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बिस्तर पर पेशाब करने के ये कारण होते हैं!

बचपन में बच्चों का बैड पर पेशाब करना आम बात होती है, और ऐसा हर एक बच्चा करता है, लेकिन चार या पांच साल तक के बच्चे या उससे अधिक उम्र होने पर भी यदि आपका बच्चा बैड पर पेशाब करता है तो इस बात को आपको गंभीरता से लेना चाहिए, एक तो यह अच्छी आदत नहीं है, साथ ही इसके कारण बच्चे को बीमारियों से भी खतरा रहता है, इसके अलावा बच्चे दिन भर कुछ न कुछ खाते रहते है, कभी ठंडा तो कभी गरम और रात को कई बार तो खाना खाते खाते ही सो जाते है, जिसके कारण नींद में उन्हें पता भी नहीं चलता है की वो बीच में पेशाब कर रहे है, लेकिन इसे अनदेखा न करते हुए आपको बच्चे को समय से खाना खिलाना चाहिए और साथ ही सोने से पहले बच्चे को हमेशा पेशाब भी करवाना चाहिए।

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यूरिन

बच्चे के बीच में पेशाब करने के बहुत से कारण हो सकते हैं, जैसे की बच्चे को डर लगना, बच्चे का हमेशा अधिक ठन्डे भोजन का ही सेवन करना, पेट से जुडी कोई परेशानी होना, आहार में लापरवाही होना, आदि, लेकिन यह समस्या कोई ऐसी नहीं है की जिसका कोई समाधान न हो, बल्कि आप कुछ घर पर ही आसान तरीको का इस्तेमाल करके इस समस्या से निजात पा सकते हैं, साथ ही यदि इनसे भी आपको हल न मिलें तो इस बारे में आपको डॉक्टर से भी राय लेनी चाहिए, तो आइये आज हम आपको विस्तार से बताते है की बच्चे के बैड पर पेशाब करने के कौन कौन से कारण हो सकते है, और साथ ही इससे बचने के लिए कुछ आसान समाधान भी आपको बताते हैं।

बच्चे के बिस्तर पर पेशाब करने के कारण:-

अधिक ठन्डे पदार्थो का सेवन करने के कारण:-

जो बच्चे दिन में अधिक ठन्डे भोजन या अन्य चीजों का सेवन करते है, उन्हें बार बार पेशाब आता है, जिसके कारण रात को सोते समय भी ऐसा होता है, और जब वो सो जाता है तो उसके बाद न उठने के कारण सोते सोते बैड पर ही पेशाब कर देता है।

पेट में कीड़े होने के कारण:-

जिन बच्चों के पेट में कीड़े होते है, वो भी इस तरह रात को सोते समय बैड पर पेशाब कर देता है, क्योंकि इसके कारण उनकी पाचन क्रिया पर भी असर पड़ता है, और साथ ही पेट में भी दिक्कत हो जाती है, जिसके कारण वो रात को सोते समय बैड पर पेशाब कर देते हैं।

पेशाब की नली से जुडी समस्या होने पर:-

जिन बच्चों को पेशाब की नली से जुडी बिमारी होती है, उन्हें भी ये समस्या हो सकती है, साथ ही बच्चों के मूत्राशय का आकार कम होने के कारण यदि आप रात को सोते समय उन्हें पेशाब नहीं कराते हैं तो वो नली भर जाती है जिसके कारण बच्चों के रात को सोते समय बैड पर पेशाब करने की समस्या से आपको परेशान होना पड़ सकता है।

बच्चे को देरी से भोजन देने के कारण:-

बच्चे को उसके सोने से कम से कम एक से दो घंटे पहले भोजन करवा देना चाहिए, यदि आप उसे खाना खाने के तुरंत बाद सुला देते है, तो ऐसा करने के कारण भी आपका बच्चा रात को सोते समय बैड पर पेशाब कर देता है।

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ज्यादा खेल कूद करने के कारण:-

playing child

कुछ बच्चे दिन के समय बहुत अधिक खेल कूद करते हैं, जिसके कारण बाद में वो बुरी तरह से थक जाते हैं, और खाना खाते ही सो जाते है, थकावट के कारण भी कई बार वो रात को सोते समय बैड पर पेशाब कर देता हैं।

डर लगने के कारण:-

कई बच्चे जो डर जाते है, या नींद में कोई बुरा सपना देख लेते है, तो वो भी बीच में बैड पर पेशाब कर देते हैं, इसीलिए रात को सोते समय बच्चे को जितना हो अकेला नहीं छोड़ना चाहिए, और न ही टीवी आदि में कोई डरावनी चीज दिखानी चाहिए।

बिस्तर पर पेशाब की समस्या से निजात पाने के कुछ उपाय:-

  • रात को सोने से पहले अजवाइन के चूर्ण की लगभग पचास ग्राम की मात्रा में लेकर बच्चे को उसका सेवन करवाएं कुछ ही दिनों में बच्चे को इस परेशानी से राहत मिलती है।
  • तिल और गुड़ का सेवन बच्चे को करवाने से आपको बच्चों की इस समस्या को खत्म करने में मदद मिलती है, आप चाहे तो इनके साथ थोड़ा अजवाइन का चूर्ण भी मिला सकती है।
  • सूखे आंवले को अच्छे से पीस लें, उसके बाद कपडे की मदद से उसे छान लें, उसके बाद बारीक चूर्ण अलग हो जाएगा, दिन में दो बार सुबह शाम तीन ग्राम आंवले के चूर्ण को एक चम्मच शहद के साथ बच्चे को खिलाने से बच्चे बिस्तर पर पेशाब करना बंद कर देते हैं।
  • दस ग्राम की मात्रा में काला जीरा, आंवला, और मिश्री, को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें, और सुबह शाम दो दो ग्राम चूर्ण बच्चे को पानी के साथ दें, बच्चे को इस परेशानी से राहत मिलती है।
  • बच्चे को नियमित मुनक्के का सेवन करवाने से भी आपको फायदा मिलता है।
  • जामुन की गुठलियों को सुखाकर उन्हें अच्छे से पीस लें, उसके बाद उसका चूर्ण तैयार करें, अब इस चूर्ण को दिन में दो बार पानी के साथ बच्चे को दें, बच्चे की आदत से छुटकारा पाने में आपको मदद मिलेगी।
  • दो अखरोट के साथ बीस किशमिश का सेवन बच्चे को नियमित रूप से करवाएं बच्चे को फायदा मिलेगा।
  • एक पाव दूध में दो छुहारे डालकर अच्छे से उबाल लें, उसके बाद इस दूध को ठंडा होने के लिए रख दें, उसके बाद इसमें से छुहारे को निकाल कर इसका सेवन बच्चे को करवाएं, और दूध को हल्का गुनगुना करके वो भी बच्चे को पीला दें, कुछ ही दिनों में आपको फ़र्क़ दिखाई देने लगेगा।
  • रात को सोते समय यदि आप बच्चे को शहद का सेवन करवाते हैं तो भी बच्चे की ये आदत धीरे धीरे छूट जाती है।
  • दो मुनक्के के बीज निकालकर उसमे दो काली मिर्च मिलाएं, और पानी के साथ बच्चे को दें, ऐसा नियमित दो हफ़्तों तक करने के बाद ही आपको फ़र्क़ दिखाई देने लगता है।

तो ये कुछ कारण है जिनकी वजह से बच्चा बैड पर पेशाब कर देता है, इसके अलावा आपको हमने कुछ उपाय भी बताएं हैं जिनका इस्तेमाल करके आप इस समस्या से निजात पा सकते है, लेकिन यदि आपका बच्चा पांच साल से ऊपर का हो गया है और फिर भी वो रात को सोते समय बिस्तर पर पेशाब कर देता है, तो यह उसके लिए हानिकारक और बिमारी का कारण हो सकता है, इससे बचने के लिए आपको एक बार डॉक्टर से भी राय जरूर लेनी चाहिए।

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घरेलू मक्खी से निजात पाने के उपाय

बारिश और गर्मियों के मौसम के कारण ही नहीं बल्कि आपके आस पास गंदगी का जमाव होने के कारण भी मक्खियों से जुडी परेशानी आपको हो सकती है, सोचिये की जब आप कोई काम कर रहे हैं और मक्खी आपके आस पास घूम रही है तो आपको कितना गुस्सा आता है, और उन्हें भगाने के चक्कर में आपका हाथ भी दुखने लगता है, इसके साथ पानी से भरे गंदे गड्डो, कूड़ा करकट पर बैठी मक्खियां जब आपके खुले रखें खाने पर बैठती हैं तो भी उनके द्वारा फैलाये गए जर्म्स के कारण आपको बीमारियों का भी खतरा रहता है, क्या आप भी जानना चाहते हैं की आप किस तरह अपने घर से मक्खियों को छू मंतर कर सकते हैं यदि हाँ तो आइये आज हम आपको इस समस्या से बचने के लिए कुछ आसान से टिप्स बताते है, जो आपको इस परेशानी से निजात दिलाते है।

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कपूर का प्रयोग करें:-

कपूर एक आसान उपाय है जिससे आप आसानी से घर की सभी जगह से मक्खी को भगा सकते है, इसके लिए आप एक कपूर को जलाकर और पूरे घर में उसे घुमा दें, दो भी जला सकते है, इसकी महक से मक्खियां दूर भागती है।

तुलसी का पौधा लगाएं:-

तुलसी अपने औषधीय गुण से आपकी सेहत ठीक करने के लिए ही नहीं बल्कि मक्खियों को भी दूर भगाने में मदद करती है, घर में तुलसी का पौधा लगाने से मक्खियाँ नहीं आती है, तुलसी के अलावा यदि आप लैवेंडर या गेंदा भी लगाते है तो भी आपको फायदा मिलता है।

फ्लाई स्वात का प्रयोग करें:-

यह एक तरह की इलेक्ट्रॉनिक मशीन होती है, जो की मक्खियों को अपने बीच में फंसा कर मार देती है, इसके लिए बस जहां आपको मक्खी दिखे वही इसे घुमा देना चाहिए, बच्चों को इसके अंदर हाथ नहीं लगाने देना चाहिए।

तेल का इस्तेमाल करें:-

कुछ ऐसे तेल होते हैं जिनका छिडकाव यदि आप अपने घर के हिस्सों में करते हैं तो उनकी सुगंध से भी मक्खियाँ घर में नहीं आती हैं, जैसे की लैवेंडर, नीलगिरी, पुदीना, और लेमन ग्रास आदि,इन्हें आप स्प्रे की बोत्टेल में डालकर थोडा थोडा छिडकाव करें, आपको इसका असर खुद दिखाई देगा।

मच्छर, छिपकली, और कॉकरोच भगाने के तरीके

सेब और लोंग का इस्तेमाल करें:-

लोंग की महक मक्खियाँ बर्दाश्त नहीं कर पाती है, इसलिए जहां भी आपको मक्खियाँ लगे उसे भगाने के लिए आप एक सेब में पांच छह लोंग लगाकर रख दें, उसकी महक से मक्खियाँ भाग जाएगी, साथ ही आप सेब के सिरके का उपयोग भी कर सकते है, इसके लिए आप एक प्लास्टिक के बर्तन में पानी में थोड़ा सेब का सिरका मिलाएं साथ ही थोड़ा सा सर्फ घोल कर रख दें, उसके बाद देखिये सेब के सिरके की महक सूंघ कर मक्खियाँ पानी पर बैठने तो लग जाएंगी पर बाद में उड़ नहीं पाएंगी।

खीरे का उपयोग करें:-

जहां भी आपको मक्खियां दिखे खीरे की स्लाइसेस को काटकर रख दें, इससे भी मक्खियां डरकर दूर भागती है, और न ही अंडे देती है, इसीलिए आप इस आसान उपाय का उपयोग भी मक्खी को भगाने के लिए आप कर सकती हैं।

लाल मिर्च का उपयोग करें:-

लाल मिर्ची से तो अच्छे अच्छे भाग जाते है फिर ये मक्खियां क्या चीज हैं, इसके लिए आप लाल मिर्च में थोड़ा पानी मिलाकर उसे स्प्रे बॉटल में भरकर जहां भी मक्खियां दिखे वहां छिड़क दें मक्खियां मर जाएंगी, परन्तु धयान रखें की वहां बच्चे न हो, और साथ ही यह की की आँखों में न जाए।

वाइट वाइन का प्रयोग करें:-

एक खुले बर्तन में पानी में वाइट वाइन मिलकर रख दें, इसकी खुशबू से मक्खियां इसकी तरफ आकर्षित होंगी लेकिन इस पानी में डूब जाएंगी जिससे आपको इनसे राहत मिलेगी।

पंखे का उपयोग करें:-

पंखा मक्खियों को भगाने का सबसे आसान उपाय है जब भी आपको मक्खियां लगे तो पंखा चला दें, पंखे की हवा में मक्खियों से होने वाली परेशानी से बचने में आपको मदद मिलेगी।

मक्खियां भगाने के अन्य उपाय:-

  • ग्रीन एप्पल सोप को पानी में मिक्स करके एक जार में भरकर रख दें, इसकी खुशबू से भी मक्खियां इसके पास आएँगी को इसकी सुगंध सुंग कर मर जाएंगी।
  • दालचीनी को घर के उन हिस्सों में रखें जहां से मक्खियां आती है, इससे भी मक्खियों को एलर्जी होती है और वो इससे दूर भागती हैं।
  • अजवाइन के पाउडर का इस्तेमाल करने और इसके तेल का स्प्रे घर में करने से भी मक्खियां दूर भागती हैं।
  • घर के आस पास गेंदे के फूलों के पौधे लगाएं इससे भी मक्खियां दूर भागती हैं।
  • घर में सामान खासकर मीठी चीजों को खुला न छोड़े इससे भी मक्खियां आकर्षित होती हैं और आपके घर में आ जाती हैं।
  • जितना हो सकें पर्दो से खिड़कियों को ढककर रखें, और घर की साफ सफाई का ध्यान रखें, यदि आप घर में गंदगी मचा कर रखेंगे तो गंदगी की तरफ तो मक्खियां आकर्षित होती ही हैं, इसीलिए साफ़ रखें ताकि मक्खियों से बचाव हो सकें।
  • फ्लाई स्ट्रिप्स का इस्तेमाल करें।
  • बाजार से मक्खियों को लाएं गए उत्पाद भी इस्तेमाल कर सकते हैं, परन्तु बच्चों को इनसे दूर रखें क्योंकि इनमे केमिकल की मात्रा अधिक होती है।

तो ये हैं कुछ उपाय जिनका इस्तेमाल करके आप मक्खियों को भगा सकते है, इसके साथ जितना हो सकें आपको अपने घर और आस पास साफ़ सफाई का ध्यान रखना चाहिए, बीमारियों से बचाव के लिए खाने को खुला नहीं रखना चाहिए, आस पास कूड़ा करकट, पानी आदि का जमाव भी नहीं होने देना चाहिए, इससे भी आपको मक्खियों से बचाव करने में मदद मिलेगी।

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प्रेगनेंसी में पसीने में से बदबू आना

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला बहुत सी परेशानियों का सामना करती है। लेकिन यदि महिला अपनी अच्छे से केयर करें, अपना अच्छे से ध्यान रखे तो महिला को इन परेशानियों से बचे रहने में मदद मिल सकती है। आज हम एक ऐसी ही परेशानी के बारे में बात करने जा रहे हैं और वो है प्रेगनेंसी में पसीने में से बदबू आना।

यह एक ऐसी परेशानी है जिसका कारण ज्यादातर गर्भवती महिला की गलत आदतें होती है। क्योंकि गर्भावस्था के दौरान यदि छोटी छोटी बातों का ध्यान रखा जाये तो प्रेग्नेंट महिला को इन परेशानियों से बचे रहने के साथ संक्रमण व् दूसरों के सामने शर्मिंदा होने से बचे रहने में मदद मिल सकती है। तो आइये पहले जानते हैं की प्रेगनेंसी में पसीने में से बदबू आने के क्या कारण होते हैं।

हार्मोनल बदलाव

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के शरीर में लगातार हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं। और इन्ही हार्मोनल बदलाव के चलते कुछ ऐसे हॉर्मोन का स्तर शरीर में बढ़ जाता है। जिनकी वजह से गर्भवती महिला के पसीने में से बदबू आ सकती है।

शरीर का तापमान

महिला के शरीर का तापमान प्रेगनेंसी के दौरान बढ़ जाता है। जिसके कारण महिला को गर्मी अधिक महसूस होती है जिसकी वजह से पसीना भी अधिक आता है। और पसीना अधिक आने के कारण महिला के पसीने में बदबू भी आ सकती है।

खान पान सही न होना

गर्भवती महिला यदि जंक फ़ूड, ज्यादा तेल मसाले वाले फ़ूड का सेवन अधिक करती है। तो इस कारण भी प्रेग्नेंट महिला के पसीने में अधिक दुर्गन्ध आने की समस्या हो सकती है।

दवाइयां

कई बार प्रेगनेंसी के दौरान ली जाने वाली दवाइयों के सेवन के कारण भी पसीने में बदबू आ सकती है। लेकिन सभी महिलाओं के साथ ऐसा हो ऐसा जरुरी नहीं होता है।

पानी की कमी

यदि प्रेग्नेंट महिला पानी का सेवन भरपूर मात्रा में नहीं करती है तो इस कारण गर्भवती महिला के शरीर में पानी की कमी हो जाती है। और शरीर में पानी की कमी होने के कारण गर्भवती महिला को पसीने में बदबू महसूस हो सकती है।

रहन सहन सही न होने के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपने रहन सहन का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिल सके। और यदि गर्भवती महिला का रहन सहन सही नहीं होता है तो इस कारण महिला को दिक्कत हो सकती है। जैसे की यदि महिला सुबह नहाने की जगह शाम में नहाती है, कपडे अच्छे से धोकर नहीं पहनती है, ज्यादा गर्मी में रहती है तो इस कारण भी गर्भवती महिला के पसीने में बदबू आती है।

पहनावा

गलत पहनावा भी गर्भवती महिला के पसीने में बदबू का कारण हो सकता है। क्योंकि यदि महिला सिल्की, ज्यादा टाइट, चुभने वाले कपडे पहनती है तो इस कारण शरीर तक हवा अच्छे से पास नहीं हो पाती है। जिस कारण महिला के पसीने में से बदबू ज्यादा महसूस हो सकती है।

साफ़ सफाई का ध्यान

गर्भवती महिला यदि अपने शरीर की साफ़ सफाई का ध्यान नहीं रखती है तो इस कारण भी गर्भवती महिला के पसीने में से बदबू आने लगती है।

प्रेगनेंसी के दौरान पसीने की बदबू दूर करने के टिप्स

  • दिन में दो बार बार नहाएं यदि गर्मी का मौसम है, और बाकी समय समय से नहाएं।
  • अपने पहनावे का ध्यान रखें पसीने के कारण होने वाली परेशानी से बचने के लिए सूती कपडे पहनें।
  • गर्भवती महिला को जंक फ़ूड, तेल मसाले का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए।
  • दिन में आठ से दस गिलास पानी का सेवन करें।
  • अपने घर को ठंडा रखें।
  • अपने शरीर की साफ़ सफाई का ध्यान रखें।
  • ज्यादा नॉन वेज, प्याज़, लहसुन आदि का सेवन नहीं करें।
  • नहाने के पानी में निम्बू का रस मिलाएं ऐसा करने से भी पसीने में आने वाली बदबू से निजात पाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से गर्भवती महिला के पसीने में बदबू आती है। साथ ही इस परेशानी से बचने के लिए कुछ आसान उपाय भी दिए गए हैं। तो यदि आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान यह परेशानी है तो आप भी इन बातों का ध्यान रखें ताकि आपको पसीने की बदबू के कारण होने वाली दिक्कतों से बचे रहने में मदद मिल सके।

Causes of Sweat Smell during Pregnancy

प्रेगनेंसी का पहला सप्ताह और बदलाव

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महिला के प्रेग्नेंट होने पर शारीरिक व् मानसिक रूप से बदलाव का आना आम बात होती है। और इसका कारण शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव होते हैं। ऐसा जरुरी नहीं होता है की हर महिला में एक जैसे बदलाव आएं क्योंकि यह हर महिला की शारीरिक सरंचना पर निर्भर करता है। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान आने वाले शारीरिक बदलाव ज्यादातर महिलाओं में एक जैसे होते हैं जैसे की ब्रेस्ट में भारीपन महसूस होना, स्वाद में परिवर्तन, पेट से जुडी परेशानी, आदि। इसके अलावा मानसिक रूप से भी महिला में बदलाव आते हैं, और प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने तक आपको कुछ न कुछ नया अनुभव होता रहता है।

प्रेगनेंसी के पहले हफ्ते में आने वाले बदलाव

प्रेगनेंसी के दौरान बहुत से बदलाव बॉडी में देखने को मिलते है और यह बदलाव शारीरिक व् मानसिक रूप से भी दिखाई देते हैं। तो आइये जानते हैं की प्रेगनेंसी के पहले हफ्ते में कौन कौन से बदलाव आते हैं।

पीरियड्स मिस होना

हर महीने अठाइस दिन में चक्र के बाद या उससे दो तीन दिन आगे पीछे आपको पीरियड्स आते हैं। लेकिन यदि आप प्रेग्नेंट होती है तो इसका सबसे पहला संकेत यही होता है की आपका पीरियड्स मिस हो जाता है।

ब्रेस्ट में सूजन व् भारीपन

प्रेगनेंसी के पहले हफ्ते आपको ब्रेस्ट में सूजन व् भारीपन की समस्या महसूस हो सकती है, क्योंकि शरीर में हो रहे हार्मोनल चेंज का प्रभाव दुग्ध ग्रथियों पर भी पड़ता है। जिससे की गर्भ में पल रहे शिशु के लिए दूध बनने की प्रक्रिया की शुरुआत भी हो जाती है।

कमजोरी व् थकान

बॉडी में अचानक से होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण शरीर में कमजोरी की समस्या आने लगती है। जिसके कारण आपको बहुत जल्दी थकान का अनुभव हो सकता है।

यूरिन ज्यादा आना

शरीर में हो रहे प्रेगनेंसी के दौरान बदलाव के कारण किडनी भी अधिक सक्रिय हो जाती है। जिसके कारण आपको बार बार यूरिन पास करने की इच्छा होती है।

स्किन में बदलाव

प्रेगनेंसी होने पर इसका असर आपको स्किन पर भी साफ़ दिखाई देता है। जैसे की आँखों के नीचे अधिक कालापन महसूस होना, स्किन पर थोड़े दाने, या दाग धब्बे उभर कर आना आदि।

सिर में भारीपन

सिर दर्द व् चक्कर आने की समस्या भी अक्सर प्रेगनेंसी के पहले हफ्ते में देखने को मिलती है, क्योंकि आपके शरीर की सभी प्रक्रियाएं मस्तिष्क द्वारा ही की जाती है। ऐसे में आपको सिर में भारीपन या चक्कर की समस्या होना आम बात होती है।

उल्टी

सुबह सुबह उठते ही आपको उल्टी जैसा महसूस होना, या उल्टी आना भी प्रेग्नेंट होने का आम लक्षण होता है। इस दौरान आपके मुँह का स्वाद भी कड़वा हो सकता है जिसके कारण आपको हमेशा उल्टी आने जैसा महसूस होने लगता है।

मूड स्विंग्स होना

इस दौरान महिला पर मानसिक रूप से भी असर पड़ता है जिसके कारण उसका मूड बदल सकता है, जैसे की हो सकता है की वो किसी चीज को देखकर खुश हो जाएँ तो कभी किसी चीज को देखकर उन्हें चिड़चिड़ापन महसूस होने लग जाए।

पेट में दर्द

प्रेगनेंसी के पहले हफ्ते में आपको पेट व् कमर में हल्का दर्द भी महसूस हो सकता है, क्योंकि इस समय मांसपेशियों में खिंचाव होना शुरू हो जाता है जिसके कारण यह आम होता है।

तो यह हैं कुछ बदलाव जो प्रेगनेंसी के पहले हफ्ते आपको बॉडी में दिखाई देते है, इसके अलावा आपको पीरियड्स मिस होने के दस दिन बाद प्रेगनेंसी किट का इस्तेमाल करके चेक भी करना चाहिए की कहीं आप प्रेग्नेंट तो नहीं हैं। और यदि आपको प्रेगनेंसी हो या न हो इसके लिए आपको एक बार डॉक्टर से राय लेनी चाहिए ताकि पीरियड्स मिस होने का कारण आपको पता चल सके।

विडिओ प्रेग्नेंसी का पहला सप्ताह और बदलाव

बर्थिंग बॉल क्या होती है? प्रेगनेंसी के दौरान बर्थिंग बॉल कैसे इस्तेमाल की जाती है

बर्थिंग बॉल, प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। जैसे की कमर दर्द, पेट के निचले हिस्से में दर्द, डिलीवरी को लेकर तनाव, बॉडी में अकड़न, मांसपेशियों में खिंचाव होने के कारण बॉडी में दर्द, आदि। और इन परेशानियों से बचाव के लिए एंटीबायोटिक दवाइयों का सेवन प्रेगनेंसी के समय नुकसानदायक हो सकता है। तो इन परेशानियों से बचाव के लिए प्रेग्नेंट महिला कुछ अलग तरीको का इस्तेमाल कर सकती है। जैसे की मैडिटेशन, योगासन, सैर, मैटरनिटी बेल्ट का इस्तेमाल, प्रेगनेंसी पिल्लो का इस्तेमाल आदि। यह सभी प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद करते हैं। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको एक और ऐसी चीज के बारे में बताने जा रहे हैं जो प्रेगनेंसी के दौरान फायदेमंद होती है और वो है बर्थिंग बॉल।

बर्थिंग बॉल क्या होती है?

यह एक ऐसी बॉल होती है जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला के लिए बहुत फायदेमंद होती है। और इस बॉल का इस्तेमाल केवल प्रेगनेंसी के दौरान ही नहीं बल्कि शिशु के जन्म के बाद भी किया जा सकता है। आपने जिम में एक बड़ी से बॉल को देखा होगा, बर्थिंग बॉल भी कुछ ऐसी ही होती है। यह न फूटने वाले पदार्थ से बनी होती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को इस बॉल को लेकर मन में कोई डर नहीं रखना चाहिए। और यदि यह बॉल खाली होती भी है। तो धीरे धीरे इसमें से हवा निकलती है। यह एक दम से खाली नहीं हो जाती है। प्रेगनेंसी के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली यह बॉल आरामदायक होने के साथ बहुत फायदेमंद भी होती है।

Birthing ball का इस्तेमाल करने के फायदे

  • यह बॉल बहुत ही आरामदायक होती है गर्भवती महिला कुर्सी या सोफे के मुकाबले इस बॉल पर आरामदायक तरीके से बैठ सकती है।
  • बर्थिंग बॉल का इस्तेमाल करने से प्रेग्नेंट महिला को पीठ में दर्द की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।
  • गर्भाशय में ब्लड फ्लो को बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है।
  • रीढ़ की हड्डी पर पड़ने वाले दबाव के कारण हो रही परेशानी को कम करने के लिए इसका इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है।
  • पेल्विक एरिया की मांसपेशियों को आराम पहुंचाने में मदद करती है जिससे डिलीवरी के दौरान अधिक दर्द की परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • गर्भ में पल रहे शिशु को सही पोजीशन में लाने के लिए इस बॉल का इस्तेमाल करना बहुत फायदेमंद होता है।
  • गर्भावस्था के दौरान बर्थिंग बॉल की मदद से प्रेग्नेंट महिला का व्यायाम आराम से हो जाता है।

किस तरह करें बर्थिंग बॉल का इस्तेमाल

  • बर्थिंग बॉल का इस्तेमाल बहुत तरीको से किया जा सकता है।
  • जैसे की आप इस पर बैठकर अपने हाथों से अपने पैरों को छूकर व्यायाम कर सकती है।
  • आप घुटने के बल बैठकर अपने दोनों हाथों के सहारे अपने मुँह इस बॉल पर रखकर व्यायाम कर सकती है, इससे कमर में दर्द से आराम मिलता है।
  • इसके अलावा और भी तरीको से आप इस बॉल का इस्तेमाल कर सकती है ऐसे में इसके लिए आपको एक बार डॉक्टर से बात करनी चाहिए।
  • ताकि कौन सी पोजीशन सही और प्रेगनेंसी के दौरान फायदेमंद है उसके बारे में आपको अच्छे से जानकारी मिल सके।

प्रेगनेंसी के दौरान Birthing ball का साइज क्या होना चाहिए

  • गर्भावस्था के दौरान आपकी हाइट के अनुसार बर्थिंग बॉल का साइज लिए जाता है।
  • जैसे की यदि आपकी लम्बाई यदि 5 फुट 4 इंच से कम है तो बॉल का साइज 55 सेंटी मीटर होना चाहिए।
  • यदि आपकी लम्बाई 5 फुट 4 इंच से 5 फुट 10 इंच तक है तो बॉल का साइज 65 सेंटी मीटर होना चाहिए।
  • इसके अलावा यदि आपकी लम्बाई 5 फुट 10 इंच से ज्यादा है तो 75 सेंटीमीटर की बॉल लेनी चाहिए।

बर्थिंग बॉल का इस्तेमाल करते समय बरतें यह सावधानियां

  • ज्यादा तापमान, आग के आस पास से इस बॉल को दूर रखें।
  • किसी भी नुकीली चीज को बॉल के आस पास न रखें।
  • खुरदरी जगह पर इस बॉल को रखने से बचें।
  • जब भी बॉल खरीदने जाएँ तो हवा भरने के लिए पंप जरूर खरीदें।
  • बॉल का कवर जरूर खरीदें ताकि बॉल को सेफ रखने में मदद मिल सके।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली बर्थिंग बॉल से जुडी कुछ जरुरी बातें, जो प्रेग्नेंट महिला के लिए बहुत फायदेमंद हो सकती है। ऐसे में यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आप भी प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने के लिए बर्थिंग बॉल को खरीद सकती है। ताकि गर्भावस्था में आपको रिलैक्स रहने में मदद मिल सके।

कोल्ड्रिंक्स पिने के नुक्सान – Effect of Having Cold-Drinks

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कोल्ड्रिंक्स हर किसी को चाहें बच्चे हो या बड़े सभी को बेहद पसंद होती है। कुछ लोग 12 महीनें कोल्ड्रिंक्स पीते है और कुछ सिर्फ गर्मियों में पर हर कोई इनका सेवन जरूर करता है। गर्मियां आने पर बाजार में कोल्ड्रिंक्स की डिमांड बढ़ जाती है। लोग गर्मियों की प्यास बुझाने के लिए दिन में एक बार तो कोल्ड्रिंक्स का सेवन कर ही लेते है।

अक्सर आपने हमारे बड़ो को कहते हुए सुना होगा की कोल्ड्रिंक मत पियो यह नुकसानदायक है। पर क्या हमने कभी यह जानने की कोशिश करी की आखिर क्यों कोल्ड्रिंक्स नुकसानदायक है और कितना नुक्सान पहुंचाती है।

तो आइये आज जानते है कोल्ड्रिंक्स के क्या नुक्सान होते है।

  • एक ग्लास कोल्ड्रिंक या एक कैन कोल्ड्रिंक में 10 चम्मचों के बराबर चीनी होती है। इतनी चीनी शायद ही आप दिन भर में लेते होंगे।
  • कोल्ड्रिंक पिने के 20 मिंट के अंदर ही आपके शरीर में शुगर लेवल बढ़ जाता है।
  • शरीर में इन्सुलिन लेवल इतनी तेजी बढ़ता है के आपके लिवर को इसे नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त शुगर को फैट यानि वसा में बदलना पड़ता है।
  • ज्यादा कोल्ड्रिंक्स पिने वाले लोगो का मोटापा बहुत तेजी से बढ़ता है।
  • कोल्ड्रिंक पिने के 40 मिंट के अंदर इसमें मौजूद सारी कैफीन आपके शरीर में पूरी तरह से मिल जाती है। जिसके कारण आप अलर्ट महसूस करते है।
  • इस दौरान आपके शरीर का ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। बढ़े हुए ब्लड प्रेशर को कण्ट्रोल करने के लिए लिवर एक्स्ट्रा शुगर छोड़ने लगता है।
  • कोल्ड्रिंक पिने के 45 मिंट के अंदर शरीर में डोपामाइन केमिकल बढ़ने लगता है यह केमिकल आपको ख़ुशी प्रदान करने वाला होता है। हिरोइन जैसे ड्रग्स के सेवन के दौरान भी ठीक यही प्रक्रिया आपके शरीर में होती है।
  • सॉफ्ट ड्रिंक में मौजूद कैफीन और फॉस्फोरिक एसिड के कारण आपके शरीर को कैल्शियम, मैग्नीशियम और जिंक नहीं मिल पाते।
  • कोल्ड्रिंक पिने से सभी जरुरी पोषक तत्व हमारे शरीर से बाहर निकल जाते है।
  • इसके सेवन से हमारी हड्डियों और दांतो को भारी नुक्सान होता है।
  • रिसर्च में यह बात प्रमाणित हुई है के कोल्ड्रिंक पिने से हृदय रोग, टाइप 2 डॉयबिटीज़ और कैंसर जैसे बीमारी होने का दर रहता है।

इन सभी नुक्सानों के आलावा आपको यह जानकर और भी हैरानी होगी की एक 500 ml कोल्ड्रिंक बनाने के लिए 35 लीटर पानी का इस्तेमाल किया जाता है। तो कोल्ड्रिंक्स का सेवन न के सिर्फ हमारे शरीर का बल्कि हमारी धरती का भी बहुत नुक्सान कर रही है।

नारियल तेल और कपूर के फायदे गर्भावस्था में

गर्भावस्था में हमारे शरीर में बहुत से शारीरिक और मानसिक बदलाव होते है। कुछ बदलाव दीखते है और कुछ का तो पता भी नहीं चलता है। जैसे जैसे हमारे शरीर में बदलाव होते जाते है और हमारा आकर बढ़ता जाता है वैसे वैसे हमारी त्वचा खींचने लगती है। हमारे वेट बढ़ता चला जाता और साथ साथ हमारी बॉडी में टाइटनेस आती जाती है।

त्वचा में खिचांव और टाइटनेस आने से बहुत सी परेशानिया भी होने लगती है। जैसे की त्वचा रूखी हो जाती है और खुजली होनी शुरू हो जाती है। कई बार ज्यादा खुजली करने से मार्क्स भी पड़ जाते है। इन मार्क्स को हम स्ट्रेच मार्क्स के नाम से भी जानते है। यह मार्क्स गर्भावस्था में ब्रैस्ट पर या पेट पर हो जाते है। सबसे ज्यादा परेशानी होती है इचिंग की, कई बार तो हम इचिंग करते करते इतने परेशान हो जाते है और फिर भी आराम नहीं मिलता।

इन सभी चीजों के आलावा गर्भावस्था में हमारी त्वचा पर भी बहुत से बदलाव आते जैसे की मुहाँसे, झाइयाँ आदि। कई बार तो मिनरल्स और विटामिन्स की कमी के कारण त्वचा काली भी पड़ने लगती है। यह सब बाते बताने का मतलब यह नहीं की प्रेगनेंसी से हम आपको डरा रहे है बस हम आपको पहले से आगाह कर रहे है। वैसे भी प्रोब्लेम्स है तो सोल्यूशन्स भी है आइये उन हलों के बारे में भी अच्छे से जान लेते है।

आज हम आपको दो गुणकारी चीजों के बारे में बताएंगे। यह दोनों चीजे गर्भावस्था में आपके बहुत ही काम आएगी एक नारियल तेल और दूसरा कपूर। नारियल के तेल के फायदों के बारे में लगभग हम सबने ही सुन रखा है। लेकिन कपूर के बारे में बहुत कम लोगों को ही जानकारी है। कपूर को पूजा पाठ में भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके अतिरिक्त कपूर को औषधीय रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। एक शोध में भी यह बात समने आयी है के कपूर दर्द, सूजन और त्वचा की कई तरह की परेशानियों को ठीक करने के काम आती है।

शायद आपको पता भी नहीं होगा की नारियल और कपूर को मिलाकर बहुत से कामो में लाया जाता है। आइये जानते है के दोनों के मिश्रण से किस प्रकार गर्भावस्था में फायदा लिया जा सकता है।

इचिंग यानी खुजली

गर्भावस्था में हल्की खुजली होना बहुत ही आम बात है, पर यदि शुरुआत में ही इस खुजली के लिए कुछ ना किया जाए तो यह जल्द ही स्ट्रेच मार्क्स का रूप ले लेती है। एक चम्मच कपूर का पाउडर ले और इसे एक कटोरी नारियल तेल में मिलाये। इस मिश्रण को खुजली वाली जगह पर दिन दो से तीन बार लगाए। कपूर आपकी त्वचा को ठंडक पहुँचायेगा और नारियल तेल आपकी त्वचा के रूखेपन को दूर करेगा।

इस मिश्रण के उपयोग से खुजली की समस्या धीरे धीरे खत्म हो जायेगी। शरीर के किसी भी हिस्से पर खुजली होने पर आप इसका इस्तेमाल कर सकती है। और आपको कोई भी साइड इफ़ेक्ट भी नहीं होगा।

मुँहासे और पिम्पल्स

प्रेगनेंसी के दौरान बहुत से हार्मोनल बदलाव होते है। जिसके कारण कई बार फेस पर मुँहासे या पिम्पल्स निकल जाते है। नारियल तेल और कपूर के मिश्रण को सुबह शाम मुँहासो पर लगाने से आराम मिलता है। यह हमारे त्वचा के पिम्पलस को ठीक करते है।

दाग धब्बे

यदि आपको नारियल और कपूर के मिश्रण के इस्तेमाल को बारे में पहले नहीं पता था और खुजली कर कर के आपके शरीर पर दाग धब्बे बनते जा रहे है। तो कोई बात नहीं अब भी देर नहीं हुई है। आप अब भी इस मिश्रण को इस्तेमाल कर सकते है, नारियल का तेल और कपूर सिर्फ आपकी इचिंग से ही आपको राहत नहीं देगा बल्कि आपकी त्वचा पर जो दाग धब्बे भी पड़ गए है उनसे भी राहत मिलेगी।

इसके उपयोग से दाग धब्बे धीरे धीरे हल्के पड़ कर खत्म हो जाएंगे। इसके अतिरिक्त मुँहासो से पड़ने वाले दागो से भी यह छुकारा दिलाता है। कई गर्भवती महिलाओं में फोलेट और आयरन की कमी होने के कारण चेहरे पर झाइयाँ भी पड़ जाती है। नारियल तेल और कपूर की मसाज करने से चेहरे की झाइयाँ भी ठीक हो जाती है।

खाना बनाते समय प्रेग्नेंट महिला को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

गर्भावस्था कोई बिमारी नहीं होती है की जिसमे महिला को बिल्कुल आराम करने की सलाह दी जाती है। बल्कि घर के छोटे छोटे काम गर्भवती महिला कर सकती है, लेकिन महिला जो भी काम करती है उसमे पूरी सावधानी बरतने की जरुरत होती है। क्योंकि कोई भी काम ऐसा हो जिसे करते समय पेट पर दबाव पड़े, आपको थकान का अनुभव अधिक हो तो ऐसे काम महिला को कम ही करने चाहिए। तो आज इस आर्टिकल में हम आपसे खाना बनाते समय प्रेग्नेंट महिला को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए उस बारे में बात करने जा रहे हैं। क्योंकि खाना बनाते समय की गई छोटी छोटी गलतियों के कारण प्रेग्नेंट महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

पंखा लगवाएं

रसोई में बहुत गर्मी होती है ऐसे में गर्मी से बचने के लिए प्रेगनेंसी के दौरान कोशिश करें की आप अपनी किचन में एक पंखा लगवा लें। जिससे आपको गर्मी में किचन में काम करने में दिक्कत न हो।

कुर्सी रखें

किचन में सारा काम खड़े रहकर नहीं होता है बल्कि चोप्पिंग यानी सब्जियां काटने के लिए आप बैठ सकती है या फिर जब काम करते हुए थक जाये तो थोड़ा आराम कर सकती है। और इसके लिए आपको किचन में कुर्सी रखनी चाहिए। इससे आपको आराम भी मिलेगा और आपका काम भी हो जायेगा।

किचन का काम जो बाहर बैठकर हो सकता है वो बाहर करें

कुछ ऐसे काम होते हैं जैसे की सब्जियां काटना, आटा गुथना आदि वो महिला किचन से बाहर बैठकर भी कर सकती है। ऐसा करने से किचन में महिला को ज्यादा समय नहीं बिताना पड़ता है। ऐसे में किचन में आपको ज्यादा परेशानी न हो इसके लिए जो काम किचन से बाहर हो सकते हैं उन्हें बाहर ही कर लें।

शेल्फ के साथ चिपक कर खड़ी न हो

कई महिलाओं की आदत होती है की वो सब्ज़ी बनाते समय, रोटी बनाते समय, बर्तन धोते समय शेल्फ को बिल्कुल चिपक कर खड़ी हो जाती है। लेकिन प्रेग्नेंट महिला को शेल्फ से दूरी बनाकर खड़े होना चाहिए। क्योंकि शेल्फ के साथ बिल्कुल चिपक कर खड़े होने से पेट पर दबाव पड़ता है जिसके कारण शिशु को दिक्कत हो सकती है।

लगातार खड़ी न रहें

किचन में काम करते समय ध्यान रखें की लम्बे समय के लिए केवल खड़ी ही न रहें। क्योंकि ज्यादा देर खड़े रहने से पैरों तक ब्लड फ्लो अच्छे से नहीं हो पाता है, साथ ही बॉडी का पूरा वजन पैरों पर पड़ता है जिसकी वजह से महिला को सूजन व् पैरों में दर्द की समस्या से प्रेगनेंसी के दौरान अधिक परेशान होना पड़ सकता है।

गैस से दूरी बनाकर रखें

लगातार बहुत देर तक गैस के पास न खड़ी रहें क्योंकि गैस के कारण आपको गर्मी अधिक महसूस हो सकती है। साथ ही इसके कारण शरीर के तापमान बढ़ सकता है। और शरीर का तापमान बढ़ने के कारण महिला को दिक्कत हो सकती है।

तेजी न करें

किचन का काम करते समय बिल्कुल तेजी न करें क्योंकि आपने यह तो सुना होगा की जल्दी का काम शैतान का होता है। और हो सकता है की जल्दी जल्दी के चक्कर में आपको कोई परेशानी हो जाएँ ऐसे में आपको आराम से ही किचन में काम करना चाहिए। ताकि काम भी हो जाये और आपको कोई परेशानी भी न हो।

थक जाएँ तो थोड़ा आराम करें

यदि काम करते समय आपको थकावट महसूस होने लगे तो रुक जाएँ और थोड़ी देर आराम करें। और यदि आपको ऐसा लगे की आपको परेशानी हो रही है और आपसे काम नहीं होगा। तो आपको काम नहीं करना चाहिए और आराम करना चाहिए साथ ही काम करने के लिए घर के किसी अन्य सदस्य को बोलना चाहिए।

जिस काम को करने में परेशानी हो उसके लिए दूसरों की मदद लें

यदि आपको किचन में कोई सामान ऊपर से उठाना हैं, झुककर किसी काम को करना है, या ऐसी कोई चीज बनानी है जिसकी गंध से आपको एलेर्जी है। तो यह सभी काम खुद करने की बजाय घर के किसी और सदस्य से करवाएं। ताकि आपको और आपके बच्चे को कोई दिक्कत न हो।

तो यह हैं कुछ बातें जिनका ध्यान गर्भवती महिला को खाना बनाते किचन में रखना चाहिए। यदि प्रेग्नेंट महिला इन बातों का ध्यान रखती है। तो प्रेग्नेंट महिला को खाना बनाने में किसी तरह की परेशानी नहीं होती है।

तनाव दूर करने के उपाय

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव भी लोगो की जिंदगी का अहम हिस्सा बनाकर रह गया है, हर किसी व्यक्ति को किसी न किसी चीज की टेंशन लगी ही रहती है, परन्तु टेंशन का इलाज नहीं होगा तो आपकी परेशानी और बढ़ जायेगी, इसके लिए जरुरी है की आप अपने तनाव का कारण जानकार उसका समाधान करें, तनाव होने के कारण व्यक्ति धीरे धीरे अकेलेपन और उदासी की और जाने लगता है, और ऐसा लगता है उसे किसी काम में या अपनी जिन्दगी में ही कोई दिलचस्पी नहीं रह गई है, इसका कारण आपका किसी छोटी सी बात को बड़ी परेशानी का रूप देना भी हो सकता है, तनाव के कारण व्यक्ति किसी भी तरह का निर्णय लेने में सक्षम नहीं रहता है, उसमे आत्मविश्वास की कमी होने लगती है, और भी बहुत सी समस्याए हो जाती है, तो आइये आज हम रोजमर्रा की जिंदगी में होने वाले तनाव से बचने के लिए आपको कुछ टिप्स देने जा रहे हैं, जिनके इस्तेमाल से आपको तनाव से बचने में मदद मिलती है।

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व्यायाम और मैडिटेशन को अपनी दिनचर्या में शामिल करें:-

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तनाव से बचने के लिए व्यायाम और मैडिटेशन एक बहुत ही अच्छा उपाय है, क्योंकि व्यायाम करने से आपके शरीर में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है, और साथ ही बॉडी में सेरोटोनिन और टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन का स्त्राव भी होता है, जिससे आपके अंदर एक सकारात्मक ऊर्जा आती है, और आपके दिमाग को स्थिर रहने में मदद मिलती है, साथ ही मैडिटेशन करने से आपको दिमागी रूप से बहुत अधिक आराम मिलता है,और आपके अंदर एक पॉज़िटिव एनर्जी का संचार होता है,और  तनाव से बचने में मदद मिलती है।

अच्छे दोस्तों को अपने जीवन में शामिल करें:-

अच्छे दोस्त भी आपको तनाव से बचाने में मदद करते है, इसीलिए आपको दोस्त बनाने चाहिए,परन्तु आपको इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए की आप ऐसे दोस्त बनाएं, जो आपको सहानुभूति देने की बजाय सही सलाह दें, क्योंकि कई बार आपके दोस्त आपके साथ होते हुए भी साथ नहीं देते हैं, इसीलिए अच्छेदोस्त बनाएं जो आपको तनाव से बाहर निकालने में आपकी मदद कर सकें।

नकारात्मक लोगो से दूरी बनाकर रखें:-

न, नहीं ऐसे कहने वाले लोग आपको तनाव में धकेलने का काम करते है, क्योंकि इससे आपके अंदर कभी भी सकारात्मक ऊर्जा नहीं बन पाती है, इसीलिए आपको यदि तनाव से बचना है तो इससे बचने के लिए आपको जितना हो सकें नकारात्मक लोगो से दूरी बनाकर रखनी चाहिए, और सकारात्मक लोगो को अपने साथ रखें, इससे आपके अंदर एक नई ऊर्जा का संचार होता है, और आपको अवसाद से बचने में मदद मिलती है।

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अकेले रहने से बचें:-

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अकेले रहने के कारण भी व्यक्ति अवसाद की चपेट में आ सकता है, साथ ही कई लोग तनाव होने के कारण अकेले रहना शुरू कर देते हैं, जबकि अकेले रहने के से आपकी परेशानी और बढ़ जाती है, इसीलिए अवसाद से बचने के लिए आपको लोगो के संपर्क में रहना चाहिए ताकि आपको उस समस्या का समाधान करने में मदद मिल सकें।

ब्लोग्स और जर्नल लिखें:-

कई लोगो को अधिक बातें करना या घूमना फिरना पसंद नहीं होता है, तो इसके लिए भी एक समाधान है की आप बुक्स को अपना दोस्त बनाएं, क्योंकि इससे भी आपको मानसिक रूप से राहत मिलती है, साथ ही आप यदि अपने मन के विचारो को किसी से शेयर नहीं करना चाहते ही तो ब्लोग्स लिखना शुरू करें, या डायरी लिखें इससे भी आपको तनाव से बचने में मदद मिलती है।

दूसरों से कभी यह आशा न रखें की वो आपको समझे:-

कुछ लोग हमेशा दूसरों को खुश करने में लगे रहते है जिसके कारण जिंदगी में उन्हें बहुत बार निराशा हाथ लगती है, ऐसे में दूसरों को संतुष्ट करने के चक्कर में वो लोग अपने आप को अवसाद में डुबो लेते है, ऐसा करने से बचें और हमेशा दूसरों की सोचने के साथ अपने आप के बारे में भी थोड़ा सोचें।

आज में जीना सीखें:-

भूतकाल में क्या गलतियां क्या परेशानिया थी उन्हें अपने आज में शामिल न करें, यदि आप तनाव से बचने चाहते हैं तो अपने आज में जीना सीखें, क्योंकि यदि आप हमेशा गढ़े मुर्दे उखाड़ने में लगी रहती हैं तो इसके कारण भी आपको हमेशा दिमागी रूप से परेशान ही होना पड़ता है, जिसके कारण आप अपने वर्तमान को भी खराब कर लेते है, इसीलिए आज में जीना सीखें।

संगीत से अपना सम्बन्ध बनाएं:-

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संगीत भी तनाव से बचने का एक अहम माध्यम हैं संगीत सुनने से आपको अपने दिमाग को फ्रैश महसूस करवाने में मदद मिलती है, मूड बदलने, मन को उपर उठाने और भावनाओं से ऊपर उठाने की ताकत संगीत में भरपूर होती है, और संगीत सुनते समय आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए की आप सैड संगीत न सुने क्योंकि इससे आपको नकारात्मक महसूस हो सकता है, ऐसे गाने सुने जिनसे आपका मन खुश हो जाए।

सेक्स लाइफ का भी आनंद उठाएं:-

यदि आप शादीशुदा हैं तो आपकी बेहतर सेक्स लाइफ भी आपको तनाव से बचाने में मदद करती है, इसीलिए तनाव के होने पर कभी भी अपनी सेक्स लाइफ को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि सेक्स करते समय आपके शरीर में ऐसे हॉर्मोन स्त्रावित होते है, जो आपको तनाव, व् मानसिक दबाव से राहत दिलाने में मदद करते है।

नींद को भी भरपूर लें:-

भरपूर नींद भी आपको स्ट्रैस की समस्या से बचाने में मदद करती है, क्योंकि यदि आप नींद पूरी नहीं लेते है तो इससे आप सारा दिन आलस महसूस करते है, जिससे आप किसी भी काम को दिलचस्पी से नहीं कर पाते हैं, नतीजा आपके दिमाग पर दबाव पड़ता है, और यदि आप एक दिन में कम से कम आठ घंटे की नींद लेते हैं तो इससे आपको मानसिक रूप से राहत मिलने में मदद मिलती है, जिससे आपको अवसाद से बचाया जा सकता है।

तनाव से बचने के अन्य उपाय:-

  • चाहे आप कितना भी जरुरी काम करें, लेकिन हर एक घंटे में पांच मिनट का आराम अपने आप को जरूर दें, ऐसा करने से आपके दिमाग को रिलैक्स होने में मदद मिलती है।
  • यदि आप अपनी लाइफ में तनाव को जगह नहीं देना चाहते हैं तो इससे बचने के लिए आपको अपने विचारों में सकारात्मकता लानी चाहिए।
  • अकेले न रहे अपने जीवन में थोड़ा हंसी मज़ाक करना भी बहुत जरुरी होता है, इसीलिए अपने परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं, और कोई परेशानी है तो उसे शेयर करें।
  • अपने एस पास के माहौल को हमेशा खुशनुमा बनाकर रखें, लोगो से दिल खोल कर मिलें और बातें करें।
  • कभी कभी अपनी बॉडी की मसाज करें, इससे आपके शरीर में रक्त का प्रवाह अच्छे से होता है, जिससे आपको आराम मिलता है और फ्रेश महसूस हो।
  • खान पान में किसी भी तरह की लापववाही न करें, संतुलित व् पौष्टिक आहार का नियमित रूप से सेवन करें।
  • प्रकृति के साथ थोड़ा समय बिताएं इससे भी आपको मन और दिमाग दोनों रूप से ही शांति मिलेगी।
  • यदि आपको जानवरों से लगाव है तो अपने घर में ही अपने पसंद के पेट को पालन, उसके साथ समय बिताने से भी आपको अच्छा महसूस होता है, और आपको टेंशन से भी रिलीफ मिलती है।
  • पानी का भरपूर सेवन करने से भी आपके शरीर में ऊर्जा को भरपूर बनाएं रखने में मदद मिलती है, इसीलिए पानी का भरपूर सेवन करें।
  • दवाइयों, और नशें की लत के बिलकुल पास न जाएँ, क्योंकि यह आपको टेंशन से बचाने की बजाय आपकी टेंशन को और बढ़ा देती है।

तो ये हैं कुछ टिप्स जिनकी मदद से आप अपने जीवन में आने वाले तनाव को दूर कर सकते है, साथ ही यदि आपको कोई भी परेशानी हो तो उसे अपने दिमाग पर हावी नहीं होने देना चाहिए बल्कि जितना जल्दी हो उसका हल निकालने की कोशिश करनी चाहिए, ऐसा करने से आपको तनाव से बचने में मदद मिलती है और आप दिमागी रूप से भी आराम महसूस करते है।

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गर्भवती महिलाओं को नाश्ते में यह जरूर खाना चाहिए

गर्भवती महिलाओं को नाश्ते में यह जरूर खाना चाहिए, प्रेगनेंसी के दौरान महिला नाश्ते में करें इन्हे शामिल, प्रेग्नेंट महिला को नाश्ते में क्या खाना चाहिए, गर्भवती महिला का सुबह का नाश्ता, Breakfast tips during Pregnancy

प्रेगनेंसी के दौरान खान पान का बहुत अधिक महत्व होता है क्योंकि इस दौरान महिला को तीन सौ अधिक कैलोरी की आवश्यकता होती है। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला और शिशु दोनों ही स्वस्थ रह सके। और सुबह का नाश्ता सबसे अहम होता है क्योंकि यह दिन का पहला आहार होता है जो आप रात को सोने के बाद सुबह सबसे पहले लेते हैं। और यह आहार यदि आप बेहतर तरीके और पौष्टिक तत्वों से भरा हुआ लेती है तो इससे न केवल प्रेगनेंसी में आने वाली परेशानियां कम होती है, बल्कि आपको तनाव, मॉर्निंग सिकनेस, कमजोरी, व् थकान जैसी परेशानियों से राहत मिलती है। साथ ही यह शिशु के विकास के लिए भी बेहतर होता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को नाश्ते में क्या क्या खाना चाहिए।

दूध व् दूध से बने प्रोडक्ट्स

सुबह के नाश्ते में आपको दूध व् दूध से बने उत्पाद को शामिल करना चाहिए। क्योंकि इसमें प्रोटीन व् कैल्शियम भरपूर होता है जो आपको एनर्जी से भरपूर रखने में मदद करता है। साथ ही यह शिशु की हड्डियों के विकास के लिए बहुत जरुरी होता है। दूध के अलावा दही, पनीर, छाछ आदि का सेवन आप कर सकते हैं।

ताजे फल व् उनका रस

फल भी भरपूर पोषक तत्व वाले होते है, इसमें प्रोटीन, सिलिकॉन, कैल्शियम, व् अन्य पोषक तत्व होते हैं। फलों के साथ आप घर में निकाले ताजे फलों के रस का भी सेवन करें, इससे न केवल आपकी बॉडी में पानी की कमी पूरी होती है बल्कि बॉडी को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

अंडे

प्रेगनेंसी के दौरान आपको बॉडी में कैलोरी की बहुत आवश्यकता होती है जो आपको अंडे से भरपूर मिलती है, साथ ही इसके सेवन से आपको प्रोटीन, आयरन, फोलिक एसिड, मैग्नीशियम आदि भरपूर मिलता है। सुबह यदि नाश्ते में आप दो अंडे या ऑमलेट का सेवन करते हैं तो यह आपके लिए बहुत फायदेमंद होते हैं क्योंकि यह बॉडी में भरपूर ऊर्जा को बरकरार रखने में आपकी मदद करते हैं।

साबुत अनाज

दालें, ब्राउन राइस, कॉर्न फलैक्स, दलिया, पराठे आदि का सेवन भी आप सुबह के नाश्ते में कर सकते हैं। क्योंकि इनमे भी फाइबर, आयरन, प्रोटीन, विटामिन व् अन्य एंटी ऑक्सीडेंट भरपूर होते हैं। जो की आपको भरपूर पोषण देने के साथ आपको पूरा दिन फ्रैश और तरोताज़ा रहने में मदद करते हैं।

सलाद

ताजे फल व् सब्जियों का सलाद बनाकर उसका सेवन भी आप कर सकती है, क्योंकि इससे भी आपको भरपूर पोषक तत्व मिलते हैं। और इसमें आप सेब, संतरा, गाजर, टमाटर, अनार, चुकंदर आदि को शामिल कर सकती हैं।

भीगे हुए बादाम व् अंकुरित अनाज

सुबह के नाश्ते में आप पांच छह भगे हुए बादाम या अंकुरित, मूंग या चना आदि का सेवन भी कर सकते हैं, क्योंकि इनमे भी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं जो आपके लिए बहुत फायदेमंद होते हैं।

पानी का करें भरपूर सेवन

नाश्ते में आपको भरपूर पानी का सेवन भी करना चाहिए, क्योंकि पानी भी आपको फ्रैश व् एनर्जी से भरपूर रखने में मदद करता हैं। इसीलिए कम से कम दो गिलास फिल्टर्ड या उबले हुए पानी को ठंडा करके आपको उसका सेवन जरूर करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका इस्तेमाल आप प्रेगनेंसी के दौरान नाश्ते में कर सकते है, जिससे आपको एक हैल्थी प्रेगनेंसी के साथ सेहतमंद शिशु को जन्म देने का मौका मिलता है। और सुबह का नाश्ता आपको जितना जल्दी हो सके कर लेना चाहिए, ज्यादा से ज्यादा आपको आठ बजे तक नाश्ता कर लेना चाहिए।

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गर्भावस्था के दौरान नाश्ते में ये जरूर खाएं।