Home Blog Page 3

गर्भ में शिशु को निरोग रखने के तरीके

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में पल रहा शिशु पूरी तरह से अपनी माँ की जिम्मेवारी होता है। क्योंकि शिशु अपने विकास के लिए अपनी माँ पर ही निर्भर करता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपना दुगुना ध्यान रखने की सलाह दी जाती है क्योंकि महिला जितना अच्छे से अपना ध्यान रखती है उतना ही गर्भ में शिशु को निरोग रहने और शिशु का बेहतर विकास होने में मदद मिलती है। आज इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे ही टिप्स बताने जा रहे हैं जो गर्भावस्था के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु को निरोग रहने में मदद करते हैं। तो आइये अब जानते हैं की वो टिप्स कौन से हैं।

पोषक तत्वों से भरपूर डाइट

गर्भावस्था के दौरान महिला को पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेने की सलाह दी जाती है क्योंकि महिला जितना पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेती है उतना ही गर्भवती महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा शिशु के बेहतर विकास के लिए भी सभी जरुरी पोषक तत्व शिशु को मिलते हैं जिससे शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। खाने के साथ महिला को पानी व् अन्य तरल पदार्थों का भी भरपूर सेवन करना चाहिए क्योंकि पोषक तत्वों के साथ शरीर में तरल पदार्थों का होना भी जरुरी होता है।

भरपूर नींद

जिस तरह अच्छा खाना स्वस्थ रहने के लिए जरुरी है उसी तरह भरपूर नींद भी स्वस्थ रहने के लिए बहुत जरुरी है। ऐसे में गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रखने के लिए महिला को अपनी नींद में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए और भरपूर नींद लेनी चाहिए। साथ ही जितना अच्छे से महिला नींद लेती है उतना ही शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद मिलती है।

स्ट्रेस फ्री रहें

प्रेगनेंसी के दौरान तनाव महिला के साथ बच्चे के विकास पर भी बुरा असर डालता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने के लिए गर्भवती महिला को बिल्कुल भी तनाव नहीं लेना चाहिए और खुश रहना चाहिए क्योंकि जितना महिला खुश रहती है उतना ही महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद मिलती है।

शिशु से बातें करें

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रखने के लिए महिला को गर्भ में पल रहे शिशु से बातें करनी चाहिए, पेट पर हाथ फेरना चाहिए, आदि। क्योंकि ऐसा करने से गर्भ में पल रहा शिशु एक्टिव होता है और उसका विकास बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है जिससे आपका बच्चा गर्भ में स्वस्थ रहता है। इसके अलावा आप शिशु को कहानियां, हल्का म्यूजिक भी सुना सकते है यह भी शिशु के बेहतर विकास में मदद करता है।

ज्यादा शोर और भीड़भाड़ वाली जगह पर जाने से बचें

गर्भ में शिशु को निरोग रखने के लिए गर्भवती महिला को ऐसी किसी भी जगह पर नहीं जाना चाहिए जहां पर ज्यादा शोर हो साथ ही महिला को ज्यादा भीड़भाड़ वाली जगह पर जाने से भी बचना चाहिए। क्योंकि ज्यादा शोर वाली जगह पर जाने के कारण शिशु की सुनने की क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है साथ ही भीड़भाड़ वाली जगह पर जाने से संक्रमण का खतरा अधिक होता है।

पहनावा सही रखें

पेट में पल रहे शिशु को निरोग रखने के लिए महिला को अपना पहनावा भी सही रखना चाहिए जैसे की ज्यादा टाइट और चुभने वाले कपडे नहीं पहनने चाहिए, ऐसे कपडे नहीं पहनने चाहिए जिन्हे पहनने से पेट पर दबाव पड़े, आदि। क्योंकि ऐसे कपड़ों को पहनने से गर्भ में पल रहे शिशु को दिक्कत महसूस हो सकती है। इसके अलावा महिला को ज्यादा ऊँचे जूते चप्पल भी नहीं पहनने चाहिए क्योंकि इनकी वजह से महिला के गिरने का खतरा होता है और गिरने के कारण गर्भ को नुक्सान पहुँच सकता है।

योगासन व् मैडिटेशन करें

गर्भ में पल रहा शिशु पूरी तरह से अपनी माँ पर निर्भर करता है ऐसे में महिला जब स्वस्थ रहती है तो शिशु को भी स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। ऐसे में महिला को शारीरिक और मानसिक रूप से फिट रहने के लिए रोजाना थोड़ी देर योगासन और मैडिटेशन जरूर करना चाहिए। और ऐसा करने का बेहतरीन असर माँ और बच्चे दोनों को मिलता है।

सही तरीके से सोएं

गर्भ में शिशु को स्वस्थ रखने के लिए महिला को अपने सोने की पोजीशन का ध्यान भी रखना चाहिए जैसे की महिला को पेट के बल नहीं सोना चाहिए, बाईं और करवट लेकर सोना चाहिए। यदि महिला इन बातों एक ध्यान रखती है तो इससे गर्भ में शिशु को होने वाले दिक्कत से बचे रहने में मदद मिलती है।

पेट पर किसी तरह का दबाव नहीं पड़ने दें

पेट पर दबाव पड़ने के कारण गर्भ में शिशु असहज महसूस कर सकता है ऐसे में गर्भ में शिशु के स्वस्थ रहने के लिए गर्भवती महिला को ऐसा कोई भी काम नहीं करना चाहिए जिससे पेट पर दबाव पड़े। जैसे की झुककर कोई काम करना, भारी सामान उठाना, लम्बे समय तक खड़े रहकर काम करना, टॉयलेट साफ़ करना, किसी चीज से बिल्कुल सटकर काम करना आदि। यदि महिला इन सभी कामों को नहीं करती है या करने में सावधानी बरतती है तो इससे गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

ट्रैवेलिंग से बचें

प्रेगनेंसी के दौरान ट्रैवेलिंग करने पर गर्भ को झटका लगने, ज्यादा देर एक ही पोजीशन में बैठे रहने पर पेट पर दबाव पड़ने आदि का खतरा रहता है। जिससे गर्भ में शिशु को दिक्कत हो सकती है ऐसे में शिशु को स्वस्थ रखने के लिए गर्भावस्था के दौरान महिला को यात्रा करने से बचना चाहिए।

बेबी मूवमेंट का ध्यान रखें

गर्भावस्था के दौरान महिला को गर्भ में शिशु की मूवमेंट का ध्यान रखना चाहिए क्योंकि गर्भ में शिशु का मूवमेंट करना शिशु के स्वस्थ होने की और इशारा करता है। और यदि कभी गर्भ में शिशु मूवमेंट नहीं करता है या कम करता है तो महिला को डॉक्टर से मिलना चाहिए ताकि यदि कोई दिक्कत हो तो उसका इलाज हो सके जिससे गर्भ में शिशु को निरोग रहने में मदद मिल सके।

सही समय पर जांच और टीकाकरण करवाएं

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपना रूटीन चेकअप और टीकाकरण समय से करवाना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से महिला और शिशु दोनों को बिमारियों से बचे रहने और प्रेगनेंसी के दौरान हर परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में किसी तरह की कमी नहीं आती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान प्रेगनेंसी के दौरान रखने से गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान कोई भी मन में सवाल हो, कोई भी दिक्कत हो तो तुरंत अपनी डॉक्टर से बात करें। ताकि आपकी परेशानी का हल मिल सके जिससे प्रेगनेंसी के दौरान माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ रहें।

Ways to keep baby healthy in the womb

बच्चों की हमेशा नाक बहने के कारण व् उपाय

छोटे बच्चे बहुत ही नाजुक होते हैं ऐसे में यदि उनकी केयर में थोड़ी सी चूक हो जाये तो इसकी वजह से उन्हें कोई न कोई सेहत सम्बन्धी समस्या लगी ही रहती है। जैसे की कई बच्चों की हमेशा नाक बहती रहती है। और ऐसे में छोटे बच्चों को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए आप मेडिकल स्टोर से लाकर यदि दवाई खिलाते हैं तो ऐसा करना बच्चों के लिए सही नहीं होता है।

क्योंकि बिना डॉक्टरी परामर्श के यदि आप बच्चों को दवाई खिलातें हैं तो कई बार इसकी वजह से बच्चों साइड इफ़ेक्ट होने का खतरा होता है। साथ ही हमेशा नाक बहने की समस्या के कारण बच्चों को सांस लेने, मुँह सूखने जैसी समस्या भी लगी रहती है। जिसकी वजह से बच्चा भी परेशानी अनुभव करता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको बच्चों की हमेशा नाक बहने के कारण व् उपाय क्या-क्या है उसके बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।

बच्चों की नाक बहने के कारण

  • मौसम में आने वाले बदलाव के कारण बच्चों की सेहत पर असर पड़ सकता है जिसकी वजह से बच्चों को जुखाम हो सकता है और जुखाम के कारण नाक बहना बहुत ही आम बात होती है।
  • जो बच्चे धूल मिट्टी में अधिक खेलते हैं उन बच्चों को धूल के संपर्क में रहने के कारण भी यह दिक्कत हो सकती है जिसकी वजह से उनकी नका हमेशा बहती रहती है।
  • जिन छोटे बच्चों को नजले की समस्या होती है उन बच्चों की नाक भी हमेशा बहती रहती है।
  • ठंडी तासीर की चीजें अधिक खाने के कारण भी बच्चों का इस समस्या से परेशान रहना आम बात है।

नाक बहने की समस्या से निजात पाने के उपाय

यदि आपके बच्चे की नाक हमेशा बहती रहती है तो इस समस्या के कारण आपको व् आपके बच्चे दोनों को अधिक दिक्कत महसूस हो सकती है। लेकिन यह कोई ऐसी परेशानी नहीं है की जिसका कोई समाधान नहीं हो बल्कि कुछ आसान टिप्स को ट्राई करने से आप आसानी से इस परेशानी से निजात पा सकते हैं। तो आइये आगे जानते हैं की वो उपाय कौन-कौन से हैं।

अदरक और शहद

यदि आपके बच्चे की नाक हमेशा बहती रहती है तो आप एक अदरक के टुकड़े को घिसकर उसका रस निकाल लें। उसके बाद उस रस को आधा चम्मच शहद में मिलाएं और अपने बच्चे को दें। ऐसा दिन में दो से तीन बार तब तक करें जब तक की आपके बच्चे का जुखाम ठीक न हो जाये। ऐसा करने से आपके बच्चे को जल्द ही इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलेगी।

सरसों का तेल

सरसों का तेल सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। लोग इसे खाने के साथ, सिर की मालिश करने, शरीर की मालिश करने आदि में भी इस्तेमाल करते हैं। वैसे की सरसों के तेल का इस्तेमाल करने से बच्चों को हमेशा नाक बहने की समस्या से निजात दिलाने में भी मदद मिलती है।

इसके लिए आप एक कटोरी में थोड़ा सरसों का तेल, लहसुन की एक या दो कली, थोड़ा सा अजवाइन, थोड़ी सी हींग, डालकर उसे गर्म कर लें। उसके बाद इस तेल के गुनगुना रहने पर इसे छान लें और इस तेल से बच्चे की पीठ व् छाती की तरफ से अच्छे से मालिश करें। ऐसा करने से बच्चे को नका बहने की समस्या से आराम दिलाने में मदद मिलती है।

जायफल

बहती नाक की समस्या से राहत पाने के लिए जायफल का घरेलू नुस्खा भी बहुत फायदेमंद होता है। इसके इस्तेमाल के लिए आध आधी से थोड़ी कम कटोरी में दूध लेकर इसमें चुटकी भर जायफल का चूर्ण मिलाएं। उसके बाद इसे गर्म कर लें और थोड़ा ठंडा होने के लिए छोड़ दें।

उसके बाद इस दूध को थोड़ा थोड़ा करके बच्चे को पिलाएं ऐसा करने से बच्चे की बंद नाक को खोलने और बहती नाक की समस्या दोनों को कम करने में मदद मिलती है। और कुछ दिनों तक रोजाना करने से आपको इस समस्या से राहत भी मिल जाती है।

कपूर और नारियल का तेल

नारियल तेल और कपूर का इस्तेमाल करने से भी इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप नारियल तेल में कपूर डालकर उसे अच्छे से गर्म कर लें। उसके बाद इस मिश्रण के हल्का गुनगुना रहने पर इसे शिशु की छाती, पीठ व् गर्दन पर लगाएं। इससे शिशु को आराम मिलेगा जिससे शिशु को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलेगी।

बच्चों को काढ़ा पिलाएं

बहती नाक की समस्या से निजात पाने के लिए आप बच्चों को काढ़ा पिलाएं। और काढ़ा बनाने के लिए आप पानी में लौंग, इलायची, अदरक, हल्दी, अजवाइन, तुलसी आदि डालकर अच्छे से उबाल लें। उसके बाद आप इसे गुनगुने रहने पर दो से तीन चम्मच बच्चे को पिलाएं और ऐसा दिन में दो से तीन बार करें। ऐसा करने से बच्चे को बहती नाक की समस्या से निजात दिलाने में मदद मिलेगी और साथ ही बच्चे का इम्यून सिस्टम भी मजबूत होगा।

तुलसी

सदियों पहले से ही तुलसी का इस्तेमाल औषधि के रूप में किया जाता है और इसके इस्तेमाल से शरीर को बहुत सी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है। ऐसे में बहती नाक की समस्या से निजात पाने के लिए भी आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आप पांच छह तुलसी के पत्तों को पानी में उबाल लें और पानी के आधा रहने पर गैस बंद कर लें।

उसके बाद आप इस पानी में थोड़ा शहद मिलाकर बच्चे को पिलाएं और ऐसा दिन में कम से कम दो बार जरूर करें। ऐसा करने से बच्चे की बहती नाक की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है और साथ ही बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है। आप चाहे तो तुलसी के पत्तों का रस निकालकर उसमे शहद मिलाकर भी बच्चे को दे सकते हैं।

हल्दी दूध

बहती नाक की समस्या से निजात पाने के लिए हल्दी दूध का सेवन करना भी बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए आप कच्ची हल्दी को अच्छे से पीसकर दूध में डालकर अच्छे से उबाल लें। उसके बाद आप इस दूध को बच्चे को पिलाएं और ऐसा दिन में दो से तीन बार करें। ऐसा करने से भी आपको बच्चों के नाक बहने की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।।

तो यह हैं कुछ उपाय जिन्हे ट्राई करने से बच्चों को बहती नाक की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। इसके अलावा बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए आपको उनके आस पास साफ़ सफाई का खास ध्यान रखना चाहिए ताकि बच्चों को सेहत सम्बन्धी परेशानियों से बचाएं रखने में मदद मिल सकें।

Causes and remedies of runny nose

कैसे पता करें की गर्भपात हो गया है?

प्रेगनेंसी की खबर से जहां महिला और उसके परिवार के चेहरे पर ख़ुशी की लहर आ जाती है। तो वहीँ अचानक गर्भपात होने के कारण यह ख़ुशी खत्म हो जाती है। गर्भपात कई प्रकार के हो सकते हैं जैसे की कुछ महिलाएं बच्चा नहीं चाहती हैं तो वो दवाई का सेवन करके या डॉक्टर की मदद से गर्भ गिरा देती है, कई बार महिला द्वारा किसी शारीरिक परेशानी के होने के कारण गर्भ गिर जाता है, कुछ केस ऐसे भी होते हैं जहां महिला द्वारा बरती गई लापरवाही के कारण गर्भ गिर जाता है, आदि। तो आज इस आर्टिकल में हम गर्भपात का कैसे पता चलता है व् उससे जुडी अन्य जानकारी बताने जा रहे हैं।

गर्भपात होने के कारण

  • यदि किसी महिला को शुगर, थायरॉयड, या अन्य कोई शारीरिक बीमारी है तो उसके कारण गर्भपात हो सकता है।
  • बढ़ती उम्र में गर्भधारण करने वाली महिलाओं के गर्भपात होने का खतरा अधिक होता है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान बरती गई लापरवाही जैसे की यात्रा करना, पेट पर दबाव डालना, तनाव अधिक लेना, आदि के कारण भी गर्भपात हो सकता है।
  • शरीर में हार्मोनल असंतुलन के कारण भी गर्भपात हो सकता है।
  • जो महिलाएं पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम की समस्या से जूझ रही होती है उनका भी गर्भपात हो सकता है।
  • डॉक्टर की बिना सलाह के गलत दवाइयों का सेवन करने के कारण भी गर्भपात का खतरा रहता है।

गर्भपात होने वाला है या हो गया है कैसे पता चलता है?

यदि महिला का गर्भपात हो गया हो या होने वाला है तो महिला को शरीर में कुछ लक्षण महसूस होते हैं जिन्हे देखकर आप जान सकते हैं की महिला का गर्भपात हो गया है या होने वाला है। आइये उन लक्षणों के बारे में जानते हैं।

पेट में दर्द व् ऐंठन

यदि महिला को पेट के बहुत तेज दर्द व् ऐंठन की समस्या हो रही हो और महिला को बिल्कुल वैसा या उससे ज्यादा दर्द महसूस हो जैसा की माहवारी के समय होता है। तो महिला को इस लक्षण को अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि यह लक्षण इस बात की और इशारा करता है की महिला का गर्भपात होने वाला है।

पीठ में दर्द

पेट के साथ यदि महिला कभी महिला को पीठ में भी बहुत तेजी से दर्द होता है तो यह लक्षण भी इस बात की और इशारा करता है की महिला का गर्भपात होने वाला है। ऐसे में आपको जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलना चाहिए।

ब्लीडिंग

यदि महिला को प्राइवेट पार्ट से लाल, भूरे, गुलाबी रंग का स्त्राव महसूस हो तो आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। क्योंकि यह भी गर्भपात का लक्षण होता है यदि महिला को केवल खून के धब्बे लगते हैं तो आप इस गर्भपात को डॉक्टर की मदद से रोक भी सकते हैं ऐसे में आपको बिल्कुल देरी नहीं करनी चाहिए। लेकिन यदि ब्लीडिंग बहुत ज्यादा हो रही है तो इसका मतलब होता है की गर्भपात हो गया है।

तो यह हैं गर्भपात होने के कारण व् उसके लक्षण, ऐसे में आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान इन टिप्स का ध्यान रखना चाहिए। ताकि आप ऐसा कोई काम नहीं करें जिससे गर्भपात हो। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान आप अपना अच्छे से ध्यान रखें ताकि माँ और बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

प्रेग्नेंट महिला को हरियाली तीज का व्रत रखने से पहले यह जानना जरुरी है?

हरियाली तीज का व्रत साल 2021 में 11 अगस्त दिन बुधवार को आएगा। हरियाली तीज सावन के पावन महीने में आती है और इस दिन सुहागन महिलाएं अपने पति की लम्बी उम्र व् पति के निरोग रहने की कामना करते हुए पूरे दिन का निर्जला उपवास रखती है। साथ ही पूरे सोलह श्रृंगार करके एक दुल्हन की तरह तैयार होती है। इसके अलावा हरियाली तीज के दिन पाठ पूजा का भी बहुत अधिक महत्व होता है इस दिन माँ गौरा और भोलेबाबा की पूजा अर्चना की जाती है। आज इस आर्टिकल में हम गर्भवती महिलाओं को हरियाली तीज का व्रत रखना चाहिए या नहीं और व्रत रखने से पहले किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

प्रेग्नेंट महिला हरियाली तीज का व्रत करे या नहीं?

यदि आप गर्भवती हैं तो व्रत रखने से पहले आपको एक बार डॉक्टर की राय लेनी चाहिए की आपका स्वस्थ ठीक है या नहीं, आपके लिए व्रत रखना सही है या नहीं, आदि। और उसके बाद यदि डॉक्टर आपको व्रत रखने के लिए कहतें हैं तो आप व्रत रख सकती है और यदि नहीं कहते हैं तो आपको व्रत नहीं रखना चाहिए। इसके अलावा यदि आप व्रत रखती है तो आपको बहुत सी बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि आपको व्रत रखने पर किसी भी तरह की परेशानी नहीं हो।

हरियाली तीज का व्रत रखने पर गर्भवती महिला किन बातों का ध्यान रखें

यदि गर्भवती महिला हरियाली तीज का व्रत रखने जा रही है तो महिला को बहुत सी बातों का ध्यान रखना चाहिए। तो आइये अब उन बातों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

भूखे प्यासे रहकर व्रत न करें

प्रेगनेंसी के दौरान भूखा प्यासा रहना महिला के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है जिससे महिला को थकान, कमजोरी, सिर दर्द, चक्कर जैसी समस्या हो सकती है। ऐसे में महिला को ऐसी कोई परेशानी नहीं हो इससे बचने के लिए महिला को व्रत रखने पर पानी व् फलाहार का सेवन करते रहना चाहिए।

खाली पेट न करें चाय कॉफी का सेवन

व्रत वाले दिन महिला गलती से भी खाली पेट चाय या कॉफ़ी का सेवन नहीं करें क्योंकि इसकी वजह से महिला को पेट सम्बन्धी परेशानियां बढ़ने का खतरा होता है।

आराम जरूर करें

व्रत वाले दिन अपने स्वास्थ्य के साथ लापरवाही न करते हुए दिन में थोड़ी देर आराम जरूर करें ऐसा करने से आपके शरीर में ऊर्जा बनी रहेगी जिससे आपको दिक्कत नहीं होगी।

आरामदायक कपडे पहने

व्रत वाले दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती है भारी भरकम साड़ियां व् लहंगे पहनती हैं लेकिन यदि आप गर्भवती हैं तो आप आरामदायक कपड़ें पहनें। क्योंकि भारी भरकम कपडे पहनने के कारण आपको दिक्कत हो सकती है साथ ही आप ज्यादा थका हुआ महसूस कर सकती है।

झूला नहीं झूलें

हरियाली तीज के दिन महिलाएं झूला भी झूलती है लेकिन यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो ऐसा बिल्कुल नहीं करें। क्योंकि झूला झूलना आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है।

मीठा कम खाएं

व्रत के दिन ज्यादातर लोग मीठा खाना खाना पसंद करते हैं लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान जरुरत से ज्यादा मीठा खाना आपके लिए नुकसादायक हो सकता है। खासकर जिन खाद्य पदार्थों में रेफिन्स शुगर होता है उनका सेवन तो गर्भवती महिला को बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

कोई भी दिक्कत होने पर डॉक्टर से संपर्क करें

यदि आपको ऐसा लगता है की आपको कोई भी दिक्कत हो रही है तो उसे अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर से मिलें। ताकि यदि कोई समस्या हो तो उसका जल्द से जल्द इलाज हो सके।

रात के समय हल्का आहार लें

पूरा दिन व्रत रखने के बाद रात के समय ज्यादा भारी भोजन नहीं करें ऐसा करने से आपको भोजन को हज़म करने में दिक्कत हो सकती है। जिसके कारण पेट से जुडी परेशानियां हो सकती है ऐसे में रात के समय महिला को हल्का आहार लेना चाहिए जिसे पचाने में महिला को आसानी हो।

तो यह हैं कुछ बातें जिनका ध्यान प्रेगनेंसी के दौरान हरियाली तीज का व्रत रखते समय महिला को रखना चाहिए। यदि महिला इन बातों का ध्यान रखती है तो महिला को व्रत रखने पर होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

Pregnant women need to know this before fasting for Hariyali Teej

गर्भवती महिला को थकान रहने के क्या कारण होते हैं?

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को थकान होना बहुत ही आम समस्या होती है और इस समस्या से अधिकतर गर्भवती महिलाएं परेशान रह सकती है। प्रेगनेंसी के समय कभी कभी थकान होना जहां आम बात होती है वहीँ ज्यादा थकान की समस्या रहने के बहुत से कारण हो सकते हैं। और उन कारणों को गर्भवती महिला को अनदेखा न करते हुए उनका समाधान करना चाहिए। क्योंकि थकान होने के कुछ कारण ऐसे होते हैं जो माँ व् बच्चे दोनों की सेहत के लिए नुकसानदायक होते हैं। तो आइये अब इस आर्टिकल में प्रेगनेंसी में थकान होने के क्या-क्या कारण हो सकते हैं और गर्भवती महिला को किस तरह इस समस्या का समाधान करना चाहिए उसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

गर्भावस्था में थकान होने के कारण

गर्भवती महिला को यदि थकान की समस्या रहती है तो इसका कोई एक नहीं बल्कि कई कारण हो सकते हैं। जैसे की:

शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के शरीर में लगातार हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं जिनकी वजह से महिला को थकान की समस्या हो सकती है। खासकर पहली तिमाही में हार्मोनल बदलाव बहुत तेजी से होते हैं इसीलिए पहली तिमाही में यह समस्या अधिक हो सकती है।

पोषण सही न मिलना

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला अपनी डाइट का ध्यान नहीं रखती है, पोषक तत्वों से भरपूर डाइट नहीं लेती हैं तो इसकी वजह से शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है जिसकी वजह से महिला को थकान की समस्या होती है।

तनाव हो सकता है कारण

कुछ गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान तनाव की समस्या हो जाती है और तनाव होने के कारण महिला मानसिक रूप से थकावट महसूस करने के साथ शारीरिक रूप से भी थकावट का अनुभव कर सकती है।

नींद सही न लेने की वजह से

गर्भावस्था के दौरान जितना खाना और पीना जरुरी होता है उतना ही बेहतर स्वास्थ्य के लिए नींद भी लेना जरुरी होता है। लेकिन यदि गर्भवती महिला अपनी नींद अच्छे से नहीं लेती है तो इसकी वजह से भी गर्भवती महिला को थकान की समस्या अधिक होती है साथ ही महिला को अन्य शारीरिक दिक्कतें भी अधिक हो सकती है।

वजन

जिन गर्भवती महिलाओं का वजन प्रेगनेंसी के दौरान जरुरत से ज्यादा हो जाता है या कम रहता है उन महिलाओं को थकान की समस्या अधिक हो सकती है।

शरीर में खून की कमी होने के कारण

अधिकतर गर्भवती महिलाओं में प्रेगनेंसी के दौरान खून की कमी की समस्या देखने को मिलती है और जिन महिलाओं को यह समस्या होती है उन्हें प्रेगनेंसी के दौरान थकान जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

शारीरिक परेशानियां

जिन गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के समय ब्लड प्रैशर, शुगर, उल्टियां जैसी शारीरिक परेशानी अधिक रहती है।उन महिलाओं को प्रेग्नेंसीउ के समय थकान का सामना अधिक करना पड़ सकता है।

जरुरत से ज्यादा काम करने की वजह से

प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के दौरान थोड़ा बहुत कमा जरूर करना चाहिए। ताकि शरीर को फिट व् एक्टिव रहने में मदद मिल सके। लेकिन यदि महिला जरुरत से ज्यादा काम करती है, ज्यादा तेजी से काम करती है तो इसकी वजह से भी महिला को थकान की समस्या अधिक हो सकती है

पाचन क्रिया से जुडी समस्या होने के कारण

जिन गर्भवती महिला को कब्ज़, गैस, अपच व् अन्य पाचन से जुडी समस्या अधिक रहती है उन महिलाओं को थकान अधिक महसूस हो सकती है।

शरीर में दर्द

कमर दर्द, पेल्विक एरिया में दर्द, शरीर के अन्य हिस्सों में दर्द की समस्या अधिक होने के कारण भी महिला हमेशा थका हुआ सा महसूस कर सकती है।

बार बार यूरिन पास करने की दिक्कत होने पर

प्रेगनेंसी की पहली और तीसरी तिमाही में महिला को यूरिन पास करने की इच्छा अधिक हो सकती है और बार बारे यूरिन पास करने जाने की वजह से गर्भवती महिला को थका हुआ सा महसूस हो सकता है।

एक ही पोजीशन में बहुत देर तक बैठने के कारण

गर्भवती महिला को एक ही पोजीशन में ज्यादा देर के लिए नहीं बैठना चाहिए क्योंकि इससे हाथों पैरों में ब्लड फ्लो थोड़ा कम होने लगता है जिसकी वजह से बाद में उठने पर आपको थका हुआ महसूस हो सकता है।।

प्रेगनेंसी में थकान की समस्या को दूर करने के टिप्स

  • गर्भवती महिला को पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेनी चाहिए।
  • लम्बे समय तक भूखा नहीं रहना चाहिए बल्कि थोड़ी थोड़ी देर में कुछ न कुछ हेल्दी खाते रहना चाहिए।
  • आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन जैसे सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की शरीर में कमी नहीं होने देनी चाहिए क्योंकि इनकी कमी थकान की समस्या को बढ़ाती है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान वजन को जरुरत से ज्यादा नहीं बढ़ने देना चाहिए क्योंकि वजन का जरुरत से ज्यादा बढ़ना थकान का अहम कारण होता है इसके अलावा वजन जरुरत से कम भी नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे भी थकान की समस्या होती है।
  • शरीर में पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए इसके लिए दिन भर में आठ से दस गिलास पानी, नारियल पानी व् अन्य तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए।
  • नींद भरपूर लेनी चाहिए साथ ही जरुरत से ज्यादा भी नहीं सोना चाहिए क्योंकि इसकी वजह से सुस्ती आती है और थकान भी महसूस होती है।
  • ज्यादा तेजी से और जरुरत से ज्यादा काम नहीं करना चाहिए ऐसा करने से भी थकान को कम करने में मदद मिलती है।
  • थोड़ा व्यायाम भी जरूर करें इससे शरीर की सभी क्रियाओं को सुचारु रूप से काम करने में मदद मिलती है जिससे थकान दूर होती है।
  • प्रेग्नेंट महिला को डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों का सेवन भी समय से करना चाहिए ताकि शरीर में किसी भी प्रकार के पोषक तत्वों की कमी नहीं हो।
  • चाय कॉफ़ी व् अन्य कैफीन युक्त चीजों का सेवन अधिक नहीं करें क्योंकि कैफीन युक्त चीजों का अधिक सेवन करने पर भी थकान की समस्या अधिक होती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में थकान होने के कारण व् इस समस्या से बचाव के उपाय, यदि आप भी माँ बनने वाली हैं तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी में होने वाली थकान की समस्या से आपको बचे रहने में मदद मिल सके।

Causes of tiredness during pregnancy

चेहरे पर ग्लो लाने के लिए क्या करें?

कौन नहीं चाहता है की वो हमेशा दूसरों से ज्यादा सूंदर और आकर्षित दिखें और हमेशा उनकी स्किन ग्लोइंग रहें। लेकिन कई बार स्किन की अच्छे से केयर न करने पर, केमिकल युक्त चीजों का अधिक इस्तेमाल करने पर, स्ट्रेस की वजह से, आदि चेहरे के ग्लो में कमी आ जाती है। और कई बार तो आपकी स्किन की वजह से ज्यादा उम्र के लगने लगते हैं साथ ही आपकी स्किन भी खराब होने लगती है।

अगर आप भी स्किन के ग्लो खत्म होने की वजह से परेशान हैं तो इसमें आपको परेशान होने की बिल्कुल भी जरुरत नहीं है। क्योंकि यदि आप अपनी स्किन की अच्छे से केयर करने लगते हैं, उसका ध्यान रखते हैं, तो आप कभी भी अपनी स्किन को ग्लोइंग बना सकते हैं। आज इस आर्टिकल में हम आपको स्किन की ख़ूबसूरती को बढ़ाने और आपकी स्किन को ग्लोइंग बनाएं रखने के कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं।

एलोवेरा का इस्तेमाल करें

एलोवेरा स्किन सम्बन्धी समस्याओं को दूर करने का सबसे आसान और असरदार उपाय होता है। इससे स्किन में नमी को बरकरार रहने और स्किन को ग्लोइंग बनाएं रखने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप एक एलोवेरा के पत्ते को तोड़ लें। उसके बाद उसमे से ताजा जैल निकालें और उसे स्किन पर लगाएं हो सके तो एक या दो मिनट तक मसाज करें।

उसके बाद थोड़ी देर के लिए इसे चेहरे पर ही छोड़ दें फिर साफ़ पानी का इस्तेमाल करके चेहरे को धो लें। हो सके तो आप रात को सोने से पहले एलोवेरा जैल का इस्तेमाल करें और रातभर के लिए इसे चेहरे पर छोड़ दें। इस उपाय को नियमित करने से चेहरे पर होने वाली दाग धब्बों, झुर्रियों, टैनिंग आदि की समस्या को खत्म करके स्किन को ग्लोइंग बनाएं रखने में मदद मिलेगी।

मुल्तानी मिट्टी है फायदेमंद

चेहरे की ख़ूबसूरती को बढ़ाने के लिए मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल करना बहुत फायदेमंद होता है इसके इस्तेमाल से चेहरे को ग्लोइंग बनाने के साथ स्किन सम्बन्धी परेशानियों को दूर करने में भी मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप एक चम्मच मुल्तानी मिट्टी के पाउडर में दो चम्मच टमाटर का रस और आधा चम्मच दही मिलाकर एक पेस्ट बनाएं। उसके बाद इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं और चेहरे को सूखने के लिए छोड़ दें। जैसे ही यह पेस्ट सूख जाएँ तो चेहरे को मसाज करते हुए साफ़ करें इस उपाय को हफ्ते में कम से कम दो बार करें।

चावल का आटा

एक कटोरी में एक चम्मच चावल का आटा, एक चम्मच दही, चुटकी भर कॉफ़ी पाउडर और आधा चम्मच शहद डालकर अच्छे से मिक्स करें और एक पेस्ट तैयार करें। उसके बाद इस पेस्ट को मुँह पर लगाएं और दो से तीन मिनट तक मसाज करें। उसके बाद दस से पंद्रह मिनट के लिए इसे चेहरे पर ही छोड़ दें और फिर साफ़ पानी का इस्तेमाल करके चेहरे को धो लें। इस उपाय को हफ्ते में कम से कम दो बार जरूर करें। ऐसा करने से स्किन ग्लोइंग रहने में मदद मिलती है।

बेसन

बेसन का इस्तेमाल पुराने समय से ही स्किन को ग्लोइंग बनाने के लिए किया जाता है। इसके इस्तेमाल के लिए आप एक कटोरी में एक से डेढ़ चम्मच बेसन का लें उसके बाद इसमें थोड़ा दही, चार पांच बूंदे निम्बू के रस की और थोड़ा सा गुलाबजल मिक्स करें। ऐसा करने के बाद आप इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं और हल्के हाथों से दो से तीन मिनट तक मसाज करे। मसाज करने के बाद दस से पंद्रह मिनट के लिए इस पेस्ट को चेहरे पर ऐसे ही छोड़ दें। उसके बाद मुँह को धो लें आपको असर जरूर दिखाई देगा।

दही, मुल्तानी मिट्टी और हल्दी

हल्दी, दही, मुलानी मिट्टी तीनों ही चेहरे को ग्लोइंग रखने में मदद करते हैं। ऐसे में इन तीनों को यदि साथ में मिला दिया जाये तो सोचिये कितना असर आपको दिखाई देगा। इस उपाय को करने के लिए आप एक कटोरी में एक चम्मच मुल्तानी मिट्टी का पाउडर, थोड़ा सा दही, चुटकी भर हल्दी और थोड़ा सा गुलाबजल मिक्स करें। मिक्स करने के बाद आप इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं और दस से पंद्रह मिनट के लिए छोड़ दें उसके बाद इसे थोड़ा सा पानी लगाकर मसाज करते हुए साफ़ पानी से धो दें। ऐसा हफ्ते में कम से कम दो बार जरूर करें।

मसूर की दाल

मसूर की दाल को पीसकर एक पाउडर तैयार करें उसके बाद एक चमच्च पाउडर में एक चम्मच शहद मिलाकर अच्छे से मिक्स करें और एक पेस्ट तैयार करें। ऐसा करने के बाद आप इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं और चेहरे को सूखने के लिए छोड़ दें। उसके बाद साफ़ पानी से मुँह धो लें और चेहरे पर मॉइस्चराइजर लगाएं। इस उपाय को करने से भी चेहरे को ग्लोइंग बनाने में मदद मिलती है।

गुलाब जल

रोजाना रात को सोने से पहले साफ़ पानी से मुँह धोएं और सूखे तोलिये से मुँह को अच्छे से साफ़ करें उसके बाद रुई की मदद से पूरे चेहरे पर गुलाब जल लगाएं। उसके बाद सुबह उठकर साफ़ पानी से मुँह धो लें। ऐसा करने से भी चेहरे को ग्लोइंग बनाने में मदद मिलती है।

कच्चा दूध

स्किन को ग्लोइंग बनाने के लिए कच्चे दूध का इस्तेमाल करना भी बहुत अच्छा उपाय है इसके इस्तेमाल के लिए आप मुँह को साफ़ पानी से धोने के बाद दिन में तीन से चार बार कच्चा दूध रुई की मदद से चेहरे पर लगाएं। उसके बाद जब आपकी स्किन अच्छे से दूध को सोख लें तो चेहरे को साफ़ पानी से धो लें इस उपाय को नियमित रूप से करने पर आपकी स्किन को हमेशा ग्लोइंग रहने में मदद मिलती है।

दालचीनी

एक कटोरी में एक चम्मच दालचीनी पाउडर, थोड़ा सा दही और थोड़ा सा शहद मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें। पेस्ट तैयार करने के बाद आप इसे चेहरे पर लगाएं और सूखने के लिए छोड़ दें। सूखने के बाद चेहरे को साफ़ पानी से धो लें। इस उपाय को करने से भी चेहरे को ग्लोइंग बनाने में मदद मिलती है।

पानी का भरपूर सेवन करें

स्किन को ग्लोइंग रखने के लिए आपको पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए क्योंकि भरपूर मात्रा में पानी पीने से स्किन की नमी को बरकरार रहने के साथ शरीर में मौजूद विषैले पदार्थों को भी बाहर निकालने में मदद मिलती है। जिससे आपकी स्किन हमेशा ग्लोइंग व् खूबसूरत रहती है।

हल्दी दूध पीएं

स्किन को ग्लोइंग बनाने के लिए आपको नियमित रात को सोने से पहले हल्दी दूध का सेवन भी करना चाहिए। हल्दी दूध में एंटीऑक्सिडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं जो स्किन पर होने वाली मुहांसों, दाग धब्बो की समस्या से आपको बचाएं रखने में मदद करते हैं।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिन्हे ट्राई करने से आपकी स्किन को हमेशा ग्लोइंग बनाये रखने में मदद मिलती है। इसके अलावा आपको स्ट्रेस नहीं लेना चाहिए, स्किन पर केमिकल युक्त चीजों का अधिक इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, धूल मिट्टी से स्किन को सुरक्षित रखना चाहिए, आदि ताकि आपकी स्किन को हमेशा आकर्षित बने रहने में मदद मिल सकें।

What to do to get glow on face

Month by Month Baby Development

0

हरेक महीने आपका शिशु ऐसे बढ़ता है, गर्भ में शिशु कैसे बढ़ता है, कब-कब कौन-कौन से अंग का निर्माण होता है, कब सुनता है सम्पूर्ण जानकारी आपके लिए

If you are a soon-to-be parent, it is natural to wonder how your baby is developing in the womb. From the moment of conception, your baby goes through a series of rapid changes and transformations, culminating in the birth of a fully-formed infant. In order to help you understand this process, we have compiled complete information on how your baby grows every month.

Starting from the moment of conception, we will guide you through each stage of fetal development, highlighting when and what organs are formed, and how your baby’s body is growing and changing. We will also provide insights into when your baby’s hearing begins to develop, giving you a glimpse into your little one’s world.

Whether you are a first-time parent or an experienced caregiver, understanding how your baby grows in the womb is an essential part of preparing for the arrival of your new family member. With this information at your fingertips, you can feel confident and empowered as you navigate this exciting and transformative time in your life.

Watch Hindi Video Month By Month Development of Baby, गर्भ में शिशु कैसे बढ़ता है, कब-कब कौन-कौन से अंग का निर्माण होता है। कब सुनता है सम्पूर्ण जानकारी आपके लिए

गर्भ के अंदर बच्चे में कितने महीने में जान आती है?

गर्भ में शिशु के आने की खबर के साथ ही महिला के सोचने के तरीके में बदलाव आ जाता है। क्योंकि अब महिला कुछ भी करने से पहले, कुछ भी खाने से पहले, केवल इसी बात के बारे में सोचती है की जो वो कर रही है वो बच्चे के लिए सही है या नहीं। और ऐसा करना जरुरी भी है क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला जितना ज्यादा अपना ध्यान रखती है उतना ही शिशु को फायदा मिलता है।

साथ ही बच्चे के गर्भ में आने से लेकर बच्चे के जन्म के कुछ समय बाद तक भी बच्चे का विकास उसकी माँ पर ही निर्भर करता है। प्रेगनेंसी के एक से नौ महीने तक शिशु का विकास गर्भ में धीरे धीरे बढ़ता रहता है और जब शिशु पूरा विकसित हो जाता है तो उसका जन्म होता है।

गर्भ में तो शिशु के विकास को महिला देख नहीं पाती है लेकिन जन्म के बाद महिला शिशु के विकास को देख पाती है। आज इस आर्टिकल में हम गर्भ में शिशु के विकास से जुडी कुछ जानकारी आपको बताने जा रहे हैं। जिसे अधितर लोग जानना चाहते हैं की आखिर गर्भ में शिशु में जान कब आती है।

कब आती है भ्रूण में जान

एक महीने तक तो महिला को पता भी नहीं चलता है की महिला का गर्भ ठहरा है या नहीं लेकिन जब दूसरे महीने में जब महिला के पीरियड्स मिस हो जाते हैं। तब महिला घर में प्रेगनेंसी टेस्ट करती है जिससे यह जानने में मदद मिलती है की महिला प्रेग्नेंट हैं या नहीं।

यदि घर में प्रेगनेंसी टेस्ट पॉजिटिव आता है तो उसके बाद महिला डॉक्टर के पास जाती है। और जब महिला डॉक्टर के पास जाती है तो डॉक्टर महिला को कुछ टेस्ट करवाने के लिए बोल सकते हैं। साथ ही छह से नौ हफ्ते की प्रेगनेंसी के बीच महिला को एक अल्ट्रासॉउन्ड करवाने की सलाह दी जाती है। और यह अल्ट्रासॉउन्ड गर्भ में शिशु के दिल की धड़कन आई है या नहीं इसके लिए लिए किया जाता है।

इस दौरान महिला चाहे तो डॉक्टर की मदद से शिशु के धड़कते दिल की आवाज़ सुन भी सकती है। अब जब इस दौरान शिशु के दिल की धड़कन आ जाती है तो इसका मतलब यही होता है की शिशु में जान आ गई है। और अब इसके बाद धीरे धीरे गर्भ में शिशु का विकास बढ़ने लगता है। पहले शिशु के अंगों की आकृतियां बनती है, धीरे धीरे उनमे मजबूती बढ़ती है और फिर वो अंग धीरे धीरे अपना काम भी करने लगते हैं।

तो यह हैं गर्भ में अंदर बच्चे में कितने महीने में जान आती है उससे जुडी जानकारी, ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि गर्भ में शिशु के बेहतर विकास और तेजी से विकास होने में मदद मिल सके।

कच्चा चावल, मिट्टी, कोयला खाने का मन क्यों करता है प्रेगनेंसी में

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में बहुत से बदलाव आते हैं। शरीर में बदलाव आने के साथ महिला व्यवहार में, खाने पीने की आदतों में, भी बदलाव आ सकते हैं। और इन सभी का कारण प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव हो सकते हैं। साथ ही कुछ महिलाओं के अंदर कुछ अजीब बदलाव देखने को भी मिलते हैं जैसे की प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं का मिट्टी, कच्चे चावल, कोयला आदि खाने के मन करता है। क्या आप भी प्रेगनेंसी के दौरान ऐसे बदलावों का अनुभव कर चुकी है या आप अब प्रेग्नेंट हैं और आपको ऐसे बदलाव महसूस हो रहे हैं? यदि हाँ, तो क्या आप जानती है की आखिर ऐसा क्यों होता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको प्रेग्नेंट महिला का कच्चा चावल, मिट्टी, कोयला खाने का मन क्यों करता है इस बारे में बताने जा रहे हैं।

पिका सिंड्रोम के कारण

पिका सिंड्रोम एक ऐसी अवस्था होती है जहां किसी खाने की चीज के प्रति आपकी इच्छा इतनी बढ़ जाती है की आप उसे खाए बिना रह नहीं पाते हैं। यदि कोई प्रेग्नेंट महिला इस समस्या से ग्रसित होती है तो महिला की प्रेगनेंसी के दौरान कच्चा चावल, मिट्टी, कोयला खाने की इच्छा बढ़ सकती है। इस बीमारी का बढ़ना सेहत पर गलत असर डाल सकता है ऐसे में महिला को इस समस्या का इलाज करवाना चाहिए।

हार्मोनल बदलाव

गर्भावस्था के दौरान महिला की खाने की इच्छा में भी बदलाव आता है यानी की महिला का कुछ न कुछ अलग खाने का मन कर सकता है। ऐसे में कई महिलाओं का कच्चा चावल, मिट्टी, कोयला, मुल्तानी मिट्टी आदि खाने का मन कर सकता है।

पोषक तत्वों की कमी के कारण

यदि किसी प्रेग्नेंट महिला के शरीर में आयरन या अन्य किसी पोषक तत्वों की कमी होती है तो इस कारण भी महिला का ऐसी चीजें खाने का मन अधिक करता है। ऐसे में हो सके तो आपको एक बार डॉक्टर से राय जरूर लेनी चाहिए। क्योंकि शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने के कारण यदि यह समस्या होती है तो इससे माँ व् बच्चे की सेहत पर गलत असर पड़ सकता है।

गंध और स्वाद

प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को जिन चीजों की गंध या स्वाद अधिक आकर्षित करता है उन चीजों का खाने का मन भी महिला का कर सकता है। जैसे की महिलाओं को मिट्टी की गंध अच्छी लगती है तो महिला का मिट्टी खाने का मन कर सकता है।

क्या इन चीजों को खाने से माँ या बच्चे को कोई नुकसान होता है?

जी हाँ, प्रेगनेंसी के दौरान कोयला, मिट्टी, कच्चे चावल आदि खाने के कारण महिला को पेट से जुडी समस्याएँ, इन्फेक्शन, शरीर में पोषक तत्वों की कमी जैसी समस्या होने का खतरा रहता है। साथ ही गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर भी इसका नकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। ऐसे में जितना हो सके गर्भवती महिला को इन चीजों को खाने से परहेज करना चाहिए।

तो यह हैं कच्चा चावल, मिट्टी, कोयला खाने का मन प्रेगनेंसी के दौरान क्यों करता है उससे जुडी जानकारी, यदि आपका भी ऐसा ही मन करता है तो आपको अपनी इस आदत को कण्ट्रोल करना चाहिए ताकि माँ और बच्चे पर इसका कोई गकत प्रभाव नहीं पड़े।

सिजेरियन डिलीवरी के बाद पीरियड्स में क्या बदलाव आते हैं?

डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में बहुत से बदलाव आते हैं खासकर पीरियड्स में आपको यह बदलाव सबसे ज्यादा महसूस होता है। जब महिला की डिलीवरी सिजेरियन तरीके से होती है तो महिला के पेट के निचे के हिस्से और गर्भाशय में चीरा लगाकर बच्चे को बाहर निकाला जाता है। और उसके बाद उसे वहां पर टाँके लगाकर बंद भी कर दिया जाता है।

साथ ही महिला को प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने तक पीरियड्स नहीं आते हैं, हाँ कुछ महिलाओं को हल्की ब्लीडिंग होती रहती है। लेकिन जैसे ही महिला की डिलीवरी होती है उसके तुरंत बाद महिला को पीरियड्स आने शुरू हो जाते हैं। और यह पीरियड्स महिला को बीस से तीस दिन तक रह सकते हैं।

शुरूआती दिनों में जहां महिला को हैवी फ्लो होता है वहीँ धीरे धीरे ब्लीडिंग होना कम होता जाता है। उसके बाद जब महिला को पहला पीरियड आता है तो उसमे महिला को कुछ बदलाव महसूस हो सकते हैं। तो आइये अब इस आर्टिकल में जानते हैं की सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला के पीरियड्स में क्या बदलाव आते हैं।

तीन महीने बाद आ सकते हैं पीरियड

महिला को डिलीवरी के तीन महीने के बाद पहला पीरियड आ सकता है कुछ महिलाओं को छह महीने भी लग सकते हैं, यह पूरी तरह से शरीर की प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है। ऐसे में हर महिला के पहला पीरियड आने का समय अलग अलग हो सकता है। लेकिन अधिकतर महिलाओं को तीन से पांच महीने तक ब्लीडिंग होना शुरू हो जाता है शुरुआत में पीरियड्स का चक्र थोड़ा अनियमित हो सकता है लेकिन उसके बाद धीरे धीरे यह नियमित होता रहता है।

ब्लीडिंग बढ़ सकती है

जहां आपको पहले तीन से पांच दिन तक ब्लीडिंग होती थी वहीँ सिजेरियन डिलीवरी के बाद जब आपको पहला पीरियड आता है तो यह एक हफ्ते तक रह सकता है। साथ ही आपको शुरुआत में हैवी ब्लीडिंग व् दर्द जैसी परेशानी भी हो सकती है ऐसा होने का कारण शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव होते हैं। और आपको दिन भर में पांच से छह पैड बदलने की जरुरत पड़ सकता है ऐसे में आप अच्छी क़्वालिटी के पैड का ही इस्तेमाल करें ताकि वो लम्बे समय तक चल सकें। लेकिन ध्यान रखें की छह से आठ घंटे में आप पैड को जरूर बदलें ताकि इन्फेक्शन का खतरा नहीं हो।

दर्द अधिक महसूस हो सकता है

सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं ऐसे में जब महिला को पीरियड्स आते हैं तो हो सकता है की महिला को पहले के मुकाबले अधिक दर्द व् ऐंठन महसूस हो। पेट के साथ साथ कमर, टांगों, जाघों के आस पास, पेट के निचले हिस्से में अधिक दर्द महसूस हो सकता है ऐसे में आप सिकाई करके इस समस्या से राहत पा सकते हैं।

पीरियड्स कम भी हो सकते हैं

ऐसा नहीं है की हर महिला को डिलीवरी के बाद हैवी ब्लीडिंग ही हो बल्कि यह शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव पर निर्भर करता है। जहां कुछ महिलाओं को डिलीवरी के बाद पीरियड्स ज्यादा हो सकते हैं वहीँ कुछ महिलाओं को पीरियड्स कम भी हो सकते है।

सिजेरियन डिलीवरी के बाद मासिक धर्म के अनियमित होने के कारण

महिला की डिलीवरी के बाद यदि महिला को पीरियड्स अनियमित हो सकता हैं तो इसका कारण थायरॉयड, वजन, तनाव, अधिक उम्र आदि हो सकते हैं ऐसे में आप घबराएं नहीं बल्कि आप चाहे तो एक बार डॉक्टर की राय जरूर ले सकते हैं।

डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

जब महिला को पीरियड्स एक हफ्ते से ज्यादा आये और ब्लीडिंग भी बहुत ज्यादा हो रही हो, पेट में असहनीय दर्द या बुखार जैसे लक्षण महसूस हो तो ऐसा महसूस होने पर आपको अनदेखा न करते हुए एक बार डॉक्टर से मिलना चाहिए। साथ ही आपको डिलीवरी के छह महीने बाद भी यदि पीरियड आने शुरू नहीं होते हैं तो आपको एक बार डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

तो यह हैं कुछ बदलाव जो सिजेरियन डिलीवरी होने के बाद महिला को पहला पीरियड आने पर महसूस हो सकते है। यदि आपकी डिलीवरी भी सिजेरियन हुई है तो आपको भी यह बदलाव महसूस हो सकते हैं।

Changes in periods after cesarean delivery