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मुल्तानी मिट्टी से निखारे त्वचा

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पहले के समय में लोगों के पास महंगी कास्मेटिक और ब्रांडेड क्रीम्स नहीं हुआ करती थी लेकिन फिर भी उस समय के लोग सुंदर और खूबसूरत हुआ करते थे। केवल उनकी त्वचा ही नहीं अपितु उनके बाल भी इतने अच्छे हुआ करते थे जितने आजके समय में होना बहुत मुश्किल है। आपने भी अपनी नानी दादी की जवानी की फोटो देखी होगी वे उनमे कितनी सुंदर और प्यारी लग रही होती है। जिसका कारण होता था प्राकृतिक उपाय।

जी हां, उनकी मदद से बिना कोई हानिकारक परिणाम से स्किन को विभिन्न समस्यायों से मुक्त कर बेहतर त्वचा पाई जा सकती है। उन्ही कुछ उपायों में से एक है मुल्तानी मिट्टी। मुल्तानी मिट्टी का नाम तो आप सभी ने सुना होगा। मुल्तानी मिट्टी जिसे फुलर अर्थ भी कहा जाता है त्वचा के लिए बेहद लाभकारी होती है।

यह स्किन के लिए किसी कास्मेटिक से कम नहीं क्योंकि त्वचा की सफाई से लेकर दाग धब्बों को दूर करने और त्वचा में चमक लाने तक सभी गुण इसमें पाए जाते है। इसमें मौजूद मैग्नीशियम क्लोराइड त्वचा की विभिन्न समस्याओं को दूर करने में मदद करता है।

इतना ही नहीं आजकल बाजार में ऐसे बहुत से कॉस्मेटिक और फेस वाश मौजूद है जिनमे मुल्तानी मिट्टी एक मुख्य इंग्रेडिएंट के रूप में प्रयोग किया जाता है। मुल्तानी मिट्टी का प्रयोग सीधे त्वचा पर पेस्ट के रूप में किया जा सकता है। इसे लगाने से त्वचा पर कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होते। रोजाना मुल्तानी मिट्टी के पैक का प्रयोग करने से त्वचा संबंधी सभी समस्याएं दूर हो जाती है। इसके अलावा भी मुल्तानी मिट्टी के कई फायदे है जिनके बारे में आज हम आपको बताने जा रहे है।

मुल्तानी मिट्टी के फायदे :-

1. क्लींजर :बिना साबुन के चेहरा साफ कैसे करें

मुल्तानी मिट्टी में मैग्नीशियम क्लोराइड की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो त्वचा के लिए क्लीन्ज़र के रूप में कार्य करती है। इसके नियमित प्रयोग से त्वचा की गहरी सफाई की जा सकती है। ऐसे तो बाजार में मौजूद अन्य क्लीनर्स से भी स्किन की सफाई की जा सकती है लेकिन मुल्तानी मिट्टी आपके स्किन को नुकसान पहुंचाएं बिना फेस क्लीनिंग का काम करती है।

2. ऑयली स्किन के लिए :oily-skin-care-tips-in-hindi

ऑयली स्किन के लिए मुल्तानी मिट्टी बहुत फायदेमंद होती है। यह स्किन से एक्स्ट्रा आयल रिमूव करके उसे नार्मल करने में मदद करती है। इस स्किन टाइप के लिए मुल्तानी मिट्टी का पेस्ट बहुत लाभकारी होता है। प्रयोग के लिए सुबह और शाम को मुल्तानी मिट्टी लगाकर उसे सूखा लें और चेहरा साफ़ कर लें। तैलीयपन समाप्त होने के साथ-साथ यह कील मुहांसे भी दूर करने में मदद करती है। ब्लैकहेड्स और वाइटहेड्स की समस्या भी मुल्तानी मिट्टी के इस्तेमाल से दूर हो जाती है।

3. स्क्रबर :scrub

मुल्तानी मिट्टी का प्रयोग स्किन के लिए स्क्रबर के रूप में भी किया जा सकता है। यह स्किन से डर्ट निकालकर पोर्स को साफ़ करने में मदद करती है। इसके प्रयोग से ब्लैकहेड्स और वाइट हेड्स आसानी से निकल जाते है। यह त्वचा को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाती।

4. कॉम्प्लेक्शन :

टैनिंग, त्वचा का डार्क रंग या कालेपन की समस्या के लिए मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है। लेकिन प्रयोग नियमित रूप से करना होगा एक या दो दिन से फायदा नहीं होगा। इसके अलावा यदि चेहरे पर कोई दाग-धब्बे या रैशेस हो जाए तो भी मुल्तानी मिट्टी का प्रयोग किया जा सकता है।

5. त्वचा के लिए :

मुल्तानी मिट्टी स्किन के टेक्सचर को बेहतर बनाने में भी मदद करती है। त्वचा पर सफ़ेद दाग या काले धब्बे हो तो मुल्तानी मिट्टी के प्रयोग से ठीक हो जाते है। इसे लगाने से स्किन में चमक भी आती है। जिन लोगों को रूखी त्वचा की समस्या होती है वे इसका प्रयोग कर सकते है। परन्तु सर्दियों में इसके इस्तेमाल से बचना चाहिए।

6. बालों के लिए :Hair Spa mask

आपको यह जानकर हैरानी होगी मुल्तानी मिट्टी की मदद से बालों से जुडी कई समस्यायों में भी फायदा होता है। यह स्कैल्प को नौरीश करके बालों को पोषण प्रदान करती है और उन्हें एक नयी चमक देने में भी मदद करती है। दो मुहें बाल, झड़ते बाल, रूखे और बेजान बाल जैसी समस्यायों में मुल्तानी मिट्टी का पेस्ट बहुत लाभकारी होता है।

कौन से फलों का सेवन प्रेग्नेंट महिला को नहीं करना चाहिए

प्रेगनेंसी के दौरान फलों का सेवन गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि फलों का सेवन करने से न केवल गर्भवती महिला को पोषक तत्व मिलते हैं। बल्कि फलों का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली बहुत सी परेशानियों से बचे रहने में भी मदद मिलती है। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान सभी फलों का सेवन किया जाए यह भी सही नहीं है। क्योंकि कुछ फल ऐसे होते हैं जो प्रेग्नेंट महिला और बच्चे की सेहत पर बुरा प्रभाव डाल सकते हैं। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में कौन से फल नहीं खाने चाहिए।

कच्चा पपीता: गर्भवती महिला को कच्चे पपीते का सेवन करने से बचना चाहिए। क्योंकि इसमें लेटेक्स की मात्रा अधिक होती है साथ ही इसमें मौजूद एंजाइम बच्चे के विकास पर बहुत बुरा असर डालते हैं। साथ ही इसके कारण गर्भपात होने के साथ समय से पहले डिलीवरी होने की आशंका भी हो जाती है।

अंगूर: कभी- कभी गर्भवती महिला चाहे तो स्वाद के लिए दो चार अंगूर का सेवन कर सकती है। जैसे की फ्रूट चाट आदि में डालकर अन्य फलों के रस के साथ मिलाकर अंगूर का रस आदि भी पी सकती है। लेकिन रोजाना और सिमित मात्रा से ज्यादा अंगूर का सेवन करने से गर्भाशय में संकुचन होने का खतरा हो सकता है। जिसके कारण महिला को शुरूआती समय में ब्लीडिंग का खतरा, और प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही में समय से पहले डिलीवरी होने का खतरा हो सकता है।

अनानास: अनानास का सेवन भी गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए क्योंकि अनानास का सेवन करने से भी गर्भाशय में संकुचन का खतरा होता है। जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला व् बच्चे दोनों को दिक्कत हो सकती है।

तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन फलों का सेवन करने से बचना चाहिए। क्योंकि इन फलों का सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियां बढ़ सकती है। इसके अलावा जो भी फल आप खाते हैं वो मौसमी फल होना चाहिए। और फलों को अच्छे से धोने के बाद ही खाने के लिए प्रयोग में लाना चाहिए।

कम उम्र में बेबी होने से क्या दिक्कत आती है

प्रेगनेंसी के लिए भी एक सही उम्र होती है, जैसे की रिसर्च के अनुसार तेईस से सताइस वर्ष की उम्र को प्रेगनेंसी के लिए सही बताया गया है। क्योंकि इस समय प्रजनन क्षमता बेहतर होती है जिससे गर्भधारण में परेशानी होने के चांस कम होते हैं, यदि महिला स्वस्थ है तो। और तीस की उम्र तक भी महिला गर्भधारण कर सकती है, लेकिन कई बार इससे अधिक उम्र होने के बाद प्रेग्नेंट होने से लेकर प्रेगनेंसी के दौरान भी महिला को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। जिस तरह अधिक उम्र होने के बाद प्रेगनेंसी में परेशानी आती है, उसी तरह यदि महिला की उम्र कम हो तो भी प्रेगनेंसी में बहुत सी परेशानियां आ सकती है।

लेकिन कई बार शादी जल्दी होने के कारण महिला का गर्भधारण भी जल्दी हो जाता है, ऐसे में महिला को चाहिए की शादी के बाद शिशु को जन्म देने के लिए थोड़ा समय लें। क्योंकि कम उम्र में माँ बनने पर कई बार शारीरिक के साथ महिला मानसिक रूप से भी परेशानी का अनुभव कर सकती है। और यदि महिला शारीरिक रूप से कमजोर है तो दिक्कत ज्यादा भी हो सकती है, तो लीजिये आज हम ऐसी ही कुछ परेशानियों के बारे में बताने जा रहे हैं जो महिला को कम उम्र में माँ बनने पर हो सकती है।

गर्भपात होने के चांस

कम उम्र में यदि महिला गर्भधारण करती है, और शारीरिक रूप से अभी वह गर्भधारण के लिए तैयार नहीं होती है तो इसके कारण गर्भपात होने के चांस भी बढ़ जाते हैं। साथ ही इस दौरान बॉडी में तेजी से हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण भी महिला यदि ज्यादा परेशानी का अनुभव कर सकती है, और बॉडी इन बदलाव को सहन नहीं कर पाती है तो भी महिला का गर्भपात हो सकता है।

तनाव

पहली बार माँ बनना किसी भी महिला के लिए बेहद प्यारा अहसास होता है। लेकिन कम उम्र में माँ बनने पर कई बार महिलाएं इस पल को महसूस करने की बजाय बॉडी में हो रहे परिवर्तन, और प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों से परेशान हो जाती है जिसके कारण महिला तनाव में आ सकती है। और गर्भवती महिला के लिए तनाव लेना बहुत ही हानिकारक हो सकता है।

ज्यादा परेशानी का अनुभव होना

यदि महिला शारीरिक व मानसिक रूप से माँ बनने के लिए तैयार न हो तो प्रेगनेंसी में मुश्किलें बढ़ जाती हैं फिर चाहे वो किसी भी उम्र में हो। साथ ही कम उम्र में माँ बनना ज्यादातर महिलाओं के लिए परेशानी का कारण हो सकता है, और इसके कारण प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों का अनुभव भी महिला को ज्यादा महसूस हो सकता है।

शिशु के विकास में कमी

यदि जन्म देने वाली माँ ही शारीरिक रूप से फिट नहीं होती है तो गर्भ में शिशु का विकास बाधित हो सकता है। क्योंकि यदि महिला कम उम्र में माँ बनती है, और वह शारीरिक रूप से कमजोर है तो उसके द्वारा लिया गया आहार महिला को फिट रखने में मदद करेगा या शिशु तक पोषण पहुंचाएगा। ऐसे में महिला के साथ शिशु के पोषण में भी कमी आ सकती है। जिसके कारण गर्भ में शिशु का विकास बेहतर तरीके से न होने के चांस बढ़ जाते हैं।

डिलीवरी के दौरान परेशानी

कम उम्र होने के कारण कई महिलाओं को डिलीवरी के दौरान भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। और ज्यादातर केस में नोर्मल की जगह सिजेरियन डिलीवरी होने के चांस बढ़ जाते हैं।

तो यह हैं कुछ परेशानियां जो कम उम्र में महिला को माँ बनने पर हो सकती है, लेकिन ऐसा भी जरुरी नहीं है की ऐसा सभी महिलाओं के साथ हो। क्योंकि यदि महिला शारीरिक रूप से फिट होती है, तो हो सकता है की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को स्वस्थ रहने के साथ शिशु भी स्वस्थ हो।

रोज़ एक चम्मच सौंफ खाने से इतने सारे फायदे होते है

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सामान्य तौर पर भारतीय घरों और रेस्तरां में सौंफ का इस्तेमाल खाने खाने के अंत में किया जाता है, क्योंकि इसके सेवन से सांसों की बदबू दूर होती है। लेकिन कुछ लोग अपने डेली रूटीन में भी इसका सेवन करते है। कुछ इसके फ्रेशनेस गुणों के कारण तो कुछ इसके अनगनित फ़ायदों के कारण। दरअसल इसमें कई तरह के विटामिन, मिनरल्स और पोषक तत्व पाए जाते है। जो हमारे स्वास्थ्य के साथ-साथ हमारे शरीर के लिए भी काफी फायदेमंद होते है।

इसके अलावा इसमें ताँबा (copper), आयरन, कैल्सियम, पोटाशियम, मैंगनीस, सिलीनीयम, जिंक और मैग्नेशियम भी पाया जाता है। आयुर्वेद में भी सौंफ को बुद्धिपूर्वक, कफ खत्म करने वाला, पाचन संबंधी बिमारियों को दूर करने वाला और आँखों के लिए फायदेमंद बताया गया है। इसके साथ ही इसके रस का सेवन करने से गर्मी और प्यास को भी दूर किया जा सकता है।

यूनानी चिकित्सा की बात करें तो वहां भी इस प्राकृतिक देन को काफी लाभकारी माना जाता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है की इसके सेवन से पाचनतंत्र स्वस्थ रहता है। इसीलिए खाना खाने के बाद हमेशा एक चम्मच सौंफ का सेवन करना चाहिए। पहले के समय में तो सभी इसके इन फायदों को जानते थे लेकिन आजकल की पीढ़ी इन प्राकृतिक देनों के फ़ायदों से अपरिचित है। इसलिए आज हम सौंफ खाने के फायदे बताने जा रहे है।

स्वास्थ्य के लिए सौंफ के फायदे :-

1. एंटी ओक्सिडेंट :

अपने खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए तो सौंफ का इस्तेमाल सभी करते है लेकिन क्या आप जानते है की इसमें मौजूद एंटी ओक्सिडेंट हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होते है। ये एंटी ओक्सिडेंट फ्री रेडिकल्स से शरीर को होने वाले नुकसानों से भी बचाते है। जो की बहुत सी बिमारियों का कारण होते है। इसमें मौजूद kaempferol और quercetin नामक एंटी ओक्सिडेंट अपक्षयी प्रतिक्रियाओं (degenerative reactions) को ठीक करने में भी मदद करते है।

2. डाइटरी फाइबर :

सौंफ में डाइटरी फाइबर की अच्छी मात्रा पाई जाती है। जो हमारे शरीर के लिए काफी लाभकारी है। ये फाइबर शरीर में पाचन क्रिया को बढाकर हमारे द्वारा खाए गए खाद्य पदार्थों को जल्द पचाने में मदद करते है ताकि इंस्टेंट एनर्जी मिल सके।

3. कैंसर :

कैंसर और उससे संबंधित रोगों का सही समय पर इलाज किया जाना बेहद आवश्यक होता है। ताकि भविष्य में होने वाले दुष्परिणामों और उसके प्रभावों को रोका जा सके। और सौंफ में मौजूद सभी एंटी ओक्सिडेंट इस कार्य को पूर्ण करने में सक्षम है।

4. तंत्रिका संबंधी रोग :सौंफ खाने के लाभ

सौंफ का सेवन करने से फ्री रेडिकल्स की समस्या दूर रहती है। जिससे मस्तिष्क और तंत्रिका संबंधी बीमारियाँ भी दूर रहती है।

5. कोलेस्ट्रॉल :

शरीर में कोलेस्ट्रॉल की सही मात्रा पहुँचाना बेहद जरुरी है। इसके साथ है रक्त वाहिकाओं में भी कोलेस्ट्रॉल absorption काफी महत्वपूर्ण होता है। और सौंफ में मौजूद तत्व cholesterol के reabsorption को कम करते है। जिससे हृदय संबंधी बिमारियों को रोकने में भी मदद मिलती है।

6. तेलिय तत्व :

सौंफ में myrcene, fenchone, chavicol, cineole नामक  volatile oil compound पाए जाते है जो शरीर की पाचन, वातहर और एंटीऑक्सीडेंट प्रतिक्रिया में मदद करते है।

7. लाल रक्त कोशिकाओं :

सौंफ का सेवन करने से रक्त में लाल रक्त कोशिकाओं की खपत को बढ़ाया जा सकता है। और कॉपर जो की शरीर में इन कोशिकाओं के निर्माण के लिए जरूरी है सौंफ में उच्च मात्रा में पाया जाता है।

8. ग्रोथ और विकास :

शरीर की ग्रोथ और विकास के लिए जिंक उत्तरदायी होता है। और सौंफ के बीजों में ये बहुत अच्छी मात्रा में पाया जाता है। जो नियमित ग्रोथ और विकास को बढ़ाते है।

9. हृदय गति और ब्लड प्रेशर :

आजकल लोगों को बहुत से परेशानियों का सामना करना पड़ता है ऐसे में जरुरी है की अपनी हृदय गति और ब्लड प्रेशर को संतुलित रखा जाए। और सौंफ इस कार्य में मदद करती है। इसमें मौजूद पोटैशियम ब्लड प्रेस्सुर को नियंत्रित करके हृदय गति को भी नियंत्रित करता है।

10. नुट्रीएंट की मात्रा :

स्वास्थ्य के नज़रिए से सौंफ का रस पोषक तत्वों से बना पेय है। इसमें विटामिन ए, बी, सी, ई, और बीटा कैरोटीन पाया जाता है। इसके अलावा इसमें मैग्नीशियम, आयरन, कोबाल्ट, पोटेशियम, फास्फोरस, सोडियम, सिलिकॉन, और जिंक जैसे खनिज भी उच्च मात्रा में पाए जाते है। साथ ही इसमें carotenoids और flavonoids नामक एंटी oxidents की भी अच्छी मात्रा पाई जाती है। सौंफ में anethole पाया जाता है, एक तरह का phytonutrient जो इसे एक मजबूत सुगंध प्रदान करता है। एंटी oxidents की भरपूर मात्रा शरीर के फ्री रेडिकल्स को बेअसर करके कोशिकाओं को होने वाली हानि से बचाती है।

11. पाचन :

सौंफ का रस आंतों के लिए बेहद लाभकारी होता है। इसकी anti-spasmodic प्रकृति आंतों की ऐंठन, सूजन और पेट फूलना की समस्या को दूर करने में मदद करती है। सौंफ के रस में मौजूद एसेंशियल आयल, digestive juice के स्त्राव को प्रोत्साहित करके पेट की सुजन को कम करने में मदद करते है। ये हमारे द्वारा खाए जाने वाले खाने से नुट्रीएंट्स के absorption को भी बढ़ाता है। सौंफ के जूस का इस्तेमाल antacid के रूप में किया जाता है। जबकि इसमें मौजूद तत्व पाचन तंत्र को संतुलित करके मल त्याग को भी आसान करते है। इसके अलावा सौंफ पेट में मौजूद बुरे बैक्टीरिया को समाप्त करके अच्छे बैक्टीरिया के उत्पादन को बढ़ाती है।

12. एनीमिया :

सौंफ के रस में मौजूद आयरन और हिस्तामिन की उच्च मात्रा, एनीमिया की समस्या के लिए एक बेहतर प्राकृतिक उपचार है। सौंफ के रस का नियमित सेवन करने से शरीर में हिमोग्लोबिन का उत्पादन बढ़ता है जो एनीमिया को ठीक करता है। इसके साथ ही ये शरीर में ब्लड क्लॉट को बढ़ने से भी रोकता है।

13. आंखों के लिए :

सौंफ में बहुत से एसेंशियल नुट्रीएंट्स पाए आजाते है जो आंखों की रोशनी को बढ़ाने में मदद करते है। सौंफ के रस में मौजूद एंटी ओक्सिडेंट और एमिनो acid आंखों के लिए काफी फायदेमंद होते है। इस रस को आंखों पर लगाने से, उनमे होने वाली जलन और थकान को भी दूर किया जा सकता है। इस रस में पाया जाने वाला flavonoids oxidative stress, को दूर करने में मदद करता है।

14. Diuretic :

सौंफ के रस की Diuretic प्रकृति, शरीर में मौजूद सभी toxins को मूत्र के द्वारा बाहर निकालने में मदद करती है। इसके साथ ही ये जलन को भी कम करता है जो आमवात और सुजन को कम करता है। इसके अलावा ये गुर्दे की पथरी के निर्माण को भी रोकता है।

15. मीनोपॉज :सौंफ

सौंफ के रस में phyto-estrogen नामक केमिकल पाया जाता है जिसका स्ट्रक्चर बिलकुल estrogen हॉर्मोन की भांति होता है। इसलिए, मीनोपॉज और उससे संबंधित समस्यायों से पीढित महिलाओं के लिए ये काफी लाभकारी है। इसमें मौजूद फोलेट अजन्मे बच्चों में होने वाले birth defects को ठीक करता है। इसके अतिरिक्त ये menstruation से संबंधित समस्यायों को ठीक करने में भी लाभदायक है।

16. दिमागी स्वास्थ्य :

सौंफ का रस रक्त में endorphins के स्त्राव को बढ़ाता है जो डिप्रेशन और उससे संबंधित समस्यायों को दूर करने में मदद करता है। सौंफ के रस में मौजूद पोटैशियम मस्तिष्क के कार्यों को बेहतर करने में सहायता करता है और साथ ही दिमाग की cognitive एबिलिटी को भी बढ़ाता है।

17. Aperitif :

सौंफ का एसेंशियल आयल, एक बेहतर Aperitif है। यह भूख बढ़ाने में मदद करते है। तो अगर आपको लगता है की जरुरत होने पर भी आपको भूख नहीं लगती, तो सौंफ के एसेंशियल आयल का सेवन करना शुरू कर दें।

18. एंटी सेप्टिक :

सौंफ के एसेंशियल आयल में कई तरह के केमिकल पाए जाते है, जिनकी प्रकृति एंटी सेप्टिक और बैक्टीरियल है। सौंफ का तेल घावों को जल्द ठीक करने में भी मदद करता है। इसके साथ ही ये tetanus और अन्य post-surgical infection को ठीक करने की भी क्षमता रखता है।

19. एसिडिटी :

सौंफ शरीर को ठंडक और neutralizing बेनिफिट प्रदान करते है। तो, एसिडिटी की समस्या को दूर करने के लिए ये एक रामबाण है। ये आंतो को एक्टिव करके अवशोषण की प्रक्रिया को आसान बनाता है। जिससे सभी toxins और जरूरी खनिज अलग-अलग हो जाते है। बाद में ये अलग हुए toxins शरीर से बाहर निकल जाते है। जिससे pH लेवल सामान्य होकर एसिडिटी में राहत मिलती है।

20. इम्युनिटी बूस्ट करे :

विटामिन सी मानव के लिए एक प्राकृतिक इम्युनिटी बूस्टिंग विटामिन है। और सौंफ में विटामिन सी की अच्छी मात्रा पाई जाती है। इसका नियमित सेवन करने से इम्यून सिस्टम को मजबूत किया जा सकता है। ये आपके शरीर को छोटे-मोटे इन्फेक्शन से बचाता है। और बड़े इन्फेक्शन से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है।

21. श्वास संबंधी समस्याएं :

सौंफ, cineole नामक तत्व का अच्छा स्त्रोत्र है। जो की नसल ब्लोकेज को ठीक करने में मदद करता है। congestion, asthma और bronchitis से परेशान लोगो के लिए ये किसी रामबाण से कम नहीं है। जुखाम आदि की समस्या में भी इसका सेवन करने से लाभ मिलता है।

22. पीरियड्स में होने वाले दर्द :

सौंफ शरीर में होने वाले हार्मोनल परिवर्तन को नियंत्रित करता है। इसके analgesic फायदे महिलाओं में पीरियड्स में होने वाले दर्द को ठीक और नियंत्रित करने में मदद करते है।

तो अगली बार से खाने के बाद आइस क्रीम या कोई और मीठी चीज नहीं, बल्कि सौंफ का सेवन करें और अपने पाचन तंत्र को स्वस्थ रखें।

पेल्विक एरिया में दर्द से बचने के उपाय

पेल्विक एरिया पेट का निचला हिस्सा होता है जिसे पेडू भी कहा जाता है। प्रेगनेंसी के दौरान अधिकतर महिलाएं इस दर्द से परेशान हो सकती है। क्योंकि गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण पेट के निचले हिस्से की मांसपेशियों में खिंचाव का अनुभव हो सकता है। इसके आलावा और भी कई कारण हो सकते हैं जिसके कारण गर्भवती महिला को पेल्विक एरिया में दर्द हो सकता है। पेल्विक एरिया में थोड़े बहुत दर्द का अनुभव होना आम बात होती है। लेकिन यदि दर्द बढ़ जाए तो इसे अनदेखा न करते हुए जल्दी से जल्दी डॉक्टर से राय लेनी चाहिए। तो आइये आज इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में पेल्विक एरिया में दर्द के क्या कारण हो सकते हैं। और इस दर्द से बचने के लिए प्रेग्नेंट महिला क्या कर सकती है।

पेल्विक एरिया में दर्द होने के कारण

  • गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण।
  • पेट के निचले हिस्से की मांसपेशियों में खिंचाव होने के कारण।
  • शिशु का गर्भ में वजन बढ़ने के कारण पेट के निचले हिस्से पर जोर पड़ने के कारण दर्द का अनुभव हो सकता है।
  • यदि प्रेग्नेंट महिला को यूरिन इन्फेक्शन या प्राइवेट पार्ट में किसी तरह का इन्फेक्शन है तो भी पेल्विक एरिया में दर्द महसूस हो सकता है।
  • प्रेग्नेंट महिला के अंडाशय में गाँठ होने के कारण भी पेल्विक एरिया में दर्द का अनुभव ज्यादा हो सकता है।
  • गर्भवती महिला को कब्ज़, दस्त जैसी परेशानी के अधिक होने पर भी पेल्विक एरिया में प्रेग्नेंट महिला को दर्द अनुभव हो सकता है।
  • जिन महिलाओं को एक्टोपिक प्रेगनेंसी होती है उन्हें भी इस दर्द का अनुभव हो सकता है।
  • समय पूर्व प्रसव होने का एक लक्षण पेट के निचले हिस्से में दर्द का अधिक महसूस होना हो सकता है।
  • प्रेगनेंसी के शुरूआती समय में पेट के निचले हिस्से में तेजी से दर्द का होना गर्भपात का संकेत हो सकता है।

पेल्विक एरिया में दर्द से बचने के टिप्स

यदि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान पेट के निचले हिस्से में दर्द होने के कारण परेशान रहती है। तो कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल करके प्रेग्नेंट महिला इस समस्या से निजात पा सकती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में पेल्विक एरिया के दर्द से निजात पाने के लिए प्रेग्नेंट महिला क्या कर सकती है।

मैटरनिटी बेल्ट

  • प्रेगनेंसी के दौरान पेट के निचले हिस्से के दर्द से आराम के लिए मैटरनिटी बेल्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • क्योंकि यह बेल्ट पेट व् रीढ़ की हड्डी को स्पोर्ट करती है।
  • जिससे पेट का भार को नीचे की तरफ ज्यादा महसूस नहीं होता है।
  • और पेट के निचले हिस्से में दर्द से राहत पाने में मदद मिलती है।

फाइबर युक्त आहार

  • गर्भावस्था के दौरान कब्ज़ की समस्या होने के कारण भी पेट के निचले हिस्से में दर्द महसूस हो सकता है।
  • ऐसे में कब्ज़ की समस्या से निजात के लिए प्रेग्नेंट महिला को अपनी डाइट में फाइबर युक्त आहार को शामिल करना चाहिए।
  • जिससे कब्ज़ की समस्या से बचे रहने में मदद मिलने के साथ पेल्विक एरिया के दर्द से आराम पाने में मदद मिल सके।
  • साथ ही प्रेग्नेंट महिला को फाइबर युक्त आहार का जरुरत से ज्यादा सेवन भी नहीं करना चाहिए क्योंकि दस्त के कारण भी पेल्विक एरिया में दर्द की समस्या हो सकती है।

डॉक्टर से मिलें

  • यदि पेट के निचले हिस्से में प्रेग्नेंट महिला को बहुत अधिक दर्द रहता है तो इसे अनदेखा न करते हुए डॉक्टर से मिलें।
  • ताकि डॉक्टर आपकी जांच कर सकें और पेल्विक एरिया में होने वाले दर्द का कारण पता करके उसका इलाज कर सके।
  • जिससे प्रेगनेंसी में आने वाली हर परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका इस्तेमाल प्रेगनेंसी के दौरान करने से गर्भवती महिला को पेडू यानी पेल्विक एरिया के दर्द से निजात पाने में मदद मिलती है। तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और पेडू के दर्द से परेशान हैं तो आप भी इन टिप्स का इस्तेमाल कर सकती है।

ऐसे बताएं अपनी प्रेगनेंसी लोगो को

माँ बनने की खबर ही आपके और आपके परिवार के लिए साथ ही आपके करीबी लोगो के लिए बहुत ही ख़ुशी का पल होता है। और जैसे ही आप अपनी प्रेगनेंसी के बारे में सबको बताती है तो आप खुद देखिएगा की सभी के लिए आप सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है। साथ ही जितना बेसब्री से आपको इंतज़ार होता है आपके घर में आने वाले नन्हे मेहमान का उतना ही ज्यादा बेसब्री से आपसे जुड़े लोग भी बच्चे का बेसब्री से इंतज़ार करते हैं। की कब उनके घर नन्हा मेहमान आएगा और उनके घर में खुशियां लाएगा। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको अपनी प्रेगनेंसी को लोगो को कैसे बताएं? कब बताएं? इस बारे में बताने जा रहे हैं।

अपनी प्रेगनेंसी के बारे में कब बताएं?

ऐसा नहीं है की पीरियड्स मिस होने के बाद आप घर में प्रेगनेंसी टेस्ट करें और रिपोर्ट के पॉजिटिव आने पर आप सबको बताना शुरू कर दें। की आप प्रेग्नेंट हैं, बल्कि आपको कम से कम तीन महीने तक लोगो से अपनी प्रेगनेंसी के बारे में शेयर नहीं करना चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने बहुत ही नाजुक होते हैं ऐसे में आपको तीन महीने तक किसी से शेयर नहीं करना चाहिए।

लेकिन हाँ, प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद आप अपने पार्टनर, अपने घर के सदस्यों के साथ इस न्यूज़ को शेयर कर सकती है। क्योंकि आपकी आने वाली ख़ुशी के हक़ पर आपके पार्टनर का भी तो हिस्सा होता है। लेकिन बाहर के लोगो को अपने करीबियों को भी आपको कम से कम तीन महीने बाद अपनी प्रेगनेंसी के बारे में शेयर करना चाहिए।

प्रेगनेंसी न्यूज़ शेयर करने के टिप्स

यदि आप अपनी प्रेगनेंसी न्यूज़ को अपने करीबियों से शेयर करना चाहती है। तो कुछ आसान तरीको का इस्तेमाल करके आप इस न्यूज़ को शेयर कर सकती है आइये जानते हैं की वो टिप्स कौन से हैं।

घर में लाये छोटे बच्चों खिलौने और फोटो

यदि आपको समझ नहीं आ रहा है की आप घर के सदस्यों को कैसे बताएं की आप माँ बनने वाली हैं। तो इसके लिए आप अपने कमरे में छोटे बच्चे की फोटो लगाएं और बच्चों के खिलौने लाएं। ऐसा करने से आपको किसी को बताने की जरुरत नहीं पड़ेगी। बल्कि आपके घर वाले इन सभी को देखकर अपने आप समझ जाएंगे। और फिर उन्हें इस बात की कितनी ख़ुशी है वो भी उनके चेहरे पर आपको दिख जाएगी।

इंटरनेट का करें इस्तेमाल

आज कल आप सोशल मीडिया पर देखते हैं की सेलेब्रिटीज़ किस तरह से अपनी प्रेगनेंसी को शेयर करते हैं। तो आप भी वैसे ही कुछ फोटोज का इस्तेमाल कर सकती है। जैसे की आप दो बड़ी टी शर्ट्स के साथ एक छोटी टी शर्ट दिखा सकते हैं और उसके नीचे कुछ लिख सकती है, यदि आपका कोई बच्चा है तो उसकी फोटो लगाकर लिख सकती है की अब वो बड़ा भाई या बहन बनने वाला या वाली है, इसके अलावा और भी बेहतरीन टिप्स आप इंटरनेट से ढूंढ सकती हैं। और आप अपनी प्रेगनेंसी को अपने करीबियों के साथ शेयर कर सकते हैं।

अपना स्टेटस बदलें

आप अपने सोशल मीडिया पर अपने स्टेटस को बदल सकते हैं जैसे की बच्चे की फोटो लगा सकते हैं। या फिर लिख सकते हैं की आप जल्द ही नन्हे मेहमान का घर में स्वागत करने वाली हैं। इसके अलावा आप अपने बचपन की फोटो को भी शेयर कर सकती है की अब आपकी कॉपी आने वाली है या वाला है।

फोटो शूट

आजकल प्रेगनेंसी फोटोशूट का ट्रेंड बहुत ज्यादा चल रहा है। तो आप भी प्रेगनेंसी फोटोशूट करवाकर अपनी प्रेगनेंसी को सभी के साथ शेयर कर सकती है। इसमें आपको कोई आईडिया देने की जरुरत नहीं होती है बल्कि फोटोशूट करने वाले ही आपको अलग अलग तरीके बता देते हैं।

फ़ोन करें या घर पर बुलाएँ

यदि आपको ऐसा लगता है की कोई आपके बहुत करीब है जिसे आपको खुद बताना चाहिए की आप प्रेग्नेंट हैं। तो आप उन्हें फ़ोन करें या उन्हें घर पर बुलाएं। और अपनी इस खुशखबरी को उनके साथ शेयर करें।

तो यह हैं प्रेगनेंसी न्यूज़ को कब और कैसे शेयर करें उससे जुड़े कुछ टिप्स। इसके अलावा यदि आप किसी से शेयर नहीं करना चाहते हैं। तो न करें क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान जब आपका पेट बाहर आएगा। तो आपके बिना ही सभी को पता चल जायेगा।

डिलीवरी के बाद भी पेट दर्द रहें तो यह करें

प्रेगनेंसी में अधिकतर महिलाएं यह सोचती है की प्रेगनेंसी खत्म होते ही महिला को इन सभी परेशानियों से निजात मिल जाएगा। जबकि ऐसा नहीं होता है, बल्कि डिलीवरी के बाद भी महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। जैसे की डिलीवरी के बाद शरीर में कमजोरी, बॉडी पेन, थकान, उल्टी, पेट में दर्द जैसी परेशानियां महिला को होती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको डिलीवरी के बाद महिला को होने वाले पेट में दर्द के कारण व् उपचार बताने जा रहे हैं।

डिलीवरी के बाद पेट में दर्द होने के कारण

  • शिशु के जन्म के बाद से ही महिला को लगातार ब्लीडिंग होनी शुरू हो जाती है ऐसे में ब्लीडिंग के साथ महिला को पेट में दर्द का अनुभव भी हो सकता है।
  • शिशु के जन्म के बाद गर्भाशय खाली हो जाता है और धीरे धीरे वापिस शेप में आने लगता है जिसकी वजह से भी महिला को पेट में दर्द की समस्या हो सकती है।
  • कुछ महिलाओं को डिलीवरी के बाद कब्ज़, पेट में गैस जैसी परेशानी होने के कारण भी ऐसा होता है।
  • सिजेरियन डिलीवरी वाली महिलाओं को घाव के कारण भी दर्द का अहसास होता है।
  • यदि महिला यूरिन को रोककर रखती है तो भी महिला को पेट में दर्द दिक्कत होती है।

डिलीवरी के बाद पेट में दर्द से बचने के कुछ आसान टिप्स

बच्चे के जन्म के बाद यदि महिला को पेट दर्द की परेशानी होती है तो कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल करके महिला इस परेशानी से राहत पा सकती है। जैसे की:

गुनगुने पानी से नहाना

डिलीवरी के बाद महिला यदि गुनगुने पानी से नहाती है तो इससे महिला के पुरे शरीर की सिकाई हो जाती है। जिससे डिलीवरी के बाद महिला को बॉडी पेन के साथ पेट में दर्द से भी निजात पाने में मदद मिलती है। यदि आप चाहे तो हीटिंग पैड का इस्तेमाल करके केवल पेट की सिकाई भी कर सकती है।

हल्दी वाला दूध

हल्दी वाला दूध एक एंटीबायोटिक दवाई की तरह काम करता है जो संक्रमण से बचाव करने के साथ बॉडी में होने वाले दर्द से बचाव करने में भी मदद करता है। ऐसे में यदि डिलीवरी के बाद महिला के पेट में दर्द हो रहा है तो महिला हल्दी वाले दूध का सेवन कर सकती है।

सौंफ का पानी

पानी में थोड़े से सौंफ उबालकर उस पानी को छान लें अब उसमे थोड़ा शहद मिलाकर चाय की तरह पीएं। ऐसा दिन में कम से कम दो बार करें, ऐसा करने से भी पेट दर्द से आराम पाने में मदद मिलती है।

अजवाइन

अजवाइन में थोड़ा नमक डालकर गुनगुने पानी के साथ पीने से एसिडिटी, कब्ज़, जैसी परेशानी को दूर करने के साथ पेट में दर्द से आराम पाने में भी मदद मिलती है।

निम्बू पानी

डिलीवरी के बाद पेट में दर्द की समस्या होने पर महिला को एक गिलास गुनगुने पानी में निम्बू का रस मिलाकर पीने से भी पेट में दर्द से निजात पाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिन्हे ट्राई करने से डिलीवरी के बाद महिला को पेट में दर्द की परेशानी से निजात मिलता है। लेकिन महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की यदि महिला को बहुत ज्यादा पेट में दर्द हो रहा हो तो एक बार डॉक्टर को जरूर दिखाएं। ताकि आपको ज्यादा परेशानी न हो।

ब्रेस्ट बढ़ाने के घरेलू उपाय, Increase your breast size naturally

हर महिला खुद को आकर्षक और अट्रैक्टिव दिखाना चाहती है जिसमे उनके शरीर के सभी हिस्से अपनी अपनी भूमिका निभाते है। लेकिन पर्सनालिटी को आकर्षक दिखाने में सबसे बड़ा योगदान महिला के स्तनों यानी ब्रैस्ट का होता है। क्योंकि ये ही आपकी पर्सनालिटी को निखारने में मदद करते है। जिन महिलाओं के स्तन काफी छोटे होते है या लटके हुए होते है उनका लुक इतना आकर्षक नहीं लगता जिसके कारण कर बार उन्हें शर्मिंदगी का भी सामना करना पड़ सकता है।

इसका एक कारण ये भी होता की जिन महिलाएं के स्तनों का आकार छोटा होता है वे कुछ भी पहन लें उनपर कुछ भी उभरकर दिखाई नहीं पड़ता। महिलाओं की पर्सनालिटी में उनके स्तनों के साइज का बहुत महत्वपूर्ण भाग होता है इसीलिए हर महिला अपनी पर्सनालिटी के हिसाब से स्तनों को बड़ा करना पसंद करती है। ताकि उनकी खूबसूरती निखर कर आये।

ऐसे में बाजार में ढेरों क्रीम्स और दवाएं मौजूद है जो ब्रैस्ट को कुछ ही दिनों में बड़ा करने का दावा करती है लेकिन क्या आप जानती है उनमे प्रयोग होने वाले केमिकल्स आपकी स्किन और स्वास्थ्य के लिए कितने हानिकारक होते है। ऐसे में इनका इस्तेमाल करना ठीक नहीं। लेकिन करें तो क्या? क्योंकि ये एक ऐसी समस्या है जो 10 में से 5 महिलाओं को अवश्य होती है।

इसलिए आज हम आपको स्तन बढ़ाने के कुछ आसान और घरेलु उपाय बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप बिना किसी नुकसान के घर बैठे अपने स्तनों के आकार को बढ़ा सकेंगी। तो आइये जानते है क्या है वे घरेलू उपाय।

ब्रैस्ट साइज बढ़ाने के घरेलू तरीके :-milk 1

1. दूध के साथ पपीते का सेवन करने से स्तनों के आकार में वृद्धि होती है। लेकिन इस उपाय को करने से पूर्व इस बात को ध्यान में रखें की इसके बाद आपको दस्त लगने की समस्या हो सकती है। एक और बात प्रेग्नेंट महिला को इस उपाय का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

2. सौंफ का सेवन करने से भी ब्रैस्ट के साइज को बढ़ाया जा सकता है। उपाय के लिए रोजाना सौंफ को चबा चबा कर खयने या इसका पाउडर बनाकर उसका भोजन में इस्तेमाल करें। फर्क आपके सामने होगा।

3. ब्रेस्ट को आकार को बढ़ाने में अलसी के बीज भी बहुत मददगार होते है। अलसी के बीजों को चबाकर खाने से छोटी ब्रैस्ट को बड़ा किया जा सकता है। आप चाहे तो इसे अपने सलाद में सम्मिलित कर सकते है। लेकिन हां, एक बात का ध्यान रखें प्रेग्नेंसी के समय इनका सेवन नहीं करें।

4. सोया प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करके भी आप अपनी इस मुसीबत से छुटकारा पा सकती है। क्योंकि सोया मिल्क और सोया बीन्स शरीर में एस्ट्रोजन के निर्माण को बढ़ाती है जो ब्रैस्ट को बढ़ाने का काम करते है। सोयाबीन और सोया मिल्क को ब्रैस्ट कैंसर से जोड़कर भी देखा जाता है। लेकिन, इसके अधिक सेवन से बचना चाहिए। और इस्तेमाल करने से पूर्व एक बार डॉक्टरी सलाह अवश्य लेनी चाहिए।milk

5. दूध और उससे बने खाद्य पदार्थों में फैट अधिक मात्रा में पाया जाता है। और इनके सेवन से ब्रैस्ट में फैट बढ़ता है। इसके अतिरिक्त अपने खाद्य पदार्थों में ऐसी चीजों को शामिल करें जिनमे वसा की मात्रा अधिक हो। इससे आपके शरीर का वजन भी बढ़ सकता है तो साथ में एक्सरसाइज करा न भूलें।

6. मेथी के बीज भी ब्रैस्ट बढ़ाने में आपकी मदद कर सकते है। इसके लिए मेथी के बीजों का सेवन करें। आप चाहे तो इसके बीजों का पेस्ट बनाकर उनसे ब्रैस्ट पर मसाज कर सकती है। गर्भवती महिलाओं को इस उपाय का भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

7. मेथी के बीजों के तेल से स्तनों की मालिश करने से भी स्तनों के आकार में वृद्धि होती है।

स्तनों का आकार बढ़ाने के लिए मालिश :-breast-msaj

1. जिन लड़कियों या महिलाओं के स्तन छोटे है और वे उन्हें बड़ा, सुन्दर और सुडौल बनाना चाहती है तो प्रतिदिन 20 से 30 मिनट की ब्रैस्ट मसाज करनी चाहिए। ब्रैस्ट को बिना हानिकारक परिणाम के बड़ा करने के लिये यह सबसे असरदार उपाय है।

2. मालिश करने के 1 महीने के बाद ही आपको फर्क नजर आएगा। बता दें, मसाज करने से ब्रैस्ट में रक्त का प्रवाह तेज होता है जिससे होर्मोनस और मासपेशियों का विकास होता है।

3. मसाज के लिए आप अलसी, सरसों या जैतून के तेल का इस्तेमाल कर सकती है। वैसे आप चाहे तो इसके लिए क्रीम का प्रयोग भी कर सकती है। लेकिन ध्यान रखें आयल की मसाज हलके हाथों से ही करें।

ब्रैस्ट को बड़ा दिखाने की टिप्स :loose-breast-121

# आजकल बाजार में ब्रैस्ट को बड़ा दिखाने वाली ब्रा भी मिलने लगी है। जिनकी मदद से आप अपने छोटे स्तनों को बड़ी आसानी से बड़ा दिखा सकती है। इन ब्रा को पुश-अप और पैडेड ब्रा कहते है।

# रंग बिरंगे और डिजाइनर प्रिंट वाले टॉप आपके छोटे स्तनों को छिपाने में मदद कर सकते है।

# छाती को उभरा हुआ दिखाने के लिए आप मेकअप की मदद भी ले सकती है। इसके लिए ब्यूटी एक्सपर्ट्स से मिलकर सलाह लें।

# आजकल बाजर में ब्रैस्ट का आकार बढ़ाने के लिए बहुत सी दवाएं मिलने लगी है जिन्हे महिलाएं लेती भी है लेकिन यह तरीका सुरक्षित नहीं है और इतना असरदार भी नहीं है। कुछ टेबलेट्स तो आपके शरीर को भी नुकसान पंहुचा सकती है। ऐसे में घरेलू उपाय ही परफेक्ट और कारगर उपाय है।

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प्रेगनेंसी में करौंदा खाने के फायदे

करौंदा एक फल होता है जो हल्के गुलाबी और सफ़ेद रंग का होता है। जिसका कई तरह से खाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता हैं। जैसे की इसकी सब्ज़ी बनाकर खाई जा सकती हैं, इसकी चटनी खाई जा सकती है या इसे अन्य फलों के साथ मिलाकर जूस के रूप में भी डाइट में शामिल किया जा सकता है। करौंदे में कैल्शियम, विटामिन्स व् एंटी ऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते है। जो की प्रेगनेंसी के दौरान बहुत फायदेमंद होते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में करौंदा का सेवन करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

फाइबर

करौंदा में फाइबर प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है जो गर्भवती महिला को पेट सम्बन्धी परेशानियों से बचाव करने में मदद करता है। साथ ही इससे पाचन तंत्र को मजबूत करने में मदद मिलता है। इसका सेवन करने से महिला को पेट दर्द, कब्ज़, पेट में गैस,अपच, पेट फूलना जैसी परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

विटामिन सी

विटामिन सी जैसे एंटी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर करौंदा का सेवन करने से गर्भवती महिला की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ने में मदद मिलती है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान बुखार व् अन्य सभी तरह के संक्रमण से गर्भवती महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

यूरिन इन्फेक्शन

अधिकतर गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान यूरिन इन्फेक्शन की समस्या से परेशान हो सकती है। ऐसे में यदि महिला करौंदा का सेवन करती है तो इससे महिला को यूरिन इन्फेक्शन जैसी परेशानियों से बचाने में मदद मिलती है।

तनाव होता है दूर

विटमिन, मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर करौंदा गर्भवती महिला के मस्तिष्क को शांत रखने में भी मदद करता है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को तनाव जैसी परेशानी से बचाव करने में मदद मिलती है।

हदय स्वस्थ रहता है

प्रेग्नेंट महिला यदि करौंदा का सेवन करती है तो इससे हदय की मांसपेशियों को स्वस्थ रहने, कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल करने, ब्लड प्रैशर को नियंत्रित रखने और शरीर के सभी अंगो में ब्लड फ्लो को बेहतर करने में मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला स्वस्थ रहती है।

सूजन कम करता है

करौंदा में मौजूद औषधीय गुण प्रेग्नेंट महिला को सूजन की समस्या से बचाव करने में भी मदद करते हैं। सूजन की समस्या से बचे रहने के लिए गर्भवती महिला को हफ्ते में दो से तीन बार करौंदा का सेवन जरूर करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ बेहतरीन फायदे जो करौंदा का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को मिलते हैं। ऐसे में इन बेहतरीन फायदों के लिए प्रेग्नेंट महिला को करौंदा का सेवन जरूर करना चाहिए। लेकिन ध्यान रखें की करौंदा के फायदे के लिए सिमित मात्रा में ही इसका सेवन करना चाहिए क्योंकि जरुरत से ज्यादा किसी भी चीज का सेवन आपका नुकसान पहुंचा सकता है।

प्रेगनेंसी में ब्रोकली खाने के फायदे

प्रेगनेंसी के दौरान हरी सब्जियों का सेवन भरपूर मात्रा में करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि हरी सब्जियों में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में शामिल होते हैं। जैसे की फाइबर, आयरन, फोलिक एसिड, मैग्नीशियम, पोटैशियम, ओमेगा 3 फैटी एसिड, आदि। और इन सभी पोषक तत्वों की जरुरत प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को होती है। ताकि प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने व् शिशु का बेहतर विकास करने में मदद मिल सके। और आज हम इस आर्टिकल में ब्रोकली जो की एक हरी सब्ज़ी है उसके बारे में बात करने जा रहे हैं। जिसमे पोषक तत्व तो भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं साथ ही यह गर्भवती महिला व् शिशु के लिए भी फायदेमंद होती है।

प्रेगनेंसी में ब्रोकली खाने के फायदे

यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो आप चाहे तो ब्रोकली का सेवन अपने आहार में कर सकती है। क्योंकि इसका सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला व् शिशु को बहुत फायदा मिलता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में ब्रोकली खाने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

प्रेगनेंसी में ब्रोकली खाने से मिलता है आयरन

  • ब्रोकली में आयरन व् फोलिक एसिड भरपूर मात्रा में मौजूद होता है।
  • जो प्रेग्नेंट महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद करता हैं।
  • जिससे प्रेग्नेंट महिला को खून की कमी के कारण होने वाली दिक्कतों से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • साथ ही इससे गर्भ में पल रहे शिशु को भी भरपूर आयरन व फोलिक एसिड मिलता है जिससे शिशु के बेहतर शारीरिक विकास में मदद मिलती है।

फाइबर

  • गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण पाचन क्रिया प्रभावित हो सकती है।
  • जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला को कब्ज़, एसिडिटी जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
  • लेकिन ब्रोकली का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला इन सभी परेशानियों से निजात मिल सकता है।
  • क्योंकि ब्रोकली में घुलनशील व अघुलनशील फाइबर मौजूद होते हैं।
  • जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने व बेहतर तरीके से काम करने में मदद करते हैं।

प्रेगनेंसी में ब्रोकली खाने से मिलता है कैल्शियम

  • प्रेग्नेंट महिला की हड्डियों की मजबूती व भ्रूण की हड्डियों के बेहतर विकास के लिए गर्भवती महिला को कैल्शियम युक्त आहार का भरपूर सेवन करना चाहिए।
  • और ब्रोकली में कैल्शियम के साथ जिंक और मैग्नीशियम भी मौजूद होता है।
  • ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला ब्रोकली का सेवन करती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला की हड्डियों को मजबूती मिलने के साथ भ्रूण की हड्डियों के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

बीटा कैरोटीन

  • ब्रोकली में बीटा कैरोटीन और सेलेनियम की मात्रा मौजूद होती है।
  • जो प्रेग्नेंट महिला की इम्युनिटी को मजबूत करने में मदद करती है।
  • जिससे गर्भवती महिला व शिशु को प्रेगनेंसी के दौरान हर तरह के संक्रमण से बचे रहने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में ब्रोकली खाने से मिलता है विटामिन ए

  • ब्रोकली में विटामिन ए की मात्रा भी मौजूद होती है और विटामिन ए आँखों के लिए बहुत अच्छा होता है।
  • ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला ब्रोकली का सेवन करती है तो ऐसा करने से गर्भवती महिला की आँखों की रौशनी को बढ़ाने के साथ भ्रूण की आँखों के विकास को बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है।

ब्लड प्रैशर

  • ब्रोकली में फाइबर, मैग्नीशियम, कैल्शियम, पोटेशियम ओमेगा-3 फैटी एसिड आदि पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मिलते हैं।
  • और यह पोषक तत्व ब्लड में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखने के साथ रक्त वाहिकाओं में खून के संचार को सुचारू रूप से करके रक्तचाप को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं।
  • जिससे प्रेग्नेंट महिला को ब्लड प्रैशर के अनियंत्रित होने की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

डिटोक्सीफिकेशन

  • ब्रोकली में डिटोक्सीफिकेशन गुण मौजूद होता है।
  • ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला ब्रोकली का सेवन करती है तो इससे बॉडी में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है।
  • जिससे प्रेगनेंसी के दौरान प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में ब्रोकली खाने से मिलता है गेस्टेशनल डाइबिटीज़ से निजात

  • गर्भवस्था के दौरान प्रेग्नेंट महिलाओं को गेस्टेशनल डाइबिटीज़ की समस्या होने का खतरा रहता है।
  • और इसका कारण बॉडी में पर्याप्त मात्रा में इन्सुलिन का पर्याप्त मात्रा में न बनना हो सकता है।
  • इन्सुलिन की कमी के कारण बॉडी में मौजूद शुगर ऊर्जा में नहीं बदल पाती है।
  • जिसके कारण ब्लड में शुगर लेवल बढ़ने के कारण गेस्टेशनल डाइबिटीज़ होने के खतरा रहता है।
  • लेकिन ब्रोकली में मौजूद गुण ब्लड में शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं जिससे प्रेग्नेंट महिला को गेस्टेशनल डाइबिटीज़ के खतरे से बचे रहने में मदद मिलती है।

स्किन के लिए है फायदेमंद

  • प्रेगनेंसी के दौरान स्किन की ख़ूबसूरती को बरकरार रखने के लिए भी ब्रोकली का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।
  • क्योंकि ब्रोकली में मौजूद विटामिन ए, विटामिन बी, विटामिन ई, विटामिन के स्किन के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं।

तो यह हैं कुछ फायदे जो गर्भवती महिला को ब्रोकली का सेवन करने से मिलते हैं। तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आप भी अपने आहार में ब्रोकली को जरूर शामिल करें। ताकि इसके भरपूर फायदे आपको भी मिल सके जिससे प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करके महिला व् शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।