Home Blog Page 149

गोरा और सूंदर शिशु के लिए क्या खाएं

गोरा और सूंदर शिशु के लिए क्या खाएं, गोरा और सूंदर बच्चा पैदा करने के लिए क्या खाएं, गोरा व् सूंदर शिशु पैदा करने के घरेलू उपाय, स्वस्थ व् सूंदर शिशु के लिए गर्भवती महिला यह खाए

जैसे ही शिशु माँ के गर्भ में आता है वैसे ही महिला अपने मन में उसकी छवि तैयार करने लग जाती है। और हर माँ चाहती है की उसके गर्भ में पल रहा शिशु स्वस्थ, सूंदर, बुद्धिमान, गोरा, व् हष्ट पुष्ट हो। और इसके लिए वो गर्भास्था में अपनी अच्छी तरह से केयर करती है। तो आज हम आपको गर्भवस्था के दौरान खाए जाने वाले कुछ ऐसे आहार के बारे में बताने जा रहें हैं। जिनका सेवन करने से गर्भ में पल रहा शिशु स्वस्थ, सूंदर व् गोरा होता है, तो आइये अब जानते हैं की वो कौन से आहार हैं।

केसर वाला दूध

पुराने समय से ही कहा जाता है की यदि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के समय केसर वाले दूध का सेवन करती है तो इससे गर्भ में पल रहा शिशु गोरा व् सूंदर होता है। इसके इस्तेमाल के लिए एक गिलास दूध में केवल पांच से छह रेशे केसर के डालकर दूध को उबाल लें, उसके बाद गुनगुने रहने पर उसका सेवन करें। ज्यादा केसर का सेवन न करें और दिन में एक ही बार इसे पीएं क्योंकि इसके कारण गर्भाशय में संकुचन होने की समस्या हो सकती है।

नारियल

नारियल एक सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करने से न केवल शिशु का रंग गोरा और सूंदर होता है बल्कि इससे मॉर्निंग सिकनेस जैसी परेशानी से भी राहत मिलती है। यदि आप कच्चा नारियल को वैसे ही खाना चाहे तो खा सकती हैं, नहीं तो नारियल की खीर, नारियल के लडू, या फिर नारियल पानी का सेवन भी कर सकते हैं।

अंगूर

अंगूर का सेवन करने से भी आप एक सूंदर और गोर शिशु को जन्म दे सकती हैं, लेकिन आप एक दिन में पंद्रह बीस दाने ही अंगूर के खाएं क्योंकि इसके ज्यादा सेवन से आपको परेशानी हो सकती है।

दूध

यदि आप दूध जैसा गोरा बच्चा चाहती है तो प्रेगनेंसी के दौरान आप दिन में दो से तीन गिलास दूध का सेवन करें। ठंडे दूध की जगह गुनगुना दूध पीएं, साथ ही मलाई रहित दूध का सेवन करें।

बादाम

यदि आप गोरा व् सूंदर शिशु होने के साथ शारीरिक व् मानसिक रूप से भी हष्ट पुष्ट शिशु चाहती है तो बादाम का सेवन आपको जरूर करना चाहिए। भीगे हुए बादाम ज्यादा फायदेमंद होते हैं साथ ही आप बादाम वाले दूध का सेवन या बादाम खाने के बाद दूध का सेवन भी कर सकते हैं।

संतरा

प्रेगनेंसी के दौरान कब्ज़ जैसी समस्या से राहत और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ संतरे का सेवन करने से शिशु खूबसूरत और गोरा भी होता है। आप चाहे तो संतरे का सेवन कर सकती हैं या फिर इसका जूस भी पी सकती है, लेकिन घर में निकाले हुए जूस का ही सेवन करें।

सौंफ

यदि गर्भवती महिला खाना खाने के बाद सौंफ को अच्छे से चबाकर उसका सेवन करती है तो ऐसा करने से शिशु का रंग गोरा होता है और साथ महिला की पाचन क्रिया को भी बेहतर होने में मदद मिलती है।

आंवले का मुरब्बा

यदि आप प्रेगनेंसी के दौरान खाने से पहले या खाने के साथ आंवले के मुरब्बे का सेवन करते हैं तो इससे भी शिशु के रंग पर असर पड़ता है और साथ ही शिशु स्वस्थ और सूंदर भी होता है।

हरी सब्जियां

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को हरी सब्जियों का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए क्योंकि हरी सब्जियों का सेवन करने से न केवल महिला के शरीर में आयरन की कमी पूरी होती है। बल्कि इससे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलने के साथ शिशु की ख़ूबसूरती भी बढ़ती है और शिशु गोरा भी होता है।

गाजर व् चुकंदर

नियमित ताजा गाजर का जूस, सलाद के रूप में गाजर का सेवन करने से भी आपको बहुत फायदा मिलता है। इससे रक्त की कमी को पूरे करने के साथ शिशु के बेहतर विकास और उसकी स्किन को गोरा बनाने में मदद मिलती है। साथ ही आप चुकंदर का गाजर के साथ मिलाकर जूस पीएं, यह भी फायदेमंद होता है।

अनार

अनार का सेवन करने से या अनार का जूस पीने से न केवल शिशु का शारीरिक विकास बेहतर होता है, बल्कि महिला के शरीर में आयरन की मात्रा को भी पूरा करने में मदद मिलती है। साथ ही अनार का सेवन करने से आपकी गोरा व् सूंदर शिशु पाने की चाह भी पूरी होती है।

तो यह हैं कुछ खाने की चीजें जिनका सेवन यदि गर्भवती महिला करती है तो एक स्वस्थ, सूंदर, गोरा शिशु होता है। इसके अलावा महिला को प्रेगनेंसी के दौरान खुश रहना चाहिए, तनाव व् गुस्सा आदि से दूर रहना चाहिए ताकि गर्भ में पल रहे शिशु का विकास अच्छे से हो सके।

यूट्यूब विडिओ –

क्या खाने से गोरा बेबी होता है? गोर शिशु के लिए ये खाएं।

मूलांक क्या होता है? जन्म तारीख से जानिए अपना स्वभाव

Numerology Predictions : Know Your Nature By Birth Date

मूलांक क्या होता है, जन्मतिथि के अनुसार स्वभाव, इन तारीख को जन्मे हुए बच्चे का स्वभाव ऐसा होता है, Numerology predictions, Know your nature birth date

हर एक इंसान का अपना स्वभाव होता है, अपने तरीके होते है, कोई ज्यादा मिलनसार होता है तो कोई लोगो से कटे हुए होते है। एक परिवार में जितने लोग होते है उन सभी का व्यवहार अलग अलग होता है इनका कारण होता है उनका मूलांक यानी जन्म तिथि या जन्म तारीख। किसी भी इंसान का मूलांक 1 से 9 तक होता है। आप जिस तारीख को जन्म लेते है उसका एक अपना मूलांक होता है।

जैसे अगर आप तारीख 1 को जन्म लेते है तो आपका मूलांक 1 हुआ। अगर आप 11 तारीख को जन्म लेते है तो 11 दो आँखों से बना है 1 + 1 = 2 इसका मतलब आपका मूलांक 2 है। इस तरीके से अगर आप 28 तारीख को जन्म लेते है तो आपका मूलांक 2 + 8 = 10 = 1 इसका मतलब आपका मूलांक 1 हुआ क्योंकि 0 का कोई अर्थ नहीं होता। अगर आप 18 तारीख को पैदा हुए है तो 1 + 8 = 9, आपका मूलांक 9 हुआ।baby

यहाँ हम आपको जन्म तारीख और मूलांक के हिसाब के व्यक्ति के स्वभाव के बारे में बताने जा रहे है। जिसके बाद आप भी अपने संबंधियों और परिवारजनों के स्वभाव के बारे में विस्तार से जान सकेंगे।

जन्म तारीख से जानिए अपना स्वभाव

मूलांक 1 :-

जन्मतिथि – 1, 10, 19, 28

स्वभाव : इन तारीखों में जन्म लेने वाले इंसान अपने आप में नयी चीजों को ढूंढने वाला होता है और उनका अपनी जिंदगी के लिए एक अलग नजरिया होता है। वो हमेशा लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र होते है। कई बार ये लोग किसी और व्यक्ति के प्रति आक्रमक भी हो जाते है।


मूलांक 2 :-

जन्मतिथि – 2, 11, 20, 29

स्वभाव :  जिन व्यक्तियों का मूलांक 2 है वे स्वभाव के बहुत अच्छे होते है वे अपनी सोच और काम के द्वारा लोगो पर राज करते है। उनका स्वभाव माफ़ करना और दया दिखाना होता है। वे अन्य लोगों के विचारों से भी प्रेरित होते है।


मूलांक 3 :-

जन्मतिथि – 3, 12, 21, 30

स्वभाव : जिन व्यक्तियों का जन्म इन तिथियों को हुआ है उनका उद्देश्य बहुत बड़ा होता है और वे अपने उद्देश्य को पाने के लिए दिन रात मेहनत करते है। उनकी सोच और उनका आचरण उनको लोगों का प्रेरणा स्त्रोत्र बनाता है। ऐसे लोगों का स्वभाव शांत और मिलनसार होता है।


मूलांक 4 :-

जन्मतिथि – 4, 13, 22, 31

स्वभाव : जिनका मूलांक 4 है वे लोग मिलनसार बहुत कम होते है। वे लोग कभी कुछ सोचते है और कभी कुछ सोचते है। वे अपने आपको आकर्षित करने की कोशिश करते है लेकिन जब उनका काम नहीं बनता है तो वो गुस्सैल और चिड़चिड़े हो जाते है। इसी वजह से वे कभी-कभी बहुत ज्यादा क्रोधित हो जाते है। उनके स्वभाव के चलते उनके कई दुश्मन हो सकते है। और दूसरे लोग इसी चीज का फायदा उठाकर अपना काम बनाते है।


मूलांक 5 :-

जन्मतिथि – 5, 14, 23

स्वभाव : जिनका मूलांक 5 है, वे लोग स्वभाव से बहुत चालाक होते है और अपना काम निकालने के लिए दूसरों के साथ चालाकी करते है। ऐसे लोग व्यापार और संबंधों में इसका फायदा उठाते है। इन लोगों का स्वभाव ऐसा होता है की उनके व्यापार और जीवन में संबंध अच्छे रहते है। वो लोगों और समाज के लिए अच्छे कार्य करते है। वे बेहतरीन सलाहकार भी होते है।


मूलांक 6 :-

जन्मतिथि – 6, 15, 24

स्वभाव : मूलांक 6 वाले व्यक्ति को समाज में काफी ख्याति मिलती है। वे लोगों के बीच अपनी एक अलग पहचान बनाते है। और आकर्षण का केंद्र बने रहते है। वो दोस्ताना व्यवहार और शांत स्वभाव के होते है। लेकिन वे गलत चीजों को सहन नहीं करते।


मूलांक 7 :-

जन्मतिथि – 7, 16, 25

स्वभाव : मूलांक 7 वाले व्यक्ति को आप कभी भी ग्रुप में नहीं पाएंगे। वे अपने सभी कार्यों को खुद करना चाहते है और किसी का सहयोग नहीं चाहते। वे हमेशा अपने पैरों पर खड़े होने की कोशिश करते है। वो चाहते है की उनका सर हमेशा ऊँचा उठा रहे। ये लोग जिद्दी स्वभाव के होते है और दूसरों की सलाह को कम मानते है व् अपने मन की करते है।


मूलांक 8 :-

जन्मतिथि – 8, 17, 26

स्वभाव : इन तारीखों में जन्म लेने वाले शांत स्वभाव के होते है। ये लोग इधर-उधर की बातों में नहीं पड़ते है। वे लोग अकेला रहना अधिक पसंद करते है। कई बार ये लोग जलन के शिकार भी हो जाते है। और अलग-थलग पड़ जाते है।


मूलांक 9 :-

जन्मतिथि – 9, 18, 27

स्वभाव : इन तारीखों में जन्म लेने वाले लोग मुंहफट होते है और लोगों की अच्छाई-बुराई सामने बोल जाते है। कई बार उनका व्यवहार और उनके शब्द दूसरों को ठेस पहुँचाने वाले होते है।

अब तो आप अच्छी तरह से जान गए होंगे की कौन सी तिथि या मूलांक में जन्म लेने वाले व्यक्ति का स्वभाव कैसा होता है? इन सभी बातों से इतना तो साफ़ हो जाता है की किसी भी व्यक्ति का स्वभाव एक दुसरे से मिलता हुआ नहीं होता यानी हर व्यक्ति की अपनी सोच और अपना स्वभाव होता है जो उसे दूसरों से भिन्न बनाता है।

प्रेशर कुकर इस्तेमाल करने से पहले ये जरुर पढ़ें!

Tips To Remember While Using Pressure Cooker

प्रेशर कुकर इस्तेमाल करने से पहले ये जरुर पढ़ें, प्रेशर कुकर का इस्तेमाल कैसे करें, Common Mistabkes With Pressure Cooker, Tips To Remember While Using Pressure Cooker, प्रेशर कुकर के इस्तेमाल में की जाने वाली सामान्य गलतियाँ, प्रेशर कुकर का इस्तेमाल, प्रेशर कुकर यूज करने की टिप्स इन हिंदी

पहले के जमानें की तुलना में आज के समय में खाना बनाना बहुत सरल हो गया है जहाँ एक तरफ मुश्किल से जलने वाले चूल्हे गैस में परिवर्तित हो गए है वहीं खाना बनाने के लिए प्रयोग किये जाने बर्तनों में भी काफी बदलाव आ गए है। पहले लोग खाना उबालने या पकाने के लिए कढाई या भगोनो का इस्तेमाल किया करते थे। लेकिन बदलते वक्त के साथ इस दिशा में भी काफी बदलाव आ गया है। जिनमे से एक है प्रेशर कुकर। जिसमे खाना बनाना काफी सरल हो गया है।प्रेशर कुकर का इस्तेमाल कैसे करें

प्रेशर कुकर का इस्तेमाल करने से न केवल खाना बनाने में लगने वाले समय में कमी आती है बल्कि खाना भी अच्छी तरह पकता है। इसका प्रयोग करना काफी आसान होता है, लेकिन इसके इस्तेमाल के समय काफी सावधानियां बरतनी चाहिए। क्योंकि जरा सी लापरवाही आपके लिए परेशानी का कारण बन सकती है।

आजकल की इस भागदौड़ भरी दिनचर्या में जल्दी से जल्दी खाना बनाने के लिए अधिकतर घरों में प्रेशर कुकर का ही इस्तेमाल किया जाता है। क्योंकि इसमें खाना बहुत कम समय में बन जाता है और खाने में मौजूद सभी पौष्टिक गुण भी बने रहते है जो अक्सर खाना बनाने के अन्य तरीकों में खत्म हो जाते है। हालांकि खाना बनाने के लिए यह तरीका काफी आसान और सरल है लेकिन इसके इस्तेमाल में की गयी जरा सी लापरवाही बड़ी परेशानी बन सकती है। इसीलिए आज हम आपको प्रेशर कुकर के इस्तेमाल के समय ध्यान रखने वाली कुछ विशेष बातों के बारे में बता रहे है। जिनके बारे में अधिकतर लोगों को पता नहीं होता।

प्रेशर कुकर के इस्तेमाल ये सावधानियां बरतें :-

1. कुकर की रबर :

प्रेशर कुकर के इस्तेमाल में ध्यान रखने वाली पहली बात उसकी रबर की होती है जो उसके ढक्कन पर लगाई जाती है। कुकर में इस्तेमाल की जाने वाली रबर का इस्तेमाल कुकर में सही भाप / प्रेशर बनाने के लिए किया जाता है। लेकिन अगर वह रबर ठीक तरह से नहीं लगाई गयी है या थोड़ी भी लूज होगी तो कुकर में बन रहा खाना ठीक तरह से नहीं पकेगा। इसीलिए प्रेशर कुकर में खाना बनाते समय उसकी रबर को अच्छे से चेक कर लें।

2. प्रेशर कुकर की सिटी को दबाएँ नहीं :pressure cooker

बहुत से लोग खाने को अधिक समय तक कुकर में रखकर भाप से पकाने के लिए कुकर की सिटी को दबाए रखते है। जिसके कारण प्रेशर कुकर में जरुरत से ज्यादा भाप बन जाती है। इस स्थिति में कुकर फटने की सम्भावनाएं बढ़ जाती है जो आपके और आपकी किचन के लिए हानिकारक हो सकता है। इसीलिए कभी भी कुकर की सिटी को जबरदस्ती दबाएँ नहीं। उसमे जितनी भाप मौजूद है उसी से खाने को पकने दें।

3. कुकर को जबरदस्ती खोलने का प्रयास :

जल्दी बाजी के चक्कर में अधिकतर लोग कुकर की सिटी निकले बिना ही उसे खोलने का प्रयास करते है। जो की सही नहीं है। क्योंकि गैस बंद करने के बाद भी कुछ समय तक कुकर में भाप बनी रहती है। ऐसे में कुकर की भाप निकलने बना ही उसे खोलना हानिकारक हो सकता है। इस स्थिति में कई बार कुकर फट भी जाता है। इसलिए कुकर से पूरी भाप निकलने तक का इंतजार करना चाहिए और उसके बाद ही कुकर का ढक्कन खोलना चाहिए। हां, अगर आपको लगता है की कुकर में रखा खाना ज्यदा पक गया है तो आप करछी से उसकी सिटी को उठाकर साड़ी भाप निकालकर कुकर का ढक्कन खोल सकते है। लेकिन इसमें भी काफी सावधानी रखनी होती है। इसीलिए संभव हो तो कुकर से स्वतः ही भाप निकलने का इंतजार करें।

4. सिटी को समय-समय पर बदलते रहें :

कुकर में प्रेशर से भाप बनाने और उस भाप को सही समय पर निकालने तक का सारा काम सिटी का होता है। जिसमे खराबी होने पर खाना या तो जल जाता है या अधपका ही रह जाता है। इसलिए कुकर की सिटी को समय समय पर बदलवा लेना चाहिए। इसके अलावा कुकर के इस्तेमाल के समय होने वाली दुर्घटनाओं का एक कारण कुकर की सिटी में खराबी होना भी होता है। इसलिए इस बात का विशेष ध्यान रखें।

5. बिना पानी के प्रेशर कुकर का प्रयोग :

प्रेशर कुकर का इस्तेमाल खाना पकाने और किसी चीज को उबालने के लिए किया जाता है, जिसमे पानी डालना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि अगर आप उसमे पानी नहीं डालेंगे तो उसमे भाप नहीं बनेगी। और खाना कच्चा ही रह जाएगा। इसके अलावा पानी भी कुकर की सतह तक पूरा भरा हुआ नहीं होना चाहिए। क्योंकि भाप बनने की भी जगह चाहिए होती है और अगर उस हिस्से में पानी भरा रहेगा तो भाप नहीं बन पाएगी। ऐसे में कुकर फटने की संभावना हो सकती है। इसीलिए इस बात का भी ध्यान रहें।

6. डिफेक्टिव कुकर से बचें :

बहुत पुराना प्रेशर कुकर या दरारे पड़े हुए कुकर का इस्तेमाल खाना पकाने के लिए नहीं करना चाहिए। क्योंकि इस तरह के कुकर में भाप ठीक तरह से नहीं बनती जिससे खाना भी ढंग से नहीं पाक पाता। इसीलिए हमेशा ऐसे कुकर का इस्तेमाल करे जिसमे कोई दरार न हो और वह अच्छी तरह से साफ़ हो।

7. कुकर को सही तरीके बंद करें :

कुकर में खाना बनाने का सारा खेल भाप का होता है लेकिन अगर आप कुकर का ढक्कन ही सही से बंद नहीं करेंगे तो भाप ठीक तरह से नहीं बन पाएगी। जिससे खाना अच्छे से पक नहीं पाएगा। इसीलिए कुकर को हमेशा सही तरीके से बंद करें।

8. सभी तरह के खाने को एक ही बार में न पकाएं :

प्रेशर कुकर का इस्तेमाल करने वाले अधिकतर लोग यही गलती करते है। जल्दी खाना बनाने के चक्कर में वे अलग अलग तरह की सब्जियों को एक ही बार में पकाने लगते है। जिससे एक चीज तो अच्छे से पक जाती है लेकिन दूसरी चीज कच्ची या ज्यादा पक जाती है। इसीलिए खाना बनाते समय इस बात का खास ध्यान रखें की एक बार में एक ही तरह का खाना कुकर में हो जिससे वह अच्छी तरह से पक सके।

तो ये थी कुछ जरुरी बातें जिन्हें आपको प्रेशर कुकर का इस्तेमाल करने से पूर्व और करते समय ध्यान में रखना होगा। क्योंकि प्रेशर कुकर के इस्तेमाल में की गयी जरा सी गलती आपके लिए खतरे का संकेत बन सकती है।

लहसुन के शैम्पू के बचाएं झड़ते हुए बाल

लहसुन शैम्पू, लहसुन से बना शैम्पू, झड़ते बालों के लिए लहसुन का शैम्पू, लहसुन का शैम्पू, गिरते बालों के लिए लहसुन का शैम्पू, बालों के टूटने की समस्या के लिए लहसुन शैम्पू, लहसुन का शैम्पू कैसे बनाने, लहसुन शैम्पू बनाने की विधि, लहसुन का शैम्पू बनाने की सही विधि, लहसुन का शैम्पू कैसे बनाया जाता है, घर पर लहसुन का शैम्पू कैसे बनायें, लहसुन के शैम्पू के फायदे,बालों के लिए लहसुन शैम्पू के फायदे, लहसुन शैम्पू लाभ 

बालों को लेकर हर कोई बहुत केयरफुल और सेंसिटिव होता है। लेकिन आजकल के समय में अपने बालों को बचा पाना बेहद मुश्किल होता जा रहा है। बालो का झड़ना तो एक आम समस्या बन गया है। क्या महिला और क्या पुरुष, कितने ही प्रयास कर लें लेकिन बालों का टूटना और झड़ना कम नहीं हो रहा।

ऐसे तो बाजार में ढेरों ऐसे प्रोडक्ट्स मौजूद है जो बालों का झड़ना रोकने का दावा करते है लेकिन उनमे मिले केमिकल समस्या को और अधिक बढ़ा देते है। ऐसे में करे तो क्या? परेशान न हो, क्योंकि आज भी कुछ ऐसे उपाय है जिन्हे अपनाकर आप अपने बालों की खोई चमक को वापस पा सकेंगे। जी हां, हम बात कर रहे है घरेलू उपायों।

ऐसे तो आपने बालों का झड़ना रोकने के लिए बहुत से घरेलू उपाय पढ़े और सुने होंगे लेकिन क्या कभी लहसुन के बारे में सुना है। जी हां, वे स्वादिष्ट सब्जी भी आपके बालों का झड़ना रोक सकते है। इसके लिए आप अपने घर पर लहसुन से बने शैम्पू का प्रयोग करना होगा। जो बालों का झड़ना रोककर उनकी ग्रोथ बढ़ाने में मदद करेगा।

इतना ही नहीं, इसकी एंटी फंगल और एंटी बैक्टीरियल प्रकृति स्कैल्प में हो रहे हर प्रकार के इन्फेक्शन को भी ठीक करने में मदद करती है। इस शैम्पू को आप हफ्ते में 2 से 3 बार प्रयोग कर सकते है लेकिन इससे अधिक बार न करें अन्यथा समस्या हो सकती है। तो आइये जानते है कैसे बनायें लहसुन का शैम्पू?

घर पर बनायें लहसुन का शैम्पू और सवारें अपने बाल :-

इस शैम्पू को बनाने के लिए प्रयोग होने वाली सभी चीजें आपको आसानी से मिल जाएंगी। अगर ये सभी आपके घर में मौजूद है तो बहुत अच्छी बात है लेकिन अगर नहीं है तो आप इन्हे बाजार से भी खरीद कर ला सकते है। तो आइये अब जानते है इस शैम्पू को बनाने के लिए किन किन वस्तुओं का प्रयोग होगा।

लहसुन का शैम्पू बनाने के लिए सामग्री :

  • 10 से 15 ताजे लहसुन की कलियां
  • 1 चम्मच जैतून का तेल
  • 3 से 5 बूंद पिपरमिंट आयल
  • 3 से 5 बूंद टी ट्री आयल
  • 1 फुल बॉटल शैम्पू

लहसुन का शैम्पू बनाने की विधि :-

  • इस शैम्पू को बनाने के लिए सबसे पहले लहसुन को छील लें।
  • अब उन्हें पानी से तब तक साफ़ करते रहे जब तक वे पूरी तरह साफ़ न हो जाए।
  • फिर इसे पीसकर पेस्ट बना लें।
  • पेस्ट में थोड़ा पानी मिलायें और थोड़ी देर तक मिक्स करते रहे, जिससे यह क्रीमी हो जाए।
  • पेस्ट बन जाने के बाद इसमें एक चम्मच जैतून का तेल, पिपरमिंट आयल और टी ट्री आयल की कुछ बूंदे डालें।
  • मिश्रण को अच्छी तरह मिलाएं और अंत में सभी चीजों को अपने शैम्पू में अच्छी तरह मिला लें।
  • शैम्पू को एयर टाइट जार में ही रखे अन्यथा खुशबु उड़ सकती है।
  • अपने नियमित शैम्पू के स्थान पर लहसुन के शैम्पू का इस्तेमाल करें।
  • हफ्ते में 2 से 3 बार प्रयोग करें फर्क आप खुद देखेंगे।

इन समस्यायों में फायदेमंद है लहसुन का शैम्पू :-

बालों को दे मजबूती :

लहसुन में एंटी बायोटिक गुण पाए जाते है जो स्कैल्प में मौजूद बैक्टीरिया को समाप्त करते है जो बाल गिरने का कारण होते है। इसके प्रयोग से बाल जड़ से मजबूत और घने भी होते है।

स्कैल्प की देखभाल :

केमिकल शैम्पू के इस्तेमाल से बाल अक्सर खराब हो जाते है और ड्राई भी हो जाते है। लेकिन इस शैम्पू की मदद से आपके सर में होने वाली खुजलाई के साथ साथ ड्राइनेस भी दूर हो जाएगी। क्योंकि जब स्कैल्प हेल्थी होगी तो ही बाल हेल्थी होंगे।

हेयर ब्रेकेज :

बहुत से लड़कियों के बाल बीच में से टूटने लगते है अगर आपके साथ भी यही समस्या है तो एक बार इस शैम्पू का प्रयोग करें। यह बालों की मोटाई बढाकर उन्हें टूटने से बचाता है। इस शैम्पू से बालों का पतलापन दूर हो जाता है और फिर कभी दो मुंहे बालों की समस्या भी नहीं होती।

ब्लड सर्कुलेशन :

लहसुन, स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन में भी मदद करता है जिससे स्कैल्प में मौजूद गंदगी हेयर फोलिकिल्स से बाहर निकल जाती है और बालों को पूर्ण पोषण मिलता है। इससे बाल भी मजबूत होते है।

तो ये लहसुन के शैम्पू के कुछ फायदे जिन्हे जानकर आप भी एक न एक बार एक शैम्पू का इस्तेमाल करके जरूर देखेंगे।

बालों के झड़ने की समस्या के अन्य उपाय जानने के लिए इसे पढ़े : बालों का झड़ना रोकने के घरेलू उपाय!

गर्भावस्था में नाभि का बाहर निकलना

गर्भावस्था में नाभि का बाहर निकलना,  प्रेगनेंसी के दौरान नाभि का बाहर आना

गर्भावस्था में एक महिला के शरीर में बहुत से बदलाव आते है। प्रेगनेंसी के दौरान एक महिला को मानसिक और शारीरिक परिवर्तनो से गुजरना पड़ता है।

हर महिला का शरीर अलग हिसाब से बदलता है, यहाँ तक के एक ही महिला की रिपीट या सेकंड प्रेगनेंसी के दौरान भी अलग अलग बदलाव हो सकते है।

गर्भावस्था में नाभि के बाहर आने के कारण

गर्भावस्था के दौरान अक्सर महिलाओं की नाभि बाहर निकल आती है। आईये जानते है नाभि के बाहर आने के क्या कारण है।

  • जैसे जैसे गर्भाशय विकसित होता है वैसे वैसे पेट बहार निकलने लगता है। पेट के साथ साथ आपकी नाभि भी बाहर आने लगती है।
  • प्रेगनेंसी में हमारी नाभि एम्ब्लिकल कॉर्ड (गर्भनाल) से बच्चे की नाभि को जोड़ता है।
  • शिशु की ग्रोथ के साथ साथ प्रेशर बढ़ने से भी नाभि बाहर की और निकल जाती है।

तो आपने देखा गर्भावस्था के दौरान नाभि का बाहर निकलना पूरी तरह से सामान्य है।

इसके अतिरिक्त नाभि पर खुजली होना और हल्का दर्द होना भी बहुत आम बात है।

नाभि के आसपास खुजली होने पर नाखूनों से खुजली नहीं करनी चाहिए।

डिलीवरी के बाद जैसे आपका पेट वापस अपनी शेप लेता है, वैसे नाभि भी पहले के तरह सामान्य हो जाती है।

प्रेगनेंसी में घीया खाने के फायदे और नुकसान

गर्भावस्था में घीया खाने के फायदे, गर्भवस्था के दौरान गर्भवती महिला को भरपूर मात्रा में फलों और सब्जियों को अपनी डाइट में शामिल करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि यह पोषक तत्वों से भरपूर होती है। और पोषक तत्वों से भरपूर चीजों का सेवन करने से गर्भवती महिला को फायदा मिलने के साथ गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। तो लीजिये आज हम एक ऐसी ही सब्ज़ी की बात करने जा रहे हैं जिसका सेवन गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए। और वो है घीया, ज्यादातर लोग इस सब्ज़ी को नापसंद ही करते हैं। लेकिन प्रेग्नेंट महिला को इसका सेवन जरूर करना चाहिए क्योंकि प्रेग्नेंट महिला और भ्रूण महिला को बहुत से फायदे मिलते हैं।

प्रेगनेंसी में घीया खाने के फायदे

गर्भावस्था के दौरान यदि प्रेग्नेंट महिला घीया का सेवन करती है तो महिला को कौन से फायदे मिलते हैं। आइये विस्तार से जानते हैं।

गर्भावस्था में घीया खाने से मिलता है फाइबर

  • प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी गर्भवती महिलाएं कब्ज़, एसिडिटी, अपच जैसी समस्या से परेशान होती है।
  • ऐसे में घीया का सेवन करने से इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।
  • क्योंकि घीया में फैट की मात्रा कम होती है और फाइबर की मात्रा पर्याप्त होती है।
  • जिससे घीया पाचन क्रिया को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करती है और कब्ज़, एसिडिटी जैसी परेशानी से गर्भवती महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।
  • साथ ही खाने में घीया बहुत हल्की होती है जिसे पचाने में प्रेग्नेंट महिला को दिक्कत नहीं होती है जिससे अपच जैसी परेशानी से भी बचाव होता है।

गेस्टेशनल डाइबिटीज़

  • घीया का सेवन करने या घीया का जूस पीने से ब्लड में शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
  • जिससे प्रेगनेंसी के दौरान प्रेग्नेंट महिला को गेस्टेशनल डाइबिटीज़ की समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है।

वजन

  • गर्भावस्था के दौरान वजन का ज्यादा बढ़ना गर्भवती महिला व शिशु के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।
  • लेकिन लौकी का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला के वजन को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
  • जिससे वजन बढ़ने के कारण प्रेग्नेंट महिला को होने वाली समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है।

कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल

  • घीया का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला के शरीर में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
  • जिससे प्रेग्नेंट महिला को हदय सम्बन्धी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

गर्भावस्था में घीया खाने से मिलता है आयरन व विटामिन सी

  • घीया में आयरन की मात्रा मौजूद होती है ऐसे में घीया का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला के शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।
  • साथ ही घीया में विटामिन सी भी मौजूद होता है जो आयरन को बॉडी में अच्छे से अवशोषित करने में मदद मिलती है।
  • ऐसे में खून की कमी को पूरा करने के लिए प्रेग्नेंट महिला को अपनी डाइट में घीया को जरूर शामिल करना चाहिए।

सोडियम

  • घीया में सोडियम और पोटैशियम की मात्रा भी मौजूद होती है।
  • ऐसे में गर्भावस्था के दौरान बॉडी में सोडियम की कमी से थकान हो सकती है, शिशु के विकास में कमी आ सकती है।
  • लेकिन घीया का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को बॉडी में सोडियम की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।
  • जिससे थकान व कमजोरी को दूर करने के साथ शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

गर्भावस्था में घीया खाने से मिलता है मॉर्निंग सिकनेस से आराम

  • घीया का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को मॉर्निंग सिकनेस की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।
  • साथ ही इससे सिरदर्द, जी मिचलाना जैसी समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

गर्भावस्था में घीया का सेवन करने के नुकसान

वैसे तो प्रेग्नेंट महिला को घीया का सेवन करने से कोई नुकसान नहीं होता है। लेकिन घीया का सेवन करते समय दो बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है। ताकि प्रेग्नेंट महिला या शिशु को किसी भी तरह की दिक्कत न हो।

  • एक तो प्रेग्नेंट महिला को कड़वी घीया का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे गर्भपात का खतरा रहता हैं।
  • दूसरी यदि प्रेग्नेंट महिला को यदि घीया का सेवन करने से उल्टी दस्त की समस्या होती है तो महिला को इसका सेवन नहीं करना चाहिए और इसके लिए एक बार डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

तो यह है प्रेग्नेंट के दौरान लौकी का सेवन करने से जुड़े कुछ टिप्स, तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। साथ ही लौकी की सब्ज़ी के साथ लौकी के जूस को अन्य फलों के रस के साथ मिलाकर , कोफ्ते बनाकर, घीया का रायता बनाकर भी इसका सेवन किया जा सकता है।

बाथरूम और किचन की टाइल्स साफ़ करने के तरीके

हम अपने घर की रोज साफ़ सफाई करते है। रोज की सफाई के बावजूद भी घर में कुछ जगह ऐसी होती है जो साफ नहीं दिखती। क्योंकि इन जगहों को खास क्लीनिंग की जरुरत होती है। बात करे बाथरूम और किचन टाइल्स की तो रोज की क्लीनिंग से सिर्फ साफ़ नहीं होती। बल्कि कुछ दिनों में इन टाइल्स पर ऐसा मैल दिखने लगता है जिससे यह काली दिखने लगती है।

हमारा घर चाहे दिखने में कितना ही सुंदर क्यों न हो अगर बाथरूम और किचन के टाइल्स साफ़ नहीं दिखती तो मेहमानो के सामने हमारी इमेज खराब हो जाती है। इन टाइल्स को साफ़ करने में बहुत समय भी बर्बाद हो जाता है। घंटो तक इन टाइल्स को रगड़ने के बाद भी इनमे वो चमक नहीं आती। आज हम आपको कुछ आसान तरीके बतायेंगे जिनसे आपका बाथरूम और किचन चमक उठेगा।

बेकिंग सोडा

दाग चाहे बाथरूम की टाइल्स पर हो या किचन की टाइल्स पर बेकिंग सोडा से की गयी सफाई आपको कही नहीं मिलेगी। 2 चम्मच बेकिंग सोडा और 1 चम्मच कपड़े धोने वाले डिटर्जेंट को मिक्स करें। अब इस मिक्सचर में 1 कप गर्म पानी मिलाये और अच्छे से मिक्स कर लें। अब इस घोल को ब्रश या स्पॉन्ज की मदद से टाइल्स को रगड़े। और हो सके तो गर्म पानी से धो लें। आपकी टाइल्स पर एकदम नया वाला लुक आ जायेगा। इस तरीको आप 15 दिनों में एक बार इस्तेमाल करेंगे तो आपका बाथरूम और किचन हमेशा नए के नए ही लगेंगे।

सिरका

वाइट सिरका और पानी को बराबर मात्रा में मिलाकर मिक्सचर तैयार कर लें। अब इस मिक्सचर से टाइल्स को स्क्रब करें। 5 से 10 मिनट तक ही रगड़ने से सभी दाग धब्बे सांफ हो जाएंगे। ऊपर से साफ़ पानी डालकर टाइल्स को धो लीजिये। इस तरीके को आप कभी अपना सकते है।

निम्बू

निम्बू एक प्राकृतिक एसिड के रूप में कार्य करता है। बाथरूम या किचन के दाग धब्बे दूर करने के लिए निम्बू के रस को टाइल्स पर स्प्रे करे और 5 मिनट बाद कपड़े से साफ़ कर लें। अगर टाइल्स बहुत ज्यादा गन्दी है तो निम्बू रस छिड़कने से पहले टाइल्स पर बेकिंग सोडा की एक परत लगा लें। उसके बाद निम्बू रस से साफ़ करें। टाइल्स बिलकुल चमक जाएँगी।

ब्लीच

एक कटोरी क्लोरीन ब्लीच और एक कटोरी गर्म पानी में एक से दो चम्मच शैम्पू मिला लें। अब इस घोल को टाइल्स पर लगा कर 15 मिनट तक इन्तजार करे। जिस जगह पर ज्यादा दाग धब्बे हो वहां ब्रश से अच्छे से रगड़ लें। और फिर पानी से धो लें। इस तरीके से टाइल्स के हर तरह के दाग साफ़ हो जायेंगे।

इन उपाय के अलावा बाथरूम को गर्म पानी से धोने से भी दाग धब्बे गहरे नहीं होते है। टाइल्स को सूखा रखने पर भी मैल ज्यादा नहीं जमता है।

खाली पेट गुनगुना नींबू पानी पीने के ये फायदे होते है

0

Benefits of Lukewarm Lemon Water

गुनगुना नींबू पानी पीने के फायदे, Benefits of Drinking Lukewarm lemon water, Gunguna Nimbu pani pine ke labh, Empty Stomach Lemon Water pine ke benefits

आज के समय में लगभग हर व्यक्ति किसी न किसी बीमारी से परेशान रहता है। किसी को मोटापे की समस्या है तो किसी को डायबिटीज, कोई ज्यादा खाना खा नहीं सकता तो किसी को नींद नहीं आती कुछ ऐसी ही बीमारियां है जिनके कारण अधिकतर लोग परेशान दिखाई देते है। लेकिन इनमे से सबसे कॉमन समस्या है मोटापे की। जो केवल बड़ों ही नहीं अपितु बच्चों में भी देखने को मिलती है।

हालांकि सभी अपनी अपनी क्षमता के अनुसार इस बीमारी से पीछा छुड़ाने के प्रयत्न करते है लेकिन आखिर में सिवाए निराशा के और कुछ हाथ नहीं लगता। ऐसे में नींबू और गर्म पानी आपकी सहायता कर सकता है। पानी में नींबू डालकर पीने के फायदों से तो आप सभी भली भांति परिचित होंगे लेकिन क्या आप जानते है की इस पानी को शहद के साथ प्रातःकाल खाली पेट पीने के कितने लाभ होते है?

जी हां, हाजमा हो या नींद की समस्या, मोटापा हो या फेस की चमक सभी को ठीक करने और बेहतर बनाने में ये मिश्रण सक्षम है। हो न हो आप भी सुबह जागने के बाद एक ग्लास पानी अवश्य पीते होंगे आपको बस करना ये है की अपने सादे पानी के ग्लास को इस नींबू वाले गुनगुने पानी के ग्लास से बदलना है। जिसका असर आपको कुछ दिनों के सेवन से ही नजर आने लगेगा। इसीलिए आज हम आपको खाली पेट गुनगुना नींबू पानी पीने के फायदों के बारे में बताने जा रहे है।

खाली पेट गुनगुना नींबू पानी पीने के फायदेगुनगुना नींबू पानी पीने के फायदे

1. हाजमा शक्ति :

नींबू, गुनगुना पानी और शहद मिलाकर पीने से हाजमा शक्ति बढ़ती है। नींबू को लीवर के लिए बहुत अच्छा माना जाता है यह पित्त में bile juice के निर्माण में मदद करता है और साथ ही शरीर से सभी टॉक्सिन्स को बाहर करने में भी मदद करता है। जबकि शहद में कई एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते है जो शरीर में किसी भी प्रकार से इन्फेक्शन को बढ़ने से रोकती है। यह आंतों में म्यूकस के उत्पादन को बेहतर करता है जिससे शरीर से सभी टॉक्सिन्स निकालने में आसानी होती है।

2. पेट साफ़ :

आयुर्वेद के अनुसार पेट में मौजूद विषैले पदार्थ या टॉक्सिन्स मनुष्य के शरीर में उपजने वाली बिमारियों का सबसे बड़ा कारण होते है। और नींबू के साथ गुनगुने पानी का सेवन करने से पेट में मौजूद सभी विषैले गुण बाहर निकल जाते है। इसके अलावा इसमें मौजूद तत्व शरीर को पोषक तत्वों को सोखने में भी मदद करते है।

3. लसीका प्रणाली को साफ़ करे :

डॉक्टरों की माने तो सुखी हुई लसीका प्रणाली बहुत सी बिमारियों का कारण बनती है। लसीका प्रणाली में पानी की कमी के कारण व्यक्ति को बेवजह थकान महसूस होती है, तनाव रहता है, कब्ज की समस्या उतपन्न होती है, नींद नहीं आती, High BP जैसे समस्याएं होने लगती है। ऐसे में गुनगुने नींबू पानी का सेवन आपको इन सभी परेशानियों से बचा सकता है। इसीलिए रोज सुबह एक ग्लास गुनगुने नींबू पानी का सेवन करें।यह आपकी इम्युनिटी को भी बढ़ाने में मदद करेगा।

4. मूत्र पथ :

शहद में मौजूद एंटी बैक्टीरियल गुण शरीर को कई इन्फेक्शन्स से लड़ने में मदद करता है जबकि नींबू और पानी किसी भी नली या पथ को साफ़ करने का काम करती है। ऐसे में अगर तीनों पदार्थों को एक साथ मिलाकर सुबह इसका सेवन किया जाए तो इससे मूत्र पथ भी अच्छे से साफ़ हो जाता है। जिससे इस पथ से संबंधित किसी भी बीमारी के होने का खतरा नहीं रहता। जिन महिलाओं को मूत्र पथ के संक्रमण की समस्या होती है वे इस पानी का सेवन अवश्य करे।

5. मुंह से बदबू :

Read more : सांसों की बदबू दूर करने के घरेलू उपाय!  

मुंह से बदबू आने की समस्या किसी के लिए भी परेशानी का कारण बन सकती है। ऐसे में गुनगुना नींबू पानी इस समस्या को दूर करने में आपकी मदद कर सकता है। जी हां, रोजाना सुबह सुबह, इस मिश्रण का सेवन करने या कुल्ला करने से मुंह में मौजूद बैक्टीरिया समाप्त हो जाते है। जिससे मुंह से बदबू नहीं आती और आप दिन भर फ्रेश फील करते है।

6. वजन घटाने के लिए :

वजन घटाने के लिए इसे एक रामबाण औषधि के रूप में देखा जाता है। दरअसल इस घोल में पेक्टिन नामक फाइबर होता है जो पेट के लिए काफी अच्छा होता है। इसके अलावा नींबू और गुनगुने पानी के गुण शरीर की चर्बी को घटाने में मदद करते है जिससे वजन कम होता है।

7. त्वचा :

नींबू और शहद में कई एंटी ओक्सिडेंट और एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते है जो शरीर के भीतर से सभी विषैले तत्वों को बाहर निकाल देते है। जिससे त्वचा को भी लाभ पहुँचता है। इसके अलावा यह त्वचा में कोलोजन के निर्माण को भी बढाता है जिससे त्वचा में नया निखार आता है। इन मिश्रण को रोजाना सुबह खाली पेट पीने से मुहांसे और ब्लैक हेड्स आदि की समस्या भी ठीक हो जाती है।

8. स्वस्थ शरीर :

इतने फायदे जानने के बाद आप ये तो जान ही गए होंगे की नींबू और गुनगुना पानी शरीर से सभी टॉक्सिन्स को बाहर निकालने का काम करता है जो की व्यक्ति के अस्वस्थ होने का सबसे बड़ा कारण होते है। तो अगर आप रोजाना खाली पेट गुनगुने नींबू पानी का सेवन करेंगे तो आपकी त्वचा ही नहीं अपितु शरीर भी बिलकुल स्वस्थ हो जाएगा।

प्रेगनेंसी में पेशाब में जलन होने के कारण व् उपाय

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिलाएं बहुत सी परेशानियों का सामना कर सकती है। जैसे की उल्टी, जी मिचलाना, पेट में हल्का दर्द, ब्लीडिंग की समस्या, पीठ में दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव, आदि की समस्या हो सकती है। इसके अलावा कुछ प्रेग्नेंट महिलाएं पेशाब में जलन की समस्या से भी परेशान हो सकती है। और जो महिलाएं इस समस्या से परेशान होती है। उन्हें इस समस्या को अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि इस समस्या के बढ़ने के कारण महिला व् बच्चे दोनों को दिक्कत हो सकती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में महिला को होने वाली पेशाब में जलन के क्या कारण होते हैं। और किस प्रकार इस समस्या से प्रेग्नेंट महिला निजात पा सकती है।

गर्भवती महिला को पेशाब में जलन होने के कारण

प्रेग्नेंट महिला को पेशाब में जलन के कारण होने का कोई कारण होते हैं। बल्कि बहुत से कारण होते हैं जिनकी वजह से प्रेग्नेंट महिला को यह दिक्कत हो सकती है।

  • जो गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान पानी का सेवन पर्याप्त मात्रा में नहीं करती है उन महिलाओं को यह समस्या हो सकती है।
  • अधिक मीठा खाने वाली प्रेग्नेंट महिलाओं को भी यह दिक्कत हो सकती है।
  • यदि प्रेग्नेंट महिला के प्राइवेट पार्ट में या यूरिन में इन्फेक्शन की समस्या है तो भी महिला को पेशाब में जलन महसूस हो सकती है।
  • बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण प्रेग्नेंट महिला को बार बार यूरिन आने की समस्या हो सकती है, ऐसे में यूरिन बार बार आने के कारण भी पेशाब में जलन के महसूस होते हैं।
  • यदि कोई प्रेग्नेंट महिला यूरिन को रोककर रखती है तो उन महिलाओं को भी यह परेशानी होने का खतरा होता है ऐसे में जब भी यूरिन आये महिला को तुरंत यूरिन पास करना चाहिए।
  • जिन गर्भवती महिलाओं को पथरी की समस्या होती है उन्हें भी यूरिन करते समय जलन महसूस होने की समस्या हो सकती है।

प्रेगनेंसी में यूरिन के जलन महसूस होने की समस्या से बचने के उपाय

यदि प्रेगनेंसी के दौरान किसी गर्भवती महिला पेशाब में जलन महसूस होती है। तो कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल करके प्रेग्नेंट महिला आसानी से इस परेशानी से निजात पा सकती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में यूरिन में होने वाली जलन की समस्या से निजात पाने के लिए प्रेग्नेंट महिला क्या कर सकती है।

पानी पीएं भरपूर: प्रेग्नेंट महिला को भरपूर मात्रा में पानी पीना चाहिए। क्योंकि पानी का सेवन करने से बॉडी में मौजूद विषैले पदार्थों को यूरिन से बाहर निकालने में मदद मिलती है। साथ ही बॉडी के हाइड्रेट रहने से प्रेग्नेंट महिला को पेशाब में होने वाली जलन की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

विटामिन सी: संतरा, निम्बू, जैसे पदार्थों में विटामिन सी की अधिकता होती है जो बॉडी से बैड बैक्टेरिया को बाहर निकालने में मदद करते हैं साथ ही बॉडी की इम्युनिटी को बढ़ाने में भी मदद करते हैं। जिससे यूरिन इन्फेक्शन, यूरिन में जलन, प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन जैसी परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलती है।

नारियल पानी: प्रेग्नेंट महिला को यूरिन में जलन की समस्या को दूर करने के लिए नारियल पानी का सेवन करना चाहिए। क्योंकि नारियल पानी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स बॉडी में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं। जिससे प्रेग्नेंट महिला को इस परेशानी से बचाव करने में मदद मिलती है।

दही: दही का सेवन करने से भी बॉडी में बैड बैक्टेरिया को खत्म करने और गुड़ बैक्टेरिया को बढ़ाने में मदद मिलती है। जिससे यूरिन में होने वाली जलन की समस्या से प्रेग्नेंट महिला को निजात पाने में मदद मिलती है।

फलों का सेवन: जिन फलों का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान फायदेमंद होता है और जिन फलों में पानी की मात्रा भरपूर होती है। उन फलों का सेवन भी गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि इससे प्रेग्नेंट महिला को हाइड्रेट रहने में मदद मिलती है जिससे महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान यूरिन में जलन होने के कारण व् उपचार से जुड़े कुछ टिप्स, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और आपको भी यह परेशानी है तो एक बार डॉक्टर से टेस्ट जरूर करवाएं ताकि आपको ज्यादा परेशानी न हो।

दुल्हन चूड़ा क्यों पहनती है? इसका क्या मतलब होता है?

लड़का हो या लकड़ी, शादी सभी की लाइफ का सबसे खुबसूरत और यादगार पल होता है। शादी के दौरान जहां एक तरफ दो दिल मिलते है वहीं दूसरी तरफ दो परिवारों का भी मिलन होता है। रिश्तेदारों और घर परिवार के लोगों के आशीर्वाद से दूल्हा-दुल्हन अपनी नई जिन्दगी की शुरुआत करते है। भारत में शादी विवाह के दौरान बहुत सी रस्में और रिवाज़ होते है। जिसके साथ बहुत से फंक्शन होते है। इन्ही में से एक है चूड़े की रस्म।

भारतीय शादी विशेषकर पंजाबी शादियों में होने वाली चूड़े की रस्म हर दुल्हन के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसा नहीं है की ये सिर्फ पंजाबियो में ही होती है बल्कि भारत के अलग-अलग कोनों में अलग-अलग नाम से जानी जाती है। इस रस्म के दौरान एक विशेष आयोजन किया जाता है जिसमे दुल्हन को चूड़ा पहनाया जाता है। लेकिन क्या कभी सोचा है की आखिर शादी के समय ही चूड़ा क्यों पहनाया जाता है? क्यों शादी के बाद इसका महत्व इतना बढ़ जाता है? शायद नहीं! क्योंकि कभी इसकी आवश्यकता ही नहीं पड़ी।

जैसा की आप सभी जानते है शादियों में होने वाली हर एक रस्म के पीछे कोई न कोई कारण होता है। इसी प्रकार इस रस्म के पीछे भी कई कारण छुपे है जिनके बारे में आज हम आपको बताने जा रहे है। इसके साथ ही आज हम आपको ये भी बताएँगे की शादी के समय ही दुल्हन चूड़ा क्यों पहनती है? तो आइए जानते है शादी की इस मजेदार रस्म के पीछे का महत्व!

शादी में दुल्हन चूड़ा क्यों पहनती है?

क्या होता है चूड़ा?

किसी भी चीज के महत्व को जानने से पहले ये जानना जरुरी है की वो क्या है। इसीलिए सबसे पहले हम आपको बताएँगे की चूड़ा होता क्या है?चूड़ा क्यों पहनाया जाता है

चूड़ा सफ़ेद और लाल /  किसी अन्य रंग की चूड़ियों का सेट होता है।  लेकिन सामान्य तौर पर ये केवल दो ही रंगों में मिलता है। पारंपरिक तौर पर इसे हाथी के दांत से बनाया जाता है लेकिन आजकल इनका निर्माण प्लास्टिक से होने लगा है। चूड़े को ,खासकर की हिन्दू विवाहों में, दुल्हन की शादी वाले दिन पहनाया जाता है। सिंदूर और मंगलसूत्र के साथ हिन्दू परिवारों में होने वाली सबसे महत्वपूर्ण परंपरा है। चूड़े में कई तरह के कलर और कॉम्बिनेशन देखने को मिलते है लेकिन सामान्य तौर पर लाल और सफ़ेद रंग ही प्रयोग में लाया जाता है।

चूड़ा शादी के बाद 40 दिनों तक पहना जाता है और 40 वें दिन केवल उसका पति ही ये चूड़ा उतारता है। इसके बाद अगर वे चाहे तो किसी अन्य रंग के चूड़े को पहन सकती है।

चूड़े से जुड़े रिवाज :

खासकर पंजाबियों में होने वाली चूड़ा सेरेमनी दुल्हन के घर पर की जाती है। जिसमे दुल्हन के मामा उसके लिए चूड़ा लेकर आते है। इसमें लाल और सफ़ेद रंग की 21 चूड़ियाँ होती है। दुल्हन इस चूड़े को तब तक नहीं देख पाती जब तक वेह पूरी तरह से तैयार न हो जाए और मंडप में दुल्हे के साथ न बैठ जाए।

चूड़े की रस्म :

चूड़ा पहनने की रस्म शादी वाले दिन या उससे एक दिन पहले की जाती है। दुल्हन को चूड़ा पहनाने से पहले इसे शादी से एक रात पहले दूध में भिगोकर रखा जाता है। फिर दुल्हन के मामा और मामी जी चूड़े का सेट उसे देते है। जिसमे लाल और सफ़ेद रंग की 21 चूड़ियाँ होती है लेकिन आजकल की लड़कियां केवल 7 से 9 चूड़ियाँ पहनना ही पसंद करती है। इस रस्म में दुल्हन के सर पर लाल चुन्नी रखकर, ज्वेलरी और शगुन भी दिया जाता है। हालाँकि आजकल के चूड़ों में से नग न निकले इसीलिए शादी की सुबह ही इसे दूध में भिगोकर दुल्हन को पहना दिया जाता है।

चूड़ा पहनाने के दौरान दुल्हन की आँखे उसकी माँ बंद कर देती है ताकि वो चूड़े को देख न पाए। क्योंकि माना जाता है की चूड़े को देखने पर उसकी खुद की नजर चूड़े पर लग जाती है। इसके बाद लड़की के हाथों को सफ़ेद कपडे से बांध दिया जाता है। और शादी तक दुल्हन इसे नहीं देख सकती।

कितने दिन तक पहनें :

पारंपरिक तौर पर चूड़ा कम से कम 1 साल तक पहना जाता है। लेकिन वर्तमान में दुल्हने केवल एक महीना या 40 दिनों तक ही इसे पहनती है। इनका आकार कुछ इस प्रकार होता है की ये आपकी कलाई से लेकर आपकी बांह तक पूरी तरह सेट हो जाए।

चूड़ा क्यों पहनाते है?

चूड़ा शादी शुदा होने का प्रतीक माना जाता है। साथ ही यह प्रजनन और समृद्धि का संकेत भी होता है। इसके अलावा पति की लम्बी आयु और उसकी भलाई के लिए भी इसे पहनाया जाता है।

चूड़ा उतारने की रस्म :

चूड़ा उतारने की रस्म शादी के 40 दिन बाद या 1 साल बाद की जाती है, और इसके लिए छोटा सा आयोजन भी किया जाता है। इसमें दुल्हन को शगुन के साथ मिठाई भी दी जाती है। उसके बाद पति चूड़ा उतारकर कांच की चूड़ियाँ पहनाता है। चूड़ा उतारने के बाद उसे किसी नदी में सिरा दिया जाता है। लेकिन अगर दुल्हन शादी के 1 साल के भीतर ही प्रेग्नेंट हो जाए तो चूड़ा उतार दिया जाता है। वैसे, आजकल की दुल्हनें केवल 40 दिन तक ही चूड़ा पहनना पसंद करती है लेकिन कुछ पंजाबी परिवारों में 5 महीने बाद भी चूड़ा उतार दिया जाता है।

कलीरे की रस्म :-

हर पंजाबी दुल्हन को चूड़ियों के साथ कलीरे पहनाये जाते है। जिसे दुल्हन की बहने और दोस्त बांधते है। बहनें, रिश्तेदार और दोस्त कलीरे बांध कर दुल्हन को आशीर्वाद देते है की वह अपनी जिन्दगी में हमेशा खुश रहे, मार्किट में कई तरह के कलीरे मिलते है। जिनमे से आप अपनी पसंद के कलीरे चुन सकती है।

जब एक बार कलीरे दुल्हन की चूड़ियों से बांध दिए जाते है तब वो चूड़ा और कलीरे पहन कर कुंवारी लड़कियों के सर पर छनकाती है। माना जाता है जिस लड़की के सर पर कलीरा गिरता है अगली शादी उसी की होती है। शादी के अगले दिन दुल्हन का एक कलीरा उतारकर मंदिर में चढ़ा दिया जाता है और बाकी कलीरे लड़की अपने पास रखती है।