Home Blog Page 82

सिजेरियन डिलीवरी के बाद तीन महीने तक ऐसे रखें अपना ध्यान

प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों के कारण, डिलीवरी के समय आने वाली समस्या के कारण, गर्भ में शिशु के साथ कोई समस्या होने पर, या कुछ महिलाएं जो दर्द से डरती हैं, उनकी सिजेरियन डिलीवरी होती है। वैसे ज्यादातर महिलाएं नार्मल डिलीवरी को ही ज्यादा बेहतर मानती हैं क्योंकि इसके बाद बॉडी को अच्छे से फिट होने में ज्यादा समय नहीं लगता है। जबकि सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला को पूरी तरह से फिट होने के लिए कम से कम छह महीने का समय लग सकता है। साथ ही सिजेरियन डिलीवरी में महिला के घाव भरने में समय भी लगता है, और उन्हें नार्मल डिलीवरी से बहुत ज्यादा केयर की जरुरत होती है।

सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला को अपने खान पान से लेकर अपने उठने बैठने का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि उसकी थोड़ी सी लापरवाही के कारण उसे परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है। इसके अलावा सिजेरियन डिलीवरी के बाद बच्चे को स्तनपान करवाते हुए भी ज्यादा परेशानी होती है, क्योंकि महिला यदि पेट पर ज्यादा जोर देती है तो उसे परेशानी हो सकती है। इसके अलावा और भी बहुत सी बातें हैं जिनका ध्यान आपको सिजेरियन डिलीवरी के बाद रखना चाहिए। ऐसे में आज हम आपको सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला को किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, और अपनी केयर कैसे करनी चाहिए इससे ही जुडी कुछ बातें बताने जा रहें है।

सिजेरियन डिलीवरी के तीन महीने तक महिला को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए:- डिलीवरी होने के बाद एक तरह महिला का नया जन्म ही होता है। ऐसे में उसके शरीर बहुत कमजोर हो जाता है और खासकर जब महिला की सिजेरियन डिलीवरी हुई होती है। ऐसे में महिला को अपना बहुत अधिक ध्यान देना पड़ता है। तो आइए अब जानते है की सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला को किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

अपने टांको का रखें ध्यान:- सिजेरियन डिलीवरी होने पर महिला के टांको की संख्या अधिक होती है। ऐसे में महिला को उनका ध्यान रखना चाहिए, उनकी साफ़ सफाई रखनी चाहिए ताकि इन्फेक्शन न हो, ड्रेसिंग करवाते रहना चाहिए। इसके अलावा महिला को नहाते समय ज्यादा पानी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, गुनगुने पानी का प्रयोग नहाने के लिए करना चाहिए, साथ ही नहाते समय घाव पर कोई कपडा या पॉलीथीन का इस्तेमाल करना चाहिए। ताकि घाव गीला न हो, क्योंकि यदि घाव गीला हो जाएगा तो आपको दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।

मालिश न करवाएं:- सिजेरियन डिलीवरी की शुरुआत में कम से कम बीस दिन तक आपको मालिश नहीं करवानी चाहिए, क्योंकि उस समय घाव भरा हुआ नहीं होता है, और ऐसे में मालिश करवाने के कारण आपको परेशानी हो सकती है। लेकिन यदि आप चाहे तो घाव भरने के बाद मालिश करवा सकते है, क्योंकि इससे आपको जल्दी ठीक होने में मदद मिलती है, साथ ही आपकी बॉडी को भी आराम मिलता है।

खान पान का ध्यान रखें:- महिला को सिजेरियन डिलीवरी के बाद अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। जैसे की महिला को पौष्टिक तत्वों से भरपूर चीजों का सेवन करना चाहिए, लेकिन ज्यादा घी से भरी हुई चीजे नहीं खानी चाहिए क्योंकि इससे घाव को भरने में समय लग सकता है। हाँ घाव भरने के बाद आप जितना चाहे घी आदि का सेवन कर सकती है, इसीलिए आपको हैल्थी आहार का सेवन करना चाहिए लेकिन ऐसे आहार से परहेज करना चाहिए जिससे आपके घाव को भरने में परेशानी हो।

नींद भरपूर लेनी चाहिए:- डिलीवरी के बाद अपने बॉडी को पूरी तरह रेस्ट देने के लिए भरपूर नींद लेनी चाहिए, ऐसा करने से आपके शरीर को आराम मिलता है। शुरुआत में शिशु के कारण आपको थोड़ा परेशानी हो सकती है, लेकिन जब भी शिशु सोएं उस समय आप भी सो जाएँ।

भारी सामान, या ज्यादा भागदौड़ से रखें परहेज:- पेट पर किसी भी तरह से जोर पड़ने के कारण आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आपको न तो भारी सामान उठाना चाहिए, न ही ज्यादा सीढ़ियां चढ़नी चाहिए, न ही ज्यादा भागदौड़ करनी चाहिए, क्योंकि इसके कारण आपको आपको परेशानी हो सकती है।

बिना डॉक्टर के परामर्श के न करें दवाइयों का सेवन:- कई बार ऐसा होता है सिजेरियन डिलीवरी होने के कारण आपको पेट या अन्य जगह पर दर्द की समस्या हो सकती है। ऐसे में इस दर्द से छुटकारा पाने के लिए आपको दवाइयों का सेवन नहीं करना चाहिए, बल्कि अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए। क्योंकि बिना परामर्श के दवाइयां खाने के कारण आपकी परेशानी बढ़ सकती है।

आराम से उठे बैठें:- सिजेरियन डिलीवरी के बाद यदि आप एक दम से उठते या बैठते हैं तो इसके कारण आपको घाव से जुडी परेशानी या पेट में दर्द आदि का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए की जब भी आप उठे या बैठे तो करवट लेकर उठे और आराम से बैठें ऐसा करने से आपको कोई परेशानी नहीं होगी। साथ ही पेट के बल झुककर, और पैरों के भार बैठकर काम न करें क्योंकि इससे आपके टांको पर जोर पड़ता है, जिसके कारण आपको परेशानी हो सकती है।

शिशु को स्तनपान जरूर करवाएं:– स्तनपान करवाने से महिला को सिजेरियन वाले घाव को तेजी से भरने में मदद मिलती है। साथ ही इससे शिशु के बेहतर विकास में भी फायदा होता है। इसीलिए सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला को इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए। और स्तनपान करवाते समय सहारा लेकर बैठना चाहिए ताकि आपको स्तनपान करवाते समय किसी भी तरह की परेशानी न हो। और चाहे तो गोद में सिरहाने को लेकर उस पर शिशु को लिटाएं और उसके बाद आराम से शिशु भी रहता है और आपको भी परेशानी नहीं होती है।

व्यायाम न करें:- बॉडी की फिटनेस को लेकर महिलाएं बहुत परेशान होती है, लेकिन आपको सिजेरियन डिलीवरी के बाद कम से कम दो महीने तक किसी भी तरह का व्यायाम नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे आपको परेशानी हो सकती है, और उसके बाद भी हल्का व्यायाम करने से ही शुरुआत करनी चाहिए।

सम्बन्ध न बनाएं:- प्रसव के दौरान महिला बहुत सी परेशानियों से गुजरती है, और उसके बाद उसे काफी दिनों कम से कम तीन हफ्ते तक ब्लीडिंग भी होती है। उसके बाद भी उसकी बॉडी को अच्छे से ठीक होने में समय लगता है। इसीलिए आपको सिजेरियन डिलीवरी के बाद सम्बन्ध बनाने से काफी समय तक परहेज रखना चाहिए, और इसके बारे में अपने डॉक्टर से जरूर राय लेनी चाहिए।

ज्यादा टाइट कपडे न पहनें:- ज्यादा टाइट कपडे पहनने के कारण, सिंथेटिक कपडे पहनने के कारण आपके घाव पर परेशानी होने के साथ आपको चुभन महसूस हो सकती है। ऐसे में आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए की आप डिलीवरी के बाद खुले और कॉटन के कपडे पहने जिससे आपको आराम महसूस हो।

डॉक्टर से जांच करवाएं:- जब तक आपके घाव भर नहीं जाते हैं तब तक डॉक्टर से राय लेते रहना चाहिए, और साथ ही जांच भी करवाते रहना चाहिए। ताकि यदि कोई भी परेशानी हो तो आपको इस समस्या का हल करवाने में मदद मिल सके।

तो यह हैं कुछ टिप्स जो की सिजेरियन डिलीवरी के बाद तीन महीने तक महिला को ध्यान रखने चाहिए। ऐसा करने से महिला को आराम मिलता है और जल्दी ठीक होने में मदद मिलती है। इसके अलावा यदि टांको से जुडी कोई परेशानी हो या और कोई समस्या हो तो इससे बचने के लिए आपको एक बार अपने डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

गर्भवती महिला को किस महीने में पति से अलग सोना चाहिए

गर्भावस्था में सम्बन्ध

प्रेगनेंसी किसी भी महिला के लिए बहुत ही प्यारा अनुभव होता है, और इस अनुभव के दौरान किसी भी तरह की परेशानी न हो इसके लिए गर्भवती महिला को छोटी से छोटी बात का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। प्रेग्नेंट महिला को इस दौरान न केवल अपने उठने बैठने और खाने पीने का ध्यान रखना चाहिए बल्कि अपने पार्टनर से भी थोड़ा दूरी बनाकर रखनी चाहिए, नहीं नहीं हम यह नहीं कह रहे हैं की आप उनसे बात करना बंद कर दें। बल्कि हमारे कहने का मतलब है की पति और पत्नी को सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए। वैसे तो स्वस्थ प्रेगनेंसी होने पर सम्बन्ध बनाया जा सकता है, लेकिन कुछ ऐसा समय भी होता है प्रेगनेंसी के दौरान जिस समय सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए क्योंकि इससे गर्भवती महिला को समस्या हो सकती है।

प्रेग्नेंट महिला को किस महीने में पति से अलग सोना चाहिए

प्रेगनेंसी के दौरान पति और पत्नी बेड शेयर कर सकते हैं, लेकिन एक दूसरे से शारीरिक रूप से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी में कुछ समय ऐसा आता है जब सम्बन्ध बनाना केवल गर्भवती महिला को ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु को भी नुकसान पहुंचा सकता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के किस महीने में गर्भवती महिला को पति से अलग सोना चाहिए।

तीसरा महीना

पहले महीने में तो महिला को पता ही नहीं होता है की महिला का गर्भ ठहर गया है, लेकिन दूसरे महीने में पीरियड्स के मिस होने के एक हफ्ते महिला चेक कर सकती है की महिला का गर्भ ठहरा है या नहीं। और यदि महिला का परिणाम पॉजिटिव आता है तो ऐसे में महिला को अपने पार्टनर से दूरी बनाकर रखना चाहिए, और यही राय आपको डॉक्टर भी देते हैं जब आप डॉक्टर से चेक करवाते हैं। क्योंकि यह प्रेगनेंसी का बहुत ही नाजुक समय होता है इस दौरान गर्भाशय पर लगी थोड़ी सी चोट ब्लीडिंग की समस्या या गर्भपात जैसी परेशानी को खड़ी कर सकती है ऐसे में गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी का पता चलने के तीसरे महीने तक सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में शिशु का आकार भी बढ़ जाता है साथ ही महिला के पेट का आकार भी बढ़ जाता है। ऐसे में सम्बन्ध बनाने के कारण पेट पर दबाव पड़ने या गर्भाशय पर चोट लगने खतरा और अधिक हो जाता है। जिसके कारण गर्भाशय में संकुचन होने के चांस बढ़ जाते हैं और तेज गति से गर्भाशय में संकुचन होने के कारण समय पूर्व प्रसव जैसे खतरे का सामना भी करना पड़ सकता है, जिससे शिशु काफी कमजोर होता है। ऐसे में शिशु के गर्भ में बेहतर विकास और डिलीवरी को समय से पहले होने जैसी समस्या से बचने के लिए महिला को अपने पार्टनर के करीब नहीं आना चाहिए।

प्रेगनेंसी में अपने पार्टनर के किन किन परिस्थितियों में करीब नहीं आना चाहिए

गर्भावस्था में कोई एक कारण नहीं होता है जब गर्भवती महिला अपने पार्टनर के करीब नहीं आ सकती है। बल्कि ऐसी बहुत सी परिस्थितियां होती है जब गर्भवती महिला को अपने पार्टनर के करीब आने से बचना चाहिए। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की और कौन से परिस्थितियां है जब गर्भवती महिला को कब अपने पार्टनर के करीब नहीं आना चाहिए।

  • गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान कोई कॉम्प्लीकेशन्स हो तो महिला को अपने पार्टनर के साथ सोने से बचना चाहिए, प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स के होने पर डॉक्टर भी आपको ऐसा करने की सलाह देते है और साथ ही पूरी तरह से बेड रेस्ट करने की सलाह देते हैं।
  • पहले गर्भपात हो चूका हो या गर्भपात का खतरा हो।
  • ब्लीडिंग की समस्या रहती हो।
  • गर्भ में एक से ज्यादा शिशु के होने पर।
  • शिशु के गर्भ में नीचे की तरफ होने पर।
  • बहुत मुश्किलों के बाद गर्भधारण हुआ हो।
  • उम्र अधिक होने पर गर्भधारण करने पर भी प्रेगनेंसी में मुश्किलें बढ़ सकती है ऐसे में भी डॉक्टर सम्बन्ध न बनाने की सलाह देते हैं।
  • सम्बन्ध बनाने पर यदि आपको गर्भवती महिला को कोई तकलीफ या असहज महसूस होता है तो भी प्रेग्नेंट महिला को सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।
  • पहला शिशु यदि समय से पहले हो गया हो या समय पूर्व प्रसव होने का खतरा हो तो भी महिला को सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।

तो यह हैं वो समय जब प्रेग्नेंट महिला को अपने पार्टनर के साथ सोने से बचना चाहिए। इसके अलावा यदि आप प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाते भी हैं तो आपको इसके लिए एक बार डॉक्टर से जरूर राय लेनी चाहिए। साथ ही सम्बन्ध बनाते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए की गर्भवती महिला को इससे कोई परेशानी न हो और पेट पर भी जोर न पड़े।

बिमारी को दूर करने के लिए चुकंदर का ऐसे इस्तेमाल करें!

0

भारत प्रदेश में ऐसी कई सब्जियां है जिन्हें लोग उनके स्वाद से ज्यादा उनके गुणों की वजह से पसंद करते है या उनका सेवन करते है. इन्ही सब्जियों में से एक है चुकंदर जिसका नाम तो आप सभी ने सुना होगा. चुकंदर लाल रंग की जड़ से पर्याप्त एक सब्जी/फल है जिसका प्रयोग सब्जी आदि बनाने के लिए किया जाता है.

कुछ लोग इसे सलाद में कच्चा खाना पसंद करते है तो कोई इसके रस को पीना पसंद करते है. तरीका कोई भी हो फायदे वही होते है. हरी सब्जियों की तरह ये फल भी आपके स्वास्थ्य से लेकर आपके बालों तक सभी को एक समान फ़ायदे पहुँचाता है.

लाल रंग के ये फल आपके स्वास्थ्य के लिए कितना फायदेमंद होता है इसका अनुमान भी नहीं लगाया जा सकता. त्वचा की समस्या हो या स्वास्थ्य की कोई गंभीर समस्या सभी में ये बेहतरीन औषधि का काम करता है. चूँकि ये फल लाल रंग का होता है तो इसमें खून बढ़ाने वाले और उसे शुद्ध करने वाले गुण भी पाए जाते है.

कहते है यदि कोई व्यक्ति 15 से 20 दिन तक लगातार कच्चे चुकंदर या उसके रस का सेवन करे तो उसके स्वास्थ्य पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है. शोधों से ज्ञात हुआ है की जिन व्यक्तिओ को High BP यानि उच्च रक्तचाप की समस्या होती है वह 1 ग्लास चुकंदर के रस का सेवन करे. ऐसा करने से साने वाले 1 घंटे के भीतर उनका BP नियंत्रित हो जायेगा.

फल के अतिरिक्त चुकंदर का प्रयोग सब्जी के रूप में भी किया जाता है. इसमें सोडियम, सल्किम, आयरन, फॉस्फोरस आदि आवश्यक तत्व भी पाए जाते है जो आपके स्वास्थ्य के लिए बेहद जरुरी होते है. High BP के अतिरिक्त चुकंदर पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने, आँखों की रोशनी बढ़ाने और शरीर में खून का निर्माण करने में भी मदद करता है.

लेकिन ये भी सत्य है की बहुत कम लोग इस फल के पूर्ण फायदों के बारे में जानते है. और इसके खाना नापसंद करते है. परंतु यदि वे सभी इसके पूर्ण फायदों को जान जाए तो जाहिर है की वे इस चमत्कारिक फल को न नहीं कह पाएंगे. चुकंदर हर मौसम में बड़ी आसानी से मिलने वाला फल है. इसीलिए इसे खरीदने के लिये भी आपको ज्यादा परेशनी उठाने की आवश्यकता नहीं है.

वैसे तो खून के रोगियों के लिए ये फल लाभकारी माना जाता है लेकिन हमें भी रोजाना किसी न किसी रूप में चुकंदर का सेवन करना चाहिये. इससे न केवल आपकी त्वचा में निखार आएगा बल्कि आपका स्वास्थ्य भी बेहतर होगा. आगे हम आपको चुकंदर खाने और उसका जूस पीने के पूर्ण फायदों के बारे में बताने जा रहे है. जिन्हें जानकर शायद आपको आश्चर्य हो. और हो सकता है की इसके पूर्ण गुणों को जानकर आप भी इस लाल रंग के फल को पसंद करने लगे.

स्वास्थ्य के लिए चुकंदर के फ़ायदे

सही मायने में देखा जाये तो लाल रंग की जड़ से प्राप्त यह फल सबसे अधिक हमारे स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता है. उच्च रक्त चाप हो या खून की कमी सभी में इसका प्रयोग करना फायदेमंद सिद्ध होता है. चुकंदर के इतने सारे फ़ायदे जानकर आपका मन भी इसके पूर्ण गुणों को जानने के लिये उत्सुक हो रहा होगा. तो आपकी इस उत्सुकता को शांत करते है और बताते है स्वास्थ्य के लिए चुकंदर के फ़ायदे.beetroot-recipe

1. स्ट्रोक, हार्ट अटैक और BP को कम करे :

चुकंदर में nitrates की अच्छी मात्रा पायी जाती है जो स्ट्रोक, हृदय संबंधी बीमारिया और BP को नियंत्रित करती है. क्योकि जब नाइट्रेट को blood forming nitric oxide के साथ मिलाया जाता है तो वो रक्त वाहिकाओं को बड़ा करके खून में ऑक्सीजन की मात्रा को बड़ा देता है. जिससे BP नियंत्रित हो जाता है. यदि आप भी अपने हृदय को स्वस्थ रखना चाहते है तो नियमित रूप से चुकंदर का सेवन करना शुरू कर दें.

2. एक बेहतर एंटी ऑक्सीडेंट :

मनुष्य के Immune system को बेहतर बनाने के लिए एंटी ऑक्सीडेंट्स बेहद आवश्यक होते है. और लाल रंग का ये फल beta cyanine से भरपूर होता है जो एक अच्छा एंटी ऑक्सीडेंट है. ये LDL को भी कम करने में मदद करता है जिसे bad cholesterol के नाम से भी जाना जाता है.

3. Brain फैक्टर :

बढ़ती उम्र में स्मरण शक्ति का कमजोर होना एक आम बात है. क्योकि जैसे जैसे उनकी उम्र बढ़ती है उनकी स्मरण शक्ति भी कम होने लगती है. ऐसे में चुकंदर का सेवन करना बहुत लाभकारी होता है. क्योकि जब चुकंदर खाया जाता है तो वो मस्तिष्क तक रक्त का बहाव बढ़ा देता है जिससे dementia का प्रभाव कम हो जाता है.

4. हड्डियों के लिए बेहतर औषधि :

चूँकि चुकंदर में प्राकतिक खनिज silica की मात्रा पायी जाती है, तो ये शरीर को कैल्शियम के सेवन का पूर्ण उपयोग करने में मदद करता है. जिससे कैल्शियम के पुरे तत्व हमारी हड्डियों की मिलते है और हड्डियां मजबूत होती है. इसके अलावा इसमें मैग्नीशियम, Vitamin C और फोलेट भी पाए जाते है जो हड्डियों को मजबूत करने के लिए बेहतर Supplements है.

5. कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करे :

अपने रोजाना के आहार में चुकंदर को सम्मिलत करने से खून में बढे cholesterol level को कम किया जा सकता है. क्योकि इस फल में soluble fibre पाए जाते है जो bad cholesterol or LDL को नियंत्रित करते है.

6. न्यूट्रिएंट्स supplier :

चुकंदर में न्यूट्रिएंट्स की अच्छी मात्रा पायी जाती है जो आपके इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाता है और नई रक्त कोशिकाओं का निर्माण करता है. एक कच्चे चुकंदर में folic acid, iron, zinc, magnesium, potassium, fiber, vitamin C और carbohydrates पाए जाते है. Folic acid को फोलेट के नाम से जाना जाता है जो गर्भावस्था में बेहद आवश्यक होता है क्योकि ये गर्भाशय में spina bifida (रीढ़ की हड्डी के विकास में कमी) को ठीक करता है. खराब पाचन तंत्र को भी इसके सेवन से कुछ ही दिनों में ठीक किया जा सकता है. चुकंदर का आयरन एनीमिया की समस्या को दूर करे.beetroot

7. Energy provider :

रीसर्च से पता चला है की किसी भी व्यायाम और शारीरिक workout से पहले लगभग 250ml चुकंदर का रस पीने से आपकी performance में वृद्धि होती है क्योंकि ये रक्त वाहिकाओं को stimulate करता है जिसकी वजह से इसे बेहतर energy प्रोवाइडर भी कहा जाता है.

8. शुगर लेवल को नियंत्रित करे :

चुकंदर रक्त में ग्लूकोस के लेवल को स्थिर करता है, इसीलिए जब मधुमेह के रोगी द्वारा हफ्ते में तीन दिन लगातार चुकंदर के रस का सेवन किया जाता है तो ये रक्त के शुगर लेवल में बहुत से परिवर्तन लाता है. और ये काम चुकंदर में मौजूद soluble fiber करते है.

9. वजन के लिए :

चुकंदर में फाइबर की उच्च और कैलोरी की कम मात्रा पाई जाती है. इसके वजन घटाने वाले फ़ायदे के कारण इसे बहुत जाना जाता है. क्योकि इसमें मौजूद फाइबर फैट कम करने में मदद करते है. इसके अलावा ये शरीर से toxic और अतिरिक्त पानी को भी निकालने में मदद करते है. इसके साथ ही ये आपकी स्किन में ग्लो भी लाता है.

10. कैंसर से लड़े :

पिछले कई वर्षो से चुकंदर का प्रयोग एक बेहतर औषधि के रूप में किया जाता आ रहा है. colon कैंसर और liver कैंसर जैसी गंभीर बिमारियों को भी रोजाना एक ग्लास चुकंदर के रस से ठीक किया जा सकता है. ये काम चुकंदर की detoxifying प्रकृति करती है.

त्वचा के लिए चुकंदर के फ़ायदे

केवल चुकंदर ही नहीं बल्कि अन्य फल और सब्जियां भी विभिन्न इन्फेक्शन्स और समस्याओ से हमारे शरीर को बचाती है. जिनमे से कुछ cholesterol level को नियंत्रित करती है तो कुछ High BP की समस्या को ठीक करती है. लेकिन जब बात स्वस्थ त्वचा की आती है तो सबसे पहला नाम चुकंदर का ही आता है. तो aayiy जानते है त्वचा के लिए चुकंदर के फ़ायदे.

11. रक्त को शुद्ध करे :

चुकंदर न केवल आपके शरीर को सभी आवश्यक खनिज और न्यूट्रिएंट्स प्रदान करता है जिससे त्वचा को स्वस्थ रखा जा सके बल्कि रक्त को भी शुद्ध करता है. यदि रोजाना नियमित रूप से चुकंदर के रस का सेवन किया जाए तो मुँहासे और कील जैसी समस्याओ को आसानी से दूर किया जा सकता है. क्योंकि इन समस्याओ का कारण रक्त में मौजूद अशुद्धियाँ होती है.beetroot-juice

12. बढ़ती उम्र की निशानियां :

चुकंदर का रस रक्त को शुद्ध करके स्वस्थ त्वचा प्रदान करता है. इसके अलावा इसमें एंटी ऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते है जो शरीर से free radicals और बढ़ती उम्र की निशानियो को कम करने में मदद करता है.

वैसे देखा जाए तो त्वचा के लिए चुकंदर के अनगिनत फ़ायदे है. इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता की किस रूप में इसका सेवन किया जा रहा है क्यंकि हर रूप में ये आपके लिए लाभकारी होता है. इसके अलावा ये आपको निखरी और बेदाग़ त्वचा और चेहरा प्रदान करने में भी मदद करता है.

बालों के लिये चुकंदर के फ़ायदेचुकंदर खाने के फ़ायदे

चुकंदर में कई तरह के न्यूट्रिएंट्स और आवश्यक तत्व पाए जाते है जो पुरे शरीर में रक्त के संचारण को सुधारते है.

13. डेंड्रफ की समस्या :

चुकंदर के रस में प्रोटीन, फॉस्फोरस, potassium और कई तरह के आवश्यक विटामिन और मिनरल्स पाए जाते है, जो स्कैल्प तक रक्त के बहाव को सुधारते है. इसके साथ ही ये स्कैल्प से डेड स्किन को निकालता है और स्कैल्प से अतिरिक्त oil को निकाल कर बालों की ग्रोथ में मदद करता है. इसमें एंटी सेप्टिक और anti inflammatory गुण भी पाए जाते है जो डेंड्रफ उर स्कैल्प की जुडी समस्याओ को ठीक करने में मदद करते है. इसके साथ ही ये बालों की जड़ो को भी मजबूत करते है.

14. प्राकृतिक हेयर डाई :

चुकंदर का रंग गाढ़ा होता है और इसका प्रयोग कई तरह के खाद्य पदार्थो में किया जाता है. इसी प्रकार इसका प्रयोग प्रकृतिक हेयर डाई के रूप में भी किया जा सकता है.

15. स्वस्थ बालों के लिए :

Beetroot में carotenoids पाए जाते है जो बालों की मोटाई को बनाये रखते है और उनके चमक प्रदान करते है.

प्रेगनेंसी में घुटनों के दर्द से बचने के उपाय

गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में बहुत से बदलाव होते हैं और इन्ही बदलाव के कारण महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। तो आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली एक समस्या के बारे में बात करने जा रहे हैं। जिसका सामना ज्यादातर गर्भवती महिलाएं कर सकती है। और वो समस्या है प्रेगनेंसी के दौरान घुटनों में दर्द महसूस होना। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में घुटनों में दर्द होने के क्या कारण होते हैं। और किस तरह प्रेग्नेंट महिला इस परेशानी से निजात पा सकती है।

गर्भावस्था में घुटनों में दर्द होने के कारण

  • प्रेग्नेंट महिला का वजन बढ़ने के कारण पैरों पर दबाव बढ़ जाता है जिसके कारण महिला को घुटनों में दर्द महसूस होता है।
  • पैरों को ज्यादा देर तक एक ही पोजीशन में मोड़कर रखने के कारण भी घुटनों में दर्द की समस्या होती है।
  • यदि प्रेग्नेंट महिला बहुत देर तक खड़ी रहती है तो इसके कारण भी पैरों की तरफ दबाव बढ़ता है जिसकी वजह से गर्भवती महिला को घुटनों में दर्द अधिक हो सकता है।
  • शरीर में पानी व् पोषक तत्वों की कमी के कारण भी यह समस्या होती है।
  • जरुरत से ज्यादा काम करने के कारण भी महिला को यह दिक्कत हो सकती है।
  • जिन महिलाओं को थायरॉयड की समस्या होती है उन्हें जोड़ो में दर्द की परेशानी अधिक होती है।
  • गर्भवती महिला के एक ही पोजीशन में सोने के कारण भी यह दिक्कत हो सकती है।

गर्भावस्था में घुटनों के दर्द की समस्या से बचने के उपाय

यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला को घुटनों में दर्द की समस्या होती है तो कुछ आसान टिप्स को ट्राई करने से प्रेग्नेंट महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। जैसे की:

मसाज

रोजाना रात को सोने से पहले तेल गरम करके घुटनों की मसाज करें। ऐसा करने से मांसपशियों को आराम मिलेगा, ब्लड फ्लो अच्छे से होगा जिससे गर्भवती महिला को घुटनों के दर्द की समस्या से राहत पाने में मदद मिलेगी।

सिकाई

गरम पानी में टॉवल को भिगोकर उसे निचोड़ ले उसके बाद उसे घुटनों पर बांधकर सिकाई करें या फिर आप गरम पानी को बोतल में डालकर सिकाई करें। ऐसा करने से भी आपको घुटनों के दर्द से आराम मिलता है गरम पानी से सिकाई के साथ आप बर्फ को कपडे में बांधकर भी सिकाई कर सकती है ऐसा करने से भी आपको तुरंत घुटनों के दर्द से आराम मिलता है।

थोड़ा व्यायाम

घुटनों के दर्द की समस्या से बचने के लिए आपको थोड़ा व्यायाम भी करना चाहिए। क्योंकि व्यायाम करने से मांसपेशियों को रिलैक्स महसूस होता है, ब्लड फ्लो अच्छे से होता है जिससे घुटनों के दर्द से आराम मिलता है।

पैरों को ऊँचा रखें

घुटनों के दर्द से बचने के लिए सोते समय पैरों के नीचे दो पिल्लों लगाएं ताकि पैरों तक ब्लड फ्लो अच्छे से हो। जिससे गर्भवती महिला को घुटनों के दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिल सके। यदि आपको स्विमिंग आती है तो स्विमिंग करें। क्योंकि स्विमिंग करने से बहुत जल्दी इस परेशानी से राहत पाने में मदद मिलती है।

आरामदायक जूते चप्पल

घुटनों के दर्द से बचने के लिए महिला को अपने जूते चप्पलों का भी ध्यान रखना चाहिए। महिला को ऐसे जूते चप्पल नहीं पहनने चाहिए जिससे पैरों में हवा पास न हो, जूते चप्पल आरामदायक न हो, हाई हील्स हो। यदि महिला इन बातों का ध्यान रखती है तो भी महिला को घुटनों के दर्द से आराम पाने में मदद मिलती है।

भरपूर आराम

गर्भवती महिला को घुटनों व् शरीर के अन्य पार्ट्स में दर्द की समस्या से बचने के लिए भरपूर आराम भी करना चाहिए। क्योंकि महिला जितना आराम करती है उतना ही महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

पोषक तत्वों से भरपूर आहार

शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने के कारण शरीर के अंगों को अच्छे से पोषण नहीं मिलता है। जिसकी वजह से महिला को घुटनों में दर्द जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान घुटनों के दर्द की समस्या से बचने के लिए महिला को पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए।

घुटनों में दर्द की समस्या से बचने के अन्य उपाय

  • ज्यादा देर तक एक ही जगह खड़ी न रहें।
  • बहुत देर तक एक ही पोजीशन में न बैठें।
  • गलत पोजीशन में न सोएं।
  • प्रेगनेंसी पिल्लो का इस्तेमाल करें।
  • पानी का भरपूर सेवन करें।
  • स्ट्रेचिंग करें।
  • तनाव नहीं लें।
  • वजन कण्ट्रोल में रखें।
  • यदि दर्द ज्यादा हो और किसी भी तरीके को ट्राई करने पर आराम नहीं मिल रहा हो तो तुरंत डॉक्टर को मिलें।

तो यह हैं कुछ बेहतरीन उपाय जिन्हे ट्राई करने से प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को घुटनों में दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। यदि आप भी प्रेगनेंसी के दौरान इस समस्या के कारण परेशानी का अनुभव कर रही है तो आप भी इन टिप्स को ट्राई कर सकती हैं आपको जरूर फायदा मिलेगा।

Remedies to get rid from Knee pain in Pregnancy

प्रेगनेंसी में हेयर फॉल की समस्या

प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओ को बहुत सी समस्याओ का सामना करना पड़ता है, उनमे से बालों का झड़ना या पतला होना भी एक है, कई महिलाएं इसे लेकर बहुत परेशान हो जाती है, लेकिन गर्भावस्था के समय ऐसा होना आम बात होती है, और इसका सबसे बड़ा कारन होता है शरीर में होने वाला हार्मोनल बदलाव, जिसका असर आपके शरीर के साथ साथ आपके बालों पर भी पड़ता है, और यह समस्या डिलीवरी के बाद भी हो सकती है लेकिन जैसे ही आपके हॉर्मोन संतुलन में आ जाते हैं वैसे ही आपको इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है, तो आइये जानते हैं की प्रेगनेंसी में हेयर फाल की समस्या से बचने के लिए आप क्या क्या कर सकते हैं।

इन्हें भी पढ़ें:- प्रेगनेंसी में बार बार यूरिन आने की समस्या है? ये करें

आहार का रखें ध्यान:-

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में यदि सभी भरपूर पोषक तत्व होतो इससे शिशु को स्वस्थ रहने के साथ आपको भी पोषण मिलता हैं, और साथ ही इससे आपको अपने बालों के झड़ने की समस्या पर भी रोक लगाने में मदद मिलती है, इसके लिए आप ऐसे आहार का सेवन करें, जिसमे विटामिन, अन्य खनिज जैसे विटामिन इ, बी, जिंक, प्रोटीन, आयरन आदि भरपूर मात्रा में हो, आपको इससे फायदा मिलेगा।

मालिश करें:-

मालिश करने से आपको न केवल मानसिक रूप से राहत और आराम महसूस होगा, बल्कि इसके कारण आपके बालों को भी पोषण मिलेगा, और मालिश करने के बाद अच्छे से अपने बालों में कंघी कर लें, हफ्ते में दो से तीन बार ऐसा जरूर करें इससे आपके बालों को प्रेगनेंसी में हेयर फॉल की समस्या से बचने में मदद मिलेगी।

इन्हें भी पढ़ें:- प्रेगनेंसी के बाद आपका पेट बड़ा नहीं होगा! अगर अपनाएंगे ये तरीके

ट्रिम्मिंग करवाएं:-

समय समय पर अपने बालों को ट्रिम करवाते रहें ऐसा करने से भी आपके बालों को ग्रोथ करने में मदद मिलती है, और साथ ही बाल भी बढ़ते है, और बालों के झड़ने की समस्या को भी कम करने में मदद मिलती है।

तनाव न लें:-

जो महिलाएं गर्भावस्था में अधिक तनाव लेती है, उन्हें भी हेयर फॉल की समस्या अधिक होती है, क्योंकि उनके शरीर में बहुत से हॉर्मोन असंतुलित हो जाते है, साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान हो रहे बदलाव को लेकर आपको परेशान भी नहीं होना चाहिए क्योंकि धीरे धीरे यह ठीक हो जाते है, और यदि आप तनावमुक्त रहते है खुश रहते हैं तो इससे भी आपको स्वस्थ रहने में मदद मिलती है, और हेयर फॉल को भी कम किया जा सकता है।

इलेक्ट्रिक चीजों का इस्तेमाल न करें:-

बालों को सुखाने या सीधा करने के लिए आपको ड्रायर या स्ट्राइटनेर का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए क्योंकि यह भी आपके बालों पर बुरा प्रभाव डालते है और बालों को कमजोर करते हैं जिसके कारण आपको बालों के झड़ने की समस्या से परेशान होना पड़ सकता है।

गीले बालों में कंघी न करें:-

जितना हो सकें गीले बालों में कंघी करने से बचें, और साथ ही गीले बालों को या वैसे भी बालों को अधिक टाइट नहीं बांधना चाहिए क्योंकि इससे भी आपको बालों के झड़ने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

अधिक केमिकल का इस्तेमाल न करें:-

बालों के लिए अधिक केमिकल का इस्तेमाल करने के कारण भी आपको यह समस्या हो सकती है, इसीलिए जितना हो सकें प्रेगनेंसी में अधिक केमिकल का इस्तेमाल करने से बचें क्योंकि यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसा करने से आपको बालों के झड़ने की समस्या हो सकती है, इसके अलावा बालों के लिए ऐसे शैम्पू का इस्तेमाल करें जिसमे सिलिका और बायोटिन हो इससे बालों को पोषण मिलता है।

चिकित्सक की राय लें:-

यदि आपके बाल प्रेगनेंसी में अधिक झड़ रहे हैं तो किसी घरेलू उपाय का इस्तेमाल करने से पहले आपको डॉक्टर की राय जरूर लेनी चाहिए साथ ही आप उनसे इसका कारण भी जान सकती हैं, बिना डॉक्टरी परामर्श के कुछ भी नहीं करना चाहिए क्योंकि हो सकता है की इसका शिशु पर कोई गलत प्रभाव न पड़े।

तो ये हैं कुछ ख़ास टिप्स जिनका इस्तेमाल करके आप प्रेगनेंसी में होने वाली इस समस्या से निजात पा सकते हैं, लेकिन आप चाहे तो इस बारे में अपने डॉक्टर से भी राय ले सकते है।

इन्हें भी पढ़ें:- प्रेगनेंसी के दौरान ये होना सामान्य बात होती है?

प्रेगनेंसी में पेट साफ़ करने के तरीके प्रेगनेंसी में

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जिसमे से पेट का अच्छे से साफ़ न होना भी एक समस्या है। और गर्भवती महिला का जब पेट अच्छे से साफ़ नहीं होता है तो भूख में कमी, खट्टी डकार, पेट फूलना, पेट में हल्का दर्द, सीने में जलन जैसी परेशानियां भी महिला को होने लगती है। और इन सभी परेशानियों के कारण महिला ज्यादा दिक्कत महसूस करती है। क्या आप भी प्रेग्नेंट हैं? और आपको भी यह सभी परेशानियां हो रही है? यदि हाँ, तो घबराइए नहीं अब इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे कुछ आसान उपचार बताने जा रहे हैं। जिसकी मदद से आपको इन सभी परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलती है।

प्रेग्नेंट महिला का पेट साफ़ नहीं होने के कारण

  • बॉडी में हार्मोनल बदलाव होने के कारण प्रोजेस्ट्रोन हॉर्मोन का स्तर बढ़ जाता है जिसके कारण पेट अच्छे से साफ नहीं हो पाता है।
  • प्रेग्नेंट महिला यदि अपनी डाइट में फाइबर युक्त आहार का सेवन नहीं करती है तो इस वजह से पाचन तंत्र अच्छे से काम नहीं करता है जिसकी वजह से प्रेग्नेंट महिला का पेट साफ नहीं होता है।
  • बिल्कुल भी शारीरिक श्रम न करने के कारण भी ऐसा होता है।
  • वजन बढ़ने के कारण पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है जिसकी वजह से आपको यह परेशानी हो सकती है।
  • यदि प्रेग्नेंट महिला पानी का भरपूर सेवन नहीं करती है तो इस वजह से भी गर्भवती महिला का पेट अच्छे से साफा नहीं हो पाता है।
  • आयरन व् कुछ अन्य दवाइयां जो गर्भवती महिला लेती हैं उनके कारण भी महिला को यह परेशानी हो सकती है।

प्रेग्नेंट महिला पेट साफ़ करने के लिए अपनाएँ यह टिप्स

गर्भवती महिला का यदि पेट अच्छे से साफ नहीं होता है तो इस समस्या से बचने के लिए प्रेग्नेंट महिला कुछ आसान टिप्स को ट्राई कर सकती है। जो प्रेग्नेंट महिला को इस परेशानी से बचाने में मदद करते हैं। तो आइये अब जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला पेट साफ़ करने के लिए किन टिप्स को ट्राई कर सकती है।

फाइबर युक्त आहार

सबसे पहले तो प्रेग्नेंट महिला को अपनी डाइट में फाइबर युक्त चीजों को जरूर शामिल करना चाहिए। क्योंकि फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता हैं। जिससे गर्भवती महिला को पेट से जुडी इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है। और फाइबर के लिए प्रेग्नेंट महिला बादाम, चोकर युक्त अनाज, उबले आलू, संतरा, आंवला, बीन्स, ब्रोकली, कद्दू, केला आदि का सेवन करें।

तरल पदार्थ ले भरपूर

पेट साफ़ करने के लिए प्रेग्नेंट महिला को तरल पदार्थों का भरपूर सेवन करना चाहिए। और इसके लिए दिन में आठ से दस गिलास पानी पीने के साथ अन्य पेय पदार्थ जैसे नारियल पानी आदि का भी सेवन करना चाहिए।

दही या छाछ

दही प्रोबायोटिक्स का बेहतरीन स्त्रोत होती है। जो खाने को अच्छे से हज़म करने में मदद करती है। ऐसे में सुबह और दोपहर के खाने में गर्भवती महिला को दही या छाछ को शामिल जरूर करना चाहिए। ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

सोने से पहले गुनगुना दूध पीएं

रोजाना सोने से पहले प्रेग्नेंट महिला को गुनगुना दूध पीना चाहिए ऐसा करने से महिला को नींद भी बेहतर आती है। और सुबह पेट भी अच्छे से साफ़ होता है।

निम्बू

पेट को साफ करने के लिए गुनगुने पानी में थोड़ा नमक व् निम्बू का रस डालकर मिलाएं और पीएं। ऐसा करने से पेट साफ़ होने के साथ पेट में गैस की परेशानी से निजात पाने में भी मदद मिलती है।

थोड़ा व्यायाम करें

सारा दिन आराम करने से भी गर्भवती महिला को यह परेशानी हो सकती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को थोड़ा बहुत व्यायाम जरूर करना चाहिए। यदि गर्भवती महिला व्यायाम करती है तो इससे बॉडी की सभी क्रियाओं को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है। साथ ही पाचन तंत्र भी अच्छे से काम करता है जिससे गर्भवती महिला को इस परेशानी से निजात मिलता है।

खट्टे फल

खट्टे फल जैसे की संतरा, आंवला, आदि में विटामिन सी व् फाइबर की मात्रा भरपूर होती है। ऐसे में खट्टे फलों का सेवन करने से भी प्रेग्नेंट महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

इसबगोल

यदि प्रेग्नेंट महिला को पेट साफ़ न होने के कारण ज्यादा परेशानी हो रही है तो महिला गुनगुने पानी या दूध में इसबगोल डालकर उसका सेवन करें। ऐसा करने से भी महिला को इस दिक्कत से निजात मिलता है।

किशमिश

रात भर के लिए आठ दस किशमिश को एक गिलास पानी में भिगोकर रख दें। सुबह उठकर इस पानी को छानकर इसका सेवन करें। ऐसा करने से भी गर्भवती महिला को पेट से जुडी इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

सेब का सिरका

एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच सेब का सिरका मिलाकर पीएं। ऐसा रात को सोने या सुबह उठने के बाद करें, ऐसा करने से भी गर्भवती महिला को इस परेशानी से बचाव करने में मदद मिलती है। साथ ही इसे पीने से पाचन क्रिया को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिन्हे ट्राई करने से प्रेग्नेंट महिला को पेट को साफ़ करने में मदद मिलती है। इसके अलावा महिला को खाते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला आराम से धीरे धीरे और अच्छे से चबाकर अपना भोजन खाएं साथ ही थोड़ा थोड़ा करके खाएं, एक ही बार में पेट भरकर न खाएं। ऐसे आहार को बिल्कुल न खाएं जिसे पचाने में आपको परेशानी हो। यदि आप इन सभी बातों का ध्यान रखेंगी तो प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली इन सभी परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलेगी।

प्रेगनेंसी के दौरान यह दस चीजें बिल्कुल नहीं पीनी चाहिए

प्रेगनेंसी के दौरान यह दस चीजें बिल्कुल नहीं पीनी चाहिए, गर्भवती महिला को क्या नहीं पीना चाहिए, प्रेगनेंसी के दौरान न पीएं यह चीजें, गर्भावस्था के दौरान क्या क्या नहीं पीना चाहिए

प्रेगनेंसी के दौरान क्या खाना है क्या पीना है, क्या नहीं खाना है और क्या नहीं पीना है यह बहुत बड़ी समस्या होती है। क्योंकि गर्भवती महिला का गलत खान पान न केवल गर्भवती महिला बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के विकास को भी मुश्किल में डाल सकता है। साथ ही कई बार इसके कारण गर्भपात जैसी समस्या का भी महिला को सामना करना पड़ सकता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला की किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। तो लीजिये आज हम गर्भवती महिला को कुछ ऐसे पेय पदार्थो के बारे में बताने जा रहे हैं जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला को नहीं पीने चाहिए।

कच्चा दूध

कच्चे दूध में हानिकारक बैक्टेरिया मौजूद होता है, और गर्भवती महिला यदि इसका सेवन करती है तो इसके कारण पेट में इन्फेक्शन की समस्या का सामना महिला को करना पड़ सकता है। जैसे की महिला को उल्टी, दस्त, पेट में दर्द, या डायरिया की समस्या हो सकती है, और डायरिया होने के कारण पानी की कमी बॉडी में होने लगती है। ऐसे में गर्भवती महिला के साथ शिशु की सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है। इसीलिए महिला को कच्चा या मलाई वाले दूध से बचना चाहिए।

कॉफ़ी

कॉफ़ी में कैफीन की मात्रा बहुत अधिक होती है, ऐसे में कॉफी का सेवन अधिक मात्रा में यदि गर्भवती महिला करती है, तो प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में जहां गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है वहीँ इसके कारण शिशु के शारीरिक विकास जैसे की वजन में कमी की समस्या भी हो सकती है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान कॉफ़ी का सेवन भी गर्भवती महिला को अधिक नहीं करना चाहिए, कोल्ड कॉफ़ी, पाउडर कॉफ़ी, फ़िल्टर कॉफ़ी किसी भी तरह की कॉफ़ी को अधिक मात्रा में नहीं लेना चाहिए।

अल्कोहल

शराब का सेवन गर्भवती महिला के लिए तो नुकसानदायक होता ही है, साथ ही इसके कारण शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास में भी कमी आ सकती है। क्योंकि इसमें मौजूद हानिकारक तत्व गर्भनाल के रास्ते शिशु तक पहुंचकर शिशु के विकास में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं, शराब के साथ अन्य किसी तरह के नशे का सेवन भी गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए।

गरम पानी

गरम पानी शरीर में मौजूद टॉक्सिन्स को बाहर निकालकर बॉडी को स्वस्थ रखने में आपकी मदद करता है। लेकिन गर्भवती महिला को गरम पानी का सेवन करने से बचना चाहिए क्योंकि अधिक गरम पानी का सेवन करने से गर्भवती महिला के शरीर का तापमान बढ़ सकता है जिसके कारण गर्भपात या समयपूर्व प्रसव जैसी परेशानी का सामना महिला को करना पड़ सकता है।

ग्रीन टी

गर्भवती महिला को ग्रीन टी का सेवन भी ज्यादा नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके अधिक सेवन के कारण महिला को गर्भपात जैसी परेशानी हो सकती है, खासकर सुबह के समय खाली पेट तो भूलकर भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

डिब्बाबंद जूस

प्रेग्नेंट महिला यदि चाहे तो घर में ताजा निकला हुआ जूस पी सकती है, लेकिन बाहर से लाया हुआ डिब्बाबंद जूस महिला को नहीं पीना चाहिए। क्योंकि इसमें मिलावट हो सकती है साथ ही इसमें कैलोरी की मात्रा भी अधिक होने के कारण महिला को वजन बढ़ने जैसी समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है।

चाय

चाय का नाम सुनते ही जितनी भी थकावट हो उतर जाती है, और प्रेगनेंसी के दौरान तो महिला को थकान का अनुभव अधिक होता है। लेकिन इस थकावट को दूर करने के लिए चाय का सेवन अधिक करने से अच्छा होता है की आप आराम करें। क्योंकि अधिक मात्रा में चाय पीने से गर्भवती महिला और शिशु दोनों को परेशानी हो सकती है, साथ ही महिला को गर्भपात जैसी परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है। ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि अधिक चाय का सेवन बॉडी में कैफीन की मात्रा को बढ़ाता है, जिसके कारण गर्भपात की समस्या हो सकती है।

ब्लैक टी

ब्लैक टी का सेवन भी गर्भवती महिला को न करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह गर्भवती महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या से परेशान करने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में कमी की समस्या भी खड़ी कर सकते है।

कोल्ड ड्रिंक्स

कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन भी गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए क्योंकि इसे बनाने के लिए ऐसे उत्पाद का इस्तेमाल होता है जो न केवल गर्भवती महिला को नुकसान पहुंचाते हैं। बल्कि इसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु को भी नुकसान पहुँच सकता है।

घर में बना जूस

प्रेगनेंसी के दौरान घर में ताजा बना हुस जूस पीने से आपको फायदा मिलता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं होता है की आप सारा दिन इसे पीते रहें। उचित मात्रा में जूस का सेवन ही आपके लिए फायदेमंद होता है, क्योंकि अधिक मात्रा में घर का बना जूस पीने से भी प्रेगनेंसी के दौरान ब्लड में ग्लूकोस की मात्रा बढ़ने के कारण गेस्टेशनल डाइबिटीज़ के साथ वजन बढ़ने जैसी समस्या का सामना भी आपको करना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ चीजे जिनका सेवन गर्भवती महिला को करने से बचना चाहिए। क्योंकि इनका अधिक सेवन गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी नुकसान पहुंचा सकती है।

गर्भवती महिला गर्मियों में घर से बाहर निकलते समय यह ध्यान रखे

गर्मियों में गर्भवती महिला

गर्मियों का मौसम परेशानी से भरा हुआ होता है, गर्मी का अनुभव होने के साथ लू की समस्या, पसीने के कारण परेशानी, कुछ खाने का मन न करना, केवल ठंडा खाने की इच्छा होना आदि, जैसी परेशानियां हो सकती है। और जब महिला गर्भवती होती है तो परेशानी भी दुगुनी हो जाती है। और प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली दिक्कत के साथ गर्मी के कारण होने वाली परेशानी के कारण महिला ज्यादा परेशानी अनुभव कर सकती है। ऐसे में गर्भवती महिला को भी अपनी सेहत का अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है।

गर्मियों में गर्भवती महिला को घर से बाहर निकलते समय क्या करना चाहिए

गर्मी का मौसम होने पर भी घर से बाहर कोई काम के होने पर गर्भवती महिला को जाना पड़ सकता है। ऐसे में गर्मी का मौसम होने पर गर्भवती महिला को घर से बाहर निकलते समय कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए जिससे गर्मी के कारण होने वाली परेशानी से बचाव करने में गर्भवती महिला को मदद मिल सके।

कपड़ो का रखें ध्यान

गर्मी के मौसम में घर से बाहर निकलते समय प्रेग्नेंट महिला को सूती कपड़ो को पहनकर निकलना चाहिए। क्योंकि इसके कारण पसीने के कारण होने वाली परेशानी व् अधिक गर्मी की समस्या से बचने में मदद मिलती है।

जूते चप्पल

आगे से बंद वाले जूते चप्पल पहन कर भी गर्भवती महिला को गर्मी के मौसम में बाहर नहीं निकलना चाहिए। क्योंकि इससे ज्यादा गर्मी का अनुभव हो सकता है और महिला को चक्कर आदि की परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है। ऐसे में आगे से थोड़े खुले हुए जूते चप्पल पहनने चाहिए ताकि पैरों को हवा लगती रहे।

स्किन केयर

सनस्क्रीन, मॉइस्चराइजर आदि का इस्तेमाल भी गर्भवती महिला को घर से बाहर निकलते समय करना चाहिए। ताकि धूप के कारण स्किन को होने वाली परेशानी से बचाव करके स्किन को भी सुरक्षित रखने में मदद मिल सके।

आँखों की सुरक्षा

गर्मी के कारण आँखों में जलन, आँखों में लालपन, आदि की समस्या भी हो सकती है ऐसे में गर्भवती महिला को आँखों पर चश्मा लगाने के बाद ही घर से निकलना चाहिए।

छाता

गर्भवती महिला को अधिक गर्मी की समस्या से बचने के लिए एक छाता भी जरूर लेकर निकलना चाहिए, इससे भी गर्मी से बचाव करने में मदद मिलती है, साथ ही तेज धूप के दुष्प्रभाव से सुरक्षित रहने में भी मदद मिलती है।

खाना खाएं

प्रेग्नेंट महिला को गर्मी में घर से बाहर निकलते समय कभी भी खाली पेट नहीं निकलना चाहिए क्योंकि इसके कारण महिला को परेशानी हो सकती है। और महिला लू की चपेट में भी आ सकती है, और एक बात का ध्यान रखना चाहिए की ज्यादा ऑयली और मसाले वाले आहार का सेवन करके नहीं निकलना चाहिए। हमेशा हल्के भोजन का सेवन करने के बाद ही गर्मी में घर से बाहर जाना चाहिए।

पानी

घर से पानी भरपूर पीकर निकलना चाहिए, और साथ ही पानी की एक बोतल साथ भी रखनी चाहिए ताकि समय समय पर प्यास लगने पर आप उसका सेवन कर सकें। ऐसा करने से भी गर्मी के कारण होने वाली परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

ज्यादा धूप में न चलें

गर्मी के मौसम में धूप तो हर जगह होती है, लेकिन आपको देखकर चलना चाहिए जिस एरिया में कम धूप हो वहां चलना चाहिए, इससे भी अधिक धूप के कारण होने वाली परेशानी से बचाव करने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका इस्तेमाल गर्मी के मौसम में गर्भवती महिला को घर से बाहर निकलते समय करना चाहिए। क्योंकि इन टिप्स का इस्तेमाल करने से गर्भवती महिला को गर्मी के मौसम में घर से बाहर निकलते समय करने से गर्मी के कारण होने वाली परेशानी से बचने में मदद मिलती है।

Hindi Video : Summer Tips for Pregnant Woman

Summer Care Tips For Pregnant Women

प्रेगनेंसी के छह से नौ महीने के बीच सम्बन्ध बनाने से क्या-क्या हो सकता है?

गर्भावस्था के दौरान महिला को भरपूर आराम करने की सलाह दी जाती है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं होता है की महिला कुछ भी नहीं कर सकती है। परन्तु आज इस आर्टिकल में हम आपसे घर के काम नहीं बल्कि प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाने की इच्छा को लेकर बात करने जा रहे हैं। प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में ऐसे हॉर्मोन स्त्रावित होते हैं जिसके कारण महिला की सम्बन्ध बनाने की इच्छा में बढ़ोतरी होती है।

वहीँ कुछ केस ऐसे में भी होते हैं जहां महिला को सम्बन्ध बनाने की इच्छा में कमी आ जाती है। तो आइये अब प्रेगनेंसी के दौरान तीसरी तिमाही में सम्बन्ध बनाने के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं। लेकिन उससे पहले यह जानना की की प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाना सेफ होता है या नहीं।

प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाएं या नहीं

गर्भावस्था के दौरान यदि किसी भी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स नहीं होती है, महिला को सम्बन्ध बनाने में कोई दिक्कत नहीं होती है साथ ही आप सम्बन्ध बनाते समय पूरी सावधानी का ध्यान रखते हैं। तो ऐसे में आप प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बना सकते हैं। लेकिन यदि प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स है, महिला का सम्बन्ध बनाने का मन नहीं है, महिला को शारीरिक परेशानियां अधिक हैं तो ऐसे में आपको सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में सम्बन्ध बनाने के कारण होने वाले नुकसान

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में बच्चे का विकास तेजी से हो रहा होता है, महिला का पेट बाहर आ जाता है, ऐसे में सम्बन्ध बनाने में की गई थोड़ी सी गलती प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स को बढ़ा देती है। जिसके कारण कारण प्रेग्नेंट महिला व् बच्चे को नुकसान पहुँच सकता है। जैसे की:

गर्भाशय को लग सकती है चोट

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में सम्बन्ध बनाते समय यदि थोड़ी सी भी तेजी की जाती है तो इसके कारण गर्भाशय को चोट लग सकती है। जिसकी वजह से महिला को पेट में दर्द, गर्भ में बच्चे को असहज महसूस होना, संकुचन होना जैसी दिक्कतें हो सकती है।

समय से पहले बच्चे के जन्म का खतरा

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में सम्बन्ध बनाते समय यदि महिला या पुरुष कोई भी बहक कर ज्यादा जोश में आ जाता है। तो ऐसे में गर्भाशय पर तेजी के कारण चोट लगने पर संकुचन बढ़ सकता है। और यदि संकुचन अधिक होने लग जाये तो इसके कारण समय से पहले महिला को लेबर पेन शुरू हो सकती है। जिसकी वजह से महिला व् बच्चे दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

पेट पर दबाव

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में महिला का पेट बाहर आ जाता है। जिसकी वजह से यदि पुरुष महिला के ऊपर लेटकर सम्बन्ध बनाता है और थोड़ी सी भी चूक के कारण महिला के पेट पर दबाव पड़ जाता है। तो इसकी वजह से केवल महिला को ही नहीं बल्कि गर्भ में बच्चा भी दिक्कत महसूस करता है।

इन्फेक्शन का डर

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में भी महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं ऐसे में बिना सुरक्षा के यदि आप अपनी प्रेग्नेंट पार्टनर के साथ सबंध बनाते हैं। तो इस कारण महिला को इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। और यदि इन्फेक्शन ज्यादा हो जाये तो इस कारण बच्चे पर भी असर पड़ने का खतरा रहता है।

महिला को परेशानी

यदि महिला का सम्बन्ध बनाने का मन नहीं है, प्रेगनेंसी में किसी भी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स हैं, महिला को शारीरिक परेशानियां अधिक हो रही है, और ऐसे में आप प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में महिला के साथ सम्बन्ध बना रहे हैं। तो इसके कारण महिला को आप और ज्यादा रिस्क में डाल रहे हैं। जिससे महिला की परेशानियां कम होने की बजाय ज्यादा बढ़ जाती है।

तो यह हैं कुछ परेशानियां जो प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में महिला को सम्बन्ध बनने के कारण हो सकती है। ऐसे में डॉक्टर की राय के बिना और बिना सावधानी के सम्बन्ध बनाने से प्रेगनेंसी के दौरान बचना चाहिए। ताकि माँ व् बच्चे दोनों को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

बच्चे क्यों मारते हैं किक जानिये

बच्चे क्यों मारते हैं किक जानिये, गर्भ में शिशु की हलचल, गर्भ में शिशु लात क्यों मारता है, भ्रूण की मूवमेंट क्यों है जरुरी, शिशु की हलचल महसूस न होने पर क्या करें

गर्भ में शिशु का पहली बार लात मारना किसी भी गर्भवती महिला के लिए उसकी प्रेगनेंसी का सबसे भावनात्मक अहसास होता है। क्योंकि इस दौरान गर्भ में शिशु के विकसित होने का न केवल महिला को अहसास होता है, बल्कि इस मूवमेंट से गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु के प्यार भरे रिश्ते का अहसास भी गहरा होता है। और शिशु की हर मूवमेंट गर्भवती महिला को अपने होने का अहसास करवाती है, साथ ही इससे पता चलता है की शिशु का विकास बेहतर तरीके से हो रहा है और शिशु स्वस्थ है। तो आइये अब गर्भ में शिशु के किक मारने से जुड़े कुछ और तथ्य जानते हैं।

शिशु गर्भ में लात क्यों मारता है?

शिशु का गर्भ में लात मारना या कोहनी से किक मारना इस बात की और इशारा करता है की गर्भ में पल रहा शिशु अब अपनी मांसपेशियों द्वारा की जाने वाली गतिविधियों में सक्षम हो गया है। और जैसे जैसे शिशु का विकास बढ़ता है वैसे वैसे आप शिशु द्वारा मारी जाने वाली किक यानी की गर्भ में शिशु द्वारा की जाने वाली हलचल का अहसास बेहतर तरीके से कर सकते हैं। और शिशु की दिनभर की हलचल से आप अंदाजा भी लगा सकते हैं की गर्भ में शिशु कब सोता है और कब जागता है।

गर्भ में शिशु कब से शुरू करता है हलचल

गर्भ में शिशु की हलचल सोलह से चौबीस हफ़्तों के बीच शुरू हो सकती है, क्योंकि हर महिला के गर्भ में पल रहा शिशु एक ही समय पर हलचल करे ऐसा कोई जरुरी नहीं होता है। क्योंकि हर महिला के शरीर की बनावट अलग होती है और गर्भ में पल रहे शिशु का विकास भी उसी पर ही निर्भर करता है। साथ ही यह गर्भ में एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा पर भी निर्भर करता है। इसीलिए कई महिलाओं में यह बीस तो कई महिलाओं को चौबीस हफ्ते के बाद महसूस हो सकती है। लेकिन अगर चौबीस हफ्ते बाद भी आपको ऐसा महसूस न हो तो इसके लिए आपको एक बार डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

गर्भ में शिशु की मूवमेंट न होने पर क्या करें

गर्भ में शिशु की मूवमेंट का होना शिशु के स्वस्थ होने की तरफ इशारा करता है, लेकिन यदि आपको ज्यादा लम्बे समय तक यानी चौबीस से अड़तालीस घंटे के बीच भी गर्भ में शिशु की हलचल न महसूस हो। तो यह परेशानी का विषय हो सकता है और आपको इसे अनदेखा न करते हुए एक बार डॉक्टर से जरूर राय लेनी चाहिए।

तो यह हैं गर्भ में शिशु की मूवमेंट से जुडी कुछ बातें और गर्भवती महिला के शिशु की मूवमेंट का हर पल बहुत ही खास होता है। ऐसे में आपको इन लम्हो को एन्जॉय करना चाहिए और किसी अपने अच्छे से ख्याल रखना चाहिए ताकि गर्भ में शिशु का विकास बेहतर होने के साथ गर्भवती महिला को भी प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों से बचाव करने में मदद मिल सके।