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गर्मियों में प्रेग्नेंट महिला दिन में यह जरूर खाएं

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला थकान व् कमजोरी जैसी परेशानियों का अनुभव करती है। लेकिन गर्मियों के मौसम में दोपहर के समय गर्मी अधिक बढ़ने के कारण थकान व् कमजोरी जैसी दिक्कत ज्यादा होती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को गर्मियों के मौसम में स्वस्थ रहने और गर्मी से बचे रहने के लिए अच्छे से अपना ध्यान रखना चाहिए।

साथ ही इस दौरान खान पान में भी कुछ ऐसी चीजों को शामिल करना चाहिए। जो महिला को गर्मी से बचाने के साथ एनर्जी से भरपूर रखने में भी मदद करें। तो आइये आज हम आपको ऐसे कुछ खाद्य पदार्थों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका सेवन गर्मियों में दोपहर के समय प्रेग्नेंट महिला को जरूर करना चाहिए।

दही

दही की तासीर ठंडी होती है साथ ही दही पोषक तत्वों से भी भरपूर होती है जो माँ व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होती है। ऐसे में दोपहर की डाइट में गर्भवती महिला को दही का सेवन जरूर करना चाहिए। आप चाहे तो इसे प्लेन या फिर इसका रायता बनाकर भी इसका सेवन कर सकती है।

चावल

गर्मी में मौसम में रोटी खाने की इच्छा कम ही होती है ऐसे में दोपहर के समय गर्भवती महिला चाहे तो चावल का सेवन कर सकती है। और चावल अधिकतर महिलाओं का पसंदीदा आहार भी होते हैं। और इसे पचाने में भी महिला को दिक्कत नहीं होती है।

फल

गर्मियों में तरबूज, खरबूजा जैसे फल बहुत मिलते हैं। ऐसे में स्नैक्स के रूप में दिन में महिला इन फलों का सेवन जरूर करना चाहिए। इन फलों में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होने के साथ पानी की मात्रा भी भरपूर होती है। जो गर्मियों में गर्भवती महिला को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। साथ ही महिला चाहे तो गर्मियों में आम भी बहुत मिलता है तो महिला को मीठे व् स्वादिष्ट आम का सेवन भी कर सकती है।

शकरकंद

प्रेग्नेंट महिला चाहे तो दिन के समय शकरकंद का सेवन भी कर सकती है। क्योंकि शकरकंद विटामिन ए से भरपूर होता है। जो प्रेग्नेंट महिला की इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करता है।

सलाद

गर्मियों में प्रेग्नेंट महिला दिन में सलाद का सेवन भी कर सकती है। और सलाद के रूप में प्रेग्नेंट महिला खीरा, टमाटर आदि का सेवन कर सकती है। क्योंकि सलाद का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला के शरीर में पानी की कमी पूरी होती है साथ ही सलाद में पोषक तत्व भी भरपूर मात्रा में होते हैं। जो प्रेगनेंसी के दौरान फायदेमंद होते हैं।

तरल पदार्थ

खाने की चीजों के साथ गर्भवती महिला को दिन के समय तरल पदार्थों का भी भरपूर सेवन करना चाहिए। और इसके लिए प्रेग्नेंट महिला पानी का सेवन करने के साथ छाछ, फलों का ताजन जूस, नारियल पानी, निम्बू पानी आदि का सेवन कर सकती है।

तो यह हैं कुछ चीजें जिनका सेवन गर्मियों के मौसम में दिन के समय महिला को जरूर करना चाहिए। इन चीजों का सेवन करने से महिला को ठंडक मिलती हैं, पोषक तत्व मिलते है साथ ही बॉडी को हाइड्रेट रहने में भी मदद मिलती है। तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और गर्मियों का मौसम है तो आपको भी इन चीजों को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।

प्रेग्नेंट महिला के लिए 6 से 9 महीने तक यह खाना बहुत जरुरी होता है

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही बहुत ही अहम होती है। क्योंकि इस दौरान महिला का पेट बाहर आने की वजह से, वजन बढ़ने की वजह से महिला को जहां परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। वहीँ गर्भ में शिशु का विकास भी तेजी से हो रहा होता है। ऐसे में गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने के लिए अपने खान पान का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है। ताकि गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ भ्रूण के बेहतर विकास को होने में भी मदद मिल सके। तो आइये अब जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को तीसरी तिमाही में क्या क्या खाना चाहिए।

प्रेग्नेंट महिला तीसरी तिमाही में खाएं आयरन व् फोलिक एसिड युक्त आहार

  • तीसरी तिमाही में गर्भवती महिला को आयरन व् फोलिक एसिड युक्त आहार का भरपूर सेवन करना चाहिए।
  • क्योंकि आयरन गर्भ में पल रहे शिशु व् गर्भवती महिला को रक्त की कमी के कारण होने वाली परेशानियों से बचाता है।
  • और फोलिक एसिड गर्भनाल को स्वस्थ रखने व् गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद करता है।
  • आयरन व् फोलिक एसिड युक्त आहार का सेवन करने से भ्रूण को जन्म दोष के खतरे से सुरक्षित रखने में भी मदद मिलती है।
  • ऐसे में इसके लिए हरी पत्तेदार सब्जियों, अनार, सेब, स्ट्रॉबेरी, संतरे, ओटमील, पत्ता गोभी आदि का सेवन जरूर करना चाहिए।

कैल्शियम युक्त आहार

  • तीसरी तिमाही में गर्भवती महिला को थकान व् कमजोरी जैसी परेशानी अधिक हो सकती है।
  • ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को कैल्शियम युक्त आहार का सेवन करना चाहिए।
  • जिससे गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूत रहने में मदद मिल सके।
  • साथ ही कैल्शियम युक्त आहार का सेवन यदि प्रेग्नेंट महिला भरपूर मात्रा में करती है तो इससे शिशु की हड्डियों को मजबूत बनाने व् शिशु के शारीरिक विकास को तेजी से बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • ऐसे में कैल्शियम के लिए गर्भवती महिला डेयरी प्रोडक्ट्स, बादाम, हरी सब्जियां, जौ, संतरा आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए।

प्रेग्नेंट महिला तीसरी तिमाही में खाएं ओमेगा 3 फैटी एसिड युक्त आहार

  • यदि प्रेग्नेंट महिला ओमेगा 3 फैटी एसिड युक्त आहार का सेवन प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में करती है।
  • तो ऐसा करने से भ्रूण के मस्तिष्क के बेहतर विकास के साथ भ्रूण की मांसपेशियों के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।
  • ऐसे में ओमेगा 3 फैटी एसिड के लिए गर्भवती महिला अपनी डाइट में काला चना, लोबिया, अखरोट, सोयाबीन, मछली, चिकन, राजमा, राई का तेल, मेथी के बीज आदि को शामिल कर सकती है।

जिंक

  • प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में में जिंक युक्त आहार का भी भरपूर सेवन करना चाहिए।
  • क्योंकि जिंक युक्त आहार का सेवन करने से भ्रूण के बेहतर विकास में मदद मिलने के साथ प्रसव को आसान बनाने में भी मदद मिलती है।
  • ऐसे में जिंक युक्त आहार के लिए प्रेग्नेंट महिला अपनी डाइट में फलियां, मेवे, हरी सब्जियां, डेयरी प्रोडक्ट्स, चौलाई का साग, अंडे आदि को शामिल कर सकती है।

प्रेग्नेंट महिला तीसरी तिमाही में खाएं प्रोटीन युक्त आहार

  • प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में वजन बढ़ने के कारण गर्भवती महिला की पीठ में दर्द, पेल्विक एरिया में दर्द जैसी दिक्कतें हो सकती है।
  • और इसका कारण वजन बढ़ने के कारण मांसपेशियों में खिंचाव होना हो सकता है ऐसे में इन परेशानियों से बचाव के लिए प्रेग्नेंट महिला को प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करना चाहिए।
  • ऐसे में प्रोटीन युक्त आहार के लिए दालें, अंडा, नॉन वेज, ड्राई फ्रूट्स, हरी सब्जियों, आदि को प्रेग्नेंट महिला को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए।

तो यह हैं वो आहार जिन्हे प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में गर्भवती महिला को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। क्योंकि यह आहार गर्भ में पल रहे शिशु के विकास को तेजी से होने में मदद करने के साथ गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रखने में भी मदद करते हैं।

हिप और जांघो को सुडौल बनाने के तरीके

हिप और जांघो को सुडौल बनाने के तरीके:-

पतली कमर ही आपको फिट और सेक्सी दीखने के लिए काफी नहीं होती हैं, बल्कि हिप और जांघो पर जमी चर्बी भी आपको परेशान कर सकती हैं, क्योंकि जो लड़कियां और महिला शार्ट ड्रेस, जीन्स आदि पहनती हैं, उन्हें हिप और जांघो का मोटापा उनके इस शौक को पूरा होने से रोक सकता हैं। साथ ही यदि आप कोई ड्रेस या सूट भी पहनती हैं, तो हिप का बड़ा हुआ मोटापा उसमे से अलग ही दिखाई देता हैं, और सुडौल जांघे और हिप को पाने के लिए लड़की हो या महिला दोनों ही बड़ी उत्सुक रहती हैं।

हिप और जांघो पर जमी चर्बी का कारण होता हैं, जैसे की आप हमेशा छोटे से छोटे काम के लिए पैदल चलना पसंद ही नहीं करते हैं, बहुत अधिक मात्रा में जंक फ़ूड का सेवन करते है, एक ही जगह बैठे रहते हैं, शरीर को किसी प्रकार का व्यायाम की नहीं करवाते हैं, ऐसे में आपकी जांघो और हिप पर चर्बी जैम जाती हैं, जिससे आप जब चहलते हैं तो आपके हिप अलग ही दिखाई देते हैं, जिसके कारण कई बार तो आपके दोस्त भी आपका मज़ाक उड़ाते हैं, और आपको बुरा भी लगता होगा।

तो अब आपका इस परेशानी को खत्म करने का समय आ गया हैं, परंतु यदि आप इसे ख़तम करना चाहते हैं तो आपको नियमित रूप से आपको इन टिप्स को अपनी दिनचर्या में शामिल करना होगा, क्योंकि यदि आप इन्हें एक दिन करके इस समस्या को दूर करना चाहते हैं, तो आपको इन सबको अपनी लाइफ में शामिल करना होगा, तो आइये जानते हैं अब वो टिप्स जो आपकी इस समस्या का समाधान करके इस समस्या से निजात दिलाने में आपकी मदद करेंगे, और आपकी हिप और जांघो को सुडौल बनाने में आपकी मदद करेंगे।

हाई रिस्क प्रेगनेंसी क्या होती है? और इसकी केयर कैसे करें

हाई रिस्क प्रेगनेंसी

प्रेगनेंसी के नौ महीने गर्भवती महिला के लिए उतार चढ़ाव से भरे हुए होते है। कुछ महिलाओं को इस दौरान कम परेशानियां होती है तो कुछ महिलाएं बहुत ज्यादा परेशान होती है। और जो महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान बहुत अधिक परेशानियों से ग्रसित होती है जैसे की गेस्टेशनल डाइबिटीज़, यौन संक्रमित रोग, शारीरिक समस्या, प्रीक्लेम्पसिया, खून की कमी, बॉडी में पोषक तत्वों की कमी, बहुत मुश्किलों के बाद गर्भधारण होने पर, आदि। ऐसी प्रेगनेंसी को हाई रिस्क प्रेगनेंसी के नाम से जाना जाता है, और डॉक्टर्स इस तरह की प्रेगनेंसी होने पर गर्भवती महिला को अपना बेहतर तरीके से ध्यान रखने के साथ बेड रेस्ट की सलाह भी दे सकते हैं। ताकि गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में शिशु के विकास में भी किसी तरह की कमी न आये।

हाई रिस्क प्रेगनेंसी में ऐसे करें

यदि महिला की प्रेगनेंसी में बहुत सारी परेशानियां आ रही है, तो ऐसे में महिला को अपना बहुत ज्यादा ध्यान रखना जरुरी होता है। ताकि किसी भी तरह की परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके, तो आइये अब जानते हैं की हाई रिस्क प्रेगनेंसी के लिए किन किन बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है।

डॉक्टर से जांच

हाई रिस्क प्रेगनेंसी होने पर सबसे जरुरी होता है की आप डॉक्टर के संपर्क में रहें, किसी भी परेशानी के होने पर तुरंत डॉक्टर से राय लें। साथ ही सभी जरुरी जांच भी महिला को समय से करवानी चाहिए और किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। ताकि यदि प्रेगनेंसी में किसी भी तरह की परेशानी हो तो महिला को समय से इलाज मिल सके, और हर दिक्कत से बचाव हो सके।

सही खान पान

पोषक तत्वों की कमी शरीर में होने के कारण महिला शरीर में कमजोरी की समस्या हो सकती है, जिसके कारण गर्भवती महिला की शारीरिक परेशानी बढ़ने के साथ गर्भ में शिशु के विकास में भी कमी आ सकती है। ऐसे में महिला को खान पान में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए, और गर्भवती महिला को हर दो घंटे के गैप में कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए, ताकि बॉडी में एनर्जी और पोषक तत्वों की मात्रा को बरकरार रहने में मदद मिल सके।

काम से बचें

यदि प्रेगनेंसी में किसी तरह का रिस्क होता है तो डॉक्टर आराम की सलाह देते हैं, ऐसे में बहुत से ऐसे काम है जिन्हे महिला को नहीं करना चाहिए। जैसे की भारी सामान उठाना, भारी सामान सरकाना, पेट के भार काम करना, झुककर काम करना, सीढ़ियां चढ़ना, ज्यादा देर एक ही जगह पर खड़े रहना, पैरों के भार बैठकर काम करना, यात्रा करना, आदि। इन काम को यदि गर्भवती महिला करती है तो इसके कारण पेट पर जोर पड़ता है जिसके कारण ब्लीडिंग, गर्भपात, शिशु को असहज महसूस होने जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है

इन्फेक्शन

हाई रिस्क प्रेगनेंसी में थोड़ी सी भी लापरवाही करने से महिला को इन्फेक्शन की समस्या से परेशान होना पड़ सकता है, जिसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु पर भी नकारत्मक असर पड़ सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला को घर में पालतू जानवर का काम करने से, भीड़भाड़ वाली जगह पर जाने से, प्रदूषण वाली जगह पर जाने से बचना चाहिए। क्योंकि ऐसी जगह पर जाने से इन्फेक्शन का खतरा बढ़ता है और शिशु का विकास शारीरिक के साथ मानसिक रूप से भी प्रभावित हो सकता है।

आयरन

खून की कमी का होना भी हाई रिस्क प्रेगनेंसी की समस्या को खड़ा कर सकता है। ऐसे में महिला को प्रेगनेंसी के दौरान इस समस्या से बचने के लिए ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए जिसमे आयरन भरपूर मात्रा में हो। जैसे की अनार, गाजर, हरी सब्जियां, आदि इससे बॉडी में आयरन की कमी को पूरा करने के साथ खून की कमी के कारण होने वाली परेशानी से भी गर्भवती महिला को बचाव करने में मदद मिलती है।

स्ट्रेस फ्री

स्ट्रेस होना गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर भी बुरा प्रभाव डाल सकता है। और हाई रिस्क प्रेगनेंसी होने पर महिला का तनाव में रहना महिला की मुश्किलों को दुगुना करता है, ऐसे में गर्भवती महिला को हाई प्रेगनेंसी रिस्क को कम करने के लिए तनाव नहीं लेना चाहिए।

भरपूर आराम

यदि डॉक्टर ने आपको बेड रेस्ट की सलाह दी है, तो ऐसे में महिला को जितना हो सके आराम करना चाहिए। क्योंकि यदि महिला आराम नहीं करती है तो इसके कारण महिला की दिक्कतें बढ़ सकती है। और भरपूर आराम लेने पर महिला को शारीरिक के साथ मानसिक रूप से भी आराम मिलता है, जिससे प्रेगनेंसी के रिस्क को कम करने में मदद मिलती है।

दवाइयां

दवाइयों का सेवन भी महिला को समय से करना चाहिए, इसमें किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। खासकर डॉक्टर ने जिन दवाइयों का सेवन करने की सलाह आपको दी है उनका सेवन करने के साथ अपनी मर्ज़ी से किसी भी दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए। यदि कोई परेशानी या शारीरिक समस्या है तो उसके लिए डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

शारीरिक समस्या होने पर

हाई रिस्क प्रेगनेंसी के होने पर महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियां हो सकती है, ऐसे में यदि कोई भी परेशानी अधिक हो तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसके कारण ज्यादा दिक्कत बढ़ सकती है। ऐसे में कभी भी असहज महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

तो यह हैं कुछ टिप्स जो हाई रिस्क प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपनी सेहत का ध्यान रखने के लिए इस्तेमाल करने चाहिए। इससे महिला को फिट रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के विकास से जुडी परेशानियों से बचने में मदद मिलती है।

गर्भवती महिलाओं को इन जगहों पर नहीं जाना चाहिए

प्रेग्नेंट महिला यहाँ नहीं जाएं, गर्भावस्था में इन स्थानों पर नहीं जाना चाहिए, प्रेग्नेंसी में इस जगह ना जाएं, गर्भवती स्त्री को इन जगहों पर नहीं जाना चाहिए, प्रेग्नेंसी में महिलाओं को नहीं जाना चाहिए इस जगह, Pregnant Mahila Yaha Nahi Jaye, Pregnancy me kaha nahi jana chahiye, In Sthano par nahi jaye garbhvati mahila


दोस्तों, गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में बहुत सारे परिवर्तन आते हैं। जिसके चलते उनका शरीर, उनकी चेतना और उनका मन बहुत संवेदनशील हो जाता है जिसके कारण इस दौरान नकारात्मक ऊर्जा गर्भवती महिला पर अपना प्रभाव शीघ्र दिखाती हैं। इसलिए गर्भवती महिला को कुछ खास स्थानों पर नहीं जाने की सलाह दी जाती है। क्यूंकि कई महिलाओं में ऐसा देखा गया है की इन जगहों पर जाने के बाद मन विचलित और अशांत रहने लगता है। और माना जाता है इस तरह के स्थानों पर जाने से गर्भ में पल रहे शिशु को भी नुकसान हो सकता है। इसलिए कभी भी इन स्थानों पर नहीं जाना चाहिए।

गर्भवती महिला को किन-किन स्थानों पर नहीं जाना चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ कुछ खास तथ्य भी हैं जिन्हे जानने के बाद ही महिलाओं को उन स्थानों पर नहीं जाने की सलाह दी जाती है। माना जाता है ऐसे स्थानों पर नकारात्मकता बहुत अधिक होती है और गर्भवती महिला बहुत कमजोर होता है, ऐसे में गर्भवती महिला का वहां जाना हानिकारक हो सकता है। ये मान्यताएं प्राचीन काल से चली आ रही हैं और लोग अभी तक मान रहे हैं, मानना या नहीं मानना यह आपके ऊपर है।

नदी-तालाब के आस-पास

प्रेग्नेंसी के दौरान, गर्भवती महिला को नदी-नालों, तालाब या नहर के पास नहीं जाना चाहिए। यहाँ तक की उन्हें पार भी नहीं करना चाहिए। माना जाता है ऐसे स्थानों पर नकारात्मक ऊर्जा बहुत अधिक प्रभावशाली होती है और अधिकतर तंत्र-मंत्र सिद्धियां नदी-नालों के आस-पास ही की जाती हैं। इसीलिए प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भवती महिला इन स्थानों पर नहीं जाएं।

श्मशान घाट

गर्भावस्था के दौरान, महिला को शमशान घाट भी नहीं जाना चाहिए। आप यूँ कहिये की आप उधर से गुजरे भी नहीं, उधर से गुजरना भी नहीं चाहिए। क्योंकि इस स्थान पर, या इसके आस-पास की ऊर्जा बहुत नकारात्मक होती है। ऐसे में वहां से गुजरना या वहां जाना ठीक नहीं होता।

रेलवे ट्रैक

इस दौरान गर्भवती महिला को रेलवे ट्रैक के आस-पास भी नहीं जाना चाहिए। क्यूंकि इस स्थान पर भी नकारात्मक ऊर्जा बहुत प्रबल होती हैं।  गर्भावस्था के दौरान महिला का शरीर बहुत कमजोर होता है। ऐसे में इस स्थान पर जाने से आपकी मन प्रवृति ठीक नहीं रहेगी और नकारात्मक ऊर्जा आपको घेर लेगी। अगर आप यात्रा कर रहीं हैं तो ये अलग बात हैं अन्यथा रेलवे ट्रैक के आसपास बिलकुल भी नहीं जाएं।

शोकसभा

गर्भावस्था के दौरान किसी भी शोक सभा में नहीं जाना चाहिए? गर्भधारण के बाद से ही शोक सभा में जाना हो तो आप उससे बचने की कोशिश करें। इससे आप नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव से बच जाएंगी।

श्राद्ध का भोज नहीं खाएं

गर्भवती महिला को कभी भी श्राद्ध के भोज में नहीं जाना चाहिए। और अगर श्राद्ध का कोई भोजन आ जाए तो उसे भी नहीं खाना चाहिए।

बाहर से कुछ ना खाएं

इस दौरान बाहर के खाने जैसे किसी के घर से कुछ आ गया हो तो नहीं खाएं। आपको भी पता है अक्सर घरों में दूसरों के घर से मिठाई आ जाती है चाहे वो ख़ुशख़बरी की क्यों ना हो? आप उसे अवॉयड करें भूलकर भी नहीं खायें।

तो अब आप जान गई होंगी की प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भवती महिला को किन-किन स्थानों पर नहीं जाना चाहिए और वहां जाने से क्या नुकसान हो सकते हैं? इसलिए गर्भावस्था के दौरान भूलकर भी इन स्थानों पर नहीं जाएं।

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प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए देसी घी खाना क्यों जरुरी है

प्रेगनेंसी महिला के लिए एक ऐसी अवस्था होती हैं जहां महिला को अपने ऊपर दुगुना ध्यान देने की जरुरत होती है। क्योंकि इस दौरान महिला के शरीर को पोषण की जरुरत होने के साथ महिला के गर्भ में पल रहे पोषण की जरुरत भी होती है। ऐसे में देसी घी का सेवन करना प्रेग्नेंट महिला के लिए फायदेमंद होता है। क्योंकि देसी घी विटामिन्स व् अन्य एंटी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है जो माँ व् बच्चे को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में घी का सेवन करने से कौन से फायदे मिलते हैं।

कैलोरीज़ मिलती है भरपूर

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को फिट रहने के लिए और बच्चे के बेहतर विकास के लिए 300 अतिरिक्त कैलोरीज़ की जरुरत होती है। और घी का सेवन करने से गर्भवती महिला की इस जरुरत को पूरा करने में मदद मिलती है जिससे माँ व् बच्चा दोनों स्वस्थ रहते हैं।

महिला के शरीर को मिलता है पोषण

गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में बहुत कमजोरी आ जाती है जिसके कारण महिला की शारीरिक परेशानियां बढ़ जाती है।लेकिन घी का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला की इन परेशानियों को दूर करने में मदद मिलती है। क्योंकि घी में मौजूद पोषक तत्व गर्भवती महिला के शरीर को भरपूर पोषण देते हैं जिससे महिला को फिट रहने में मदद मिलती है।

बच्चे का विकास होता है बेहतर

घी में मौजूद कैलोरीज़ व् अन्य पोषक तत्व गर्भ में शिशु के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। जिससे शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास को बेहतर करने में मदद मिलती है।

पाचन क्रिया रहती है दुरुस्त

एंटी वायरल गुणों से भरपूर देसी का सेवन करने से गर्भवती महिला की पाचन क्रिया को दुरुस्त रहने में मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को पेट से सम्बंधित परेशानियों जैसे की कब्ज़ आदि से प्रेगनेंसी के दौरान बचे रहने में मदद मिलती है।

मूड होता है बेहतर

प्रेगनेंसी के दौरान मूड स्विंग्स होना आम बात होती है लेकिन यदि गर्भवती महिला घी का सेवन करती है। तो ऐसा करने से महिला को खुश रहने व् मूड स्विंग्स के कारण होने वाली परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही घी का सेवन करने से गर्भवती महिला को तनाव दूर करने में भी मदद मिलती है।

वजन बढ़ाने में करता है मदद

यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला का वजन नहीं बढ़ रहा है या शिशु का वजन कम है तो भी देसी का सेवन गर्भवती महिला के लिए बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि घी का सेवन करने से गर्भवती महिला के वजन को बढ़ाने के साथ गर्भ में शिशु के वजन को सही करने में भी मदद मिलती है।

प्रसव के दौरान होती है आसानी

ऐसा भी कहा जाता है की प्रेगनेंसी के नौवें महीने में महिला को घी का भरपूर सेवन करना चाहिए। क्योंकि इससे महिला की पेल्विक एरिया को मजबूत करने से साथ महिला को एनर्जी भी मिलती है जिससे प्रसव के दौरान होने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है।

तो यह है प्रेगनेंसी में देसी घी का सेवन करने से मिलने वाले फायदे, लेकिन ध्यान रखें की जरुरत से घी का सेवन न करें। हो सके तो घर में बनाये हुए देसी घी का सेवन ही करें, साथ ही यदि आपका वजन ज्यादा है तो आपको घी का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसे में घी का सेवन करने से आपका वजन और भी ज्यादा बढ़ सकता है जिससे प्रेगनेंसी में आपकी परेशानियां बढ़ती है।

जानिए बिच्छू के काटने के घरेलू इलाज

बिच्छू (Scorpion) को तो आप सभी जानते होंगे और हो सकता है कभी न कभी देखा भी होगा. बिच्छू एक प्रकार का बेहद खतरनाक कीड़ा होता है जो बहुत ही जहरीला होता है और यदि ये किसी मनुष्य को काट ले तो कुछ ही घंटो में उसके पुरे शरीर में ये जहर फ़ैल जाता है और उसकी मृत्यु भी हो सकती है.

इसके काटने पर होने वाली पीड़ा बहुत ही असहनीय होती है. और उसके काटने के बाद पुरे शरीर में जलन भी होती है जिसकी वजह से मनुष्य को बहुत परेशानियो का सामना करना पड़ता है. इसीलिए बिच्छू के काटने के बाद तुरंत पीड़ित व्यक्ति का उपचार किया जाना आवश्यक होता है.

बिच्छू के काटने पर सबसे पहले जहर को रोकना चाहिए ताकि जहर पुरे शरीर में न फैले. इसके लिए लोग उस स्थान पर (जहाँ बिच्छू ने डंक मारा है) वहां कस के पट्टी बांध देते है जिससे जहर शरीर के अन्य हिस्सो में न जा सके. इसके बाद बिच्छू के जहर को विभिन्न चिकित्साओं द्वारा बाहर निकाला जाता है.

आप चाहे तो इसके उपचार के लिए अपने किसी नजदीकी डॉक्टर के पास भी जा सकते है. परन्तु हर किसी के लिए ये संभव नहीं हो पाता. इसीलिए आज हम आपको बिच्छू के काटने पर किये जाने वाले घरेलु उपचारो के बारे में बताने जा रहे है.

बिच्छू कहां पाए जाते है?

ज़्यादातर बिच्छू पानी वाले क्षेत्रो के इर्द-गिर्द ही रहते है. नदी, तालाबो और उसके आस पास भी बिच्छू देखने को मिलते है. समुद्र के किनारे और विशेषकर किनारे की रेत में बिच्छू मिलते है. लेकिन ये रेत के ऊपर नहीं बल्कि उसके अंदर छुपे रहते है. जिससे कोई भी उन्हें आसानी से देख नहीं पाता.

बिच्छू के काटने पर प्रयोग किये जाने वाले घरेलु उपाय 

बिच्छू एक विषैला कीड़ा होता है जो अपने शिकार को डंक मरता है. उसके इस डंक में बहुत खतरनाक जहर पाया जाता है जो यदि किसी व्यक्ति के पुरे शरीर में फ़ैल जाये तो उसकी जान भी जा सकती है. इसीलिए इसके काटने पर सबसे पहले इसके जहर को शरीर में फैलने से रोका जाता है. उसके बाद इसके डंक को निकालने की प्रक्रिया शुरू की जाती है. इसके लिए अधिकतर लोग घरेलु उपायो का ही प्रयोग करते है. जबकि कुछ झाड़ा और मन्त्र आदि का प्रयोग करने में विश्वास रखते है.bichu karne ke upay

नीचे कुछ सरल और आसन घरेलु इलाज दिए गए है जिनकी मदद से आप बिच्छू के डंक और उसके जहर से राहत पास सकते है. तो आईये जानते है क्या है वे उपाय :

पुदीना :-

यदि किसी व्यक्ति को बिच्छू काट ले तो जिस जगह पर बिच्छू ने डंक मारा है उस जगह पर पुदीने के पत्तो का पेस्ट बनाकर लगाएं. इसके अलावा पुदीने का रस निकालकर पीड़ित व्यक्ति को पीने को कहे. इससे भी Bichu का विष उतर जाता है.

सेब :-

बिच्छू के काटने पर सेब को पीसकर उसका लेप बना लें. अब इस लेप को जिस जगह Bichu ने काटा है वहां लगाएं. और साथ ही पीड़ित व्यक्ति को सेब खाने को भी दें. ये उपाय भी बिच्छू का जहर जल्द उतारने में मदद करता है.

फिटकरी :-

Bichu के काटने पर तुरंत ही उस जगह पर फिटकरी को पानी में घिस कर उसका लेप बनाकर लगाएं. ऐसा करने से बिच्छू का जहर फैलता नहीं है.

सरसों का बीज :-

इसके अलावा जिस जगह बिच्छू में काटा है वहां सरसों के बीजो को पीस कर लगाने से भी जहर निकल जाता है.

Silica-200 :-

ये एक प्रकार की होम्यपैथी दवा है जो Bichu के काटने पर दी जाती है. ये तरल रूप में मिलती है. जब भी किसी व्यक्ति को बिच्छू काट लें तो उसकी जीभ पर इस दवा की केवल एक बून्द डालें. 10 मिनट के अंतराल में 3 बार इस दवा के लेने से जहर का असर कम होने लगता है.

मूली :

मूली को पीस कर उसका पेस्ट बना लें. अब इसमें हल्का सा नमक मिलाकर उस स्थान पर लगाएं जहाँ Bichu ने काटा था और साथ ही रोगी को मूली भी खिलाये. ये जहर के प्रभाव को कम करने में मदद करेगी.

लहसुन :-

इस उपाय के लिए एक लहसुन को छिल कर उसका रस निकाल लें. अब इसमें 3 चम्मच शहद मिलकर पीड़ित को खाने के लिए दें. इससे जहर का असर कम हो जायेगा.
इसके अतिरिक्त लहसुन की 6 कलियों को पीसकर उसमे आधा चम्मच नमक मिलाकर जिस जगह Bichu ने काटा है वहां लगाने से विष का प्रभाव कम हो जाता है.

तुलसी :-

तुलसी के पत्तो को पीसकर उसमे नमक मिलाये और इस लेप को Bichu द्वारा काटे गए स्थान पर लगाएं. ऐसा करने से जहर का असर कम होने लगता है.

बिच्छू के काटने के अन्य घरेलु इलाज :-

1. एक पत्थर को अच्छे से साफ़ कर लें. अब उस पर फिटकरी को घिसें. इसके बाद जिस स्थान पर बिच्छू ने काटा है उस स्थान पर उस लेप को लगाएं. और थोड़ी देर आग से सेकें. किसी भी प्रकार के Bichu का जहर इस इलाज से दो मिनट में उतर जायेगा.pyaas ka ras juon ke liye

2. बारीक़ पीसे हुए सेंधा नमक को प्याज में मिलाये. और जिस जगह Bichu ने काटा था वहां लगाएं. इससे जहर उतर जायेगा.

3. माचिस की पांच से सात तीलियों के मसाले को पानी में घिसकर प्रभावित क्षेत्र पर लगाने से भी बिच्छू का जहर उतर जाता है.

4. प्याज के रस में नौसादर मिलाकर Bichu के डंक पर जागने से विष को प्रभाव कम हो जाता है.

5. हल्दी की बुकनी अंगारो पर डालकर उसका धुँआ Bichu के डंक वाले स्थान पर लें. उससे जहर उतरता है.

6. पुदीने का रस पीने या उसके पत्तो को खाने से Bichu के काटने पर होने वाली पीड़ा में राहत मिलती है.

7. सूखे रतालू को घिस कर लगाने से भी Bichu के डंक में लाभ मिलता है.

विशेष :-

परिस्तिथि के अनुसार निर्णय लें. यदि आवश्यकता है तो डॉक्टर से भी सलाह लें. इसके साथ ही जिस व्यक्ति को Bichu ने काट लिया है तो तुरन्त उस जगह से करीब चार उंगल ऊपर किसी कपडे या रस्सी से बांध देना चाहिए. इससे जहर खून के साथ शरीर के बाकी हिस्सों में नहीं फैलेगा. इसके बाद किसी साफ़ सेफ्टी पिन या चिमटी को गर्म करके त्वचा में घुसा कर डंक निकाल देना चाहिए.

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प्रेगनेंसी में क्या नहीं करें

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गर्भवती महिला के लिए प्रेगनेंसी सुखद अहसास होने के साथ जटिलताओं से भरा समय होता है। क्योंकि इस दौरान बॉडी में हार्मोनल बदलाव चलते रहते हैं, और इनके कारण महिला को बहुत सी शारीरिक समस्याएं जैसे की उल्टी, मॉर्निंग सिकनेस, पेट में दर्द, थकान, कमजोरी, आदि का अनुभव होना आम बात होती है। लेकिन इन सब परेशानियों से बचाव के लिए और गर्भ में पल रहे शिशु के स्वस्थ रहने और शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास के लिए गर्भवती महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। और प्रेगनेंसी के दौरान कुछ सावधानियां महिला को बरतनी चाहिए। तो लीजिये आज हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान क्या नहीं करना चाहिए इस बारे में कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं।

खान पान में बरते सावधानी

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान पोषक तत्वों से भरपूर आहार लेने की सलाह दी जाती है। लेकिन खान पान में उन चीजों को शामिल नहीं करना चाहिए जिनका सेवन करने से गर्भवती महिला या गर्भ में पल रहे शिशु को परेशानी का अनुभव हो। जैसे की कच्चा पपीता, कटहल, ज्यादा मात्रा में अंगूर, कच्चा व् अधपका मास, कच्चे अंडे, जंक फ़ूड, मर्क्युरी युक्त मछली, चाइनीज़ फ़ूड, कच्चा दूध, ज्यादा मात्रा में चाय कॉफ़ी, कच्चे अंकुरित अनाज, आदि। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी चीज का सेवन जरुरत से ज्यादा नहीं करना चाहिए क्योंकि आवश्यकता से अधिक किसी भी चीज का सेवन गर्भवती महिला के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।

भूखे नहीं रहें

बॉडी में प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण जीभ के स्वाद में परिवर्तन आने या उल्टी या किसी अन्य शारीरिक आदि समस्या अधिक होने के कारण गर्भवती महिला का खाने का मन नहीं करता है। ऐसे में महिला को भूखे नहीं रहना चाहिए बल्कि मन न होने पर भी थोड़े थोड़े समय बाद कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए। क्योंकि गर्भवती महिला का भूखा रहना गर्भवती महिला की समस्या बढ़ाने के साथ शिशु के विकास में कमी का कारण भी बन सकता है।

नशे का सेवन

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को अल्कोहल, धूम्रपान, कैफीन युक्त चाय कॉफ़ी, या अन्य किसी भी तरह के नशे का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि यदि गर्भवती महिला यदि नशे का सेवन करती है तो इसका असर गर्भनाल के रास्ते शिशु तक पहुँच जाता हैं जिससे शिशु के शारीरिक के साथ मानसिक विकास में भी बाधा उत्पन्न हो सकती है।

ज्यादा भागदौड़ व् यात्रा

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादा भागदौड़ वाले काम, तेजी से सीढ़ियां चढ़ना, यात्रा करना जैसे काम नहीं करना चाहिए। खासकर प्रेगनेंसी की शुरुआत में इस तरह के काम करने से गर्भपात होने के चांस भी बढ़ जाते हैं।

संक्रमण होने वाली जगह व् चीजों से दूरी

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को भीड़भाड़ वाली जगह पर नहीं जाना चाहिए, घर में इस्तेमाल किये जाने वाले केमिकल के प्रयोग से बचना चाहिए जैसे की पोछा लगाते समय केमिकल का इस्तेमाल, किसी भी संक्रमित व्यक्ति के पास नहीं जाना चाहिए, घर में यदि कोई पालतू जानवर है तो उसके काम को करने से बचना चाहिए, आदि। क्योंकि इन सब कामो को करने से गर्भवती महिला को इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है, जो गर्भ में शिशु को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

गरम पानी से नहाना

गर्भवती महिला को नहाने के लिए ज्यादा गरम पानी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि गरम पानी से नहाने के कारण गर्भवती महिला के शरीर का तापमान बढ़ सकता है। जिसके कारण गर्भपात होने के चांस भी हो जाते हैं।

तनाव

तनाव व्यक्ति को केवल शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी बीमार बना देता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को तनाव लेने से बचना चाहिए, क्योंकि यह गर्भवती महिला की सेहत सम्बन्धी बढ़ाने के साथ, शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास में समस्या उत्पन्न कर सकते है।

व्यायाम

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान व्यायाम न करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यदि आप फिटनेस के चक्कर में अधिक व्यायाम करती हैं तो इससे गर्भवती महिला को गर्भपात जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही अधिक योगासन करने से भी बचना चाहिए, और यदि आप व्यायाम व् योगासन करना चाहते हैं तो डॉक्टर के साथ ट्रेनर की राय भी लेनी चाहिए ताकि प्रेगनेंसी के दौरान आपको हर परेशानी से बचाव करने में मदद मिल सकें।

पेट के बल काम नहीं करना चाहिए

गर्भ में शिशु को सुरक्षित रखने के लिए गर्भवती महिला को ऐसा कोई भी काम नहीं करना चाहिए जिससे पेट पर किसी भी तरह का जोर पड़े। क्योंकि इससे गर्भ में पल रहे शिशु को परेशानी का अनुभव हो सकता है। जैसे की झुककर किसी काम को न करें, पैरों के भार बैठकर कोई भी काम न करें, आदि।

दवाइयों का सेवन

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के समय बहुत सी शारीरिक परेशानियां हो सकती है। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं होता है की गर्भवती महिला दर्द से राहत के लिए घर में दवाइयों का सेवन करना शुरू कर दें, क्योंकि यह शिशु के लिए नुकसानदायक हो सकता है। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी समस्या के बढ़ने पर आपको एक बार डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

पेट के बल सोना

वजन बढ़ने के कारण गर्भवती महिला को सोने में परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है, लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को सोने में सावधानी बरतनी चाहिए। क्योंकि ऐसे सोने से गर्भ में शिशु असहज महसूस कर सकता है। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान सोने के लिए सबसे बेहतरीन पोजीशन बाई तरफ करवट लेकर सोना होता है। साथ ही दिन में आठ से दस घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए क्योंकि नींद में कमी के कारण गर्भवती महिला को थकान, कमजोरी, चिड़चिड़ापन आदि की समस्या हो सकती है।

तो यह हैं कुछ काम ज गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान करने से बचना चाहिए। क्योंकि इन कामो को करने से गर्भवती महिला और गर्भ में शिशु को परेशानी हो सकती है। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी समस्या को इग्नोर नहीं करना चाहिए, और कभी भी असहज महसूस होने पर लापरवाही न करते हुए तुरंत डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

टी वी सीरीयल में आप भी काम कर सकती हैं! ये तरीक़े अपनाएँ

हमें कभी भी अपने सपनों से कॉम्प्रोमाइज नहीं करना चाहिए। सपने पूरे ना होने पर जीवन भर अफसोस रहता है और यह हमें पूरी जिंदगी परेशान करता रहता है। कई बार सोसाइटी के प्रेशर के कारण हम अपने सपनों को हासिल करने का प्रयास नहीं करते हैं, जिसका हमें पूरी जिंदगी अफसोस रहता है। इसलिए हमें हमेशा अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए।

हर इंसान की अपनी एक अलग पसंद होती है, किसी को सिंगर बनना है तो किसी को डान्सर, कोई खिलाड़ी बनना चाहता है तो कोई डिज़ाइनर, किसी को अध्यापक बनना है तो किसी को डॉक्टर, कोई ऐक्टर बनना चाहता है तो कोई डाईरेक्टर। हर किसी को अपनी रुचि और प्रतिभा के अनुसार ही अपना करीयर चुनना चाहिए। अगर आपके मन में ऐक्टर बनने की इच्छा है और आपके अंदर ऐक्टिंग की प्रतिभा है तो सिनेमा जगत में अपनी पहचान बना सकती हैं। आजकल भारतीय दर्शकों का रुझान टीवी के प्रति बहुत बढ़ गया है।

घर का टीवी पूरा दिन चालू ही रहता है, ख़ासकर गृहणियाँ दिन भर घर के काम के साथ साथ अपने पसंदीदा धारावाहिक भी देखती रहती हैं। ऐसे में टीवी इंडस्ट्री में नए नए धारावाहिकों और उसमें काम करने वाले कलाकारों की आवश्यकता पड़ती ही रहती है। अगर आप इन टीवी सीरीयल में काम करना चाहती हैं तो आपको बस थोड़ी मेहनत करनी होगी। अब हम आपको कुछ ऐसी बातें बताएँगे, जो अभिनय के क्षेत्र में काम पाने के लिए आपके काम आ सकती हैं।

एक्टर बनने के लिए टैलेंट और लुक दोनों का सही कॉम्बिनेशन होना चाहिए। अच्छा लुक होने के बावजूद आप अपने आपको रिप्रजेंट नहीं कर पा रहे तो लुक मायने नहीं रखता। वहीं आप में जबरदस्त टैलेंट होने के बावजूद आपका लुक आप के केरेक्टर से मैच नहीं कर रहा है तो वह भी मायने नहीं रखता है। अपने व्यक्तित्व और अपनी कला को निखारने के लिए आप निम्नलिखित काम कर सकते हैं –

व्यक्तित्व और कला को निखारने के लिए ये करें :- टी वी सीरीयल

सबसे पहले तो आप ये जानिए कि ये कला का क्षेत्र है, तो इसमें आने के लिए आपको अपनी अभिनय कला को निखारना ही होगा। आज कल तरह तरह स्त्रोत उपलब्ध हैं, जो इस काम में आपकी मदद कर सकते हैं। जैसे –

1. आप किसी theatre group के साथ जुड़ सकते हैं, जहाँ आप अपनी अभिनय कला को बारीकी से तराश सकती हैं। Theatre group वाले थोड़े थोड़े समय बाद नाटक मंचन करते रहते हैं। इन नाटकों में काम करके आप अपना अभिनय निखार सकती हैं।

2. आप किसी ड्रामा स्कूल में अड्मिशन ले सकती हैं। ड्रामा स्कूल में आपको अभिनय की बारीकियाँ सीखने का अवसर मिलेगा, साथ ही साथ कैमरा के सामने कैसे सहज रहना है, ये भी सिखाया जाएगा।

3. आप ऑनलाइन ऐक्टिंग क्लास भी join कर सकती हैं। आजकल बहुत से लोग ऑनलाइन ऐक्टिंग क्लास लेते हैं। आपकी मदद के लिए वो video बना कर भी अपलोड करते हैं, ताकि आप video देख कर सीख सकें।

4. टीवी पर आने वाले धारावाहिकों को ध्यान से देखें, कलाकारों के चेहरे के भाव सीखने की कोशिश करें। बहुत सी बातें देख देख कर भी सीखी जा सकती हैं।

5. ऐक्टिंग कला को निखारने के लिए प्रैक्टिस की बहुत ज़रूरत होती है। इसलिए किसी भी डाईलोग की तब तक रिहर्सल करें, जब आप उसमें पर्फ़ेक्ट ना हो जाएँ।

6. आइने के सामने खड़ी होकर ऐक्टिंग करें, अपने चेहरे के हाव भाव पर ध्यान दें।

ख़ूबसूरती और सेहत के लिए ये करें :- 

अब दूसरा ख़ास मुद्दा ये है कि अभिनय कला के साथ साथ आपको अपने आपको भी सजाना सँवारना होगा। क्यूँकि करोड़ों दर्शकों के सामने टीवी पर आने के लिए आपको ख़ूबसूरत और फ़िट तो दिखना ही होगा। अपनी ख़ूबसूरती और सेहत के लिए आपको निमलिखित चीज़ों पर ध्यान देना होगा –

1. अपने खानपान का ख़्याल रखें। तली हुई और मसालेदार चीज़ों से दूर रहें। फल सब्ज़ियों को अपने भोजन में अधिक से अधिक शामिल करें। संतरा, अमरूद, पालक, ककड़ी, आँवला, निम्बू आदि का अधिक सेवन करें, इनमें विद्यमान विटामिन और मिनरल त्वचा को पोषण देकर, उनके दाग़ धब्बों को हल्का करके उसे निखार देते हैं।

2. पानी अधिक पिएँ, दिन में कम से कम आठ दस गिलास पानी ज़रूर पिएँ। शरीर में पानी की सही मात्रा होने से हमारा पाचन तंत्र सही रहता है और त्वचा में नमी बनी रहती है।

3. रोज़ एक नारियल का पानी ज़रूर पिएँ। नारियल पानी एक कम कैलोरी वाला पेय है, इसमें एंटीऑक्सिडेंटस्, अमीनो ऐसिडस्, एंजाईमस्, विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, विटामिन सी और कई तरह के सॉल्ट भी होते हैं।

4. नियमित व्यायाम करें, नियमित सैर, योगा और व्यायाम करने से शरीर स्वस्थ रहता है और टॉक्सिक पदार्थ पसीने के साथ शरीर से बाहर निकल जाते हैं। इससे आपमें चुस्ती फुर्ती बनेगी और आपकी त्वचा भी कांतिमय बनी रहेगी।

5. घर से बाहर जाते वक़्त सन स्क्रीन का प्रयोग अवश्य करें। सूर्य की रोशनी में कुछ हानिकारक किरणें जैसे अल्ट्रा वॉयलेट किरणें होती हैं, जो हमारी त्वचा को नुक़सान पहुँचाती हैं।

6. रात को सोते वक़्त अपना मेकअप ज़रूर उतारें और मुँह धोकर कोई अच्छा moisturiser लगाएँ।

7. नशीले पदार्थों से दूर रहें। धूम्रपान और शराब के सेवन से तौबा करें, वरना आपकी त्वचा कांतिहीन होकर, असमय बूढ़ी होने लगेगी।

ये भी है जरुरी :- 

1. अभिनय कला सीखने और ख़ुद को निखारने के बाद जिस चीज़ की ज़रूरत है, वो है मौक़ा। मौक़ा घर बैठे बैठे तो आएगा नहीं, उसके लिए आपको मेहनत करनी होगी।

2. सबसे पहले अपना एक फ़ोटो शूट करवाएँ और कुछ अच्छी अच्छी तस्वीरें खिंचवाएँ। ये तस्वीरें आप कास्टिंग डाइरेक्टर और प्रोडक्शन हाउस को भेज सकती हैं। फिर जब वो आपको ऑडिशन के मेसेज भेजेंगे तब आप ऑडिशन देने जाइए।

3. सबसे पहले पता लगाएँ कि ऑडिशन कहाँ कहाँ होते हैं। जहाँ भी ऑडिशन हो, वहाँ जाकर अपनी कला का प्रदर्शन करिए। अगर आपमें अभिनय के गुण हैं तो आपको ज़रूर मौक़ा मिलेगा।

4. ऑनलाइन साइट्स की मदद लें। आजकल कई तरह की ऑनलाइन साइट्स मौजूद हैं, जिन पर आप रेजिस्ट्रेशन करवा सकती हैं। फिर वो ख़ुद आपको आपकी उम्र और आपके व्यक्तित्व के हिसाब से उपयुक्त रोल के लिए ऑडिशन का मेसेज भेजते हैं।

5. घर पर ही अपने ऑडिशन का video बनाकर आप उसे youtube या फिर बाक़ी ऑनलाइन साइट्स पर अपलोड कर सकती हैं।

6. बड़े बड़े production houses को अपना ऑडिशन video बनाकर mail भी कर सकती हैं। आपके लिए कोई उपयुक्त रोल होगा तो वो आपको ज़रूर मौक़ा देंगे।

अगर आपमें हुनर है तो आपको पहचान ज़रूर मिलेगी, आपको बस मेहनत करते रहना है।

गर्भधारण करने के बाद इन टेस्ट को जरुर करवाना चाहिए

गर्भधारण करने के बाद इन टेस्ट को जरुर करवाना चाहिए:-

गर्भधारण किसी भी महिला के लिए बहुत ही खास लम्हा होता है। और ऐसे में महिला को अपनी और भी देखभाल और केयर करनी पड़ती हैं, बहुत सी चीजों का ध्यान रखना पड़ता है, क्योंकि महिला के गर्भधारण के बाद उसमे बहुत से बदलाव आते है, जैसे की महिला का वजन बढने लगता है, कई महिलाओ को उलटी की समस्या हो जाती हैं, कुछ महिलाएं चक्कर की परेशानी से परेशान हो जाती है, और गर्भावस्था के दौरान महिला कई नये अनुभवों से भी गुजरती हैं, जैसे की जब बच्चा गर्भ में हिलना डुलना शुरू करता हैं, और कभी अचानक से लात मारता हैं, ऐसे की कुछ लम्हों पर आपको बहुत आचा लगता हैं, और आप सबके साथ इस लम्हे को शेयर करते है।

गर्भावस्था में महिला को अपने खान पान और साथ ही अपने उठने बैठने चलने सबका ध्यान रखना पड़ता है, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही कभी कभी आपके लिए खतरनाक साबित हो सकती है, क्योंकि कई बार शुरुआती दिनों में लापरवाही बरतने के कारण गर्भपात होने की सम्भावना भी बढ़ जाती हैं, महिलाओ को गर्भावस्था के समय कभी भी ज्यादा भागदौड़ नहीं करनी चाहिए, भारी सामान नहीं उठाना चाहिए, पपीते का सेवन नहीं करना चाहिए, इन सबके कारण भी कई बार गर्भ गिर जाता हैं, या ब्लीडिंग की परेशानी हो जाती हैं, जिसके कारण गर्भावस्था का पूरा समय आपको बेड रेस्ट भी हो सकता है।

गर्भावस्था के समय महिलाओ को अपनी सेहत के साथ भी किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए, जैसे की महिलाओ को समय समय पर डॉक्टर से जाँच करवानी चाहिए, खान पान में किसी भी तरह ही लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए, सेहत में किसी भी तरह की समस्या होने  पर अनदेखा न करके उसी समय डॉक्टर से जाँच करवानी चाहिए, और बच्चे की स्थिति को जानने के लिए भी स्केन आदि करवाते रहना चाहिए, और कुछ टेस्ट भी होते हैं, जो महिला और बच्चे के लिए बहुत जरुरी हैं, इसीलिए समय पर आपको ये टेस्ट करवाते रहना चाहिए, तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की आपको कौन कौन से टेस्ट करवाने चाहिए।

गर्भधारण के बाद होने कौन कौन से टेस्ट करवाएं जाने चाहिए:-

पहले तिमाही में करवाएं ये टेस्ट:-

यूरिन टेस्ट:-

यूरिन को लेकर महिला का शुगर और प्रीक्लेम्पसिया का एक टेस्ट होता हैं, प्रीक्लेम्पसिया ये परेशानी पांच प्रतिशत गर्भवती महिलाओ में होती हैं, इसका सीधा असर महिला और गर्भ में पल रहें शिशु पर इसका असर पड़ता हैं, यदि ये समस्या होती हैं तो महिला का वजन अचानक से बढने लग जाता हैं, सर दर्द, सुजन, पेट में दर्द, धुंधला दीखना, आदि परेशानिया होने लग जाती हैं, ये परेशानी कई बार महिला को प्रेगनेंसी के मध्य में भी होसकती हैं इसीलिए डॉक्टर के कहे अनुसार आपको इसकी जाँच करवानी चाहिए ताकि इसका बुरा असर आपके होने वाले बच्चे या महिला पर न पड़ें।

ब्लड से होने वाल टेस्ट:-

उसके बाद महिला के ब्लड से सम्बंधित टेस्ट भी करवाने चाहिए, इसमें महिला का एसटीडी, एच् सी जी, आपके जीवाणु आदि का टेस्ट होता हैं, जिससे महिला के अंदर या उसके होने वाले बच्चे को कई परेशानी न हो इसके लिए टेस्ट किये जाते हैं, आइये अब विस्तार से जानते हैं की इन टेस्ट में क्या क्या होता है।

एसटीडी:-

इस टेस्ट में ये चेक किया जाता हैं की महिला को कोई यौन संचारित रोग तो नहीं हैं, जब कोई बिना किसी सुरक्षा के योंन सम्बन्ध बनाते हैं, तो इस रोग के फैलने की आशंका होती हैं, यदि आपका साथी इस रोग से ग्रसित हो तो, इसके कारण होने वलेबच्चे को कोई परेशानी न हो, इसीलिए इस टेस्ट को किया जाता है।

Rh फैक्टर टेस्ट:-

इस टेस्ट के द्वारा ये पता किया जाता हैं की क्या आपके बच्चे का और आपका ब्लड ग्रुप एक जैसा है या नहीं, यदि आप दोनों का ब्लड ग्रुप एक जैसा नहीं होता हैं तो कई बार डिलीवरी के समय या गर्भावस्था के दौरान महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

9th सप्ताह में होने वाला टेस्ट:-

NIPT टेस्ट:-

इसमें महिला के शरीर में कोई भी तकलीफ या क्रोमोसोमस की संख्या में कोई परेशानी तो नहीं हैं इस विषय में टेस्ट किया जाता है। क्योंकि यदि कोई कमी होती है तो डॉक्टर साथ ही उस समस्या का इलाज कर देते हैं, ताकि महिला को डिलीवरी के समय कोई परेशानी न हो, और साथ ही बच्चे पर भी इसका कोई बुरा असर न पड़ें।

10 से 13 सप्ताह में होने वाला टेस्ट:-

CVS टेस्ट:-

इसमें महिला को गर्भाशय से सम्बंधित कोई परेशानी तो नहीं हैं, बच्चे के बढने के कारण गर्भाशय से सम्बंधित कोई परेशानी तो नहीं हो रही हैं, इस बारे में अच्छे से चेक किया जाता हैं, और यदि कुछ हो, तो साथ ही इस परेशानी का इलाज भी किया जाता है।

11 से 14 हफ्ते में होने वाला टेस्ट:-

NT टेस्ट:-

इस टेस्ट में महिला का अल्ट्रासाउंड स्केन किया जाता हैं जिसमे बच्चे की स्थिति, और उसके आकार के बारे में अच्छे से बताया जाता हैं, और साथ ही बच्चे के हदय की गति के बारे में भी बताया जाता हैं, इसीलिए इस टेस्ट को समय पर ही करवाना चाहिए, ताकि कोई लापरवाही न हो, और माँ और बच्चा दोनों ही स्वस्थ हो।

14 तो 22 सप्ताह में होने वाला टेस्ट:-

इस समय में भी महिला को डॉक्टर के पास अपने गर्भाशय के जाँच के लिए जाना चाहिए, ताकि आप बच्चे और महिला दोनों को कोई परेशानी न हो, और साथ ही डिलीवरी के समय भी महिला को कोई दिक्कत का सामना न करना पड़ें, इसीलिए इन दिनों में डॉक्टर के बताएं अनुसार डॉक्टर से जरुर चेक करवाना चाहिए।

18 तो 22 सप्ताह टेस्ट:-

इस बीच भी महिला को एक स्केन करवाना चाहिए, और इस स्केन में डॉक्टर आपको बच्चे के सभी अंगो को विस्तार से देखा भी सकती हैं, की बच्चा गर्भ में क्या कर रहा है, बच्चे के भीतरी रूप से हर एक अंग की जांच की जाती हैं, साथ ही डॉक्टर तो गर्भ में पल रहें शिशु के सेक्स से वाकिफ हो जाती हैं, और कई बार तो बच्चे को आप हिलता हुआ भी देख सकते है।

24 से 28 सप्ताह में होने वाला टेस्ट:-

इस बीच महिला का Glucose Tolerance Test होता हैं, इसमें महिला का फिर से शुगर का टेस्ट किया जाता हैं, क्योंकीसके कारण भी महिला की डिलीवरी में परेशानिया आ सकती हैं, इसीलिए आपके लिए जरुरी हैं की आप इसे नज़रंदाज़ न करें, बल्कि इन सभी टेस्ट को समय से करवाएं, ताकि आपको और आपके बच्चे को कोई और परेशानी न हो।

तीसरी तिमाही में होने वाले महिला के टेस्ट:-

Nonstress test और biophysical profile :-

इस टेस्ट में बच्चे का हिलना डुलना, बच्चे की हदय की गति, और उसकी गर्भ में क्या स्थिति हैं  इस बारे में चेक किया जाता हैं, और यदि डिलीवरी के समय कोई समस्या आने वाली हो तो उसका भी इलाज किया जाता है।

Group B strep:-

इसमें एक तरह के वायरस का टेस्ट किया जाता हैं जिससे बच्चे के जन्म के बाद बच्चे पर कोई बुरा प्रभाव न पड़ें, तो इसीलिए आपको इन में से किसी भी टेस्ट के प्रति लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।

डॉक्टर से राय लें:-

महिला को बच्चे के लिए और अपने स्वास्थ्य के लिए समय समय पर डॉक्टर से जाँच करवाते हुए रहना चाहिए, और इस बारे में आपको जैसे ही आपको पता चले की आप माँ बनने वाली हैं, वैसे ही डॉक्टर से जाँच करवाने के बाद आप अगली जाँच और पुरे नौ महिने तक कौन कौन से टेस्ट करवाने हैं इस बारे में अच्छे से जानकारी भी लेनी चाहिए, और डॉक्टर के परामर्श के अनुसार चलना चाहिए।

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