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आयुर्वेद में देसी घी खाने के फायदे

ज्यादातर लोग गाँव में खाने में देसी घी का ही इस्तेमाल करते हैं और पुराने समय में सभी लोग देसी घी को ही सबसे बेहतर मानते थे। लेकिन आज कल के लोग देसी घी का सेवन करने से बचते हैं क्योंकि उन्हें ऐसा लगता है की देसी घी खाने से उनका वजन बढ़ जायेगा। जबकि आयुर्वेद के अनुसार सही मात्रा में देसी घी का सेवन आपके शरीर के लिए कोई परेशानी पैदा नहीं करता है। बल्कि आपको स्वस्थ व् फिट रखने में मदद करता है।

क्योंकि इसमें पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। लेकिन आजकल बाजार में मिलने वाले नकली व् मिलावटी देसी घी के कारण आपको ऐसी दिक्कतें हो सकती है। जबकि घर में बनाया गया देसी घी या बाजार से मिलने वाले शुद्ध देसी घी आपके लिए बहुत फायदेमंद होता है। तो आइये अब आयुर्वेद में देसी खाने के कौन से फायदे हैं जो आपको देसी घी का सेवन करने से मिलते हैं उनके बारे में जानते हैं।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है: आयुर्वेद के अनुसार यदि कोई व्यक्ति रोजाना सुबह खाली पेट शुद्ध देसी घी का सेवन करता है। तो ऐसा करने से उनकी इम्युनिटी बढ़ती है क्योंकि देसी घी में एंटी ऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं। यदि आप भी ऐसा करते हैं तो ऐसा करने से आपको बिमारियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को पोषण देता है: आयुर्वेद के अनुसार घी का सेवन करने से आपकी यादाश्त और बुद्धि को बढ़ावा मिलता है। साथ ही यह आपके मानसिक और भावनात्मक असंतुलन को दूर रखने के लिए फायदेमंद होता है।

पोषक तत्वों के बेहतर तरीके से अवशोषित करता है: घी का सेवन करने से शरीर में पोषक तत्वों को अवशोषित करने की क्षमता को बढ़ती है जिससे आपको फिट रहने में मदद मिलती है।

एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण: घी का सेवन करने से एलर्जी, गठिया जैसे रोगो को नियंत्रित करने में मदद मिलती है, क्योंकि इसमें एंटी इंफ्लेमेटरी एजेंट मौजूद होते हैं।

गले की समस्या दूर होती है: यदि आपको खांसी, गले में खराश, गले में दर्द की समस्या है तो आपको दो चम्मच देसी घी में एक काली मिर्च, थोड़ी मिश्री, थोड़ा सा अदरक के रस को मिलाकर सेवन करना चाहिए। ऐसा करने से आपको गले से जुडी समस्या को दूर करने में मदद मिलती है।

खांसी का इलाज: चाहे कितनी ही पुरानी खांसी हो आयुर्वेद के अनुसार यदि आप एक चम्मच देसी घी को गर्म करके उसमे गुड़ को मिलाकर उसका सेवन करते हैं। तो ऐसा करने से आपको खांसी से बचे रहने में मदद मिलती है।

बवासीर का इलाज: रोजाना रात को सोने से पहले एक कप दूध को गुनगुना करके उसमे एक चम्मच देसी घी मिलाकर सेवन करने से बवासीर की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है। और खुनी बवासीर की समस्या से बचने के लिए आपको थोड़े से काले तिल का पाउडर और मिश्री भी मिलानी चाहिए।

आँखों की रौशनी: एक चम्मच देसी घी में थोड़ी सी मिश्री मिलाकर रोजाना सेवन करने से आँखों की रौशनी बढ़ती है।

दुबलेपन की समस्या: नियमित रूप से शुद्ध देसी घी में चीनी मिलाकर खाने से दुबलेपन को दूर करके आपके वजन को सही रखने में फायदा होता है।

हिचकी: यदि आपको हिचकी आ रही है तो आपको उसी समय एक चम्मच देसी घी खाना चाहिए ऐसा करने से आपकी हिचकी रुक जाती है।

माइग्रेन का इलाज: यदि आपको माइग्रेन की समस्या है तो रोजाना अपने नाक में दो चम्मच देसी घी की बूंदे डालें। ऐसा करने से आपको माइग्रेन की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। आप चाहे तो देसी घी में केसर के रेशे भी मिला सकती है और आपको यह उपाय सुबह खाली पेट करना है।

कोलेस्ट्रॉल: देसी घी का सेवन करने से शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को घटाने में मदद मिलती है।

कब्ज़ का इलाज: कब्ज़ की समस्या से निजात पाने के लिए रात को सोने से पहले एक चम्मच देसी एक गिलास गर्म दूध में डालकर पीएं। ऐसा करने से सुबह उठकर आपका पेट अच्छे से साफ़ हो जाता है।

हदय स्वस्थ रहता है: देसी घी का सिमित मात्रा में सेवन करने से हदय भी स्वस्थ रहता है क्योंकि इसमें विटामिन के प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है।

हड्डियां मजबूत होती है: देसी घी का रोजाना सेवन आपकी हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करता हैं। खासकर बच्चों के बेहतर विकास के लिए बच्चों की डाइट में देसी घी को जरूर शामिल करना चाहिए।

पाचन क्रिया होती है बेहतर: बिना गर्म किये देसी घी का सेवन करने से पाचन क्रिया को दुरुस्त रहने में मदद मिलती है। साथ ही इससे बॉडी में फैट भी नहीं जमता जिससे वजन के ज्यादा बढ़ने की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

नशा खत्म होता है: यदि किसी व्यक्ति को बहुत ज्यादा नशा हो गया हो तो उसे दो चम्मच गुनगुने देसी घी में दो चम्मच चीनी मिलाकर देनी चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति का नशा बहुत जल्दी उतारने में मदद मिलती है।

फ़ूड पोइज़निंग: यदि किसी को फ़ूड पोइज़निंग की समस्या हो गई है तो दिन में तीन से चार बार एक चम्मच देसी घी का सेवन करें। ऐसा करने से फ़ूड पोइज़निंग की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है।

स्किन के लिए है फायदेमंद: घी खाने से तो स्किन को पोषण मिलता ही है लेकिन स्किन की घी से मालिश करने से भी स्किन की कोमलता को बरकरार रखने में मदद मिलती है, साथ ही घी से मालिश करने से भी शरीर को मजबूती मिलती है।

जलने पर करें घी का इस्तेमाल: आयुर्वेद के अनुसार यदि आपके शरीर का कोई हिस्सा जल गया है तो तुरंत वहां पर घी लगाने से जलन से रहता मिलने के साथ स्किन फूलने की समस्या से भी बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो देसी घी का सेवन करने से आपको मिलते हैं। लेकिन ध्यान रखें की देसी घी खाने के बेहतरीन फायदों के लिए आपको शुद्ध देसी घी का ही सेवन करना चाहिए।

प्रेग्नेंट महिला को सर्दी खांसी से बचना है तो यह जरूर करें

गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण इम्युनिटी कमजोर पड़ जाती है। जिसके कारण इन्फेक्शन, फ्लू आदि की समस्या होने खतरा बढ़ जाता है। साथ ही यदि आप किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आते हैं जिसे सर्दी खांसी की समस्या है। या फिर मौसम में बदलाव हो रहा है तो इसके कारण सर्दी, खांसी, जुखाम जैसी परेशानी बहुत जल्दी प्रेग्नेंट महिला को हो सकती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की जरुरत होती है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान सेहत सम्बन्धी समस्या का अधिक होना गर्भवती महिला के साथ शिशु को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

प्रेगनेंसी के दौरान सर्दी खांसी से बचना है तो यह जरूर करें

गर्भवती महिला यदि सर्दी, खांसी, जुखाम, जैसी परेशानी से प्रेगनेंसी के दौरान बचे रहना चाहती है। तो इसके लिए प्रेग्नेंट महिला को अपनी डाइट में कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए। जिससे उसे इस परेशानी से बचाव होने में मदद मिल सके। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम कुछ ऐसे ही टिप्स के बारे में बताने जा रहे हैं। जो प्रेग्नेंट महिला को सर्दी खांसी जैसी समस्या से बचाव करने में मदद करते हैं।

शहद

  • प्रेग्नेंट महिला यदि रोजाना एक गिलास दूध को गुनगुना करके उसमे आधा चम्मच शहद का डालकर पीती है।
  • तो इससे प्रेग्नेंट महिला को गले में खराश, सर्दी, खांसी जैसी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • निम्बू के रस के साथ शहद का सेवन करने से भी इस परेशानी से राहत पाने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में सर्दी खांसी से बचाव के लिए पीएं गुनगुना पानी

  • गर्भवती महिला को ज्यादा गर्म नहीं बल्कि गुनगुना पानी नियमित पीना चाहिए।
  • इससे शरीर में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है।
  • साथ ही इससे गले को आराम भी मिलता है जिससे सर्दी खांसी जैसी परेशानी से प्रेगनेंसी के दौरान बचे रहने में मदद भी मिलती है।
  • इसके अलावा दिन भर में पानी की भरपूर मात्रा लेनी चाहिए क्योंकि बॉडी के हाइड्रेट रहने से भी इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

चाय पीएं

  • कभी कभी प्रेग्नेंट महिला को अदरक, तुलसी, शहद आदि डालकर एक कप चाय का बनाकर पीना चाहिए।
  • क्योंकि यह चाय भी सर्दी के कारण होने वाली परेशानी से प्रेग्नेंट महिला को बचाने में मदद करती है।
  • लेकिन इस बात का ध्यान रखें की चाय में अदरक, तुलसी की मात्रा का ध्यान रखें।

भाप लें

  • यदि प्रेग्नेंट महिला को कभी ऐसा महसूस होता है की उसे सर्दी खांसी की समस्या हो रही है।
  • तो महिला को भाप लेना चाहिए, भाप लेने से इस समस्या को बहुत जल्दी खत्म किया जा सकता है।

प्रेगनेंसी में सर्दी खांसी से बचने के लिए खाएं लहसुन

  • लहसुन में एंटी वायरल गुण मौजूद होते हैं जो प्रेग्नेंट महिला की सर्दी खांसी की समस्या को दूर करने में मदद करते है।
  • साथ ही यदि प्रेग्नेंट महिला रोजाना एक कली लहसुन की खाती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला को सर्दी खांसी की समस्या से बचे रहने में भी मदद मिलती है।
  • यदि आप कच्चा लहसुन नहीं खा पाती हैं तो आपको सब्जियों में लहसुन डालकर उसका सेवन करना चाहिए।

खाने पीने पर ध्यान दें

  • सर्दी खांसी की समस्या से बचाव के लिए महिला को अपने खान पान का अच्छे तरीके से ध्यान रखना चाहिए।
  • ताकि प्रेग्नेंट महिला के इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने में मदद मिल सके।
  • जिससे महिला को सर्दी खांसी व् अन्य किसी भी तरह के संक्रमण से बचे रहने में मदद मिल सके।
  • और इसके लिए प्रेग्नेंट महिला को अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियों, फलों, ड्राई फ्रूट, दालों आदि को भरपूर मात्रा में शामिल करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ खाद्य पदार्थ जिनका सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को सर्दी खांसी की समस्या से बचने में मदद मिलती है। तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और प्रेगनेंसी के दौरान सर्दी खांसी की परेशानी से बचना चाहते हैं। तो आपको भी इन खाद्य पदार्थों का सेवन जरूर करना चाहिए।

गर्मियों में जुराब और जूते से बदबू नहीं आएगी अगर करेंगे ये उपाय

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जूते-जुराब से बदबू आना

आपने अक्सर महसूस किया होगा की कुछ लोगों के पैरों से बहुत बदबू आती है। ऐसा अधिकतर उन लोगों के साथ होता है जो लंबे समय तक जूते पहन कर रखते हैं या जिनके पैरों में बहुत अधिक पसीना आता है। यह समस्या अधिकतर गर्मियों के मौसम में होती है।

पैरों से बदबू क्यों आती है?

दरअसल, गर्मियों के दिनों में पैरों के आस-पास गर्मी बहुत रहती है और हर तरफ पैक होने के कारण जूतों में नमी आ जाती है। आपने भी अक्सर देखा होगा की कुछ दूर पैदल चलने के बाद जब भी जूते या कोई बंद चप्पल पैरों से निकालते हैं तो पैर हल्के गीले हो जाते हैं। ऐसा फुटवियर के अंदर मौजूद गर्मी के कारण उत्पन्न हुई नमी की वजह से होता है। जूतों के अंदर नमी और गर्मी की वजह से पैरों में बदबू पैदा करने वाले बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। और पैरों से बदबू आने लगती है।

कई बार इस बदबू के कारण फ्रैंड्स, रिश्तेदारों और समाज के सामने शर्मिंदा भी होना पड़ता है। लेकिन अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्यूंकि आज हम आपको कुछ खास उपाय बता रहे हैं जिनकी मदद से गर्मियों में जूते और जुराब से आने वाली बदबू को दूर किया जा सकता है।

जूतों की बदबू दूर करने के उपाय

मोजों की सफाई

जूतों के कारण पैरों से आने वाली बदबू को दूर करने के लिए आपको मोजों की साफ-सफाई का खास ध्यान होगा। क्यूंकि पैरों से बदबू आने का एक कारण मोजों की गंदगी भी होती है। इसीलिए हर रोज अपने सॉक्स धोएं और वैसे मोजों का इस्तेमाल करें जो पैरों में आने वाले पसीने को सोख ले। अगर आप कपडे के जूतों का इस्तेमाल करते हैं तो जूतों को भी कुछ दिनों बाद धोएं।

जूतों की सफाई

पैरों से आने वाली बदबू को दूर करना है तो आपको अपने जूतों की सफाई पर भी खास ध्यान रखना होगा। इसके लिए रोज जूते उतारने के बाद उन्हें धूप में रख दें। इससे जूतों में मौजूद बैक्टीरिया को दूर करने में मदद मिलेगी। और जूतों का सोल और अंदर का गीला कपड़ा भी अच्छे से सूख जाएगा और बदबू नहीं आएगी। अगर आप रोज नहीं सूखा सकते, तो सप्ताह में एक दिन जूतों को धूप में जरूर सुखाएं। और कोशिश करें की आपके पास 2 जोड़ी जूते हों जिन्हे आप बदल-बदलकर पहन सके।

बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करें

जूतों की बदबू को दूर करने के लिए आप बेकिंग सोडा का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए पानी में बेकिंग सोडा मिलाकर घोल बना लें। अब इस पानी में बदबू वाले जूतों को भिगो दें। कम से कम 20 मिनट के लिए जूतों को पानी में डालकर रखें और उसके बाद साफ़ पानी से धोकर सूखा लें। अगर आपके पास समय नहीं है तो रात में जूतों में बेकिंग पाउडर डालें और रातभर ऐसे ही रहने दें। सुबह साफ़ कपडे से जूतों को साफ़ कर लें।

सफेद सिरके का प्रयोग करें

जूते-जुराब की बदबू को दूर करने के लिए सफेद सिरके का इस्तेमाल करें। इसके लिए आप सफेद सिरके के पानी में जूतों को भिगोकर धो सकते हैं। या जूतों के अंदर सफेद सिरका छिड़ककर कपडे से साफ़ कर सकते हैं। इससे जूते या चप्पल से आने वाली स्मेल दूर हो जाएगी।

फैब्रिक सॉफ्टनर / कंडीशनर शीट

जूतों की बदबू दूर करने के लिए फैब्रिक सॉफ्टनर या कंडीशनर शीट का इस्तेमाल कर सकते है। ये शीट जूतों को अच्छी खुश्बू देने के साथ-साथ पैरों की नमी को दूर करने में भी मदद करता है। प्रयोग के लिए एक या दो फैब्रिक फ्रेशनर शीट अपने जूतों में लगा दें। ये आपको किसी भी ऑनलाइन स्टोर पर मिल जाएगी।

देवदार की लकड़ी का सोल

जूतों से आने वाली बदबू का एक कारण सोल की नमी होता है। जिसके चलते बदबू फैलाने वाले बैक्टीरिया पनपते रहते हैं। ऐसे में देवदार की लकड़ी आपके लिए फायदेमंद हो सकती है। इसके लिए देवदार की लड़की का सोल खरीदे। इसमें एंटीफंगल गन होते हैं जो बदबू दूर करने में मदद करते हैं। देवदार की लकड़ी की खुशबू बदबू को दूर करके बैक्टीरिया की वृद्धि को भी रोकती है।

खट्टे फलों का छिलका

अगर आप ऊपर बताए गए उपायों का इस्तेमाल नहीं कर सकते तो खट्टे फलों जैसे संतरा, मौसमी या नींबू के छिलके से भी जूतों की बदबू दूर कर सकते हैं। इन छिलकों में फ्रेशनेस होने के साथ-साथ खुशबू भी आती है। जूते-जुराब की बदबू दूर करने के लिए ताजे खट्टे फलों के छिलके रातभर जूतों में रखकर छोड़ दें। जूतों का प्रयोग करने से पहले उन्हें हटा लें। इससे जूतों में खुशबू आएगी।

लैवेंडर एसेंशियल आयल

एसेंशियल आयल का इस्तेमाल करके भी जूतों की बदबू को दूर किया जा सकता है। इसके लिए लैवेंडर आयल बेस्ट रहेगा। प्रयोग के लिए, जूते के सोल में एक या दो बूंद लैवेंडर आयल डाल लें। जूते-जुराब से खुशबू आने लगेगी।

एंटीबैक्टीरियल स्प्रे

जूते-जुराब के कारण पैरों से आने वाली बदबू को दूर करने के लिए एंटी-फंगल या एंटी-बैक्टीरियल स्प्रे का इस्तेमाल करें। ये आपको किसी भी दवा किराने या मेडिकल की दूकान पर मिल जाएगा। पैरों में बदबू के साथ कोई और समस्या हो तो पाउडर का इस्तेमाल करने से पूर्व डॉक्टरी सलाह जरूर लें।

खुले फुटवियर पहनें

अगर पैरों में बहुत ज्यादा पसीना आता है और उसके कारण बदबू आती है तो कोशिश करें की खुले फुटवियर पहनें। बंद फुटवियर पहनने से भी पैरों में बदबू अधिक आती है। इससे पैरों को तो आराम मिलेगा ही साथ-साथ पैरों में आने वाला पसीना भी तुरंत सुख जाएगा।

तो दोस्तों, ये कुछ खास उपाय हैं जिन्हे अपनाकर जूते-जुराब के कारण पैरों से आने वाली बदबू को दूर किया जा सकता है।

40 की उम्र में प्रेग्नेंट होने के लिए यह करें

चालीस की उम्र में प्रेग्नेंट होने के लिए यह करें, प्रेग्नेंट होने के लिए चौबीस से अठाइस साल सबसे सही उम्र होती है। उसके बाद जैसे जैसे उम्र बढ़ती है वैसे वैसे न केवल महिला को प्रेग्नेंट होने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। बल्कि यदि महिला गर्भधारण कर भी लेती है तो प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी परेशानियां भी आ सकती है। ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि एक उम्र के बाद अंडाशय में अंडे बनने कम होने लगते हैं साथ ही फर्टिलिटी रेट में भी गिरावट आने लगती है।

लेकिन ऐसा भी नहीं है इस इस उम्र में महिला माँ नहीं बन सकती है। बल्कि यदि आप कुछ बातों का ध्यान रखती है तो इससे आपकी प्रेगनेंसी के चांस बढ़ाने के साथ प्रेगनेंसी में आने वाली कॉम्प्लीकेशन्स को भी कम करने में मदद मिलती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की 40 की उम्र में प्रेग्नेंट होने के लिए महिला को क्या करना चाहिए।

करवाएं सभी जांच

  • यदि आप प्रेग्नेंट होना चाहती है लेकिन आपकी उम्र चालीस के आस पास है तो ऐसे में सबसे पहले महिला को अपनी पूरी बॉडी की डॉक्टरी जांच करवानी चाहिए।
  • ताकि महिला को कोई शारीरिक समस्या तो नहीं है या ऐसी कोई समस्या तो नहीं है जिससे महिला की प्रेगनेंसी में दिक्कत आए, इसके बारे में पता चल सके।
  • और यदि कोई समस्या है तो उसका उपचार करवाएं ताकि आपकी प्रेगनेंसी में आ रही परेशानियों को दूर करने में मदद मिल सके।
  • और चालीस की उम्र में भी आपको प्रेगनेंसी का सुख मिल सके।
  • साथ ही यदि आपके माँ बनने में कोई समस्या है तो आप मेडिकल द्वारा दी गई तकनीकें जैसे की आईवीएफ, आईयूआई आदि का इस्तेमाल करके भी प्रेग्नेंट हो सकती है।

चालीस की उम्र में प्रेग्नेंट होने के लिए अपने ओवुलेशन पीरियड की सही जानकारी लें

  • चालीस की उम्र के बाद यदि आप माँ बनने के लिए ट्राई कर रही है तो इसके लिए अपने सही ओवुलेशन पीरियड के बारे में जानें।
  • क्योंकि ओवुलेशन पीरियड वो समय होता है जब महिला के गर्भधारण के चांस सबसे अधिक होते हैं।
  • इसके अलावा यदि आपको अपने सही ओवुलेशन पीरियड का पता नहीं चल पा रहा है तो इसके लिए डॉक्टर से राय लें।
  • यदि आप सही ओवुलेशन पीरियड में अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध बनाती है तो इससे चालीस की उम्र में भी आप आसानी से गर्भधारण कर सकती है।

ज्यादा से ज्यादा सम्बन्ध बनाएं

  • चालीस की उम्र में माँ बनने के लिए यदि आप ट्राई कर रही है तो आपको अपने पार्टनर के साथ रोजाना सम्बन्ध बनाने चाहिए।
  • ताकि अंडे और शुक्राणु के मिलन के चांस को बढ़ाने में मदद मिल सके।
  • और जितनी बेहतर तरीके से और जितना ज्यादा आप सम्बन्ध बनाती है उतना ही निषेचन के चांस बढ़ते हैं।
  • जिससे महिला को गर्भधारण करने में मदद मिलती है।
  • और यदि घर में आपको समय नहीं मिल पाटा है तो आप थोड़े दिन अपने पति के साथ बाहर घूमने जाएँ।

तनाव नहीं लें

  • प्रेग्नेंट होने के लिए आपको एक बात का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।
  • और वो यह हैं की किसी भी बात को लेकर आप मानसिक रूप से परेशान न रहे।
  • क्योंकि तनाव आपकी प्रेगनेंसी के चांस को कम कर सकता है।
  • और यदि आप मानसिक रूप से रिलैक्स रहना चाहती है तो इसके लिए घूमने जाएँ, मैडिटेशन करें, अकेली न रहें आदि।

चालीस की उम्र में प्रेग्नेंट होने के लिए दिनचर्या का ध्यान रखें

  • चालीस की उम्र में माँ बनने के लिए आपको इस बात का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।
  • की आपकी दिनचर्या बहुत अच्छी होनी चाहिए, जैसे की खान पान समय से लें।
  • पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करें।
  • भरपूर नींद लें।
  • व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
  • पानी का भरपूर सेवन करें।
  • नशीले पदार्थों के सेवन से दूर रहें।
  • वजन को नियंत्रित रखें न तो वजन को जरुरत से ज्यादा बढ़ने दे न ही कम होने दें।
  • यदि आप अपनी दिनचर्या को बेहतर रखती हैं तो इससे आपको स्वस्थ रहने में मदद मिलती है, और जितना महिला स्वस्थ रहती है उतना महिला की प्रेगनेंसी के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ बातें जिनका ध्यान महिला को चालीस की उम्र में गर्भवती होने पर रखना चाहिए। ताकि महिला के गर्भधारण के चांस को बढ़ाने में मदद मिल सके।

वैलेंटाइन डे सेलिब्रेट करने के शानदार तरीके

फ़रवरी का महीना दुनिया के हर प्रेमी जोड़े के लिए बेहद खास महत्त्व रखता है. क्योंकि सालभर में केवल एक ही महीना ऐसा होता है जिसमे वे अपने प्रेमी को अपने दिल की बात बताते है. महीने के पहले हफ्ते की 7 तारीख़ से शुरू होने वाला वैलेंटाइन वीक कोई कपल नहीं भूलता. 7 फ़रवरी से 14 फ़रवरी तक चलने वाला यह वीक प्रेमी जोड़े के लिए किसी त्यौहार से कम नहीं होता. जिसमे पुरे 7 दिन अलग-अलग तरीकों से अपने प्यार का इजहार किया जाता है.

इस वीक में आने वाले सभी दिनों और उनके महत्त्व की जानकारी हम आपको आगे देंगे. लेकिन सबसे पहले बात करते है इस वीक के सबसे आखिरी दिन यानी वैलेंटाइन्स डे की. प्यार के नाम फ़रवरी का यह हफ्ता वैलेंटाइन्स वीक के नाम से भी जाना जाता है. जिसके अंतिम दिन यानी 14 फ़रवरी को वैलेंटाइन्स डे मनाया जाता है. इस दिन प्रेमी एक दुसरे को अपने दिल की बातें बताते है और अपने प्यार का इजहार करते है. जबकि कुछ इस दिन अपनी प्रेमिका/प्रेमी को गिफ्ट, सरप्राइज आदि देकर उन्हें खुश करने का प्रयास करते है. इसके साथ ही वे अपने प्रेमी/प्रेमिका को यह एहसास भी दिलाते है की वो उनसे कितना प्यार करते है.

दुनिया के लगभग जार प्रेमी जोड़े को 14 फ़रवरी की तारीख बहुत अच्छे से याद रहती है क्योंकि इस दिन वे सभी वैलेंटाइन्स डे सेलिब्रेट करते है लेकिन अक्सर प्रॉब्लम की बात यह होती है की बहुत से लोगो को ये पता ही नहीं होता की वैलेंटाइन डे कैसे मनाए या वैलेंटाइन डे कैसे सेलिब्रेट करें. और उनको वैलेंटाइन डे को दिखाने का अच्छा तरीका तक पता ही नहीं होता जिसकी वजह से उनके वैलेंटाइन डे का पूरा मजा किरकिरा हो जाता है.

यदि आप भी एक प्रेमी जोड़ा है या आपने बॉयफ्रेंड/गर्लफ्रेंड के साथ वैलेंटाइन डे सेलिब्रेट करना चाहते है लेकिन आपको उसका कोई अच्छा तरीका नहीं पता तो परेशान न हो. क्योंकि आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स देने जा रहे है जिससे आप अपने वैलेंटाइन्स डे को अच्छे तरीके से मना पायेंगे. ये भी बता दें की यह टिप्स केवल बॉयफ्रेंड और गर्लफ्रेंड के लिए ही नहीं बल्कि हस्बैंड और वाइफ के लिए भी अपनाई जा सकती है. जिनके द्वारा आप अपने शादीशुदा रिश्ते को भी मजबूत बना सकते है.

वैलेंटाइन डे कैसे मनाएं?

ऐसे तो बहुत से तरीके है जिनसे आप अपने वैलेंटाइन डे को स्पेशल बना सकते है लेकिन उन सभी के लिए आपको हजारों रूपए खर्च करने पड़ते है. इसीलिए आज हम आपको वैलेंटाइन डे सेलिब्रेट करने के कुछ ऐसे आसन और सामान्य तरीके देने जा रहे है जिन्हें आप आराम से अपने घर पर भी सेलिब्रेट कर सकते है और इनके लिए आपको ज्यादा पैसे खर्च करने की भी जरूरत नहीं है.

पहले के समय में भारत में ये सब नहीं हुआ करता है क्योंकि यह एक वेस्टर्न कल्चर है लेकिन आजकल क्या वेस्टर्न और क्या indian सभी इसे अपने लाइफ में सम्मिलित करने लगे है. तो उस हिसाब से आपको भी अपना वैलेंटाइन डे स्पेशल बनाना होगा.

तो आईये जानते है वैलेंटाइन डे सेलिब्रेट करने के कुछ आसान तरीके जो आपको और आपके पार्टनर को एक दुसरे के करीब लाने में मदद करेंगे.

वैलेंटाइन डे सेलिब्रेट करने के तरीके :- 

1. गुलाब के फूलों से करें शुरुवात :

वैलेंटाइन्स डे पर लाल गुलाबों के गुलदस्ते से अच्छा गिफ्ट और कुछ हो ही नहीं सकता. आपके प्यार को जाहिर करने के लिए इससे अच्छा तरीका नहीं है. ऐसे तो गुलाब के फूल बहुत से रंगों में मिलते है लेकिन सभी रंगों का अलग-अलग मतलब होता है. जिनमे से गुलाबी रंग आपके प्रति आदर को दर्शाता है, केसरिया रंग उमंग जबकि पीले गुलाब दोस्ती के प्रतीक होते है. इन सभी में लाल गुलाब खूबसूरती और प्यार का प्रतीक होते है. पारंपरिक तौर पर वैलेंटाइन्स डे वाले दिन लाल गुलाब को ही एक दुसरे को दिया जाता है.

2. पुरानी यादें ताज़ा करें :

जब भी आप किसी नए रिश्ते की शुरुवात करते है तो अमूमन आपका व्यवहार सबसे अच्छा हो जाता है और आप अपने साथी से प्रेमपूर्वक पेश आते है. वैलेंटाइन डे को आप इसी दिन आर व्यवहार को याद करके भी माना सकते है. इस दिन आप फिर से वही पहले वाले प्रेमी बन जाये और अपने साथी से पहले की तरह पेश आये. साथ ही अपनी पहली मुलाकात की यादें भी ताज़ा करें. विशेषकर पुरुष प्रेमी, क्योंकि महिलाओं को यह बहुत पसंद आता है की उनका साथी अपनी पुरानी यादों को अपने दिल में हमेशा जिंदा रखते है.

3. दिन को प्रेमपूर्वक बिताएं :

यदि आप अपने इस वैलेंटाइन को स्पेशल बनाना चाहते है तो उस पुरे दिन अपने साथी के साथ बिताने जा प्लान बनाएं. साथ के साथ समय बिताने के लिए अपनी ऑफिस मीटिंग्स और फ़ोन कॉल्स से दूर ही रहें ताकि आप अपने पार्टनर के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिता सकें. यदि आप ये सभी प्लान अपने घर पर कर रहे है तो किसी तीसरे को इस बीच न बुलाएं. ये आपके दिन को खराब करने जैसा हो सकता है.

4. मीठा भी है जरुरी :

अपने वैलेंटाइन डे को सबसे खास बनाने के लिए अपने साथी को कुछ मीठा दे. बेहतर होगा की इसके लिए आप उन्हें चॉकलेट ही दें. बाज़ार में बहुत से शेप और डिज़ाइन में चॉकलेट मौजूद होती है. आप उनमे से अपने पसंद की या दिल की शेप की चॉकलेट अपने साथी को दें. ये आपके रिश्ते में मिठास भरने का काम करेंगी.

5. कपड़ो का रखें ध्यान :

अपने वैलेंटाइन डे को स्पेशल बनाने के लिए उस दिन सबसे अच्छे कपड़े पहने और खुबसुरत मेकअप करें. ऐसे तो सभी लड़कियों और महिलाओं को सजना संवरना पसंद होता है लेकिन यदि उनके पुरुष साथ भी अपने पहनावे पर ध्यान देते है तो उन्हें ये बहुत अच्छा लगता है. लेकिन सिर्फ अच्छे कपड़ो से ही बात नहीं बनेगी इसके लिए बेहतर फुटवियर होना भी जरुरी है. इस दिन के लिए आप एक दुसरे से सलाह लेकर अपने कपड़ो का रंग चुन सकते है. वैसे ज्यादातर कपल इस दिन लाल रंग के कपडे ही चुनते है.

जानिए अपने बेबी के बारे में कब कौन से अंग बनते हैं?

प्रेगनेंसी के दौरान शिशु का विकास

गर्भ में पल रहे शिशु का विकास कैसे हो रहा है, शिशु के अंग बने है या नहीं, शिशु का शारीरिक विकास अच्छे से हो रहा है या नहीं, शिशु कब गर्भ में प्रेग्नेंट महिला को हलचल करता हुआ महसूस होगा, शिशु को गर्भ में अंदर कोई तकलीफ तो नहीं हैं, प्रेगनेंसी में क्या खाना चाहिए क्या नहीं, ऐसे ही कुछ सवाल प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने गर्भवती महिला के दिमाग में घूमते रहते हैं। और ऐसा केवल किसी एक गर्भवती महिला के साथ नहीं बल्कि हर गर्भवती महिला के साथ होता है, क्योंकि शिशु के गर्भ में आते है महिला में मातृत्व की भावना आने के साथ शिशु के साथ गर्भवती महिला भावनात्मक रूप से भी जुड़ जाती है। इसीलिए तो गर्भ में पल रहे शिशु के विकास को जानने की उत्सुकता हमेशा गर्भवती महिला के मन में बनी रहती है।

गर्भ में शिशु के कब कौन से अंग बनते हैं

इम्प्लांटेशन के बाद से ही धीरे धीरे जैसे प्रेगनेंसी के महीने आगे बढ़ते हैं वैसे वैसे शिशु का विकास भी बढ़ता है। पहले शिशु के अंग बनते हैं, फिर वो मजबूत होते हैं और फिर वो काम करना शुरू करते हैं। और जैसे ही शिशु का जन्म होने वाला होता है वैसे ही शिशु के सभी अंग पूरी तरह से तैयार हो जाते हैं, और उसके बाद गर्भ से बाहर आने के लिए शिशु अपनी पोजीशन ले लेता हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भ में शिशु के कब कौन से अंग बनते हैं।

पहले महीने में शिशु का विकास

जब महिला के अंडे के साथ पुरुष के शुक्राणु मिलते हैं, और निषेचन की क्रिया होती है, तो उसके लगभग तीन दिन के बाद वह अंडा फैलोपियन ट्यूब से होते हुए गर्भाशय तक पहुँच जाता है, और गर्भाशय की दीवार से जुड़ जाता है, जिसे की इम्प्लांटेशन के नाम से जाना जाता है। उसके बाद यह जैसे ही गर्भाशय की दीवार से जुड़ता है, वैसे ही गर्भनाल बन जाती है, जो शिशु को पोषण पहुँचाने में मदद करती है।

दूसरे महीने में शिशु के अंग

उसके बाद शिशु का सिर, हथेलियां, पैर, छाती, अंग बनने शुरू हो जाते हैं, शुरुआत में शिशु बहुत ही छोटा होता है ऐसे में उसके अंगो को पूरी तरह से अलग अलग देखना थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन धीरे धीरे यह विकसित होने लग जाते हैं। और लगभग आठ हफ्ते पूरे होते होते शिशु के कान, नाक की नौक, छोटी छोटी पलके आदि भी विकसित होने लग जाती है, और इस दौरान शिशु आधा इंच लम्बाई में होने लग जाता है।

तीसरे महीने में शिशु के अंग

तीसरे महीने के खत्म होते होते शिशु की लम्बाई दो इंच तक हो जाती है, और इस दौरान आप डॉप्लर की मदद से डॉक्टर द्वारा शिशु की धड़कन को साफ़ सुन सकते हैं। साथ ही शिशु की हाथ पैर की उँगलियों का विकास भी बढ़ने लग जाता है। इसके अलावा इस समय शिशु के यौन अंग भी विकसित हो जाते हैं, लेकिन इस बारे में डॉक्टर आपको कुछ नहीं बताते हैं, क्योंकि गर्भ में पल रहे शिशु का लिंग जानना अपराध होता है।

चौथे महीने में शिशु के अंग

चौथे महीने के आते आते शिशु की लम्बाई बढ़ने के साथ शिशु के चेहरे के पार्ट्स जैसे नाक, ठोडी, कान, मुँह और विकसित हो जाते हैं, जिससे उसे अलग अलग देखा जा सकता है, जैसे की एक आम शिशु के अंग होते है। इसके अलावा जो महिलाएं दूसरी बार माँ बन रही होती है उन्हें कई बार चौथे हफ्ते के खत्म होते होते गर्भ में शिशु की हल्की हलचल भी महसूस हो सकती है, लेकिन पहली बार माँ बन रही महिलाओं के लिए इसे समझना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।

पांचवें महीने में शिशु के अंगो का विकास

पांचे महीने में गर्भ में शिशु की लम्बाई लगभग छह इंच तक हो जाती है, और शिशु का वजन भी बढ़ जाता है। साथ ही इस महीने में शिशु की रीढ़ की हड्डी का विकास भी बढ़ने लगता है, और चेहरे की मांसपेशियां भी अच्छे तरीके से विकसित होने लगती है। इसके अलावा इस दौरान गर्भ में शिशु हलचल करता है जो गर्भवती महिला महसूस कर सकती है, साथ ही शिशु जम्हाई ले सकता है, अंगूठा भी चूस सकता है। पांचवे महीने में शिशु के अंगो के विकास को देखने के लिए और शिशु को किसी तरह की दिक्कत तो नहीं है इसे जानने के लिए डॉक्टर अल्ट्रासॉउन्ड करवाने की सलाह भी देते हैं।

छठे महीने में शिशु के अंगो का विकास

छठे महीने में शिशु का वजन और भी बढ़ जाता है, साथ ही शिशु की सुनने की क्षमता में भी वृद्धि होने लगती है। जिससे शिशु बाहर आवाज़ को सुनने का प्रयास कर सकता है, और उसे सुनकर चौंकने की गतिविधि भी कर सकता है। इस दौरान शिशु हिचकी भी ले सकता है।

सातवें महीने में शिशु के अंगो का विकास

इस समय शिशु की सुनने की क्षमता का विकास पूरी तरह से हो जाता है, साथ ही शिशु की आँखों का विकास भी हो जाता है। महिला का वजन बढ़ने के कारण इस दौरान महिला को अपनी ज्यादा केयर करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इस समय की गई कोई भी लापरवाही समय पूर्व प्रसव का कारण बन सकती है।

आठवें महीने में शिशु का विकास

प्रेग्नेंसी के आठवें महीने से शिशु वजन गेन करने लगता है जिसके चलते गर्भ में स्पेस कम हो जाता है और शिशु को मूव करने में दिक्क्तें आने लगती है। इसलिए आठवें महीने से शिशु की हलचल कम होने लगती हैं। यहाँ पर कई महिलाओं को लगता है की शिशु मूव नहीं कर रहा है। इसलिए चिंता नहीं करें। आठवें महीने के अंतिम सप्ताह तक शिशु डिलीवरी की पोजीशन में आ जाता है जिसमे शिशु का सिर नीचे और पैर ऊपर की तरफ हो जाते हैं।

नौवें महीने में शिशु का विकास

इस समय शिशु के सभी अंग अच्छे से विकसित हो चुके होते हैं, और अच्छे से काम कर रहे होते हैं, शिशु का वजन भी सही हो जाता है, जो इस बात का संकेत देते हैं की शिशु अब जन्म के लिए पूरी तरह से तैयार है।

तो यह है गर्भ में शिशु के विकास से जुडी कुछ बातें, ऐसे में गर्भवती महिला को चाहिए की गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला अपना अच्छे से ध्यान रखे और किसी भी तरह की लापरवाही न करें जिससे प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिल सके।

बाल सफ़ेद होने की क्या वजह होती है?

Causes of Premature Graying of Hair

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आज के समय की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर अपनी ओर ध्यान देना भूल जाते है जिसका प्रभाव उनके फेस और शरीर पर दिखने लगता है। जहां एक तरफ आजकल 30 वर्ष आयु के पहले ही महिलाओं के फेस पर झुर्रियां दिखने लगी है वहीं दूसरी तरफ असमय सफ़ेद हुए बाल भी किसी परेशानी से कम नहीं है। सफ़ेद बालों को अक्सर बुढ़ापे की निशानी माना जाता है लेकिन आजकल 20 से 30 वर्ष की आयु के बीच के युवा भी इस समस्या से ग्रसित दिखाई पड़ते है।

इतना ही नहीं आजकल तो छोटे बच्चों के बाल भी सफ़ेद होना शुरू हो गए है। जो न केवल देखने में अजीब लगते है बल्कि कहीं न कहीं आपके आत्मसम्मान को भी नुक्सान पहुंचाते है। बालों का सफ़ेद होना कोई बिमारी नहीं बल्कि एक आम समस्या है जो किसी के भी साथ हो सकती है।premature graying of hair

वैसे तो इस समस्या के होने बहुत से कारण होते है लेकिन सबसे बड़ा कारण तनाव को माना जाता है क्योंकि तनाव मस्तिष्क में होता है जहां बालों की जड़ें मौजूद होती है। और तनाव लेने पर जड़े कमजोर हो जाती है जिससे बाल पकने लगते है। इसके अलावा भी बाल सफ़ेद होने की कई वजह होती है जिनके बारे में आज हम आपको बताने जा रहे है। तो आइये जानते है उनके बारे में –

बालों के असमय सफ़ेद होने के क्या कारण होते है?

1. अनुवांशिकता :

बालों के असमय सफ़ेद होने के मुख्य कारणों में से अनुवांशिकता को एक कारण माना जाता है। यदि आपके माता या पिता में से किसी के भी बाल युवावस्था में सफ़ेद हो गए थे तो निश्चित रूप से आपके बाल भी जल्द सफ़ेद हो सकते है। क्योंकि ये सभी चीजें आपके अंदर मौजूद जीन्स निर्धारित करते है। अर्थात अगर आपके बालों में से मेलेनिन तत्व कम हो जाएगा तो भी आपके बाल असमय सफ़ेद हो सकते है।

2. विटामिन की कमी :

बालों के असमय सफ़ेद होने का एक कारण विटामिन बी12 की कमी भी होता है। यह एक ऐसा विटामिन है जो बालों को स्वस्थ रखने और उन्हें मजबूत बनाये रखने के लिए आवश्यक होता है। और जब इसकी कमी होने लगती है तो उसका प्रभाव बालों पर दिखने लगता है। इसीलिए हमेशा विटामिन बी12 युक्त भोजन का सेवन करना चाहिए। जिससे बालों को असमय सफ़ेद होने से बचाया जा सके।

3. थाइराइड :

अगर आप पिछले लंबे समय से किसी गंभीर बीमारी शिकार है तो भी आपके बाल सफ़ेद हो सकते है। क्योंकि बीमारी के कारण शरीर के तत्व कमजोर पड़ने लगते है और वे शरीर व् बालों को सही पोषण प्रदान नहीं कर पाते। थाइराइड उन्ही बिमारियों में से एक है। अर्थात अगर आपको थाइराइड है तो भी आपके बाल असमय सफ़ेद होने लगेंगे।

4. न्यूट्रीशन :बालों के असमय सफ़ेद होने की क्या वजह है

स्वस्थ जीवन जीने के लिए स्वस्थ और अच्छे भोजन का सेवन करना जरुरी होता है। क्योंकि आप जो कुछ भी खाते है उसका असर सीधे आपकी स्किन, फेस, बालों और स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। जहां एक तरफ सही डाइट आपके पुरे शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करती है। जिससे आप स्वस्थ रहने के साथ साथ फिट भी रहते है और आपके बाल भी अच्छे रहते है।

5. व्यस्त दिनचर्या :

आजकल के भागदौड़ भरे जीवन में लोग अपनी ओर ध्यान देना भूल ही गए है। सबको भागने की जल्दी रहती है। जिसके कारण वे इतनी ज्यादा व्यस्त हो जाते है की कई कई दिनों तक अपनी डाइट और खान पान पर ध्यान नहीं दे पाते। जिसका सीधा असर उनके स्वास्थ्य और बालों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। ऐसे में बालों का असमय सफ़ेद होना आम बात है। इसीलिए अपने लिए समय निकालिये और थोड़ा अपनी ओर ध्यान देना शुरू कीजिये।

6. धूम्रपान :

धूम्रपान करना सेहत के लिए कितना हानिकारक होता है ये बायत तो सभी भली भांति जानते है। लेकिन क्या आप जानते है की इससे आपकी स्किन और आपके बालों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जी हां, लगातार स्मोकिंग करने से बालों पर बुरा असर पड़ता है। इसके सेवन से शरीर में मेलेनिन पिग्मेंट के निर्माण में कमी आने लगती है। जिससे बाल असमय सफ़ेद होने लगते है।

7. मेलेनिन :premature hair graying

यह एक तरह का पोषक तत्व होता है जो बालों का रंग कला करने और उसे बनाये रखने के लिए उत्तरदायो होता है। बालों के असमय सफ़ेद होने का एक कारण शरीर में इस पिगमेंट की कमी का होना होता है। जिसकी वजह से बाल सफ़ेद होने लगते है। इस पिग्मेंट में आने वाली कमी का मुख्य कारण आपके खान पान और आदतों में आने वाले बदलाव होते है।

8. आहार :

सामान्य भोजन की तुलना में जो व्यक्ति बाहर का खाना, फ़ास्ट फ़ूड, तला हुआ और मसालेदार भोजन ज्यादा खाना पसंद करते है उनके बाल भी समय से पहले ही सफ़ेद हो जाते है। जी हां, बाहर के खाने में मौजूद केमिकल्स और अन्य तत्व बालों को सफ़ेद करने के उत्तरदायी होते है। इसलिए हमेशा स्वस्थ और पौष्टिक भोजन का ही सेवन करते है।

9. तनाव :stress management

जैसा की हमने आपको पहले बताया था। बालों के असमय सफ़ेद होने का सबसे बड़ा और मुख्य कारण तनाव ही होता है। अर्थात जो व्यक्ति जरूरत से ज्यादा तनाव लेने लगता है उनके बाल जल्दी सफ़ेद हो जाते है साथ वे झड़ने भी लगते है। क्योंकि तनाव के कारण शरीर में बहुत से हॉर्मोन्स का उतसर्जन होने लगता है जो स्वास्थ्य के लिए अच्छे नहीं होते। इसलिए जितना हो सके उतना कम तनाव लेना चाहिए।

10. हेयर प्रोडक्ट्स :

पहले ये सब नहीं था लेकिन आजकल हेयर कलर, कंडीशनर, जेल, हेयर स्टाइलिंग प्रोडक्ट ऐसी बहुत सी चीजें बाजार में उपलब्ध है जिनमे कई केमिकल्स का प्रयोग किया जाता है। और सबसे बड़ी बात सभी इसका इस्तेमाल भी बड़े शौक से करते है। जहां लड़कियों को अपने बालों का रंग बदलना अच्छा लगता है वहीं जेल से बालों को सेट करना लड़कों की आदत बनता जा रहा है। ऐसे में इन केमिकल्स का सीधा सम्पर्क आपके बालों से होता है जिससे बाल सफ़ेद होने लगते है।

11. पानी :

नहाने के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले पानी का लेवल सॉफ्ट होना चाहिए। हार्ड वाटर का इस्तेमाल करने से बाल तो गिरेंगे ही साथ साथ उनके रंग में भी सफेदी आने लगती है। इसके अतिरिक्त बाल धोने के लिए कभी भी गर्म पानी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह भी आपके बालों का रंग सफ़ेद करने में मदद करता है।

12. प्रदूषण :

वर्तमान का प्रदुषण किसी से भी नहीं छुपा ऐसे में कुछ भी बताने या समझने का कोई लाभ नहीं। क्योंकि आप भी जानते है की वायु प्रदुषण वाकई बालों के लिए काफी नुकसानदेह होता है। ऐसे में यह आपका दायित्व है की अपने बालों को प्रदुषण से बचाया जाए, इसके लिए आप स्क्राफ आदि का इस्तेमाल कर सकती है। घर से बाहर जाते समय बालों को अच्छे से ढक लें और उन्हें बांध लें जिससे धूल मिटटी उन्हें खराब न कर पाएं। धुप से बचाने के लिए आप छतरी का भी इस्तेमाल कर सकते है।

अब तो आप अच्छी तरह से समझ गए होंगे की आखिरकार क्यों आजकल बच्चे या बड़े सभी के बाल असमय सफ़ेद होने लगे है। लेकिन ये भी सच है इनमे से सभी कारण मनुष्य की अपनी गलतियों और लापरवाहियों की देन है। अगर आप समय रहते इन कारणों पर ध्यान देने लगे तो आप भी अपने बालों को असमय समय सफ़ेद होने से बचा सकते है।

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प्रेग्नेंट महिला को रात में दूध व् शहद पीने के फायदे

दूध और शहद दोनों ही ऐसी चीजें हैं जिनका सेवन गर्भवती महिला कर सकती है। और दोनों का सेवन करने प्रेग्नेंट महिला व् बच्चे दोनों को ही फायदा मिलता है। ऐसे में दोनों को साथ मिलाकर यानी की दूध में शहद डालकर सेवन किया जाये तो इसका फायदा दुगुना हो जाता है। खासकर रात को सोने से पहले यदि गुनगुने दूध में यदि शहद डालकर उसका सेवन किया जाता है तो यह बहुत फायदा करता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को रात को दूध में शहद डालकर पीने से कौन से फायदे मिलते है।

हड्डियों के लिए है फायदेमंद

रात को सोने से पहले रोजाना गुनगुने दूध में शहद डालकर पीने से हड्डियों को पोषण मिलता है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को थकान, कमजोरी, बॉडी में दर्द जैसी परेशानियों से राहत मिलती है। साथ ही इससे बच्चे की हड्डियों के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

अनिंद्रा की समस्या होती है दूर

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों के कारण, वजन बढ़ने के कारण, बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण, बेहतर नींद लेने में परेशानी हो सकती है। लेकिन गर्भवती महिला यदि रोजाना रात को सोने से पहले एक गिलास दूध में एक चम्मच शहद डालकर उसे अच्छे से उबालने के बाद गुनगुना करके पीती है तो इससे महिला को रिलैक्स महसूस होता है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को अच्छी और गहरी नींद आती है।

पाचन तंत्र करता है अच्छे से काम

प्रेगनेंसी के दौरान अधिकतर महिलाएं कब्ज़, एसिडिटी जैसी दिक्कतों से परेशान हो सकती है। लेकिन यदि गर्भवती महिला दूध में शहद मिलाकर उसका सेवन करती है। तो इससे पाचन तंत्र को दुरुस्त रहने में मदद मिलती है क्योंकि दूध और शहद दोनों में फाइबर मौजूद होता है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को कब्ज़, एसिडिटी जैसी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

तनाव से मिलता है निजात

दूध में शहद डालकर पीने से दिमाग की कोशिकाओं को आराम मिलता है जिससे प्रेग्नेंट महिला को मानसिक रूप से आराम महसूस होता है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को तनाव से निजात पाने में मदद मिलती है।

एनर्जी मिलती है भरपूर

दूध और शहद को मिलाकर सेवन करने से मांसपशियों में आये खिंचाव को दूर करने में मदद मिलती है। जिससे बॉडी रिलैक्स महसूस करती है और महिला ऊर्जा से भरपूर रहती है। और गर्भवती महिला को थकान, कमजोरी, बॉडी पेन जैसी समस्याओं से बचे रहने में मदद मिलती है।

बिमारियों से होता है बचाव

दूध और शहद को मिलाने से इसमें एंटी बैक्टेरियल, एंटी फंगल, एंटी बायोटिक गुणों की मात्रा बढ़ जाती है। ऐसे में गर्भवती महिला यदि इसका सेवन करती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला और बच्चे को बिमारियों से बचे रहने में मदद मिलती है। इसीलिए नियमित रूप से रात को सोने से पहले गर्भवती महिला को दूध में शहद में डालकर पीना चाहिए।

तो यह हैं कुछ फायदे जो प्रेग्नेंट महिला व् उसके होने वाले बच्चे को रात को दूध में शहद डालकर पीने से मिलते हैं। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो इन बेहतरीन फायदों के लिए और प्रेगनेंसी में अपने और अपने बच्चे के स्वास्थ्य को सही रखने के लिए गर्भवती महिला को रात को दूध में शहद डालकर पीना चाहिए।

काजल लगाने के फायदे

महिलाओ की ख़ूबसूरती को बढ़ाने में उनकी आँखे भी अहम रोल अदा करती है, और उनकी ख़ूबसूरती और आकर्षण और भी बढ़ जाता है, जब इसके लिए महिलाएं काजल का इस्तेमाल करती है, आज कल बाज़ार में अलग अलग तरह के और अलग अलग कंपनी के काजल मिल जाते है, लेकिन पहले लोग काजल को कभी बाहर से नहीं लाते थे, बल्कि इसे पारंपरिक तरह से घर पर ही बनाया जाता था, कई लोग इसे टोटके की तरह भी इस्तेमाल करते थे, जैसे की शिशुओ को भी और बड़े भी इसे अपने आप को नज़र से बचाने के लिए इस्तेमाल करते थे, और कोई भी दोष शांत करना हो चाहे फिर वो मंगल हो या शनि सभी को शांत करने के लिए काजल का इस्तेमाल किया जाता है, तो आइये जानते है की काजल से आपकी ख़ूबसूरती को क्या फायदे होते हैं।

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आँखों की खूबसूरती बढ़ती है:-

आँखों में काजल इसलिए लगाया जाता है, क्योंकि आँखों में काजल लगाने से ये और भी आकर्षित लगती है, साथ ही इससे आँखों की शेप भी अच्छी दिखती है, जिससे आपकी लुक को बेहतर बनने में मदद मिलती है, इसके लिए महिलाएं आज कल पेंसिल वाले काजल का इस्तेमाल करती हैं इससे शेप को आसानी से बनाने में मदद मिलती है।

आँखे बड़ी दिखती हैं:-

छोटी आँखे ऐसा नहीं होता है की अच्छी नहीं लगती है, परन्तु यदि आपकी आँखे बड़ी होती है, तो इससे आपका लुक और भी बेहतर होता है, इसीलिए यदि आप चाहती हैं, की आपकी आंखे बड़ी दिखे तो नियमित रूप से आपको अपनी आँखों में काजल लगाना चाहिए।

आँखों की रौशनी बढ़ती है:-

यदि आप नियमित रूप से अपनी आँखों के लिए घर के बने काजल का इस्तेमाल करती हैं, तो इससे आपकी आँखों की रौशनी को भी बढ़ने में मदद मिलती है, और आँखों की रौशनी को बढ़ाने के लिए आपको केवल घर का बना काजल ही फायदा करता है।

सूरज की किरणों के दुष्प्रभाव से बचने में मदद मिलती है:-

कई बार धुप के कारण आपकी आँखे लाल होने लगती है, आँखों में से पानी आने लगता है, लेकिन यदि आप अपनी आँखों में काजल लगाते हैं तो ऐसा करने से आपको सूरज की किरणों का बुरा असर आप अपनी आँखों पर पड़ने से रोक सकते हैं, जिससे आपकी आँखों को सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

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कीट पतंगों से बचाव करने में मदद मिलती है:-

काजल लगाने से आप अपनी आँखों का किट पतंगों से भी बचाव करने में मदद मिलती है, क्योंकि यदि कोई कीट पतंगा आपकी आँखों में घुस जाता है, तो इसके कारण आँखों में दर्द होने लगता है, व् पानी आने के साथ आँख लाल भी होने लगती है।

शिशुओं को नज़र से बचाने के लिए करते है इसका इस्तेमाल:-

सबसे पहले काजल को घर में ही बनाया जाता था और घर में बड़ी दादी या नानी इसे बच्चों के माथे या कान के पीछे लगाती थी, और इसका कारण यह था की इससे बच्चों को नज़र नहीं लगती है, साथ ही यदि जन्म से ही बच्चों की आँखों में यदि काजल लगाया जाता है, तो इससे शिशु की आँखे बड़ी और मोटी बनती है, जिससे उसकी ख़ूबसूरती और भी बढ़ जाती है।

तो ये हैं कुछ फायदे जो आपको काजल के लगाने से होते हैं साथ ही इसका इस्तेमाल करने से पहले इस बात का ध्यान रखें की यदि यह घर में बना हुआ नहीं है तो अच्छी क़्वालिटी का हो, ताकि इससे आपकी आँखों को किसी भी तरह का नुकसान न हो।

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जब तीन महीने का गर्भ हो तो महिलाएं भूल कर भी न करें ये काम

प्रेगनेंसी का पूरा समय ही महिलाओ को अपना पहले से ज्यादा ध्यान रखना चाहिए, परंतु पहले तीन महीने महिला को अपना ज्यादा ध्यान रखने की जरुरत होती है, क्योंकि इस समय में महिला की स्थिति बहुत नाजुक होती है, और साथ ही थोड़ी सी भी लापरवाही आपके और गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य को नुकसान पंहुचा सकती है, तो आइये जानते है की गर्भ के पहले तीन महीने महिला को भूल कर भी कौन से काम नहीं करने चाहिए।

प्रेगनेंसी के समय में महिला बहुत से अनुभव से गुजरती है, ऐसे में महिला के शरीर में भी बहुत से बदलाव आते है, इसीलिए महिला को प्रेगनेंसी में अपना पूरा ध्यान रखना चाहिए, लेकिन महिला को जैसे ही पता चलता है किसके गर्भ में एक नन्ही सी जान पल रही है, तब से लेकर तीन महीने तक महिलाओ को अपना सबसे ज्यादा ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि पहले तीन महीने में महिला के साथ समस्या होने के चांस ज्यादा होते है, थोड़ी सी लापरवाही के कारण स्पोटिंग या कई बार गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है, जैसे की महिला यदि अपने खान पान का ध्यान नहीं रखती है, तो इसके कारण उसके शरीर में कमजोरी आ जाती है।

ज्यादा उछल कूद भागा दौड़ी करने के कारण महिला को स्पोटिंग या गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है, शारीरिक सम्बन्ध बनाते समय यदि सावधानी न बरती जाएँ, तो इसके कारण भी गर्भ में पल रहे शिशु को नुकसान पहुच सकता है, ज्यादा गरम चीजो का सेवन करने से गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है, बिना डॉक्टर की सलाह के दवाईयो का सेवन करने के कारण भी आपको परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है, तो आइये अब आपको विस्तार से बताते है की आपको प्रेगनेंसी के समय कौन कौन से काम भूल कर भी नहीं करने चाहिए।

अपने खान पान के प्रति लारवाही न बरतें:-

pregnant women eating

महिलाओ को प्रेगनेंसी के समय ज्यादातर उनके स्वाद में परिवर्तन, गंध से एलर्जी होने के कारण, या शरीर में हॉर्मोन्स के परिवर्तन के कारण भूख कम लगती है, जिसके कारण महिला अपने खान पान के प्रति लापरवाही करती है, परंतु उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिएं बड़े बड़े मील लेने की बजाय थोड़े थोड़े समय के बाद कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए, यदि वो खान पान को सही नहीं रखती है, जिसके कारण उनके शरीर में कमजोरी आ जाती है, और इससे गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य को भी नुकसान होता है, इसीलिए आपको अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, ताकि प्रेगनेंसी में माँ और बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलेगी।

ज्यादा उछल कूद न करें:-

महिलाओ को प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने बिलकुल भी उछल कूद नहीं करनी चाहिए, क्योंकि ऐसा करने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि ज्यादा उछल कूद करने के कारण आपको स्पोटिंग का खतरा बढ़ जाता है, और पेट में भी दर्द की समस्या हो जाती है, इसीलिए आप गर्भ के पहले तीन महीने ज्यादा उछल कूद नहीं करनी चाहिए।

ज्यादा कड़ा व्यायाम नहीं करना चाहिए:-

महिला को पुरे गर्भावस्था के समय में कड़ा व्यायाम नहीं करना चाहिए, जिसके कारण उसके पेट पर या अन्य अंगो पर दबाव पढ़ें, और गर्भ के पहले तीन महीने तो ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए, थोड़ा बहुत वॉक आप कर सकती है, परंतु वॉक करते समय भी ध्यान रखें, यदि आप थका हुआ महसूस कर रहे है, तो इससे भी परहेज करना चाहिए, कहना खाने के बाद आपको थोड़ा बहुत वॉक जरूर करना चाहिए।

ऐसा कोई काम न करें जिसके कारण आपके पेट पर दबाव पढ़ें:-

महिलाओ को ध्यान रखना चाहिए की वो ऐसा कोई काम न करें, जिसके कारण उनके पेट पर दबाव न पड़ें, जैसे की पैरो के भार न बैठे, ज्यादा झुककर काम न करें, पेट के बल लग कर न खड़े हो, ज्यादा सामान न उठायें, ऐसा करने से आपके पेट पर दबाव पड़ता है, जिसके कारण पेट में दर्द हो जाता है, और साथ ही कई बार ज्यादा देर पैरो के भार बैठने पर ब्लीडिंग भी होने लगता है।

ज्यादा दवाइयों का सेवन न करें:-

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गर्भावस्थे के तीन महीने महिला के शरीर में हॉर्मोन्स का बदलाव तेजी से होने के कारण कई प्रकार की शारीरिक समस्या हो जाती है, कई बार थकावट महसूस होती है, सर दर्द, शरीर के ने अंगो में दर्द रहने लगता है, ऐसे में इससे राहत पाने के लिए कभी भी डॉक्टरी परामर्श के दवाईयो का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसके कारण भी आपके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

इलायची का सेवन न करें:-

इलायची का सेवन करने से भी हो सकें तो आपको प्रेगनेंसी में परहेज रखना चाहिए, क्योंकि इसके कारण भी गर्भ के गिरने का खतरा बढ़ जाता है, और रात के समय तो खास कर इसका सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये आपके स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती है, हो सकें तो प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने इलायची का सेवन से चाय में भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

ज्यादा भाग दौड़ी नहीं करनी चाहिए:-

प्रेगनेंसी में आपको ज्यादा भागा दौड़ी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इसके कारण भी आपको समस्या का सामना करना पड़ सकता है, ज्यादा घूमने फिरने, से भी आपको परहेज रखना चाहिए, यात्रा भी हो सकें तो कम करनी चाहिए, जितना हो सकें रेस्ट करना चाहिए, क्योंकि पहले तीन महीने आपको थोड़ी सी भी लापरवाही आपको नुकसान कर सकती है।

नशीले पदार्थो व् धूम्रपान का सेवन नहीं करना चाहिए:-

गर्भावस्था के पहले तीन महीने ही नहीं बल्कि आपको आपको पूरी गर्भावस्था के दौरान नशीले पदार्थो का सेवन नहीं करना चाहिए, धूम्रपान से भी परहेज करना चाहिए, क्योंकि इसके कारण महिला और होने वाले बच्चे पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है, इसीलिए इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

पपीते का सेवन नहीं करनी चाहिए:-

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गर्भावस्था के पहले तीन महीने भूल कर भी कच्चे पपीते का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसमें विटामिन सी की मात्रा बहुत होती है, जो की सीधा आपको गर्भपात जैसी गंभीर समस्या की और लेकर जा सकती है, इसीलिए आपको पहले तीन महीने ही नहीं बल्कि पूरी गर्भावस्था में ही कच्चे पपीते का सेवन नहीं करना चाहिए।

शारीरिक सम्बन्ध बनाते समय रखे ध्यान:-

प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने बहुत ज्यादा महिला को अपना ध्यान रखना चाहिए, वैसे तो डॉक्टर भी गर्भावस्था के पहले तीन महीने शरीर की स्थिति को सामान्य रखने के लिए हो सकें तो शारीरिक सम्बन्ध से परहेज रखना चाहिए, आप चाहे तो इसके लिए डॉक्टर की भी राय ले सकते है, क्योंकि पहले तीन महीने महिला की स्थिति नाजुक होती है, इसीलिए आप शारीरिक सम्बन्ध बनाते समय ध्यान रखें।

डॉक्टर से राय लें:-

महिला को प्रेगनेंसी के समय में यदि कोई भी परेशानी हो, तो आपको बिलकुल भी अनदेखा नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसके कारण आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, यदि आपको कभी भी प्रेगनेंसी में असहज महसूस हो, तो आपको बिना लापरवाही किये डॉक्टर के पास जाना चाहिएं न की घर में इसका इलाज़ शुरू कर देना चाहिए।

प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने भूल कर भी न करें ये काम:-

  • अजवाइन की तासीर गरम होती है, इसीलिए गर्भावस्था के पहले तीन महीने अजवाइन का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • गरम पदार्थो का सेवन जैसे की ड्राई फ्रूट्स आदि जिनकी तासीर गरम होती हैं, शुरूआती दिनों में इनसे भी परहेज रखना चाहिए।
  • अनानास का सेवन नहीं करना चाहिए, इसमें विटामिन सी की मात्रा अधिक होती है।
  • कटहल में भी विटामिन सी की मात्रा अधिक होती है, और यदि गर्भावस्था के शुरूआती दिनों में इसका सेवन करते है, तो गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है।
  • ज्यादा तले हुए और मसालेदार भोजन से परहेज रखें।
  • डिब्बा बंद जूस का सेवन न करें।
  • नशीले पदार्थो और धूम्रपान का सेवन न करें।
  • शिमला मिर्च, ब्रोकली, आदि का सेवन करने से भी आपको परेशानी का अनुभव हो सकता है।
  • ज्यादा व्यायाम न करें, और थकावट होने के बाद तो कभी भी अपने शरीर पर जोर नहीं डालना चाहिए।

तो ये कुछ काम है, जो महिलाओं को बिलकुल भी नहीं करने चाहिए है, जब गर्भावस्था के पहले तीन महीने चल रहे होते है, यदि आप चाहते है गर्भ में पल रहे शिशु के साथ आप भी स्वस्थ रहें और शिशु का विकास भी गर्भ में अच्छे से हो इसके लिए आपको ध्यान देना चाहिए, और कोईभी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।