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क्या आपका बच्चा रात को सोते समय पेशाब करता है? तो जानिए उपाय

बिस्तर पर पेशाब करने के कारण और उपाय

बचपन में तो सभी ने सोते हुए बिस्तर गीला जरूर किया होगा? पैदा होने से लेकर ३ साल तक तो ये आम बात होती है, लेकिन अगर तीन साल से अधिक बड़ा बच्चा पेशाब बिस्तर में करता है तो फिर या तो यह बीमारी हो सकती है या इसे आदत भी कहा जा सकता है। अक्सर बच्चे डर के कारण सोते हुए पेशाब कर देते है या फिर कई बार ये अनुवांशिक बीमारी भी होती है। ऐसे मे माता पिता खुद बहुत परेशान हो जाते है। न तो वो कही जाने का मन बना पाते है और न ही ऐसे में अकेले बच्चे को कहीं रहने देते हैं।

माता पिता ऐसे में बच्चों को डाँट कर या डरा कर उन्हें ऐसा करने से रोकते है।  जिससे बच्चों में या तो हीन भावना जन्म ले लेती या फिर वह अपने आप को अपमानित समझने लगते हैं। इससे बच्चे का आत्मविश्वास काम हो जाता है और वह खुद अपने आपको धीरे धीरे अलग करने लगते है। क्यूंकि बच्चा ये सब खुद या जानबूझ कर नहीं करता।

हालाकि खुद माता पिता भी इस बात को लेकर शर्मिंदा होते है। लेकिन क्या ये बात वास्तव में शर्मिंदा करने की है? नहीं क्यूंकि ये कोई बीमारी भी हो सकती है जो बच्चे को किसी कारणवश हो गई हो। ये अनुवांशिक भी हो सकता है और ऐसा हमारी नासमझी के कारण भी हो सकता है। तो इस समास्या से हम अपने बच्चे को कैसे छुटकारा दिया सकते है, ये जानते हैं।

बच्चे से बात कीजिये 

समझाना – बच्चों को कभी भी किसी भी बात को लेकर सबसे पहले उससे पूछने की कोशिश करनी चाहिए की उसे क्या परेशानी है। बच्चों से बात करके उन्हें हमेशा समझाना चाहिए की हर छोटी बड़ी बात जिससे भी उन्हें परेशानी हो अपने माता पिता से बात करनी चाहिए। और माता पिता का भी फ़र्ज़ है की उन्हें अपने बच्चे को ठीक से समझना चाहिए। ऐसा करने से बच्चे में आत्मविश्वास जागृत होता है।

पेय प्रदार्थ – शाम को ६ बजे के बाद से ही बच्चे को पेय पदार्थ काम मात्रा में देने चाहिए।  चाय, कॉफ़ी, कोल्ड्रिंक, शरबत जैसे चीज़ों का सेवन कम करने देना चाहिए। यह तक की पानी को भी कम मात्रा में ही देना चाहिए। ऐसा करने को डॉक्टर भी बोलते है की शाम को ६ बजे के बाद बच्चों को पीने के लिए कम पेय पदार्थ देने चाहिए। आप फर्क को खुद देखेंगे की बच्चे की इस आदत में धीरे धीरे सुधर आ जायेगा।

दवाई – कई बार ये समस्या बच्चो में इतनी बढ़ जाती है की ये एक बीमारी का रूप ले लेती है। इसके लिए हमने डॉक्टर की सलाह और परामर्श की आवश्यकता लेनी चाहिए। डॉक्टर के पास अपने बच्चे को ले जाकर सारी परेशानी बतानी चाहिए। और यदि वह कोई दवाई दें तो अपने बच्चे को नियमित रूप से वो दवाई देनी चाहिए।

आदत में बदलाव – बच्चे की आदत में बदलाव की जरूरत करनी चाहिए। जैसे की उसे सोने से पहले पेशाब करवाना। सोते समय भी २-३ उठाकर उसे अपने साथ ही पेशाब करवाने ले जाना चाहिए। ऐसा करने से भी आदत  में सुधर आ जाता है।

यदि आपका बच्चा ज्यादा ही छोटा है और आप बार बार उसे उठा नहीं सकतीं तो आप उसे डॉयपर लगा सकते हैं। उसके सोने की जगह पर चादर के नीचे भी कोई प्लास्टिक की शीट बिछा सकतीं है। ये थे कुछ ऐसे तरीके की जिनकी मदद से आप खुद भी अपने बच्चे की इस आदत को छुटवा सकतीं हैं।

क्या आप दोपहर को नींद लेते है? ये है फायदे

आज कल की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई नींद की कमी से संघर्ष कर रहा है, जिसके कारण व्यक्ति केवल शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी प्रभावित हो रहा है, और आज के समय में यदि आप एक दिन में आठ से नौ घंटे ही नींद ले रहे है तो आप बहुत लकी है, लेकिन ज्यादातर लोग ऐसी ही है जिन्हे अपनी नींद को पूरा करने का समय ही नहीं मिलता है, आपने ज्यादातर लोगो से यही सुना होगा की जैसे ही आप दोपहर का खाना खाते है, तो इसके बाद उन्हें नींद आने लगती है! परन्तु यदि वो सो नहीं पाते है तो या तो वो चाय पी कर अपनी नींद को भगा लेते है, या फिर सुस्त होने लगते है।

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लेकिन ज्यादातर लोग ऑफिस में होने के कारण, पढाई के कारण, व्यापार के कारण सो नहीं पाते है, और दिन में तो क्या रात को भी कई बार वो अच्छे से नींद नहीं ले पाते है, और इसका असर आपके शरीर और दिमाग पर साफ़ दिखाई देता है, परन्तु क्या आप जानते है की दोपहर में सोने से आपको सिर्फ शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि आपके दिमाग को भी रिफ्रैश करने में मदद मिलती है, साथ ही इसके कारण आपको दिल से सम्बंधित समस्या होने के भी कम चांस हो जाते है, साथ ही भारतीय संस्कृति में भी दोपहर की नींद लेने का बहुत महत्व होता है, दोपहर के समय छोटी अवधि में ली जाने वाली नींद को वामकुक्षी कहाजाता है, और भगवान विष्णु भी शेषनाग पर वामकुक्षी अवस्था में ही लेटते है, इस अवस्था में लेटने से सूर्य-नाड़ी सक्रिय हो जाती है, जिसके कारण खाना पचाने में मदद मिलती है, मतलब इसके कारण आपकी पाचन क्रिया में भी सुधार आता है, तो आइये अब विस्तार से जानते है की दोपहर की नींद लेने से आपको कौन कौन से फायदे होते है।

दिमाग की शक्ति बढ़ती है:-

रिसर्च में ये बात साबित हुई है की दोपहर की झपकी लेने से आपकी दिमाग की पाउडर बढ़ती है, और जो लोग दिन में सोते है उनका दिमाग दूसरों के मुकाबले ज्यादा तेजी से चलते है, और खास कर बच्चों को तो दिन के समय कम से कम आधे घंटे की नींद तो जरूर लेनी चाहिए, और बड़ो को भी ज्यादा नहीं तो दस मिनट तक जरूर सोना चाहिए।

ब्लड प्रैशर की समस्या कम होती है:-

आज कल हर दूसरे व्यक्ति को ब्लड प्रैशर की समस्या है, लेकिन यदि आप दोपहर की नींद लेते है तो इसके कारण आपके ब्लड प्रैशर की परेशानी को भी कम होने में मदद मिलती है, और इस बात को कई रोगियों ने भी माना है, इसीलिए जिन्हे ब्लड प्रैशर की समस्या होती है, उन्हें दिन में थोड़ी देर जरूर आराम करना चाहिए।

हार्ट अटैक की सम्भावना कम होती है:-

जो लोग दिन में थोड़ी देर के लिए नींद लेते है उन्हें हार्ट अटैक की सम्भावना कम होती है, इसका सबसे ज्यादा फायदा नौकरी करने वालों, व्यापार वालों और छात्रों को होता है, क्योंकि कई बार उन्हें रात की भी नींद पूरी लेने का समय नहीं मिल पाता है, परन्तु ऐसा भी जरुरी नहीं की वो रोजाना ऐसा करें, यदि आप हफ्ते में तीन भी आधे घंटे की नींद लेते है तो इसके कारण आपको फायदा मिलता है, और इसके कारण आपको स्ट्रोक के चांस 37% तक कम हो जाते है।

रिफ्रैश और रिबूट करने में मदद करता है:-

एक दिन में हर व्यक्ति को कम से कम आठ घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए, परन्तु कई बार ज्यादा बिज़ी रहने के कारण आपको आपकी नींद पूरी नहीं होती है, जिसके कारण आप हमेशा थका हुआ महसूस करते है, और आपको फ्रैश फील नहीं होता है, परन्तु यदि आप इसके लिए थोड़ी देर दिन में आराम करते है तो इसके कारण आपकी बॉडी को फ्रैश महसूस होने के साथ रिबूट होने में भी मदद मिलती है।

पाचन शक्ति में सुधार आता है:-

दोपहर की नींद लेने के कारण आपकी पाचन शक्ति में भी सुधार आने में मदद मिलती है, और इसके लिए दोपहर के समय थोड़ी देर आपको अपने सर को अपने बाएं हाथ के ऊपर रख कर सोना चाहिए, यदि आप इस अवस्था में दोपहर को खाना खाने के बाद सोते है, तो इसके कारण आपको फायदा मिलता है।

तो ये कुछ फायदे है जो दिन में सोने के कारण आपको होते है, इसीलिए यदि आपकी नींद पूरी नहीं होती है तो दिन में थोड़ी देर अपने शरीर को आराम जरूर देना चाहिए, और ऐसा जरुरी नहीं है की आप रोजाना सोएं, हफ्ते में यदि तीन दिन भी आ दोपहर के समय आराम करते है, तो इसके कारण भी आपको फायदा होता है, बुजुर्गो और पढ़ने वाले छात्रों को दिन में थोड़ी देर जरूर सोना चाहिए, क्योंकि इसके कारण उन्हें केवल शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी आराम मिलने में मदद मिलती है।

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प्रेगनेंसी में 1 से 9 महीने तक पतियों के लिए टिप्स

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गर्भावस्था किसी भी महिला के लिए उसकी लाइफ का सबसे खास और अनमोल समय होता है। और इस लम्हे को और भी खास बनाया जा सकता है यदि गर्भवती महिला को अपने पार्टनर का साथ मिलता है। ऐसा भी नहीं है की हम कह रहे हैं की पति को सारा दिन अपनी प्रेग्नेंट बीवी के पास ही बैठे रहना चाहिए।बस जितना हो सके उनके साथ समय बिताना चाहिए। प्रेगनेंसी में होने वाले अनुभव को उनके साथ जीना चाहिए। ऐसा करने से महिला को प्रेगनेंसी के दौरान खुश रहने के साथ माँ बनने के अनुभव का मज़ा दुगुना करने में मदद मिलती है। तो आइये आज हम आपको बताते हैं की प्रेगनेंसी में 1 से 9 महीने तक पतियों को अपनी पत्नी के लिए क्या क्या करना चाहिए।

साथ बिताएं समय

गर्भावस्था में महिला के बॉडी में बहुत से बदलाव आते हैं जिसके कारण महिला को शारीरिक के साथ मानसिक समस्या भी हो सकती है। कुछ महिलाएं तो इस दौरान तनाव का शिकार भी हो जाती है। ऐसे में अपने पार्टनर को खुश रखने व् उनकी मानसिक परेशानी को दूर करने के लिए पति का फ़र्ज़ बनता है की वो जितना हो सकता है उतना समय इस दौरान अपने पत्नी के साथ बिताए।

दिक्कत होने पर दे साथ

हार्मोनल बदलाव के बॉडी में होने के कारण महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी परेशानियां हो जाती है। ऐसे में यदि महिला को किसी परेशानी का अनुभव हो रहा है तो पति को उनका साथ देना चाहिए। ताकि उनकी दिक्कत को कम करने में मदद मिल सके। और यदि परेशानी ज्यादा हैं तो उसी समय डॉक्टर से पूछ कर उसका इलाज करना चाहिए ताकि महिला को इन परेशानियों से बचाया जा सके।

बातें करें शेयर

आप पिता बनने वाले है उस शिशु का आपकी जिंदगी में क्या महत्व है, और आप अपने आने वाले बच्चे और अपनी पत्नी से कितना प्यार करते हैं इस बात को अपनी पत्नी से शेयर करें। उनसे शेयर करें की शिशु के लिए आपने क्या सपने देखे हैं। ऐसा करने से गर्भवती महिला को भी अच्छा महसूस होता है।

खुश रखें

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में हो रहे बदलाव शारीरिक परेशानियों के कारण कई बार महिलाएं तनाव में आ जाती है। ऐसे में गर्भवती महिला को खुश रखने के लिए पति को कुछ न कुछ जरूर करना चाहिए। जैसे की उनका मनपसंद खाना बनाएं, प्रेगनेंसी में उन्हें शिशु की तरह उनका ध्यान रखे, बिज़ी होने पर भी उनका हालचाल पूछना न भूले आदि।

यादों को मिलकर संजोए

घर में शिशु का आना केवल गर्भवती महिला के लिए ही नहीं बल्कि घर के हर सदस्य के जीवन में ख़ुशी लाता है, और हर कोई नन्हे मेहमान के आने का बेसब्री से इंतज़ार भी करता है। ऐसे में आपको इन ख़ुशी के लम्हो को अपनी पत्नी के साथ मिलकर संजोना चाहिए, ताकि आप और अपनी पत्नी इन लम्हो को हमेशा के लिए अपनी जिंदगी में कैद करके रख सकें।

गर्भावस्था के अनुभव को मिलकर करें एन्जॉय

गर्भावस्था के पांचवे महीने के बाद शिशु गर्भ में हलचल करना शुरू कर देता है, ऐसे में शिशु का लात मारना, पेट में घूमना, आदि का अनुभव केवल महिला महसूस कर सकती है। लेकिन आपको भी अपनी पत्नी से पूछना चाहिए की शिशु गर्भ में किस तरह घूमता है, उनके पेट पर हाथ लगाकर कई बार शिशु की हरकत को आप भी महसूस कर सकते हैं, ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान आपको भी अपनी पत्नी के साथ मिलकर इस अनुभव को उठाना चाहिए।

काम में दे साथ

प्रेगनेंसी के समय पति को अपनी पत्नी का हर काम में साथ देना चाहिए खासकर वजन बढ़ने के बाद महिला को ज्यादा परेशानी हो जाती है। ऐसे में घर के छोटे मोटे काम हो, बाहर का कोई काम हो, पत्नी को किसी चीज की जरुरत हो ऐसे काम में आपको अपने पत्नी का साथ देना चाहिए।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका ध्यान पतियों को प्रेगनेंसी के दौरान रखना चाहिए, ऐसा करने से प्रेगनेंसी के दौरान महिला को होने वाली तनाव जैसी बड़ी परेशानी से बचाने में मदद मिलती है। साथ ही प्रेगनेंसी के खास लम्हे का अनुभव आप भी अपने पार्टनर के साथ शेयर कर सकते हैं।

यूट्यूब विडिओ –

गर्भावस्था के दौरान पति को भी अपनी पत्नी का खास ख्याल रखना चाहिए। गर्भावस्था में पतियों के लिए टिप्स।

दांतों में चमक लाने के उपाय

दांतों की व्यक्ति की खुबसूरती का अभिन्न हिस्सा माना जाता है जो न केवल आपको खाना खाने में मदद करते है अपितु आपके व्यक्तित्व को भी नई पहचान देते है। परन्तु वर्तमान की पीढ़ी इनके प्रति काफी लापरवाह हो गई है, बाहर का उल्टा-सीधा खान-पान और महंगे ब्रांड्स के टूथपेस्ट इस्तेमाल करने से लगातार उनकी वास्तविक सुन्दरता में कमी होती जा रही है। जहाँ एक तरफ आज हर छोटे बच्चे के दांत में कीड़ा लगा रहता है वहीं दूसरी तरफ दांत का दर्द सभी को परेशान किये हुए है।

अच्छे दांत व्यक्ति की मुस्कान में चार चाँद लगा देते है जबकि खराब और पीले दांत उसी मुस्कान में ग्रहण का काम करते है। फेस की खूबसूरती को बनाए रखने के लिए सिर्फ दांतों का साफ़ होना ही पर्याप्त नहीं है अपितु उनका चमकदार होना भी बहुत जरुरी है। अगर किसी कारणवश आपके दांतों में से भी वो वास्तविक चमक कहीं खो गई है तो परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। क्योंकि यहाँ हम आपको दांतों को चमकदार बनाने के कुछ सरल घरेलू उपायों के बारे में बता रहे है। जिनकी मदद से दांतों को पुनः सफ़ेद और चमकदार बनाया जा सकता है।

दांतों को सफ़ेद चमकदार और सुंदर बनाने के उपाय :-

ऐसे तो सभी अपने दांतों की साफ़-सफाई का पूरा ध्यान रखते है परन्तु कई बार विभिन्न वजहों से दांत पीले होने लगते है। परन्तु कुछ आसान तरीके है जिनकी वजह से उन्हें फिर से चमकाया जा सकता है। यहाँ हम आपको उन्ही उपायों के बारे में बता रहे है।Strawberry for teeth

1. स्ट्रॉबेरी :

स्ट्रॉबेरी का स्वाद बहुत अच्छा होता है यह खाने में बहुत स्वादिष्ट लगती है। लेकिन क्या आप जानते है की इसकी मदद से आप अपने दांतों को भी चमका सकते है। इसके लिए पकी हुई स्ट्रॉबेरी को पिचकाकर अपने दांतों पर रगड़ें। ऐसा करने से दांतों का पीलापन कम होगा। आप इसके लिए ब्रश का इस्तेमाल भी कर सकते है। बाद में गुनगुने पानी से कुल्ला अवश्य करें। इससे स्ट्रॉबेरी के बचे हुए पार्टिकल्स भी दांतों से निकलकर बाहर आ जाएंगे।

2. सेब :

सेब में बहुत से गुण पाए जाते है जो न केवल स्वास्थ्य अपितु त्वचा को भी बेहतर बनाने में मदद करते है। लेकिन ये आपके दाँतों के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है। इसमें मौजूद हलके एसिडिक पदार्थ दांतों की चमक वापस लाने में मदद कर सकते है। इसके लिए सेब के टुकड़े लें और उसे अपने दांतों पर रगड़ें, कुछ ही प्रयोगों में आपको फर्क महसूस होने लगेगा।

3. कोयला :दांतों में चमक

कोयला होता तो काला है परन्तु इसकी मदद से भी अपने दांतों की खोयी चमक को वापस लाया जा सकता है। आज से नहीं अपितु पिछली कई सदियों से कोयला का प्रयोग दांत चमकाने के लिए किया जाता आ रहा है। इसके लिए कोयला पीसकर उसका चूर्ण बना लें। अब इस चूर्ण से मंजन करें। आपके पीले दांत साफ़ हो जाएंगे और दांत चमकने लगेंगे।

4. बेकिंग सोडा :

बेकिंग सोडा वैसे तो अधिकतर खाना बनाने के लिए प्रयोग में लाया जाता है परंतु इसकी मदद से दांतों का पीलापन भी दूर किया जा सकता है। इसके लिए बेकिंग सोडा को थोड़े से पानी में मिलाकर पेस्ट बना लें अब इससे पेस्ट या मंजन करें। कुछ देर रगड़ने के बाद कुल्ला करके दांतों की चमक देखें। कुछ ही दिनों के इस्तेमाल से आपके दांत पहले की भांति मोती की तरह चमकने लगेंगे।

5. नमक :

आपने अक्सर ऐड में एक व्यक्ति को यह कहते हुआ सुना होगा की क्या आपके टूथपेस्ट में नमक है? जो बिलकुल गलत नहीं है। क्योंकि नमक भी दांतों का पीलापन दूर करने में मदद करता है। और साथ ही मसूड़ों में हुए इन्फेक्शन को भी दूर करने का काम करता है। इसके लिए गुनगुने पानी में थोडा सा नमक डालकर कुल्ला करें। लगातार सुबह शाम के प्रयोग से कुछ ही दिनों में दांत पहले की तरह चमकदार हो जाएँगे।

6. नींबू और संतरे का छिलका :nimbu ka chilka

नींबू और संतरे के छिलके में विटामिन सी पाया जाता है जो किसी भी तरह की गंदगी को साफ़ करने में सक्षम है। दांतों का पीलापन हटाने के लिए भी इनका प्रयोग किया जा सकता है। इसके लिए नींबू और संतरे के छिलके को या तो चबाएं या उन्हें अपने दांतों पर रगड़ें। कुछ ही दिनों के इस्तेमाल से दांतों पर असर दिखने लगेगा।

7. तुलसी :

तुलसी में बहुत से एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल गुण पाए जाते है जो दांतों और मसूड़ों से जुडी समस्यायों को ठीक करने में लाभकारी होते है। दांतों को चमकदार बनाने के लिए तुलसी के पत्तों को अपने दाँतों पर रगड़ें। दांत चमकने लगेंगे। लेकिन ध्यान रहे अधिक इस्तेमाल से दांतों की इनेमल को नुकसान भी पहुँच सकता है इसलिए तुलसी के अधिक इस्तेमाल से बचें।

8. नीम :

दांतों के लिए नीम भी तुलसी की ही तरह काम करता है। इसमें भी एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल गुण पाए जाते है जो दांतों से पूरी गंदगी हटाकर उन्हें चमकदार बनाने में मदद करते है। इसके लिए रोजाना सुबह दातुन करें, एक हफ्ते के इस्तेमाल से ही आपके दांत चमकने लगेंगे।

तो, ये थे कुछ उपाय जिनकी मदद से दांतों को चमकदार बनाया जा सकता है। लेकिन ध्यान रहे किसी भी चीज का अधिक इस्तेमाल करने से नुक्सान आप ही को भुगतना पड़ेगा। इसीलिए सबका प्रयोग सीमित मात्रा में करें।

गर्भावस्था के लक्षण

गर्भवती होने के लक्षण:-

आज कल आप प्रेग्नेंट हैं या नहीं या गर्भावस्था के लक्षण इसका पता लगाने के लिए मार्किट में बहुत सारे प्रोडक्ट्स आ गए हैं. जिनकी मदद से आप अपने मासिक धर्म न आने पर पता कर सकते हैं की आप गर्भवती हैं या नहीं. परन्तु इसके आलावा महिलाओं के अंदर कुछ ऐसे बदलाव आते हैं. जिसे देख कर आपको लगता हैं की आप गर्भवती हैं. जैसे उल्टी का आना, टेस्ट में बदलाव आना आदि.

यदि आप माँ बनने के बारे में सोच रहे हैं तो इसके लिए आपको अपना स्वस्थ ठीक रखना चाहिए. आपको मानसिक व् शारीरिक रूप से अपने आपको स्वस्थ रखना चाहिए. कई बार आपके मासिक धर्म अपने समय पर नहीं आते हैं. और आप ये सोचते है की कही आप गर्भवती तो नहीं हैं. आप इसी उधेडबुन में लगी रहती हैं के आपको मासिक धर्म क्यों नहीं आया. आपके अंदर कोई बदलाव भी नहीं आता तो आपको अपने डॉक्टर से पूछना चाहिए.

गर्भावस्था के लक्षण

आइये जानते हैं प्रेग्नेंट होने के कुछ लक्षण:-

पीरियड्स समय से न आने पर:-

गर्भवती होने का सबसे पहला लक्षण हैं आपकी माहवारी का समय पर न आना. यदि आपका मासिक धर्म समय पर आता हैं. और इस बार कुछ देर हो जाये तो आपको डॉक्टर से जरूर टेस्ट करवाना चाहिए. टेस्ट करवा के आप ये पता कर सकती है आप माँ बनने वाली हैं या नहीं.
यदि आप घर पर ही टेस्ट करना चाहती हैं तो वो भी कर सकती हैं. आप मार्किट से प्रेगनेंसी टेस्टर ला कर अपने घर पर ही पेशाब की दो बूंदों से टेस्ट कर सकती हैं. और इससे ही आपको पॉजिटिव नेगिटिव का पता चल जायेगा. और यदि आप माँ बनने वाली हैं तो ये ख़ुशी सब के साथ बाटे. यदि नहीं तो आप अपने डॉक्टर से पूछे के आपके पीरियड्स क्यों नहीं आये.

आपके व्यवहार या मूड में बदलाव का आना:-

आपके व्यवहार या मूड में बदलाव का आना भी एक तरीका हैं जिससे ये पता चलता हैं आप गर्भवती हैं या नहीं. इसमें कभी आपका कुछ करने का दिल करता हैं और कभी कुछ. कई महिलाओं को कुछ भी करने का दिल नहीं करता. कभी-कभी तो किसी भी चीज को देख कर घबराहट होने लगती हैं. इस बारे में आपको अपने पति से बताना चाहिए व् धैर्य बनाए रखना चाहिए.

सिरदर्द और कमर में दर्द होना:-

शुरूआती दिनों में कई औरतो को सिरदर्द व् कमर में दर्द की शिकायत रहती हैं. जब आप कन्फर्म हो जाये की आप प्रेग्नेंट हैं तो आपको दवाइयों का सेवन नहीं करना चाहिए. सिरदर्द की समस्या इसलिए होती हैं क्योकि शरीर के हॉर्मोन बदलते हैं. और कमर दर्द का कारण होता हैं की शरीर का वजन बढ़ने वाला होता हैं. और यदि आप इस दर्द के लिए किसी दवाई का सेवन करते हैं तो डॉक्टर का परामर्श आवश्य ले.

खाना खाने का मन न होना या कब्ज़ का होना:-

गर्भवती होने का एक लक्षण ये भी है के आपका खाना खाने का मन नहीं करता हैं. आपको खाने को देखकर कुछ होने लगता हैं. आपका कुछ चटपटा खाने का दिल करता हैं तो समझ  ले की आपके अंदर एक नन्हा मेहमान हैं. और कई बार कब्ज़ की शिकायत भी हो जाती हैं.इसका कारण ये हैं की खाने की प्रक्रिया बदलने के कारण कई बार आपकी पाचनक्रिया कमजोर हो जाती हैं. जिसके कारण आपको कब्ज़ की शिकायत होती हैं.

बार बार बाथरूम का आना:-

शुरूआती दिनों में कई बार आपको बार बार पेशाब आता हैं. क्योकि आपका शरीर गर्भवती होने के दिनों में आपका शरीर ज्यादा तरल पदार्थो को अपने शरीर से बाहर निकालता हैं. इसमें डरने की कोई बात नहीं होती. ये भी गर्भवती होने का एक लक्षण हैं.

उल्टी आना ,सांस लेने में भारीपन आना और थकान लगना:-

उल्टी आना बहुत ही आम बात होती हैं जब आपके शुरुआत के दिन होते है प्रेगनेंसी के. और कई औरतो को उल्टी पुरे नो महीने तक आती हैं. उल्टी वैसे छह महीने तक सुबह शाम को आती हैं. फिर उसके बाद हमारे शरीर की पाचनक्रिया ठीक हो जाती हैं. तो उल्टी आनी कम या समाप्त ही हो जाती हैं.
सांस लेने में भी की बार इस समय दिक्कत आती हैं. क्योंकि हमारे शरीर का वजन बढ़ता हैं. और हमे ज्यादा चलने में परेशानी होती हैं. इस कारण औरतो को सांस लेने में दिक्कत आती हैं. और एक कारण ये भी हैं की भ्रूण भी माँ से ही ऑक्सीजन लेता हैं. और इस कारण थकान की समस्या आ जाती हैं. थकान हमें वजन बढ़ने की वजह से भी हो सकती हैं.

स्तनों में भारीपन आना:

स्‍तनों में भारीपन, उनके आकार में परिवर्तन, निपल्‍स के आसपास के हिस्‍से में ज्‍यादा कालापन आना और स्‍तनों में नसों का फूलना आदि गर्भावस्‍था के लक्षण है यदि ऐसा हैं तो आप माँ बनने वाली हैं. ऐसे समय में सबसे अच्‍छी और आरामदायक ब्रा पहनें जिससे आपकी परेशानी कम हो सकें. और ये आपको शरुआत के दिनी में ही महसूस होगा.

तो ये कुछ गर्भावस्था के शुरूआती दिनों के कुछ लक्षण हैं. और यदि आप माँ बनने वाली हैं तो नियमित रूप से डॉक्टर को दिखाए.
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सुबह की इन गलतियों से खराब होता है पूरा दिन गर्भवती महिला का

अक्सर यह देखा गया है के गर्भावस्था के दौरान सुबह के समय सिकनेस यानी उलटी, सर दर्द, मिचली आदि जैसी समस्याएँ ज्यादा होती है। सुबह की इस सिकनेस के कारण गर्भवती महिला का पूरा दिन खराब हो जाता है। जिस कारण गर्भवती महिला का पूरा दिन कुछ खाने का मन नहीं करता है। प्रेगनेंसी के शुरूआती तीन महीनों में यह समस्या बहुत ज्यादा होती है क्योंकि इस समय में शरीर में बहुत तेजी से हार्मोन्स में बदलाव होता है।

हार्मोन्स में बदलाव के कारण हमे बहुत से चीजे नुकसान पहुंचाती है जिस कारण गर्भवती महिला को सुबह सुबह उलटी, सर दर्द, चक्कर आना, मिचली आदि जैसी समस्याएँ हो जाती है। आज हम आपको बताएंगे के सुबह के समय कौन सी ऐसी गलत चीजे होती है जिसे जाने अनजाने में हर गर्भवती महिला करते है जिसके कारण गर्भवती महिला का पूरा दिन हो जाता है खराब।

चाय और कॉफी

हम सभी के दिन की शुरूआती सुबह की चाय या कॉफ़ी से ही होती है। परन्तु गर्भ धारण करते ही हर महिला को अपनी इस आदत को बदलना पड़ता है। सुबह की इस चाय की आदत से गर्भवती महिला को पेट दर्द, गैस, जलन और सर दर्द जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

क्योंकि रात को सोने से लेकर सुबह तक में एक लम्बा समय होता है जिस दौरान ना हम कुछ खाते है और ना ही पीते है। सुबह उठने पर हमारा पेट पूरी तरीके से खाली होता है। इसीलिए सुबह खाली पेट चाय और कॉफ़ी के सेवन से पेट में गैस बनने लगती है। इसके अतिरिक्त चाय और कॉफ़ी में वैसे भी कैफीन की मात्रा होती है। जिसका सेवन गर्भवती महिला को ना करने की सलाह दी जाती है। अगर हम अपनी चाय और कॉफ़ी की आदत को नहीं बदलते तो हमारा दिन और मुड़ तो खराब होता ही है इसके अतिरिक्त शिशु की ग्रोथ पर भी इसका असर पड़ता है।

दूध

वैसे तो गर्भवती महिला को दूध और दूध से बनी चीजों के सेवन करने की सलाह दी जाती है। परन्तु आपश्चुरीकृत दूध कुछ महिलाओं के शरीर में पचता नहीं है। इसीलिए जो गर्भवती महिला दूध का सेवन करना चाहती है वह सिर्फ पाश्चुरीकृत दूध का ही सेवन करें।

इसके अतिरिक्त गर्भवती महिला की पाचन क्रिया धीमी हो जाती है। जिसके कारण दूध आसानी से पच नहीं पाता। इसीलिए सुबह उठकर खाली पेट दूध का सेवन कभी ना करें। पहले कुछ हल्का भोजन ले और उसके बाद ही दूध का सेवन करें।

पराँठे

भारत में ज्यादातर सभी लोगो का सुबह का नाश्ता हैवी होता है जैसे की अंडे, पराँठे आदि। परन्तु गर्भवती महिला यदि सुबह परांठो का सेवन करेगी तो पूरा दिन परेशान रहेगी। सबसे पहली बात पराँठे तेल या घी में बने होते है जिसके कारण कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ता है। परांठो का नाश्ता बहुत हैवी होता है जैसा की हम पहले भी बता चुके है के गर्भवती महिला की पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है इसीलिए इतना हैवी नाश्ता पचाना संभव नहीं हो पाता। जिस कारण गर्भवती महिला को सीने में जलन, पेट दर्द, हैवीनेस, मिचली आदि प्रोब्लेम्स का सामना करना पड़ता है। कई बार तो बहुत ज्यादा उल्टियाँ भी लग जाती है। जिस कारण पूरा दिन गर्भवती महिला कुछ और ना खा पाती है और ना ही पी पाती है, पूरा दिन और मुड़ दोनों ही खराब रहते है।

सोना

गर्भवस्था के दौरान शरीर में हार्मोन्स में बदलाव होने से बहुत सी महिलायें सुस्त हो जाती है जिस कारण वह देर तक सोने की आदत बना लेती है। जो की पूरी तरीके से गलत है सुबह देर से उठने का मतलब सुबह का नाश्ता ना करना, सुबह की वाक, मेडिसिन आदि सब चीजे मिस कर देना। इसी गलत दिनचर्या के कारण खाने, पीने, नहाने और दवाई सबका समय बदल जाता है।

असमय दवाई, खाना आदि लेने से हमारे शरीर पर इसका विपरीत प्रभाव भी पड़ता है। साथ ही इस तरह की दिनचर्या से शिशु का विकास भी प्रभावित होता है। ध्यान रखिये गर्भावस्था एक बीमारी नहीं है जिसमे आप पूरा दिन आराम करते रहे। आलस छोड़ कर अपनी पहले वाली दिनचर्या को ही निभाये। आप जो भी दिनचर्या निभाएंगी उसी के अच्छे और बुरे प्रभाव आपके शिशु पर भी दिखेंगे। अगर फिर भी आपको बहुत आलस या कमजोरी महसूस होती है तो सुबह के समय हल्की फुलकी योग और ध्यान कर सकते है। योगा को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से पहले अपने डॉक्टरों से जरूर सलाह लें।

मसालेदार नाश्ता

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के मुँह का टेस्ट भी खराब हो जाता है। जिस कारण उनका स्पाइसी खाना खाने का मन करता है। परन्तु गर्भावस्था में मुँह के स्वाद अच्छा करने के लिए मसालेदार भोजन का सेवन ना करे। सुबह का खाया हुआ मसालेदार भोजन आपको पूरा दिन परेशान रखेगा।

जिस कारण आप पूरा दिन कुछ भी नहीं खा पाएंगे। इस समय में हल्का और पौष्टिक भोजन आपके और शिशु की सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है।

गर्भावस्था में सुबह के समय हैवी फ़ूड, मसालेदार भोजन, चाय या कॉफ़ी आदि का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए। इससे हमे पुरे दिन परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस समय में अपने शिशु के सेहत का ध्यान रखते हे कम कम मात्रा में हर दो घंटों में कुछ न कुछ कहते रहना चाहिए। सुबह की शुरआत फ्रूट्स जैसे की केला, सेब या नाशपती आदि से करने चाहिए। फ्रूट्स से मिलने वाले पोटैशियम से हमे सुबह के समय होने वाली उलटी, मिचली, जी घबराना आदि से राहत मिलेगी। ज्यादा समय तक भूखे भी ना रहे। ज्यादा समय तक भूखे रहने से पेट में एसिड बनने लगता है जिस कारण हमे उलटी हो जाती है इसीलिए एसिड ना बनने दे हर थोड़ी देर में कुछ न कुछ खाते रहे।

प्रेगनेंसी के दौरान जरुरी है के किसी एक चीज अत्यधिक सेवन पर ध्यान ना देते हुए। एक संतुलित आहार ले जिससे आपको और शिशु को भरपूर पोषक तत्व मिले। गर्भावस्था में एक सहीं दिनचर्या का शिशु के सेहत पर बहुत असर पड़ता है। इसीलिए आलस त्याग कर अच्छी दिनचर्या को अपनाये। तनाव और चिंता से दूर रहने के लिए सुबह के समय हलकी फुलकी योग और मैडिटेशन यानी ध्यान आदि भी कर सकते है।

संतरे के छिलके से दूर करें त्वचा संबंधी समस्याएं!

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संतरे खाने में बड़े स्वादिष्ट होते है और उनका खट्टापन हर किसी को पसंद होता है। लेकिन क्या आप जानती है की यह फल स्वास्थ्य वर्धक होने के साथ साथ आपकी स्किन के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है। जी हां, इसमें विटामिन ए, बी, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, फॉस्फोरस, soluble fiber और एनी पोषक तत्व भी पाए जाते है जो न केवल स्वास्थ्य अपितु स्किन को भी अनेकों लाभ पहुंचाते है।

संतरा खाना सभी को अच्छा लगता है लेकिन उसके छिलके को अधिकतर लोग कूड़े में फेंक देते है जबकि यह छिलका भी हमारी स्किन के लिए बहुत लाभकारी होता है। शायद आप नहीं जानते लेकिन संतरे के छिलके के एक्सट्रेक्ट का इस्तेमाल बहुत से कॉस्मेटिक में किया जाता है। इसके अलावा संतरे के छिलकों का इस्तेमाल खाना पकाने में भी किया जा सकता है। दरअसल, इसके छिलके में एसिड और विटामिन सी की अच्छी मात्रा पाई जाती है को स्किन संबंधी बहुत सी समस्यायों को दूर करने की क्षमता रखती है। यहाँ हम आपको त्वचा संबंधी कुछ समस्याएं और उनके लिए संतरे के छिलकों से बने फेस पैक्स के बारे में बता रहे है।

त्वचा से जुड़ी समस्यायों के लिए ऐसे करें संतरे के छिलकों का प्रयोग

मुख्य सामग्री : सभी समस्यायों से निजात पाने के लिए आपको संतरे के छिलके के पाउडर की आवश्यकता होगी। जिसे आप इस प्रकार बना सकती है। संतरे के छिलकों को कडकती धुप में कुछ दिन सुखा लें। जब यह अच्छी तरह सुख जाए तो उन्हें पीसकर उसका पाउडर बना लें। आपके संतरे के छिलकों का पाउडर तैयार है।

1. त्वचा की रंगत निखारे :

त्वचा में कालापन और दाग-धब्बों के कारण स्किन की वास्तविक रंगत छिप जाती है। ऐसे में संतरे का छिलका स्किन के लिए ब्लीच का काम करेगा और स्किन टोन को बेहतर बनाने में मदद करेगा। साथ ही इसमें मौजूद विटामिन सी स्किन की फ्लेक्सिबिलिटी को भी बनाए रखेगा और डलनेस कम करके त्वचा को चमक प्रदान करेगा। इतना ही नहीं यह त्वचा की सूर्य की हानिकारक UV Rays से रक्षा करेगा।

प्रयोग के लिए –
  • 1 चम्मच शहद, 2 चम्मच संतरे के छिलके का पाउडर और 2 चम्मच सादा दही लें और तीनों को इकट्ठा मिक्स करके एक पैक बना लें।
  • अब इस पैक को अपने चेहरे और गर्दन पर लगाकर हलके हाथों से मालिश करें।
  • 20 मिनट तक रखें और उसके बाद गुनगुने पानी से अपना चेहरा साफ़ कर लें।
  • पैक का इस्तेमाल सप्ताह में 2 से 3 बार करें। स्किन टोन लाइट हो जाएगी।

2. त्वचा की उम्र कम करे :

संतरे में बहुत से एंटी ओक्सिडेंट्स पाए जाते है जो सभी ओपन पोर्स को बंद करके न्यू सेल्स को उभारने में मदद करते है। क्योंकि ओपन पोर्स त्वचा की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते है जिसके परिणामस्वरूप स्किन समय से पहले ही बूढी हो जाती है और उसमे झुर्रियां, फाइन लाइन्स और ढीलापन जैसी समस्याएं होने लगती है। इन सभी समस्यायों में संतरे के छिलका बहुत लाभकारी होता है। इसके अलावा इसमें मौजूद कडवे गुण स्किन के लिए बेहतर टोनर के रूप में काम करते है।

प्रयोग के लिए –
  • आवश्यकतानुसार शहद में 1 चम्मच संतरे के छिलकों का पाउडर और 1 चम्मच दलिया पाउडर मिक्स कर लें। और पैक बना लें।
  • अब इस पैक को चेहरे और गर्दन पर लगाएं।
  • आधा घंटे इंतजार करें और उसके बाद ठंडे पानी से चेहरा साफ कर लें।
  • बेहतर परिणामो के लिए सप्ताह में एक बार इस उपाय का इस्तेमाल करें। त्वचा पहले से बेहतर दिखने लगेगी।

3. ब्लैकहेड्स और वाइटहेड्स के लिए :

संतरे के छिलकों का पाउडर, स्किन के लिए नेचुरल स्क्रब के रूप में कार्य करता है जो त्वचा से सभी अशुद्धियों और मृत कोशिकाओं को दूर करने में मदद करता है। इस पाउडर का दरदरापन डेड स्किन को साफ़ करके ब्लैकहेड्स और वाइट हेड्स को भी दूर करता है। इसके अतिरिक्त इन छिलकों में क्लींजिंग, एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटी फंगल और एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते है जो पिंपल और एक्ने की समस्या से लड़ने मे मदद करते है।

प्रयोग के लिए –
  • संतरे के छिलके के पाउडर में थोडा सा सादा दही मिलाकर पैक बना लें।
  • अब इस पैक को अपने फेस और गर्दन पर अच्छे से लगायें और मालिश करें।
  • 15 से 20 मिनट तक रखें और उसके बाद गीले हाथों से रगड़ते हुए पेस्ट को साफ़ कर लें।
  • प्रत्येक दुसरे दिन इस उपाय का प्रयोग करने से ब्लैकहेड्स और वाइटहेड्स की समस्या हमेशा के लिए दूर हो जाएगी।

4. मुहांसों के लिए :

त्वचा में उत्पन्न होने वाला अतिरिक्त आयल, उस पर मौजूद गदंगी और ओपन पोर्स मुहांसे होने का सबसे बड़ा कारण होते है। क्योंकि रोम छिद्रों के खुले रहने के कारण उनमे लगातार गंदगी और बैक्टीरिया जाते रहते है जो इकट्ठे होकर मुहांसे का कारण बनते है। संतरे के छिलकों में सिट्रिक एसिड पाया जाता है जो इस तरह की गंदगी को दूर करके मुहांसों को हमेशा के लिए हटाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा इसमें fiber भी उच्च मात्रा में पाया जाता है जो आयल ग्लैंड के कार्य को नियंत्रित कर शरीर में विषाक्त पदार्थों और गंदगी को इकट्ठा नहीं होंगे देते।

प्रयोग के लिए –
  • इसके लिए संतरे के छिलके में थोडा सा पानी या गुलाबजल मिलाकर फेस मास्क बना लें।
  • अब इस मास्क को अपने पुरे चेहरे पर अच्छे से लगा लें।
  • कुछ देर इंतजार करें और फिर ठंडे पानी से चेहरा साफ़ कर लें।
  • नियमित रूप से इस उपाय का प्रयोग करने से चेहरे से गंदगी तो साफ़ होगी ही साथ-साथ पिंपल भी कम होंगे।

तो, ये थी कुछ सामान्य त्वचा संबंधी बीमारियाँ जिन्हें संतरे के छिलकों के पाउडर का इस्तेमाल करके कुछ ही दिनों से हमेशा के लिए दूर किया जा सकता है।

सेम की फली खाने के फायदे प्रेगनेंसी में

प्रेग्नेंट महिला को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए इसे लेकर अधिकतर गर्भवती महिलाएं परेशान हो सकती है। खासकर जो महिलाएं पहली बार माँ बन रही होती है उन्हें यह दिक्कत ज्यादा होती है। ऐसे में सेम की फली भी एक ऐसी सब्ज़ी है जिसे लेकर गर्भवती महिला के मन में सवाल आ सकता है की क्या सेम की फली प्रेगनेंसी में खाना सुरक्षित है या नहीं।

तो इसका जवाब होता है हाँ, विटामिन्स, आयरन, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट व् अन्य पोषक तत्वों से भरपूर सेम की फली का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान किया जा सकता है। तो आइये अब जानते हैं सेम की फली के कुछ बेहतरीन फायदों के बारे में जो इसका सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को मिलते हैं।

आयरन से भरपूर सेम की फली का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला के शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा को सही रखने में मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के दौरान खून की कमी के कारण होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही इससे बच्चे का विकास भी बेहतर होता है।

डाइट्री फाइबर की मात्रा भी सेम की फली में मौजूद होती है। जो प्रेग्नेंट महिला की पाचन क्रिया को मजबूत करने के साथ महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली कब्ज़, एसिडिटी, अपच, जैसी परेशानियों से बचाने में मदद करती है।

सेम की फली खाने से ब्लड में शुगर के लेवल को सही रखने में मदद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली गेस्टेशनल शुगर की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

कार्बोहाइड्रेट से भरपूर सेम की फली प्रेग्नेंट महिला के शरीर को ऊर्जा से भरपूर रखने में मदद करती है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला सेम की फली को अपनी डाइट में शामिल करती है तो इससे महिला को थकान, कमजोरी, आलस, जैसी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

प्रेग्नेंट महिला यदि सेम की फली का सेवन करती है तो इसमें मौजूद इसोफ्लेवेनॉइड्स महिला को ब्रैस्ट कैंसर जैसी समस्या से सुरक्षित रखने में मदद करते है।

मैग्नीशियम की मात्रा भी सेम की फली में मौजूद होती है। और यदि गर्भवती महिला सेम की फली का सेवन करती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला को कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल करने, हदय को स्वस्थ रखने, खून को साफ़ करने और बॉडी में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला और बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

सेम की फली में मौजूद पोटैशियम मांसपेशियों में ऐंठन की समस्या को कम करने में मदद करता है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को शरीर में दर्द जैसी समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ बेहतरीन फायदे जो प्रेग्नेंट महिला को मिलते हैं। ऐसे में इन फायदों के लिए प्रेग्नेंट महिला को सेम की फली का सेवन जरूर करना चाहिए। अगर आपको सेम की फली पसंद नहीं है तो भी प्रेगनेंसी के दौरान इसे एक बार जरूर ट्राई करें ताकि आपको इसके बेहतरीन फायदे मिल सके।

गर्भपात रोकने के घरेलू तरीके जिससे आप माँ बन सकेंगी

प्रेगनेंसी का होना जहां किसी के मन में उमंगो और सपनो को संजोने लग जाता है, वहीँ यदि शिशु की चाह रखने वाली महिला का गर्भपात हो जाता है, तो उसके सपने वहीँ टूट जाते है, कई महिलाओ को बार बार गर्भपात की समस्या होती है, जो की बिलकुल भी अच्छी बात नहीं है, बार बार गर्भपात होने के कारण प्रेगनेंसी से जुडी परेशानियां उत्त्पन्न होने लग जाती है, लेकिन यदि कुछ सावधानियां बरती जाएँ, कुछ घरेलू तरीको का इस्तेमाल किया जाएँ, या फिर यदि इस बारे में आप डॉक्टर से राय लें तो इस समस्या से बचा जा सकता है।

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माँ बनना जहां किसी महिला और उसके परिवार के लिए खुशियों से भरा लम्हा होता है, तो अनचाहा गर्भपात उनकी खुशियों को खराब कर देता है, गर्भपात होने के बहुत से कारण हो सकते है, जैसे की महिला के प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने बहुत नाजुक होते है, इसीलिए उसे अपनी अच्छे से केयर करनी चाहिए, यदि वो किसी तरह की लापरवाही, जैसे ज्यादा भागदौड़, पेट पर अधिक दबाव देना, दवाइयों का अधिक सेवन करना ऐसे कुछ काम करती है, तो इसके कारण उसके गर्भ ठहरने में समस्या उत्त्पन्न हो जाती है, इसके अलावा इसका कारण आपको किसी शारीरिक बिमारी का होना, योंन समस्या का होना, मधुमेह या थायरोइड जैसी समस्या का होना, ज्यादा वजन, और ज्यादा उम्र का होना, आदि ऐसे कुछ कारण हो सकते है, जिसके कारण महिला को गर्भपात की समस्याहो सकती है, तो आइये आज हम आपको इसके कारण और इससे बचने के कुछ घरेलू उपाय बताने जा रहे है जिनका इस्तेमाल करने से आपको इस समस्या से बचाव करने में मदद मिल सकती है।

बार बार गर्भपात होने के क्या कारण होते है:-

  • यदि महिला को शुरुआती दिनों में ही बार बार गर्भपात होता है, तो इसका कारण क्रोमोजोम का आपके शरीर में होना हो सकता है, क्योंकि यदि इसकी संख्या अधिक होती है, इसके कारण गर्भ में पल रहा भ्रूण अच्छे से विकसित नहीं हो पाता है।
  • महिला की अधिक उम्र भी इसका एक कारण हो सकता है।
  • वजन के अधिक होने के कारण भी कई महिलाओ को इस समस्या का सामना करना पड़ता है।
  • जिन महिलाओ को मधुमेह या थाइरोइड की समस्या होती है, उन्हें भी गर्भाप्त के चांस ज्यादा होते है।
  • एंटी फोस्फो लिपिड सिंड्रोम या स्टिकी रक्त सिंड्रोम भी इसका एक कारण हो सकता है, क्योंकि इसके कारण आपकी रक्त वाहिकाओ में रक्त के थक्के जमने लगते है जिसके कारण आपको गर्भपात की समस्या हो सकती है।
  • योंन संचारित रोग होने के कारण भी आपको इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • लिस्तिरेइओसिस और टोक्सोप्लाजमोसिज नामक संक्रमण होने के कारण भी महिला को ये समस्या हो सकती है।
  • महिला के गर्भपात का एक कारण उसकी खराब जीवन शैली और उसको गलत आदतों की लत का होना भी हो सकता है, जैसे की यदि कोई महिला अधिक धुम्रपान या अल्कोहल का सेवन करती है तो उसे ये समस्या हो सकती है।

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बार बार गर्भपात से बचने के उपाय:-

पीपल की बड़ी कंटकारी की जड़ का इस्तेमाल करें:-

इस उपाय को करने के लिए पीपल की बड़ी कंटकारी की जड़ को सबसे पहले अच्छे से पीस लें, उसके बाद इसे भैंस के दूध के साथ एक चम्मच लें, नियमित इस उपाय को करने से आपको बार बार गर्भपात होने की समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है।

मूली के बीजो का प्रयोग करें:-

इस उपाय को करने के लिए आप सबसे पहले मुली के बीजो को अच्छे से पीस लें, उसके बाद उसमे भीमसेनी कपूर, और गुलाब का अर्क मिला दें, उसके बाद नियमित इसे अच्छे से अपने प्राइवेट पार्ट पर लगाएं, प्रेगनेंसी के होने पर भी इस उपाय को करने से आपको गर्भ गिरने की परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

गाय के दूध और जेठीमधु का इस्तेमाल करें:-

इस उपाय को करने के लिए अप सबसे पहले एक गिलास गाय के दूध में जेठी मधु को डाल कर उबाल लें, और इसका काढ़ा तैयार करें, उसके बाद आप इस काढ़े को ठंडा करके इसका सेवन करें, आप इसका सेवन करने के साथ अपनी नाभि के नीचे की तरफ भी लगा सकते है, ऐसा करने से आपको गर्भ गिरने की परेशानी से निजात मिलने के साथ प्रेगनेंसी के समय होने वाली परेशानियों से भी बचने में मदद मिलती है।

पके हुए केले और शहद का सेवन करें:-

बार बार गर्भपात की समस्या से बचने के लिए आपको एक पके हुए केले को अच्छे से पीस कर तैयार करके उसके एक चम्मच शहद को मिलाना चाहिए, उसके बाद नियमित रूप से इसका सेवन करना चाहिए, नियमित रूप से ऐसा करने से आपको प्रेगनेंसी में होने वाली परेशानियों से बचने में मदद मिलती हैं, और साथ ही गर्भपात की परेशानी भी नहीं होती है।

हरी दूब के पंचांग का प्रयोग करें:-

हरी दूब का पंचाग मतलब, फूल, फल, पत्ती, जड़, तना, इन सबको अच्छे से पेस का एक मिश्रण तैयार करें, उसके बाद इस मिश्रण में थोड़ी मिश्री और दूध को मिला दें, इसके बाद 250 से 300 ग्राम इससे बने शरबत का सेवन प्रेगनेंसी के शुरुआती दिनों में करें आपको इसका फायदा मिलेगा, और आपको गर्भपात से बचने में मदद मिलेगी।

नागकेसर, वंशलोचन तथा मिश्री का प्रयोग करें:-

नागकेसर, वंशलोचन तथा मिश्री तीनो को बराबर मात्रा में लें, उसके बाद तीनो को अच्छे से पीस कर महीने चूर्ण तैयार करें, उसके बाद इस चूर्ण को चार ग्राम की मात्रा में एक गिलास दूध के साथ लें, आपको इसके सेवन बार बार गर्भपात होने की समस्या से निजात पाने में मदद मिलेगी।

अशोक के पेड़ की छाल का इस्तेमाल करें:-

अशोक के पेड़ की छाल का इस्तेमाल करने से आपको बार बार गर्भपात होने की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है, इसके लिए आप अशोक के पेड़ की छाल को लें और उसका क्वाथ बना लें, और इसका नियमित रूप से सेवन करें आपको इसका फायदा खुद ही दिखाई देगा।

डॉक्टर से राय लें:-

इन सब तरीको का इस्तेमाल करने के साथ यदि आप किसी शारीरिक बिमारी या गर्भाशय से सम्बंधित किसी समस्या के कारण बार बार गर्भपात की समस्या से जूझ रहे है तो आपको इस विषय में एक बार डॉक्टर से जरुर मिलना चाहिए और इस परेशानी का इलाज करके जितना जल्दी हो सकें इस समस्या से राहत पानी चाहिए।

बार बार गर्भपात की समस्या से बचने के अन्य उपाय:-

  • महिला को अपने खान पान का ध्यान रखने चाहिए क्योंकि कई बार शरीर में पोषक तत्वों की कमी और कमजोरी के होने के कारण आपको ये समस्या हो सकती है।
  • ज्यादा भागदौड़ नहीं करनी चाहिए खासकर शुरुआत के दिनों में आराम करना चाहिए।
  • सम्बन्ध बनाने के लिए डॉक्टर से राय लेनी चाहिए, और जितना हो सकें शुरुआती दिनों में इससे परहेज रखना चाहिए।
  • पेट के भार कोई भी काम नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसके कारण आपके गर्भाशय पर दबाव पड़ता है जिसके कारण आपको परेशानी हो सकती है।
  • महिला को ऐसे किसी भी पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए जिसमे विटामिन सी की मात्रा अधिक होती है, जैसे पपीता, अनानास आदि।
  • अधिक दवाइयों का सेवन नहीं करना चाहिए, और प्रेगनेंसी में तो बिना किसी डॉक्टर की सलाह के तो बिलकुल ही नहीं लेनी चाहिए।
  • गरम तासीर वाली चीजो का सेवन भी अधिक नहीं करना चाहिए जैसे की ड्राई फ्रूट आदि।
  • यदि आपको पेट में दर्द या कोई और शारीरिक परेशानी लगे तो बिना देरी किये आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

तो ये कुछ कारण है जिनकी वजह से आपको बार बार गर्भपात होता है, इसके अलावा आपको इस समस्या का डॉक्टर से मिलकर समाधान करना चाहिए, ताकि आपकी इस परेशानी का हल हो सकें, और आपके लिए ऊपर दिए गये कुछ घरेलू तरीको का इस्तेमाल करके भी आप गर्भपात की समस्या से राहत पा सकती है।

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प्रेगनेंसी के इन लक्षणों को न करें अनदेखा

प्रेगनेंसी के इन लक्षणों को न करें अनदेखा, गर्भवती महिला को इन लक्ष्यों को अनदेखा नहीं करना चाहिए, प्रेगनेंसी टिप्स, गर्भावस्था के दौरान इन बातों का ध्यान रखें, गर्भावस्था के इन लक्षणों को न करें अनदेखा

प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी महिलाएं तरह तरह की समस्याओं से गुजरती है, ऐसे में महिला कुछ परेशानियां तो सहन कर लेती है। लेकिन कभी कोई परेशानी बढ़ जाए तो महिला को उसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि गर्भधारण के बाद बरती गई थोड़ी सी लापरवाही गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु पर भी बुरा असर डाल सकती है। ऐसे में गर्भवती महिला को इसका खास ख्याल रखना चाहिए। तो लीजिये अब हम आपको कुछ ऐसे ही लक्षणों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हे प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को अनदेखा नहीं करना चाहिए।

ब्लीडिंग का होना

प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में कुछ महिलाओं को हल्के खून के धब्बे अंडरवीअर में दिखाई देते हैं, ऐसा तब होता है जब भ्रूण गर्भाशय में प्रत्यारोपित होता है। लेकिन यदि महिला को ब्लीडिंग महसूस हो तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए, क्योंकि प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में ऐसा होना गर्भपात का लक्षण हो सकता है।

उल्टी अधिक आना

ज्यादातर महिलाओं को प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में उल्टी होती है, लेकिन यदि उल्टी की समस्या ज्यादा हो, कुछ खाया पीया न पच रहा हो। खाते ही उल्टी आ जाये तो इसे अनदेखा न करते हुए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए क्योंकि अधिक उल्टी होने के कारण पेट में खिंचाव पड़ता है, डायरिया या शरीर में पानी की कमी हो सकती है और गर्भवती महिला के साथ शिशु को भी परेशानी हो सकती है।

पेट या पीठ में दर्द

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान हल्का पेट या पीठ में दर्द होना सामान्य बात होती है, लेकिन यदि प्रेगनेंसी में किसी समय मासिक धर्म जैसे दर्द का अनुभव पेट में हो, पेट के निचले हिस्से में दर्द अधिक हो, पीठ में ज्यादा दर्द हो तो यह प्रसव का लक्षण हो सकता है। ऐसे में इसे कण्ट्रोल करने की बजाय या उपचार करने की बजाय जितना जल्दी हो सके डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

प्राइवेट पार्ट से सम्बंधित समस्या

प्राइवेट पार्ट में खुजली, जलन, यूरिन से बदबू का आना, प्राइवेट पार्ट में सूजन का महसूस होना, यूरिन के रंग में बदलाव आना, आदि लक्षण को भी प्रेगनेंसी के दौरान अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह यूरिन इन्फेक्शन के लक्षण हो सकते हैं। और यदि यह इन्फेक्शन बढ़ जाता है तो इसके कारण शिशु को भी समस्या हो सकती है। साथ ही कभी प्राइवेट पार्ट से यूरिन की तरह गाढ़ा चिपचिपा पदार्थ अधिक मात्रा में निकले तो इसे भी अनदेखा नहीं कारण चाहिए, क्योंकि यह एमनियोटिक फ्लूड हो सकता है, यह महिला के प्रसव का संकेत देता है।

बुखार

गर्भवती महिला को ज्यादा खांसी, जुखाम, बुखार आदि का होना भी फ्लू का लक्षण हो सकता है। ऐसे में आपको बॉडी के तापमान बढ़ने पर तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए, ताकि समस्या को बढ़ने से पहले ही कण्ट्रोल में करने में मदद मिल सके।

गर्भ में शिशु की हलचल

यह बताना थोड़ा मुश्किल होता है की शिशु कितनी बार दिन में गर्भ में हलचल करता है, लेकिन यदि आपको कभी ऐसा महसूस हो की काफी समय से शिशु ने गर्भ में हलचल नहीं की है। तो इस लक्षण को भी प्रेगनेंसी के दौरान अनदेखा नहीं करना चाहिए, और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

अन्य लक्षण

यदि गर्भवती महिला को आँखों से धुंधला दिखाई दें, सर में दर्द हो, बेहोशी, चक्कर, ब्लड प्रैशर बढ़ने या कम होने लगे, दिल की धड़कन तेज हो, सूजन की समस्या अधिक हो तो इसे भी गर्भवती महिला को अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि यह महिला के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।

तो यह हैं कुछ लक्षण जिन्हे प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को बिल्कुल भी इग्नोर नहीं करने चाहिए। क्योंकि यदि महिला थोड़ी सी भी लापरवाही करती है तो इससे गर्भ में शिशु को समस्या का सामना करना पड़ सकता है।