Home Blog Page 87

मौसमी खाने के फायदे प्रेग्नेंट महिला के लिए

प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के दौरान फलों का भरपूर सेवन करना चाहिए। क्योंकि फल न केवल पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। बल्कि बहुत से फलों में पानी की मात्रा की अधिकता होती है। जो प्रेग्नेंट महिला को हाइड्रेट रहने और प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली कॉम्प्लीकेशन्स को कम करने में मदद करते हैं। तो आज हम एक ऐसे फल के बारे में बताने जा रहे हैं जो प्रेग्नेंट महिला को जरूर खाना चाहिए। और वो फल है मौसमी, मौसमी प्रेग्नेंट महिला को क्यों खानी चाहिए और इसे खाने से प्रेग्नेंट महिला और शिशु को कौन से फायदे मिलते हैं आइये अब इस बारे में जानते हैं।

क्यों खानी चाहिए प्रेग्नेंट महिला को मौसमी?: विटामिन सी, फाइबर, पोटैशियम, आयरन, फोलेट जैसे पोषक तत्व होने के साथ मौसमी में पानी की मात्रा की अधिकता भी होती है। जो गर्भवती महिला व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं। इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को मौसमी का सेवन जरूर करना चाहिए। साथ मौसमी का सेवन करने के साथ मौसमी का जूस भी फायदेमंद होता है। तो आइये अब जानते हैं प्रेग्नेंट महिला को मौसमी का सेवन करने से होने वाले फायदों के बारे में।

विटामिन सी की मात्रा मौसमी में मौजूद होती है और विटामिन सी एक बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट होता है। जो प्रेग्नेंट महिला की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। जिससे महिला व् शिशु को संक्रमण से बचे रहने में मदद मिलती है।

पोटैशियम युक्त खाद्य पदार्थों सेवन करने से तनाव दूर करने के साथ ब्लड प्रैशर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। और मौसमी में पोटैशियम मौजूद होता है ऐसे में गर्भवती महिला को तनाव से बचे रहने और ब्लड प्रैशर को सही रखने के लिए गर्भवती महिला को नियमित एक मौसमी का सेवन जरूर करना चाहिए।

प्रेगनेंसी के दौरान कब्ज़, गैस व् अन्य पाचन क्रिया से सम्बंधित परेशानियों का होना आम बात होती है। लेकिन गर्भवती महिला यदि मौसमी का सेवन करती है तो प्रेग्नेंट महिला को इन परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है। क्योंकि मौसमी में मौजूद फाइबर पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मदद करता है।

बच्चे के बेहतर विकास के लिए और बॉडी में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण के लिए जरुरी फोलेट भी मौसमी में मौजूद होता है। ऐसे में गर्भवती महिला यदि मौसमी का सेवन करती है तो इससे बच्चे के विकास को बढ़ाने के साथ बॉडी में आयरन की मात्रा को सही रखने में भी मदद मिलती है।

पानी की कमी का होना गर्भवती महिला के साथ बच्चे के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में मौसमी का सेवन करने से गर्भवती महिला के शरीर में पानी की मात्रा को सही रखने में मदद मिलती है। जिससे बच्चे के लिए एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा को सही रखने के साथ गर्भवती महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

तो इन सभी फायदों के लिए और प्रेगनेंसी के दौरान महिला व् बच्चे को स्वस्थ रहने के लिए मौसमी का सेवन करने के साथ मौसमी का जूस भी जरूर पीना चाहिए।

मौसमी खाने के फायदे देखिये वीडियो

पुरुषो में शुक्राणु की कमी के क्या कारण होते हैं? और इसे बढ़ाने के उपाय

पुरुषो में शुक्राणु की कमी के क्या कारण होते हैं, पुरुषो में शुक्राणु बढ़ाने के तरीके, पुरुषो में शुक्राणु की कमी क्यों होती है, पुरुषो में शुक्राणु को बढ़ाने के घरेलू तरीके

आज कल बदलती जीवनशैली और गलत दिनचर्या के अलावा गलत आदतों के कारण पुरुषो को शुक्राणु की कमी की समस्या से परेशान होना पड़ सकता है। सम्बन्ध बनाने के बाद पुरुष के प्राइवेट पार्ट से एक चिपचिपा पदार्थ निकलता है, उसमे शुक्राणु होते हैं और यदि यह शुक्राणु पूरे न हो तो इनकी कमी के कारण महिलाओं के गर्भधारण में समस्या आ सकती है। क्योंकि पुरुष के शुक्राणु जब महिला के शुक्राणु से मिलते हैं तभी महिला का गर्भधारण होता है। पुरुषो के शुक्राणु में कमी का कोई एक कारण नहीं होता है बल्कि इसके कई कारण हो सकते हैं, तो आइये आज हम आपको बताते हैं की पुरुषो में शुक्राणु की कमी के क्या कारण होते हैं और किस तरह आप इस समस्या से निजात पा सकते हैं ।

पुरुषो में शुक्राणु की कमी के कारण

  • भारी धातुओं जैसे लेड आदि के संपर्क में अधिक रहने के कारण पुरुषो को यह समस्या हो सकती है।
  • रेडिएशन के संपर्क में अधिक रहने पर ही शुक्राणु का उत्पादन कम होता है।
  • लम्बे समय तक साइकिल चलाने के कारण भी पुरुषो की प्रजनन क्षमता पर बुरा असर पड़ता है।
  • अधिक तापमान वाली जगह पर रहने पर, हिट की समस्या (यानी ज्यादा देर गोद में लैपटॉप लेकर कमा करने से) होने के कारण भी पुरुषो को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • नियमित हॉट बाथ टब का प्रयोग करना भी पुरुषो में शुक्राणु की कमी का कारण हो सकता है।
  • जो पुरुष अधिक शराब का सेवन करते हैं, धूम्रपान करते हैं, तम्बाकू आदि का सेवन करते हैं, ड्रग्स लेते हैं उनकी प्रजनन क्षमता में भी कमी आने लगती है।
  • यौन संक्रमण का होना भी इसका एक कारण हो सकता है।
  • जो पुरुष तनाव की समस्या से जूझ रहे होते हैं उनकी प्रजनन क्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है।
  • अत्यधिक वजन का होना भी इस समस्या का कारण हो सकता है।
  • सर्जरी आदि होने के कारण भी ऐसा हो सकता है, या जो पुरुष अधिक दवाइयों का सेवन करते हैं उनकी प्रजनन क्षमता भी कम होने लगती है।

पुरुषो में शुक्राणु की संख्या बढ़ाने के लिए अपनाएँ यह उपाय

पुरुषो में शुक्राणु की कमी होने के कारण उनकी शादीशुदा जिंदगी पर इसका बुरा असर देखने को मिलता है। साथ ही इसके कारण महिला के गर्भधारण में भी समस्याएं आ सकती है। तो लीजिए पुरुषो से जुडी इस समस्या के समाधान के लिए हम आज आपको कुछ उपाय बताने जा रहे हैं जिससे आपको इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलेगी।

व्यायाम व् स्वस्थ आहार

पुरुषो को फिट रहने के लिए सबसे जरुरी होता है की वो अपने आहार का खास ध्यान रखे, और नियमित व्यायाम करें। पोषक तत्वों से युक्त आहार का सेवन करने से पुरुषो को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है, जिससे बॉडी के सभी अंग अपना कार्य बेहतर तरीके से करते हैं। साथ ही व्यायाम करने से आपके वजन को नियंत्रित रहने, तनाव को कम होने, बॉडी को फिट रहने, और बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर होने में मदद मिलती है जिससे प्रजनन क्षमता को बेहतर होने में मदद मिलती है।

अश्वगंधा

अश्वगंधा का सेवन करने से पुरुषो में शुक्राणुओं की वृद्धि को तेजी से करने में मदद मिलती है। क्योंकि इसके सेवन से बॉडी में हार्मोनल संतुलन को बनाएं रखने के साथ, तनाव दूर करने में मदद मिलती है, बॉडी की कमजोरी को दूर किया जा सकता है, आदि। इसके इस्तेमाल के लिए आप नियमित आधा चम्मच अश्वगंधा चूर्ण को एक गिलास गर्म दूध में डालकर उसका सेवन करें।

लहसुन

अलिसिन नामक तत्व से भरपूर लहसुन बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है, जो की शुक्राणुओं की संख्या को बढ़ाने के लिए बहुत जरुरी होता है। इसके अलावा इसमें सेलेनियम भी मौजूद होता है जो शुक्राणु की गतिशीलता को बढ़ाने में मदद करता है। इसके इस्तेमाल के लिए आप तीन से चार लहसुन की कलियाँ नियमित चबाकर खाएं, साथ ही इसे अपनी सब्जियों में भी भरपूर मात्रा में इस्तेमाल करें।

गलत चीजों का सेवन न करें

शराब, धूम्रपान, ड्रग्स, एंटी बायोटिक दवाइयों का अधिक सेवन, तम्बाकू आदि का अधिक सेवन भी आपको नहीं करना चाहिए। क्योंकि इन्हे सेवन से आपकी प्रजनन क्षमता पर बहुत बुरा असर पड़ता है, यदि कोई शारीरिक समस्या है तो उसके लिए डॉक्टर से राय लेने के बाद ही दवाई लेनी चाहिए।

तंग अंडरवियर न पहने

पुरुषो को अपने लिए ज्यादा टाइट अंडरवियर का चुनाव नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे बॉडी का तापमान अधिक बढ़ता हैं, खासकर प्राइवेट पार्ट पर, जिससे शुक्राणुओं की गुणवत्ता कम हो सकती है।

डॉक्टर से राय लें

यौन संक्रमण या अन्य कोई शारीरिक समस्या होने के कारण भी आपको यह समस्या हो सकती है। और यदि कोई ऐसी समस्या है तो इसके लिए आपको डॉक्टर से राय लेनी चाहिए ताकि आपका अच्छे से इलाज करने के बाद आपको इस समस्या से निजात दिलाने में मदद मिल सके।

पुरुषो में शुक्राणु बढ़ाने के घरेलू नुस्खे

  • आधा ग्राम पीसे हुए तुलसी के बीज को पान के पत्ते के साथ खाने से फायदा मिलता है।
  • बथुए का सेवन करने से भी पुरुषो में शुक्राणु की वृद्धि करने में मदद मिलती है।
  • शुक्राणु की कमी को दूर करने के लिए पुरुषो को नियमित केसर वाला दूध पीना चाहिए।
  • विटामिन से भरपूर केले का सेवन भी पुरुषो में शुक्राणुओं की वृद्धि के लिए एक बेहतरीन उपाय है।
  • हरी पत्तेदार सब्जियों का भरपूर सेवन करने से भी फायदा मिलता है।
  • डार्क चॉकलेट का सेवन भी आपकी इस समस्या का समाधान करने में में मदद करता है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से पुरुष के शुक्राणुओं में कमी आने लगती है, साथ ही इस समस्या से निजात पाने के कुछ उपाय भी बताये गए हैं। और यदि आप इस समस्या से अधिक परेशान है तो इसे अनदेखा न करते हुए एक बार डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए। और खुलकर अपनी समस्या बतानी चाहिए ताकि आपकी समस्या का समाधान हो सके।

दूध पीने का सही तरीका प्रेग्नेंट महिला के लिए?

दूध पोषक तत्वों का एक समृद्ध स्त्रोत है। जो गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहें शिशु के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को दिन में दो से तीन गिलास दूध पीने की सलाह दी जाती है। लेकिन अधिक मात्रा में और सही तरीके से दूध का सेवन न करने पर इसके दुष्प्रभाव भी महिला हो सकते है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को दूध का सेवन करने के साथ इसकी सही मात्रा व् इसके सही तरीके के बारे में पता होना चाहिए।

तो आइये आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से प्रेग्नेंट महिला को कितना दूध पीना चाहिए। किस तरह से दूध का सेवन करना चाहिए। प्रेगनेंसी में दूध का सेवन करने से कौन से फायदे होते हैं। इस बारे में विस्तार से बताने जा जा रहें हैं। तो आइये सबसे पहले जानते हैं की गर्भवती महिला को दूध प्रेगनेंसी में क्यों पीना चाहिए।

प्रेग्नेंट महिला को दूध क्यों पीना चाहिए?

कैल्शियम, प्रोटीन, फॉस्फोरस, पोटैशियम, वसा, कैलोरी जैसे पोषक तत्व दूध में भरपूर मात्रा में होते हैं। जो गर्भवती महिला और शिशु दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं। इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को दूध को नियमित रूप से जरूर पीना चाहिए।

गर्भावस्था में दूध पीना कब शुरू करना चाहिए?

प्रेग्नेंट महिला को दूध का सेवन करने के लिए सही समय का इंतज़ार करने की जरुरत नहीं है। बल्कि प्रेगनेंसी में रोजाना गर्भवती महिला को दूध का सेवन जरूर करना चाहिए। और यह आपको हम नहीं बल्कि डॉक्टर भी कहते हैं। क्योंकि दूध गर्भवती महिला के स्वास्थ्य और भ्रूण के विकास के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

प्रेगनेंसी में दूध कितना पीना चाहिए?

गर्भवती महिला को दिन में दो से तीन गिलास दूध के जरूर पीने चाहिए। जैसे की सुबह नाश्ते व् रात को सोने से पहले जरूर पीना चाहिए। बाकी आप चाहे तो शाम को भी दूध का सेवन कर सकती है। और इससे ज्यादा दूध भी नहीं पीना चाहिए। क्योंकि दूध का अधिक मात्रा में सेवन भी गर्भवती महिला को परेशान कर सकता है।

प्रेगनेंसी में दूध पीने का सही तरीका क्या है?

प्रेग्नेंट महिला के लिए दूध का पीना ही जरुरी नहीं है। बल्कि इसे सही तरीके से पीना भी जरुरी है। क्योंकि गलत तरीके से दूध का सेवन करने से गर्भवती महिला को सेहत सम्बन्धी समस्या हो सकती है। तो आइये जानते हैं की प्रेगनेंसी में दूध पीने का सही तरीका क्या है।

दूध को अच्छे से उबालें

प्रेगनेंसी में दूध को पीने से पहले अच्छे से उबाल लेना चाहिए। और उसके गुनगुना रहने पर उसका सेवन करना चाहिए। ताकि दूध का तापमान सही हो सके। और उसमे किसी तरह के बैक्टेरिया न हो। आप चाहे तो उसमे स्वादानुसार थोड़ा मीठा भी मिला सकते है।

मिल्क का तापमान

बहुत ज्यादा गर्म दूध या बहुत ज्यादा ठंडा दूध भी प्रेग्नेंट महिला को नहीं पीना चाहिए। क्योंकि गर्म दूध में प्रेग्नेंट महिला के शरीर के तापमान में फ़र्क़ आ सकता है। जबकि ठंडा दूध पीने से सेहत सम्बन्धी परेशानी हो सकती है।

बादाम दूध

दूध में पोषक तत्वों मात्रा को बढ़ाने के लिए प्रेग्नेंट महिला दूध में बादाम डालकर भी पी सकती है। इससे दूध का फायदा दुगुना हो जाता है।

केसर

  • दूध में केसर डालकर पीना भी प्रेग्नेंट महिला के लिए फायदेमंद होता है।
  • केसर के दी तीन रेशे डालकर भी प्रेग्नेंट महिला दूध का सेवन कर सकती है।
  • लेकिन ध्यान रखें की केसर की मात्रा अधिक न हो।

कच्चा दूध

  • गर्भवती महिला को कच्चा दूध नहीं पीना चाहिए।
  • क्योंकि इसमें लिस्टेरिया नामक बैक्टेरिया होता है।
  • जो गर्भवती महिला व् शिशु के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
  • इसीलिए दूध को अच्छे से उबालने के बाद ही उसका सेवन करें।

प्रेगनेंसी में दूध का सेवन करने के फायदे

गर्भवती महिला यदि नियमित रूप से दूध का सही तरीके और सही मात्रा में सेवन करती है। तो ऐसा करने से गर्भवती महिला और शिशु दोनों को बहुत से फायदे मिलते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं प्रेगनेंसी में दूध पीने के फायदे क्या हैं।

कैल्शियम

  • दूध में कैल्शियम की मात्रा की अधिकता होती है।
  • जो गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करता है।
  • जिससे थकान व् कमजोरी जैसी परेशानी से प्रेग्नेंट महिला को बचें रहने में मदद मिलती है।
  • साथ ही इससे गर्भ में भ्रूण की हड्डियों के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

प्रोटीन

  • प्रोटीन की मात्रा भी दूध में मौजूद होती है।
  • जो प्रेग्नेंट महिला की मांसपेशियों की मरम्मत व् मजबूती में मदद करता है।
  • साथ ही इससे भ्रूण के बेहतर विकास होने में मदद मिलती है।
  • और इससे भ्रूण का वजन भी सही रहता है।

विटामिन डी

  • विटामिन डी की मात्रा भी दूध में होती है।
  • जो गर्भ में भ्रूण के बेहतर विकास में मदद करता है।
  • साथ ही इससे भ्रूण को होने वाली बहुत सी परेशानियों से बचाव करने में मदद मिलती है।

हाइड्रेटेड

  • दूध पीने से गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान हाइड्रेटेड रहने में मदद मिलती है।
  • जिससे प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली बहुत सी परेशानियों को कम किया जा सकता है।
  • इसके अलावा इससे गर्भवती महिला को तनाव जैसी परेशानी से बचाव करने में भी मदद मिलती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में दूध पीने से जुड़े कुछ खास टिप्स। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को इन सभी बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि प्रेग्नेंट महिला और शिशु को इसके भरपूर फायदे मिल सके।

प्रेगनेंसी में पीए जाने वाले 10 जूस के बेहतरीन फायदे

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को तरल पदार्थों का भरपूर सेवन करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि तरल पदार्थों का भरपूर सेवन गर्भवती महिला के शरीर में पानी की कमी को पूरा करने, प्रेग्नेंट महिला को एनर्जी से भरपूर रखने, एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा को सही रखने, शरीर में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है। इसके अलावा और भी बहुत से फायदे हैं जो गर्भवती महिला को हाइड्रेटेड रहने से मिलते हैं।

और शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के लिए गर्भवती महिला को पानी के साथ तरह तरह के जूस का सेवन करने की सलाह भी दी जाती है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम ऐसे दस जूस के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका सेवन प्रेग्नेंट महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि उनका सेवन करने से गर्भवती महिला व् गर्भ में पल रहे शिशु को बहुत से फायदे मिलते हैं।

निम्बू पानी

  • प्रेगनेंसी के दौरान निम्बू पानी पीने से मॉर्निंग सिकनेस की समस्या यानी उल्टी, जी मिचलाना, थकान आदि समस्या से छुटकारा पाने में मदद मिलती है।
  • निम्बू पानी पीने से पाचन तंत्र मजबूत होता है साथ ही कब्ज़, पेट में गैस आदि की परेशानी से निजात मिलता है।
  • विटामिन सी से भरपूर निम्बू पानी का सेवन करने से इम्युनिटी मजबूत करने में मदद मिलती है।
  • निम्बू पानी में कैल्शियम और मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में मौजूद होता है ऐसे में निम्बू पानी का सेवन माँ व् बच्चे दोनों की हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है।
  • सूजन की समस्या से निजात पाने के लिए निम्बू पानी का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।

नारियल पानी

  • विटामिन्स व् एंटी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर नारियल पानी का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को इम्युनिटी बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • नारियल पानी पीने से शरीर में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है जिससे प्रेग्नेंट महिला को यूरिन इन्फेक्शन व् अन्य इन्फेक्शन से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • डायरिया, उल्टी, सिर दर्द, कमजोरी जैसी परेशानियों से बचाव के लिए प्रेगनेंसी में नारियल पानी पीना बहुत फायदेमंद होता है।
  • ऊर्जा से भरपूर रहने के लिए नारियल पानी का सेवन गर्भवती महिला के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
  • प्रेगनेंसी में शरीर में कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल रखने के लिए नारियल पानी का सेवन गर्भवती महिला कर सकती है।

अनार का जूस

  • फोलेट से भरपूर अनार का जूस पीने से गर्भ में शिशु के बेहतर मानसिक व् शारीरिक विकास में मदद मिलने के साथ जन्म के समय शिशु को होने वाली परेशानियों से बचाव करने में भी मदद मिलता है।
  • अनार का जूस पीने से प्रेगनेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रैशर की समस्या से बचाव होता है।
  • कैल्शियम से भरपूर अनार का जूस प्रेग्नेंट महिला की हड्डियों को मजबूत रखने के साथ गर्भ में शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास में भी मदद करता है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में खून की कमी को पूरा करने के लिए अनार के जूस का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।
  • गर्भावस्था के दौरान प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए अनार के जूस का सेवन फायदेमंद होता है।

संतरे का जूस

  • संतरे का जूस पीने से गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास के लिए फोलिक एसिड भरपूर मात्रा में मिलता है।
  • विटामिन सी से भरपूर संतरे का जूस पीने से गर्भवती महिला की इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • संतरे के रस में जिंक भरपूर मात्रा में मौजूद होता है जो माँ व् बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है।
  • गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने के लिए भी संतरे के जूस का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।
  • संतरे के जूस में कैल्शियम भी भरपूर मात्रा में मौजूद होता है जो गर्भवती महिला व् गर्भ में पल रहे बच्चे की हड्डियों की मजबूती के लिए जरुरी होता है।

गाजर का जूस

  • प्रेग्नेंट महिला की इम्युनिटी को मजबूत करने के लिए गाजर के जूस का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।
  • आयरन व् विटामिन सी से भरपूर गाजर का जूस प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करता है।
  • कैल्शियम से भरपूर गाजर का जूस गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूत करने के साथ गर्भ में शिशु की हड्डियों को मजबूत रखने में भी मदद करता है।
  • फाइबर से भरपूर गाजर का जुवे प्रेग्नेंट महिला के पाचन तंत्र को मजबूत करने में मदद करता है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कब्ज़, अपच जैसी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • हाई ब्लड प्रैशर के जोखिम को कम करने के लिए प्रेगनेंसी के दौरान गाजर के जूस का सेवन करना चाहिए।

गन्ने का जूस

  • विटामिन्स, मिनरल्स, एंटी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर गन्ने के रस का सेवन करने से गर्भवती महिला की इम्युनिटी बढ़ती है जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को हर तरह के इन्फेक्शन से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।
  • कब्ज़ की समस्या से राहत पाने के लिए गन्ने का जूस बहुत फायदेमंद होता है।
  • गन्ने का जूस पीने से मेटाबोलिज्म रेट बढ़ता है जिससे प्रेगनेंसी के दौरान वजन नियंत्रित रहने में मदद मिलती है।
  • प्रेगनेंसी में मॉर्निंग सिकनेस की समस्या से निजात पाने के लिए गन्ने के रस का सेवन फायदेमंद होता है।
  • गन्ने का जूस पीने से गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

सेब का जूस

  • प्रेगनेंसी के दौरान सेब का जूस पीने से गर्भवती महिला की इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • सेब का जूस पीने से गर्भवती महिला के शरीर में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है जिससे प्रेग्नेंट महिला स्वस्थ रहती है।
  • गर्भावस्था के दौरान शरीर में खून की कमी को पूरा करने के लिए सेब के जूस का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।
  • सेब के जूस का सेवन करने से गर्भवती महिला के कोलेस्ट्रॉल को कण्ट्रोल रहने और हदय को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।
  • विटामिन ए से भरपूर सेब का जूस गर्भवती महिला की आँखों की रौशनी को बढ़ाने के साथ गर्भ में शिशु की आँखों के बेहतर विकास में भी मदद करता है।

चुकंदर का जूस

  • चुकंदर का जूस पीने से गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है।
  • गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने के लिए चुकंदर के जूस का सेवन फायदेमंद होता है।
  • एंटी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर चुनकदर का सेवन करने से गर्भवती महिला को प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • एंटी इन्फ्लैमटेरी गुणों से भरपूर चुकंदर का जूस पीने से गर्भवती महिला को जोड़ो में दर्द व् सूजन की समस्या से बचे रहने में भी मदद मिलती है।
  • चुकन्दर का जूस पीने से गर्भवती महिला के साथ गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

कीवी का जूस

  • फाइबर से भरपूर कीवी फल का रस पीने से पाचन तंत्र से जुडी परेशानियों से गर्भवती महिला को निजात पाने में मदद मिलती है।
  • विटामिन सी से भरपूर कीवी का जूस पीने से गर्भवती महिला की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • विटामिन के से भरपूर कीवी का जूस पीने से गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूती मिलने के साथ बच्चे की हड्डियों के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।
  • गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने के लिए भी कीवी का जूस बहुत फायदेमंद होता है।
  • ब्लड में शुगर की मात्रा को नियंत्रित रखने के लिए कीवी के जूस का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।

स्ट्रॉबेरी का जूस

  • गर्भावस्था में स्ट्रॉबेरी का जूस पीने से प्रेग्नेंट महिला की इम्युनिटी को मजबूत करने में मदद मिलती है।
  • फोलेट से भरपूर स्ट्रॉबेरी का जूस पीने से गर्भ में पल रहे बच्चे के बेहतर विकास में मदद मिलती है।
  • फाइबर से भरपूर स्ट्रॉबेरी का जूस पीने से प्रेग्नेंट महिला के पाचन तंत्र को दुरुस्त रहने में मदद मिलती है।
  • स्ट्रॉबेरी का जूस पीने से गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूत रहने व् गर्भ में बच्चे की हड्डियों का बेहतर विकास होने में मदद मिलती है।
  • गर्भावस्था के दौरान स्ट्रॉबेरी का जूस पीने से गर्भवती महिला के जीभ के स्वाद को सही करने में मदद मिलती है।

तो यह हैं वो दस जूस जिनका सेवन करने से गर्भवती महिला को फायदे मिलते हैं। तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन जूस का सेवन जरूर करना चाहिए ताकि आपको व् आपके बच्चे को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

आजकल क्या नहीं करें प्रेग्नेंट महिला?

आज कल कोरोना वायरस फैलने के कारण हर व्यक्ति को अपनी सेहत का अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जा रही है, घर में ही रहने के लिए कहा जा रहा है, और इसका उदेश्य सिर्फ इतना है की आपको स्वस्थ रहने में मदद मिल सके और आप स्वस्थ रहें। ऐसे में गर्भवती महिला को तो अपना और भी ज्यादा ख्याल रखना चाहिए। और कुछ ऐसी चीजें हैं जिनसे गर्भवती महिला को अपने आप को बचाकर रखना चाहिए और कुछ ऐसे काम है जो गर्भवती महिला को नहीं करने चाहिए। तो आइये अब जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने के लिए किन कामों को करने से बचना चाहिए।

खाने में न करें लापरवाही:

आज कल गर्भवती महिला अपने खान पान में लापरवाही न करें। क्योंकि इसके कारण बॉडी में पोषक तत्वों की कमी के साथ इम्युनिटी कमजोर होने का खतरा बढ़ सकता है। जिसके कारण बच्चे व् महिला दोनों को शारीरिक रूप से परेशानी हो सकती है।

बाहर न निकलें:

संक्रमण से बचाव के लिए आपको एक बात को गाँठ बाँध लेना है की आप घर से न निकलें। जब तक कोई इमरजेंसी न हो, क्योंकि बाहर निकलने से आपके स्वास्थ्य के साथ बच्चे से स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ सकता है।

भीड़ भाड़ में न रहें:

भीड़ भाड़ में गलती से भी न जाएँ, यहां तक की यदि आपको डॉक्टर से मिलना है तो अपना टाइम पता करें। उसके बाद मास्क, ग्लव्स पहनकर डॉक्टर से मिलने के लिए जाएँ।

संक्रमित व्यक्ति से रखें दूरी:

यदि आपके घर में कोई ऐसा व्यक्ति है जो बीमार है चाहे उसे खांसी या जुखाम ही है। उस व्यक्ति से दूरी रखें, साथ ही उनकी इस्तेमाल की हुई चीजों को आप हाथ भी न लगाएं। और उन्हें आप मास्क लगाने के लिए कहें और खुद भी घर में मास्क लगाकर रखें।

बाहर से आयी चीजों को तुरंत न छुएं:

यदि आपके घर में बाहर से कुछ भी आता है तो उसे तुरंत न छुएं, और आपके घर में यदि कोई काम करने के लिए है तो उसे भी छूने से मना करें। फिर थोड़ी देर बाद उस सामान को अच्छे से गर्म पानी में धोयें और इस्तेमाल करें।

पालतू जानवर से रखें दूरी:

यदि आपके घर में कोई पालतू जानवर है तो उसके पास जाने, उसे हाथ लगाने, उसका कोई भी काम करने से बचें। क्योंकि जानवर से आपको बहुत जल्दी संक्रमित होने का खतरा होता है।

घर और अपनी साफ़ सफाई में न करें लापरवाही:

घर की साफ़ सफाई हो या अपनी सफाई प्रेग्नेंट महिला इसमें बिल्कुल भी लापरवाही न बरतें। बल्कि प्रेग्नेंट महिला हर आधे से एक घंटे बाद अपने हाथों को अच्छे से धोएं। ताकि प्रेग्नेंट महिला को हर तरह की बीमारी से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

केमिकल के इस्तेमाल से बचें:

प्रेग्नेंट महिला को आज कल किसी भी तरह के केमिकल उत्पाद का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। क्योंकि केमिकल का इस्तेमाल करने से प्रेग्नेंट महिला को संक्रमण होने का खतरा रहता है। ऐसे में केमिकल का इस्तेमाल जिस भी काम में हो गर्भवती महिला को उन सभी कामों को करने से बचना चाहिए।

आराम में न करें लापरवाही:

घर पर सभी लोगों के रहने के कारण आप पूरा दिन घर के काम या बातों में लगकर आराम में किसी तरह की लापरवाही न करें। बल्कि भरपूर आराम करें क्योंकि भरपूर आराम करने से प्रेग्नेंट महिला की इम्युनिटी बढ़ने व् महिला को शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ काम जो प्रेग्नेंट महिला को आज कल करने से बचना चाहिए। यदि प्रेग्नेंट महिला इन सभी बातों का ध्यान रखती है। तो ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला व् बच्चे दोनों को संक्रमण से बचे रहने और स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

जल्दी पीरियड्स लाने के आसान घरेलु उपाय

पीरियड्स हर महिला के साथ होने वाली समस्या है, जिससे हर महिला को गुजरना पड़ता है। लेकिन कई बार ये समस्या उनके लिए परेशानी बन जाती है। अधिकतर ऐसा होता है की हमें कहीं घूमने जाना है या हम किसी आउटस्टेशन टूर पर जा रहे है लेकिन एंड टाइम पर इस समस्या का हो जाना पुरे टूर की बैंड बजा देता है।

ये समस्या अधिकतर तभी होती है जब माहवारी अनियमित और समय पर नहीं आती। बहुत सी महिलाएं ऐसी होती है जिनको पीरियड्स या तो समय से पहले आ जाते है या फिर समय के बाद। अनियमित माहवारी की समस्या लगभग 70 % महिलाओं को होती है। जिसका मुख्य कारण शरीर में कमजोरी और पोषक तत्वों की कमी होता है।

किसी खास अवसर पर जाना हो तो महिलाओं के मन में सबसे पहला ख्याल अपनी डेट को लेकर ही आता है। वे इसी सोच में रहती है की अगर उनकी डेट समय से पहले आ गयी तो उनके लिए समस्या हो जाएगी। ऐसा नहीं है की हम इसे बंद कर सकते है लेकिन हां कुछ तरीके है जिनकी मदद से हम पीरियड्स को रेगुलर या नियमित कर सकते है। जिससे आप अपने प्लान को उस हिसाब से एडजस्ट कर सकती है।

ये कुछ ऐसे घरेलू नुस्खे है जो अनियमित माहवारी को नियमित करके उस दौरान होने वाली समस्यायों में आराम देने में मदद करता है। आज हम आपको उन्ही कुछ घरेलू नुस्खों के बारे में विस्तार से बताने जा रहे है।

अनियमित माहवारी के कारण :

किसी भी समस्या का इलाज जानने से पूर्व उसके कारणों को पहचानना आवश्यक होता है। इसीलिए पहले हम आपको माहवारी के अनियमित होने के कारणों के बारे में बता रहे है।

  • अत्यधिक दवाओं का सेवन
  • तनाव
  • शरीर में हार्मोनल असंतुलन
  • वजन का कम होना
  • शरीर में कमजोरी
  • पोषक तत्वों की कमी
  • थाइराइड भी है एक कारण

इसके अलावा भी ऐसे बहुत से कारण है जिनकी वजह से माहवारी (पीरियड्स) में देरी होती है। इसके लिए आप अपनी लेडी डॉक्टर से सलाह ले सकती है।

पीरियड्स जल्दी लाने के घरेलू उपचार :-

1. पपीता :

पपीते में कैरोटीन की अच्छी मात्रा पाई जाती है। और ये कैरोटीन एस्ट्रोजन हॉर्मोन को उत्तेजित करता है, जो की महिलाओं में मासिक धर्म की स्थिति को नियंत्रित करता है। ऐसे में यदि आप पपीते का सेवन करती है तो ये आपके मासिक चक्र को नियमित करने के साथ-साथ पीरियड्स जल्दी लाने में भी मदद करेगा। इसके अलावा आप अनानास, कद्दू, अंडे, गाजर, पालक आदि का सेवन भी कर सकती है।

2. अदरक की चाय :

समय से पहले मासिक धर्म लाने के लिए आप अदरक की चाय का सेवन कर सकती है। ये आपके मासिक धर्म को जल्दी लाने में मदद करेगा। लेकिन दिन भर में 2 कप चाय से अधिक न लें। अगर आपको चाय में अदरक पसंद नहीं तो आप 1 गिलास अदरक के रस के साथ गुड़ का सेवन करें।

3. सेक्स :

सहवास / सेक्स करने से भी पीरियड्स जल्दी आते है। क्योंकि सेक्स के दौरान शरीर में सभी हॉर्मोन एक्टिवेट हो जाते है जिससे मासिक धर्म समय से पहले ही आ जाता है।

4. गर्म पानी :

अगर आप चाहती है की आपके पीरियड्स जल्दी हो जाए तो इसके लिए आप गर्म पानी का इस्तेमाल भी कर सकती है। आप दिन में 1 ग्लास गर्म पानी का सेवन करें या फिर पेट के निचले हिस्से पर गर्म पानी से सिकाई करें। ऐसा तब तक करते रहे जब तक पीरियड्स शुरू नहीं हो जाते।

5. विटामिन सी :

मासिक धर्म को समय से पहले लाने के लिए विटामिन सी बहुत ही अच्छा उपाय है। ये शरीर में हॉर्मोन को उत्तेजित करते है जिससे पीरियड्स आसानी से हो जाते है। इसके लिए आप विटामिन सी युक्त फलों जैसे नींबू, संतरा, कीवी, संतरा, टमाटर आदि का सेवन करें। जल्दी मासिक धर्म लाने में ये आपकी मदद करेंगे।

6. तनाव से बचें :

तनाव आजकल की सबसे बड़ी समस्या है और इसी के कारण अनियमित माहवारी की समस्या उत्पन्न होती है। अगर आप चाहती है की आपके पीरियड्स जल्दी हो जाए तो कुछ दिन तनाव लेना छोड़ दें। क्योंकि तनाव होने पर शरीर मासिक धर्म लाने वाले हॉर्मोन को छोड़ने में अधिक समय लेता है जिससे माहवारी लेट होती है।

7. मसालें :

शायद आप नहीं जानती लेकिन आपके घर में मौजूद मसालें भी आपकी माहवारी को जल्दी लाने में मदद कर सकते है। इसके लिए आपको ज्यादा कुछ नहीं करना है बस कुछ दिनों के लिए अपने खाने में मिर्च मसालें की मात्रा थोड़ी बढ़ा दें। बेहतर होगा खट्टे मसालों का अधिक सेवन करें।

8. गर्म चीजें :

आप अपने मासिक धर्म को जल्दी लाने के लिए गर्म खाद्य पदार्थ जैसे गुड़, तिल के लड्डू, कॉफ़ी, अंगूर के जूस आदि का सहारा ले सकती है। ये सभी पदार्थ आपके मासिक धर्म को जल्दी लाने में आपकी मदद करेंगे। लेकिन हां एक बात का ध्यान की अधिक मात्रा में किसी भी चीज का सेवन न करें ये आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

तो ये थे कुछ घरेलू उपचार जिनकी मदद से आप पीरियड्स को समय से पहले लाकर अपने प्लान को बना सकती है और मजे से घूमने जा सकती है।

क्या सूंदर शिशु को निहारने से शिशु सूंदर पैदा होता है?

गर्भ में पल रहे शिशु की सुंदरता

हर महिला चाहती है की उसके गर्भ में पल रहा शिशु सूंदर, गोरा व् खूबसूरत हो। और इसके लिए गर्भवती महिला को जो कुछ भी करने के लिए कहता है महिला उसे करने लगती है। जैसे की ऐसा माना जाता है की कुछ ऐसी चीजें है जिन्हे यदि महिला अपनी डाइट में शामिल करती है तो उससे शिशु की स्किन में निखार आने लगता है, और शिशु गोरा व् सूंदर पैदा होता है। और इसके लिए महिला नारियल, नारियल पानी, सेब, गाजर, संतरा आदि का सेवन कर सकती है, तो प्रेगनेंसी के दौरान महिला इन चीजों का सेवन शुरू कर देती है। वैसे ही पुराने समय से ही लोग ऐसा मानते हैं की गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान जिसे सबसे ज्यादा देखती है शिशु की आकृति उसी पर जाने लगती है, जैसे की अधिकतर गर्भवती महिला प्रेगनेंसी की खबर सुनते ही सबसे पहले अपने कमरे में सूंदर, गोरे व् प्यारे प्यारे शिशु की तस्वीर लगाना शुरू कर देती है। लेकिन क्या यह सच है इसके बारे में आइये कुछ बातें जानते हैं।

क्या सूंदर शिशु को देखने से शिशु बिल्कुल वैसा ही होता है?

गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान जिन चीजों का सेवन करती है, जो भी काम करती है उसका सीधा असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है यह बात बिल्कुल सच है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है ताकि गर्भ में पल रहे शिशु को किसी भी तरह का नुकसान न हो। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान महिला यदि सूंदर शिशु को निहारती है तो शिशु बिल्कुल वैसा ही हो, ऐसा बिल्कुल भी जरुरी नहीं होता है। क्योंकि गर्भ में आने से लेकर जन्म तक और उसके आगे शिशु का विकास बढ़ने तक शिशु बहुत से बदलाव से गुजरता है, और यह बदलाव केवल शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि शिशु की आकृति से जुड़े भी हो सकते हैं।

और जहां तक बात आती है की गर्भ में पल रहा शिशु किसी सूंदर शिशु को निहारने से बिल्कुल वैसा ही हो जाता है यह बात सही नहीं है। बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के नाक नक़्शे, रंग, शिशु की स्किन, बाल, शिशु का कद आदि सभी वंशाणु यानी की जीन्स तय करते हैं। जो की माँ बाप द्वारा शिशु को मिलते हैं, बचपन में शिशु को देखकर बहुत से लोग ऐसा कह सकते हैं की यह मां पर गया है या पिता पर गया है, तो कोई उसे दादा या दादी की तरह भी बोल सकता है। ऐसे में जिस तरह आपको अपने माँ और पिता के जीन्स मिले हैं, उसी तरह शिशु को भी अपने माँ और पिता के जीन्स मिले हैं। ऐसे में शिशु थोड़ा माँ या थोड़ा पिता पर जा सकता है। लेकिन वो किसी सूंदर फोटो वाले शिशु जैसा हो ऐसा मानना बिल्कुल गलत होता है।

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखती है, तनाव नहीं लेती है, अच्छे अच्छे विचारों को अपने मन में रखती है, अपनी देखभाल में किसी तरह की कमी नहीं करती है, शिशु के विकास के लिए सभी जरुरी पोषक तत्वों को भरपूर मात्रा में लेती है, आदि। तो इससे शिशु को भरपूर पोषण मिलता है जिससे शिशु को गोरा,म सूंदर व् खूबसूरत बनाने में मदद मिलती है। लेकिन आप सोचें की आप कुछ खाएं गई पीयेंगी नहीं केवल सारा दिन केवल एक सूंदर शिशु को निहारती रहेंगी तो शिशु सूंदर होगा ऐसा नहीं होता है। बल्कि यदि आप अपने अच्छे से ध्यान नहीं रखती है तो इससे गर्भ में शिशु के विकास पर बुरा असर पड़ने के सजातरः आपको भी स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या हो सकती है। ऐसे में यदि आप सूंदर शिशु की चाह रखती है तो कमरे में लगी किसी फोटो को निहारने की बजाय प्रेगनेंसी में अपना अच्छे से ध्यान रखें ताकि शिशु का विकास अच्छे से हो सके।

तो यह है गर्भ में पल रहे शिशु की शक्ल किस पर जाती है इससे जुड़े कुछ टिप्स, साथ ही यदि प्रेगनेंसी के दौरान और शिशु के जन्म के बाद आप शिशु की अच्छे से केयर करती है। तो शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ाने के साथ शिशु को खूबसूरत बनाने और उसकी स्किन को निखारने में भी मदद मिलती है।

थ्रेडिंग के बाद लगे कट को हटाने के ये हैं उपाय और आसान टिप्स!

Tips To Prevent Cuts After Eyebrow Threading

आज के समय में महिलाएं अपने लुक्स को लेकर काफी सजग हो गयी है। मैनीक्योर, पेडीक्योर से लेकर फशियल ब्लीच किसी में कोई कमी नहीं छोडती। इसके अलावा थ्रेडिंग भी इन ब्यूटी ट्रीटमेंटस में से एक है जिसका प्रयोग आइब्रो की शेप को सही रखने और उसके अतिरिक्त बालों को हटाने के लिए किया जाता है। अच्छी तरह से शेप की गयी आइब्रो न केवल आपके चेहरे की खुबसूरती को बढाती है अपितु आपको एक नया लुक भी प्रदान करती है। इतना ही नहीं यह आपके फीचर को बढ़ाकर आंखों को भी निखारती है।थ्रेडिंग के बाद लगे कट

परन्तु कई बार आइब्रो बनवाते समय फेस पर कट लग जाता है। जिनमे कुछ देर तो जलन होती है लेकिन बाद में वह काली पपड़ी के रूप में जम जाता है। तो देखने में काफी खराब लगता है। अगर आपके साथ भी अक्सर थ्रेडिंग बनवाते समय ऐसा होता है तो परेशान होने की आवश्यकता नहीं है क्यूंकि आज हम आपको थ्रेडिंग के बाद लगे कट से छुटकारा पाने के उपाय बताने जा रहे है। इनकी मदद से आप कुछ ही समय से थ्रेडिंग कट से छुटकारा पा सकेंगी।

थ्रेडिंग के बाद लगे कट से छुटकारा पाने के उपाय :-

थ्रेडिंग फेस के लुक को पूरी तरह परिवर्तित कर देती है इसमें कोई दोराहें नहीं। इसीलिए तो आजकल महिलाएं ही नहीं बल्कि पुरुष भी इसका इस्तेमाल करने लगे है। परन्तु बहुत सी महिलाओं की स्किन काफी कोमल और सेंसिटिव होती है जिसके कारण थ्रेडिंग के बाद उनकी आईब्रोज के आसपास कट लग जाते है। यहाँ हम आपको उन्ही कट्स को हटाने के घरेलू उपायों के बारे में बता रहे है।

1. जब भी थ्रेडिंग बनवाएं उसके बाद पानी से चेहरा धोएं :

थ्रेडिंग के दौरान स्किन से बालों को थ्रेड से खींचा जाता है जिसमे कई बार स्किन में कट लगा जाता है। ऐसे में जरुरी है की आप जब भही थ्रेडिंग बनवाएं तो सबसे पहले साफ गुनगुने पानी से अपना चेहरा धोएं। फिर चाहे आपकी स्किन सेंसिटिव हो या नहीं! फेस धोने के लिए हमेशा गुनगुने पानी का ही इस्तेमाल करना चाहिए। फेस धोने बाद पोंछने के लिए कॉटन के कपडे का इस्तेमाल करें। फेस को रगड़ें नहीं बल्कि हलके हाथों से थपथपाकर सुखाएं। अगर आप चाहे तो थ्रेडिंग वाले हिस्से पर डेटॉल का इस्तेमाल भी कर सकती है। इससे इन्फेक्शन नहीं होगा और स्किन नार्मल हो जाएगी।

2. खुशबू वाले उत्पाद के इस्तेमाल से बचें :threading cuts

अगर आपकी स्किन में थ्रेडिंग के बाद कट लग गया है तो उस क्षेत्र पर कम से कम 12 घंटों तक किसी भी ऐसे प्रोडक्ट का यूज न करें जिसमे एसिड आदि का इस्तेमाल किया गया हो। जैसे – मोइस्चराइज़र, क्लींजर या ब्लीच। क्योंकि सी तरह के प्रोडक्ट्स स्किन की उपरी परत को हटा देते है और थ्रेडिंग के बाद स्किन काफी सेंसिटिव हो जाती है ऐसे में अगर आप इन प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करती है जो स्किन पर रिएक्शन हो सकता है। अगर आप चाहे तो इनकी जगह आलू, शहद या खीरे के रस का इस्तेमाल करके, स्किन की इरीटेशन को खत्म कर सकती है।

3. लोशन आदि का प्रयोग किया जा सकता है :

कट लग जाने के बाद अक्सर काले निशान पड़ जाते है जो काफी खराब लगते है। इससे बचने के लिए आप क्रीम या लोशन का इस्तेमाल कर सकती है। वैसे आप चाहे तो थ्रेडिंग बनवाने के बाद इस्तेमाल होने वाले astrigent का भी इस्तेमाल कर सकती है। इसके अतिरिक्त दालचीनी का पानी या गुलाबजल की मदद भी ले सकती है। यह प्राकृतिक तरीकों से आपकी स्किन की केयर करेंगे जिससे पिम्पल और दाने की समस्या भी नहीं होगी।

4. कट से बचने के लिए थ्रेडिंग से पहले इनका ध्यान रखें :

थ्रेडिंग बनवाने से पहले फेस को अच्छी तरह से धो कर पोंछ लेना चाहिए। एक और बात थ्रेडिंग बनवाने से पहले कभी भी स्किन में कोई लोशन या क्रीम न लगायें। क्योंकि आइब्रो जितनी ड्राई होगी उतनी ही अच्छी बनेंगी। इसके लिए आप थ्रेडिंग बनवाने से पहले आइब्रो को गुनगुने पानी से भी धो सकती है। इससे दर्द कम होगा। अगर कट लग गया है तो रात में सोने से पहले आइब्रो वाली जगह पर शुद्ध नारियल तेल का प्रयोग करें। इससे कट में जलन नहीं होगी और आराम मिलेगा।

तो ये थी कुछ टिप्स जिनकी मदद से आप थ्रेडिंग के बाद लगे कट को बड़ी ही आसानी से दूर कर सकती है। और क्यूंकि ये उपाय काफी आसान और सस्ते है तो आप बिना किसी परेशानी के इनका इस्तेमाल कर सकती है।

बाल झड़के पतले हो गए हैं? ये उपाय अपनाएं

Baal Lambe karne ke upay : बालों को महिलाओं की खूबसूरती का अभिन्न हिस्सा माना जाता है। इसीलिए सभी महिलाएं लंबे और सुंदर बालों की चाह रखती हैं। परन्तु आजकल के समय में बालों की लंबाई और सुंदरता को बरकरार रख पाना बहुत मुश्किल होता जा रहा है जिसके अनेकों कारण है –

  • तनाव
  • हॉर्मोन्स का असंतुलित होना
  • प्रदूषण
  • अनुवांशिकता
  • केमिकल युक्त पदार्थों का प्रयोगों
  • पोषण की कमी
  • एलर्जी
  • बालों की सही देख रेख नहीं करने के कारण बालों की सुंदरता खो जाती है। विशेषकर तब जब आप कामकाजी महिला हो।

पतले बालों को लंबा करने के उपाय :-

बालों का टूटना या झड़ना एक ऐसी समस्या है जिसे हर कोई परेशान रहता है और इस समस्या के कारण बाल पतले हो जाते है जो आपकी पर्सोनलिटी को अफेक्ट करते हैं। अगर आपके बाल भी झड़ने या टूटने के कारण पतले हो गए है तो यहाँ हम आपको कुछ उपाय बता रहें हैं जिनकी मदद से बालों को लंबा और मोटा किया जा सकता है। – Patle baal lambe karne ke upay

1. अंडा :

इसमें प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है जो बालों को मजबूत और घना बनाने के लिए जरुरी होता है।

तरीका –

  • बालों की लंबाई के अनुसार 1 या 2 अंडे लें और तोड़कर अच्छे से मिला लें।
  • अब गीले बालों में इसे लगाएं और आधे घंटे के लिए छोड़ दें।
  • फिर गुनगुने पानी से बाल धो लें।
  • इसका इस्तेमाल आप हफ्ते में 1 या 2 बार कर सकते है।
  • अगर आप चाहे तो अंडे के पीले भाग में एक चम्मच बालों में लगाने वाला तेल डालकर भी अपने बालों की जड़ों में लगा सकती हैं। इससे बाल घने होंगे।

2. जैतून का तेल :

जैतून का तेल बालों को घना करने में मदद करता है और उन्हें मजबूत और स्मूथ भी बनाता है।

तरीका –

  • बालों में गर्म जैतून के तेल से मालिश करें।
  • 30 से 40 मिनट ऐसे ही रहने दें।
  • उसके बाद बालों में शैम्पू कर लें।
  • आप चाहे तो इसे रातभर लगे रहने दे सकतें है और फिर अगली सुबह शैम्पू कर सकतें हैं।
  • इस तेल को शैम्पू के साथ मिलाकर भी लगाया जा सकता है।
  • इस उपाय का इस्तेमाल हफ्ते में 1 या 2 बार किया जा सकता है। – Baal lambe kaise kare

3. एवोकाडो :

यह बालों को मॉइस्चराइज़ करने में मदद करता है जिससे बाल घने होतें हैं। इसमें मौजूद विटामिन इ बालों को मुलायम बनाता है।

तरीका –

  • एक एवोकाडो और केले को क्रश कर लें और फिर उसमे जैतून का तेल मिला लें।
  • अच्छे से मिलाकर बालों की जड़ों में लगाकर मसाज करें।
  • आधा घंटे मिश्रण को बालों में रखें। फिर शैम्पू कर लें।

4. मेथी के बीज :

यह बालों का झड़ना रोकने में मदद करती है और बालों को ग्रोथ अच्छी करती है।

तरीका –

  • इसके लिए १-२ चम्मच मेथी के बीजों को पानी में 8 से 10 घंटे के लिए भिगोकर रख दें।
  • उसके बाद मेथी को छानकर मिक्सी में पीस लें।
  • अब इसमें 2 चम्मच नारियल तेल मिलाएं। और अपने बालों में अच्छे से लगाएं।
  • आधा घंटे रखें और फिर गुनगुने पानी से बाल धो लें।
  • एक हफ्ते तक रोजाना इसका इस्तेमाल करें बालों का रूखापन और झड़ना बंद हो जाएगा। – Beautiful Hair

5. आंवला :

आंवला में बहुत से लाभकारी पोषक तत्व पाए जाते है जो बालों की जड़ों को मजबूत करके लंबाई बढ़ाने में मदद करते हैं।

तरीका –

  • इसके लिए 1 चम्मच आंवला पाउडर को 2 चम्मच नारियल तेल में मिलाकर उबालने तक अच्छे से गर्म कर लें।
  • अब तेल को छान लें और हल्का गुनगुना होने से पहले जड़ों में अच्छे से लगा लें।
  • उसके बाद अगली सुबह बाल में शैम्पू कर लें।
  • इस उपाय का इस्तेमाल तब तब करें जब आप बाल धोने वाले हों।
  • अच्छे बालों के लिए आंवला फल और आंवला फ्रूट जूस का सेवन भी किया जा सकता है।

6. अरंडी का तेल :

अरंडी के तेल में बहुत से गुण पाए जाते हैं जो बालों को मजबूत, लंबा और घना बनाने में मदद करते है।

तरीका –

  • इसके लिए अरंडी के तेल की  1/4 और नारियल तेल की 3/4 मात्रा मिलाकर गर्म कर लें।
  • अब इसे अपने बालों की जड़ों में लगाएं और हलके हाथों से मसाज करें।
  • फिर बालों में कंघी कर लें जिससे तेल पुरे बालों में फ़ैल जाए।
  • उसके बाद बालों को गर्म तौलिया से ढक लें।
  • एक घंटे तक ऐसे ही रखें और उसके बाद बालों में शैम्पू कर लें।
  • लंबे बालों के लिए हफ्ते में एक बार इस उपाय का इस्तेमाल करें।

7. अलसी :

अलसी में ओमेगा – 3 फैटी एसिड और प्रोटीन होता है जो बालों को घना करने में मदद करता है। Alsi for Long and Healthy Hair

तरीका –

  • रात में अलसी को पानी में भिगों दें।
  • सुबह जागकर उस अलसी को छानकर 2 कप पानी में तेज आंच पर उबाल लें।
  • जब मिश्रण जेल लगने लगे तो गैस बंद कर दें और उसे छान लें।
  • अब इसमें कोई भी बाल में लगाने वाला तेल मिला लें।
  • मिश्रण के ठंडा होने के बाद बालों में लगाएं।
  • घुंघराले और रूखे बालों के लिए ये उपाय बहुत लाभकारी होता है।

8. संतरे का रस :

संतरे के रस में विटामिन सी होता है जो बालों की प्राकृतिक चमक लौटाने में मदद करता है और साथ ही बालों को हुए नुकसान को भी ठीक करता है।

तरीका – 

  • एक संतरा लेकर उसे मिक्सी में पीस लें।
  • छिलका उतारने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह भी बालों के लिए लाभकारी होता है।
  • पीसने के बाद संतरे के गूदे को बाल में लगा लें।
  • आधे घंटे तक रखें और फिर बाल धो लें।
  • शैम्पू के बाद कंडीशनर जरूर लगाएं, क्योंकि रस का एसिड बालों को रुखा बना सकता है।
  • अच्छे बालों के लिए सप्ताह में एक बार इस उपाय का इस्तेमाल करें फायदा होगा।

ये थे झड़-झड़ कर पतले हो गए बालों को लंबा करने के घरेलू उपाय जिनकी मदद से बालों को घना मजबूत और मुलायम बनाया जा सकता है। अगर आप भी नियमित रूप से अपने बालों में इन उपायों का इस्तेमाल करेंगे तो आपके बाल अच्छे हो जाएंगे। – Healthy Hair

गर्भवती महिला को घर का काम कब नहीं करना चाहिए

प्रेगनेंसी में घर का काम

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान भरपूर आराम की सलाह दी जाती है, लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं होता है की प्रेग्नेंट महिला किसी काम को न करे। बल्कि थोड़ा बहुत काम गर्भवती महिला को करना चाहिए ताकि शरीर एक्टिव रहे। क्योंकि एक्टिव रहने से बॉडी में भरपूर एनर्जी बनी रहती है, जिससे महिला को शारीरिक परेशानियों से व् अपने आप को थोड़ा व्यस्त रखकर मानसिक रूप से भी स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। लेकिन कई बार महिला की प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स होती है, गर्भ में शिशु की पोजीशन सही नहीं होती है, अन्य और भी कई कारण होते हैं जब गर्भवती महिला को घर के किसी भी काम को न करने की सलाह दी जाती है।

प्रेग्नेंट महिला को कब घर का काम नहीं करना चाहिए

प्रेगनेंसी के दौरान ऐसी बहुत सी स्थितियां होती है जहां गर्भवती महिला को पुरे आराम की सलाह दी जाती है, और महिला को आराम करना भी चाहिए ताकि गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ इसका बुरा असर शिशु पर भी न पड़े। तो आइये अब जानते हैं की गर्भवती महिला को घर का काम कब नहीं करना चाहिए।

पहली तिमाही में

पहली तिमाही यानी की प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने किसी भी गर्भवती महिला के लिए सबसे अहम होते हैं। क्योंकि इस समय शिशु के दिल की धड़कन आने के साथ शिशु के अंग भी बनने शुरू हो जाते है। और प्रेगनेंसी के शुरूआती तीन महीनों में गर्भवती महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव भी बहुत तेजी से होते हैं जिसके कारण महिला को बहुत सी शारीरिक समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है। साथ ही इस दौरान महिला द्वारा बरती गई थोड़ी सी भी लापरवाही गर्भपात का कारण भी बन सकती है, ऐसे में पहली तिमाही में ज्यादातर डॉक्टर्स भी ज्यादा काम न करने की सलाह देते हैं ताकि शिशु के अंगो का विकास बेहतर तरीके से होने के साथ गर्भपात से भी बचने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स होने पर

सभी गर्भवती महिलाएं नहीं लेकिन कई बार कुछ गर्भवती महिलाओं की प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स होती है, जिसके कारण महिला को बेड रेस्ट की सलाह डॉक्टर द्वारा दी जाती है। ऐसे में गर्भवती महिला को भरपूर आराम करना चाहिए और जितना हो सके घर का काम नहीं करना चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी में आई समस्या से बचे रहने में मदद मिल सके।

गर्भपात

यदि महिला का गर्भधारण करने से पहले गर्भपात हो चूका हो तो ऐसे में फिर से गर्भपात का खतरा होता है। और यदि महिला के साथ ऐसा हुआ है तो भी महिला को प्रेगनेंसी के दौरान काम न करने की सलाह दी जा सकती है।

ब्लीडिंग की समस्या होने पर

कुछ गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी में स्पॉटिंग की समस्या हो सकती है, ऐसे में स्पॉटिंग की समस्या न बढे और महिला का गर्भपात न हो। ऐसी समस्या से बचने के लिए भी गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान काम से बचने की सलाह दी जाती है।

शिशु की पोजीशन

आज कल ऐसे बहुत से मामले सामने आते हैं जिसमे गर्भ में पल रहा शिशु गर्भनाल को अपनी गर्दन में लपेट लेता है। जिसके कारण शिशु को मूवमेंट करने में दिक्कत आती है। यह समस्या ज्यादातर प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में होती है, ऐसे में अल्ट्रासॉउन्ड की रिपोर्ट देखने के बाद डॉक्टर्स महिला को रेस्ट की सलाह देते है, और ऐसे केस में महिला को नॉर्मल डिलीवरी की अपेक्षा सिजेरियन डिलीवरी के चांस ज्यादा होते हैं।

मुश्किल से हुई प्रेगनेंसी में

यदि महिला को बहुत मुश्किल से प्रेगनेंसी हुई है, या महिला को अधिक उम्र में गर्भधारण होता है। तो ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों से बचने के लिए भी महिला को आराम की सलाह दी जाती है। साथ ही अधिक उम्र में माँ बनना या बहुत मुश्किल से गर्भधारण होने के कारण प्रेगनेंसी में समस्या आने के चांस ज्यादा होते हैं।

पेट के बाहर आने पर

चौथे महीने के बाद से ही गर्भवती महिला का पेट बाहर निकलना शुरू हो जाता है, ऐसे में पेट के बाहर आने के कारण गर्भवती महिला को उठने बैठने, काम करने, चलने में, सोने आदि में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में पेट के बाहर आने पर भी महिला को अधिक काम न करने की सलाह दी जाती है। खासकर वो काम जिसके कारण पेट पर दबाव पड़ता है क्योंकि पेट पर अधिक दबाव पड़ने के करने के कारण महिला के साथ गर्भ में शिशु को भी परेशानी का अनुभव हो सकता है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी से जुडी कुछ टिप्स, ऐसे में यदि महिला की इनमे से कोई भी कंडीशन हो तो जितना हो सके महिला को आराम करना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला को इन सभी परेशानियों से बचने में और एक स्वस्थ शिशु को जन्म देने में मदद मिल सके।