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प्रेगनेंसी में होने वाले डिस्चार्ज के अलग अलग रंग से जानिए की आपकी प्रेगनेंसी कितनी स्वस्थ है

प्रेगनेंसी में वजाइनल डिस्चार्ज, गर्भावस्था के दौरान सफ़ेद पानी आना आम बात होती है। और यह कोई समस्या या बिमारी नहीं होती है बल्कि सफ़ेद पानी गर्भाशय को संक्रमण से सुरक्षित रखने में मदद करता है। लेकिन साथ ही आपको इस बात का ध्यान भी रखना जरुरी होता है की डिस्चार्ज कितनी मात्रा में हो रहा है। और डिस्चार्ज के रंग में तो कोई बदलाव नहीं है या बदबू तो नहीं आ रही है। क्योंकि प्रेगनेंसी में सफ़ेद पानी की मात्रा यदि जरुरत से ज्यादा बढ़ जाएँ या डिस्चार्ज के रंग में बदलाव या बदबू महसूस हो तो यह परेशानी का कारण हो सकता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में जानते हैं की प्रेगनेंसी में होने वाले डिस्चार्ज के अलग अलग रंग से कैसे पता चलता है की आपकी प्रेगनेंसी कितनी स्वस्थ है। लेकिन पहले जानते हैं की की प्रेगनेंसी में डिस्चार्ज क्यों होता है।

प्रेगनेंसी में सफ़ेद पानी आने का कारण

गर्भावस्था के दौरान बॉडी में बहुत से हार्मोनल बदलाव होते हैं। जिसके कारण बॉडी में एस्ट्रोजन के स्तर में वृद्धि हो जाती है। एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ने के कारण आपको सफ़ेद पानी आ सकता है। और सफ़ेद पानी बॉडी से मृत कोशिकाओं और विषैले पदार्थों को भी बॉडी से बाहर निकालने में मदद करता है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। इसीलिए सफ़ेद पानी यदि प्रेगनेंसी के दौरान आता है तो इसे लेकर घबराना नहीं चाहिए। लेकिन यदि डिस्चार्ज के रंग में बदलाव हो या बदबू महसूस हो तो इसे अनदेखा भी नहीं करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में वजाइनल डिस्चार्ज के अलग अलग रंग क्या बताते हैं

गर्भावस्था के दौरान कई बार हो सकता है की महिला को सफ़ेद की जगह किसी और रंग का डिस्चार्ज हो। ऐसे में उन रंगो का क्या मतलब होता है। आइये इस आर्टिकल में जानते हैं।

गाढ़ा और सफेद डिस्चार्ज

  • प्रेग्नेंट महिलाओं को होने वाला सफेद रंग का डिस्चार्ज सामान्य होता है।
  • लेकिन यदि डिस्चार्ज के साथ जलन या खुजली और दुर्गंध पैदा करने वाला स्राव पैदा आता है।
  • तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि यह यीस्ट इन्फेक्शन का लक्षण हो सकता है।
  • ऐसे में अगर आपके साथ ऐसा हो रहा है तो आपको निश्चित रूप से डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए।

पीला डिस्चार्ज

  • यदि गर्भवती महिला को पीले रंग का डिस्चार्ज होता है तो ऐसा होना भी प्रेगनेंसी के दौरान सामान्य बात होती है लेकिन इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि यह बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण हो सकता है ऐसे में एक बार डॉक्टर से जरूर पूछना चाहिए।
  • लेकिन यदि पीले रंग के स्त्राव के साथ स्त्राव में से बदबू महसूस हो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि पीले रंग के गाढ़े स्त्राव के साथ बदबू का आना संक्रमण का कारण, यौन संचारित रोगो के होने का कारण हो सकता है।
  • और प्राइवेट पार्ट में किसी तरह के संक्रमण का होना गर्भवती महिला व भ्रूण दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है।

प्रेगनेंसी में वजाइनल डिस्चार्ज हरे रंग का होना

  • यदि प्रेग्नेंट महिला प्रेगनेंसी के दौरान बिना सुरक्षा के सम्बन्ध बनाती है।
  • तो इसके कारण भी प्रेग्नेंट महिला को संक्रमण का खतरा हो सकता है।
  • और इस संक्रमण को ट्रिचोमोनिएसिस कहा जाता है।
  • ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को यदि यह संक्रमण होता है तो इसके कारण महिला को हरा रंग का डिस्चार्ज हो सकता है।
  • और यदि महिला को इस रंग का डिस्चार्ज होता है तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए और डॉक्टर से मिलना चाहिए।

ब्राउन रंग का डिस्चार्ज

  • भूरे रंग का डिस्चार्ज आमतौर पर अनियमित पीरियड्स के समय होता है।
  • लेकिन यदि प्रेगनेंसी में या सामान्य दिनों में भी अगर भूरे रंग का वजाइनल डिस्चार्ज होता है तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि यह यूटेरस या सर्वाइकल कैंसर की और संकेत कर सकता है।

प्रेगनेंसी में वजाइनल डिस्चार्ज के साथ ब्लड

  • गर्भावस्था के दौरान यदि सफ़ेद पानी के साथ आपको हल्का फुल्का ब्लड भी आता है तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि सफ़ेद पानी के साथ ब्लड आना भी बैक्टेरियल व यीस्ट इन्फेक्शन का लक्षण हो सकता है।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले स्त्राव का कारण व किस रंग के स्त्राव को अनदेखा नहीं करना चाहिए उससे जुड़े कुछ टिप्स। यदि आप भी माँ बनने वाली हैं तो आपको भी इन लक्षणों को अनदेखा नहीं करना चाहिए और डॉक्टर से मिलना चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान प्रेग्नेंट महिला व गर्भ में पल शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

ऑनलाइन डेटिंग से यूं रहे सावधान

सोशल मीडिया के कारण आज कल डेटिंग करने के तरीके में भी बहुत बड़ा बदलाव आया है, साथ ही आज का युवा वर्ग नेटवर्किंग पर पहले की अपेक्षा अधिक समय भी बिताने लग गया है, और वो नए दोस्त बनाने के लिए, गर्ल फ्रेंड या बॉयफ्रेंड बनाने के लिए भी इसी का सहारा ले रहे हैं, सोशल मीडिया भी आज कल इसे काफी बढ़ावा दे रही है, बहुत सी ऐसी वेबसाइट हैं जो ऑनलाइन डेटिंग को बढ़ावा दे रहीं हैं, जिसकी वजह से आप बिना देखे किसी को जाने पहचाने बिना ही आप अपने पार्टनर की तलाश कर सकते है, और उसके बाद ऑनलाइन डेटिंग स्टार्ट हो जाती हैं हम ये नहीं कह रहे है की आप ऐसा करे या न करें, लेकिन आपको ऑनलाइन डेटिंग करने से पहले इसके बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए और इस पर आई डी बनाने वाले लोग आपसे कौन कौन से झूठ बोलते है इस बारे में भी आपको पता होना चाहिए, साथ ही आपको ऑनलाइन डेटिंग करते समय कौन कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए आइये जानते हैं।

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ऑनलाइन डेटिंग करते समय लोग क्या क्या झूठ बोते है:-

उम्र छुपाते हैं:-

जब आप सोशल मीडिया पर किसी को डेट करते हैं तो आप उसके बारे में जानते नहीं हैं, ऐसे में लड़का हो चाहे लड़की वो अपनी उम्र के बारे में कभी भी आपको सही नहीं बताते हैं, और इसे सही दिखाने के लिए कई बार वो किसी और की फोटो डालते हैं, या स्पेशल इफ़ेक्ट से अपने लुक्स को अट्रैक्टिव बनाते हैं।

परिवार को लेकर भावनात्मक होकर दिखाना:-

लड़का या लड़की दोनों ही एक दूसरे को अपनी तरफ अट्रैक्ट करने के लिए अपने परिवार को लेकर भावनात्मक बातें करते है, जिससे कई लोग तो इमोशनल होकर धोखा भी खाते हैं, इसीलिए ऐसी बातों में नहीं आना चाहिए।

अपने सोशल मीडिया अकाउंट में कम तस्वीरों को डालना:-

फेक लोगो की पहचान करने का एक तरीके ये है की वो लोग अपने अकाउंट को अपडेट करने में बहुत स्लो होते हैं, साथ ही बहुत कम ऑनलाइन डेटिंग के समय ऐसे होते है जो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अधिक एक्टिव रहते हैं।

खुद की तारीफ़ करना:-

ऑनलाइन डेटिंग के समय लोग कभी भी अपनी पर्सनैल्टी के बारे में नहीं बताते है, हमेशा अपनी पर्सनैल्टी और लुक की तारीफ़ करते हैं साथ ही हमेशा अपने आप को दूसरों की पसंद बताते है, यदि आपके साथ चैट कर रहा व्यक्ति या लड़की भी ऐसी हैं तो आपको सावधान रहने की जरुरत होती है।

मीठी बातें करते हैं:-

चाहे वो लड़का हो या लड़की हर किसी मो अपनी तारीफ़ सुनना बहुत पसंद होता है, इसीलिए लड़का लड़की को और लडकियां लड़को को टारगेट करने के लिए ऑनलाइन डेटिंग में बातें करते हुए मीठे बोलने का अहारा लेती है ताकि वो अपने टारगेट को आसानी से अपनी और खींच सकें।

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अपने आप को दुखी बताते हैं:-

आप खुद ही सोचोये की एक बार जब कोई आप अपना दुःख बताता है तो आप भी समझ नहीं पाते हैं की वो झूठ बोल रहा है या सच, और ऑनलाइन डेटिंग को सफल बनाने के लिए सबसे पहले लोग सामने वाले को इमोशनल करके अपनी और खींचने की कोशिश करते हैं।

अपने बारे में इम्प्रेसिव बातें करके:-

लड़के अक्सर लड़कियों को को अपनी और आकर्षित करने के लिए अपने आप को दिखाते हैं की वो बहुत इम्प्रेसिव जॉब करते हैं, उनके पास बहुत पैसा है ऐसी गाडी है, इसे सुनकर लडकियां बहुत आसानी से लड़को की तरफ आकर्षित हो जाती है।

ऑनलाइन डेटिंग करते समय रखें इन बातों का ध्यान रखें:-

पैसों के बारे में न बताएं:-

ऑनलाइन डेटिंग करते समय खासकर लड़को की यह आदत होती है की लड़की को इम्प्रेस करने के लिए वो अपने आप को आमिर दिखाते हैं, और हमेशा पैसों की बात करते हैं, यदि कोई लड़का ऐसा करता है तो हो सकें उसे क्विट कर दें, या फिर यदि कोई लड़की हमेशा आपसे आपके बैलेंस के बारे में बातें करती है, तो लड़को को उन लड़कियों से सावधान रहना चाहिए क्योंकि ऑनलाइन डेटिंग पर सबसे बड़ा फ्रॉड पैसो को लेकर ही होता है।

सुनसान जगह पर मिलने न जाएँ:-

कभी ऐसा होता है की आपका चैट आगे बढ़ता है और बात मिलने तक पहुँचती है तो ऐसे में आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए चाहे फिर वो लड़का हो या लड़की किसी सुनसान जगह पर न जाएँ, ऐसी जगह पर मिलने का प्रोग्राम बनाएं जहां आप सेफ भी हो, और यदि आपको कोई परेशानी हो तो आसानी से आप उसका समाधान भी कर सकें, इसीलिए जितना हो सुसान और बैकवर्ड जगह का चयन न करें।

पर्सनल बातें कभी भी शेयर न करें:-

ऑनलाइन चैट को आप मनोरंजन का साधन भी बोल सकते हैं ऐसे में आपको अपने ऑनलाइन पार्टनर को कभी भी अपनी पर्सनल बातें नहीं बतानी चाहिए, जैसे की आप कहाँ रहते है, आपके पापा का क्या नाम है, आप क्या काम करते है, या कौन सी कंपनी में लगे हुए हैं, यहां तक की अपने परिवार या अपने दोस्त से जुडी किसी भी तरह की इनफार्मेशन को शेयर नहीं करना चाहिए।

जल्दी न करें:-

ऐसे भी कुछ लोग होते हैं जो ऑनलाइन चैट करने में जल्दी करते हैं और सब कुछ बता देते हैं, और अपने दायरे से बाहर निकल कर चैट करने लगते हैं, और बाद में यही उनके लिए मुसीबत बन जाती है, क्योंकि वो आपके द्वारा दी गई इनफार्मेशन और चैट को लेकर आपको बाद में ब्लैकमेल करने लगते हैं, और आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

अपना फोटो शेयर न करें:-

यदि आप ऑनलाइन चैट करते भी हैं तो सावधान रहने के लिए कभी भी आपको अपना ओरिजिनल फोटो भी शेयर नहीं करना चाहिए, आप उनका चेहरा तभी देखें जब आप मिलने जाते हैं, क्योंकि कई लोग इतने शातिर भी होते हैं की आपके फोटो से ही आपकी सभी इनफार्मेशन निकालकर आपको ब्लैकमेल भी कर सकते हैं, इसीलिए हो सकें तो आपको इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

तो ये हैं कुछ बातें जिनका ध्यान आपको ऑनलाइन चैट करते समय रखना चाहिए, और साथ ही सतर्क भी रहना चाहिए ताकि आपको ऑनलाइन मिलने वाले धोखे से बचाव करने में मदद मिल सकें।

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जब पेट में हमेशा दर्द हो तो ये करें

गर्भावस्था के दौरान महिला को बहुत से शारीरिक, भावनात्मक व मानसिक रूप से बदलाव का अनुभव हो सकता है। साथ ही इस दौरान महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का अनुभव भी हो सकता है। जैसे की उल्टी की समस्या, मॉर्निंग सिकनेस, बॉडी में दर्द महसूस होना, थकान व कमजोरी की समस्या होना, पेट व पीठ में दर्द की समस्या होना, आदि।

ऐसे में थोड़ी बहुत परेशानी का अनुभव सभी गर्भवती महिलाओं को होता है लेकिन यदि परेशानी ज्यादा हो तो इसे प्रेग्नेंट महिला को अनदेखा नहीं करना चाहिए। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी के दौरान पेट में दर्द की समस्या के बारे में बात करने जा रहे हैं। गर्भावस्था के दौरान पेट दर्द की समस्या होने पर महिला के मन में तुरंत यही विचार आता है की कहीं गर्भ में उसके बच्चे को तो कुछ नहीं हो गया है।

जबकि प्रेगनेंसी के दौरान हल्का फुल्का पेट में दर्द होना आम बात होती है। और इसे लेकर प्रेग्नेंट महिला को घबराने की जरुरत नहीं होती है। लेकिन यदि पेट में दर्द ज्यादा हो और धीरे धीरे बढ़ रहा हो तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए, क्योंकि पेट में अधिक दर्द परेशानी का कारण होता है। तो आइये अब जानते हैं प्रेगनेंसी में पेट दर्द के क्या कारण होते हैं।

प्रेगनेंसी में पेट में दर्द होने के कारण

  • पाचन तंत्र से जुडी समस्या होने के कारण जैसे की कब्ज़, पेट गैस आदि।
  • प्रेग्नेंट महिला यदि अपने आहार समय से नहीं लेती है लम्बे समय तक भूखी रहती है तो इस कारण पेट में गैस बनने लगती है जिस कारण महिला को पेट में दर्द होता है।
  • शिशु का भार नीचे की तरफ होने के कारण, जिसके कारण पेट के आस पास की मांसपेशियों में खिंचाव महसूस हो सकता है और महिला को दर्द का अनुभव होता है।
  • प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में पेट में यदि अधिक दर्द महसूस हो रहा है तो यह गर्भपात का लक्षण हो सकता है।
  • यदि प्रेग्नेंट महिला को एक्टोपिक प्रेगनेंसी है यानी की गर्भाशय की जगह शिशु का विकास फैलोपियन ट्यूब या कहीं और हो रहा है।
  • शिशु के अधिक मूव करने के कारण प्रेग्नेंट महिला को हल्का फुल्का पेट में दर्द का अहसास हो सकता है।

प्रेगनेंसी में पेट में दर्द की समस्या से निजात पाने के टिप्स

यदि आप माँ बनने वाली हैं तो प्रेगनेंसी के दौरान छोटी छोटी शारीरिक परेशानियों के कारण आपको अधिक टेंशन लेने की जरुरत नहीं है। बल्कि आपको उस समस्या से निजात कैसे पाया जाए इस बारे में सोचना चाहिए। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में पेट में दर्द से निजात पाने के लिए प्रेग्नेंट महिला क्या कर सकती है।

फाइबर युक्त आहार लें

गर्भावस्था के दौरान बॉडी में प्रोजेस्ट्रोन हॉर्मोन का स्तर बढ़ने के कारण व वजन बढ़ने के कारण पाचन क्रिया धीमी पड़ सकती है। जिसके कारण खाने को अच्छे से हज़म करने में प्रेग्नेंट महिला को दिक्कत हो सकती है। और खाने के अच्छे से हज़म न होने के कारण महिला को कब्ज़, पेट में गैस, भूख में कमी, पेट दर्द जैसी समस्या हो जाती है।

ऐसे में इस समस्या से निजात पाने के लिए महिला को अपनी डाइट में फाइबर युक्त चीजें जैसे की निम्बू, हरी सब्जियों, संतरा, आदि का सेवन करना चाहिए। क्योंकि इससे महिला की पाचन क्रिया को बेहतर होने में मदद मिलती है और खाने को हज़म करने में महिला को परेशानी नहीं होती है। जिससे पाचन तंत्र के कमजोर होने के कारण होने वाले पेट दर्द से महिला को निजात पाने में मदद मिलती है।

थोड़ा थोड़ा करके खाएं

एक ही बार में पेट भर कर खा लेने से प्रेग्नेंट महिला को भोजन को पचाने में समस्या हो सकती है क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान पाचन क्रिया कमजोर हो जाती है। ऐसे में पेट में दर्द व पेट में गैस की समस्या से महिला परेशान हो सकती है साथ ही महिला को खट्टी डकार, सीने में जलन जैसी परेशानी भी अधिक महसूस होती है। लेकिन थोड़ा थोड़ा करके खाने से भोजन को पचाने में आसानी होती है जिससे महिला को पेट दर्द से निजात पाने में मदद मिलती है।

हाइड्रेट रहें

यदि प्रेग्नेंट महिला के शरीर में पानी की कमी होती है तो भी महिला को पेट में दर्द के साथ बॉडी के अन्य पार्ट्स में दर्द की समस्या हो सकती है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला हाइड्रेट रहती है यानी पानी व अन्य तरल पदार्थों का सेवन भरपूर मात्रा में करती है। तो ऐसा करने से गर्भवती महिला को पेट दर्द की परेशानी से निजात मिलता है।

बेल्ट का इस्तेमाल करें

पेट के निचले हिस्से पर भार अधिक होने के कारण मांसपेशियों में खिंचाव बढ़ जाता है जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला को पेट में हल्का फुल्का दर्द होता रहता है। ऐसे में मैटरनिटी बेल्ट का इस्तेमाल प्रेग्नेंट महिला को करना चाहिए। क्योंकि इस बेल्ट को पेट पर बाँधने से प्रेग्नेंट महिला को पेट दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

आराम करें

गर्भावस्था के दौरान काम अधिक करने के कारण भी महिला को पेट में दर्द महसूस होता है ऐसे में आपको इस समस्या से बचने के लिए भरपूर आराम करना चाहिए। ताकि आपको इस परेशानी से बचने में मदद मिल सके। इसके अलावा सीढ़ियां चढ़ना, बहुत अधिक एक ही जगह पर भी महिला को नहीं खड़े होना चाहिए क्योंकि इससे भी महिला को पेट में हलके दर्द का अहसास हो सकता है।

हल्का व्यायाम करें

प्रेगनेंसी के दौरान सारा दिन केवल आराम करने से भी प्रेग्नेंट महिला को यह परेशानी हो सकती है। ऐसे में महिला को हल्का फुल्का व्यायाम भी करना चाहिए इससे बॉडी को एक्टिव रहने में मदद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला को पेट दर्द के साथ बॉडी के अन्य पार्ट्स में महसूस होने वाले दर्द से भी आराम मिलता है। लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है की आप भारी वजन उठायें या बहुत अधिक व्यायाम करें।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिन्हे ट्राई करने से प्रेग्नेंट महिला को पेट में दर्द की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। लेकिन यदि पेट में दर्द बढ़ जाये तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

कैस्टर ऑयल के फायदे

कैस्टर ऑयल को अरंडी के तेल के नाम से भी जाना जाता है। यह तेल औषधीय गुणों से भरपूर होता है जो आपके स्वास्थ्य को फिट रखने के साथ आपकी स्किन व् बालों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। कैस्टर ऑयल का इस्तेमाल दवाइयों को बनाने के लिए भी किया जाता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की कैस्टर ऑयल से आपको कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

मुहांसे से मिलता है निजात

यदि आप चेहरे पर मुहांसे की समस्या से बहुत परेशान रहती है। तो ऐसे में आप रात को सोने से पहले गुनगुने पानी से अपने चेहरे को धोएं और चेहरे पर पर अरंडी का तेल लगाकर हलकी मालिश करें और सो जाएँ। उसके बाद सुबह उठकर ठन्डे पानी से अपने चेहरे को धो लें। ऐसा हफ्ते में दो तीन बार करें।

स्किन की कोमलता रहती है बरकरार

स्किन का रुखा व् बेजान होना बहुत बड़ी समस्या होती है क्योंकि इसके कारण खुजली जैसी परेशानी भी हो सकती है। ऐसे में कैस्टर ऑयल का इस्तेमाल करके आप इस परेशानी से निजात पा सकते हैं। इसके लिए आप रोजाना नहाने से आधे घंटे पहले अपनी स्किन की कैस्टर ऑयल से मसाज करें। और फिर नहा लें, यह आपकी स्किन के लिए मॉइस्चराइजर का काम करता है। जिससे स्किन की कोमलता को बरकरार रहने में मदद मिलती है।

दाग धब्बे होते हैं दूर

कैस्टर ऑयल में मौजूद फैटी एसिड चेहरे पर होने वाले दाग धब्बे की समस्या से भी आपको निजात दिलाते हैं। इसके लिए आप कैस्टर ऑयल को रात को सोने से पहले अपने दाग धब्बों पर लगाएं। और सुबह उठकर चेहरे को साफ़ पानी से धो लें।

त्वचा को रखें जवान

अरंडी के तेल का इस्तेमाल करने से आपको अपनी स्किन को हमेशा जवान रखने में मदद मिलती है। क्योंकि यह स्किन पर होने वाली झुर्रियों की समस्या से, फाइन लाइन्स को रोकने में मदद करता है। इसके लिए आपको रोजाना रात को सोने पहले चेहरे को धोना हैं ताकि चेहरे पर जमी धूल मिट्टी साफ़ हो जाए। उसके बाद स्किन पर ऑयल से मसाज करके रात भर के लिए छोड़ दें। उसके बाद सुबह उठकर अपने चेहरे को साफ़ कर दें।

डार्क सर्कल होते हैं दूर

यदि आपको डार्क सर्कल की समस्या है तो रोजाना आँखों के निचले हिस्से पर कैस्टर ऑयल से मसाज करने पर आपको इस परेशानी से निजात मिलता है।

होंठो को बनाएं कोमल

फटे होंठों की समस्या से बचने के लिए भी आप कैस्टर ऑयल का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आप अपने होंठों पर कैस्टर ऑयल लगाएं। आपको इस फायदा जरूर दिखाई देगा।

स्ट्रेचमार्क्स से निजात

प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को स्ट्रेचमार्क्स की समस्या होती है। लेकिन कैस्टर ऑयल का इस्तेमाल करने से गर्भावस्था में आपको इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सकती है। साथ ही यदि आपको स्ट्रेचमार्क्स की समस्या है तो आप रोजाना उस जगह पर मसाज करें आपको बहुत जल्दी इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

लम्बे बालों के लिए

कैस्टर ऑयल का इस्तेमाल करने से बालों को लम्बा करने में भी मदद मिलती है। क्योंकि जब आप इस ऑयल से सिर की और बालों की मसाज करते हैं तो इससे बालों के लिए जरुरी फैटी एसिड मिलते हैं। साथ ही सिर में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है। कैस्टर ऑयल का इस्तेमाल करने से बालों को लम्बा करने के साथ डैंड्रफ, खुजली जैसी परेशानी से भी निजात पाने में मदद मिलती है।

सफ़ेद बालों से निजात

यदि आपके बाल समय से पहले सफ़ेद हो रहे हैं तो हफ्ते में दो से तीन बार अच्छे से सिर की मसाज अरंडी के तेल से करें। ऐसा करने से सफ़ेद बालों को काला करने में मदद मिलती है।

आइब्रो की ग्रोथ

यदि आपकी आइब्रो की ग्रोथ बहुत कम है तो रोजाना कैस्टर ऑयल से आइब्रो की मसाज करें। धीरे धीरे आपकी आइब्रो को घना करने में फायदा मिलेगा।

कब्ज़ से मिलता है निजात

यदि आप कब्ज़ की समस्या से बहुत परेशान हैं तो आपको आधा चम्मच कैस्टर ऑयल पीना चाहिए। ऐसा करने से कब्ज़ से राहत पाने में मदद मिलती है। प्रेग्नेंट महिला व् बच्चे को कैस्टर ऑयल का सेवन नहीं करना चाहिए।

सूजन और दर्द

यदि आपको सूजन व् दर्द की समस्या है तो भी कैस्टर ऑयल का इस्तेमाल आपके लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसके इस्तेमाल के लिए आप प्रभावित जगह पर ऑयल को थोड़ा गुनगुना करके मसाज करें। और ऐसा दिन में दो से तीन बार करें ताकि आपको इसका फायदा मिल सके।

घाव

एंटीसेप्टिक गुणों से भरपूर अरंडी का तेल घाव आदि को भरने में भी फायदेमंद होता है। या फिर आपको कोई चोट लगती है तो उस जगह पर अरंडी का तेल लगाने से भी फायदा मिलता है।

प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है

रोजाना कैस्टर ऑयल से बॉडी की मसाज करने से शरीर की कोशिकाओं को मजबूत होने के साथ कोशिकाओं की संख्या को बढ़ाने में भी मदद मिलती है। जिससे आपकी रोगो से लड़ने की क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलती है।

गठिया का इलाज

कैस्टर ऑयल का इस्तेमाल करने से गठिया के रोगियों को आराम पाने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप एक सूती कपडे को अरंडी के तेल में भिगोएं। और फिर उसे निचोड़ कर उस जगह पर बांधे जहां आपको सबसे ज्यादा दर्द की समस्या होती है। उसके बाद गर्म पानी बोतल में डालकर या हीटिंग पैड का इस्तेमाल करके सिकाई करें। ऐसा रोजाना करें आपको बहुत जल्दी गठिया की परेशानी से निजात पाने में मदद मिलेगी।

पीठ दर्द से निजात

पीठ दर्द के इलाज के लिए आप कैस्टर ऑयल को अपनी पीठ पर लगाएं। उसके बादपीठ को साफ व मुलायम कपड़े से ढक दें। उसके बाद पीठ पर गर्म पानी की बोतल या हीटिंग पैड रखें। दो से तीन दिन दिन तक ऐसा रोजाना करें। आपको इस दर्द में राहत ज़रूर मिलेगी।

वजन करता है नियंत्रित

यदि आप बढ़ते वजन या मोटापे की समस्या से परेशान हैं। तो वजन कम करने के लिए आप सुबह खाली पेट एक चम्मच कैस्टर ऑयल का सेवन करें। थोड़े ही दिन में आपको इसका असर साफ़ दिखाई देगा।

बच्चों के लिए भी है कैस्टर ऑयल फायदेमंद

केवल बड़ो के लिए ही नहीं बल्कि बच्चों के लिए कैस्टर ऑयल का इस्तेमाल करने से भी फायदा मिलता है। जैसे की:

  • अरंडी के तेल का इस्तेमाल करने से बच्चों की स्किन को को कोमल बनाने में मदद मिलती है।
  • डाइपर पहनाने पर या किसी अन्य कारण की वजह से बच्चे को रैशेस हो जाते हैं तो उसे ठीक करने में मदद मिलती है।
  • बच्चे के पेट पर ऑयल से मसाज करने पर गैस, कब्ज़ जैसी परेशानी से बच्चे को निजात मिलता है।
  • बच्चे के बालों को घना व् सूंदर बने रहने में मदद मिलती है।
  • कैस्टर ऑयल से बच्चे की मसाज करने पर बच्चे की मांसपेशियों को आराम मिलता है।

तो यह हैं कुछ बेहतरीन फायदे जो कैस्टर ऑयल से आपको मिलते हैं। ऐसे में आप भी चाहे तो इन बेहतरीन फायदों के लिए कैस्टर ऑयल का इस्तेमाल कर सकते हैं।

एक स्वस्थ शिशु को जन्म देने के लिए एक से तीन महीने के बाद ये करें

एक स्वस्थ शिशु को जन्म देने के लिए टिप्स, गर्भ में पल रहे शिशु की बेहतर केयर के लिए टिप्स, हैल्दी शिशु के जन्म के लिए टिप्स, एक स्वस्थ शिशु को जन्म देने के लिए एक से तीन महीने के बाद ये करें

प्रेगनेंसी के समय एक से तीन महीने महिला के लिए बहुत ज्यादा अहम होते है, इसीलिए महिला को बहुत ज्यादा अपना ध्यान रखना पड़ता है। क्योंकि इस समय तेजी से बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को शारीरिक परेशानी अधिक होने के साथ इस दौरान की गई थोड़ी सी भी लापरवाही के कारण गर्भपात के चांस लगातार बने रहते हैं। लेकिन तीन महीने के बाद महिला थोड़ा आराम महसूस करती है। ऐसे में महिला को प्रेगनेंसी के तीसरे महीने के बाद अपनी केयर का और अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। तो आइये जानते हैं की प्रेगनेंसी के तीसरे महीने के बाद महिला को किन किन बातों का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

खान पान

तेजी से हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण मुँह का स्वाद भी कड़वा होने लगता है, लेकिन तीसरे महीने के बाद शिशु के विकास के लिए महिला का खान पान बेहतर होना बहुत जरुरी होता है। ऐसे में महिला को थोड़े थोड़े समय के बाद कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए। और ऐसा आहार लेना चाहिए जिसमे पोषक तत्व भरपूर हो जिससे महीने को स्वस्थ रहने के साथ शिशु को बेहतर पोषण देने में मदद मिल सके। इसके अलावा कुछ महिलाओं को उल्टी की समस्या भी रहती है और इस डर के कारण खाना न छोड़ें, बल्कि उल्टी करने के थोड़ी देर बाद फिर कुछ न कुछ खाएं।

हल्का व्यायाम

आपको थोड़ा वॉक, व्यायाम आदि प्रेगनेंसी के समय करते रहना चाहिए। और हो सके तो इसके लिए एक बार डॉक्टर या जिम ट्रेनर की राय लेनी चाहिए। क्योंकि आपको इस समय ऐसा व्यायाम करना चाहिए जिससे गर्भवती महिला के स्वस्थ रहने के साथ शिशु पर किसी भी तरह का बुरा प्रभाव न पड़े।

तनाव न लें

स्ट्रेस यदि गर्भवती महिला लेती है तो इसका बहुत बुरा असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है। ऐसे में गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास के लिए आपको तनाव लेने से बचना चाहिए। और जितना हो सकें प्रेगनेंसी में होने वाले हर नए अनुभव का मज़ा लेते हुए खुश रहना चाहिए।

पानी का भरपूर सेवन

पानी ने केवल बॉडी में एनर्जी को भरपूर रखने में मदद करता है बल्कि का सेवन करने से प्रेगनेंसी में महिला की बहुत सी परेशानियों का समाधान होने में मदद मिलती है। साथ ही गर्भशय में शिशु के लिए भी पानी का भरपूर होना बहुत जरुरी होता है इसीलिए एक दिन में आठ से दस गिलास पानी पीने के साथ आपको जूस आदि का भी सेवन करना चाहिए।

आयरन भरपूर लें

बहुत सी महिलाओं को खून की कमी के कारण डिलीवरी के समय बहुत ज्यादा परेशानी का अनुभव करना पड़ता है। साथ ही इसका शिशु के पोषण पर भी असर पड़ता है क्योंकि यदि महिला के शरीर में खून की कमी होती है तो गर्भ में पल रहा शिशु भी इससे प्रभावित होता है। इसीलिए बॉडी में खून की कमी को पूरा करने के लिए आपको आयरन का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए।

भरपूर नींद

भरपूर नींद लेने से गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान आराम महसूस होता है, और यदि महिला फ्रेश महसूस करती है तो इससे शिशु को भी एक्टिव रहने में मदद मिलती है। साथ ही महिला को सोने तरीके को भी देखना चाहिए क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान बायीं तरफ करवट करके सोना सबसे उत्तम तरीका होता है।

प्रदूषण से बचाव

प्रेगनेंसी के समय महिला को उन स्थानों पर जाने से बचना चाहिए जहां अधिक भीड़भाड़ या प्रदूषण होता है। क्योंकि इसके कारण वायरल इन्फेशन फैलने का खतरा रहता है जिससे शिशु के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ता है और शिशु की विकलांग होने तक का खतरा रहता है।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका प्रेगनेंसी में एक से तीन महीने के बाद महिला को जरूर ध्यान रखना चाहिए इससे प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है।

चेहरा साफ़ कैसे करें?

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सुंदर, आकर्षक और साफ़ सुथरी त्वचा हर किसी की चाह होती है। लेकिन लगातार बढ़ते प्रदुषण और भाग दौड के चलते स्किन पर ग्लो और चमक बनाए रखना काफी मुश्किल हो जाता है। लेकिन इस तरह की स्किन के साथ रहना भी आसान नहीं। क्योंकि आजकल हर जगह व्यक्ति की पर्सनालिटी देखकर ही उन्हें जॉब दी जाती है। ऐसे में अगर आपका फेस थका हुआ और साफ़ सुथरा नहीं होगा तो इसका प्रभाव आपकी पर्सनालिटी पर ही पड़ेगा।

ऐसे तो बाजार में ढेरों ऐसे प्रोडक्ट और फेस वाश मौजूद है जो स्किन की भीतरी सफाई करने का दावा करते है लेकिन उनमे से कोई भी अपने इस कार्य में सफल नहीं होता। इस स्थिति में घरेलू उत्पादों का प्रयोग करना ही एकमात्र सुरक्षित और आसान उपाय है।

इनकी मदद से आप बिना किसी परेशानी और हानिकारक परिणामों के अपनी स्किन को भीतरी रूप से साफ़ कर सकती है। और सबसे बड़ी बात इनके लिए आपको बहुत से पैसे खर्च करने की भी आवश्यकता नहीं है। क्योंकि गन्दा चेहरा न केवल खुद को अजीब लगता है बल्कि देखने वाले को भी अजीब लगता है। ऐसे में उसे साफ़ सुथरा रखना और भी जरुरी हो जाता है। आज हम आपको ऐसे ही कुछ उपायों के बारे में बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप अपने चेहरे को घरेलू तरीकों से साफ़ कर सकती है। तो आइये जानते है चेहरे को साफ़ करने के घरेलू उपाय!

चेहरे को साफ़ कैसे करें?

चेहरे को साफ़ रखने के लिए क्या करें?

1. चेहरे को धोएं :बिना साबुन के चेहरा साफ कैसे करें

अगर आप अपने चेहरे को हर टाइम साफ़ सुथरा रखना चेहते है तो दिन में कम से कम २ से 3 बार अपने फेस को अच्छी तरह से साफ़ करें। इसके लिए आप फेस वाश की मदद भी ले सकती है। लेकिन एक बात का ध्यान रखें फेस वाश आपकी स्किन को सूट करता हुआ होना चाहिए। और अच्छी क्वालिटी का होना चाहिए ताकि उसके कोई हानिकारक दुष्परिणाम न आये।

2. साबुन का प्रयोग :

चेहरे को साफ़ करने के लिए कभी भी साबुन का प्रयोग न करें। ये आपकी स्किन से नमी छीनकर उसे ड्राई बना देता है। जिससे वह अजीब और फटी फटी दिखने लगती है। ऐसे तो आजकल बहुत से ब्रांड के साबुन मौजूद है जिनका चेहरे पर प्रयोग किया जा सकता है। लेकिन फिर भी अगर आप फेस वाश और साबुन में से किसी एक को चुनती है तो उसमे फेस वाश ही बेहतर रहेगा।

3. नारियल तेल :कपूर और नारियल तेल

नारियल तेल हमारी स्किन के लिए बहुत लाभकारी होता है। जानकारी के लिये, बता दें बहुत सी ऐसी कॉस्मेटिक क्रीम्स है जिनमे नारियल आयल को मुख्य सामग्री के रूप में प्रयोग किया जाता है। ये न केवल हमारी स्किन को साफ़ करता है अपितु उसे मुलायम बनाकर चमकदार बनाने में भी मदद करता है। नारियल तेल में कई एंटी बैक्टीरियल गुण भी पाए जाते है जो स्किन से सभी कीटाणुओं को दूर करने में भी मदद करता है।

4. आलू के रस का प्रयोग :

स्किन को साफ़ सुथरा और गोरा बनाने के लिए आलू का रस एक बेहतर घरेलू उपाय है। इसके लिए कच्चे आलू के रस को स्किन पर लगाएं। ये डार्क पैचेज को दूर करने के साथ साथ सनबर्न की समस्या भी दूर करता है। साथ ही डार्क सर्कल्स पर भी काफी असरदार है इसके नियमित प्रयोग से आप अपनी स्किन में एक नया ग्लो देख सकती है।

5. पालक :

पालक इन पौष्टिक आहारों में से एक है जिसका सेवन करने से त्वचा और स्वास्थ्य संबंधी कई बिमारियों को छू मंतर किया जा सकता है। दरअसल इसमें विटामिन बी. सी, इ, पोटैशियम, आयरन आदि पोषक तत्व पाए जाते है। साथ ही इसमें फलते भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है। ये स्वास्थ्य तो ठीक करता ही है साथ साथ स्किन को जवान बनाए रखने में भी मदद करता है।

6. नींबू का रस :

नींबू के रस में विटामिन सी की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो स्किन में मौजूद सभी गंदगी को साफ़ करने में मदद करता है। इसके लिए नींबू के रस में दूध पाउडर और हल्दी मिलाकर एक पेस्ट तैयार कर लें। अब इस पेस्ट को 10 मिनट के लिए अपनी स्किन पर लगाएं। 10 मिनट बाद ठंडे पानी से धोकर साफ़ कर लें। यह आपके फेस पर ग्लो लाने के साथ साथ उसे साफ़ करने में भी मदद करेगा।

7. ड्राई फ्रूट्स :dry fruit 1

बादाम, अखरोट जैसे ड्राई फ्रूट्स स्किन के लिए बहुत लाभकारी होते है। इनकी मदद से त्वचा चिकनी होती है और साथ ही बाल भी मजबूत होते है। इसके अलावा इनमे ओमेगा 3 फैटी एसिड और विटामिन E पाया जाता है। जो त्वचा को पोषण देकर उनमे नमी बनाए रखते है।

8. ठंडे या गुनगने पानी से चेहरा धोएं :

आप रोजाना अपने चेहरे को ठंडे या गुनगुने पानी से धोएं। ध्यान रखें पाने ज्यादा गर्म न हो अन्यथा स्किन को नुकसान पहुंच सकता है। चेहरे को धोने से पहले उसमे उंगली डालकर चेक कर लें जब वह सहने लायक हो तभी प्रयोग करें।

9. टमाटर :

टमाटर में lycopene नामक तत्व पाया जाता है जो स्किन को जलन और UV किरणों से होने वलए नुकसान को ठीक करने में मदद करता है। इसके लिए टमाटर को ब्लैंड करके अपने फेस पर लगाएं। यह आपके लिए बहुत लाभकारी होगा।

10. पानी :

रोज़ अधिक से अधिक पानी पीएं। पानी पीने से त्वचा में चमक आती है। अगर आप वाकई अपने चेहरे को आकर्षित बनाना चाहती है तो रोजाना कम से कम 8 से 10 ग्लास पानी का सेवन करें।

प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने कोई दिक्कत नहीं होगी रखें इन 10 टिप्स का ध्यान

गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर ले लगातार हार्मोनल बदलाव होते हैं। जिसके कारण महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही कुछ महिलाएं मानसिक रूप से भी प्रेगनेंसी के दौरान परेशान होती है। लेकिन यदि प्रेगनेंसी के दौरान कुछ टिप्स का ध्यान रखा जाए तो गर्भवती महिला को इन सभी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है। तो आइये इस आर्टिकल में गर्भवती महिलाओं के लिए ऐसे 10 टिप्स बताने जा रहे हैं। जिनका ध्यान रखने से प्रेग्नेंट महिला को पूरे नौ महीने स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

डॉक्टर से करवाए समय पर जांच

गर्भावस्था की शुरुआत से ही प्रेग्नेंट महिला को अपने के लिए एक अच्छे डॉक्टर का चुनाव करना चाहिए। साथ ही अपने सभी टेस्ट, जांच, टीकाकरण, रूटीन चेकअप समय से करवाना चाहिए। ऐसा करने से प्रेगनेंसी में यदि कोई दिक्कत भी होती है तो उसका पता चलते ही इलाज भी हो जाता है। जिससे प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स से बचे रहने में मदद मिलती है। और प्रेगनेंसी में फिट रहने के लिए महिला को पूरे नौ महीने तक इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

प्रीनेटल विटामिन्स लेने में न करें लापरवाही

प्रेगनेंसी के समय डॉक्टर्स प्रेग्नेंट महिला को कुछ विटामिन्स लेने की सलाह देते हैं। यह विटामिन्स शरीर में पोषक तत्वों की मात्रा को सही रखने में मदद करते हैं। गर्भवती महिला को उन सभी विटामिन्स को समय से लेना चाहिए।

अपने आहार का रखें खास ध्यान

यदि प्रेग्नेंट महिला चाहती है प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने महिला फिट रहे और बच्चे का विकास भी बेहतर हो। तो इसके लिए महिला को अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान रखना बहुत जरुरी है। जैसे की पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करें, सही समय पर अपना आहार लें, जरुरत से ज्यादा न खाएं, जिन चीजों को खाने से आपको दिक्कत होती है उन्हें खाने से बचें , ठन्डे बासी आहार का सेवन न करें, हर दो से तीन घंटे में कुछ न कुछ जरूर खाएं, आदि। ऐसे ही खान पान से जुड़े कुछ टिप्स का ध्यान रखने से आपको प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

हाइड्रेटेड रहें

ठोस आहार लेने के साथ प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने के लिए महिला को तरल पदार्थों का भी भरपूर सेवन करना चाहिए। गर्भवती महिला को दिन में आठ से दस गिलास पानी पीने के साथ, जूस, नारियल पानी व् अन्य तरल पदार्थों का भी भरपूर सेवन करना चाहिए।

कोई भी ऐसा काम न करें जिससे आपको परेशानी हो

गर्भावस्था के दौरान आप फिट रहे तो इसके लिए आपको ऐसा कोई भी काम नहीं करना चाहिए जिससे आपको परेशानी हो। जैसे की केमिकल युक्त चीजों के इस्तेमाल से बचे, ट्रैवेलिंग से बचें, भरी सामान न उठाएं, उल्टा होकर न सोएं, सीढिया अधिक न चढ़ें, ज्यादा देर एक ही पोजीशन में न रहे, आदि।

शरीर में खून की कमी न होने दें

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में अधिक खून की जरुरत होती है और यदि गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी हो तो इसके कारण गर्भवती महिला को परेशानी हो सकती है। ऐसे में गर्भवती महिला को इस परेशानी से बचने के लिए आयरन युक्त चीजें जैसे की हरी सब्जियां, अनार, सेब आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए। ताकि शरीर में खून की कमी न हो और प्रेग्नेंट महिला को फिट रहने में मदद मिल सके।

टेंशन न लें अपनी प्रेगनेंसी को एन्जॉय करें

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले बदलाव, शारीरिक परेशानियों, दूसरों की नकारात्मक प्रेगनेंसी के एक्सपीरियंस सुनकर महिलाएं तनाव में आ जाती है। जिससे माँ व् बच्चे दोनों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है। लेकिन यदि आप चाहती है की आप प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने फिट रहें तो इसके लिए आपको किसी भी बात को लेकर टेंशन नहीं लेनी चाहिए और अपनी प्रेगनेंसी को अच्छे से एन्जॉय करना चाहिए।

मैडिटेशन, योगासन, व्यायाम करें

गर्भावस्था के दौरान फिट रहने के लिए आराम के साथ थोड़ा व्यायाम भी जरुरी है। और इसके लिए महिला दिन में थोड़ी देर सैर, मैडिटेशन, योगासन आदि कर सकती है। यदि प्रेग्नेंट महिला ऐसा करती है तो ऐसा करने से महिला को शारीरिक रूप से फिट रहने के साथ मानसिक रूप से भी फिट रहने में मदद मिलती है।

छोटी छोटी लापरवाहियों से बचें

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को फिट रहने के लिए अपनी छोटी छोटी हरकतों पर ध्यान देना चाहिए। जैसे की ज्यादा तेजी से नहीं चलना चाहिए, झुककर सामान नहीं उठाना चाहिए, यदि बाहर का खाने की इच्छा हो रही है तो जंक फ़ूड का सेवन नहीं करना चाहिए, खाना खाते ही सोना नहीं चाहिए, ज्यादा गुस्सा नहीं करना चाहिए, ज्यादा ठंडी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए, ज्यादा टाइट कपडे नहीं पहनने चाहिए, जूते चप्पल का ध्यान रखना चाहिए, आदि। यदि महिला इन सभी बातों का ध्यान रखती है तो महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

करें भरपूर आराम

प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने के लिए भरपूर आराम करना चाहिए। क्योंकि महिला जितना आराम करती है उतना ही प्रेग्नेंट महिला को फिट रहने में मदद मिलती है। सतह ही आराम करने से महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं वो टिप्स जिनका ध्यान रखने से प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन छोटी छोटी बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि आप भी अपनी प्रेगनेंसी में फिट और एक्टिव रहें।

जानिए गर्मियों में डिलीवरी अच्छी होती है या सर्दियों में

जानिए गर्मियों में डिलीवरी अच्छी होती है या सर्दियों में, किस माह में बेहतर होती है डिलीवरी, सर्दियों में डिलीवरी होनी चाहिए या गर्मियों में, डिलीवरी से जुड़े टिप्स

प्रसव के बाद महिला को भरपूर आराम करना चाहिए ताकि उसके शरीर में आई कमजोरी को दूर करने में मदद मिल सके। लेकिन क्या आप जानते हैं की सर्दियों में डिलीवरी होनी चाहिए या गर्मियों में? और किस मौसम में महिला को ज्यादा आराम मिलता हैं, इस सवाल का जवाब देना इतना आसान नहीं है, क्योंकि कुछ महिलाओं को सर्दी के दिन पसंद होते है, तो कुछ महिलाएं गर्मियों को बेहतर मानती है। परन्तु देखा जाये तो डिलीवरी का समय सर्दियों में सबसे सही होता है, क्योंकि सर्दियों में दिन छोटे होते हैं, साथ ही महिला को पूरा आराम भी मिलता है। जबकि गर्मियों में दिन बड़े होने के साथ पसीने के कारण महिला को ज्यादा परेशानी का अनुभव हो सकता है।

कब होनी चाहिए डिलीवरी

डिलीवरी के बाद महिला को ज्यादा से ज्यादा आराम करने की सलाह दी जाती है, लेकिन गर्मियों में दिन बड़े होने के कारण गर्मी होने के कारण सारा दिन आराम नहीं होता है। ऊपर से गर्मी होने के कारण शिशु को भी अधिक परेशानी हो सकती है। ऐसे में सर्दियों के दिनों में दिन भी छोटे होते हैं, और ठण्ड के कारण महिला का बिस्तर में से बाहर निकलने का भी मन नहीं करता है, और घर के सदस्य भी ठण्ड से नवजात और महिला को सुरक्षित रखने के लिए भरपूर आराम की सलाह देते हैं। जबकि गर्मियों में महिला उतनी बेहतर तरीके से आराम नहीं कर पाती है। ऐसे में यदि डिलीवरी के लिए सबसे सही समय की बात की जाये तो सर्दियों में डिलीवरी होना सही होता है

तो यह हैं कुछ बातें जिनसे आप जान सकती है की महिलाओं के लिए कौन से मौसम में डिलीवरी होना बेहतर होता है। बाकी यह आपके प्रेगनेंसी के पहले महीने पर निर्भर करता है की जब आपकी गर्भावस्था को पूरे नौ महीने हो जाएंगे तब गर्मियां होंगी या सर्दिया होंगी।

यूट्यूब विडिओ –

डिलीवरी सर्दियों की अच्छी होती है या गर्मियों की? कौन से मौसम में डिलीवरी होना अच्छा होता है सर्दियों में या गर्मियों में?

बार-बार बुखार आने के क्या कारण होते है?

Causes of Repeating Fever

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बदलते मौसम और अव्यवस्थित खान-पान के कारण अक्सर लोगों की तबियत खराब हो जाती है। जिसमे सबसे पहला नाम बुखार, खांसी और जुखाम का आता है। वैसे तो ये बीमारियां किसी भी मौसम हो जाती है लेकिन बरसात और ठंड के मौसम में ये समस्या बहुत अधिक देखने को मिलती है। जिसके चलते कई बार गंभीर बिमारियों का सामना करना पड़ता है।

बुखार एक ऐसी बीमारी है जो किसी भी व्यक्ति को हो सकती है, लेकिन बच्चों में यह सबसे अधिक होती है क्योंकि बच्चों का इम्यून सिस्टम बहुत कमजोर होता है और उनपर कोई भी बीमारी बहुत जल्दी अटैक करती है। सामान्य तौर पर बुखार ठंड लगने, थकावट होने या शरीर की किसी अन्य बीमारी के कारण आता है। बुखार होने पर व्यक्ति के शरीर का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है।

वैसे तो ये कोई बीमारी नहीं है परन्तु अगर बार बार एक ही डिग्री पर बुखार आ रहा है तो हो सकता है की यह किसी बीमारी का संकेत हो। या हो सकता है की यह किसी संक्रामक रोग का लक्षण हो। क्योंकि मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, स्वाइन फ्लू टाइफाइड आदि कुछ ऐसे रोग है जिनमे रोगी का बुखार टूटता नहीं है और उसे बार बार बुखार आता है। इसके अलावा अधिक शारीरिक मेहनत करने, अधिक गर्म वातावरण में रहने, पीरियड्स के समय, लू लगने, बैक्टीरियल या वायरल इन्फेक्शन के कारण भी अक्सर बुखार आ जाता है।

यहाँ हम आपको बार बार बुखार आने के कारण और उसके लक्षण बताने जा रहे है। क्योंकि हो सकता है जिसे आप सामान्य हरारत समझ रहे हो वह कोई बीमारी का शुरुवाती लक्षण हो। ऐसे में स्वयं अपना ध्यान रखना और सही समय पर उचित दवा लेना ही एकमात्र उपाय है। तो आइये जानते है बार-बार बुखार आने के कारण।

बुखार आने के लक्षण :

बुखार होने पर व्यक्ति के शरीर में बहुत सी क्रियाएं और प्रतिक्रियायें होने लगती है जिनमे सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, सर्दी लगना, शरीर में कमजोरी, कमर में दर्द, त्वचा पर दाने निकलना, बहुत पसीना आना, चक्कर आना, कपकपी छूटना, बेहोशी, बेहोशी में बड़बड़ाना, डार्क सर्कल्स आदि सम्मिलित है।

क्यों आता है बार-बार बुखार?

वैसे तो बार-बार बुखार आने के पीछे कई कारण है लेकिन उसका पता केवल बुखार के प्रकार और उसके कारण को जानकर ही लगाया जा सकता है। यहाँ हम आपको बुखार के प्रकार और उनके कारणों के बारे में बताने जा रहे है जिनके बाद बार-बार बुखार आने के कारण हो पहचानना काफी आसान हो जाएगा।

सामान्य बुखार एक नार्मल बुखार है जिसके होने पर विशेष उपचार करने की आवश्यकता नहीं पड़ती इसे ठीक करने के लिए घरेलू उपचारों की मदद ली जा सकती है। ऐसा अक्सर बारिश में भीगने, पानी के अधिक संपर्क में रहने, गीले कपडे पहनने, जुखाम होने, कब्ज होने, लूज़ मोशन होने पर, पेट दर्द या पेट से जुडी किसी अन्य समस्या के होने पर, देर रात तक जागने, अनियमित दिनचर्या के कारण, मानसिक तनाव, मौसम में बदलाव, धुप में अधिक देर तक घूमने और अधिक शारीरिक परिश्रम करने के कारण हो जाता है।

इस तरह के बुखार में आप घरेलू उपचारों का प्रयोग कर उसे ठीक कर सकते है। इसके अलावा पेरासिटामोल, एस्पिरिन, आइब्रुफेन जैसी कुछ दवाएं भी सामान्य बुखार को ठीक करने की क्षमता रखती है। वैसे तो ये बुखार एक या दो गोली खाने के बाद स्वयं ही ठीक हो जाता है। लेकिन अगर बार-बार बुखार आये तो यह चिंता का विषय है। बता दें, सामान्य बुखार के अलावा सविराम बुखार, अविराम बुखार, स्वल्प-विराम बुखार भी बुखारों के प्रकारों में से एक है।

ये है असली वजह :-बार-बार बुखार आने के क्या कारण

अगर किसी व्यक्ति को बार-बार बुखार आ रहा है और लगातार बना हुआ है तो हो सकता है रोगी किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हो। इन बिमारियों में टाइफाइड, हेपिटाइटिस-बी, जॉन्डिस, मलेरिया, डेंगू, लिवर में खराबी, चिकनगुनिया और स्वाइन फ्लू आदि सम्मिलित है। जिनमे अगर समय रहते उपचार नहीं किया जाए तो रोगी की जान भी जा सकती है।

तो अगर आप भी बार-बार आने वाले बुखार को अनदेखा कर रहे है तो आपको इसके घातक परिणाम भुगतने पड़ सकते है। बच्चे हो या बड़े, बूढ़े हो या जवान किसी भी व्यक्ति के बुखार को अनदेखा नहीं करें। इसके अलावा अगर आप बुखार में पेरासिटामोल या किसी अन्य दवा का इस्तेमाल कर रहे है तो उससे पहले एक बार डॉक्टर से मिलें।

क्योंकि हो सकता है जिसे आप सामान्य बुखार समझकर उसके इलाज के लिए पेरासिटामोल का प्रयोग कर रहे है वे उपरोक्त रोगों में से किसी एक का शुरूआती लक्षण हो।

इसलिए किसी भी बीमारी को आम न समझे, थोड़ी सी परेशानी होने पर डॉक्टर से मिलें। अगर डॉक्टर के पास नहीं जा सकते तो घरेलू उपायों का प्रयोग कर उसे दूर करने की कोशिश करें।

गर्भ में शिशु का वजन नहीं बढ़ने के क्या कारण होते हैं?

हर प्रेग्नेंट महिला प्रेगनेंसी के दौरान अपने स्वास्थ्य का बेहतर तरीके से ध्यान रखने की कोशिश करती है। लेकिन कई बार प्रेगनेंसी के दौरान छोटी छोटी लापरवाही के कारण महिला को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही इसका नकारात्मक असर शिशु पर भी देखने को मिल सकता है। जैसे की इसके कारण शिशु का शारीरिक विकास अच्छे से नहीं हो पाता है। जिसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु का वजन नहीं बढ़ पाता है। और इसके कारण जन्म के समय शिशु के वजन में कमी, समय पूर्व प्रसव जैसी समस्या का भी खतरा रहता है। तो आइये आज हम इस आर्टिकल में जानते की आखिर क्यों गर्भ में भ्रूण का वजन नहीं बढ़ पाता है।

शिशु का वजन गर्भ में न बढ़ने के कारण

प्रेगनेंसी की शुरुआत में शिशु का वजन कम ही होता है। लेकिन दूसरी तिमाही से शिशु के अंगो की आकृतियां बनने के बाद शिशु के वजन में बढ़ोतरी होने लगती है। और तीसरी तिमाही में शिशु का वजन और भी तेजी से बढ़ता है। और शिशु के वजन में कमी के बारे में आपको डॉक्टर द्वारा बताया भी जाता है। ऐसे में शिशु का वजन क्यों नहीं बढ़ रहा है इसके कारण का पता करना बहुत जरुरी होता है। तो आइये अब जानते हैं की भ्रूण का वजन नहीं बढ़ने के क्या कारण होते हैं।

पोषक तत्वों की कमी

  • प्रेग्नेंट महिला को पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करने की सलाह दी जाती है।
  • क्योंकि यह पोषक तत्व केवल गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने में मदद ही नहीं करते हैं।
  • बल्कि शिशु के विकास के लिए जरुरी पोषक तत्व गर्भनाल के माध्यम से शिशु तक पहुंचाए जाते हैं।
  • लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन नहीं करती है।
  • तो शरीर में पोषक तत्वों की कमी के कारण प्रेग्नेंट महिला की शारीरिक परेशानियां बढ़ सकती है।
  • साथ ही इससे शिशु के विकास पर भी बुरा असर पड़ सकता है जिसके कारण गर्भ में शिशु का वजन सही से नहीं बढ़ पाता है।

आयरन की कमी

  • प्रेग्नेंट महिला के शरीर में यदि खून की कमी होती है।
  • तो इसके कारण केवल गर्भवती महिला को ही दिक्कत नहीं होती है।
  • बल्कि इसके कारण शिशु के विकास पर भी असर पड़ सकता है।
  • और खून की कमी के कारण शिशु का शारीरिक विकास अच्छे से नहीं हो पाता है।
  • जिसके कारण शिशु को जन्म के समय वजन में कमी जैसी दिक्कत हो सकती है।

शिशु का वजन गर्भ में न बढ़ने का कारण है तनाव

  • प्रेग्नेंट महिला का तनाव लेना महिला की शारीरिक दिक्कतों को बढ़ाने के साथ शिशु के विकास को भी प्रभावित कर सकता है।
  • साथ ही इसके कारण महिला को या भूख में कमी या भूख अधिक लगने जैसी दिक्कत भी हो सकती है।
  • और यह दोनों ही शिशु के लिए सही नहीं होती है।
  • खासकर महिला की भूख में कमी होने के कारण भ्रूण को पोषक तत्व नहीं मिलते हैं जिसके कारण भ्रूण का वजन अच्छे से नहीं बढ़ पाता है।
  • और शिशु के वजन में कमी जैसी दिक्कत हो सकती है।

प्रेग्नेंट महिला को होने वाली परेशानियां

  • गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव की वजह से महिला को बहुत सी शारीरिक दिक़्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
  • ऐसे में यदि महिला इन दिक़्कतों के होने पर अपने खान पान का अच्छे से ध्यान नहीं रखती है।
  • अपनी सेहत का अच्छे ध्यान नहीं रखती है।
  • तो इसका बुरा असर शिशु पर देखने को मिल सकता है जिसके कारण शिशु के वजन में कमी जैसी दिक्कत हो सकती है।

नींद की कमी

  • प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने के लिए खान पान के साथ नींद भी भरपूर लेनी चाहिए।
  • क्योंकि नींद में कमी के कारण महिला को थकान, कमजोरी व् अन्य स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियां हो सकती है।
  • जिसका शिशु पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।
  • और शिशु को वजन में कमी जैसी दिक्कत हो सकती है।

शिशु का वजन गर्भ में न बढ़ने का कारण है पानी की कमी

  • यदि प्रेग्नेंट महिला पानी का भरपूर सेवन नहीं करती है तो इसके कारण प्रेग्नेंट महिला की स्वास्थ्य सम्बन्धी बढ़ सकती है।
  • साथ ही इसके कारण एमनियोटिक फ्लूड जिसमे गर्भाशय में शिशु होता है उसकी मात्रा में कमी आ सकती है।
  • जिसके कारण शिशु के शारीरिक विकास में कमी आ सकती है और शिशु का वजन अच्छे से नहीं बढ़ पाता है।

नशीले पदार्थ व् कैफीन का सेवन

  • गर्भावस्था के दौरान महिला को किसी भी तरह के नशीले पदार्थ जैसे की अल्कोहल, धूम्रपान आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि इनका बुरा असर शिशु तक गर्भनाल के माध्यम से पहुँच जाता है।
  • जिसके कारण शिशु के शारीरिक विकास में कमी होने के साथ मानसिक रूप से शिशु के विकास में भी कमी आ सकती है।
  • और जहां कोई इन चीजों का सेवन कर रहा हो।
  • वहां भी गर्भवती महिला को नहीं जाना चाहिए।
  • इसके अलावा कैफीन की अधिक मात्रा जिन पदार्थों में मौजूद हो उनका सेवन भी अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए।
  • जैसे की चाय, कॉफ़ी का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए।

गर्भ में शिशु का वजन बढ़ाने के लिए इन बातों का ध्यान रखें

  • प्रेग्नेंट महिला को पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए।
  • तनाव नहीं लेना चाहिए हमेशा खुश रहना चाहिए।
  • प्रेगनेंसी के दौरान डॉक्टर द्वारा बताई गई सभी दवाइयों का समय से सेवन करना चाहिए।
  • शरीर में पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए।
  • नींद को भरपूर मात्रा में लेना चाहिए।
  • शिशु के बेहतर विकास के लिए अपनी सेहत का बहुत ज्यादा ध्यान रखना चाहिए और किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से भ्रूण का वजन नहीं बढ़ पाता है। और शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास के लिए महिला को ऐसी लापरवाही प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करनी चाहिए। और अपना दुगुना ध्यान रखना चाहिए। ताकि प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने के साथ भ्रूण के बेहतर विकास में भी मदद मिल सके।