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प्रेग्नेंट महिला न खाए यह सब्जियां

प्रेगनेंसी के दौरान खान पान

प्रेग्नेंट महिला को अपने खान पान का बेहतर तरीके से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है क्योंकि इससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है। और खाने में महिला को ऐसी चीजों को शामिल करने की सलाह दी जाती है जो पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ प्रेग्नेंट महिला और शिशु के लिए फायदेमंद हो। और कुछ ऐसी चीजें भी होती है जिनका सेवन प्रेगनेंसी में नहीं करने की सलाह दी जाती है क्योंकि वह प्रेग्नेंट महिला के साथ गर्भ में भ्रूण के विकास पर बुरा प्रभाव डाल सकती है। जैसे की जिन चीजों की तासीर गर्म होती है, किसी तरह का नशा व् कुछ फल और सब्जियां आदि का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करना चाहिए।

प्रेगनेंसी के समय कौन सी सब्जियां नहीं खानी चाहिए

गर्भावस्था के दौरान महिला को सब्जियों का सेवन करते समय उनकी साफ़ सफाई का ध्यान रखते हुए इस बात का ख्याल भी रखना चाहिए की प्रेगनेंसी के दौरान इनका सेवन करना चाहिए या नहीं। तो आइये आज हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान किन सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए इस बारे में बताने जा रहे हैं।

बैंगन

बैंगन का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान महिला को जितना हो सके कम ही करना चाहिए क्योंकि बैंगन का सेवन करने से गर्भपात का खतरा बढ़ सकता है। हफ्ते में एक बार थोड़ी मात्रा में इसका सेवन आप करना चाहे तो कर सकती यही लेकिन अधिक मात्रा में इसे लेने से बचें।

कटहल

पर्याप्त मात्रा में कटहल का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान किया जा सकता है लेकिन इसका सेवन अधिक करने के कारण प्रेग्नेंट महिला को एक नहीं बल्कि कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। जैसे की इसके सेवन से कब्ज़ की परेशानी अधिक होने के साथ ब्लड में शुगर का लेवल बढ़ सकता है जिससे महिला को गेस्टेशनल डाइबिटीज़ की समस्या हो सकती है। इसीलिए यदि आप शुगर की मरीज़ है तो आपको कटहल बिल्कुल नहीं खाना चाहिए साथ ही यदि आपको ब्लड से जुडी कोई परेशानी है तो भी प्रेगनेंसी के दौरान कटहल का सेवन करने से बचना चाहिए।

अदरक

अदरक की तासीर गर्म होती है ऐसे में अदरक का सेवन करने से प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में गर्भपात का खतरा बढ़ सकता है इसीलिए जितना हो सकें प्रेगनेंसी के दौरान अदरक का सेवन करने से बचना चाहिए।

करेला

पोषक तत्वों से भरपूर करेला वैसे तो प्रेगनेंसी के दौरान खाना सेफ होता है लेकिन इसके बीजों के साथ इसका सेवन करने से बचना चाहिए। क्योंकि करेले के बीजों में कुछ ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जी गर्भपात के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में कमी की समस्या खड़ी कर सकते हैं।

बिना मौसम की सब्जियां

यदि आपको कोई सब्ज़ी खाने का मन कर रहा है लेकिन उसका अभी मौसम नहीं है। और मार्किट में वो मौजूद है तो उसका सेवन करने से बचना चाहिए क्योंकि हो सकता है की उन्हें पकाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया गया हो। ऐसे में वो सब्जियां गर्भवती महिला और गर्भ में शिशु दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकती है इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को इन बिना मौसम की सब्जियों का सेवन करने से बचना चाहिए।

तो यह हैं कुछ सब्जियां जिनके सेवन से गर्भवती महिला को परहेज रखना चाहिए क्योंकि इन सब्जियों के सेवन से गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में कमी जैसी परेशानी खड़ी हो सकती है।

स्ट्रेचमार्क्स कैसे हटाएँ डिलीवरी के बाद

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प्रेगनेंसी के दौरान और डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में बहुत से परिवर्तन आते हैं। जैसे की डिलीवरी के बाद कुछ महिलाओं को पेट पर स्ट्रेचमार्क्स की समस्या हो जाती है। इसका कारण प्रेगनेंसी के दौरान जैसे जैसे गर्भ में शिशु का का विकास होता है वैसे वैसे पेट पर खिंचाव पडता है। और डिलीवरी के बाद इस खिंचाव के कारण स्ट्रेचमार्क्स जैसी समस्या का आपको सामना करना पड़ सकता है। इसके कारण महिलाओं को बहुत अजीब महसूस होता है क्योंकि उन्हें ऐसा लगता है की उनकी ख़ूबसूरती कम हो गई है। लेकिन यह कोई ऐसी परेशानी नहीं होती है या किसी तरह की कोई बिमारी नहीं होती है बल्कि आप कुछ दिनों तक कुछ खास टिप्स का इस्तेमाल करके आसानी से इस परेशानी से निजात पा सकते हैं।

स्ट्रेचमार्क्स हटाने के टिप्स

स्ट्रेचमार्क्स कोई ऐसी समस्या नहीं होती है की जिसका कोई समाधान न हो, बल्कि आप नियमित इनके लिए कुछ टिप्स का इस्तेमाल करके जिससे धीरे धीरे यह हल्के होने लगते हैं और बाद में आपको इनसे पूरी तरह निजात पाने में मदद मिलती है। साथ ही आपको इन टिप्स को नियमित करने से फायदा मिलेगा एक दिन करके एक हफ्ता छोड़ देने से आपको इसका असर दिखाई न ही देगा। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की स्ट्रेचमार्क्स हटाने के लिए आप क्या क्या कर सकते हैं।

जैतून का तेल

एंटी ऑक्सीडेंट्स व अन्य गुणों से भरपूर जैतून के तेल का इस्तेमाल करने से आपको स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। इस उपाय को करने के लिए नियमित रात को सोने से पहले दो चम्मच जैतून के तेल में थोड़ा सा पानी और सिरका डालकर अच्छे से मिक्स करके अपने स्ट्रेचमार्क्स पर मसाज करके रात भर के लिए छोड़ दें। उसके बाद सुबह उठकर नहा लें, ऐसा नियमित करने से आपको इसका फायदा जरूर मिलेगा।

चीनी का प्रयोग करें

चीनी स्किन के लिए प्राकृतिक रूप से स्क्रब का काम करती है जो मृत कोशिकाओं को हटाकर स्किन टोन को एक जैसा करती है। इस उपाय को करने के लिए आप एक चम्मच चीनी, एक चम्मच बादाम का तेल, और आधा चम्मच निम्बू का रस अच्छे से एक कटोरी में डालकर मिक्स करें। लेकिन ध्यान रखें की चीनी को अच्छे से घुलने न दें। उसके बाद हल्के हाथों से स्ट्रेचमार्क्स पर मसाज करें। नियमित ऐसा करने से धीरे धीरे आपके स्ट्रेचमार्क्स हल्के पड़ने लगेंगे, और आपको इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलेगी।

कोकोआ बटर

कोकोआ बटर की स्किन को लचीला बनाता है जिससे आपकी स्किन पर पड़े निशान हल्के होने लगते हैं इसके इस्तेमाल के लिए आप दिन में दो बार कोकोआ बटर का इस्तेमाल करके अच्छे से अपने स्ट्रेचमार्क्स पर मसाज करें। ऐसा कुछ दिन करने से आपको इसका अच्छा परिणाम देखने को मिलता है।

कॉफ़ी

कॉफ़ी का इस्तेमाल करने से भी आपको स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है इसके इस्तेमाल के लिए आप कॉफ़ी के दानों को पीसकर हल्का गुनगुना पानी मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें और उसमें थोड़ा सा एलोवेरा जैल भी मिक्स करें। उसके बाद दो से तीन मिनट तक मालिश करने के बाद सूखने के लिए छोड़ दें। सूखने के बाद गुनगुने पानी में तौलिया भिगोकर उसे साफ़ कर लें। फिर जैतून का तेल लगाएं और छोड़ दें ऐसा नियमित करें।

अंडे का सफ़ेद हिस्सा

प्रोटीन से भरपूर अंडे के सफ़ेद हिस्से को नियमित स्ट्रेचमार्क्स पर लगाएं। ऐसा करने के बाद उसे सूखने के लिए छोड़ दें, सूखने के बाद उसे साफ पानी से धोकर सूखा लें। सूखने के बाद मॉइस्चराइजर लगाएं ऐसा नियमित करने से आपको बहुत जल्दी स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

अरंडी का तेल

अरंडी का तेल भी आपको स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से बचाने में मदद करता है इसके लिए आप अरंडी के तेल से गोलाई में स्ट्रेचमार्क्स पर पांच से दस मिनट के लिए अच्छे से मसाज करें। उसके बाद एक कपडे में गुनगुने पानी में भिगोकर और निचोड़कर अच्छे से पेट पर बाँध लें। ऐसा करने से स्किन को भाप मिलेगी और ऐसा नियमित करने से आपको इस परेशानी से भी बहुत जल्दी निजात पाने में मदद मिलेगी।

ग्लिसरीन

ग्लिसरीन में निम्बू के रस की बूंदे मिलाकर दिन में दो बार अच्छे से बीस मिनट के लिए स्ट्रेचमार्क्स पर मसाज करें। और उसके बाद उसे सूखने के लिए छोड़ दें, ऐसा करने के बाद साफ़ पानी का इस्तेमाल करके अच्छे से उसे साफ कर लें। ऐसा नियमित करें और आप चाहे तो इसे रात भर के लिए भी स्ट्रेचमार्क्स पर लगाकर छोड़ सकते हैं। ऐसा करने से भी आपको अपने पेट पर पड़े निशानों को दूर करने में मदद मिलती है।

हल्दी

औषधीय गुणों से भरपूर हल्दी का इस्तेमाल करने से भी आपको पेट पर होने वाले स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। इसके लिए आप हल्दी में पानी या कोई भी तेल मिलाकर एक पेस्ट बनाएं और इसकी पतली लेयर अच्छे से स्ट्रेचमार्क्स पर लगाएं। उसके बाद साफ़ पानी का इस्तेमाल करके इसे साफ़ कर दें। ऐसा नियमित आप दिन में दो बार आधे घंटे के लिए करें आपको इसका असर खुद ही दिखाई देने लगेगा।

स्ट्रेचमार्क्स खत्म करने के अन्य टिप्स

  • सरसों के तेल से दिन में तीन बार मसाज करें आपको बहुत जैसी इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलेगी।
  • निम्बू के रस को नियमित स्ट्रेचमार्क्स के लिए इस्तेमाल करने से भी आपको फायदा मिलता है।
  • विटामिन और मिनरल्स से भरपूर आलू का रस स्ट्रेचमार्क्स को बहुत तेजी से हटाने में मदद करता है, इसके लिए आप आलू को क्रश करके उसका रस निकाल सकते हैं। या आप आलू की स्लाइसेस काटकर उससे भी दस मिनट के लिए स्ट्रेचमार्क्स पर मसाज कर सकते हैं।
  • टमाटर को पीसकर स्ट्रेचमार्क्स पर आधे घंटे के लिए लगाकर छोड़ दें, उसके बाद साफ पानी इसे धो लें, इस उपाय को नियमित करें।
  • सेब के सिरके और पानी को बराबर मात्रा में मिलाकर स्ट्रेचमार्क्स पर लगाएं। उसके आधे घंटे बाद गुनगुने पानी का इस्तेमाल करके इसे अच्छे से साफ़ कर लें।
  • एलोवेरा जैल को रात भर के लिए स्ट्रेचमार्क्स पर लगाकर छोड़ दें, उसके बाद सुबह साफ पानी से धो लें, जल्दी असर के लिए दिन में दो बार इस तरीके का प्रयोग करें आपको जरूर फायदा मिलेगा।
  • अपने आहार में जिलेटिन को शामिल करें इससे आपकी त्वचा में कोलेजन की मात्रा को बढ़ाने में मदद मिलती है जिससे आपको स्ट्रेचमार्क्स से निजात मिलता है।
  • विटामिन सी और विटामिन के युक्त आहार जैसे संतरे, अमरुद, शिमला मिर्च, आदि को भरपूर खाएं इससे भी आपकी स्किन टोन को बेहतर बनने में मदद मिलती है।
  • बादाम, नारियल, विटामिन इ, तिल आदि किसी भी तेल से नियमित मसाज करें इससे मांसपेशियों को टोन होने में मदद मिलती है जिससे आपको स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से आपको स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। इसके अलावा आपको भरपूर मात्रा में पानी पीना चाहिए, और स्वस्थ आहार का सेवन करना चाहिए इससे भी आपको बहुत जल्दी इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

गर्भावस्था में उठने, बैठने और लेटने का सही तरीका

प्रेगनेंसी में बरती जाने वाली सावधानियां

गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला को अपना दुगुना ध्यान देना चाहिए, क्योंकि महिला जितने अच्छे तरीके से अपनी केयर करती है उतना ही गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है। और गर्भवती महिला को अपनी केयर के लिए केवल अपने खाने पीने का ही ध्यान नहीं रखना पड़ता है। बल्कि प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को खाने पीने के साथ अपने उठने, बैठने, लेटने सभी चीजों का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी काम को करने में बरती गई थोड़ी सी लापरवाही के कारण महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

प्रेग्नेंट महिला बैठते समय रखे इन बातों का ध्यान

गर्भवती महिला को बैठते समय एक नहीं बल्कि कई बातों का ध्यान रखना चाहिए क्योंकि कई बार बैठते समय जल्दबाज़ी करने के कारण पेट पर झटका या गिरने का डर होता है। और इसके कारण महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को बैठते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

  • सबसे पहले तो गर्भवती महिला को बैठते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला के दोनों पैर जमीन से अच्छी तरह सटे हो।
  • प्रेग्नेंट महिला को बैठते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला के शरीर का वजन उसके पेट पर न पड़े।
  • और बैठने के लिए महिला किसी की मदद या किसी चीज का सहारा ले सकती है जिससे महिला को बैठने में आसानी हो।
  • प्रेग्नेंट महिला को बैठते समय एक पैर के ऊपर दूसरा पैर रखना नहीं बैठना चाहिए साथ ही महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला की पीठ सीधी हो। पीठ को सीधा रखने के लिए महिला तकिये या कुशन का इस्तेमाल कर सकती है।
  • यदि आप ऑफिस में काम करती है तो आपको बैठते समय या तो पीठ को सीधा करके बैठना चाहिए या फिर पीठ को पीछे की तरफ थोड़ा झुकाकर बैठना चाहिए। इसके अलावा महिला को ऑफिस में कामकाजी या किसी अन्य जिस भी सामान की जरुरत पड़ती है उसे अपने आस पास ही रखना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला को बार बार किसी भी चीज के लिए उठना न पड़े।
  • साथ ही गर्भवती महिला को बहुत देर तक एक ही पोजीशन में नहीं बैठना चाहिए क्योंकि इसके कारण भी महिला को परेशानी का अनुभव हो सकता है।

उठते समय प्रेग्नेंट महिला रखे इन बातों का ध्यान

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बेड से, कुर्सी से, या किसी अन्य जगह पर जहां भी महिला बैठी हुई है। वहां पर बैठते समय ध्यान रखने के साथ उठते समय भी ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि कई बार महिला उठते समय तेजी करती है तो इसके कारण महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। तो आइये अब जानते हैं की महिला को उठते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

  • प्रेग्नेंट महिला यदि कुर्सी से उठती है तो उसे किसी चीज का सहारा लेना चाहिए, या किसी का हाथ पकड़कर उसकी मदद लेनी चाहिए, खासकर जब महिला का वजन बढ़ चूका हो, ताकि महिला को उठते समय किसी भी तरह की दिक्कत न हो।
  • साथ ही यदि महिला बेड से सोकर उठती है तो महिला को जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए, बल्कि बेड से उठने के लिए सबसे पहले बाई और करवट लेकर लेटे। उसके बाद अपने घुटनो को मोड़कर जमीन पर लगाते हुए अपने हाथ से बेड का सहारा लेटे हुए महिला को बेड पर पैर नीचे की तरफ लटकाकर बैठ जाना चाहिए।
  • बैठने के बाद दो से तीन मिनट तक महिला को बैठे रहना चाहिए, और गहरी सांस लेनी चाहिए, इससे महिला को रिलैक्स महसूस होता है। और उसके बाद अपने हाथों का सहारा लेते हुए धीरे धीरे खड़े होना चाहिए।
  • यदि आपको उठने में किसी तरह की परेशानी हो तोई घर के किसी की सदस्य की मदद लेनी चाहिए।
  • इसके अलावा कभी आपको बेड पर लेटे हुए अचानक किसी सामना की जरुरत हो तो उसके लिए एक दम से न घूम जाएँ, बल्कि आराम से बैठकर या पूरी बॉडी को एक तरफ करके घुमाएं और अपनी जरुरत की चीज लें।

लेटते समय गर्भवती महिला रखे इन बातों का ध्यान

आराम करने के लिए जब गर्भवती महिला लेटने के लिए जाती है तो महिला को लेटते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, और सोते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए इसके बारे में जानना भी बहुत जरुरी होता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भवती महिला को लेटते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

  • गर्भवती महिला को लेटते समय एक दम से बेड पर जाकर लेट नहीं जाना चाहिए, क्योंकि एक दम से लेटने के कारण महिला को झटका लग सकता है। जिसके कारण महिला को परेशानी हो सकती है।
  • जब भी महिला लेटने या सोने के लिए जाती है तो महिला को सबसे पहले आराम बेड पर सहारा लेकर बैठना चाहिए।
  • उसके बाद सिर के नीचे कोमल व् नरम सिरहाना रखकर लेटना चाहिए।
  • प्रेग्नेंट महिला को सीधे और पेट के बल सोने से बचना चाहिए क्योंकि पेट के बल सोने से जहां गर्भ में शिशु को नुकसान पहुँच सकता है, वही सीधे सोने के कारण सिर से पैरों तक ब्लड फ्लो अच्छे से नहीं हो पाता है, खासकर प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में जब महिला के पेट आकार पूरी तरह बढ़ जाता है तो महिला को यह समस्या अधिक हो सकती है।
  • प्रेगनेंसी की पहली तिमाही के बाद गर्भवती महिला के सोने के लिए सबसे बेहतरीन पोजीशन होती है जब महिला बाईं और करवट लेकर सोती है।
  • सोते समय पीठ के पीछे महिला को तकिया लगाकर सोना चाहिए इससे महिला को पीठ में दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा महिला चाहे तो पैरों के बीच में तकिया लगाकर भी सो सकती है इससे पेट को सहारा मिलता है।
  • प्रेग्नेंट महिला को यदि कमर या पीठ में दर्द की समस्या होती है तो महिला को थोड़ी देर घुटनो को मोड़कर लेटना चाहिए इससे महिला को आराम मिलता है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान गर्भवती महिला को उठते, बैठते, लेटते समय रखना चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला को हर छोटी से छोटी गलती से बचे रहने में मदद मिल सके, और प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

मेथी के फायदे त्वचा के लिए

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मेथी दाने के फायदे

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मेथी के पत्ते और उसके दाने का प्रयोग लगभग सभी घरों में होता है। फिर चाहे वो परांठे बनाने के लिए हो या कड़ी को छौंक लगाए के लिए। आज से नहीं बल्कि पिछले कई वर्षों से इसका प्रयोग एक मुख्य जड़ी बूटी के रूप में किया जाता आ रहा है लेकिन वर्तमान में बदलते वक्त के साथ-साथ लोगों के स्वाद भी बदलने लगे है। जिसके कारण वे इसके गुणों को भूलते जा रहे है।

पहले के जमाने में खाने को मसालेदार बनाने के लिए किसी के पाद रेडीमेड मसले नहीं हुआ करते थे इसीलिए वे स्वयं घर में ही मसालें बनाकर उनका प्रयोग करते थे। और मेथी दाना भी उन्ही मसालों में से एक है। जिसका स्वाद को मजेदार होता ही है साथ साथ उसकी खुशबु भी बहुत अच्छी होती है।

यह हमारे स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभकारी होती है। इसकी मदद से मधुमेह जैसी गंभीर बिमारियों को भी दूर किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त यह हमारी त्वचा के लिए भी बहुत लाभकारी होती है। जी हां, खाने को स्वादिष्ट बनाने वाली मेथी का उपयोग करके आप अपनी सुंदरता में भी चार-चांद लगा सकता है। परंतु सभी को इसके इन फायदों के बारे में पूर्णतः ज्ञान नहीं होता इसलिए आज हम आपको मेथी दाने के त्वचा के लिए फायदों के बारे में बताने जा रहे है।

त्वचा के लिए मेथी दाने के फायदे :-मेथी के दाने के स्किन के लिए फायदे

1. एंटी एजिंग फायदे :

मेथी के दानों में आपकी त्वचा के लिए फायदेमंद गुण पाए जाते है जो त्वचा की एंटी एजिंग समस्याएं जैसे झुर्रियों और फाइन लाइन्स को दूर करने में भी मदद करते है।

कैसे करें इस्तेमाल?

सामग्री – 1 चम्मच मेथी के दाने रातभर भीगे हुए, 1 चम्मच सादा दही

विधि –

  • सबसे पहले भीगे हुए मेथी के दानों को दही के साथ मिलाकर स्मूथ पेस्ट बना लें।
  • अब इसे अपने चेहरे पर लगाएं।
  • 30 मिनट तक अपने फेस पर रखें और उसके बाद ठंडे पानी से साफ़ कर लें।

लाभ :

मेथी के दानों में एंटी ऑक्सीडेंट्स की भरपूर मात्रा पाई जाती है तो एजिंग के प्रोसेस को धीमा करने में मदद करती है। जबकि दही में मौजूद लैक्टिक एसिड स्किन को एक्सफोलिएट करके स्मूथ और मुलायम बनाता है।

2. मुहांसों के लिए :pimple

एक्ने या मुंहासों से ग्रस्त स्किन पर मेथी दाने का प्रयोग करें। ये मुहांसों से छुटकारा दिलाने के लिए काफी प्रभावी उपाय है।

कैसे करें इस्तेमाल?

सामग्री – 4 चम्मच मेथी के दाने रात भर भीगे हुए, 4 कप पानी

विधि –

  • सबसे पहले पानी में मेथी के दाने डालकर उबाल लें। और 15 मिनट तक इंतजार करें।
  • इसके बाद पानी निकालकर इसे ठंडा होने दें।
  • रुई की मदद से, इस पानी को दिन में दो बार अपने फेस पर लगाएं। अतिरिक्त पानी को फ्रिज में रख दें।

लाभ :

मेथी के दानों में Diosgenin नामक एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते है। जो त्वचा से पिंपल को दूर करने में मदद करते है।

3. मॉइस्चराइज़ स्किन :skin 1

मेथी के दाने स्किन को प्रॉब्लम्स से बचाने के अलावा उसे मॉइस्चराइज़ और नौरीश भी करते है। साथ ही स्किन के रूखेपन को भी दूर करते है।

कैसे करें इस्तेमाल?

सामग्री – 1 चम्मच मेथी दाने का पाउडर, 1 चम्मच पानी

विधि –

  • सबसे पहले मेथी के दाने के पाउडर और पानी को मिलाकर एक स्मूथ पेस्ट बना लें।
  • अब रुई की मदद से इस पेस्ट को अपने पुरे चेहरे पर लगाएं।
  • आधा घंटे तक रखें और बाद में पानी से धो लें।

लाभ :

मेथी के दाने स्किन को रुखा और बेजान होने से बचाते है। और इसका स्लिपरी टेक्सचर स्किन को मॉइश्चराइज़ करने में मदद करता है।

4. डार्क स्पॉट्स :

मेथी के दानों में फॉस्फेट, लेसिथिन जैसे पोषक तत्व पाए जाते है। इसके अलावा इसमें फोलिक एसिड, मैग्नीशियम, सोडियम, जिंक, कॉपर आदि भी अच्छी मात्रा में पाए जाते है जो स्वास्थ्य के साथ साथ त्वचा के लिए भी बेहद जरुरी है। और इसके यही पोषक तत्व स्किन पर मौजूद डार्क स्पॉट्स और काले धब्बे को दूर करने में मदद करता है। इसके लिए आप इसके दानों का या पत्तियों का पेस्ट बनाकर प्रयोग में ला सकते है।

5. डार्क सर्कल :dark circle

उम्र बढ़ने के साथ साथ या अन्य कारणों की वजह से व्यक्ति की आंखों के आस-पास डार्क सर्कल्स होने लगते है। और इनके कारण त्वचा बेजान सी दिखने लगती है। ऐसे में मेथी आपके लिए फायदेमंद हो सकती है। इसके लिए मेथी के कुछ दानों को पीसकर उनका पेस्ट बना लें और इसे डार्क सर्कल्स पर लगाएं। कुछ दिनों के प्रयोग से आपकी स्किन साफ हो जाएगी।

6. चमकदार त्वचा :

मेथी के बीज चेहरे की सभी समस्यायों जैसे – झुर्रियां, काले धब्बे, फाइन लाइन्स और इन्फेक्शन आदि को दूर करने की क्षमता रखते है। इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट त्वचा के रंग को ठीक करके उसमे ग्लो लाने में भी मदद करते है। इसके लिए आप मेथी के बीजों, भीगी हुई मेथी के पानी और दही के प्रयोग से फेस पैक्स तैयार कर सकती है। ये पैक आपके स्किन के लिए एक्सफोलिएटर का काम करेंगे। जिससे धीरे धीरे स्किन में ग्लो आने लगेगा।

प्रेगनेंसी में महिलाएं घी क्यों खाती हैं?

गर्भवती महिला के लिए संतुलित आहार और पोषक तत्वों से भरपूर आहार बहुत जरुरी होता है। क्योंकि महिला द्वारा लिया जाने वाला आहार महिला के स्वास्थ्य के लिए और बच्चे के विकास के लिए महत्वपूर्ण होता है। साथ ही महिला जिन खाद्य पदार्थों का सेवन करती है उनके सेवन से पहले भी यह जानना जरुरी होता है की क्या महिला महिला को खा रही है उसे खाना प्रेगनेंसी के दौरान फायदेमंद है या नहीं?

लेकिन कुछ ऐसी चीजें है जो पुराने समय से ही गर्भवती महिला को खाने की सलाह दी जाती है। और उन्ही में से एक है देसी घी, पोषक तत्वों से भरपूर देसी घी गर्भावस्था के दौरान खाना फायदेमंद होता है यह तो आप सभी जानते हैं। लेकिन इसे खाने से कौन से फायदे मिलते हैं और महिला इसका सेवन क्यों करती है इसके बारे में जानना भी जरुरी होता है।

गर्भवती महिला क्यों खाती है देसी घी?

ऐसा माना जाता है की देसी घी खाने से गर्भवती महिला के शरीर को पोषण मिलता है जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को थकान, कमजोरी व् प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली अन्य परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलती है। साथ ही गर्भ में शिशु के दिमागी व् शारीरिक विकास के लिए भी देसी घी बहुत फायदेमंद होता है।

इसके अलावा पुराने समय में महिलाओं का कहना था की यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला घी का सेवन करती है तो इससे डिलीवरी को आसान बनाने में मदद मिलती है साथ ही बच्चे के सामान्य प्रसव से जन्म लेने के चांस बढ़ जाते हैं। इसीलिए अधिकतर गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान घी का सेवन करती हैं।

प्रेगनेंसी में देसी घी खाने के फायदे

गर्भवती महिला यदि घी का सेवन करती है तो ऐसा करने से महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी बहुत से फायदे मिलते हैं। जैसे की:

  • घी का सेवन करने से गर्भवती महिला की पाचन क्रिया दुरुस्त रहती है जिससे महिला को कब्ज़ व् पेट से सम्बन्धी अन्य परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • देसी घी का सेवन करने से गर्भवती महिला की हड्डियों को पोषण मिलता है जिससे प्रेग्नेंट महिला को थकान कमजोरी की समस्या से प्रेगनेंसी के दौरान बचे रहने में मदद मिलती है।
  • यदि प्रेग्नेंट महिला या बच्चे का वजन प्रेगनेंसी के दौरान कम होता है तो घी का सेवन करने से महिला को वजन बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • घी खाने से गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान घी का सेवन करने से गर्भ में पल रहे बच्चे के दिमाग व् शरीर के बेहतर विकास में मदद मिलती है।
  • देसी घी का सेवन करने से महिला को डिलीवरी के दौरान होने वाली दिक्कतों को कम करने में मदद मिलती है।

यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो घी के इन बेहतरीन फायदों के लिए आपको भी रोटी पर लगाकर या अपनी सब्ज़ी में एक चम्मच घी डालकर जरूर खाना चाहिए। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला को हाई ब्लड प्रैशर की समस्या है, महिला का वजन ज्यादा है तो प्रेगनेंसी के दौरान महिला को घी का सेवन करने से बचना चाहिए। क्योंकि इसके कारण महिला की परेशानियां बढ़ सकती है। और आपके स्वास्थ्य के हिसाब से आपके लिए कितना घी का सेवन सही है इसके लिए एक बार आपको डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

क्या गर्भ में भी शिशु बीमार होता है जानिए

यह तो सभी जानते हैं माँ के पेट में पल रहे बच्चे का विकास माँ पर ही निर्भर करता है। लेकिन इसके साथ प्रेग्नेंट महिला जो भी करती है, जो भी महसूस करती है, परेशान होती है, शिशु से बातें करती है, आदि इन सभी चीजों को भी शिशु महसूस कर सकता है। ऐसे में यदि महिला को कोई दिक्कत होती है तो शिशु भी उसे महसूस कर सकता है। जिसके कारण यदि महिला अस्वस्थ है तो ऐसा हो सकता है की गर्भ में शिशु भी अस्वस्थ हो। और यदि शिशु बीमार होता है तो इसके कुछ लक्षण गर्भवती महिला को भी महसूस हो सकते हैं। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम गर्भ में शिशु के बीमार होने के कुछ लक्षणों के बारे में बताने जा रहे है।

गर्भ में शिशु के बीमार होने पर प्रेग्नेंट महिला को महसूस होते हैं यह लक्षण

कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जो शिशु के बीमार होने पर प्रेग्नेंट महिला को महसूस हो सकते हैं। तो आइये अब जानते हैं की वो लक्षण कौन से हैं।

पेट का बाहर न आना

कुछ महिलाओं का पेट प्रेगनेंसी के सातवें आठवें महीने में भी बाहर की तरफ कम निकला हुआ महसूस हो सकता है। और यदि ऐसा होता है तो इसका मतलब होता है की शिशु गर्भ में अस्वस्थ है और शिशु का विकास अच्छे से नहीं हो रहा है।

शिशु की मूवमेंट का कम होना

शिशु का विकास बढ़ने के साथ गर्भ में शिशु की मूवमेंट भी बढ़ने लगती है लेकिन यदि महिला को शिशु की मूवमेंट कम महसूस हो। तो यह भी शिशु के बीमार होने का एक लक्षण होता है।

प्रेग्नेंट महिला के कारण बच्चा कब बीमार होता है?

कई बार महिला की शारीरिक स्थिति सही न होने के कारण भी शिशु बीमार पड़ सकता है। तो आइये अब जानते हैं की माँ की वजह से शिशु कब बीमार हो सकता है।

पोषक तत्वों की कमी

यदि प्रेग्नेंट महिला अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान नहीं रखती है और खान पान में लापरवाही करती है। तो इसके कारण बच्चे के विकास लिए जरुरी पोषक तत्व बच्चे तक नहीं पहुँच पाते हैं। जिसके कारण बच्चे के विकास में कमी आ सकती है। और गर्भ में बच्चा कमजोर यानी अस्वस्थ हो सकता है।

तनाव

प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों के कारण कुछ प्रेग्नेंट महिलाएं तनाव में आ जाती है। और गर्भवती महिला के मानसिक रूप से परेशान होने के कारण बच्चे का विकास भी प्रभावित हो सकता है। जिसके कारण बच्चे के विकास पर असर पड़ने के कारण बच्चा बीमार हो सकता है।

प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियां

कुछ गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी परेशानियां जैसे की उल्टी का अधिक होना, गेस्टेशनल शुगर होना, ब्लड प्रैशर से जुडी समस्या होना, खून की कमी, आदि हो सकती है। और जिन महिलाओं को यह शारीरिक परेशानियां अधिक होती है। तो इसका असर बच्चे पर भी पड़ सकता है जिसके कारण शिशु गर्भ में बीमार हो सकता है या फिर शिशु के विकास में कमी आ सकती है।

महिला का बीमार होना

यदि प्रेग्नेंट महिला को बुखार है जिसके कारण बॉडी का तापमान में फ़र्क़ रहा है। तो बॉडी के तापमान में फ़र्क़ आने का असर बच्चे पर भी पड़ सकता है। जिसके कारण बच्चा भी अस्वस्थ महसूस कर सकता है। इसके अलावा प्रेग्नेंट महिला के अधिक थकान महसूस करने, बहुत ज्यादा भागदौड़ करने, आदि के कारण भी पेट में बच्चा असहज महसूस कर सकता है।

तो यह हैं कुछ कारण व् लक्षण जो गर्भ में शिशु के बीमार होने की तरफ इशारा करते हैं। यदि आप भी माँ बनने वाली हैं तो आपको भी इन सभी बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि गर्भ में शिशु स्वस्थ है या नहीं इसके बारे में जानने में आपको आसानी हो सके।

दूध पीने के फायदे! आपको रोजाना एक गिलास दूध जरूर पीना चाहिए

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दूध पीना हर किसी को पसंद नहीं होता है, और बच्चे ही नहीं कई बार बड़े भी इसे न पीने के के लिए तरह तरह के बहाने बनाते हैं, लेकिन क्या आप जानते है की दूध में मौजूद कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन्स, फॉस्फोरस, व् अन्य खनिज होते है, जो की दूध पीने से आपको मिलते है और आपके स्वस्थ को सही रखने में मदद करते है, और यदि आपको दूध का स्वाद पसंद नहीं है, तो आप इसके स्वाद को बदल कर जैसे की शेक बनाकर, गरम दूध पसंद नहीं है तो ठंडा दूध पीकर इसके फायदों को उठा सकते है, लेकिन आपको इसे किसी न किसी रूप में नियमित एक गिलास जरूर पीना चाहिए, और बच्चों के लिए महिलाओं के लिए तो यह बहुत जरुरी होता है।

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दूध के फ्लेवर को बदलने के लिए आप मानगो शेक, इलायची दूध, बादाम दूध, कस्टर्ड, खीर आदि बना सकते हैं, अब आप ये सोच रहें होंगे की दूध पीने से आपको कौन कौन से फायदे होते है, और यकीन मानिये जब आप इन फायदों के बारे में जान जाएंगे तो आप दूध पीना जरूर शुरू कर देंगे, इससे आपके बोन्स ( हड्डियों ) की मजबूती से लेकर आपकी सुंदरता बढ़ाने तक के गुण होते है, तो आइये अब हम आपको विस्तार से बताते है की दूध पीने से आपको कौन से फाड़े होते है, और गरम दूध और ठंडा दूध पीने के अलग अलग फायदों के बारे में चर्चा करते है।

गरम दूध पीने के फायदे:-

हड्डियों के लिए है फायदेमंद:-

हड्डियों की मजबूती को बरक़रार रखने के लिए कैल्शियम की मात्रा की शरीर में अधिकता होनी बहुत जरुरी होती है, और दूध में वह भरपूर मात्रा में पाया जाता है, इसके लिए आपनो नियमित एक गिलास दूध का सेवन जरूर करना चाहिए साथ ही बच्चों की हड्डियों के विकास के लिए यह बहुत जरुरी होता है, इसीलिए उन्हें तो दो से तीन गिलास दूध का सेवन करवाना चाहिए, और यदि आप गुनगुने दूध का सेवन करते है, तो यह तेजी से असर करता है।

दांतो के लिए अच्छा होता है:-

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आपके दांतो की मजबूती को बनाएं रखने के लिए भी कैल्शियम बहुत जरुरी होता है, और दूध में यह भरपूर पाया जाता है, इसीलिए दूध का सेवन जरूर करना चाहिए इससे आपके दांतों को मजबूत होने में मदद मिलती है।

ऊर्जा से भरपूर बनाएं रखने में मदद करता है:-

यदि आप बहुत जल्दी थक जाते है, या आपको कमजोरी लगती है, तो आपको नियमित एक गिलास गरम दूध कस सेवन नाश्ते में जरूर करना चाहिए, इसके सेवन से आपको पूरा दिन ऊर्जावान बने रहने में मदद मिलती है।

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तनाव से दूर रहने में मदद मिलती है:-

डिप्रेशन आजकल हर व्यक्ति जिंदगी का हिस्सा बना गया है, और इससे बचने के लिए आपको रात को सोने से पहले एक गिलास गुनगुने दूध का सेवन करना चाहिए, इससे आपको शारीरिक के साथ मानसिक रूप से भी राहत महसूस करने में मदद मिलती है।

गले से जुडी परेशानी दूर करता है:-

गरम दूध का सेवन करने से आपको गले में खराश आदि की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है, इसके अलावा यदि आप चाहे तो दूध में हलकी हल्दी डालकर भी मिला सकते है, यह तेजी से से राहत दिलाने में मदद करती है।

ठंडा दूध पीने के फायदे:-

मोटापा घटाने में मदद करता है:-

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जी हां ये बिलकुल सच है की ठन्डे दूध का सेवन करने से आपके वजन को कम होने में मदद मिलती है, क्योंकि अगर आप ठन्डे दूध का सेवन करते हैं तो आपके शरीर को नॉर्मल तापमान पर लाने के लिए आपके शरीर को कैलोरी बर्न करनी पड़ेगी, और उसे पचाना पड़ेगा और कैलोरी के बर्न होने पर आपके शरीर में जमी चर्बी को भी कम होने में मदद मिलेगी।

एसिडिटी दूर भगाएं:-

ठन्डे दूध का सेवन करने से आपकी एसिडिटी की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है, साथ ही इसके सेवन से आपको पेप्टिक अल्सर के कारण होने वाले पेट दर्द से भी राहत पाने में मदद मिलती है।

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आपकी बॉडी को हाइड्रेट करने में मदद करता है:-

ठन्डे दूध का सेवन करने से आपकी बॉडी को हाइड्रेट रहने में मदद मिलती है, ठंडे दूध में मौजूद एलेक्‍ट्रोलाइट्स आपकी बॉडी को डीहाइड्रेट होने से रोकते है, और यदि आप सुबह के समय इस दूध का सेवन करते है तो यह आपको ज्यादा फायदा करता है।

आपकी स्किन को बनाएं खूबसूरत:-

ठन्डे दूध का सेवन करने से आपकी स्किन की ख़ूबसूरती को बढ़ाने में मदद मिलती है, क्योंकि यह आपकी स्किन को हमेशा हाइड्रेट रखता है, और साथ ही यदि आप इसे रुई की मदद से अपनी स्किन पर लगते है, तो यह और भी फायदा करता है।

पचने में आसान होता है:-

ठन्डे दूध को पचना भी आसान होता है, और इसके कारण आपको गैस आदि से भी निजात पाने में मदद मिलती है, क्योंकि यह हर तरह के फैट जैसे दूध, घी मक्खन को आसानी से पचाने में मदद करता है, और आप चाहे तो रात को खाना खाने के साथ सुबह वर्कआउट के बाद एनर्जी ड्रिंक के रूप में भी इसका सेवन कर सकते है।

कोल्ड कॉफ़ी के रूप में करें इस्तेमाल:-

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यदि आप गर्मी में चाय या कॉफ़ी का सेवन करने से निजात पाना चाहते है, तो आप ठंडे दूध से बनी कॉफ़ी का सेवन करें, कोल्ड कॉफ़ी का सेवन करने से आपको रिलैक्स मह्सूस होता है, साथ ही आपको फ्रेश फील करके अपनी थकावट को भी दूर करने में मदद मिलती है।

दूध पीने के अन्य फायदे:-

  • यदि आपकी मांसपेशियां कमजोर हैं तो नियमित गरम दूध का सेवन करने से आपकी मांसपेशियों को मजबूत होने में मदद मिलती है, क्योंकि गरम दूध में विटामिन और प्रोटीन की मात्रा अधिक हो जाती है।
  • त्वचा की नमी को बरकरार रखने के लिए आपको दूध का सेवन नियमित करना चाहिए, क्योंकि आपकी स्किन को कोमल बनाएं रखने वाला एमिनो एसिड इसमें भरपूर मात्रा में होता है।
  • दूध का नियमित सेवन करने से आपकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, जिससे आपको रोगो से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।
  • कब्ज़ से जुडी परेशानी हो या नींद नहीं आती हो, तो नियमित रात को गरम दूध का सेवन करें आपको फायदा मिलेगा।
  • गरम दूध में हल्दी डालकर पीने से सायनस और दमा जैसी बिमारी से बचाव करने में आपको मदद मिलती है।
  • यदि आपको पीरियड्स के दौरान अधिक दर्द होता है तो गरम दूध का सेवन करने से आपकी इस समस्या को खत्म किया जा सकता है।
  • नियमित दूध का सेवन करने से आपको हदय रोग होने की सम्भावना कम होती है।
  • एक्ज़िमा से जुडी परेशानी होने पर नियमित दूध का सेवन करने से आपको फायदा मिलता है।
  • दुबलेपन के शिकार लोगो को भी दूध का सेवन भरपूर करना चाहिए इससे उन्हें दुबलेपन से निजात पाने में मदद मिलती है।
  • पैर में मोच आदि के आने पर गरम दूध का सेवन करने से आपको फायदा मिलता है।

तो ये है नियमित दूध पीने के फायदे, इसीलिए आपको इन फायदों को उठाने के लिए खुद भी दूध पीना चाहिए और अपने परिवार के सदस्यों को भी दूध पिलाना चाहिए. और यदि आपको या आपके बच्चों व् अन्य को प्लेन दूध पसंद नहीं है तो इसके फ्लेवर्स को आपको नियमित लेना चाहिए, ताकि आपको टेस्ट भी मिलें और फायदे भी मिलें।

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क्यूँ होते हैं असमय बाल सफ़ेद? जानें वजह और उपचार! 

बढ़ती उम्र के साथ बाल सफेद होना आम बात है, लेकिन आजकल कई लोग कम उम्र में ही सफेद बालों की प्रॉब्लम का सामना कर रहे हैं। आजकल 20 से 30 वर्ष के युवाआयु में ही लोगों के बाल सफ़ेद होना शुरू हो गए हैं। बालों का सफ़ेद रंग होना ऐसे तो कोई बड़ी बीमारी नहीं है पर क्योंकि बालों के पकने के कारण लोग अन्य लोगों केसामने जाने से डरते हैं और मानसिक रूप से परेशान हो जाते हैं। असमय बाल सफ़ेद होने की बीमारी को Vitiligo कहते हैं, इसमें त्वचा और बालों की पिग्मेंट बनानेवाली कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, इसकी वजह से मेलेनिन नामक पिग्मेंट बनना कम हो जाता है और बाल सफ़ेद होने लगते हैं।

असमय बाल सफ़ेद होने की कई सारी वजहें हो सकती हैं। आजकल प्रदूषण, रसायन युक्त प्रॉडक्ट्स, मानसिक तनाव, दवाइयों की वजह से कम उम्र में ही कुछ लोगों केबाल पकने लग जाते हैं यानि बाल सफेद हो जाते हैं। इन सफेद बालों को छुपाने के लिए लोग हेयर कलर का इस्तेमाल करने लगते है, जो की रसायन युक्त होता है औरइससे बाल और ज्यादा सफेद हो जाते हैं।

इस आर्टिकल में हम आपको बताएँगे कि बालों को असमय सफ़ेद होने से कैसे रोका जा सकता है। पर उससे पहले हम जानेंगे की बाल सफ़ेद होने की वजह क्या होती हैं।

असमय बाल सफ़ेद होने के कारण :- 

1. अनुवांशिक –

अगर आपके माता या पिता में से किसी के बाल युवा आयु में ही सफ़ेद हो गए थे, तो आपके बाल भी युवा आयु में ही जल्द सफ़ेद होने की संभावनाअधिक रहती है। आपके जींस यह निर्धारित करते हैं कि आपके बालों में से Melanin तत्व कब कम होगा और इसी वजह से आपके बाल भी जल्द सफ़ेद हो जाते हैं।

2. थाइरोइड – असमय बालों का सफ़ेद होना

थाइरोइड ग्रंथि का ज़्यादा सक्रिय होना या कम सक्रिय होना मेलेनिन पिग्मेंट उत्पादन को प्रभावित करता है, जिससे बाल असमय सफ़ेद हो जाते हैं।

3. विटामिन B12 की कमी

शरीर में विटामिन B12 की कमी होने के कारण बाल असमय सफ़ेद हो जाते हैं।

4. Vitiligo

Vitiligo नामक बीमारी में त्वचा और बालों की पिग्मेंट बनाने वाली कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, इसकी वजह से मेलेनिन नामक पिग्मेंट बननाकम हो जाता है और बाल सफ़ेद होने लगते हैं।

5. तनाव

जो व्यक्ति अधिक समय तक तनाव में रहता है, उनके बाल जल्दी सफ़ेद हो जाते हैं। तनावग्रस्त व्यक्ति के शरीर में बनने वाले हॉर्मोन मेलेनिन बनाने वालीकोशिकाओं को प्रभावित करते हैं, और इससे बालों के रंग पर असर पड़ता है। बाल असमय सफ़ेद होने का यह एक सबसे बड़ा कारण माना जाता हैं। तनाव में रहनेसे शरीर में यह बदलाव होता हैं।

6. आहार

एक शोध में यह जानकारी सामने आई है कि जो युवा आहार में अधिक केमिकल युक्त फ़ास्ट फ़ूड, चटपटा, तला हुआ और मसालेदार भोजन करते हैं,उनके बाल जल्दी सफ़ेद हो जाते हैं। इसके विपरीत पौष्टिक आहार लेने वाले लोगों में यह समस्या कम होती है।

7. पानी

अगर आप नहाने के लिए काफी हार्ड वाटर का इस्तेमाल करते हैं तो इस वजह से भी बाल गिरते है या उनका रंग सफ़ेद हो जाता है।

8. प्रदूषणpremature hair graying

अगर आप ऐसी जगह रहते हैं या कार्य करते हैं, जहाँ अधिक प्रदूषण है तो हवा में मौजूद खतरनाक केमिकल का विपरीत परिणाम आपके शरीर के साथसाथ आपके बालों पर भी होता हैं। प्रदूषित पानी से स्नान करने से भी आपके बालों को नुक़सान हो सकता है।

9. सौन्दर्य उत्पाद

आजकल शैम्पू, तेल, कंडीशनर, जेल इत्यादि कई केमिकल युक्त सौंदर्य उत्पाद का लोग इस्तेमाल करते हैं। बालों को कोई खास स्टाइल या रंगबदलने के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले इन केमिकल के कारण भी बालों पर विपरीत असर पड़ता है और बालों का रंग सफ़ेद हो जाता हैं।

बालों को सफ़ेद होने से बचाने के लिए ख़्याल रखें इन बातों का

-> पौष्टिक आहार लें। अपने भोजन में फल, साबुत अनाज, दालें, हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ और दूध को शामिल करें।

-> आँवला खाएँ, इसमें विटामिन C प्रचुर मात्रा में होता है। नियमित रूप से इसका सेवन करने से सम्पूर्ण शरीर को लाभ होता है। ऐसा माना जाता है कि आँवले केसेवन से बाल स्वस्थ, सुंदर और काले होते हैं। कड़ी पत्ते के साथ छाछ

-> गर्मी के मौसम में छाछ पीना सम्पूर्ण शरीर के लिए लाभदायक होता है। अगर आप छाछ के साथ कड़ी पत्ते भी लेते हैं तो इससे बालों को अधिक लाभ होता है।

-> रोजाना सुबह या दोपहर के समय दही खाना भी आपके बालों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।

-> अपने रोज़ के आहार में कड़ी पत्ते को शामिल करें, बालों का असमय सफ़ेद होना रुक जाएगा।

बालों को सफ़ेद होने से रोकने के लिए कुछ घरेलु नुस्खे और आयुर्वेदिक उपाय – 

✓  कड़ी पत्ता नारियल के तेल में कड़ी पत्ते को अछी तरह उबालें। फिर इस मिश्रण को ठंडा होने पर किसी बोतल में भर के रख लें और सप्ताह में कम से कम दो बारअवश्य लगाएँ।

✓  आँवलाआँवले को काट कर छोटे टुकड़े कर लें और फिर इन टुकड़ों को सुखा दें। अच्छी तरह से सूख जाने पर इन्हें पीस कर इनका पाउडर बना लें। अब इसपाउडर को नारियल के तेल में मिक्स कर लें। सप्ताह में एक या दो बार इसे लगाना लाभकारी होगा।

✓  अश्वगंधा अश्वगंधा और भृंगराज की जड़ें बालों के लिए लाभकारी होती हैं। नारियल के तेल के साथ इनका पेस्ट बनाकर बालों की जड़ों में लगाने से बालों कीजड़ें मजबूत बनती हैं और बाल काले होते हैं। यह पेस्ट लगाने के 1 घण्टे बाद बालों को धो लेना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि अश्वगंधा लगाने से हमारे सिर कीत्वचा में मौजूद मेलेनिन पिग्मेंट का उत्पादन बढ़ जाता है और इससे बालों का रंग काला होता है। स्वास्थ्य के लिए ओलिव आयल के क्या फ़ायदे है

✓  जैतून तेलसप्ताह में एक बार जैतून के तेल से सिर की मालिश करने पर बालों का सफ़ेद होना कम होता है और बाल जड़ से मजबूत बनते हैं।

✓  मेहंदीएक कटोरी हर्बल मेहंदी पाउडर लें, इसमें दो बड़े चम्मच चाय पत्ती का पानी, दो चम्मच आंवला पावडर, एक चम्मच निम्बू का रस, दो चम्मच दही,शिकाकाई व रीठा पावडर, एक अंडा (अगर आप लेना चाहे तो ), आधा चम्मच नारियल तेल व थोड़ा-सा कत्था। यह सब चीजें लोहे की कड़ाही में डालकर पेस्टबनाकर रात को भिगो दें। इसे सुबह बालों में लगाए। फिर दो घंटे बाद धो लें। इससे बाल बिना किसी नुकसान के काले हों जाएँगे। ऐसा माह में कम से कम एकबार अवश्य ही करें।

✓  दही – बालों को काले करने के लिए दही भी बहुत कारगर उपाय है। इसके लिए दही के साथ टमाटर को पीस लें। उसमें थोड़ा-सा नींबू रस और नीलगिरी का तेलमिलाएं। इससे सिर की मालिश सप्ताह में दो बार करें। इससे बाल अभी ही नहीं लंबी उम्र तक काले और घने बने रहेंगे।

✓  आँवलामेहंदी पैक ये तो आपने सुना ही होगा कि आँवला बालों के लिए फायदेमंद होता है।  इसलिए सूखे आंवले को पानी में उबालें। इस पानी को इतना उबालेंकि वह आधा रह जाए। इसमें मेहंदी और नींबू रस मिलाकर बालों पर लगाएं। माना जाता है कि ऐसा करने से असमय बालों का सफेद होना बंद हो जाता है। Kapur ke gun

✓  कर्पूर यानि की कपूर – बालों को सफेद होने से रोकने का एक और तरीका ये है कि 1/2 कप नारियल तेल या जैतून के तेल को हल्का गर्म करें। इसमें 4 ग्राम कर्पूरमिला लें। जब कर्पूर पूरी तरह से घुल जाए तो इस तेल से बालों की मालिश करें। इसकी मालिश हफ्ते में एक बार ज़रूर करें। 

✓  तुरईबालों को काला करने के लिए सब्ज़ियाँ भी बहुत कारगर होती हैं। इसलिए तुरई को काटकर नारियल तेल में तब तक उबालें, जब तक वह काली न होजाए। इस तेल को रोजाना बालों में लगाने से बाल काले हो जाते हैं।

✓  देसी घीसप्ताह में दो या तीन बार शुद्ध देसी घी से सिर की मालिश करके भी बालों को सफ़ेद होने से रोका जा सकता है।

वर्तमान समय में भाग-दौड़ भरी जिंदगी में, बालों की ठीक से देखभाल न हो पाने और प्रदूषण के कारण हमारे बाल असमय ही सफेद हो जाते है। हालांकि बाल तनाव,प्रदूषण, कोई बीमारी या‍ फिर अनुवांशिकता के कारण से भी सफेद हो सकते हैं। बालों को कलर करना इस समस्या का कोई उपचार नहीं हैं। लेकिन आप कुछ घरेलूउपचार आजमा अपने बालों को सफेद होने से अवश्य ही रोक सकते हैं। ऊपर दिए गए नुस्ख़ों को आज़मा कर देखिए, आपको ज़रूर लाभ मिलेगा।

अगर ये हो रहा है तो समझिए 7 दिन के अंदर डिलीवरी होगी

नौवां महीना लगते ही हर गर्भवती महिला के मन में यह सवाल आ सकता है की प्रसव का समय पास आ गया है यह उन्हें कैसे पता चलेगा? खासकर जो महिलाएं पहली बार माँ बन रही होती है वो इसे लेकर ज्यादा परेशान हो सकती है। लेकिन यह वो समय होता है जहां गर्भवती महिला का तनाव लेना, परेशान होना, महिला को दिक्कतों को बढ़ा सकता है। और प्रसव कोई ऐसी प्रक्रिया नहीं है की एक दम से ही शिशु जन्म ले ले, बल्कि प्रसव एक ऐसी प्रक्रिया है जिस तरह प्रेगनेंसी होने के लक्षण आपको बॉडी में महसूस होते हैं, वैसे ही जब डिलीवरी का समय पास आ गया है तो भी आपकी बॉडी कुछ संकेत देती है।

यह 7 लक्षण बताते हैं की डिलीवरी अब कभी भी हो सकती है

प्रसव का समय पास आने पर महिला को घबराने की जगह प्रसव होने के संकेत के बारे में जानकारी लेनी चाहिए। ताकि प्रसव की प्रक्रिया को समझने में गर्भवती महिला को आसानी हो सके। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की वो कौन से लक्षण हैं जो बताते हैं की अब डिलीवरी किसी भी समय हो सकती है।

शिशु का भार

यदि गर्भवती महिला को ऐसा महसूस हो रहा है की शिशु का भार नीचे की तरफ बढ़ रहा है और सीने व् पेट में हल्कापन महसूस हो रहा है। तो यह इस बात का संकेत होता है की शिशु डिलीवरी के लिए अपनी सही पोजीशन में आ गया है और अब आपको कभी भी डिलीवरी हो सकती है।

वजाइनल डिस्चार्ज

यदि आपको वजाइनल डिस्चार्ज अधिक हो रहा है और साथ ही उसमे आपको खून के धब्बे भी महसूस हो रहे हैं तो इसे भी अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि यह भी डिलीवरी का समय अब बहुत नजदीक है इसका ही लक्षण होता है।

पेल्विक व् पीठ में दर्द

प्रसव का समय पास आने पर शिशु का भार नीचे की तरफ अधिक महसूस होने के कारण गर्भवती महिला को पीठ व् पेल्विक एरिया में मांसपेशियों का खिंचाव अधिक बढ़ने के कारण दर्द महसूस हो सकता है। और पेल्विक एरिया या पीठ में दर्द का बढ़ना प्रसव का समय नजदीक आने का ही एक लक्षण होता है।

पेट में दर्द

डिलीवरी का समय पास आने पेट में दर्द का महसूस होना एक सामान्य लक्षण है लेकिन पेट में होने वाला दर्द एक दम से शुरू नहीं होता है और हल्का फुल्का पेट में दर्द रहना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है। लेकिन यदि आपको कभी पेट में हल्का तो कभी तेज दर्द महसूस होता है, और रुक रुक कर तेजी से दर्द बढ़ता है तो यह लेबर पेन हो सकता है।

पानी की थैली फटना

यदि आपको ऐसा महसूस हो की आपके प्राइवेट पार्ट से पानी की तरह चिपचिपा पदार्थ बहुत अधिक मात्रा में निकल रहा है। तो यह इस बात का संकेत होता है की एमनियोटिक बैग फट चूका है। और अब शिशु का जन्म किसी भी समय हो सकता है और इस लक्षण के महसूस होने पर बिना देरी किये आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए। क्योंकि यह इस बात का संकेत होता है की प्रसव का समय आ गया है।

ग्रीवा में फैलाव

शिशु के जन्म से पहले गर्भाशय के निचले हिस्से में फैलाव होना शुरू हो जाता है, ऐसे में नौवें महीने की जांच में यदि डॉक्टर आपको बताती है की ग्रीवा का फैलाव बढ़ रहा है तो यह इस बात का संकेत होता है की डिलीवरी का समय अब पास ही है।

शारीरिक परेशानी

यदि प्रेग्नेंट महिला को बार बार यानी की हर दस से पंद्रह मिनट में यूरिन पास करने की इच्छा हो रही है, गर्भवती महिला को दस्त की समस्या हो रही है, तो ऐसी परेशानियों का ज्यादा महसूस होना भी इस बात का संकेत हो सकता है की आपके प्रसव का समय बहुत पास आ गया है। और ऐसे में दस्त की समस्या यदि ज्यादा है तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि इस परेशानी के अधिक होने के कारण महिला के शरीर में पानी की कमी हो सकती है जिससे प्रेग्नेंट महिला की दिक्कतें बढ़ सकती है।

तो यह हैं वो लक्षण जो यदि नौवां महीना लगते ही आपको बॉडी में महसूस हो तो इसका मतलब होता है की शिशु का जन्म होने के समय पास आ गया है। लेकिन इस बात का भी ध्यान रखना रखना चाहिए की यदि यह लक्षण डिलीवरी का समय पास आने से पहले आपको बॉडी में महसूस हो तो यह समय पूर्व प्रसव के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे में इन्हे अनदेखा नहीं करना चाहिए।

खूबसूरती बढ़ाने के लिए ऐसे करें चावल के पानी का प्रयोग

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पेट खराब होने या दस्त लगने पर अक्सर आपकी दादी-नानी आपको चावल के पानी यानी चावल के मांड में नमक मिलाकर पिलाया करती होंगी। जो स्वाद में हल्का नमकीन लगता है। लेकिन क्या आप जानती है की चावल का मांड सिर्फ दस्त ठीक करने ही नहीं अपितु आपके फेस की सुंदरता को बढ़ाने में भी काफी सहयोगी है। जी हां, पुराने समय में महिलाएं अपनी खूबसूरती बरकरार रखने के लिए चावल के पानी का ही इस्तेमाल किया करती थी।

परंतु आजकल फेस के लिए इतने सारे ब्यूटी प्रोडक्ट्स मिलने लगे है की लोग घरेलू उपाय के बारे में भूलते ही जा रहे है। आज के समय में ये उपाय केवल बात बनकर ही रह गए है कोई इनका इस्तेमाल करना पसंद नहीं करता क्योंकि इन्हे कार्य करने में समय लगता है। लेकिन वास्तव में देखें को ये उपाय ही हमारी समस्या का सही इलाज करते है।

शायद आप नहीं जानते लेकिन बहुत सी महिलाएं फेस धोने के लिए चावल के पानी का इस्तेमाल करती है। क्योंकि इसमें बहुत से पोषक तत्व और एंटी ऑक्सीडेंट्स होते है जो फेस में ग्लो लाने के साथ-साथ उससे जुडी समस्याएं दूर करने में भी मदद करते है। यह पानी फेस की गंदगी को साफ़ करके उसमे निखार लाता है। आप चाहे तो रुई को चावल के पानी में डुबोकर उसे अपने फेस पर भी इस्तेमाल कर सकती है।खूबसूरती बढ़ाने के लिए ऐसे करें चावल के पानी का प्रयोग

इसके इस्तेमाल के बाद फेस काफी मुलायम और स्मूथ हो जाता है। चूँकि यह एक प्राकृतिक उपाय है तो इसके प्रयोग से किसी तरह के कोई दुष्परिणाम भी नहीं होते। लेकिन सभी को इस प्राकृतिक देन के फायदों के बारे में पता नहीं होता। इसीलिए आज हम आपको फेस की खूबसूरती बढ़ाने के लिए चावल के पानी का इस्तेमाल कैसे करें इस बारे में बताने जा रहे है? तो आइये विस्तार से जानते है इसके बारे में –

फेस की खूबसूरती बढ़ाने के लिए ऐसे करें चावल के पानी का प्रयोग :-

1. गुलाबजल के साथ :

चावल का पानी स्किन के लिए टोनर के रूप में कार्य करता है। इससे फेस की गंदगी साफ़ होती है। टोनर बनाने के लिए 2 से 3 चम्मच चावल के पानी में 3 चम्मच गुलाबजल मिलाएं। अब इसे किसी स्प्रेयर बोतल में रखें। और इस्सके प्रयोग अपने फेस पर करें। टोनर छिड़कने के 4 से 5 मिनट बाद फेस को रुई से साफ़ कर लें। दिन में 2 बार इसका इस्तेमाल करने से आपकी स्किन हमेशा फ्रेश और खिली खिली रहेगी।

2. ग्रीन टी के साथ :

ग्रीन के साथ मिलाकर लगाने से यह चेहरे को चमकदार और आकर्षक बनाता है। प्रयोग के लिए 2 चम्मच चावल के पानी में 2 चम्मच ग्रीन टी मिलाएं। अच्छे से मिलाकर इस मिश्रण को अपने फेस पर लगाएं। कुछ समय तक रखें और फिर नार्मल पानी से चेहरा धो लें। रोजाना इस्तेमाल करने के लिए घोल बनाकर अलग रख लें और रोजाना इसका इस्तेमाल करें।

3. शहद के साथ :

शहद के साथ चावल का पानी इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले 1 चम्मच शहद में 2 चम्मच चावल का पानी मिला लें। अच्छे से मिलाने के बाद पैक को अपने फेस पर लगाएं। 15 मिनट तक पैक को लगाएं रखें और उसके बाद ठंडे पानी से फेस साफ़ कर लें। हर हफ्ते इस पैक का इस्तेमाल करें। ऐसा करने से स्किन में ग्लो आएगा और मुहांसों की समस्या दूर हो जाएगी।

4. एलोवेरा के साथ :

त्वचा को कोमल और मुलायम बनाने के लिए आप चावल के पानी का इस्तेमाल एलोवेरा जेल के साथ कर सकती है। इसके लिए 2 चम्मच एलोवेरा जेल में 1 चम्मच चावल का पानी मिलाएं। अच्छे से मिलाकर फेस पर लगाएं और 30 मिनट तक लगाए रखें। 30 मिनट बाद साफ़ पानी से चेहरा साफ़ कर लें। आपकी स्किन पहले से बेहतर हो जाएगी। हफ्ते में दो बार इस उपाय का नियमित प्रयोग करें लाभ मिलेगा।

5. दूध के पाउडर के साथ मिलाकर :

इसके प्रयोग के लिए 2 चम्मच चावल के पानी में 1 चम्मच दूध का पाउडर डालें। अच्छे से मिलाकर पेस्ट बना लें और इसे अपने फेस पर लगाएं। 20 मिनट तक लगाएं रखें और उसके बाद चेहरा साफ़ पानी से धो लें। इससे आपके फेस की टैनिंग की दूर होगी ही साथ-साथ अन्य समस्याएं भी कम हो जाएंगी। इसका प्रयोग आपको सप्ताह में एक बार करना होगा।

6. नींबू के साथ :

नींबू के ब्लीचिंग गुण स्किन को निखारने में मदद करते है जबकि चावल का पानी स्किन को साफ़ करने का काम करता है। दोनों को मिलाकर प्रयोग किया जाए तो ये स्किन के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा। प्रयोग के लिए 4 चम्मच चावल के पानी में 1 चम्मच नींबू के रस मिलाएं। और इसे अपने फेस पर लगाएं। बाद में हलके गुनगुने से चेहरा साफ़ कर लें। सप्ताह में दो बार इसका इस्तेमाल करें स्किन दमक जाएगी।

7. खीरे के साथ चावल का पानी देगा फायदा :

इसके प्रयोग के लिए एक कटोरे में खीरे के कटे हुए टुकड़े डालकर उसमे 2 चम्मच चावल का पानी डाल दें। अब इस मिश्रण को अपनी स्किन पर लगाएं और सूखने दें। 15 मिनट तक इंतजार करें और उसके बाद फेस धो लें। इसकी मदद से चेहरे में ग्लो आएगा और वह अच्छे से साफ़ भी हो जाएगा।

8. चंदन के पाउडर के साथ :

चंदन स्किन के लिए बहुत अच्छा होता है। चावल के पानी के साथ इसके इस्तेमाल के लिए 1 चम्मच चावल के पानी में 1 चम्मच चंदन पाउडर डालें। अच्छे से मिक्स करके मिश्रण बनायें और इसे अपने फेस और गर्दन पर लगाएं। 15 मिनट तक इंतजार करें और उसके बाद फेस को पानी से धो लें। इसकी मदद से आप अपनी स्किन की झुर्रियां और झाइयां दोनों दूर कर सकती है। बेहतर परिणामों के लिए हफ्ते में 1 बार इसका इस्तेमाल करें।

अब तो आप अच्छी तरह से समझ गयी होंगी की चावल के पानी का इस्तेमाल फेस धोने के लिए क्यों किया जाता है? अगर अब भी मन में कोई शंका है तो एक बार इन चीजों के साथ मिलाकर चावल के पानी का इस्तेमाल करें, परिणाम आपके सामने होंगे।