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प्रेगनेंसी में कब कैसे और कितना अमरुद खाना चाहिए?

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गर्भावस्था के दौरान महिला को अपने खान पान में बहुत से बदलाव करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान जितना बेहतर महिला का खान पान होता है उतना महिला को हेल्दी रहने और गर्भ में शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद मिलती है। प्रेगनेंसी के दौरान महिला को पोषक तत्वों से युक्त फलों का सेवन करने की सलाह दी जाती है। लेकिन किसी भी फल की पूरी जानकारी के बिना महिला को उसका सेवन नहीं करना चाहिए। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान अमरुद के सेवन के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था के दौरान अमरुद खाएं या नहीं?

आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन्स, एंटी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर अमरुद का सेवन गर्भवती महिला कर सकती है। क्योंकि अमरुद में मौजूद यह सभी पोषक तत्व गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान कब, कैसे और कितना करें अमरुद का सेवन?

गर्भवती महिला यदि अमरुद का सेवन करना चाहती है तो महिला इसका सेवन प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी समय कर सकती है। गर्भवती महिला को अमरुद का सेवन करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए की अमरुद अच्छे से धुला हुआ हो, साफ़ हो, उसमे कीड़ा नहीं हो (कीड़ा चेक करने के लिए महिला को अमरुद काटकर देखना चाहिए), अमरुद बिल्कुल भी कच्चा नहीं हो। साथ ही महिला दिन भर में एक या दो अमरुद का सेवन कर सकती है। यदि महिला इन बातों को ध्यान में रखते हुए अमरुद का सेवन करती है तो इससे महिला और बच्चे को बहुत से फायदे मिलते हैं।

गर्भावस्था में अमरुद का सेवन करने के फायदे

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला अमरुद का सेवन करती है तो इससे महिला को एक नहीं बल्कि बहुत से फायदे मिलते हैं। तो आइये अब उन फायदों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

आयरन

गर्भावस्था के दौरान खून की कमी माँ और बच्चे दोनों के लिए हानिकारक होती है। लेकिन यदि महिला अमरुद का सेवन करती है तो इससे महिला को खून की कमी के कारण होने वाली परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। क्योंकि अमरुद में आयरन भरपूर मात्रा में मौजूद होता है।

हाई ब्लड प्रैशर का खतरा होता है कम

गर्भावस्था के दौरान बहुत सी महिलाएं हाई ब्लड प्रैशर की समस्या से परेशान हो सकती है और इस समस्या के कारण माँ और बच्चे दोनों की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में यदि महिला अमरुद का सेवन करती है तो इससे महिला को हाई ब्लड प्रैशर की समस्या से बचे रहने व् हाई ब्लड प्रैशर के कारण होने वाली परेशानियां जैसे की गर्भपात, समय से पहले डिलीवरी जैसी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

जेस्टेशनल डाइबिटीज़ का खतरा होता है कम

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को जेस्टेशनल डाइबिटीज़ की समस्या होने का खतरा रहता है। लेकिन अमरुद का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला के ब्लड में शुगर लेवल कण्ट्रोल रहता है। जिससे महिला को जेस्टेशनल शुगर के खतरे से बचे रहने में मदद मिलती है।

फाइबर

अमरुद में फाइबर की अधिकता भी होती है जिससे गर्भवती महिला को पाचन क्रिया से जुडी परेशानियां जैसे की कब्ज़, अपच, गैस जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

एंटीऑक्सीडेंट्स

गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है। जिसकी वजह से महिला को संक्रमण व् बिमारियों से ग्रसित होने का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन यदि महिला अमरुद का सेवन करती है तो अमरुद में मौजूद विटामिन सी जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स महिला की इम्युनिटी को स्ट्रांग रखने में मदद करते हैं जिससे महिला को संक्रमण व् बिमारियों से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

विटामिन बी 6

गर्भावस्था के दौरान अधिकतर गर्भवती महिलाएं मॉर्निंग सिकनेस की समस्या से परेशान रहती है। लेकिन यदि महिला अमरुद का सेवन करती है तो महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। क्योंकि अमरुद का सेवन करने से महिला को विटामिन बी 6 मिलता है जो महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद करता है।

तनाव होता है दूर

प्रेगनेंसी के दौरान तनाव होना माँ और बच्चे दोनों के लिए हानिकारक होता है। लेकिन कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान इस परेशानी से ग्रसित हो जाती है ऐसे में इस परेशानी से निजात के लिए अमरुद का सेवन करना महिला के लिए फायदेमंद होता है। क्योंकि अमरुद मैग्नीशियम का बेहतरीन स्त्रोत होता है जो महिला को मानसिक रूप से सहमत और रिलैक्स रहने में मदद करता है।

कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला यदि अमरुद का सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला के शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल को घटाने और गुड़ कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है जिससे माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ रहने हैं। साथ ही इससे गर्भवती महिला को हदय सम्बन्धी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

बच्चे का विकास होता है बेहतर

अमरुद में फोलिक एसिड, आयरन, कैल्शियम, विटामिन जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो गर्भवती महिला को हेल्दी रखने के साथ गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान अमरुद का सेवन करने से जुडी जानकारी, यदि आप भी माँ बनने वाली हैं और आपका भी अमरुद खाने का मन कर रहा है। तो ऊपर दिए गए टिप्स का ध्यान रखकर आप भी अमरुद का सेवन कर सकती है और उसके बेहतरीन फायदे उठा सकती है।

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प्रेग्नेंट महिला हेल्दी कैसे रहें?

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जैसे ही महिला का गर्भधारण होता है और महिला को इस बात का पता चलता है की वो माँ बनने वाली है। उसी दिन उसी पल से महिला महिला के दिमाग में केवल यही चलता है की महिला प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा क्या करे, क्या खाये, कैसे अपना ध्यान रखें, जिससे महिला हेल्दी रहे। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान जितना ज्यादा महिला अपना ध्यान रखती है उतना ही गर्भवती महिला को हेल्दी रहने और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है। तो अब इस आर्टिकल में हम आपके साथ कुछ ऐसे टिप्स शेयर करने जा रहे हैं जो गर्भवती महिला को हेल्दी रहने में मदद करते हैं।

खाने पीने का रखें अच्छे से ध्यान

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के फिट रहने के लिए और बच्चे के बेहतर विकास के लिए सबसे जरुरी होता है की महिला अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखें। और खान पान में भी बहुत सी चीजों का ध्यान रखना महिला के लिए जरुरी होता है। जैसे की:

  • खाने पीने में उन चीजों को करने शामिल जिसमे पोषक तत्व भरपूर हो जैसे की डेयरी प्रोडक्ट्स, हरी सब्जियां, दालें, फल, अंडे, चिकन, देसी घी, आदि।
  • गर्भवती महिला की पाचन क्रिया कमजोर होने के कारण महिला को खाना हज़म करने में दिक्कत हो सकती है ऐसे में महिला को एक बार में पेट भर कर खाने की बजाय थोड़ा थोड़ा करके और थोड़ी थोड़ी देर में खाना खाना चाहिए। ताकि महिला का खाना भी हज़म हो जाएँ और महिला को पेट सम्बन्धी परेशानी भी नहीं हो।
  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला को सभी ऐसा कहते हैं की अब महिला को दो लोगो के लिए खाना है, लेकिन महिला के लिए जरुरत से ज्यादा खाना नुकसानदायक साबित हो सकता है। ऐसे में महिला उतना ही खाएं जितना महिला को अच्छे से हज़म हो सके।
  • जंक फ़ूड, बासी खाना, मसालेदार व् तेलीय आहार, कच्चे अंडे, कच्चा मास, बिना धुले फल व् सब्जियां आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • खाने के साथ बॉडी में तरल पदार्थों की मात्रा भी भरपूर रहे इसके लिए महिला को पानी के साथ जूस, नारियल पानी, निम्बू पानी आदि का भी भरपूर सेवन करना चाहिए।
  • खाने का रूटीन सही रहे इसके लिए आप एक डाइट चार्ट तैयार करें जिसमे हफ्ते के हिसाब से अपनी डाइट लिखे की आपने कब क्या खाना है, यदि आप उसे फॉलो करेंगी तो इससे आपको फायदा मिलेगा।

व्यायाम को अपनी दिनचर्या का अहम हिस्सा बनाएं

प्रेगनेंसी कोई बीमारी नहीं होती है जिसमे महिला को केवल आराम ही करना चाहिए। बल्कि प्रेगनेंसी के दौरान जितना हो सके महिला को एक्टिव रहना चाहिए और व्यायाम, योगासन को अपनी दिनचर्या का अहम हिस्सा बनाना चाहिए क्योंकि व्यायाम करने से महिला को हेल्दी रहने में मदद मिलती है। लेकिन यदि डॉक्टर ने आपको बैड रेस्ट की सलाह दी है तो महिला को व्यायाम व् अन्य शारीरिक गतिविधि करने से बचना चाहिए। साथ ही व्यायाम करते समय भी महिला को बहुत सी बातों का ध्यान रखना चाहिए। जैसे की:

  • भारी सामान या वजन उठाने वाला व्यायाम नहीं करना चाहिए।
  • ऐसा व्यायाम नहीं करें जिसे करने से पेट पर जोर पड़े।
  • जरुरत से ज्यादा शरीर को थकावट महसूस हो उस तरह का व्यायाम नहीं करें।
  • किसी जिम ट्रेनर या डॉक्टर से राय लें की आपको किस तरह का व्यायाम करना चाहिए।
  • इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए यदि महिला व्यायाम करती है तो इससे महिला को प्रेगनेंसी के दौरान हेल्दी रहने और एक्टिव रहने में मदद मिलती है।

बुरी आदतों से रहे दूर

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को हेल्दी रहने के लिए बुरी आदतों से दूर रहना चाहिए। जैसे की महिला को अधिक मात्रा में कैफीन, धूम्रपान, अल्कोहल का सेवन नहीं करना चाहिए साथ ही ऐसी जगह पर जाने से भी बचना चाहिए जहां पर कोई नशीले पदार्थों का सेवन कर रहा हो। यदि प्रेग्नेंट महिला इन बातों का ध्यान रखती है तो इससे महिला को हेल्दी रहने में मदद मिलती है।

स्ट्रेस से बचें

गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाएं तनाव का शिकार हो जाती है और तनाव प्रेग्नेंट महिला के स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होता है और इसका असर गर्भवती महिला की सेहत के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। ऐसे में हेल्दी रहने के लिए सबसे जरुरी है की महिला अपने आप को तनाव से दूर रखें और जितना हो सके खुश रहें। और खुश रहने के लिए महिला को अपने मन में आ रहे विचारों को शेयर करना चाहिए, प्रेगनेंसी और प्रसव से जुडी जानकारी इक्कठी करनी चाहिए, अकेले नहीं रहना चाहिए, प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली दिक्कतों का समाधान करने की कोशिश करनी चाहिए, आदि।

लापरवाहियों से बचें

गर्भावस्था के दौरान हेल्दी रहने के लिए बहुत जरुरी है की महिला किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करें। और इसके लिए जरुरी है की महिला को प्रेगनेंसी के दौरान छोटी छोटी बातों का ध्यान रखना चाहिए। जैसे की गर्भवती महिला को यात्रा नहीं करनी चाहिए, भागदौड़ नहीं करनी चाहिए, भारी सामान उठाना या सरकाना नहीं चाहिए, पेट के बल नहीं सोना चाहिए, सीढ़ियां नहीं चढ़नी चाहिए, बाथरूम साफ़ करने से बचना चाहिए, केमिकल युक्त चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, पालतू जानवर का काम नहीं करना चाहिए, आदि। यदि महिला इन छोटी छोटी लापरवाहियों को करने से बचती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला को हेल्दी रहने में मदद मिलती है।

भरपूर नींद भी है जरुरी

गर्भावस्था के दौरान हेल्दी रहने के लिए महिला को खान पान का ध्यान रखने के साथ भरपूर नींद भी लेनी चाहिए। और इसके लिए महिला को रात को समय से सोना चाहिए ताकि महिला कम से कम आठ घंटे की नींद ले सके साथ ही महिला को दिन में भी थोड़ी देर आराम जरूर करना चाहिए। इसके अलावा यदि आपको सोने में कोई परेशानी होती है तो आपको प्रेगनेंसी पिल्लो का इस्तेमाल करना चाहिए।

समय से करवाए जांच

प्रेग्नेंट महिला के हेल्दी रहने और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए जरुरी है की महिला डॉक्टर से समय से जांच करवाएं। साथ ही अपने टीकाकरण समय से करवाएं, अपनी दवाइयां समय से ले साथ ही किसी भी दिक्कत के होते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

तो यह हैं कुछ बेहतरीन टिप्स जिनका ध्यान रखने से प्रेग्नेंट महिला को हेल्दी रहने और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है। यदि आप भी माँ बनने वाली हैं तो आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान इन टिप्स को अपनी दिचर्या में शामिल करना चाहिए ताकि आपको और आपके शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

Tips to be healthy during pregnancy

प्रेगनेंसी में व्रत करने के फायदे और नुकसान

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प्रेगनेंसी के दौरान व्रत करना चाहिए या नहीं इसे लेकर अधिकतर गर्भवती महिलाओं के मन में सवाल आता है। और इसका जवाब होता है की यदि प्रेग्नेंट महिला व्रत रखना चाहती है तो रख सकती है। लेकिन महिला को निर्जला उपवास यानी पूरे दिन पानी नहीं पीने वाला उपवास या फिर पूरा दिन भूखे रहकर किये जाने वाले उपवास नहीं करना चाहिए। साथ ही व्रत करते समय महिला को बहुत सी बातों का ध्यान भी रखना चाहिए।

क्योंकि यदि महिला बिना जानकारी के व्रत रखती है तो इसके कारण महिला को व्रत रखने के फायदे होने के साथ नुकसान भी हो सकते हैं। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी में व्रत रखने के फायदे, नुकसान व् व्रत करने समय गर्भवती महिला को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए उसके बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था के दौरान व्रत रखने के फायदे

गर्भवती महिला यदि व्रत रखती है तो इससे महिला को बहुत से फायदे मिलते हैं जो माँ और बच्चे दोनों को फायदा पहुँचातें हैं। तो आइये अब जानते हैं प्रेगनेंसी में व्रत रखने से कौन से फायदे मिलते हैं।

सेहत रहती है अच्छी

व्रत रखने के दौरान प्रेग्नेंट महिला फलों का भरपूर सेवन करती है, ताजा व् कम मसाले का या उबला हुआ खाना खाती है जिसमे पोषक तत्व भरपूर होते हैं, तरल पदार्थों का भरपूर सेवन करती है, साथ ही समय से अपनी डाइट लेती है तो ऐसा करने से गर्भवती महिला की सेहत अच्छी रहती है।

हड्डियां होती है मजबूत

यदि गर्भवती महिला व्रत रखती है तो महिला डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे की दूध, दही का भरपूर सेवन कर सकती है। और यह कैल्शियम से भरपूर होते हैं जिससे प्रेग्नेंट महिला की हड्डियों को मजबूती मिलने के साथ गर्भ में शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

मन रहता है शांत

व्रत रखने पर महिला का मन भगवान की तरफ लगा रहता है जिससे महिला को मानसिक रूप से रिलैक्स रहने में मदद मिलती है। और महिला को तनाव से बचे रहने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में व्रत रखने के नुकसान

प्रेग्नेंट महिला यदि व्रत रखती है तो इससे महिला को फायदे होने के साथ कुछ नुकसान होने का खतरा भी रहता है। जैसे की:

थकान व् कमजोरी

गर्भावस्था के दौरान महिला को व्रत रखने के कारण थकान व् कमजोरी की समस्या हो सकती है। क्योंकि यदि महिला अपनी डाइट अच्छे से नहीं लेती है, पानी का भरपूर सेवन नहीं करती है, आराम नहीं करती है तो महिला को यह दिक्कत हो सकती है। साथ ही महिला को सिर दर्द व् चक्कर जैसी परेशानी भी हो सकती है।

शरीर में पानी की कमी

व्रत रखने के दौरान यदि महिला भरपूर पानी का सेवन भी नहीं करती है तो इसकी वजह से महिला को डीहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है। जिसका बुरा असर माँ और बच्चे दोनों की सेहत पर पड़ता है।

आलस अधिक आना

यदि महिला व्रत रखती है तो महिला को आलस अधिक आता है जिसकी वजह से महिला एक्टिव नहीं रहती है। और प्रेग्नेंट महिला यदि एक्टिव नहीं रहती है तो इसकी वजह से महिला की परेशानियां बढ़ सकती है।

वजन बढ़ने का खतरा

व्रत रखने के बाद तला भुना, मसालेदार खाना खाने की इच्छा अधिक होती है। जिसकी वजह से महिला के वजन बढ़ने का खतरा भी अधिक बढ़ जाता है। और प्रेगनेंसी के दौरान वजन का जरुरत से ज्यादा बढ़ना माँ और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

शिशु के विकास को होता है खतरा

यदि प्रेग्नेंट महिला उपवास रखती है और उस दौरान महिला अपना अच्छे से ध्यान नहीं रखती है तो व्रत रखने के कारण बच्चे के विकास में कमी आ सकती है। जिसकी वजह से जन्म के समय बच्चे के वजन में कमी जैसी समस्या होने का खतरा बढ़ जाता है।

प्रेग्नेंट महिला व्रत करते समय किन बातों का ध्यान रखें

  • पूरा दिन भूखे या प्यासे रहकर उपवास नहीं करें।
  • व्रत रखने पर महिला हर दो घंटे के गैप में फल, सलाद, स्नैक्स, भोजन आदि का सेवन करती रहे।
  • दिन भर में पानी का भरपूर सेवन करने के साथ, जूस, नारियल पानी, निम्बू पानी का सेवन भी जरूर करें ताकि शरीर में एनर्जी भरपूर रहें।
  • यदि आपको प्रेगनेंसी के दौरान दिक्कतें ज्यादा हो रही हैं या प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स है तो आपको व्रत नहीं करना चाहिए।
  • व्रत रखने पर ज्यादा तला भुना आहार न लेकर ताजा व् उबला हुआ लेकिन पोषक तत्वों से भरपूर आहार लेना चाहिए।
  • नींद में भी महिला को किसी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए और आराम भी भरपूर करना चाहिए।
  • गर्भावस्था के दौरान व्रत करने पर महिला को चाय कॉफ़ी आदि का सेवन अधिक नहीं करना चाहिए।
  • डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों का समय से सेवन करना चाहिए।
  • व्रत रखने से पहले एक बार डॉक्टर से बात जरूर करें।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में व्रत करने के फायदे व् नुकसान साथ ही कुछ टिप्स जिनका ध्यान महिला को व्रत करते समय रखना चाहिए। यदि महिला इन बातों का ध्यान रखती है तो इससे महिला को व्रत रखने से किसी तरह की परेशानी नहीं होती है।

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प्रेगनेंसी में पिम्पल्स, फोड़े, फुंसी की समस्या से बचाव के उपाय

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गर्भावस्था के दौरान महिला को शारीरिक परेशानियों के साथ स्किन सम्बंधित समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव होने के कारण स्किन भी बहुत सेंसिटिव हो जाती है जिसकी वजह से महिला को चेहरे पर फुंसी, मुहांसे, पिम्पल्स, फोड़े जैसी समस्या हो सकती है। ऐसे में महिलाएं इस समस्या के उपचार के लिए केमिकल युक्त क्रीम का इस्तेमाल कर सकती है।

लेकिन केमिकल युक्त क्रीम का इस्तेमाल करने से महिला की यह समस्या बढ़ने का खतरा भी हो सकता है। ऐसे में महिला प्रेगनेंसी के दौरान स्किन से जुडी इस परेशानी के समाधान के लिए घरेलू नुस्खे ट्राई कर सकती है। जिससे महिला को कोई दिक्कत भी नहीं होती है और इस समस्या का समाधान भी हो जाता है। तो आइये अब प्रेगनेंसी में पिम्पल्स, फोड़े, फुंसी की समस्या से बचाव के लिए महिला किन किन नुस्खों को ट्राई कर सकती है उसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

प्रदूषण धूप से बचाव

धूप में बैठने के कारण, प्रदूषण के कारण भी स्किन पर बुरा प्रभाव पड़ता है जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला को यह परेशानी हो सकती है। ऐसे में इस परेशानी से बचाव के लिए महिला को धूप में सनस्क्रीन लगाकर जाना चाहिए और जितना हो सके धूप में जाने से बचना चाहिए, साथ ही धूल मिट्टी वाली जगह पर भी नहीं जाना चाहिए। यदि महिला ऐसा करती है तो महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

पानी पीएं भरपूर

गर्भावस्था के दौरान महिला भरपूर पानी का सेवन करें। इससे शरीर में तरल पदार्थों की मात्रा भरपूर रहेगी जिससे स्किन को हाइड्रेट रहने में मदद मिलेगी साथ ही बॉडी में से विषैले पदार्थ भी बाहर निकल जाएंगे। जिससे महिला की स्किन को साफ़, कोमल व् ग्लोइंग रहने में मदद मिलेगी।

एलोवेरा जैल

स्किन से जुडी हर परेशानी के इलाज के लिए एलोवेरा जैल का इस्तेमाल करना बहुत फायदेमंद होता है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला को पिम्पल्स, मुहांसे, फुंसी फोड़े की समस्या हो जाती है तो महिला उस जगह पर एलोवेरा जैल लगाएं। और एलोवेरा जैल के सूखने के बाद साफ़ पानी से मुँह धो लें।

आलू का रस

आलू को कसकर उसका रस निकाल लें उसके बाद रुई की मदद से इस रस को पिम्पल्स, फुंसी, फोड़े वाली जगह पर लगाएं और सूखने के लिए छोड़ दें। सूखने के बाद इसे साफ़ पानी से धो दें, नियमित ऐसा करने से आपको इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलेगी।

कच्चा दूध

कच्चा दूध भी स्किन को ग्लोइंग व् साफ़ रखने में मदद करता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला प्रेगनेंसी के दौरान पिम्पल्स, फुंसी, फोड़े की समस्या से बचे रहने के लिए कच्चे दूध का इस्तेमाल कर सकती है। इसके लिए प्रेग्नेंट महिला रात को सोने से पहले रुई की मदद से कच्चा दूध चेहरे पर लगाएं और सुबह उठकर साफ़ पानी से चेहरे को धो लें।

शहद

शहद का इस्तेमाल करने से भी स्किन से जुडी परेशानियों से बचे रहने व् उन्हें ठीक करने में मदद करता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान महिला स्किन से जुडी परेशानियों से निजात के लिए एक चम्मच शहद को मास्क की तरह चेहरे पर लगाएं। और लगभग बीस से पच्चीस मिनट के बाद गुनगुने पानी से चेहरे को धो लें। ऐसा हफ्ते में तीन से चार बार करें।

सेब का सिरका

चेहरे पर होने वाले पिम्पल्स, मुहांसे की समस्या से निजात पाने के लिए सेब के सिरके का इस्तेमाल करना भी बहुत फायदेमंद होता है। इसके इस्तेमाल के लिए महिला रुई की मदद से सेब का सिरका चेहरे पर लगाए और जब स्किन इसे अच्छे से सोख ले, उसके बाद आप मुँह को साफ़ पानी से धो लें।

बेकिंग सोडा

बेकिंग सोडा में पानी मिलाकर एक पतला पेस्ट तैयार करें, पेस्ट तैयार करने के बाद आप इसे मास्क के रूप में चेहरे पर लगाएं। और सूखने के बाद इसे साफ़ पानी से धो दें। ऐसा करने से भी प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली पिम्पल्स, मुहांसे, फुंसी, फोड़े की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिन्हे ट्राई करने से प्रेगनेंसी में पिम्पल्स, फोड़े, फुंसी की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है साथ ही महिला की स्किन की कोमलता और ग्लो को बरकरार रहने में मदद मिलती है। साथ ही महिला किसी उपाय को ट्राई करने सेपहले इस बात का ध्यान रखें की महिला जो भी उपाय कर रही है उसमे इस्तेमाल की जाने वाली चीजों से महिला को किसी भी तरह की एलर्जी न होती हो।

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प्रेगनेंसी में थकान होना कितना खतरनाक है जानिए?

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गर्भावस्था के दौरान थकान की समस्या का होना बहुत आम बात होती है। और इस समस्या से अधिकतर गर्भवती महिलाएं परेशान होती है। यह समस्या प्रेगनेंसी की पहली और तीसरी तिमाही में महिला को सबसे अधिक हो सकती है। साथ ही प्रेगनेंसी में थकान होने के एक नहीं बल्कि कई कारण हो सकते हैं। और कुछ कारण ऐसे होते हैं जो महिला और बच्चे दोनों की सेहत पर हानिकारक प्रभाव डालते हैं। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी में थकान होने के कारण, थकान की समस्या को कब अनदेखा नहीं करना चाहिए, और गर्भवती महिला कैसे इस परेशानी से निजात पा सकती है इस बारे में बताने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी में थकान होने के कारण

  • गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को थकान हो सकती है।
  • जिन गर्भवती महिलाओं के शरीर में खून की कमी होती है उन्हें भी थकान की समस्या होती है।
  • जो महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान अपने खान पान का ध्यान नहीं रखती है, समय से आहार नहीं लेती है, पोषक तत्वों से भरपूर डाइट नहीं लेती है, उनके शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। जिस कारण महिला को थकान व् कमजोरी जैसी समस्या होने लगती है।
  • जिन महिलाओं का वजन प्रेगनेंसी के दौरान कम होता है उन महिलाओं को इस परेशानी का सामना करना पड़ता है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान जो महिला तनाव का शिकार हो जाती है उन महिलाओं को भी थकान का अनुभव ज्यादा होता है।
  • जरुरत से ज्यादा शारीरिक श्रम, भागदौड़ करने पर भी महिला हमेशा थका हुआ महसूस कर सकती है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान जो महिलाएं नींद अच्छे से नहीं लेती है उन महिलाओं को भी थकान का अनुभव ज्यादा हो सकता है।

प्रेग्नेंट महिला के लिए थकान होना कब ज्यादा हानिकारक हो जाता है?

गर्भवती महिला को थकान यदि शरीर में खून की कमी के कारण हो, तनाव की वजह से हो, शरीर में पोषक तत्वों की कमी, तब अधिक थकान का होना महिला और बच्चे के विकास के लिए हानिकारक हो जाता है। क्योंकि इन सभी वजहों के कारण महिला की शारीरिक परेशानियां बढ़ जाती है, बच्चे का विकास अच्छे से नहीं होता है, डिलीवरी के दौरान दिक्कतें होने का खतरा बढ़ जाता है, आदि। ऐसे में गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान यदि थकान का अनुभव ज्यादा हो तो महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए और जल्द से जल्द डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

गर्भावस्था के दौरान थकान से बचे रहने के उपाय

गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान यदि थकान की समस्या से परेशान होती है तो महिला को कुछ टिप्स को प्रेगनेंसी के दौरान फॉलो करना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से गर्भवती महिला को थकान की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

डाइट का ध्यान रखें

प्रेगनेंसी के दौरान थकान की समस्या से बचे रहने के लिए महिला अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान रखें। जैसे की महिला सही समय पर अपना खाना खाये, पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लें, जंक फ़ूड मसालेदार खाना बासी खाना ठंडा खाना आदि का सेवन नहीं करें। यदि प्रेग्नेंट महिला अपनी डाइट को अच्छे से फॉलो करती है तो ऐसा करने से महिला को फिट और एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

व्यायाम करें

गर्भवती महिला को दिन में थोड़ी देर, व्यायाम, योगासन, मैडिटेशन आदि जरूर करना चाहिए। ऐसा करने से महिला शारीरिक व् मानसिक रूप से फ्रैश महसूस करती है जिससे महिला को थकान से बचे रहने में मदद मिलती है।

हिम्मत नहीं हारें

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला हमेशा नेगेटिव सोचती है, तनाव लेती है, प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों को लेकर घबरा जाती हैं, तो इससे भी महिला की दिक्कतें बढ़ जाती है और महिला थका हुआ सा महसूस करती है। लेकिन यदि महिला खुश रहती है, प्रेगनेंसी में आने वाली परेशानियों को कम करने की कोशिश करती है, हमेशा पॉजिटिव रहती है, हिम्मत नहीं हारती है, एनर्जी से भरपूर रहती है, तो ऐसा करने से भी महिला को प्रेगनेंसी के दौरान थकान की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

आराम करें भरपूर

गर्भवती महिला को नींद भरपूर लेनी चाहिए रात में सोने के साथ दिन भर में भी जब समय लगे थोड़ा आराम करना चाहिए। क्योंकि प्रेग्नेंट महिला जितना आराम करती है उतना ही महिला को स्वस्थ रहने और एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

जरुरत से ज्यादा शरीर पर जोर नहीं डालें

गर्भवती महिला से जितना काम हो महिला उतना ही करे, जरुरत से भागदौड़ नहीं करें, भारी सामान न उठायें, घर का वही काम करें जो आपको नुकसान नहीं पहुंचाएं, आदि। प्रेग्नेंट महिला यदि इन बातों का ध्यान रखती है तो भी महिला को थकान जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान थकान की समस्या से बचे रहने के उपाय, इसके अलावा यदि महिला को थकान अधिक महसूस होती हो चक्कर आते हो तो महिला को इसे अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

Tiredness during Pregnancy

प्रेग्नेंट महिला को ब्लीच और फेशियल करना चाहिए या नहीं?

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जब महिला माँ बनने की न्यूज़ सुनती है तभी से महिला हर वो सावधानी बरतना शुरू कर देती है जिससे प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने और बच्चे के बेहतर विकास में मदद मिलती है। लेकिन यह तो आप सभी जानते हैं की महिलाओं को खूबसूरत दिखने का कितना शौक होता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान भी अपनी ख़ूबसूरती को बरकरार रखने के लिए महिला को ब्लीच फेशियल आदि करवाना चाहिए या नहीं।

इससे जुड़े सवाल महिला के मन में आ सकते हैं। क्या आप भी माँ बनने वाली हैं और गर्भावस्था के दौरान ब्लीच फेशियल आपको करवाना चाहिए या नहीं इसके बारे में सोच रही हैं? यदि हाँ, तो आइये आज इस आर्टिकल में हम इन्ही कुछ सवालों के जवाब के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।

क्या प्रेग्नेंट महिला को ब्लीच फेशियल करवाना चाहिए या नहीं?

गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में बहुत से हार्मोनल बदलाव होते हैं जिसकी वजह से स्किन भी प्रभावित होती है। जैसे की स्किन पर झाइयां आने लगती है, फोड़े फुंसी पिम्पल्स होने लगते हैं, स्किन काली पड़ सकती है, आदि। ऐसे में महिला प्रेगनेंसी के दौरान अपनी स्किन के ग्लो को बरकरार रखने के लिए ब्लीच फेशियल करवाने के बारे में सोच सकती है।

लेकिन प्रेग्नेंट महिला को ब्लीच फेशियल करवाने से प्रेगनेंसी के दौरान जितना हो सके बचना चाहिए। क्योंकि ब्लीच व् फेशियल की क्रीम को बनाने के लिए केमिकल युक्त चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। और प्रेगनेंसी के दौरान केमिकल युक्त चीजों का इस्तेमाल करना माँ और बच्चे दोनों के लिए हानिकारक हो सकता है।

ब्लीच व् फेशियल गर्भावस्था में करवाने से होने वाले नुकसान

  • स्किन पाए इस्तेमाल किये जाने वाले इन प्रोडक्ट्स में मौजूद केमिकल स्किन पर होने वाले रोमछिद्रों से शरीर में प्रवेश कर सकता है जिसका बुरा असर माँ और बच्चे दोनों की सेहत पर पड़ सकता है।
  • गर्भावस्था के दौरान महिला की स्किन काफी सेंसिटिव हो जाती है ऐसे में ब्लीच व् फेशियल का इस्तेमाल करने से महिला को एलर्जी, फोड़े फुंसी आदि होने का खतरा अधिक होता है।
  • ब्लीच व् फेशियल करवाने के कारण महिला को खुजली व् रैशेस जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
  • महिला को इन क्रीम की गंध के कारण उल्टी आने जैसी परेशानी भी हो सकती है।
  • कुछ गर्भवती महिलाओं को ब्लीच व् फेशियल के कारण सांस लेने में परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है।

गर्भावस्था के दौरान ख़ूबसूरती को बरकरार रखने के लिए महिला क्या कर सकती है?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला चेहरे की ख़ूबसूरती को बरकरार रखने के लिए घरेलू नुस्खों को ट्राई कर सकती है जैसे की:

  • आलू का रस चेहरे पर लगाएं।
  • कच्चा दूध चेहरे पर लगाने।
  • बेसन, हल्दी, गुलाबजल का पेस्ट बनाकर चेहरे की ख़ूबसूरती को बढ़ाएं।
  • टमाटर का पेस्ट लगाने से भी प्रेगनेंसी के दौरान चेहरे के ग्लो को बरकरार रखने में मदद मिलती है।
  • एलोवेरा जैल का इस्तेमाल करने से भी गर्भवती महिला के चेहरे की ख़ूबसूरती बरकरार रहती है।।
  • चन्दन का फेस पैक भी आप चेहरे पर लगा सकती है।
  • मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल करने से भी प्रेगनेंसी के दौरान स्किन की चमक को बरकरार रखने में मदद मिलती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान महिला को ब्लीच फेशियल क्यों नहीं करवाना चाहिए और प्रेगनेंसी के दौरान चेहरे के ग्लो को बरकरार रखने के कुछ खास टिप्स। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन सभी बातों का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

प्रेगनेंसी में एड़ी में दर्द होने के कारण और उपाय

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गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। जैसे की उल्टियां आना, जी मिचलाना, जीभ के स्वाद में बदलाव आना, सिर दर्द व् चक्कर आना, बॉडी पेन रहना, पैरों व् एड़ी में दर्द महसूस होना आदि। और इन परेशानियों का गर्भवती महिला को होना बहुत ही आम बात होती है। आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी के दौरान एड़ी में होने वाले दर्द के कारण व् इस परेशानी के उपचार के बारे में बात करने जा रहे हैं।

प्रेग्नेंट महिला को एड़ी में दर्द होने के कारण

  • गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को एड़ी में दर्द महसूस होता है।
  • प्रेग्नेंट महिला का वजन यदि बहुत ज्यादा बढ़ जाता है तो इस कारण भी एड़ी में दर्द की समस्या होती है।
  • शरीर में पानी की कमी होने के कारण भी महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • जिन गर्भवती महिलाओं के शरीर में खून की कमी होती है उन महिलाओं को भी इस परेशानी का सामना करना पड़ता है।
  • गर्भावस्था के दौरान महिला को पैरों में सूजन की समस्या हो सकती है और पैरों में सूजन होने के कारण महिला को एड़ी में दर्द होता है।
  • जो महिला पोषक तत्वों से भरपूर आहार नहीं लेती है उन महिलाओं को भी यह समस्या होती है।
  • गलत तरीके के जूते सैंडल पहनने के कारण भी महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ता है।
  • ज्यादा भागदौड़ करने या लम्बे समय तक एक ही जगह पर खड़े रहने के कारण भी महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

प्रेगनेंसी में होने वाले एड़ी में दर्द की समस्या से बचाव के उपाय

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला को एड़ी में दर्द महसूस होता है। तो कुछ आसान टिप्स को ट्राई करने से महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है। तो आइये अब उन टिप्स के बारे में विस्तार से जानते हैं।

मालिश

एड़ी में दर्द की समस्या से बचाव के लिए एड़ी की मसाज करना सबसे आसान और असरदार उपाय है। इसके लिए आप सरसों के तेल को हल्का गर्म कर लें और उसके बाद इस तेल से अच्छे से अपने पैरों और एड़ी की मसाज करें। ऐसा करने से पैरों में ब्लड फ्लो अच्छे से होगा, मांसपेशियों को आराम महसूस होगा, जिससे गर्भवती महिला को एड़ी में दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलेगी। साथ ही रात को सोने से पहले तेल से मसाज करें ताकि आपको नींद भी अच्छी आये।

गर्म पानी की सिकाई

एक बाल्टी में गर्म पानी लेकर उसके नमक मिलाएं या फिर फिटकरी का इस्तेमाल करें, साथ ही ध्यान रखें की पानी उतना गर्म हो की आप उसमे पैरों को आराम से रख सकें। उसके बाद आप अपने पैरों को थोड़ी देर उस पानी में रखें। उसके बाद पैरों को बाहर निकालकर तोलिये से साफ़ कर लें। ऐसा करने से भी आपको इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

योगासन

प्रेगनेंसी के दौरान योगा करना बहुत फायदेमंद होता है। साथ ही योगा करने से गर्भवती महिला को एड़ी में दर्द की समस्या से बचे रहने में भी मदद मिलती है। इसके लिए महिला उन योगा को करें जिसमे पैरों की स्ट्रेचिंग होती है। रोजाना यदि महिला थोड़ी देर योगा करती है तो ऐसा करने से महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

सिकाई

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला को ज्यादा देर तक पैरों को लटकाकर बैठने में परेशानी होती है तो महिला एक बोतल में गर्म पानी डालकर या हीटिंग पैड में गर्म पानी डालकर सिकाई कर सकती है। ऐसा करने से भी महिला को एड़ी में दर्द से आराम मिलता है।

पोषक तत्वों से भरपूर डाइट

एड़ी में होने वाले दर्द की समस्या का एक कारण गर्भवती महिला के शरीर में होने वाली पोषक तत्वों की कमी भी होती है। ऐसे में गर्भवती महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला अपनी डाइट अच्छे से ले। और इसके लिए गर्भवती महिला डेयरी प्रोडक्ट्स यानी दूध दही, हरी सब्जियां, दालें, फ्रूट्स आदि का भरपूर सेवन करें। साथ ही सही समय से अपनी डाइट ले। यदि महिला अपनी डाइट को सही समय से लेती है साथ ही पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेती है तो ऐसा करने से महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

ज्यादा देर एक जगह खड़ी न रहें

गर्भावस्था के दौरान एड़ी में दर्द की समस्या से बचाव के लिए महिला लम्बे समय के लिए एक ही जगह खड़ी न रहें, बहुत ज्यादा वाक नहीं करें, भारी सामान नहीं उठायें, आदि। यदि महिला इन बातों का ध्यान रखती है तो इससे भी महिला को एड़ी में दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

पानी पीएं भरपूर

गर्भवती महिला दिन में आठ से दस गिलास पानी पीने के साथ जूस, नारियल पानी व् अन्य तरल पदार्थों का सेवन भी भरपूर करे। यदि महिला ऐसा करती है तो ऐसा करने से बॉडी हाइड्रेट रहती है जिससे गर्भवती महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

आरामदायक जूते चप्पल पहने

गर्भावस्था के दौरान महिला आरामदायक जूते व् चप्पल पहनें। क्योंकि इससे पैरों को आराम रहता है जिससे गर्भवती महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ उपाय जिन्हे ट्राई करने से गर्भवती महिला को एड़ी में दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा महिला भरपूर आराम भी करें क्योंकि महिला यदि भरपूर आराम करती है तो उतना ही महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

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क्या आपको प्रेगनेंसी में बेचैनी होती है?

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प्रेगनेंसी के दौरान महिला के मन में अलग अलग बातें चल रही होती है। जैसे की प्रेगनेंसी के दौरान महिला क्या करे क्या नहीं करें, बच्चे के विकास से जुड़े विचार, प्रेगनेंसी में क्या सही है क्या नहीं, आदि। ऐसे में कुछ महिलाएं गर्भावस्था के दौरान घबराहट, डर, बेचैनी की शिकार हो जाती है। जिसके कारण महिला तनाव से ग्रसित हो जाती है। जो की माँ और बच्चे दोनों के लिए हानिकारक होता है। क्या आप भी प्रेग्नेंट हैं और आपको भी बेचैनी या घबराहट महसूस हो रही है? यदि हाँ, तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको गर्भावस्था के दौरान महिला को घबराहट और बेचैनी क्यों होती है और इस समस्या से बचाव के लिए महिला क्या-क्या कर सकती है उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था में बेचैनी होने के कारण

यदि किसी गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान घबराहट, बेचैनी, डर, तनाव जैसी समस्या होती है तो ऐसा होने का कोई एक कारण नहीं होता है। बल्कि ऐसे बहुत से कारण होते हैं जिसकी वजह से महिला को यह समस्या हो सकती है। जैसे की:

हार्मोनल बदलाव: प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में बहुत से हार्मोनल बदलाव होते हैं। जिनका असर महिला के मस्तिष्क पर भी पड़ता है। और जब महिला के मस्तिष्क पर असर पड़ता है तो इस कारण महिला को बेचैनी महसूस हो सकती है।

पहली प्रेगनेंसी: पहली बार गर्भधारण करने पर महिला को प्रेगनेंसी से जुडी पूरी जानकारी कई बार नहीं होती है जिस वजह से महिला को बेचैनी महसूस होती है।

गर्भपात का डर: यदि किसी महिला का पहले गर्भपात हुआ है तो दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान भी महिला के मन में इस बात को लेकर डर होता है की कहीं महिला का गर्भपात नहीं हो जाये इसीलिए महिला को बेचैनी होती है।

शारीरिक परेशानियां: गर्भावस्था के दौरान जिन महिलाओं को शारीरिक परेशानियां अधिक रहती है। उन महिलाओं को बेचैनी महसूस होती है।

बच्चे का विकास: अधिकतर गर्भवती महिलाओं की बेचैनी का कारण गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास सही से हो रहा है या नहीं यह होता है।

अनिंद्रा: वजन बढ़ने के कारण, बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को अनिंद्रा की समस्या हो सकती है। और अनिंद्रा की समस्या होने के कारण महिला को बेचैनी महसूस हो सकती है।

प्रसव: कुछ गर्भवती महिलाओं को प्रसव का समय पास आने पर डिलीवरी कैसे होगी इस बात को लेकर बेचैनी महसूस हो सकती है।

अकेलापन: जो महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान अकेली रहती है उन्हें यह परेशानी अधिक हो सकती है।

प्रेग्नेंट महिला बेचैनी की समस्या से बचाव के लिए अपनाएं यह टिप्स

जो गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान बेचैनी की समस्या से परेशान रहती है वो महिलाएं कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल करके इस परेशानी से निजात पा सकती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की वो टिप्स कौन से हैं।

प्रेगनेंसी की जानकारी

गर्भावस्था कन्फर्म होने के बाद से ही या प्रेगनेंसी के प्लानिंग करते समय महिला को प्रेगनेंसी से जुडी पूरी जानकारी इक्कठी कर लेनी चाहिए। क्योंकि यदि गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी से जुडी सम्पूर्ण जानकारी होती है तो महिला को बेचैनी, घबराहट, डर, तनाव जैसी समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

योगासन व् मैडिटेशन

गर्भवती महिला को रोजाना थोड़ी देर योगा व् मैडिटेशन जरूर करना चाहिए। ऐसा करने से महिला को शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के साथ मानसिक रूप से भी रिलैक्स रहने में मदद मिलती है जिससे महिला को बेचैनी की समस्या से निजात मिलता है।

बेहतर खान पान

बेचैनी की समस्या से राहत के लिए महिला को अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि जितना अच्छा महिला का खान पान होगा उतना ही महिला स्वस्थ रहेगी, महिला की शारीरिक परेशानियां कम होंगी, गर्भ में शिशु का विकास अच्छे से होगा, आदि। और जब प्रेगनेंसी के दौरान महिला की परेशानियां कम होंगी उतना ही महिला को बेचैनी की समस्या से निजात पाने में मदद मिलेगी।

अकेली न रहें और शेयर करें

गर्भावस्था एक ऐसा समय होता है जब महिला को परिवार के स्पोर्ट की बहुत जरुरत होती है और जब परिवार साथ होता है तो महिला की आधी से ज्यादा परेशानियां खत्म हो जाती है। ऐसे में महिला को प्रेगनेंसी के दौरान परिवार के साथ रहना चाहिए साथ ही अपने मन में चल रहे सवालों को विचारों को शेयर करना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला को बेचैनी की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

नींद ले भरपूर

स्वस्थ रहने के लिए जितना खान पान का ध्यान रखने की जरुरत होती है उतना ही महिला को आराम भी करना चाहिए। ऐसे में बेचैनी की समस्या से निजात पाने के लिए महिला को अपनी नींद पर्याप्त लेनी चाहिए।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान बेचैनी महसूस होने के कारण व् इस परेशानी से बचे रहने के कुछ आसान उपाय, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान इस समस्या से बचे रहने और अपनी प्रेगनेंसी को अच्छे से एन्जॉय करने में मदद मिल सके।

Do you feel restless during pregnancy

डिलीवरी के बाद टाँके के निशान कैसे हटाएँ?

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यदि कोई महिला सिजेरियन डिलीवरी के माध्यम से बच्चे को जन्म देती है तो उसके पेट पर टाँके लगाएं जाते हैं। और धीरे धीरे यह टाँके ठीक होने लगते हैं। लेकिन इनके निशान नहीं जाते हैं और यह निशान महिला को पसंद नहीं आ सकते हैं। ऐसे में टांकों के निशान को हटाने के लिए महिला कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल कर सकती है।

लेकिन इन टिप्स का इस्तेमाल महिला को डिलीवरी के कम से कम तीन से चार महीनों बाद करना चाहिए। ताकि टांकों के कारण आपको कोई दिक्कत होने का खतरा नहीं हो। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम डिलीवरी के बाद महिला अपने टांकों के निशान को कैसे हटा सकती है उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

एलोवेरा जैल

रोजाना सुबह शाम महिला यदि टांकों पर एलोवेरा जेल का इस्तेमाल करती है तो धीरे धीरे यह टांकों के निशान हल्के होने लगते हैं। एलोवेरा जैल लगाने के लिए सुबह नहाने से पहले या रात को सोते समय का समय सबसे सही होता है।

शहद

शहद में थोड़ा सा बेकिंग सोडा मिलाकर टाँके के निशान पर लगाएं और हल्के हाथों से दो से तीन मिनट तक मसाज करें। उसके बाद इसे पांच मिनट के लिए छोड़ दें फिर साफ पानी से उस जगह को साफ़ कर दें। ऐसा कुछ दिन तक रोजाना करें धीरे धीरे आपको इन निशान में हल्कापन दिखाई देने लगेगा।

प्याज़ का रस

एक प्याज़ को कसकर उसका रस निकाल लें, उसके बाद रुई की मदद से आप इस रस को टांकों पर लगाए। ऐसा आप चार से पांच बार करें जैसे ही रस सुख जाये दोबारा लगाएं। उसके बाद आप साफ़ पानी से उस जगह को साफ़ कर लें। इस उपचार को ट्राई करने पर थोड़ा धैर्य रखें क्योंकि इसका असर आपको धीरे धीरे जरूर दिखाई देगा।

टी ट्री आयल

टी ट्री आयल में थोड़ा पानी मिलाकर इस मिश्रण को आप टांकों पर लगाएं। उसके बाद इसे दस से पंद्रह मिनट तक लगे रहने दे फिर इसे साफ़ पानी से साफ़ कर लें। इस तरीके को रोजाना करने पर आपको धीरे धीरे इसका असर दिखाई देगा।

हल्दी और दूध

एक चम्मच हल्दी में दूध मिलाकर न तो ज्यादा पतला और न ही ज्यादा गाढ़ा पेस्ट बनाएं। उसके बाद इस पेस्ट को टांकों के निशान पर लगाएं और उसके बाद सूखने के लिए छोड़ दें। सूखने के बाद साफ़ पानी से इसे साफ़ कर दें। ऐसा करने से भी आपको टांकों के निशान की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

निम्बू

एक निम्बू को निचोड़ कर उसका रस निकाल लें। उसके बाद इस रस को रुई की मदद से टांको पर लगाएं। टांकों पर इस रस को लगाने के बाद इसे सूखने के लिए छोड़ दें। ऐसा दो से तीन बार करें, उसके बाद जब निम्बू का रस अच्छे से सुख जाएँ तो इसे पानी से साफ़ कर लें। ऐसा करने से भी आपको इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

बेकिंग सोडा

बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करने से भी महिला को इस समस्या से छुटकारा पाने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप बेकिंग सोडा में पानी मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें और अब इस पेस्ट को टांकों पर लगाएं। उसके बाद जब यह पेस्ट सूख जाये तो उस जगह को साफ़ पानी से धो दें।

पुदीना

पुदीने के पत्तों को पीसकर उसका रस अच्छे से निकाल लें अब इस रस को रुई की मदद से महिला अपने निशानों पर लगाएं। उसके बाद जब यह रस सूख जाएँ तो उस जगह को साफ़ पानी से साफ़ कर लें।

टमाटर

टमाटर के गुद्दे को निकालकर बाकी हिस्से को अच्छे से पीस लें और उसके बाद उस पेस्ट को टांकों के निशान पर लगाएं। ऐसा करने से भी महिला को टांकों के निशान को हटाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिन्हे ट्राई करने से महिला डिलीवरी के बाद होने वाले टांकों के निशान को हटा सकती है। यदि आप भी इस समस्या से परेशान है तो कुछ दिन लगातार इन टिप्स का इस्तेमाल करके आप भी इस समस्या से निजात पा सकती है। लेकिन ऐसी किसी भी चीज का इस्तेमाल टांको पर नहीं करें जिसे लगाने से आपको स्किन पर किसी भी तरह की एलर्जी हो।

How to remove stitches marks after delivery

प्रेगनेंसी टेस्ट करने के 10 तरीके

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पीरियड्स मिस होने पर महिलाएं इस बात को लेकर सोचने लगती है की कहीं वो प्रेग्नेंट तो नहीं हो गई हैं। क्योंकि पीरियड्स का मिस होना प्रेगनेंसी का अहम लक्षण है। और महिला गर्भवती है या नहीं इसका पता लगाना आज कल कोई मुश्किल बात भी नहीं है। क्योंकि महिला प्रेग्नेंट है या नहीं है इसका पता महिला मार्किट से प्रेगनेंसी टेस्ट लाकर या फिर कुछ आसान घरेलू तरीको का इस्तेमाल करके भी कर सकती है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे दस तरीको के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपको यह बताने में मदद करते हैं की महिला गर्भवती है या नहीं है।

कांच का गिलास

प्रेगनेंसी टेस्ट करने का सबसे आसान तरीका है की महिला अपने यूरिन को एक कांच के साफ़ सूखे गिलास में डाले। उसके बाद उसे थोड़ी देर के लिए रखें उसके बाद यदि गिलास में यूरिन के ऊपर सफ़ेद रंग की परत आ जाती है। तो इसका मतलब होता है की महिला प्रेग्नेंट है।

चीनी

चीनी का इस्तेमाल करके भी महिला प्रेगनेंसी टेस्ट कर सकती है। इस टेस्ट के लिए महिला थोड़े से यूरिन के सैंपल में थोड़ी सी चीनी मिलाएं। अब महिला उसे मिक्स करे यदि चीनी यूरिन में घुल जाती है तो इसका मतलब है की आप प्रेग्नेंट नहीं है और यदि चीनी नहीं घुलती है और इक्क्ठी होने लगती है तो इसका मतलब होता है की आप गर्भवती हैं।

ब्लीच

प्रेगनेंसी टेस्ट करने के लिए ब्लीच का इस्तेमाल करना भी बहुत फायदेमंद होता है। इसके इस्तेमाल के लिए आप थोड़ा सा यूरिन लेकर उसमे थोड़ी सी ब्लीच मिलाएं। अब उसे मिक्स करें यदि मिश्रण के ऊपर आपको बुलबुले दिखाई देते हैं तो इसका मतलब होता है की आप प्रेग्नेंट हो सकती है।

सिरका

विनेगर यानी सिरका का इस्तेमाल करने से भी प्रेगनेंसी टेस्ट किया जा सकता है। इस टेस्ट को करने के लिए आप यूरिन में थोड़ा सा सिरका मिलाएं। यदि यूरिन में सिरका मिलाने के बाद आपको उसके रंग में कोई बदलाव नज़र आता है तो इसका मतलब होता है की शायद आप प्रेग्नेंट हैं और यदि रंग में कोई बदलाव नज़र नहीं आता है तो इसका मतलब होता है की आप प्रेग्नेंट नहीं है।

टूथपेस्ट

सफ़ेद रंग के टूथपेस्ट को आप यूरिन सैंपल में मिक्स करें उसके बाद देखें की यदि सैंपल का रंग नीला हो जाता है तो इसका मतलब आप प्रेग्नेंट हैं। और यदि सैंपल का रंग वैसे ही रहता है तो इसका मतलब होता है की परिणाम नेगेटिव है।

डेटोल

डेटोल का इस्तेमाल करने से भी आप घर में प्रेगनेंसी टेस्ट कर सकती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप आप एक डिस्पोजेबल गिलास में यूरिन और डेटोल को बराबर मात्रा में मिलाएं यदि डेटोल और यूरिन अच्छे से मिक्स हो जाता है तो इसका मतलब होता है की आप प्रेग्नेंट हैं और यदि डेटोल के ऊपर यूरिन परत बनाकर अलग से तैरने लगता है तो इसका मतलब होता है की आप प्रेग्नेंट नहीं है।

साबुन

घर में मौजूद साबुन का इस्तेमाल करने से भी आप प्रेगनेंसी टेस्ट कर सकते हैं। इसके लिए आप यूरिन में थोड़ा साबुन मिलाएं यदि साबुन यूरिन में घुलकर बुलबुले बनाने लगता है तो इसका मतलब होता है की आप प्रेग्नेंट हैं।

नमक

सफ़ेद नमक का इस्तेमाल करने से भी आप घर में प्रेगनेंसी टेस्ट कर सकते हैं। इसके लिए आप यूरिन सैंपल में थोड़ा सा नमक मिलाएं। अब इसे अच्छे से मिक्स करें यदि नमक यूरिन सैंपल में मिलकर दूधिया रंग का होने लगता है तो इसका मतलब होता है की आप प्रेग्नेंट हैं। और यदि किसी तरह का कोई भी रिऎक्शन नहीं होता है तो इसका मतलब होता है की आप प्रेग्नेंट नहीं हैं।

बेकिंग सोडा

यूरिन सैंपल में दो से तीन चम्मच बेकिंग सोडा को अच्छे से मिक्स करें यदि मिश्रण को अच्छे से मिलाने पर झाग या बुलबुले दिखाई देते हैं। तो इसका मतलब होता है की महिला गर्भवती है यदि मिश्रण को मिक्स करने पर ऐसा कुछ नहीं होता है तो इसका मतलब होता है महिला प्रेग्नेंट नहीं है।

प्रेगनेंसी टेस्ट किट

मार्किट से मिलने वाली प्रेगनेंसी टेस्ट किट का इस्तेमाल करके भी आप घर पर बैठे आसानी से अपनी प्रेगनेंसी के बारे में जान सकते हैं। टेस्ट किट का इस्तेमाल करने के लिए आप ड्रॉपर की मदद से यूरिन सैंपल को किट में बताई गई जगह पर दो से तीन बून्द डालें। और उसके बाद पांच से दस मिनट तक इंतज़ार करें। यदि किट पर दी गई दोनों लाइन लाल या गुलाबी हो जाती है तो इसका मतलब होता है की टेस्ट पॉजिटिव है। और यदि ऐसा नहीं होता है तो इसका मतलब होता है की टेस्ट नेगेटिव है।

प्रेगनेंसी टेस्ट करते समय इन बातों का ध्यान रखें

  • जिस दिन आपने प्रेगनेंसी टेस्ट करना हो उस दिन के पहले यूरिन का टस्ट के लिए इस्तेमाल करें या फिर टेस्ट करने से चार से पांच घंटे पहले तक यूरिन पास न करें और उस यूरिन का इस्तेमाल करें। क्योंकि इसमें HCG हॉर्मोन का लेवल सही होता है जिससे प्रेगनेंसी की सही रिपोर्ट आने में मदद मिलती है।
  • यूरिन सैंपल के लिए इस्तेमाल किया जाना वाला कंटेनर साफ़ सुथरा और सूखा हुआ होना चाहिए।
  • पीरियड्स के मिस होने के कम से कम एक चार से पांच दिन बाद टेस्ट करें।
  • टेस्ट के सही परिणाम का पता लगाने के लिए कम से कम तीन से पांच मिनट तक इंतज़ार करें।

तो यह हैं प्रेगनेंसी टेस्ट करने के दस आसान तरीके, तो यदि आप भी घर पर प्रेगनेंसी टेस्ट करना चाहती है तो आप भी इन टिप्स को ट्राई कर सकती है। और यदि टेस्ट पॉजिटिव आता है तो उसके बाद जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलें और अपना ट्रीटमेंट शुरू करवाएं।

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