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अदरक से ऐसे करें वजन कम

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अदरक से ऐसे करें वजन कम, रसोई घर में अदरक का इस्तेमाल सब्ज़ी के जायके को बढ़ाने के लिए किया जाता है। साथ ही अदरक का सेवन करने से आपको बहुत सी शारीरिक परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलती है, क्योंकि अदरक में एंटी इंफ्लेमेट्री, एंटी बैक्टीरियल आदि गुण मौजूद होते हैं। अदरक की तासीर गर्म होने के कारण गर्मी के मौसम में अदरक का सेवन कम ही किया जाता है। लेकिन सर्दी के मौसम में चाहे सब्ज़ी हो या चाय जब तक अदरक का इस्तेमाल उसमे न हो तब तक मज़ा ही नहीं आता है। लेकिन शायद बहुत कम ही लोग जानते हैं की अदरक का इस्तेमाल करने से आप अपने वजन को भी कण्ट्रोल व् कम कर सकते हैं।

वजन कम करने के लिए अदरक का इस्तेमाल कैसे करें?

बढ़ते वजन से आजकल केवल महिलाएं ही बल्कि पुरुष भी परेशान हैं। और यदि वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ जाये तो इसके कारण आपकी परेशानी और भी बढ़ सकती है। ऐसे में वजन कम करने के लिए आप पता नहीं क्या क्या करते हैं। तो लीजिये आज इस आर्टिकल में हम आपको अदरक से जुड़े कुछ ऐसे आसान टिप्स के बारे में बताने जा रहे हैं। जो आपकी वजन बढ़ने की समस्या को कम करने में आपकी मदद करते हैं। तो आइये अब जानते हैं की वजन कम करने के लिए अदरक का इस्तेमाल कैसे करें।

निम्बू और अदरक

  • एक गिलास में दो चम्मच निम्बू का रस और दो चम्मच अदरक का रस डालें।
  • अब इस गिलास में उतना ही गुनगुना पानी डाले जितना आपने पीना है।
  • उसके बाद इसे अच्छे से मिक्स करके पीएं।
  • इस पानी को पीने से आपकी पाचन क्रिया को बेहतर होने में मदद मिलती है, मेटाबोलिज्म रेट बढ़ता है, भूख कम लगती है, आदि।
  • जिससे आपकी जरुरत से ज्यादा खाने की आदत पर नियंत्रण लगता है, भोजन को अच्छे से हज़म होने में मदद मिलती है।
  • जिससे आपके वजन को कम करने में मदद मिलती है।

अदरक का पानी

  • दो चम्मच पीसी हुई अदरक को पानी में डालकर अच्छे से उबाल लें।
  • उसके बाद इस पानी को गुनगुना होने पर पीएं, या आप चाय की तरह गर्म -गर्म सिप -सिप करके भी पी सकते हैं।
  • और इस पानी को नियमित दिन में दो बार जरूर पीएं।
  • ऐसा करने से भी आपके वजन को कण्ट्रोल होने में मदद मिलती है।

अदरक से ऐसे करें वजन कम ग्रीन के साथ मिलाएं अदरक

  • मेटाबोलिज्म को बढ़ाने और वजन को नियंत्रित करने के लिए ग्रीन टी का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है।
  • लेकिन जब आप ग्रीन टी में अदरक को भी शामिल कर लेते हैं।
  • तो इसका फायदा दुगुना बढ़ जाता है।
  • इसके लिए ग्रीन टी के लिए पानी को उबालते समय उसमे आधा या एक चम्मच अदरक की डालकर उबाल लें।
  • और दिन में कम से कम दो बार अदरक वाली ग्रीन टी का सेवन करें।
  • धीरे धीरे इसका असर आपको जरूर महसूस होगा।

अदरक से ऐसे करें वजन कम शहद और अदरक

  • एक कप पानी में एक चम्मच शहद और एक चम्मच पीसा हुस अदरक डालकर चाय की तरह उबाल लें।
  • उसके बाद इसे छानकर चाय की तरह इसका सेवन करें।
  • ऐसा नियमित दिन में कम से कम दो बार जरूर करें।
  • ऐसा करने से आपको वजन कम करने में मदद मिलती है।
  • आप चाहे तो अदरक को सुखाकर उसका पाउडर भी बनाकर रख सकती हैं और नियमित पानी में शहद और अदरक का पाउडर डालकर भी चाय बना सकती है।

अदरक का टुकड़ा

  • नियमित सुबह उठकर एक अदरक के छोटे टुकड़े को लेकर चबाएं।
  • ऐसा करने से आपकी पाचन क्रिया को मजबूत होने, मेटाबोलिज्म रेट को बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • जिससे आपके वजन को नियंत्रित रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ अदरक से जुड़े आसान टिप्स, जिनका इस्तेमाल करने से आपको वजन कम करने में मदद मिलती है। लेकिन अब ऐसा भी नहीं है की एक ही दिन में आपका वजन कम हो जायेगा। बल्कि इनमे से किसी एक टिप्स का इस्तेमाल नियमित रूप से करें, आपको धीरे धीरे इसका असर जरूर महसूस होगा। इसके अलावा सब्ज़ी, दाल, चाय आदि में तो नियमित अदरक को जरूर शामिल करें ।

प्रेगनेंसी में काला नमक खाने के फायदे

गर्भावस्था के दौरान नमक का सेवन बहुत जरुरी होता है। क्योंकि नमक शरीर में पीएच बैलेंस को बनाएं रखने के साथ तरल पदार्थों के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद करता है। साथ ही नमक का सेवन सही मात्रा में करने से गर्भवती महिला को बहुत सी परेशानियों से निजात मिलता है और बच्चे का विकास भी अच्छे से होता है। लेकिन नमक का सेवन करते समय इस बात का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है की आप नमक को न तो जरुरत से ज्यादा लें और न ही कम लें।

क्योंकि इसके कारण आपको दिक्कत हो सकती है। प्रेगनेंसी के दौरान महिला सिम्पल नमक के अलावा सेंधा नमक व् काले नमक का सेवन भी कर सकती है। आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान काले नमक का सेवन करने से कौन से फायदे मिलते हैं बताने जा रहे हैं।

कब्ज़ से निजात

गर्भावस्था के दौरान कब्ज़ होना बहुत आम बात होती है। ऐसे में इस परेशानी से निजात के लिए काले नमक का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है।

सीने में जलन से राहत

पेट में गैस बनने के कारण सीने में जलन, खट्टे डकार जैसी परेशानी प्रेगनेंसी के दौरान महिला को हो सकती है। ऐसे में एक गिलास पानी में काला नमक और निम्बू का रस डालकर सेवन करें। ऐसा करने से इस परेशानी से आराम मिलता है।

पेट दर्द से आराम

गर्भावस्था के दौरान थोड़ा बहुत पेट में दर्द होना आम बात होती है। लेकिन कभी दर्द बढ़ जाये तो इस परेशानी से निजात पाने के लिए काला नमक एक असरदार उपाय है। क्योंकि काला नमक खाने से खाने को पचाने में मदद मिलती है जिससे पेट दर्द से आराम मिलता है।

फिट रखने में करता है मदद

प्रेगनेंसी के दौरान गुनगुने पानी में काला नमक डालकर पीने से शरीर में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है। जिससे बिमारियों व् संक्रमण से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है और गर्भवती महिला फिट रहती है।

हड्डियां होती है मजबूत

काला नमक मिनरल्स से भरपूर होता है जो गर्भवती महिला की हड्डियों को पोषित करने में मदद करता है। जिससे गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूत बने रहने में मदद मिलती है।

तनाव होता है कम

गर्भावस्था के दौरान तनाव, महिला के साथ बच्चे के लिए भी अच्छा नहीं होता है। और काला नमक तनाव कम करने के लिए एक असरदार उपाय है। क्योंकि काला नमक खाने से शरीर में तनाव उत्पन्न करने वाले हॉर्मोन्स को कण्ट्रोल करने में मदद मिलती है।

ब्लड शुगर लेवल रहता है नियंत्रित

काला नमक खाने से गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रहने में मदद मिलती है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान जेस्टेशनल डाइबिटीज़ जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ बेहतरीन फायदे जो काले नमक का सेवन करने से गर्भवती महिला को मिलते हैं। लेकिन ध्यान रखें की यदि आपको कोई शारीरिक परेशानी है जैसे की हाई बीपी की समस्या है तो आपको काले नमक का सेवन करने से पहले एक बार डॉक्टर से राय जरूर लेनी चाहिए।

Health benefits of eating Black salt in Pregnancy

स्वस्थ रहने के लिए कैसा भोजन लेना चाहिए

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बॉडी की फिटनेस, शरीर को बीमारियों से बचाने के लिए जरुरी होता है की आप अपने आहार का अच्छे से ध्यान रखें। क्योंकि जो आहार आप खाते है वो आपके शरीर के अंगो के विकास और उन्हें स्वस्थ रखने में मदद करता है। क्योंकि उसमे मौजूद पोषक तत्व ही आपके शरीर की वृद्धि में मदद करते हैं। शरीर को स्वस्थ रहने के लिए विटामिन, फैट, फाइबर, फाइटोकेमिकल व् अन्य मिनरल्स की भरपूर मात्रा में जरुरत होती है। क्योंकि यही पोषक तत्व बॉडी की कार्य प्रणालियों को स्वस्थ बनाएं रखने, आपको रोगो से बचाने और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने, व् पर्यावरण में मौजूद विषैले पदार्थो से बचाव करने में आपकी मदद करते हैं।

इसीलिए आपको स्वस्थ रहने के लिए अपने आहार का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि यदि आप ऐसे आहार का सेवन करते हैं जिसमे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते है तो इससे आपके शरीर के अंगो को विकास करने और शरीर की गतिविधियों को सुचारु रूप से चलाने में मदद मिलती है। इसीलिए आपको स्वस्थ संतुलित, पौष्टिक व् मिनरल्स से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए। क्योंकि उचित पोषण ही स्वस्थ शरीर की नींव होता है। तो आइये अब जानते है की शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आपको अपने आहार में किन किन चीजों को सम्मिलित करना चाहिए। जिससे आपको स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

स्वस्थ रहने के लिए करें इन पोषक तत्वों का सेवन:- शरीर को स्वस्थ रहने के लिए भरपूर मात्रा में मौजूद पोषक तत्वों वाले आहार का ही सेवन करना चाहिए। जैसे की प्रोटीन, विटामिन व् मिनरल्स, फाइबर, फैट आदि। तो आइये अब विस्तार से जानते है की किन किन चीजों में यह पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते है।

प्रोटीन को करें अपने आहार में शामिल:- शरीर में उत्तक के निर्माण के लिए एमिनो एसिड बहुत जरुरी होते है जो हमे प्रोटीन का सेवन करने से मिलते हैं। शरीर की कार्यप्रणाली को उचित तरीके से चलाने के लिए बीस तरह के एमिनो एसिड की जरुरत होती है। बारह तरीके के एमिनो एसिड का निर्माण बॉडी में ही होता है जबकि आठ तरह के एमिनो एसिड आपके आहार पर निर्भर करते है। ऐसे में आपको अपने आहार में प्रोटीन को भरपूर मात्रा में शामिल करना चाहिए।

प्रोटीन के लिए इन चीजों का सेवन करें:- दाल, फलियों, मटर, बीन्स, पालक, शतावरी, मशरूम, फूलगोभी, केला, सेब अमरुद, आदि में प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है इसीलिए बॉडी में प्रोटीन की मात्रा को को पर्याप्त करने के लिए आपको इनका सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।

फाइबर को करें अपने आहार में शामिल:- फाइबर आपकी पाचन क्रिया में सुधार लाने के लिए बहुत जरुरी होता है। और यदि आप अपने आहार में फाइबर को उचित मात्रा में शामिल करते हैं तो इससे आपके मेटाबोलिज्म को बेहतर करने और पेट में कब्ज़ जैसी समस्याओं से निजात पाने में आपको मदद मिलती है।

फाइबर के लिए करें इन चीजों का सेवन:- हरे मटर, पत्तागोभी, ब्रोकली, मूली, जौ, ब्राउन राइस, गेहूं, जई, मक्का, रागी, खजूर, मुनक्का, आदि में फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा सेब, नाशपाती, रास्पबेरी जैसे फलों में भी यह उचित मात्रा में मौजूद होता है।

फैट की भी होनी चाहिए शरीर में उचित मात्रा:- आपके शरीर में बहुत से कार्यो को करने के लिए जो ऊर्जा चाहिए होती है उसके लिए आपको अपने आहार में फैट यानी वसा को शामिल जरूर करना चाहिए। वसा हमारे शरीर में पोषक तत्वों को एक अंग से दूसरे अंग तक पहुंचाने का काम करता है। वैसे देखा जाए तो फैटी एसिड मूल रूप से दो प्रकार के होते है ओमेगा फैटी एसिड 3 और ओमेगा फैटी एसिड 6, यह आपके शरीर में भरपूर मात्रा में होने चाहिए ताकि आपको स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें।

फैटी एसिड के लिए करें इन चीजों का सेवन:- फैटी एसिड के लिए आपको अपने आहार में सोयाबीन, मकई, जैतून, सरसों, सूरजमुखी, आदि के तेलों को शामिल करना चाहिए। क्योंकि इनमे फैटी एसिड भरपूर मात्रा में होते है।

कार्बोहाइड्रेट का सेवन करें:- देखा जाए तो बॉडी में ऊर्जा को बनाएं रखने का सबसे उत्तम स्त्रोत कार्बोहाइड्रेट ही होता है। इसीलिए आपको अपने आहार में कार्बोहाइड्रेट को जरूर शामिल करना चाहिए। लेकिन कार्बोहाइड्रेट का सेवन आपको सिमित मात्रा में ही करना चाहिए जितना ही इसे जरुरत होती है क्योंकि इसमें अधिक सेवन के कारण आपको मोटापा व् शुगर जैसी परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है। इसीलिए कार्बोहाइड्रेट का सेवन करें लेकिन इसे अधिक मात्रा में न लें।

कार्बोहाइड्रेट के लिए करें इन चीजों को अपने आहार में शामिल:- बाजरा, मोटे अनाज, चावल, दाल, गेहूं, ज्वार, आलू, जड़ वाली सभी सब्जियां, केला अमरुद, सूखे मेवे आदि का भरपूर मात्रा में सेवन करने से आपको अपने शरीर के लिए कार्बोहाइड्रेट उचित मात्रा में मिलता है।

विटामिन और मिनरल्स का करें भरपूर सेवन:- शरीर के सही तरह से विकास, कार्य करने की क्षमता को बनाएं रखने, चपापयच क्रियाओं को सही करने के लिए आपको अपने आहर में भरपूर मात्रा में विटामिन व् मिनरल्स को भी शामिल करना चाहिए। यह आपके शरीर को स्वस्थ रखने और आपको हमेशा एनर्जी से भरपूर रखने में बहुत मदद करते हैं।

विटामिन और मिनरल्स के लिए करें इन चीजों का सेवन:- दाल, सेम, सभी तरह के फलों और सब्जियों आदि में विटामिन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में होते है इसीलिए आपको इन्हे अपने आहार में जरूर शामिल करना चाहिए।

स्वस्थ रहने के लिए आहार से जुडी इन बातों का ध्यान रखें:-

  • बासी व् फ्रिज में ज्यादा दिनों तक रखे खाने का सेवन न करें, जब भी फ्रिज से निकाल कर कुछ खाएं तो उसे गर्म जरूर करें।
  • सुबह का नाश्ता पेट भर कर करें और इसमें प्रोटीन और कैल्शियम को भरपूर मात्रा में लें क्योंकि इससे आपको ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है।
  • पूरे दिन में आठ से दस गिलास पानी का सेवन जरूर करें।
  • अपने खाने में ज्यादा बड़ा गैप न रखें दिन में तीन मील और दो बार स्नैक्स का सेवन जरूर करें।
  • खाना खाते समय साफ़ सफाई का ध्यान भी जरूर रखें।
  • खाना खाते समय बीच में बार बार पानी का सेवन न करें।
  • सलाद जरूर खाएं।
  • रात को सोने से एक घंटा पहले भोजन करें ताकि भोजन को अच्छे से पचने में मदद मिल सकें।

तो यह हैं वो पोषक तत्व जिन्हे यदि आप अपने आहार में सम्मिलित करते हैं तो आपको स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा आपको इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए की आप अधिक मात्रा में जंक फ़ूड का सेवन न करें क्योंकि आपके शरीर में बीमारियों को यह बुलावा देता है। हमेशा स्वस्थ व् पौष्टिक आहार का ही सेवन करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में सिर दर्द क्यों होता है? क्या हैं इसके उपाय

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है और इन परेशानियों के होने का कारण बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव हो सकते हैं। तो आज हम प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले सिर दर्द की समस्या के बारे में आपसे बात करने जा रहे हैं। प्रेग्नेंट महिला को सिर में दर्द महसूस होना आम बात होती है। और यह परेशानी गर्भवती महिला को पहली तिमाही में अधिक व् दूसरी और तीसरी तिमाही में थोड़ी कम हो सकती है। सिर दर्द की समस्या से निजात पाने के लिए गर्भवती महिला को बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि बिना सलाह के ली गई दवाइयां प्रेगनेंसी के दौरान नुकसानदायक साबित हो सकती है।

प्रेगनेंसी में सिर में दर्द होने के कारण

गर्भवती महिला के सिर में दर्द होने का कोई एक कारण नहीं होता है बल्कि ऐसे बहुत से कारण हैं जिनकी वजह से गर्भवती महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में सिर दर्द होने के क्या क्या कारण हो सकते हैं।

हार्मोनल बदलाव: प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में तेजी से हार्मोनल बदलाव हो सकते हैं जिनकी वजह से गर्भवती महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। और ऐसे ही प्रेगनेंसी में सिर दर्द होने का कारण भी बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव हो सकते हैं।

तनाव: गर्भवती महिला यदि प्रेगनेंसी के दौरान मानसिक रूप से परेशानी का अनुभव करती है तो भी महिला को सिर ने दर्द जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

ब्लड प्रैशर: गर्भावस्था के दौरान महिला को ब्लड प्रैशर के कम या ज्यादा होने की परेशानी हो सकती है। और ब्लड प्रैशर के घटने या बढ़ने के कारण गर्भवती महिला को सिर दर्द जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

कैफीन: यदि कोई महिला प्रेग्नेंट होने से पहले एक दिन में दो से तीन कप चाय कॉफ़ी का सेवन करती थी और प्रेग्नेंट होने पर एक दम से इसका सेवन बंद कर देती है तो भी गर्भवती महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

थकान: बहुत जल्दी थकान व् कमजोरी का महसूस होना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है। और यदि महिला को यह समस्या अधिक होती है तो भी प्रेग्नेंट महिला को सिर में दर्द जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

पानी की कमी: बॉडी में पानी की कमी होने के कारण भी गर्भवती महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। और सिर में दर्द के साथ बॉडी के अन्य पार्ट्स में भी दर्द की समस्या महिला को हो सकती है।

भूख: प्रेगनेंसी के दौरान मुँह का स्वाद बिगड़ने के कारण कई बार कुछ खाने की इच्छा नहीं होती है ऐसे में पेट खाली होने के कारण भी महिला को यह समस्या हो सकती है।

सर्दी: बंद नाक, खांसी जैसी समस्या से यदि गर्भवती महिला परेशान है तो इस समस्या के होने के कारण भी महिला को सिर में दर्द जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

नींद की कमी: जो प्रेग्नेंट महिला अपनी नींद पूरी नहीं लेती है उन्हें भी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

प्रेगनेंसी में होने वाले सिर दर्द से बचने के उपाय

यदि प्रेग्नेंट महिला सिर दर्द की समस्या से बहुत अधिक परेशान है तो इस समस्या से बचने के लिए गर्भवती महिला कुछ आसान तरीको का इस्तेमाल कर सकती है जिससे महिला को इस परेशानी से बचाव करने में मदद मिलती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को सिर दर्द से निजात पाने के लिए क्या करना चाहिए।

बेहतर खान पान: गर्भवती महिला जितना पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करती है उतना ही प्रेगनेंसी के दौरान महिला और शिशु दोनों को होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है। और महिला का बेहतर खान पान महिला को सिर दर्द जैसी परेशानी से बचाव करने में भी मदद करता है।

मालिश: घर पर किसी से भी या अपने आप ही आपको अपने सिर की मालिश करनी चाहिए। और हो सके तो मालिश करने वाले तेल को हल्का गर्म कर लें, और उससे मसाज करें। इससे आपको बहुत ज्यादा आराम महसूस होगा और साथ ही आपको आराम की नींद लेने में मदद मिलेगी।

चाय: यदि आप प्रेगनेंसी से पहले चाय का सेवन करती थी तो एक दम से चाय नहीं छोड़नी चाहिए और न ही ज्यादा मात्रा में प्रेगनेंसी के दौरान चाय लेनी चाहिए। ऐसे में यदि आप सिर दर्द महसूस कर रही हैं तो एक कप अच्छी से चाय बनाकर पीएं इससे भी आपको सिर दर्द की समस्या से निजात पाने में मदद मिल सकेगी, लेकिन इस बात का भी ध्यान रखें की जरूरत से ज्यादा मात्रा में कैफीन का सेवन इस दर्द को बढ़ा भी सकता है।

आराम: सिर दर्द का कारण नींद का पूरा न होना, थकान महसूस होना आदि हो सकते हैं। ऐसे में आपको यह परेशानी न हो इससे बचने के लिए भरपूर आराम करने के साथ अपनी नींद को पूरा लेना चाहिए।

सैर करें: सुबह के समय जल्दी उठकर थोड़ी देर वाक करें ऐसा नहीं ही तेजी से चले बल्कि आराम से दस मिनट वाक करें, या किसी पार्क आदि में जाएँ। ऐसा करने से शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के साथ मानसिक रूप से रिलैक्स रहने में भी मदद मिलती है। जिससे सिर दर्द जैसी परेशानी से प्रेगनेंसी के दौरान राहत पाने में मदद मिलती है।

हाइड्रेट रहें: हाइड्रेट रहे यानी की प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में पानी की कमी न होने दें, पानी की कमी को पूरा करने के लिए दिन में आठ से दस गिलास पानी पीने के साथ, नारियल पानी, जूस आदि का भी भरपूर सेवन करें। हाइड्रेटेड रहने से भी गर्भवती महिला को सिर दर्द की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

योगासन: सिर दर्द जैसी परेशानी से राहत के लिए गर्भवती महिला योगासन व् मैडिटेशन भी कर सकती है। यह सिर जैसी परेशानी के साथ गर्भवती महिला को अन्य शारीरिक परेशानियों से स्वस्थ रखने के साथ स्वस्थ रखने में भी मदद करता है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से गर्भवती महिला को सिर दर्द की समस्या हो सकती है। इसके अलावा नीचे कुछ उपाय भी दिए गए हैं जिससे प्रेगनेंसी के दौरान आप सिर दर्द की समस्या से निजात पा सकती है। लेकिन यदि सिर में दर्द बहुत ज्यादा हो, बुखार महसूस हो, थकान व् कमजोरी अधिक लगे तो इस लक्षण को अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर से बात करनी चाहिए। और जल्दी से जल्दी इस समस्या का उपचार करना चाहिए।

गर्भवती महिला को भूलकर भी इन सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए

प्रेगनेंसी के दौरान इन सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए, गर्भवती महिला इन सब्जियों से रखे परहेज, गर्भावस्था के दौरान इन सब्जियों के सेवन से बचें, प्रेगनेंसी टिप्स

गर्भावस्था के दौरान खान पान का विशेष महत्व होता है, क्योंकि गर्भवती महिला जितने पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करती है। उतना ही गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पेल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। लेकिन महिला को इस दौरान इस बात का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए की गर्भवती महिला को किन सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि कुछ ऐसी सब्जियां है जो गर्भवती महिला और शिशु के लिए नुकसानदायक हो सकती है। तो आइये अब जानते हैं की वो सब्जियां कौन सी हैं जो गर्भवती महिला के लिए नुकसानदायक हो सकती है।

कटहल

कटहल का सेवन गर्भवती महिला के लिए नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि इसमें विटामिन सी की अधिकता बहुत ज्यादा होती है, जिसके कारण गर्भाशय में संकुचन हो सकता है। और प्रेगनेंसी की शुरुआत में कटहल का अधिक सेवन गर्भपात का कारण भी बन सकता है। ऐसे में जितना हो सके गर्भवती महिला को इससे परहेज करना चाहिए।

बैंगन

बैंगन में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं लेकिन फिर भी गर्भवती महिला को इसके सेवन से परहेज करना चाहिए। क्योंकि इसमें मौजूद नेनुसिन नामक तत्व ब्लड सर्कुलेशन में समस्या खड़ी कर सकता है। जिसके कारण गर्भवती महिला को परेशानी होने के साथ शिशु के विकास पर भी इसका बुरा असर पड़ सकता है। साथ ही इसके अधिक सेवन से गर्भवती महिला के शरीर में आयरन की कमी हो सकती है जिसके कारण प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को एनीमिया जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

अंकुरित सब्जियां

कुछ सब्जियां जिनके रखे रहने पर उन पर अंकुर निकल आते हैं जैसे की आलू, आदि उन सब्जियों के सेवन से भी परहेज करना चाहिए। क्योंकि ऐसी सब्जियों पर हानिकारक बैक्टेरिया का जमाव होने लगता है जिसके कारण महिला को इन्फेक्शन जैसी समस्या हो सकती है। साथ ही स्प्राउट आदि का सेवन भी प्रेगनेंसी के दौरान अधिक नहीं करना चाहिए।

ड्रमस्टिक

गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान ड्रमस्टिक का सेवन करते समय थोड़ा ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि इसमें मौजूद अल्फा सिटोस्टेरोल गर्भवती महिला के लिए हानिकारक हो सकता है। इसके साथ ड्रमस्टिक आयरन, पोटैशियम और विटामिन से भरपूर होते हैं। इसलिए गर्भवती महिला सीमित मात्रा में इसका सेवन कर सकती है। इसके अलावा किसी भी बैक्टीरिया और कीटनाशकों से होने वाले इन्फेक्शन से बचाव के लिए इनका सेवन करने से पहले इन्हे ठीक से धोना आवश्यक है।

मरकरी युक्त फिश

गर्भवती महिला के लिए फिश का सेवन करना फायदेमंद होता है, लेकिन गर्भवती महिलाएं मछली को किंग मैकरेल, ऑरेंज रफ, मार्लिन, शार्क, टाइलफिश, स्वोर्डफ़िश, बिगेय, ट्यूना जैसी उच्च मर्करी युक्त फिश का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसके सेवनसे गर्भ में पल रहे शिशु के विकासशील मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के विकास पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

बिना धुली, बासी, ठंडी सब्जियां

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को पोषक तत्व से भरपूर सब्जियां खाने के साथ ताजा व् संतुलित खाने की सलाह दी जाती है। ऐसे में गर्भवती महिला को बासी, फ्रिज में रखी ठंडी, बिना ढकी पड़ी सब्जी, बिना धुली हुई सब्जियों के सेवन से परहेज करना चाहिए। क्योंकि ऐसी सब्जियों का सेवन करने से गर्भवती महिला को न तो पोषक तत्व मिलते है, साथ ही पेट में इन्फेक्शन या पेट से जुडी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है ऐसे में जितना हो सके गर्भवती महिला को इन सब्जियों से परहेज करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ सब्जियां जिनका सेवन गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए, क्योंकि इन सब्जियों का सेवन करने से गर्भवती महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला को पोषक तत्वों से युक्त आहार का सेवन करना चाहिए जिससे गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी में जोड़ो में दर्द होने के कारण व् उपाय

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में बहुत से हार्मोनल बदलाव होते है, शारीरिक बदलाव होते हैं, प्रेगनेंसी के आगे बढ़ने के साथ वजन में भी बढ़ोतरी होती है, आदि। ऐसे में गर्भवती महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है जिसमे से बॉडी पार्ट्स में पेन होना बहुत आम बात होती है। बॉडी पार्ट्स के साथ गर्भवती महिला को जॉइंट पेन की समस्या भी हो सकती है। जिसके कारण गर्भवती महिला को बहुत ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। तो आइये अब जानते हैं की गर्भवती महिला को जॉइंट पेन होने के क्या कारण होते हैं और किस तरह प्रेग्नेंट महिला इस परेशानी से निजात पा सकती है।

गर्भावस्था में जोड़ो में दर्द होने के कारण

  • वजन बढ़ने के कारण घुटनों, एड़ियों आदि पर दबाव ज्यादा पड़ता है जिसकी वजह से जोड़ो में दर्द अधिक महसूस होता है।
  • शरीर में पानी की कमी होने के कारण भी जोड़ो में दर्द की समस्या होती है।
  • प्रेग्नेंट महिला यदि नमक का सेवन अधिक करती है तो इसकी वजह से भी जोड़ो में दर्द की समस्या होती है।
  • गर्भवती महिलाएं यदि खुद को फिट रखने के लिए ज्यादा व्यायाम करती है तो इसकी वजह से भी जॉइंट पेन की समस्या होती है।
  • भारी वजन उठाने के कारण, ज्यादा देर एक ही जगह पर खड़े रहने की वजह से भी यह परेशानी हो सकती है।
  • प्रेग्नेंट महिला यदि लौ ब्लड प्रैशर की समस्या से परेशान रहती है तो भी महिला को यह परेशानी हो सकती है।
  • गर्भवती महिला यदि किसी शारीरिक बीमारी जैसे की थायरॉयड आदि से पीड़ित है तो भी प्रेग्नेंट महिला को यह समस्या हो सकती है।

गर्भावस्था में जॉइंट पेन से निजात पाने के आसान टिप्स

यदि गर्भवती महिला को जॉइंट पेन की समस्या अधिक हो तो है तो कुछ आसान तरीको का इस्तेमाल करने से गर्भवती महिला इस परेशानी से निजात पा सकती है। तो आइये अब जानते हैं की वो टिप्स कौन से हैं।

मालिश

किसी भी तेल को थोड़ा गुनगुना करके रोजाना रात को सोने से पहले मालिश करें ऐसा करने से आपको इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

सिकाई

हीटिंग पैड, नमक गर्म करके, पानी की बोतल में गर्म पानी डालकर या किसी भी अन्य तरीके से जोड़ो की सिकाई करें। ऐसा करने से भी जोड़ो में दर्द की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

हल्का व्यायाम

जॉइंट पेन से आराम के लिए गर्भवती महिला को थोड़ा बहुत व्यायाम करना चाहिए, क्योंकि व्यायाम करने से मांसपेशियां रिलैक्स रहती है। बॉडी में ब्लड फ्लो बेहतर तरीके से होता है, जिससे गर्भवती महिला को जॉइंट पेन से राहत मिलती है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें की ज्यादा व्यायाम न करें।

कैल्शियम युक्त आहार

जोड़ो में दर्द की समस्या से राहत के लिए गर्भवती महिला को कैल्शियम युक्त आहार का सेवन करना चाहिए। जैसे की दूध व् दूध से बने उत्पाद, क्योंकि दूध व् दूध से बने उत्पाद का सेवन करने से हड्डियों को मजबूत रहने में मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को जोड़ो में दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

पोषक तत्वों से भरपूर आहार

गर्भवती महिला को पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए। क्योंकि पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करने से बॉडी को फिट रहने में मदद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला को जॉइंट पेन व् शरीर में दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

भरपूर आराम

गर्भावस्था के दौरान महिला को बहुत जल्दी थकावट महसूस होती है ऐसे में थकावट अधिक महसूस होने के कारण भी जॉइंट पेन की समस्या हो जाती है। ऐसे में जॉइंट पेन से राहत के लिए गर्भवती महिला को भरपूर आराम करना चाहिए।

पानी का भरपूर सेवन

गर्भवती महिला को पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए क्योंकि पानी का भरपूर सेवन करने से बॉडी हाइड्रेट रहती है जिससे गर्भवती महिला को इस परेशानी से बचने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ उपाय जिनकी मदद से प्रेग्नेंट महिला को जॉइंट पेन की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है। ऐसे में यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और आपको भी यह समस्या है तो आप भी इस परेशानी से निजात पाने के लिए इन आसान तरीको का इस्तेमाल कर सकते हैं।

सांवलेपन से छुटकारा पाने के उपाय!

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गोरा और खूबसूरत दिखना हर किसी की चाह होती है फिर चाहे वो लड़का हो या लड़की। लेकिन आजकल के समय में अपनी खूबसूरती को बरकरार रख पाना काफी मुश्किल होता है। जहा एक तरफ प्रदुषण भरे वातावरण से स्किन का गोरापन छीन लेता है वहीं दूसरी तरफ केमिकल युक्त कॉस्मेटिक स्किन संबंधी परेशानियों को बढ़ाने का काम करती है। ऐसे में गोरी स्किन पाना बेहद मुश्किल हो जाता है।

ऐसे तो बाजार में बहुत सी क्रीम्स मौजूद है जो सांवलेपन को दूर करने का दावा करती है लेकिन उनमे से केवल कुछ को छोड़कर अन्य सभी इस कार्य में असमर्थ रहते है। साथ ही, बहुत सी स्किन प्रॉब्लम भी दे जाती है। लेकिन क्या आप जानती है की इनके अलावा भी कुछ उपाय है जिनकी मदद से आप सांवली स्किन से छुटकारा पा सकते है।

जी हां, हम बात कर रहे है घरेलू उपायों की जिनकी मदद से बिना अधिक पैसे खर्च किये आप अपने सांवलेपन से छुटकारा पा सकते है। पहले के समय में इस तरह की क्रीम्स नहीं हुआ करती थी तब लोग घरेलू उपायों का प्रयोग करके ही अपनी त्वचा को निखारते थे। लेकिन आज के समय में लोग इन उपायों के बारे में नहीं जानते। इसीलिए आज हम आपको साँवलेपन से छुटकारा पाने के कुछ घरेलू उपायों के बारे में बताने जा रहे है। जो आपकी इस समस्या को दूर करने में आपकी मदद करेंगे।

सांवलेपन से छुटकारा पाने के घरेलू उपाय :-

1. शहद :

शहद त्वचा के लिए ब्लीच का काम करता है। और इसमें मौजूद एंटी बैक्टीरियल गुण त्वचा को बैक्टीरिया से बचाने में मदद करते है। इसके अलावा यह त्वचा को मॉइस्चराइज़ करने में भी मदद करता है। प्रयोग के लिए शहद को त्वचा पर लगाएं और पांच मिनट तक लगे रहने दें। कुछ देर बाद गुनगुने पानी से चेहरा साफ़ कर लें। लम्बे समय तक लगातार प्रयोग से समस्या दूर हो जाएगी।

2. दही :

दही में लैक्टिक एसिड पाया जाता है को स्किन के लिए नेचुरल ब्लीच का काम करता है। अगर आप भी सांवली त्वचा से निजात पाने के लिए ढेरों क्रीम्स का इस्तेमाल करके थक चुके है तो एक बार दही का इस्तेमाल करके देखे। प्रयोग के लिए दही को हाथों में लेकर उससे चेहरे की मसाजकरें। कुछ देर मसाज करने के बाद हलके गुनगुने पानी से चेहरा साफ़ कर लें। कुछ ही दिनों में आपका सांवलापन दूर हो जाएगा।

3. पपीता :

पपीते खाने में तो बड़ा स्वादिष्ट होता है लेकिन क्या आप जानते है की इसकी मदद से सांवली त्वचा से भी छुटकारा पाया जा सकता है। जी हां, पपीते में भी नेचुरल ब्लीच के गुण होते है जो त्वचा की रंगत को निखारने में मदद करते है। सांवली स्किन से छुटकारा पाने के लिए पपीते का एक टुकड़ा काटकर उसे चेहरे पर अच्छे से मलें। 2 से 3 मिनट के बाद चेहरा धोकर साफ़ कर लें। फर्क आप खुद महसूस करेंगे।

4. नींबू :potato lemon

नींबू बेहद लाभकारी और गुणकारी फल है जिसकी जितनी तारीफ़ की जाए उतनी कम है। एंटी ऑक्सीडेंट से लेकर एंटी एजिंग और ब्लीचिंग सभी गुण इस छोटे से फल में पाए जाते है। प्रयोग के लिए नींबू के कुछ बूंद रुई में लेकर चेहरे पर लगाएं। आप चाहे तो सीधे नींबू को भी अपनी त्वचा पर रगड़ सकते है। पांच मिनट बाद चेहरे को ठंडे पानी से धो लें। कुछ ही दिनों में फर्क दिखने लगेगा।

5. हल्दी :haldi mask

हल्दी में एंटी बैक्टीरियल गुण होने के साथ साथ कई औषधीय गुण भी पाए जाते है जो त्वचा की छोटी समस्या से लेकर बड़ी समस्या सभी में बेहद लाभकारी होते है। इसके अलावा यह स्किन टोन को निखारने में भी मदद करती है। प्रयोग के लिए हल्दी में कुछ बूंद दूध मिलाकर अपने चेहरे पर लगाएं। लेप के सूखने तक लगाएं रखें और उसके बाद चेहरा साफ़ कर लें। आप चाहे तो इसमें बेसन भी मिला सकते है।

6. टमाटर :tomato scrub

टमाटर भी त्वचा की रंगत निखारने में मदद करता है। इसमें मौजूद विटामिन सी स्किन की रंगत को संवारने में मदद करता है। इसके लिए टमाटर को पीसकर उसका पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट में नींबू को दो बूंद डालकर चेहरे पर लगाएं। जब तक नींबू का रस सूखे नहीं पेस्ट को लगाएं रखें। उसके बाद चेहरा पाने से धो लें। नियमित इस्तेमाल से त्वचा की रंगत और चमक बढ़ेगी।

नाक की बनावट को ठीक करने के तरीके

चेहरे की ख़ूबसूरती को बढ़ाने में हमारे चेहरे का हर एक पार्ट बहुत अहम भूमिका निभाता है। फिर चाहे वो आँख हो, होंठ हो, दांत हो, नाक हो, आदि। जैसे की कई बार पलके छोटी होने के कारण चेहरे की ख़ूबसूरती कम हो जाती है तो होंठों के काले पड़ने के कारण चेहरे की ख़ूबसूरती कम होने लगती है, तो कुछ लोगो की नाक सही शेप में न होने के कारण चेहरे की सुंदरता थोड़ी फीकी हो जाती है।

तो आज इस आर्टिकल में हम आपको आपकी नाक के बारे में कुछ टिप्स बताने का रहे हैं की आप उसकी बनावट को आप कैसे ठीक कर सकते हैं। नाक की बनावट को ठीक करने के लिए कुछ लोग मेकअप का सहारा लेता हैं तो कुछ सर्जरी करवाते हैं। लेकिन आज हम कुछ ऐसे छोटे छोटे टिप्स बताएंगे जिन्हे डेली ट्राई करने से आपकी नाक की बनावट को सही करने में मदद मिलेगी।

नाक को दोनों तरफ से दबाएं

अपनी उँगलियों की मदद से अपनी नाक को दोनों तरफ से दबाएं और उँगलियों को आगे की तरफ ले जाएँ ऐसा बार बार करें और जब भी आपको टाइम मिलें करते रहे। ऐसा करने से आपकी नाक को परफेक्ट शेप में आने में मदद मिलेगी।

साँसों से जुड़ा व्यायाम

साँसों से जुड़े व्यायाम के लिए पहले अपनी नाक के एक तरफ के छेद को बंद करें और दूसरी तरफ यानी जहां पर नाक का छेद खुला है वहां से सांस लें। उसके बाद जहां से सांस ली है उस छेद को बंद कर दें और जो बंद छेद था वहां से सांस छोड़ दें। ऐसा रोजाना सुबह शाम थोड़ी देर करें। ऐसा करने से भी आपकी नाक को शेप में लाने में फायदा होता है।

नाक को घुमाएं

अपनी नाक को पकड़कर दाई से बाईं और बाईं से दाईं और जल्दी जल्दी घुमाएं। साथ ही बार बार नाक के छेदों को खोलें और बंद करें। ऐसा रोजाना करें धीरे धीरे आपकी नाक शेप में आने लगेगी।

मसाज करें

किसी तेल या क्रीम को लेकर रोजाना अपनी नाक की मालिश करें मालिश करने से आपकी नाक को शेप में आने में मदद मिलेगी। साथ ही साइनस और माइग्रेन जैसी परेशानी से भी बचाव होगा।

नाक को ऊपर नीचे करें

अपनी ऊँगली को नाक के नीचे लगाकर ऊपर नीचे करें थोड़ा आराम से करें की कहीं आपको दर्द न शुरू हो जाये। ऐसा जब भी आपको समय लगे तब करें ऐसा करने से आपकी नाक को शेप में आने में मदद मिलेगी।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनसे नाक की शेप को सही बने रहने में मदद मिलती है। लेकिन ध्यान रखें की छोटे बच्चों की हड्डियों और मांसपेशियां बहुत नाजुक होती है इसीलिए उन्हें जल्दी शेप में लाने में मदद मिलती है। लेकिन उम्र के साथ मांसपेशियों और हड्डी में फ़र्क़ आता है। ऐसे में धैर्य रखें धीरे धीरे आपको भी इन टिप्स का फायदा जरूर मिलेगा और एक दिन में इसका असर नहीं दिखाई देगा। बल्कि नियमित रूप से इन इन टिप्स को फॉलो करने पर ही आपको बेहतरीन परिणाम मिलेगा।

Tips to get Sharp Nose

प्रेगनेंसी खत्म करने की दवाई

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प्रेगनेंसी हर समय ख़ुशी ही नहीं देती है क्योंकि कई बार कपल नहीं चाहता है की बच्चा जन्म लें, लेकिन बिना सुरक्षा के सम्बन्ध बनाने के कारण महिला का गर्भ ठहर जाता है। ऐसे में अनचाहे गर्भ को गिराने के लिए महिला तरह तरह के घरेलू तरीको का इस्तेमाल करती है। लेकिन यदि गर्भ दो महीने तक का हो जाता है तो ऐसे में महिला को बिल्कुल भी रिस्क न लेते हुए गर्भपात करने के लिए दवाई का सेवन करना चाहिए, इस फिर डॉक्टर से राय लेनी चाहिए। क्योंकि यदि गर्भ ज्यादा समय का हो जाता है तो उसके बाद गर्भपात करने में महिला को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है।

गर्भपात करने का सही समय कौन सा होता है

यदि आप बच्चे को जन्म नहीं देना चाहते हैं तो तीन महीने पूरे होने से पहले ही आपको अपना गर्भपात करवा लेना चाहिए। क्योंकि गर्भ ज्यादा समय का होने पर गर्भपात में परेशानी होने चांस बढ़ जाते हैं। और पीरियड्स लेट होने के दस से पंद्रह दिन के बाद ही आपको पता चल जाता है, की आप गर्भवती हैं या नहीं और यदि आप इससे निजात पाना चाहते हैं तो आप घर में ही आसानी से घरेलू तरीको का इस्तेमाल करके इससे निजात पा सकते हैं। लेकिन यदि गर्भ यदि ज्यादा दिन का होता है तो इसके लिए आपको एक बार डॉक्टर से ही परामर्श लेना चाहिए।

गर्भपात करने के तरीके

आज हम आपको गर्भपात करने के एक ऐसे तरीके के बारे में बताने जा रहें है जो की गर्भपात करने में 99% तक असरदार होता है। तो आइये जानते हैं गर्भपात करने का वो तरीका कौन सा है।

एम टी पी किट का उपयोग करें

गर्भपात करने की किट जिसे की एम टी पी किट कहा जाता है। उसमे दो तरह की मेडिसिन मिफेप्रिस्टोन और मिसोप्रोस्टोल होती है इसके इस्तेमाल के लिए सबसे पहले आपको मिफेप्रिस्टोन 200 mg की एक टेबलेट को निगल लें। ज्यादातर महिलाओं को इस गोली को लेने के बाद ज्यादा फ़र्क़ नहीं महसूस होता है। और इसे लेने के बाद हल्की ब्लीडिंग हो सकती। उसके बाद आप 24-48 घंटो के बाद मिसोप्रोस्टोल जो की 200 mcg की 4 गोलियाँ होती है उन्हें लें। और इन्हे पहली गोली लेने के 24-48 घंटो के बीच किसी भी समय लें, यदि आप इससे पहले या बाद में इस दवाई का सेवन करती है तो हो सकता है यह असर न करें। इन गोलियों को लेने के दो तरीके होते हैं या तो आप इनका सेवन करें या फिर आप आप अपने प्राइवेट पार्ट में इनका उपयोग करें।

एम टी पी किट लेने के बात इन बातों का ध्यान रखें

  • पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करें।
  • दवाई लेने के बाद हल्का भोजन करें आपको आराम मिलेगा।
  • दवाई का सेवन करने के बाद आराम भरपूर करें।
  • एक बार डॉक्टर से जरूर चेक करवाएं।

डॉक्टर से राय लें

यदि आपका गर्भ दो महीने से ऊपर का है तो आपको डॉक्टर की राय लेनी चाहिए, क्योंकि यदि आप घर पर गर्भपात करते हैं तो गर्भाशय में टिश्यू रहने का खतरा होता है। जिसके कारण बाद में आपको गर्भधारण करने में परेशानी हो सकती है, साथ ही इसके कारण पेट में दर्द की समस्या भी रहने लगती है।

तो यह हैं गर्भपात करने का सबसे सही तरीका जो की आसान होने के साथ असरदार भी है, और गर्भपात करने के बाद आपको ज्यादा ब्लीडिंग जैसी समस्या का सामना करने के साथ मासिक धर्म के अनियमित होने की परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है। ऐसे में ब्लीडिंग बंद होने के बाद भी आप चाहे तो एक बार डॉक्टर से राय ले सकते हैं।

ब्रैस्ट में दर्द होने के क्या क्या कारण होते हैं

ब्रैस्ट पेन एक आम समस्या होती है जो की महिला को पीरियड्स के दौरान, प्रेगनेंसी के दौरान, ज्यादा कैफीन के सेवन, आदि के कारण होना आम बात होती है। लेकिन स्तन में होने वाले दर्द को ज्यादा समय तक अनदेखा भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि कई बार यह ब्रैस्ट कैंसर, या ब्रैस्ट में सूजन होने के कारण भी हो सकता है। लेकिन ब्रैस्ट में हमेशा पेन का कारण ब्रैस्ट कैंसर हो यह भी सही नहीं है।

ब्रैस्ट में होने वाला दर्द कई बार असहनीय होता है, लेकिन यदि यह दर्द आपको पीरियड्स के दौरान होता है तो पीरियड्स के बाद इससे आपको निजात भी मिल जाता है। इसकी समस्या होने के एक कारण महिलाओ का अपने ब्रैस्ट के लिए सही ब्रा का चुनाव न करना भी हो सकता है। ऐसे ही बहुत से कारण होते है। तो आइये आज हम आपको विस्तार से बताते हैं की ब्रैस्ट में पेन होने के क्या क्या कारण होते है।

ब्रैस्ट पेन के कारण:-

ज्यादा व्यायाम करने के कारण:-

अधिक व्यायाम करने से भी आपके शरीर के उत्तको में खिंचाव पड़ता है, जिसके कारण आपको दर्द का अनुभव हो सकता है। भारी स्तन वाली महिलाओ को ये परेशानी अधिक होती है, इसीलिए व्यायाम करने के साथ आपको अपनी डाइट का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि आपको ऐसी किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े।

फिटिंग की ब्रा न पहनने के कारण:-

महिलाओ को अपने ब्रैस्ट शेप को सही रखने के लिए अपने साइज की ब्रा पहननी चाहिए, यदि महिलाएं अपने साइज की ब्रा नहीं पहनती हैं, तो इसके कारण न केवल महिलाओ का ब्रैस्ट शेप ख़राब होता है, बल्कि टाइट ब्रा पहनने के कारण मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है जिसके कारण ब्रैस्ट में पेन की समस्या हो सकती है।

स्तन अल्सर के कारण:-

ब्रैस्ट में कई बार अंगूर के साइज जितनी थैलियों में तरल पदार्थ सा भर जाता है, जिसके कारण महिला को ब्रैस्ट पेन का अनुभव हो सकता है। ज्यादातर महिलाओ में यह समस्या मेनोपॉज़ होने के बाद देखी जाती है।

ज्यादा मात्रा में कैफीन का सेवन करने पर:-

जो महिलाएं ज्यादा मात्रा में चाय, कॉफ़ी, सोडा, चॉकलेट, कैफीन युक्त पदार्थो का सेवन करती है। उसके कारण धीरे धीरे उनकी रक्त वाहिकाओं में खिंचाव होने लगता है, जिसके कारण महिला को ब्रैस्ट में दर्द की समस्या का सामना करना पड़ सकता है, इसीलिए महिलाओ को अधिक मात्रा में कैफीन के सेवन से परहेज करना चाहिए।

दवाइयों के कारण:-

जिन दवाइयों के मुख्य घटक एस्ट्रोजन, और प्रोजेस्ट्रोन होते हैं, उनके सेवन से महिलाओ को ब्रैस्ट पेन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। यह घटक खासकर जन्म नियंत्रण वाली दवाइयों और हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थैरेपी की दवाइयों में अधिक होता है। इसीलिए इन दवाइयों के सेवन को अधिक मात्रा में करने से बचना चाहिए।

हार्मोनल बदलाव के कारण:-

मासिक धर्म के दौरान, प्रेगनेंसी के समय, मेनोपॉज़ के बाद, शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण, स्तनों में दर्दम सूजन, व् भारीपन का महसूस होना आम बात होती है। और इन सबके खत्म होने के बाद आपको इस दर्द से भी राहत मिल जाती है, लेकिन यदि आपको हमेशा ही ऐसा दर्द रहता है तो इस बारे में आपको अपने डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

चोट लगने के कारण:-

यदि आपको ब्रैस्ट पर कोई चोट, या दाना आदि निकला हुआ है, तो इसके कारण भी ब्रैस्ट की स्किन प्रभावित होती है। जिसके कारण ब्रैस्ट में पेन होना आम बात होती है। आपकी चोट ठीक होने पर आपको इस दर्द से राहत मिलने में मदद मिलती है।

ब्रैस्ट में गाँठ होने पर:-

कई बार ब्रैस्ट में सूजन, व् स्तन टाइट होने लगता है, और उसमे गाँठ सी प्रतीत होती है। ऐसे में कई लोग इसे कैंसर समझने लगते हैं जो की गलत होता है। यदि आपको गाँठ सी महसूस होती है तो आपको डॉक्टर को चेक करवाना चाहिए। और साथ ही इसे दिखाने में लापरवाही भी नहीं करनी चाहिए।

स्तनपान करवाने के दौरान:-

डिलीवरी के बाद में जब शुरुआत में महिला को स्तनपान करवाने पर भी ब्रैस्ट में दर्द का अहसास हो सकता है। क्योंकि दूध पीने के लिए शिशु स्तन पर खिंचाव डालता है, जिसके कारण शुरुआत में स्तन में दर्द का अनुभव महिला को हो सकता है।

ब्रैस्ट कैंसर होने पर:-

यदि आपको ब्रैस्ट कैंसर की समस्या होती है, तो भी आपको अधिक दर्द की समस्या लगातार बनी रहती है। इसीलिए यदि कभी आपको ब्रैस्ट से जुडी ऐसी कोई परेशानी हो तो बिना देरी किये डॉक्टर से एक बार राय जरूर लेनी चाहिए, ताकि आपकी इस समस्या का समाधान होने में मदद मिल सकें।

यदि आपको ब्रैस्ट पेन की समस्या अधिक होती है तो एक बार आपको डॉक्टर को जरूर चेक करवाना चाहिए। ताकि आपको दर्द का कारण पता चल सके और आप इस समस्या का समाधान कर सकें। लेकिन यदि आप इसे अनदेखा करते हैं तो कई बार यह आपके लिए बड़ी समस्या भी खड़ी कर सकता है।

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