Home Blog Page 181

महिलाओ में फर्टिलिटी बढ़ाने के तरीके

बदलती जीवनशैली का बुरा प्रभाव आपकी सेहत पर पड़ने के साथ आपकी प्रजनन क्षमता पर भी पड़ता है, प्रजनन क्षमता का मतलब होता है प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करना लेकिन यदि प्रजनन क्षमता कमजोर हो जाती है, तो इसके कारण महिला को प्रेग्नेंट होने में बहुत समस्या का सामना करना पड़ता है, और प्रजनन क्षमता कमजोर होने के कारण अंडकोष में ज्यादा अंडे नहीं बनते है, प्रजनन क्षमता के कमजोर होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे की यदि आप अधिक पतली है, हमेशा लैपटॉप को अपनी गोद में रखकर काम करती हैं, अपने शरीर को आराम नहीं देती है, किसी शारीरिक समस्या के कारण, अधिक धूम्रपान और शराब का सेवन करने के कारण, आदि ये सब कुछ ऐसे कारण हैं जो आपकी प्रजनन क्षमता को कमजोर करते हैं लेकिन आप कुछ खाद्य पदार्थो का सेवन करके और कुछ अन्य तरीको का इस्तेमाल करके अपनी प्रजनन क्षमता को बढ़ा सकते हैं।

इन्हें भी पढ़ें:- महिलाओ में इनफर्टिलिटी ( बांझपन ) के मुख्य कारण

प्रजनन क्षमता के कमजोर होने के कारण:-

  • अधिक वजन और कम वजन दोनों ही आपकी प्रजनन क्षमता पर बुरा असर डालते हैं।
  • कार्बोहाइड्रेट का अधिक सेवन भी आपकी प्रजनन क्षमता पर बुरा असर डालता है, क्योंकि अधिक कार्बोहाइड्रेट रक्त शर्करा को तुरंत बढ़ाते हैं जिससे इन्सुलिन बढ़ जाता है।
  • जो महिलाएं ड्रग्स या अन्य नशीले पदार्थो का सेवन अधिक मात्रा में करती है, उन्हें भी यह समस्या हो सकती है।
  • शारीरिक सम्बन्ध कम बनाने के कारण भी आपकी क्षमता पर असर पड़ता है।
  • शरीर में होने वाली पोषक तत्वों की कमी भी आपके प्रजनन पर बुरा असर डालती है।
  • अधिक पेन किलर्स का सेवन भी आपकी प्रजनन क्षमता को कम करता है।
  • कैफीन का सेवन भी अधिक मात्रा में करने से आपकी प्रजनन क्षमता पर बुरा असर पड़ता है।
  • ऐसा भी एक शोध में सामने आया है जो महिलाएं अधिक रौशनी में सोती हैं उनकी प्रजनन क्षमता पर भी प्रभाव पड़ता है।

प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के उपाय:-

दूध से बने उत्पाद का सेवन अधिक मात्रा में करें:-

पूर्ण वसायुक्त आहार जो महिलाएं दिन मे एक बार लेती हैं, उनके बांझपन का खतरा एक चौथाई घट जाता है, और इसके सेवन से अंडाशय को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है, साथ ही इससे आपकी प्रजनन क्षमता भी बेहतर होती है, इसीलिए महिलाओ को इसका सेवन जरूर करना चाहिए।

मल्टीविटामिन लें:-

शरीर में होने वाली पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने के लिए महिलाओ को मल्टीविटामिन लेना चाहिए, फोलिक एसिड, विटामिन 12 और सेलेनियम, अन्य पोषक तत्व युक्त मल्टीविटामिन का सेवन करने से भी आपकी प्रजनन क्षमता बेहतर होती है।

नशीले पदार्थो का सेवन न करें:-

अधिक नशीले पदार्थो का सेवन करने से भी आपकी प्रजनन क्षमता पर बुरा असर डालता है क्योंकि इससे अंडाशय में अंडे कम बनते हैं, साथ ही अल्कोहल का अत्याधिक सेवन करने से अण्डोत्सर्ग खराब होता है, और ड्रग्स भी महिलाओ को नहीं लेने चाहिए इससे महिला को बांझपन की समस्या भी हो जाती है।

शरीर को आराम दें:-

अत्यधिक तनाव, और शरीर को आराम न देने के कारण भी महिलाओ की प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है, कई बार महिलाओ को ऐसा लगता है की उनका गर्भधारण क्यों नहीं हो रहा है, इसका कारण होता है आपके शरीर का अधिक श्रम करना, यदि आप अपनी प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको अपने शरीर को अपने श्रम के अनुसार आराम भी देना चाहिए।

शरीर को ठंडा रखें:-

यदि आप अधिक देर तक अपनी गोद में लैपटॉप को रखकर काम करती है, अधिक गरम पानी का नहाने के लिए इस्तेमाल करती हैं, तो इससे आपके शुक्राणुओं पर असर पड़ता है, जबकि ठन्डे पानी से नहाने के कारण आपके शुक्राणुओं में पांच गुना बढ़ोतरी होती है, इसीलिए ऐसा करने से बचें, नहीं तो आपको गर्भधारण में आने वाली परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

इन्हें भी पढ़ें:- बढ़ती उम्र में गर्भधारण करने में आने वाली परेशानियों के कारण

वजन को नियंत्रित रखें:-

अधिक बढ़ा हुआ वजन और कम वजन दोनों ही आपकी प्रजनन क्षमता पर बुरा असर डालते हैं, क्योंकि अधिक वजन आपके अण्डोत्सर्ग के चक्र को भ्रमित कर सकता है, और कम वजन के कारण अण्डों के उत्पादन की क्षमता बंद हो सकती है, इसीलिए बेहतर प्रजनन क्षमता के लिए अपने वजन को नियंत्रित रखना चाहिए।

विटामिन डी लें:-

बेहतर प्रजनन क्षमता के लिए शरीर में विटामिन डी की मात्रा का उपयुक्त होना भी बहुत जरुरी होता है, इसके लिए महिलाओ को ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए जिसमे विटामिन डी भरपूर होता है, इसके अलावा हलकी धूप में महिलाओ को सेकनी चाहिए, क्योंकि सूर्य की किरणों से आपको भरपूर मात्रा में विटामिन डी मिलता है, जो की प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में आपकी मदद करता है।

शारीरिक सम्बन्ध बेहतर बनाएं:-

शारीरिक सम्बन्धो में आने वाली कमी भी आपकी प्रजनन क्षमता पर बुरा असर डालती है क्योंकि सेक्स करने से आपके शुक्राणुओं को अंडाशय को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है, साथ ही इससे आपके गर्भधारण के चांस भी बढ़ते है, और एक बार सेक्स करने के बाद इसकी गुणवत्ता तीन दिनों तक रहती है लेकिन यदि आप शारीरिक सम्बन्ध बनाने में समय लगाते हैं, तो धीरे धीरे इसकी गुणवत्ता कम होने लगती है जिसका असर आपकी प्रजनन क्षमता पर भी पड़ता है।

पानी का भरपूर सेवन करें:-

पानी का भरपूर सेवन न करना भी आपकी प्रजनन क्षमता पर बुरा असर डालता है क्योंकि पानी फूले हुए अंड कूप बनाता है जो की गर्भाशय की दीवार को मजबूती से रक्त आपूर्ति करने में मदद करता है, इसके अलावा यदि आप कम पानी का सेवन क्र रहे हैं तो गर्भाशय का द्रव जो शुक्राणु को अंडा ढूँढने में मदद करता है, वह अक्रियाशील हो जाता है, जिससे आपको गर्भधारण में परेशानी होती है, इसीलिए प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाने के साथ अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए भी आपको पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए।

प्रजनन क्षमता बढ़ाने के लिए खाद्य पदार्थ:-

  • एंटी ऑक्सीडेंट्स, आयरन, फोलिक एसिड से भरपूर हरी सब्जियों को अपने आहार में शामिल करने से आपकी प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
  • विटामिन सी युक्त पदार्थ जैसे स्ट्रॉबेरी, संतरा, कीवी, ब्लूबेरी का सेवन करने से भी महिलाओ को फायदा मिलता है।
  • बादाम, अखरोट आदि का भी भरपूर सेवन करें।
  • दूध व् अन्य डेरी प्रोडक्ट्स का सेवन भरपूर मात्रा में करने से भी महिलाओ की प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
  • ब्रोकली का सेवन भरपूर मात्रा में करने से भी लाभ मिलता है।
  • सालमन मछली व् अन्य सी फ़ूड खाने से भी प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
  • विटामिन सी, विटामिन के, फोलिक एसिड व जरूरी मिनरल्स युक्त अनार जैसे फल का सेवन भी फर्टिलिटी को बढ़ाने में सहायक होता है।
  • अंडा प्रोटीन और फोलेट का अच्छा स्रोत होने के कारण महिलाओ की प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है, साथ ही यह प्रेगनेंसी के दौरान भी फायदेमंद होता है।
  • एवोकाडो, नाशपाती, चुकंदर आदि में भी ऐसे पोषक तत्व होते है जो महिलाओ में फर्टिलिटी को बढ़ाने में मदद करते हैं।

तो ये हैं कुछ तरीके जिनका इस्तेमाल करके महिलाएं अपनी प्रजनन क्षमता को बढ़ा सकती है, साथ ही इससे आपके गर्भधारण के चांस बढ़ जाते है, और आपको स्वस्थ रहने में भी मदद मिलती है, साथ ही आपको नशे से भी दूर रहना चाहिए, कैफीन का भी अधिक सेवन नहीं करना चाहिए।

इन्हें भी पढ़ें:- फैलोपियन ट्यूब के बंद होने के क्या कारण होते हैं?

अनार के छिलके आपके रूप को निखार देंगे!

0

अनार के छिलके के फ़ायदे त्वचा के लिए :- हमारी प्रकृति में ऐसे कई उत्पाद है जिनके फल से लेकर उनकी जड़ तक सभी मनुष्य के लिए बेहद फायदेमंद होते है. इन्ही में से एक है अनार, जिसके दानों को खाने के फ़ायदे तो सभी जानते है लेकिन क्या आप जानते है की इसके दानों के अलावा इसका छिलका भी आपके लिए बेहद लाभकारी होता है.

अनार में पाए जाने वाले गुण और इसके स्वाद के कारण बड़े क्या बच्चे भी इसे आसानी से खा लेते है. विटामिन C, फाइबर और अन्य तरह के पोष्टिक गुणों की खान अनार आपके स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी होता है. इसके अलावा इसमें कुछ anti oxidents भी पाए जाते है जो शरीर को विभिन्न तरह की बिमारियों से बचाने में मदद करते है.

लेकिन आपको ये जानकर थोड़ी हैरानी होगी की ये एक ऐसा फल है जिसके बीज तो फायदेमंद होते ही है साथ-साथ उसका छिलका भी बेहद लाभकारी होता है. अनार के छिलके में वही anti oxidents पाए जाते है जो अनार के बीज में पाए जाते है.

वैसे देखा जाये तो जितना लाभ अनार के दाने खाने से होता है उतना ही उसके छिलके से भी होता है. पहले के समय के अधिकतर लोग अच्छे स्वास्थ्य के लिए इस तरह के उपायों का प्रयोग करते थे लेकिन आज कल हर समस्या का इलाज एलोपेथी दवाइया बनता जा रहा है. और आज भी अधिकतर लोग प्रकृति की इस देन के फायदों से अपरिचित है. इसीलिए आज हम आपको अनार के छिलके के कुछ ऐसे फायदों के बारे में बताने जा रहे है जिन्हें जानकर आपको हैरानी तो होगी ही साथ-साथ प्रसन्नता भी होगी. तो आईये जानते है अनार के छिलकों के फ़ायदे!!

अनार के छिलके के स्वास्थ्य के लिए फ़ायदे 

1. हृदय सम्बन्धी बिमारियों के लिए :

जैसा ही हमने आपको बताया की अनार के छिलके में कई तरह के anti oxidants की अछि मात्रा पाई जाती है जो oxidation से LDL cholesterol को सुरक्षित रखने में मदद करते है. इतना ही नहीं हृदय संबंधी बिमारियों से लेकर अन्य समस्याओ सभी में ये छिलके बेहद लाभकारी होते है.

2. बेहतर  Detoxifying Agent :dane-aur-chilke-k-fayde

ये तो सभी जानते है की एंटी ऑक्सीडेंट्स शरीर के लिए toxins agent का काम करते है. और अनार के छिलके में antioxidant की अच्छी मात्रा पाई जाती है. जो आपके शरीर को detoxify करने में मदद करते है.

3. Vitamin C का स्रोत्र :

शरीर के लिए vitamin C बहुत लाभकारी और आवश्यक तत्व है जो अनार के छिलके में पाया जाता है. ये एक extensive growth agent का काम करता है जो घावों को ठीक करने और कोशिकाओं को रिपेयर करने में मदद करता है. इसके अलावा ये शरीर को प्रोटीन भी प्रदान करता है जिससे body mass बढ़ाया जा सके. इसके अतिरिक्त हड्डियों, दांतो और cartilage की मरम्मत में भी ये महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

4. दांतो के लिए :

अनार के छिलकों का इस्तेमाल कई तरह के टूथपाउडर और टूथपेस्ट बनाने में भी किया जाता है. यदि इसके पाउडर का पानी का साथ प्रयोग किया जाये तो सांसो की बदबू से भी छुटकारा पाया जा सकता है.

5. गले की खराश और कफ में दे आराम :

पारंपरिक दवाओं के आधार पर अनार के छिलके का इस्तेमाल कफ और गले की खराश की समस्यायों के लिए किया जाता था. इसके पाउडर को पानी के साथ मिलाकर गरारे करने से इन परेशानी से राहत पाई जा सकती है.

6. पेट के लिए :

अनार के छिलके में मौजूद तत्व आपके पेट के लिए भी बेहद फायदेमंद होते है. ये न केवल दस्त के दौरान रक्तस्राव को रोकता है अपितु पाचन क्रिया में भी सुधार लाता है. इसके अलावा ये आंतो की सूजन को कम करता है और साथ ही बवासीर की समस्या में भी आराम देता है.

त्वचा और बालों के लिए अनार के छिलके के फ़ायदे

7. बेहतर मोइश्चराइज़र :

अनार के छिलके म पाया जाने वाला ellagic acid, skin cells को मॉइश्चराइज़ करके रूखेपन को ख़त्म करता है. इसके अलावा ये त्वचा को hydrate करके उसमे नमी बनाये रखता है जिससे त्वचा के रूखेपन की समस्या नहीं होती. साथ ही रूखेपन के कारण हुए Skin Damage को भी ठीक करता है.

8. सूरज की किरणों से बचाए :anar-ka-chilka-bhi-faydemand-hai

अनार का छिलका एक प्रभावी sun block agent के रूप में कार्य करता है जो सूरज की UVA और UVB Rays के कारण डैमेज हुई त्वचा को ठीक करने में मदद करता है.

9. स्किन कैंसर को ठीक करे :

हाल ही में की गई जाँच के मुताबिक अनार के छिलके में कुछ ऐसे तत्व पाए जाते है जो त्वचा को cancer के प्रभाव से बचाने में मदद करते है.

10. बढ़ती उम्र की निशानिया कम करे :

जब अनार के छिलकों को seed oil के साथ मिलाकर प्रयोग में लाया जाता है तो ये त्वचा में collagen के निर्माण को घटाते है जिससे बढ़ती उम्र की निशानियों की आसानी से कम किया जा सकता है. इसके साथ ही ये त्वचा की कोशिकाओं की वृद्धि करने में भी मदद करता है.

11. स्वस्थ बाल :

अनार के छिलके का इस्तेमाल झड़ते बालो की समस्या से लेकर डेंड्रफ की समस्या तक सभी में किया जाता है. क्योंकि इसमें कुछ ऐसे गुण पाए जाते है जो बालो की जड़ो को मजबूत करके उनका झड़ना कम करते है और डेंड्रफ को भी मिटाते है.

12. मुँहासे की समस्या :

अनार के छिलके में कई तरह के anti oxidents पाए जाते है जो त्वचा को विभिन्न तरह की समस्याओ से बचाने में मदद करते है. इन्ही में से एक है मुँहासे जिनमे अनार के छिलकों का प्रयोग करके इन्हें ठीक किया जा सकता है. इसके लिए इन छिलकों को सूखने के बाद इन्हें भून कर अपने चेहरे पर लगाएं. आपके मुँहासे की समस्या ठीक हो जाएगी.

अनार के छिलके आपके रूप को निखार देंगे, अनार के छिलके के फ़ायदे त्वचा के लिए, अनार के छिलके के इन फायदों को जानते है, स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है

मुल्तानी मिट्टी चेहरे पर लगाने के फायदे

चेहरे की सुंदरता को बढ़ाने के लिए हर कोई चाहे वो महिला हो ता पुरुष, लड़के हो या लड़कियां नए नए तरीके आजमाते रहते हैं। लेकिन मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल चेहरे की सुंदरता को बढ़ाने के लिए बरसों से किया जा रहा है। और यह चेहरे की ख़ूबसूरती को बढ़ाने के लिए असरदार उपाय भी है साथ ही चेहरे पर मुल्तानी मिट्टी लगाने से चेहरे की स्किन को किसी भी तरह का नुकसान भी नहीं होता है। इसके अलावा मुल्तानी मिट्टी को चेहरे पर लगाने से कोई एक नहीं बल्कि बहुत से फायदे मिलते हैं। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको मुल्तानी मिट्टी को चेहरे पर लगाने से कौन से फायदे मिलते हैं इस बारे में बताते हैं।

ऑयली स्किन से मिलता है निजात

कुछ लोगो की स्किन बहुत ऑयली होती है जिससे स्किन से जुडी बहुत सी दिक्कतें होती रहती है। लेकिन मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल करने से ऑयली स्किन से निजात पाने में मदद मिलती है। क्योंकि मुल्तानी मिट्टी को चेहरे पर लगाने से स्किन के रोम छिद्र खुल जाते हैं। और ऑयली स्किन से निजात पाने के लिए आप एक कटोरी में दो चम्मच मुल्तानी मिट्टी, एक चम्मच चन्दन पाउडर और गुलाबजल को मिलाकर एक पैक बनाएं और एक हफ्ते में तीन से चार बार इसे चेहरे पर लगाएं।

स्किन को करती है टाइट

उम्र के बढ़ने के साथ स्किन ढीली पड़ने लगती है जिसके कारण आपका चेहरा ही आपकी उम्र को बता देता है। लेकिन मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल चेहरे के लिए करने से चेहरे की स्किन के कसाव को बरकरार रखने में मदद मिलती है। जिससे उम्र बढ़ने के बाद भी आपका चेहरा जवान लगता है। और इसके लिए आप एक कटोरी में एक चम्मच मुल्तानी मिट्टी, थोड़ा सा शहद, थोड़ी सी ग्लिसरीन और एक अंडे को फोड़कर उसका सफ़ेद हिस्सा तोड़कर उसमे मिलाएं। अब इस पेस्ट को अच्छे से मिक्स करके अपने चेहरे पर लगाएं।

चेहरे का सांवलापन होता है दूर

चेहरे के सांवलेपन को दूर करने के लिए भी मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है। साथ ही यदि आप इसे अपने चेहरे के लिए इस्तेमाल करते रहते हैं तो इससे आपकी स्किन को गोरी व् निखरी हुई बनने में मदद मिलती है। और चेहरे को गोरा करने के लिए आप एक कटोरी में दो चम्मच मुल्तानी मिट्टी, दो चम्मच दही डालकर अच्छे से मिलाएं अब इसे आधे घंटे के लिए रख दें। उसके बाद इसमें आधा या एक चम्मच पुदीने के पाउडर मिलाकर चेहरे पर लगाएं, ऐसा हफ्ते में दो बार जरूर लगाएं।

डेड स्किन हटती है

चेहरे पर डेड स्किन जमने के कारण भी चेहरे की ख़ूबसूरती कम हो जाती है। लेकिन मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल करने से डेड स्किन को हटाने में मदद मिलती है। जिससे चेहरे की ख़ूबसूरती बढ़ती है और इसके लिए आप एक कटोरी में मुल्तानी मिट्टी, ग्लिसरीन, शहद मिलाकर एक पेस्ट बनाएं और इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं। और पेस्ट को साफ़ करने के लिए गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें।

मुहांसे व् दाग धब्बों से मिलता है निजात

मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल करने से चेहरे पर होने वाले दाग धब्बों व् मुहांसों से निजात मिलता है। और इसके लिए आप एक कटोरी में दो चम्मच मुल्तानी मिट्टी, एक चम्मच नीम के पत्तों का पेस्ट गुलाबजल मिलाकर एक पेस्ट बनाएं। और मास्क के रूप में इसे अपने चेहरे पर लगाएं। ऐसा एक हफ्ते में दो से तीन बार करें, इससे आपको चेहरे पर दाग धब्बों व् मुहांसो से बचे रहने में मदद मिलती है।

घाव के निशान होते हैं खत्म

चोट के कारण, जलने के कारण यदि आपके चेहरे पर निशान रह गया है तो मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल करने से आपको इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है। और इसके लिए आपको एक कटोरी में मुतानी मिट्टी, निम्बू का रस, विटामिन इ का तेल आदि को मिलाकर एक पेस्ट तैयार करना चाहिए और उसे मास्क की तरह चेहरा पर लगाएं। ऐसा हफ्ते में तीन से चार बार करें आपको बहुत जल्दी इसका असर अपने चेहरे पर दिखाई देगा।

तो यह हैं कुछ बेहतरीन फायदे जो मुल्तानी मिट्टी को चेहरे पर लगाने से मिलते हैं, और लगभग चेहरे से जुडी हर समस्या का समाधान मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल करने से हो जाता है। तो यदि आप भी चेहरे की सुंदरता को बढ़ाना चाहते हैं तो आप भी मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल कर सकते हैं।

पीरियड में क्या-क्या नहीं करना चाहिए

पीरियड में क्या-क्या नहीं करना चाहिए, पीरियड्स में भूलकर भी न करें यह काम, पीरियड्स में इन में इन गलतियों से बचें, पीरियड्स के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

महिलाएं हर महीने पीरियड्स के समय से गुजरती हैं, कुछ महिलाओं के लिए यह समय दर्द भरा होता है, तो कुछ के लिए सामान्य होता है। लेकिन इस दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव, और रक्तस्त्राव के कारण हर महिला बेचैन रहती है। कुछ महिलाओं को पीरियड्स तीन तो कुछ को पांच या सात दिन के लिए होते हैं। और मासिक धर्म का मासिक चक्र हर महीने चलता रहता है। ऐसे में इस दौरान बॉडी में कमजोरी महसूस होना भी आम बात होता है। लेकिन इस दौरान महिलाओं को कुछ गलतियां भूलकर भी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि यह उनके लिए परेशानी का कारण बन सकती है। तो आइये जानते हैं की पीरियड में क्या-क्या नहीं करना चाहिए।

खान पान में लापरवाही

पीरियड्स के दौरान महिला को लगातार रक्तस्त्राव होता है ऐसे में बॉडी में कमजोरी आना भी आम बात होती है। इसीलिए महिला को अपने खान पान का खास ध्यान रखना चाहिए। और उसमे किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। और ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए जो की पौष्टिक तत्वों से भरपूर हो, खासकर उसमे आयरन भरपूर मात्रा में हो।

अधिक व्यायाम व् शारीरिक श्रम न करें

पीरियड्स के दौरान कई महिलाओं को दर्द की समस्या रहती है ऐसे में अधिक शारीरिक श्रम या व्यायाम आदि उनकी परेशानी को बढ़ा सकता है। जिन महिलाओं को दर्द नहीं भी होता है उन्हें भी ऐसा नहीं करना चाहिए।

ज्यादा टाइट कपडे न पहने

चिड़चिड़ापन या असहज महसूस होना पीरियड्स में होता है, ऐसे में आपको अपने कपड़ो का भी ध्यान रखना चाहिए। आपको ज्यादा तंग व् चुभने वाले कपडे नहीं पहनने चाहिए, क्योंकि उसके कारण आपको परेशानी हो सकती है। ऐसे में आपको उन कपड़ो का चुनाव करना चाहिए जो की आरामदायक हो, खासकर अंडरवियर कॉटन का ही पहनना चाहिए।

एक पैड को ज्यादा समय तक इस्तेमाल न करें

इस समय पर आपको अच्छी क्वालिटी के पैड का इस्तेमाल करना चाहिए, और साथ ही हर पांच से छह घंटे में पैड को बदलना चाहिए। क्योंकि यदि आप एक ही पैड को लम्बे समय तक इस्तेमाल करती है। तो ऐसा करने के कारण संक्रमण, खुजली, दुर्गन्ध आदि की समस्या का आपको सामना करना पड़ सकता है।

ज्यादा भागदौड़ न करें

पीरियड्स के दौरान आपके शरीर को आराम की जरुरत होती है, और यदि आप आराम न करके भागदौड़ में लगी रहती है। तो इसके कारण रक्तस्त्राव ज्यादा हो सकता है, साथ ही दर्द भी अधिक महसूस हो सकता है। ऐसे में आपको जितना हो शरीर को आराम देना चाहिए ताकि किसी भी तरह की कोई परेशानी न हो।

जंक फ़ूड से दूरी रखें

ज्यादा तला भुना और मसालेदार भोजन भी आपको पीरियड्स के दौरान नहीं खाना चाहिए। क्योंकि इस दौरान बॉडी को पोषक तत्वों की जरुरत होती है। ऐसे में आपको संतुलित भोजन का सेवन करना चाहिए जिससे आपको भरपूर न्यूट्रिएंट्स मिलें।

डेरी प्रोडक्ट्स का सेवन न करें

पीरियड्स के दौरान जितना हो सके आपको डेरी प्रोडक्ट्स जैसे दूध, दही, पनीर आदि के सेवन से भी परहेज रखना चाहिए। यह पोषक तत्वों से तो भरपूर होते हैं लेकिन इसमें मौजूद एक एसिड पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द को बढ़ा देता है, ऐसे में इसे मासिक धर्म के दौरान न खाने की सलाह दी जाती है।

सम्बन्ध बनाते समय रखे ध्यान

मासिक धर्म के समय यदि आप सम्बन्ध बनाते समय सुरक्षा का इस्तेमाल नहीं करते हैं तो इसके कारण संक्रमण होने डर रहता है। ऐसे में पीरियड्स के समय सम्बन्ध बनाते समय आपको ध्यान रखना चाहिए की आप सुरक्षा का इस्तेमाल जरूर करें।

तो यह हैं कुछ कान जिनसे पीरियड्स के दौरान बचना चाहिए, क्योंकि यदि आप लापरवाही करते हैं तो इसके कारण आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। और जितना हो सके पीरियड्स के दौरान अपनी सेहत का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि आपको किसी भी तरह की परेशानी न हो।

आंखों में चमक लाने के तरीके

आंखों में चमक लाने के तरीके, आँखों में चमक कैसे लाये, घरेलू तरीके से लाएं आँखों की चमक, आँखों की चमक वापस लाने के लिए क्या करें, आँखों की चमक लाने के घरेलू तरीके, चमकती आँखे क्या करें, आँखों को चमकाने के तरीके, घर बैठे चमकाएं अपनी ठीक आंखे, थकी आँखों ठीक करने के तरीके 

आज का ज़माना काफी हाई-टेक हो गया है। हर कोई लैपटॉप, कंप्यूटर, स्मार्टफोन्स और आई-पैड में घंटो लगे रहता है। जहां एक तरफ युवाओं में स्मार्टफोन्स का काफी क्रेज है वहीँ दूसरी तरफ स्कूली छात्र बिना कंप्यूटर के कोई काम करना पसंद ही नहीं करते। इतना ही नहीं वर्तमान के लगभग हर क्षेत्र में कंप्यूटर एक आवश्यक जरुरत बनता जा रहा है।

लोग कई घंटों तक लगातार कंप्यूटर के सामने बैठकर काम करते रहते है जिसके चलते अक्सर उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती और आँखों में थकावट आ जाती है। परन्तु जो लोग नियमित रूप से इसी जीवनशैली को अपनाते है उनके लिए यह काफी नुकसानदेह हो सकता है। क्योंकि कई घंटों तक लैपटॉप आदि के सामने बैठकर काम करने से धीरे धीरे आँखों की प्राकृतिक चमक खोने लगती है।

क्योंकि आँखें आपकी खूबसूरती और चेहरे का सबसे अभिन्न अंग है तो इनका चमकदार होना भी बेहद आवश्यक है। इसके अलावा आँखों में चमक से आत्मविश्वास भी बढ़ता है। खूबसूरत और सुन्दर दिखने के लिए शरीर के अन्य हिस्सों पर ध्यान देने के साथ-साथ आँखों पर ध्यान देना भी बेहद आवश्यक है।ankhon ki chmk lane ke upay

ऐसे तो आँखों के लिए बहुत कुछ करने की आवश्यकता नहीं है लेकिन यदि आप बहुत समय तक कंप्यूटर आदि के सामने बैठते है या कम नींद लेते है तो उस स्थिति में आपको आँखों का विशेष ध्यान रखना होगा। आज हम आपको उन्ही कुछ तरीकों के बारे में बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप अपनी आँखों में नयी चमक पा सकेंगे।

आँखों में चमक लाने के घरेलू उपाय :-

1. पूरी नींद :

आँखों में होने वाली अधिकतर परेशानियों की वजह अधूरी नींद को ही माना जाता है। तो अगर आपकी भी नींद पूरी नहीं होती है तो ऐसे में आँखे लाल और थकी हुई लगती है। ऐसे में उन्हें तरोताजा रखने के लिए अच्छी नींद लेना बेहद जरुरी है। क्योंकि पूरी नींद आपकी आँखों को स्वस्थ रखने के साथ-साथ आपके शरीर को भी स्वस्थ रखेगी।

2. खीरा :

खीरे की तासीर ठंडी होती है और इसका इस्तेमाल करके आँखों की थकावट को दूर किया जा सकता है। प्रयोग के लिए खीरे के दो टुकड़े काटकर उन्हें अपनी आँखों पर रखें। कुछ देर रखने के बाद आँखों को ठंडे पानी से धो लें। खीरा थकी हुई आँखों में चमक लाने के साथ-साथ ये डार्क सर्कल्स ठीक करने में भी मदद करता है।

3. गुलाबजल :

आँखों में जलन की समस्या होने पर गुलाबजल बेहद फायदेमंद होता है। प्रयोग के लिए अपनी आँखों में 2 से 4 बूंद गुलाबजल डालें और ऑंखें बंद कर लीजिए। आप चाहे तो फ्रिज में रखे हुए गुलाबजल में रुई भीगने रख दें। उसके बाद रुई उसे अपनी आँखों पर रखें। आँखों की चमक लौट आएगी।

4. ठंडा दूध :

ठंडा दूध भी थकी हुई आँखों के उपचार के लिए काफी लाभदायक होता है। इसके लिए जब भी आँखों में थकान महसूस हो दूध को कटोरी में लेकर ठंडा कर लें। ठंडा हो जाने के बाद उसमे कॉटन बाल डालें और भीगने दें। उसके बाद इन कॉटन बॉल्स को अपने आँखों पर 10 से 15 मिनट के लिए रख लें।

5. आलू :ankhon me chamak lane ke upay

आलू भी आँखों की चमक बढ़ने में मदद करता है। इसके प्रयोग के लिए आलू की स्लाइसेस काटकर उन्हें आँखों पर रखें। ऐसा करने से आँखों की थकना भी कम होगी और डार्क सर्कल्स भी ठीक होंगे। आप चाहे तो आलू के रस और दूध के रस को मिलाकर ठंडा करके उसका प्रयोग भी कर सकते है।

6. पुदीना :

आँखों की थकान मिटने और उन्हें तरोताज़ा रखने के लिए पुदीने का इस्तेमाल करना बहुत लाभकारी होता है। इसके लिए पुदीने की पत्ती, शहद और बादाम के तेल को मिलाकर आँखों पर लगाएं। इससे आँखों की थकान दूर होती है।

7. विटामिन ऐ :

आँखों की चमक बरकरार रखने के लिए केवल नुस्खे ही नहीं अपितु अंदरूनी पोषण भी देना होगा। इसके लिए विटामिन ऐ से भरपूर भोजन का सेवन करें। इसके लिए आप बटर, गाजर, दूध और टमाटर आदि का सेवन कर सकते है।

8. टी बैग्स :

आँखों के आस-पास की त्वचा बहुत संवेदनशील होती है और पतली भी इसीलिए उसकी विशेष देखभाल करनी चाहिए। आँखों के लिए टी बैग्स की सलाह हर कोई देता है। इसके लिए आप ग्रीन या ब्लैक टी बैग्स ले सकते है। प्रयोग के लिए इस्तेमाल किये हुए टी बैग्स को फ्रीजर में रख दें। और ठंडा होने के बाद इसका प्रयोग करें।

ऐसे हो मानसिक रूप से तैयार बेबी के लिए

यदि आप प्रेग्नेंट हो चुकी है या बेबी प्लान कर रहीं हैं। तो आपको को अपनी बॉडी को स्वस्थ रखने के साथ इस बात का भी ध्यान रखना पड़ता है। की क्या आप मानसिक रूप से बेबी के लिए तैयार है? क्योंकि यह बात सच है की प्रेगनेंसी महिला के जीवन का सबसे बेहतरीन अनुभव होने के साथ महिला की जिंदगी को पूरी तरह से बदल देने वाला अनुभव भी होता है। और ऐसा भी नहीं है ही शिशु के जन्म के बाद आपकी जिंदगी में केवल ख़ुशी ही आती है।

बल्कि शिशु की केयर करना, शिशु के लिए हर छोटी से छोटी बात का ध्यान रखना, शिशु को पालना महिला के लिए खुशनुमा होने के साथ कठिनाई से भरा व् तनाव से भरा हुआ भी हो सकता है। साथ ही बेबी के आने से आपके काम, परिवार, दोस्ती, पति पत्नी का रिश्ता सभी चीजें प्रभावित होती है। ऐसे में महिला को प्रेगनेंसी प्लान करने से पहले मानसिक रूप से अपने आप को तैयार करना चाहिए की क्या वो अपने लाइफ में आने वाले इस बड़े बदलाव के तैयार है।

कैसे हो बेबी के लिए मानसिक रूप से तैयार?

यदि आप बेबी प्लान तो करना चाहती हैं। लेकिन आपको समझ नहीं आ रहा है की आप इस जिम्मेवारी को लेने के लिए तैयार है या नहीं। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपसे कुछ ऐसे बातें और टिप्स शेयर करने जा रहे हैं। जो मानसिक रूप से आपको तैयार करने में मदद कर सकते है।

सबसे पहले अपने मन में आ रहे विचारों को अपने पार्टनर से करें शेयर

  • माँ बनना महिला का काम होता है लेकिन महिला को इस फैसले व् प्रेगनेंसी के दौरान और शिशु के जन्म के बाद अपने पार्टनर के पूरे स्पोर्ट की जरुरत पड़ती है।
  • और शिशु के जन्म के बाद महिला की जिम्मेवारियां बढ़ जाती है।
  • ऐसे में महिला को अपने मन में आ रहे विचारों को अपने पार्टनर के साथ शेयर करना चाहिए।
  • की शिशु के जन्म के बाद आपके पार्टनर किन किन चीजों में आपकी मदद कर सकते हैं, शिशु के जन्म के बाद उनकी लाइफ में आने वाले बदलाव के लिए आपके पार्टनर तैयार हैं या नहीं, आदि।
  • क्योंकि महिला अपने मन और दिमाग में चल रहे जितने सवालों का जवाब चाहती है और उसे वह जवाब मिल जाते हैं तो यह सब महिला को मानसिक रूप से बेबी प्लानिंग के लिए तैयार करने में मदद करते हैं।

शिशु को जन्म देने से पहले दूसरे माता पिता के साथ बिताएं थोड़ा समय

  • मानसिक रूप से बेबी के लिए तैयार होने के लिए महिला व् उनके पार्टनर दोनों को दूसरे माता पिता के साथ थोड़ा समय बिताना चाहिए।
  • और उनका एक्सपीरियंस कैसा है इस बारे में बात करनी चाहिए, प्रेगनेंसी के समय व् डिलीवरी के बाद महिला के जीवन में कौन से बदलाव आये हैं, इस बारे में पूछना चाहिए।
  • हो सकता है की आपको कुछ लोग अच्छा बताएं, तो कुछ डरा भी दें, लेकिन आपने किसी भी बात को अपने दिमाग में नहीं बिठाना है।
  • बस लोगो की बातें सुननी है, उसके बाद एक बार बैठकर उन सभी बातों पर अच्छे से विचार करना है।
  • तो ऐसा करने से हो सकता है की आपको मानसिक रूप से हो सके की आप एक प्यारे से बेबी को अपनी लाइफ में लाने के लिए तैयार हैं।

शिशु को जन्म देने से पहले अपने घर में थोड़ा बदलाव करके देखें

  • शिशु के जन्म के बाद घर को थोड़ा अव्यस्थित करके देखें यानी की अपने घर में कहीं कहीं थोड़े कपडे, कुछ न कुछ सामान को बिखेर दें।
  • उसके बाद आप महसूस करें की आपको कैसा लग रहा है, और फिर उस सामान को वापस व्यस्थित करें की आपको कितना समय लगता है।
  • ऐसा करके देखने से आपको शिशु के जन्म के बाद आपको अपने घर में, अपने काम में किस तरह बदलाव होगा उसका अनुभव लेने में मदद मिलती है।
  • ऐसे में यदि आप इन सब चीजों को एडजस्ट करने में अच्छा महसूस करते हैं और आपको कोई दिक्कत नहीं होती है।
  • तो आपका घर में ऐसे बदलाव को ट्राई करना भी आपको प्रेगनेंसी के लिए मानसिक रूप से तैयार करने में मदद करता है।

अपनी लाइफ को थोड़ा बदल कर देखें

  • शिशु के जन्म से पहले आप जब चाहे कहीं आ सकती हैं, जा सकती है, यात्रा कर सकती है, मूवी देख सकती हैं, बाहर का खाना खा सकती है, सो सकती है, जब इच्छा हो तब खा सकती हैं, आदि।
  • लेकिन शिशु के जन्म के कम से कम दो साल तक हो सकता है की आपको इन सभी चीजों में दिक्कत हो।
  • ऐसे में थोड़े दिन घर पर रहकर देखें अपनी इन आदतों को दिनचर्या को सही से प्लान करके देखें।
  • की क्या आप अपनी दिनचर्या और लाइफ में आने वाले इस बदलाव के लिए तैयार हैं या नहीं।
  • हाँ हो सकता है शुरुआत में आपको दिक्कत हो लेकिन ऐसा जरूर करके देखें।
  • क्योंकि आपको अपनी लाइफ में होने वाले बदलाव को महसूस करके इस बात को समझने में आसानी है की क्या आप मानसिक रूप से नन्हे मेहमान को लाने के लिए तैयार हैं या नहीं।

शिशु को जन्म देने से पहले आर्थिक रूप से भी एक बार जरूर सोचें

  • शिशु के जन्म के बाद खर्चे बढ़ जाते हैं कम नहीं होते हैं।
  • ऐसे में शिशु की बेहतर केयर के लिए आपको शिशु की हर छोटी से छोटी जरुरत का ध्यान अच्छे से रखना पड़ता है।
  • लेकिन इसके लिए आपको प्रेगनेंसी प्लान करने से पहले आर्थिक रूप से डिलीवरी के खर्चे, डिलीवरी के बाद के खर्चे सब चीजों का विचार भी कर लेना चाहिए।
  • यदि आप शिशु को जन्म देने के लिए आर्थिक रूप से तैयार होते हैं तो भी आपको प्रेगनेंसी प्लान करने के लिए मानसिक रूप से तैयार होने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जो आपको मानसिक रूप से बेबी के लिए तैयार करने में मदद करते हैं। और आपको इन टिप्स का ध्यान भी रखना चाहिए। क्योंकि यदि आप मानसिक रूप से बेबी के लिए तैयार नहीं है। और आप गर्भवती हो गई हैं, ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान मानसिक रूप से परेशानी महिला के साथ महिला के पेट में पल रहे शिशु के लिए भी परेशानी खड़ी कर सकती है।

प्रेग्नेंट महिला के लिए 10 आयरन से भरपूर आहार – 10 Iron rich food for Pregnancy

Iron rich food for Pregnancy, शरीर में खून की कमी का होना एक आम व्यक्ति के लिए बहुत बड़ी परेशानी होती है। और जब बात प्रेगनेंसी की हो तो गर्भवती महिला के साथ महिला के पेट में पल रहे बच्चे को तो ज्यादा दिक्कतें हो सकती है। जैसे की गर्भवती महिला को थकान, कमजोरी, बॉडी में दर्द, डिलीवरी के दौरान परेशानी जैसी समस्या हो सकती है।

साथ ही बच्चे के विकास में भी दिक्कत आ सकती है। तो लीजिये आज इस आर्टिकल में हम आपको दस ऐसे खाद्य पदार्थों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनमे आयरन की मात्रा भरपूर होती है। और गर्भावस्था के दौरान प्रेग्नेंट महिला इन्हे अपनी डाइट में भी शामिल कर सकती है।

Iron rich food for Pregnancy- पालक – Spinach

  • पालक में आयरन प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है।
  • आयरन के साथ विटामिन सी भी पालक में मौजूद होता है।
  • जो प्रेग्नेंट महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद करता है साथ ही विटामिन सी बॉडी के सभी अंगो में आयरन को अवशोषित करने में भी मदद करता है।
  • जिससे प्रेग्नेंट महिला को खून की कमी के कारण होने वाली परेशानियों से बचें रहने के साथ शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।
  • पालक के अलावा अन्य हरी सब्जियों में भी आयरन भरपूर मात्रा में मौजूद होता है।

सेब

  • सेब में भी आयरन की प्रचुर मात्रा मौजूद होती है जो गर्भवती महिला को एनीमिया से सुरक्षित रखने में मदद करता है।
  • एनीमिया के साथ गर्भवती महिला व् शिशु के विकास में खून की कमी के कारण आ रही सभी परेशानियों को दूर करने में भी मदद मिलती है।

चुकंदर

  • गर्भवती महिला चुकंदर का सेवन यदि सलाद या जूस के रूप में करती है तो इससे भी गर्भवती महिला के शरीर में आयरन की कमी को दूर करने में मदद मिलती है।
  • क्योंकि चुकंदर में आयरन प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है।
  • लेकिन ध्यान रखें की की चुकंदर के जूस को अन्य फलों के रस के साथ मिलाकर पीएं।

Iron rich food for Pregnancy – अनार – Pomegranate

  • लाल लाल अनार भी आयरन से भरपूर होता है।
  • यदि प्रेग्नेंट महिला अनार के दाने या अनार के जूस का सेवन करती है।
  • तो इससे गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने के साथ बॉडी में ब्लड फ्लो को बेहतर होने में मदद मिलती है।
  • जिससे प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने और शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है।

अमरुद

  • प्रेगनेंसी के दौरान अमरुद खाने से गर्भवती महिला को बहुत से फायदे मिलते हैं।
  • और इसका एक फायदा यह भी होता है की अमरुद खाने से गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।
  • एक बात का गर्भवती महिला को ध्यान रखना चाहिए की अमरुद को कच्चा खाने की बजाय जितना ज्यादा पके हुए अमरुद का गर्भवती महिला सेवन करती है।
  • उतना ही ज्यादा बॉडी में हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाने में मदद मिलती है।

Iron rich food for Pregnancy – सूखे मेवे – Dry fruits

  • पिस्ता, अखरोट, किशमिश, बादाम यह सभी सूखे मेवे आयरन के बेहतरीन स्त्रोत होते हैं।
  • ऐसे में गर्भवती महिला बॉडी में खून की कमी को पूरा करने के लिए सूखे मेवों का सेवन भी कर सकती है।
  • सूखे मेवों का सेवन करने से गर्भवती महिला को आयरन के साथ और भी पोषक तत्व मिलते हैं जो गर्भवती महिला व् शिशु को हेल्दी रखने में मदद करते हैं।

अनाज

  • अनाज भी आयरन का एक बेहतरीन स्त्रोत होता है।
  • इसीलिए गर्भवती महिला को नियमित रूप से अनाज का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करना चाहिए।
  • अनाज का सेवन करने से गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान ऊर्जा से भरपूर रहने व् फिट रहने में भी मदद मिलती है साथ ही शिशु का विकास बेहतर होता है।

तुलसी

  • तुलसी के औषधीय गुणों के बारे में तो आप सभी जानते हैं की इसका इस्तेमाल बॉडी में बहुत सी बीमारियों को खत्म करने के लिए किया जाता है।
  • इसके साथ तुलसी में आयरन भी भरपूर मात्रा में मौजूद होता है जो गर्भवती महिला के शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा को पूरा करने में मदद करता है।

आंवला

  • आंवले में आयरन भरपूर मात्रा में मौजूद होता है जो गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद करता है।
  • साथ ही आंवलें में मौजूद विटामिन सी बॉडी के सभी अंगो तक खून के प्रवाह को बढ़ाने में भी मदद करता है।

अंडा

  • अंडे का पीला भाग आयरन का बेहतरीन स्त्रोत होता है।
  • ऐसे में यदि आप अंडे का सेवन कर लेती हैं तो प्रेगनेंसी के दौरान अंडे का पीला भाग खाएं।
  • इससे गर्भवती महिला के शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा को सही रखने में मदद मिलती है।

तो यह हैं वो दस आहार जिनमे आयरन प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है। साथ ही गर्भावस्था के दौरान इन आहार को लेने से गर्भवती महिला या शिशु को कोई दिक्कत भी नहीं होती है। ऐसे में गर्भवती महिला चाहे तो इन आहार को अपनी डाइट में शामिल कर सकती है। ताकि गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी का सातवां महीना सबसे खतरनाक क्यों होता है?

प्रेगनेंसी के नौ महीने

गर्भावस्था के पूरे नौ महीने गर्भवती महिला को अपना अच्छे तरीके से ख्याल रखने की सलाह दी जाती है। क्योंकि प्रेग्नेंट महिला का स्वस्थ रहना ही प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास में मदद करता है। साथ ही प्रेगनेंसी के हर दिन महिला बहुत से उतार चढ़ाव से गुजरती है इस दौरान महिला केवल शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक व् भावनात्मक रूप से भी अपने अंदर बदलाव महसूस करती है। साथ ही लगाकर बॉडी में हो रहे बदलाव के कारण परेशानी, शिशु के विकास को लेकर सोचना, डिलीवरी को लेकर डर ऐसी ही कुछ बातों को लेकर महिला परेशान हो सकती है। इसके अलावा महिला केवल परेशान ही नहीं होती है बल्कि शिशु की गर्भ में पहली हलचल को महसूस करना भी प्रेगनेंसी के नौ महीने का सबसे बेहतरीन अनुभव होता है। और जब शिशु का जन्म होता है तो महिला प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने की परेशानियों को भी भूल जाती है।

प्रेगनेंसी का सातवां महीना क्यों होता है खतरनाक

गर्भावस्था जैसे जैसे आगे बढ़ती है वैसे वैसे महिला का वजन बढ़ने के कारण महिला की परेशानी भी बढ़ सकती है। और इस दौरान महिला को बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इस महीने में की गई थोड़ी सी भी लापरवाही प्रेगनेंसी की मुश्किलों को बढ़ा सकती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के सातवे महीने को खतरनाक क्यों कहा जाता है।

थकान

वजन बढ़ने के कारण, बॉडी में हार्मोनल बदलाव आदि के कारण प्रेग्नेंट महिला को सातवें महीने में बहुत जल्दी थकान का अनुभव हो सकता है। ऐसे में थकान की समस्या से राहत पाने के लिए महिला को भरपूर आराम करना चाहिए। लेकिन यदि महिला थकान में भी काम करती है और बॉडी को आराम नहीं देती है तो इसके कारण महिला की तबियत पर ही बुरा असर पड़ता है बल्कि शिशु को भी परेशानी का अनुभव हो सकता है।

वजन

सातवें महीने में महिला वजन भी बढ़ जाता है, और वजन बढ़ने के कारण उठने, बैठने, सोने, चलने आदि में महिला को परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है। ऐसे में उठते बैठते समय महिला के लिए बहुत जरुरी होता है की वो अपना ध्यान अच्छे से रखे क्योंकि इस दौरान की गई थोड़ी सी चूक प्रेग्नेंट महिला के लिए नुकसानदायक हो सकती है।

तनाव

शारीरिक बदलाव, प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियां, बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला तनाव में आ सकती है। और तनाव के कारण गर्भवती महिला की परेशानियां ही नहीं बढ़ सकती है, बल्कि इसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु पर भी बुरा असर पड़ सकता है।

घर के काम में लापरवाही

यदि प्रेग्नेंट महिला इस दौरान घर का काम अधिक करती है, पेट पर अधिक दबाव या जोर पड़ने वाला काम करती है, तो इसके कारण गर्भाशय में संकुचन होने की सम्भावना बढ़ सकती है जिसके कारण गर्भ में शिशु असहज महसूस कर सकता है और साथ ही समय पूर्व प्रसव जैसी परेशानी का सामना भी महिला को करना पड़ सकता है।

मूड स्विंग्स

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में भी गर्भवती महिला को मूड स्विंग्स की समस्या अधिक हो सकती है जिसके कारण महिला अधिक गुस्से व् चिड़चिड़ाहट महसूस कर सकती है। और अधिक गुस्सा व् चिड़चिड़ाहट भी प्रेग्नेंट महिला के लिए सही नहीं होती है।

समय पूर्व प्रसव

गर्भावस्था के सातवें महीने में महिला यदि किसी भी तरह की लापरवाही करती है जिसके कारण महिला के गर्भ पर असर पड़ता है। तो इसके कारण समय पूर्व प्रसव जैसी परेशानी महिला को हो सकती है और इसका नकारात्मक असर शिशु पर देखने को मिलता है। और उसके बाद हो सकता है शिशु को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है।

सम्बन्ध

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में सम्बन्ध बनाने के कारण भी खतरा बढ़ सकता है, क्योंकि सम्बन्ध बनाते समय पेट पर जोर पड़ने के कारण या गर्भाशय पर चोट लगने के कारण गर्भाशय में संकुचन का खतरा रहता है। ऐसे में पति पत्नी दोनों को प्रेगनेंसी के सातवें महीने में होने वाली परेशानी से बचने के लिए सम्बन्ध बनाने से भी बचना चाहिए।

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में महिला को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

  • झुककर किसी भी काम को नहीं करना चाहिए।
  • ऐसे किसी भी काम को करने से गर्भवती महिला को बचना चाहिए जिसे गर्भवती महिला के पेट पर जोर पड़े।
  • प्रेग्नेंट महिला को भारी वजन उठाने या किसी भी भारी चीज को सारकाने से बचना चाहिए।
  • उल्टा होकर नहीं सोना चाहिए, साथ ही बाईं और करवट लेकर सोना महिला के लिए सबसे सही पोजीशन होती है।
  • सीढ़ियां चढ़ने से बचना चाहिए।
  • एक ही बार में पेट भरकर नहीं खाना चाहिए क्योंकि इससे भोजन को पचाने में समस्या होने के कारण एसिडिटी, सीने में जलन जैसी परेशानी का सामना भी महिला को कारण पड़ सकता है।
  • किसी भी तरह के नशे, कैफीन का अधिक मात्रा में सेवन आदि करने से बचना चाहिए।
  • डॉक्टर से समय से जांच करवानी चाहिए और बिना डॉक्टरी परामर्श के किसी भी दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के सातवें महीने से जुडी कुछ बातें ऐसे में गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के सातवें महीने में होने वाली परेशानियों से बचने के लिए अपना अच्छे से ख्याल रखना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के विकास को बेहतर तरीके से होने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी के दौरान सर्दियों में केसर व् बादाम दूध पीना क्यों जरुरी होता है?

गर्भावस्था के दौरान मौसम में बदलाव होने के कारण महिला को अपने खान पान में भी थोड़े बदलाव की जरुरत हो सकती है। और महिला को ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए जो प्रेग्नेंट महिला और शिशु के लिए पोषक तत्वों से भरपूर हो और साथ ही मौसम के दुष्प्रभाव से भी महिला और शिशु को सुरक्षित रख सकें। तो लीजिये आज हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान यदि सर्दियों का मौसम आता है तो गर्भवती महिला को केसर दूध व् बादाम के दूध का सेवन क्यों और कब करना चाहिए इसके बारे में बताने जा रहे हैं। क्योंकि किसी भी चीज के सेवन से पहले गर्भवती महिला को उसकी पूरी जानकारी होनी चाहिए की प्रेगनेंसी में उस चीज का सेवन करना चाहिए या नहीं।

प्रेगनेंसी में केसर दूध और बादाम दूध का सेवन क्यों और कब से करना चाहिए?

बहुत सी गर्भवती महिलाएं ड्राई फ्रूट में शामिल बादाम व् केसर को लेकर थोड़ा परेशान रहती है की प्रेगनेंसी में इनका सेवन करना चाहिए या नहीं। तो लीजिये आज हम आपकी इस परेशानी का समाधान करने जा रहे हैं, गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में बादाम व् केसर के सेवन से बचना चाहिए चाहे फिर वो सर्दियों में ही क्यों न हो, क्योंकि इनकी तासीर गर्म होने के कारण गर्भ में शिशु पर नकारात्मक असर पड़ सकता है यानी इसका अधिक सेवन महिला के लिए गर्भपात जैसी परेशानी भी खड़ी कर सकता है।

लेकिन प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही से गर्भवती महिला इसका सेवन कर सकती है लेकिन सही मात्रा में जैसे की दूध में दो से तीन रेशे केसर के डालने चाहिए, एक दिन में चार से पांच बादाम का सेवन गर्भवती महिला कर सकती है। और दूध में डालकर इनका सेवन इसीलिए करना चाहिए क्योंकि दूध पोषक तत्वों से भरपूर होता है ऐसे में केसर व् बादाम के पोषक तत्व भी दूध के साथ मिल जाते हैं। जिससे इन्हे पीने का फायदा दुगुना हो जाता है तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में बादाम दूध व् केसर दूध का सेवन करने के कुछ फायदों के बारे में, जो गर्भवती महिला और शिशु को इनका सेवन करने से मिलते हैं।

सर्दियों में प्रेग्नेंट महिला को केसर दूध पीने के फायदे

  • केसर मिल्क की तासीर गर्म होने के कारण यह सर्दी के मौसम में बॉडी के तापमान को सही रखने में मदद करता है जिससे गर्भवती महिला को ठण्ड के कारण होने वाली परेशानी से बचाव करने में मदद मिलती है।
  • केसर को दूध के साथ मिलकर पीने से दूध व् केसर के पोषक तत्व मिलकर गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। जैसे की दूध में मौजूद कैल्शियम गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करता है वही केसर महिला को खून की कमी के कारण होने वाली परेशानी से बचाव के साथ बॉडी में आयरन की मात्रा को सही रखने में मदद करता है।
  • केसर मिल्क पीने से गर्भ में पल रहे शिशु की रंगत में निखार लाने में मदद मिलती है।
  • ब्लड प्रेशर से जुडी परेशानी से गर्भवती महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।
  • मूड स्विंग्स के कारण बहुत सी गर्भवती महिलाएं परेशान रहती है लेकिन सर्दियों में केसर दूध का सेवन यदि गर्भवती महिला करती है तो इससे महिला के मूड को सही रखने में मदद मिलती है।
  • केसर दूध का सेवन करने से गर्भवती महिला को लिवर व् किडनी से सम्बंधित परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • ऐसा भी माना जाता है की सर्दियों में ठण्ड के कारण एक ही जगह बैठे रहने का मन करता है जिससे हो सकता है गर्भ में शिशु भी सुस्त रहने लगे। लेकिन केसर का दूध पीने से गर्भ में शिशु की मूवमेंट को बेहतर रखने में मदद मिलती है।

सर्दियों में प्रेग्नेंट महिला को बादाम दूध पीने के फायदे

  • सर्दी के मौसम में बादाम मिल्क का सेवन करने से गर्भवती महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है क्योंकि बादाम के दूध में न्यूट्रिएंट्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो गर्भवती महिला और शिशु दोनों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।
  • बादाम के दूध का सेवन करने से गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक विकास के साथ मानसिक विकास को भी बेहतर होने में मदद मिलती है।
  • कोलेस्ट्रॉल को कण्ट्रोल रखने के साथ हदय को स्वस्थ रखने के लिए प्रेग्नेंट महिला बादाम के दूध का सेवन कर सकती है।
  • फाइबर से भरपूर होने के कारण बादाम का दूध गर्भवती महिला की पाचन क्रिया को बेहतर रखने में मदद करता है।
  • गर्भवती महिला को हड्डियों की मजबूती और गर्भ में शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास के लिए भी गर्भवती महिला को बादाम के दूध का सेवन जरूर करना चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान सर्दियों में केसर दूध व् बादाम दूध क्यों को कब पीना चाहिए इससे जुड़े कुछ टिप्स, तो यदि आप भी गर्भवती महिला और आपकी प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही चलने के साथ सर्दियों का मौसम है तो आपको भी इनका जरूर करना चाहिए।

प्रेग्नेंट महिला को गर्मियों में रात को पराठे खाने से क्या नुकसान होते हैं?

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को पोषक तत्वों से भरपूर आहार खाने की सलाह दी जाती है। लेकिन साथ ही महिला को खान पान में सावधानी बरतने की सलाह भी दी जाती है। ताकि महिला व् शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके, महिला को भोजन को पचाने में कोई दिक्कत न हो, जो भी महिला खा रही है उससे माँ या बच्चे की सेहत को कोई नुकसान न हो आदि। आज इस आर्टिकल में हम प्रेग्नेंट महिला को गर्मियों के मौसम में रात को पराठे क्यों नहीं खाने चाहिए और पराठे खाने से महिला को क्या नुकसान हो सकते हैं इस बारे में बताने जा रहे हैं।

हज़म करने में होती है दिक्कत

पराठे बनाने के लिए तेल, मसालों, आलू, प्यास जैसी चीजों का इस्तेमाल होता है। जिनका सेवन रात को करने के कारण उन्हें पचाने में परेशानी हो सकती है खासकर गर्भवती महिला की पाचन क्षमता कमजोर होती है ऐसे में उन्हें अधिक परेशानी होती है। और जब महिला का खाना अच्छे से हज़म नहीं होता है तो इसके कारण महिला को रातभर परेशानी हो सकती है।

पेट में गैस की हो सकती है समस्या

पराठों में होने वाले मसालों के कारण, पराठों के न पचने के कारण, पेट में गैस की समस्या होती है। जिसके कारण पेट दर्द, पेट फूलने जैसी परेशानी से रातभर महिला परेशान होती है। साथ ही इसके कारण सीने में जलन खट्टी डकार जैसी परेशानी भी महिला को होती है।

प्यास अधिक लगती है

तेलीय चीजें रात में खाने के कारण पानी की प्यास भी अधिक लगती है, और महिला पानी का सेवन ज्यादा करती है। पानी का सेवन बार बार करने के कारण बार बार यूरिन पास करने की इच्छा होती है। जिससे बार बार बाथरूम में आने जाने के कारण पूरी रात महिला परेशान होती है।

मसालों के कारण हो सकती है परेशानी

पराठे बनाने के लिए बहुत से मसालों का इस्तेमाल किया जाता है, और गर्भावस्था के दौरान महिला अधिक मसालों का सेवन करने की मनाही होती है। क्योंकि इसके कारण महिला को पेट सम्बन्धी परेशानियां जैसे की पेट में दर्द, अपच जैसी परेशानी होती है।

गर्मी लगती है अधिक

गर्मियों में मौसम में रात को पराठे खाने के कारण महिला को पसीना, अधिक गर्मी महसूस होने जैसी परेशानी भी होती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को गर्मी के कारण होने वाली परेशानी व् नींद न आने के कारण होने वाली दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो प्रेग्नेंट महिला को गर्मियों में रात को पराठे खाने से हो सकते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला को इस परेशानी से बचने के लिए रात को पराठे का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही चाहे गर्मी हो या सर्दी रात का आहार हल्का लेना चाहिए जिसे हज़म करने में महिला को किसी तरह की दिक्कत नहीं हो और न ही कोई सेहत सम्बन्धी परेशानी हो।