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रोजाना सेब खाने के फायदे जान कर आप भी रह जाएंगे हैरान!

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स्वाद में मिठास से भरपूर और रंग में लाल सेब आपको लगभग पूरा साल बाजार में मिल जाता है, और ज्यादातर लोगो को सेब पसंद भी होता है, परंतु क्या आप जानते है की यदि आप नियमित रूप से रोजाना एक सेब का सेवन करते है, तो इसके कारण आपको कितने फायदे हो सकते है, यदि नहीं तो आइये आज हम आपको बताते है।

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वैसे तो सभी फल खाने से आपको फायदा मिलता है, परंतु यदि आप सेब का नियमित रूप से सेवन करते है तो ये आपके शरीर को स्वस्थ रखने के साथ कई बिमारियों को भी कण्ट्रोल करके रखता है, सेब में इतने गुण होते है, की इस पर इंग्लिश में एक कहावत भी कही गई है की ” रोजाना एक सेब खाएं और डॉक्टर या बीमारियों से दूर रहें” “An apple in a day keeps doctor away”, यदि ऐसा कहा गया है तो जाहिर है की इसमें ऐसे गुण होंगे, तो आइये अब हम आपको विस्तार से बताते है की सेब खाने से आपको कौन कौन से फायदे होते है, और ये भी सच है की यदि आप इसका सेवन नहीं करते है तो इन फायदों को पढ़ने के बाद इसे खाना जरूर शुरू कर देंगें।

डायबीटिज़ के मरीज़ों के लिए होता है फायदेमंद:-

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डायबीटिज़ के मरीजोंके लिए सेब फायदेमंद होता है, क्योंकि सेब में पाए जाने वाला पैक्टिन शरीर में ग्लाक्ट्रोनिक एसिड की कमी पूरी करने में मदद करता है। साथ ही ये शरीर में होने वाले इन्सुलिन के उपयोग को कम करता है। इसलिए डायबिटीज़ के मरीज़ इस फल का सेवन कर सकते है, और ये उनके लिए फायदेमंद भी होता है। लेकिन जब डायबिटीज़ का स्तर गंभीर हो तो सेब का सेवन कम मात्रा में ही करना चाहिए।

शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद करता है:-

यदि आपके शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाएँ, तो इसके कारण आपको एनीमिया की समस्या हो जाती है, ऐसी स्थिति ज्यादा महिलाओ में देखी जाती है, ऐसे में इस समस्या के समाधान के लिए सेब किसी औषधि से कम नहीं होता है, क्योंकि सेब में आयरन की मात्रा भरपूर होती है, जिसके कारण यदि आप सेब का सेवन करते है, तो ये आपके शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने में मदद करता है, इसीलिए यदि आपके शरीर में भी खून की कमी है या एनीमिया की समस्या है तो आपको दिन में दो से तीन सेब का सेवन जरूर करना चाहिए।

आपके शरीर के लिए एनर्जी बूस्टर का काम करता है:-

सेब में प्राकृतिक रूप से ग्लूकोज़ मौजूद होता है, जिसके कारण ये आपके शरीर में ऊर्जा का उत्पादन करता है, और साथ ही ये फेफड़ो के लिए ऑक्सीजन की पूर्ति का काम करने में मदद करता है, इसीलिए यदि आप इसका सेवन सुबह नाश्ते में करते है, तो ये आपको सारा दिन ऊर्जा से भरपूर रखता है, और खास कर बच्चों में एनर्जी को बनाएं रखने के लिए इसका सेवन जरूर करना चाहिए।

पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है:-

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जिन लोगो को पेट से जुडी समस्या जैसे कब्ज़, अपज आदि की समस्या होती है, उनके लिए भी सेब बहुत फायदेमंद होता है, क्योंकि ये आपके पाचन तंत्र को मजबूत करने में मदद करता है, और इसका कारण होता है, की सेब में फाइबर उपरोक्त मात्रा में पाया जाता है, जिसके कारण आपको ये पाचन में मदद करता है, और छिलके के साथ सेब खाने से ये आपके कब्ज़ को दूर कर देता है, इसीलिए अपने पेट को स्वस्थ रखने के लिए आपको इसका सेवन जरूर करना चाहिए।

लीवर को मजबूत करने में मदद करता है:-

लीवर का काम होता है की आपके शरीर की अच्छे से अंदर से सफाई रखना, और आपके शरीर से विषैले पदार्थो को बाहर निकालना जिसके कारण आपके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है, और सेब में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स आपके लिवर को मजबूर रखने में मदद करते है, इसीलिए यदि आप अपने लिवर को मजबूत और अपने शरीर को स्वस्थ रखना चाहते है तो आपको इसका सेवन जरूर करना चाहिए।

अल्जाइमर से बचाव करने में मदद करता है:-

क्या आप सोच सकते है की सेब के सेवन से आपके मस्तिष्क को भी कितना फायदा होता है, रोजाना सेब का सेवन करने से ये आपके मस्तिष्क की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल डैमेज से सुरक्षित रखता है, जो अल्जाइमर का कारण बनती है, इसीलिए आपको खुद भी और बच्चों को भी नियमित रूप से सेब का सेवन जरूर करवाना चाहिए।

इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करता है:-

सेब में क्वरसिटिन नाम का एक एंटीऑक्सिडेंट मौजूद होता है, जो की आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने में मदद करता है, यदि आप रोजाना सेब का सेवन करते है, तो इसके कारण आपका इम्यून सिस्टम दुरुस्त रहता है, जिसके कारण आपको स्वस्थ रहने में मदद मिलती है, और साथ ही आप बिमारियों से भी बचें रहते है।

आपकी हड्डियों और दांतों को मजबूत रखने में मदद करता है:-

यदि आप रोजाना नियमित रूप से सेब का सेवन करते है, तो इसके कारण आपकी हड्डियों को मजबूत और दांतों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है, सेब में मौजूद फ्लेवोनोइड जो आपका ऑस्टियो पिरॉसिस से बचाव करता है, जिसके कारण आपकी हड्डियों को मजबूत रहने में मदद मिलती है,और साथ ही सेब में मौजूद फाइबर आपके दांतों को भी मजबूत रखने में मदद करता है, यदि आप रोजाना इसका सेवन करते है, तो आप भी इससे मिलने वाले फायदों को उठा सकते है।

आपकी त्वचा की चमक को बढ़ाता है:-

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सेब में मौजूद फाइबर आपको फिट रहने में मदद करता है, साथ ही इसके कारण आपकी त्वचा को भी भरपूर पोषण मिलता है, जिसके कारण इसकी चमक को बढ़ाने में मदद मिलती है, और साथ ही यदि आपके शरीर में ब्लड की मात्रा भरपूर हो तो आपके त्वचा का ग्लो वैसे भी बढ़ जाता है, इसीलिए यदि आप भी चाहते है आप अपनी ख़ूबसूरती में निखार ला सकें तो आपको नियमित रूप से सेब का सेवन जरूर करना चाहिए।

तो ये कुछ फायदे है जो आप नियमित रूप से सेब का सेवन करके उठा सकते है, इसीलिए आपको इसका सेवन करना चाहिए क्योंकि ये आपको शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने में मदद करता है, और यदि आप बच्चों को इसका सेवन करवाते है तो इसके कारण बच्चों के स्वास्थ्य को भी बेहतर रहने और उनके विकास में भी मदद मिलती है।

डिलीवरी के बाद वजन घटाने का सुरक्षित तरीका

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किसी भी महिला के लिए माँ बनने का अनुभव इस दुनिया का सबसे प्यारा अहसास होता है। लेकिन डिलीवरी के बाद बढ़ा हुआ वजन भी महिला के लिए परेशानी का कारण होता हैं, ऐसे में डिलीवरी के बाद तुरंत वजन घटाना महिला के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। लेकिन यदि आप चाहे तो आसानी से और सुरक्षित तरीके से अपने वजन को कम कर सकते हैं। लेकिन आपको डिलीवरी के बाद कम से कम दो से तीन हफ्ते बेहतर तरीके से आराम करना चाहिए, ताकि महिला के शरीर में आई कमजोरी को दूर करने में मदद मिल सके। उसके बाद महिला को शिशु की बेहतर केयर करने के साथ अपने शरीर का ध्यान रखते हुए सुरक्षित तरीके से वजन कम करना चाहिए। ताकि न तो शिशु के विकास पर असर पड़े और न ही महिला की सेहत को कोई नुक्सान हो। तो लीजिये आज हम आपको डिलीवरी के बाद महिला के शरीर को शेप में लाने के कुछ ऐसे ही बेहतरीन और सुरक्षित तरीके बताने जा रहें है।

आहार का सेवन करते हुए रखे ध्यान

डिलीवरी के बाद महिला को भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों से युक्त आहार का सेवन करना चाहिए, ताकि शिशु का दूध के जरिये बेहतर विकास करने में मदद मिल सके। लेकिन आहार का सेवन करते हुए ध्यान रखें की आपका खाना ताजा व् संतुलित हो, और बड़े बड़े मील लेने की बजाय छोटे छोटे मील का सेवन करें। ताकि आपको भोजन को पचाने में आसानी हो, और खाना खाने के बाद पानी पीने से बचें। ऐसा करने से आपके शरीर में अतिरिक्त चर्बी का जमाव नहीं होता है।

गुनगुना पानी पिएं

पानी का भरपूर सेवन करने से शरीर में मौजूद विषैले पदार्थो को बाहर निकालने के साथ, शरीर में वसा का जमाव होने से भी रोकता है। ऐसे में आपको दिन में आठ से दस गिलास पानी का सेवन करना चाहिए। साथ ही कोशिश करें की आप दिन में तीन से चार गिलास गरम पानी पीएं, इससे डिलीवरी के बाद आपका वजन कम होने के साथ शरीर को दर्द आदि से आराम भी मिलेगा। खासकर सुबह उठते ही एक या दो गिलास गरम पानी जरूर पीएं, और खाने के आधे घंटे बाद भी इसका सेवन करें।

स्तनपान करवाएं

कुछ महिला ब्रेस्ट शेप खराब होने के डर से शिशु को स्तनपान करवाने से बचती है, लेकिन आपको यह जानकार हैरानी होगी की जन्म के बाद शिशु को स्तनपान करवाने से बॉडी में होने वाली एक्स्ट्रा कैलोरी को बर्न करने में मदद मिलती है। जिससे आपके बढे हुए पेट के साथ शरीर के अतिरिक्त भागों पर जमी चर्बी को भी कम करने में मदद मिलती है। इसीलिए डिलीवरी के बाद वजन आसानी से कम करने के लिए आपको शिशु को स्तनपान जरूर करवाना चाहिए।

वॉक करें

डिलीवरी के बाद तुरंत व्यायाम आदि करना आदि परेशानी बढ़ा सकता है, लेकिन आपको घर में ही थोड़ी देर वॉक जरूर करनी चाहिए। खासकर खाना खाने के दस मिनट बाद दस मिनट के लिए ही वॉक करना भी आपके लिए फायदेमंद होता है। इससे आपका खाना आसानी से पचने के साथ बॉडी में ब्लड फ्लो भी बेहतर होने लगता है जिससे आपको आराम मिलता है, साथ ही आपके शरीर पर एक्स्ट्रा चर्बी का जमाव नहीं होता है।

तनाव न लें

शिशु के जन्म के बाद बॉडी में होने वाले बदलाव, शिशु की जिम्मेवारी आदि की परेशानी होने के कारण कई बार महिलाएं तनाव में आ जाती है। लेकिन यदि महिला तनाव में आ जाती है तो उसकी मुश्किलें कम नहीं होती हैं बल्कि बढ़ जाती है। क्योंकि इससे मोटापा जैसी समस्या बढ़ने लगती है इसीलिए डिलीवरी के बाद महिला को तनाव नहीं लेना चाहिए, बल्कि शिशु के साथ अपने मातृत्व के हसीन लम्हो को एन्जॉय करना चाहिए।

योगासन

ज्यादा कड़ा व्यायाम डिलीवरी के बाद जहां आपकी परेशानी बढ़ा देता है, वहीँ योगासन करने से आप दिमाग को शांति मिलती है। बॉडी को हल्का फुल्का स्ट्रेच करने से आपके शरीर में ब्लड फ्लो को बेहतर करने के साथ आपको बढ़ते वजन की समस्या से निजात दिलाने में भी मदद मिलती है।

पर्याप्त नींद

शिशु के जन्म के बाद एक साथ नींद लेना महिला के लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है, लेकिन फिर भी आपको दिन में आठ घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए। क्योंकि नींद की कमी के कारण आपको स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानी, बढ़ता वजन, तनाव, ऊर्जा की कमी, आदि समस्याएँ हो सकती है। ऐसे में जब भी शिशु सोते है आपको भी चाहिए की आप भी उसके साथ आराम करें और अपनी नींद को भरपूर लें, ताकि आपको बढ़ते वजन की समस्या से निजात पाने में मदद मिल सके।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से आपको डिलीवरी के बाद बढ़ते वजन की समस्या से निजात पाने में मदद मिल सकता है। तो यदि आपकी भी डिलीवरी होने वाली है या हो चुकी है तो आप भी इन टिप्स का इस्तेमाल करके आसानी से इस समस्या से निजात पा सकते हैं।

कोरोना से बचने के क्या-क्या उपाय है?

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आज देश एक बहुत ही बड़ी समस्या से जूझ रहा है। और यह समस्या एक वायरस की वजह से है जिसका नाम कोरोना वायरस है। यह वायरस किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से, आपके ऊपर किसी व्यक्ति द्वारा खांसने या छींकने द्वारा, संक्रमित चीजों को छूने से फ़ैल रहा है। ऐसे में इस वायरस को जड़ से खत्म करने और इस बिमारी से बचे रहने के लिए सरकार द्वारा भी सभी देशवासियों को घर में रहने की सलाह दी जा रही है। ताकि इस शारीरिक परेशानी से जल्द से जल्द निपटने में मदद मिल सके। तो आइये अब कुछ ऐसे टिप्स के बारे में जानते हैं जो आपको कोरोना वायरस से बचे रहने में मदद करते हैं।

हाथों की साफ सफाई: सबसे पहले आप अपने हाथों की साफ़ सफाई का ध्यान रखें। और इसके लिए हर आधे घंटे में चाहे आप कुछ करे या नहीं करें साबुन से अच्छे से हाथ धोएं। हाथ धोने में जल्दबाज़ी नहीं करें बल्कि कम से कम बीस से तीस सेकंड तक हाथ धोएं। हाथों की उँगलियों के बीच में से, हाथों को पीछे से अच्छे से धोएं। इसके अलावा जब भी कहीं बाहर से आएं तो कोहनी तक अपने हाथों को अच्छे से साफ़ करें।

सैनिटाइज़र: अल्कोहल वाले सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करें। अच्छे से हाथों पर हर आधे से एक घंटे के बाद लगाएं। इससे हाथों में मौजूद बैक्टेरिया को खत्म करने में मदद मिलती है।

चेहरे को न छुएं: कोरोना वायरस से बचने के लिए अपने चेहरे को छूने से बचें। और यदि खांसी या छींक आती है तो अपने हाथों को मुँह पर न लगाएं। बल्कि कोहनी को मुँह के आगे रखें।

गर्म पानी: एक दिन में तीन से चार गिलास गुनगुना पानी जरूर पीएं। साथ ही नहाने के लिए भी गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें। क्योंकि गर्म पानी पीने से व् गर्म पानी से नहाने से भी कोरोना वायरस से बचे रहने में मदद मिल सकती है।

दूरी रखें: जितना हो सके बाहर के लोगो के साथ अपने घर के सदस्यों से भी थोड़ा दूर रहकर बात करें। यदि किसी काम से बाहर भी जाना पड़े तो लोगो के बिल्कुल साथ न रहें उनसे दूरी बनाकर रखें।

घर में रहें: कोरोना वायरस से बचने के लिए घर से बाहर न निकलें। जितना हो घर में ही रहे क्योंकि कोरोना वायरस आपके घर में नहीं अपने आप नहीं आएगा। बल्कि आप घर से बाहर जायेंगे तो आपको इस वायरस से संक्रमित होने का खतरा बढ़ जायेगा।

बाहर की चीजों को तुरंत घर में न लाएं: यदि आप बाहर से सब्ज़ी, दूध कुछ भी खरीद कर लाते हैं तो तुरंत उसे घर में न लाएं। बल्कि थोड़ी देर उसे घर के दरवाज़े पर ही छोड़ दें। फिर गर्म पानी से उन चीजों को धोने के बाद ही उनका प्रयोग करें।

अंडा या मीट: कोरोना वायरस से बचने के लिए गलती से भी अंडे या मीट का सेवन नहीं करें। क्योंकि इनके कारण आपको संक्रमण होने का खतरा बढ़ सकता है।

संक्रमित व्यक्ति से दूरी: यदि आपके घर में किसी को भी खांसी, जुखाम या बुखार है तो उसे घर के अलग कमरे में रहने दें। और उसके संपर्क में आने से बचें। उस व्यक्ति को मास्क पहनाएं, डॉक्टर से जांच करवाएं। ताकि किसी भी तरह की परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके।

यदि आप भी कोरोना वायरस से बचना चाहते हैं तो आप भी इन टिप्स का ध्यान रखें। साथ ही इस वायरस से बचने के लिए घर में ही रहें।

होंठ फटने के क्या कारण है?

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हमारी आँखे हो या हमारा चेहरा पर्सनालिटी में चार चाँद लगाने में मदद करता है। उसी प्रकार हमारे होंठ भी पर्सनालिटी को बढ़ाते है, परंतु कई बार होंठो के रूखे सूखे हो जाने के कारण उनमे फटने की समस्या होने लगती है।

वैसे तो अधिकतर ये समस्या सर्दी के समय होती है, लेकिन कई बार होंठो पर हमेशा होंठों पर जीभ लगाने, या फिर उन्हें दांत से काटने, लिप बाम का इस्तेमाल नहीं करने, या मुँह से सांस लेने के कारण भी होंठ फटने लगते है।

जिसका सीधा प्रभाव हमारी पर्सनालिटी पर पड़ता है। अगर आपके साथ भी अक्सर यही समस्या होती है तो पहले इस समस्या के कारण जान लें और आज हम आपको उन्ही कुछ कारणों के बारे में बतायेंगे जिनसे आपके होंठ फटते है।

होंठ फटने के निम्नलिखित कारण हो सकते है :-

1. होंठों को चेतना, चबाना या काटना :

बहुत से लोग होंठों के थोड़ा रुखा होने पर उन्हें चाटकर गीला कर देते है। जब की होंठों पर जीभ फिराने से थोड़ी देर बाद वे फिर से रूखे होने लगते है। और उन्हें फिर से नम करने की इच्छा होती है। जिसके बाद फिर से जीभ लगाते है। और यही प्रक्रिया काफी समय तक चलती रहती है। लेकिन बता दें इससे समस्या खत्म नहीं होती बल्कि होंठ और अधिक रूखे और बेजान हो जाते है। इसीलिए ऐसा कतई न करें।

2. धुप से बचाव :

यह पढ़े : फटे होंठों का इलाज

सूरज की तेज किरणे और गर्मियों में चलने वाली गर्म हवाएं होंठों से नमी सोख लेती है। जिससे होंठ रूखे हो जाते है। चेहरे पर तो सभी लोशन आदि का इस्तेमाल करते है लेकिन लिप्स के बारे में कोई नहीं सोचता। जिसके कारण उन्हें नमी नहीं मिल पाती और वे रूखे होने लगते है। तो अगली बार जब बाहर जाए तो होंठों पर भी लोशन और सनस्क्रीन लगाना न भूलें।

3. मुंह से साँस लेना :फटे होंठो को मुलायम करने की टिप्स

बहुत से लोगो अक्सर मुंह से साँस लेते है। हां, कई बार ये मज़बूरी हो सकती है। लेकिन बार बार इसे दोहराना आपकी आदत का संकेत है। क्योंकि जब हम मुंह से साँस लेते है तो हवा होंठों पर से गुजरती है जिससे वे उनसे नमी छीन लेती है और होंठ बेजान होकर फटने लगते है। वैसे ये समस्या अधिकतर खर्राटे लेने वालों में अधिक देखने को मिलती है। इसलिए अपनी इस आदत को बदले और मुंह से साँस लेना छोड़ दें।

4. खाद्य पदार्थ :

इनके अलावा भी हमारे मुंह के सम्पर्क में आने वाली ऐसी बहुत सी चीजें होती है जिनके कारण होंठों में सूखापन आ सकता है। टूथपेस्ट भी उन्ही में से एक है। अगर आपको लगता है की टूथपेस्ट में गड़बड़ है तो आप उसे बदल सकते है। साथ ही खट्टे फलों के सेवन से भी यह समस्या हो सकती है। टमाटर की चटनी, च्वेइंग गम, कैंडी का सेवन करने से भी होंठों में सूखापन आ सकता है।

5. पानी की कमी :

कई बार शरीर में आई पानी की कमी के कारण भी होंठ सूखने लगते है। अगर आपके होंठ बहुत अधिक सुख रहे है तो समझ लें की आपके शरीर में पाने की कमी है। इस स्थिति में धुप और हवा रूखेपन को बढ़ाने में मदद करती है। गर्मियों के मौसम में पानी की कम की कमी के कारण होंठ फटने की समस्या सबसे अधिक होती है।

6. विटामिन की कमी :

विटामिन बी की कमी के कारण भी होंठ सूखने और फटने की समस्या हो सकती है। इसके अलावा आयरन और फोलेट की कमी की वजह से भी यह समस्या हो सकता है। ऐसे में डॉक्टरी सलाह से इलाज करवाना बेहतर होता है। अगर आपको लगता है की होंठ बहुत अधिक सुख रहे है और स्वयं इलाज संभव नहीं तो एक बार डॉक्टर के पास जरूर जाए।

इसे भी पढ़े : होंठों की खूबसूरती बढ़ाने के तरीके

7. एलर्जी :

कई बार मुलती विटामिन के अन्य तत्वों के कारण एलर्जी हो जाती है जिससे होंठ सूखने या फटने की समस्या हो सकती है। लिपस्टिक उन एलर्जी के कारणों में से एक है। साथ ही जिन खानों में रंगों का इस्तेमाल किया जाता है वे भी इसके जिम्मेदार है।

8. बिमारी और दवाएं :

थायराइड , सिरोसिस , डायबिटीज आदि बीमारियों के होने से होंठ फटने की समस्या हो सकती है। कुछ अन्य बीमारी के कारण भी होंठ फटना या उनमे जलन सूजन आदि हो सकते है। कभी कभी कुछ दवाएं जैसे झुर्रियों या एक्ने , ब्लड प्रेशर आदि की दवा के कारण भी होंठ सूख कर फटने लगते है । यदि लंबे समय तक इस प्रकार की परेशानी बनी रहे तो डॉक्टर से परामर्श जरूर कर लेना चाहिए।

प्रेगनेंसी में खुजली हो तो क्या करें

प्रेगनेंसी में खुजली

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, जैसे की उल्टियां, बॉडी पेन, सिर दर्द व् चक्कर, पेट में दर्द, जीभ के स्वाद में परिवर्तन, मूड में बदलाव आदि। और इन सभी परेशानियों का कारण बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव हो सकते हैं, और इन्ही हार्मोनल बदलाव के कारण कुछ गर्भवती महिलाएं स्किन से जुडी समस्या का सामना भी कर सकती है, जैसे की कुछ गर्भवती महिलाओं को खुजली की समस्या हो सकती है। प्रेगनेंसी के दौरान खुजली होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे की बॉडी का डीहाइड्रेट होना, स्किन की केयर न करना, एलर्जी के कारण, संक्रमण के कारण, बॉडी में ब्लड फ्लो के तेजी से होने के कारण, आदि। ऐसे में यदि महिला को खुजली के साथ स्किन पर छोटे छोटे दाने निकलने लगे तो एक बार डॉक्टर को चेक करवाना चाहिए, ताकि एलर्जी की समस्या के कारण होने वाली परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी में खुजली होने पर इन टिप्स का इस्तेमाल करें

यदि आप गर्भवती हैं, और प्रेगनेंसी के दौरान आपको भी खुजली की समस्या है तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए, क्योंकि अधिक खुजली का होना भी संक्रमण का कारण हो सकता है। तो लीजिये आज हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान खुजली की समस्या से बचने के कुछ आसान टिप्स बताने जा रहे हैं।

एलोवेरा जैल

स्किन को मॉइस्चराइज करने के लिए, स्किन की कोमलता और ख़ूबसूरती को बरकरार रखने के साथ स्किन पर दाने, खुजली जैसी समस्या से निजात पाने के लिए भी एलोवेरा जैल का इस्तेमाल करना एक आसान और असरदार विकल्प है। इसके इस्तेमाल के लिए दिन में दो बार उस जगह पर एलोवेरा जैल को लगाकर छोड़ दें, जहां आपको खुजली की समस्या होती है। आपको बहुत जल्दी इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलेगी।

नारियल तेल

एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर नारियल के तेल का इस्तेमाल करने से भी गर्भवती महिला को खुजली की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप रात को सोने से पहले अपने हाथ, पैर या जिस बॉडी पार्ट पर खुजली की समस्या होती है वहां पर नारियल तेल की हल्की मसाज करके छोड़ दें, इससे स्किन को पोषण मिलने के साथ खुजली की समस्या से बचने में फायदा मिलता है।

बर्फ की सिकाई

एक बर्तन में आइस क्यूब डालकर थोड़ा पानी डाल दें, अब उसमे कॉटन यानी सूती कपडे को डालकर हल्का निचोड़ लें। ऐसा करने के बाद उस कपडे को उस जगह पर रखें जहां पर खुजली हो रही है तुरंत आपको इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

सेब का सिरका

सेब के सिरके में पानी मिलाकर खुजली वाले अंग को अच्छे से साफ करें, और ऐसा दिन में दो से तीन बार करें। इस तरीके का इस्तेमाल करने से भी गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली खुजली की परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

बेकिंग सोडा

नहाने के पानी में एक या दो चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर नहाएं ऐसा करने से भी खुजली की समस्या से आराम पाने में मदद मिलती है। और यदि किसी एक अंग पर खुजली की समस्या अधिक होती है तो पानी में बेकिंग सोडा मिलाकर उसका पेस्ट उस जगह पर लगाएं, और थोडी देर बाद उसे साफ़ कर दें। इस उपाय का इस्तेमाल करने से भी खुजली की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

लोशन

स्किन के रूखे पड़ने के कारण भी गर्भवती महिला को इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला को इस परेशानी से बचने के लिए और स्किन की कोमलता को बरकरार रखने के लिए प्रेगनेंसी के दौरान स्किन पर लोशन या मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके।

पानी

बॉडी में डीहाइड्रेशन की समस्या होने के कारण भी गर्भवती महिला को खुजली की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए गर्भवती महिला को पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए ताकि बॉडी हाइड्रेटेड रहे। और गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान खुजली की समस्या से बचे रहने और बॉडी में पानी की कमी के कारण होने वाली परेशानी का सामना न करने पड़े।

कपड़ो का ध्यान रखें

गर्भवती महिला यदि ऐसे कपडे पहनती है जो बहुत टाइट या चुभने वाले होते हैं, तो इसके कारण भी गर्भवती महिला को खुजली का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए प्रेग्नेंट महिला को खुले, सूती कपडे पहनने चाहिए जिससे महिला को आरामदायक मसहूस हो और खुजली जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके।

ठन्डे पानी से नहाएं

कई बार थकान महसूस होने के कारण, या बॉडी पेन की समस्या होने के कारण महिला का गुनगुने पानी से नहाने का मन कर सकता है। ऐसे में महिला को ऐसा करने से बचना चाहिए खासकर गर्मियों में, क्योंकि इससे स्किन का रूखापन बढ़ सकता है जिसके कारण गर्भवती महिला को खुजली जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ आसान तरीके जो प्रेगनेंसी के दौरान खुजली की समस्या से बचने में आपकी मदद करते हैं। तो यदि आप भी प्रेगनेंसी के दौरान खुजली की समस्या से परेशान हैं तो ऊपर दिए गए आसान टिप्स का इस्तेमाल करके आसानी से इस समस्या से निजात पा सकती है।

18 साल उम्र के बाद वजन बढ़ाने के तरीके

Tips for Weight Gain After 18 years

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आज के समय में लड़कियां खुद को स्लिम ट्रिम रखना पसंद करती है। फिर चाहे उसके लिए उन्हें कितना ही स्ट्रगल क्यों न करना पड़े? खाना खाने से लेकर स्वास्थ्यवर्धक चीजें सभी को वे यही सोचकर त्याग देती है की इन्हे खाने से उनका वजन बढ़ सकता है। लेकिन इसके विपरीत कुछ लड़कियां ऐसी भी है जो चाहे कुछ भी खा लें उनका वजन बढ़ता ही नहीं। ज्यों का त्यों ही रहता है। उन्हें समझ ही नही आता की उनके द्वारा खाया जाने वाले खाना आखिर जा कहाँ रहा है?

माना आजकल जीरो साइज सबको पसंद आता है लेकिन अगर आपका जीरो साइज आपके शरीर की हड्डियों को साफ़-साफ़ दिखाता है तो यह किसी को भी अच्छा नहीं लगेगा। पतला होना अच्छा है लेकिन हद से ज्यादा पतला होना न माता पिता को अच्छा लगता है और न ही आपके रिश्तेदारों को।weight gain

इसके अलावा ये शरीर आपके दैनिक कार्यों में भी काफी बाधाएं उत्पन्न कर सकता है। शरीर से कमजोर व्यक्ति मन से भी कमजोर होता है औरो की तुलना में उसके कार्य करने की क्षमता काफी कम हो जाती है जिसके चलते कई बार वे अपने दैनिक कार्यों को भी ठीक प्रकार से नहीं कर पाते।

Read more : वजन घटाने के ये है उपाय 

और शरीर कमजोर होने के चलते इम्यून सिस्टम भी कमजोर हो जाता है जिसके कारण बीमारियां उन्हें अपनी चपेट में ले लेती है और उनसे रिकवर करने में उन्हें काफी समय लग जाता है। यह सब जानकार तो यही लगता है की बहुत पतला होने से बेहतर है एवरेज मोटा होना। इसीलिए आज हम आपको कुछ उपाय बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप खुद को मोटा कर सकते है। लेकिन ध्यान रहे उपाय का इस्तेमाल आपको कम से कम 1 महीने तक करना होगा तभी जाकर इच्छित परिणाम आ पाएंगे। तो आइये जानते है क्या है वे उपाय –

18 साल के बाद वजन बढ़ाने के उपाय :-

1. एक्सरसाइज :

मोटा होने के लिए आपको थोड़ी सी एक्सरसाइज करनी होगी। इसके लिए आप सुबह में केवल आधा घंटे का समय निकालकर कसरत करें। अगर आप जिम जाकर व्यायाम करना चाहती है तो वह भी कर सकती है लेकिन ध्यान रहे शुरू में इजी और बाद में हैवी एक्सरसाइज करें। इससे आपके शरीर पर ज्यादा प्रेशर भी नहीं पड़ेगा और आप मोटी भी हो जाएंगी। इसके अलावा पुश-अप्स, सीट-अप्स, लटकना आदि एक्सरसाइज करें।

2. खाली पेट :

अगर आप वाकई में मोटा होना चाहते है तो ध्यान रहे कभी भी खाली पेट व्यायाम या एक्सरसाइज नहीं करें। और खाना खाने के तुरंत बाद भी एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए। अगर आप सुबह 10 बजे एक्सरसाइज करने की सोच रहे है तो उससे आधा घंटे पहले दो केले और दूध या केवल दही का सेवन कर लें। कसरत से 20 मिनट पहले ग्लूकोस का सेवन करें। ये आपको एक्सरसाइज में लगने वाली ऊर्जा देने में मदद करेंगे।

3. वजन के हिसाब से भोजन :weight loss food

इसके लिए पहले अपना वजन कर लें। क्योंकि वजन बढ़ाने के लिए उसके हिसाब से ही प्रोटीन की मात्रा का सेवन करना होगा। अगर आपका वजन 40 किलो है तो 40 ग्राम प्रोटीन आपके लिए सही है। अगर आपका वजन 50 किलो है तो 50 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होगी। लेकिन लड़कों को इसमें डबल प्रोटीन की आवश्यकता होगी यानी 50 किलो वाले लड़के को 100 किलो प्रोटीन की आवश्यकता होगी। अनजानों के लिए प्रोटीन की मात्रा का अंदाजा लगाना थोड़ा मुश्किल है लेकिन आपका पडोसी यानी “Google” इन सभी समस्यायों का एकमात्र समाधान है। यहाँ आप प्रोटीन से जुडी हर जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते है।

4. 8 घंटे की नींद :

पुरे दिन स्वस्थ और एक्टिव बने रहने के लिए आपको 8 घंटे की नींद लेना जरुरी है। इससे शरीर को पूरा आराम और प्रॉपर ग्रोथ करने का समय मिल जाता है। अगर आपकी नींद 8 घंटे से पहले खुल जाती है तो उसके लिए दूध में शहद मिलाकर सो जाना चाहिए। दोपहर का खाना खाने के बाद समय मिले तो 2 घंटे की नींद ले लें। और सोने से पहले हमेशा किसी स्वास्थ्यवर्धक चीज का सेवन जरूर करें। ये आपको मोटा करने में मदद करेगा।

5. डॉक्टर के पास :doctor se milen

अगर आपको लगता है की आपके वजन के कम होने के पीछे कोई स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएँ। अपने लीवर की जाँच कराएं। उन्हें बताये की खाना खाने के बाद भी आपका वजन नहीं बढ़ रहा है। तो वे इसमें आपकी कुछ मदद कर पाएंगे। लेकिन ध्यान रहे डॉक्टर के पास MBBS की डिग्री होना जरुरी है। क्योंकि आजकल बहुत से झोलाछाप डॉक्टर देखने को मिलते है तो जानते तो कुछ नहीं लेकिन खुद को डॉक्टर कहते है।

7. ये भी है एक कारण :

कुछ लोगों के शरीर का मेटाबोलिज्म बहुत फ़ास्ट होता है ये लोग कुछ भी खा लें शरीर उसे तुरंत एनर्जी में परिवर्तित कर यूज कर लेता है। यही लोग बहुत एक्टिव होते है और शरीर से बहुत पतले होते है। ऐसे में आपको अपने लिए कुछ करने की आवश्यकता नहीं है बस खाते जाइये और अपना एनर्जी लेवल बढ़ाते जाइए।

8. भोजन की टिप्स :

कसरत से पहले दो केले और दूध का सेवन करना आपके लिए अच्छा रहेगा। नाश्ते में तीन उबले अंडे, एक बेसन का लड्डू, दो ब्रेड मक्खन लगाकर, आधा गिलास दूध या जूस या ग्लूकोज लें। खाने में आप जो चाहे खा सकते है, साथ में चावल सलाद और कुछ मीठा जरूर लें। शाकाहारियों के लिए पनीर और non veg के लिए मछली बेस्ट भोजन है। शाम का खाना भी दिन की तरह हैवी होना चाहिए। रात्रि में एक ग्लास ठंडा दूध आपके लिए अच्छा रहेगा।

तो ये थी कुछ टिप्स जिनकी मदद से आप 18 वर्ष के बाद भी अपना वजन बढ़ा सकते है। लेकिन ध्यान रहे लड़कों और लड़कियों के शरीर और उनकी कैपेसिटी में काफी फर्क होता है इसीलिए लड़कों को लड़कियों से ज्यादा भोजन और प्रोटीन की आवश्यकता होती है जिनकी जानकारी आप किसी डॉक्टर या न्यूट्रीशियन डाइट सलाहकार की मदद ले सकते है।

एमटीपी अबॉर्शन किट इस्तेमाल करने के तरीके और साइड इफ़ेक्ट

एमटीपी अबॉर्शन किट गर्भपात के लिए इस्तेमाल की जाने वाली किट होती है। यह किट दो तरह की दवाइयों को मिलाकर बनती है। पहली दवाई होती है मिफेप्रिस्टोन जो की एक ऐसे हॉर्मोन की तरह काम करती है जो बॉडी में प्रोजेस्ट्रोन हॉर्मोन के प्रभाव को कम करती है। और दूसरी तरह की दवाई होती है मिसोप्रोस्टोल जो की गर्भाशय में संकुचन को बढ़ाने में मदद करती है। और इन दोनों दवाइयों के प्रभाव से महिला का गर्भपात हो जाता है।

लेकिन इस दवाई को लेने के लिए डॉक्टर की सलाह बहुत जरुरी होती है। यह किट उन्ही महिलाओं पर असरदार होती है जिनका गर्भ दो महीने तक का होता है। यदि प्रेगनेंसी दो महीने से ज्यादा हो जाती है तो यह किट हो सकता है की बॉडी पर असर न करें, और इससे पूरी तरह गर्भपात न हो। इसीलिए दवाई लेने के बाद आपको किसी भी तरह की परेशानी न हो इसके लिए एक बार डॉक्टर की सलाह लेना जरुरी होता है।

एमटीपी अबॉर्शन किट का इस्तेमाल कैसे किया जाता है?

एमटीपी किट में एक पैक में 5 गोलियां होती है जिसमे एक गोली मिफेप्रिस्टोन की होती है जो की 200mg की होती है और 4 गोलियां मिसोप्रोस्टोल की होती है जो की 200mcg की होती है। इसमें से सबसे पहले मिफेप्रिस्टोन की एक गोली खाली पेट सबसे पहले ली जाती है। उस गोली के लेने के बाद एक से तीन दिन के अंदर आपको बची हुई मिसोप्रोस्टोल की गोलियां प्राइवेट पार्ट के अंदर रखनी होती है, इन गोलियों को अंदर रखने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला उपकरण किट में ही दिया होता है।

और किस तरह उस उपकरण का इस्तेमाल करके आप प्राइवेट पार्ट के अंदर गोलियां रखनी है यह भी बताया होता है। इन गोलियों का इस्तेमाल करने के बाद महिला को ब्लीडिंग होनी शुरू हो जाती है और यह ब्लीडिंग दो हफ्ते तक महिला को हो सकती है। साथ ही इस किट का इस्तेमाल करने के बाद महिला को और भी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। तो आइये अब जानते हैं की एमटीपी अबॉर्शन किट का इस्तेमाल करने से महिला को कौन सी शारीरिक परेशानियां होती है।

एमटीपी अबॉर्शन किट से कौन सी शारीरिक परेशानियां होती है

  • ब्लीडिंग बहुत ज्यादा होती है।
  • पेट में दर्द, पेट में ऐंठन, पेट के निचले हिस्से में दर्द की समस्या अधिक होती है।
  • बॉडी का तापमान बढ़ सकता है जिसके कारण आपको बुखार की समस्या होती है।
  • ब्रेस्ट में दर्द व् भारीपन महसूस हो सकता है।
  • चक्कर आना, सिर दर्द महसूस होना।
  • उल्टी, जी मिचलाना, दस्त, अपच की समस्या।
  • कई महिलाओं को इस दौरान कपकपी महसूस होने की समस्या भी होती है।

एमटीपी किट लेने के बाद डॉक्टर से कब मिलें

  • यदि बहुत ज्यादा ब्लीडिंग या दर्द की समस्या हो।
  • कोई ऐसी शारीरिक परेशानी हो जो की बर्दाश ही न हो रही हो।
  • यदि दवाई लेने के बाद चार घंटे बाद तक आपको ब्लीडिंग शुरू न हो तो भी आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए।

तो यह है एमटीपी अबॉर्शन किट को लेने का तरीका, इस दवाई को लेने के नुकसान से जुड़े कुछ टिप्स। यदि आप भी इस किट का इस्तेमाल करने वाले हैं तो आपको बिना डॉक्टर की राय के इस दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए।

प्रेगनेंसी चेक करने में देरी क्यों नहीं करनी चाहिए?

पीरियड्स मिस होना प्रेगनेंसी का सबसे अहम लक्षण माना जाता है। लेकिन जिन महिलाओं को पीरियड्स दो चार दिन ऊपर नीचे हो जाते हैं उनके लिए पीरियड्स मिस होना आम बात होती है। परन्तु यदि महिला के पीरियड्स आगे पीछे नहीं होते हैं, पीरियड्स आने से पहले बॉडी में कुछ अलग से लक्षण महसूस होते हैं।

तो महिला को पीरियड्स मिस होने के एक या दो दिन बाद ही प्रेगनेंसी चेक कर लेना चाहिए और उसमे बिल्कुल भी देरी नहीं करनी चाहिए। अब आप सोच रहे होंगे की हम ऐसा क्यों कह रहे हैं? तो आइये अब इस आर्टिकल में हम उन्ही कारणों की बात करने जा रहे हैं जिनकी वजह से महिला को प्रेगनेंसी चेक करने में देरी नहीं करनी चाहिए।

पहली बार ऐसा हुआ हो या पहली प्रेगनेंसी हो

यदि महिला को पहली बार पीरियड्स मिस हुए हो या शादी के बाद पहली बार ऐसा हुआ है तो महिला को पीरियड्स मिस होने के एक या दो दिन बाद ही प्रेगनेंसी टेस्ट कर लेना चाहिए। और यह टेस्ट सुबह के पहले यूरिन से करना चाहिए क्योंकि सुबह के पहले यूरिन में एचसीजी हॉर्मोन की अधिकता अधिक होती है।

और सही परिणाम आने के चांस भी अधिक होते हैं। ऐसा भी हो सकता है की आपको उस दिन प्रेगनेंसी पॉजिटिव न आये तो ऐसे में आपको अगले दिन दोबारा टेस्ट करना चाहिए। क्योंकि यदि शादी के बाद ऐसा पहली बार हुआ है तो यह प्रेगनेंसी महिला के लिए बेहद खास होती है। और जितनी जल्दी प्रेगनेंसी कन्फर्म होती है उतना ही जल्दी ट्रीटमेंट भी शुरू होता है।

उम्र के बढ़ने के कारण

उम्र बढ़ने के बाद यदि आपके पीरियड्स मिस हुए हैं तो भी आपको प्रेगनेंसी टेस्ट जल्दी से जल्दी करना चाहिए। क्योंकि यदि आप बेबी चाहती हैं तो शुरुआत से ही आपको सही ट्रीटमेंट मिलें और उम्र बढ़ने के कारण प्रेगनेंसी में किसी तरह की परेशानी न आये इसके लिए आपको प्रेगनेंसी टेस्ट जल्दी से जल्दी करना चाहिए।

बहुत मुश्किल से प्रेगनेंसी की उम्मीद नज़र आई हो

कुछ महिलाओं की बहुत कोशिश के बाद भी माँ बनने की इच्छा पूरी नहीं होती है। ऐसे में कभी किसी महीने में आपको ऐसा लग रहा है की आपके माँ बनने के चांस हैं और ऊपर से आपके पीरियड्स भी मिस हो जाते हैं तो आपको जरा भी देरी न करते हुए तुरंत प्रेगनेंसी टेस्ट कर लेना चाहिए।

पहले गर्भपात हो चूका हो

यदि महिला का गर्भपात हुआ है और महिला ऐसा सोच रही है की गर्भपात के कारण उनका मासिक चक्र अनियमित हुआ है पीरियड्स आने में ज्यादा देरी हो गई है। तो महिला को इस लक्षण को अनदेखा न करते हुए जल्द से जल्द प्रेगनेंसी टेस्ट कर लेना चाहिए। क्योंकि कई बार गर्भपात के बाद सम्बन्ध बनाने से साथ के साथ ही गर्भ ठहर जाता है। और ऐसे में दोबारा गर्भपात न हो इसके लिए आपको शुरुआत से ही सावधानी बरतनी चाहिए।

प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही अच्छा ट्रीटमेंट हो

हर महिला यही चाहती है की गर्भावस्था के दौरान माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ रहें। और इसके लिए पीरियड्स मिस होने के बाद आपको तुरंत प्रेगनेंसी टेस्ट कर लेना चाहिए। ताकि यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो आपको जल्द से जल्द प्रेगनेंसी का ट्रीटमेंट मिल सके जिससे आप और आपका बच्चा दोनों स्वस्थ रहें।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से महिला को प्रेगनेंसी चेक करने में देरी नहीं करनी चाहिए। यदि आपके पीरियड्स भी आगे पीछे होते हैं और कभी ज्यादा दिनों के लिए आगे बढ़ जाते हैं। तो आपको भी इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि कई बार ऐसा होने का कारण प्रेगनेंसी ही होता है।

Why not delay in doing pregnancy check

प्रेगनेंसी के अंतिम दिनों में कौन से काम करने से नार्मल डिलीवरी होती है?

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गर्भावस्था का समय शुरू होते ही हर महिला के मन में डिलीवरी को लेकर तरह तरह के सवाल उठने लगते है। गर्भवती महिलाओं यह डर लगा रहता है के उनकी डिलीवरी नार्मल होगी या सीजेरियन। उनके मन में डिलीवरी को लेकर चिंता बनी रहती है।

आज से कुछ साल पहले सीजेरियन डिलीवरी का ऑप्शन महिलाओं की मेडिकल कंडीशन देखकर चुना जाता था। परन्तु आजकल महिलाये नार्मल डिलीवरी के दर्द से बचने के लिए सी सेक्शन डिलीवरी का ऑप्शन चुन लेती है। पर यह पूरी तरह से सहीं नहीं है गर्भवती महिला की नार्मल डिलीवरी ना के सिर्फ महिला के लिए बल्कि बच्चे के लिए भी अच्छी होती है।

नार्मल डिलीवरी के उपाय

अगर आप भी चाहते है के आपकी भी नार्मल डिलीवरी हो तो यह उपाय जरूर पढ़े।

पौष्टिक और संतुलित भोजन:

  • गर्भवती महिला में खून या आयरन की कमी के कारण सी सेक्शन डिलीवरी होती है।
  • इसीलिए जरुरी है के नार्मल डिलीवरी के लिए आप पौष्टिक आहार ले।
  • गर्भवती महिला में खून और जरुरी पौषक तत्व की कमी नहीं होनी चाहिए।

पानी की मात्रा:

  • भोजन के साथ साथ पानी की मात्रा भी अच्छे से ले।
  • ताकि शरीर में वाटर लेवल सहीं रहे।
  • नार्मल डिलीवरी के लिए जरुरी है के गर्भवती महिला अच्छे से हाइड्रेट रहे।
  • पानी में सादे पानी के अलावा फलों का रस भी पी सकते है।
  • गर्भवती महिला का वाटर लेवल सहीं होने से नार्मल डिलीवरी का दर्द सहन करने की शक्ति मिलती है।

व्यायाम करें:

  • प्रेगनेंसी के हल्की फुलकी एक्सरसाइज जरूर करें।
  • इससे मासपेशियां नार्मल डिलीवरी के लिए तैयार होती है।
  • आजकल कई जगहों पर प्रेगनेंसी एक्सरसाइज सिखाई जाती है।
  • विशेषज्ञ के देखरेख में ही व्यायाम करें।
  • भारी वजन वाले एक्सरसाइज ना करें।
  • छोटी छोटी एक्सरसाइज करें, जिससे पेट के निचली हिस्से की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है।
  • गलत एक्सरसाइज ना करें, इससे डिलीवरी में दिक्क्त भी आ सकती है।

ब्रीदिंग एक्सरसाइज:

  • साँस से रिलेटेड एक्सरसाइज गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत ही फायदेमंद है।
  • इस एक्सरसाइज से शिशु को ऑक्सीजन मिलती है।
  • इससे आपके शरीर को नार्मल डिलीवरी के समय दर्द ज्यादा समय तक सहने की सकती मिलती है।
  • इस एक्सरसाइज से आप तनाव मुक्त रहते हो।

स्ट्रेस या तनाव:

  • स्ट्रेस या तनाव जितना दूर रहें उतना ही नार्मल डिलीवरी के लिए फायदेमंद होता है।
  • किसी चीज के तनाव और परेशानियों से अपने आप को दूर रखें।

मसाज:

  • गर्भावस्था के आखिरी तीन महीनो में जरुरी है के आप मसाज करवाए।
  • इससे आपके शरीर को मजबूती मिलेगी।
  • नार्मल डिलीवरी के दौरान दर्द कम होगा।
  • आजकल एंटीनेटल क्लास में भी गर्भवती महिला और पार्टनर को यह शिक्षा दी जाती है के मालिश कैसे करनी है।

सहीं डॉक्टर:

  • इन सभी बातों के अतिरिक्त सबसे ज्यादा जरूरी है के आप अपनी डिलीवरी के लिए सहीं डॉक्टर चुने।
  • अपने आसपास के लोगों से डॉक्टर चुनने से पहले सलाह जरूर ले।
  • एक अच्छा डॉक्टर ही आपकी नार्मल डिलीवरी में पूरी मदद कर सकता है।

अगर आप कोई एक्सरसाइज नहीं भी कर पाती तो घर का काम भी करके अपने आप को नार्मल डिलीवरी के लिए तैयार कर सकती है।

गर्भावस्था में कभी-कभी सफ़ेद पानी आना

प्रेगनेंसी में सफ़ेद पानी

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, जैसे की उल्टियां होना, सिर व् बॉडी के अन्य हिस्सों में दर्द रहना, मांसपशियों में खिंचाव होना, कमजोरी व् थकान का अनुभव होना, ब्लीडिंग की समस्या होना, आदि। ऐसे की कई बार प्रेगनेंसी के दौरान सफ़ेद पानी की समस्या हो सकती है, जिसे ल्यूकोरिया के नाम से भी जाना जाता है और यह कोई बिमारी नहीं होती है साथ ही ऐसा होना प्रेगनेंसी के दौरान सामान्य बात होती है। लेकिन हो सकता है की सफ़ेद पानी गिरने के कारण महिला तनाव में आ जाएँ, परेशानी का अनुभव करे, या ऐसा सोचें की इससे गर्भ में शिशु को किसी तरह का नुकसान होगा। तो आपको यह पता होना होना चाहिए थोड़ा बहुत सफ़ेद पानी का आना प्रेगनेंसी के दौरान नोर्मल होता है और इसके कारण शिशु को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुँचता है। इसीलिए महिला को तनाव नहीं लेना चाहिए, लेकिन यदि सफ़ेद पानी बहुत ज्यादा गिरने लगे तो एक बार डॉक्टर से राय लेना सही होता है।

प्रेगनेंसी की तीनो तिमाही में स्त्राव होने के कारण

गर्भावस्था की तीनो तिमाही में स्त्राव अलग अलग तरीके का हो सकता है, ऐसे में स्त्राव किस तरह का हो रहा है इस बात का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है, तो आइये जानते है प्रेगनेंसी की तीनो तिमाही में सफ़ेद पानी से जुडी कुछ बातें।

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही

गर्भवती महिला के शरीर में तेजी से हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण सफ़ेद पानी आ सकता है यह स्त्राव पतला व् रंगहीन हो सकता है। लेकिन यदि सामान्य से अधिक, बदबूदार स्त्राव हो तो यह असामान्य हो सकता है ऐसे में इसे अनदेखा न करते हुए एक बार डॉक्टर से बात करनी चाहिए। साथ ही प्रेगनेंसी की पहली तिमाही के दौरान बॉडी में एस्ट्रोजन का उत्पादन बढ़ने लगता है जिसके कारण भी गर्भवती महिला को सफ़ेद पानी आ सकता है।

प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही

दूसरी तिमाही में सफ़ेद पानी के आने का कारण गर्भाशय की ग्रीवा पर दबाव पड़ना हो सकता है। और यह सफ़ेद पानी अंडे के सफ़ेद भाग की तरह महसूस हो सकता है लेकिन यदि सफ़ेद पानी के साथ हल्की रक्त की बूंदे दिखाई दे तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही

शिशु का वजन तीसरी तिमाही में पूरी तरह से बढ़ जाता है जिसके कारण गर्भाशय की ग्रीवा और पेल्विक एरिया पर जोर पड़ने के कारण गर्भवती महिला को रक्तस्त्राव हो सकता है। और डिलीवरी का समय पास आने पर सफ़ेद पानी के साथ रक्त की कुछ बूंदे भी नज़र आ सकती है। ऐसे में इसे अनदेखा न करें और जितना जल्दी हो सके डॉक्टर से राय लें।

संक्रमण: इसके अलावा यदि किसी भी तिमाही में गर्भवती महिला को प्राइवेट पार्ट में संक्रमण होने के कारण भी सफ़ेद पानी की समस्या हो सकती है।

सफ़ेद पानी के कारण गर्भ में पल रहे शिशु को कोई नुकसान होता है?

जी नहीं, प्रेगनेंसी के दौरान सामान्य रूप से सफ़ेद पानी का आना गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए फायदेमंद होता है। यह गर्भ में पल रहे शिशु को संक्रमण से सुरक्षित रखने में मदद करता है। लेकिन यदि सफ़ेद पानी की मात्रा बहुत अधिक हो, सफ़ेद पानी में रक्त के थक्के नज़र आएं, स्त्राव में से बदबू आती हुई महसूस हो तो यह संक्रमण का लक्षण हो सकता है जो की गर्भ में शिशु के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है, साथ ही यदि महिला को प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन हो तो इसे अनदेखा न करते हुए एक बार डॉक्टर से राय लेना चाहिए और इसका इलाज करवाना चाहिए ताकि गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को हर तरह की परेशानी से सुरक्षित रखने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी के दौरान सफ़ेद पानी के कारण होने वाले इन्फेक्शन से बचने के टिप्स

  • प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई का अच्छे से ध्यान रखें, ताकि ph संतुलन को मेंटेन रखने में मदद मिल सके।
  • ज्यादा सुगन्धित चीजें जैसे साबुन, क्रीम आदि का इस्तेमाल प्राइवेट पार्ट के लिए करने से बचे।
  • ज्यादा टाइट या सिंथेटिक अंडरवियर न पहने, बल्कि आरामदायक व् कॉटन की अंडरवियर का इस्तेमाल करें, और दिन में दो बार अंडरवियर बदलें।
  • यूरिन या मल पास करने के बाद अच्छे से प्राइवेट पार्ट को साफ़ करें और सूखने के बाद कपडे पहने।
  • सम्बन्ध बनाते समय सुरक्षा का इस्तेमाल जरूर करें।
  • यदि आपका पार्टनर प्राइवेट पार्ट के इन्फेक्शन से परेशान है या आपको कोई ऐसी परेशानी है तो जितना हो सके सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।

प्रेगनेंसी में सफ़ेद पानी में इन लक्षणों के महसूस होने पर डॉक्टर से मिलना चाहिए

  • यदि डिस्चार्ज पीले, भूरे रंग का हो तो आपको इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।
  • सफ़ेद पानी के साथ खून के धब्बे नज़र आएं।
  • डिस्चार्ज में से तेज दुर्गन्ध के आने पर एक बार डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए।
  • सफ़ेद पानी अधिक आने के साथ प्राइवेट पार्ट में दर्द, खुजली, आदि अधिक महसूस हो।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान सफ़ेद पानी से जुडी कुछ बातें, इसके अलावा यदि गर्भावस्था की आखिरी तिमाही में सफ़ेद पानी अधिक आने लग जाए जैसे की यूरिन आता है तो यह एमनियोटिक फ्लूइड भी हो सकता है जिसमे शिशु पूरे नौ महीने तक गर्भ में रहता है। तो यह प्रसव का संकेत हो सकता है ऐसे में इसे अनदेखा न करते हुए एक बार डॉक्टर से राय लेनी चाहिए या जितना जल्दी हो सके डॉक्टर के पास पहुँच जाना चाहिए।