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गर्भवती महिला को बरसात के मौसम में क्या खाने से बचना चाहिए?

मानसून में प्रेगनेंसी

गर्भवती महिला को पूरे नौ महीने तक अपने स्वास्थ्य का बेहतर तरीके से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है ताकि गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें। खासकर मौसम में होने बदलाव पर महिला को ज्यादा सतर्क रहने की जरुरत होती है और बरसात के मौसम में बीमारियां फैलने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। मानसून में नमी वाला मौसम होने के कारण कीटाणु अधिक सक्रिय हो जाते हैं ऐसे में इन्फेक्शन, फ्लू की समस्या होने खतरा भी बढ़ जाता है। जिससे गर्भवती महिला के साथ गर्भ में शिशु पर भी असर पड़ सकता है, ऐसे में मानसून में होने वाली समस्या से बचने के लिए गर्भवती महिला को अपने स्वास्थ्य का बेहतर तरीके से ध्यान रखना चाहिए।

प्रेग्नेंट महिला को बरसात के मौसम में क्या खाने से बचना चाहिए

मानसून के मौसम में खाने पीने की चीजों में बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की जरुरत होती है क्योंकि खाने पीने की चीजों में सावधानी न बरतने के कारण गर्भवती महिला को इन्फेक्शन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही इसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु का स्वास्थ्य भी प्रभावित हो सकता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भवती महिला को मानसून के मौसम में क्या क्या खाने से बचना चाहिए।

फल

आम, तरबूज, खरबूजा आदि यह कुछ ऐसे फल हैं जिनमे पानी की अधिकता होती है और गर्मी में यह आसानी से मार्किट में मिल जाते हैं। लेकिन इनके अधिक सेवन से गर्भवती महिला को बचना चाहिए, ऐसे फल जल्दी खराब हो जाते है जिसके कारण इनमे विषैले तत्व इक्कठे होने के कारण इनका सेवन करने पर गर्भवती महिला को नुकसान पहुंचा सकते हैं। साथ ही इनके सेवन से फंगल, बैक्टेरियल इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है जो गर्भवती महिला के स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर सकते हैं।

हरी पत्तेदार सब्जियां

हरी पत्तेदार सब्जियों जैसे पालक, गोभी, आदि का सेवन गर्भवती महिला के लिए बहुत फायदेमंद होता है, लेकिन मानसून के मौसम में हरी पत्तेदार सब्जियों पर मिट्टी व् कीड़े आदि होने के कारण बैक्टेरियल इन्फेक्शन का खतरा रहता हैं। जो गर्भवती महिला के स्वास्थ्य के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है। ऐसे में महिला को हरी सब्जियों का सेवन करने से परहेज करना चाहिए या फिर अच्छे से धोने और चेक करने के बाद इनका खाने के लिए इस्तेमाल करना चाहिए।

ऑयली फ़ूड

बरसात के मौसम में पकोड़े, ज्यादा मसाले वाले आहार खाने की इच्छा हो सकती है, लेकिन गर्भवती महिला को ज्यादा तेलीय, ज्यादा नमक वाले आहार का सेवन करना से बचना चाहिए। क्योंकि इनका सेवन करने के बाद इन्हे हज़म करने में दिक्कत हो सकती है जिसके कारण गर्भवती महिला को परेशानी पेट सम्बन्धी समस्या जैसे एसिडिटी आदि का सामना करना पड़ सकता है।

स्ट्रीट फ़ूड

स्ट्रीट फ़ूड का सेवन किसी भी मौसम में गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए, लेकिन कई बार जीभ का स्वाद बदलने के लिए महिला इसका सेवन कर सकती है, लेकिन साफ़ सफाई वाली जगह से ही इन्हे खाने के लिए लेना चाहिए। इसके अलावा बरसात के मौसम में इनका सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए क्योंकि इनके सेवन के कारण गर्भवती महिला को बैक्टेरियल इन्फेक्शन होने के खतरा हो सकता है।

पानी

गर्भवती महिला को फ़िल्टर का पानी की मानसून के मौसम में उपयोग में लाना चाहिए, क्योंकि पानी के माध्यम से भी इस मौसम में इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है। साथ ही ज्यादा सुरक्षा के लिए आप चाहे तो फ़िल्टर के पानी को भी उबाल कर ठंडा करके उसका सेवन कर सकते हैं।

खट्टी चीजें

इमली, अचार, चटनी आदि का सेवन भी मानसून के मौसम में गर्भवती महिला को कम करना चाहिए, क्योंकि इसके कारण गर्भवती महिला को डीहाइड्रेशन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। जिसके कारण गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को दिक्कत हो सकती है।

कटे हुए फल

बहुत देर तक रखे हुए कटे पड़े फलों का सेवन भी गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसके कारण गर्भवती महिला को पेट से जुडी समस्या या इन्फेक्शन आदि की समस्या हो सकती है।

तो यह हैं कुछ चीजें जिनका सेवन करने से गर्भवती महिला को मानसून के मौसम में बचना चाहिए, ताकि गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। इसके अलावा गर्भवती महिला को पूरी बाजू के कॉटन के कपडे पहनने चाहिए ताकि मच्छर आदि के काटने के कारण गर्भवती महिला को इन्फेक्शन की समस्या न हो साथ मानसून के मौसम में गर्भवती महिला को सिंथेटिक कपडे नहीं पहनने चाहिए क्योंकि इसके कारण स्किन पर खुजली आदि की समस्या का सामना गर्भवती महिला को करना पड़ सकता है।

स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए यह खाना जरुरी होता है

स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए यह खाना जरुरी होता है, शुक्राणु की संख्या में कमी या शुक्राणु की क़्वालिटी के बेहतर न होने के कारण प्रजनन क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है। जिसके कारण न तो पुरुष अपने संबंधों का बेहतर आनंद ले पाते हैं साथ ही इसके कारण महिला को गर्भाधारण में भी समस्या आ सकती है। स्पर्म काउंट में कमी का कारण आपकी गलत आदतें, गलत खान पान, गलत जीवनशैली आदि हो सकते हैं। इसके अलावा और भी कई कारण हो सकते हैं जिनके कारण स्पर्म काउंट में कमी आ सकती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको स्पर्म काउंट में कमी के क्या कारण होते हैं? व् इस समस्या को दूर करने के लिए कौन से खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए इस बारे में बताने जा रहे हैं।

स्पर्म काउंट में कमी के कारण

  • यूरिन इन्फेक्शन की समस्या अधिक होने, यौन संक्रमण आदि होने के कारण शुक्राणु की संख्या में कमी आ सकती है।
  • किसी बिमारी के इलाज के लिए लम्बे समय से यदि आप दवाइयों का सेवन कर रहें हैं तो भी यह समस्या हो सकती है।
  • लम्बे समय तक साइकिल चलाने के कारण भी ऐसा हो सकता है।
  • यदि आप ऐसे वातावरण में काम करते हैं जहां गर्मी अधिक होती है तो इसके कारण शुक्राणु पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
  • तनाव भी शुक्राणु की संख्या व् शुक्राणु की गुणवत्ता में कमी का कारण हो सकता है।
  • शराब, धूम्रपान, तम्बाकू व् अन्य नशीली चीजों का सेवन करने से भी शुक्राणु की संख्या में कमी आ सकती है।
  • यदि आपने कोई सर्जरी करवाई है तो भी ऐसा हो सकता है।
  • वजन अधिक होने के कारण बॉडी में हार्मोनल असंतुलन हो सकता है जिसके कारण यह समस्या हो सकती है।

स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए क्या खाएं

बेहतर खान पान न केवल आपको शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने में मदद करता है बल्कि इससे स्पर्म काउंट को भी बेहतर रखने में भी मदद मिलती है। तो आइये आज हम आपको ऐसे कुछ खाद्य पदार्थों के बारे में बताने जा रहे हैं। जिनका सेवन करने से स्पर्म काउंट को बढ़ाने में मदद मिलती है।

टमाटर

  • टमाटर में लाइकोपीन मौजूद होता है।
  • जो स्पर्म काउंट को बढ़ाने के साथ उसकी गुणवत्ता को बेहतर करने में भी मदद मिलती है।
  • और यदि टमाटर को ओलिव आयल में पकाकर खाया जाता है तो इसका फायदा और भी बढ़ जाता है।

स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए खाएं पालक

  • आयरन व् फोलिक एसिड से भरपूर से भरपूर पालक का सेवन करने से भी स्पर्म काउंट को बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • क्योंकि फोलिक एसिड स्वस्थ शुक्राणु के उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिलती है।

केला

  • केले में विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन बी 1, ब्रोमेलिन एंजाइम, मौजूद होते हैं।
  • जो शुक्राणु की गुणवत्ता व् शुक्राणु की संख्या को बढ़ाने में मदद करते हैं।

स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए खाएं डार्क चॉकलेट्स

  • एमिनो एसिड्स, एंटी ऑक्सीडेंट्स डार्क चॉकलेट्स में भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं।
  • जो स्पर्म काउंट को बढ़ाने में मदद करते हैं।

लहसुन

  • लहसुन में एलिसिन नामक पोषक तत्व होता है जो प्रजनन अंगो में ब्लड फ्लो को बढ़ाने में मदद करता है।
  • साथ ही लहसुन में सेलेनियम भी मौजूद होता हैं।
  • जो स्पर्म काउंट की गतिशीलता को बढ़ाने में मदद करता है।

अखरोट

  • अखरोट में ओमेगा 3 फैटी एसिड्स मौजूद होते हैं।
  • जो पुरुष के प्रजनन अंगो में ब्लड फ्लो को बढ़ाने के साथ स्पर्म काउंट को भी बढ़ाने में मदद करता है।

स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए खाएं ब्रोकली

  • फोलिक एसिड ब्रोकली में भी भरपूर मात्रा मौजूद होता है।
  • और फोलिक एसिड शुक्राणु की गुणवत्ता को बेहतर करने के साथ शुक्राणु की संख्या में वृद्धि करने में भी मदद करता है।

अंडा

  • विटामिन व् प्रोटीन से भरपूर अंडा शुक्राणु की गुणवत्ता को बेहतर करने में मदद करता है।
  • जिससे शुक्राणु की संख्या को बढ़ाने में भी मदद मिलती है।
  • इसीलिए शुक्राणु की गुणवत्ता को बेहतर करने के लिए एक दिन में कम से कम दो अंडे का सेवन जरूर करना चाहिए।

अनार

  • अनार में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स शुक्राणु की गुणवत्ता को बढ़ाने में मदद करते हैं।
  • साथ ही अनार का सेवन करने या अनार का जूस पीने से शुक्राणु की संख्या को बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

संतरा

  • संतरे में विटामिन सी की मात्रा मौजूद होती है जो स्वस्थ स्पर्म का उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है।
  • ऐसे में यदि आप स्पर्म काउंट को बढ़ाना चाहते हैं तो इसके लिए संतरे का सेवन जरूर करना चाहिए।

कद्दू के बीज

  • अमीनो एसिड और फाइटोस्‍टेरॉल कद्दू के बीज में मौजूद होते हैं।
  • जो प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के साथ स्पर्म काउंट को बढ़ाने में भी मदद करते हैं।
  • ऐसे में आपको कद्दू के बीज अपने आहार के साथ मिलाकर खाने या कच्चे खाने से शुक्राणु की संख्या को बढ़ाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ खाद्य पदार्थ जिनका सेवन करने से शुक्राणु की गुणवत्ता और शुक्राणु की संख्या को बढ़ाने में मदद मिलती है। तो यदि आप भी इस समस्या का सामना कर रहे हैं तो इस समस्या से बचाव के लिए इन खाद्य को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें। ताकि आपको इस परेशानी से आसानी से निजात पाने में मदद मिल सके।

क्या प्रेगनेंसी के दौरान व्यायाम करना सेफ है?

क्या प्रेगनेंसी के दौरान व्यायाम करना सेफ है, गर्भावस्था के दौरान व्यायाम कर सकते हैं या नहीं, गर्भवती महिला व्यायाम करते समय इन बातों का ध्यान रखें, प्रेगनेंसी के दौरान व्यायाम कर सकते हैं या नहीं

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बहुत सावधानी बरतनी पड़ती है। ताकि गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। खान पान, उठने बैठने, यहां तक की महिला को अपनी सोचने के तरीके तक का अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है। इस दौरान महिला के मन में तरह तरह के सवाल उठ रहे होते हैं, खासकर जो महिलाएं पहली बार माँ बन रही होती है उन्हें तो समझ ही नहीं आता है की क्या सही है क्या गलत और ऐसे में वो हर किसी से राय लेती रहती हैं। ऐसे ही कई बार गर्भवती महिलाएं यह सवाल करती है की क्या प्रेग्नेंसी के दौरान व्यायाम करना सेफ है या नहीं? तो लीजिये आज हम आपको इसी सवाल का जवाब देने जा रहें हैं।

प्रेगनेंसी में व्यायाम कर सकते हैं या नहीं

गर्भवती महिला को भरपूर आराम करने की सलाह दी जाती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं होता है की वो व्यायाम न करें। बल्कि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान सेफ तरीके या किसी ट्रेनर की राय लेकर व्यायाम कर सकती है। क्योंकि व्यायाम करने से स्वस्थ रहने में मदद मिलती है, शिशु का विकास अच्छे से होता है, प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली बहुत सी परेशानियों का हल होता है, बॉडी में ब्लड फ्लो बेहतर होता है, आदि। लेकिन व्यायाम करने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है की आप हर तरह का व्यायाम कर लें, बल्कि शरीर को कोई परेशानी न हो और प्रेगनेंसी में किसी तरह की समस्या न हो ऐसा व्यायाम महिला को करने की सलाह दी जाती है। तो लीजिये अब जानते हैं की गर्भवती महिला किस तरह का व्यायाम कर सकती है।

चहलकदमी

वॉक करना गर्भवती महिला के लिए बहुत फायदेमंद होता है, सुबह या शाम किसी समय भी पार्क या घर की छत आदि पर आप वॉक कर सकती है। इससे आपके शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह अच्छे से होता है, आपको तनाव आदि से निजात मिलता है, प्रेगनेंसी के दौरान चर्बी जमने की समस्या से बचाव होता है, आदि। तो यह एक आसान व्यायाम है जो गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए।

तैराकी

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला हफ्ते में एक बार तैराकी भी कर सकती है,क्योंकि स्विम करते समय पानी में होने कारण आपके पेट के वजन को सहारा मिलता है। यह महिला के लिए बहुत फायदेमंद होती है, इससे महिला के दिल और फेफड़ों को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है, कमर दर्द से आराम मिलता है, सूजन से आराम मिलता है, महिला फ्रेश महसूस करती है, आदि। लेकिन स्विमिंग के लिए किसी साफ़ सुथरी जगह का चुनाव ही करना चाहिए।

मांसपेशियों के लिए व्यायाम

यह व्यायाम करने से महिला को प्रसव के दौरान आने वाली परेशानियों से बचाव करने में मदद मिलती है। इसे करने के दौरान महिला एक बड़ी बॉल पर कमर सीधी करके बैठ जाती है, जिससे कमर की मांसपेशियों को सहारा मिलता है। उसके बाद आप अपने हाथों को स्ट्रेच भी कर सकती है, यह आप किसी ट्रेनर के अंदर कर सकती है।

प्रेगनेंसी के दौरान व्यायाम करते समय इन बातों का ध्यान रखें

  • ज्यादा उछलने, कूदने, भागने, पेट पर जोर पड़ने वाला व्यायाम नहीं करना चाहिए।
  • व्यायाम करते हुए यदि आप थक जाते हैं तो बीच -बीच में आराम करते रहना चाहिए।
  • व्यायाम करते समय बिल्कुल भी तेजी नहीं करनी चाहिए।
  • यदि आपकी प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स हैं और डॉक्टर ने आपको बेड रेस्ट की सालाह दी है तो आपको व्यायाम नहीं करना चाहिए।
  • व्यायाम करते समय ज्यादा भार उठाने वाले व्यायाम को नहीं करना चाहिए।
  • गर्भाशय की ग्रीवा कमजोर है तो भी व्यायाम नहीं करना चाहिए।
  • व्यायाम करने से पहले एक बार डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान व्यायाम करने से जुड़े कुछ टिप्स, इससे आपको प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। इसीलिए आराम के साथ महिला को व्यायाम भी जरूर करना चाहिए, ताकि प्रेगनेंसी के दौरान भी महिला फिट और एक्टिव रह सके।

चेहरे की स्किन टाइट करने के घरेलू तरीके

उम्र बढ़ने के साथ चेहरे की स्किन लूज़ होना आम बात होती है। साथ ही गलत खान पान के कारण, गलत लाइफस्टाइल के कारण भी स्किन ढीली पड़ने लगती है। लेकिन कारण चाहे कोई भी हो पर सच तो यह हैं की, चेहरे की स्किन का ढीला पड़ना आपकी सुंदरता को कम कर देता है। और यदि ऐसा उम्र से पहले हो जाये तो इसके कारण आप समय से पहले बूढ़ी लगने लगती है।

क्योंकि स्किन के ढीले पड़ने के साथ स्किन पर लाइन्स भी नज़र आने लगती है। लेकिन यदि आप अपनी स्किन का अच्छे से ध्यान रखती है, अपने खान पान का ध्यान रखती है, तो आपको स्किन में कसाव को बरकरार रखने और उम्र बढ़ने के बाद भी अपने चेहरे की सुंदरता को बढ़ाने में मदद मिलती है। तो आइये अब जानते हैं कुछ ऐसे घरेलू नुस्खों के बारे में जो आपकी स्किन को टाइट रखने में मदद करते हैं।

अंडा

एक अंडे को तोड़कर आप उसके सफ़ेद हिस्से को अलग कर लें और पीला हिस्सा अलग कर दें। उसके बाद सफ़ेद हिस्से को आप अपने चेहरे पर लगाएं। उसके बाद आराम से लेट जाएँ और कुछ भी न बोलें। जब अंडा सूख जाये तो गुनगुने पानी का इस्तेमाल करके चेहरे को साफ़ करें। हफ्ते में एक से दो बार इस उपाय को करें।

एलोवेरा जैल

एलोवेरा के ताजे पत्ते को काटकर या मार्किट से एलोवेरा जैल लाकर रोजाना रात को सोने से पहले अपने चेहरे पर लगाएं। और सुबह उठकर चेहरे को धो लें। ऐसा रोजाना करें आपको धीरे धीरे इसका असर अपने चेहरे पर जरूर नज़र आएगा।

निम्बू का रस

निम्बू का रस रुई की मदद से या निम्बू को आधा काटकर चेहरे पर रगड़ें, उसके बाद जब आपकी स्किन निम्बू के रस को अच्छे से सोख ले। तब पानी का इस्तेमाल करके अपने चेहरे को धो लें। निम्बू में विटामिन सी होता है जो स्किन में कोलेजेन का निर्माण बढ़ाता है। इससे त्‍वचा में लचीलापन आता है और स्किन को टाइट रहने में मदद मिलती है।

चन्दन

चन्दन स्किन की ख़ूबसूरती को बढ़ाने के साथ स्किन को टाइट रखने में भी मदद करता है। इसके लिए आप चन्दन के पाउडर में गुलाबजल या दूध मिलाकर एक पतले पेस्ट को तैयार करें। उसके बाद मास्क के रूप में इसे चेहरे पर लगाएं। ऐसा हफ्ते में दो से तीन बार करें।

फिटकरी

थोड़े से पानी में फिटकरी को डालकर अच्छे से उबाल लें। उसके बाद इस पानी को ठंडा करके रुई की मदद से दो से तीन बार चेहरे पर लगाएं और फिर सूखने के लिए छोड़ दें। फिर साफ पानी का इस्तेमाल कर चेहरे को धो लें। चेहरा धोने के बाद मॉइस्चराइजर जरूर लगाएं। आप किसी मास्क के साथ भी फिटकरी का प्रयोग कर सकती है।

टमाटर

टमाटर को पीसकर रुई की मदद से अपने चेहरे पर लगाएं। पंद्रह से बीस मिनट तक चेहरे पर इस पेस्ट के लगे रहने के बाद चेहरे को धो लें। ऐसा करने से न केवल चेहरे का निखार बढ़ता है। बल्कि चेहरे की स्किन को टाइट होने में भी मदद मिलती है।

पपीता और चावल का आटा

दो चम्मच पीसा हुआ पपीता और दो चम्मच चावल का आटा लेकर इसे अच्छे से मिक्स कर दें। अब इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं और दस पंद्रह मिनट के बाद चेहरे को धो लें। ऐसा हफ्ते में दो बार जरूर करें, इस उपाय को करने से भी आपको स्किन को टाइट करने में मदद मिलती है।

दही

थोड़ी सी दही लें और उसमे कुछ बूंदे निम्बू के रस की मिलाएं। अब इस पेस्ट को चेहरे कर लगाकर तीन से पांच मिनट मसाज करें और दस मिनट तक चेहरे पर लगे रहने दें। उसके बाद चेहरे को धो लें आपको फायदा मिलेगा।

मुल्तानी मिट्टी

एक कटोरी में एक से डेढ़ चम्मच मुल्तानी मिट्टी का पाउडर, एक चम्मच शहद और थोड़ा सा गुलाबजल डालकर अच्छे से मिक्स करके एक पेस्ट तैयार करें। अब इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं और इस पेस्ट को सूखने दें। सूखने के बाद चेहरे को साफ़ पानी से धो दें। ऐसा करने से भी चेहरे की स्किन को टाइट करने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ बेहतरीन टिप्स जिन्हे ट्राई करने से चेहरे की स्किन में कसाव को बरकरार रखने में मदद मिलती है। साथ ही यदि आपके चेहरे की स्किन ढीली है तो आपको चेहरे की स्किन को टाइट करने में मदद मिलती है। यदि आपको भी स्किन से जुडी यह परेशानी है तो आप भी इन आसान टिप्स को ट्राई करके चेहरे से जुडी इस परेशानी से निजात पा सकती है।

नाख़ून की चमक बढ़ाने के उपाय

जब भी आप किसी से मिलते हैं तो उनसे हाथ मिलाते हैं और ऐसा केवल पुरुष ही नहीं बल्कि महिलाएं भी करती है। ऐसे में आपकी पर्सनैलिटी सबको अपनी और आकर्षित करें इसके लिए आपके चेहरे की ख़ूबसूरती, आपके बेहतरीन कपड़ों के साथ आपके हाथों का खूबसूरत होने भी जरुरी होता है। और हाथों की ख़ूबसूरती तब और भी बढ़ जाती है जब आपके नाख़ून भी खूबसूरत होते हैं।

कुछ लोगो को लम्बे नाख़ून रखने का शौक तो होता है लेकिन उनके नाख़ून में वो चमक नहीं होती है। यदि आप भी उन्ही में से एक हैं तो यह आर्टिकल आपके लिए ही है। क्योंकि आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बताने जा रहे हैं जो आपके नाख़ून की ख़ूबसूरती को बढ़ाने के साथ नाखूनों को लम्बा करने में मदद करता है। तो आइये जानते हैं की वो टिप्स कौन से हैं।

नाखूनों में मेल न जमा होने दें

नाखूनों की ख़ूबसूरती कम होने का सबसे पहले कारण होता है की आप अपने नाखूनों की साफ़ सफाई नहीं रखती है। यदि आप चाहती है की आपके नाख़ून चमकदार रहें तो इसके लिए रोजाना आपको अपने नाखूनों की सफाई करनी चाहिए। और हफ्ते में एक बार अपने नाखूनों की शेप भी बनाने चाहिए।

मक्खन

सफ़ेद सफ़ेद मक्खन खाने में स्वाद तो होता ही है लेकिन मक्खन का इस्तेमाल करने से आपके नाखूनों को भी खूबसूरत बनाने में मदद मिलती है। और इसके लिए आप मक्खन को गर्म करके उससे अपने नाखून और उसके आस पास के हिस्से की मसाज करें। मसाज करने से दस मिनट बाद गुनगुने पानी से अपने नाखूनों को साफ कर दें।

ओलिव आयल

नाखूनों की ख़ूबसूरती और चमक को बढ़ाने के लिए ओलिव आयल का इस्तेमाल करना भी बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए आप ओलिव आयल को गर्म करके रात को सोने से पहले नाखूनों की मसाज करें। और फिर सुबह उठकर हाथों को धो लें। रोजाना ऐसा करें आपको बहुत जल्दी अपने नाखूनों में फ़र्क़ साफ़ दिखाई देगा।

पेट्रोलियम जेली

पेट्रोलियम जेली से नाखूनों पर मसाज करने से भी नाखून को पोषण मिलता है और नाखूनों की रंगत को निखारने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप पेट्रोलियम जेली से नाख़ून की मसाज करें और थोड़ी देर बाद हाथों को धो लें।

बेबी आयल

बेबी आयल नाखूनों के लिए बहुत फायदेमंद होता है ऐसे में रोजाना रात को नाखूनों की बेबी आयल से मसाज करें। इससे नकहुनों की खोई चमक को बहुत जल्दी वापिस लाने में मदद मिलेगी।

निम्बू

निम्बू को प्राकृतिक क्लीन्ज़र माना जाता है ऐसे में निम्बू को स्लाइस में काटकर अपने नाख़ून की अच्छे से मसाज करें। ऐसा कुछ दिनों तक रोजाना करें ऐसा करने से आपके नाखूनों की चमक को बढ़ाने और उन्हें आकर्षक बनाने में मदद मिलेगी।

नारियल तेल

नारियल तेल का इस्तेमाल करने से भी नाखूनों की खोई चमक को वापस लाने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप नारियल तेल को गुनगुना करके रोजाना अपने नाखूनों की मसाज करें और फिर गुनगुने पानी से उसे साफ कर दें।

विटामिन इ

विटामिन इ जिन जिन चीजों में मौजूद होता है जैसे अखरोट, मूंगफली, बादाम, दालें, आदि उन सभी चीजों का भरपूर मात्रा में सेवन करें। जितना आप विटामिन इ युक्त डाइट लेती है उतना ही ज्यादा आपको नाखूनों की ख़ूबसूरती बढ़ाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिन्हे ट्राई करने से आपके नाखूनों की खोई चमक को वापिस लाने में मदद मिलती है साथ ही यदि आपके नाख़ून नहीं बढ़ रहे हैं तो उन्हें लम्बा होने में भी मदद मिलती है।

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क्या आपकी हथेलियां गरम रहती हैं? ये उपाय करें

क्या आप भी महसूस करते हैं की आपकी हथेलियां गरम रहती है, यदि हाँ तो आपको इसे इग्नोर नहीं करना चाहिए क्योंकि यह भी एक समस्या होती है जो आपके शरीर में होने वाली किसी समस्या की और इशारा करती है, इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे ब्लड का सर्कुलेशन सही न होने के कारण, नशीले पदार्थो का सेवन अधिक करने के कारण, शरीर में होने वाली पोषक तत्वों की कमी के कारण, तनाव भी इसकी एक वजह हो सकता है, इसके अलावा और भी कई कारण हो सकते हैं जिसके कारण आपको हथेलियों के गरम रहने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है, तो आइये विस्तार से जानते हैं की हथेलियों के गरम रहने के क्या कारण हो सकते हैं और आप किस तरह इससे निजात पा सकते है।

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हथेलियों के गरम रहने के कारण:-

  • शरीर में होने वाले विटामिन 12 और 3 की कमी के कारण आपको ये समस्या हो सकती है, साथ ही शरीर में अन्य मिनरल भी भरपूर न हो तो भी आपको इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • तनाव होने पर भी आपको इस परेशानी का अहसास हो सकता है।
  • यदि आपकी बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन सही से नहीं होता है तो भी आपको इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • ब्लड प्रैशर की समस्या भी इसका कारण हो सकता है।
  • वजन के अधिक होने के कारण
  • नशीले पदार्थ जैसे की ड्रग्स, अल्कोहल, धूम्रपान आदि करने पर भी आपको इस समस्या से परेशान होना पड़ सकता है।
  • जो लोग यौन रोगो से ग्रसित होते हैं उन्हें भी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

हथेलियों के गरम रहने की समस्या से बचने के उपाय:-

व्यायाम करें:-

आपके शरीर को फिट रखने और आपकी बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन को सही रखने में मदद करता है, इसीलिए नियमित कम से कम आधा घंटा व्यायाम जरूर करें, इससे आपके शरीर में एनर्जी मिलने के साथ आपको इस समस्या से निजात मिलने में मदद मिलती है।

विटामिन का भरपूर सेवन करें:-

हथेली के गरम रहने का का कारण शरीर में होने वाली विटामिन काम्प्लेक्स की कमी होती है, इसीलिए आपको ऐसे आहार का भरपूर सेवन करना चाहिए जिसमे विटामिन भरपूर मात्रा में हो ताकि आपको इस समस्या से रहत पाने में मदद सकें।

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तनाव न लें खुश रहें:-

खुश रहना आपके शरीर के लिए दवाई का काम करता है, और तनाव आपके शरीर में बीमारियों को आमंत्रित करता है, इसीलिए जितना हो सकें तनाव से बचना चाहिए और छोटी छोटी बातों में ख़ुशी को ढूँढना चाहिए।

स्वस्थ व् पौष्टिक आहार का सेवन करें:-

स्वस्थ व् पौष्टिक आहार व् मिनरल्स युक्त आहार का सेवन करने से आपके शरीर में मिनरल्स हमेशा भरपूर मात्रा में रहते हैं, जिससे आपके शरीर को अच्छे से पोषण मिलता है व् बीमारियों से बचें रहने में भी मदद मिलती है, साथ ही आपको ज्यादा मसालें और तला हुआ भी नहीं खाना चाहिए क्योंकि यह आपके शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है जिससे भी आपको इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

योगासन करें:-

योगासन भी आपके शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है, साथ ही यह आपके शरीर को शारीरिक के साथ मानसिक रूप से भी फिट रखने में मदद करता है, और आपको तनाव से भी राहत दिलाने में मदद करता है, जिससे आप बिलकुल फिट रहते है और आपको इस परेशानी से राहत पाने में भी मदद मिलती है।

नशीले पदार्थो से परहेज रखें:-

शरीर को स्वस्थ रखने और इस समस्या से राहत पाने के लिए आपको नशीले पदार्थो के सेवन से परहेज करना चाहिए, क्योंकि यह केवल आपके शरीर को आंतरिक से खराब करने के साथ आपको बिमारियों के अधीन बना देते हैं इससे बचने के लिए और अपने आप को फिट रखने के लिए इससे परहेज करना चाहिए।

वजन को नियंत्रित रखना चाहिए:-

बढ़ता वजन भी आपके लिए किसी समस्या से कम नहीं होता है, इसके लिए आपको अपने वजन को कंट्रोल करना चाहिए, वजन कण्ट्रोल करने से आपको शारीरिक रूप से फिट रहने के साथ बीमारियों से बचें रहने में भी मदद मिलती है।

डॉक्टर से जांच करवाएं:-

यदि आपकी हथेलियां अधिक गरम रहती हैं तो आपको इसे लम्बे समय तक इग्नोर भी नहीं करना चाहिए और इसके लिए डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए ताकि आपको यदि कोई शारीरिक समस्या है तो उसका इलाज हो सकें और उससे बचने में मदद मिल सकें।

तो ये हैं कुछ कारण और उपाय जो आपकी इस समस्या का समाधान करने में आपकी मदद करते हैं, इसके अलावा आपको एक बार अपने डॉक्टर से भी जांच जरूर करवानी चाहिए ताकि यदि किसी शारीरिक परेशानी के कारण आपको ये समस्या हो रही है तो इस समस्या का समाधान हो सकें।

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प्रेगनेंसी ख़त्म करने का सबसे सही तरीका जानें ये है

गर्भ में शिशु के आने से ही महिला के दिल में नए नए सपने संजोने की शुरुआत हो जाती है। लेकिन सभी के साथ ऐसा नहीं होता है। कई बार आपके न चाहने पर भी बिना सुरक्षा के शारीरिक सम्बन्ध बनाने पर आपका गर्भ ठहर जाता है। ऐसे में महिलाएं इस गर्भ को गिराना चाहती है। और इसके लिए वो तरह तरह के घरेलू उपाय और मेडिकल में उपस्थित सुविधा का इस्तेमाल करती है। लेकिन यदि गर्भ छह या सात हफ्ते का होता है तभी यह तरीके कारागार होते है इससे ज्यादा समय के गर्भ को खत्म करने के लिए डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा की कई महिलाएं ऐसी भी है जिन्हे आज भी इस सुविधा का पता नहीं है, तो गाओं आदि में रहने वाली महिलाएं कई बार शर्म के कारण गर्भ नहीं गिराती है, और ज्यादा बच्चे, और बच्चों में कम गैप होने के कारण उन्हें बहुत परेशानी होती है। ऐसे में जरुरी है की महिलाओ को इस तरह की चीजों से अवगत करवाना चाहिए। तो आइये आज हम आपको ऐसे ही कुछ घरेलू नुस्खे और मेडिकल में आई सुविधा के बारे में बताने जा रहे है, जो आपका अनचाहा गर्भ गिराने में मदद करती है।

गर्भ गिराने के मेडिकल उपाय:-

अनवांटेड किट का इस्तेमाल करके भी आप अपने गर्भ को गिरा सकती है। लेकिन यह भी छह से सात हफ्ते के गर्भ पर ही असरदार होता है। इसमें पांच गोलिया होती है, और यह केवल डॉक्टर के परामर्श पर ही मिलती है, इसीलिए आपको डॉक्टर की राय लेने के बाद इसका इस्तेमाल करना चाहिए। जिससे आपको अनचाहे गर्भ की समस्या से निजात मिल सके।

गर्भ गिराने के घरेलू उपाय:-

कच्चा पपीता:-

कच्छा पपीता विटामिन सी से भरपूर होता है, ऐसे में यदि आप इसका सेवन भरपूर मात्रा में करते हसि इससे आपके गर्भ को गिराने में मदद मिलती है।

सीताफल के बीज:-

सीताफल के बीज भी गर्भपात करने का एक असरदार उपाय है। इसके लिए आप सीताफल के बीजो को अच्छे से पीस कर एक पेस्ट तैयार करें। उसके बाद इसे अच्छे से अपने प्राइवेट पार्ट के आस पास लगाएं, और थोड़ी देर बाद साफ कर दें, ऐसा जब तक करें जब तक आपको ब्लीडिंग न हो।

गर्म पानी:-

पीरियड्स के दिनों में गर्म पानी से नहाने से ब्लीडिंग अच्छे से होती है। ऐसे ही यदि आपको अभी प्रेगनेंसी की शुरुआत है तो आपको नहाने के लिए गर्म पानी का इस्तेमाल करना चाहिए। और नियमित ऐसा करने से आपको फायदा मिलता है।

इलायची:-

इलायची का सेवन करके भी आप आसानी से गर्भ को गिरा सकते है, आप इसका इस्तेमाल चाय में डालकर, या फिर इलायची को पीस कर पाउडर के रूप में सब्ज़ी में करने के साथ मुँह में चबा कर भी कर सकते है।

ड्राई फ्रूट्स का सेवन करें:-

ड्राई फ्रूट की तासीर गर्म होती है, और इसका सेवन प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में नहीं करना चाहिए। और यदि आप गर्भ को गिराना चाहते है तो इनका सेवन आपको भरपूर मात्रा में करना चाहिए। ऐसा करने से आपको अनचाहे गर्भ को गिराने में मदद मिलती है।

कटहल:-

कटहल की सब्ज़ी ज्यादातर लोग नहीं खाते है लेकिन यदि आप अपने अनचाहे गर्भ को गिराना चाहते हैं तो आपको इसका सेवन भरपूर करना चाहिए। क्योंकि इसमें विटामिन सी की अधिकता होने के कारण यह आपके अनचाहे गर्भ को गिराने में मदद मिलती है।

अजवाइन:-

एक गिलास पानी में काला नमक, थोड़ा सा जीरा पाउडर, और अजवाइन डालकर अच्छे से उबाल लें उसके बाद इसे चना कर इसका सेवन करें। दिन में दो बार इसका सेवन गर्भ के गिरने तक नियमित करें यह काफी असरदार नुस्खा होता है।

लहसुन:-

लहसुन की तासीर भी गर्म होती है, इसके अधिक सेवन से भी गर्भपात करने में आपको मदद मिलती है। सुबह उठकर तीन काहर लहसुन की कच्ची कलियाँ, साथ ही सब्जियों में इनका ज्यादा प्रयोग करने से आपको फायदा मिलता है।

गर्भ गिराने के अन्य तरीके:-

  • शारीरिक श्रम अधिक करना चाहिए।
  • पेट के बल काम करना शुरू करे, जिससे पेट पर जोर पड़ेगा और आपके गर्भ को गिराने में मदद मिलेगी।
  • गरम चीजों का सेवन अधिक मात्रा में करने से भी आपको गर्भ गिरने की सम्भावना बढ़ जाती है।
  • भाग दौड़ अधिक करनी चाहिए।
  • व्यायाम आदि अच्छे से करना चाहिए, जिससे बॉडी में थकावट हो और इससे भी गर्भ गिरने में मदद मिलती है।
  • गुड़ और जीरे को मिलाकर गर्म दूध के साथ सेवन करें।
  • दूध में छुहारे उबाल कर उन्हें खाएं, और बाद में गर्म दूध का सेवन करने से भी गर्भ गिराने में मदद मिलती है।
  • इस दौरान शारीरिक सम्बन्ध अधिक बनाने से भी आपके गर्भ को गिराने में मदद मिलती है।

तो ये है कुछ टिप्स जिनका इस्तेमाल करके आप अनचाहे गर्भ से राहत पा सकते है। इसके अलावा ब्लीडिंग के खत्म होने के बाद आपको अल्ट्रासाउंड करवाना चाहिए ताकि आपको गर्भ अच्छे से साफ़ हुआ है या नहीं इस बारे में पता चल सके। और यदि आपका गर्भ दो महीने से ज्यादा का है तो इसके लिए आपको डॉक्टर से ही मदद लेनी चाहिए, क्योंकि ज्यादा समय के गर्भ को गिराने से आपको परेशानी क सामना करना पड़ सकता है।

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1 से 3 महीने के बीच प्रेग्नेंट महिला को यह 10 चीजें जरूर करनी चाहिए

प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने गर्भवती महिला के लिए बहुत खास होते हैं। क्योंकि जहां माँ बनने की खबर सुनकर महिला मातृत्व का अहसास कर रही होती है। वहीँ यह समय महिला के लिए बहुत ही नाजुक समय भी होता है क्योंकि इस दौरान बरती गई थोड़ी सी लापरवाही गर्भवती महिला के साथ शिशु पर भी नकारात्मक असर डाल सकती है। ऐसे में अपनी बेहतर तरीके से केयर करने के साथ कुछ जरुरी चीजें भी हैं जो प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने में महिला को जरूर करनी चाहिए ताकि महिला की सेहत, स्वास्थ्य, दिनचर्या को बेहतर बने रहने में मदद मिल सके। तो आइये आज हम आपको ऐसी दस चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं जो प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में महिला को जरूर करनी चाहिए। ताकि महिला और शिशु दोनों को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

डॉक्टर से मिलें

यदि आप और आपका पार्टनर दोनों शिशु को जन्म देना चाहते हैं तो घर पर प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद सबसे पहले एक अच्छे डॉक्टर से मिलें। जो की प्रेगनेंसी केस में माहिर हो, उसके बाद अपने आखिरी पीरियड की डेट का अच्छे से ध्यान रखें क्योंकि उस डेट को डॉक्टर को जब आप बताती है तो उसी से डॉक्टर आपकी डिलीवरी डेट का अंदाजा लगा सकते हैं। साथ ही डॉक्टर से अपनी यदि कोई पुरानी मेडिकल हिस्ट्री है उसके बारे में कहे ताकि यदि कोई समस्या है तो उसका शुरुआत से ही समाधान हो सके।

जरुरी जांच

प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने में डॉक्टर द्वारा बताई गई सभी जरुरी जांच करवाएं, साथ ही डॉक्टर द्वारा बताई गए सभी विटामिन का सेवन शुरू कर दें। ताकि गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी न हो जिससे गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के विकास को शुरुआत से ही बेहतर तरीके से होने में मदद मिल सके। इसके अलावा आगे भी यदि डॉक्टर किसी जांच की सलाह देते हैं तो उसमे देरी न करते हुए समय पर करवाएं।

किस तरह बताएं अपनी प्रेगनेंसी

यदि आपने घर पर प्रेगनेंसी टेस्ट कर लिया है और वो पॉजिटिव आया है तो आप इसके बारे में सबसे पहले अपने पार्टनर से शेयर करें। ताकि आपको पहले ये जानने में मदद मिल सके की आप अभी शिशु चाहते हैं या नहीं, यदि हाँ तो उसके बाद एक बार डॉक्टर द्वारा भी इसे कन्फर्म करना चाहिए। और हो सके तो दो महीने पूरे होने के बाद घर में बताना चाहिए और तब भी अपने सभी रिश्तेदारों को न बताएं। उसके बाद अपने करीबी लोगो को आप तीसरे महीने के बाद चाहे तो बता सकते हैं, नहीं तो दूसरी तिमाही में आपका पेट थोड़ा थोड़ा निकलने लग जाता है जिससे सभी को अपने आप पता चल जाता है।

दिनचर्या बनाएं

गर्भावस्था के दौरान आपको अपने खाने पीने, सोने उठने, सभी चीजों का अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है ताकि आपको प्रेगनेंसी में स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। ऐसे में यदि आप गर्भवती है तो आपको प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद से ही अपना रूटीन बना लेना चाहिए, ताकि आपको पूरी प्रेगनेंसी में अपनी दिनचर्या को सही रखने में मदद मिल सके। और प्रेग्नेंट महिला यदि अपनी दिनचर्या को सही से फॉलो करती है तो इससे प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली बहुत सी परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी से सम्बंधित किताबें पढ़े

गर्भावस्था की जानकारी के लिए जैसे की प्रेगनेंसी में क्या करें क्या नहीं, प्रेगनेंसी में क्या खाना चाहिए क्या नहीं, गर्भावस्था के दौरान बॉडी में कौन कौन से बदलाव आते हैं, इन सभी की जानकारी के लिए महिला को प्रेगनेंसी से सम्बंधित किताबें पढ़नी चाहिए। इससे गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले बदलाव को समझने में आसानी होती है और यह गर्भवती महिला के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

आराम करें

गर्भावस्था के पहले तीन महीने बहुत ही अहम होते हैं ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को जितना हो सके आराम करना चाहिए ताकि महिला को शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। और महिला जितना शारीरिक रूप से स्वस्थ होती है उतना ही प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने के साथ शिशु के विकास को बेहतर करने में मदद मिलती है।

अपने बेबी बंप की फोटो लें

प्रेगनेंसी की शुरुआत में आपको अपने बेबी बंप की फोटो जरूर लेनी चाहिए क्योंकि इससे आपको शुरुआत और आगे जाकर आपके बेबी बंप में कितना बदलाव आता है इसके बारे में जानने में मदद मिलती है। साथ ही ऐसा करना आपके प्रेगनेंसी के खास अनुभव में शामिल हो जाता है।

पानी भरपूर पीएं

वैसे तो प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने तक गर्भवती महिला को पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए लेकिन पहले तीन महीने में महिला को एक दिन में दस से बारह गिलास पानी पीना चाहिए। क्योंकि इस दौरान बॉडी में तेजी से हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण महिला शारीरिक के साथ मानसिक रूप से भी परेशान हो सकती है। ऐसे में महिला का एनर्जी से भरपूर रहना बहुत जरुरी होता है। और पानी का भरपूर सेवन करने से बॉडी हाइड्रेट रहती है जिससे प्रेग्नेंट महिला की शारीरिक परेशानियों को कम करने के साथ महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में भी मदद मिलती है। पानी के साथ महिला जूस, नारियल पानी आदि का सेवन भी कर सकती है।

खुश रहें

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने बहुत से बदलाव बॉडी में महसूस हो सकते हैं जिसके कारण हो सकता है की गर्भवती महिला तनाव में आ जाएँ। लेकिन गर्भवती महिला को तनाव लेने से बचना है और जितना हो सके अपना अच्छे से ध्यान रखना है और खुश रहना है। और जितना महिला खुश रहती है उतना ही महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है।

बीमा का ध्यान रखें

प्रेग्नेंट महिला को डॉक्टर के पास जाने से पहले ही यदि महिला ने कोई बीमा करवा रखा है तो उसके सभी कागज़ साथ लेकर जाने चाहिए ताकि आपको आर्थिक रूप से मदद मिल सके। साथ ही यदि कोई बीमा नहीं करवा रखा है तो किसी बीमा एजेंट से मिलकर कोई न कोई पालिसी जरूर ले ताकि यदि किसी तरह की कोई दिक्कत हो तो आपको आर्थिक रूप से किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े।

तो यह हैं वो चीजें जो प्रेग्नेंट महिला को पहली तिमाही में जरूर करनी चाहिए। ताकि गर्भवती महिला और शिशु दोनों को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ व् सेहतमंद रहने में मदद मिल सके। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिल सके।

कान में से अलग-अलग आवाजें आने के क्या कारण हो सकते हैं?

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कान से आवाज आना बीमारी या कुछ और?

क्या आपके कान में से भी बिना किसी कारण कोई आवाज गूंजती है? अगर हां, तो आपको सावधान हो जाना चाहिए। क्यूंकि कान में से आवाजे आना ठीक नहीं होता। कुछ लोगों को यह समस्या बिमारी के कारण होती है जबकि कुछ को अन्य वजहों से भी कान में आवाज महसूस होती है।

कानों में सीटी बजना एक आम समस्या है तो अधिकतर लोगों को हो जाती है। इस समस्या के दौरान कान के अंदरूनी, बाहरी और बीच के हिस्सों से आवाज आती है। ऐसे तो कान से आवाज आने के कई कारण हो सकते हैं लेकिन उनमे से कुछ प्रमुख हैं जिनके बारे में आज हम आपको बता रहे हैं।

कान से आवाजें आने के क्या कारण होते हैं?

ऐसे तो कोई निश्चित कारण नहीं हैं लेकिन नीचे कुछ कारण बता रहे हैं जिनमे से हो सकता है किसी वजह से आपके कान से आवाज आ रही हो। अगर कान से आवाज आने के ये कारण नहीं हैं तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए क्यूंकि यह किसी गंभीर बिमारी का संकेत भी हो सकता है।

कान में कोई कीट-पतंगा जाने पर

कई बार रात को सोते समय, बाहर ट्रेवल करते समय, या ऐसे स्थान पर रहने से जहाँ पर कीट-पतंगे बहुत ज्यादा हो। वहां रहने से कान में कीट-पतंगा घुस जाता है। कान के भीतर रौशनी और ऑक्सीजन की कमी के चलते वो पतंगा फड़फड़ाने लगता है जिसके कारण कान से आवाज आती है। कई बार कीट निकल जाने के बाद भी उसका पंख कान के अंदर ही रह जाता है और जब वो पंख थोड़ा सा भी हिला है तो आपको कान में से आवाज आने लगती है।

कान में पानी चले जाने पर

कई बार नहाते समय या मुंह धोते समय कान के अंदर पानी चला जाता है। ऐसे में जब आप उसे निकालने के लिए कान को हिलाते हैं तो ऐसा महसूस होता है जैसे कान से आवाज आ रही हूँ। कान में पानी घुसने पर कान को विपरीत दिशा में टेढ़ा करने से पानी बाहर निकल जाता है।

गंदगी जमा होने पर

कुछ लोगों के कान में वैक्स बहुत ज्यादा होता है। जो लोग कई समय तक अपना कान साफ़ नहीं करते उनके कान में गंदगी जमा हो जाती है। कई बार इस गंदगी के कारण भी कान से आवाज आती है।

बीमार रहने पर

जो लोग हमेशा बीमार रहते हैं या जिन्हे अंदरूनी समस्या ज्यादा होती है उनके कान से भी आवाज आती है। यह केवल अंदरूनी रूप से बीमार रहने पर होता है।

कोल्ड होने पर

कई बार जुखाम होने के कारण भी कान से आवाज आती है। जुखाम होने पर नाक बंद हो जाती है जिसके कारण कान पर दबाब पड़ता है इस दबाब के कारण भी कान से आवाज आती है। इसमें घबराने की जरूरत नहीं है जुखाम ठीक होने पर आवाज आना भी बंद हो जाएगी।

कान की कोई बिमारी होने पर

अगर ऊपर बताए गए किसी भी कारण की वजह से कान में से आवाज नहीं आ रही है तो हो सकता है यह कान की बिमारी का संकेत हो। कान में होने वाली एक बिमारी का लक्षण कान से आवाजें आना भी होता है। अगर कान में सीटी, सुन्नपन या कोई अन्य समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। ऐसा होने पर घरेलू इलाज करना पेशेंट के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।

तो, ये कुछ खास कारण हैं जिनकी वजह से कान से आवाजें आती हैं। आशा है आपके लिए ये आर्टिक्ल फायदेमंद होगा।

अगर गर्भवती महिला रोजाना शहद का सेवन करती है तो क्या-क्या फायदे हो सकते हैं?

शहद स्वाद में मीठा होने के साथ पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है। लेकिन प्रेग्नेंट महिला को खाने की हर चीज को लेकर इस बात का ध्यान रखना जरुरी होता है की उसे खाना चाहिए या नहीं। क्योंकि कुछ चीजें पोषक तत्वों से भरपूर तो होती हैं लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान उनका सेवन की मनाही होती है जैसे की कच्चा पपीता। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला शुगर की समस्या से परेशान हैं, या डॉक्टर्स द्वारा आपको गेस्टेशनल शुगर होने का खतरा बताया गया है तो महिला को शहद के सेवन से परहेज करना चाहिए। बाकी ऐसी कोई दिक्कत न होने पर गर्भवती महिला शहद का सेवन कर सकती है, लेकिन इस बात का ध्यान रखें की यदि आपको शहद के बेमिसाल फायदे चाहिए तो जरुरत के अनुसार (दिन में दो से तीन चम्मच तक) इसका सेवन किया जा सकता है। क्योंकि जरुरत से ज्यादा यदि किसी भी चीज का सेवन किया जाये तो वह गर्भवती महिला और शिशु दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है।

प्रेगनेंसी में शहद का सेवन करने के फायदे

एंटी ऑक्सीडेंट, विटामिन, एमिनो एसिड व् अन्य खनिज से भरपूर शहद का सेवन यदि गर्भवती महिला करती है। तो ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला को बहुत से स्वास्थ्य सम्बन्धी फायदे मिलते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को शहद का सेवन करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

एंटीऑक्सीडेंट गुण

शहद में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटी बैक्टेरियल गुण गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु की इम्युनिटी को मजबूत करने में मदद करते हैं। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को संक्रमण से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

एंटी इंफ्लेमेटरी गुण

एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होने के कारण शहद का सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को खांसी, गले में दर्द, गले में खराश, गले में इन्फेक्शन, सर्दी जैसी परेशानी से भी सुरक्षित रहने में मदद करता है। इसीलिए यदि कोई महिला सर्दियों में प्रेग्नेंट होती तो उसे रोजाना शहद का सेवन जरूर करना चाहिए क्योंकि ठण्ड के कारण होने वाली परेशानियों से बचाने के लिए शहद एक रामबाण उपाय है।

तनाव

बहुत सी गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान तनाव जैसी परेशानी से ग्रसित हो सकती है। ऐसे में तनाव जैसे खतरे से बचे रहने के लिए भी प्रेग्नेंट महिला शहद का सेवन कर सकती है। क्योंकि शहद का सेवन करने से गर्भवती महिला को एंटी ऑक्साइड मिलता है जो महिला को तनाव से बचाएं रखने में मदद करता है।

मॉर्निंग सिकनेस

प्रेग्नेंट महिला को मॉर्निंग सिकनेस यानी की सुबह उठते समय कमजोरी, बेचैनी का मसहूस होना बहुत आम बात है। लेकिन शहद का सेवन करने से गर्भवती महिला को इस परेशानी से राहत पाने में मदद मिलती है। और इस समस्या से बचाव के लिए प्रेग्नेंट महिला को नियमित सुबह एक गिलास पानी में एक चम्मच शहद डालकर जरूर पीना चाहिए।

अनिंद्रा

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव, प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों के कारण, वजन बढ़ने की वजह से बहुत सी गर्भवती महिलाएं अनिंद्रा की समस्या से परेशान हो सकती है। और नींद का पूरा न होना गर्भवती महिला की सेहत सम्बन्धी समस्या को बढ़ा सकता है, ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए और बेहतर नींद के लिए प्रेग्नेंट महिला के लिए शहद का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है।

फाइबर

बहुत सी गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान अपच, गैस, कब्ज़ जैसी परेशानी का सामना कर सकती है और इसका कारण वजन बढ़ने और बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव हो सकते हैं। लेकिन शहद का सेवन करने से गर्भवती महिला इस परेशानी से राहत पाने में मदद मिल सकती है क्योंकि शहद में फाइबर की मात्रा मौजूद होती है जो पाचन क्रिया को स्वस्थ रखने में मदद करती है।

एलर्जी

एंटी बैक्टेरियल गुणों से भरपूर शहद का सेवन करने से गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह की एलर्जी की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में शहद खाने के नुकसान

  • अधिक मात्रा में शहद का सेवन करने से ब्लड में शुगर का लेवल बढ़ने का खतरा रहता है जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला को गेस्टेशनल शुगर होने का खतरा रहता है।
  • यदि महिला जरुरत से ज्यादा इसका सेवन कर सकती है तो इसके कारण महिला को पेट में ऐंठन, पेट में दर्द, दस्त, जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो प्रेग्नेंट महिला को शहद का सेवन करने से मिलते हैं। लेकिन महिला को शहद का सेवन करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए की जरुरत से ज्यादा शहद का सेवन न करने के साथ अच्छी कंपनी का शहद लें, और उसके बाद ही उसका सेवन करें।