Home Blog Page 266

समय से पहले डिलीवरी से बचने के उपाय

समय से पहले डिलीवरी से बचने के उपाय, समय से पहले प्रसव से बचने के टिप्स, समय से पहले डिलीवरी होने के कारण, समय पूर्व प्रसव के खतरे को कम करने के उपाय

यदि शिशु का जन्म नौ महीने पूरे होने से पहले हो जाता है तो इसे समय पूर्व प्रसव कहा जाता है। और ऐसा होने के कारण न केवल शिशु कमजोर होता है, बल्कि शिशु का बीमारियों की चपेट में आने के साथ और भी समस्याएं हो सकती है। साथ ही इसके कारण महिला को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। समय से पहले शिशु का जन्म होने के बहुत से कारण हो सकते हैं जैसे की प्रेगनेंसी के दौरान महिला का अपना अच्छे से ध्यान न रखना, मानसिक रूप से परेशान यानी तनाव अधिक लेना, वजन का ज्यादा होना, शुगर होने के कारण, खान पान के प्रति लापरवाही करना, पेट पर अधिक जोर डालना आदि। ऐसा न हो और डिलीवरी के बाद महिला और नवजात दोनों स्वस्थ रहे इसके लिए आपको कुछ टिप्स का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, तो आइये अब जानते हैं की वो टिप्स कौन से है।

संतुलित आहार लें

खान पान में लापरवाही न केवल प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कमजोर बनाती है बल्कि इसके कारण शिशु का विकास भी कम होता है। खान पान का अच्छे से ध्यान न रखने के कारण शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने लगती है। जिसके कारण प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, और शरीर में कमजोरी होने के कारण आपको समय से पहले प्रसव हो सकता है। ऐसे में आपको अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए और पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए।

तनाव से बचें

तनाव प्रेगनेंसी के दौरान महिला की न केवल परेशानी को बढ़ाता है, बल्कि प्रेगनेंसी की शुरुआत के दिनों में इसके कारण गर्भपात होने का खतरा भी रहता है। और यदि महिला प्रेगनेंसी के दौरान हमेशा तनाव में रहती है तो इसके कारण समय से पहले शिशु का जन्म हो सकता है, और शिशु पर भी इसका बुरा असर पड़ता है। ऐसे में स्वस्थ रहने के लिए और डिलीवरी से जुडी इस समस्या से निजात पाने के लिए आपको प्रेगनेंसी के दौरान तनाव नहीं लेना चाहिए।

कुछ खाद्य पदार्थो से भी करें परहेज

प्रेगनेंसी के समय कुछ ऐसी चीजे होती है जिनका सेवन आपके लिए परेशानी का कारण बन सकता है। जैसे की कच्चा पपीता इसमें लेटेक्स की मात्रा अधिक होने के कारण यह आपके गर्भपात और समय से पहले डिलीवरी का कारण भी बन सकता है, इसीलिए आपको कच्चा पपीता, अंगूर, अनानास, कटहल, आदि का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करना चाहिए।

नींद ले भरपूर

नींद में कमी के कारण तनाव, बॉडी में ब्लड फ्लो का बेहतर न होना जैसी समस्या बढ़ सकती है। साथ ही इसके कारण शिशु के विकास में भी कम आती है, और शिशु का जन्म भी समय से पहले हो सकता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने के साथ समय से पहले डिलीवरी से बचने के लिए आपको अपनी नींद को भरपूर लेना चाहिए।

वजन पर रखे कण्ट्रोल

अधिक वजन भी समय से पहले प्रसव का कारण होता है, ऐसे में यदि आपका वजन अधिक है तो आपको अपने वजन पर नियंत्रण रखना चाहिए। क्योंकि जितना आप प्रेगनेंसी के दौरान फिट रहेंगी उतना ही आपको प्रेगनेंसी में होने वाली परेशानियों से राहत पाने में मदद मिलेगी।

बीमारियों से रहें सुरक्षित

गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह की बिमारी से बचाव के लिए आपको डॉक्टर से जरूर राय लेनी चाहिए, और यदि कोई बिमारी है तो उसका इलाज करना चाहिए। जैसे की यदि आप शुगर से ग्रसित हैं, या रक्तचाप बढ़ने की समस्या है तो इसके कारण समय से पहले प्रसव हो सकता है।

शराब व् धूम्रपान से करें परहेज

गर्भधारण के बाद अल्कोहल और धूम्रपान करने के कारण न केवल समय से पहले प्रसव होता है बल्कि इसके कारण शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास पर भी बुरा असर पड़ता है।

दवाइयों का सेवन

प्रेगनेंसी के दौरान आपको बिना डॉक्टर की राय के किसी भी तरह की दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि यदि आप ऐसा करती हैं तो इसके कारण भी आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही शिशु पर भी इसका असर पड़ता है। और यदि आप अधिक एंटीबायोटिक दवाइयों का सेवन करती है। तो इसके कारण भी आपको समय से पहले प्रसव की समस्या हो सकती है।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका आपको प्रेगनेंसी के दौरान ध्यान रखना चाहिए ऐसा करने से प्रेगनेंसी के दौरान और प्रसव के बाद महिला और शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। साथ ही इन टिप्स को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से आपको समय से पहले डिलीवरी की समस्या से बचने में भी फायदा होता है।

प्रेगनेंसी में निम्बू पानी पीने के 8 फायदे

प्रेगनेंसी में निम्बू पानी पीने के 8 फायदे, प्रेगनेंसी में निम्बू पानी पीने के फायदे, गर्भवती महिला को क्यों पीना चाहिए निम्बू पानी, गर्भावस्था के दौरान निम्बू पानी पीने के फायदे, निम्बू पानी पीने के फायदे , Benefits of drinking lemon water while pregnant

प्रेगनेंसी के दौरान खान पान का विशेष ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि इस दौरान महिला बहुत सी परेशानियों से गुजरती है ऐसे में गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास के लिए अपने डाइट प्लान में भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों को शामिल करने की सलाह दी जाती है। तो आज हम आपको एक ऐसी ड्रिंक के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे न केवल घर में बनाना आसान है बल्कि गर्भवती महिला को उसके सेवन से बहुत से फायदे भी मिलते हैं। और वो है निम्बू पानी, यह न केवल गर्भवती महिला बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी फायदेमंद होता है। तो लीजिये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान निम्बू पानी पीने से कौन से फायदे मिलते हैं।

मॉर्निंग सिकनेस से दिलाता है आराम

ज्यादातर महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान सुबह उठते समय परेशानी का अनुभव करती है इस समय उल्टी आने का मन करना जी मचलाना जैसी समस्या होने लगती है। ऐसे में विटामिन सी और पोटैशियम से भरपूर निम्बू पानी का सेवन करने से गर्भवती महिला को इस परेशानी से राहत पाने में मदद मिलती है।

पाचन क्रिया को करे मजबूत

कब्ज़, एसिडिटी, खाना पचाने में परेशानी का होना, पेट में गैस, हल्का दर्द रहना, आदि पेट से जुडी समस्या का प्रेगनेंसी में होना आम बात होती है। ऐसे में निम्बू पानी का सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली पेट से जुडी इन सभी परेशानियों को दूर करके पाचन क्रिया को दुरुस्त करने और मेटाबोलिज्म को बढ़ाने में मदद मिलती है।

इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करता है

विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर निम्बू पानी का सेवन करने से बॉडी में होने वाले सभी विषैले पदार्थो और फ्री रेडिकल्स को बाहर निकालकर, प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले इन्फेक्शन से बचाव के साथ इम्युनिटी को मजबूत करने में मदद मिलती है।

सूजन से आराम

कुछ गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान हाथों पैरों में सूजन की समस्या हो सकती है। ऐसे में निम्बू पानी में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट और विटामिन सी इस समस्या से राहत दिलाने में मदद करते हैं। लेकिन यदि सूजन की समस्या अधिक हो और हाथों और पैरों के साथ मुँह पर भी आने लगे तो इसे अनदेखा न करते हुए एक बार डॉक्टर से राय जरूर लेनी चाहिए।

पानी की कमी को करता है पूरा

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में पानी की कमी बहुत सी परेशानियों को बढ़ावा दे सकती है। ऐसे में निम्बू पानी का सेवन करने से शरीर में होने वाली पानी की कमी की समस्या से आराम मिलता है, साथ ही गर्भवती महिला को एनर्जी भी मिलती है जो गर्भवती महिला को रिलैक्स और फ्रैश महसूस करवाने में मदद करती है।

ब्लड प्रैशर कण्ट्रोल करता है

निम्बू में विटामिन की मात्रा अधिक होती है जो रक्त वाहिकाओं की मजबूती को बनाएं रखने में मदद करती है, साथ ही बॉडी में ब्लड फ्लो को भी बेहतर तरीके से करने में मदद करती है। जिसके कारण ब्लड प्रैशर को कण्ट्रोल में रखने में मदद मिलती है। इसके अलावा यह बॉडी में कोलेस्ट्रॉल को कण्ट्रोल करने में भी मदद करता है।

डिलीवरी के दौरान तनाव को कम करने में मदद करता है

डिलीवरी के दौरान महिला को तनाव के साथ बहुत ही ज्यादा दर्द की परेशानी भी हो सकती है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान निम्बू पानी का सेवन करती है तो ऐसा करने से डिलीवरी के दौरान होने वाली परेशानी को कम करने में मदद मिलती है।

शिशु के लिए है फायदेमंद

गर्भावस्था के दौरान निम्बू पानी का सेवन गर्भवती महिला के लिए ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी फायदेमंद होता है। निम्बू पानी का सेवन करने से गर्भ में पल रहे शिशु को संक्रमण से बचाव करने के साथ, पोटैशियम की मात्रा भरपूर होने के कारण शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास, और शिशु के मस्तिष्क के बेहतर विकास में भी बहुत मदद करता है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान निम्बू पानी का सेवन करने से मिलते हैं। इसीलिए दिन में एक या दो गिलास निम्बू पानी का सेवन गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए।

Hindi Video : Lemon water during Pregnancy

Nimbu Pani Fayde Pregnant Woman ke Liye

होंठ फटने का घरेलु इलाज

होंठो का सुखना और फटना बहुत ही आम बात है। होंठो की त्वचा में कोई भी प्राकृतिक तेल नहीं होता है यही कारण है के मौसम बदलते ही होंठो पर सबसे पहले असर दिखने लगता है। होंठो के फटने का सबसे बड़ा कारण होता है इनका रूखापन। होंटो के फटने से चेहरे की सुंदरता तो खराब होती ही है साथ ही दर्द भी होता है। होंठो के ज्यादा फटने और सूखने के कारण से कई बार खून भी निकलने लगता है। होंठो की त्वचा को खास देखभाल और सुरक्षा की जरुरत होती है।

होंठो के फटने के कारण

किसी भी चीज को ठीक करने के लिए उसके कारण के बारे में जानना जरुरी है। आइये जानते है होंठो के फटने के कारण कौन कौन से है।

  • शरीर में विटामिन की कमी होने का असर सबसे पहले होंठो पर दिखता है।
  • होंठो की त्वचा बहुत ही नरम होती है ठीक से सुरक्षा और देखभाल ना करने पर त्वचा फटने लगती है।
  • जो लोग मुँह से सांस लेते है उन लोगो के भी होंठ बहुत जल्दी फटने लगते है।
  • किसी प्रकार के एलर्जिक रिएक्शन के कारण भी होंठ फट जाते है।
  • शरीर में पानी की कमी होने से भी होंठो की त्वचा फटने लगती है।
  • सिगरेट का सेवन करने से भी होंठ फटते है।
  • धुप की अधिकता के कारण भी होंठो की त्वचा पर असर पड़ता है।
  • मौसम बदलने से सबसे पहले होंठो पर ही असर होता है।
  • कई लोगो की आदत होती है बार बार होंठो पर जीभ फेरने की पर यही आदत उनके होंठ फटने का कारण भी बनती है।

फटे होंठो को ठीक करने के उपाय

आइये जानते है के होंठो की फटी त्वचा को कैसे ठीक किया जा सकता है।

चीनी

होंठो के फटने से उन पर डेड स्किन जमा हो जाती है अगर स्क्रब करके के डेड स्किन को निकाल दिया जाए तो होंठो की प्राकृतिक कोमलता को वापस पाया जा सकता है। दो चम्मच चीनी को एक चम्मच शहद में मिलाये। इस मिश्रण को होंठो पर लगाए और एक मिनट के लिए छोड़ दे। हल्के हाथों से इस मिश्रण अपने होंठो पर मले और डेड स्किन को निकाल ले। और फिर हल्के गुनगुने पानी से धो लें। उसके बाद में थोड़ा सा शहद होंठो पर लगाए ताकि त्वचा प्राकृतिक रूप से होंठ सॉफ्ट बने।

शहद

होंठो की त्वचा को ठीक करने के लिए शहद बहुत ही फायदेमंद है। शहद एक प्राकृतिक मॉइस्चराइजर है और इसमें बहुत से एंटीबैक्टीरियल गुण मौजूद है। शहद को ऊँगली पर लेकर होंठो पर लगाए। इस उपाय को दिन में तीन से चार बार इस्तेमाल कर सकते है। आप चाहे तो रात में लगाकर सोये और सुबह उठकर मुलायम होंठ पाए।

गुलाब की पत्तियां

फटे हुए होंठो का इलाज करने के लिए गुलाब की पत्तियां बहुत ही अच्छा इलाज है। इसके इस्तेमाल से होंठो की त्वचा बहुत ही मुलायम बन जाती है और साथ ही होंठो का प्राकृतिक रंग भी निखरता है। गुलाब की कुछ पत्तियों को दूध में भिगोये और कुछ देर बाद गुलाब की पत्तियों और दूध को मिलाकर एक पेस्ट तैयार कर लें। इस पेस्ट को रोजाना दो से तीन बार लगाए इससे आपके फटे होंठ पूरी तरह से ठीक होकर सॉफ्ट बनेंगे।

कास्टर आयल

कास्टर आयल फटे होंठो को ठीक करने के लिए बहुत ही अच्छा हाइड्रेट तत्व है। रोजाना दिन में एक बार कास्टर आयल को होंठो की त्वचा पर जरूर इस्तेमाल करे। आप चाहें तो जब तक होंठो की त्वचा ठीक ना हो जाए तब तक रोजाना कास्टर आयल, ग्लिसरीन और निम्बू के रस को बराबर मात्रा में मिलाकर इस्तेमाल करे। इससे आपकी होंठो की त्वचा पूरी तरह से ठीक होकर एकदम मुलायम बन जायेंगे।

एलोवीरा जेल

त्वचा के रोगों को ठीक करने के लिए एलोवीरा जेल के गुणों को बहुत लाभदायक माना जाता है। रोजाना एलोवेरा का ताजा जेल लेकर होंठो पर लगाए। इस जेल की मदद से फटे होंठो का दर्द भी ठीक होगा साथ ही त्वचा भी मुलायम होगी। एलोवेरा होंठो की त्वचा की प्राकृतिक रंगत भी निखारने के काम आता है।

पानी

जैसा की हम पहले भी बता चुके है के होंठो की त्वचा में कोई भी प्राकृतिक तेल नहीं होता है। जिसके कारण देखभाल ना मिलने पर बहुत जल्दी सूखने लगते है। होंठो का मॉइस्चराइजर बनाये रखने के लिए रोजाना दिन में 8 से 10 ग्लास पानी जरूर पिए। रात को सोने से पहले हल्का गर्म पानी जरूर पिए। इससे होंठो की त्वचा को बहुत ही फायदा मिलेगा।

खीरा

फटे होंठो की सेहत सुधारने के लिए खीरा या खीरे का जूस बहुत ही लाभदायक है। खीरे में बहुत से विटामिन्स और मिनरल्स होते है जो होंठो की देखभाल के काम आते है। खीरे के टुकड़े काट कर होंठो पर लगाए। 15 से 20 मिनट तक होंठो पर लगा रहने दे। खीरे में पानी अत्यधिक मात्रा पायी जाती है। इसके उपयोग से होंठो की त्वचा हाइड्रेट होकर सॉफ्ट बनेगी।

नारियल तेल

सर्दियों में नारियल तेल का इस्तेमाल रातो रात फटे होंठो को पूरी तरीके से ठीक कर देता है। नारियल तेल को सदियों से ही बालो और त्वचा की देखभाल के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। रोजाना रात को सोने से पहले होंठो की त्वचा पर लगाए और नरम और मुलायम त्वचा पाए।

इनमे से कोई भी उपाय आप अपनी इच्छा अनुसार इस्तेमाल कर सकते है। इन तरीको के अतिरिक्त होंठो की त्वचा की देखभाल अच्छे से करनी चाहिए। जब होंठ सुख रहे हो तो लिपस्टिक का प्रयोग ना करके लिप ग्लॉस का इस्तेमाल करें। होंठो को कभी भी सूखा ना छोड़े उन पर लिप ग्लॉस, वैसेलिन जेल या फिर घी का प्रयोग भी कर सकते है।

प्रेगनेंसी को इज़ी बनाना चाहते हैं तो इन 10 बातों का ध्यान रखें

गर्भावस्था महिला के लिए वो समय होता है जहां महिला को बहुत ज्यादा देखभाल की जरुरत होने के साथ महिला को बहुत सी चीजों से परहेज भी करना पड़ता है। इसके अलावा प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने महिला किसी न किसी शारीरिक परेशानी व् बदलाव से गुजरती है। ऐसे में महिला कई बार मानसिक रूप से भी परेशान हो सकती है। खासकर जब महिला पहली बार माँ बनने का अनुभव ले रही होती है तब महिला को ज्यादा दिक्कत हो सकती है। लेकिन यदि महिला प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही कुछ बातों का ध्यान रखती है तो उससे प्रेगनेंसी को इज़ी बनाने में मदद मिलती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी को इज़ी बनाने के 10 टिप्स बताने जा रहे हैं।

सही जानकारी इक्कठी करें

  • प्रेगनेंसी को इज़ी बनाने के लिए सबसे जरुरी है की आपको प्रेगनेंसी में क्या होता है क्या नहीं होता है इसके बारे में पता हो।
  • ताकि बॉडी में होने वाले बदलाव व् लक्षणों को समझने में आपको आसानी हो सके।
  • इसीलिए सबसे पहले आपको प्रेगनेंसी से जुडी पूरी जानकारी इक्कठी करनी चाहिए और सही जानकारी इक्क्ठी करनी चाहिए।
  • और आपको यह जानकारी प्रेगनेंसी से जुडी किताबों, इंटरनेट, आपके घर के बड़े बुर्जुगों से मिल सकती है।
  • और किसी भी बात को लेकर आपको कन्फ्यूज़न है तो एक बार डॉक्टर से सलाह लें।

अपनी डाइट तय करे

  • प्रेगनेंसी में क्या खाना सही है और क्या नहीं इस बारे में आपको पता होना चाहिए।
  • ताकि खान पान को लेकर आपको प्रेगनेंसी में कोई परेशानी न हो।
  • जैसे की कच्चा पपीता, अनानास, गर्म तासीर वाली चीजें, जंक फ़ूड, कटहल, कच्चा दूध, कच्चे अंडे, आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • हरी सब्जियों, फलों, दालों, ड्राई फ्रूट्स आदि का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।
  • नियमित अपनी डाइट में कुछ न कुछ नया जरूर शामिल करें।
  • हो सकता है की बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण आपके खाने की इच्छा में कमी आये या हो सकता है खाने की इच्छा बढ़ जाएँ।
  • लेकिन आपको इस बात का ध्यान रखना है की न तो आप जरुरत से ज्यादा खाएं न कम खाएं।
  • और नियमित दिन में हर दो से तीन घंटे में कुछ न कुछ हेल्दी जरूर खाएं।
  • खाने के साथ तरल पदार्थों का सेवन भी भरपूर मात्रा में करें, क्योंकि महिला के हाइड्रेट रहने से भी प्रेगनेंसी में फिट रहने और प्रेगनेंसी को इज़ी बनाने में मदद मिलती है।
  • ऐसा करने से गर्भवती महिला और महिला के पेट में पल रहे शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी को इज़ी बनाने के लिए अपनी दिनचर्या प्लान करें

  • गर्भावस्था को इज़ी बनाने के लिए महिला को अपनी दिनचर्या का प्लान भी जरूर बनाना चाहिए।
  • जैसे की किस समय महिला को खाना खाना है, दवाई लेनी हैं, सैर करनी है, योगासन करना है, सोना है, आदि।
  • यदि महिला अपनी दिनचर्या का अच्छे से पालन करती है तो ऐसा करने से प्रेगनेंसी को इज़ी बनाने में मदद मिलती है।

स्ट्रेच मार्क्स का ध्यान रखें

  • बहुत सी गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान स्ट्रेच मार्क्स से परेशान हो सकती है।
  • और प्रेगनेंसी के दौरान यदि इस समस्या का इलाज न किया जाये तो इसके कारण महिला बाद में परेशानी हो सकती है। ‘
  • ऐसे में प्रेगनेंसी में दौरान ही महिला को स्ट्रेच मार्क्स से स्किन को बचाने के लिए क्रीम, तेल आदि का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए।
  • ताकि महिला को स्ट्रेच मार्क्स जैसी कोई परेशानी न हो और प्रेगनेंसी को इज़ी बनाने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी पिल्लो खरीदें

  • वजन बढ़ने के कारण महिला को प्रेगनेंसी के दौरान सोने में दिक्कत हो सकती है।
  • ऐसे में बेहतर नींद लेने के लिए प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी पिल्लो खरीदना चाहिए।
  • ताकि महिला को बेहतर नींद लेने और प्रेगनेंसी को इज़ी बनाने में मदद मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी को इज़ी बनाने के लिए बर्थिंग बॉल लें

  • बर्थिंग बॉल प्रेगनेंसी के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली एक बॉल होती है।
  • जिससे प्रेग्नेंट महिला के पेट के निचले हिस्से, पीठ आदि के दर्द से राहत पाने में मदद मिलती है।
  • महिला इस बॉल की मदद से घर में आसानी से व्यायाम भी कर सकती है।
  • जिससे बॉडी में ब्लड फ्लो को बेहतर करने में मदद मिलती है।
  • और महिला को प्रेगनेंसी रिलैक्स रहने में मदद मिलती है।

पैरेंटल मसाज लें

  • बहुत कम गर्भवती महिलाएं पैरेंटल मसाज प्रेगनेंसी के दौरान लेती हैं।
  • लेकिन महिला को प्रेगनेंसी में रिलैक्स रहने और प्रेगनेंसी को इज़ी बनाने के लिए पैरेंटल मसाज जरूर लेनी चाहिए।
  • इससे महिला को सूजन, दर्द तनाव जैसी समस्या से राहत पाने के साथ मानसिक रूप से भी रिलैक्स रहने में मदद मिलती है।

कपडे व् जूते चप्पल खरीदें

  • गर्भवती महिला को कपड़ों का भी प्रेगनेंसी के दौरान ध्यान रखना चाहिए।
  • प्रेगनेंसी में जैसे जैसे समय आगे बढ़ता है वैसे वैसे महिला का वजन बढ़ता है।
  • जिसके कारण महिला को अपने साइज से थोड़े खुले कपडे खरीदने चाहिए।
  • जैसे की नाइटी, खुले कुर्ते, साइज से थोड़ी बड़ी ब्रा, सूती पैंटी, आदि, और यदि सर्दी का मौसम है तो उसके अनुसार कपडे खरीदने चाहिए।
  • कपड़ों के साथ आरामदायक जूते चप्पल भी खरीदने चाहिए, और एक बात का ध्यान रखें की न तो ज्यादा ऊँचे और न ही फिसलने वाले जूते चप्पल ही खरीदें।
  • इससे भी प्रेगनेंसी को इज़ी बनाने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी को इज़ी बनाने के लिए वजन नियंत्रित रखें

  • प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला का वजन बढ़ता है लेकिन महिला को इस बात का ध्यान रखना भी जरुरी होता है की महिला का वजन जरुरत से ज्यादा न बढे।
  • क्योंकि यदि महिला का वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ता है तो इसके कारण प्रेगनेंसी के दौरान महिला की कॉम्प्लीकेशन्स बढ़ सकती है।
  • लेकिन यदि महिला प्रेगनेंसी के दौरान फिट रहने के साथ अपने वजन को नियंत्रित रखती है तो इससे महिला को प्रेगनेंसी को इज़ी बनाने में मदद मिलती है।

डॉक्टर से जांच

  • प्रेगनेंसी को इज़ी बनाने के लिए एक बात का ध्यान महिला को सबसे ज्यादा रखना चाहिए।
  • और वो है की पूरी प्रेगनेंसी में महिला डॉक्टर से राय लेती रहें, अपना टीकाकरण व् अन्य जांच के साथ रूटीन चेकअप समय से करवाए।
  • कोई भी दिक्कत होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
  • यदि महिला इन बातों का ध्यान रखती है तो इससे महिला को अपनी प्रेगनेंसी को इज़ी बनाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं वो दस टिप्स जिनका ध्यान रखने से प्रेगनेंसी कोई इज़ी बनाने में मदद मिलती है। यदि आपकी प्रेगनेंसी भी कन्फर्म हो गई है तो आप भी इन बातों का प्रेगनेंसी की शुरुआत से भी ध्यान रखें। ताकि आपको प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह की परेशानी से बचे रहने और प्रेगनेंसी को एन्जॉय करने में मदद मिल सके।

गर्भावस्था के चौथे महीने में शिशु का विकास और गर्भवती महिला के शरीर में बदलाव

चौथे महीने में शिशु का विकास, गर्भ में शिशु का विकास, चौथे महीने में गर्भवती महिला में बदलाव, गर्भावस्था का चौथा महीना, प्रेग्नेंसी के चौथे महीने में चैंजेस, Changes in Fourth Month of Pregnancy, Baby Development in Fourth Month, Changes in Pregnant Women after Four month pregnancy, Fourth Month, Four Month Baby Developement


गर्भावस्था का हरेक महीना गर्भवती महिला के लिए बहुत खास होता है। हर महीने महिला गर्भ में अपने शिशु से जुड़े नए-नए अनुभवों को महसूस करती हैं। चौथा महीना शुरू होते ही माँ का शिशु से भावनात्मक लगाव शुरू हो जाता है। माँ हर पल सिर्फ अपने आने वाले शिशु के बारे में ही सोचती रहती हैं। वो ये सोचती है शिशु क्या कर रहा होगा, कैसा दिखता होगा, लड़का है या लड़की है? इस तरह से उनके मन में कई सारे विचार आने लगते हैं। और यह चौथे महीने से ही शुरू हो जाता है।

आज हम आपको बता रहे हैं गर्भधारण के चौथे महीने में गर्भ के भीतर शिशु का विकास किस तरह होता है और चौथे महीने गर्भवती महिला के शरीर में क्या-क्या बदलाव होते हैं?

गर्भावस्था का चौथा महीना और शिशु में विकास

गर्भधारण के चौथे महीने से शिशु गर्भनाल के द्वारा साँस लेना शुरू कर देता है। इस महीने तक पता चल जाता ही की गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है या लड़की। चौथे महीने से शिशु की मूवमेंट थोड़ी बढ़ जाती है लेकिन अभी भी आप उसकी मूवमेंट को महसूस नहीं कर पाएंगी। आपको ये मूवमेंट आने वाले महीने में महसूस होगी।

चौथे महीने तक शिशु की बाहरी संरचनाओं का निर्माण पूरा हो जाता है और अंदरूनी अंगों का विकास होने लगता है। चौथे महीने से शिशु के मस्तिष्क का विकास तेजी से होने लगता है। इस महीने से शिशु के चेहरे की मांसपेशियां और किडनी काम करना शुरू कर देती है।

चौथे महीने में शिशु की खोपड़ी का आकार बनने लगता है। इस महीने में शिशु के हाथ, पैर और कान का पूरा विकास हो जाता है। इस समय शिशु की हड्डियां मजबूत होने लगती है पर अभी भी शिशु की पलके पूरी तरह आँखों से चिपकी रहती है जो आने वाले महीने में खुल जाएगी।

गर्भावस्था के चौथे महीने में गर्भवती महिला के शरीर में बदलाव

गर्भावस्था के चौथे महीने में गर्भवती महिला के शरीर में भी तेजी से बदलाव होने लगते हैं। इस महीने से गर्भवती महिला का पेट बढ़ने लगता है जिसे देखकर आसानी से पता चल जाता है की महिला गर्भवती है। चौथे महीने से गर्भवती महिला के शरीर में एस्ट्रोजन हॉर्मोन का स्तर बढ़ जाता है जिसके कारण त्वचा पर झाइयां और मुहांसे की समस्या होने लगती है।

चौथे महीने में गर्भवती महिला के नाक पर सूजन आ सकती है पर ऐसा जरुरी नहीं की यह सभी के साथ हो। चौथे महीने से गर्भवती महिला को शिशु की हलकी मूवमेंट महसूस होने लगती है, शरीर में कमजोरी आ जाती है, भूख बढ़ जाती है, मूड स्विंग्स बहुत ज्यादा होते हैं, पैरों में दर्द और सूजन बढ़ सकती है, हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज की समस्या हो सकती है और प्राइवेट पार्ट से हल्का स्त्राव हो सकता है।

प्रेग्नेंसी के चौथे महीने से गर्भवती महिला को अपना खास केयर करना शुरू कर देना चाहिए, क्यूंकि इस महीने से शिशु के अंदरूनी अंगों का विकास होना शुरू हो जाता है और शिशु के समुचित विकास के लिए शरीर में सभी नुट्रिएंट्स का सही मात्रा में होना जरुरी होता है। इसके लिए आप सही समय पर सही आहार लें और अगर कुछ समस्या हो तो तुरंत जाँच करवाएं। ताकि आने वाले महीनों में कोई परेशानी ना हो और शिशु का विकास भी सही तरीके से हो सके।

यूट्यूब विडिओ –

गर्भावस्था का चौथा महीना शिशु में विकास और गर्भवती महिला में बदलाव

प्रेगनेंसी में रात को नींद नहीं आती है? यह करें

गर्भवती महिला के लिए जिस तरह खाना बहुत जरुरी है उसी तरह महिला के लिए भरपूर नींद लेना भी बहुत जरुरी है। क्योंकि भरपूर नींद लेने से महिला को रिलैक्स रहने, तनाव मुक्त रहने, खुश रहने, ऊर्जा से भरपूर रहने, शारीरिक परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों के कारण वजन बढ़ने की वजह से कई बार प्रेग्नेंट महिला रात को अच्छे से सो नहीं पाती है।

और जब महिला रात को अच्छे से नहीं सोती है तो सुबह उठकर थकावट, कमजोरी, चिड़चिड़ाहट महसूस होती है साथ ही महिला की शारीरिक परेशानियां भी बढ़ती है। और नींद पूरी न होने के कारण महिला के तनाव से ग्रसित होने का खतरा भी रहता है। तो आइये अब जानते हैं की गर्भवती महिला को रात को नींद लेने में कठिनाई क्यों होती है और किस तरह महिला इस परेशानी से निजात पा सकती है।

प्रेगनेंसी में रात को नींद नहीं आने के कारण

  • शारीरिक परेशानियों के अधिक होने के कारण।
  • रात को भारी भोजन करने की वजह से।
  • जरुरत से ज्यादा पानी पीने के कारण।
  • सोने की पोजीशन गलत होने के कारण।
  • तनाव के कारण, घबराहट की वजह से, आदि।
  • दिन में सोने की वजह से।
  • थकावट के कारण भी ऐसा होता है।
  • पैरों में दर्द व् ऐंठन।
  • पेट से जुडी समस्या होने के कारण।
  • सर्दी की समस्या होने की वजह से।
  • गर्मी अधिक लगने के कारण।

प्रेगनेंसी के दौरान रात को होने वाली अनिंद्रा की समस्या से बचने के टिप्स

प्रेग्नेंट महिला को यदि रात को सोने में दिक्कत होती है तो कुछ आसान टिप्स का ध्यान रखने से महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। जैसे की:

सही पोजीशन में सोएं

गर्भवती महिला यदि सही पोजीशन में नहीं सोती है तो इस कारण भी महिला को रात को सोने में दिक्कत होती है। ऐसे में रात को अच्छी नींद लेने के लिए महिला को अपनी सही पोजीशन में सोना चाहिए। और गर्भवती महिला के लिए सोने की सही पोजीशन बाईं और करवट लेकर सोना होती है।

प्रेगनेंसी पिल्लो का करें इस्तेमाल

गर्भावस्था के दौरान महिला को रात को सोने में कोई दिक्कत न हो इसके लिए प्रेगनेंसी पिल्लो का इस्तेमाल भी कर सकती है। यह पिल्लो बाजार में आराम से मिल जाता है और इसका इस्तेमाल करने के बाद महिला को अच्छी और गहरी नींद लेने में मदद मिलती है।

रात के खाने का रखें ध्यान

प्रेग्नेंट महिला को रात को अच्छी नींद आए इसके लिए सोने से कम से कम दो घंटे पहले महिला को खाना खा लेना चाहिए। और रात के खाने में ज्यादा तेलीय, मसालेदार व् ऐसे आहार का सेवन नहीं करना चाहिए जिसे पचाने में महिला को दिक्कत हो। यदि महिला रात के आहार से जुडी इन बातों का ध्यान रखती है तो ऐसा करने से भी महिला को रात को अच्छी नींद लेने में मदद मिलती है।

ज्यादा पानी नहीं पीएं

यदि प्रेग्नेंट महिला रात को सोने से पहले बहुत ज्यादा पानी पीती है तो इस कारण रात को महिला को बार बार यूरिन पास करने की इच्छा होती है। जिस वजह से महिला को रात को नींद नहीं आती है ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए महिला को शाम के बाद ज्यादा पानी नहीं पीना चाहिए।

सोने से पहले थोड़ी वाक करें

गर्भवती महिला यदि सोने से पहले थोड़ी देर वाक करती है तो ऐसा करने से खाना तो अच्छे से हज़म हो जाता है साथ ही महिला मानसिक रूप से भी रिलैक्स फील करती है। जिससे महिला को अच्छी नींद लेने में मदद मिलती है।

पैरों की मालिश

कुछ गर्भवती महिलाओं को नींद नहीं आने का कारण थकान, पैरों में दर्द आदि की समस्या हो सकती है। ऐसे में रात को बेहतर नींद लेने के लिए महिला को अपने पैरों, सिर आदि की अच्छे से मसाज करनी चाहिए। ऐसा करने से महिला को आराम महसूस होता है जिससे महिला को रात को अच्छी नींद लेने में मदद मिलती है।

गुनगुना दूध

रोजाना रात को सोने से पहले गर्भवती महिला गुनगुना दूध या गुनगुने दूध में हल्दी डालकर पीएं। ऐसा करने से गर्भवती महिला को रात को अच्छी नींद लेने में मदद मिलती है।

कमरे के तापमान का रखें ध्यान

गर्मी के मौसम में महिला को रात को सोने में ज्यादा दिक्कत हो सकती है क्योंकि महिला के शरीर का तापमान प्रेगनेंसी के दौरान बढ़ जाता है। और गर्मी के मौसम में यदि कूलर या एसी न हो तो महिला को ज्यादा दिक्कत होती है। ऐसे में बेहतर नींद लेने के लिए गर्भवती महिला को कमरे के तापमान का भी ध्यान रखना चाहिए।

कैफीन का सेवन नहीं करें

प्रेग्नेंट महिला को रात को सोते समय चाय या कॉफ़ी का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि कैफीन युक्त चीजों का सेवन करने से गर्भवती महिला को रात को सोने में परेशानी होती है।

फ़ोन से दूरी

रात क्लो सोते समय फ़ोन, लैपटॉप, टीवी आदि से दूरी रखें क्योंकि इन चीजों की तरफ ध्यान होने के कारण भी रात को नींद लेने में परेशानी होती है।

दिन में ज्यादा नहीं सोएं

यदि प्रेग्नेंट महिला दिन में ज्यादा समय तक सोती है तो इस कारण भी प्रेग्नेंट महिला को रात को अच्छे से नींद नहीं आती है। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए गर्भवती महिला को रात को अच्छी नींद लेने के लिए दिन में ज्यादा सोना नहीं चाहिए।

अपने आप को ज्यादा नहीं थकाएं

यदि गर्भवती महिला दिन में शारीरिक श्रम जरुरत से ज्यादा करती है तो इस कारण भी महिला को रात को थकावट के कारण अच्छी नींद नहीं आती है। ऐसे में महिला से जितना हो उतना ही काम करना चाहिए जरुरत से ज्यादा काम नहीं करना चाहिए। जिसे महिला की शारीरिक परेशानियां बढ़ जाएँ और महिला को अनिंद्रा की समस्या का सामना करना पड़े।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिन्हे ट्राई करने से प्रेग्नेंट महिला को रात को अच्छी व् गहरी नींद लेने में मदद मिलती है। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो अच्छी और गहरी नींद लेने के लिए आपको भी इन टिप्स को जरूर ट्राई करना चाहिए।

Sleeping Problem at night in Pregnancy

क्या गर्भपात के बाद दुबारा गर्भवती होना सुरक्षित है

क्या गर्भपात के बाद दुबारा गर्भवती होना सुरक्षित है, गर्भपात के कितने महीनों बाद गर्भधारण करना सही होता है, प्रेगनेंसी टिप्स, गर्भपात के बाद दुबारा गर्भधारण से पहले ध्यान रखें यह बातें

गर्भपात के बाद महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। जैसे की बॉडी में दर्द, बहुत ज्यादा ब्लीडिंग, पेट के निचले हिस्से में दर्द, बुखार, उल्टियां, कमजोरी, आदि। यहां तक की कुछ महिलाएं इस दौरान तनाव में भी आ जाती है। लेकिन इस दौरान कई महिलाएं सवाल करती है की क्या गर्भपात के बाद दुबारा गर्भवती होना सुरक्षित होता है? और गर्भपात के कितने दिनों बाद महिला दुबारा गर्भधारण कर सकती है? तो लीजिये आज हम आपको आपके इन्ही कुछ सवालों का जवाब देने जा रहे हैं और गर्भपात के बाद महिला को गर्भधारण करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए इस बारे में भी जानते हैं।

गर्भपात के बाद दुबारा गर्भधारण करना सुरक्षित होता है

जी हाँ, गर्भपात के बाद दुबारा गर्भधारण करना बिल्कुल सुरक्षित होता है। लेकिन दुबारा गर्भधारण से पहले इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए की महिला शारीरिक व् मानसिक रूप से बिल्कुल फिट हो। क्योंकि महिला यदि तनाव में होती है या महिला शारीरिक रूप से कमजोर होती है, तो ऐसे में गर्भपात होने चांस दुबारा बढ़ जाते हैं। लेकिन यदि महिला फिट होती है तो ऐसे में डॉक्टर से जांच करवाने के बाद महिला दुबारा गर्भधारण कर सकती है।

गर्भपात के कितने दिनों बाद गर्भधारण करना सही होता है

स्टडीस के अनुसार गर्भपात के तीन महीने बाद महिला गर्भधारण कर सकती है। कुछ कपल गर्भपात के बाद लम्बे समय तक गर्भधारण के लिए इंतज़ार करते है, यह उनका निजी फैसला भी हो सकता है। लेकिन यदि आपका गर्भपात हुआ है और आप गर्भधारण के बारे में सोच रही हैं तो तीन महीने बाद आप आसानी से गर्भधारण कर सकती है। और अध्यन में यह भी सामने आया है की 77 प्रतिशत महिलाओं ने ऐसे गर्भधारण करके स्वस्थ शिशु को जन्म दिया है।

गर्भपात के बाद दुबारा गर्भधारण से पहले इन बातों का ध्यान रखें

  • गर्भपात के बाद महिला के शरीर में कमजोरी आ जाती है, ऐसे में महिला जब तक शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट न हो जाए तब तक महिला को गर्भधारण के बारे में नहीं सोचना चाहिए।
  • कुछ महिलाएं गर्भपात के बाद तनाव में आ जाती है ऐसे में मानसिक रूप से फिट होने के बाद ही महिला को गर्भधारण करना चाहिए, क्योंकि यदि महिला तनाव में रहती है और दुबारा गर्भधारण कर लेती है तो ऐसे में महिला के गर्भपात होने के चांस दुबारा होते हैं।
  • दुबारा गर्भधारण से पहले एक बार महिला को डॉक्टर से अपनी अच्छे से जांच करवानी चाहिए। ताकि किसी भी तरह की शारीरिक परेशानी का सामना आपको न करना पड़े और आपको स्वस्थ प्रेगनेंसी हो।

तो यह हैं गर्भपात के बाद दुबारा गर्भवती होने से जुड़े कुछ खास टिप्स, साथ ही प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने महिला के लिए बहुत अहम होते है, ऐसे में महिला को किसी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए जिससे गर्भपात हो। तो यदि आपका अनचाहा गर्भ ठहर गया है और इसके कारण आप गर्भपात करवा रहे हैं, तो आपको इससे बचने के लिए सुरक्षा का इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि आपको ऐसी कोई समस्या न हो क्योंकि बार बार गर्भपात का होना महिला को शारीरिक रूप से कमजोर बना सकता है।

प्रेगनेंसी में अमरुद खाना सही है या गलत

गर्भावस्था में अमरुद

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को सामान्य दिनों की तुलना में अपनी ज्यादा देखभाल करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि इस दौरान महिला अकेली नही होती है बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु का विकास भी पूरी तरह से महिला पर निर्भर करता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को अपने खान पान में पोषक तत्वों से भरपूर चीजों को शामिल करने की सलाह दी जाती है। तो लीजिये आज हम आपको एक ऐसे ही पोषक तत्वों से भरपूर फल के बारे में बताने जा रहे हैं जो गर्भवती महिला को जरूर खाना चाहिए। और वो है अमरुद, यदि गर्भवती महिला अमरुद का सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला को बहुत से फायदे मिलते हैं। साथ ही जो महिलाएं माँ बनना चाहती है उनके लिए भी अमरुद का सेवन फायदेमंद होता है क्योंकि यह फर्टिलिटी को बढ़ाने में मदद करता है। तो यदि आप प्रेगनेंसी में अमरुद का सेवन करना चाहिए या नहीं इस बात को लेकर परेशान हैं, तो आप बिना किसी डर के इसका सेवन कर सकती है।

प्रेगनेंसी में अमरुद का सेवन करने के फायदे

स्वाद में खट्टा मीठा होने के कारण अमरुद का स्वाद प्रेग्नेंट महिला को बहुत पसंद आ सकता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला यदि इसका सेवन करती है तो इससे केवल महिला के जीभ के स्वाद को बढ़ाने में ही नहीं बल्कि सेहत सम्बन्धी भी बहुत से फायदे मिलते हैं। तो आइये अब जानते हैं प्रेग्नेंट महिला को अमरुद का सेवन करने से कौन से फायदे मिलते हैं।

पोषक तत्व

गर्भवती महिला को अपनी डाइट में भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों को शामिल करने की सलाह दी जाती है ताकि गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में भी मदद मिल सके। ऐसे में अमरुद में विटामिन्स, आयरन, फोलेट, मैग्नीशियम, फाइबर व् अन्य एंटी ऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने के साथ गर्भ में शिशु के बेहतर विकास व् शिशु को होने वाली परेशानियों से सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।

मॉर्निंग सिकनेस

मॉर्निंग सिकनेस की समस्या गर्भवती महिला को होना आम बायत है खासकर पहली तिमाही में महिला को इससे ज्यादा परेशानी हो सकती है। ऐसे में अमरुद का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को मॉर्निंग सिकनेस की समस्या से बचने से राहत मिलती है और साथ ही इससे जी मिचलाना, उल्टी आदि की परेशानी को कम करने में भी फायदा मिलता है।

ब्लड प्रैशर

प्रेगनेंसी के दौरान ब्लड प्रैशर की समस्या गर्भवती महिला के साथ गर्भ में शिशु के लिए भी नुकसानदायक हो सकती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को यदि नियमित एक पके हुए अमरुद का सेवन करती है तो इससे महिला को ब्लड प्रैशर जैसी समस्या से प्रेगनेंसी के दौरान बचे रहने में मदद मिलती है।

फाइबर

गर्भावस्था के दौरान बहुत सी महिलाएं कब्ज़ की समस्या से परेशान हो सकती है, और यह समस्या प्रेगनेंसी की पहली या आखिरी तिमाही में अधिक हो सकती है। ऐसे में अमरुद का सेवन प्रेग्नेंट महिला के लिए लाभदायक हो सकता है। क्योंकि अमरुद में मौजूद फाइबर प्रेग्नेंट महिला को कब्ज़ जैसी परेशानी से सुरक्षित रखने में मदद करता है। इसके अलावा पाचन क्रिया के धीमे पड़ने के कारण महिला एसिडिटी जैसी परेशानी से भी परेशान हो सकती है, लेकिन अमरुद का सेवन करने से पाचन क्रिया को सुचारु रूप से काम करने में मदद मिलती है।

गेस्टेशनल डाइबिटीज़

प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के दौरान गेस्टेशनल डाइबिटीज़ होने का भी ख़तरा रहता है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला अमरुद का सेवन करती है तो इससे ब्लड शुगर लेवल को कण्ट्रोल में रहने में मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को गेस्टेशनल शुगर की परेशानी से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

इम्युनिटी

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को रोगो से बचने के लिए इम्युनिटी का बेहतर होना बहुत जरुरी होता है। और अमरुद में मौजूद विटामिन सी गर्भवती महिला की इम्युनिटी को बढाने में मदद करता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने के लिए और गर्भ में पल रहे शिशु को रोगो से सुरक्षित रहने के लिए अपनी डाइट में अमरुद को जरूर शामिल करना चाहिए।

आयरन

आयरन की मात्रा भी अमरुद में भरपूर मात्रा में मौजूद होती है, जो प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के दौरान एनीमिया जैसी समस्या से सुरक्षित रखने में मदद करती है।

कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल

कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने के कारण प्रेग्नेंट महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने के लिए गर्भवती महिला का अमरुद का सेवन करना फायदेमंद होता है।

विटामिन ए

अमरुद में मौजूद विटामिन ए प्रेग्नेंट महिला की आँखों की रौशनी को बढ़ाने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु की आँखों के बेहतर विकास के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

तनाव

प्रेग्नेंट महिला यदि तनाव के कारण परेशान रहती है तो इससे बॉडी में कार्टिसोल नामक हॉर्मोन बनता है जो गर्भाशय को नुकसान पहुंचा सकता है, साथ ही तनाव के कारण शिशु के विकास पर भी बुरा असर पड़ता है। लेकिन तनाव से बचने और मन को शांत रखने के लिए प्रेग्नेंट महिला चाहे तो अमरुद का सेवन कर सकती है।

शिशु के लिए है फायदेमंद

अमरुद का सेवन करने से केवल गर्भवती महिला को ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु को भी बहुत से फायदे मिलते हैं। जैसे की अमरुद में मौजूद फोलिक एसिड गर्भ में पल रहे शिशु के तंत्रिका तंत्र व् मस्तिष्क के विकास को बेहतर करने में मदद करते हैं। इसके अलावा अमरुद में मौजूद अन्य पोषक तत्व शिशु के बेहतर शारीरिक विकास में भी मदद करते हैं।

कैंसर

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को ऐसे फलों का सेवन भरपूर मात्रा में करने की सलाह दी जाती है जिसमे एंटी ऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में मौजूद हो। क्योंकि एंटी ऑक्सीडेंट बॉडी में विषैले पदार्थों का जमाव नहीं होने देते हैं, जिससे प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने के साथ स्तन कैंसर जैसी समस्या से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है। और अमरुद में एंटी ऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं।

अमरुद खाते समय इन बातों का ध्यान रखें

प्रेग्नेंट महिला दिन में एक या दो अमरुद का सेवन कर सकती है लेकिन इसका सेवन करते हुए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। जैसे की बिना धोए इसका सेवन नहीं करना चाहिए, ज्यादा कच्चे अमरुद का सेवन करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे पेट में दर्द की समस्या के साथ दांत में दर्द की परेशानी भी हो सकती है। इसके अलावा अमरुद खाने के बाद आपको किसी तरह की एलर्जी होने की परेशानी होती है तो अमरुद के सेवन से बचना चाहिए।

तो यह हैं कुछ फायदे जो गर्भवती महिला को अमरुद का सेवन करने से हो सकते हैं। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला चाहे तो अन्य फलों के साथ अमरुद का सेवन भी प्रेगनेंसी के दौरान कर सकती है।

बाल में मेहंदी लगाने से क्या होता है और कैसे लगाते है बालों में मेहंदी?

Mehndi lagane ke fayde : आज के समय में अधिकतर लोग अपने बालों से संबंधित समस्यायों से परेशान रहतें हैं। किसी को सफ़ेद बालों की समस्या है तो कोई डैंड्रफ की समस्या से जूझ रहा है। जिसका कारण लगातार बढ़ता प्रदुषण और तनाव है। आजकल के लोग तनाव बहुत ज्यादा लेते है जिसके कारण उनके बाल असमय ही सफ़ेद होने लगते है और जड़े कमजोर होकर टूटने लगते हैं।

मेहंदी इन सभी समस्यायों का एक मात्र सरल उपाय है इसकी मदद से सफ़ेद बालों को छुपाया जा सकता है और टूटते बालों की समस्या से भी छुटकारा पाया जा सकता है। क्योंकि यह केवल बाल ही कलर नहीं करती अपितु उनके लिए प्राकृतिक कंडीशनर का काम करती है।

मेहंदी बालों की समस्यायों को दूर करती है :-

हिना बालों को रंगने के साथ-साथ यह डैंड्रफ और बालों के टूटने की समस्या को भी दूर करती है। बालों में रुसी हो जाने पर भी मेहंदी का प्रयोग करना लाभकारी होता है। हिना में बहुत से एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते है,  सुरक्षा देने के साथ-साथ स्कैल्प को संक्रमण से भी बचाते हैं। इसके अलावा भी बालों में मेहंदी लगाने के कई फायदे होते हैं जिनके बारे में आज हम आपको बता रहे हैं।

बालों में मेहंदी लगाने से क्या होता है?

यूँ तो बालों में मेहंदी लगाने के कई फायदे है लेकिन उनमे से कुछ खास फायदों के बारे में हम यहाँ आपको बता रहें हैं। – Baal me mehndi lagane ke fayde

1. बालों को कंडीशन करे :

मेहंदी बालों को कंडीशन करने में मदद करती है। मेहंदी के लगातार प्रयोग से बाल घने, मजबूत और रेशमी होते हैं। यह बालों की जड़ों को मजबूत करके बालों को लंबा और घना बनाने में मदद करती है। इससे बालों में शाइन भी आती है।

2. लंबे बालों के लिए :

baalo ki dekhbhal

बालों में हिना का इस्तेमाल करने से बाल लंबे और मजबूत होते हैं। मेथी के दानों को पीसकर हिना में मिलाकर लगाने से असर जल्दी दिखने लगता है। अगर आप भी लंबे बालों की चाहत रखती है तो मेहंदी का इस्तेमाल करना शुरू कर दें।

3. डैंड्रफ से बचाए :

गर्मियों के मौसम में धूल उड़ने और सर्दियों के मौसम में त्वचा रूखी हो जाने के कारण बालों में रुसी की समस्या हो जाती है, जिससे बचने के लिए भी मेहंदी का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए मेहंदी में नींबू का रस मिलाकर अपने बालों में अच्छे से लगाएं। सूखने तक रखें और बाद में बाल धो दें।

4. बालों को कलर करे :

मुख्य तौर पर हिना का इस्तेमाल बालों को रंगने के लिए किया जाता है। इसकी मदद से सफ़ेद बालों को आसानी से कलर किया जा सकता है। यह बालों को प्राकृतिक तरीके से रंगन में मदद करती है। जिससे बालों को कोई नुकसान नहीं होता।

5. मजबूत बालों के लिए :

मेहंदी में प्राकृतिक और कई लाभकारी गुण पाए जाते हैं जो बालों को बिना नुकसान पहुंचाएं उन्हें मजबूत बनाने में मदद करते है। हिना की मदद से बालों को चमकदार और घना भी बनाया जा सकता है। यह बालों की जड़ों को मजबूत करके उन्हें टूटने से बचाती है।

6. सिर में खुजली :

बरसात के मौसम में बाल भीग जाने के कारण कई बार सर में खुजली होने लगती है जिससे छुटकारा पाने के लिए भी मेहंदी का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए मेहंदी के पत्ते, तुलसी के पत्ते और नीम के पत्तों को एक साथ मिलाकर पीस लें। उसके पश्चात् इस पेस्ट को अपने सर में लगाएं। एक घंटे तक रखें और फिर धो लें खुजली दूर हो जाएगी।

बालों में मेहंदी का इस्तेमाल कैसे करें?

Heena Benefits for Hair : आप मेहंदी में अलग अलग चीजें मिलाकर बालों में लगा सकती है। इससे बालों को मेहंदी के साथ-साथ अन्य पदार्थों का भी फायदा मिलेगा।

  • लौंग – सर्दियों के मौसम में सर को मेहंदी की ठण्ड से बचाने के लिए।
  • सूखा आंवला – बालों को मजबूती देने और घना बनाने के लिए।
  • शलगम का रस – बालों के कड़कपन को कम करने के लिए और उन्हें मुलायम बनाने के लिए।
  • दालचीनी का पाउडर – डैंड्रफ और संक्रमण को दूर करने के लिए।
  • कॉफ़ी – बालों को कलर करने में मदद करे।
  • चाय पत्ती का पानी – इसका प्रयोग भी बालों को कलर करने के लिए किया जाता है।
  • रीठा और शिकाकाई – बालों को मजबूत, घना और लंबा बनाने के लिए किया जाता है।
  • नींबू का रस – बालों से डैंड्रफ दूर करने और स्कैल्प के फंगल इन्फेक्शन को खत्म करने में मदद करता है।
  • मेथी का पेस्ट – बालों को शाइन देने और मजबूत बनाने के लिए किया जाता है।
  • दही – बालों को मुलायम बनाने के लिए किया जाता है।
  • अंडा – बालों को मुलायम, चमकदार और सुन्दर बनाने के लिए। – balon me mehndi lgane ka tarika

कब्ज दूर करने के घरेलू उपाय

Causes, Symptoms & Remedies for Constipation

कब्ज दूर करने के घरेलू उपाय, Causes & Remedies for Constipation, कब्ज़, कब्ज के कारण, लक्षण और घरेलू उपाय, कब्ज की समस्या के घरेलू उपचार

आज के समय में लोगों की दिनचर्या बहुत बदल गयी है कोई भी अपने काम समय पर नहीं करता फिर चाहे वो खाना हो या सोना। और इसी अस्त-व्यस्त दिनचर्या के चलते लोगों के स्वास्थ्य बिगड़ने लगता है। जिनमे सबसे अधिक प्रभाव हमारे पाचन तंत्र पर पड़ता है। जिसके कारण कब्ज की समस्या होने लगती है। कब्ज की समस्या के होने का सीधा सीधा अर्थ पेट से होता है जो की पेट ठीक तरह से साफ़ नहीं हो पाने के कारण होता है।कब्ज दूर करने के घरेलू उपाय

कब्ज एक कष्टदायक बिमारी है जिसके होने के बाद व्यक्ति बहुत परेशान रहने लगता है। क्योंकि इस समस्या के कारण पेट में गैस तो बनती ही है साथ-साथ मल त्याग करने में भी समस्या होती है। वैसे तो इस समस्या के कई कारण होते है लेकिन समय पर भोजन नहीं करना, भोजन करते ही सो जाना और समय पर मल त्याग नहीं करना इस बीमारी का मुख्य कारण होते है। जिनकी वजह से यह बीमारी और अधिक कष्टदायी हो जाती है। और ये भी सच है की मल त्याग समय पर नहीं करने से यह शरीर में बड़े-बड़े रोगों का कारण बन सकता है।

Read More : पेट में गैस होने की ये है वजह!

इसके अलावा खाने पीने की गलत आदतों और देर रात तक जागने की वजह से भी कब्ज़ की समस्या हो सकती है। कब्ज होने पर व्यक्ति का पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है जिसकी वजह से बिमारियों की आशंका बढ़ जाती है। जैसे की कम भूख लगना, बवासीर, एसिडिटी और गैस। ऐसा नहीं है की इस समस्या का उपचार नहीं किया जा सकता। यदि सही दिनचर्या और अपनी गलत आदतों को सुधर लिया जाए तो इस बीमारी को दूर किया जा सकता है। यहाँ हम आपको कब्ज की समस्या के कारण, लक्षण और उपाय बताने जा रहे है। जिन्हे जानकार आप इस बीमारी के बारे में बेहतर तरीके से समझ पाएंगे और उसका सही ढंग से इलाज भी कर पाएंगे।

कब्ज होने के कारण :-

यह सभी कारण कब्ज की समस्या होने के सामान्य कारण है अगर आप इन बातों का ध्यान रखेंगे तो आपको कब्ज की बीमारी का इलाज करवाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और इसके लिए बहुत पैसे खर्च करने की भी आवश्यकता नहीं है क्योंकि इसमें तो केवल आपको अपनीओ आदतें बदलनी है।

  • शरीर में पानी की कमी।
  • सही समय पर भोजन नहीं करना।
  • अधिक चाय और कॉफ़ी आदि का सेवन करना।
  • शरीर में फाइबर की कमी।
  • भोजन को निगलना, चबा चबा कर नहीं खाना।
  • नशीले पदार्थों का सेवन।
  • अधिक मसालेदार भोजन का सेवन।
  • भोजन करने से तुरंत बाद सो जाना।
  • मुंह में छाले होना।
  • किसी भी तरह का शारीरिक श्रम जैसे gym, एक्सरसाइज, वाकिंग आदि नहीं करना।
  • बिना भूख के भोजन करना।
  • सही समय पर मल त्याग नहीं करना।

कब्ज होने के क्या-क्या लक्षण होते है?kabj

पूरी तरह से पेट का साफ़ नहीं होना गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। और यह तो सभी जानते है की मल एक ऐसी चीज है जिसे शरीर के अंदर नहीं रखना चाहिए। क्योंकि अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो यह आपको मानसिक और शारीरिक नुकसान दे सकता है।

  • मुंह से बदबू आना।
  • भूख नहीं लगना।
  • जी मचलना।
  • सिर में दर्द होना।
  • चेहरे पर फुंसियां होना।
  • पेट में दर्द।
  • पेट भारी-भारी सा लगना।
  • मल त्याग करते समय जोर लगाना।
  • बार बार मल त्यागने की इच्छा होना।
  • मल में गाढ़ापन भी कब्ज का एक लक्षण है।

पूरी तरह से पेट साफ़ नहीं होने से होने वाले नुकसान :-

  • यादाश्त कमजोर होना।
  • मानसिक भ्र्म होगा।
  • पाचन तंत्र में विकृति होना।
  • उम्र कम होना।
  • चेहरे की सुंदरता का क्षीण होना।
  • आंखों की रोशनी कम होना।
  • शारीरिक क्षमता कम होना।
  • चिड़चिड़ापन रहना।
  • मुंह में छाले होना।

आदि वह नुकसान है जो समय पर मल त्याग नहीं करने के कारण हो सकते है।

कब्ज दूर करने के घरेलू उपाय :-

1. कब्ज होने पर रोगी को पपीता और अमरुद का सेवन जरूर करना चाहिए।

2. पेट में मौजूद मल को बाहर निकालने के लिए 1 कप गुनगुने पानी में 1 नींबू निचोड़कर पियें।

CONSTIPATION problem

3. इस बीमारी से छुटकारा पाने के लिए रात को सोने से पहले 1 गिलास गर्म दूध पियें। अगर मल आंतों से चिपक गया हो तो इसमें 1-2 चम्मच अरंडी का तेल डालकर पियें।

4. इस्बगोल की भूसी भी कब्ज की बीमारी में रामबाण का काम करती है। इसके लिए 125 ग्राम दही में इस्बगोल की भूसी घोलकर सुबह और शाम पियें।

5. बेकिंग सोडा जिसे मीठा सोडा भी कहते है कब्ज की समस्या दूर करने में बेहद फायदेमंद होता है। इसके लिए 1 / 4 कप गर्म पाने में 1 चम्मच मीठा सोडा मिलाएं और पियें।

6. पेट की बिमारियों से बचने के लिए पेट में अच्छे बैक्टीरिया का होना जरुरी है। दही खाने से यह बैक्टीरिया बढ़ते है। इसलिए रोजाना दही का सेवन जरुर करें। सामान्य व्यक्ति भी इसका सेवन कर सकते है।

7.आधा ग्लास पत्ता गोभी के रस को पीने से भी कब्ज का रोग दूर होता है। पालक का जूस भी इस समस्या के लिए फायदेमंद होता है।

8. इलाज के लिए रात को सोने से पूर्व 1 ग्लास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी पाउडर और एक चम्मच घी घोलकर पी लें। समस्या ठीक हो जाएगी।

9. इसके अलावा एक ग्लास दूध में थोड़ी अंजीर उबाल लें। और इसका सेवन रात को सोने से पहले करें। फायदा होगा।

10. सुबह सुबह खाली पेट एक गिलास गर्म या नार्मल पानी पीने से कब्ज दूर होती है।tambe-ke-bartan-ka-pani-pine-ke-labh

11. इस समस्या का इलाज करने के लिए रात को सोने से पहले तांबे के बर्तन में पानी भरकर रखें और उसमे 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण डालकर ढक दें। सुबह इस पानी को छानकर खाली पेट इसका सेवन करें। कुछ दिनों तक प्रयोग करने से समस्या जड़ से खत्म हो जाएगी।

12. किशमिश में फाइबर की अच्छी मात्रा पाई जाती है। रात को सोने से पहले 1 मुट्ठी किशमिश पानी में भिगो दें। और सुबह खाली पेट इसका सेवन करें।

13 . पानी में अलसी के बीज का पाउडर लेने से कब्ज में राहत मिलती है।

14. रात को सोने से पहले गुनगुने दूध में बादाम का तेल मिलाकर पियें। 2 हफ्ते तक लगातार इस उपाय का प्रयोग करें। इससे आपकी पुरानी बीमारी भी दूर हो जाएगी।