तीन महीने तक प्रेगनेंसी न्यूज़ क्यों न करें शेयर, महिला को तीन महीने तक अपनी प्रेगनेंसी क्यों नहीं बतानी चाहिए, प्रेगनेंसी टिप्स, शुरूआती प्रेगनेंसी में इन बातों का रखें ध्यान
प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने किसी भी महिला के लिए बहुत अहम होते हैं, ऐसे में महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है। क्योंकि यदि आप प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने अपना अच्छे से ध्यान रखते हैं, तभी आपकी प्रेगनेंसी पूरी तरह कन्फर्म होती है। इसके अलावा इस दौरान बॉडी में हार्मोनल बदलाव बहुत तेजी से होने के कारण महिला की परेशानी भी बढ़ती है, जिसके कारण उसे तनाव आदि हो सकता है। और इस दौरान यदि महिला तनाव अधिक ले लेती है या और किसी तरह की लापरवाही करती है तो इसके कारण महिला का गर्भपात हो सकता है। तो आइये अब हम आपको बताते है की महिला को अपनी प्रेगनेंसी तीन महीने के बाद क्यों बतानी चाहिए।
नज़र के डर से
पुराने समय में ज्यादातर लोग तीन महीने के बाद भी अपनी प्रेगनेंसी को नहीं बताते थे, क्योंकि उन्हें डर लगता था की कहीं किसी की नज़र न लग जाएँ। और कहीं न कहीं आज भी महिलाएं तीन महीने से पहले अपनी को ज्यादा लोगो से शेयर करना पसंद नहीं करती हैं। और उन्हें बताना भी नहीं चाहिए।
गर्भपात के चांस ज्यादा होते हैं
प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में गर्भपात के चांस ज्यादा होते हैं, इसीलिए महिलाओं को पहले तीन महीने में अपनी प्रेगनेंसी के बारे में नहीं बताना चाहिए। और अपना अच्छे से ध्यान देना चाहिए, वैसे तो महिला को पूरे नौ महीने अपना ध्यान रखना चाहिए। लेकिन तीन महीने अपना सबसे ज्यादा ध्यान रखना चाहिए। तीन महीने जब अच्छे से बिना किसी परेशानी के बीत जाएँ तब आप चाहे तो आप इसे अपने करीबियों से शेयर कर सकते हैं।
डॉक्टर से कन्फर्म होने के बाद
का बार प्रेगनेंसी लास्ट के दिनों में होती है ऐसे में आपको ही दो महीने के बाद पूरी तरह पता हालत है की आप प्रेग्नेंट हैं, ऐसे में थोड़ा समय रुकने के बाद और डॉक्टर से अच्छे से कन्फर्म होने के बाद ही आपको अपनी प्रेगनेंसी को शेयर करना चाहिए।
तो यह कुछ वजह है जिनकी वजह से महिला को तीन महीने के बाद ही प्रेगनेंसी के बारे में बताना चाहिए और वैसे भी तेन महीने के बाद धीरे धीरे महिला का पेट दिखाई देने लगता है तो सभी को अपने आप ही पता चल जाता है।
यूट्यूब विडिओ –
तीन महीने तक अपनी प्रेग्नेंसी के बारे में किसी को भी नहीं बताना चाहिए?
क्या गर्मियों में भी गर्भवती महिला अंडे खा सकती है, प्रेगनेंसी के दौरान अंडे का सेवन, गर्भवती महिला को अंडे खाने के फायदे, गर्भवतीमहिला को गर्मियों में अंडे का सेवन करना चाहिए या नहीं
प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला कैसे आहार का सेवन करती है, उसकी जीवनशैली कैसी है, उठना बैठना आदि सब चीजों से गर्भ में पल रहा शिशु प्रभावित होता है। ऐसे में गर्भवती महिला गर्भावस्था के दौरान अपना बेहतर तरीके से ध्यान रखती है, ताकि गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी स्वस्थ रहने के साथ शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके। इस दौरान खान पान को लेकर महिलाएं बहुत परेशानी रहती है क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान सही आहार क्या है, इसके लिए उन्हें घर में मौजूद हर कोई सलाह देता है। और इसे लेकर महिला के मन में तरह तरह के सवाल भी आते हैं, जैसे की प्रेगनेंसी के दौरान गर्मियों में अंडा खाना सुरक्षित है या नहीं। तो लीजिये आज हम आपको आपके इस सवाल से जुडी कुछ बातें बताने जा रहे हैं।
प्रेगनेंसी के दौरान गर्मियों में में अंडा खाना चाहिए या नहीं?
अंडा एक तरह का सुपरफूड होता है, जो की प्रोटीन, फैट, विटामिन, व् अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान अंडे का सेवन गर्भवती महिला के लिए फायदेमंद होता है, और चाहे गर्मी हो या सर्दी गर्भवती महिला दिन में एक या दो अंडे का सेवन कर सकती है। हाँ, लेकिन गर्मियों में एक या दो अंडे का सेवन करना ही उचित होता है क्योंकि इस अधिक सेवन शरीर की गर्मी को बढ़ा सकता है, जिससे गर्भवती महिला को परेशानी हो सकती है। इसके अलावा जिन महिलाओं का वजन अधिक है या कोलेस्ट्रॉल की समस्या है, तो इसके लिए गर्भवती महिला को एक बार डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।
और साथ ही अंडे का सेवन करते हुए आपको एक बात का ध्यान रखना चाहिए की गर्मियों में एक या दो अंडे से ज्यादा का सेवन न करें, कच्चा अंडा कभी न खाएं, अधपके अंडे का सेवन भी न करें, क्योंकि इसके कारण उल्टी, पेट से जुडी समस्या, बुखार, आदि होने की दिक्कत का सामना गर्भवती महिला को करना पड़ सकता है। अंडे का सेवन जब भी करे ताजे अंडे लाएं और उनका सेवन करें, अंडे को अच्छे से उबालकर जब तक की सफ़ेद और पीला भाग अच्छे से ठोस न हो जाये तब तक उसका सेवन नहीं करना चाहिए। और कितना हो सके उबले अंडे का सेवन ही करे क्योंकि वह ज्यादा फायदेमंद होता है।
प्रेगनेंसी में अंडे का सेवन करने के फायदे
एक शोध के अनुसार गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी अंडे का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। इससे शिशु के शारीरिक के साथ मानसिक विकास में भी मदद मिलती है। तो आये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में अंडे का सेवन करने से कौन से फायदे मिलते हैं।
प्रोटीन मिलता है भरपूर
प्रोटीन का भरपूर मात्रा में गर्भवती महिला की बॉडी में होना गर्भ में पल रहे शिशु की कोशिकाओं के बेहतर विकास में मदद करता है। जिससे शिशु का शारीरिक विकास बेहतर होने में मदद मिलती है, और साथ ही गर्भवती महिला के शरीर की कोशिकाओं को भी मजबूत रहने में मदद मिलती है।
कैलोरी की मात्रा को करता है पूरी
गर्भवती महिला को एक दिन में 200 से 300 अधिक कैलोरी की जरुरत होती है ताकि गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास के साथ गर्भवती महिला को भी स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। और अंडे का सेवन महिला के शरीर में कैलोरी की मात्रा को पूरा करने में मदद करता है।
शिशु के लिए है बेहतर
स्टडीज़ के अनुसार यदि गर्भवती महिला के शरीर में choline की कमी हो तो इसके कारण शिशु के मानसिक विकास में कमी आ सकती है। ऐसे में अंडे का सेवन गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक विकास के साथ मानसिक विकास में भी मदद करता है, क्योंकि यह पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ, शिशु के मानसिक विकास के लिए जरुरी choline और ओमेगा 3 फैटी एसिड को भी गर्भवती महिला के शरीर में पूरा करता है।
कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है
अंडे का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करने से गर्भवती महिला के शरीर में सैचुरेटेड फैट का लेवल संतुलित रहता है। लेकिन अगर आपको हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या है तो इसका सेवन ना करें। और यदि आप डॉक्टर से पूछकर इसका सेवन करती है तो अंडे के सफ़ेद हिस्से का सेवन करना चाहिए पीले भाग को अलग निकाल देना चाहिए।
तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान अंडे के सेवन से जुड़े कुछ टिप्स, ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान एक बात का ध्यान रखना चाहिए की किसी भी चीज का पर्याप्त सेवन जहां आपके लिए फायदेमंद होता है, वहीँ इसके अधिक सेवन से आपको परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है। इसीलिए गर्मियों में अंडे का सेवन यदि आप करती है तो एक या दो, ज्यादा न करें।
Hindi Video : Egg During Pregnancy
Garbhvati Mahila ko Egg Khana Garmi Me Fayde hai ya Nuksan
प्रेगनेंसी के छठे महीने में शिशु का वजन तेजी से बढ़ने लगता है, साथ ही गर्भवती महिला का वजन भी बढ़ जाता है। ऐसे में महिला को ज्यादा भूख का अहसास हो सकता है, और होना भी चाहिए क्योंकि शिशु के विकास के लिए भी महिला को ही आहार का सेवन करना पड़ता है। लेकिन वजन को अधिक भी नहीं बढ़ने देना चाहिए क्योंकि यह भी गर्भवती महिला के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। साथ ही प्रेगनेंसी के छठे महीने में महिला को अपने आहार में कुछ ऐसी चीजों को सेवन करना चाहिए, जिससे डिलीवरी के लिए महिला का शरीर तैयार हो जाए, शिशु का विकास बेहतर तरीके से हो सके, गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके आदि। प्रेगनेंसी के छठे महीने में खान पान से जुडी किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए आइये विस्तार से जानते हैं।
प्रेगनेंसी के छठे महीने में क्या क्या खाना चाहिए
गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के लिए, प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने के लिए, गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास के लिए फायदा मिलता है। तो प्रेगनेंसी के छठे महीने में महिला को अपनी डाइट में क्या किन किन चीजों को शामिल करना चाहिए आइये विस्तार से जानते हैं।
प्रोटीन लें
प्रोटीन गर्भ में पल रहे भ्रूण के विकास के लिए बहुत जरुरी होता है, इससे गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु की मांसपेशियों को मजबूती मिलने में मदद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला और भ्रूण दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है, और प्रोटीन की कमी को बॉडी में पूरा रखने के लिए अंडे का सफ़ेद हिस्सा, सभी किस्म की दालें, फलियां, दूध, दही आदि का सेवन गर्भवती महिला कर सकती है।
फाइबर
प्रेगनेंसी के छठे महीने में भी कई महिलाएं पेट से जुडी समस्याओं से परेशान हो सकती है, ऐसे में पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने के लिए गर्भवती महिला को फाइबर युक्त आहार का भरपूर सेवन करना चाहिए। और फाइबर को भरपूर मात्रा में लेने के लिए गर्भवती महिला संतरे, सेब, शकरगंद, गाजर, साबुत अनाज, आदि का सेवन कर सकती है।
विटामिन सी
इम्युनिटी को मजबूत बनाएं रखने के लिए गर्भवती महिला को विटामिन सी का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए। विटामिन सी का सेवन करने से गर्भवती महिला को रोगो से लड़ने के लिए प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलती है। और इसके लिए गर्भवती महिला संतरें, अंजीर, शिमला मिर्च, स्ट्रॉबेरीज, ब्रोकली, कीवी, पत्ता गोभी, टमाटर आदि का सेवन भरपूर मात्रा में कर सकती है। इसके अलावा अन्य विटामिन से युक्त आहार का सेवन भी गर्भवती महिला को भरपूर करना चाहिए।
आयरन
गर्भवती महिला के शरीर में आयरन की कमी का होना गर्भवती महिला की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या को बढ़ाने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में भी कमी का कारण बन सकता है। साथ ही खून की कमी के कारण डिलीवरी के दौरान भी महिला को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में यदि महिला के शरीर में आयरन की कमी है तो प्रेगनेंसी के छठे महीने से महिला को आयरन युक्त आहार का भरपूर सेवन करना चाहिए। और आयरन की कमी को पूरा करने के लिए गर्भवती महिला अनार, टमाटर, हरी सब्जियां, चुकंदर, गाजर, बीन्स आदि का सेवन भरपूर मात्रा में कर सकती है।
फैट और कार्बोहाइड्रेट
प्रेगनेंसी के आख्रिरी महीने में वजन बढ़ने के कारण महिला की परेशानी बढ़ सकती है। ऐसे में महिला को स्वस्थ रहने के लिए ऊर्जा से भरपूर रहना जरुरी होता है, और बॉडी में ऊर्जा के लिए वसा या फैट का होना बहुत जरूरी है। ऐसे में फैट युक्त पदार्थों के लिए महिला नॉन वेज, अंडे, देसी घी,आदि का सेवन कर सकती है। साथ ही कार्बोहाइड्रेट के लिए चावल, आलू, शकरगंद आदि का सेवन गर्भवती महिला कर सकती है।
कैल्शियम
अन्य पोषक तत्वों की तरह बॉडी में कैल्शियम का होना भी बहुत जरुरी होता है, बॉडी में कैल्शियम का भरपूर मात्रा में होना गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूत बनाएं रखने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास में भी मदद करता है। और कैल्शियम को भरपूर मात्रा में लेने के लिए गर्भवती महिला को दूध बी दूध से बनी चीजों का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए।
तरल पदार्थ
प्रेगनेंसी के छठे में महिला में शरीर में पानी की कमी होना गर्भवती महिला के लिए समस्या खड़ी कर सकता है, साथ ही इसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु को भी परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला को इस परेशानी से निजात पाने के लिए पानी का भरपूर सेवन करने के साथ, नारियल पानी, निम्बू पानी, ताजे फलों के रस, सूप आदि का भी सेवन करना चाहिए। तरल पदार्थो का गर्भवती महिला के शरीर में भरपूर मात्रा में होना गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रखने में भी मदद करता है।
तो यह हैं कुछ आहार जो प्रेगनेंसी के छठे महीने में गर्भवती महिला को जरूर लेने चाहिए, इन चीजों को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। साथ ही खान पान के लिए आप चाहे तो एक बार अपने डॉक्टर से भी राय ले सकती है।
धूप के कारण हाथों पैरों के काले होने की समस्या केवल गर्मी के मौसम में ही नहीं बल्कि सर्दी के मौसम भी हो होती है। क्योंकि गर्मियों में जहां हमारे आधी बाजू या स्लीवलेस कपडे पहनने के कारण यह परेशानी होती है वहीँ सर्दी में ठण्ड से बचने के लिए हम धूप में बैठते हैं और लगातार धूप में बैठने के कारण भी हाथों पैरों के काले होने की समस्या हो जाती है।
और हाथों पैरों का कालापन आपकी ख़ूबसूरती को कम करता है। लेकिन कुछ आसान नुस्खों का इस्तेमाल करके घर में बैठे बैठे ही आप इस परेशानी से निजात पा सकते हैं। तो आइये अब जानते हैं की हाथों पैरों के कालेपन को दूर करने के लिए आप किन टिप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।
हल्दी और दही
आधा कप दही में एक छोटा चम्मच हल्दी डालकर अच्छे से मिक्स कर लें, अब नहाने से बीस मिनट पहले इसे अपने हाथों पैरों पर लगाएं और मसाज करें। मसाज करने के बाद इसे दस से पंद्रह मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें। उसके बाद इसे साफ पानी से धो दें, ऐसा रोजाना करें इससे टैनिंग और स्किन पर जमे धूल मिट्टी के कण हट जाएंगे। जिससे आपको धूप के कारण स्किन के काले होने की समस्या से निजात पाने में मदद मिलेगी।
निम्बू
एक बाल्टी में गुनगुना पानी करें और उसमे दो या तीन निम्बू निचोड़ लें, उसके बाद दस मिनट तक इसमें अपने हाथों पैरों को डुबोकर रखें। उसके बाद साफ़ पानी से हाथों को धोकर मॉइस्चराइजर लगाएं। ऐसा एक दिन छोड़कर करते रहें, ऐसा करने से टैनिंग को हटाने और धूप की किरणों के कारण स्किन को होने वाले नुकसान से बचाने में मदद मिलती है।
दूध और सेंधा नमक
तीन से चार चम्मच कच्चे दूध में एक चम्मच शहद और एक चम्मच सेंधा नमक मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें। अब इस पेस्ट से हाथों पैरों की अच्छे से मसाज करें। उसके दस मिनट बाद अपने हाथों पैरों को साफ पानी से धो दें। यह उपाय आसान होने के साथ बहुत जल्दी आपकी स्किन पर असर भी दिखाएगा।
संतरे के छिलके
संतरे के छिलकों को सुखाकर इसे पीस लें, उसके बाद इस पाउडर में कच्चा दूध मिलाकर हाथों पैरों पर लगाएं। ऐसा करने से हाथों पैरों की डेड स्किन निकल जाएगी साथ ही स्किन टोन भी बेहतर होगा।
एलोवेरा
एलोवेरा जैल स्किन के लिए बहुत फायदेमंद होता है जैसे की एलोवेरा जैल से स्किन को निखारने में मदद मिलती है, स्किन की कोमलता बरकरार रहती है, स्किन पर होने वाले दाग, धब्बे दूर करने में मदद मिलती हैं, स्किन टोन को बेहतर करने में मदद मिलती है, आदि। ऐसे में धूप के कारण हाथों पैरों के कालेपन की समस्या को दूर करने के लिए भी आप एलोवेरा का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए एलोवेरा जैल को रात को सोने से पहले हाथों, पैरों, मुँह आदि पर लगाएं। और सुबह उठकर नहा लें, ऐसा एक दिन छोड़कर आप कर सकते हैं। इसके अलावा यदि आपके घर में या आस पास एलोवेरा के ताजे पत्ते नहीं हैं तो आप मार्किट से एलोवेरा जैल लाकर भी इस्तेमाल कर सकती है।
आलू का रस
आलू का रस और निम्बू के रस को बराबर मात्रा में मिलाकर रात को सोने से पहले रुई की मदद से आप अपने हाथों पैरों पर लगाएं। और सुबह उठकर साफ पानी से हाथों पैरों को साफ़ कर दें, ऐसा करने से भी आपको हाथों पैरों के रंग को निखारने में मदद मिलती है। क्योंकि आलू का रस भी स्किन टैनिंग को दूर करने में बहुत फायदेमंद होता है।
शहद और निम्बू
दो चम्मच शहद में निम्बू का रस मिलाएं उसके बाद इसे मास्क के रूप में हाथों और पैरों पर लगाएं। दस से पंद्रह मिनट के बाद मसाज करते हुए इसे साफ़ पानी के साथ अपने हाथों पैरों पर से उतार दें। ऐसा करने से भी धूप के कारण काली पड़ी स्किन को निखारने में मदद मिलती है।
बेसन, हल्दी, गुलाबजल
एक कटोरी में दो चम्मच बेसन, आधा चम्मच हल्दी और गुलाबजल मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें, आप चाहे तो इसमें थोड़ा सा निम्बू का रस भी मिला सकती है। ऐसा करने के बाद आप इस पेस्ट को मास्क की तरह अपने हाथों पैरों पर लगाएं और फिर सूखने के लिए छोड़ दें। सूखने के बाद थोड़े पानी या गुलाबजल का इस्तेमाल करते हुए मसाज करके साफ़ पानी से धो दें। बेसन की जगह आप चाहे तो चन्दन का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।
तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिन्हे ट्राई करने से आपको हाथों पैरों के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है। इसके अलावा आप जब भी धूप में बाहर जाएँ तो हाथों को कॉटन के दुपट्टे से ढककर निकलें। साथ ही सनस्क्रीन जरूर लगाएं ऐसा करने से भी आप धूप के कारण हाथों पैरों को होने वाले नुकसान से बचा सकते हैं।
प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को पानी का भरपूर सेवन करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि पानी का भरपूर सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों से निजात मिलता है। साथ ही बच्चे के विकास के लिए गर्भवती महिला को भरपूर पानी पीना चाहिए। लेकिन यदि गर्भवती महिला के शरीर में पानी की कमी होती है तो इसके कारण महिला को सूजन, थकान, कमजोरी, बॉडी में दर्द, पेट से सम्बन्धी समस्या जैसे की कब्ज़ आदि होने का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही इसका असर महिला के पेट में पल रहे बच्चे पर भी पड़ता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम इस बारे में ही बात करने जा रहे हैं की यदि प्रेग्नेंट महिला के शरीर में पानी की कमी होने पर शिशु को क्या क्या नुकसान होते हैं।
एमनियोटिक फ्लूड की कमी
गर्भाशय में बच्चा जिस द्रव में नौ महीने तक होता है उसे एमनियोटिक फ्लूड कहा जाता है। प्रेग्नेंट महिला यदि तरल पदार्थों का सेवन भरपूर मात्रा में करती है तो इससे एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा को सही रखने में मदद मिलती है। लेकिन यदि महिला के शरीर में पानी की कमी होती है तो इससे एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा में कमी आने की सम्भावना होती है जिसके कारण बच्चे के विकास से जुडी परेशानियां होती है।
गर्भपात का होता है खतरा
पानी का भरपूर सेवन करने से शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला पानी का भरपूर सेवन नहीं करती है तो इस कारण बॉडी के तापमान के बढ़ने का खतरा रहता है, गर्भनाल अच्छे से काम नहीं कर पाती है जिससे गर्भ गिरने का खतरा बढ़ जाता है।
गर्भनाल सूखने लगती है
प्रेग्नेंट महिला के शरीर में पानी की कमी होने के कारण गर्भनाल सूखने लगती है और गर्भनाल के माध्यम से ही प्रेगनेंसी के दौरान शिशु के लिए जरुरी पोषक तत्व, रक्त, ऑक्सीजन आदि पहुंचाया जाता है। ऐसे में यदि गर्भनाल सूखने लगती है तो बच्चे के विकास लिए जरुरी चीजें बच्चे तक नहीं पहुँच पाती है जिसके कारण बच्चे के शारीरिक व् मानसिक विकास में कमी आ सकती है।
शिशु की मूवमेंट होती है कम
गर्भाशय में तरल पदार्थ की कमी के कारण बच्चे को गर्भ में घूमने में दिक्कत हो सकती है। जिसके कारण शिशु कम मूव कर पाता है। और गर्भ में शिशु असहज महसूस करता है।
शिशु का विकास नहीं हो पाता है
गर्भ में शिशु को पानी की कमी होने के कारण शिशु के फेफड़े, पाचन तंत्र व् उसके अन्य नाजुक अंगों का पूर्ण विकास नहीं होता है। जिसके कारण शिशु का शारीरिक व् मानसिक विकास अच्छे से नहीं हो पाता है।
संक्रमण का खतरा
पानी की कमी के कारण प्रेग्नेंट महिला की इम्युनिटी कमजोर होने के कारण महिला को संक्रमण होने का खतरा रहता है इसके अलावा यूरिन इन्फेक्शन, प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन होने की समस्या का खतरा भी होता है। और यदि प्रेग्नेंट महिला को संक्रमण होता है तो इसका असर बच्चे पर भी पड़ सकता है जिसके कारण बच्चे को दिक्कत हो सकती है।
समय से पहले डिलीवरी
गर्भवती महिला के शरीर में पानी होने के कारण महिला की डिलीवरी समय से पहले होने का खतरा होता है। जिसकी वजह से जन्म के समय शिशु के वजन में कमी जैसी परेशानी होती है।
तो यह हैं कुछ नुकसान जो गर्भवती महिला के शरीर में पानी की कमी होने पर बच्चे को हो सकते हैं। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए ताकि माँ व् बच्चे दोनों को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों से निजात मिल सके, और बच्चे का शारीरिक व् मानसिक विकास बेहतर हो सके।
गर्भावस्था का आहार: गर्भावस्था किसी भी महिला को पूरा करने की राह हैं| ऐसा माना जाता हैं की बच्चे के जन्म के बाद माँ का भी नया जन्म होता हैं| महिलाओ के लिए सबसे खास लम्हा तब होता हैं, या तो जब उन्हें पता चलता हैं की वो माँ बनने वाली हैं, और या जब वो नन्हे कदम आपके जीवन में आते हैं तब| ये दो पल महिला के सबसे खास पल होते हैं| अपनी प्रेगनेंसी को लेकर महिला पुरे नौ महीने कई नए अनुभवो से गुजरती हैं|
प्रेगनेंसी में गर्भ में होने वाली हलचल का अहसास लगभग पांचवे महीने से माँ को होने लग जाता हैं| पहली बार माँ बनने वाली युवतियां इसे लेकर बहुत खुश होती हैं| प्रेगनेंसी के समय में महिला के शरीर में बहुत से बदलाव भी आते हैं| जैसे की कई महिलाओ को चक्कर आते हैं, उलटी आना, गंध बर्दाश न होना, इसके अलावा शरीर के कई अंगो में दर्द रहने के कारण भी महिलाएं परेशान रहती हैं|
ऐसा बिल्कुल भी जरुरी नहीं हैं की हर महिला को गर्भावस्था के दौरान एक जैसी समस्या हो| हर एक महिला के हॉर्मोन्स के बदलाव के कारण महिलाओ में अलग-अलग तरह के बदलाव आते हैं| गर्भावस्था के समय महिला को अपने स्वास्थ्य के साथ कोई भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए| क्योंकि उस समय माँ के गर्भ में पल रहा बच्चा भी हर तरह से महिला पर ही निर्भर करता हैं|
गर्भावस्था के समय सबसे जरुरी हैं की आप, अपने खान-पान का पूरा ध्यान दे, संतुलित व् पोष्टिक आहार ले| इसके साथ कभी भी किसी भी तरह की लापरवाही अपने खान पान को लेकर न करें| कई महिलाएँ ज्यादा मोटे होने के डर से खाने से परहेज करती हैं उन्हें ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए| और इस चीज का भी ध्यान रखना चाहिए की गर्भावस्था में इन चीजो का सेवन नहीं करना चाहिए|
अंगूर की तासीर बहुत गरम होती हैं| इसीलिए गर्भावस्था के पहले तीन महीने में कम से कम अंगूर का सेवन करना चाहिए| और हो सके तो गर्भावस्था में कम से कम ही अंगूर का सेवन करें| क्योंकि ज्यादा अंगूरों का सेवन करने से प्रसव का खतरा बढ़ जाता हैं| इसीलिए आपको इन से प्रेगनेंसी के समय में परहेज करना चाहिए| और डॉक्टर भी इसकी सलाह देते हैं|
पपीते का सेवन न करें:-
पका हुआ पपीता विटामिन-सी और अन्य पोषक तत्वो से भरपूर होता हैं| फिर भी गर्भावस्था के समय में गर्भवती महिलाओ को पपीते का सेवन नहीं करना चाहिए| क्योंकि पपीते का सेवन करने से भी प्रसव का खतरे बढ़ जाते हैं| कच्चे और पके दोनों ही तरह के पपीते का सेवन नहीं करना चाहिए| दोनों ही नुकसानदायक होते हैं|
अनानास का सेवन भी नहीं करना चाहिए:-
अनानास का सेवन गर्भावस्था के पहले तीन महीने में तो बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए| क्योंकि अनानास की को खाने से गर्भ में नरमी हो जाती हैं, जिससे प्रसव का खतरा बढ़ जाता हैं| इसीलिए आपको हो सकें तो पुरे नौ महीने ही इस फल से दूर रहना चाहिए|
कच्ची सब्जियों का सेवन न करें:-
गर्भवती महिलाओ को कच्ची सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए| और आप जो भी सब्ज़ी खाएं, कोशिश करें की आप उन्हें अच्छे से धो ले ताकि संक्रामक रोगों का खतरा न बने| और हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन आप कर सकते हैं क्योंकि इसमें आयरन की मात्रा अधिक होती हैं|
ज्यादा तेल से बनी चीजो से करें परहेज:-
गर्भावस्था के समय महिलाओ को ज्यादा मसले व् तेल वाले खाने से परहेज करना चाहिए| इसके साथ आपको ये भी कोशिश करनी चाहिए, की आप बाहर के खाने को तो बिल्कुल ही न खाएं| क्योंकि कई बार ये खाना हज़म नहीं होता हैं| इसके साथ ये पेट में गैस और एसिडिटी जैसी समस्या भी बढ़ाता हैं| और कई बार इससे पेट में जलन की समस्या भी उत्तपन हो जाती हैं| और हो सके तो फ्रेश व् हेअलटी खाना खाएं|
चाय, कॉफ़ी का सेवन कम से कम करें:-
चाय कॉफ़ी का सेवन भी गर्भावस्था के समय में कम से कम करना चाहिए| क्योंकि इसमें टॉनिक एसिड होता हैं जो प्रेग्नेंट महिलाओ के लिए अच्छा नहीं होता हैं| और इससे महिलाओ को बार-बार बाथरूम में जाने की समस्या होती हैं| इसीलिए जितना हो सके इसका कम से कम सेवन करना चाहिए|
बासी खाने का सेवन न करें:-
गर्भावस्था में हमेशा फ्रेश और ताजे खाने का ही प्रयोग करना चाहिए| इसके साथ आपको ऐसा भी करना चाहिए, की आप कभी भी बासी खाने का प्रयोग नहीं करना चाहिए खास कर अंडे और मछली का सेवन तो कभी भी नहीं करना चाहिए| और वैसे ही गर्भावस्था के आलावा वैसे भी आपको ताजे व् पोस्टिक आहार का सेवन ही करना चाहिए|
मीट का सेवन न करें:-
कच्चा या अधपका मीट खाने से गर्भावस्था के शुरूआती दिनों में बचना चाहिए| बेहतर होगा कि गर्भावस्था के दिनों में आप मीट को अच्छी तरह पकाकर खाएं| और हो सके तो आपको इससे परहेज ही करना चाहिए, और खास कर गर्भावस्था में प्रॉन मीट खाने से बचना चाहिए|
कच्चे दूध का सेवन न करें:-
कच्चा दूध मिल्क में प्रोटीन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में होते है| लेकिन गर्भवती महिलाएं, प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में भूल से भी कच्चे दूध का सेवन न करें| क्योंकि ये उनके लिए समस्या हो सकता हैं| अगर आपको दूध पीना है तो अच्छी तरह उबालने के बाद ही पिएं| मलाई निकला हुआ दूध ही पीना चाहिए|
एल्कोहल व् धूम्रपान नहीं करना चाहिए:-
एल्कोहल, और धूम्रपान बच्चे के विकास में काफी नुकसानदायक होता है| और इसे जल्दी होने वाली गर्भावस्था के दौरान पीने से बचना चाहिए, और गर्भावस्था के बाद भी यदि आप अपने बच्चे को स्तनपान करवाती हैं, तो भी इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए|
तो ये कुछ बातें जो आपके आहार से सम्बंधित हैं| गर्भावस्था में आपको इन चीजो से परहेज करना चाहिए| और अधिक से अधिक मात्रा में स्वस्थ व् पोष्टिक आहार लेना चाहिए| ताकि आप और आपका बच्चा स्वस्थ रह सकें| साथ ही आप हर समय अपने डॉक्टर से राय लेते रहें, और अपना रूटीन चेक-अप जरूर करवाएं| इसके साथ आपको हर समय बहुत सी सावधानियां भी बरतनी चाहिए|
जैसे की भरी सामान नहीं उठाना चाहिए, पैरो के भर नहीं बैठना चाहिए, ज्यादा व्यायाम नहीं करना चाहिए, ज्यादा देर तक एक स्थान पर नहीं बैठना चाहिए, पेट के भर कोई भी काम नहीं करना चाहिए, ज्यादा झुकना नहीं चाहिए, ऐसी बहुत सी छोटी-छोटी बातें हैं जिनका ध्यान गर्भावस्था के समय रखना चाहिए| इससे आपको गर्भावस्था का समय अच्छा बनाने में मदद मिलेगी|
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प्रेगनेंसी एक ऐसा समय होता है जहां गर्भवती महिला को छोटी छोटी बातों का अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है। क्योंकि कई बार छोटी सी लापरवाही बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। जैसे की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को भरपूर नींद लेनी चाहिए। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बहुत सी शारीरिक समस्या जैसे की उल्टी होना, जी मिचलाना, पेट व कमर में दर्द जैसी समस्या होती है। जिसके कारण महिला को नींद लेने दिक्कत हो सकती है। साथ ही वजन बढ़ने के कारण महिला को सोते समय भी बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
और जो महिलाएं पहली बार माँ बन रही होती है। उन्हें तो हो सकता है की यह भी न पता हो की आखिर प्रेगनेंसी में किस तरह सोना चाहिए और किस तरह सोना गर्भावस्था में नुकसानदायक हो सकता है। क्योंकि गर्भवती महिला यदि गलत तरीके से सोती है तो इसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में बाधा उत्पन्न हो सकती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान महिला को एक से नौ महीने तक सोते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए इस बारे में बताने जा रहे हैं।
प्रेगनेंसी में कितनी देर की नींद गर्भवती महिला को लेनी चाहिए?
यह जानने से पहले की प्रेगनेंसी में महिला को किस तरह सोना चाहिए। उससे पहले यह जानना जरुरी होता है की गर्भवती महिला को कितनी नींद प्रेगनेंसी के दैरान लेनी चाहिए। एक स्वस्थ व्यक्ति को एक दिन में कम से कम आठ घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए। लेकिन यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो आपको इससे थोड़ा ज्यादा सोना चाहिए। क्योंकि गर्भावस्था के दौरान महिला को बॉडी को रिलैक्स रखने के लिए ज्यादा ऊर्जा की जरुरत होती है। और पर्याप्त नींद प्रेग्नेंट महिला व शिशु को स्वस्थ रखने में मदद करती है।
गर्भावस्था के दौरान कम नींद या गलत तरीके से सोना शिशु को नुकसान पहुंचा सकता है?
जी हाँ, प्रेग्नेंट महिला यदि भरपूर नींद नहीं लेती है तो इससे शिशु तक खून व ऑक्सीजन की मात्रा सही तरीके से नहीं पहुँचती है। जिससे शिशु के विकास में कमी आ सकती है। साथ ही भरपूर नींद न लेने के कारण महिला की स्वास्थ्य सम्बन्धी दिक्कतें बढ़ सकती हैं। जिससे भ्रूण भी प्रभावित हो सकता है।
प्रेगनेंसी में सोने का सही तरीका क्या है?
गर्भावस्था के दौरान महिला को केवल खान पान का ही नहीं बल्कि अपने सोने के तरीके का भी ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि जिस तरह से गलत खान पान शिशु पर बुरा असर डाल सकता है। वैसे ही गलत तरीके से सोना भी प्रेग्नेंट महिला व शिशु पर बुरा असर डाल सकता है। तो आइये अब जानते हैं की गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान तीनों तिमाही में किस तरह से सोना चाहिए ताकि गर्भवती महिला व शिशु को कोई दिक्कत न हो।
गर्भावस्था की पहली तिमाही में किस तरह सोना चाहिए
प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में गर्भ में शिशु का वजन कम ही होता है साथ ही पेट का आकार भी नहीं बढा हुआ होता है।
ऐसे में प्रेग्नेंट महिला करवट लेकर सोना चाहे तो करवट लेकर सो सकती है या फिर पीठ के बल सोना चाहे तो भी सो सकती है।
लेकिन प्रेग्नेंट महिला को जितना हो पेट के बल नहीं सोना चाहिए।
क्योंकि इससे गर्भस्थ शिशु को दिक्कत हो सकती है।
साथ ही पीठ के बल भी ज्यादा देर सोने से अच्छा है की थोड़ी थोड़ी देर बाद अपनी पोजीशन को बदलते रहना चाहिए।
प्रेगनेंसी के दौरान दूसरी तिमाही में किस तरह सोना चाहिए
दूसरी तिमाही तक आते आते महिला का पेट थोड़ा बाहर निकल आता है साथ ही शिशु का वजन भी बढ़ जाता है।
ऐसे में महिला को पेट के बल तो बिल्कुल नहीं सोना चाहिए साथ ही पीठ के बल सोने से भी बचना चाहिए।
क्योंकि पीठ के बल सोने से प्रेग्नेंट महिला को गर्भाशय का भार पीठ की मांसपेशियों व रीढ़ की हड्डी पर पड़ सकता है।
जिसके कारण बॉडी में ब्लड फ्लो का अच्छे से नहीं होना, मांसपेशियों में सूजन, पीठ में दर्द जैसी समस्या प्रेग्नेंट महिला को हो सकती है।
ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को करवट लेकर सोना चाहिए और बाईं तरफ करवट लेकर सोना प्रेग्नेंट महिला के सोने के लिए सबसे सही पोजीशन होती है।
प्रेगनेंसी के दौरान तीसरी तिमाही में प्रेग्नेंट महिला को किस तरह सोना चाहिए
गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में महिला का वजन तेजी से बढ़ता है क्योंकि गर्भ में शिशु का विकास भी पहले की अपेक्षा तेजी से होता है।
ऐसे में न तो महिला को पीठ के बल सोना चाहिए और न ही दाईं और करवट लेकर ज्यादा देर सोना चाहिए।
क्योंकि इससे शिशु तक ऑक्सीजन व ब्लड का प्रवाह अच्छे से नहीं हो पाता है।
साथ ही प्रेग्नेंट महिला को इस समय जितना हो बाईं और करवट लेकर ही सोना चाहिए।
क्योंकि इससे न केवल प्रेग्नेंट महिला को बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है बल्कि शिशु को भी किसी तरह की दिक्कत नहीं होती है।
प्रेगनेंसी में कम नींद लेने के नुकसान
महिला को थकावट, कमजोरी व अन्य स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या होने का खतरा रहता है।
तनाव जैसी समस्या से प्रेग्नेंट महिला को परेशान होना पड़ सकता है।
सिजेरियन डिलीवरी होने के चांस बढ़ जाते हैं।
प्रेग्नेंट महिला के इम्यून सिस्टम पर बुरा असर पड़ता है।
महिला को स्किन सम्बन्धी समस्या हो सकती है।
जन्म के समय शिशु के वजन में कमी जैसी परेशानी हो सकती है।
तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान सोने से जुड़े कुछ खास टिप्स, जिनका गर्भवती महिला को जरूर ध्यान रखना चाहिए। ताकि प्रेग्नेंट महिला व शिशु को होने वाली हर दिक्कत से बचाव करने में मदद मिल सके।
खूबसूरत और बेदाग त्वचा कौन नहीं पाना चाहता? लेकिन ऐसे बहुत से कारण और समस्याएं है तो त्वचा को खूबसूरत और बेदाग रहने नहीं देती। इन्ही कारणों में से एक है चेहरे की झाइयां, जो अक्सर उम्र बढ़ने के साथ चेहरे पर उभर आती है। जो अच्छी खासी सुंदरता में ग्रहण लगा देती है। क्योंकि ये बहुत अजीब दिखने वाले काले धब्बे होते है जो अधिक उम्र की महिलाओं की त्वचा पर आ ही जाते है।
पहले ये समस्या केवल अधिक उम्र की महिलाओं में ही देखने को मिलती थी लेकिन आजकल तो 30 के बाद से ही झाइयां आना शुरू हो जाती है। जिसका मुख्य कारण हमारा वातवरण और अव्यवस्थित खान पान है। शरीर में पौष्टिक तत्वों की कमी के कारण हॉर्मोन समय से पहले ही बूढ़े हो जाते है जिसके कारण बढ़ती उम्र की निशानियां भी दिखने लगती है।
इसके तनाव, कब्ज, अधिक देर तक धुप के सम्पर्क में रहना, बहुत अधिक मात्रा में कॉस्मेटिक का इस्तेमाल करने से भी झाइयां आ जाती है। ऐसे तो बाजार में बहुत से उत्पाद मौजूद है जो इस समस्या को खत्म करने का दावा करते है लेकिन उनमे से केवल कुछ को छोड़कर अन्य सभी इस दावे को पूरा नहीं कर पाते। ऐसे में इनका इस्तेमाल हानिकारक हो सकता है।
अगर आपकी त्वचा पर भी समय से पहले झाइयां दिखने लगी है तो परेशान न हो क्योंकि आज हम आपको कुछ आसान और फायदेमंद घरेलू उपायों के बारे में बताने जा रहे है जिनकी मदद से आपकी ये समस्या कुछ ही दिनों में गायब हो जाएगी।
झाइयां ठीक करने के घरेलू उपाय :-
1. दूध और दही :
सर्दियों में गर्म दूध और गर्मियों में दही की मलाई से रात को सोने से पहले चेहरे की मालिश करें। 15 मिनट तक रखें और उसके बाद चेहरा धोकर सो जाए। ऐसा करने से त्वचा का रूखापन, झाइयां और दाग धब्बे मिट जायेंगे। इसके अलावा एक दिन सुबह बासी मट्ठे को नहाने से पहले अपने चेहरे पर लगाएं और 10 मिनट बाद नहा लें। ये झुर्रियां हटाने में मदद करेगा।
2. नींबू :
त्वचा के लिए नींबू के अनगिनत फायदे है। उन्ही में से एक ये भी है। इसके प्रयोग के लिए रोजाना अपने चेहरे पर नींबू रगड़ें या नींबू के रस को लगाएं। ऐसा करने से दाग धब्बे दूर होंगे और झाइयां ठीक हो जाएंगी। साथ ही त्वचा में निखार भी आएगा।
3. गुलाबजल :
झाइयां मिटाने के लिए 30 gram गुलाबजल में नींबू का रस डालकर उसमे थोड़ी कस्तूरी और ग्लिसरीन मिला लें। नहाने से 1 घंटा पूर्व इसे अपने चेहरे पर लगाएं। नहाते समय गर्म पानी से चेहरा साफ़ कर लें और उसके बाद ठंडे पानेसे छींटे मारे। तौलिये से त्वचा को रगड़ें, साबुन का इस्तेमाल न करें। ऐसा करने से झाइयां दूर होंगी और त्वचा सॉफ्ट होगी।
4. हल्दी :
हल्दी का प्रयोग त्वचा के लिए बरसों के किया जाता आ रहा है। झाइयां मिटाने के ली पीसी हुई हल्दी को आक के दूध में मिलकर उबटन बना लें। रात को सोने से पूर्व इस लेप को लगाएं। कुछ ही दिनों के प्रयोग से झाइयां बिलकुल समाप्त हो जाएंगी।
5. जामुन :
जामुन की गुठलियों को साफ़ चिकने पत्थर पर घिसकर चेहरे पर लगाएं। ऐसा करने से मुहाँसें दूर होते है और साथ ही झाइयां ठीक करने में भी मदद मिलती है।
6. पुष्प :
चंपा के फूल, छाल और पत्तों के इस्तेमाल से भी झाइयों को दूर किया जा सकता है। इसके प्रयोग के लिए इन तीनो चीजों को पानी में मिलाकर पीस लें। अब इसे अपने चेहरे पर लगाएं। ये चेहरे की झाइयों के साथ साथ दागों को भी ठीक करेगा।
7. मसूर की दाल :
इस दाल के इस्तेमाल के लिए रात को उसे पानी में भिगो दें। अगली सुबह इसे दूध में पीसकर सुबह शाम इसे अपने चेहरे पर मलें। पेस्ट लगाने के कुछ देर बाद चेहरे को गुनगुने पानी से साफ़ कर लें। फर्क आपके सामने होगा।
8. प्याज़ :
इसके लिए प्याज़ का रस निकालकर उसमे नींबू का रस मिला लें। अब इस मिश्रण को झाइयों पर लगाएं। लगाने के 20 मिनट बाद तक इन्तजार करें और फिर चेहरा ठंडे पानी से धो लेंव् ऐसा सप्ताह में 2 बार करें। झाइयां हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगी।
9. रीठा :
रीठा के छिलके को पानी में मिलाकर पीस लें। अब इस लेप को चेहरे पर लगाएं। कुछ देर रखने के बाद चेहरे को ठंडे पानी से धो लें। धीरे-धीरे झाइयां बिलकुल समाप्त हो जाएंगी।
10. संतरे का छिलका :
इस उपाय के इस्तेमाल के लिए सेंटर के छिलके को तुलसी के 7 से 8 पत्तो और एक चुटकी हल्दी, थोड़े से दूध के साथ पीस लें। अब इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लेप की तरह लगाएं। 15 से 20 मिनट तक रखने के बाद गुनगुने पानी से चेहरा साफ़ कर लें। रोजाना इस्तेमाल से झाइयां खत्म हो जाएंगी।
तो ये थे कुछ उपाय जिनकी मदद से आप अपनी झाइयों को हमेशा के लिए दूर भगा सकती है। और इसके लिए बहुत से पैसे भी खर्च नहीं होंगे और न ही किसी प्रकार का साइड इफ़ेक्ट।
महिला के प्रेग्नेंट होने की सही उम्र बाइस से अठाइस वर्ष तक होती है लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है की इस उम्र से कम या ज्यादा उम्र की महिलाएं गर्भधारण नहीं कर पाती है। परन्तु ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि बाइस से अठाइस वर्ष की उम्र में प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चे दोनों को परेशानी होने का खतरा कम होता है। जबकि बाइस से अठाइस वर्ष से कम या ज्यादा उम्र होने पर महिला को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
और आज कल लडकियां अपने भविष्य के बारे में सोचती हुई माँ बनने के निर्णय में देरी कर देती है। ऐसे में यदि महिला तीस या तीस से ज्यादा उम्र में यदि गर्भधारण करती है तो प्रेगनेंसी में किसी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स न आए और माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ रहें इसके लिए महिला को प्रेग्नेंट होने पर बहुत सी बातों का ध्यान रखने की जरुरत होती है। तो आइये अब जानते हैं की तीस की उम्र में गर्भवती होने पर महिला को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
जांच करवाएं
तीस की उम्र के बाद प्रेग्नेंट महिला को अपनी सभी जाँच को समय से करवाना चाहिए, प्रेगनेंसी में रूटीन चेकअप का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, किसी भी जांच में देरी नहीं करनी चाहिए, ऐसा करने से गर्भावस्था के दौरान आपको हर परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही यदि उम्र ज्यादा होने के कारण प्रेगनेंसी में कोई परेशानी होती भी है तो उसका समय से समाधान हो जाता है।
पॉजिटिव रहें
गर्भवती होने पर यदि आपको कोई प्रेगनेंसी के बारे में बताता हैं तो ऐसे में आपको बताने वाले सभी लोगो की राय अलग अलग हो सकती है। साथ ही आपसे सभी अपने एक्सपीरियंस भी शेयर कर सकते हैं, वो एक्सपीरियंस अच्छे होने के साथ बुरे भी हो सकते हैं। लेकिन इन सभी बातों को लेकर आपने तनाव नहीं लेना है बल्कि पॉजिटिव रहना है। क्योंकि आपका तनाव लेना आपकी परेशानी को बढ़ाता है ऐसे में पॉजिटिव रहकर अपना अच्छे से ध्यान रखकर आपको अपनी प्रेगनेंसी को एन्जॉय करना चाहिए।
सम्बन्ध बनाने से बचे
तीस की उम्र के बाद यदि अपने गर्भधारण किया है तो आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए की आप अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध न बनाएं। क्योंकि इसके कारण गर्भाशय पर थोड़ी सी चोट लगने के कारण आपको और आपके बच्चे को दिक्कत हो सकती है।
शरीर में पोषक तत्वों की कमी न होने दें
तीस की उम्र के बाद माँ बनने में कॉम्प्लिकेशन होने का खतरा ज्यादा होता है ऐसे में बॉडी में विटामिन्स की कमी, आयरन की कमी, कैल्शियम की कमी, गर्भवती महिला की दिक्कतों को बढ़ा सकती है। ऐसे में डॉक्टर्स द्वारा दी गई दवाइयों का सेवन करने के साथ महिला को अपनी डाइट में भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों को शामिल करना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला को पोषक तत्वों की कमी के कारण होने वाली शारीरिक परेशानियों से बचे रहने में मदद मिल सके।
हाइड्रेट रहें
प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में पानी की कमी प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स को बढ़ा देती है। ऐसे में महिला को इस बात का भी अच्छे से ध्यान रखना है की शरीर में पानी की कमी न हो इसके लिए गर्भवती महिला को पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए। पानी की कमी को पूरा करने के लिए जूस, नारियल पानी, निम्बू पानी, आदि का सेवन भी गर्भवती महिला कर सकती है।
वजन
वजन बढ़ने या कम होने पर भी तीस की उम्र में माँ बनने पर महिला को अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि वजन का कम बढ़ना या ज्यादा बढ़ना दोनों ही प्रेग्नेंट महिला की दिक्कतों को ज्यादा बढ़ाता है।
कैफीन का सेवन
यदि आप कैफीन युक्त आहार जैसे चाय, कॉफ़ी, ब्लैक टी, खाली पेट ग्रीन टी का सेवन अधिक मात्रा में करती हैं। तो प्रेगनेंसी की शुरुआत से इन चीजों का सेवन कम कर दें, क्योंकि कैफीन से गर्भपात, समय से पहले बच्चे का जन्म, प्रेगनेंसी के समय कॉम्प्लीकेशन्स होने का खतरा रहता है। खासकर यदि आप तीस या उससे ज्यादा उम्र में गर्भवती हुई है तो आपको ऐसे रिस्क लेने से बचना चाहिए।
व्यायाम
तीस की उम्र के बाद गर्भधारण होने पर आपको व्यायाम नहीं करना चाहिए। खाना खाने के बाद चाहे तो घर में ही वॉक करें, लेकिन ऐसा कोई भी काम करने से बचे जिससे आपको थकावट या कमजोरी की परेशानी हो। इसके अलावा आप चाहे तो मैडिटेशन या योगासन कर सकती है।
भरपूर आराम करें
तीस की उम्र के बाद यदि आपने गर्भधारण किया है तो आपको इस दौरान भरपूर आराम करना चाहिए। क्योंकि आराम करने से आपको स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है की आप सारा दिन एक ही जगह पर बैठी या लेटी रहें।
तीस की उम्र के बाद गर्भधारण होने पर इन कामों को बिल्कुल न करें
भारी वजन न उठाएं, भीड़भाड़ में न जाएँ, पोछा न लगाएं, जिन कामों को करने में पेट पर जोर पड़े उन कामों को न करें, झुककर काम न करें, सीढ़ियां न चढ़ें, गर्म पानी से न न नहाएं, डाइट न करें, आदि। यदि आप इन बातों का ध्यान रखती हैं तो तीस की उम्र के बाद प्रेगनेंसी में आने वाली दिक्कतों से बचे रहने में मदद मिलती है।
तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका ध्यान महिला को तीस की उम्र में गर्भधारण करने पर रखना चाहिए। ताकि महिला की प्रेगनेंसी में कोई परेशानी न हो, बच्चे का विकास अच्छे से हो और महिला अपनी प्रेगनेंसी को अच्छे से एन्जॉय कर सके।
आज कल महिला के पीरियड्स के मिस होने पर वो आसानी से प्रेगनेंसी किट का इस्तेमाल करके घर पर ही जांच कर लेती है की वो गर्भवती है या नहीं। लेकिन क्या आप जानते हैं की यदि आप गर्भवती हैं तो इसके कुछ लक्षण आपके शरीर में भी दिखाई देने लग जाते हैं, जिससे पता चल सकता है की आप गर्भवती हैं या नहीं। और पहले समय में कोई किट का इस्तेमाल नहीं करता था बल्कि घर की बुजुर्ग महिलाएं महिला के बॉडी में होने वाले लक्षण और मासिक धर्म के मिस होने पर ही बता देती थी की महिला का गर्भ ठहरा है या नहीं। और ऐसा भी नहीं है की बॉडी में कोई एक लक्षण दिखाई देता है बल्कि कई लक्षण दिखाई दे सकते हैं। साथ ही निषेचन की क्रिया के बाद बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव पर यह निर्भर करता है की महिला के बॉडी में क्या बदलाव आते है, इसीलिए हर महिला में यह अलग अलग महसूस हो सकते हैं।
गर्भावस्था के लक्षण
माहिला के अंडाणु में रखे अण्डों में से जिस अंडे के साथ पुरुष के शुक्राणु का फैलोपियन ट्यूब में मिलन होता है और निषेचन की क्रिया होने बाद, जब भ्रूण गर्भाशय से जुड़ता है। तो महिला के शरीर में बहुत से लक्षण दिखाई देते हैं। तो लीजिए अब विस्तार से जानते हैं की आप प्रेग्नेंट हो गए इसके कौन कौन से लक्षण होते हैं।
क्रेविंग
गर्भावस्था में क्रेविंग का होना भी एक आम लक्षण होता है इसके होने पर गर्भवती महिला का आकर्षण किसी एक खाने की चीज के लिए बढ़ जाता है, जैसे की कुछ महिलाओं को मीठा खाने का मन करता है तो कुछ महिलाओं का नमकीन। और हमेशा उसी चीज को खाने की इच्छा होती रहती है।
यूरिन
बार बार यूरिन जाने की इच्छा होना भी प्रेगनेंसी के शुरूआती लक्षणों में से एक होता है, क्योंकि बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण किडनी अधिक सक्रिय हो जाती है। जिसके कारण महिला को बार बार यूरिन पास करने की जरुरत पड़ती है।
बॉडी का तापमान
प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में आपको बॉडी का तापमान सामान्य से अधिक महसूस हो सकता है, और ऐसा होना आम बात होती है। लेकिन यदि आपको ऐसा महसूस हो की तापमान बहुत अधिक है तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।
मूड स्विंग्स
मूड स्विंग्स भी प्रेगनेंसी के लक्षणों में से ही एक है, और महिला के मूड में बदलाव के कारण महिला कभी खुश रहती है तो कभी बहुत अधिक गुस्से में, चिड़चिड़ी भी हो सकती है।
कब्ज़
बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है जिसके कारण महिला को कब्ज़ की समस्या से परेशान हो सकती है, साथ ही पाचन क्रिया के धीमे होने के कारण महिला का कुछ खाने का मन भी नहीं करता है।
सिर दर्द
रक्त का वॉल्यूम बढ़ जाने के कारण शुरूआती दिनों में महिला को सिर में दर्द की समस्या अधिक रहती है, ऐसे में महिला को भरपूर आराम करना चाहिए। साथ ही धीरे धीरे इस समस्या से महिला को आराम भी मिल जाता है।
ब्रेस्ट
ब्रेस्ट में भारीपन व् सूजन का महसूस होना भी प्रेगनेंसी के शुरूआती लक्षणों में से एक है। यह बहुत ही सामान्य लक्षण होता है और ब्रेस्ट में आये इस परिवर्तन का कारण बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव होते हैं। क्योंकि ब्रेस्ट के उत्तक काफी संवेदनशील होते हैं और हार्मोनल बदलाव के कारण इन पर बहुत जल्दी असर दिखाई देता है। इसके अलावा निप्पल के रंग में भी गहरा होने लग जाता है।
उल्टी
प्रेगनेंसी होने का सबसे सामान्य और अहम लक्षणों में से एक होता है महिला को उल्टी की समस्या और अधिकतर गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी की शुरुआत में इस समस्या से परेशान होती है। कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने इस समस्या से परेशान रहती हैं तो कुछ पूरे नौ महीने तक उल्टियां होने के कारण परेशान हो सकती है।
थकान व् कमजोरी
गर्भावस्था की शुरुआत में बॉडी में हार्मोनल बदलाव बहुत तेजी से होते है, जिसके कारण महिला शुरुआत में बहुत ही ज्यादा थकान व् कमजोरी का अनुभव कर सकती है। ऐसे में महिला को चाहिए की जितना हो सके महिला अपनी बॉडी को आराम दे ताकि इस परेशानी से राहत पाने में मदद मिल सके।
पेट में दर्द व् स्पॉटिंग
हल्का फुल्का पेट में दर्द रहना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है और शुरुआत में यह महिला को महसूस हो सकता है, साथ ही कुछ महिलएं स्पॉटिंग की समस्या से भी परेशान हो सकती है, और ऐसा होना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है। लेकिन यदि पेट में दर्द अधिक हो और साथ ही महिला को ब्लड का प्रवाह भी अधिक हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
गंध से एलर्जी
गंध से एलर्जी का होना भी प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली एक आम समस्या है, केवल दुर्गन्ध ही नहीं बल्कि कई बार सब्जियों व् फलों की सुगंध से भी महिला को एलर्जी हो सकती है।
भूख
बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव का असर पाचन क्रिया पर भी पड़ता है ऐसे में कुछ महिलाएं तो खाने से परहेज करने लगती है लेकिन कुछ महिलाओं की खाने की इच्छा में वृद्धि होने लगती है।
तो यह हैं कुछ लक्षण जो महिला का गर्भ ठहरने के बाद बॉडी में महसूस होते हैं ऐसे में महिला को यदि प्रेगनेंसी के लक्षण बॉडी में महसूस हो या महिला प्रेगनेंसी में टेस्ट किट के माध्यम से प्रेगनेंसी टेस्ट करे तो उसके बाद महिला को बिना देरी करते हुए तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए ताकि शुरुआत से ही आपकी प्रेगनेंसी में सही केयर होने में मदद मिल सके।