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प्रेगनेंसी में बाल झड़ने से ऐसे बचाएं

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। और उन्ही समस्याओं में से एक है बाल झड़ने की समस्या, बाल झड़ने की समस्या केवल प्रेगनेंसी के दौरान ही नहीं बल्कि प्रसव के बाद भी महिलाओं को हो सकती है। और अधिकतर गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान इस समस्या से परेशान हो सकती है। और महिला के बाल झड़ना उन्हें लिए बहुत बड़ी समस्या होती हैं साथ ही इस समस्या के होने के कई कारण हो सकते हैं। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान बालों के झड़ने के क्या कारण होते हैं। और प्रेग्नेंट महिला कैसे इस परेशानी से निजात पा सकती है।

प्रेगनेंसी में बाल झड़ने के कारण

  • गर्भवस्था के दौरान बॉडी में बहुत से हार्मोनल बदलाव होते हैं जिनके कारण बॉडी में एस्ट्रोजन, प्रोजेस्ट्रोन व् अन्य हॉर्मोन्स के स्तर में उतार चढ़ाव आता है। और हार्मोनल अंसतुलन होने के कारण गर्भवती महिला के बाल झड़ने लगते हैं।
  • यदि प्रेग्नेंट महिला पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन नहीं करती है। तो इससे बॉडी के साथ बालों के विकास के लिए जरुरी पोषक तत्व बालों को नहीं मिलते हैं नहीं मिलते हैं जिससे बाल कमजोर होकर झड़ने लगते हैं।
  • गर्भवती महिला का तनाव लेना भी बालों के झड़ने का कारण होता है।
  • नींद में कमी के कारण भी बाल झड़ते हैं क्योंकि इसके कारण हॉर्मोन्स असंतुलित हो सकते हैं और हार्मोनल असंतुलन के कारण बालों के झड़ने की समस्या हो सकती है।
  • प्रेग्नेंट महिला के शरीर में पानी की कमी होने पर भी बाल सूखे, कमजोर ही जाते हैं जिसके कारण बाल झड़ने लगते हैं।
  • प्रेगनेंसी के दौरान या पहले कभी महिला बालों को तेल आदि से पोषित नहीं करती है तो इसके कारण भी प्रेगनेंसी के दौरान बाल झाड़ सकते हैं।
  • गर्भावस्था के दौरान गेस्टेशनल शुगर, थायरॉयड, खून की कमी जैसी परेशानियां होने के कारण भी बाल झड़ने की समस्या गर्भवती महिला को अधिक हो सकती है।
  • जो गर्भवती महिला पहले गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करती थी उन महिलाओं को भी प्रेगनेंसी के दौरान यह परेशानी अधिक हो सकती है।
  • यदि आपके बाल पतले हैं या सिर से सम्बंधित कोई परेशानी या एलर्जी आदि है तो भी बाल झड़ सकते हैं।
  • अनुवांशिक समस्या यानी की यदि प्रेगनेंसी के दौरान आपकी माँ या बहन को यह समस्या थी तो आपको भी हो सकती है।
  • गर्भवती महिला यदि बार बार अपने शैम्पू, तेल आदि में बदलाव करती रहती है तो भी बालों से जुडी परेशानी महिला को होती है।

गर्भावस्था में बालों को झड़ने से बचाने के उपाय

प्रेगनेंसी के दौरान महिला यदि कुछ आसान टिप्स का ध्यान रखती है तो इससे बालों को पूरा पोषण मिलता है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। तो आइये जानते हैं की बालों को झड़ने से बचाने के लिए गर्भवती महिला क्या क्या कर सकती है।

मसाज करें

जिस तरह बॉडी को फिट रखने के लिए खाना खाना जरुरी होता है उसी तरह बालों को पोषक देने के लिए बालों के लिए बेहतरीन तेल से मालिश यानी मसाज करनी जरुरी होती है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला बादाम, सरसों, नारियल, जैतून आदि के तेल से सिर की मालिश करती है और बालों को जड़ से सिरे यानी की नीचे तक अच्छे से तेल लगाती है। तो इससे बालों की जड़ यानी स्कैल्प में ब्लड का प्रवाह अच्छे से होता है। साथ ही बालों को पोषण मिलता है। जिससे गर्भवती महिला को बालों के झड़ने की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

पोषक तत्वों से युक्त आहार

आयरन, प्रोटीन से भरपूर आहार जैसे की हरी सब्जियां, दालें, ड्राई फ्रूट्स आदि का सेवन गर्भवती महिला को भरपूर करना चाहिए। क्योंकि इससे बॉडी के साथ बालों को भी पोषण मिलता है जिससे बालों की ग्रोथ को बढ़ाने, बालों को मजबूत बनाने में मदद मिलती है।

केमिकल से बचें

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बार बार शैम्पू बदलने, केमिकल्स का इस्तेमाल बालों के लिए करने आदि से बचना चाहिए। क्योंकि बालों के लिए केमिकल का इस्तेमाल करने से बालों पर बुरा प्रभाव पड़ता है जिससे बाल टूटने लगते हैं।

तनाव न लें

गर्भावस्था के दौरान परेशानियों से आमना सामना होना आम बात होती है ऐसे में गर्भवती महिला को उन परेशानियों से निजात पाने के लिए सोचना चाहिए। न की उन्हें सोच सोच कर तनाव लेना चाहिए, यदि प्रेग्नेंट महिला तनाव नहीं लेती हैं, अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखती है, तो इससे भी बालों के झड़ने की समस्या से आराम मिलता है।

नींद ले भरपूर

गर्भवती महिला को नींद भरपूर लेनी चाहिए ताकि प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने और बॉडी में हार्मोनल असंतुलन की समस्या से बचे रहने में मदद मिल सके। जिससे बालों के झड़ने के कारण होने वाली परेशानी से निजात मिल सके।

गीले बालों में कंघी न करें

यदि आप गीले बालों में कंघी करती है तो गीले बल कमजोर होते हैं, ऐसे में आपके बाल ज्यादा झड़ सकते हैं ऐसे में आपको बालों को झड़ने से बचाने के लिए गीले बालों में कंघी नहीं करनी चाहिए।

इलेक्ट्रिकल चीजों का इस्तेमाल

प्रेगनेंसी के दौरान या वैसे भी प्रेसिंग मशीन, हेयर ड्रायर आदि के अधिक इस्तेमाल से बालों की असली चमक चली जाती है और बाल सूखे व् कमजोर होकर झड़ने लगते हैं। ऐसे में प्रेगनेंसी के बालों के झड़ने की समस्या से बचने के लिए प्रेग्नेंट महिला को इलेक्ट्रिकल चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

मैडिटेशन व् व्यायाम करें

प्रेगनेंसी के दौरान थोड़ी देर मैडिटेशन व् व्यायाम करने से भी इस परेशानी से निजात मिलता है। क्योंकि मैडिटेशन करने से तनाव से राहत मिलती है और व्यायाम करने से बॉडी के सभी हिस्सों में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है। और यदि प्रेग्नेंट महिला तनावमुक्त रहती है और सिर की कोशिकाओं में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है तो प्रेग्नेंट महिला को बालों के झड़ने की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिन्हे ट्राई करने से गर्भवती महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और बालों के झड़ने से परेशान हैं तो आप भी इन आसान टिप्स का ध्यान रखें ताकि प्रेगनेंसी में भी आपके बालों की ख़ूबसूरती को बरकरार रहने में मदद मिल सके।

भ्रूण का वजन बढ़ाने के उपाय

गर्भ में शिशु का वजन

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु का शारीरिक व् मानसिक विकास पूरी तरह से महिला पर ही निर्भर करता है।क्योंकि माँ जो भी खाती है वह गर्भनाल की मदद से शिशु तक पहुँचाया जाता है। और शिशु का विकास अच्छे से होता है यदि महिला अपना अच्छे से ध्यान रखती है। लेकिन कई बार जन्म के बाद कुछ शिशु कमजोर पैदा होते है और शिशु के कमजोर होने के कारण उन्हें जन्म के बाद बीमारियां होने का डर भी अधिक होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं की शिशु के वजन में कमी की समस्या का समाधान आप प्रेगनेंसी के दौरान ही कर सकते है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान अल्ट्रासाउंड के द्वारा गर्भ में पल रहे बच्चे का वजन मापा जा सकता है, और डॉक्टर्स भी गर्भ में शिशु के वजन से ही यह अंदाजा लगाते हैं की शिशु स्वस्थ है या नहीं। प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में होने वाले अल्ट्रासॉउन्ड के माध्यम से आप जान सकते हैं की शिशु का गर्भ में वजन कितना है और शिशु का वजन कितना होना चाहिए। ताकि शिशु का वजन कम है तो आप इस समस्या से निजात पाने के कुछ टिप्स का इस्तेमाल कर सकें।

गर्भ में शिशु का वजन बढ़ाने के तरीके

यदि आपको डॉक्टर द्वारा बताया जाता है की गर्भ में पल रहे शिशु का वजन कम है तो इसके लिए गर्भवती महिला को अपने खान पान का ज्यादा अच्छे से ध्यान रखना चाहिए और दिमागी रूप से भी अपने आप को फ्रेश रखना चाहिए। ताकि शिशु को भरपूर मात्रा में पोषक तत्व मिल सके जिससे गर्भ में पल रहे शिशु का वजन बढ़ाने में मदद मिल सके। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की भ्रूण का वजन बढ़ाने के लिए महिला को क्या क्या करना चाहिए।

पौष्टिक व् पोषक तत्वों से भरपूर आहार

प्रेग्नेंट महिला को पौष्टिक के साथ पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए। और गर्भ में पल रहे शिशु का वजन बढ़ाने के लिए थोड़े थोड़े समय के बाद पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए। इससे शिशु के विकास के लिए जरुरी सभी पोषक तत्व उसे भरपूर मात्रा में मिलेंगे, जिससे शिशु के शारीरिक विकास को बेहतर तरीके से होने में मदद मिलेगी।

विटामिन्स

गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए गर्भवती महिला के शरीर में विटामिन्स भरपूर मात्रा में होने चाहिए। क्योंकि शिशु को यदि यह सभी विटामिन्स भरपूर मात्रा में मिलते हैं तो इससे गर्भ में पल रहे शिशु के वजन को बेहतर तरीके से बढ़ने में मदद मिलती है।

आयरन

गर्भवती महिला के शरीर में यदि खून की कमी होती है तो इसके कारण न केवल गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बल्कि इससे गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में कमी जैसी परेशानी भी सकती है। और यदि गर्भवती महिला के शरीर में कमी है तो महिला को आयरन युक्त आहार जैसे अनार, सेब, गाजर, हरी सब्जियां, आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला के शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने के साथ शिशु का वजन बढ़ाने में भी मदद मिल सके।

ड्राई फ्रूट्स

गर्भ में शिशु का वजन बढ़ाने के लिए गर्भवती महिला को ड्राई फ्रूट्स का भी भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए। क्योंकि इसमें आयरन, फोलिक एसिड, कैल्शियम, प्रोटीन, जैसे सभी मिनरल्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। और गर्भवती महिला यदि इनका सेवन करती है तो शिशु तक इन पोषक तत्वों को भरपूर मात्रा में पहुंचाने में मदद मिलती है जिससे गर्भ में शिशु के वजन को बढ़ाने में मदद मिलती है।

घी

यदि आपको प्रेगनेंसी के आखिरी महीने के आस पास डॉक्टर यह कहता है की शिशु का वजन अभी भी कम है, तो गर्भवती महिला को देसी घी का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए। क्योंकि इसके सेवन से गर्भ में शिशु के वजन को तेजी से बढ़ाने में मदद मिलती है।

कैल्शियम और प्रोटीन

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु के वजन को बढ़ाने के लिए गर्भवती महिला को कैल्शियम और प्रोटीन युक्त आहार का भी भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए। क्योंकि यदि महिला इन पोषक तत्वों को भरपूर मात्रा में लेती है तो इससे गर्भ में शिशु की हड्डियों और मांसपेशियों के विकास को बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है। और जैसे जैसे शिशु का विकास तेजी से बढ़ता है वैसे वैसे गर्भ में शिशु का वजन भी तेजी से बढ़ने लगता है।

पानी

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को पानी भी भरपूर मात्रा में लेना चाहिए। क्योंकि यदि गर्भवती महिला पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करती है तो इससे गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा को सही रहने में मदद मिलती है। जिससे शिशु को गर्भ में आसानी से घूमने के साथ एक्टिव रहने में भी मदद मिलती है। और जितना शिशु गर्भ में एक्टिव रहता है उतना ही शिशु के विकास को बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है।

तनाव

शिशु के गर्भ में सही तरीके से विकास को इसके लिए गर्भवती महिला को तनाव न लेने के साथ गलत विचारों को भी अपने दिमाग में नहीं आने देना चाहिए। क्योंकि यदि महिला तनाव लेती है या मानसिक रूप से परेशान रहती है तो इससे भी गर्भ में शिशु के विकास में कमी आ सकती है। ऐसे में शिशु का गर्भ में विकास अच्छे से हो, और शिशु का वजन अच्छे से बढ़ सके इसके लिए गर्भवती महिला को हमेशा खुश रहना चाहिए और सकारात्मक रहना चाहिए।

आराम करें

गर्भ में शिशु का विकास अच्छे से हो, शिशु का वजन अच्छे से बढ़ें इसके लिए सबसे जरुरी है की महिला स्वस्थ रहें। ऐसे में महिला को स्वस्थ रहने के लिए अपने खान पान के साथ आराम भी करना चाहिए। यदि महिला भरपूर आराम लेती है तो इससे गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है और यदि महिला स्वस्थ रहती है तो गर्भ में शिशु के विकास को भी बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका इस्तेमाल यदि गर्भवती महिला करती है तो इससे गर्भ में पल रहे शिशु का वजन आसानी से बढ़ाने में मदद मिलती है। इसके अलावा गर्भ में शिशु का वजन बढ़ाने के लिए गर्भवती महिला को और क्या क्या करना चाहिए इसके लिए एक बार महिला डॉक्टर से भी राय ले सकती है।

बालों को लंबा करने के लिए तेल में क्या मिलाकर लगाएं?

बालों को महिलाओं की खूबसूरती का अभिन्न हिस्सा माना जाता है। इसीलिए हरेक महिला चाहती हैं की उनके बाल लंबे, घने और काले हो। लेकिन आजकल के प्रदूषण भरे वातावरण में बालों को स्वस्थ रख पाना काफी मुश्किल हो गया है। आजकल अधिकतर महिलाएं बाहर जॉब करने जाती हैं जिसके कारण बाहर की धूल, मिट्टी और गंदगी सीधे बालों को नुकसान पहुंचाती है।

इतना ही नहीं हेयर केयर प्रोडक्टस और स्टाइलिंग टूल्स भी बालों की जड़ों को काफी नुकसान पहुंचाते हैं। जिसके कारण बाल बेजान हो जाते हैं और ठीक तरह से बढ़ नहीं पाते। अगर आपके बाल भी छोटे हैं, बढ़ नहीं रहे हैं, दोमुहें हैं, बेजान हैं तो परेशान न हो क्यूंकि आज हम आपको कुछ ऐसे उपाय बता रहे हैं जिनकी मदद से बालों को आसानी से लंबा किया जा सकता है। इन टिप्स को अपनाकर आप अपने बालों को नैचुरली लंबा कर सकती हैं।

बालों की लंबाई नहीं बढ़ने के कारण

बालों को लंबा करने से बाहरी पोषण के साथ-साथ अंदरूनी पोषण की भी जरूरत होती है। इसलिए सिर्फ बाहर कारण ही नहीं बल्कि कई अंदरूनी खामियां भी बालों की लंबाई पर असर डालती हैं। जैसे –

  • प्रॉपर डाइट नहीं लेना।
  • गलत समय पर खाना।
  • पौष्टिक खाने की बजाए बाहर का खाना खाना।
  • सभी विटामिन्स और मिनरल्स नहीं लेना।
  • तनाव लेना।
  • बालों में गलत प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना।
  • हीट और स्टाइलिंग आयरन का ज्यादा प्रयोग करना।
  • बालों की केयर नहीं करना।
  • बालों को समय पर नहीं धोना।
  • ऑइलिंग नहीं करना।
  • धूप के सम्पर्क में ज्यादा रहना।
  • प्रदूषण, धूल, मिट्टी के कारण बाल लम्बे नहीं हो पाते।

बालों को लंबा करने के लिए क्या करें?

बालों को लम्बा करने के लिए हर कोई अपनी-अपनी एडवाइस देता है। लेकिन एक ही एडवाइस सभी की स्कैल्प को सूट नहीं करती। इसलिए आपको वो उपाय अपनाने चाहिए जो सूट करें। हेयर केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने से बेहतर हैं की एक बार अपने घर में रखे ऑयल्स का इस्तेमाल किया जाए। आज हम आपको कुछ खास आयल बता रहे हैं। जिन्हे लगाने से बाल स्मूथ और लंबे हो जाते हैं।

नारियल का तेल

बालों को लम्बा करने के लिए आप अपने रेगुलर हेयर आयल में नारियल का तेल मिलाएं। नारियल का तेल बेजान जड़ों को नमी पहुंचाने का काम करता है जिससे जड़ें मजबूत होती है और हेयर ग्रोथ बढ़ती है। नारियल तेल लगाने से ड्राई स्कैल्प की समस्या से भी निजात मिलती है। आप चाहे तो इसे अपने रेगुलर हेयर आयल में मिलाकर या सिर्फ नारियल तेल ही बालों में लगा सकती है। 2 दिन तेल बालों में रखें और तीसरे दिन हेयर वाश कर लें। एक महीने में फर्क दिखने लगेगा।

अरंडी का तेल

बालों के लिए कैस्टर आयल को भी बहुत फायदेमंद माना जाता है। कैस्टर आयल में एंटी वायरल, एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल प्रॉपर्टीज होती हैं जो स्कैल्प को सुरक्षित करने में मदद करती हैं। इसमें प्रोटीन अधिक मात्रा में होता है जो बालों को स्वस्थ रखता है। ये तेल थोड़ा गाढ़ा होता है इसलिए इसकी जरा सी मात्रा ही पर्याप्त होती है। बाल लंबे करने के लिए तेल में थोड़ा सा कैस्टर आयल मिलाकर अपनी स्कैल्प पर लगाएं।

विटामिन ई आयल

विटामिन ई आयल बालों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। ये जड़ों को मजबूत करके लंबाई बढ़ाने का काम करता है। विटामिन ई आयल स्कैल्प को स्वस्थ रखने के साथ-साथ pH लेवल को बैलेंस करता है, स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन को सुधारता है, प्राकृतिक आयल के उत्पादन को बढ़ाता है जिससे रोमछिद्र स्वस्थ रहते हैं। ये आपको कैप्सूल के रूप में किसी भी मेडिकल स्टोर पर मामूली सी कीमत पर मिल जाएगा। इसे रात में अपने तेल में मिलाकर स्कैल्प पर लगाएं और अच्छे से मसाज करें। कुछ ही दिनों में फर्क दिखने लगेगा।

ओलिव आयल

बालों को नैचुरली लम्बा करने के लिए जैतून का तेल भी बहुत लाभकारी होता है। ये तेल बालों को नमि पहुंचाता है और जड़ों को मजबूत करता है। जैतून के तेल में एंटी ऑक्सीडेंट्स होते हैं जो बालों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। जैतून का तेल बाकी तेलों से हल्का होता है। नियमित रूप से इस तेल का प्रयोग करने से डैंड्रफ, बाल झड़ना, दोमुहें बालों की समस्या भी दूर हो जाती है और बाल लंबे होने लगते हैं। इस तेल को आप अपने हेयर आयल में मिलाकर लगा सकती हैं।

बादाम का तेल

बादाम का तेल बहुत हल्का और बिना चिपचिपा होता है। जिन लोगों को तेल लगाने के बाद सुर में चिपचिपाहट की समस्या होती है उनके लिए यह तेल बहुत फायदेमंद होता है। बादाम के तेल में विटामिन ई अधिक मात्रा में होता है जो ब्लड सर्कुलेशन को ठीक करके जड़ों को मजबूत बनाने का काम करता है। हेयर आयल में बादाम तेल मिलाकर लगाने से बाल स्मूथ होते हैं। तो अगर आप बाल लंबे करना चाहती हैं तो बादाम तेल का इस्तेमाल कर सकती हैं।

तो ये कुछ खास एसेंशियल आयल हैं जिनका प्रयोग करके बालों की लंबाई बढ़ाई जा सकती हैं। इन ऑयल्स का नियमित रूप से इस्तेमाल करने से 2 से 3 महीनों में बालों की ग्रोथ होने लगेगी।

बरसाती बुखार के घरेलू उपाय

बरसाती बुखार

बरसता का मौसम चल ही रहा है और ऐसे में बरसात के मौसम का आनंद लेने के साथ अपनी सेहत का ध्यान रखना भी बहुत जरुरी होता है, ताकि आपनो किसी भी तरह की सेहत सम्बन्धी समस्या से बचें रहने में मदद मिल सके। क्योंकि ऐसे मौसम में सर्दी, जुखाम, वायरल बुखार जैसे डेंगू, मलेरिया आदि के होने का खतरा भी अधिक होता है। और यदि व्यक्ति बरसाती बुखार की चपेट में आ जाता है तो इसके कारण बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। बरसाती बुखार के होने पर बॉडी में दर्द, कमजोरी, उल्टियां, बेचैनी महसूस होना, यूरिन के रंग में बदलाव आना, जी मिचलाना, जैसी परेशानी हो सकती है। साथ ही बॉडी का तापमान बढ़ने के कारण उठने बैठने में भी परेशानी हो सकती है। ऐसे में केवल बच्चों को ही नहीं बल्कि बड़े बूढ़ों को भी अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। तो आइये पहले जानते हैं की बरसाती बुखार होने के क्या कारण हो सकते हैं।

बरसाती बुखार होने के कारण

  • बरसात का आना, और फिर धूप निकलना, ऐसे में गर्म सर्द होने के कारण बॉडी में तापमान में फर्क आ सकता है।
  • बरसात के मौसम में हर जगह पानी भरा रहता है ऐसे में उन जगह पर मच्छर आदि बहुत अधिक पैदा होने लगते हैं, जिनसे फैलने वाले संक्रमण के कारण डेंगू, मलेरिया जैसे बुखार बरसात मौसम में हो सकते हैं।
  • खाने पीने में सफाई का ध्यान रखना, गंदे पानी का सेवन करने के कारण भी यह परेशानी हो सकती है।
  • बारिश में अधिक भीगने के कारण भी यह परेशानी हो सकती है।
  • हवा के माध्यम से भी हानिकारक बैक्टेरिया आपकी बॉडी में पहुंचकर आपको परेशान कर सकता है।

बरसाती बुखार से बचने के घरेलू उपाय

बरसात के सुहाने मौसम का मज़ा लेने के लिए और इस दौरान होने वाली बुखार की समस्या से बचने के लिए आपको अपनी सेहत का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। साथ ही आज हम आपको बरसाती बुखार से बचने के कुछ आसान घरेलू टिप्स बताने जा रहे हैं जो आइये अब विस्तार से जानते हैं की वो खास टिप्स कौन से हैं।

गिलोय

गिलोय एक बेल होती है जो की किसी भी तरह के बुखार को खत्म करने में मदद करती है। इसके इस्तेमाल के लिए गिलोय की छोटी छोटी पानी छह डंडियाँ लेकर खुले बर्तन में पानी डाल कर उबाल लें। अब इस पानी का नियमित सेवन करने से बरसाती बुखार से बचें रहने में मदद मिलती है। लेकिन यदि आपको बुखार हो गया है तो दो गिलास पानी में चार पांच गिलोय की डांडिया, थोड़ी सी अदरक, पांच छह तुलसी के पत्ते, दो काली मिर्च डालकर पानी के आधा रहने तक उबालकर इसका काढ़ा बनाएं। अब इसे दिन में दो से तीन बार जब तक बुखार ठीक न हो जाये नियमित पीये। इसे न केवल आपके बुखार को ठीक होने में मदद मिलती है बल्कि बॉडी को एनर्जी से भरपूर रहने में भी मदद मिलती है।

तुलसी के पत्ते

औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी के पत्ते का सेवन यदि आप नियमित चाय में डालकर या पानी में उबालकर करते हैं तो इससे भी बरसात के मौसम में बैक्टेरिया के कारण होने वाले बुखार से बचें रहने में मदद मिलती है। और यदि आपको बुखार हो गया है तो दो लीटर पानी में एक चम्मच लौंग का पाउडर और आठ दस तुलसी के पत्ते डालकर अच्छे से पानी के आधा रहने तक उबाल लें। उसके बाद इस पानी को छानकर इसका सेवन दिन में दो से तीन बार करें। और ऐसा जब तक करें जा तक की आपका बुखार अच्छे से उतर नहीं जाएगा।

चावल का पानी

इसके लिए आप पानी में चावल डालकर उबाल लें, और पानी थोड़ा ज्यादा लें, फिर चावल के बनने के बाद उस पानी को अलग कर लें। अब इस पानी में थोड़ा नमक मिलाकर गर्म गर्म ही इस पानी का सेवन करें इस उपाय को करने से आपको बरसात में होने वाले बुखार की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

मेथी

रातभर के लिए एक कप पानी में एक बड़ा चम्मच मेथी के दानो का भिगोकर रख दें। अब सुबह के समय इस पानी को छानकर इसका सेवन करें। यह उपा ही बरसाती बुखार की समस्या से बचने के लिए बेहतरीन उपाय है। आप चाहे तो इसमें निम्बू का रस व् आधा चम्मच शहद का मिलाकर भी इसका सेवन कर सकती है।

धनिया की चाय

एक गिलास पानी में एक चम्मच सूखा धनिया बिना पीसा हुआ डालकर अच्छे से उबाल लें। अब इस पानी को आधा रहने तक अच्छे से उबालें। उसके बाद इसमें थोड़ी चीनी व् थोड़ा दूध मिलाकर इसे छान लें, और इसका सेवन करें। यह चाय नियमित जब तक पीएं जब तक की आपको बुखार से आराम नहीं आता है। और वैसे भी आप चाहे तो हफ्ते में एक या दो बार इसका सेवन कर सकते हैं ताकि आपको बुखार से बचें रहने में मदद मिल सके।

अदरक

एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटी ऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर अदरक के काढ़े का सेवन करने से भी बरसाती बुखार की समस्या से बचने में मदद मिलती है। इसके लिए आप एक दो गिलास पानी में थोड़ा अदरक, आधा चम्मच हल्दी, तीन चार काली मिर्च, और थोड़ी सी चीनी डालकर पानी के आधा रहने तक उबाल लें। अब इस काढ़े को दिन में दो से तीन बार सेवन करें। ऐसा जब तक करें जब तक की आपको बुखार से पूरी तरह से आराम नहीं आ जाता है।

सरसों का तेल

बरसात के कारण होने वाले बुखार से बचने के लिए थोड़े से सरसों के तेल में आठ दस लहसुन की कलियों को काला होने तक पकाएं और अब इस तेल को छान लें। नियमित इस तेल से पैर के तलवे की मसाज करें। इससे आपको बरसाती बुखार से बचें रहने में मदद मिलती है। और यदि बुखार है तो बुखार भी उतर जाता है।

हल्दी

एंटी बायोटिक गुणों से भरपूर हल्दी भी बरसाती बुखार की समस्या से बचाव के लिए एक बेहतरीन उपाय है। ऐसे में आपको यदि बुखार है या आप बुखार से बचना चाहते हैं तो नियमित रात को सोने से आधा घंटा पहले हल्दी दूध का सेवन जरूर करें।

शहद

एक चम्मच शहद में चुटकी भर लौंग का पाउडर मिलाकर लें, ऐसा करने से आपको बरसात के मौसम में होने वाली सर्दी, खांसी, बुखार आदि की समस्या से बचें रहने में मदद मिलती है।

बरसाती बुखार से बचने के अन्य तरीके

  • घर के आस पास पानी न जमा होने दें, व् घर में भी पानी को खुले में भरकर न रखें।
  • बारिश में ज्यादा न नहाएं।
  • सब्जियों, फलों को खाने के लिए इस्तेमाल में लाने से पहले अच्छे से धोएं।
  • बहुत देर तक कटे पड़े फल सब्जियों के सेवन से बचें।
  • स्ट्रीट फ़ूड, बाहर के किसी भी तरह के व्यंजन का सेवन करने से बरसाती मौसम में बचें, क्योंकि ऐसे मौसम में बाहर का खाना बुखार के साथ पेट में इन्फेक्शन की समस्या का कारण भी बन सकता है।
  • बाहर जाने पर मास्क का इस्तेमाल जरूर करें।
  • हो सके तो प्यूरीफायर के पानी का सेवन करें नहीं तो दूसरे पानी को अच्छे से उबालने के बाद उसे पीने के लिए प्रयोग में लाएं।
  • बासी खाना खाने से बचें।
  • पूरी बाजू के कपडे पहने, और हो सके तो सूती कपडे ही पहने।
  • यदि बुखार है तो ठन्डे पानी से नहाने की बजाय गुनगुने पानी का इस्तेमाल नहाने के लिए करें। इससे आपको आराम महसूस होगा।
  • नींद भरपूर लें ताकि आपको फिट रहने में मदद मिल सके।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से आपको बरसाती बुखार के कारण होने वाली परेशानी से बचें रहने में मदद मिलती है। साथ ही यदि आपको बुखार हो जाये तो एक बार डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए ताकि बरसाती बुखार की परेशानी ज्यादा न आधे और आपको स्वस्थ होने में मदद मिल सके।

घर पर टैबलेट से अबॉरशन करने से क्या-क्या परेशानी होती है

घर पर टैबलेट से अबॉरशन करने से क्या-क्या परेशानी होती है, घर पर अबॉरशन करने से क्या दिक्कत होती है, अबॉरशन किट का इस्तेमाल करने से होने वाले नुकसान, घर पर अबॉरशन करने से आ सकती है यह दिक्कत

अनचाहे गर्भ को गिराने के लिए महिलाएं घर पर ही अबॉरशन किट यानि दवाई का इस्तेमाल करके गर्भ गिरा देती है। और दवाई का सेवन करने से आपको इससे निजात भी मिल जाता है लेकिन क्या आप जानती है की ऐसा करने से आपको कितनी परेशानी हो सकती है। जैसे की पेट में अधिक दर्द, कमजोरी, ब्लीडिंग, बुखार, आदि की समस्या हो सकती है। इसके अलावा घर पर अबॉरशन करने से आपको यह भी पता नहीं चलता है की गर्भाशय में से सभी टिश्यू साफ़ हुए भी हैं या नहीं, क्योंकि यदि कुछ टिश्यू रह जाते हैं तो यह आपके लिए परेशानी का कारण बन सकते हैं। यदि आप भी घर पर अबॉरशन करने का सोच रही है तो आइये हम आपको बताते हैं की आपको कौन कौन सी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।

ज्यादा हो सकती है ब्लीडिंग

टैबलेट का इस्तेमाल करने के बाद जैसे ही आपको ब्लीडिंग होती है, तो यह सामान्य से काफी अधिक होती है, साथ ही इसमें आपको रक्त के थक्के भी महसूस हो सकते हैं। और ज्यादा ब्लीडिंग होने के कारण आपको और अधिक परेशानी भी हो सकती है।

उल्टी व् बुखार

यदि आप गर्भपात घर में करने के लिए टैबलेट का इस्तेमाल करते हैं तो बॉडी में तुरंत बदलाव होने शुरू होते हैं जिसके कारण आपको अधिक उल्टी व् तेज बुखार जैसी समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है।

पेट में दर्द

ब्लीडिंग होने के कारण और रक्त स्त्राव तेजी से होने के कारण आपको पेट, पीठ व् पेट के नीचले हिस्से में बहुत तेज दर्द की समस्या भी हो सकती है। और कई बार तो यह दर्द असहनीय भी हो सकता है।

कमजोरी महसूस होना

दवाई का सेवन करते ही बॉडी में तेजी से हार्मोनल बदलाव होने के कारण आपको बहुत ज्यादा कमजोरी व् थका थका सा महसूस हो सकता है। साथ ही खून ज्यादा आने के कारण शरीर में वैसे ही कमजोरी आ जाती है।

गर्भाशय से जुडी परेशानी

यदि आप टैबलेट का इस्तेमाल करके घर में गर्भपात करते हैं, तो आपको पता नहीं चलता है की भ्रूण के सभी टिश्यू निकले हैं या नहीं। और यदि अच्छे से सफाई नहीं हुई है तो बाद में इसके कारण आपको परेशानी हो सकती है, इसके कारण आपको पेट में अधिक दर्द रह सकता है, और बाद में यदि आप दुबारा प्रेग्नेंट होना चाहती है तो उस समय आपको समस्या हो सकती है, साथ ही इससे गर्भपात बार बार होने का खतरा भी रहता है।

तनाव होना

यदि महिला को बहुत ज्यादा दिक्कत होने लगती है, और उससे बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव सहन नहीं होते है, तो इसके कारण महिला को तनाव भी हो सकता है।

एक्टोपिक प्रेगनेंसी

गर्भपात के बाद कई बार महिलाओं को कई बार एक्टोपिक प्रेगनेंसी जैसी समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है। इस अवस्था में शिशु गर्भ की जगह फैलोपियन ट्यूब या कहीं और पनपने लगते हैं, जिसके कारण महिला को दुबारा से गर्भपात करवाना पड़ सकता है, ऐसे में महिला को सम्बन्ध बनाते समय सुरक्षा का इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि अनचाहे गर्भ की समस्या न हो। और यदि कभी गर्भ ठहर भी जाता है तो इसके लिए घर पर टैबलेट लेने की बजाय डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

तो यह हैं कुछ परेशानियां जो आपको घर पर टैबलेट का इस्तेमाल करके अबॉरशन करने से हो सकती है। इसीलिए आपको कभी भी ऐसा नहीं करना चाहिए बल्कि अनचाहे गर्भ को गिराने के लिए डॉक्टर का परामर्श लेना चाहिए।

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में सम्बन्ध क्यों नहीं बनाना चाहिए

गर्भवस्था का सातवां महीना प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही का पहला महीना होता है। इस दौरान महिला का वजन बढ़ चूका होता है, पेट बाहर की तरफ बढ़ा हुआ होता है, महिला को थकान, पीठ में दर्द, पेट के निचले हिस्से में दर्द जैसी दिक्कतें हो सकती है। ऐसे में इन परेशानियों के होने पर हो सकता है की प्रेग्नेंट महिला के सम्बन्ध बनाने के उत्साह में कमी आ जाए। साथ ही महिला को किसी शारीरिक समस्या होने का खतरा हो जाए। तो आइये आज इस आर्टिकल में आपको सातवें महीने में सम्बन्ध क्यों नहीं बनाना चाहिए इस बारे में बताने जा रहे हैं।

बॉडी का आकार बढ़ने के कारण

  • प्रेगनेंसी के सातवें महीने में महिला का वजन बढ़ जाता है साथ ही पेट का आकार भी बढ़ जाता है।
  • ऐसे में सम्बन्ध बनाने के कारण प्रेग्नेंट महिला के पेट पर दबाव पड़ने, पेट के निचले हिस्से में दर्द जैसी परेशानी होने का खतरा होता है।
  • और पेट पर दबाव पड़ने के कारण गर्भ में शिशु को असहज महसूस हो सकता है।
  • इसीलिए हो सके तो प्रेगनेंसी के सातवें महीने में सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में सम्बन्ध बनाने से हो सकती है ब्लीडिंग की समस्या

  • यदि प्रेग्नेंट महिला को ब्लीडिंग की समस्या रहती है, गर्भ में शिशु का भार नीचे की तरफ होता है।
  • और ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला सम्बन्ध बनाती है तो इसके कारण ब्लीडिंग की समस्या बढ़ने के साथ गर्भ में शिशु के विकास को भी खतरा पहुँच सकता है।
  • ऐसे में इस तरह की कोई परेशानी प्रेग्नेंट महिला को न हो, इससे बचाव के लिए प्रेग्नेंसी के सातवें महीने में महिला को सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में सम्बन्ध बनाने से हो सकता है समय पूर्व प्रसव का खतरा

  • यदि पहले प्रेग्नेंट महिला का प्रसव समय से पहले हुआ हो, गर्भ में एक से ज्यादा शिशु हो।
  • तो ऐसे में भी सातवें महीने में गर्भवती महिला को गलती से भी सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।
  • क्योंकि इसके कारण समय पूर्व प्रसव का खतरा बढ़ जाता है जिससे न केवल गर्भवती महिला बल्कि शिशु को भी दिक्कत हो सकती है।

शारीरिक समस्या बढ़ सकती है

  • सातवें महीने में वजन बढ़ने के कारण प्रेग्नेंट महिला वैसे ही बहुत सी शारीरिक परेशानियों से जूझ सकती है।
  • ऐसे में सम्बन्ध बनाने के कारण महिला की यह परेशानियां और भी बढ़ सकती है।
  • जैसे की पेट में दर्द, पेट के निचले हिस्से में दर्द, आदि की समस्या अधिक हो सकती है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के सातवें महीने में सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए। लेकिन यदि आप स्वस्थ है, आपकी सम्बन्ध बनाने की इच्छा है, डॉक्टर ने भी आपको सम्बन्ध बनाने की मनाही नहीं की है। तो ऐसे में आप चाहे तो प्रेगनेंसी के दौरान पूरी सावधानी और सतर्कता के साथ सम्बन्ध बना सकती है।

दिमाग वाला शिशु चाहती हैं तो डाइट में शामिल करें यह 8 आहार

शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास माँ के गर्भ से ही शुरू हो जाता है, इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को अपना दुगुना ख्याल रखने की सलाह दी जाती है। गर्भ में ही यदि शिशु को बेहतर पोषण मिलता है तो इससे शिशु के मस्तिष्क का निर्माण और विकास बेहतर तरीके से होता है, जिससे शिशु का दिमाग तेज बनता है। इसीलिए महिला को शिशु के जन्म के बाद नहीं बल्कि गर्भ से ही शिशु को ऐसे पोषक तत्व पहुंचाने चाहिए जिससे शिशु के बेहतर शारीरिक विकास के साथ मानसिक विकास को भी बेहतर होने में मदद मिल सके। और इसके लिए गर्भवती महिला को अपनी डाइट में कुछ ऐसे आहार को सम्मिलित करना चाहिए जो गर्भ में शिशु के बेहतर मानसिक विकास में मदद कर सकें। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की वो आहार कौन से है जो गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर मानसिक विकास में मदद करते हैं।

अंडा

शिशु के दिमाग को तेज बनाने के लिए कोलिन नामक पोषक तत्व का बॉडी में मौजूद होना बहुत जरुरी होता है। और यदि गर्भवती महिला के शरीर में इसकी कमी होती है तो इसके कारण शिशु के मानसिक विकास में कमी भी आ सकती है। कोलिन अंडे में भरपूर मात्रा में पाया जाता है ऐसे में गर्भवती महिला को इसे अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए, और अंडे के पीले और सफ़ेद दोनों भागों को खाना चाहिए। इससे मस्तिष्क की कोशिकाओं का निर्माण बेहतर तरीके से होने के साथ विकास भी बेहतर तरीके से होता है। अंडे के सेवन के लिए सुबह नाश्ते का समय सबसे बेहतर होता है इस दौरान आप एक या दो अंडो को उबाल कर उनका सेवन कर सकती हैं या ऑमलेट भी खा सकती हैं।

वसा युक्त मछली का सेवन

गर्भ में शिशु के दिमाग के संरचनात्मक विकास और इसके अंदर के अरबों न्यूरॉन्स के लिए डी एच ए का होना बहुत जरुरी होता है। और सार्डिन एक वसा युक्त मछली है जिसमें डी एच ए भरपूर पाया जाता है। इसके अलावा और भी किस्म की मछलियां हैं जिसमे डी एच ए भरपूर मात्रा में पाया जाता है। लेकिन किसी भी मछली का सेवन करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए की उसमे मर्क्युरी की मात्रा न हो, नहीं यह शिशु को नुकसान पहुंचा सकती है।

एवोकाडो

दिमाग 60% वसा से बना होता है ऐसे में दिमाग के विकास के लिए फैट की जरुरत है। और एवोकाडो में मोनोअनसेचुरेटेड फैट भरपूर पाया जाता है जिससे दिमाग के विकास में मदद मिलती है। ऐसे में गर्भवती महिला चाहे तो एवोकाडो का सेवन भी कर सकती है जिससे गर्भ में शिशु के बेहतर मानसिक विकास में मदद मिल सके।

पालक

गर्भ में शिशु के मानसिक विकास के लिए फोलेट की भी मात्रा पर्याप्त होना बहुत जरुरी होती है। क्योंकि यह दिमाग के सेल्स की सरंचना के लिए बहुत फायदेमंद होता है, जिससे गर्भ से ही शिशु के दिमाग को तेज बनाने में मदद मिलती है। साथ ही इसमें अन्य पोषक तत्व भी भरपूर मात्रा में होते हैं, इसीलिए गर्भवती महिला को इसे अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।

कद्दू के बीज खाएं

कद्दू के बीज में जिंक पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है जो गर्भ में पल रहे शिशु के दिमाग के लिए बहुत जरुरी है। ऐसे में गर्भवती महिला को कद्दू के बीज का सेवन भी जरूर करना चाहिए, इसे आप सलाद में या वैसे ही खा सकते हैं।

मूंगफली

मूंगफली में प्रोटीन, फैट, विटामिन बी, फोलेट आदि भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। साथ ही इसमें विटामिन इ भी होता है जो डी एच ए की मात्रा को भरपूर रखने में मदद करता है। ऐसे में मूंगफली का सेवन गर्भवती महिला यदि करती है तो इससे शिशु के मानसिक विकास में मदद मिलती है।

दालों का सेवन करें

मायलेन एक तरह का केमिकल होता है जो मस्तिष्क तक आसानी से सिगनल्स पहुंचाने में मदद करता है। ऐसे में यदि यह केमिकल बॉडी में भरपूर हो तो इससे दिमाग को तेज करने में मदद मिलती है। इसीलिए यदि गर्भवती महिला अपने आहार में दालों को भरपूर मात्रा में शामिल करती है। तो इससे महिला को भरपूर मात्रा में आयरन मिलता है जो मायलेन केमिकल के उत्पादन के लिए जरुरी होता है।

बादाम

अकसर आपने यह लोगो से सुना होगा की यदि यादाश्त कमजोर हो गई है तो बादाम का सेवन करना चाहिए क्योंकि इससे यादाश्त को तेज करने में मदद मिलती है। गर्भवती महिला दूध में डालकर, बादाम को भिगोने के बाद या फिर अन्य तरीको से भी इसका सेवन कर सकती है।

तो यह हैं वो आहार जो गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर मानसिक विकास में मदद मिलते है, और आपका होने वाला शिशु बुद्धिमान व् तेज दिमाग वाला होता है। इसके अलावा गर्भवती महिला को गर्भ में पल रहे शिशु से बातें करनी चाहिए, अच्छी अच्छी किताबे पड़नी चाहिए, इससे भी शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है।

परवल खाने के फायदे अगर आप नहीं खाते हैं तो खाना शुरू कर दीजिए

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ज्यादातर सब्जियों और फलों का एक मौसम होता है जो मौसम के बदलाव के साथ ही या तो आना बंद हो जाती हैं या फिर कम हो जाती है। लेकिन परवल एक ऐसी सब्ज़ी होती है जो आपको हर मौसम में मिल जाती है। क्योंकि इसमें इतने गुण मौजूद होते है जो आपके लिए बहुत फायदेमंद होते है, ज्यादा लोग इस सब्ज़ी को नहीं खाते हैं। लेकिन यदि आप इसके फायदों के बारे में जान जाएंगे तो इसे जरूर खाना शुरू कर देंगे। परवल देखने में कुंदरू की तरह लगता है पर उससे थोड़ा बड़ा होता है, परवल को पोईंटेड गोर्ड भी कहते हैं। केवल परवल की सब्ज़ी ही नहीं बल्कि इसकी पत्तियां भी आपके लिए बहुत फायदेमंद होती हैं। जो की आपके शरीर को स्वस्थ रखने में बहुत फायदेमंद होता है, और शरीर की बहुत सी बीमारियों को कण्ट्रोल करने में भी आपकी मदद करता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की परवल की सब्ज़ी खाने से आपको कौन कौन से फायदे मिलते है।

परवल खाने के फायदे

परवल एक ऐसी सब्ज़ी है जो आपके पेट के लिए बहुत फायदेमंद होती है, और जब आपका पेट दुरुस्त होता है तो आपके शरीर की गतिविधियों को दुरुस्त रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा विटामिन, कैल्शियम व् अन्य पोषक तत्वों से भरपूर परवल आपके लिए और कौन कौन से फायदे करती है आइये विस्तार से इस बारे में जानते हैं।

पाचन तंत्र दुरुस्त होता है

परवल की सब्ज़ी खाने से आपके पाचन तंत्र को मजबूत होने में मदद मिलती है, साथ ही पाचन तंत्र से जुडी परेशानी जैसे गैस, कब्ज़ आदि को दूर करने में भी यह बहुत फायदेमंद होता है। आयुर्वेदिक उपाय में परवल को पेट में गैस की समस्या होने पर उपचार की तरह इसका सेवन करना चाहिए।

प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है

बॉडी में इम्युनिटी को बढ़ाने के लिए परवल का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए। यदि आप परवल का सेवन करते हैं तो आपको किसी भी तरह के इन्फेक्शन, सर्दी, खांसी, बुखार आदि से जल्दी राहत पाने में मदद मिलती है। और यदि आप इसका सेवन करते हैं तो आपकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है जिससे आपको इन सभी बीमारियों से बचाव करने में मदद मिलती है।

चेहरे की सुंदरता

हर कोई चाहता है की उसके चेहरे की और स्किन की चमक हमेशा बनी रहे, तो आपको यह फायदा परवल का सेवन करने से भरपूर मिलता है। यदि आप परवल का सेवन करते हैं तो आपको अपने चेहरे की सुंदरता को बढ़ाने में मदद मिलती है,और इसके सेवन से आपकी स्किन ग्लोइंग होती है।

ब्लड साफ़ होता है

बॉडी में हो रहे रक्त प्रवाह से अशुद्धियों को निकाल कर उसे साफ़ करके बॉडी को फिट रखने के लिए भी परवल खाने से बहुत फायदा मिलता है।

कोलेस्ट्रॉल लेवल ठीक रहता है

बॉडी को फिट रहने के लिए बहुत जरुरी होता है की बॉडी में कोलेस्ट्रॉल का लेवल ठीक रहे, और यदि आप परवल का सेवन करते हैं तो आपकी बॉडी में कोलेस्ट्रॉल के लेवल को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। क्योंकि इसमें कैलोरी की मात्रा कम होती है।

मोटापा कम होता है

मोटापा एक ऐसी समस्या है जिससे आज हर दूसरा व्यक्ति परेशान है क्योंकि इसके कारण शरीर में और बहुत सी परेशानियां आने लगती है। ऐसे में यदि आप परवल के रस में यदि सौंफ और हींग को अच्छे से पीस कर उसका सेवन करते हैं, तो नियमित ऐसा करने से आपके मोटापे की समस्या को दूर होने में मदद मिलती है।

फोड़े फुंसी की समस्या दूर होती है

बरसात के मौसम में फोड़े फुंसी की समस्या अधिक रहती है या वैसे भी कभी आपको फोड़े फुंसी हो जाते हैं तो आपको परवल की सब्ज़ी खाने से बहुत फायदा होता है, इसके लिए यदि आप कुछ दिन तक नियमित बिना मिर्च मसाले की परवल की सब्ज़ी का सेवन करते हैं। तो धीरे धीरे आपको इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

शुगर नियंत्रित रहता है

जिस किसी को भी शुगर की बिमारी होती है उसे परवल का सेवन जरूर करना चाहिए, क्योंकि इसका सेवन करने से उनके शुगर को कण्ट्रोल करने में मदद मिलती है। आप चाहे तो इसका रस भी पी सकते हैं वह भी बहुत फायदेमंद होता है।

तनाव दूर होता है

परवल में ऐसे गुण भी मौजूद होते हैं जो आपको मानसिक रूप से आराम देने में मदद करते हैं। ऐसे में टेंशन से फ्री रहने के लिए आपको अपने आहार में इसे जरूर शामिल करना चाहिए।

बढ़ती उम्र की निशानियों को रोकता है

यदि आप हमेशा जवान रहना चाहते हैं तो भी परवल खाने से बहुत फायदा मिलता है। क्योंकि यह आपके चेहरे पर आने वाली बढ़ती उम्र की निशानियां जैसे की झुर्रियां, झाइयां, बारीक लाइन्स आदि से स्किन को दूर रखता है, और स्किन की रौनक बनाएं रखता है। साथ ही आपकी स्किन में कसाव को बनाएं रखने में आपकी मदद करता है।

परवल खाने के अन्य फायदे

  • शरीर के किसी भी हिस्से में होने वाले दर्द को दूर करने के लिए आप परवल की पत्तियों को पीसकर उसके लेप को वहां लगाएं इससे आपको दर्द को कम करने में मदद मिलती है।
  • यूरिन से जुडी किसी भी परेशानी को दूर करने के लिए परवल खाने से बहुत फायदा मिलता है।
  • कब्ज़ की समस्या को दूर करने के लिए परवल के बीजो का सेवन करना चाहिए।
  • पीलिया की बिमारी में परवल खाने से आपको जल्द ठीक होने में मदद मिलती है।
  • पेट में कीड़ो की समस्या होने पर परवल का सेवन करना चाहिए।
  • जिन लोगो को भूख न लगने की समस्या होती है तो परवल का सेवन करने से उनकी इस समस्या को दूर किया जाता है जिससे आपको भूख खुलकर लगती है।
  • पेट में सूजन होने पर परवल खाने से आपको आराम मिलता है।
  • परवल के पत्तों को पीसकर यदि आप फोड़े फुंसी पर लगाते हैं तो आपको इस परेशानी से जल्द राहत पाने में मदद मिलती है।

हर व्यक्ति चाहता है की वो स्वस्थ रहे और जब आपको एक सब्ज़ी खाने से आपके शरीर को स्वस्थ रखने के साथ और इतने सारे फायदे मिलते हैं, तो आपको इस सब्ज़ी को अपने आहार में जरूर शामिल करना चाहिए। इसके अलावा आप चाहे तो परवल का रस भी पी सकते हैं यह भी बहुत फायदेमंद होता है, लेकिन यदि आप यह नहीं भी पीते हैं तो भी आपको अपने आहार इसे सब्ज़ी में जरूर शामिल करना चाहिए।

जैसे ही पता चले की आप प्रेग्नेंट हैं तो यह 5 चीजें जरूर करें

प्रेगनेंसी कन्फर्म होते ही करें यह जरुरी काम, पीरियड्स मिस होने के बाद हर महिला के मन में यही सवाल आता है की कहीं वो प्रेग्नेंट तो नहीं हो गई है। और इसका पता लगाना आज कल बहुत ही आसान हो गया है क्योंकि महिला अपने घर पर ही प्रेगनेंसी किट लाकर यूरिन का सैंपल लेकर यह जान सकती है की महिला प्रेग्नेंट है या नहीं। और यदि टेस्ट पॉजिटिव आता है तो यह महिला के लिए ख़ुशी की बात होती है। लेकिन इस ख़ुशी में आपको कुछ जरुरी काम करने को नहीं भूलना चाहिए। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी का पता चलते ही महिला को कौन से पांच काम हैं जो जल्दी से जल्दी करने चाहिए।

प्रेगनेंसी कन्फर्म होते ही डॉक्टर से मिलें

  • घर में प्रेगनेंसी टेस्ट के कन्फर्म होने के बाद सबसे पहले महिला को एक अच्छे डॉक्टर का चुनाव करना चाहिए।
  • उसके बाद उन डॉक्टर से मिलना चाहिए।
  • फिर डॉक्टर द्वारा बताई गई सारी जांच करवाने के साथ यदि आपको कोई शारीरिक समस्या है तो उसके बारे में भी डॉक्टर से बात करनी चाहिए।
  • ताकि प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स से बचे रहने में मदद मिल सके।
  • डॉक्टर द्वारा बताई गई सभी दवाइयों को खरीदें।
  • प्रेगनेंसी से जुड़े आपके मन में जो भी सवाल चल रहें हैं या कुछ समझ नहीं आ रहा है तो खुलकर डॉक्टर से बात करें।
  • फिर उसके बाद जब भी डॉक्टर अगली बार डॉक्टर जांच के लिए अपने पास बुलाती है तो समय पर जाना चाहिए।

डाइट चार्ट बनायें

  • खान पान का ध्यान रखना प्रेगनेंसी के दौरान बहुत जरुरी होता है क्योंकि ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।
  • साथ ही पोषक तत्वों से भरपूर आहार आपके गर्भ में पल रही नन्ही जान के विकास को बेहतर होने में मदद करता है।
  • लेकिन उसके लिए सबसे पहले आपको अपने लिए एक डाइट प्लान बनाना होगा।
  • जैसे की सुबह नाश्ते में किन चीजों का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है, दोपहर में किन चीजों का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है, रात में कौन से आहार लेने चाहिए, दिन में पानी का कितना सेवन करना है आदि।
  • और ऐसा नहीं है की रोजाना एक ही तरह की डाइट लेनी है बल्कि रोजाना अपनी डाइट में बदलाव करें ताकि खाने की इच्छा को बढ़ावा मिलें।
  • डाइट के समय का भी ध्यान रखें जैसे की सुबह आठ बजे तक नाश्ता कर लें, रात को ज्यादा लेट तक भूखी न रहें।
  • हर एक डाइट में दो से तीन घंटे का अंतराल रखें, और आपके लिए कौन से आहार को लेना फायदेमंद है उसके लिए डॉक्टर से भी राय लें।
  • इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान आप हरी सब्जियां, अंडे, नॉन वेज, फल, ड्राई फ्रूट्स, साबुत अनाज आदि का सेवन कर सकती हैं।
  • जैसे की नाश्ते में साबुत अनाज, फल व् फलों का रस, ड्राई फ्रूट, डेयरी प्रोडक्ट्स को शामिल करना चाहिए।
  • दोपहर के आहार में रोटी, चावल, हरी सब्ज़ी, दाल, दही, आदि खाना चाहिए, ऐसे ही अपने डाइट प्लान में रोजाना कुछ न कुछ बदलाव भी करते रहना चाहिए।
  • दिन में आठ से दस गिलास पानी भी जरूर पीना चाहिए।
  • लेकिन डाइट प्लान बनाते समय इस बात का ध्यान रखें की अपनी डाइट में केवल उन्ही चीजों को शामिल करें जो प्रेगनेंसी के दौरान फायदेमंद होती है।

प्रेगनेंसी कन्फर्म होते ही दिनचर्या बनायें

  • प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद एक महिला की लाइफ पूरी तरह बदल जाती है।
  • क्योंकि अब महिला अकेली नहीं होती है बल्कि गर्भ में पल रहा शिशु भी महिला पर ही निर्भर करता है।
  • और महिला को कुछ भी करने से पहले इस बात का ध्यान रखना पड़ता है की महिला जो भी कर रही है उस चीज का अच्छा या बुरा असर अब केवल महिला पर ही नहीं बल्कि उनके पेट में पल रहें शिशु पर भी पड़ेगा।
  • ऐसे में महिला को प्रेगनेंसी के दौरान कोई परेशानी न हो इसके लिए महिला का रूटीन यानी दिनचर्या अच्छे से मैंटेन होनी चाहिए।
  • और इसके लिए महिला को सुबह किस टाइम उठना है, नाश्ता करना है, व्यायाम कब करना चाहिए, स्नैक्स लेने है, दोपहर का भोजन कब करना है, रात्रि का भोजन कब करना है, दवाइयां कब लेनी हैं , आदि सभी चीजों का एक रूटीन सेट कर लेना चाहिए।
  • यदि महिला का रूटीन सेट हो जाता है और महिला अपनी दिनचर्या को बिगड़ने नहीं देती है।
  • तो ऐसा करने से महिला को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने और प्रेगनेंसी को एन्जॉय करने में मदद मिलती है।

आने वाले बदलाव के लिए रहें तैयार

  • जैसे ही महिला का गर्भधारण होता है वैसे ही बॉडी में हार्मोनल बदलाव होने शुरू हो जाते हैं।
  • जिससे महिला शारीरिक, मानसिक व् भावनात्मक रूप से अपने अंदर बदलाव का अनुभव करती है।
  • लेकिन महिला को इन बदलाव से परेशान नहीं होना चाहिए बल्कि प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले बदलाव के लिए तैयार रहना चाहिए।
  • जैसे की हर महिला को पता होता है की समय के साथ महिला का वजन बढ़ेगा जिससे महिला को काम में दिक्कत हो सकती है, डिलीवरी क समय पास आने पर महिला को अकेले रहने में दिक्कत हो सकती है, आदि।
  • तो महिला को इन सभी चीजों के लिए तैयार रहना चाहिए को मदद के लिए घर के किसी सदस्य या कामवाली को रखना चाहिए।
  • नींद में आ रही दिक्कत को दूर करने के लिए प्रेगनेंसी पिल्लो खरीदना चाहिए।
  • पेट के निचले हिस्से व् पीठ के के दर्द से बचाव के लिए मैटरनिटी बेल्ट खरीदनी चाहिए।
  • चलने में कोई दिक्कत न हो इसके लिए आरामदायक जूते चप्पल खरीदने चाहिए।
  • बॉडी का साइज बढ़ने के साथ खुले कपडे खरीदने चाहिए, आदि।
  • मानसिक रूप से होने वाली परेशानी से बचने के लिए योगासन व् मैडिटेशन करना चाहिए, आदि।
  • यदि महिला इन सभी बदलाव के लिए प्रेगनेंसी के दौरान तैयार रहती है तो इससे प्रेगनेंसी और डिलीवरी का समय पास आने पर होने वाली दिक्कतों से बचाव करने में मदद मिलती है।

सही जानकारी इकठ्ठी करें

  • प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद महिला को सबसे पहले प्रेगनेंसी से जुडी जानकारी को इक्कठा करना शुरू कर देनी चाहिए।
  • और केवल जानकारी नहीं बल्कि सही जानकारी, क्योंकि यदि आप अपने घर के सदस्यों से जानकारी लेती है तो हर महिला का अपना अलग अलग एक्सपीरियंस हो सकता है।
  • इंटरनेट से आपको अलग जानकारी मिलती है, किताबों में भी प्रेगनेंसी से जुडी जानकारी आपको मिल सकती हैं।
  • ऐसे में जिस भी बात को लेकर आपको समझ न आए उसके बारे में एक बार डॉक्टर से जरूर पूछें।
  • ताकि प्रेगनेंसी की सही जानकारी गर्भवती महिला को मिल सके और प्रेगनेंसी के दौरान महिला को हर लक्षण हर बदलाव को समझने में मदद मिल सके।
  • और ऐसा भी जरुरी नहीं होता है की प्रेगनेंसी के दौरान जैसा दूसरों के साथ हुआ है वैसा आपके साथ भी हो, इसीलिए दूसरों की बातों को ज्यादा न सोचकर प्रेगनेंसी में आपको अपने अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

तो यह हैं वो पांच काम जो आपको तुरंत ही करने चाहिए जब आपको पता चले की आप प्रेग्नेंट हैं। यदि आप प्रेगनेंसी के दौरान इन बातों का ध्यान रखती हैं तो ऐसा करने से गर्भावस्था के दौरान आपको होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी के तीन से नौ महीने तक शिशु का वजन इससे कम नहीं होना चाहिए

प्रेगनेंसी के तीन से नौ महीने तक शिशु का वजन इससे कम नहीं होना चाहिए, गर्भावस्था किसी भी महिला के लिए एक ऐसा समय होता है। जहां महिला अपने से पहले अपने गर्भ में पल रहे शिशु के बारे में सोचती है। जिसने की अभी जन्म भी नहीं लिया होता है, ऐसा इसीलिए होते हैं क्योंकि शिशु के गर्भ में आते ही महिला केवल शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि भावनात्मक रूप से भी शिशु से जुड़ जाती है।

और भ्रूण भी अपने विकास के लिए माँ पर ही निर्भर करता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला भी गर्भ में शिशु के विकास को लेकर हमेशा चिंतित होती रहती है। लेकिन यदि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान अपनी अच्छे से केयर करती है। अपने खान पान और आराम का अच्छे से ध्यान रखती है तो इसे शिशु के विकास को बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम गर्भ में शिशु के विकास से जुडी कुछ बातें करने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी के तीन से नौ महीने तक शिशु का वजन कितना होना चाहिए

गर्भ में पल रहे शिशु के वजन के बारे में आपको अल्ट्रासॉउन्ड की रिपोर्ट में बताया जाता है। और इसके बाद जब भी आप डॉक्टर के पास जांच करवाने के लिए जाते हैं। तो भी डॉक्टर शिशु के विकास से जुडी बातों को आपसे शेयर करते हैं। तो लीजिये आज हम भी आपको भ्रूण के वजन से जुडी कुछ बातें बताने जा रहे हैं। जैसे की भ्रूण का वजन गर्भ में कितना होना चाहिए। और कितना कम नहीं होना चाहिए।

प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में शिशु का वजन

  • गर्भावस्था के तीसरे महीने में शिशु के लगभग सभी जरुरी अंग बन चुके होते हैं।
  • साथ ही एक स्वस्थ शिशु का वजन अठाइस ग्राम तक इस समय होना चाहिए और इससे कम नहीं होना चाहिए।

प्रेगनेंसी के चौथे महीने में शिशु का वजन

गर्भावस्था के चौथे महीने के गर्भ में पल रहे एक स्वस्थ शिशु का वजन 140 ग्राम होना चाहिए और इससे कम नहीं होना चाहिए।

पांचवें महीने में गर्भ में शिशु का वजन

गर्भावस्था के पांचवें महीने के गर्भ में पल रहे एक स्वस्थ शिशु का वजन 226 ग्राम होना चाहिए और इससे कम नहीं होना चाहिए।

छठे महीने में गर्भ में शिशु का वजन

गर्भावस्था के छठे महीने के गर्भ में पल रहे एक स्वस्थ शिशु का वजन 900 ग्राम होना चाहिए और इससे कम नहीं होना चाहिए।

सातवें महीने में गर्भ में शिशु का वजन

गर्भावस्था के सातवें महीने के गर्भ में पल रहे एक स्वस्थ शिशु का वजन एक किलो ग्राम होना चाहिए और इससे कम नहीं होना चाहिए।

प्रेगनेंसी के आठवें महीने में शिशु का वजन

गर्भावस्था के आठवें महीने के गर्भ में पल रहे एक स्वस्थ शिशु का वजन 1133 ग्राम से डेढ़ किलो तक होना चाहिए और इससे कम नहीं होना चाहिए।

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में शिशु का वजन

गर्भावस्था के नौवें महीने के गर्भ में पल रहे एक स्वस्थ शिशु का वजन ढाई किलो तक होना चाहिए और इससे कम नहीं होना चाहिए।

गर्भ में पल रहे शिशु का वजन बढ़ाने के तरीके

  • प्रेग्नेंट महिला को गर्भ में शिशु का वजन बढ़ाने के लिए पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए, ताकि शिशु के विकास के लिए सभी जरुरी पोषक तत्व उसे मिल सकें।
  • डेयरी प्रोडक्ट्स का भरपूर सेवन करें ताकि शिशु की हड्डियों के विकास को बेहतर करने में मदद मिल सकें।
  • प्रोटीन युक्त दालों का सेवन प्रेग्नेंट महिला को भरपूर करना चाहिए क्योंकि दालों में प्रोटीन होता है जो शिशु की मांसपेशियों के विकास को बेहतर करके शिशु के वजन को सही रखने में मदद करता है।
  • शिशु के बेहतर विकास के लिए प्रेग्नेंट महिला को तनाव लेने से बचना चाहिए और खुश रहना चाहिए।
  • अंडे भी प्रोटीन और फैट का बेहतरीन स्त्रोत होता है जो गर्भ में शिशु का वजन बढ़ाने में मदद करता है।
  • सोयाबीन भी गर्भ में शिशु का वजन बढ़ाने में मदद करता है।
  • सफ़ेद रसगुल्ले का सेवन करने से भी भ्रूण का वजन तेजी से बढ़ाने में मदद मिलती है।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान शिशु के वजन से जुड़े कुछ टिप्स। और यदि आपके गर्भ में पल रहे शिशु का वजन भी कम है। तो आप भी ऊपर दिए टिप्स का इस्तेमाल कर सकती है। इससे शिशु के वजन को तेजी से बढ़ाने में मदद मिलती है।