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पुराने जमाने में लोग कैसे बताते थे की गर्भ में लड़का है या लड़की

पुराने समय में जब भी कोई महिला गर्भधारण करती थी तो घर की बुजुर्ग महिलाएं गर्भवती महिला के लक्षणों को देखकर बता देती थी की गर्भ में लड़का है या लड़की। और यह किसी एक लक्षण से नहीं बल्कि ऐसे बहुत से लक्षण होते थे जिन्हे देखकर पुराने जमाने में इस बात का अंदाजा लगाया जाता था। हर महिला एक अलग लक्षण से इस बात का अंदाजा लगाती थी। और कुछ महिलाएं तो आज भी गर्भवती महिला के शरीर में महसूस होने वाले लक्षणों को देखकर इस बात का अंदाजा लगाती है। तो आइये अब जानते हैं की पुराने जमाने में लोग कैसे बताते थे की गर्भ में लड़का है या लड़की:-

मीठा या नमकीन खाना: यदि गर्भवती महिला की मीठा खाने की इच्छा होती है तो गर्भ में लड़की है और यदि गर्भवती महिला का नमकीन खाने का मन है तो गर्भ में बेटा है।

पिता का वजन: होने वाले बच्चे के पिता का वजन यदि बढ़ने लग जाता है तो यह गर्भ में बेटी होने का लक्षण होता है।

नाक का आकार: गर्भवती महिला की नाक का आकार यदि प्रेगनेंसी के दौरान बढ़ा हुआ महसूस होता है तो यह पेट में बेटा होने की और संकेत करता है।

ब्रेस्ट का आकार: प्रेग्नेंट महिला का दायां ब्रेस्ट यदि बाएं से बड़ा होता है तो इसका मतलब होता है की पेट में बेटा है जबकि यदि बाएं ब्रेस्ट का आकार दाएं ब्रेस्ट से बड़ा होता है तो यह पेट में बेटी होने का लक्षण होता है।

पेट का आकार: गर्भवती महिला के पेट का आकार यदि गोल व् आगे की तरफ कम निकला हुआ होता है तो इसका मतलब होता है की गर्भ में बेटा है। जबकि महिला का पेट बड़ा व् आगे की तरफ ज्यादा निकला हुआ होता है तो गर्भ में लड़की होती है।

बच्चे का लात मारना: पेट में पल रहा बच्चा यदि पेट के निचले हिस्से की तरफ अधिक लात मारता है तो इसका मतलब होता है की गर्भ में बेटा है। जबकि गर्भ में बच्चा यदि पसली पर अधिक लात मारता है तो पेट में बेटी है।

बच्चे का भार: सीधे हाथ की तरफ यदि गर्भवती महिला को शिशु का भार अधिक महसूस करती है तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है। जबकि यदि गर्भ में बच्चे का भार उल्टे हाथ की तरफ अधिक होता है तो यह गर्भ में बेटी होने का लक्षण होता है।

भूख: यदि प्रेग्नेंट महिला की भूख में बढ़ोतरी होती है तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है। जबकि यदि महिला को ज्यादा भूख न लगे तो यह गर्भ में बेटी होने का लक्षण होता है।

पैरों के पंजे का ठंडा होना: यदि गर्भवती महिला के पैरों के तलवें ठन्डे रहते हैं। तो पुराने जमाने में ऐसा कहा जाता था की यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण है।

व्यवहार में बदलाव: प्रेग्नेंट महिला के व्यवहार में यदि कोई बदलाव नहीं आता है वो वैसे ही रहती है जैसे की पहले रहती थी तो यह गर्भ में लड़का होने का लक्षण होता है। जबकि यदि महिला के व्यव्हार में बदलाव आता है तो यह गर्भ में बेटी होने का लक्षण होता है।

थकावट का अहसास: माँ बनने वाली महिला यदि प्रेगनेंसी के दौरान एक्टिव रहती है, थकान आदि का अहसास महिला को कम होता है तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है। जबकि गर्भ में बेटी होने पर महिला बहुत जल्दी थक जाती है और थकावट आदि की समस्या से ज्यादा परेशान रहती है।

यूरिन का रंग: गर्भवती महिला के यूरिन का रंग यदि बहुत ज्यादा पीला होता है तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है।

स्किन में बदलाव: यदि प्रेग्नेंट महिला को मुहांसे, दाने, दाग धब्बे आदि की समस्या प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादा होती है तो यह गर्भ में लड़का होने की तरफ इशारा करता है।

बालों का बढ़ना: गर्भावस्था के दौरान यदि महिला की स्किन पर होने वाले बाल बहुत तेजी से बढ़ते हैं तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है। जबकि बाल यदि सामान्य गति से बढ़ते हैं तो यह गर्भ में लड़की होने का लक्षण होता है।

सोने की पोजीशन: प्रेगनेंसी में वजन बढ़ने के कारण गर्भवती महिला को सोने में बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला बाईं और करवट लेकर आसानी से सो जाती है। महिला को कोई कोई दिक्कत नहीं होती है तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है।

वजन: प्रेग्नेंट महिला का वजन यदि पूरी बॉडी की बजाय पेट की तरफ से ज्यादा बढ़ता है तो यह गर्भ में बेटा होने का संकेत होता है। जबकि यदि महिला की पूरी बॉडी का वजन सभी जगह से बढ़ता है तो यह गर्भ में बेटी होने का लक्षण होता है।

त्वचा का रूखापन व् फटना: प्रेग्नेंट महिला की स्किन यदि बहुत ज्यादा रूखी व् फटने लगती है तो यह भी एक लक्षण होता है जो यह बताता है की गर्भ में पल रहा शिशु बेटा है।

तो यह हैं कुछ लक्षण जिन्हे देखकर इस बात का अंदाजा लगाया जाता था की गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है या लड़की। लेकिन यह पूरी तरह से सच हो ऐसा कोई जरुरी नहीं होता है। और कई बार ऐसा भी होता है की यह अंदाजा बिल्कुल सही भी होता है।

प्रेगनेंसी में यह 5 लक्षण दिखाई दें तो समझ जाइये की महिला और शिशु स्वस्थ हैं

प्रेगनेंसी एक ऐसा समय होता है जहां महिला अपनी छोटी छोटी आदतों, मूवमेंट, काम का अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है। क्योंकि इस दौरान बरती गई थोड़ी सी लापरवाही गर्भवती महिला के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। और गर्भ में पल रहा शिशु भी महिला पर निर्भर करता है ऐसे में महिला द्वारा की गई लापरवाही से शिशु पर भी उसका असर पड़ सकता है। ऐसे में आप ऐसा कह सकते हैं की प्रेगनेंसी महिला के लिए बहुत ही ख़ुशी भरा पल होने के साथ कठिन समय भी होता है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव व् परेशानियों से अपने आप को स्वस्थ रखने के साथ महिला को शिशु के विकास का भी अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है। और हर गर्भवती महिला यही चाहती है की प्रेगनेंसी के दौरान ऐसी कोई भी लापरवाही महिला न करे जिससे महिला या शिशु को कोई दिक्कत हो।

प्रेग्नेंट महिला व् शिशु के स्वस्थ होने के लक्षण

जरुरी नहीं है, की हर गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान एक जैसी परेशानी हो या किसी भी तरह की परेशानी हो। बल्कि यह हर गर्भवती महिला के बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव पर निर्भर करता है। जैसे की कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने परेशान रहती है तो कुछ पूरे नौ महीने तक किसी न किसी दिक्कत का सामना करती रहती है। साथ ही कुछ महिलाएं ऐसी भी होती है जिन्हे किसी भी तरह की दिक्कत से अधिक परेशान नहीं होना पड़ता है। तो लीजिये आज हम आपको ऐसे पांच लक्षणों के बारे में बताने जा रहे हैं जो यदि गर्भवती महिला में होते हैं तो यह गर्भ में पल रहे शिशु और महिला के प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ होने की निशानी होती है।

आहार का ध्यान

बहुत सी ऐसी महिलाएं होती है जो प्रेगनेंसी के दौरान खाना तो खाती है लेकिन खाने में कौन कौन से पोषक तत्वों का भरपूर मात्रा में होना जरुरी होता है इसका ध्यान नहीं रखती है या फिर खाने में किसी तरह की लापरवाही करती है। और ऐसा करना न केवल प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों को बढ़ाता है बल्कि इससे गर्भ में शिशु के विकास में भी कमी आ सकती है। लेकिन जो महिलाएं खाने में भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों को शामिल करती है, समय पर अपने आहार का सेवन करती है, खान पान में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करती है। तो गर्भवती महिला का यह लक्षण भी गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु के स्वस्थ होने की तरफ इशारा करता है।

खून की कमी

बहुत सी ऐसी महिलाएं होती है जो प्रेगनेंसी के दौरान खून की कमी की समस्या से परेशान हो सकती है। और गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी होने के कारण गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में कमी सकती है। लेकिन यदि गर्भवती महिला को ऐसी कोई समस्या नहीं होती है तो प्रेगनेंसी के दौरान न केवल गर्भवती महिला को खून की कमी के कारण होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है। बल्कि इससे गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। और गर्भवती महिला महिला के शरीर में आयरन की मात्रा का पूरा होना भी गर्भवती महिला और गर्भ में शिशु के स्वस्थ होने की और इशारा करता है।

गर्भवती महिला का एक्टिव रहना

प्रेगनेंसी एक ऐसी स्थिति होती है जहां महिला को आराम की जरुरत होती है लेकिन इसका मतलब यह नहीं होता है की महिला पूरा दिन लेटी रहे और कोई काम न करें, क्योंकि ऐसा करने से भी महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियों का सामना अधिक करना पड़ सकता है। लेकिन यदि कोई गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान एक्टिव रहती है, आलस नहीं करती, थकान व् कमजोरी की समस्या से बची रहती है, तो यह भी गर्भवती महिला के स्वस्थ होने की और इशारा करता है। और गर्भवती महिला का एक्टिव रहना गर्भ में पल रहे शिशु को भी एक्टिव रहने में मदद करता है जिससे गर्भ में पल रहे शिशु का विकास बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है।

खुश रहना

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला का तनाव लेना गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाल सकता है। और यदि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान खुश रहती है, अपने आप को बिज़ी रखती है, अपनी सेहत का अच्छे से ध्यान रखती है, मानसिक परेशानियों से अपने आप को बचाकर रखती है, तो यह प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने में मदद करता है। और यदि गर्भवस्था के दौरान गर्भवती महिला स्वस्थ रहती है तो यह गर्भ में पल रहे शिशु को भी स्वस्थ रहने में मदद करता है।

वजन

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला का वजन ग्यारह से सोलह किलोग्राम तक बढ़ सकता है। और यदि किसी गर्भवती महिला का वजन इससे कम या इससे ज्यादा बढ़ता है तो यह दोनों ही महिला और शिशु के लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं। ऐसे में यदि किसी गर्भवती महिला का वजन प्रेगनेंसी के दौरान ग्यारह से सोलह किलोग्राम के बीच बढ़ जाता है तो गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु के स्वस्थ होने की निशानी होती है। लेकिन यदि गर्भ में जुड़वा शिशु हैं तो यह वजन अठारह किलोग्राम तक बढ़ सकता है।

तो यह हैं कुछ लक्षण जो यदि आपको गर्भवती महिला में महसूस होते हैं तो यह लक्षण इस और इशारा करते हैं की गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहा शिशु दोनों स्वस्थ है। लेकिन ऐसा तभी होता है जब गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान अपने आप को हर तरह की लापरवाही से सुरक्षित रखने में मदद करती है।

डिलीवरी के डर को कैसे दूर भगाएं

प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने महिला बहुत से उतार चढ़ाव से गुजरती है। लेकिन फिर भी महिला प्रेगनेंसी के दौरान अपना अच्छे से ध्यान रखती है। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला या शिशु को किसी भी तरह की समस्या न हो। यदि आप भी प्रेग्नेंट है तो आप भी ऐसा ही करती होंगी लेकिन जैसे जैसे महिला की डिलीवरी का समय पास आता है। वैसे वैसे महिला को घबराहट, डर, चिंता महसूस होने लगती है। साथ ही मन में बहुत से सवाल भी उठने लगते हैं।

लेकिन यही वो समय होता है जहां महिला को धैर्य बरतने की जरुरत होती है। क्योंकि इस दौरान महिला यदि डर या तनाव में रहती है तो इससे महिला की दिक़्कतें बढ़ सकती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे आसान टिप्स बताने जा रहे हैं। जो महिला के डिलीवरी को लेकर डर को कम करने में मदद करते हैं। तो आइये अब जानते हैं की वो टिप्स कौन से हैं।

प्रसव की सही जानकारी इक्कठी करें

  • डिलीवरी के डर को कम करने के लिए सबसे पहले महिला को प्रसव से जुडी जानकारी इक्कठी करनी चाहिए लेकिन ध्यान रखें की वो जानकारी सही हो।
  • जैसे की प्रसव के लक्षण क्या होते हैं, डिलीवरी से पहले आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, आदि।
  • और आप यह जानकारी घर के बड़े सदस्यों, इंटरनेट, किताबों, आदि से ले सकते हैं।
  • इसके अलावा यदि आपको कुछ समझ नहीं आ रहा है तो एक बार डॉक्टर से भी बात करें।
  • क्योंकि जितनी ज्यादा महिला को प्रसव के बारे में जानकारी होती है।
  • उतना ही डिलीवरी को लेकर डर को कम करने में मदद मिलती है।

दर्द को लेकर नहीं डरें

  • ज्यादातर महिलाएं डिलीवरी का समय पास आने पर इस बात को लेकर डरती हैं की महिला की डिलीवरी के दौरान महिला को बहुत दर्द होगा।
  • लेकिन ऐसा कोई जरुरी नहीं है क्योंकि यदि प्रेगनेंसी के नौ महीने अपनी सेहत का अच्छे से ध्यान रखती है।
  • तनाव नहीं लेती है, वजन नियंत्रित रखती है, खान पान का ध्यान रखती है, तो इससे महिला और शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।
  • और जितना महिला और शिशु स्वस्थ रहते हैं उतना ही डिलीवरी को आसान बनाने और प्रसव पीड़ा को कम करने में मदद मिलती है।

किस तरह होगी डिलीवरी इस बारे में न सोचें

  • कुछ महिलाएं डिलीवरी का समय पास आने पर इस बात को लेकर डरती रहती हैं की महिला की डिलीवरी नोर्मल होगी या सिजेरियन।
  • लेकिन महिला को इस बात को लेकर बिल्कुल भी नहीं डरना चाहिए।
  • क्योंकि यह आप नहीं बता सकते हैं, की आपकी डिलीवरी कैसे होगी, यह पूरी तरह से आपके स्वास्थ्य पर निर्भर करता है।
  • ऐसे में यदि आप चाहती है की आपकी डिलीवरी में कोई दिक्कत न हो तो इसके लिए आपको केवल अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना है की आप फिट रहें।
  • क्योंकि यदि आप स्वस्थ रहती है तो डिलीवरी के दौरान किसी तरह की परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

डिलीवरी के डर को दूर भगाने के लिए शिशु को लेकर न डरें

  • डिलीवरी का समय पास आने पर महिला को शिशु को लेकर डरना बहुत आम बात है जैसे की प्रसव के समय शिशु को दिक्कत तो नहीं होगी।
  • लेकिन ऐसे में डरने से कुछ भी नहीं होगा बल्कि आपकी परेशानी हो बढ़ेगी।
  • ऐसे में महिला को अपने आप को स्वस्थ रखने के लिए अपने आप को शांत रखना चाहिए, सकारात्मक रखना चाहिए।

एक दम से नहीं होगा प्रसव

  • कई महिलाएं यह सोच कर डरी रहती है की प्रसव होने वाला है उन्हें कैसे पता चलेगा।
  • तो इस बात को लेकर आपको बिल्कुल भी डरने की जरुरत नहीं है।
  • क्योंकि आपकी डिलीवरी एक दम से नहीं होगी, जिस तरह प्रेगनेंसी की शुरुआत में आपकी बॉडी में कुछ लक्षण महसूस होते हैं।
  • वैसे ही डिलीवरी से पहले भी आपके बॉडी में कुछ लक्षण महसूस हो सकते हैं।
  • जैसे की प्राइवेट पार्ट से एमनियोटिक फ्लूड निकलना, ब्लड के धब्बे लगना, पेट में रुक रुक कर दर्द होना, आदि।

डिलीवरी के डर को दूर भगाने के लिए अकेली न रहें

  • आपने यह तो सुना होगा की खाली दिमाग शैतान का घर, वैसे ही डिलीवरी के दौरान यदि आप अकेली रहती है।
  • तो आपके दिल और दिमाग में केवल डिलीवरी को लेकर नकारात्मक बातें चल रही होती है।
  • ऐसे में यदि आप चाहती है की आपके इस डर को कम किया जाये तो आपको इस दौरान बिल्कुल भी अकेले नहीं रहना चाहिए।
  • इसीलिए इस समय आप अपने परिवार के साथ रहें ताकि डिलीवरी को लेकर आपके मन के डर को कम करने में मदद मिल सके।

अच्छा सोचें

  • डिलीवरी का समय पास आने पर हो सकता है की आपसे लोग अपनी डिलीवरी के एक्सपीरियंस शेयर करें।
  • कुछ लोग अच्छा तो कुछ लोग गलत बातें भी आपको बताएं।
  • ऐसे में एक तो आपको वैसे ही डिलीवरी को लेकर डर लग रहा होता है और लोगो की बातें सुनकर आप और डर जाती है।
  • लेकिन डिलीवरी के डर को कम करने के लिए आपको ऐसा बिल्कुल नहीं करना है।
  • बल्कि आपको अपनी सोच को सकारात्मक रखना है।
  • क्योंकि ऐसा जरुरी नहीं है की जैसा उनके साथ हुआ हो वैसा आपके साथ भी हो।
  • यदि आप अपनी सोच को सकारात्मक रखते हैं तो इससे डिलीवरी को लेकर आपके मन के डर को कम करने में मदद मिलती है।

डिलीवरी के डर को दूर भगाने के लिए डॉक्टर के संपर्क में रहें

  • डिलीवरी का समय पास आने पर बॉडी में हल्की सी परेशानी होने पर ही महिला डर जाती है की ऐसा क्यों हो रहा है।
  • लेकिन ऐसे में डरें नहीं बल्कि डॉक्टर से बात करें, और डॉक्टर को बताएं की आपको क्या हो रहा है।
  • यदि कोई दिक्कत होगी तो डॉक्टर उसी समय आपको अपने पास बुला लेगी।
  • नहीं तो आपके बॉडी में होने वाले असहजता के बारे में बता देगी की आखिर ऐसा क्यों हो रहा है।
  • यदि आप ऐसा करती है हैं और लगातार डॉक्टर के संपर्क में रहती हैं।
  • तो इससे डिलीवरी को लेकर महसूस होने वाले डर को कम करने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिन्हे ट्राई करने से डिलीवरी को लेकर डर को कम करने में मदद मिलती है। यदि आपका डिलीवरी का समय भी पास हैं, तो डरे नहीं बल्कि इन बातों का ध्यान रखें। ताकि डिलीवरी का समय पास आने पर आपको रिलैक्स रहने में मदद मिल सके।

ये हैं 10 प्रेगनेंसी हेल्दी फ़ूड

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गर्भवती महिला के लिए खान पान का बेहतर तरीके से ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है, क्योंकि इस समय महिला का खान पान यदि पोषक तत्वों से भरपूर होता है। तो इससे प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। लेकिन प्रेगनेंसी के समय क्या खाना सही होता है और क्या नहीं इसे लेकर महिला बहुत परेशान होती है। तो लीजिये आज हम गर्भवती महिलाओं को इस समस्या का समाधान बताने जा रहे हैं जिससे उन्हें पता चलेगा की प्रेगनेंसी के दौरान अपनी डाइट में क्या क्या शामिल करना चाहिए।

अंडे

अंडे में कोलिन नामक तत्व होता है जो शिशु के मानसिक विकास को बेहतर करने में मदद करता है, साथ ही यह शारीरिक विकास को भी बढ़ावा देता है। और ऐसा भी माना जाता है की यदि बॉडी में कोलिन नामक तत्व की कमी हो तो इससे शिशु के मानसिक विकास में कमी आ सकती है। इसीलिए गर्भवती महिला को एक या दो अंडो का सेवन जरूर करना चाहिए, लेकिन ध्यान रखें की अधपके या कच्चे अंडे का सेवन न करें क्योंकि इससे डायरिया जैसी समस्या के कारण महिला को परेशान होना पड़ सकता है। अंडे को खाने का सबसे बेहतरीन समय सुबह नाश्ते के समय होता है।

हरी सब्जियां

आयरन, फाइबर, प्रोटीन जैसे पोषक तत्वों से भरपूर हरी सब्जियों का सेवन भी गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए। और एक समय के आहार में इन्हे जरूर शामिल करना चाहिए, इससे शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने के साथ अन्य पोषक तत्व भी मिलते है। जो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान फिट रखने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद करते है, लेकिन ताज़ी व् अच्छे से धोने के बाद ही इन्हे प्रयोग में लाना चाहिए।

फल व् उनका रस

फलों में भी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं, साथ ही कई फल जैसे की तरबूज, संतरा आदि में पानी की मात्रा की अधिकता होती है। जिसके कारण बॉडी में पानी की कमी को पूरा करने में भी मदद मिलती है। आप चाहे तो फलों का घर में बना ताजा रस भी पी सकते हैं क्योंकि वह भी आपके लिए फायदेमंद होता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान ताजे फल व् उनके रस का सेवन जरूर करना चाहिए।

दूध व् दूध से बने पदार्थ

दूध का सेवन दिन में दो से तीन गिलास गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि इसमें कैल्शियम की मात्रा भरपूर होती है जो की गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास के साथ महिला की हड्डियों को मजबूत बनाएं रखने में मदद करता है। साथ ही कच्चे दूध या मलाई वाले दूध का सेवन नहीं करना चाहिए। और दूध के अलावा गर्भवती महिला दूध से बने पदार्थ जैसे की दही, पनीर आदि का सेवन भी कर सकती है।

दालें

प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, मिनरल्स से भरपूर दालों का सेवन भी गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए। गर्भवती महिला एक समय के आहार में इसे जरूर शामिल करें, क्योंकि इसके सेवन से बॉडी में पोषक तत्वों की मात्रा को पर्याप्त बने रहने में मदद मिलती है।

नॉन वेज

वेज से ज्यादा नॉन वेज के आयरन की मात्रा अधिक होती है, इसके अलावा नॉन वेज में अन्य पोषक ततब भी भरपूर मात्रा में होते हैं। ऐसे में कभी कभी गर्भवती महिला चाहे तो नॉन वेज का सेवन भी कर सकती है। लेकिन नॉन वेज का सेवन करते हुए बहुत सी बातों का ध्यान रखना चाहिए जैसे की बासी, अधपके, मर्करी युक्त मछली आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से गर्भवती महिला को पेट से सम्बंधित समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

आयरन युक्त आहार

खून की कमी के कारण गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में कमी आने के साथ, प्रेगनेंसी के दौरान महिला को एनीमिया की समस्या से भी परेशान होना पड़ सकता है। साथ ही खून की कमी के कारण डिलीवरी के दौरान भी महिला को बहुत परेशानी होती है। ऐसे में इन सभी दिक्कतों से बचने के लिए गर्भवती महिला को आयरन युक्त आहार का भरपूर सेवन करना चाहिए, जैसे की अनार, गाजर, पालक, आदि का सेवन करना चाहिए।

सूप

सब्जियों, दालों को अच्छे से उबाल कर मिक्स करके घर में ही सूप बनाकर पीना भी न केवल गर्भवती महिला के पेट को भरने में मदद करता है। बल्कि इससे महिला को भरपूर मात्रा में पोषक तत्व मिलते हैं, और खाने में कुछ नया शामिल करने में मदद मिलती है। सूप में आप अपनी इच्छानुसार सब्जियों व् दालों को शामिल कर सकते हैं।

स्नैक्स

खाने में ज्यादा समय का अंतराल रखना गर्भवती महिला को कमजोरी व् थकान की समस्या से परेशान कर सकता है। ऐसे में खाने के दो घंटे बाद आपको स्नैक्स का सेवन भी जरूर करना चाहिए। इसमें आप घर में ही अपनी पसंद के स्नैक्स बना सकते हैं जो की पोषक तत्वों से भरपूर हो।

पेय पदार्थ

गर्भवती महिला को खाने से जितना फ़ायदा होता है, उतना ही प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में पानी भी होना चाहिए। क्योंकि पानी की कमी के कारण गर्भवती महिला और गर्भ में शिशु दोनों को परेशानी हो सकती है। ऐसे में गर्भवती महिला को हाइड्रेटेड रहने के लिए दिन में आठ से दस गिलास पानी पीने के साथ अन्य पेय पदार्थ जैसे की फलों का रस, निम्बू पानी, नारियल पानी आदि का सेवन भी जरूर करना चाहिए।

तो यह हैं वो हेल्दी फ़ूड जो गर्भवती महिला को अपनी डाइट में जरूर शामिल करने चाहिए। यदि प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला इन सभी को अपनी डाइट में भरपूर मात्रा में शामिल करती है। तो ऐसा करने से गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास को बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है। इसके अलावा आपको उन चीजों का सेवन बिलकुल भी नहीं करना चाहिए जिनके सेवन से आपको एलर्जी की समस्या होती है।

क्या प्रेगनेंसी के पहले महीने में पीरियड होता है?

प्रेगनेंसी में खून के धब्बे

यदि आपको पीरियड्स समय पर आते है, और इस बार आपके पीरियड मिस हो गए हैं तो हो सकता है की आप गर्भवती हो। लेकिन यदि आपके पीरियड्स दो चार दिन आगे पीछे हो जाएँ तो थोड़ा इंतज़ार करना सही होता है, और उसके बाद प्रेगनेंसी टेस्ट करना चाहिए। साथ ही कई महिलाएं प्रेगनेंसी के पहले महीने अपनी माहवारी की तिथि के आस पास खून के धब्बे महसूस कर सकती है, ऐसे में यदि वो गर्भवती है तो हो सकता है की आपको केवल खून के धब्बे महसूस हो, और साथ ही बॉडी में प्रेगनेंसी के लक्षण भी दिखाई दे। साथ ही यदि आप गर्भवती है तो आपको पीरियड्स की तरह ब्लीडिंग की समस्या नहीं होती है। बहुत सी महिलाएं प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में खून के धब्बे महसूस कर सकती है। आप चाहे तो प्रेगनेंसी को कन्फर्म करने के लिए एक बार घर पर ही टेस्ट करके भी देख सकती हैं।

प्रेगनेंसी में पीरियड होते हैं या नहीं?

जी नहीं, प्रेगनेंसी के दौरान पीरियड्स नहीं होते हैं क्योंकि महिला के पीरियड्स का बंद हो जाना ही महिला के गर्भवती होने का संकेत होता है। और यदि आपको पीरियड्स नहीं रुकते हैं तो इसका मतलब यही होता है की आप गर्भवती नहीं है, और यदि आपका गर्भ ठहर जाता है तो आपको पीरियड्स नहीं होते हैं। लेकिन कई महिलाओं को यदि पीरियड्स के दौरान खून के धब्बे महसूस होते हैं, जो की पीरियड्स के जैसे नहीं होते हैं तो यह गर्भपात, संक्रमण, इम्प्लांटेशन, मोलर प्रेगनेंसी, एक्टोपिक प्रेगनेंसी आदि के कारण हो सकता है।

प्रेगनेंसी के पहले महीने में रक्तस्त्राव होना

प्रेगनेंसी के कन्फर्म होने के बाद यदि आपको पेट में तेज दर्द, रक्तस्त्राव महसूस हो तो यह गर्भपात या एक्टोपिक प्रेगनेंसी का लक्षण हो सकता है। लेकिन कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान खून के धब्बे प्रेगनेंसी के पहले महीने में लग सकते हैं। ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि यदि आप गर्भवती है तो उस दौरान बॉडी में उत्सर्जित होने वाले हॉर्मोन, और पीरियड्स के दौरान बॉडी में उत्सर्जित होने वाले हॉर्मोन आपस में जूझने लगते हैं जिसके कारण ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है। साथ इम्प्लांटेशन के कारण भी महिला को प्रेगनेंसी के पहले महीने में खून के धब्बे महसूस हो सकते हैं। इम्प्लांटेशन के दौरान निषेचित अंडा गर्भाशय से जुड़ता है जिसके कारण महिला को ब्लीडिंग हो सकती है।

प्रेगनेंसी के पहले महीने में खून के दाग लगने में कोई घबराने की बात होती है

जी हाँ, यदि केवल खून के दाग लगे तो ऐसा होना आम बात होती है, लेकिन यदि गर्भवती महिला को प्राइवेट पार्ट से खून का प्रवाह शुरूआती समय में अधिक हो, तो यह गर्भपात, एक्टोपिक प्रेगनेंसी का लक्षण हो सकता है। ऐसे में जितना जल्दी हो सके गर्भवती महिला को तुरंत डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान पीरियड्स से जुडी कुछ बातें, इसके अलावा यदि आप घर पर टेस्ट करती हैं और उसमे प्रेगनेंसी की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है। और उसके बार आपको ब्लीडिंग बढ़ने लगती है तो ऐसे में यह गर्भपात का लक्षण हो सकता है। यदि आपको ऐसा महसूस हो तो आपको बिना देरी किये जितना जल्दी हो सके डॉक्टर से मिलना चाहिए।

प्रेगनेंसी में क्यों जरुरी है कैल्शियम और इसके लिए गर्भवती महिला क्या खाए

गर्भावस्था के दौरान कुछ ऐसे पोषक तत्व होते हैं जिनकी गर्भवती महिला को बहुत जरुरत होती है। और उन्ही पोषक तत्वों में से एक है कैल्शियम, इसीलिए डॉक्टर्स भी गर्भवती महिला को कैल्शियम की गोलिया खाने की सलाह देते हैं। लेकिन कैल्शियम गर्भवती महिला के लिए क्यों जरुरी है? कैल्शियम की कमी होने पर गर्भवती महिला को क्या दिक्कत हो सकती है? गर्भ में बच्चे के लिए कैल्शियम क्यों जरुरी है? गर्भवती महिला कैल्शियम की कमी को पूरा करने के लिए किन किन खाद्य पदार्थों का सेवन कर सकती है? ऐसे ही कुछ सवाल गर्भवती महिला के मन में आ सकते हैं, तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको इन्ही सवालों का जवाब देने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी में क्यों जरुरी है कैल्शियम?

गर्भावस्था के दौरान कैल्शियम जरुरी इसीलिए होता है क्योंकि कैल्शियम से गर्भवती महिला की हड्डियों को पोषण मिलता है जिससे महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। साथ ही कैल्शियम गर्भ में बच्चे की हड्डियों व् दांतों के बेहतर विकास में भी मदद करता है। लेकिन यदि गर्भवती महिला कैल्शियम युक्त डाइट नहीं लेती है तो ऐसे में बच्चा तो अपने विकास के लिए जरुरी कैल्शियम महिला की हड्डियों से ले लेता है।

लेकिन ऐसे में महिला की शारीरिक परेशानियां प्रेगनेंसी के दौरान बढ़ सकती है। इसके अलावा यदि प्रेग्नेंट महिला के शरीर में कैल्शियम की कमी पहले से ही है तो इसके कारण न केवल गर्भवती महिला को दिक्कत होती है बल्कि गर्भ में बच्चे के विकास में भी कमी आ जाती है। इसलिए माँ व् बच्चे दोनों के स्वस्थ रहने के लिए प्रेगनेंसी में कैल्शियम युक्त डाइट का सेवन जरुरी है।

गर्भवती महिला के शरीर में कैल्शियम की कमी के कारण क्या परेशानी होती है

प्रेग्नेंट महिला के शरीर में यदि कैल्शियम की कमी होती है तो इसके कारण गर्भवती महिला को थकान, कमजोरी, बॉडी में दर्द जैसी शारीरिक परेशानियां ज्यादा होती है। साथ ही कैल्शियम की कमी के कारण गर्भ में बच्चे के शारीरिक विकास में कमी आने का खतरा होता है।

कैल्शियम की कमी को पूरा करने के लिए गर्भवती महिला किन चीजों का सेवन करें

ऐसे बहुत से खाद्य पदार्थ होते हैं जिनमे कैल्शियम भरपूर मात्रा में मौजूद होता है। और गर्भवती महिला बॉडी में कैल्शियम की कमी को पूरा करने के लिए किन खाद्य पदार्थों का सेवन कर सकती है आइये जानते हैं।

दूध व् दूध से बनी चीजें: दूध, दही, पनीर, घी, आदि चीजों में कैल्शियम भरपूर मात्रा में मौजूद होता है। और यह सभी चीजें गर्भावस्था के दौरान बहुत फायदेमंद होती है। ऐसे में गर्भवती महिला बॉडी में कैल्शियम की कमी को पूरा करने के लिए इन चीजों का सेवन कर सकती है।

हरी पत्तेदार सब्जियां: हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान बहुत फायदेमंद होता है साथ ही हरी पत्तेदार सब्जियों में कैल्शियम भी भरपूर मात्रा में मौजूद होता है जिससे गर्भवती महिला के शरीर में कैल्शियम की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है। इसके लिए गर्भवती महिला पालक, फूलगोभी, सरसों आदि का सेवन कर सकती है।

ब्रोकली: ब्रोकली का सेवन करने से भी गर्भवती महिला बॉडी में कैल्शियम की कमी को पूरा कर सकती है।

फल: कैल्शियम से भरपूर फल जैसे कीवी, संतरे, स्ट्रॉबेरी, आदि का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि यह सभी फल गर्भवती महिला के फायदेमंद होने के साथ महिला के शरीर में कैल्शियम की कमी को पूरा करने में भी मदद करते हैं।

बादाम और किशमिश: वैसे तो सभी ड्राई फ्रूट्स में कैल्शियम मौजूद होता है लेकिन बादाम व् किशमिश में कैल्शियम सबसे ज्यादा होता है। इसीलिए गर्भवती महिला को कैल्शियम की कमी को पूरा करने के लिए इन ड्राई फ्रूट का सेवन जरूर करना चाहिए।

खजूर: प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही से गर्भवती महिला बॉडी में कैल्शियम की कमी को पूरा करने के लिए खजूर का सेवन कर सकती है।

सोयाबीन और टोफू: सोयाबीन व् टोफू भी कैल्शियम से भरपूर होता है और यह प्रेगनेंसी के दौरान नुकसानदायक भी नहीं होता है। ऐसे में बॉडी में कैल्शियम की कमी को पूरा करने के लिए महिला इन का सेवन कर सकती है।

प्रेगनेंसी में कैल्शियम का भरपूर सेवन करने के फायदे

  • गर्भवती महिला यदि कैल्शियम का भरपूर सेवन करती है तो इससे जन्म के समय बच्चे के वजन में कमी जैसी परेशानी नहीं होती है।
  • कैल्शियम की कमी के कारण समय से पहले शिशु का जन्म होने का खतरा बढ़ जाता है लेकिन कैल्शियम का भरपूर सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • हाई ब्लड प्रैशर की समस्या के खतरे को कम करने में मदद मिलती है।
  • प्रेग्नेंट महिला यदि कैल्शियम युक्त आहार का सही मात्रा में सेवन करती है तो ऐसा करने से गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान हड्डियों में कमजोरी की समस्या से बचे रहने के साथ बच्चे की हड्डियों व् दांतों के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।
  • कैल्शियम की कमी के कारण प्रसव के बाद महिला को बहुत ज्यादा ब्लीडिंग की दिक्कत होती है ऐसे में कैल्शियम का भरपूर सेवन करने से डिलीवरी के बाद महिला को होने वाली इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में कैल्शियम का सेवन क्यों करना चाहिए और किन खाद्य पदार्थों में कैल्शियम की अधिकता होती है उससे जुड़े कुछ टिप्स। ऐसे में यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी प्रेगनेंसी में कैल्शियम युक्त डाइट का सेवन जरूर करना चाहिए ताकि गर्भावस्था के दौरान माँ व् बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

घरेलू मक्खियों को भगाने के तरीके

जैसे ही मौसम में बदलाव आता है, वैसे ही घर में मक्खी की समस्या शुरू हो जाती है। और गर्मी के मौसम में तो मक्खियां आराम से बैठने भी नहीं देती। साथ ही यह हमेशा दूषित स्थान पर ही रहती है। जिसके कारण घर में यदि मक्खियां हो जाएँ तो यह आपके घर में खाने के सामान आदि पर भी बैठती है। जिसके कारण अनेक बीमारियां भी फैलती है। और कई बार तो इन्फेक्शन आदि की समस्या और पेट से सम्बंधित परेशानी भी हो जाती है।

इन मक्खियों का डेरा आपको कभी भी अपने घर में नहीं जमने देना चाहिए, अपने घर में जाली की खिड़कियाँ लगवानी चाहिए, जिससे यह आपके घर में प्रवेश न कर सकें। इसके अलावा आपको घर में साफ सफाई का भी ध्यान रखना चाहिए, घर के दरवाज़ों को खुला नहीं रखना चाहिए। इसके अलावा और भी कई टिप्स है जिनका इस्तेमाल करके आप इस समस्या से राहत पा सकते है। तो आइये जानते है की घरेलू मक्खियों से निजात पाने क्या टिप्स है।

मक्खियां भगाने के टिप्स:-

कपूर:-

दिन में एक बार दो तीन कपूर जलाकर घर में धुंआ कर दे, और आप इसे पूरे घर में घुमाएं। जैसे जैसे इसकी सुगंध बढ़ेगी वैसे वैसे आपके घर से मक्खियों को भगाने में मदद मिलती है।

निम्बू और लौंग:-

एक निम्बू लेकर उसके दो हिस्से कर लें, अब उसके अंदर वाले हिस्से की तरफ आठ दस लौंग लगा दें। और अब इसे घर के उस हिस्से में रखें जहां मक्खियां अधिक होती है। इस उपाय को करने से इससे दो से तीन मीटर तक एक भी मक्खी आपको नज़र नहीं आएगी।

तुलसी:-

तुलसी में मौजूद औषधीय गुण जितना आपकी बॉडी को फिट रखने में मदद करते है। उतना ही असरदार यह मक्खियों को भागने में भी है। इसके लिए आप घर में तुलसी का पौधा लगाएं इससे आपके घर में मक्खियां आनी बंद हो जाएँगी।

लौंग का तेल:-

स्प्रे बोतल की मदद से घर में थोड़ा सा लौंग के तेल का छिड़काव कर दें, इसकी गंध से आपके घर से मक्खियों को भगाने में मदद मिलती है। साथ ही इसे ज्यादा न छिड़के, क्योंकि इसकी स्मैल बहुत तेज होती है।

खीरा:-

खीरे से भी मक्खियां दूर भागती है, यदि आप खीरे की स्लाइसेस को काटकर घर के कोनो में और कूड़े के ऊपर रख देते हैं। तो इससे मक्खियां न तो अंडे देती है और न ही आपके घर में टिकती है। जिससे आपके घर से मक्खियों को दूर भगाने में फायदा होता है।

तेल का इस्तेमाल करें:-

पुदीना, नीलगिरि, निम्बू, लेवेंडर, आदि कई तेल आते है जिनकी सुगंध काफी तेज होती है। और इन तेलों का छिड़काव यदि आप अपने घर में करते है। तो ऐसा करने से भी आपको अपने घर से मक्खियों को भगाने में मदद मिलती है।

सिरका:-

एक बड़े बर्तन में पानी और सिरका मिलाकर रख दे, इसकी खुसबू से मक्खियां आकर्षित होती है। लेकिन उसके बाद वो पानी में डूब जाती है और बाहर निकल नहीं पाती है। जिससे उसी में डूब कर मर जाती है और आपको इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

सेब:-

सेब की गोल गोल स्लाइसेस काटकर उसमे लौंग को फंसकर रख दें, ऐसा घर के उन हिस्सों में करें जहां पर मक्खियां अधिक आती है। ऐसा करने से भी आपको घरेलू मक्खियों को भगाने में मदद मिलती है।

लाल मिर्च का उपयोग करें:-

पानी में लाल मिर्च पाउडर डालकर स्प्रे बोतल में डाल दें, और अच्छे से मिक्स करें। उसके बाद इसका छिड़काव घर में करें इस तरीके का इस्तेमाल करने से भी आपको घर में से मक्खियों को खत्म करने में मदद मिलती है।

अल्ट्रा वॉइलेट टेप का इस्तेमाल:-

यह भी मक्खियों को मारने के लिए एक आसान उपाय है, इस टेप को आप घर के हिस्सों में लगाएं। इसकी तरफ मक्खियां तेजी से आकर्षित होती है। जिससे वो जब इसके पास आती है तो इससे चिपक कर मर जाती है।

ग्रीन एप्पल सोप:-

ग्रीन एप्पल सोप को पानी में घोल कर एक बड़े बर्तन में डालकर घर में रखें, थोड़ी देर में ही देखिएगा जैसे जैसे मक्खियां इसके पास आती है। वो इसमें डूब जाती है जिससे की आपको इस समस्या से बचने में मदद मिलती है।

घरेलू मक्खियों को भगाने के अन्य उपाय:-

  • कूड़ा करकट अपने घर के आस पास इक्कठा न होने दें।
  • पानी के जमाव को भी होने से रोके।
  • घर में साफ़ सफाई का अच्छे से ध्यान रखे।
  • घर की खिड़कियों पर जाली के दरवाज़े लगवाए।
  • इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का इस्तेमाल करें।
  • मक्खियों से तुरंत निजात पाने के लिए घर में पंखा चलाएं।
  • घर में पर्याप्त रौशनी रखें इससे भी घर में मक्खियां नहीं आती है।
  • खाने पीने के सामान को अच्छे से ढक कर रखें।

तो यदि आप भी अपने घर में इन मक्खियों की समस्या से परेशान हैं तो आप भी ऊपर दिए गए टिप्स का इस्तेमाल कर सकते है। इन तरीको का इस्तेमाल करने से आपको बिमारी से बचने और इन मक्खियों से निजात पाने में मदद मिलती है।

बाल टूटने के क्या कारण होते है?

Reasons of Hair Fall

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बालों का झड़ना या टूटना आज के समय की सबसे आम समस्या बनता जा रहा है। छोटा बच्चा हो या कोई बड़ा हर कोई इस समस्या से परेशान दिखाई पड़ता है। लेकिन लोगों का मानना है की महिलाओं की तुलना में पुरुषों के बात अधिक टूटते है। जिसको लेकर एक अध्यन किया गया और उसमे पाया गया की पुरुषों में गंजेपन का कारण जेनेटिक (अनुवांशिक) होता है, जबकि स्त्रियों में इस समस्या के होने का मुख्य कारण तनाव या मानसिक परेशानियां होती है।

शोध के मुताबिक, वे स्त्रियां जिनका वैवाहिक जीवन तनावपूर्ण होता है, जो असमय अपने पति या किसी अपने को खो देती है या फिर जो तलाक जैसी स्थिति से गुजर रही होती है उनके सर के बीच वाले हिस्से यानी मांग से बालों का झड़ना आम बात होती है। इसके अलावा भी बालों के टूटने और झड़ने के कई कारण होते है जिनपर हम लोग गौर नहीं करते और अकारण ही इस समस्या को मोल ले लेते है।wet hair

अगर आपके बाल भी भारी मात्रा में टूटते है, तो हो सकता है की आप भी गंजेपन के शिकार हो सकते है। ऐसे में इसका कारण जानकर उसे रोकना अति आवश्यक है। इसीलिए आज हम आपकप बालों के टूटने के कुछ विशेष कारणों के बारे में बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप भी अपने बालों के टूटने के कारण का पता लगा पाएंगे।

बालों के टूटने के क्या कारण होते है?

1. तनाव :

वर्तमान में बालों के टूटने का मुख्य कारण इसी को माना जाता है। क्योंकि आज कल की भाग दौड़ भरी जिंदगी में हमारे शरीर से बड़ी मात्रा में ऊर्जा बाहर निकलती है जिसके कारण तनाव का स्तर बढ़ता है। इसलिए अधिकतर लोगों के तनाव के कारण बाल टूटने लगते है। क्योंकि तनाव लेने से मस्तिष्क की मांसपेशियां कमजोर हो जाती है जिसका सीधा प्रभाव बालों की जड़ों पर पड़ता है।

2. परिवार :

बहुत से लोगों के बालों के टूटने या झड़ने का कारण उनके परिवार के इतिहास से संबंधित होता है। जिसमे आप या हम कुछ नहीं कर सकते। ऐसी स्थिति में उचित आहार और बेहतर लाइफस्टाइल ही आपकी इस समस्या को कम करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा खुद को उन चीजों से भी बचा कर रखें जो बालों के झड़ने का कारण बनते है।

3. आधुनिक उपकरण :

बहुत सी लड़किया अक्सर नहाने के बाद बालों को सुखाने के लिए हेयर ड्रायर का इस्तेमाल करती है। जबकि ये उनके बालों के लिए बेहद नुकसानदेह होता है। इस बात की पुष्टि एक शोध में हुई है की प्रतिदिन बालों को ड्रायर से सुखाने से बाल अधिक मात्रा में झड़ते है। इसके अलावा बालों को स्ट्रैट और कर्ल करने के लिए प्रयोग किये जाने वाले ट्रीटमेंट्स भी बालों को डैमेज करने का काम करते है।

4. हॉर्मोन परिवर्तन :

गर्भावस्था और प्रसव के दौरान शरीर में हॉर्मोन के स्तर में काफी उतार चढ़ाव होते है जिसके कारण बहुत अधिक मात्रा में बाल टूटने लगते है। इसके अतिरिक्त थाइराइड इम्बैलेंस, मासिक धर्म के बंद होने और हॉर्मोन से संबंधित अवस्था में भी बाल तेजी से टूटने लगते है।

5. केमिकल प्रोडक्ट :

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आज बाजार में मौजूद सभी शैम्पू, कंडीशनर और हेयर ऑयल्स में केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है जो बालों को कई तरह से नुकसान पहुंचते है। वर्तमान के अधिकतर कास्मेटिक में भी हानिकारक रसायन होते है और जब आप उनका इस्तेमाल आपके बालों पर करती है तो ये बालों को कमजोर करने के साथ-साथ बालों से जुडी अन्य समस्यायों को भी जन्म देते है।

6. जंक फ़ूड :

अधिक मात्रा में जंक फ़ूड का सेवन करने से शरीर में पोषण की कमी होने लगती है, जो की गंजेपन या बालों के टूटने का एक कारण होता है। इसलिए कारण जब आप अपने खान पान पर ध्यान देना बंद कर देते है तो बहुत अधिक मात्रा में बाल टूटने लगते है।

7. मौसम :

आपके ऑफिस या घर में लगा एयर कंडीशनर आपको गर्मी से राहत तो दिला सकता है लेकिन आपके बालों के लिए ये बिलकुल भी अच्छा नहीं है। इसके अलावा सूरज की तेज किरणें भी आपके बालों को नुकसान पहुंचाती है। ऐसे में जरुरी है की अपने बालों की अच्छी तरह से ध्यान रखा जाए।

8. लिंग :बालों के टूटने

बालों के टूटने या झड़ने की समस्या महिला व् पुरुष दोनों में ही होती है। जिसमे महिलाओं के बाल पुरे सर से एक समान रूप से टूटते है जबकि पुरुषों के बाल एक विशेष तरीके से टूटते है। पुरुषों की ऑटो-इम्यून अवस्था भी गंजेपन का एक कारण होती है।

9. नींद :

अच्छी तरह से नींद नहीं लेने का असर आँखों के साथ साथ सर पर भी दिखता है। इसलिए सभी डॉक्टर हर बीमारी में यही सलाह देते है की भरपूर नींद ली जाएँ। क्योंकि कई बार ठीक तरह से नींद नहीं लेना भी आपके गंजेपन का कारण हो सकता है।

10. बीमारियां :

मनुष्य के शरीर में ऐसी बहुत सी बीमारियां होती है जिनका असर बालों की सेहत पर पड़ता है। खून की कमी, poly cystic ovary syndrome, थाइराइड और chronic illnesses कुछ ऐसी ही बीमारियां है जिसके कारण सर से बाल टूटने लगते है।

गर्भावस्था में फूलगोभी खाना जरुरी है या पत्तागोभी?

गर्भावस्था के दौरान खाने पीने की चीजों को लेकर गर्भवती महिला बहुत ज्यादा कंफ्यूज हो सकती है की आखिर प्रेगनेंसी में कौन सी सब्ज़ी या फल का सेवन करना चाहिए और कौन सी सब्ज़ी या फल का नहीं। और इस बात का ध्यान रखना जरुरी भी होता है क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला अकेली नहीं होती है बल्कि गर्भ में पल रहा शिशु भी अपनी माँ पर ही निर्भर करता है। तो आज हम आपको गर्भावस्था में फूलगोभी का सेवन करना चाहिए या पत्तागोभी का इस बारे में बताने जा रहे हैं, वैसे तो यह दोनों सब्जियां एक ही परिवार में आती है। और दोनों ही पोषक तत्वों से भरपूर होती है। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान इनमे से किसका सेवन करना चाहिए और किसका नहीं इसके बारे में जानना बहुत जरुरी होता है।

गर्भावस्था में फूलगोभी खाएं या पत्तागोभी?

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान उन सब्जियों का सेवन करना चाहिए जो न केवल पोषक तत्वों से भरपूर हो बल्कि जिनसे गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को फायदा भी मिलें। और फूलगोभी और पत्तागोभी दोनों ही पोषक तत्वों से भरपूर होती है साथ ही दोनों के अलग अलग फायदे भी हैं जो गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को मिलते हैं। ऐसे में केवल एक के बारे यह कहना की इसे खाना चाहिए यह गलत होगा। क्योंकि प्रेग्नेंट महिला दोनों में से किसी भी गोभी का सेवन जरुरत के अनुसार कर सकती है क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान यह दोनों ही फायदेमंद होती है। तो आइये अब गोभी खाने के क्या फायदे होते हैं इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

प्रेगनेंसी में पत्तागोभी को खाने के फायदे

गर्भवती महिला यदि प्रेगनेंसी के दौरान पत्तागोभी का सेवन करती है तो उससे गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को कौन कौन से फायदे मिलते हैं। आइये सबसे पहले इसके बारे में जानते हैं।

फोलिक एसिड: प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को फोलिक एसिड को पर्याप्त मात्रा में लेने की सलाह दी जाती है। क्योंकि गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी का होना गर्भवती महिला और शिशु दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। और पत्तागोभी में फोलिक एसिड भरपूर मात्रा में मौजूद होता है जो न केवल गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करता है। बल्कि इससे नई लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण करने में भी मदद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला और शिशु दोनों को ब्लड की कमी के कारण होने वाली सभी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

विटामिन: विटामिन बी, विटामिन ए, फोलेट जैसे पोषक तत्व भी पत्तागोभी में भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो न केवल गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं बल्कि इससे गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

वजन: पत्तागोभी एक ऐसी सब्ज़ी है जो गर्भवती महिला को पोषक तत्वों तो भरपूर मात्रा में देती हैं, लेकिन इसमें कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है। जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला को स्वस्थ रखने के साथ महिला के वजन को कण्ट्रोल में रखने में भी मदद करती है। क्योंकि गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला का वजन ज्यादा होना गर्भवती महिला और शिशु दोनों की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

यूरिन सम्बन्धी परेशानियां: बहुत सी गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान यूरिन सम्बन्धी समस्या जैसे यूरिन इन्फेक्शन से परेशान हो सकती है। लेकिन पत्तागोभी को अपनी डाइट में यदि गर्भवती महिला शामिल करती है तो उससे गर्भवती महिला को यूरिन सम्बन्धी परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है। साथ ही इसके सेवन से गर्भवती महिला को बॉडी में दर्द व् सूजन की समस्या से राहत पाने में भी मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में फूलगोभी खाने के फायदे

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला फूलगोभी का सेवन भी कर सकती है, क्योंकि फूलगोभी का सेवन करने से भी गर्भवती महिला को बहुत से फायदे मिलते हैं। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान फूलगोभी का सेवन करने से गर्भवती महिला को कौन से फायदे मिलते हैं।

choline: यह एक ऐसा पोषक तत्व है जो गर्भवस्था के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु के मानसिक विकास के लिए बहुत जरुरी होता है। और फूलगोभी में यह भरपूर मात्रा में मौजूद होता है। और यदि शिशु को यह पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलता है तो शिशु को मानसिक विकास से जुडी समस्या होने का खतरा भी रहता है। ऐसे में गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर मानसिक विकास के लिए महिला को फूलगोभी का सेवन जरूर करना चाहिए।

कैल्शियम: गर्भवती महिला की हड्डियों की मजबूती के लिए और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक विकास के लिए महिला को कैल्शियम युक्त आहार का भरपूर सेवन करना चाहिए। और फूलगोभी में कैल्शियम भरपूर मात्रा में मौजूद होता है। और केवल हड्डियों के लिए ही नहीं इससे दांतों को सुरक्षित रहने में भी मदद मिलती है। साथ ही फूलगोभी में मौजूद विटामिन के भी हड्डियों की मजबूती के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

विटामिन सी: विटामिन सी एक बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट होता है जो गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु के इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने में मदद करता है। जिससे गर्भवती महिला और शिशु को हर तरह के संक्रमण से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

आयरन: फूलगोभी का सेवन करने से गर्भवती महिला को आयरन को बेहतर तरीके से अवशोषित करने में मदद मिलती है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को खून की कमी के कारण होने वाली परेशानियां जैसे समयपूर्व प्रसव, डिलीवरी के दौरान होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो गर्भवती महिला को फूलगोभी और पत्तागोभी का सेवन करने से मिलते हैं, इसके अलावा और भी बहुत से फायदे हैं। लेकिन गर्भवती महिला को यह फायदे तभी मिलते हैं जब गर्भवती महिला जरुरत के अनुसार इनका सेवन करती है। क्योंकि जरुरत से ज्यादा गोभी का सेवन महिला को पेट सम्बन्धी समस्या से परेशान कर सकता है। ऐसे में गोभी के सेवन से महिला को केवल फायदा ही हो और कोई नुकसान न हो इसके लिए महिला को गोभी को सही मात्रा में ही अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए।

गाय का घी खाने के फायदे

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Health Benefits of Cow’s Desi Ghee

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देशी घी को स्वास्थ्य, सेहत और बुद्धि के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। इसलिए तो पुराने समय में सभी खाना बनाने से लेकर मिठाई बनाने तक सभी में देशी घी का इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन उस समय भी देशी घी मुख्यतः 2 वेराइटी में मिलता था गाय के दूध से बना देशी घी और भैंस के दूध से बना देशी घी। जिनमे से सबसे अधिक प्रयोग गाय के घी का ही किया जाता था। क्योंकि गाय का घी न केवल स्वाद में लाजवाब होता है अपितु स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभकारी होता है।

लेकिन आज भी ऐसे बहुत से लोग है जो खाना बनाना तो दूर रोटियों पर लगाने के लिए भी घी का इस्तेमाल नहीं करते। क्योंकि उन्हें लगता है की घी खाने से मोटापा बढ़ता है। जबकि ऐसा कुछ नहीं है। घी का सेवन करने से आपका मोटापा बढ़ता नहीं है अपितु नियंत्रण में रहता है। सिमित और सही मात्रा में किया गया घी का सेवन न केवल आपको कार्य करने की क्षमता प्रदान करता है अपितु आपकी सेहत को भी बेहतर बनाता है। इसके अलावा देशी घी में ऐसे बहुत से पोषक तत्व पाए जाते है जिनका सेवन करने से दिमाग तेज होता है।

गाय का देशी घी न केवल शरीर को बिमारियों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है अपितु त्वचा के लिए भी बहुत से लाभ प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त भी गाय का घी खाने के बहुत से फायदे होते है, परन्तु सभी को उनके बारे में पता नहीं होता। इसीलिए आज हम आपको गाय का घी खाने के फायदों के बारे में बताने जा रहे है।

गाय का घी खाने के फायदे :- 

गाय का दूध तो आप सभी ने पीया होगा और उसके स्वाद से भी भली-भांति परिचित होंगे। लेकिन क्या आपने कभी गाय के घी का सेवन किया है? शायद नहीं! कारण उसका पीला रंग। बहुत से लोग गाय के घी को उसके रंग की वजह से पसंद नहीं करते। जबकि उसका यही रंग उसे स्वास्थ्य और शरीर के लिए लाभकारी बनाता है। इसलिए आज हम आपको उसी घी के सम्पूर्ण फायदे बता रहे है।

1. छोटे बच्चों के लिए गाय का घी बहुत लाभकारी :गाय का घी

नवजात शिशु को यदि रोजाना 2 से 4 बूंद गाय का घी दिया जाए तो उसकी कई बीमारियां अपने आप समाप्त हो जाएंगी। इसके अलावा पेट से संबंधित किसी भी विकार के लिए घी बहुत लाभकारी होता है। स्तनपान कराने वाली महिलाओं को गाय का घी अवश्य खाना चाहिए।

2. त्वचा के लिए :

सर्दियों के मौसम में स्किन के रूखे होने की समस्या में भी देशी घी बहुत लाभकारी होता है। यह त्वचा को नमी प्रदान करके रूखापन दूर करता है। स्किन के लिए यह किसी मोइश्चराइजर से कम नहीं है। वैसे आप चाहे तो इससे अपने पुरे शरीर की मालिश कर सकते है। इससे स्किन में चमक और ग्लो आएगा।

3. आंखों के लिए :

आंखों से संबंधित बहुत सी समस्यायों में गाय के घी का प्रयोग करना लाभकारी होता है। त्रिफला और शहद के साथ गाय के घी का मिश्रण बनाकर सेवन करने से आँखों को लाभ मिलता है। यह घी आंखों की रौशनी बढ़ाने में भी मदद करता है और साथ ही उन्हें कई बिमारियों से भी बचाता है।

4. मस्तिष्क के लिए :

खाने में सुबह-शाम गाय के घी का इस्तेमाल करने से दिमाग के विकास में लाभ मिलता है। गाय के घी में वे सभी पोषक और जरुरी तत्व पाए जाते है जो दिमाग को सुचारू रूप से कार्य करने में मदद करते है। इसके अलावा गाय के घी से सर की मालिश करने से भी काफी लाभ मिलता है।

5. भोजन पचाने के लिए :

कई बार असमय भोजन करने या ज्यादा या कच्चा खाना खाने की वजह से पीट में कब्ज और गैस जैसी समस्याएं होने लगती है। ऐसे में रोजाना एक ग्लास गर्म दूध में एक चम्मच गाय का घी डालकर पीने से सभी समस्याएं दूर हो जाती है।

6. वजन बढ़ाने के लिए :

वजन बढ़ाने के लिए डॉक्टर भी आहार में घी खाने की सलाह देते है। क्योंकि यह शारीरिक दुर्बलता को कम करने के साथ साथ स्फूर्ति और एनर्जी भी प्रदान करता है। जल्दी वजन बढ़ाने के लिए सुबह और शाम घी का सेवन करना चाहिए।

7. नशा उतारने के लिए :

कई बार लोग आवेश में बहुत अधिक नशा कर बैठते है जो n केवल उनकी सेहत बल्कि उनके व्यक्तित्व पर भी बुरा असर डालता है। ऐसे में उस व्यक्ति को 24 ग्राम देशी घी में थोड़ी सी मिश्री मिलाकर खिलाने से नशा उतर जाता है।

8. खांसी होने पर :cough

छोटे बच्चों को जरा सा मौसम बदलने पर खांसी जुखाम जैसी समस्याएं होने लगती है। ऐसे में बच्चे की छाती और पीठ पर गाय के घी से मालिश करने से समस्या ठीक हो जाती है।

9. हड्डियों को मजबूत करने में मदद करे :

देशी घी हड्डियों के लिए बहुत लाभकारी होता है। बढती उम्र में हाथ पैरों और घुटने की हड्डियाँ कमजोर होने लगती है। ऐसे में अगर आप रोजाना गाय के घी का सेवन करेंगे तो आपकी ये समस्या ठीक हो जाएगी। जोड़ों पर घी गर्म करके लगाने से जोड़ो के दर्द में आराम मिलता है।

10. फटें होंठों की समस्या :

सर्दियों के मौसम में होंठ फटने की समस्या बहुत आम होती है। ऐसे में अगर आप होंठों पर गाय के घी का इस्तेमाल करते है तो आपको किसी भी लिप बाम या कोल्ड पेट्रोलियम जेली की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। रोजाना रात को सोने से पूर्व होंठों पर घी लगाने से सूखापन तो दूर होगा ही साथ साथ वे मुलायम और गुलाबी भी होंगे।

गाय का घी खाने के अन्य फायदे :-
  • स्टैमिना बढाने के लिए गाय का घी खाना बहुत लाभकारी होता है।
  • माइग्रेन का दर्द होने पर रोगी को गाय का घी खाने के लिए देना चाहिए।
  • नियमित रूप से घी का सेवन करने वालों का रक्तचाप नियंत्रित रहता है।
  • हृदय संबंधी बिमारियों से परेशान व्यक्तियों को गाय का घी का सेवन करना चाहिए। क्योंकि यह वजन नियंत्रित करने में मदद करता है।
  • गाय का घी हार्ट ब्लॉकेज के खतरे को कम करता है।
  • मेटाबोलिज्म को नियंत्रित करने में मददगार।
  • ब्लड सर्कुलेशन को सही करने में मदद करता है।