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बरसात में आँखों के इन्फेक्शन से बचने के घरेलू इलाज

आप आँखों के माध्यम से इस संसार को देख पाते है, और इन सूंदर नज़ारों का मज़ा उठाते है, साथ ही मौसम में आये परिवर्तन को भी देखते है, और हर मौसम में ये भी जरुरी है की आप अपने शरीर और सभी अंगो की अच्छे से देखभाल भी करें, जैसे की बरसात में कई बार लोगो को नहाना बहुत पसंद होता है, या लोग भीग जाते है, तो बारिश में मौजूद हानिकारक जर्म्स आपकी आँखों पर बुरा प्रभाव डालते है, जिसके कारण आँखों से पानी आना, आँखों का लाल होना, या इन्फेक्शन की समस्या खड़ी हो जाती है।

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आँखों में यदि कोई भी समस्या हो तो इसे ज्यादा अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि कई बार यह आपकी रेटिना, रक्त नलिका और कॉर्निया को नुकसान पहुंचा सकती है, परन्तु आप घर में भी आसानी से आँखों में होने वाले इन्फेक्शन की समस्या का समाधान कर सकते है, लेकिन यदि आपको ज्यादा परेशानी है तो आपको इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए, और डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, तो आइये अब जानते की आँखों के इन्फेक्शन से बचने के कुछ ख़ास टिप्स, जो आपकी इस परेशानी का समाधान करेंगे।

गरम पट्टी या तोलिये का इस्तेमाल करें:-

आँखों में होने वाले इन्फेक्शन से बचने के लिए सबसे आसान तरीका जिसे आप कर सकते है वो है गरम पट्टी का इस्तेमाल, इसके इतेमाल के लिए एक बर्तन में गरम पानी कर लें, उसके बाद उसमे कोई सूती कपडा या तौलिया डालकर भीगा लें, और उसके बाद उसे निचोड़ दें, और फिर उस तोलिये को अपनी आँखों पर रखें, इससे आपकी आँखों की सिकाई होगी, जिसके कारण इन्फेक्शन से बचाव करने में आपको मदद मिलती है।

सलाइन सोल्युशन का इस्तेमाल करें:-

नमक और पानी से बने इस घोल का इस्तेमाल करने से भी आपको आँखों के इन्फेक्शन से बचाव करने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप एक चम्मच नमक को एक कप पानी में मिलाएं, उसके बाद इसे अच्छे से गरम करें, और फिर ठंडा होने के लिए रख दें, ठंडा होने के बाद अपनी आँखों को इससे अच्छे से साफ़ करें, या फिर ड्रॉपर की मदद से दो तीन बून्द अपनी आँखों में डालें, इस उपाय को करने से आपको फायदा मिलता है।

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शहद का इस्तेमाल करें:-

शहद में मौजूद एंटीबैक्टेरियल गुण आपके आँखों के इन्फेक्शन को दूर करने में आपकी मदद करते है, इसके इस्तेमाल के लिए आप शहद और पानी को बराबर मात्रा में लें, और उसे अच्छे से मिक्स कर लें, उसके बाद इसे कपास के टुकड़े से अपनी आँखों पर लगाएं, और दिन में दो से तीन बार इस उपाय को करें, या आप एक बून्द शहद को सीधा अपनी आँखों में डालें, ऐसा करने से आपकी आँखों से आंसू निकलेंगे, साथ ही आपकी आँखों में जमी गंदगी को भी दूर होने में मदद मिलती है।

ग्रीन टी का उपयोग करें:-

ग्रीन टी में टैनिक एसिड भरपूर होता है, जो आपको आँखों के इन्फेक्शन से बचाने में मदद करता है, साथ ही इसमें मौजूद न्यूट्रिएंट्स, और एंटी ऑक्सीडेंट्स आपकी आँखों को स्वस्थ रखने में मदद करते है, इसके इस्तेमाल के लिए आप दो टी बैग लें, और उन्हें पांच मिनट के लिए गरम पानी में रखें, उसके बाद आप उन्हें उस पानी में से निकाल कर फ्रिज में ठंडा होने के लिए रखें, जब वो ठन्डे हो जाएँ, तो उन्हें फ्रिज में से निकाल कर अपनी आँखों को अच्छे से साफ़ करें, और फिर दस से पंद्रह मिनट के लिए इन्हे अपनी आँखों पर रखें और इस उपाय को दिन में दो से तीन बार करें जब तक की आपको इन्फेक्शन से आराम नहीं आता है।

बोरिक एसिड का इस्तेमाल करें:-

बोरिक एसिड में मौजूद एंटी बैक्टेरियल और एंटी फंगल गुण आपकी आँखों के इन्फेक्शन की समस्या को दूर करने में मदद करता है, फिर चाहे आँखे लाल हो, या उनमे ज्यादा पानी आता है, खुजली या जलन का अनुभव होता है, ये सभी समस्या का समाधान करता है, इसके इस्तेमाल के लिए आप एक कप पानी में यह चम्मच का आठवा हिस्सा बोरिक एसिड का मिलाकर अच्छे से गर्म कर लें, और उसके बाद सूती कपडे से अपनी आँखों को अच्छे से साफ़ करें, और कपडे को अच्छे से निचोड़ लें, क्योंकि बोरिक एसिड लगाने से आपको जलन हो सकती है, परन्तु बाद में ठीक हो जाता है, इस उपाय को दिन में तीन बार करें, और हर बार पानी को बदल दें।

एप्पल साइडर विनेगर यानि सेब के सिरके का इस्तेमाल करें:-

एप्पल साइडर विनेगर में मैलिक एसिड पाया जाता है, जो की एंटी माइक्रोबियल की तरह काम करता है, और आपकी आँखों को इन्फेक्शन से बचाव में मदद करता है, साथ ही आँखों में होने वाले हानिकारक जर्म्स को भी दूर करने में मदद करता है, इसके इस्तेमाल के लिए एक गिलास पानी में एक चम्मच एप्पल साइडर विनेगर मिलाएं, और उसके बाद इसे अच्छे से मिक्स कर लें, फिर कपास के टुकड़े को इस मिश्रण में भिगाकर अपनी आँखों को बाहर और अंदर से साफ करें, आपको जरूर फायदा मिलेगा, या आप दो से तीन बूंदे ड्रॉपर की मदद से भी आँखों में दाल सकती है।

स्तन के दूध का इस्तेमाल करें:-

आपको ये जानकार हैरानी होगी की स्तन के दूध का इस्तेमाल करने से भी आपको आँखों के इन्फेक्शन से बचाव करने में मदद मिलती है, क्योंकि इसमें एंटीबॉडीज, इम्युनोग्लोब्युलिन इ होता है जो आपकी आँखों की बाहरी परत को सुरक्षा देता है, जिससे आपकी आँखों में हानिकारक जर्म्स का परिवेश नहीं होता है, इसके इस्तेमाल के लिए कटोरी में थोड़ा सा स्तन का दूध लें, और ड्रॉपर की मदद से इसे अपनी आँखों में दो से तीन बून्द डालें, उसके बाद हर दो से तीन घंटे में इस प्रक्रिया को दोहराएं, आपको फायदा मिलेगा।

आँखों के इन्फेक्शन से बचने के अन्य उपाय:-

  • नियमित दिन में तीन से चार बार ठन्डे पानी की मदद से अपनी आँखों को जरूर धोना चाहिए।
  • गुलाब जल को पानी में मिलाकर अपनी आंखों को धोने या गुलाबजल का इस्तेमाल आई ड्राप की तरह करने से भी आपको फायदा मिलता है।
  • इन्फेक्शन होने पर आँखों में लैंस को नहीं पहनना चाहिए।
  • आपको अपनी आँखों के लिए इस्तेमाल किये जाना वाला तौलिया या रुमाल किसी से भी शेयर नहीं करना चाहिए।
  • बार बार अपनी आँखों पर हाथ नहीं लगाना चाहिए और किसी भी ड्राप का इस्तेमाल करने से पहले अपनी आँखों को अच्छे से धो लेना चाहिए।
  • आँखों में इन्फेक्शन होने पर आँखों के लिए मेकअप या केमिकल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
  • डॉक्टर से राय लेकर आई ड्राप का इस्तेमाल भी कर सकते है, परन्तु यदि अधिक परेशानी है तो डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए।

तो ये कुछ टिप्स है जिनका इस्तेमाल करके आप अपनी आँखों के संक्रमण से बचाव कर सकते है, साथ ही यदि आपको आँखों में अधिक दर्द या वो ठीक नहीं हो रहा है तो डॉक्टर को दिखाने में भी लापवाही नहीं करनी चाहिए, और जितना हो सकें धूप या बरसात में घर से निकलते हुए आँखों के लिए गॉगल्स का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए, इससे आपको प्रदूषण के हानिकारक प्रभाव से आपकी आँखों को बचाने में मदद मिलती है।

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गर्भधारण के बाद 10 सम्पूर्ण आहार

गर्भधारण के बाद 10 सम्पूर्ण आहार, प्रेगनेंसी के दौरान महिला का आहार, प्रेगनेंसी के समय महिला को क्या क्या खाना चाहिए, गर्भवती महिला के लिए सम्पूर्ण आहार, गर्भावस्था के दौरान क्या खाना चाहिए

गर्भावस्था के दौरान महिला का स्वास्थ्य और शिशु का बेहतर विकास पूरी तरह से गर्भवती महिला के खान पान पर निर्भर करता है। क्योंकि महिला जो आहार लेती है उसमे मौजूद पोषक तत्व ही शिशु का बेहतर विकास करते है, और प्रेगनेंसी के समय महिला को हर परेशानी से बचाव करने में मदद करते हैं। और यदि महिला प्रेगनेंसी के दौरान सम्पूर्ण आहार का सेवन नहीं करती है तो इसके कारण शिशु के विकास में कमी आ सकती है, महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या का सामना करना पड़ सकता है, समय से पहले प्रसव की समस्या हो सकती है, डिलीवरी के दौरान परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है, आदि। यदि आप चाहती हैं की प्रेगनेंसी के दौरान आपको ऐसी कोई भी परेशानी न हो तो आपको अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। तो आइये अब जानते हैं की गर्भधारण के बाद सम्पूर्ण आहार कौन कौन से होते हैं।

हरी पत्तेदार सब्जियां

विटामिन ए, फोलिक एसिड, आयरन से भरपूर हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान महिला को भरपूर करना चाहिए। क्योंकि यह महिला में खून की कमी को दूर करने के साथ शिशु के मस्तिष्क विकास, रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने में मदद करता है। इसके लिए आप पालक, चने का साग, सरसों, गोभी के पत्ते, चौलाई, बथुआ आदि का भरपूर सेवन कर सकते हैं। आप इन्हे सब्जी, रायता, पराठे, सैंडविच आदि बनाकर खा सकते हैं। इनके सेवन से पहले एक बात का ध्यान रखे की यह ताजा होने के साथ अच्छे से धोने के बाद प्रयोग करें।

दूध व् दूध से बनी चीजें

कैल्शियम, प्रोटीन व् अन्य पोषक तत्वों से भरपूर दूध व् दूध से बनी चीजों का सेवन भी प्रेगनेंसी के दौरान महिला को स्वस्थ रखने के साथ, शिशु की शारीरिक विकास खासकर हड्डियों की मजबूती में बहुत मदद करता है। और यदि महिला के शरीर में कैल्शियम की कमी आती है तो प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कमजोरी जैसी समस्या होने के साथ शिशु के विकास में भी कमी आती है।

फल

फलों का सेवन भी प्रेगनेंसी के दौरान भरपूर मात्रा में करना चाहिए क्योंकि यह भी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। साथ ही संतरा, तरबूज, जैसे फलों का सेवन करने से पोषक तत्व भी मिलते हैं और शरीर में पानी की कमी को भी पूरा करने में मदद मिलती है।

अंडा

गर्भावस्था के दौरान महिला को अंडे का सेवन भी जरूर करना चाहिए, खासकर सुबह नाश्ते के समय यदि महिला दो उबले अण्डों का सेवन कर लेती है। तो ऐसा करने से महिला को पूरा दिन एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है। क्योंकि इसमें मौजूद कोलिन नामक तत्व महिला के शरीर में कैलोरी को पर्याप्त बनाएं रखने में मदद करता है, साथ ही इसमें मौजूद प्रोटीन भी शिशु और गर्भवती महिला दोनों के लिए ही बहुत फायदेमंद होता है। अंडे का सेवन करते समय एक बात का ध्यान रखें की अंडा अधपका न हो।

दालें

दाल भी प्रोटीन, विटामिन, व् अन्य मिनरल्स से भरपूर होती है, और प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में पोषक तत्वों की मात्रा को भरपूर बनाये रखने में मदद करती है। इसीलिए महिला को दिन में एक समय के आहार में किसी भी दाल, चने, राजमा, आदि को जरूर शामिल करना चाहिए।

सूखे मेवे

सूखे मेवे भी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, और प्रेगनेंसी के दौरान इनका सेवन भी महिला के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद होता है। महिला को भीगे हुए बादाम, पिस्ता व् अन्य ड्राई फ्रूट्स को दूध में मिक्स करके उनका सेवन करना चाहिए, यह महिला को एनर्जी से भरपूर रखने व् शिशु को भी पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व देने में मदद करते हैं।

नॉन वेज

यदि आप नॉन वेज का सेवन करते हैं तो हफ्ते में एक बार आप नॉन वेज का सेवन भी कर सकते है, क्योंकि आयरन व् प्रोटीन के लिए यह सबसे बेहतरीन स्त्रोत होता है। इसके सेवन से शिशु के मानसिक और शारीरिक विकास को और ज्यादा बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है, लेकिन कुछ किस्म की मछलियां जिनमे मर्करी की मात्रा अधिक होती है, बासी, ठंडा व् अधपके मास के सेवन से बचना चाहिए क्योंकि यह आपके लिए और शिशु के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है।

अंकुरित चना और मूंग

विटामिन बी, आयरन, जिंक, फाइबर, व् अन्य पोषक तत्वों से भरपूर अंकुरित चने व् मूंग का सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान महिला और गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए भरपूर मात्रा में पोषक तत्व मिलते हैं। इन्हे आप सुबह के नाश्ते में, सलाद आदि में शामिल कर सकते हैं।

भरपूर आयोडीन

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में आयोडीन की मात्रा का भी पर्याप्त होना जरुरी होता है, क्योंकि आयोडीन की कमी होने के कारण शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास में कमी आ सकती है। ऐसे में खाने में पर्याप्त मात्रा में आयोडीन लेना चाहिए, और जरुरत से अधिक भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके अधिक सेवन के कारण रक्तचाप से जुडी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

पेय पदार्थ

खाने के साथ प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में पानी की मात्रा का भी पर्याप्त होना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि पानी की कमी के कारण गर्भ में शिशु को भी परेशानी हो सकती है, इसके लिए महिला को दिन में आठ से दस गिलास पानी पीने के साथ, ताजे फलों का रस घर में निकाला हुआ, नारियल पानी, निम्बू पानी आदि का सेवन करते रहना चाहिए।

तो यह हैं वो सम्पूर्ण आहार जो महिला को प्रेगनेंसी के दौरान लेने चाहिए क्योंकि इनका सेवन करने से महिला को प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानी से बचाव करने के साथ शिशु के भरपूर विकास में भी मदद मिलती है। और यह भी सच है की एक स्वस्थ महिला के गर्भ में स्वस्थ शिशु निवास करता है।

यूट्यूब विडिओ –

गर्भधारण के बाद ये खाएं। गर्भावस्था के दौरान सभी विटामिन्स और मिनरल्स की पूर्ति के लिए इन चीजों को खाएं

महिलाओ में गंजेपन की समस्या का इलाज

महिलाओ को लुक को और भी बेहतर बनाने में बाल बहुत मदद करते है, परन्तु बालों का झड़ना, कमजोर होना महिलाओ के लिए आज एक समस्या बन गई है, और जब ये बाल तेजी से झड़ने लगते है तो इसके कारण महिलाओ को गंजेपन की समस्या हो जाती है, जिसके कारण केवल महिलाओ की पर्सनैल्टी ही ख़राब नहीं होती है, बल्कि उनके आत्मविश्वास में भी कमी आ जाती है, इसीलिए बालों को स्वस्थ और मजबूत बनाएं रखने के लिए आपको अपने बालों की अच्छे से केयर करनी चाहिए, ताकि यदि आपको बालों से जुडी कोई परेशानी हो रही है तो समय रहते उसका इलाज हो जाएँ।

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गंजेपन की समस्या का सबसे बड़ा कारण होता है बालों की सही से देख -रेख न करना या बालों में ज्यादा केमिकल का इस्तेमाल करने, इसके कारण आपके बालों की जड़ धीरे धीरे कमजोर होने लगती है, जिसके कारण आपको बालों के झड़ने की समस्या शुरू हो जाती है, और धीरे धीरे आपके सिर में कही कही पूरे बाल झड़ जाते है, जिसके कारण आपको गंजेपन की समस्या शुरू हो जाती है, इसके अलावा बालों से जुडी इस समस्या के कई और कारण भी हो सकते है, जैसे ही शरीर में हॉर्मोन का असंतुलन होने के कारण, किसी बिमारी या शरीर में पोषक तत्वों की कमी का असर भी आपको गंजेपन की समस्या से परेशान कर सकता है, इसके लिए जरुरी है की जैसे ही आपको लगे की आपके बल झड़ रहे है, या पतले हो रहे है, तो इसके कारण का आपको पता लगाना चाहिए, ताकि इसका सही से इलाज हो सकें, इसके अलावा आज हम महिलाओ के लिए ऐसे कुछ ख़ास टिप्स बताने जा रहे है जिसके कारण उनके गंजेपन की समस्या का इलाज हो सकता है, और उन्हें अपने बालों की ख़ूबसूरती को बरक़रार रखने में मदद मिलती है।

गंजेपन की समस्या से बचने के लिए घरेलू इलाज:-

मैथी के बीजो का इस्तेमाल करें:-

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मैथी में आर्जीनाइन की मात्रा ज्यादा होती है जो की आपके नए बालों को उगाने में मदद करती है, इस तरिके का इस्तेमाल करने के लिए आधा कप मैथी के बीज रात भर पानी में भिगोकर छोड़ दें, उसके बाद सुबह उन्हें छानकर पीस लें, अब इसमें एक चम्मच नारियल का तेल मिलाएं, और अच्छे से इसे अपने स्कैल्प पर लगाएं, और एक घंटे के लिए छोड़ दें, उसके बाद पानी से सिर धो लें, कुछ ही दिनों तक इस तरीके का इस्तेमाल करने से आपको फायदा मिलता है।

प्याज़ का इस्तेमाल करें:-

प्याज़ को घिस कर उसका रस निकाल लें, और अच्छे से अपने स्कैल्प पर लगाएं, और सूखने के बाद इसे धो दें, एक दिन छोड़कर इस उपाय को थोड़े दिनों तक करने से आपको इससे फायदा मिलता है, और आपके गंजेपन की समस्या को दूर होने में मदद मिलती है।

लहसुन का प्रयोग करें:-

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लहसुन को घिस कर पीस लें, उसके बाद इसमें से उसका रस निकाल कर अलग कर लें, उसके बाद इस रस को अच्छे से अपने स्कैल्प पर लगाएं, और सूखने के बाद पानी से सिर को धो लें, हफ्ते में दो से तीन बार इस तरीके का इस्तेमाल करने से आपके गंजेपन की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है।

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रोज़मेरी ऑयल का इस्तेमाल करें:-

एक कटोरी में आठ दस बुँदे रोजमेरी ऑयल और इससे दुगुना नारियल का तेल या ओलिव ऑयल डाल कर अच्छे से मिक्स करें, और रत को सोने से पहले अच्छे से इस मिश्रण की मदद से अपने स्कैल्प पर मसाज करें, और उसके बाद अपने बालों को धो दें, इस तरीके का इस्तेमाल करने से आपके बालों की ग्रोथ बढ़ती है साथ ही जड़ से नए बाल भी आने लगते है, और गंजेपन को दूर करने में मदद मिलती है, इस उपाय को आप हफ्ते में दो से तीन बार कर सकते है।

एलोवेरा का उपयोग करें:-

एलोवेरा का इस्तेमाल करने से भी आपके गंजेपन की समस्या को दूर किया जा सकता है, इसके लिए आप एलोवेरा जैल को निकाल कर अच्छे से अपने स्कैल्प पर लगाएं और उसके बाद उसे सूखने के लिए छोड़ दें, और सूखने के बाद अपने सिर को धो दें, इस तरीके का इस्तेमाल हफ्ते में तीन से चार बार करने से आपको अच्छा परिणाम मिलता है।

केले और निम्बू के रस का इस्तेमाल करें:-

एक पके हुए केले को अच्छे से पीस कर उसमे कुछ बुँदे निम्बू के रस की मिलाएं और इसे अच्छे से अपने स्कैल्प पर लगाएं, और थोड़ी देर बाद अच्छे से अपने बालों को धो दें, हफ्ते में दो बार इस तरीके का इस्तेमाल करने से आपको बालों के झड़ने के साथ नए बालों को उगाने में भी मदद मिलती है।

धनिये का इस्तेमाल करें:-

इसके इस्तेमाल के लिए हरे धनिये को अच्छे से बारीक पीस लें, और इसे उस जगह पर लगाएं जहां आपके बाल उड़ गए है, उसके बाद इसे सूखने के लिए छोड़ दें, और फिर सिर को धो लें, इस तरीके का इस्तेमाल लगातार एक महीने तक करने से आपको गंजेपन की समस्या से राहत मिलने में मदद मिलती है।

नीम का इस्तेमाल करें:-

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आंवला पाउडर को नीम की पत्तियों के साथ अच्छे से पानी में मिलाकर उबाल लें, उसके बाद इस पानी को ठंडा करके हफ्ते में दो से तीन बार इस पानी से अपने बालों को अच्छे से धोएं, आपको फायदा मिलेगा, साथ ही यदि आप एक दिन छोड़कर अच्छे से अपने बालों में नीम के तेल की मसाज भी करते है तो आपको गंजेपन की समस्या से राहत मिलने में मदद मिलती है।

गंजेपन की समस्या से रहता पाने के अन्य तरीके:-

अपने लिए सही आहार चुने:-

महिलाओ में बालों के झड़ने की समस्या का एक कारण आपके शरीर में होने वाली पोषक तत्वों की कमी भी हो सकता है, इसीलिए अपने आहार में प्रोटीन, विटामिन फाइबर आदि को भरपूर मात्रा में शामिल करें, इसके कारण आपके शरीर को फिट रहने के साथ आपके बालों को भी प्रॉपर नूट्रीएंट्स मिलेंगे, जिसके कारण आपके बालों को जड़ से मजबूत होने में मदद मिलती है, जिससे बालों के झड़ने की समस्या से आराम और गंजेपन का इलाज होता है।

अपने रोग का इलाज करें:-

गंगे पण की समस्या का कारण आपके शरीर का किसी रोग के कारण ग्रसित होना भी हो सकता है, जैसे की शरीर में खून की कमी, पीलिया, चिकन पॉक्स आदि के होने पर भी आपको ये समस्या हो सकती है, इसीलिए जैसे ही आपको लगे की आपके बाल जरुरत से ज्यादा झड़ रहे है तो तुरंत ही आपको डॉक्टर से मिलकर इसके कारण की अच्छे से जांच करवानी चाहिए ताकि समय रहते इसका इलाज हो सकें।

तनाव न लें:-

Depression

महिलाओ को छोटी से छोटी बात की परेशानी बहुत जल्दी हो जाती है, इसके साथ तनाव के कारण आपके शरीर में हॉर्मोन असंतुलित हो जाते है, जिसका असर आपकी सेहत के साथ आपके बालों पर भी पड़ता है, और आपके बालों के झड़ने की समस्या शुरू हो जाती है, जिसके कारण धीरे धीरे आप गंजेपन के शिकार हो जाते है, इससे बचने के लिए है की आप तनाव न लें, और यदि कोई परेशानी है तो उसका हल करें, साथ ही अपने बालों की अच्छे से केयर करें।

अपने बालों की साफ़ सफाई का भी ध्यान रखें:-

जो महिलाएं अपने बालों की साफ़ सफाई नहीं रखती है, उनके साथ भी ये समस्या हो जाती है, जिस तरह आप अपने शरीर को फिट रखने के लिए अच्छे आहार का सेवन करते है, उसी तरह अपने बालों की अच्छे से मसाज उन्हें सही समय पर धोना और उनकी अच्छे से केयर करने से भी आपको बालों से जुडी इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है।

अपने पिलो कवर, हेयर ब्रश, और टॉवल, की साफ़ सफाई का भी ध्यान रखें:-

बालों की साफ़ सफाई के साथ जो भी चीजे आप अपने बालों के लिए इस्तेमाल करती है उनका भी आपको ध्यान रखना चाहिए जैसे की पिलो कवर, हेयर ब्रश, और टॉवल क्योंकि यदि इनमे किसी भी प्रकार की गंदगी होगी तो इसके कारण आपके सिर में जर्म्स जाएंगे, जिसके कारण आपके बालों में परेशानी होगी और बालों से जुडी समस्या उत्त्पन्न हो जाएगी इसीलिए इससे बचने के लिए आपको इन चीजों की साफ़ सफाई का भी ध्यान रखना चाहिए। इसके कारण जब आपके बाल स्वस्थ रहेंगे तो आपके गंजेपन की समस्या को दूर करने में भी मदद मिलेगी।

ज्यादा केमिकल्स का इस्तेमाल न करें:-

गंजेपन की समस्या का एक कारण आपका अपने बालों के लिए ज्यादा केमिकल का इस्तेमाल करना भी हो सकता है, जब भी आपको ऐसा महसूस हो की आपके बाल झड़ रहे है या आपको गंजेपन जैसी स्थिति आ रही है तो आपको हर्बल प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना शुरू कर देना चाहिए, क्योंकि हर्बल प्रोडक्ट्स में केमिकल कम होता है, इसके अलावा आपको हेयर स्टाइल आदि करने के लिए नियमित जैल आदि एक भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, इसके कारण भी आपके बालों पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

तो ये कुछ अन्य टिप्स है जिनका इस्तेमाल महिलाएं गंजेपन की समस्या से राहत पा सकती है, इसके साथ ऐसा करने से आप अपने बालों को मजबूत रेशमी और मुलायम भी बना सकती है, इसीलिए यदि आपको कभी भी ऐसा लगे की आपके बाल झड़ रहे है या कोई और समस्या है तो आप इन टिप्स का इस्तेमाल करके बालों से जुडी हर परेशानी का समाधान कर सकते है।

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मेहंदी रचाने के तरीके

भारतीय परंपरा के अनुसार, मेहंदी को सोलह श्रृंगारों में से एक माना जाता है, जिसका महत्व बहुत खास होता है। घर में कोई पूजा हो, किसी की शादी हो, कोई उपवास हो सभी में मेहंदी लगाना बहुत शुभ माना जाता है। इसलिए किसी भी शुभ काम की शुरुवात मेहंदी से की जाती है। लेकिन कई महिलाओं को ये शिकायत होती है की उनकी मेहंदी डार्क नहीं रचती। जिसके चलते दो दिनों में ही मेहंदी छूटने लगती है।

कई बार होता है जब मेहंदी बहुत अच्छी लगी होती है लेकिन सही तरह से नहीं रचने के कारण खूबसूरत डिजाइन भी खिल कर नहीं आ पाता। अगर आप भी अक्सर मेहंदी से जुडी इन समस्यायों को फेस करती हैं तो एक बार इन उपायों का इस्तेमाल करें। इन टिप्स की मदद से आपकी मेहंदी पहले से ज्यादा डार्क रचेगी और लंबे समय तक बनी रहेगी।

हाथों की मेहंदी डार्क करने के उपाय

कुछ खास टिप्स हैं जिन्हे अपनाकर आप अपने हाथों की मेहंदी का कलर डार्क कर सकती है। आइये जानते हैं क्या है मेहँदी रचाने के तरीके।

  • मेहंदी लगाने और रचने में थोड़ा समय लगता है। ऐसे में आपको थोड़ा धैर्य रखना चाहिए। मेहंदी लगवाकर तुरंत नहीं हटाएं। कम से कम 5 – 6 घंटे मेहंदी को हाथों पर लगे रहने दें। इससे मेहंदी का रंग गहरा चढ़ता है। मेहंदी सूखने के बाद उसे नाखूनों से खुरचकर हटाएं नहीं। बल्कि खुद झड़ने दें।
  • अगर आप चाहती की मेहँदी का रंग डार्क रचे तो मेहंदी लगवाने के बाद जब वो हलकी सुख जाए तो उसपर नींबू चीनी का घोल लगा लें। ऐसा करने से मेहंदी लंबे समय तक हाथों से चिपकी रहेगी और रंग डार्क हो जाएगा। ध्यान रहे नींबू चीनी का घोल थोड़ा गाढ़ा होना चाहिए।
  • हाथों की मेहंदी डार्क करने के लिए सरसों का तेल बहुत फायदेमंद होता है। प्रयोग के लिए एक कटोरी में थोड़ा सा सरसों का तेल लें और मेहंदी हटाने से आधा घंटे पहले हाथों पर अच्छी तरह मल लें। इससे मेहंदी छुड़ाने में आसानी होगी। और जब मेहंदी छूट जाए तो एक बार फिर हाथों पर सरसों तेल लगा लें। इससे मेहंदी का रंग गहरा होगा।
  • लौंग का प्रयोग करके भी आप अपनी मेहँदी का रंग डार्क कर सकती हैं। प्रयोग के लिए एक पैन या तवे पर थोड़ी सी लौंग रखकर गर्म करें। बहुत सावधानी रखते हुए अपनी हथेलियों को पैन के ठीक ऊपर कुछ दुरी पर रखें ताकि पैन से निकलने वाला धुआं आपकी हथेलियों पर लगे। इस उपाय का प्रयोग करते समय ध्यान रखें की हाथ न जले। आप देखेंगी कुछ ही घंटों में मेहंदी डार्क हो जाएगी।
  • आपको जानकार हैरानी होगी की सर्दी जुखाम दूर करने वाली विक्स भी मेहंदी का रंग डार्क करने में मदद करती है। दरअसल ये बाम गर्म होती है जिससे मेहंदी को गाढ़ा रंग मिलता है। इसके लिए मेहंदी रात के समय लगाएं ताकि वो पूरी रात हाथों में लगी रहे और उसे रचने का समय मिल सके। मेहंदी हटाने के बाद हाथों में विक्स लगा लें। इससे आपके हाथों के मेहँदी का कलर डार्क हो जाएगा।
  • हाथों की मेहंदी डार्क करने के लिए आप आचार के तेल का प्रयोग कर सकती हैं। जब आपकी मेहंदी पूरी तरह सूख जाए तो उसपर आचार का तेल लगाएं। इस उपाय का प्रयोग करने से आपकी मेहंदी डार्क हो जाएगी।

इन बातों का भी ध्यान रखें

  • मेहंदी हटाने के बाद कम से कम 3 से 4 घंटों तक पानी का इस्तेमाल नहीं करें। और मेहंदी हटाने के लिए भी पानी यूज नहीं करें। इसके लिए आप सरसों तेल का प्रयोग कर सकती हैं।
  • मेहँदी लगाने के बाद एक बात का ध्यान रखें की सीधे धूप के संपर्क में न जाएं। क्यूंकि सूर्य की UV Rays मेहंदी के कलर को हल्का कर देती हैं जिससे उसका रंग फीका हो जाता है।
  • कभी भी मेहंदी लगाने के बाद वैक्सिंग या स्क्रबिंग नहीं कराएं। ये हमेशा मेहंदी लगाने से पहले कराएं। क्यूंकि इससे मेहंदी का कलर हल्का हो जाता है।
  • अगर मेहंदी हटाने के बाद पानी का यूज करना बहुत जरुरी है तो घरवालों या दोस्तों की मदद ले लें। आप चाहे तो दस्ताने पहनकर भी काम कर सकती हैं। इससे मेहंदी पर पानी नहीं पड़ेगा।
  • मेहँदी लगाने से पहले हाथों को अच्छी तरह धोकर साफ कर लें। हाथ पर कुछ भी तेल, क्रीम नहीं लगा हो। क्यूंकि ये चीजें मेहंदी को हाथों पर रचने नहीं देती।
  • इस बात का खास ध्यान रखें की मेहंदी लगाते वक्त आपके हाथों में किसी भी तरह की चिकनाई न हो। क्यूंकि अगर हाथों पर जरा भी चिकनाई हुई तो मेहंदी का रंग नहीं चढ़ेगा।

ये कुछ खास टिप्स हैं जिनका प्रयोग करके आप अपनी मेहँदी को डार्क कर सकती हैं।

प्रेगनेंसी के 8वें और 9वें महीने पैरों में सूजन होने के कारण और उपाय

गर्भावस्था के दौरान जैसे जैसे महिला का वजन बढ़ता है वैसे वैसे गर्भवती महिला की दिक्कतें भी थोड़ी बढ़ सकती है। जैसे की महिला को उठने बैठने में परेशानी होना, सही तरीके से सो नहीं पाना, कमर दर्द की परेशानी अधिक होना, बार बार यूरिन आना, सूजन की समस्या होना, आदि। ऐसा जरुरी नहीं है की सभी गर्भवती महिला महिलाओं को एक जैसी परेशानियां हो। तो आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी के 8वें और 9वें महीने पैरों में सूजन होने की समस्या के बारे में बात करने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी में पैरों सूजन होने के कारण

  • प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण ऐसा हो सकता है।
  • पेट का आकार बढ़ने की वजह से पैरों तक ब्लड फ्लो अच्छे से नहीं हो पाता है जिसके कारण पैरों में सूजन आ जाती है।
  • वजन बढ़ने के कारण पैरों की तरफ जाने वाली नसों पर दबाव अधिक पड़ता है जिसकी वजह से पैरों से जुडी यह समस्या हो सकती है।
  • आयरन, पोटैशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों की कमी के कारण भी यह समस्या हो सकती है।
  • गर्भवती महिला के शरीर में पानी की कमी के कारण भी यह परेशानी हो सकती है।
  • जो गर्भवती महिला कैफीन और नमक का सेवन अधिक करती है उन्हें भी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • ज्यादा टाइट जूते चप्पल पहनने के कारण भी ऐसा हो सकता है।
  • गर्भावस्था के दौरान महिला के ज्यादा समय तक एक ही जगह पर खड़े रहकर काम करने के कारण भी यह परेशानी हो सकती है।

गर्भावस्था के दौरान होने वाली सूजन की समस्या से बचने के आसान टिप्स

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला को सूजन की समस्या हो जाती है तो इसे लेकर महिला को बिल्कुल भी परेशान होने की जरुरत नहीं है। क्योंकि कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल करने से प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली सूजन की परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। जैसे की:

गुनगुना पानी और नमक

रोजाना रात को सोने से पहले गुनगुने पानी में नमक डालकर पैरों की सिकाई करें। ऐसा करने से पैरों को आराम मिलेगा, ब्लड फ्लो बेहतर होने में मदद मिलेगी जिससे सूजन कम करने में फायदा होगा।

मसाज

रात को सोने से पहले गुनगुने तेल का इस्तेमाल करके अपने पैरों की मसाज करें। ऐसा करने से मांसपेशियों को राहत मिलेगी साथ ही पैरों में ब्लड फ्लो बेहतर होगा। जिसे प्रेग्नेंट महिला को इस परेशानी से बचने में मदद मिलेगी।

बर्फ से सिकाई

बर्फ का टुकड़ा लेकर पैरों पर रखें और उसे पैरों पर घुमाएं। ऐसा करने से भी पैरों में होने वाली सूजन व् दर्द की समस्या को कम करने में मदद मिलती है।

नमक का सेवन कम करें

गर्भावस्था के दौरान सूजन की परेशानी से बचने के लिए गर्भवती महिला को ज्यादा नमक का सेवन नहीं करना चाहिए।

पानी भरपूर पीएं

गर्भवती महिला को पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए क्योंकि पानी का भरपूर सेवन करने से भी प्रेग्नेंट महिला को इस परेशानी से बचने में मदद मिलती है।

पोषक तत्वों का भरपूर सेवन

पोटैशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम, आयरन जैसे पोषक तत्वों से भरपूर आहार को अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं। यदि गर्भवती महिला के शरीर में यह पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होंगे तो इससे गर्भवती महिला को सूजन की परेशानी से बचे रहने में मदद मिलेगी।

कैफीन से बचें

कैफीन का अधिक सेवन भी सूजन की समस्या को बढ़ा सकता है। ऐसे में सूजन की परेशानी से राहत के लिए प्रेग्नेंट महिला को कैफीन युक्त चीजों का सेवन अधिक नहीं करना चाहिए।

ज्यादा टाइट जूते न पहने

ज्यादा टाइट जूते चप्पल पहनने के कारण पैरों में ब्लड फ्लो अच्छे से नहीं हो पाता है। जिसकी वजह से सूजन की समस्या महिला को हो सकती है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान सूजन की परेशानी से बचने के लिए महिला को ज्यादा टाइट जूते चप्पल नहीं पहनने चाहिए।

भरपूर आराम

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला भरपूर आराम करती है तो इसके कारण भी प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है।

बाई और करवट लेकर सोएं

प्रेग्नेंट महिला को सूजन की परेशानी से बचने के लिए बाईं और करवट लेकर सोना चाहिए। क्योंकि बाईं और करवट लेकर सोने से प्रेग्नेंट महिला के शरीर में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है। जिससे गर्भवती महिला को ब्लड फ्लो अच्छे से न होने के कारण होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

एक जगह पर देर तक खड़ी न रहें

यदि महिला बहुत देर तक ही जगह खड़ी रहकर काम करती है या बातें करते समय बहुत देर तक ही जगह खड़ी रहती है। तो इसके कारण भी पूरी बॉडी का वजन पैरों पर पड़ने के कारण महिला को सूजन हो सकती है। ऐसे में सूजन की समस्या से बचने के लिए महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला बहुत देर तक एक ही जगह पर खड़ी न रहे।

थोड़ा व्यायाम करें

थोड़ा बहुत व्यायाम भी गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि इससे मांसपेशियों को आराम मिलने के साथ शरीर में ब्लड फ्लो भी अच्छे से होता है। जिससे सूजन जैसी परेशानी से बचे रहने के साथ प्रेग्नेंट महिला को फिट रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ उपाय जिन्हे ट्राई करने से प्रेग्नेंट महिला को पैरों में सूजन की परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। लेकिन ध्यान रखें की सूजन की समस्या अधिक हो, पैरों के साथ हाथ या मुँह पर भी सूजन होने लगे, तो इसे अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर से मिलें।

पीरियड के समय हो जाता है इन्फेक्शन तो यह टिप्स है आपके लिए

महिला के लिए पीरियड्स एक ऐसा समय होता है जिस दौरान महिला को परेशानी तो होती है लेकिन उसके बाद भी अपनी साफ सफाई का अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है। क्योंकि इस दौरान यदि महिला अपने प्राइवेट पार्ट की अच्छे से साफ सफाई नहीं रखती है तो इसके कारण उसे इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है। और इन्फेक्शन होने के बाद महिला को अनियमित माहवारी, ज्यादा ब्लीडिंग, खुजली व् जलन जैसी परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। तो आइये आज हम आपको ऐसी ही कुछ पीरियड्स से जुडी बातें बताते हैं जिनसे आपको पीरियड्स के समय होने वाले इन्फेक्शन से बचाव करने में मदद मिलती है।

पीरियड्स के समय इन्फेक्शन होने के कारण:- पीरियड्स के समय कई महिलाओं को इन्फेक्शन होने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। और इसके कारण महिला को प्राइवेट पार्ट में खुजली, जलन, दर्द, ज्यादा ब्लीडिंग जैसी समस्या भी हो सकती है। ऐसे में इन्फेक्शन होने के क्या कारण होते है आपको सबसे पहले यह पता होना चाहिए ताकि आप पीरियड्स के दौरान होने वाले इन्फेक्शन से बचाव कर सकें।

  • ज्यादा लम्बे समय तक एक ही पैड का इस्तेमाल करने के कारण इन्फेक्शन हो सकता है।
  • पीरियड्स के समय यदि आप बिना किसी सुरक्षा के सम्बन्ध बनाते हैं तो आपको इन्फेक्शन होने का सबसे ज्यादा खतरा होता है।
  • यदि आप माहवारी होने पर भी प्राइवेट पार्ट के लिए ज्यादा सुगन्धित और केमिकल युक्त चीजों का प्रयोग करती हैं तो भी आपको इन्फेक्शन होने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
  • साफ़ सफाई न रखने के कारण भी प्राइवेट पार्ट प्रभावित होता है जिसके कारण आपको इन्फेक्शन हो सकता है।
  • पीरियड्स के समय यदि आप अच्छे क़्वालिटी का पैड इस्तेमाल नहीं करते है, कपडा इस्तेमाल करते है तो भी आपको इन्फेक्शन होने की सम्भावना हो सकती है।

पीरियड्स के समय इन्फेक्शन से बचने के टिप्स:- पीरियड्स के समय कई बार महिला को इन्फेक्शन जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। जिसके कारण महिला को बहुत परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है तो आइए अब हम आपको बताते है की पीरियड्स के दौरान इन्फेक्शन से बचाव के लिए आप क्या क्या कर सकते है।

साफ़ सफाई का रखें ध्यान:- पीरियड्स में जितना आप साफ़ सफाई का ध्यान रखते हैं उतना ही आपको इन्फेक्शन से बचे रहने में मदद मिलती है। इसके लिए आप जब भी बाथरूम में जाते हैं तो आपको अपने प्राइवेट पार्ट को अच्छे से साफ पानी से साफ़ करना चाहिए और प्राइवेट पार्ट के सूखने के बाद पैड लगाना चाहिए। इसके अलावा अंडरवियर भी दिन में कम से कम दो बार बदलना चाहिए, और जितना हो सके सिंथेटिक की जगह कॉटन के अंडरवियर का इस्तेमाल ही करना चाहिए। क्योंकि जितना आप अधिक साफ सफाई रखते हैं उतना ही आपको फायदा होता है।

सैनिटरी पैड का रखें ध्यान:- जब भी आपको पीरियड्स होता है तो आपको सबसे पहले तो कपडे का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। बल्कि पीरियड्स के दौरान आपको सैनिटरी पैड का इस्तेमाल करना चाहिए। और सैनिटरी पैड भी जो आप इस्तेमाल करते है वो अच्छी क़्वालिटी का होना चाहिए। साथ ही आपको एक पैड को छह से आठ घंटे के बाद बदल देना चाहिए। क्योंकि यदि आप ज्यादा समय तक एक ही पैड को लगाए रखते हैं तो इसके कारण हानिकारक बैक्टेरिया का जमाव होता है, जिसके कारण इन्फेक्शन का खतरा ज्यादा रहता है।

सम्बन्ध बनाते समय बरतें सावधानी:- कुछ कपल पीरियड्स के दौरान भी सम्बन्ध बनाते है, ऐसे में उन्हें दुगुनी सावधानी बरतनी चाहिए। जैसे की सम्बन्ध बनाते समय उन्हें सुरक्षा का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए। और इस दौरान उन्हें साफ़ सफाई का भी अधिक ध्यान देना चाहिए। और सम्बन्ध बनाते समय महिला का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए की उसे कोई परेशानी न हो। और यदि महिला को इन्फेक्शन की समस्या होती है तो इस समय जितना हो सकें सम्बन्ध बनाने से परहेज करना चाहिए। और ऐसे में साफा सफाई का ध्यान केवल महिला को ही नहीं बल्कि पुरुष को भी रखना चाहिए, क्योंकि यदि पुरुष भी साफ़ सफाई का ध्यान नहीं रखते हैं तो भी इन्फेक्शन का खतरा रहता है।

सुगन्धित चीजों का इस्तेमाल न करें:- पीरियड्स आने पर महिला को प्राइवेट पार्ट के लिए किसी भी सुगन्धित या केमिकल युक्त चीज जैसे की किसी साबुन, जैल, क्रीम आदि का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि इस समय यदि आप इनका इस्तेमाल करते हैं। तो ऐसा करने से आपको इन्फेक्शन होने की सम्भावना बहुत अधिक बढ़ जाती है, क्योंकि यह बैक्टेरिया के संपर्क में आने के बाद बुरा प्रभाव डालते हैं। जिससे आपको परेशानी हो सकती है इसीलिए पीरियड्स के दौरान इस बात का आपको खास ध्यान रखना चाहिए, की आप साफ़ सफाई का ध्यान रखें लेकिन ज्यादा केमिकल युक्त चीजों का इस्तेमाल न करें।

पीरियड्स में इन्फेक्शन होने के कारण हमने आपको बताएं हैं और यदि आप इससे बचना चाहते हैं तो इसके उपचार भी आपको ऊपर दिए गए हैं। ऐसे में यदि आप पीरियड्स के दौरान अपना अच्छे से ध्यान नहीं रखते है, और साफ सफाई नहीं रखते हैं तो इसके कारण आपको इन्फेक्शन की समस्या ज्यादा परेशान कर सकती है। इसीलिए पीरियड्स के समय आपको किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। और यदि आपको ज्यादा परेशानी होती है तो इसके लिए आप चाहे तो एक बार अपनी डॉक्टर से भी पूछ सकते है।

प्रेग्नेंट महिला को प्लास्टिक के बर्तनों में क्यों नहीं खाना चाहिए

प्रेग्नेंट महिला के खाने के बर्तन

प्रेगनेंसी के दौरान हर गर्भवती महिला खान पान का अच्छे तरीके से ध्यान रखती है, ताकि गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को ही नुकसान न हो। खाने के साथ खाने के बर्तनों का भी प्रेग्नेंट महिला को अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, बर्तन साफ़ सुथरे होने के साथ प्लास्टिक के भी नहीं होने चाहिए। और इसके लिए डॉक्टर भी मना करते हैं क्योंकि ऐसा माना जाता है की प्लास्टिक के बर्तनों में खाना गर्म करके खाने से या डिब्बाबंद प्लास्टिक के बर्तन में रखे खाने को खाने से गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु तक को नुकसान पहुँच सकता है।

क्यों गर्भवती महिला को प्लास्टिक के बर्तन में नहीं खाना चाहिए?

सभी गर्भवती महिला को प्लास्टिक के बर्तन में नहीं खाना चाहिए, क्योंकि प्लास्टिक में रखे खाने में गर्मी के कारण प्लास्टिक कुछ रसायन उत्सर्जित करता है, जो खाने में मिलकर गर्भवती महिला के शरीर में पहुँच जाते हैं। और यह केवल गर्भवती महिला को ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसीलिए गर्भवती महिला को डिब्बाबंद आहार और प्लास्टिक के बर्तन में रखे खाने को न खाने की सलाह दी जाती है।

गर्भवती महिला को प्लास्टिक के बर्तन में खाने से क्या नुकसान होते हैं?

यदि गर्भवती महिला प्लास्टिक के बर्तन में रखे आहार का सेवन करती है तो इसके कारण गर्भवती महिला को नुकसान पहुँच सकता है, और इसके कारण कौन सी परेशानियां हो सकती है आइये जानते हैं।

हार्मोनल अंसतुलन

प्लास्टिक के बर्तनों में खाना खाने के कारण गर्भवती महिलाओं को हार्मोनल अंसतुलन जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि इसमें बिस्फेनोल ए नामक रसायन हो सकता है जिसके कारण एस्ट्रोजन हार्मोन बहुत अधिक सक्रिय हो जाता है, और बॉडी के हार्मोनल गड़बड़ी हो सकती है। और बॉडी में हार्मोनल गड़बड़ी के कारण महिला की शारीरिक परेशानियां भी बढ़ सकती है।

कैंसर कारक

प्लास्टिक के बर्तनों में खाना खाने के कारण उसमे मौजूद रसायन खाने में मिलकर शरीर में पहुँच जाते है, जो कैंसर कारक का काम करते हैं। प्लास्टिक के बर्तनो का खान पान में अधिक इस्तेमाल करने के कारण कैंसर होने का खतरा भी रहता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान या वैसे भी प्लास्टिक के बर्तनों में खाने पीने से परहेज करना चाहिए।

शिशु के लिए हो सकती है परेशानी

यदि गर्भवती महिला प्लास्टिक के बर्तनो में खाना खाती है तो इसके कारण बॉडी में एस्ट्रोजन हॉर्मोन सक्रिय हो सकता है जिसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक के साथ मानसिक विकास पर भी बुरा असर पड़ सकता है। शिशु को मस्तिष्क से सम्बंधित बिमारी होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो गर्भवती महिला को प्लास्टिक के बर्तनों में खाना खाने से हो सकते हैं। इसके अलावा गर्भवती महिला को प्लास्टिक की बोतल में पानी भी नहीं पीना चाहिए। और ओवन में भी खाना गर्म करते समय प्लास्टिक के बर्तनों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

गर्भवती महिलाओ को सिगरेट और शराब पीने के ये नुकसान होते हैं?

प्रेगनेंसी का समय किसी भी महिला के लिए बहुत ही अहम होता है, इसीलिए इस समय महिला को अपना बहुत अधिक ध्यान रखना पड़ता है, ताकि गर्भ में पल रहा शिशु स्वस्थ हो और उसका विकास अच्छे से हो सकें, खान पान से लेकर उठने बैठने तक का महिला को अपना ध्यान रखना चाहिए, साथ ही अपनी दिनचर्या को भी सही रखना चाहिए, और अच्छी आदतों को अपनाना चाहिए, ताकि शिशु हमेशा स्वस्थ रहें, लेकिन कई महिलाएं गर्भावस्था में भी सिगरेट और शराब का सेवन करती जो की न केवल महिला की बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु पर भी बहुत बुरा प्रभाव डालती है।

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प्रेगनेंसी में न केवल महिला को स्मोक से परहेज करना चाहिए, बल्कि यदि कोई स्मोक कर रहा हो तो उसके आस पास भी नहीं होना चाहिए, क्योंकि इसमें मौजूद टॉक्सिन शरीर पर बहुत बुरा प्रभाव डालते है, जिसके कारण गर्भ में बच्चे को सांस लेने में परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है, साथ ही प्रेग्नेंसी में शराब से भी जितना हो सकें परहेज रखना चाहिए, साथ ही प्रेगनेंसी में बरती जाने वाली थोड़ी सी असावधानी आपके लिए बुरे परिणाम ला सकती है, तो आइये जानते है की गर्भावस्था में शराब पीने और स्मोक करने से क्या क्या नुकसान होते है।

शराब पीने से होने वाले नुकसान:-

गर्भवती महिलाओ को प्रेगनेंसी के दौरान शराब का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जिसके कारण उसके विकास और जीवन से सम्बंधित समस्या उत्त्पन्न हो जाती है, आइये जानते है की प्रेगनेंसी में शराब पीने से होने वाले नुकसान कौन कौन से होते है।

  • शराब का सेवन करने से महिना को फेटल एल्कोहल सिन्ड्रोम ( एफ ए एस ) हो सकता है।
  • इसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु के वजन में कमी आ सकती है।
  • यदि आप प्रेगनेंसी में शराब का सेवन करते है तो इसके कारण कुपोषण की समस्या हो जाती है।
  • इसके कारण बच्चे की गर्भ में बन रही त्वचा पर भी बुरा असर पड़ता है।
  • बच्चे का विकास भी अच्छे से नहीं हो पाता है।

धूम्रपान करने से होने वाले नुकसान:-

धुम्रपान वैसे भी सेहत के लिए बहुत नुकसानदायक होता है, इसके कारण सांस लेने में तकलीफ, खांसी, व् फेफड़ों से सम्बंधित परेशानी हो जाती है, और प्रेगनेंसी में तो खासकर इसके कारण आपको बहुत परेशानी होती है, और आपको सिगरेट या बीडी पीनी ही नहीं बल्कि ऐसे व्यक्ति के पास भी नहीं खड़े होना चाहिए जो की बीडी या सिगरेट का सेवन कर रहा हो, क्योंकि इसका धुँआ भी आपके लिए हानिकारक होता है, तो आइये जानते है की प्रेगनेंसी में सिगरेट पीने से और कौन कौन से नुकसान होते है।

  • इसके कारण बच्चे को सांस लेने में परेशानी का अनुभव हो सकता है।
  • मानसिक तौर पर बच्चे पर इसका बहुत बुरा प्रभाव अड़ता है, जिसके कारण बच्चा मानसिक रूप से कमजोर पैदा हो सकता है।
  • बच्चे के जीवन पर भी इसका बहुत बुरा असर पड़ता है।
  • बच्चे के विकास से जुडी परेशानी उत्त्पन्न हो सकती है।

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प्रेगनेंसी में न करें ये अन्य काम:-

  • विटामिन सी युक्त किसी भी पदार्थ का सेवन न करें, जैसे की पपीता अनानास आदि।
  • पेट के बल कोई भी काम न करें, इससे शिशु पर बुरा असर पड़ता है।
  • सेक्स करते समय ध्यान रखें की आप ऐसी कोई भी पोजीशन या ऐसा कोई भी काम न करें जिसके कारण महिला या गर्भ में शिशु को कोई तकलीफ हो।
  • महिला को भारी वजन नहीं उठाना चाहिए।
  • यदि आपको कभी पेट में दर्द या स्पोटिंग जैसी कोई समस्या हो तो इसे भी नज़रंदाज़ नहीं करना चाहिए, और डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
  • पैरों के भार या झुककर किसी भी काम को नहीं करना चाहिए।
  • ज्यादा देर एक ही स्थान पर खड़े नहीं रहना चाहिए।
  • खान पान में लापरवाही नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इसके कारण शिशु के पोषण और विकास पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
  • तनाव नहीं करना चाहिए।

तो ये कुछ परेशानियां है जो आपको प्रेगनेंसी में अपनी इस गलत आदत की वजह से उठानी पड़ सकती है, इसीलिए जितना हो सकें आपको इनसे परहेज करना चाहिए, ताकि आप और आपके गर्भ में पल रहे शिशु को कोई नुकसान न हो, और शिशु का अच्छे से विकास हो सकें।

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डिलीवरी में तीन महीने बाकी है तो इन बातों का ध्यान रखें

Precaution Before 3 month of Delivery, डिलीवरी से पहले ध्यान देने योग्य टिप्स, क्या करें बच्चा जन्म होने से पहले गर्भवती महिलाओं के लिए हिंदी में टिप्स, डिलीवरी में तीन महीने बाकी है तो इन बातों का ध्यान रखें, प्रेगनेंसी के आखिरी तीन महीने, डिलीवरी होने के पहले के तीन महीने इन बातों का ध्यान रखें


डिलीवरी से पहले के तीन महीने रखें अपना खास ख्याल

गर्भधारण से लेकर डिलीवरी तक गर्भवती महिला को अपना खास ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। डॉक्टर से लेकर घर के बड़े बूढ़े तक सभी गर्भवती महिला को खान-पान और स्वास्थ्य पर ध्यान देने की सलाह देते हैं। यूँ तो गर्भावस्था के सभी नौ महीने बहुत ही अहम और खास होते हैं। लेकिन डिलीवरी से पहले के तीन महीने यानी 7 वां, 8 वां और 9 वां महीना गर्भावस्था की पूरी अवधि का सबसे खास समय होता है। इसलिए डिलीवरी के पहले तीन महीने गर्भवती महिला को खास ख्याल रखना चाहिए।

प्रेगनेंसी के आखिरी तीन महीने

डॉक्टरों के अनुसार, प्रेगनेंसी के आखिरी के तीन महीने महिलाओं को अपने खान पान से लेकर रहन सहन तक सभी में उचित बदलाव करने चाहिए। क्योंकि गर्भावस्था के पांचवे महीने के बाद से पेट भी बढ़ने लगता है। ऐसे में गर्भवती महिला को अपने पेट का खास ध्यान रखना चाहिए। इसके अलावा अपने खान-पान में भी उचित बदलाव करने चाहिए। तो आइये विस्तार से जानते हैं डिलीवरी के पहले के तीन महीने में किन-किन बातों का ध्यान रखें और क्या करें जिससे डिलीवरी में समस्या ना हो?

डिलीवरी होने के पहले के तीन महीने इन बातों का ध्यान रखें

प्रेगनेंसी का 7 वां, 8 वां और 9 वां महीना बहुत ही ध्यान रखने वाला होता है। इस समय गर्भवती महिला को हर चीज का खास ख्याल रखना चाहिए। खासकर 9 वे महीने में। नीचे हम आपको कुछ टिप्स दे रहे हैं जिन्हे गर्भावस्था के आखिरी 3 महीनों में अपनाकर आप खुद को और अपने बच्चे को स्वस्थ रख सकती हैं।

ज्यादा देर खड़े ना हो

आखिरी महीनों में पेट बढ़ने के साथ-साथ वजन भी बढ़ने लगता है। इस अवस्था में आधी देर तक खड़े रहने से पेट के निचले हिस्से पर जोर पड़ने लगता है जिसके कारण पीठ दर्द की समस्या हो सकती है। इसलिए इस समय में ज्यादा देर तक खड़े होने से बचें और जितना हो सके आराम करें।

इस तरह ना बैठें 

इन महीनों में चेयर पर पैर लटकाकर बैठने से पैरों में सूजन आ सकती है। इसके अलावा इन महीनों में पैरों के भार पर भी नहीं बैठना चाहिए। इससे पैरों में दर्द और सूजन की समस्या हो सकती है।

पेट के भार पर ना सोएं 

गर्भावस्था के आखिरी तीन महीनों में गर्भवती महिला को कभी भी पेट के भार नहीं सोना चाहिए। क्योंकि इस समय में पेट का आकार बढ़ जाता है, ऐसे में इस तरह सोने से परेशानी हो सकती है और शिशु की शारीरिक संरचना पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

खान-पान का रखें ध्यान

इन तीन महीनों में गर्भवती महिला को अपने खान-पान का भी खास ख्याल रखना चाहिए। एक बार भर पेट खाने की बजाय उतना खाना ही 5 से 6 बार में थोड़ा-थोड़ा करके खाना चाहिए। अधिक देर तक भूखा नहीं रहना चाहिए। खाने में कैल्शियम, और डेरी प्रोडक्ट्स का अधिक से अधिक सेवन करना चाहिए। साथ ही विटामिन और आयरन सप्लीमेंट्स भी लेते रहना चाहिए। खासकर की घी, कहते है प्रेग्नेंसी के आखिरी समय में जितना हो सके घी पीना चाहिए ये प्रसव को आसान करने में मदद करता है।

व्यायाम करें 

यूँ तो गर्भावस्था के दौरान सभी नौ महीनों में व्यायाम करने की सलाह दी जाती है। लेकिन आखिरी के तीन महीनों में व्यायाम जरूर करने चाहिए। इससे प्रसव में आसानी होती है। इसके लिए आप सरल और बिना परिश्रम वाले व्यायाम अपना सकती हैं। ज्यादा कड़े व्यायाम ना करें।

संबंध से परहेज 

प्रेग्नेंसी के आखिरी तीन महीनों में गर्भवती महिला के पेट का आकार बढ़ने लगता है ऐसे में संबंध बनाने से आपको असहजता महसूस होगी। इसके अलावा इस दौरान संबंध बनाने से पेट पर दबाब पड़ने के चांसेस भी बढ़ जाते हैं इसलिए इन महीनों में जितना हो सके संबंध बनाने से परहेज रखना चाहिए।

इन कामों को करने से बचें 

प्रेग्नेंसी के आखिरी तीन महीनों में गर्भवती स्त्री को पोंछा लगाने से बचना चाहिए। इससे पेट पर दबाब पड़ता है जो आपके शिशु के लिए ठीक नहीं।

ये समस्याएं हो सकती है 

गर्भावस्था के आखिरी महीनों में अपच, सीने में जलन, सूजन, जल्दी पेशाब लगने और ऐंठन की समस्याएं हो सकती है। इसके अलावा पीठ दर्द की समय भी हो सकती है। इसीलिए परेशान ना हो।

इनका भी ध्यान रखें 

गर्भावस्था के आखिरी महीने में भारतीय शौचालय का इस्तेमाल करना चाहिए, यह आपको स्क्वाट मुद्रा देता है जो डिलीवरी के समय प्रसव में बहुत लाभकारी होती है।

गर्मियों में त्वचा काली होने से बचाने के तरीके

गर्मियों में त्वचा को काली होने से कैसे बचाएं :- अच्छी, गोरी और खुबसूरत स्किन पाना हर महिला की चाह होती है लेकिन बदलते मौसम और प्रदुषण भरे वातावरण में अपनी स्किन की खुबसूरती को बरकरार रख पाना काफी मुश्किल होता है। विशेषकर गर्मियों में! क्योंकि इस मौसम में स्किन टैनिंग और त्वचा के काले होने की समस्याएं सबसे अधिक देखने को मिलती है। गर्मियों के मौसम में चलने वाली गर्म हवाएं और लू स्किन की नमी चुराकर उसे रुखा बना देतीं है।

इसके अलावा सूर्य की तेज किरणें स्किन का टोन असामान्य कर देती है। अगर आप ध्यान दे, तो आप देखेंगे की गर्मियों के मौसम में जो स्किन ढकी रहती है उसका कलर सामान्य रहता है जबकि जो स्किन डायरेक्ट धूप के कांटेक्ट में आती है उसका कलर डार्क हो जाता है। जो देखने में काफी खराब लगता है। लेकिन इस समस्या से बचना वाकई काफी मुश्किल होता है।

ऐसे में जरुरी है की सही समय पर स्किन की देखभाल करना शुरू कर दें। ताकि गर्मियों में अच्छी और एकसमान निखार वाली स्किन पा सके। इसके लिए आपको कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना होगा। जिससे स्किन को धूप में काली या टैन होने से बचाया जा सकता है। इसके अलावा अगर धूप से आपकी त्वचा काली हो चुकी है तो उसके लिए कुछ उपाय जिनकी मदद से टैनिंग को दूर किया जा सकता है। यहाँ हम आपको उन्हों के बारे में बता रहे है –सूर्य की किरणों से त्वचा की देखभाल

गर्मियों में त्वचा काली या टैन होने से कैसे बचाएं?

गर्मियों में चलने वाली गर्म लू और सूरज की हानिकारक किरणों की वजह से त्वचा काली हो जाती है और उसमे टैनिंग होने लगती है। अगर आपकी स्किन भी धूप में काली हो गयी है तो आज हम आपको कुछ उपाय बता रहे है जिनकी मदद से स्किन टैनिंग को दूर किया जा सकता है।

1. बेसन और दही का प्रयोग करें :

बेसन और दही दोनों में मौजूद स्किन स्किन की रंगत को साफ़ करने और त्वचा को निखारने में मदद करते है। इतना ही नहीं इन दोनों का मिश्रण डेड स्किन और सनटैन को भी दूर करता है। यह स्किन को एक्स्फोलिएट करके डेड स्किन साफ़ करके नए सेल्स को बाहर लाने में मदद करते है। सनटैन की समस्या के लिए –

1 चम्मच बेसन और 1 चम्मच दही लें। अब इन दोनों को अच्छे से मिलाकर पेस्ट बना लें। अच्छे से मिलाने के बाद अपने चेहरे और गले पर इस मिश्रण को लगाएं। 10 मिनट तक स्क्रब करें। उसके बाद 10 मिनट और इस पैक को फेस पर लगे रहने दें। उसके बाद पानी से साफ़ कर लें। रोजाना दिन में एक बार इस उपाय का प्रयोग करने से स्किन अपने आप साफ हो जाएगी।

2. हल्दी, दही और शहद से बना फेस पैक :

त्वचा और उससे जुड़ी समस्यायों के लिए हल्दी का इस्तेमाल बहुत पुराने समय से किया जा रहा है। क्योंकि इसमें कई एंटी सेप्टिक, एंटी बैक्टीरियल और एंटी ओक्सिडेंट्स पाए जाते है जो स्किन की समस्यायों को दूर करने में मदद करते है। जबकि दही स्किन को मोइस्चराइज़ करके उसे नमी पहुँचाने का काम करती है। और शहद उसके फायदों से तो सभी भली भांति परिचित है। ये त्वचा के लिए एक नेचुरल मोइस्चराइज़र का काम करती है और लूज स्किन को ठीक करके जवान बनाये रखने में मदद करती है। धूप से काली हुई स्किन के लिए –

1 चुटकी हल्दी, 1 चम्मच दही और 1 चम्मच शहद को अच्छे से मिलाकर पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को अपने फेस और गर्दन पर लगायें। 20 मिनट तक सूखने का इन्तजार करें और उसके बाद हलके गर्म पानी से चेहरा साफ़ कर लें। लास्ट में गुलाबजल से चेहरे को नमी दें। कुछ ही दिनों के नियमित प्रयोग से रिजल्ट्स आपके सामने होंगे।

3. चंदन और गुलाबजल का प्रयोग करें :sunskrin

चंदन स्किन के लिए बहुत लाभकारी होता है, निखरी स्किन से लेकर पिंपल आदि की समस्याओं में इसका प्रयोग करना फायदेमंद होता है। इसके अलावा बढती उम्र की निशानियों को कम करने के लिए भी चंदन का प्रयोग किया जाता है। जबकि गुलाबजल स्किन को फ्रेश लुक देने और टोन को लाइट करने में मदद करता है। फ्रेश स्किन के लिए –

1 चम्मच चंदन पाउडर और 2-3 चम्मच गुलाबजल को अच्छे से मिक्स कर लें। पैक बनाने के बाद इसे अपने चेहरे पर लगायें। 15 मिनट तक लगे रहने दें। और जब फेस पर खिंचाव महसूस होने लगे तो हाथों को गीला करके गोलाई में मसाज करते हुए पैक हटाएं। 2-3 मिनट की मसाज के बाद पानी से दोबारा चेहरा धो लें।

4. फेस के लिए नींबू और एलोवेरा :

यह स्किन के लिए एक नेचुरल ब्लीच के रूप में कार्य करता है। जो सनटैन के साथ साथ पिंपल और ब्लैकहेड्स जैसी समस्यायों को भी दूर करता है। इसमें मौजूद विटामिन सी स्किन को साफ़ करके रंगत निखारने में भी मदद करता है। प्रयोग के लिए –

आधे नींबू का रस और 1 चम्मच एलोवेरा जेल लें। दोनों को अच्छे से मिलाकर एक पेस्ट बना लें। अब इस पैक को अपने चेहरे, गर्दन और बाजुओं पर लगाएं। 15 से 20 मिनट तक रखें और उसके बाद पानी से साफ़ कर लें। पहली बार इस उपाय का इस्तेमाल करने से स्किन में खुजली हो सकती है, लेकिन अगर खुजली ज्यादा हो तो पैक को तुरंत साफ़ कर दें। बेहतर होगा प्रयोग से पहले आप इस पैक का अपने हाथों पर एक पैच टेस्ट कर लें।

5. कच्चे दूध से निखारें स्किन :

शायद आप नहीं जानते लेकिन कच्चा दूध भी स्किन को निखारने में आपकी मदद कर सकता है। आपने देखा होगा छोटे बच्चों को कच्चे दूध से नहलाया जाता है ताकि उनकी स्किन सॉफ्ट बनी रहे। इतना ही नहीं कच्चा दूध सनटैन को भी रिमूव करता है। प्रयोग के लिए रोजाना रात को अपने चेहरे और गर्दन पर कच्चा दूध लगाकर सोएं। 1 हफ्ते तक इस उपाय का प्रयोग करें फर्क आपके सामने होगा। इस उपाय का प्रयोग आप नहाने से पहले भी कर सकते है। इसके लिए नहाने से 10 मिनट पहले कच्चा दूध अपने शरीर पर लगा लें और फिर नहा लें।

6. सनस्क्रीन :

त्वचा को धूप से बचाने के लिए आप सनस्क्रीन का इस्तेमाल कर सकती है। यह स्किन को धूप की हानिकारक किरणों से बचाने में मदद करता है। इसके लिए कम से कम 15 SPF वाला सनस्क्रीन सही रहेगा। यह स्किन को किरणों और प्रदुषण दोनों से बचाने में मदद करेगा।

7. स्किन को काली होने से बचाने के अन्य उपाय :
  • अधिक से अधिक पानी का सेवन करें, जिससे स्किन और बॉडी हाइड्रेट रहे।
  • कहीं बाहर जाने से पहले अपनी स्किन को पूरी तरह ढक लें। बेहतर होगा फुल स्लीव्स के कॉटन के कपडे पहनें।
  • आँखों की सुरक्षा के लिए गौग्लास पहनें।
  • कहीं बाहर से आने के बाद तुरंत फेस वाश करें और चेहरा धोने के बाद उसे साफ़ कपडे से पोंछे।
  • अच्छी और बेस्ट क्वालिटी के फेस वाश का इस्तेमाल करें।
  • ऑयली स्किन वाले अपने फेस को कभी भी खुद न सुखाएं थोडा गीले ही रहने दें।

तो, ये थे कुछ उपाय और टिप्स जिनकी मदद से धूप में काली हुई त्वचा को ठीक किया जा सकता है। और त्वचा को धूप में काली होने से बचाया जा सकता है।


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