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डिलीवरी के बाद पेट कम करने की विधि

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डिलीवरी होने के बाद महिलाएं सबसे ज्यादा चिंतित इसी बात को लेकर होती है की किस तरह वो वापिस अपनी बॉडी शेप को सही कर पाएंगी। क्योंकि ज्यादातर महिलाओं को डिलीवरी के बाद पेट बाहर निकलने के कारण परेशानी होती है, और कई बार तो महिलाओं का पेट ऐसा लगता है की जिस तरह अभी भी उनकी एक और डिलीवरी होनी है। सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं को पेट अंदर करने में ज्यादा परेशानी होती है। क्योंकि उनके शरीर को अच्छे से फिट होने के लिए समय लगता है। लेकिन परेशानी तो नार्मल डिलीवरी वाली महिलाओं के लिए भी होती है। क्योंकि शिशु के जन्म के बाद फिट होने के लिए और शिशु के विकास के लिए महिला आधी ध्यान रखना पड़ता है।

ऐसे में न तो महिला अधिक व्यायाम कर सकती है, क्योंकि इससे महिला को परेशानी हो सकती है, न ही अपने आहार को छोड़ सकती है, क्योंकि इससे शिशु के विकास और महिला के स्वस्थ दोनों पर बुरा असर पड़ता है। तो ऐसे में कई महिलाएं ऐसा भी सोचती है की डिलीवरी के बाद उनकी ख़ूबसूरती कम हो जाती है, लेकिन ऐसा नहीं होता है। क्योंकि डिलीवरी के बाद दो महीने तक रेस्ट करने के बाद आप चाहे तो हल्का फुल्का व्यायाम आदि कर सकती हैं। इसके अलावा और भी टिप्स अपना सकती है जिससे आपको डिलीवरी के बाद लटके हुए पेट को कम करने में मदद मिल सकें, लेकिन इन सब बातों में आपको शिशु के लिए किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

डिलीवरी के बाद पेट कम करने के टिप्स

डिलीवरी के बाद महिलाओं को एक दम से पेट कम करने के लिए कुछ भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने के कारण शिशु के विकास पर असर पड़ सकता है। यदि आप चाहते हैं की डिलीवरी के बाद पेट कम हो जाए तो आज हम इसके लिए आपको कुछ आसान टिप्स देने जा रहे है जिसके इस्तेमाल से आपको डिलीवरी के बाद बाहर लटके हुए पेट को आसानी से कम करने में मदद मिलती है।

शिशु को करवाएं स्तनपान

प्रेगनेंसी के बाद ज्यादातर महिलाओं को यही लगता है की शिशु को स्तनपान करवाने से उनकी बॉडी की शेप खराब हो जाती है जबकि यह गलत है। डिलीवरी के बाद शरीर लचीला हो जाता है और जो महिलाएं ब्रेस्टफीड करवाती हैं, उससे उनके शरीर में खिचाव उत्त्पन होता है, जिससे शरीर पर जमी चर्बी को कम करके आपको फिट करने में मदद मिलती है। स्तनपान करवाने के दौरान हो सकता है ब्रैस्ट में थोड़ा ढीलापन आये लेकिन जैसे ही शिशु फीड लेना बंद करता है ब्रैस्ट वापस से शेप में आने लगती है।

पानी है वरदान

पानी आपके शरीर में जमा कैलोरी को खत्म करके आपके पेट और कमर की चर्बी को कम करने में आपकी मदद करता है। साथ ही पानी के सेवन से आपके शरीर से विषैले पदार्थो को भी बाहर निकालने में मदद मिलती है। इसके अलावा पानी आपके शरीर में मेटाबोलिज्म को भी बेहतर करता है, जिससे आपका आहार कैलोरी में तेजी से बदलता है, और पानी का सेवन करने से कैलोरी को खत्म करने में मदद मिलती है। इसीलिए दिन में कम से कम आठ से दस गिलास पानी का सेवन करें, हो सकें तो दो से तीन गिलास गुनगुना पानी भी पीएं। पानी के साथ अन्य पेय पदार्थो का सेवन भी करें इससे भी आपको फायदा मिलता है।

भरपूर लें नींद

शिशु के जन्म के बाद हो सकता है की आपको लगातार सोने को न मिलें, लेकिन फिर भी आपको दिन में कम से कम आठ घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए। और इसके लिए आप दिन में सो सकती हैं, या फिर जिस समय शिशु सोता है उसी समय आप भी उसके साथ सो जाएँ। क्योंकि नींद भरपूर लेने से मेटाबोलिज्म सही रहता है, आपको फ्रैश महसूस होता है, और इससे आपके वजन को कम करने में भी मदद मिलती है।

योगासन करें

प्रेगनेंसी के बाद व्यायाम करना थोड़ा मुश्किल होता है, ऐसे में थोड़ी देर सुबह उठकर योगासन करें, जिससे आपको आराम मिलें, और आपको किसी तरह की परेशानी न हो। इससे भी आपकी बॉडी को फिट रहने में मदद मिलती है। साथ ही ऐसा करने के साथ खाना खाने के बाद तुरंत न सो जाएँ, बल्कि अपने कमरे या घर के बाहर थोड़ा वॉक करें, लेकिन आराम से इससे आपका खाना भी अच्छे से हज़म हो जाएगा, और आपका मेटाबोलिज्म भी बेहतर होगा जिससे आपको डिलीवरी के बाद पेट लटकने की समस्या से छुटकारा पाने में भी मदद मिलेगी।

आहार का रखें ध्यान

डिलीवरी के बाद महिला को शिशु को स्तनपान करवाना होता है, ऐसे में महिलाओं को ज्यादा भूख भी लगती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं होता है की आप पूरा दिन खाते रहें। इसके लिए आप अपने आहार में भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों को शामिल करना चाहिए, और दिन में थोड़ा थोड़ा आहार लेना चाहिए, एक दम से पेट भरकर नहीं खाना चाहिए। इसके अलावा खाना खाने से एक घंटा पहले एक गिलास पानी का सेवन जरूर करना चाहिए, फाइबर युक्त चीजों को अपने आहार में सम्मिलित करना चाहिए। और अपने आहार को छोड़ना नहीं चाहिए। यदि आप आहार सम्बंधित इन टिप्स का ध्यान रखते हैं तो ऐसा करने से आपको जरूर फायदा मिलता है।

तनाव से रखे दूरी

शिशु होने के बाद जिम्मेवारियां और भी बढ़ जाती हैं साथ ही शिशु की बेहतर केयर को लेकर महिला तनाव में आ सकती है। और तनाव का होना आपके शरीर की गतिविधियों को प्रभावित करता है, ऐसे में आपको इसे आराम से हैंडल करना चाहिए और बिना डर के इन लम्हो को एन्जॉय करना चाहिए। यदि आप तनाव को छोड़ खुश रहने की कोशिश करती हैं तो ऐसा करने से आपको डिलीवरी के बाद अपने बढ़े हुए पेट की समस्या से बहुत जल्दी निजात पाने में मदद मिलती है।

जंक फ़ूड और ज्यादा मीठे से बनाएं दूरी

डिलीवरी के बाद आपको पौष्टिक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए जिससे शिशु का विकास बेहतर होने के साथ आपको भी जल्दी फिट होने में मदद मिल सकें। ऐसे में आपको जंक फोड़ का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए, और न ही अधिक मीठा खाना चाहिए। क्योंकि यह दोनों शरीर पर जमने वाली चर्बी का सबसे बड़ा कारण होते हैं। इसीलिए जो भी खाएं घर में ताजा और पौष्टिक तत्वों से भरपूर बनाकर खाएं।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से आपको डिलीवरी के बाद लटके हुए पेट की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है। साथ ही आपको व्यायाम आदि करते हुए ध्यान रखना चाहिए की इससे आपको स्वास्थ्य सम्बन्धी किसी तरह की भी समस्या उत्त्पन्न न हो, जिससे आपको परेशानी न होने के साथ शिशु का भी बेहतर तरीके से विकास हो सके।

दूध में केसर मिलाकर पीने के फायदे

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Kesar Dudh Pine ke Fayde

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केसर भारतीय रसोई में प्रयोग किया जाने वाला बहुत प्रसिद्ध मसाला है जिसका प्रयोग आयुर्वेदिक औषधि के रूप में भी किया जाता है। स्वाद में कड़वा लेकिन खुशबु में लाजवाब केसर स्वास्थ्य और त्वचा के लिए बहुत ही गुणकारी होता है। केसर का प्रयोग अक्सर स्वादिष्ट व्यंजनों और मिठाइयों में खुशबु बढ़ाने के लिए किया जाता है। केसर को कई अलग-अलग नामों से जाना जाता है संस्कृत में इसे कुमकुम कहा जाता है जबकि हिंदी में यह केसर के नाम से मशहूर है वहीं अंग्रेजी में इसे सैफरॉन (Saffron) कहा जाता है।

इसके अद्भुत गुणों के कारन विश्व भर में यह सबसे कीमती पौधा माना जाता है। भारत में इसकी पैदावार केवल जम्मू और कश्मीर के सिमित क्षेत्रों में होती है। इसीलिए भारत में इसकी कीमत काफी ज्यादा है। केसर हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होता है। सर्दियों के दिनों में केसर का दूध पीने से शरीर में ताजगी आती है और उसे स्फूर्ति मिलती है।

क्योंकि इसकी तासीर काफी गर्म होती है। जिससे यदि आप सर्दियों के दिनों में इसे दूध के साथ मिलाकर सेवन करते है तो यह शरीर को गर्मी प्रदान करता है। इसके सेवन से इम्युनिटी पावर बढ़ती है और त्वचा भी स्वस्थ रहती है। दूध में केसर मिलाकर पीने से कई रोगों से भी निजात पाई जा सकती है। इसके अलावा भी दूध और केसर के कई फायदे होते है जिनके बारे में आज हम आपको बताने जा रहे है।

केसर वाले दूध के फायदे 

1. स्किन के लिए :Kesar Milk Benefits

सांवली त्वचा को गोरा करने के लिए केसर वाला दूध बहुत फायदेमंद होता है। केसर का नियमित रूप से सेवन करने से और इसे दूध में मिलाकर फेस पर लगाने से त्वचा में नेचुरल ग्लो आता है। साथ ही त्वचा का रंग साफ़ होने लगता है और त्वचा दमकने लगती है। इसके लिए केसर और दूध की सही मात्रा लेकर उसे पीस लें और इस पैक को फेस पैक की तरह चेहरे पर लगाएं। आप इसका प्रयोग हफ्ते में दो बार या रोजाना कर सकते है। इसमें मौजूद प्राकृतिक गुणों से त्वचा में गुलाब कैसा निखार दिखने लगेगा।

2. मुहांसे :

फेस पर कील और मुहासों के बढ़ने का कारण त्वचा पर मौजूद अतिरिक्त तेल होता है। इसके अलावा बाहरी कारक जैसे प्रदुषण, धूल मिट्टी, सूरज की किरणे आदि भी इन मुहांसों का कारण होती है। इसके लिए भी केसर वाले दूध का प्रयोग किया जा सकता है। प्रयोग के लिए केसर, चन्दन पाउडर, शहद और थोड़ा सा कच्चा दूध मिलाकर पेस्ट बना लें। अब इस पैक को अपने चेहरे पर 10 मिनट के लिए लगाएं और फिर साफ़ कर लें। ये सभी समस्याएं अपने आप दूर होने लगेंगी।

3. सिर दर्द :

जिन लोगों को बार बार सिर दर्द की समस्या रहती है वे चंदन और केसर का पेस्ट बनाकर अपने सिर पर लगाएं। सिर दर्द से तुरंत राहत मिल जाएगी।

4. गर्भावस्था :pregnancy-complications

गर्भावस्था के दौरान माँ के शरीर में होने वाली कमजोरी के साथ-साथ यह बच्चे को तंदुरुस्त बनाये रखने का भी काम करता है। इसके अलावा यदि पैदा हुए बच्चे को उचित मात्रा में केसर का रोजाना सेवन कराया जाए तो बच्चे को कई बिमारियों से बचाया जा सकता है। बच्चे के जन्म के बाद महिलाओं को रोजाना केसर वाले दूध का सेवन करना चाहिए इससे शरीर की कमजोरी दूर होती है।

5. ठंड से बचाएं :

कई बार नवजात शिशु को सर्दी लग जाती है जिसके कारण उनकी नाक बंद हो जाती है और बच्चा मुंह से साँस लेने लगता है। इस स्थिति में माँ के दूध में केसर मिलाकर बच्चे के सिर और नाक पर मलने से लाभ होता है और साथ ही बच्चे की बेचैनी भी कम हो जाती है।

6. मासिक धर्म :

Read more : अनियमित मासिक धर्म को नियमित करने के उपाय

महिलाओं में अनियमित मासिक धर्म व् इसके कारण होने वाले दर्द को ठीक करने के लिए भी केसर बहुत लाभकारी है। गर्भाशय की सूजन में भी यह फायदेमंद होता है। मानसिक अवसाद व् उदासीनता में भी महिलाओं को इसका सेवन करना चाहिए। मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द से राहत पाने के लिए 2 रत्ती केसर दूध में घोलकर दिन में तीन बार पियें लाभ मिलेगा।

7. वीर्य शक्ति :

जिन पुरुषों को कमजोरी, स्वप्नदोष और शीघ्र पतन की समस्याएं होती है उनके लिए केसर एक रामबाण इलाज है। पुरुषों की वीर्य शक्ति बढ़ने के लिए बादाम और शहद के पेस्ट में केसर मिलाकर लेना चाहिए। इस पेस्ट को बनाने के लिए रात में केसर और बादाम भिगो दें। अगली सुबह पीसकर इसमें शहद मिलाएं और पियें।

8. दिमाग :

केसर दिमाग और नर्वस सिस्टम के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसके लिए रोजाना रात को केसर वाले दूध का सेवन करें। इससे आपका मस्तिष्क स्वस्थ होगा और आपके सोचने की क्षमता बढ़ेगी।

9. मानसिक तनाव :

केसर में कुछ ऐसे तत्व पाएं जाते है जिससे दिमाग में पैदा नहीं होता। यह दिमाग को शांत करके चिंता को खत्म करने का भी काम करता है। इसीलिए जब भी कोई मानसिक तनाव हो तो केसर वाले दूध का सेवन करें।

10. नकसीर :नकसीर

नाक से खून बहने की समस्या के उपचार के लिए भी केसर बहुत लाभकारी होता है। इस समस्या के होने पर केसर में चंदन मिलाकर लेप बनायें और उसे लगाएं नाक से खून बहना बंद हो जाएगा।

तो ये थे, केसर वाले दूध को पीने और केसर के फायदे जिनकी मदद से आप न केवल त्वचा अपितु स्वास्थ्य संबंधी कई बिमारियों को भी दूर कर सकते है। लेकिन एक बात का ध्यान रखें केसर की तासीर काफी गर्म होती है इसीलिए लिमिटेड मात्रा में इसका सेवन करना ही स्वास्थ्य के लिए उचित है। अन्यथा परेशानी हो सकती है।

प्रेगनेंसी में उल्टी रोकने के खास उपाय

प्रेगनेंसी में उल्टी रोकने के खास उपाय, गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना कारण पड़ सकता है। जिसमे से उल्टी आना प्रेगनेंसी की सबसे आम परेशानी है। अधिकतर गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में उल्टी आने की समस्या से परेशान हो सकती है। जबकि कुछ गर्भवती महिलाएं तो प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने इस समस्या से परेशान रह सकती है।

प्रेगनेंसी के दौरान उल्टी की समस्या होने पर घबराने की बात नहीं होती है। लेकिन यदि यह परेशानी ज्यादा हो तो इसे अनदेखा भी नहीं करना चाहिए। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे आसान उपाय बताने जा रहे हैं जो प्रेग्नेंट महिला को उल्टी की समस्या से निजात दिलाने में मदद कर सकते हैं। लेकिन उससे पहले जानते हैं की प्रेगनेंसी में उल्टी आने के क्या कारण होते हैं।

प्रेगनेंसी में उल्टी आने के कारण

  • प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में एस्ट्रोजन हॉर्मोन का लेवल बढ़ जाता है जिसके कारण महिला को उल्टी की समस्या हो सकती है।
  • पाचन शक्ति कमजोर होने के कारण महिला को खाना पचाने में दिक्कत हो सकती है जिसके कारण पेट में गैस बनने लगती है और उल्टी आ सकती है।
  • जो महिलाएं तनाव लेती है उन्हें भी यह दिक्कत ज्यादा हो सकती है।
  • कब्ज़ की समस्या जिन महिलाओं को अधिक रहती है उन्हें भी उल्टी की परेशानी अधिक हो सकती है।
  • जिन महिलाओं को किसी चीज की गंध पसंद नहीं होती है उन महिलाओं को गंध महसूस होने पर उल्टी आ सकती है।

प्रेगनेंसी में उल्टी की समस्या से बचने के टिप्स

यदि आप गर्भवती हैं और प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली उल्टी की समस्या से परेशान हैं। तो आइये आज हम आपको कुछ ऐसे आसान नुस्खे बताने जा रहे हैं जो आपको इस परेशानी से बचाने में मदद कर सकते हैं।

प्रेगनेंसी में उल्टी रोकने के लिए खाएं आंवलें का मुरब्बा

  • उल्टी की समस्या से बचने के लिए आंवलें का मुरब्बा बहुत फायदेमंद होता है।
  • यदि प्रेग्नेंट महिला सुबह शाम आंवले के मुरब्बे का सेवन करती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला को उल्टी कण्ट्रोल करने में मदद मिलती है।

निम्बू

  • एक गिलास पानी में थोड़ा सेंधा नमक व् निम्बू का रस डालकर मिक्स कर लें।
  • अब इस पानी को पीएं ऐसा करने से आपको उल्टी से बचने में मदद मिल सकती है।
  • इसके अलावा निम्बू को सूंघने से भी आपको उल्टी की परेशानी से बचने में मदद मिलती है।

काले चने

  • एक मुट्ठी काले चने रातभर के लिए एक गिलास पानी में भिगो दे।
  • उसके बाद सुबह उठकर इस पानी को छानकर इसका सेवन करें।
  • आप चाहे तो इसमें थोड़ा नमक मिला सकती है।
  • इस पानी का नियमित सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को उल्टी की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में उल्टी रोकने के लिए फाइबर युक्त आहार लें

  • कीवी, निम्बू, संतरा, हरी सब्जियों आदि का भरपूर सेवन करें जिनमे फाइबर की मात्रा मौजूद होती है।
  • फाइबर युक्त आहार का सेवन करने से पेट में गैस, कब्ज़ जैसी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • साथ ही पाचन तंत्र भी दुरुस्त रहता है।
  • जिससे उल्टी जैसी समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

आहार का ध्यान रखें

  • उल्टी की समस्या से बचने के लिए अपने आहार में उन चीजों को शामिल करें जो आसानी से हज़म हो जाएँ।
  • एक बार पेट भरकर खाने की बजाय थोड़ा थोड़ा खाएं, अच्छे से चबाकर खाएं।
  • ऐसा करने से खाने को आसानी से हज़म होने में मदद मिलती है।
  • जिससे उल्टी आने की समस्या को कम करने में मदद मिलती है।
  • इसके अलावा खाली पेट न रहे इससे उल्टी की समस्या ज्यादा हो सकती है।

तुलसी

  • थोड़ा सा तुलसी के पत्तों का रस और थोड़ा सा शहद मिलाकर गर्भवती महिला को धीरे धीरे चाटने के लिए कहें।
  • ऐसा करने से भी प्रेग्नेंट महिला को उल्टी की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

पुदीना

  • प्रेगनेंसी के दौरान पुदीने का सेवन करने से भी उल्टी की समस्या से बचे रहने में मदद मिल सकती है।
  • इसके लिए आप तीन चार पुदीने की पत्तियों को पानी में उबालकर उसमे थोड़ा नमक व् शहद मिलाकर पीएं।
  • खासकर सुबह ऐसा जरूर करें, ऐसा करने से आपको उल्टी की समस्या से निजात पाने में मदद मिलेगी।

प्रेगनेंसी में उल्टी रोकने के लिए खाएं सौंफ

खाने के बाद सौंफ खाने से या एक गिलास पानी में सौंफ उबालकर उसमे निम्बू का रस व् शहद मिलाकर पीने से भी प्रेगनेंसी में उल्टी की समस्या से आराम मिल सकता है।

अदरक

  • उल्टी रोकने का सबसे आसान और कारगर उपाय होता है।
  • यदि आपको ऐसा लग रहा है की आपको उल्टी आने वाली है तो जल्दी से अदरक को सूंघ लें।
  • ऐसा करने से उल्टी को कण्ट्रोल करने में मदद मिलेगी।

तरल पदार्थ

  • फलों का रस, नारियल पानी, निम्बू पानी का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान जरूर करें।
  • साथ ही एक दिन में आठ से दस गिलास पानी भी जरूर पीएं।
  • इससे बॉडी में तरल पदार्थों की मात्रा को सही रखने में मदद मिलती है।
  • जिससे प्रेगनेंसी के दौरान उल्टी व् अन्य सेहत सम्बन्धी परेशानियों से गर्भवती महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ खास उपाय जिन्हे ट्राई करने से गर्भवती महिला को उल्टी के कारण होने वाली परेशानी से निजात पाने में मदद मिल सकती है। यदि आप प्रेग्नेंट हैं और आप भी उल्टी बार बार आने के कारण परेशान हैं। तो इन टिप्स को ट्राई करने से आपको इस समस्या से निजात पाने में मदद मिल सकती है।

प्रेगनेंसी में आठवें, नौवें महीने में प्राइवेट पार्ट के साथ यह गलतियां भूलकर भी न करें

गर्भावस्था में प्राइवेट पार्ट से जुडी यह गलतियां न करें, गर्भावस्था महिला के लिए एक ऐसा समय होता है जहां महिला को छोटे से छोटे काम को करने से पहले बहुत बार सोचना पड़ता है। क्योंकि महिला यदि अनजाने में भी कोई गलती कर देती है। तो इसका असर केवल महिला पर ही नहीं पड़ता है। बल्कि महिला द्वारा की गई लापरवाही का असर गर्भ में पल रहे शिशु को भी प्रभावित कर सकता है।

तो आइये आज इस आर्टिकल में हम महिला के प्राइवेट पार्ट से जुडी कुछ बातें करने जा रहे हैं। जैसा की आप सभी जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपने शरीर की साफ़ सफाई का ध्यान जरूर रखना चाहिए। ताकि महिला को स्किन की कोमलता को बरकरार रखने व् इन्फेक्शन से बचे रहने में मदद मिल सके। और इसके लिए महिला को अपने शरीर पर होने वाले अनचाहे बालों को भी हटाना चाहिए।

लेकिन बालों को हटाते समय महिला को प्राइवेट पार्ट के साथ कुछ गलतियां करने से बचना चाहिए। खासकर जब प्रेगनेंसी के अंतिम महीने चल रहे होते हैं। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में प्राइवेट पार्ट से जुडी कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए।

केमिकल का इस्तेमाल

  • प्रेगनेंसी के दौरान केमिकल का इस्तेमाल न करने की सलाह दी जाती है।
  • क्योंकि इसके कारण प्रेग्नेंट महिला व् शिशु को इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है।
  • ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को प्राइवेट पार्ट के लिए किसी भी तरह की क्रीम, खुशबूदार प्रोडक्ट्स, आदि का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।

रेज़र

  • प्रेगनेंसी के अंतिम महीनों में महिला का पेट बाहर आ जाता है ऐसे में रेज़र से बालों को हटाने में महिला को परेशानी हो सकती है।
  • और यदि थोड़ी सी भी लापरवाही हो जाये तो इसके कारण कट लगने का खतरा हो सकता है।
  • और ब्लेड लगने से इन्फेक्शन का खतरा होने के साथ खून बहने, कट ज्यादा बड़ा होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
  • जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला व् शिशु को दिक्कत हो सकती है।

कुछ नया ट्राई न करें

  • प्रेग्नेंट महिला को प्राइवेट पार्ट के लिए किसी भी तरह के नए तरीके को ट्राई न करें क्योंकि इसके कारण आपको दिक्कत होने का खतरा रहता है।
  • क्योंकि यदि आपने क्रीम का कभी इस्तेमाल नहीं किया है तो हो सकता है की उससे आपको एलर्जी हो जाएँ।
  • रेज़र का कभी इस्तेमाल कभी आपने नहीं किया है तो उसके कारण भी आपको परेशानी हो सकती है।

गर्भावस्था में प्राइवेट पार्ट के अनचाहे बालों को हटाने के लिए क्या करें?

वैसे तो जब आप डिलीवरी के लिए हॉस्पिटल जाती है तो वहां नर्स अपने आप ही आपके प्राइवेट पार्ट के बालों को हटा देती है। लेकिन फिर भी यदि आप चाहती है की आप अपने बालों को हटाएँ तो इसके लिए केवल उन तरीको का इस्तेमाल करें जो आप पहले ट्राई कर चुकी हो।

जैसे की यदि आप किसी क्रीम आदि का इस्तेमाल करती है और उससे आपको स्किन से जुडी कोई समस्या नहीं होती है। तो आप क्रीम का इस्तेमाल करें। रेज़र का इस्तेमाल करने से अच्छा है ट्रीमर का इस्तेमाल करें इससे कट आदि लगने का खतरा नहीं होता है। लेकिन फिर भी पूरी सावधानी बरतें।

तो यह हैं कुछ सावधानियां जो प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के आठवें नौवें महीने प्राइवेट पार्ट के साथ बरतनी चाहिए। ताकि प्राइवेट पार्ट से जुडी कोई समस्या न हो। जिसके कारण आपको या शिशु को किसी भी तरह की परेशानी का सामना करना पड़े।

पीठ पर दाने दूर करने के घरेलू उपाय

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अक्सर हमारे चेहरे और शरीर के अन्य हिस्सों पर मुहांसे हो जाते है जिन्हे एक्ने कहा जाता है। लेकिन अगर यही एक्ने आपकी पीठ या शरीर के पिछले हिस्से में निकलने लगे तो उन्हें बैक्ने भी कहा जाता है। फेस के मुहांसे तो घरेलू उपायों की मदद से ठीक हो जाते है लेकिन पीठ, वक्ष और हाथों के ऊपरी हिस्से पर निकले मुहांसे ठीक होने में काफी समय ले लेते है। जिसका मुख्य कारन पीठ पर मौजूद रोमछिद्र होते है जी की फेस की तुलना में ज्यादा मोटे होते है। इस वजह से इनकी तेलीय ग्रंथि भी बहुत एक्टिव रहती है और इस कारण इसमें बैक्टीरिया भी अधिक होते है।

शुरुवात में ये दाने बहुत दर्द देते है लेकिन बाद में यह एक छोटे सी फुंसी का रूप ले लेते है जो कुछ दिनों बाद अपने आप ही ठीक हो जाती है। लेकिन प्रारंभ में होने वाला दर्द काफी असहनशील होता है। ऐसे में उनकी देखभाल करना और भी जरुरी हो जाता है। जिसके लिए आपको कुछ बातों का खास ख्याल रखना चाहिए।

क्या है पीठ के दानों का कारण?पीठ के दाने

पीरियड्स या प्रेगनेंसी के दौरान होर्मोनेस में काफी बदलाव होते है जिसके कारण सिबेशियस ग्रंथियां एक्टिव हो जाती है। इसकी वजह से ग्रंथियों से निकलता तेल और डेड सेल्स दोनों ही रोमछिद्र के ऊपर इकट्ठे हो जाते है जो बाद में ब्लैकहैड या वाइट हेड का रूप ले लेता है। गुलाबी रंग की मोटी फुंसियां जिनमे पस पड़ जाती है उनमे काफी जलन और दर्द होता है।

इसके अलावा शरीर में स्ट्रेस हॉर्मोन का स्तर बढ़ने पर भी हॉर्मोन का स्तर बढ़ जाता है जिससे त्वचा काफी तेलीय हो जाती है और उसमे मौजूद रोमछिद्र बंद हो जाते है। परिणामस्वरूप, त्वचा ठीक प्रकार से साँस नहीं ले पाती और उसमे कील मुहांसे होने लगते है। लेकिन अगर सही उपचार और घरेलू उपायों का प्रयोग किया जाए तो इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है। यहाँ हम आपको उन्ही कुछ घरेलू उपायों के बारे में बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप इस समस्या को ठीक कर पाएंगे।

पीठ के दाने दूर करने के घरेलू उपाय :-

टमाटर और एलोवेरा :

इस उपाय के लिए टमाटर के गूदे को मैश करके एलोवेरा के पल्प के साथ मिला लें। 30 मिनट के लिए इस मिश्रण को पीठ पर लगायें और उसके बाद ठन्डे पानी से साफ़ करें। इसमें विटामिन ऐ और सी होते है जो खुले रोमछिद्र के साइज को छोटा कर देते है।

नींबू, ग्लिसरीन और गुलाबजल :

इस उपाय के लिए नींबू, गुलाबजल और ग्लिसरीन को एक बोतल में बराबर मात्रा में भर लें। फिर पीठ, बांह और छाती के ऊपरी हिस्से पर रात को नहाने के बाद इस मिश्रण को लगाएं। और अगली सुबह साफ़ कर लें। दाग धब्बे दूर हो जाएं। लेकिन एक बात ध्यान रखे इसे मुहांसों के ऊपर बिलकुल न लगाएं।

शावर बाथ :girl take shower

किसी भी एक्सरसाइज को करने के बाद घर पर एक बार अच्छे से शावर बाथ लें। जिससे त्वचा पर मौजूद सभी बैक्टीरिया और गंदगी साफ़ हो जाएं। इसके लिए आप एंटी बैक्टीरियल बॉडी वाश का भी इस्तेमाल कर सकते है। चाहे तो नीम की उबली हुई पत्तियां, पुदीने की पत्तियों का रस और नंबू के रस को पानी में मिलाकर उससे भी नहा सकते है। इस उपाय से कुछ ही दिनों में मुहांसे ठीक हो जाएंगे।

जौ का पाउडर :

जौ के आटे में त्वचा से अतिरिक्त तेल सोखने के गुण पाए जाते है। इसके लिए सादा जौ के आटे को पका लें। अब इसमें शहद मिलाएं और ठंडा करके साफ़ पीठ पर लगाएं। 20 मिनट लगाएं रखें और फिर गुनगुने पानी से धो लें।

पुदीना और तुलसी :

पुदीने का रस, चुटकी भर हल्दी और थोड़ा का तुलसी का रस मिलकर आपकी इस समस्या को दूर कर सकता है। इसके लिए सभी चीजों को मुल्तानी मिट्टी में मिलाएं। 15 मिनट पीठ पर लगाएं और फिर गुनगुने पानी से साफ़ कर लें। इसमें एंटी सेप्टिक गुण मौजूद है जो दर्द और जलन को दूर करके समस्या ठीक करेंगे।

दालचीनी और पुदीना :

ताजे पुदीने के रस में थोड़ा सा दालचीनी पाउडर मिलाकर उसे अपनी पीठ पर लगाएं। पैक की एक लेयर लगाने के बाद सूखने दें और फिर ठंडे पानी का शावर ले लें।

जायफल और कच्चा दूध :

जायफल का पाउडर और कच्चा दूध मिलाकर एक पेस्ट बना लें। अपनी पीठ को अच्छे से साफ़ करके इस पेस्ट को अपनी पीठ पर लगाए। 2 घंटे तक लगाएं रखें और उसके बाद ठंडे पानी से धो लें। बाद में आयल फ्री मॉइस्चराइज़र लगाएं। बचे हुए पैक को किसी डब्बे में बंद करके फ्रिज में रख दें।

शहद :shahad-aur-nimbu

अधिकतर महिलाएं त्वचा को निखारने के लिए शहद का इस्तेमाल करती है। इसके एंटी बैक्टीरियल गुणों के कारण यह चेहरे के दर्दनाक मुहासों को भी दूर करने की क्षमता रखता है। इसके लिए नींबू और शहद का पैक बनायें और उसे पीठ पर लगाएं।

कूल पैक (Cool Pack) :

इस समस्या को दूर करने के लिए आप चंदन और तुलसी, सेब और शहद, पके हुए पपीते का गुदा, नींबू और टमाटर का पैक भी आजमा सकते है। इन सभी पैक को बनाकर 15 मिनट के लिए त्वचा पर लगाएं और एक्ने से छुटकारा पाएं। लेकिन पैक को 15 मिनट से ज्यादा स्किन पर नहीं रहने दें।

10 फाइबर से भरपूर फ़ूड जो पेट सम्बन्धी परेशानियों को दूर रखें

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला बहुत सी परेशानियों का सामना करती है। और पेट से सम्बंधित परेशानियां जैसे की कब्ज़, एसिडिटी, भूख में कमी जैसी परेशानियां अधिकतर गर्भवती महिलाओं को होती है। ऐसे में गर्भवती महिला की पाचन क्रिया दुरुस्त रहे और गर्भवती महिला को पेट सम्बन्धी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिल सके। इसके लिए गर्भवती महिला को फाइबर से भरपूर आहार का सेवन करने की सलाह दी जाती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको 10 फाइबर से भरपूर फ़ूड जो पेट सम्बन्धी परेशानियों से गर्भवती महिला को बचाने में मदद करते हैं उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

दालें

प्रोटीन के साथ दालें फाइबर का भी बेहतरीन स्त्रोत होती है और दालों का सेवन गर्भवती महिला के लिए फायदेमंद भी होता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को पेट सम्बन्धी परेशानियों को दूर करने के लिए दालों का सेवन जरूर करना चाहिए।

ओट्स

ओट्स भी फाइबर का बेहतरीन स्त्रोत होता है जो गर्भवती महिला के पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मदद करता हैं। और नाश्ते में ओट्स का सेवन गर्भवती महिला के लिए फायदेमंद भी होता है।

फल

संतरा, जामुन, अमरुद, नाशपाती, स्ट्रॉबेरी, केला, सेब जैसे फल भी गर्भवती महिला की पेट सम्बन्धी परेशानियों को दूर करने में मदद करते हैं। क्योंकि यह सभी फल फाइबर का बेहतरीन स्त्रोत होते हैं।

ब्राउन राइस

गर्भवती महिला चाहे तो ब्राउन राइस का सेवन कर सकती है। क्योंकि इसमें सफ़ेद चावल की अपेक्षा फाइबर अधिक मात्रा में होता है जो पेट सम्बन्धी परेशानियों को दूर करने में मदद करता है।

मटर

मटर एक ऐसी सब्ज़ी है जिसमे फाइबर की मात्रा बहुत अधिक होती है जो प्रेग्नेंट महिला को पेट से जुडी परेशानियों से निजात दिलाने में मदद करता हैं। मटर के अलावा गाजर, फलियां, पत्तागोभी भी फाइबर का बेहतरीन स्त्रोत होती है।

ड्राई फ्रूट्स

प्रेग्नेंट महिला फाइबर के लिए ड्राई फ्रूट्स का सेवन भी कर सकती है। क्योंकि ड्राई फ्रूट्स भी फाइबर का बेहतरीन स्त्रोत होते हैं जो गर्भवती महिला की पेट सम्बन्धी परेशानियों को दूर करने में मदद करते हैं।

दलिया

गेहूं में पर्याप्त मात्रा में फाइबर मौजूद होता है ऐसे में गेहूं की रोटी खाने के साथ गेहूं को पीसकर दलिया बनाकर खाने से भी गर्भवती महिला को फाइबर मिलता है। और यदि गर्भवती महिला दलिया का सेवन करती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला की पेट सम्बन्धी परेशानियों को दूर करने में मदद मिलती है।

ब्रोकली

ब्रोकली भी फाइबर का बेहतरीन स्त्रोत होती है और यह हर मौसम में आसानी से मिल भी जाती है। ऐसे में गर्भवती महिला यदि चाहे तो ब्रोकली का सेवन कर सकती है।

चुकंदर

चुकंदर में घुलनशील व् अघुलनशील दोनों तरह के फाइबर मौजूद होते हैं जो गर्भवती महिला की पेट सम्बन्धी परेशानियों को दूर करने में मदद करते हैं। चुकंदर के साथ गाजर भी फाइबर का बेहतरीन स्त्रोत होता है।

इसबगोल

यदि गर्भवती महिला को पेट सम्बन्धी परेशानी अधिक हो रही है तो इस परेशानी को दूर करने के लिए गर्भवती महिला इसबगोल का सेवन भी कर सकती है। क्योंकि इसबगोल फाइबर का बेहतरीन स्त्रोत होता है।

तो यह हैं कुछ आहार जो प्रेग्नेंट महिला के पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में मदद करते हैं। साथ ही गर्भवती महिला को कब्ज़, पेट फूलना, पेट में गैस, सीने में जलन, खट्टी डकार, कोलेस्ट्रॉल बढ़ना, वजन ज्यादा बढ़ना जैसी परेशानियों से बचाव करने में मदद करते हैं।

पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग होने के क्या कारण होते हैं

पीरियड्स महिलाओं को हर माह होने वाली एक सामान्य प्रक्रिया है इस दौरान महिला के प्राइवेट पार्ट से ब्लीडिंग होती है। अगर यह ब्लीडिंग सामान्य होती है तो कोई बात नहीं लेकिन यदि ब्लीडिंग की समस्या ज्यादा होती है और ऐसा हर महीने होता है तो इसे बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। और तुरंत अपनी डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। यह भी एक तरह की शारीरिक परेशानी ही होती है जिसे मेडिकल भाषा में मेनोर्रहाजिया कहा जाता है। और आपको ज्यादा ब्लीडिंग होने के बारे में आपके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सैनिटरी पैड या फिर टैम्पोन से पता चलता है।

क्योंकि यदि आपको सामान्य से अधिक ब्लीडिंग होती है तो आपके पैड को या टैम्पोन को हर घंटे बदलने की आवश्यकता पड़ती है। और पीरियड्स जितने दिन आपको होता है आपको उतनी ही ज्यादा यदि ब्लीडिंग होती है तो भी आपको इस बात का पता चलता है। और वैसे ही कई महिलाओं को पीरियड्स के दौरान दर्द आदि की समस्या रहती है और यदि ऊपर से ज्यादा ब्लीडिंग हो तो महिला को अधिक परेशानी हो सकती है। इसीलिए इसे इग्नोर न करते हुए अपनी डॉक्टर से राय लेनी चाहिए। तो आइए आज हम पीरियड्स के दौरान अधिक ब्लीडिंग होने के कारण क्या होते है उन्हें जानते हैं।

हार्मोनल असंतुलन का होना:- यह तो हम सब जानते हैं की पीरियड्स के दौरान बॉडी में लगातार हॉर्मोन में बदलाव आता रहता है। लेकिन यदि यह बदलाव बहुत तेजी से होता है तो इसके कारण आपको अत्यधिक ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है। मेनोपॉज़ होने से एक साल पहले ही आपकी बॉडी संकेत देने लगती हो और आपको ज्यादा ब्लीडिंग की परेशानी हो सकती है। लेकिन फिर भी इसे इग्नोर नहीं करना चाहिए।

सरवाइकल पॉलीप्‍स होने के कारण:- सरवाइकल पॉलीप्‍स बनने का कारण मेडिकल वर्ल्‍ड में प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई का न होना और संक्रमण माना जाता है। यह बहुत छोटे होते हैं जो की सरवाइकल म्‍यूकोसा और गर्भाशय के मुँह पर हो जाते है। और जैसे ही यह होते हैं तो इनके बनने से महिला के शरीर में एस्‍ट्रोजन की मात्रा असामान्‍य तरीके से बढ़ने लग जाती है। और गर्भाशय ग्रीवा में रक्त वाहिकाओं में रूकावट उत्त्पन्न होने लग जाती है जिसके कारण महिला को पीरियड्स के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग होने की समस्या हो जाती है। और यदि आप डॉक्टर को दिखाती है और आपको यह परेशानी होती है तो आप इसका आसानी से इलाज भी करवा सकती है।

गर्भाशय में फाइबर ट्यूमर का होना भी हो सकता है हैवी ब्लीडिंग का कारण:- गर्भाशय में फाइबर ट्यूमर होने का कारण अभी तक अच्छे से पता नहीं चल पाया है, लेकिन यह तीस से चालीस वर्ष की उम्र की महिलाओं में पाया जाता है। जिसके कारण भी महिला को हैवी ब्लीडिंग होने की समस्या होती है। आप इस समस्या का इलाज भी करवा सकती हैं क्योंकि ऑपरेशन के जरिए इसे आपके गर्भाशय से निकाल दिया जाता है।

ब्लीडिंग डिसआर्डर भी हो सकता है ज्यादा ब्लीडिंग का कारण:- ब्लीडिंग डिस्‍आर्डर को वॉन विलेब्रांड बिमारी के नाम से जाना जाता है। इस समस्या के होने पर शरीर में खून के थक्के जमने लग जाते है जिसके कारण आपको पीरियड्स के दौरान अधिक ब्लीडिंग होने की समस्या हो सकती है। यह बिमारी ज्यादातर उन महिलाओं को होती है जो अपने रक्त को पतला करने की दवाइयों का सेवन करती है।

एंड्रोमेट्रियल कैंसर के कारण भी हो सकती है यह परेशानी:- पचास वर्ष की उम्र होने के बाद महिलाओं को यह समस्या होती है। और यदि किसी महिला को यह समस्या होती है और उसे अभी तक पीरियड आता है। तो इस बिमारी के होने पर उसे भी अधिक ब्लीडिंग होने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। और यदि आपको यह बिमारी है तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने के बाद इसका इलाज करवाना चाहिए।

पेल्विक इंफ्लेमेट्री डिसीज होने के कारण:- इस समस्या के होने का मुख्य कारण आपको सम्बन्ध बनाने के कारण होने वाला संक्रमण होता है। और यदि आपको यह बिमारी होती है तो भी आपको हैवी ब्लीडिंग की समस्या का सामना करना पड़ सकता है इसीलिए कहा जाता है की सम्बन्ध बनाते समय भी साफ सफाई का खास ध्यान रखना चाहिए क्योंकि उस समय संक्रमण फैलने का बहुत खतरा होता है।

ल्‍यूपस बिमारी होने के कारण:- इस बिमारी के होने पर त्‍वचा, जोड़ो, खून और किड़नी आदि में सूजन हो जाती है जो की एक प्रकार की क्रॉनिक सूजन होती है। आनुवाशिंक गड़बड़ी के होने के कारण आपको यह समस्या होती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि पर्यावरणीय कारक, संक्रमण, एंटीबायोटिक यूवी लाइट्स, तनाव होना, हार्मोनल असंतुलन और अधिक दवाइयों के सेवन के कारण आपको यह होती है और जो महिला इस बिमारी से परेशान होती है उसे भी पीरियड्स के दौरान अधिक ब्लीडिंग होने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

एंडोमेट्रियल पॉलीप्‍स भी हो सकता है हैवी ब्लीडिंग का कारण:- एंडोमेट्रियल पॉलीप्‍स यह कैंसर नहीं होता है बल्कि यह गर्भाशय की सतह पर उभरता या पनपता है। इसके कारण का अभी तक अच्छे से पता नहीं लगाया गया है लेकिन इसके बनने से शरीर में एस्‍ट्रोजन या अन्‍य प्रकार के ओवेरियन ट्यूमर बनने लग जाते है। और जो महिला इस परेशानी से ग्रसित होती है उसे भी हैवी ब्लीडिंग के होने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

पीरियड्स के दौरान इन बातों का ध्यान रखें:-

  • यदि आपको सामान्य से अधिक दर्द होता है तो आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए।
  • इक्कीस से पैंतीस दिन के बीच आपको पीरियड आना सामान्य होता है लेकिन यदि आपको इससे पहले या लेट पीरियड होता है तो इसे भी अनदेखा नहीं करना चाहिए।
  • पीरियड्स के दौरान संक्रमण होने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है इसीलिए अपने पैड को बदलते रहना चाहिए साथ ही साफ सफाई का खास ध्यान रखना चाहिए।
  • यदि आपको सात दिन से अधिक ब्लीडिंग होती है तो इसे भी अनदेखा नहीं करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से आपको हैवी ब्लीडिंग होने की समस्या हो सकती है। ऐसे में आपको इसे बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए और अपनी डॉक्टर को चेक करवाना चाहिए। क्योंकि इसके कारण आपको शारीरिक समस्या के बढ़ने का खतरा रहता है। इसके अलावा पीरियड्स के दौरान बॉडी को रेस्ट भी देना चाहिए ताकि आपको पीरियड्स में होने वाली परेशानी से बचाव करने में मदद मिल सकें।

प्रेगनेंसी रुकी है या नहीं रुकी पीरियड्स मिस होने से पहले ऐसे जानें

कोई महिला प्रेग्नेंट हैं या नहीं यह इस बात से पता लगाया जाता है की महिला के पीरियड्स मिस हुए या नहीं। और आजकल आप प्रेग्नेंट हैं या नहीं इसे पता करना भी मुश्किल नहीं है। क्योंकि पीरियड्स मिस होने के बाद आप बाजार में किसी भी मेडिकल शॉप पर जाकर प्रेगनेंसी टेस्ट किट ले आएं। और यूरिन टेस्ट करके आसानी से आपको पता चल जाता है की आपका गर्भ ठहरा है या नहीं।

लेकिन क्या आप जानते हैं की प्रेगनेंसी रुकी है या नहीं रुकी इसका पता पीरियड्स मिस होने से पहले भी चल जाता है। यदि नहीं तो आइये अब हम आपको कुछ ऐसे लक्षणों के बारे में बताने जा रहे हैं जो यदि महिला को पीरियड्स मिस होने से पहले अपनी बॉडी में महसूस होते हैं। तो इसका मतलब यह होता है की महिला का गर्भ ठहर गया है।

जीभ के स्वाद में बदलाव

यदि महिला को अपने जीभ के स्वाद में परिवर्तन महसूस हो रहा है यानी महिला को अपना मुँह कड़वा सा महसूस हो रहा है। तो इसका मतलब हो सकता है की आपका गर्भ ठहर गया है और जीभ के स्वाद में बदलाव होने का कारण गर्भ ठहरने की वजह से आपकी बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव होते है। साथ ही ऐसा भी हो सकता है की कुछ चीजों से तो आपको नफरत हो जाये लेकिन कुछ चीजें खाने की बहुत इच्छा भी हो।

थकावट और कमजोरी

बिना किसी काम को किये बैठे बैठे भी यदि महिला थकावट और शरीर में बहुत कमजोरी महसूस हो रही है। तो यह भी महिला के प्रेग्नेंट होने का ही लक्षण होता है।

ब्रेस्ट में बदलाव

यदि महिला को ब्रेस्ट को छूते ही दर्द महसूस हो रहा है या ब्रेस्ट सूजे हुए से महसूस हो रहे हैं। और पीरियड्स मिस होने से पहले ही यदि आपको ऐसा महसूस हो रहा है तो ऐसा होना महिला के गर्भ ठहरने की और इशारा करता है।

कब्ज़

कब्ज़, भोजन को हज़म करने में परेशानी जैसी समस्या भी यदि महिला को हो रही है तो यह भी पीरियड्स मिस होने से पहले प्रेगनेंसी कन्फर्म होने का अहम लक्षण होता है। क्योंकि गर्भ ठहरने के कारण बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव की वजह से ऐसा हो सकता है।

सिर दर्द व् चक्कर

यदि महिला को सिर भारी महसूस हो रहा है, सिर में दर्द हो रहा है, चक्कर आ रहे हैं, तो यह लक्षण भी पीरियड्स मिस होने से पहले महिला के गर्भधारण की तरफ इशारा करते हैं।

यूरिन आना

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण किडनी का काम बढ़ जाता है। जिसके कारण महिला को बार बार यूरिन पास करने की इच्छा होती है। ऐसे में यदि आपके साथ भी मासिक धर्म मिस होने से पहले ऐसा हो रहा है तो समझ जाइये की आपका गर्भ ठहर गया है।

मूड स्विंग्स

यदि बिना किसी बात के ही महिला को बहुत गुस्सा आ रहा है, चिड़चिड़ाहट महसूस हो रही है या महिला बहुत खुश है। तो मूड में होने वाले यह बदलाव भी महिला के गर्भवती होने की तरफ इशारा करते हैं।

तो यह हैं कुछ लक्षण जो पीरियड्स मिस होने से पहले यदि महिला को अपने शरीर में महसूस होते हैं। तो यह लक्षण इस बात की और इशारा करते हैं की आपका का गर्भ ठहर गया है।

प्रेगनेंसी के दौरान सफ़ेद पानी का आना क्या शिशु के लिए खतरनाक होता है

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान रोजाना किसी न किसी समस्या से परेशान होना पड़ सकता है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान लगातार बॉडी में हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं। जिसके कारण वजन बढ़ना, उल्टी, जीभ के स्वाद में परिवर्तन, तनाव, आदि की परेशानी हो सकती है। ऐसे में घबराने की कोई बात नहीं होती है लेकिन किसी भी समस्या के अधिक होने पर एक बार डॉक्टर से राय लेना भी जरुरी होता है। और जरुरी नहीं है की हर महिला को प्रेगनेंसी के दौरान हर महिला के शरीर में एक जैसे बदलाव या परेशानियां महसूस हो। बल्कि यह हर महिला के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव पर निर्भर करता है।

इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिलाएं सफ़ेद पानी आने की समस्या से परेशान रहती है। यह ज्यादातर प्रेगनेंसी के तीसरी तिमाही में ज्यादा महसूस होता है। और सफ़ेद पानी का आना सामान्य बात होती है, इसे ल्यूकोरिया के नाम से जाना जाता है। लेकिन यदि सफ़ेद पानी बहुत ज्यादा आए या इसमें से गंध या खून आना महसूस हो तो इसके लिए एक बार डॉक्टर से राय लेना जरुरी होता है। तो आइये अब जानते हैं प्रेगनेंसी के दौरान सफ़ेद पानी के आने से जुड़े कुछ सवालों के बारे में, जिससे आपको इसके बारे में अच्छे से जानने में मदद मिलेगी।

प्रेगनेंसी में क्यों आता है सफ़ेद पानी

गर्भवती महिला के बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण सफ़ेद पानी आना आम बात होती है, प्रेगनेंसी में वाइट डिस्चार्ज सर्वाइकल मीक्यूस होता है। ज्यादातर गर्भवती महिला में इस तरह की समस्या प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में ज्‍यादा होती है। और यह गर्भाशय ग्रीवा में किसी भी तरह के संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करने में मदद करता है।

क्या सफ़ेद पानी से शिशु को कोई नुकसान पहुँचता है

जी नहीं, इससे गर्भ में पल रहे शिशु को कोई नुकसान नहीं पहुँचता है, बल्कि प्रेगनेंसी के दौरान सफ़ेद पानी का आना गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी संक्रमण से सुरक्षित रखने में मदद करता है। लेकिन यदि डिस्चार्ज अधिक होने लग जाए या खून के धब्बे और बदबू महसूस हो तो एक बार डॉक्टर से राय लेनी चाहिए। क्योंकि यदि संक्रमण के कारण ऐसा हो रहा है तो प्रेगनेंसी के दौरान यह परेशानी का कारण बन सकता है।

प्रेगनेंसी में सफ़ेद पानी आने पर डॉक्टर से कब मिलना चाहिए

  • यदि प्राइवेट पार्ट से लगातार सफ़ेद पानी निकल रहा हो तो हो सकता है की एमनियोटिक थैली फट गई हो और डिलीवरी का समय पास आ गया हो ऐसे में बिना देरी करते हुए तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए।
  • प्राइवेट पार्ट में खुजली, जलन, सूजन, व सफ़ेद पानी की परेशानी हो तो भी एक बार डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
  • यूरिन पास करने समय दर्द, जलन, या ब्लड का आना महसूस हो भी परेशानी हो सकती है।
  • अगर वजाइना में इन्फेक्शन महसूस हो और सफ़ेद पानी के साथ खून महसूस हो तो भी डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान सफ़ेद पानी से जुडी कुछ बातें, इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान कभी भी असहज महसूस हो तो घर में ही उसका उपचार करने की बजाय डॉक्टर से संपर्क करें। क्योंकि इस समय की गई थोड़ी सी भी लापरवाही परेशानी का कारण बन सकता है।

शिशु के हाथ पैर टेढ़े मेढ़े होने के क्या कारण होते हैं और क्या उपाय है

प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने माँ अपने गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास का अच्छे से ध्यान रखने की कोशिश करती है। और इसके लिए गर्भवती महिला भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों से युक्त आहार लेने के साथ, डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयां, डॉक्टर द्वारा समय पर जांच आदि सभी का अच्छे से ध्यान रखती है। लेकिन फिर भी कई बार कुछ केस ऐसे हो जाते हैं जिनमें जन्म के समय बच्चे का शारीरिक या मानसिक विकास में कमी आ जाती है।

जैसे की बच्चा दिमागी रूप से कमजोर होता है तो कुछ बच्चों के शारीरिक विकास में कमी हो जाती है जिसके कारण जन्म के समय बच्चों के हाथ पैर टेढ़े हो जाते हैं। तो आइये अब जानते हैं की बच्चों के हाथ पैर टेढ़े होने के कारण होते हैं और किस तरह इस परेशानी से निजात पाया जा सकता है।

जन्म के समय बच्चे के हाथ पैर टेढ़े होने के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को अपना ध्यान अच्छे से रखना चाहिए। यदि महिला अपनी केयर में कुछ गलतियां करती है तो इसके कारण पेट में बच्चे पर बुरा असर पड़ता है जिसके कारण जन्म के समय बच्चे के हाथ पैर टेढ़े मेढे होने का खतरा बढ़ता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की जन्म के समय बच्चे के हाथ पैर टेढ़े मेढ़े होने के क्या कारण होते हैं।

पोषक तत्वों की कमी

यदि प्रेग्नेंट महिला प्रेगनेंसी के दौरान खाना तो भरपूर खाती है लेकिन उस आहार में पोषक तत्वों की कमी होती है। तो ऐसे में बच्चे की हड्डियों, मांसपेशियों व् अंगो के विकास के लिए जरुरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं। जिसके कारण शिशु के अंग मजबूत नहीं हो पाते हैं और कमजोर रहते हैं। और जन्म के समय बच्चे के अंगो का बेहतर विकास न होने की वजह से बच्चे के हतः पैर टेढ़े रहते हैं।

भारी सामान उठाना

अगर आप प्रेग्नेंट हैं तो आपको अधिकतर चाहने वाले यही सलाह देंगे की आप अपना अच्छे से ध्यान रखें, किसी भी भारी भरकम सामान उठाने को बचे, क्योंकि इससे बच्चे पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है। लेकिन यदि कोई गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान भारी सामान उठाती है तो इससे पेट पर दबाव महसूस होता है, और उसका असर शिशु पर पड़ता है। और शिशु पर भारी चीजों का प्रभाव पड़ने के कारण शिशु के अंगो के विकास में कमी आ सकती है। जिसकी वजह से जन्म के समय शिशु के हाथ पैर टेढ़े होने के चांस बढ़ जाते हैं।

तनाव

गर्भवती महिला यदि प्रेगनेंसी के दौरान तनाव लेती है और यह तनाव प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण, प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों के कारण, घर में या बाहर होने वाली लड़ाइयों के कारण, आदि भी हो सकता है। ऐसे में तनाव के कारण भी बच्चे का शारीरिक व् मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है। और शिशु का शारीरिक विकास प्रभावित होने के कारण तनाव की वजह से जन्म के समय शिशु के हाथ पैर टेढ़े मेढ़े हो सकते हैं।

पेट पर दबाव

यदि किसी भी कारण प्रेग्नेंट महिला के पेट पर दबाव पड़ता है तो इसके कारण पेट में बच्चा असहज महसूस कर सकता है। साथ ही शिशु पर भी दबाव बढ़ता है जिसकी वजह से शिशु के अंगो के विकास में कमी आ सकती है। और जन्म के समय शिशु के हाथ पैर टेढ़े मेढ़े होने के चांस बढ़ जाते हैं।

जन्म के समय बच्चे के हाथ पैर टेढ़े न हो इससे बचने के टिप्स

  • गर्भावस्था के दौरान महिला को पोषक तत्वों से युक्त आहार खासकर कैल्शियम, प्रोटीन, आयरन, आदि का सेवन करना चाहिए। इससे बच्चे के बेहतर विकास में मदद मिलती है जिससे जन्म के समय शिशु को होने वाली समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी कारण तनाव न लें बल्कि खुश रहें।
  • पेट पर किसी भी तरह का दबाव न पड़ने दें, इसके लिए अपने उठने, बैठने, कपडे पहनने, काम करने, सोने आदि सभी का ध्यान रखें। क्योंकि किसी भी कारण पेट पर दबाव पड़ना परेशानी का कारण बन सकता है।
  • गर्भावस्था के दौरान निरंतर अपनी जांच करवाती रहे ताकि यदि कोई परेशानी हो तो समय रहते उसका इलाज हो जाये और आपको और आपके बच्चे को कोई दिक्कत न हो।

जन्म के समय बच्चे के हाथ पैर टेढ़े होने से बचाने के लिए प्रेग्नेंट महिला को इन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। इसके अलावा महिला को ज्यादा भीड़भाड़, शोरगुल वाली जगह पर भी नहीं जाना चाहिए क्योंकि इससे शिशु को गूँगा व् बहरा होने के चांस बढ़ जाते हैं।