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ज्वेलरी साफ़ करने के तरीके

आजकल के ज़माने में ज्वेलरी उतनी ही जरुरी है जितनी की आपके कपडें। लेकिन कई बार समय के आभाव और देखरेख में लापरवाही करने की वजह से वह खराब होंगे लगते है। ऐसे में उनकी देखरेख करना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। इसीलिए आज हम आपको ज्वेलरी साफ़ करने के कुछ टिप्स बताने जा रहे है। 

ज्वेलरी चाहे सोने की हो या चांदी की बिना चमक और शाइन के उनकी खूबसूरती दिखाई नहीं देती। आपने भी अपने शादी के समय में अपनी दादी का जडाऊ हार, मम्मी की चांदी की पायल और अपनी सास का खुबसुरत डायमंड चोकर पहना होगा। जो कभी अपने टाइम में फैशन में थे, लेकिन आजकल के समय में यह सभी गहने पहले से भी कहीं अधिक बेशकीमती और elegant होते जा रहे है।

और वैसे भी वर्तमान में सोने चांदी की कीमते आसमान छूती जा रही है इस स्थिति में हर किसी के लिए नए गहने बनवा पाना और खरीद पाना संभव नहीं। ऐसे में आपको चाहिए की अपने पुराने और पुश्तैनी गहनों को संभाल कर रखें। लेकिन आजकल के समय ए किसी के पास इतना टाइम नहीं है की अपने गहनों की ठीक प्रकार से देखभाल कर पायें। और जब बात सफाई की आती है तो अक्सर सभी यही कहकर टाल देते है की “जब सुनार के पास जायेंगे तब इन्हें साफ़ करा लेंगे”।

जिसके चलते समय पर इनकी सफाई नहीं हो पाते और इनकी चमक फीकी पड़ने लगती है। इसीलिए आपको चाहिए की आप इनकी सही देखभाल करना शुरू कर दें, ताकि इनकी चमक बरकरार रहें। वैसे तो सभी अपनी-अपनी समझ के अनुसार अपने गहनों की सफाई करते रहते है लेकिन कई बार जानकारी के आभाव में आप अपने कीमती गहनों को नुकसान पहुंचा बैठते है। इसीलिए जेवरों के रख-रखाव के प्रति विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। लेकिन सभी को इस बारे में पूर्ण जानकारी नहीं होती। इसीलिए आज हम आपको ज्वेलरी साफ़ करने की कुछ टिप्स बताने जा रहे है। जिनकी मदद से आप घर बैठे अपनी कीमती ज्वेलरी को साफ़ कर सकती है।

ज्वेलरी साफ़ करने के घरेलू तरीके :- 

हीरे की ज्वेलरी :

हीरे के गहनों को कभी भी ड्रायर या ड्रेसर के ऊपर नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इससे उनपर निशान पड़ जाते है और उन्हें नुकसान भी पहुँच सकता है। इसीलिए इन्हें साफ़ करने के लिए हमेशा अच्छी क्वालिटी वाले क्लीनिंग सलूशन का इस्तेमाल करना चाहिए।

आप चाहे तो घर में अमोनिया और पानी को मिलाकर भी हीरे के गहनों को साफ़ किया जा सकता है। इसके अलावा घरेलू काम, सफाई आदि करना, खाना बनाने, बर्तन धोने आदि का काम करते समय इन्हें हटा देना चाहिए।

सोने की ज्वेलरी :

सोने के गहनों की उचित देखभाल करना भी बेहद जरुरी होता है क्योंकि यदि इनकी सही देखभाल न की जाये तो इनकी चमक फीकी पड़ सकती है। इसीलिए इन्हें हमेशा सौम्य डिटर्जेंट, हल्के गुनगुने पानी और मुलायम कपड़े से साफ़ करना चाहिए।

लेकिन एक बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए  की सोने की चैन और कंगन को अलग-अलग रखना चाहिए, क्योंकि एक साथ रखने से ये उलझ सकते है। इसके अलावा स्वीमिंग पूल में तैराकी के दौरान भी इन्हें हटा देना चाहिए, क्योंकि स्विमिंग पूल में क्लोरिन होता है जो सोने के गहनों को खराब कर सकता है।

मोती की ज्वेलरी :

सूरज की किरणें जिस प्रकार हमारी त्वचा को नुकसान पहुंचाती है उसी प्रकार तेज़ रोशनी और गर्मी आपके बहुमूल्य रत्नों को बिह खराब भी कर सकती है। दिन के समय इस तरह के गहने पहनकर निकलने से वे बेकार और रंगहीन हो जाते है। और समय समय के साथ-साथ फीके और धुंधले पड़ने लगते है। इसीलिए इस तरह के गहनों को तेज़ रोशनी से बचाना चाहिए। क्योंकि रोशनी में इनका रंग बदल सकता है और ये रंगहीन भी हो सकते है।

मोती के गहनों को मुलायम कपडे से साफ़ करके सुखाकर एयरटाइट डिब्बे में रखना चाहिए।

इस तरह के गहनों को हमेशा मेकअप करने के बाद ही पहने। परफ्यूम, मेकअप, हेयर स्प्रे आदि से इन्हें बचाना चाहिए। इन्हें साफ़ करने के लिए कभी भी बेकिंग सोडा या ब्लीच का प्रयोग नहीं करना चाहिए। स्वीमिंग पूल में जाने से पहले इन्हें उतार लें ताकि इन्हें कोई नुकसान न होने पायें।

चांदी की ज्वेलरी :

सभी गहनों की तरह चांदी के आभूषणों को भी हानिकारक रसायनों से बचाना चाहिए, क्योंकि इनके इस्तेमाल से यह काले और बेरंग भी हो सकते है। इसके साथ ही तैराकी और घरेलू कार्य करते समय भी इन्हें नहीं पहनना चाहिए।

चांदी के आभूषणों को साफ़ करने के लिए फॉस्फेट मुक्त डिर्टजेंट या साबुन का प्रयोग करना चाहिए और बाद में साफ़ व् मुलायम कपडे से पोंछ कर रखना चाहिए। इन्हें किसी धातु के सम्पर्क में न रखें इससे ये काले हो सकते है।

इन 8 बातों का भी रखें ध्यान :

1. ज्वेलरी को हमेशा क्लीन और ड्राई जगह पर रखना चाहिए। क्योंकि गर्मी और ह्यूमस आपकी कीमती ज्वेलरी को खराब कर सकती है। जिसकी वजह से ज्वेलरी का luxe-factor खत्म हो सकता है। इसके अलावा अधिक गर्मी की वजह से उनकी क्वालिटी खराब हो सकती है और इसमें लगे स्टोंस की रंगत में फर्क आ सकता है।

2. ज्वेलरी को हमेशा ज्वेलर्स द्वारा दिए गये गुलाबी रंग के टिश्यू या ज़िप्लोक बैग में ही रखना चाहिए। ये आपको किसी भी आम ज्वेलर के पास मिल जाएगा। आप चाहे तो इन्हें Fabric Lining वाले पर्स में भी रख सकती है।jwellery saaf karne ke tarike

3. सभी ज्वेलरी को कभी भी एक साथ नहीं रखना चाहिए। जैसे गोल्ड, सिल्वर, पर्ल, सेमी-प्रिशियस स्टोन आदि सभी को अगल-अलग टिश्यू में लपेटकर अलग जिपलॉक बैग में रखें। इससे जूलरी पर स्क्रैच नही पड़ेगा और उनका रंग भी बरकरार रहेगा।

4. किसी भी प्रकार के केमिकल के इस्तेमाल के समय ज्वेलरी को दूर रखें। जैसे हमेशा मेकअप करने, परफ्यूम आदि लगाने के बाद ही ज्वेलरी पहने। क्योंकि यदि आप ज्वेलरी पहनने के बाद इनका इस्तेमाल करती है तो इससे corrosion दिखने लगता है जिससे वे नकली प्रतीत होती है।

5. यदि आप अपनी ज्वेलरी को रोजाना साफ़ करती है तो उसे नर्म कपडें, माइल्ड साबुन और अमोनिया की कुछ बूंद वाले पानी से ही साफ़ करें। और उसे हमेशा पूरी तरह सुखा कर रखें। यदि कोई स्टोन ढीला हो गया है तो उसे तुरंत बदलवा लें। सिंक में इन्हें कभी न धोएं, इससे स्टोन ड्रेन में गिर सकता है।

6. अगर आपके पास मोती वाली ज्वेलरी है तो साल में एक बार दोबारा इन्हें जरुर बंधवा लें।

7. अपनी पुरानी ज्वेलरी को 2 साल में एक बार अपने फैमिली ज्वेलर को जरुर दिखवाएं। ताकि यह साफ़ और सुरक्षित रहें। साथ ही इनकी चमक भी बरकरार रहे।

8. क्लोरिन वाले पानी से हमेशा ज्वेलरी को बचा कर रखें। क्योंकि यह पानी उन्हें खराब कर सकता है। और उनका रंग बिगाड़ सकता है। स्विमिंग पूल में जाने से पहले उन्हें उतारना न भूलें।

प्रेगनेंसी में ज्यादा नींद आने के कारण

गर्भावस्था के दौरान भरपूर व् अच्छी नींद लेना बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि भरपूर नींद लेने से प्रेग्नेंट महिला को रिलैक्स व् फ्रेश महसूस होता है। यानी महिला शारीरिक के साथ मानसिक रूप से भी रिलैक्स महसूस करती है। लेकिन कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी में बहुत ज्यादा नींद आती है तो कुछ महिलाएं अच्छे से सो नहीं पाती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला के लिए न तो ज्यादा सोना अच्छा होता है और न ही कम सोना। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादा नींद आने के कारणों के बारे में बताने जा रहे हैं।

पहली तिमाही में आती है प्रेग्नेंट महिला को ज्यादा नींद

गर्भावस्था की पहली तिमाही में प्रोजेस्ट्रोन हॉर्मोन का स्तर बहुत बढ़ जाता है। जिसकी वजह से गर्भवती महिला की नींद में वृद्धि होती है। और महिला को बहुत ज्यादा सोने की इच्छा होती है।

महिला के शरीर में कमजोरी

यदि गर्भवती महिला शारीरिक रूप से बहुत ज्यादा कमजोर है या महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी है। तो इस कारण महिला को बहुत ज्यादा थकान व् कमजोरी की समस्या होती है। और महिला यदि बहुत ज्यादा थकान व् कमजोरी का अनुभव करती है तो इस कारण गर्भवती महिला को नींद अधिक आती है।

बहुत ज्यादा शारीरिक श्रम

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला आराम कम और काम ज्यादा करती है। तो इस वजह से भी महिला की सोने की इच्छा में वृद्धि हो सकती है। साथ ही जरुरत से ज्यादा शारीरिक श्रम गर्भवती महिला की शारीरिक परेशानियों को भी बढ़ा सकता है।

गर्भ में होने वाले बच्चे के कारण

ऐसा माना जाता है जिन महिलाओं के गर्भ में पल रहा शिशु लड़की होती है। उन महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादा नींद आती है।

तो यह हैं गर्भवती महिलाओं को ज्यादा नींद आती है। तो इसके यह कारण हो सकते हैं साथ ही जरुरत से ज्यादा सोना प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स को बढ़ा सकता है। ऐसे में आपको इसके लिए एक बार डॉक्टर से जरूर बात करनी चाहिए।

जुड़वाँ बच्चा क्यों और कैसे होता है? पूरी जानकारी

अगर आप प्रेग्नेंट है या बच्चे की प्लानिंग कर रहे है, तो हो सकता है आपको जुड़वाँ बच्चा होने बाला हो. जी हां आज हम बात कर रहे है की आखिर जुड़वाँ बच्चे कैसे पैदा होते है, क्या कारण होता है जुड़वाँ बच्चे पैदा होने के लिए, आज हम इस विषय पर ही चर्चा कर रहे है की आखिर जुड़वाँ बच्चे होने का रहस्य क्या है. तो आईये आज हम आपको बताते है इसका रहस्य.

जुड़वा बच्चे दो तरह के होते हैं— आपको शायद पे पता होगा की एक-दूसरे से अलग दिखने वाले या मैनोज़ाइगॉटिक (monozygotic) या बिल्कुल एक से दिखने वाले जुड़वा या डायज़ाइगॉटिक (dizygotic), मैनोज़ाइगॉटिक जुड़वा बच्चों का निर्माण तब होता है जब एक एग से किसी स्पर्म द्वारा फर्टिलाइज़ किया जाता है, लेकिन दो एम्ब्रीओ निर्माण होता है। इस तरह जन्म लेनेवाले जुड़वा बच्चों की आनुवांशिक संरचना एक ही होती है। जबकि डायज़ाइगॉटिक जुड़वा बच्चे तब बनते हैं जब दो अलग स्पर्म्स दो एग्स को फर्टिलाइज करते हैं और दो अलग दिखनेवाले बच्चे पैदा होते हैं। ऐसे बच्चों की आनुवांशिक संरचना अलग होती है।
यहां हम बता रहे हैं कुछ स्थितियों के बारे में जिनसे जुड़वा बच्चों के साथ गर्भवती बनने की आपकी संभावना बढ़ा सकती है-

आनुवांशिक कारण /जेनेटिक्स- ऐसे जुड़वाँ बच्चे सब को नहीं होते है. पर जी हां, अगर आपके परिवार में पहले भी जुड़वा बच्चे पैदा हो चुके हैं, तो काफी सम्भावना है कि आपको भी जुड़वा बच्चे हों। यह आनुवांशिक प्रवृतियों की वजह से होता है। यही नहीं, अगर आप भी अपने भाई या बहन की जुड़वा हैं तो जुड़वा बच्चों की मां बनने की आपकी सम्भावनाएं काफी बढ़ जाती हैं। हालांकि, ऐसा माना जाता है कि ऐसी सम्भावनाएं माता और उसके परिवार पर आधारित होती हैं, पिता के नहीं।

ऊंचाई/ वज़न- हो सकता है यह जानकर आपको हैरानी हो लेकिन आपकी ऊंचाई और वज़न भी जुड़वा बच्चों के लिए गर्भधारण में एक निर्णायक भूमिका निभाता है। अमेरिकम कॉलेज ऑफ अब्स्टेट्रिक्स एंड गाइनोकोलोजी
में छपी एक स्टडी के अनुसार, ऐसी महिलाएं जिनका बीएमआई 30 या उससे अधिक हो उनमें जुड़वा बच्चों को जन्म देने की सम्भावना अधिक होती है। हालांकि, ऐसी स्थिति में केवल फ्रैटर्नल (fraternal) एक से दिखने वाले जुड़वा बच्चे होते हैं। साथ ही, ऐसी भी जानकारी मिलती रही है कि ऊंची महिलाएं भी जुड़वा बच्चों को अधिक जन्म देती हैं।

मां की उम्र- जहां यह बात प्रचलित है कि उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं के लिए गर्भधारण करना मुश्किल हो सकता है। कुछ स्टडीज़ में ऐसा पाया गया है कि उम्र बढ़ने के साथ आपको जुड़वा बच्चे होने की सम्भावना बढ़ जाती है। दरअसल जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है वैसे-वैसे फॉलिकल स्टिम्युलेटिंग हॉर्मोन (follicle stimulating hormone- FSH-) के निर्माण में भी कमी आती है, जो एग ओवरीज़ को ओव्यलैशन के लिए रीलिज़ करने में एक अहम भूमिका निभाता है। तो जैसे-जैसे रीलिज़ होनेवाले एग की संख्या बढ़ने लगती है, वैसे जुड़वा बच्चों के लिए गर्भधारण करने की सम्भावना बढ़ जाती है।

गर्भनिरोधक गोलियां- वैसे को गर्भनिरोधक गोलियां प्रेगनेंसी रोकने का काम करती हैं, लेकिन इनके सेवन से सम्भावना है कि आपको जुड़वा बच्चे हों। दरअसल जब आप गोलियां खाना बंद करते हैं तो हो सकता है कि शुरुआत के किसी मंथली साइकल के दौरान शरीर में विभिन्न प्रकार के हार्मोनल बदलाव आएं। जिसके चलते इन गोलियों को खाते हुए भी आपको दो गर्भ ठहरने की सम्भावनाएं बढ़ जाती हैं।
पहले दो बच्चों हो चुके हों /या आप प्रेगनेंट हो चुकी हों- अगर आपको पहले ही जुड़वा बच्चे हो चुके हैं, तो यह कहना ज़रूरी नहीं होगा कि आपको दोबारा जुड़वा बच्चे हो सकते हैं। यही नहीं, अगर आप पहले भी प्रेगनेंट हो चुकी हैं और प्रेगनेंसी की कोशिश कर रही हैं, तो हो सकता है कि आपको जुड़वा बच्चे हों।

आईवीएफ- आजकल आप बहूत से लोगो से सूना होगा कि आईवीएफ, जी हां आजकल ये काफी जोरो पर है, जहां ऊपर लिखे सभी कारणों की वजह से शायद आप जुड़वा बच्चों की मां न बन सकें, लेकिन अगर आप इन-विट्रो फर्टीलाइज़ेशन (in-vitro fertilisation) का माध्यम चुनती हैं तो हो सकता है कि आपके गर्भ में जुड़वा बच्चे आ जाएं। इस प्रक्रिया में, एग शरीर के बाहर फर्टिलाइज होते हैं और उसके बाद यूटरस में प्रवेश कराया जाता है। जैसे कि यह एक सहायक प्रक्रिया है, इसीलिए हो सकता है कि आईवीएफ की वजह से आपके जुड़वा बच्चे हों।

तो शायद अब आपको थोड़ा समझ आ गया होगा की जुड़वाँ बच्चा कैसे होता है. आप अपनी राय भी रख रक्स्ट है. अगर इस लेख में कुछ त्रुटि रह गई हो तो.

गर्भ गिराने के तरीके बिना डॉक्टरी सलाह के

माँ बनना इस दुनिया का सबसे प्यारा अनुभव होता है, परन्तु कई बार जब आप बिना सुरक्षा के सम्बन्ध बना लेते है और उसके लिए किसी गर्भनिरोधक का सेवन भी नहीं करते है तो इसके कारण आपका अनचाहा गर्भ ठहर जाता है, और इसके उपचार के लिए आप डॉक्टर के पास भी भी नहीं जाना चाहते है, और घरेलू तरीको का इस्तेमाल करके ही गर्भ को गिराने की कोशिश करते है, ऐसा संभव होता है परन्तु यदि आपका गर्भ कम समय का होता है तो यदि आपके गर्भ को तीन महीने हो जाते है तो आपको बिना डॉक्टर की सलाह के गर्भपात नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके कारण आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

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बिना प्लानिंग के गर्भ ठहरने के कारण महिलायें परेशान हो जाती है, परन्तु ऐसा होता क्यों है? इसका कारण होता है जब महिला और पुरुष बिना किसी सुरक्षा के एक दूसरे के करीब आ जाते है, और सम्बन्ध बनाने के 72 घंटे के भीतर किसी गर्भनिरोधक गोली का सेवन भी नहीं करते तो इसके कारण भी आपका गर्भ ठहर जाता है, और यदि आप अपने अनचाहे गर्भ को गिराना चाहते है, और इस विषय में डॉक्टर के पास नहीं जाना चाहते है तो आपको ध्यान रखना चाहिए की आपका गर्भ थोड़े समय का हो, क्योंकि यदि गर्भ ज्यादा दिनों का होता है तो इसके कारण महिला के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है, तो आइये आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स देते है जिनका इस्तेमाल करके आप घर पर ही बिना किसी डॉक्टर की सलाह के ही गर्भपात कर सकते है।

बबूल के पत्तों का इस्तेमाल करें:-

babool ke patte

दो ग्राम बबूल के पत्ते ले उसके बाद इसे दो कप पानी में डाल कर अच्छे से उबालें, और इसे जब तक उबालें जब तक की ये पानी आधा न रह जाएँ, उसके बाद इसका नियमित सेवन करने से आपको अनचाहे गर्भ की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

विटामिन सी का सेवन करें:-

विटामिन सी शरीर के लिए बहुत जरुरी होता है, क्योंकि ये आपके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है इसके अलावा यदि आप अधिक मात्रा में ऐसे पदार्थो का सेवन करते है जिसमे विटामिन सी अधिक होता है, तो इसके रोजाना सेवन के कारण आपका गर्भपात होने में मदद मिलती है।

कच्चे पपीते का सेवन करें:-

ऐसा कहा जाता है की गर्भवती महिला को कच्चे पपीते का सेवन नहीं करना चाहिए, इसके कारण गर्भपात होने का खतरा रहता है, तो यदि आप अपना गर्भपात शुरूआती दिनों में करना चाहती है, तो आप कच्चे पपीते का सेवन कर सकती है, इसमें विटामिन सी की मात्रा अधिक होने के कारण आपका गर्भपात हो जाता है।

बाजरे का सेवन करने से:-

बाजरे की तासीर गरम होती है, इसीलिए ये अनचाहे गर्भ को गिराने में आपकी मदद कर सकता है, इसके लिए आप नियम से बाजरे की रोटी, खिचड़ी या इसका अन्य भोज्य पदार्थ के रूप में भी सेवन करते है, तो आपके गर्भ को जल्दी गिरने में मदद मिलती है।

तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल करें:-

तुलसी जहां आपको शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने में मदद करती है, वहीं यदि कोई महिला अपने अनचाहे गर्भ से बिना डॉक्टर की सलाह के निजात पाना चाहती है तो वो पा सकती है, इसके लिए तुलसी के कुछ पत्तों को पानी में अच्छे से उबालें, या तुलसी के पत्तो को आप पीस भी सकते है, दिन में दो से तीन दिन इसका काढ़ा पीने से आपको थोड़े समय में इस परेशानी से राहत मिलने में मदद मिलती है।

लहसुन का सेवन करें:-

lehsun ke gun

लहसुन की तीखी गंध और तासीर में गरम होने के कारण ये भी आपको इस परेशानी से राहत दिला सकता है, इसके लिए आप लहसुन की दो से तीन कली नियमित खाएं इसके कारण भी आपके अनचाहे गर्भ को गिरने में मदद मिलती है।

सीताफल के बीजों का इस्तेमाल करें:-

सीताफल के बीजों को अच्छे से पीस कर यदि आप अपने प्राइवेट पार्ट पर लगाते है, तो इसके कारण भी आपको अपने अनचाहे गर्भ को गिराने में मदद मिलती है, ये अपना असर दो या तीन या फिर ज्यादा दिनों में भी दिखा सकती है।

कटहल और अनानास का सेवन करें:-

कटहल और अनानास का सेवन भी गर्भावस्था के दौरान मना होता है, क्योंकि इसके कारण भी आपके गर्भ के गिरने की संभावना बनी रहती है, और इसका कारण होता है इसमें विटामिन सी की मात्रा में अधिकता होना, इसीलिए यदि आप भी अपने अनचाहे गर्भ को गिराना चाहती है, तो आप इनका सेवन कर सकती है।

कठिन परिश्रम करें:-

exercise

प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में किसी भी तरह के व्यायाम, ज्यादा भागादौड़ी, भारी सामान उठाने, पैरों के बार बैठने, पेट के बल किसी भी तरह के काम करने के लिए मनाही होती है, क्योंकि इसके कारण स्पॉटिंग या गर्भपात का खतरा बना रहता है, इसीलिए यदि आप चाहते की आपका अनचाहा गर्भ न ठहरे तो आपको जितना हो सकें अपनी बॉडी को पुश करना चाहिए, परन्तु याद रखे की इसके कारण आपको शरीर से सम्बंधित कोई और परेशानी न खड़ी हो, इससे भी आपको जरूर फायदा होगा।

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गर्भनिरोधक गोली का सेवन करें:-

अनचाहे गर्भ को गिराने के लिए आप गर्भनिरोधक गोली का सेवन भी कर सकते है, ये उपाय आसान होता है परन्तु इसके बाद आपको माहवारी से सम्बंधित परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि गर्भनिरोधक गोली का सेवन करने के बाद आपको होने वाले ब्लड फ्लो की मात्रा ज्यादा हो सकती है, साथ ही इसके बाद दो या तीन महीने तक आपके मासिक चक्र में भी उलट फेर हो सकता है।

बिना डॉक्टर की सलाह के गर्भ गिराने के अन्य तरीके:-

  • रोजाना गरम पानी से नहाने से आपके गर्भ के गिरने की संभावना बढ़ जाती है।
  • आवश्यकता से अधिक भागादौड़ी या व्यायाम करने से आपके पेट पर दबाव पड़ता है, जिसके कारण अनचाहे गर्भ को गिरने में मदद मिलती है।
  • इलायची का सेवन करने से भी गर्भ के गिरने की संभावना बढ़ जाती है, परन्तु आप याद रखें की इसका सेवन रात में न करें, ये आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है।
  • जिन पदार्थो की तासीर गरम होती है उनका सेवन करने से भी आपको इस समस्या से राहत मिलती है, इसके लिए आप जैसे ड्राई फ्रूट आदि का सेवन कर सकते है।
  • आंवले का सेवन या आंवले का रस पीने से भी गर्भ को गिराने में मदद मिलती है।
  • सुबह उठ कर तिल और चने को चबा चबा कर उसका सेवन करने से भी आपको अनचाहे गर्भ को गिराने में मदद मिलती है।
  • दालचीनी का सेवन करने से भी आपको अनचाहे गर्भ की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।
  • नमक वाले पानी का सेवन अधिक मात्रा में करें, इससे भी आपको फायदा मिलता है।

तो ये कुछ टिप्स है जिनका इस्तेमाल करके आप अपने अनचाहे गर्भ को गिरा सकते है, परन्तु आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए की यदि आपका गर्भ बार बार ठहर जाता है, और आप गर्भपात करते है ऐसा करने से महिला के शरीर में कमजोरी आ जाती है, साथ ही यदि आप दुबारा गर्भधारण करना चाहते है, तो इसमें भी आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, तो इसीलिए यदि आप अपने अनचाहे गर्भ की समस्या से राहत पाना चाहते है तो आपको या तो सबंध बनाते समय किसी सुरक्षा का इस्तेमाल करना चाहिए, और यदि ज्यादा समय का गर्भ हो तो डॉक्टर से भी राय लेनी चाहिए।

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सुबह-सुबह कमजोरी महसूस होना, क्या कारण होते हैं?

सुबह का मौसम बहुत ही सुहावना और फ्रेशनेस भरा होता है, जो किसी की भी थकान मिटा सकता है। परंतु बहुत से लोगों को सुबह जागने का मन नहीं करता? बिस्तर से निकलने का मन नहीं करता? और जब वे उठते है तो उन्हें बहुत सुस्ती महसूस होती है। अगर आप भी इन्ही लोगों में से एक है तो आपको इस समस्या पर ध्यान देना होगा। क्योंकि सुबह-सुबह सुस्ती बेवजह नहीं होती। इसके कई कारण हो सकते है।

कई बार भरपूर नींद लेने के बाद भी सुबह जागने पर कमजोरी महसूस होने लगती है, जिसके कारण न तो आप अपने रोजमर्रा के कार्यों को ठीक से कर पाते है और न ही खुश रह पाते है। दिनभर अपने चेहरे पर सिर्फ थकान लिए घूमते रहते है। और ओत एयर शरीर में एनर्जी लेवल कम होने के कारण चिडचिडे भी हो जाते है जिसकी वजह से आपको बात-बात पर गुस्सा आने लगता है। अगर आप भी इस समस्या से अक्सर परेशान रहते है तो अब चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यहाँ हम आपको सुबह कमजोरी और थकान महसूस होने के कारण और उसके कुछ उपाय बता रहे है जिसकी मदद से इस कमजोरी को दूर किया जा सकता है।

सुबह-सुबह कमजोरी या थकान महसूस होने के कारण :-सुबह कमजोरी

सुबह जागते ही कमजोरी महसूस होना बेवजह नहीं होता इसके पीछे कोई न कोई कारण अवश्य होता है। यहाँ हम आपको उन्ही कारणों के बारे में बता रहे है –

  • कोई लंबी बीमारी।
  • नींद का पूरा नहीं होना।
  • खराब भोजन करना।
  • अनियमित दिनचर्या।
  • थाइराइड की समस्या।
  • शरीर में एसिड का अधिक निर्माण होना।
  • आहार में पोषक तत्वों की कमी होना।

सुबह होने वाली कमजोरी और थकान को दूर करने के तरीके :

यहाँ हम आपको कुछ आसान तरीके दे रहे है जिनकी मदद से सुबह-सुबह होने वाली कमजोरी और थकान को दूर किया जा सकता है।

1. पूरी नींद लें :

अधूरी नींद लेना और सही समय पर नहीं सोना, सुबह महसूस होने वाली कमज़ोरी का सबसे बड़ा कारण होता है। इसलिए जरुरी है की आप समय पर सोयें और समय पर ही जागने की कोशिश करें। ऐसा करने से न केवल आपका स्वास्थ्य बेहतर होगा और आप सुबह तरोताज़ा हो कर उठेंगे। इसके अलावा आपके शरीर में भी सुस्ती महसूस नहीं होगी।

2. ठंडे पानी से स्नान :

ठंडा पानी किसी भी सुस्ती को भगाने का सबसे सरल माध्यम होता है। अपने कमजोरी को दूर करने के लिए रोजाना सुबह ठंडे पानी से नहाएं, इससे आपका ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होगा और आप तरोताजा महसूस करेंगे। ठंडे पानी से तंत्रिका प्रणाली भी अच्छी होती है जिसकी वजह से आप दिन भर ताजगी महसूस करेंगे।

3. व्यायाम करें :

सुबह की कमजोरी दूर करने के लिए रोजाना जल्दी उठें और व्यायाम करें। इससे आपका ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होगा और आप दिनभर उर्जावान महसूस करेंगे। इसके लिए आप मोर्निंग वाक या हलकी फुलकी कसरत की सहायता ले सकते है।

4. चाय या कॉफ़ी का सेवन :

रोजाना सुबह जागने के बाद गर्म चाय का सेवन करना चाहिए। ताकि आप उर्जावान रहें। अगर आपको अक्सर सुबह के समय कमजोरी महसूस होती है तो उसके लिए, तुलसी की पत्तियों की चाय बनाएं और उसका सेवन करें। तुलसी में एंटी ओक्सिडेंट पाए जाते है, जो शरीर की ऊर्जा को बढ़ाते है। जबकि कॉफ़ी में कैफीन की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो शरीर में एनर्जी लेवल को बढाती है।

5. फलों का रस :

सुबह जागने पर अगर कमजोरी या थकान महसूस होती है तो उसके लिए अंगूर के रस का सेवन करें इससे शरीर को शक्ति मिलती है। आप चाहे तो नींबू के रस का सेवन करके भी शरीर को तरोताजा रख सकते है इसमें मौजूद विटामिन सी और सिट्रिक एसिड सुबह की थकान को दूर करता है। इसके अलावा ताजे रसीले फलों का सेवन करने से भी शरीर में ताजगी रहती है और थकान महसूस नहीं होती।

6. बेहतर नाश्ता :

शायद आपको नहीं पता लेकिन आपका नाश्ता भी आपकी कमजोरी को दूर करने में मदद कर सकता है। लेकिन इसके लिए आपको अच्छा और स्वास्थ्यवर्धक नाश्ता करना होगा। जिसमे हरी सब्जियां और फलों का रस हो। नाश्ते हो हैवी रखने की बजाय संतुलित रहें ताकि सभी पोषक तत्व सही मात्रा में शरीर में पहुंचे। और आपको कमजोरी महसूस न हो।

तो ये थे, सुबह कमजोरी महसूस होने के कुछ विशेष कारण और उनके उपाय जिनका प्रयोग करके आप इस समस्या से हमेशा के लिए निजात पा सकते है।

जांघ में रगड़ या काछ का उपचार

जांघ में रगड़ होने के कारण चलने फिरने में परेशानी, खुजली व् जलन महसूस होना आम बात होती है। इन्हे रैशेस की समस्या भी कहा जाता है, यह कोई बिमारी नहीं होती है। बल्कि स्किन के साथ होने वाला एक साइड इफ़ेक्ट होता है, जो की स्किन में घर्षण होने के कारण हो जाता है। यह परेशानी गर्मियों व् बरसात के मौसम में ज्यादा होती है। साथ ही इसका एक कारण अधिक पसीना आना भी हो सकता है। और कई बार यदि स्किन में संक्रमण हो जाए तो भी आपको यह परेशानी हो सकती है।

जिन लोगो का वजन अधिक होता है, जो लोग पैरों को सटाकर चलते है, साइकिलिंग करते है, जॉगिंग अधिक करते है, उन्हें इस परेशानी का सामना अधिक करना पड़ता है। क्योंकि इससे आपकी जांघो के बीच अधिक घर्षण उत्त्पन्न होता है जिसके कारण आपको यह परेशानी हो सकती है। और यह समस्या केवल बड़ो को ही नहीं बल्कि बच्चों को भी हो सकती है। तो आइये आज हम आपको जांघो पर रगड़ लगने के कारण होने वाली परेशानी से बचने के कुछ आसान उपाय बताते है।

जांघ में रगड़ या काछ के कारण:-

  • स्किन में अधिक नमी होने के कारण।
  • अधिक साइकिलिंग या जॉगिंग करने के कारण।
  • जांघो के आस पास रगड़ होने के कारण।
  • स्किन के अधिक सूखे होने पर।
  • जो लोग ज्यादा टाइट कपडे पहनते है उन्हें भी यह परेशानी हो सकती है।
  • फंगल या बैक्टीरियल संक्रमण के कारण भी ऐसा हो सकता है।
  • जिन लोगो को अधिक पसीना आता है उन्हें भी यह परेशानी हो सकती है।
  • पैरों को अधिक सटाकर चलने वालो को भी यह समस्या हो सकती है।

जांघ पर रगड़ की समस्या से बचने के उपाय:-

तुलसी:-

तुलसी में मौजूद औषधीय गुण आपको इस समस्या से बचाने में मदद करते है। इसके लिए आप तुलसी के पत्तो को पीसकर उसके बाद उसमे थोड़ा सा काला नमक मिलाएं। और इसे रगड़ वाली जगह पर लेप की तरह इस्तेमाल करें। और थोड़ी देर के लिए लगा रहने दें, रगड़ के पूरी तरह ठीक हो जाने तक इस तरीके का इस्तेमाल करें।

सफ़ेद सिरका:-

चार बड़े चम्मच पानी में एक बड़ा चम्मच सफ़ेद सिरके का मिलाकर अच्छे से गर्म करें, उसके बाद रुई की मदद से इसे रगड़ पर लगाएं। और इसे अच्छे से साफ़ करें, इससे उसके आस पास मौजूद बैक्टेरिया को खत्म करके, रगड़ को ठीक करने में मदद मिलेगी। ऐसा दिन में दो से तीन बहार करें।

नारियल का तेल:-

नारियल का तेल भी आपकी स्किन से जुडी परेशानी को हल करने का एक असरदार उपाय है। इसके लिए आप दिन में दो से तीन बार अच्छे से नारियल का तेल अपनी रगड़ पर लगाएं, इससे आपकी स्किन को ठीक होने में मदद मिलती है।

एलोवेरा:-

एलोवेरा भी आपकी त्वचा को ठंडक देने में मदद करता है। इसके लिए आप एलोवेरा के ताजे पत्ते को तोड़कर उसका जेल निकाल लें। और हल्के हाथों से इसे अच्छे से अपनी रगड़ पर लगाएं, ऐसा करने से आपकी स्किन को ठंडक पहुँचने में मदद मिलती है। और रगड़ पर नियमित लगाने से इस समस्या से बहुत जल्दी निजता पाने में मदद मिलती है।

टी ट्री ऑयल:-

टी ट्री ऑयल में मौजूद औषधीय गुण आपको इस परेशानी से वचाने के साथ संक्रमण से बचाव करने में भी मदद करते है। इसके लिए आप दिन में दो बार चार से पांच बूंदे टी ट्री ऑयल की अच्छे से अपनी रगड़ पर लगाएं। इसका असर आपको एक ही दिन में दिखाई देने लगेगा।

खट्टी दही:-

खट्टी दही को भी रैशेस पर लगाने से भी आपको राहत मिलती है, इसके लिए आप दही को लगाकर थोड़ी देर के लिए छोड़ दें, उसके बाद पानी की मदद से इसे साफ़ कर दें, दिन में दो बार अच्छे से इसे स्किन पर लगाएं, इससे आपको जांघो से जुडी इस परेशानी का समाधान करने में मदद मदद मिलती है।

निम्बू:-

नारियल के तेल में निम्बू या फिर केले को मैश करके इसमें निम्बू का रस मिलाकर रगड़ पर अच्छे से लगाएं। उसके बाद इसे थोड़ी देर के लिए ऐसे ही छोड़ दें, ऐसा दिन में दो बार करें जब तक की आपको अच्छे से आराम न आ जाए। इससे आपको इस समस्या को जल्दी खत्म करने में मदद मिलती है।

नीम:-

नीम के पत्तों को अच्छे से पीस कर लेप तैयार करें, उसके बाद इसे रगड़ पर लगाएं। उसके बाद इसे थोड़ी देर के लिए इसे ऐसे ही छोड़ दे, उसके बाद पानी में नीम के पत्तों को अच्छे से उबाल कर उस पानी के गुनगुना रहने पर इसे अच्छे से साफ़ करें। ऐसा करने से आपको इस समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही नीम के औषधीय गुणों के कारण यदि इन्फेक्शन हो तो उसे ठीक करने में भी मदद मिलती है।

जांघ में रगड़ या काछ से बचने के उपचार:-

  • विटामिन इ के तेल का इस्तेमाल करने से भी आपको इस समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है।
  • ओलिव ऑयल का प्रयोग करने से भी फायदा मिलता है।
  • अजवाइन को पीस कर पानी के साथ मिलाकर लेप तैयार करें और उसका प्रयोग करें।
  • सरसों के तेल और पाउडर को मिलाकर लगाने से भी आपको इससे बचने में मदद मिलती है।
  • यदि आपको ज्यादा परेशानी है तो आप इसके लिए डॉक्टर से भी राय ले सकते है।
  • ज्यादा टाइट कपडे नहीं पहनने चाहिए।

तो यदि आपको भी ये समस्या है तो आप भी ऊपर दिए गए टिप्स का इस्तेमाल कर सकते है इससे आपको जल्दी ही इस समस्या से बचने में मदद मिलती है। साथ ही सिंथेटिक कपड़ो को अधिक पहनने से बचना चाहिए क्योंकि इनके कारण भी आपको इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, खासकर गर्मियों में आपको जितना हो सके कॉटन के कपडे पहनने चाहिए।

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में सम्बन्ध बनाने से क्यों बचना चाहिए

गर्भावस्था के दौरान अधिकतर कपल्स के दिमाग में यह विचार जरूर आता है की इस समय सम्बन्ध बनाना सही होता है या नहीं? तो इसका जवाब है हाँ, प्रेगनेंसी के दौरान पूरी सावधानी का ध्यान रखते हुए सम्बन्ध बनाने की बिल्कुल भी मनाही नहीं होती है। लेकिन कुछ केस में गर्भवती महिला को सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए जैसे की प्रेगनेंसी में कॉम्प्लिकेशन हो, गर्भ में एक से ज्यादा बच्चे हो, हस्बैंड या वाइफ किसी को इन्फेक्शन हो, महिला का पहले गर्भपात हुआ हो, प्रेगनेंसी की पहली तिमाही हो, आदि। तो अब इस आर्टिकल में हम आपको गर्भावस्था की पहली तिमाही में प्रेग्नेंट महिला को सम्बन्ध बनाने से क्यों बचना चाहिए इस बारे में बताने जा रहें हैं। ताकि आपको प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह की परेशानी न हो।

गर्भपात या ब्लीडिंग का होता है खतरा

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में सम्बन्ध बनाने पर गर्भाशय पर थोड़ी सी चोट लगने के कारण ही महिला को ब्लीडिंग जैसी परेशानी होती है। और कुछ केस में ब्लीडिंग इतनी होने लगती है की महिला का गर्भ ही गिर जाता है। ऐसे में महिला को गर्भपात या ब्लीडिंग जैसी कोई समस्या न हो इसीलिए प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में सम्बन्ध बनाने की मनाही होती है।

इन्फेक्शन का सबसे ज्यादा डर होता है

गर्भावस्था की पहली तिमाही में सम्बन्ध बनाने के कारण महिला को इन्फेक्शन होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। और यदि महिला को गर्भाशय से जुड़ा संक्रमण हो जाता है तो इसके कारण गर्भ में बच्चे पर भी बुरा असर पड़ता है। ऐसे में इन्फेक्शन की समस्या से बचे रहने के लिए गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में सम्बन्ध न बनाने की सलाह दी जाती है।

प्रेग्नेंट महिला कर सकती है परेशानी का अनुभव

गर्भावस्था की पहली तिमाही में गर्भवती महिला केवल बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण ही परेशान नहीं होती है। बल्कि महिला शारीरिक व् मानसिक रूप से भी बहुत से बदलाव का अनुभव करती है। ऐसे में महिलाओं की सम्बन्ध बनाने की इच्छा नहीं होती है और यदि महिला सम्बन्ध बनाती है तो इसके कारण महिला की शारीरिक व् मानसिक परेशानियां बढ़ने का खतरा रहता है।

शिशु के शुरूआती विकास को हो सकता है खतरा

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में शिशु के शारीरिक विकास की शुरुआत हो रही होती है। ऐसे में सम्बन्ध बनाने के कारण शिशु के शुरूआती शारीरिक विकास में किसी तरह की कमी न आए। इस कारण प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में महिला को सम्बन्ध न बनाने की सलाह दी जाती है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में गर्भवती महिला को सम्बन्ध न बनाने की सलाह दी जाती है। तो ऐसे में यदि आपकी भी प्रेगनेंसी कन्फर्म हो गई है तो आपको भी सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए। इसके आलावा प्रेगनेंसी में जब भी सम्बन्ध बनाने चाहे तो उससे पहले एक बार अपने डॉक्टर की राय जरूर लें। ताकि प्रेगनेंसी में किसी तरह की कम्प्लीकेशन न हो और माँ व् बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

बरसात के मौसम गर्भवती महिला को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

प्रेगनेंसी महिला के लिए एक ऐसा समय होता है जो नाजुक होने के साथ खुशियों से भरा हुआ होता है। शारीरिक परेशानियों के साथ माँ बनने के नए नए अनुभवों से भरा होता है। इसीलिए तो कहा जाता है की माँ बनना हर महिला की जिंदगी का सबसे बेहतरीन पल होता है। लेकिन इस बेहतरीन पल को अच्छे से एन्जॉय करने के साथ गर्भवती महिला को बहुत सी बातों का ध्यान भी रखना पड़ता है।

ताकि प्रेगनेंसी में किसी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स न आएं। और मौसम के बदलाव के साथ महिला को अपने रहन सहन, खाने पीने के तरीके आदि में भी बदलाव करना जरुरी होता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेग्नेंट महिला को बरसात के मौसम में किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए इस बारे में बताने जा रहे हैं।

खान पान का रखें ध्यान

बरसात के मौसम में होने वाली परेशानियों से बचने के लिए प्रेग्नेंट महिला को अपने खान पान का खास ध्यान रखना चाहिए। जैसे की स्ट्रीट फ़ूड नहीं खाना चाहिए, बाहर का खाना खाने से परहेज करना चाहिए, बासी खाना नहीं खाना चाहिए, नॉन वेज नहीं खाएं, आदि। क्योंकि ऐसे आहार का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को पेट सम्बन्धी परेशानियां होने के साथ फ़ूड पोइज़निंग का भी खतरा होता है। इसके अलावा बरसात के मौसम में सर्दी खांसी की परेशानी से बचाव के लिए ठंडी चीजों को खाने व् ठंडा पानी पीने से भी प्रेग्नेंट महिला को परहेज करना चाहिए।

बाहर निकलने से बचें

बरसात के मौसम में जितना हो सके प्रेग्नेंट महिला को घर पर ही रहना चाहिए। क्योंकि बाहर निकलने पर बरसात में भीगने के कारण आपको सर्दी, खांसी, इन्फेक्शन जैसी परेशानी होने के साथ बुखार होने का खतरा भी अधिक होता है।

तरल पदार्थों का भरपूर सेवन करें

बरसात के मौसम में भी पानी पीने की इच्छा कम ही होती है। लेकिन गर्भवती महिला को पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए। क्योंकि पानी की कमी के कारण महिला व् बच्चे दोनों को डीहाइड्रेशन के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा आपको फिल्टर्ड पानी ही पीना चाहिए या हो सके तो पानी को उबालकर ठंडा करने के बाद उसका सेवन करें।

चलने में सावधानी बरतें

वैसे तो जितना हो सके बरसात के मौसम में गर्भवती महिला को घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। क्योंकि इस मौसम में कीचड़ के कारण फिसलने का खतरा अधिक होता है। और यदि गर्भवती महिला फिसल जाती है तो इसके कारण माँ व् बच्चे दोनों को परेशानी हो सकती है। लेकिन यदि किसी काम से महिला को घर से बाहर निकलना भी पड़ता है तो महिला को आरामदायक और जो चप्पल फिसलने वाली न हो उसे पहनना चाहिए। और हो सके तो कोई लाठी आदि लेकर या किसी का सहारा लेकर चलना चाहिए। ताकि गिरने के डर से बचा जा सके।

कपड़ों का ध्यान रखें

बरसात में मौसम ठंडा जरूर हो जाता है लेकिन इसके कारण उमस भी हो जाती है जिसके कारण अधिक पसीना आता है। ऐसे में महिला को घबराहट भी अधिक महसूस हो सकती है साथ ही मच्छर आदि भी इस मौसम में अधिक हो जाते हैं। इसीलिए गर्भवती महिला को पसीने और मच्छरों के कारण कोई दिक्कत न हो तो इससे बचने के लिए महिला को अपने पहनावे का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। जैसे की महिला को पूरी बाजू के, आपके साइज से थोड़े खुले और हवादार कपडे पहनने चाहिए। ऐसे कपडे आरामदायक होने के साथ इन परेशानियों से बचे रहने में भी मदद करते हैं।

साफ़ सफाई का ध्यान रखें

बरसात के मौसम में कीटाणु बहुत तेजी से फैलते हैं। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को अपने घर के साथ अपनी साफ़ सफाई का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। जैसे की गर्भवती महिला को नीम को पानी में उबालकर उस पानी को अपने नहाने वाले पानी में मिलाकर उससे नहाना चाहिए। इसके अलावा बरसात में भीगना नहीं चाहिए, यदि बाहर पानी भरा है तो उस पानी में नहीं जाना चाहिए, कुछ भी खाने या पीने से पहले हाथों को अच्छे से धोना चाहिए, आदि।

तो यह हैं कुछ सावधानियां जो गर्भवती महिला को बरसात के मौसम में बरतनी चाहिए। यदि प्रेग्नेंट महिला इन सभी बातों का ध्यान रखती है। तो ऐसा करने से बरसात के मौसम में होने वाली परेशानियों से गर्भवती महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

पीरियड आने से पहले पेट में गैस होने के कारण

पीरियड्स महिलाओं को हर महीने होने वाली एक शारीरिक परेशानी होती है। जैसे ही महिला को पीरियड्स आने वाले होते हैं तो महिला की बॉडी कुछ संकेत दे सकती है। जैसे की टांगो, पेट, पेट के निचले हिस्से में दर्द महसूस होना, मांसपेशियों में खिंचाव होना आदि। साथ ही कुछ महिलाएं इस दौरान पेट में गैस या पेट फूलने की समस्या से भी परेशान हो सकती है। लेकिन क्या अपने सोचा है की पीरियड्स से पहले आखिर ऐसा क्यों होता है। तो आइये आज हम इस आर्टिकल में बताते हैं की पीरियड्स से पहले महिला या लड़कियों के पेट में गैस होने का क्या कारण होता है।

पीरियड्स में गैस की समस्या होने का कारण

  • मासिक धर्म की शुरुआत होने से पहले ही बॉडी में में हार्मोनल बदलाव होने शुरू हो जाते हैं।
  • पीरियड्स के पहले बॉडी में प्रोजेस्ट्रोन हॉर्मोन में बदलाव आता है।
  • जिसके कारण महिला को मूड स्विंग्स जैसी समस्या होने के साथ पाचन तंत्र से जुडी समस्या भी हो सकती है।
  • और पाचन तंत्र से जुडी समस्या के कारण महिला को मल त्यागने में दिक्कत जैसी समस्या होने के साथ पेट फूलने जैसी समस्या भी हो सकती है।
  • जो की पीरियड्स के खत्म होने के बाद खत्म हो जाती है।
  • पेट फूलने के साथ इस दौरान डायरिया जैसी परेशानी होने का भी खतरा रहता है।
  • इसीलिए पीरियड्स के दौरान भी महिला को अपने खान पान का ध्यान रखना जरुरी होता है।

पीरियड्स में पेट में गैस की समस्या से बचने के टिप्स

  • जितना हो सके तरल पदार्थों का भरपूर सेवन करें।
  • फाइबर युक्त आहार को अपनी डाइट में शामिल करें यह पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में आपकी मदद करता है।
  • जैसे की हरी पत्तेदार सब्जियां, मछली, दही, केला, पपीता आदि।
  • व्यायाम व् योगासन करें इससे भी पाचन क्रिया को सही काम करने में मदद मिलती है।
  • ज्यादा तला हुआ, मसालेदार, जंक फ़ूड आदि का सेवन पीरियड्स से एक हफ्ते पहले या पीरियड्स में करने से बचें।

तो यह है पीरियड्स के दौरान पेट फूलने के कारण। साथ ही इस समस्या से बचने के कुछ उपचार भी ऊपर बताएं गए हैं। यदि आपको भी पीरियड्स के दौरान यह समस्या होती है। तो इन टिप्स का इस्तेमाल करने से आपको पीरियड्स के दौरान इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में मूली व् गाजर खाने के फायदे

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प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपने खान पान का बेहतर तरीके से ध्यान रखना पड़ता है, क्योंकि महिला का बेहतर खान पान न केवल गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने में मदद करता है, बल्कि इससे गर्भ में पल रहे शिशु का विकास भी बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है। तो आज हम प्रेगनेंसी के दौरान आपको गाजर व् मूली खाने के फायदे बताने जा रहें हैं, जिन्हे आप सब्ज़ी या सलाद के रूप में खा सकते हैं, साथ ही गाजर का जूस बनाकर भी उसका सेवन कर सकते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं गाजर और मूली खाने से प्रेगनेंसी के दौरान आपको कौन से फायदे मिलते हैं।

प्रेगनेंसी में मूली खाने के फायदे

मूली का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान महिला को भरपूर करना चाहिए, क्योंकि इसके कारण महिला को बहुत से फायदे मिलते हैं जो प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली बहुत सी परेशानियों से महिला को निजात दिलाने में मदद करते हैं।

ब्लड प्रैशर को नियंत्रित करता है

प्रेगनेंसी के दौरान रक्तचाप का बढ़ना परेशानी का कारण बन सकता है, लेकिन यदि आप मूली का सेवन करती है तो इसके कारण आपकी उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

शुगर कण्ट्रोल करता है

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला को अपनी शुगर के कारण होने वाली परेशानी से बचाव करना है और साथ ही शुगर को नियंत्रित करना है, तो महिला को नियमित एक मूली का सेवन जरूर करना चाहिए।

बवासीर के लिए

प्रेगनेंसी के दौरान वजन बढ़ने के कारण मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जिसके कारण महिला को बवासीर जैसी समस्या से परेशान होना पड़ सकता है। लेकिन यदि महिला प्रेगनेंसी के दौरान मूली का सेवन करती है। तो ऐसा करने से पाइल्स की समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है।

पेट सम्बन्धी समस्या से बचाव करती है

मूली का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करने से महिला को पेट सम्बन्धी समस्या जैसे कब्ज़, एसिडिटी आदि की परेशानी से निजात मिलता है। साथ ही यह पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में भी मदद करता है, क्योंकि इसमें घुलनशील फाइबर भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। इसके अलावा मूली का सेवन करने से किडनी को स्वस्थ रखने में भी मदद मिलती है जिससे शरीर में मौजूद विषैले पदार्थ बाहर निकलते है, और प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला और शिशु दोनों को ही स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

हाइड्रेट रहते हैं

मूली में पानी भी अधिक मात्रा होता है जिसके कारण प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी को हाइड्रेट रहने में भी मदद मिलती है, और आपको पानी की कमी के कारण होने वाली परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता है।

स्किन के लिए

प्रेगनेंसी के दौरान स्किन से जुडी समस्याएं भी हो सकती है, ऐसे में दाग धब्बो से बचने के लिए आप यदि मूली की स्लाइस काटकर त्वचा को उससे साफ़ करती है तो ऐसा करने से प्रेगनेंसी के दौरान आपको अपनी स्किन की सुंदरता को बढाए रखने में मदद मिलती है।

वजन को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है

मूली में फाइबर अधिक मात्रा में होता है, साथ ही इसमें पानी की मात्रा भी अधिक होती है जिसके कारण यह प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में अधिक फैट का जमाव नहीं होने देती है। और प्रेगनेंसी के दौरान भी आपके वजन को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।

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गर्भावस्था में मूली खाने के फायदे

प्रेगनेंसी के दौरान गाजर खाने के फायदे

विटामिन इ, कैल्शियम, फाइबर, आयरन व् अन्य गुणों से भरपूर गाजर का सेवन भी प्रेगनेंसी के दौरान बहुत फायदेमंद होता है, गर्भवती महिला इसे सलाद सब्ज़ी, या इसका जूस निकालकर भी इसका सेवन कर सकती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान गाजर का सेवन करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

खून की कमी पूरी होती है

प्रेगनेंसी के दौरान खून की कमी के कारण महिला को एनीमिया की समस्या होने के साथ डिलीवरी के समय भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन यदि महिला नियमित गाजर का सेवन करती है, या एक गिलास गाजर का जूस पीती है तो इसके कारण महिला के शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है। साथ ही इसके सेवन से बॉडी में नए ब्लड का निर्माण भी होता है।

यूरिन इन्फेक्शन

कई महिलाओं को प्रेगनेंसी के समय यूरिन इन्फेक्शन की समस्या से परेशान होना पड़ता है, लेकिन गाजर का सेवन आपकी इस परेशानी को खत्म करने में भी आपको मदद करता है। आप इसके लिए गाजर के मुरब्बे का सेवन भी कर सकते हैं।

कमजोरी दूर करता है

प्रेगनेंसी के दौरान गाजर का सेवन आपको ऊर्जा से भरपूर रखने में भी मदद करता है। गाजर का सेवन करने से शरीर में आई कमजोरी को दूर करने में और थकावट जैसी परेशानी से निजात पाने में भी आपको फायदा मिलता है।

भ्रूण के विकास के लिए फायदेमंद

शिशु के विकास के लिए जरुरी पोषक तत्व की कमी को पूरा करने में भी गाजर का सेवन आपकी मदद करता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान शिशु के बेहतर विकास के लिए भी गाजर का सेवन आपको जरूर करना चाहिए।

इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ सकता है, जिसके कारण आपको परेशानी हो सकती है, ऐसे में गाजर का सेवन करने से आपकी इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो आपको प्रेगनेंसी के दौरान मूली व् गाजर खाने से मिलते हैं, तो यदि आप भी गर्भवती है और गर्भावस्था के दौरान होने वाली परेशानियों से बचना चाहती हैं और स्वस्थ रहना चाहती हैं तो आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान मूली व् गाजर का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।

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गर्भावस्था में गाजर खाना कितना जरुरी है जानिये?