड्स अधिक होना होता है। साथ ही ठुड्डी पर मिट्टी, डेड स्किन का जमाव होने के कारण भी स्किन काली पड़ने लगती है। लेकिन यह कोई ऐसी परेशानी नहीं है जिसका कोई उपचार न हो बल्कि कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल करके ठुड्डी के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है। जैसे की:

एलोवेरा (Aloe vera)

एलोवेरा जैल को रोजाना रात को सोने से पहले ठुड्डी पर लगाएं और रात भर के लिए इसे ठुड्डी पर छोड़ दें। उसके बाद सुबह उठकर नहाते समय ठुड्डी को साफ़ कर लें। ऐसा कुछ दिनों तक नियमित करें धीरे धीरे ठुड्डी का कालापन दूर होने लग जायेगा। आप चाहे तो एलोवेरा जैल को पूरे चेहरे पर भी लगा सकते हैं इससे आपके पूरे चेहरे में निखार आने में मदद मिलती है।

दालचीनी (Cinnamon)

आधा चम्मच दालचीनी, थोड़ी से हल्दी और गुलाबजल को मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें। अब उस पेस्ट को ठुड्डी पर लगाकर दो से तीन मिनट तक मसाज करें और फिर इसे सूखने के लिए छोड़ दें। सूखने के बाद ठुड्डी को अच्छे से साफ़ कर लें ऐसा हफ्ते में दो से तीन बार करें इससे ठुड्डी का रंग भी निखरने लगेगा। और ठुड्डी पर ब्लैकहेड्स की समस्या भी नहीं होगी।

बेसन (Gram Flour)

एक चम्मच बेसन में नमक और गुलाबजल मिलाकर एक पेस्ट बनाएं। अब इस पेस्ट को ठुड्डी पर लगाएं और दो से तीन मिनट तक मसाज करने के बाद सूखने के लिए छोड़ दें। सूखने के बाद साफ़ पानी से ठुड्डी को साफ़ कर लें।

शहद और चीनी (Honey and Sugar)

एक चम्मच शहद में एक चम्मच चीनी मिलाएं। उसके बाद इस मिक्सचर को ठुड्डी पर लगाएं और स्क्रब की तरफ ठुड्डी पर मसाज करें। ऐसा करने से ठुड्डी पर से डेड स्किन, ब्लैकहेड्स को हटाने में मदद मिलेगी। जिससे ठुड्डी का कालापन दूर होगा।

सब्जियों का इस्तेमाल करें (Vegetables)

टमाटर, खीरा, आलू, निम्बू किसी का भी रस निकालकर या एक स्लाइस काटकर ठुड्डी की मसाज करें और ऐसा रोजाना करें। फिर इसे सूखने के लिए छोड़ दें, और जब यह सूख जाये उसके बाद साफ़ पानी से ठुड्डी को धो लें ऐसा करने से भी ठुड्डी के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है।

हल्दी (Turmeric)

हल्दी का इस्तेमाल बरसों से स्किन को निखारने के लिए किया जाता है ऐसे में ठुड्डी की स्किन के कालेपन को दूर करने और स्किन को निखारने में भी हल्दी बहुत फायदेमंद है। इसके इस्तेमाल के लिए आप हल्दी और दूध का एक पेस्ट बनाएं। उसके बाद इस पेस्ट से अपनी ठुड्डी की मसाज करें। मसाज करने के बाद ठुड्डी अच्छे से साफ़ कर लें। आपको जरूर फायदा मिलेगा।

बेकिंग सोडा (Baking Soda)

एक चम्मच बेकिंग सोडा में पानी मिलाकर एक पेस्ट बनाएं। अब इस पेस्ट से ठुड्डी की मसाज करें और उसके बाद इसे साफ़ कर दें एक दिन छोड़कर ऐसा जरूर करें। ऐसा करने से ठुड्डी के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है।

अंडा और शहद

अंडे के सफ़ेद हिस्से और शहद को मिलाकर एक पेस्ट बनाएं और इसे मास्क की तरह ठुड्डी पर लगाएं। सूखने के बाद इस पेस्ट को अच्छे गुनगुने पानी से धो लें। ऐसा करने से भी ठुड्डी के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है।

संतरे के छिलके

संतरे के छिलको को सुखाकर एक पाउडर बनाएं। अब दो चम्मच संतरे के छिलके के पाउडर में पानी मिलाएं। और उसके बाद इसे सूखने के लिए छोड़ दें। सूखने के बाद साफ़ पानी से उसे साफ़ कर दें, ऐसा करने से भी ठुड्डी के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिन्हे ट्राई करने से आपको ठुड्डी के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है। यदि आप भी इस समस्या से परेशान हैं तो इन टिप्स को जरूर ट्राई करें आपको जरूर फायदा मिलेगा।

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चेहरे से हेयर डाई का कलर उतारने के तरीके

कुछ महिलाएं या पुरुष बालों के लिए हेयर डाई का इस्तेमाल करते हैं जो उनके बालों को खूबसूरत बनाने में मदद करता है। लेकिन कई बार हेयर डाई बालों के साथ साथ चेहरे खासकर माथे पर लग जाती है जो की बहुत गन्दी लगती है। लेकिन आप अपनी इस समस्या का जल्द से जल्द उपचार करके इस समस्या से चेहरे से निजात पा सकते हैं। अब आप सोच रहे होंगे की ऐसा कैसे हो सकता है तो आइये हम आपको बताते हैं।

टूथपेस्ट

हेयर डाई का रंग जहां पर लगा है वहां पर टूथपेस्ट लगाएं और उसे सूखने के लिए छोड़ दें। सूखने के बाद साफ़ पानी से उस जगह को साफ़ कर दें आपको जरूर फ़र्क़ नज़र आएगा। लेकिन यदि पूरी तरह से रंग नहीं गया है तो थोड़ी देर बाद ऐसा दोबारा करें ऐसा करें से आपको जल्द से जल्द इस परेशानी से छुटकारा मिलता है।

आयल से करें मसाज

हेयर डाई का रंग हटाने के लिए आप बेबी आयल, ओलिव आयल, नारियल का तेल आदि उस जगह पर लगाएं और अच्छे से मसाज करें। उसके बाद पानी से उस जगह को धो दें, आपको दिखाई देगा की रंग हल्का हो गया है। और पूरी तरह रंग हटाने के लिए एक दिन में तीन से चार बार ऐसा करें ऐसा करने से हेयर डाई का कलर पूरी तरह से स्किन से चला जायेगा।

नेल पोलिश रिमूवर

रुई पर नेल पोलिश रिमूवर लगाएं और उस जगह पर रुई को लगाएं जहां पर हेयर डाई का रंग लगा हुआ है। उसके बाद रुई से स्किन को अच्छे से साफ करें। आपको थोड़ी जलन होगी लेकिन ऐसा करने से आपको इस परेशानी से छुटकारा जरूर मिल जायेगा साथ ही इस बात का ध्यान भी रखें यदि जलन ज्यादा हो रही है। तो तुरंत नेल पोलिश रिमूवर लगाना बंद कर दें।

पेट्रोलियम जेली

पेट्रोलियम जेली से भी आप उस जगह से मसाज करें जहां पर हेयर डाई का कलर है और ऐसा दिन में दो से तीन बार करें। ऐसा करने से भी आपको इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलेगी।

लिक्विड डिश वाश

जैस ही आप अपनी त्वचा पर हेयर डाई का निशान देखते हैं, तो तुरंत अपनी रसोई में जाएँ और थोड़ा लिक्विड डिश वाश लें। यदि इस लिक्विड में निम्बू हो तो यह काफी अच्छी बात होगी। नहीं तो आप इसमें थोड़ा बेकिंग सोडा भी मिला सकते हैं और उसके बाद रुई की मदद से लगा डाई लगी जगह पर लगा सकते हैं। फिर उस हगाह पर इसे एक मिनट के लिए रगडें और पानी से फिर धो लें। ऐसा करने से भी आपको फायदा मिलता है।

मेकअप रिमूवर

मेकअप रीमूवर का इस्तेमाल करने से भी चेहरे की स्किन पर लगे डाई के निशान को हटाने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप एक मिनट तक मेकअप रिमूवर को एक मिनट तक अपने चेहरे पर रगड़ें। और उसके बाद इसे ऐसे ही छोड़ दें आपको इसका असर साफ़ दिखाई देगा।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिन्हे ट्राई करने से चेहरे की स्किन पर लगे डाई के निशान को हटाने में मदद मिलती है। यदि आपके साथ भी कभी कुछ ऐसा होता है तो आप भी इन आसान टिप्स को ट्राई कर सकते हैं।

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जन्म के बाद शिशु को माँ के पेट पर क्यों रखा जाता है?

बच्चे का जन्म होने के तुरंत बाद बच्चे को साफ़ करने के लिए डॉक्टर्स बच्चे को बाहर ले जाते हैं। और उसके बाद जब बच्चा माँ को दिखाया जाता है तो बच्चे को माँ के सीने या पेट पर लिटाया जाता है। यह दृश्य माँ के लिए उसकी जिंदगी का सबसे बेहतरीन लम्हा होता है क्योंकि जिस बच्चे को नौ महीने केवल गर्भ में महिला महसूस करती है आज वो उसकी आँखों के सामने होता है। तो जाहिर सी बात है यह लम्हा बहुत ही ज्यादा यादगार और इमोशनल होता है। लेकिन क्या आपने सोचा है की आखिर क्यों बच्चे को जन्म के बाद माँ के पेट या सीने पर लिटाया जाता है? यदि नहीं तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको बताते हैं।

शिशु को होता है माँ का अहसास

जिस तरह नौ महीने महिला गर्भ में महिला अपने बच्चे को महसूस करती है उसी तरह बच्चा भी गर्भ में रहने के बाद भी माँ के स्पर्श और अहसास को महसूस कर सकता है। ऐसे में जन्म के बाद शिशु करीब से अपनी माँ के होने के अहसास को महसूस कर सके साथ ही माँ और बच्चे का रिश्ता मजबूत हो सके। इसके लिए शिशु को जन्म के बाद माँ के पेट पर लिटाया जाता है।

बच्चे को आराम महसूस हो

सभी कहते हैं की बच्चा चाहे कितना ही डरा हुआ हो, रो रहा हो, उदास हो लेकिन जैसे ही बच्चा माँ की गोद में आता है बच्चे को आराम महसूस होता है और बच्चा खिलखिला उठता है। ऐसे में बच्चे को आराम महसूस हो इसके लिए जन्म के बाद बच्चे को माँ के पेट पर लिटाया जाता है।

स्तनपान के लिए

जन्म के बाद बच्चे को माँ के करीब स्तनपान के लिए भी लाया जाता है। क्योंकि स्तनपान जन्म के बाद बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार होता है। जो जन्म के बाद बच्चे के बेहतर विकास के साथ बच्चे को बिमारियों से सुरक्षित रखने में भी मदद करता है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से जन्म के बाद बच्चे को माँ के पेट पर लिटाया जाता है। इसके अलावा जन्म के बाद जितना हो सके बच्चे को माँ के करीब ही रखना चाहिए क्योंकि यह बच्चे के लिए बहुत अच्छा होता है।

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चेहरे की स्किन को टाइट करने के तरीके

उम्र के साथ चेहरे की स्किन का लूज़ पड़ना आम बात होती है। और चेहरे की स्किन लूज़ होने के कारण आपके चेहरे की सुंदरता में कमी आना यह भी लाज़मी है। चेहरे की स्किन के लूज़ पड़ने के और भी कई कारण होते हैं। लेकिन यदि महिला अपने चेहरे का अच्छे से ध्यान रखती है अच्छे से केयर करती है तो महिला को अपने चेहरे की स्किन को जवान रखने में मदद मिलती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की चेहरे की स्किन के ढीले होने के क्या कारण होते हैं और किस तरह आप चेहरे की स्किन को टाइट बना सकते हैं।

चेहरे की स्किन के ढीलेपन के कारण

  • उम्र के बढ़ने के साथ स्किन में ढीलापन आना आम बात होती है।
  • चेहरे को पर्याप्त पोषण नहीं मिलने पर।
  • चेहरे की केयर अच्छे से न करने पर।
  • बहुत ज्यादा तनाव लेने के कारण भी ऐसा हो सकता है।
  • केमिकल युक्त कॉस्मेटिक चीजों का इस्तेमाल जरुरत से ज्यादा करने पर।
  • धूप के बुरे प्रभाव के कारण।

चेहरे की स्किन को टाइट करने के तरीके

यदि चेहरे की स्किन के ढीले होने के कारण आपको लग रहा है की आपके चेहरे की ख़ूबसूरती कम हो गई है तो घबराएं नहीं, क्योंकि कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल करने से कुछ ही दिनों में आपके चेहरे की स्किन को टाइट करने में मदद मिलती है। जैसे की:

अंडा (Egg)

एक अंडा लेकर उसे फोड़ लें उसके बाद उसका पीला भाग अलग कर लें। और बचे सफ़ेद भाग को अपने चेहरे पर लगाएं और आराम से लेट जाएँ। ध्यान रखें न तो किसी से बात करें और न ही हंसें। उसके बाद जब यह सुख जाएँ तो चेहरे को साफ़ पानी से धो लें। ऐसा हफ्ते में दो बार करें, ऐसा करने से स्किन में कोलेजन का निर्माण बढ़ेगा और ढीली पड़ी स्किन को टाइट करने में मदद मिलेगी।

निम्बू (Lemon)

निम्बू में विटामिन सी होता है जिससे स्किन में कोलेजन बढ़ता है और लचीलापन आता है। जिससे धीरे धीरे स्किन को टाइट होने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप निम्बू का रस कटोरी में निकालकर रुई की मदद से अच्छे से अपने चेहरे और गर्दन पर लगाएं, और उसके बाद सूखने के लिए छोड़ दें। सूखने के बाद चेहरे को पानी से साफ़ कर लें।

एलोवेरा जैल (Aloe vera gel)

एलोवेरा जैल मार्किट से लाकर या एलोवेरा के ताजे पत्ते को काटकर उसका जैल निकाल लें। उसके बाद इस जैल को अपने चेहरे पर लगाएं। चेहरे पर जैल लगाने के बाद चेहरे को सूखने के लिए छोड़ दें, सूखने के बाद चेहरे को गुनगुने पानी से धोएं। बेहतर परिणाम के लिए ऐसा रोजाना करें।

चन्दन मास्क (Sandalwood Mask)

चन्दन पाउडर में गुलाबजल मिलाकर एक पेस्ट बनाएं और उसके बाद इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं। चेहरे पर इस पेस्ट को लगाने से चेहरे पर जमी धूल मिट्टी, तेल, डेड स्किन साफ़ होने के साथ स्किन को टाइट होने में भी मदद मिलती है। चेहरे पर लगाने के बाद जैसे ही यह पेस्ट सुख जाये। उसके बाद साफ़ पानी का इस्तेमाल करके अपने चेहरे को धो लें।

कॉफ़ी (Coffee)

एक चमच्च कॉफ़ी में एक चम्मच दालचीनी पाउडर, एक चम्मच ब्राउन शुगर और दो से तीन चम्मच नारियल तेल मिलाएं और इसे अच्छे से मिक्स करके एक पेस्ट तैयार करें। अच्छे से पेस्ट को मिक्स करने के लिए नारियल तेल को अच्छे से गरम करके पिघला लें और तेल के गुनगुने रहने पर सभी चीजों को अच्छे से मिक्स कर लें। फिर इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं और दो से तीन मिनट तक मसाज करें।

उसके बाद साफ़ पानी का इस्तेमाल करके चेहरे को साफ़ कर लें। ऐसा करने से कॉफ़ी बढ़ती उम्र के लक्षणों को चेहरे से दूर करने, शुगर चेहरे पर जमी गंदगी को बाहर निकालने, नारियल तेल स्किन की कोमलता को बरकरार रखने में मदद करता है। नारियल तेल की जगह यदि आपके पास ओलिव आयल है तो आप उसका इस्तेमाल भी कर सकती है।

फिटकरी (Alum)

थोड़े से पानी में थोड़ी सी फिटकरी को डालकर अच्छे से मिक्स कर लें। उसके बाद इस पानी को रुई की मदद से अपने चेहरे पर लगाएं। और चेहरे को सूखने के लिए छोड़ दें। फिर साफ पानी का इस्तेमाल करके चेहरे को साफ कर लें। इस तरीके का इस्तेमाल करने से भी चेहरे की स्किन को टाइट होने में मदद मिलती है।

टमाटर (Tomato)

टमाटर में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स चेहरे की स्किन को निखारने के साथ चेहरे की स्किन को टाइट करने में भी मदद करते हैं। इसके लिए आप टमाटर के रस को निकालकर रुई की मदद से अपने चेहरे पर लगाएं। और सूखने के बाद चेहरे को साफ़ पानी से धो लें।

मुल्तानी मिट्टी (Multani Mitti)

दो चम्मच मुल्तानी मिट्टी के पाउडर में गुलाबजल और शहद मिलाएं। अब इन सभी चीजों को अच्छे से मिक्स करके एक मास्क तैयार करें और चेहरे पर लगाएं। सूखने के बाद गुनगुने पानी का इस्तेमाल करके चेहरे को साफ़ कर लें।

दही (Curd)

थोड़ी सी दही में निम्बू की बूंदे डालकर अच्छे से मिक्स कर लें। अब इस पेस्ट को रुई की मदद से अपने चेहरे पर लगाएं। और तीन से चार मिनट तक मसाज करें। मसाज करने के बाद चेहरे को साफ़ पानी से अच्छे से धो लें। ऐसा करने से भी चेहरे की स्किन को टाइट होने में मदद मिलती है।

पपीता (Papaya)

पपीते के कुछ टुकड़ों को अच्छे से पीसकर एक पास्ट तैयार करें अब इसमें एक से डेड चम्मच चावल का आटा मिला दें। चावल का आटा मिलाने के बाद इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं और सूखने के बाद चेहरे को धो लें। कुछ दिनों तक हफ्ते में दो से तीन बार इस उपाय को करें आपको बहुत जल्दी फायदा मिलेगा।

चेहरे की स्किन को टाइट करने के अन्य तरीके

  • चेहरे की स्किन को टाइट करने के लिए चेहरे की साफ़ सफाई का अच्छे से ध्यान रखें।
  • धूप में निकलने से पहले चेहरे को अच्छे से ढक लें।
  • खान पान में पोषक तत्वों को भरपूर शामिल करें ताकि शरीर के साथ स्किन को भी अच्छे से पोषण मिल सके।
  • पानी का भरपूर सेवन करें।
  • थोड़ा व्यायाम भी करें, चेहरे के लिए जो व्यायाम होते हैं उन्हें जरूर ट्राई करें।
  • तनाव नहीं लें।
  • ज्यादा केमिकल युक्त चीजों का इस्तेमाल नहीं करें।
  • बहुत ज्यादा फेशियल आदि न करवाएं।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिन्हे ट्राई करने से चेहरे की स्किन के लचीलेपन को बढ़ाने में मदद मिलती है। ताकि चेहरे की ख़ूबसूरती बरकरार रह सके और उम्र होने के बाद भी आपके चेहरा जवान रहे। लेकिन ध्यान रखें की एक ही दिन इन उपाय को ट्राई करने से आपको फायदा नहीं मिलेगा। बल्कि कुछ दिनों तक नियमित इन टिप्स को ट्राई करें आपको फायदा जरूर मिलेगा।

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प्रेगनेंसी में केक क्यों नहीं खाना चाहिए?

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला की अलग अलग चीजें खाने की क्रेविंग होती है। जैसे की कुछ गर्भवती महिलाओं की प्रेगनेंसी के दौरान मीठा खाने की क्रेविंग होती है और कुछ की तीखा और चटपटा, आदि। और जिन महिलाओं की मीठा खाने की इच्छा होती है उन्हें केक, पेस्ट्री आदि खाने की इच्छा भी हो सकती है। लेकिन प्रेगनेंसी में केक का सेवन करने से पहले इस बात के बारे में जानना जरुरी होता है। की क्या गर्भवती महिला को केक का सेवन करना चाहिए या नहीं?

प्रेगनेंसी के दौरान केक खाएं या नहीं?

गर्भावस्था के दौरान किसी भी चीज को खाने से थोड़ा सा भी माँ या बच्चे को नुकसान हो तो उस चीज का सेवन करने से बचना चाहिए। और केक एक ऐसा ही खाद्य पदार्थ है जिसे चाहे घर में बनाकर खाएं या बाहर से खाएं दोनों तरह से ही यह गर्भवती महिला व् बच्चे की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है, क्योंकि इसे बनाने के लिए आर्टिफिशल क्रीम व् स्वीटनर, कच्चे अंडे, अल्कोहल, आदि का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान केक का सेवन नहीं करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में केक खाने के नुकसान

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला केक का सेवन करती है तो इसके कारण गर्भवती महिला और होने वाले बच्चे की सेहत को बहुत से नुकसान हो सकते हैं। जैसे की:

इन्फेक्शन का होता है खतरा

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है। जिसके कारण महिला को ऐसी किसी भी चीज का सेवन न करने की सलाह दी जाती है जिससे महिला को इन्फेक्शन का खतरा हो। ऐसे में केक बनाने के लिए कच्चे अंडे का इस्तेमाल किया जाता है और कच्चे अंडे में साल्मोनेला, इ कोलाई, जैसे बैक्टेरिया मौजूद होते हैं। साथ ही घर में आप जो केक बनाते हैं उसके बैटर में भी बैक्टेरिया के होने का खतरा होता है। जिसकी वजह से गर्भवती महिला को बहुत जल्दी इन्फेक्शन होने का खतरा होता है। ऐसे में गर्भवती महिला को संक्रमण न हो इससे बचने के लिए प्रेगनेंसी के दौरान केक खाने की मनाही होती है।

वजन जरुरत से ज्यादा हो सकता है

केक स्वाद में मीठा होता है और इसे और ज्यादा मीठा करने के लिए इसमें आर्टिफिशल स्वीटनर भी मिलाया जाता है। ऐसे में केक का अधिक सेवन महिला के वजन को तेजी से बढ़ाता है। और गर्भावस्था के दौरान महिला का वजन यदि जरुरत से ज्यादा बढ़ जाता है तो इसके कारण न केवल प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स बढ़ जाती है। बल्कि इसकी वजह से बच्चे को भी दिक्कत होने का खतरा रहता है।

केक में हो सकते हैं अनहेल्दी सप्लीमेंट्स

मार्केट से ख़रीदे केक में फ्लेवर या स्वाद बढ़ाने वाली चीजों के रूप में अनहेल्दी सप्लीमेंट्स की मिलावट की जा सकती हैं जिससे आपके गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास को नुकसान हो सकता है। साथ ही महिला को भी सेहत सम्बन्धी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

कुछ केक में अल्कोहल भी होता है

कुछ केक को बनाने के लिए रम का इस्तेमाल भी किया जाता है। और ऐसे केक गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए बहुत अधिक नुकसानदायक हो सकते हैं। इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को जितना हो सके ऐसे केक को चखने से भी बचना चाहिए।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो गर्भवती महिला को केक का सेवन करने से हो सकते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अपनी जीभ के स्वाद पर थोड़ा कण्ट्रोल करना चाहिए। और जितना हो सके केक व् अन्य मीठी चीजें और जंक फ़ूड के सेवन से परहेज करना चाहिए।

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लड़का या लड़की चाहते हैं तो सम्बन्ध बनाते समय इन बातों का ध्यान रखें

प्रेग्नेंट होना ही महिला के लिए बहुत बेहतरीन अहसास होता है ऐसे में हर कोई यही चाहता है की उनका आने वाला शिशु स्वस्थ और हष्ट पुष्ट हो। लेकिन कहीं न कहीं कुछ महिलाओं की अपने आने वाले बच्चे को लेकर कुछ इच्छाएं होती है जैसे की यदि महिला का पहला शिशु बेटा है तो वो चाहती है की उनका दूसरा शिशु एक बेटी हो।

जबकि कुछ महिलाएं जिनकी पहली संतान बेटी होती है वो चाहती हैं की उनका दूसरा शिशु एक बेटा हो। या फिर कुछ केस में पहले बच्चे को लेकर भी कपल के मन में इच्छा हो सकती है। ऐसे में कपल आने वाली संतान के लिए महिला के प्रेग्नेंट होने से पहले एक कोशिश जरूर कर सकता है। जैसे की यदि कपल सम्बन्ध बनाते समय कुछ बातों का ध्यान रखता है तो इससे उन्हें अपनी मनचाही संतान की इच्छा को पूरी करने में मदद मिलती है।

लड़का चाहते हैं तो सम्बन्ध बनाते समय इन बातों का ध्यान रखें

यदि कपल चाहता हैं की उनका होने वाले शिशु एक लड़का हो तो सम्बन्ध बनाते समय कुछ छोटी छोटी बातों का ध्यान रखें जिससे आपको अपनी इस इच्छा को पूरी करने में मदद मिल सकें। जैसे की:

ओवुलेशन पीरियड के दिन ही बनाएं सम्बन्ध

महिला यदि चाहती है की उसके गर्भ में पल रहा शिशु एक बेटा हो तो इसके लिए महिला को अपने ओवुलेशन पीरियड के दिन ही अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध बनाना चाहिए। और इसके लिए सबसे सही होगा की आप अपने डॉक्टर के पास जाकर अपने सही ओवुलेशन पीरियड की जानकारी लें।

ओवुलेशन पीरियड से पहले न बनाएं सम्बन्ध

ध्यान रखें की ओवुलेशन पीरियड के कम से कम एक हफ्ते पहले तक आप अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध न बनाएं। क्योंकि ऐसा करने से Y क्रोमोसोम के X क्रोमोसोम के साथ मिलन के चांस बढ़ जाते हैं जिससे लड़का होने की उम्मीद बढ़ जाती है।

खुश रहें

लड़के की चाहत रखते हैं तो ध्यान रखें की जब आप सम्बन्ध बनाएं तो महिला और पुरुष दोनों किसी भी तरह का तनाव न लें और खुश रहें। और जितना आप उस समय अच्छे से एन्जॉय करते हैं उतना ही आपको बेहतरीन परिणाम मिलने के चांस बढ़ जाते हैं।

महिला को पहले मिलें आनंद

सम्बन्ध बनाते समय ध्यान रखें की पुरुष से पहले महिला आनंद प्राप्त करें क्योंकि यदि ऐसा होता है तो भी महिला के गर्भ में लड़का होने के चांस बढ़ जाते हैं।

डीप तक पहुंचे पुरुष

कपल को लड़के की चाहत को पूरा करने के लिए सम्बन्ध बनाते ध्यान रखना चाहिए की पुरुष महिला के डीप तक पहुंचें। ऐसा करने से XY क्रोमोसोम के मिलने के चांस बढ़ जाते हैं।

खान पान में शामिल करें यह चीजें

महिला को अपने खान पान का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए और महिला को रेड मीट, फल, सब्जियां, नट्स, डेयरी प्रोडक्ट्स आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए।

लड़की चाहते हैं तो सम्बन्ध बनाते समय इन बातों का ध्यान रखें

जिस तरह कपल को लड़के की चाहत को पूरा करने के लिए कुछ बातों का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। उसी तरह लड़की की चाहत को पूरा करने के लिए भी कपल को सम्बन्ध बनाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। जैसे की:

ओवुलेशन डे के दो चार दिन आगे पीछे बनाएं सम्बन्ध

यदि कपल चाहता है की उनका होने वाला शिशु एक बेटी हो तो इसके लिए कपल को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की ओवुलेशन डे के या दो दो चार दिन पहले या फिर दो चार दिन बाद में सम्बन्ध बनाएं। ताकि XX क्रोमोसोम के मिलने के चांस बढ़ सकें और XY के मिलने के चांस कम हो। क्योंकि जब XX क्रोमोसोम के मिलने के चांस अधिक होंगे तभी लड़की होने के चांस बढ़ेंगे।

महिला पहले न हो फ्री

ध्यान रखें की सम्बन्ध बनाते समय महिला पहले फ्री न हो यदि सम्बन्ध बनाते समय आप इस बात का ध्यान रखते हैं। और महिला का गर्भधारण हो जाता है। तो इससे गर्भ में लड़की होने के चांस अधिक होते हैं।

ज्यादा अंदर न जाएँ

पुरुष को सम्बन्ध बनाते समय इस बात का ध्यान रखना है की सम्बन्ध बनाते समय उन पोजीशन को ट्राई करें जिसमे पुरुष महिला के ज्यादा अंदर तक न जाएँ। क्योंकि ज्यादा अंदर तक जाने से आपकी इच्छा पूर्ति होने में रूकावट आ सकती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जो सम्बन्ध बनाते समय कपल यदि ध्यान रखता है तो ऐसा करने से उनकी लड़का या लड़की पाने की इच्छा को पूरा होने में मदद मिल सकती है। यदि आप भी चाहते हैं आपका बेटा या बेटी हो तो आपको भी सम्बन्ध बनाते समय इन छोटी छोटी बातों का ध्यान रखना चाहिए।

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लड़की चाहिए तो सम्बन्ध बनाते समय न करें यह गलतियां

प्रेग्नेंट होना किसी भी महिला के लिए उसकी जिंदगी का सबसे बेहतरीन समय होता है क्योंकि मातृत्व का अहसास ही महिला की जिंदगी को खुशियों और रंगों से भर देता है। हर महिला और महिला का परिवार यही चाहता है की प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चा दोनों स्वस्थ रहें और महिला एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दें। प्रेगनेंसी के दौरान महिला के मन की भी कुछ इच्छाएं होती है जैसे की कुछ केस में महिला के मन में यह इच्छा हो सकती है की यदि उसका पहला बच्चा बेटा है तो अब उसका होने वाला शिशु एक नन्ही परी हो। या फिर माता पिता दोनों ही चाहते हैं की उनके घर में पहले एक नन्ही परी का जन्म हो।

ऐसे में हम होने वाले वाले बच्चे का लिंग तो नहीं बदल सकते हैं और न ही उसके बारे में पता कर सकते हैं क्योंकि यह एक बहुत बड़ा अपराध होता है। लेकिन यदि आप चाहते हैं तो कुछ ऐसे टिप्स का ध्यान रख सकते हैं जो आपके मन की इच्छा को पूरी करने में आपकी मदद कर सकते हैं। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम उन कपल्स के लिए टिप्स बताने जा रहे हैं जो एक नन्ही परी की कामना रखते हैं, यदि कपल सम्बन्ध बनाते समय इन टिप्स का ध्यान रखता हैं तो ऐसा करने से आपकी नन्ही परी के घर में आगमन की इच्छा पूरी हो सकती है। तो आइये अब उन टिप्स के बारे में जानते हैं:

सम्बन्ध बनाते समय रखें समय का ध्यान

यदि महिला और पुरुष चाहते हैं की उनके घर में बेटी हो तो इसके लिए जरुरी होता है की XX क्रोमोसोम आपस में मिलें। ऐसे में महिला और पुरुष को ओवुलेशन पीरियड के आस पास के समय में सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए। क्योंकि यदि महिला ओवुलेशन पीरियड में सम्बन्ध बनाती है तो Y क्रोमोसोम की गति तेज होने के कारण XY के मिलने के चांस बढ़ जाते हैं। जबकि ओवुलेशन पीरियड के आगे पीछे सम्बन्ध बनाने पर Y क्रोमोसोम उस लंबे समय तक जीवित नहीं रह सकते और अंडे को निषेचित करने के लिए X क्रोमोसोम को रास्ता मिलता है जिससे लड़की के होने के चांस बढ़ जाते हैं।

सम्बन्ध बनाने की पोजीशन का भी रखें ध्यान

यदि कपल चाहता है की उनका होने वाला शिशु एक बेटी हो तो इसके लिए महिला और पुरुष को सम्बन्ध बनाने की पोजीशन का भी ध्यान रखना चाहिए। और ऐसी पोजीशन से सम्बन्ध बनाना चाहिए जिसमे पुरुष का प्राइवेट पार्ट महिला के ज्यादा अंदर तक प्रवेश न करें। क्योंकि इससे XY क्रोमोसोम के मिलन के चांस ज्यादा होते हैं। ऐसे में कपल को महिला ऊपर और पुरुष नीचे, महिला और पुरुष आगे पीछे जैसी पोजीशन को ट्राई करना चाहिए। क्योंकि यह वो पोजीशन होती है जिसमे पुरुष ज्यादा अंदर तक नहीं जा पाते हैं।

तो यह हैं कुछ गलतियां जो सम्बन्ध बनाते समय महिला और पुरुष को नहीं करनी चाहिए, यदि कपल इन बातों का ध्यान रखता है तो उनकी नन्ही परी के घर में आने की इच्छा पूरी हो सकती है। यदि आप भी चाहते हैं की आपके घर एक नन्ही परी आये तो आपको भी सम्बन्ध बनाते समय इन गलतियों को करने से बचना चाहिए।

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कैसे पता करें की बेबी ने सिर नीचे की तरफ कर लिया है?

प्रेगनेंसी के दौरान पहले से नौवें महीने तक महिला के शरीर में बहुत से बदलाव होते हैं और यह बदलाव महिला के गर्भ में भी होते हैं। क्योंकि जैसे जैसे प्रेगनेंसी का समय आगे बढ़ता है वैसे वैसे गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास भी बढ़ता है। जो महिलाएं दूसरी बार माँ बन रही होती है उन्हें प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले बदलाव को समझने में आसानी होती है।

जबकि पहली बार माँ बनने पर महिला को शरीर और गर्भ में होने वाले बदलाव को समझने में थोड़ा समय लग सकता है। ऐसे में महिला को इस दौरान कोई दिक्कत न हो इसके लिए जरुरी होता है की महिला प्रेगनेंसी के दौरान शरीर और गर्भ में होने वाले बदलाव, प्रसव के दौरान होने वाले बदलाव के बारे में पूरी जानकारी इक्कठी कर लें। गर्भावस्था की आखिरी तिमाही में एक अल्ट्रासॉउन्ड करवाने के लिए महिला को कहा जाता है।

जिसमे गर्भ में शिशु की क्या पोजीशन होती है उसके बारे में जानने में मदद मिलती है। और उसके बाद भी महिला के गर्भ में बहुत से बदलाव आते हैं जैसे की शिशु के जन्म लेने का समय जैसे जैसे करीब आता है वैसे वैसे शिशु अपने सिर नीचे की तरफ करने लगता है और ऐसा भी जरुरी नहीं होता है की गर्भ में सभी शिशु ही ऐसा करते हैं। तो आइये अब जानते हैं की महिला को इस बारे में कैसे पता चलेगा की बच्चे का सिर नीचे की तरफ आ गया है।

पेल्विक एरिया पर महसूस होगा ज्यादा जोर

गर्भ में शिशु जब अपने सिर नीचे की तरफ कर लेगा तो महिला को पेट के निचले हिस्से पर जोर ज्यादा महसूस होगा। और आपको ऊपर की तरफ से अपना पेट चपटा सा महसूस होगा क्योंकि शिशु का सिर नीचे की तरफ होने के कारण शिशु का भार नीचे की तरफ ज्यादा होगा।

बेबी किक्स

बच्चा जब अपना सिर नीचे की तरफ करेगा तो महिला को बेबी किक्स भी ऊपर की तरफ महसूस होंगी। यदि आपको भी ऐसा महसूस हो रहा है तो इसका मतलब यह है की आपका बच्चा जन्म लेने के लिए तैयार है और अपनी सही पोजीशन में आ गया है।

पीठ में दर्द

यदि प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही में महिला को पीठ में तेज दर्द महसूस होता है तो यह लक्षण भी इस बात की और इशारा करता है। गर्भ में पल रहा शिशु अपने जन्म लेने की सही पोजीशन में आ चूका है।

यूरिन करने की इच्छा में बढ़ोतरी

गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण प्रेग्नेंट महिला की यूरिन करने की इच्छा में बढ़ोतरी हो जाती है। और बच्चा यदि अपने सिर नीचे की तरफ कर लेता है तो यह इच्छा और भी ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसे में यदि महिला को प्रेगनेंसी के आखिरी समय में ऐसा महसूस हो तो समझ जाएँ की आपका बच्चा जन्म लेने के लिए तैयार है।

सीने के आस पास हल्कापन महसूस होना

यदि गर्भ में शिशु का सिर नीचे की तरफ आ जाता है तो पेट व् सीने के आस पास के हिस्सों को जगह मिलती है जिससे महिला को हल्कापन महसूस होता है। ऐसे में इस लक्षण का महसूस होना भी इस बात की और इशारा करता है की बच्चे का सिर नीचे की तरफ हो गया है।

पेट के आकार में बदलाव

गर्भ में शिशु जैसे ही नीचे की तरफ आ जाता है वैसे ही आपके पेट के आकार में बदलाव आ जाता है यानी की पेट नीचे की तरफ ज्यादा बढ़ा हुआ महसूस होता है।

सफ़ेद पानी निकलना

बेबी का सिर नीचे की तरफ आने पर महिला को प्राइवेट पार्ट से सफ़ेद पानी अधिक निकलने जैसी परेशानी भी हो सकती है। ऐसे में महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए और यदि ऐसा हो तो पानी की मात्रा पर ध्यान रखना चाहिए की कितना निकल रहा है क्योंकि कई बार यह चिपचिपा पदार्थ एमनियोटिक फ्लूड हो सकता है।

तो यह हैं कुछ लक्षण जिनसे यह पता करने में मदद मिलती है की गर्भ में शिशु का सिर नीचे की तरफ आ गया है। यदि आपका भी प्रेगनेंसी का आखिरी समय चल रहा है तो आपको भी इन टिप्स का ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि यह सभी टिप्स आपको यह बताने में मदद करेंगे की आपका बच्चा अब जन्म लेने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

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गर्भ में बेबी की क्या पोजीशन है? ऐसे जानिए

गर्भ में शिशु क्या कर रहा है, बच्चे का कितना विकास हुआ है, बच्चे को बाहर की चीजों का अहसास होता है या नहीं, गर्भ में बच्चे को कोई दिक्कत तो नहीं हो रही है, गर्भ में शिशु की क्या पोजीशन है, आदि। ऐसे ही कुछ सवाल डिलीवरी का समय पास आने पर प्रेग्नेंट महिला के दिमाग में चल रहे होते हैं। खासकर डिलीवरी का समय पास आने पर बेबी अपनी सही बर्थ लेने की पोजीशन में आया है या नहीं इसे जानने की भी महिला को उत्सुकता रहती है।

पुराने समय में महिलाएं बच्चे का भार जिस तरफ महिला को ज्यादा महसूस होता है उसी तरफ बच्चे का सिर होता है ऐसा कहती थी। साथ ही ऐसे और भी अंदाज़े लगाती है जो बच्चे की पोजीशन के बारे में बताने में मदद करते हैं। क्या आप भी प्रेग्नेंट हैं और आपके मन में भी ऐसे ही सवाल चल रहे हैं? यदि हाँ, तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको बच्चे को गर्भ में बच्चे की पोजीशन के बारे में आप कैसे जान सकते हैं उस बारे में बताने जा रहे हैं।

पेट के किस हिस्से में महिला को ज्यादा टाइट महसूस हो रहा है?

सबसे पहले महिला को पेट को चार रेक्टेंगल हिस्सों में बाँट लेना चाहिए और फिर देखना चाहिए की पेट का कौन सा हिस्सा है जहां महिला को सबसे ज्यादा टाइट महसूस हो रहा है या ज्यादा भार महसूस होता है। उस हिस्से में शिशु का सिर हो सकता है और शिशु के हाथ भी उसी के आस पास होते हैं।

शिशु की हार्ट बीट

बच्चे की हार्ट बीट कहाँ सुनाई दे रही है इसका पता महिला खुद तो नहीं लगा सकती है। ऐसे में इसके लिए महिला को डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए क्योंकि डॉक्टर की मदद से इसका आसानी से पता चल सकता है। उसके बाद जहां महिला को बच्चे की हार्ट बीट सुनाई दे रही है वहां शिशु का दिल यानी सीना है और उसी के नीचे शिशु का पेट होता है।

बच्चा कहाँ ज्यादा किक कर रहा है

गर्भ में शिशु का हलचल करना महिला के लिए प्रेगनेंसी का सबसे खूबसूरत लम्हा होता है। ऐसे में गर्भ में बच्चा कीच सबसे ज्यादा कौन से हिस्से में करता है जहां महिला को जोर से झटका लगता है। गर्भ में उस हिस्से में शिशु के पैर होते हैं।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जो इस बात को जानने में आपकी मदद करते हैं की गर्भ में बच्चे की क्या पोजीशन है। यदि आप माँ बनने वाली है तो आप भी इन टिप्स को ट्राई करके जान सकती है की गर्भ में शिशु की क्या पोजीशन है। साथ ही डिलीवरी का समय पास आने पर धीरे धीरे शिशु अपने जन्म लेने की सही पोजीशन में आने लगता है यानी की शिशु का सिर नीचे की तरफ और पैर ऊपर की तरफ हो जाते हैं।

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